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                <title>mahashivratri - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>टीम इंडिया की जीत के लिए प्रयागराज में रुद्राभिषेक, श्रीलंका में होगा हाई-वोल्टेज मुकाबला</title>
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                        <![CDATA[महाशिवरात्रि पर प्रयागराज में टीम इंडिया की पाकिस्तान पर जीत हेतु विशेष रुद्राभिषेक किया गया। कोलंबो में होने वाले इस महामुकाबले के लिए संगम तट पर भक्तों ने विजय प्रार्थना की।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/rudrabhishek-will-be-held-in-sangam-city-prayagraj-for-the/article-143278"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(12200-x-600-px)-(27).png" alt=""></a><br /><p>प्रयागराज। टी-20 क्रिकेट विश्वकप में पाकिस्तान के खिलाफ भारत की विजय की कामना के साथ संगम नगरी प्रयागराज में रविवार को महाशिवरात्रि के अवसर पर रुद्राभिषेक किया गया। विश्व कप में आज एक बार फिर क्रिकेट का सबसे बड़ा महामुकाबला आज होने जा रहा है, जहां भारत का सामना चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान से होगा। टी-20 वल्र्ड कप में टीम इंडिया पाकिस्तान को अब तक 7 बार मात दे चुकी है, और अब भारतीय टीम आठवीं बार पाकिस्तान को धूल चटाने के इरादे से मैदान में उतरेगी। श्रीलंका के कोलम्बो मैदान में होने वाले इस हाई-वोल्टेज मुकाबले को लेकर देशभर में जबरदस्त उत्साह है और टीम इंडिया की जीत के लिए दुआओं और प्रार्थनाओं का दौर जारी है।</p>
<p>संगम नगरी प्रयागराज में भी भारत की विजय की कामना को लेकर विशेष महारूद्राभिषेक पूजन का आयोजन किया गया। श्रृंगवेरपुर पीठाधीश्वर शांडिल्य जी महाराज ने वेदपाठी बटुकों के साथ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विशेष अनुष्ठान किया और पोस्टर,तिरंगा हाथ में लेकर भारत की जीत की प्रार्थना की।क्रिकेट प्रेमियों ने मां गंगा से कामना की कि टीम इंडिया पाकिस्तान के खिलाफ एक और ऐतिहासिक जीत दर्ज करे और देश का गौरव बढ़ाए।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Feb 2026 18:01:31 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>अमरापुर स्थान पर भव्य महाशिवरात्रि महोत्सव, सामूहिक प्रार्थना और पंचाक्षर मंत्रों के उच्चारण से शुरूआत,  श्रद्धा भाव से भक्तों ने किए भोले बाबा के दर्शन </title>
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                        <![CDATA[जयपुर के श्री अमरापुर स्थान में महाशिवरात्रि पर भक्तों का सैलाब उमड़ा। विशेष बर्फ की झांकी, हवन-यज्ञ और विशाल भंडारे के आयोजन ने उत्सव को आध्यात्मिक ऊर्जा और दिव्यता से भर दिया।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/grand-mahashivratri-festival-at-shri-amrapur-place/article-143251"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(12200-x-600-px)-(15)1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर: गुलाबी नगरी जयपुर के पवित्र श्रद्धा स्थल श्री अमरापुर स्थान में रविवार को भव्य महाशिवरात्रि महोत्सव का आयोजन किया गया। सुबह 6 बजे से ही भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा और श्रद्धा भाव से भोले बाबा के दर्शन किए।</p>
<p>महोत्सव की शुरुआत सामूहिक प्रार्थना और पंचाक्षर मंत्रों के उच्चारण से हुई। संतों के सत्संग और भक्ति गीतों ने वातावरण को दिव्यता और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। इसके पश्चात हवन-यज्ञ का भव्य अनुष्ठान संपन्न हुआ, जिसमें आग, घी और अन्य धार्मिक सामग्री का उपयोग कर पवित्र ऊर्जा का संचार किया गया। श्री अमरापुरेश्वर महादेव मंदिर में भोले बाबा का जल, दुग्ध, गंगाजल, बेलपत्र, आक और अन्य सामग्री से भव्य अभिषेक किया गया। भक्तों ने अपने मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना के साथ श्रद्धा भाव से पूजा अर्चना की।</p>
<p>विशेष आकर्षण के रूप में भोले बाबा की बर्फ झांकी ने सभी भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। दर्शन का समय प्रातः 6 से 12 बजे और शाम 3 से 9 बजे तक रखा गया।<br />भक्तों के लिए विशाल आम भंडारे का आयोजन भी किया गया, जिसमें उपस्थित सभी ने प्रसाद ग्रहण कर भक्ति और आनंद का अनुभव किया। आयोजन स्थल पर भक्तों की भीड़, दिव्यता और उल्लास ने महाशिवरात्रि को और भी खास बना दिया।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Feb 2026 17:22:49 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर गुलाबी नगरी के शिवालयों में उमड़ी आस्था की लहर, सुबह से सुनाई देने लगी बोल बम की गुंज</title>
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                        <![CDATA[गुलाबी नगरी के शिवालयों में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। ताड़केश्वर महादेव सहित प्रमुख मंदिरों में श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक कर "हर-हर महादेव" के जयघोष के साथ सुख-समृद्धि की कामना की।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/on-the-holy-festival-of-mahashivratri-a-wave-of-faith/article-143227"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(12200-x-600-px)-(6)11.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर गुलाबी नगरी के शिव मंदिरों में रविवार तड़के सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिर परिसर “बम-बम भोले” और “हर हर महादेव” के जयकारों से गूंजते रहे। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का विधि-विधान से जल, दूध, बेलपत्र, फल-फूल, माला, बेर और मोगरी अर्पित कर अभिषेक किया तथा परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।</p>
