<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/asthma/tag-13076" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>asthma - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/13076/rss</link>
                <description>asthma RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>अस्थमा और एलर्जी के मरीजों के लिए बढ़ी परेशानी : शहर की हवा में घुले परागकण, होलोप्टेलिया इंटीग्रिफोलिया के पौधे से फैलते हैं ये परागकण</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर के अस्थमा और एलर्जी से जुड़े मरीजों के लिए अब परेशानी ज्यादा बढ़ गई है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/increased-problems-for-asthma-and-allergic-patients-spread-from-the/article-105427"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर के अस्थमा और एलर्जी से जुड़े मरीजों के लिए अब परेशानी ज्यादा बढ़ गई है। इसकी बड़ी वजह है होलोप्टेलिया इंटीग्रिफोलिया पौधा और पेड़, जिसे चिलबिल पेड़ या बंदर की रोटी के नाम से भी जाना जाता है। पौधे के परागकण यानी पोलिन्स इस सीजन में पहली बार जयपुर की हवा में देखे गए हैं, जिससे एलर्जी से ग्रस्त लोगों के लिए परेशानी का मौसम शुरू हो गया। विशेषज्ञों के अनुसार जयपुर में लगभग 10 प्रतिशत अस्थमा रोगी होलोप्टेलिया एलर्जी से प्रभावित होते हैं। चिलबिल पेड़ या बंदर की रोटी के नाम से प्रसिद्ध यह पेड़ जयपुर का सबसे अधिक एलर्जी पैदा करने वाला पौधा माना जाता है। इसके परागकण हवा में एक से दो महीने तक अत्यधिक मात्रा में मौजूद रहते हैं, जिससे एलर्जी और अस्थमा के मरीजों को गंभीर परेशानी हो सकती है। </p>
<p><strong>बर्कार्ड पोलिन काउंटर से होता है डिटेक्ट :</strong></p>
<p>अस्थमा भवन की निदेशक डॉ. निष्ठा सिंह ने बताया कि होलोप्टेलिया परागकण का पता लगाने के लिए बर्कार्ड पोलिन काउंटर नामक उन्नत उपकरण का उपयोग किया जाता है। यह उपकरण पिछले 15 वर्षो से जयपुर के विद्याधर नगर स्थित अस्थमा भवन की छत पर स्थापित है और रोजाना हवा में मौजूद परागकणों को मापता है। अस्थमा और एलर्जी के मरीजों के लिए राहत भरी खबर यह है कि अस्थमा भवन की वेबसाइट पर यह जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है, ताकि लोग अपने बचाव के लिए पहले से तैयारी कर सकें।</p>
<p><strong>अस्थमा भवन ही है देश में एकमात्र सेंटर :</strong></p>
<p>डॉ. निष्ठा ने बताया कि अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों में परागकण गणना नियमित रूप से दैनिक आधार पर की जाती है और यह रीयल टाइम में जनता के लिए वेबसाइटों पर उपलब्ध होती है। भारत में यह महत्वपूर्ण सेवा केवल जयपुर में अस्थमा भवन द्वारा उपलब्ध कराई जा रही है।</p>
<p><strong>क्या है इन परागकरणों का स्वास्थ्य पर प्रभाव :</strong></p>
<p>होलोप्टेलिया के परागकणों की संख्या सुबह और शाम के समय चरम पर होती है, इसलिए एलर्जी से प्रभावित व्यक्तियों को इस दौरान विशेष सावधानियां बरतनी चाहिए। जैस कि सुबह और शाम के समय घर के अंदर रहें, बाहर जाते समय नाक और मुंह को ढ़कने वाला ट्रिपल लेयर्ड मास्क पहनें, ज्यादा पेड़ों वाले क्षेत्रों में जाने से बचें।</p>
<p><strong>संपर्क में आने के बाद ये आते हैं लक्षण :</strong></p>
<p>-नाक बहना और बंद होना<br />-सांस लेने में तकलीफ और घरघराहट<br />-आंखों में जलन और त्वचा पर चकत्ते </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/increased-problems-for-asthma-and-allergic-patients-spread-from-the/article-105427</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/increased-problems-for-asthma-and-allergic-patients-spread-from-the/article-105427</guid>
                <pubDate>Tue, 25 Feb 2025 11:00:46 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-02/1.jpg"                         length="283702"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ठंड ने बढ़ाई सांस, अस्थमा और एलर्जी के मरीजों की परेशानी, बच्चों और बुजुर्गों को हो रही ज्यादा तकलीफ</title>
