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                <title>छतों पर लगे अवैध होर्डिंग्स व वॉलड्रॉप से दुर्घटनाओं का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[मौसम में बदलाव से आंधी के कारण बन रहे हादसों का कारण।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/illegal-hoardings-and-wall-drops-on-rooftops-pose-a-risk-of-accidents/article-153050"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा शहर में सक्रिय हुए पश्चिमी विक्षोभ के कारण तेज हवा व आंधी से जहां लोगों को गर्मी से राहत मिली है। वहीं निजी भवनों की छतों पर लगे अवैध होर्डिंग्स व वॉल ड्रॉप लोगों के लिए खतरा भी बने हुए हैं। ये हादसों का कारण बन रहे हैं।विक्षोभ के असर से शहर में दो दिन पहले दोपहर बाद इतनी तेज आंधी व हवा के साथ बरसात हुई कि कई जगह पर होर्डिंग्स व बैनर और विज्ञापन बोर्ड छतों से उड़कर सड़क पर जा गिरे। जिससे राह चलते कई लोग चोटिल होते-होते बचे। वहीं कई जगह ऐसी हैं जहां इस तरह के विज्ञापन बोर्ड या तो आधे लटके हुए हैं या गिरने की स्थिति में हैं। जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।</p>
<p><strong>निगम ने की थी कार्रवाई</strong><br />शहर में पूर्व में अधिकतर निजी भवनों दुकानों, होटलों, मकानों पर बड़ी संख्या में अवैध रूप से होर्डिंग्स व विञ्जापन बोर्ड और भवनों की दीवारों पर वॉल ड्रॉप लगे हुए थे। जिन पर नगर निगम की ओर से कार्रवाई की गई थी। नगर निगम की तत्कालीन अधिकारी कीर्ति राठौड़ के समय में निगम के राजस्व अनुभाग के माध्यम से उन सभी अवैध होर्डिग्स व वॉल ड्रॉप को हटाया गया था। कई जगह तो गैस कटर से काटकर अवैध होर्डिग्स व बोर्ड को हटाना पड़ा था। उसके बाद तत्कालीन कांग्रेस सरकार के समय में नगर निगम ने निजी भवनों पर इस तरह से विज्ञापन बोर्ड, होर्डिग्स व वॉल ड्रॉप लगाने को अवैध घोषित कर दिया।</p>
<p><strong>हर जगह छतों पर मंडरा रहा खतरा</strong><br />हालत यह है कि वर्तमान में शहर में अधिकतर जगहों पर निजी व व्यसवायिक भवनों की छतों पर इस तरह के खतरे मंडरा रहे हैं। एरोड्राम चौराहे से छावनी चौराहे तक, सीएडी से गुमानपुरा तक, नयापुरा और नए कोटा समेत सभी जगह पर भवनों की छतों व दीवारों पर विज्ञापन बोर्ड टंगे हुए देखे जा सकते हैं। जिनसे भवन मालिक विज्ञापनों का किराया वसूल कर कमाई कर रहे हैं। वहीं ये आमजन के लिए दुर्घघटनाओं व हादसों का कारण बन रहे हैं। दो दिन पहले स्टेशन क्षेत्र में ऐसा ही एक मामला हुआ जब एक अवैध होर्डिंग्स हवा से गिर गया था। वहीं छावनी में नगर निगम के सार्वजनिक शौचालय का बोर्ड आधा लटका हुआ है। जिससे वह कभी की गिरकर हादसे का कारण बन सकता है। छावनी में ही एक भवन की छत पर तो केवल फ्रेम रह गया जबकि हवा के कारण उस पर लगा विज्ञापन फ्लेक्स फट गया।</p>
<p><strong>बरसात में अधिक खतरनाक</strong><br />जानकारों के अनुसार छतों पर लगे ये विज्ञापन बोर्ड व वॉल ड्रॉप आने वाले दिनों में बरसात के सीजन में अधिक खतरनाक साबित हो सकते हैं। बरसात के सीजन में रोजाना आंधी तूफान और हवा के साथ तेज बरसात होती है। जिसमें इन बोर्ड के उड़कर बीच सड़क पर गिरने का खतरा बना हुआ है। जिससे कभी भी राहगीरों के लिए दुर्घटना का कारण बन सकते है।सूत्रों के अनुसार नगर निगम की ओर से गत दिनों करीब एक दर्जन बड़े मॉल व प्रतिष्ठानों को इस संबंध में नोटिस भी जारी किए गए हैं।</p>