<p>प्रमुख शिवालय ताड़केश्वर महादेव मंदिर में सुबह मंगला आरती से ही भक्तों की लंबी कतारें लग गईं। वहीं शहर के अन्य मंदिरों सहित गढ़ गणेश मंदिर क्षेत्र के आसपास स्थित शिवालयों में भी दिनभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहा। कई स्थानों पर भक्तों के लिए प्रसाद और भंडारे की व्यवस्था की गई, जिससे श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।</p>
<p>मंदिर समितियों ने भीड़ को व्यवस्थित रखने के लिए विशेष प्रबंध किए थे। पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था भी तैनात रही, जिससे श्रद्धालुओं को दर्शन में किसी प्रकार की परेशानी न हो। महाशिवरात्रि के अवसर पर पूरा शहर भक्तिमय माहौल में डूबा नजर आया और देर रात तक पूजा-अर्चना का क्रम जारी रहा।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Sun, 15 Feb 2026 14:36:47 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>महाशिवरात्रि पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने किया जलाभिषेक, प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना</title>
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                        <![CDATA[मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने महाशिवरात्रि पर मुख्यमंत्री निवास स्थित मंदिर में भगवान शिव की विशेष पूजा और जलाभिषेक किया। उन्होंने प्रदेश की सुख-शांति, समृद्धि और चहुंमुखी विकास की मंगल कामना की।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/on-mahashivratri-chief-minister-bhajan-lal-sharma-performed-jalabhishek-and/article-143254"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(12200-x-600-px)-(16)1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने रविवार को सपत्नीक मुख्यमंत्री निवास स्थित मां राजराजेश्वरी मंदिर में भगवान शिव का विधिवत पूजन-अर्चन कर जलाभिषेक किया। इस दौरान उन्होंने प्रदेश की खुशहाली, समृद्धि और सुख-शांति की कामना की।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान शिव का अभिषेक किया और बिल्वपत्र, धतूरा तथा पुष्प अर्पित कर आराधना की। पूजा-अर्चना के पश्चात उन्होंने प्रदेशवासियों को महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व आध्यात्मिक ऊर्जा, आत्मचिंतन और संयम का संदेश देता है। भगवान शिव त्याग, तपस्या और करुणा के प्रतीक हैं, उनके आदर्शों को जीवन में अपनाकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है और सभी वर्गों के कल्याण हेतु निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कामना की कि महादेव की कृपा से राजस्थान निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर रहे और हर नागरिक का जीवन सुखमय बने।</p>
<p>इस अवसर पर मुख्यमंत्री निवास परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा। मंदिर में विशेष सजावट की गई थी और पूजा के दौरान धार्मिक भजनों की स्वर लहरियां गूंजती रहीं। आयोजन में परिवारजनों सहित संबंधित अधिकारी भी उपस्थित रहे।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Feb 2026 13:23:33 +0530</pubDate>
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                <title>पीएम मोदी ने दी देशवासियों को महाशिवरात्रि की बधाई, समृद्धि और शांति की प्रार्थना की</title>
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                        <![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाशिवरात्रि पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए सुख-शांति की कामना की। उन्होंने आदि देव महादेव से भारत को खुशहाली के शिखर पर ले जाने का आशीर्वाद मांगा।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pm-modi-congratulated-the-countrymen-on-mahashivratri-and-prayed-for/article-143236"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(12200-x-600-px)-(10)4.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को महाशिवरात्रि के मौके पर देश भर के लोगों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं और शांति, खुशहाली और सबके भले के लिए आदि देव महादेव का आशीर्वाद मांगा।</p>
<p>पीएम मोदी ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, देश भर में मेरे परिवार के सदस्यों को महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं। मैं प्रार्थना करता हूं कि आदि देव महादेव हमेशा सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें। उनके आशीर्वाद से सभी का भला हो और हमारा भारत खुशहाली के शिखर पर पहुंचे। हर हर महादेव!</p>
<p>उल्लेखनीय है कि, महाशिवरात्रि हिंदू परंपरा के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है और यह भगवान शिव को समर्पित है और इसे देश भर के मंदिरों में उपवास, रात भर की प्रार्थना और खास रस्मों के साथ मनाया जाता है। भक्त शिव मंदिरों में इकत्र होते हैं, शिवलिंग पर दूध और बिल्व पत्र चढ़ाते हैं, और भोलेनाथ भजन गाते हैं। </p>
