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                <title>reports - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>बिना अधिकारियों की रिपोर्ट के जारी हो रही फायर एनओसी, अधिकारियों के पद रिक्त होने से आ रही समस्या</title>
                                    <description><![CDATA[फायरमैन व कार्मिक ही कर रहे आॅनलाइन फायर एनओसी की मैपिंग।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/fire-nocs-being-issued-without-reports-from-officials/article-146675"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(2)16.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। प्रदेश की कई नगरीय निकायों में बिना तकनीकी अधिकारियों की जांच के ही फायरगैन व कार्मिकों द्वारा फायर एनओसी की मैपिंग की जा रही है। यह समस्या अधिकतर उन जगहों पर आ रही है जहां अधिकारियों के पद रिक्त हैं। नगर निगम, नगर परिषद व नगर पालिकाओं द्वारा बहुमंजिला इमारतों, आवासीय व व्यवसायिक इमारतों के 15 मीटर ऊंचाई से अधिक होने पर फायर एनओसी जारी की जाती है। फायर एनओसी जारी होने से पहले उसकी ऑनलाइन मैपिंग की जाती है। यह काम फायर अनुभाग के मुख्य अग्निशमन अधिकारी, अग्निशमन अधिकारी व सहायक अग्निशमन अधिकारियों द्वारा किया जाता है। लेकिन हालत यह है कि कई जगह पर सीएफओ, एफओ व एएफओ के पद रिक्त होने से वहां फद्दायरमैन व कार्मिकों द्वारा ही ऑनलाइन मैपिंग की जा रही है। जिसके आधार पर एनओसी भी जारी हो रही है।</p>
<p>एपीओ चल रहे सीएफओ देवेन्द्र कुमार मीणा ने स्वायत्त शासन विभाग के उप निदेशक प्रशासन को इस संबंध में पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र के माध्यम से मांग की है कि ऑनलाइन मैपिंग का कार्य तकनीकी अधिकारियों द्वारा ही किया जाता है। जहां तकनीकी अधिकारी नहीं हैं वहां नजदीकी निकायों के अधिकारियों से मैपिंग करवाई जाए। साथ ही जहां फायरमैन व कार्मिक जैसे अतकनीकी कार्मिक ऑनलाइन मैपिंग कर रहे हैं उन्हें ऐसा करने से रोका जाए।</p>
<p><strong>सबसे अधिक एएफद्दओ के पद रिक्त</strong><br />जानकारी के अनुसार प्रदेश में मुख्य अग्निशमन अधिकारी(सीएफओ), अग्निशमन अधिकारी(एफओ) व सहायक अग्निशमन अधिकारी (एएफओ) के कुल 118 पद स्वीकृत हैं। जिनमें सीएफओ के 6, एफओ को 28 व एएफओ के 84 पद स्वीकृत हैं। इनमें से सीएफओ के दो पद अधिक हैं। जबकि 19 एफद्दओ कार्यरत हैं और 9 पद रिक्त है। वहीं सबसे अधिक एएफओ 49 पद रिक्त हैं जबकि कार्यरत मात्र 35 ही हैं।</p>
<p><strong>कोटा संभाग में झालावाड़ खाली</strong><br />कोटा संभाग के फायर अनुभाग में से कोटा में सीएफओ, दो एफओ व एएफओ कार्यरत हैं। बूंदी व बारां में एक-एक एएफओ हैं। जबकि झालावाड़ में पद रिक्त हैं। वहां कोई भी अधिकारी कार्यरत नहीं हैं।</p>
<p><strong>नियमानुसार तो तकनीकी अधिकारी ही करते हैं मैपिंग</strong><br />सीएफओ राकेश व्यास ने बताया कि फायर एनओसी जारी होने से पहले आॅनलाइन मैपिंग की जाती है। यह कार्य तकनीकी अधिकारी सीएफओ, एफओ व एएफओ द्वारा ही किए जाने का नियम है। लेकिन कई जगह ऐसी हैं जहां अधिकारी नहीं होने से नजदीकी अधिकारियों से मैपिंग करवाई जा रही है। कोटा संभाग में ऐसी कुछ ही जगह हैं। जबकि अधिकतर तो कोटा में ही मैपिंग करवाने आ रहे हैं। लेकिन कुछ जगहों पर फायरमैन व कार्मिक ही मैपिंग कर रहे हैं जो गलत है। इस संबंध में कोटा में सीएफओ रहे व वर्तमान में एपीओ चल रहे देवेन्द्र कुमार मीणा ने उप निदेशक स्वायत्त शासन विभाग को पत्र लिखा है। जिसमें मैपिंग का काम तकनीकी अधिकारियों से करवाने व फायरमैन व कार्मिकों से करवाए जा रहे इस कार्य को रूकवाने की मांग की है। जिससे फायर एनओसी सही तरह से जारी की जा सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Mar 2026 14:49:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में खुलासा : ईरान और इजरायल तनाव के बीच भारत ने बढ़ाई रूस से तेल की खरीद</title>