                                    <description><![CDATA[वायु प्रदूषण में मौजूद हानिकारक गैसें और कण फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकते हैं और कैंसर का खतरा भी बढ़ा सकते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/cold-increases-the-problems-of-asthma-and-allergy-patients-children/article-97575"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer-(9)3.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सर्दियों का मौसम आते ही कई प्रकार की मौसमी बीमारियां आमजन को जकड़ लेती हैं, लेकिन विशेष तौर पर अस्थमा और एलर्जी के मरीज ठंड के मौसम में ज्यादा परेशान होते हैं। इसके साथ ही सर्दियों में प्रदूषण का स्तर भी बढ़ जाता है। यह तकलीफ को और बढ़ा देता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की मानें तो दुनिया भर में हर 250 में से एक मौत अस्थमा के कारण होती है। इस बीमारी का असर सर्दियों में ज्यादा रहता है। ठंड में सांस लेना मुश्किल हो सकता है और अस्थमा के अटैक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसके चलते सवाईमानसिंह सहित अन्य सरकारी और निजी अस्पतालों में भी इन दिनों अस्थमा, सांस और एलर्जी के मरीजों की अच्छी खासी तादाद देखने को मिल रही है। ओपीडी में सामान्य से 20 से 30 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।</p>
<p><strong>तेज ठंड और प्रदूषण घातक : डॉ. शिवानी</strong><br />नारायणा हॉस्पिटल की सीनियर कंसलटेंट पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. शिवानी स्वामी ने बताया कि ठंड के समय हवा में धुएं और धूल के कण जमा हो जाते हैं, जिन्हें स्मॉग कहा जाता है। यह स्मॉग सांस लेने में परेशानी पैदा करता है। सर्दियों में हवा भी धीमी चलती है, जिससे प्रदूषित कण हवा में लंबे समय तक टिके रहते हैं। यह प्रदूषित कण फेफड़ों में जलन पैदा कर सकते हैं और श्वसन तंत्र को कमजोर कर सकते हैं। सर्दियों के मौसम में ठंडी-सूखी हवा और प्रदूषण फेफड़ों के लिए काफी नुकसानदायक हो सकती है। जब अस्थमा से प्रभावित व्यक्ति ठंडी हवा में सांस लेते हैं तो उनके वायुमार्ग सिकुड़ जाते हैं और यह अस्थमा के अटैक को ट्रिगर कर सकता है। बच्चों और बुजुर्गों का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है इसलिए वे इस समय प्रदूषण से जल्दी प्रभावित हो सकते हैं। वायु प्रदूषण में मौजूद हानिकारक गैसें और कण फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकते हैं और कैंसर का खतरा भी बढ़ा सकते हैं।</p>
<p><strong>ऐसे करें बचाव</strong><br /> जब भी आप घर से बाहर जाएं अच्छी क्वालिटी का मास्क पहनें।  ठंडी हवा से बचने के लिए हमेशा गर्म कपड़े पहनें। ठंड के मौसम में जब जरूरी हो तो ही बाहर निकलें।  घर के अंदर की हवा साफ  रखने के लिए एयर प्यूरीफायर लगाएं। बाहर ठंड और प्रदूषण अधिक हो तो खुले में व्यायाम न करें। ठंड के दौरान गुनगुना पानी पीने से गले और श्वसन तंत्र को राहत मिलती है। इम्यून सिस्टम को मजबूत रखने के लिए ताजे फल, सब्जियां और विटामिन सी युक्त खाद्य पदार्थ खाएं। अगर अस्थमा के लक्षण बढ़ें तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें। इन्हेलर और दवाइयां हमेशा अपने पास रखें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/cold-increases-the-problems-of-asthma-and-allergy-patients-children/article-97575</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/cold-increases-the-problems-of-asthma-and-allergy-patients-children/article-97575</guid>
                <pubDate>Sat, 14 Dec 2024 11:23:23 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-12/257rtrer-%289%293.png"                         length="485158"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बदलते मौसम और प्रदूषण ने बढ़ाया अस्थमा-एलर्जी के मरीजों का मर्ज, आंखों में जलन, खांसी और सांस संबंधी परेशानियों से हर दूसरा व्यक्ति पीड़ित</title>