<p>प्रधानमंत्री का संदेश सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। कई लोगों ने 'हर हर महादेव' लिख कर उनकी शुभकामनाओं का जवाब दिया और भारत के अलग-अलग हिस्सों से त्योहारों की तस्वीरें शेयर कीं। महाशिवरात्रि के मौके पर कई राज्यों में शानदार जुलूस और धार्मिक सभाएं होती हैं, जो भारत के अलग-अलग तरह के सामाजिक ताने-बाने में इस त्योहार की गहरी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक अहमियत को दर्शाता है। </p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Feb 2026 11:34:45 +0530</pubDate>
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                <title>महाशिवरात्रि का पर्व आज: श्रद्धा, उत्साह, आस्था के साथ मनाया जाएगा, काशीनाथ की भक्ति में लीन रहेगी छोटीकाशी</title>
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                        <![CDATA[जयपुर में महाशिवरात्रि का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं। शिवालयों में विशेष योग के बीच भक्त जलाभिषेक और रुद्राभिषेक कर रहे हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-festival-of-mahashivratri-will-be-celebrated-today-with-devotion/article-143219"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(12200-x-600-px)-(1)18.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर रविवार को महाशिवरात्रि का पर्व श्रद्धा,उत्साह और आस्था के साथ मनाया जाएगा। महाशिवरात्रि पर बन रहे सर्वार्थ सिद्धि योग, बुधादित्य योग तथा चतुर्ग्रही योग का विशेष संयोग में श्रद्धालु शिवालयों में आदि देव महादेव की पूजा-अर्चना करेंगे। सुबह से देर रात तक शिवालयों में हर-हर महादेव का जयघोष सुनाई देगा। चौड़ा रास्ता के ताडकेश्वर, बनीपार्क के जंगलेश्वर महादेव, वैशालीनगर के झारखंड महादेव, छोटी चौपड़ के रोजगारेश्व, आमेर के भूतेश्वर महादेव सहित छोटीकाशी के सभी शिव मंदिरों में बाबा भोलेनाथ के भक्त जलाभिषेक किया जाएगा। दोपहर तक जहां जलाभिषेक का सिलसिला चलेगा,जबकि शाम को देसी-विदेशी फू लों से बाबा का श्रृंगार किया जाएगा। </p>
<p><strong>रूद्राभिषेक से संवरती हैं किस्मत</strong></p>
<p>भगवान शिव की उपासना में रुद्राभिषेक का विशेष महत्व है। शिव पुराण में वर्णित विधि के अनुसार विभिन्न द्रव्यों से अभिषेक करने पर अलग-अलग फ ल प्राप्त होते हैं। श्रद्धालु यदि अपनी मनोकामना के अनुरूप द्रव्य से रुद्राभिषेक कराएं तो उन्हें पूर्ण आध्यात्मिक और सांसारिक लाभ प्राप्त होता है। ज्योतिषाचार्य डॉ.महेन्द्र मिश्रा के अनुसार जल से रुद्राभिषेक करने पर वर्षा एवं शांति की प्राप्ति होती हैं। </p>
<p><strong>राज्यपाल, मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष की महाशिवरात्रि पर शुभकामनाएं</strong></p>
<p>जयपुर। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने महाशिवरात्रि के पावन पर्व की बधाई और शुभकामनाएं दी है। राज्यपाल बागडे ने कहा कि महाशिवरात्रि भारतीय संस्कृति का अनूठा उत्सव है। उन्होंने भगवान शिव और माता पार्वती से सभी के कल्याण और मंगल की कामना की है। सीएम ने कहा कि महाशिवरात्रि भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और आस्था का महत्वपूर्ण पर्व है। उन्होंने इस अवसर पर प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे सदैव सत्य के रास्ते पर चलते हुए लोककल्याण और प्राणीसेवा के प्रति समर्पित रहें। वहीं विधानसभा अध्यक्ष देवनानी ने कहा कि महाशिवरात्रि भगवान शिव की आराधना का महान पर्व है, जो हमें आत्मसंयम, तप, त्याग और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Feb 2026 09:51:54 +0530</pubDate>
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                <title>महाशिवरात्रि : नौ कुंडीय शिव गायत्री महायज्ञ में अर्पित की जाएंगी आहुतियां, गोविंददेवजी मंदिर में होगा पार्थिव शिवलिंगों का अभिषेक</title>
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                        <![CDATA[आराध्य देव गोविंद देव जी मंदिर में 26 फरवरी को महाशिवरात्रि पर मंदिर महंत अंजन कुमार गोस्वामी के सान्निध्य में सुबह सात से ग्यारह बजे तक पहली बार शिवोहम् कार्यक्रम होगा। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/mahashivratri-nine-kundiya-shiva-gayatri-mahayagya-will-be-offered-prayers/article-105440"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer94.