                                    <description><![CDATA[ मध्य-पूर्व में मचे हलचल के बीच रूस से भारतीय कंपनियों की तेल खरीद में भारी उछाल देखा जा रहा है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/indias-report-revealed-in-bloomberg-reports-india-increased-oil-from/article-118668"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/news-(2)42.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। मध्य-पूर्व में मचे हलचल के बीच रूस से भारतीय कंपनियों की तेल खरीद में भारी उछाल देखा जा रहा है। डेटा एनालिटिक्स फर्म केप्लर के मुताबिक, रूस ने इस साल समुद्री रास्ते से अपना जितना कच्चा तेल (यूराल ग्रेड) बेचा, उसका 80% भारत ने खरीदा है। सबसे अधिक यूराल भारत की दो प्राइवेट कंपनियों रिलायंस इंडस्ट्रीज और नायरा एनर्जी ने खरीदा।</p>
<p>ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, रिलायंस इंडस्ट्रीज और नायरा एनर्जी ने देश में आयातित यूराल क्रूड का 45% खरीदा है। भारत ने इस साल 23.1 करोड़ बैरल यूराल क्रूड खरीदा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि रिलायंस और नायरा दोनों की रूस तेल खरीद में 2025 में भारी बढ़ोतरी देखी गई हैं। तेल बाजार के जानकारों का मानना है कि भारत रूस से कच्चे तेल की अंधाधुंध खरीद मध्य-पूर्व में अस्थिरता को देखते हुए कर रहा है। ईरान-इजरायल की लड़ाई के दौरान तेल को लेकर अस्थिरता और बढ़ गई थी। रविवार को अमेरिका ने ईरान के तीन परमाणु संयंत्रों नतांज, फोर्डो और इस्फहान पर हमला कर दिया था जिससे गुस्साए ईरान ने होर्मूज जलमार्ग को बंद करन की धमकी दी थी। इसी जलमार्ग से होकर मध्य-पूर्व का तेल भारत और चीन जैसे देशों में पहुंचता है। इस शिपिंग मार्ग के जरिए वैश्विक तेल आपूर्ति का कम से कम 20% हिस्सा गुजरता है। विश्लेषकों का कहना था कि अगर यह जलमार्ग बंद होता है तो तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकती हैं। वहीं, भारत सरकार का कहना था कि अगर होर्मूज जलमार्ग बंद भी हो जाता है तो वो उसके प्रभावों को कम करने में सक्षम होगी।</p>
<p><strong>रूसी तेल की सबसे बड़ी खरीददार है यह भारतीय कंपनी</strong><br />रिपोर्ट के अनुसार, रिलायंस इंडस्ट्रीज इस साल रूसी तेल की दुनिया की सबसे बड़ा खरीदार बन गई है जिसने 2025 में 7.7 करोड़ बैरल यूराल क्रूड खरीदा है। रिलायंस ने दिसंबर 2024 में रूस की दिग्गज तेल कंपनी रोसनेफ्ट के साथ 500,000 बैरल प्रतिदिन (बीपीडी) कच्चे तेल के लिए दस साल का समझौता किया था, जिसकी कीमत सालाना लगभग 13 अरब डॉलर है। यह भारत और रूस के बीच एनर्जी की अब तक की सबसे बड़ी डील है। वहीं, नायरा एनर्जी की बात करें तो, इस कंपनी में रूस का भी हिस्सा है। 2017 में, रोसनेफ्ट ग्रुप ने कई रूसी कंपनियों के साथ मिलकर भारत के एस्सार आॅयल में 98% हिस्सेदारी 12.9 अरब डॉलर में खरीदी थी। बाद में कंपनी को नायरा एनर्जी के रूप में पुनर्गठित किया गया, जिसमें रोसनेफ्ट ने 49.13% हिस्सेदारी रखी। ब्लूमबर्ग ने कहा कि इसके तेल आयात का लगभग 72% हिस्सा रूस से आता है। तीन साल पहले यह हिस्सा महज 27% था। दरअसल, फरवरी 2022 यानी रूस-यूक्रेन युद्ध से पहले भारत रूस से न के बराबर कच्चा तेल खरीदता था लेकिन युद्ध शुरू होने के बाद पश्चिमी प्रतिबंध झेल रहे रूस ने भारत को रियायती दरों पर कच्चा तेल आॅफर किया। </p>