                                    <description><![CDATA[ इसके साथ एसएमएस अस्पताल सहित निजी और अन्य सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में अब अस्थमा, एलर्जी, खांसी, आंखों में जलन और सांस संबंधी बीमारियों से ग्रसित मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/changing-weather-and-pollution-have-increased-the-number-of-asthma-allergy/article-95982"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/6630400-sizee22.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><br /><br />जयपुर। मौसम में हो रहा बदलाव और वातावरण में फैला प्रदूषण इन दिनों आम आदमी की जान का दुश्मन बना हुआ है। हर घर में कोई ना कोई व्यक्ति अस्थमा, एलर्जी, खांसी-जुकाम और सांस संबंधी परेशानियों से जूझ रहा है। राजधानी जयपुर में सर्दी की शुरुआत के साथ ही वायु प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। इसके साथ एसएमएस अस्पताल सहित निजी और अन्य सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में अब अस्थमा, एलर्जी, खांसी, आंखों में जलन और सांस संबंधी बीमारियों से ग्रसित मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। अकेले एसएमएस अस्पताल की ओपीडी में ही करीब 30 का इजाफा हो चुका है और आने वाले दिनों में इसमें और बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं कैंसर विशेषज्ञों ने वायु प्रदूषण से होने वाले विभिन्न प्रकार के कैंसर के खतरे की आशंका भी जताई है। प्रदूषित हवा के कारण फेफड़े, त्वचा, गर्दन, मुंह और सिर के कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है क्योंकि ये अंग सीधे तौर पर इस जहरीली हवा के संपर्क में आते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>जिन्हें एलर्जी की हिस्ट्री नहीं, उन्हें भी हो रही </strong><br />बढ़ते प्रदूषण के कारण लोग एलर्जी का शिकार हो रहे हैं और यह समस्या अब उन लोगों में भी देखने को मिल रही है, जिनकी एलर्जी की कोई पिछली हिस्ट्री नहीं थी। एक बार एलर्जी होने के बाद यह समस्या जीवनभर बनी रहती है। इसके अलावा प्रदूषण से साइनस का कैंसर भी होने का खतरा बढ़ गया है, जो हाल ही कुछ मामलों में देखा गया है। खासकर बच्चे और बुजुर्गों को प्रदूषण से बचाना बेहद जरूरी हो गया है। कई मरीज एलर्जी और जुकाम में अंतर समझ नहीं पाते हैं। वे जुकाम की एंटीबायोटिक दवाइयां लेते रहते हैं। जिनका उनके शरीर पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। मजबूरन उन्हें एलर्जी की ही दवा लेनी पड़ती हैं। ऐसे में बिना चिकित्सकीय परामर्श के कोई भी दवा नहीं लेनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>त्वचा पर भी पड़ रहा असर</strong><br />चिकित्सकों के अनुसार सल्फर, कार्बन धूल और धुएं के कण बढ़ने से एयर क्वालिटी इंडेक्स में इजाफा होता है। इससे त्वचा संबंधी विकार जैसे खुजली, रैशेज आदि हो जाते हैं। इतना ही नहीं कैंसर रोग विशेषज्ञों का तो ये भी मानना है कि प्रदूषण के कारण त्वचा का कैंसर होने का भी खतरा रहता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>ऐसे करें बचाव</strong><br />एलर्जी के मरीज धूल, धुएं आदि से बचें। मास्क लगाएं। भीड़ में न जाएं।<br />घर से बाहर निकलने पर मुंह या नाक पर कपड़ा या रूमाल बांधें।<br />पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें। ठंडे खानपान से भी बचें।<br />जलन होने पर आंखों को ठंडे पानी से धोते रहें।<br />साफ -सफाई का खयाल रखें, बाहर से आते ही मुंह धो लें।</p>