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। आदिदेव महादेव की आराधना को समर्पित महाशिवरात्रि का पर्व विभिन्न शुभ और मांगलिक योग में भऊि१भाव से मनाया जाएगा। छोटी काशी के सभी शिवालयों में सुबह से देर रात तक धार्मिक आयोजन होंगे। कई शिवालयों में प्रयागराज के कुंभ जल से भगवान भोलेनाथ का अभिषेक किया जाएगा। आराध्य देव गोविंद देवजी मंदिर में 26 फरवरी को महाशिवरात्रि पर मंदिर महंत अंजन कुमार गोस्वामी के सान्निध्य में सुबह सात से ग्यारह बजे तक पहली बार शिवोहम् कार्यक्रम होगा। छोटीकाशी के आस्था के केन्द्र गोविंद देवजी मंदिर में राधे कृष्णा के साथ-साथ हर हर महादेव का भी जयघोष होगा। शैव और वैष्णव पंरम्परा का अद्भुत मिलन होगा। सुबह सवा सात बजे पार्थिव शिवलिंगों की प्राण प्रतिष्ठा कर रूद्राभिषेक किया जाएगा। सुबह आठ से ग्यारह बजे तक श्रद्धालु अपने हाथों से अभिषेक कर सकेंगे। पंचामृत के अलावा प्रयागराज के त्रिवेणी संगम के जल से भी अभिषेक करने का अवसर प्राप्त होगा। महाशिवरात्रि पर ठाकुरजी के दर्शन, भोलेनाथ के अभिषेक के साथ श्रद्धालु यहां नौ से ग्यारह बजे तक शिव गायत्री महायज्ञ में आहुतियां भी अर्पित कर सकेंगे। अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार और श्री शिवमहापुराण कथा समिति सहित अनेक संस्थाओं के कार्यकर्ता आयोजन में समयदान कर सफल बनाने में जुटे हुए हैं। गोविंद देवजी मंदिर के सेवाधिकारी मानस गोस्वामी ने बताया कि कार्यक्रम नि:शुल्क है। किसी का कोई पंजीयन नहीं किया जा रहा। पहले आओ पहले पाओ के आधार पर अभिषेक और हवन का अवसर प्राप्त होगा। श्रद्धालुओं को शिवाभिषेक के लिए जल और पूजन सामग्री लाने की आवश्यकता भी नहीं है।</p>
<p><strong>तीन ग्रहों की होगी युति :</strong></p>
<p>महाशिवरात्रि पर तीन ग्रहों की युति होने से इस बार शिव भक्तों को आशुतोष की विशेष कृपा प्राप्त होगी। धनिष्ठा नक्षत्र, परिघ योग, शकुनी करण के साथ मकर राशि के चंद्रमा की उपस्थिति में महाशिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा की जाएगी। ज्योतिषाचार्य डॉ.महेन्द्र मिश्रा ने बताया कि वर्ष 1965 के बाद फिर से सूर्य, बुध और शनि कुंभ राशि में गोचर करेंगे। मकर राशि के चंद्रमा की उपस्थिति में यही तीन ग्रह युति बनाएंगे। इस प्रबल योग में की गई साधना आध्यात्मिक और धार्मिक उन्नति प्रदान करेगी। पराक्रम और प्रतिष्ठा को बढ़ाने के लिए सूर्य-बुध के केंद्र त्रिकोण योग का बड़ा लाभ मिलेगा। महाशिवरात्रि को मकर राशि के चंद्रमा की मौजूदगी में यह तीन ग्रह युति बनाएंगे। सूर्य और शनि पिता-पुत्र हैं तथा सूर्य शनि की राशि कुंभ में रहेंगे। इस दिन शिवजी और माता पार्वती का विवाह हुआ था। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन भगवान भोलेनाथ पृथ्वी पर मौजूद सभी शिवलिंग में विराजमान होते हैं। यह एक विशिष्ट संयोग एक शताब्दी में एक बार बनता हैं। जब अन्य ग्रह और नक्षत्र इस प्रकार के योग में विद्यमान होते हैं।</p>
<p><strong>मंदिरों में होगी चार प्रहर की पूजा :</strong></p>
<p>महाशिव रात्रि पर चार प्रहर की पूजा होगी। चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 26 फरवरी को सुबह 11.09 बजे से होने के साथ ही 27 को सुबह 8.55 बजे तक रहेगी। निशा काल में भगवान शिव की पूजा की जा सकेंगी। प्रथम प्रहर पूजा का समय शाम 6.22 बजे से रात्रि 9.30 बजे तक, द्वितीय प्रहर रात्रि 9.30 बजे से मध्यरात्रि 12.39 बजे तक, तृतीय प्रहर पूजा का समय मध्यरात्रि 12.40 बजे से 27 फरवरी सुबह 3.48 बजे तक, चतुर्थ प्रहर पूजा का समय 27 फरवरी को सुबह 3.49 बजे से सुबह 6.57 बजे तक रहेगा।</p>
<p><strong>ब्रह्म मुहूर्त में शुरू होगा जलाभिषेक का सिलसिला थाईलैंड और बैंगलूरू से मंगवाए गए हैं फूल :</strong></p>
<p>चौड़ा रास्ता स्थित ताड़केश्वर महादेव मंदिर में महंत अमित पाराशर के सान्निध्य में भगवान भोलेनाथ का श्रद्धालु ब्रह्म मुहूर्त में अभिषेक का सिलसिला शुरू होगा जो देर शाम तक चलेगा। इसके बाद विशेष झांकी सजाई जाएगी। वैशालीनगर के झारखण्ड महादेव मंदिर में सुबह 4.30 बजे पट खुलेंगे और रात 12 बजे पट बंद होंगे। शाम चार बजे तक भक्त भोलेनाथ का जलाभिषेक कर सकेंगे। इसके बाद थाईलैंड और बेंगलूरु से विशेष फूलों से विशेष झांकी सजाई जाएगी। 200 से अधिक स्वयंसेवक व्यवस्थाएं संभालेंगे। महिला-पुरुष की लाइनें अलग-अलग होंगी। बुजुर्गों के लिए ई-रिक्शा की व्यवस्था रहेगी। शाम को भजन संध्या में भगवान भोलेनाथ का गुणगान किया जाएगा।</p>
<p><strong>कावड़ जल से करेंगे अभिषेक :</strong></p>
<p>दिल्ली रोड स्थित खोले के हनुमान मंदिर परिसर के आनन्देश्वर महादेव का पुष्करराज से लाई जाने वाली कावड़ जल से जलाभिषेक किया जाएगा। यहां चार पहर की पूजा की जाएगी। झोटवाड़ा रोड स्थित चमत्कारेश्वर महादेव, बनीपार्क के जंगलेश्वर महादेव, छोटी चौपड़ स्थित रोजगारेश्वर महादेव, कूकस स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंगेश्वर सदाशिव महादेव मंदिर में बिल्वपत्र, गंगाजल वितरण किया जाएगा। धूलेश्वर महादेव सहित सभी शिवालयों में भगवान भोलेनाथ का विशेष शृंगार किया जाएगा।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Feb 2025 11:53:12 +0530</pubDate>
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                <title>महाशिवरात्रि पर विशेष : शिव और शक्ति के मिलन की रात्रि, जानें विशेष मुहूर्त और पूजन विधि</title>
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                        <![CDATA[महाशिवरात्रि को आदि और अनंत की आराधना का पर्व कहते हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/learn-the-night-of-special-shiva-and-shakti-union-on/article-105085"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer-(5)18.png" alt=""></a><br /><p>महाशिवरात्रि को आदि और अनंत की आराधना का पर्व कहते हैं। फाल्गुन मास के कृष्णपक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। माना जाता है कि सृष्टि का प्रारंभ इस दिन हुआ था। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन सृष्टि का आरंभ अग्निलिंगम के उदय से हुआ। भारतीय दर्शन में अग्निलिंगम के प्रतीकात्मक अर्थ हैं, यह अनंत का प्रतीक है यानी शिव का। यह सृजन और विनाश का भी रूप है अर्थात शिव सृजनकर्ता के साथ साथ संहारकर्ता भी हैं। महाशिवरात्रि पर्व पर विशेष तौर पर अग्निलिंगम की पूजा की जाती है, जिसे भगवान शिव की अनंत शक्ति का प्रतीक मानते हैं।</p>