<p>उसके बाद से भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद शुरू की और जल्द ही रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया और अब भी वो भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल सप्लायर है। समाचार एजेंसी ने केप्लर डेटा का हवाला देते हुए बताया कि मई में, भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात लगभग 18 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया, जो पिछले दस महीनों में सबसे ज्यादा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Jun 2025 11:43:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डेंगू फंसा आकड़ों में, लक्षण साफ लेकिन रिपोर्ट नेगेटिव</title>
                                    <description><![CDATA[मौसमी बीमारियों और फ्लू के मरीजों की संख्या लगतार बढ़ रही है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/dengue-trapped-in-statistics--symptoms-clear-but-report-negative/article-53052"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/news-(1)1.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के निजी अस्पतालों में बड़ी संख्या में डेंगू के मरीज आ रहे हैं। लेकिन सरकारी अस्पतालों के आकड़ों में यह पकड़ नहीं आ रहा। दरअसल सरकारी अस्पतालों में डेंगू के मरीज का इलाज तो डेंगू का किया जा रहा है लेकिन रिपोर्ट में उसे डेंगूं नहीं बताया जा रहा। किसी रिपोर्ट में डेंगू नहीं लिखा जाता। मौसमी बीमारी लिखकर चिकित्सा विभाग अपना बचाव करने में जुटा है। दरअसल पिछले कुछ सालों में डेंगू ने ऐसा कहर बरपाया कि सरकारी अस्पतालों ने उसे अपनी रिपोर्ट से ही नदारद कर दिया। अस्पतालों में ओपीडी में डेंगू के लक्षण जैसे मरीज आ रहे हैं लेकिन सरकारी डंडा ऐसा की मरीजों की जांच नेगेटिव ही आ रही है। शहर में मच्छरों का प्रकोप होने के बावजूद जनवरी से जून तक मात्र 24 डेंगू के मरीज ही अस्पताल में रजिस्टर्ड हुए है। वहीं स्क्रब टाइफस के 18 मरीज, एक मरीज पी वी मलेरिया का आया है।  जबकि निजी अस्पतालों में डेंगू मलेरिया के मरीजों का इलाज चल रहा एसडीपी चढ़ाई जा रही है। लेकिन सरकारी आंकड़ों में डेंगू व मलेरिया के मरीज निल आ रही है।  एमबीएस अस्पताल की ओपीडी सहित सभी सरकारी अस्पतालों में डेंगू और मलेरिया के लक्षण वाले मरीजों की संख्या में लगतार इजाफा  हो रहा है। इनका इलाज भी डेंगू व मलेरिया के संदिग्ध मरीज मानकर किया जा रहा है लेकिन रिपोर्ट में  ये सभी मरीज डेंगू नेगिटव ही नजर आ रहे है। ओपीडी में प्रतिदिन 12 से 15 मरीज डेंगू मलेरिया के लक्षण वाले आ रहे है। इसके अलावा मौसमी बीमारियों और फ्लू के मरीजों की संख्या लगतार बढ़ रही है। </p>
<p><strong>बचाव के लिए ये काम करें</strong><br />- सभी मच्छर रुके हुए पानी में अंडे देते हैं। इसलिए रुके पानी को भर दें या कुछ बूंदे मिट्टी के तेल की डाल दें।<br />- डेंगू का मच्छर साफ पानी में जैसे कूलर, टंकियों आदि में पैदा होता है। सप्ताह में एक बार पानी अवश्य बदल दें।<br />- डेंगू का मच्छर दिन में काटता है। इसलिए दिन में पूरे आस्तीन के पकड़े और मौजे पहनें।<br />- घरों और छतों पर रखे पानी भरने वाले पात्रों को हटा दें। जिससे न पानी भरकर जमा होगा और न मच्छर जन्म लेगा।<br />- सोते समय मच्छरदानी, मच्छर भगाने वाली अगरबत्ती या क्रीम का प्रयोग करें।<br />- बुखार आने पर पैरासिटामाल दवा खाएं और नजदीकी <br />अस्पताल में दिखाएं।</p>