<p style="text-align:justify;">बदलते मौसम और पॉल्यूशन के वातावरण में खासकर अस्थमा, एलर्जी और श्वासं रोगियों की परेशानी काफी बढ़ जाती है। ऐसे में ऐसे मरीजों को विशेष ध्यान देने की जरूरत है। अपनी दवाईयां नियमित रूप से लेते रहें, मास्क लगाएं और परेशानी बढ़ने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। <br /><strong>-डॉ. शीतू सिंह, वरिष्ठ अस्थमा एवं श्वांस रोग विशेषज्ञ।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">पॉ  ल्यूशन के कारण त्वचा को भी काफी नुकसान होता है। स्किन ड्राई हो जाती है। खुजली, रैशेज, अर्टिकेरिया आदि की समस्या बढ़ जाती है। इसलिए नहाते समय मास्च्युराइजर सोप का इस्तेमाल करें और नहाने के बाद बॉडी पर मास्च्युराइजर लगाएं। <br /><strong>-डॉ. मोहित पंजाबी, त्वचा रोग विशेषज्ञ।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/changing-weather-and-pollution-have-increased-the-number-of-asthma-allergy/article-95982</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/changing-weather-and-pollution-have-increased-the-number-of-asthma-allergy/article-95982</guid>
                <pubDate>Wed, 27 Nov 2024 09:49:43 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-11/6630400-sizee22.png"                         length="426843"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विश्व में अस्थमा और सीओपीडी से मृत्यु की राजधानी बना भारत</title>
                                    <description><![CDATA[इंटरनेशनल जर्नल लंग इंडिया में प्रकाशित जयपुर की सीनियर पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. शीतू सिंह की रिसर्च में हुआ खुलासा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/india-becomes-the-capital-of-deaths-due-to-asthma-and/article-92537"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/630400-size-(8)3.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। देश में अस्थमा और सीओपीडी जैसी श्वसन संबंधित बीमारियों की स्थिति काफी खराब है। भारत में विश्व के सिर्फ 17 प्रतिशत मरीज हैं लेकिन मौतें 40 प्रतिशत से ज्यादा होती हैं। ऐसा इसीलिए क्योंकि भ्रांतियों के कारण 59 प्रतिशत मरीज दवाएं नहीं लेते और 10 प्रतिशत मरीज ही टीकाकरण करवाते हैं जिससे बीमारी गंभीर होने से मरीज की मृत्यु हो जाती है।</p>
<p>इंटरनेशनल जर्नल लंग इंडिया में अस्थमा और सीओपीडी से होने वाली मौतों के कारणों पर रिसर्च हुई जिसमें हैरान करने वाले आंकड़े सामने आए। इस रिसर्च को जयपुर की सीनियर पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. शीतू सिंह और उनकी टीम ने पूरा किया। रिसर्च में राजस्थान की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। सीओपीडी और अस्थमा से होने वाली सबसे ज्यादा मौतों में राजस्थान पहले नंबर पर है। दूसरे राज्यों में हृदय रोग के बाद सीओपीडी से सबसे ज्यादा मौतें होती हैं जबकि प्रदेश में सीओपीडी से सबसे ज्यादा मौतें होती हैं। चौंकानें वाली बात यह है कि बीमारी के इतने गम्भीर चरण तक पहुंचने के बावजूद राष्टÑीय चिकित्सा आयोग एनएमसी ने चेस्ट डिजीज विषय को एमबीबीएस के पाठ्यक्रम से ही हटा दिया है जिसके कारण नई पीढ़ी के डॉक्टर्स को इसकी सही जानकारी नहीं मिल पाती और सही इलाज का प्रशिक्षण भी नहीं हो सकेगा।</p>
<p><strong>सीजनल वेव ऑफ  रेस्पोरेटरी डिजीज सर्वे में हुआ अध्ययन</strong><br />डॉ. शीतू सिंह ने बताया कि इंडियन चेस्ट सोसाइटी द्वारा सीजनल वेव ऑफ रेस्पोरेटरी डिजीज सर्वे हुआ जिसमें भारत के 290 केंद्रों से श्वसन रोगियों का अध्ययन किया गया। अस्थमा और सीओपीडी से होने वाली वैश्विक मौतों में से 40 प्रतिशत से अधिक भारत में होती हैं, जबकि जनसंख्या सिर्फ 17 प्रतिशत है।</p>
<p><strong>59 फीसदी मरीज नहीं करते इन्हेलर का इस्तेमाल</strong><br />डॉ. शीतू ने बताया केवल 41% गंभीर अस्थमा रोगियों को इनहेल्ड कॉर्टिकोस्टेरॉयड्स यानी आईसीएस से उचित उपचार मिलता है। 59% आईसीएस का उपयोग नहीं करते, जिससे उनकी मृत्यु का जोखिम बढ़ जाता है। वहीं सीओपीडी के ग्रुप-ए यानी हल्की बीमारी के 42% रोगी अनावश्यक रूप से आईसीएस का अधिक उपयोग करते हैं, जिससे उन्हें निमोनिया का अधिक खतरा होता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/india-becomes-the-capital-of-deaths-due-to-asthma-and/article-92537</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/india-becomes-the-capital-of-deaths-due-to-asthma-and/article-92537</guid>