<p><strong>कब है मुहूर्त :</strong></p>
<p>पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की कृष्णपक्ष की चतुर्दशी तिथि 26 फरवरी को सुबह 11 बजकर 8 मिनट पर शुरू होगी और समापन 27 फरवरी को सुबह 8 बजकर 54 मिनट पर होगा। महाशिवरात्रि में रात्रि पूजन का विधान है, इसलिए 26 फरवरी को रात में महादेव पूजन किया जाएगा।</p>
<p><strong>पूजा का निशिता मुहूर्त :</strong></p>
<p>आधी रात के आस-पास के समय को निशीथ काल या निशिता काल कहते हैं। महाशिवरात्रि पर पूजा का निशिता मुहूर्त रात 12 बजकर 9 मिनट से 27 फरवरी की रात 12 बजकर 59 मिनट तक है यानी कुल पचास मिनट की अवधि का निशिता मुहूर्त है। </p>
<p><strong>क्या है पूजा का विधान ??</strong></p>
<p>महाशिवरात्रि में रात के चारों प्रहर भगवान शिव की पूजा करने का विधान है। इस साल यह प्रहर इस तरह शुरू होंगे।<br />रात्रि का प्रथम प्रहर:  26 फरवरी की शाम 6 बजकर 19 मिनट से शुरू होकर रात 9 बजकर 26 तक रहेगा।<br />रात्रि का द्वितीय प्रहर: 26 फरवरी की रात 9 बजकर 26 मिनट से 27 फरवरी की रात 12 बजकर 34 मिनट तक रहेगा।<br />रात्रि का तृतीय प्रहर: 27 फरवरी की रात 12 बजकर 34 मिनट से प्रात: 3 बजकर 41 मिनट है।<br />रात्रि का चतुर्थ प्रहर: 27 फरवरी की सुबह 3 बजकर 41 मिनट से सुबह 6 बजकर 48 मिनट तक।</p>
<p><strong>कब और कैसे करें पारण ??</strong></p>
<p>शिव और शक्ति के मिलन की रात्रि यानी महाशिवरात्रि के दिन पारण का समय कुछ इस प्रकार से रहने वाला है। 27 फरवरी की सुबह 6 बजकर 48 मिनट से सुबह 8 बजकर 54 मिनट तक पारण किया जा सकता है। पारण दरअसल किसी व्रत या उपवास के दूसरे दिन किया जाने वाला पहला भोजन और तत्व संबंधी कृत्य है। पारण हमेशा व्रत के दूसरे दिन रीति नीति से करना चाहिए, तभी व्रत का पूरा फल मिलता है। जन्माष्टमी को छोड़कर हिंदू धर्म के बाकी सभी व्रतों में पारण दिन में किया जाता है। देव पूजन करके।</p>
<p><strong>महाशिवरात्रि का संदेश :</strong></p>
<p>महाशिवरात्रि को शिव और शक्ति के मिलन की रात्रि कहा जाता है। सवाल है इसका मतलब क्या है? दरअसल भारतीय आध्यात्मिक परंपरा तंत्र दर्शन से जुड़ी हुई है। इसलिए इस मिलन का अर्थ केवल एक दैवीय मिलन भर नहीं, बल्कि इससे गहरा और प्रतीकात्मक है, जो सृष्टि की मूल ऊर्जा, संतुलन और आध्यात्मिक जागृति का प्रतीक है। इसलिए महाशिवरात्रि का संदेश मानवता के लिए बहुत व्यापक है। शिव और शक्ति का दर्शनिक अर्थ है कि शिव हमारी चेतना है, यानी शुद्ध अस्तित्व का प्रतीक हैं। शिव तत्व को पुरुष तत्व या मैसकुलिन एनर्जी भी कहते हैं, जबकि शक्ति, सृजनात्मक ऊर्जा और गतिशीलता का प्रतीक है। इसे इसकी गतिशील या फैमिनिन एनर्जी भी कहते हैं। जब कहा जाता है कि महाशिवरात्रि शिव और शक्ति के मिलन की रात्रि है, तो इसका अर्थ यही है कि शिवरात्रि की महारात्रि में ध्यान, साधना और आत्मबोध करना चाहिए। महाशिवरात्रि का समय वही काल है जब व्यक्ति अपने अंदर के शिव यानी चेतना और शक्ति यानी ऊर्जा का संतुलन कर सकता है।<br />शिव, आत्मा के और शक्ति, प्राण शक्ति या वाइटल एनर्जी का आधार हैं। महाशिवरात्रि की रात शिव भक्तों को सोना नहीं चाहिए। रात्रिभर जागरण करके भगवान शिव का ध्यान लगाना चाहिए। महाशिवरात्रि को भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह सम्पन्न हुआ था। इसलिए इस दिन को सृष्टि का संतुलन दिवस भी माना जाता है, क्योंकि शिव यानी पुरुष तत्व और शक्ति या प्राकृतिक तत्व के मिलन का प्रतीक था। शिव और पार्वती का मिलन। इसी से ही सृष्टि का संतुलन स्थापित हुआ। यह मिलन प्रेम, त्याग और भक्ति का प्रतीक है। तंत्र परांपरा में शिवरात्रि को कुंडलनी जागरण की महारात्रि माना जाता है। कुंडलनी शक्ति हमारे मूलाधार चक्र में सुप्त अवस्था में रहती है, जो कि साधना के बल पर यह सहस्रार चक्र यानी मस्तिष्क में स्थित शिव तत्व से मिलती है। इससे समाधि की अवस्था प्राप्त होती है। महाशिवरात्रि का दिन आध्यात्म का महान दिन है।</p>
<p><strong>पूजा सामग्री :</strong></p>
<p>गाय का दूध, दही, शक्कर<br />गंगाजल, महादेव के वस्त्र<br />माता पार्वती के श्रृंगार का सामान, वस्त्र<br />जनेऊ, चंदन, केसर, अक्षत्<br />इत्र, लौंग, छोटी इलायची, पान-सुपारी<br />मौली, रक्षा सूत्र, भस्म, अभ्रक, कुश का आसन</p>
<p><strong>शिवजी आरती :</strong></p>