<p><strong>जांच रिपोर्ट नेगेटिव  </strong><br />कुन्हाडी निवासी रामनारायण ने बताया कि वो पांच से छह दिन से बुखार से परेशान अस्पताल सारे लक्षण डेंगू थे लेकिन जांच कराई तो रिपोर्ट में डेंगू नहीं निकला। शरीर में कमजोरी हो गई। डॉक्टर ने मलेरिया डेंगू मानकर ही इलाज किया।  बारिश के बाद से ही लोगों को मलेरिया डेंगू के मच्छर डंक मारने से नहीं चूक रहे है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाए जा रहे हमारा स्वास्थ्य हमारी जिम्मेदारी कार्यक्रम का असर शहर में नहीं दिखाई दे रहा है।</p>
<p><strong>मौसम में हो रहा परिवर्तन बन रहा बीमारी का घर</strong><br />मेडिसिन विभाग के डॉ. शिव चरण जेलिया ने बताया कि मौसम में बार बार हो रहे मौसम परिवर्तन के कारण वायरल के साथ अब डेंगू मलेरिया के लक्षणों वाले मरीज भी अस्पताल में आना शुरू हो गए है। बारिश के बाद वायरल के साथ डेंगू मलेरिया के लक्षणों वाले मरीज आने लगे है। अस्पताल में आई फ्लू, सर्दी,गला जाम और बुखार के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। इन दिनों वायरल इंफेक्शन के मरीज लगतार बढ़ रहे है। ओपीडी में सर्दी, खांसी जुकाम के मरीज ज्यादा आ रहे है।  </p>
<p><strong>निजी में ज्यादा मरीज</strong><br />शहर में डेंगू का कहर धीरे धीरे बढ़ रहा है। हालांकि शहर के सरकारी अस्पतालों में डेंगू के मरीज अभी  नजर नहीं आ रहे है। ऐसे में सरकारी रिकार्ड में मरीज दर्ज ही नहीं हो रहे है। वहीं निजी अस्पतालों में डेंगू के मरीजों से बेड फुल चल रहे है। </p>
<p><strong>मलेरिया और डेंगू के लक्षण</strong><br />डॉ ओपी मीणा ने बताया कि मलेरिया में सर्दी के साथ एक दिन छोड़कर बुखार आना है। उल्टी, सिरदर्द, बुखार उतरने के बाद पसीना निकलना, कमजोरी होना आदि मलेरिया के लक्षण है। वहीं, डेंगू में तेज बुखार, सिरदर्द, बदन व जोड़ों में दर्द, शरीर पर लाल दाने, चकत्ते पड़ जाना, खून की उल्टी, पेशाब और मल में खून आना, अत्याधिक घबराहट होना आदि डेंगू के लक्षण हैं।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />मौसमी बीमारियों को नियंत्रण में रखने के लिए सोर्स रिडक्शन पर फोकस किया किया जा रहा है। घरों में कूलर, टंकियों एवं अन्य जल संग्रहण वाले जल पात्रों की सप्ताह में एक बार रगड़कर साफ-सफाई करना जरूरी है। इससे मच्छरों के अण्डे लार्वा बनने से पूर्व ही खत्म हो जाएगें। पोस्टर स्टीकर के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है। साथ ही चिकित्सा संस्थानों को उपचार गाइड लाइन की पालना निर्देश दिए है।  नगर निगम क्षेत्र में दोनो नगर निगम से माइक्रो प्लान अनुसार फागिंग करवाई जा रही है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में नगर पालिका व ब्लॉक स्तर से फोगिंग करवाई जा रही है। हर रविवार जन समुदाय में और हर सोमवार सरकारी कार्यालयो में सूखा दिवस मनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। जिले में कन्ट्रोल रूम की स्थापना कर रखी है, रेपिड रिस्पोंस टीमों किया हुआ है।  ब्लड स्लाइड कलेक्शन भी पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष ज्यादा किए जा रहे है। <br /><strong>- डॉ. जगदीश कुमार सोनी, सीएमएचओ</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Jul 2023 15:08:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भाजपा व कांग्रेस पार्षदों में हाथापाई, पुलिस ने किया बीच बचाव</title>