                <pubDate>Tue, 08 Oct 2024 10:19:21 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-10/630400-size-%288%293.png"                         length="241560"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शहर की हवा में घुले परागकण, अस्थमा और एलर्जी के मरीजों की बढ़ी मुसीबतें</title>
                                    <description><![CDATA[ शहर की हवा में इन दिनों परागकण की मौजूदगी हो चुकी है और यह अस्थमा-एलर्जी के मरीजों के लिए मुसीबत बन गए हैं। होलोप्लेलिया इंटीग्रिफोलिया ट्री या चिलबिल ट्री जिसे आम भाषा में बंदर की रोटी भी कहा जाता है, यह शहर का सबसे एलर्जेनिक पौधा परागकण है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/pollen-particles-dissolved-in-the-air-of-the-city--increased-problems-of-asthma-and-allergy-patients--detected-from-burcard-machine-installed-in-asthma-bhawan/article-5233"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/asthma-&amp;-allergy.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। शहर की हवा में इन दिनों परागकण की मौजूदगी हो चुकी है और यह अस्थमा-एलर्जी के मरीजों के लिए मुसीबत बन गए हैं। होलोप्लेलिया इंटीग्रिफोलिया ट्री या चिलबिल ट्री जिसे आम भाषा में बंदर की रोटी भी कहा जाता है, यह शहर का सबसे एलर्जेनिक पौधा परागकण है। यह परागकण एक से दो महीने की अवधि के लिए हवा में बहुत अधिक मात्रा में रहता है। यह प्लांट परागकण जयपुर शहर की हवा में इस साल पहली बार 28 फरवरी को देखा गया। इस परागकण का हवा में बुर्कार्ड परागकण काउंटर नामक एक उपकरण की मदद से पता चला है। यह एक परागकण प्रवेश मशीन है, जिसे 12 वर्ष पहले अस्थमा भवन विद्याधर नगर जयपुर स्थित श्वसन केंद्र और अस्पताल में स्थापित किया था। अस्थमा भवन की निदेशक डॉ. निष्ठा सिंह ने बताया कि दमा परागण की वेबसाइट पर दैनिक परागकण गणना रिकॉर्ड की जाती है। इस डेटा को हर कोई देख सकता है। अस्थमा और एलर्जी के रोगियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है।<br /><br /><strong>सुबह-शाम आमजन रहें सतर्क</strong><br />डॉ. सिंह ने बताया कि यह परागकण सुबह और शाम के समय हवा में उच्च सांद्रता में मौजूद होता है। जिन रोगियों को इस पौधे से एलर्जी है, उन्हें अपने घरों से बाहर जाना कम करना चाहिए और सुबह और शाम के समय ट्रिपल लेयर्ड मास्क से नाक और मुंह को अच्छी तरह से ढकना चाहिए। लोगों को इस परागकण के मौसम में अपनी बाहरी गतिविधियों को सीमित करने की सलाह दी जाती है। यह एलर्जी के मौसम की शुरुआत को दर्शाता है, क्योंकि अस्थमा एलर्जी के रोगियों की संख्या में इन दिनों काफी बढ़ोतरी हो रही है। यह परागकण मौसम अप्रैल के अंत तक रहेगा और मरीज नाक से पानी बहना, सांस लेने में समस्या, आंखों में जलन और चकत्ते सहित विभिन्न लक्षणों के साथ अस्पताल में आ रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/pollen-particles-dissolved-in-the-air-of-the-city--increased-problems-of-asthma-and-allergy-patients--detected-from-burcard-machine-installed-in-asthma-bhawan/article-5233</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/pollen-particles-dissolved-in-the-air-of-the-city--increased-problems-of-asthma-and-allergy-patients--detected-from-burcard-machine-installed-in-asthma-bhawan/article-5233</guid>
                <pubDate>Tue, 01 Mar 2022 14:25:56 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-03/asthma-%26-allergy.jpg"                         length="359318"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        