<p>ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।<br />ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥ ओम जय शिव ओंकारा॥<br />एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे।<br />हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥ ओम जय शिव ओंकारा॥<br />दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।<br />त्रिगुण रूप निरखत त्रिभुवन जन मोहे॥ ओम जय शिव ओंकारा॥<br />अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।<br />त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥ ओम जय शिव ओंकारा॥<br />श्वेताम्बर पीताम्बर बाघंबर अंगे।<br />सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे॥ ओम जय शिव ओंकारा॥<br />कर के मध्य कमण्डल चक्र त्रिशूलधारी।<br />जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥ ओम जय शिव ओंकारा॥<br />ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।<br />प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका॥ ओम जय शिव ओंकारा॥<br />पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा।<br />भांग धतूरे का भोजन, भस्मी में वासा॥ ओम जय शिव ओंकारा॥<br />जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला।<br />शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला॥ ओम जय शिव ओंकारा॥<br />काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।<br />नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥ ओम जय शिव ओंकारा॥<br />त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे।<br />कहत शिवानन्द स्वामी, मनवान्छित फल पावे॥<br />ओम जय शिव ओंकारा॥ स्वामी ओम जय शिव ओंकारा॥</p>
<p>आरोग्य के लिए : ॐ नम: शिवाय<br />साधक रोजाना इस मंत्र का जाप करता है, तो उसे आरोग्य की प्राप्ति हो सकती है।<br />अकाल मृत्यु का भय से मुक्ति<br />ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उवार्रुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥</p>
<p>यह महामृत्युंजय मंत्र है। कहा जाता है कि रोजाना इसके जप करने से व्यक्ति की अकाल मृत्यु को टाला जा सकता है। साथ ही व्यक्ति की आयु भी लंबी होती है और हर भय से भी मुक्ति मिलती है।</p>
<p>इच्छा प्राप्ति के लिए ॐ नमो भगवते रुद्राय नम:<br />यह रूद्र मंत्र है। माना जाता है कि प्रतिदिन इसका जाप करने से व्यक्ति की हर इच्छा पूरी होती है।</p>
<p>आर्थिक मजबूती : ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्र: प्रचोदयात्॥<br />यह बहुत ही प्रभावशाली मंत्र है। यदि साधक रोजाना शिव जी का ध्यान करते हुए इस मंत्र का जाप करता है तो उसकी आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।</p>
<p>भय होगा दूर : ऊं पषुप्ताय नम:<br />यह एक प्रभावशाली मंत्र है। पूजा के दौरान रोजाना इस शिव मंत्र का जाप करने से साधक को महादेव की विशेष कृपा प्राप्त हो सकती है।</p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 21 Feb 2025 16:50:42 +0530</pubDate>
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                <title>ईश्वरीय शक्ति के महत्व को दिखाती है महाशिवरात्रि</title>
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                        <![CDATA[भारत के साथ नेपाल, मारिशस सहित दुनिया के कई अन्य देशों में भी महाशिवरात्रि मनाते हैं। हर साल फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का व्रत किया जाता है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/mahashivratri-shows-the-importance-of-divine-power/article-72137"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/lord-shiva.png" alt=""></a><br /><p>महाशिवरात्रि भगवान शिव का त्योहार है। भारत के सभी प्रदेशों में महाशिवरात्रि का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। भारत के साथ नेपाल, मारिशस सहित दुनिया के कई अन्य देशों में भी महाशिवरात्रि मनाते हैं। हर साल फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का व्रत किया जाता है। हिन्दू पुराणों के अनुसार इसी दिन सृष्टि के आरंभ में मध्यरात्रि में भगवान शिव ब्रह्मा से रुद्र के रूप में प्रकट हुए थे। इसीलिए इस दिन को महाशिवरात्रि कहा जाता है। शिवरात्रि के प्रसंग को हमारे वेद, पुराणों में बताया गया है कि जब समुद्र मन्थन हो रहा था उस समय समुद्र में चौदह रत्न प्राप्त हुए। उन रत्नों में हलाहल भी था। जिसकी गर्मी से सभी देव दानव त्रस्त होने लगे। तब भगवान शिव ने उसका पान किया। उन्होंने लोक कल्याण की भावना से अपने को उत्सर्ग कर दिया। इसलिए उनको महादेव कहा जाता है। जब हलाहल को उन्होंने अपने कंठ के पास रख लिया तो उसकी गर्मी से कंठ नीला हो गया। तभी से भगवान शिव को नीलकंठ भी कहते हैं। शिव का अर्थ कल्याण होता है। जब संसार में पापियों की संख्या बढ़ जाती है तो शिव उनका संहार कर लोगों की रक्षा करते हैं। इसीलिए उन्हें शिव कहा जाता है।</p>
<p>योगिक परम्परा में इस दिन और रात को इतना महत्व इसलिए दिया जाता है क्योंकि यह आध्यात्मिक साधक के लिए जबर्दस्त संभावनाएं प्रस्तुत करते हैं। आधुनिक विज्ञान कई चरणों से गुजरने के बाद आज उस बिंदु पर पहुंच गया है। जहां वह प्रमाणित करता है कि हर वह चीज जिसे आप जीवन के रूप में जानते हैं। पदार्थ और अस्तित्व के रूप में जानते हैं। जिसे आप ब्रह्मांड और आकाशगंगाओं के रूप में जानते हैं। वह सिर्फ एक ही ऊर्जा है। जो लाखों रूपों में खुद को अभिव्यक्त करती है। माना जाता है की इस दिन भगवान शंकर और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इस दिन लोग व्रत रखते हैं और भगवान शिव की पूजा करते है। महाशिवरात्रि का व्रत रखना सबसे आसान माना जाता है। इसलिए बच्चों से लेकर बूढ़ों तक सभी इस दिन व्रत रखते हैं। महाशिवरात्रि के व्रत रखने वालों के लिए अन्न खाना मना होता है। इसलिए उस दिन फलाहार किया जाता है। राजस्थान में व्रत के समय गाजर, बेर का सीजन होने से गांवों में लोगों द्वारा गाजर, बेर का फलाहार किया जाता है। लोग मन्दिरों में भगवान शिव की पूजा करते हैं व उन्हें आक, धतूरा चढ़ाते हैं। भगवान शिव को विशेष रूप से भांग का प्रसाद लगता है। इस कारण इस दिन काफी जगह शिवभक्त भांग घोट कर पीते हैं।</p>