<p><strong>बिजली का खम्बा हुआ टेड़ा</strong><br />दो दिन पहले की तेज आंधी व बारिश से जहां पुराने पेड़ व होर्डिंग्स टूटकर गिरे। वहीं डीसीएम रोड स्थित संजय नगर आरओबी पर लगे बिजली के खम्बों में से बीच का एक खम्बा भी टेढ़ा हो गया है। दो दिन से वह इस स्थिति में है कि कभी भी गिर सकता है। जिससे वहां से गुजरने वाले वाहन चालकों के लिए यह खतरा बन सकता है। इस खम्बे के साथ ही बिजली के तार भी टूटकर बीच राह में गिरने से करंट भी फेला सकते हैं।<br />इस बारे में कोटा विकास प्राधिकरण के अधिशाषी अभियंता(विद्युत) ललित कुमार मीणा ने बताया कि उनकी जानकारी में आया है कि किसी वाहन की टक्कर से यह खम्बा झुक गया है। उसे काटकर हटाने व उसके बाद नया खम्बा लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इसे सही करवा दिया जाएगा।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />निजी भवनों की छतों पर लगे विज्ञापन होर्डिग्स, साइनबोर्ड व वॉल ड्रॉप को नगर निगम ने अवैध व प्रतिबंधित घोषित किया हुआ है। इनसे दुर्घटना व जन हानि होने का खतरा है। शहर में कहीं भवनों की छतों पर व दीवारों पर इस तरह के विज्ञापन लगे हुए हैं तो उन्हें हटवाने व भवन मालिकों को नोटिस देने की कार्रवाई की जाएगी।<br /><strong>- ओम प्रकाश मेहरा, आयुक्तनगर निगम कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 17:50:32 +0530</pubDate>
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                <title>कांग्रेस शासन में बने बोर्डस को फिलहाल कोई बजट प्रावधान नहीं, विधानसभा में बोले अविनाश गहलोत</title>
                                    <description><![CDATA[प्रश्न के जवाब में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने आचार संहिता के 6 महीने पहले कई बोर्ड की घोषणा की। वर्तमान में हमारी सरकार इन पर नीतिगत निर्णय करेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/at-present-there-is-no-budget-provision-to-the-boards/article-108166"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/6622-copy160.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान विधानसभा में प्रदेश में गठित बोर्ड के संचालन के लिए बजट के आवंटन का मुद्दा उठा। कांग्रेस विधायक सीएल प्रेमी ने मामला उठाते हुए प्रदेश में गठित बॉर्डर के संचालन के लिए बजट के आवंटन को लेकर मांग उठाई। </p>
<p>प्रश्न के जवाब में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने आचार संहिता के 6 महीने पहले कई बोर्ड की घोषणा की। वर्तमान में हमारी सरकार इन पर नीतिगत निर्णय करेगी। अभी बजट आवंटन को लेकर कोई भी प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 21 Mar 2025 14:02:19 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>स्वायत्तशासी संस्थाओं, निगमों, बोर्डों, विश्वविद्यालयों के कर्मचारियों और पेंशनधारकों ऑनलाइन होगा वेतन का भुगतान</title>
                                    <description><![CDATA[ राज्य के विभिन्न स्वायत्तशासी संस्थाओं, निगमों, बोर्डों, विश्वविद्यालयों, आदि के कर्मचारियों और पेंशनधारकों का वेतन, पेंशन, और अन्य वित्तीय लाभ पे-मैनेजर से ऑनलाइन भुगतान किया जाएगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p>जयपुर। राज्य के विभिन्न स्वायत्तशासी संस्थाओं, निगमों, बोर्डों, विश्वविद्यालयों, आदि के कर्मचारियों और पेंशनधारकों का वेतन, पेंशन, और अन्य वित्तीय लाभ पे-मैनेजर से ऑनलाइन भुगतान किया जाएगा। इस प्रक्रिया के तहत, संबंधित संस्थाएं अब तक मैन्युअल तरीके से भुगतान कर रही थीं, जिससे देरी और त्रुटियों की संभावना थी।</p>