                                    <description><![CDATA[ राजसमंद नगर परिषद बोर्ड की बजट बैठक में कांग्रेस व भाजपों पार्षदों में धक्का-मुक्की और हाथापाई की नौबत आ गई। पुलिस को मौके पर पहुंच कर बीच बचाव कराना पड़ा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/rajsamand/%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%AA%E0%A4%BE-%E0%A4%B5-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B8-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%A6%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%A5%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%88--%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%B8-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A5%80%E0%A4%9A-%E0%A4%AC%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B5/article-5179"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/jhagda.jpg" alt=""></a><br /><p>राजसमंद। राजसमंद नगर परिषद बोर्ड की बजट बैठक में कांग्रेस व भाजपों पार्षदों में धक्का-मुक्की और हाथापाई की नौबत आ गई। पुलिस को मौके पर पहुंच कर बीच बचाव कराना पड़ा।</p>
<p><br />विधायक दीप्ति माहेश्वरी ने बताया कि नए बोर्ड की यह पहली ऑफलाइन बैठक थी। भाजपा पार्षदों को उनकी बात रखने के लिए दो मिनट का समय भी नहीं दिया गया। विरोध में भाजपा पार्षद वेल में आकर बैठ गए। दोनों तरफ से नारेबाजी होने लगी, लेकिन सभापति अशोक टांक लगातार बजट प्रस्ताव पढ़ते रहे और बाद में बजट पास हो गया। विधायक ने बताया कि हंगामे के दौरान सभी कांग्रेस पार्षद सभापति टांक के पीछे पहुंच गए। बाद में उन्होंने धक्का-मुक्की करना शुरू कर दिया। भाजपा पार्षदों पर पानी, कागज, फाइलें और किताबें फेंकी। भाजपा पार्षद सूर्यप्रकाश जांगिड़, दीपक शर्मा, हिम्मत कुमावत, मोहन कुमावत आदि के साथ हाथापाई की गई।</p>
<p><br />महिला पार्षदों से भी धक्का मुक्की: विधायक ने कहा कि हाथापाई को रोकने के लिए मैं महिला पार्षदों के साथ गई तो मेरे साथ धक्का-मुक्की की गई। पार्षद खुश बी, राजकुमारी, गुलाबी देवी के साथ भी धक्का-मुक्की करते हुए गाली गलौज की गई। सभापति व उप सभापति चुन्नीलाल पंचोली ने पार्षद सूर्यप्रकाश जांगीड़ पर शराब पीकर बैठक में शामिल होने का आरोप लगाया। बैठक में कांग्रेस पार्षद राजकुमारी के पति शारीरिक शिक्षक दाऊ पालीवाल सहित कुछ महिला पार्षदों पति के भी शामिल हुए। नगरपरिषद कार्मिक रेणु शर्मा पर वीडियो बनाने व पार्षद दीपक शर्मा से अभद्रता से पेश आने का आरोप लगाया। <br /><br /><strong>भाजपा ने किया हंगामा</strong><br />भाजपा के सभी पार्षदों ने बैठक में हंगामा किया गया। पार्षद सूर्यप्रकाश जांगिड़ ने अभद्रता करते हुए बजट की कॉपियां फाड़ी और बोतल से पानी उछालने के साथ ही मुझ पर भी बोतल फेंकी। भाजपा पार्षद हाथापाई तक पर उतर आए। भाजपा का एक पार्षद सदन में नशा करके आया और महिला पार्षदों से भी अभद्रता करने में कोई कमी नहीं छोड़ी। - <strong>अशोक टांक, सभापति नगर परिषद, राजसमंद</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>राजसमंद</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 Feb 2022 15:46:21 +0530</pubDate>
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