<p>पुराणों में कहा जाता है कि एक समय शिव पार्वती जी कैलाश पर्वत पर बैठे थी। उसी समय पार्वती ने प्रश्न किया कि इस तरह का कोई व्रत है जिसके करने से मनुष्य आपके धाम को प्राप्त कर सके? तब उन्होंने यह कथा सुनाई थी कि प्रत्यना नामक देश में एक व्यक्ति रहता था, जो जीवों को बेचकर अपना भरण-पोषण करता था। उसने सेठ से धन उधार ले रखा था। समय पर कर्ज न चुकाने के कारण सेठ ने उसको शिवमठ में बन्द कर दिया।</p>
<p>संयोग से उस दिन फाल्गुन बुदी चतुर्दशी थी। वहां रातभर कथा, पूजा होती रही जिसे उसने भी सुना। अगले दिन शीघ्र कर्ज चुकाने की शर्त पर उसे छोड़ा गया। उसने सोचा रात को नदी के किनारे बैठना चाहिए। वहां जरूर कोई न कोई जानवर पानी पीने आएगा। अत: उसने पास के बील वृक्ष पर बैठने का स्थान बना लिया। उस बील के नीचे एक शिवलिंग था। जब वह पेड़ पर अपने छिपने का स्थान बना रहा था उस समय बील के पत्तों को तोड़कर फेंकता जाता था जो शिवलिंग पर ही गिरते थे। वह दो दिन का भूखा था। इस तरह से वह अनजाने में ही शिवरात्रि का व्रत कर ही चुका था। साथ ही शिवलिंग पर बेल-पत्र भी अपने आप चढ़ते गए। एक पहर रात्रि बीतने पर एक गर्भवती हिरणी पानी पीने आई। उस व्याध ने तीर को धनुष पर चढ़ाया किन्तु हिरणी की कातर वाणी सुनकर उसे इस शर्त पर जाने दिया कि सुबह होने पर वह स्वयं आएगी। दूसरे पहर में दूसरी हिरणी आई। उसे भी छोड़ दिया। तीसरे पहर भी एक हिरणी आई उसे भी उसने छोड़ दिया और सभी ने यही कहा कि सुबह होने पर मैं आपके पास आऊंगी। चौथे पहर एक हिरण आया। उसने अपनी सारी कथा कह सुनाई कि वे तीनों हिरणियां मेरी स्त्री थी। वे सभी मुझसे मिलने को छटपटा रही थी। इस पर उसको भी छोड़ दिया तथा कुछ और भी बेल-पत्र नीचे गिराए। इससे उसका हृदय बिल्कुल पवित्र, निर्मल तथा कोमल हो गया। प्रात: होने पर वह बेल-पत्र से नीचे उतरा। नीचे उतरने से और भी बेल पत्र शिवलिंग पर चढ़ गए। अत: शिवजी ने प्रसन्न होकर उसके हृदय को इतना कोमल बना दिया कि अपने पुराने पापों को याद करके वह पछताने लगा और जानवरों का वध करने से उसे घृणा हो गई। सुबह वे सभी हिरणियां और हिरण आए। उनके सत्य वचन पालन करने को देखकर उसका हृदय दुग्ध सा धवल हो गया और वह फूट-फूट कर रोने लगा। योगियों और संन्यासियों के लिए यह वह दिन है जब शिव कैलाश पर्वत के साथ एकाकार हो गए थे। योगिक परम्परा में शिव को ईश्वर के रूप में नहीं पूजा जाता है। बल्कि उन्हें प्रथम गुरु आदि गुरु माना जाता है। जो योग विज्ञान के जन्मदाता थे। <br />         </p>]]>
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                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Mar 2024 11:37:10 +0530</pubDate>
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                <title>मुख्यमंत्री निवास स्थित शिव मंदिर में महाशिवरात्रि पर CM गहलोत ने सपरिवार की पूजा अर्चना</title>
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                        <![CDATA[
मुख्यमंत्री ने कामना की है कि भगवान शिव की असीम कृपा सभी प्रदेशवासियों पर हमेशा बनी रहे और प्रदेश उन्नति एवं खुशहाली के पथ पर बढ़ता रहे।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/--chief-minister-gehlot-offered-prayers-to-his-family-on-mahashivratri-in-shiv-temple-at-chief-minister-s-residence/article-5243"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/ch.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने महाशिवरात्रि के पर्व मंगलवार को सीएमआर स्थित शिव मंदिर में सपरिवार पूजा अर्चना की। इस दौरान सीएमआर के अधिकारी व कर्मचारी भी मौजूद रहे।<br /><br />साथ ही मुख्यमंत्री ने महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।  गहलोत ने कहा कि महाशिवरात्रि भगवान भोलेनाथ की आराधना का महापर्व है। भगवान शिव जीवन से संकटों को हरने वाले देवाधिदेव हैं। भक्तों पर वे हमेशा विशेष कृपा बरसाते हैं और उनके कष्टों को दूर करते हैं। वे हमें समस्त प्राणियों के कल्याण के लिए निरन्तर समर्पित रहने की प्रेरणा देते हैं। मुख्यमंत्री ने कामना की है कि भगवान शिव की असीम कृपा सभी प्रदेशवासियों पर हमेशा बनी रहे और प्रदेश उन्नति एवं खुशहाली के पथ पर बढ़ता रहे।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Mar 2022 14:52:25 +0530</pubDate>
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                <title>महाशिवरात्रि व्रत का वैज्ञानिक महत्व</title>
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                        <![CDATA[हर साल फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है, ये दिन महादेव और माता पार्वती की विशेष पूजा का दिन माना गया है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/scientific-importance-of-mahashivratri-fast/article-5230"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/shiv-parvati.jpg" alt=""></a><br /><p>हर साल फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है, ये दिन महादेव और माता पार्वती की विशेष पूजा का दिन माना गया है। महाशिवरात्रि यानी शिव और शक्ति  की आराधना का दिन। इस दिन शिव को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखा जाता है। शिव की पूजा और भक्ति करने से ही कष्ट दूर हो जाते हैं।  सच्चे मन से शिव भक्ति करने वाले भक्तों पर उनकी कृपा हमेशा बनी रहती है।<br /><br /><strong>तन का शुद्धीकरण</strong> <br />व्रत रखने से तन का शुद्धीकरण होता है। व्रत रखने से रक्त शुद्ध होता है। आतों की सफाई होती है। पेट को आराम मिलता है। उत्सर्जन तंत्र और पाचन तंत्र, दोनों ही अपनी अशुद्धियों से छुटकारा पाते हैं। कई रोगों से मुक्ति मिलती है। श्वसन तंत्र ठीक होता है। उपवास रखने से कलोस्ट्रोल के स्तर कम होता है। व्रत से स्मरण शक्ति बढ़ती है। दिमाक स्वस्थ रहता है।  </p>
<p><br /><strong>ठोस वैज्ञानिक आधार</strong><br /> सनातन धर्म और उसके पर्वों का ठोस वैज्ञानिक आधार है। वैज्ञानिक दृष्टि से महाशिवरात्रि पर्व भी अतिमहत्व का है। महाशिवरात्रि की रात्रि विशेष होती है। दरअसल इस रात्रि पृथ्वी का उत्तरी गोलार्द्ध इस तरह अवस्थित होता है कि मनुष्य के अंदर की ऊर्जा प्राकृतिक तौर पर ऊपर की तरफ  जाने लगती है। अर्थात प्रकृति स्वयं मनुष्य को उसके आध्यात्मिक शिखर तक जाने का मार्ग सुगम करती है। महाशिवरात्रि की रात्रि में जागरण करने एवं रीढ़ की हड्डी सीधी करके ध्यान मुद्रा में बैठने की बात बताई गई है।</p>
<p><br /><strong>सबसे बड़ा वैज्ञानिक</strong><br />महाशिवरात्रि पर्व पर भगवान शिव की पूजा की जाती है। भगवान शिव को सबसे बड़ा वैज्ञानिक कहा गया है। समस्त प्रकार के तंत्र, मंत्र, यंत्र, ज्योतिष, ग्रह, नक्षत्र के जनक भगवान शिव ही हैं। इसलिए शिव के पास हर समस्या का समाधान हैं। इसी तरह प्रत्येक मंदिर में शिवलिंग स्थापित होता है। शिवलिंग ऊर्जा का एक पिंड है, जो गोल, लम्बा व वृत्ताकार होता है। शिवलिंग ब्रह्माण्डीय शक्ति को सोखता है।</p>
<p><br /><strong>व्याधियों का निवारण</strong><br />रुद्राभिषेक, जलाभिषेक, भस्म आरती,भांग -धतूरा और बेल पत्र आदि चढ़ाकर भक्त उस ऊर्जा को अपने में ग्रहण करता है। इससे मन व विचारों में शुद्धता तथा शारीरिक व्याधियों का निवारण स्वाभाविक है। शिवरात्रि के पश्चात ग्रीष्मऋतु का आगमन भी प्रारंभ हो जाता है। मनुष्य गर्मी के प्रभाव से बचने के लिए अपनी चेतना को शिव को समर्पित कर देता है। इससे मनुष्य तमाम तरह की व्याधियों से मुक्त हो जाता है। वैसे भी विज्ञान ध्यान ऊर्जा को विशेष महत्व देता है।<br /><br /></p>]]>
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                <pubDate>Tue, 01 Mar 2022 13:30:39 +0530</pubDate>
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                <title>महाशिवरात्रि विशेष: भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा के लिए इन बातों का रखें खास ध्यान</title>
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                        <![CDATA[इस दिन व्रत-उपवास रखकर बेलपत्र-जल से शिव की पूजा-अर्चना करके जौ, तिल, खीर और बेलपत्र का हवन करने से समस्त मनोकामना पूर्ण हो जाती हैं। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/mahashivratri-special--for-the-due-worship-of-lord-shiva-and-mother-parvati--keep-these-things-in-mind/article-5222"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/jharkhand-mahadev-mandir8.jpg" alt=""></a><br /><p>महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा की जाती है। भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उनकी प्रिय चीजें पूजा के समय उन्हें भेंट करनी चाहिए। वहीं कुछ ऐसी भी चीजें हैं जिसे भगवान भोलेनाथ की पूजा करते भूलकर भी अर्पित नहीं करना चाहिए। महाशिवरात्रि पर किसी बड़े पात्र में धातु से बने शिवलिंग या मिट्टी से बने शिवलिंग की स्थापना करें। ध्यान रखें, महाशिवरात्रि के दिन चार पहर की शिव पूजा करनी चाहिए। शिव पूजा में सबसे पहले मिट्टी के पात्र में पानी भरकर, ऊपर से बेलपत्र, धतूरे के पुष्प, चावल आदि एक साथ डालकर शिवलिंग पर चढ़ायें।महाशिवरात्रि के दिन व रात में शिवपुराण का पाठ करना या सुनना चाहिए।सूर्योदय से पहले ही उत्तर-पूर्व दिशा में पूजन-आरती की तैयारी कर लें। <br />कोई सामग्री उपलब्ध न होने पर केवल शुद्ध ताजा जल शिवजी को अर्पित करने पर प्रसन्न हो जाते हैं। इस दिन व्रत-उपवास रखकर बेलपत्र-जल से शिव की पूजा-अर्चना करके जौ, तिल, खीर और बेलपत्र का हवन करने से समस्त मनोकामना पूर्ण हो जाती हैं। <br /><br />व्रत नियम<br />.    महाशिवरात्रि के दिन चावल, गेहूं आदि से बनी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।<br />.    इस दिन मांस-मदिरा से दूर रहना चाहिए।<br />.    महाशिवरात्रि के दिन बेसन, मैदा आदि से बनी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।<br />.    महाशिवरात्रि का व्रत रखने वाले व्रती को दिन में नहीं सोना चाहिए। मान्यता है कि दिन में सोने से व्रत का फल नहीं मिलता है।<br />.    वाद-विवाद से बचना चाहिए।<br />.    कटु शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।<br />.    चाय, फल और दूध आदि का सेवन किया जा सकता है।<br />.    साबुदाने की खिचड़ी का सेवन किया जा सकता है।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Mar 2022 12:59:12 +0530</pubDate>
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