<p>वित्त विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार सभी वेतन और पेंशन भुगतान प्रत्येक माह की पहली तारीख को या उससे पहले किए जाएंगे। सभी भुगतान सीधे पे मैनेजर के माध्यम से पी.डी. खाते में जमा होंगे, जिससे सीधे बैंक खाते में स्थानांतरण की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी। यह कदम राज्य सरकार के डिजिटल और पारदर्शी वित्तीय प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। इसके अतिरिक्त रुड़सीको और अन्य वित्तीय संस्थाओं के तहत कार्यरत कर्मचारी और पेंशनधारक भी इस ऑनलाइन भुगतान प्रणाली का हिस्सा होंगे। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि किसी भी तकनीकी समस्या के समाधान के लिए पे मैनेजर हेल्प डेस्क से संपर्क किया जा सकता है। विभागीय सचिवों और संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे इस नई प्रणाली का पालन सुनिश्चित करें और इसके कार्यान्वयन के लिए आवश्यक कदम उठाएं। नई प्रणाली के तहत, वित्तीय लेनदेन में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित की जाएगी, जिससे राज्य के वित्तीय प्रबंधन में सुधार होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/salaries-of-employees-and-pensioners-of-autonomous-bodies-corporations-boards/article-84805</link>
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                <pubDate>Mon, 15 Jul 2024 20:14:19 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सत्ता पक्ष के पार्षद ही निभा रहे विपक्ष की भूमिका</title>
                                    <description><![CDATA[पार्षदों का कहना है कि धरना देने के बाद 18 जुलाई को बोर्ड बैठक बुलाने पर सहमति बनी है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/councilors-of-the-ruling-party-are-playing-the-role-of-opposition/article-82911"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/satta-paksh-k-parshad-hi-nibha-rhe-vipaksh-ki-bhumika...kota-news-27-06-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण में बोर्ड तो कांग्रेस के हैं। लेकिन कांग्रेस के पार्षद ही विपक्ष की भूमिका भी निभा रहे हैं। बोर्ड बैठक बुलाने समेत अन्य मुद्दों को लेकर पहले कोटा उत्तर के और अब कोटा दक्षिण के कांग्रेस पार्षदों को धरना देना पड़ा। नगर निगम कोटा उत्तर मं 70 वार्ड हैं और दक्षिण निगम में 80 वार्ड हैं। दोनों निगमों में नवम्बर 2020 में हुए चुनाव में कांग्रेस का बहुमत होने से उन्हीं के महापौर व उप महापौर निर्वाचित हुए। जबकि भाजपा विपक्ष में है। कोटा उत्तर में भाजपा के लव शर्मा को और कोटा दक्षिण में विवेक राजवंशी को नेता प्रतिपक्ष मनोनीत किया गया है। लेकिन हालत यह है कि दोनों निगमों में विपक्ष की ओर से कोई बड़ा आंदोलन नहीं किया गया। जबकि दोनों निगमों में पिछले काफी समय से कांग्रेस के पार्षद ही आंदोलन कर रहे हैं। नगर निगम कोटा दक्षिण के कांग्रेस पार्षदों ने एक दिन पहले ही बोर्ड बैठक बुलाने की मांग को लेकर महापौर कक्ष में धरना दिया था। गौरतलब है कि कोटा दक्षिण निगम में बोर्ड बैठक हुए सवा साल से भी अधिक का समय हो गया। जबकि नगर पालिका अधिनियम 2009 के तहत हर तीन माह में एक बोर्ड बैठक होना आवश्यक है। </p>
<p><strong>कोटा उत्तर उप महापौर ने दिया था धरना</strong><br />गत दिनों नगर निगम कोटा उत्तर के उप महापौर फरीदुद्दीन सोनूृ कुरैशी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्षदों ने आयुक्त कक्ष के बाहर धरना दिया था। दोपहर 3 बजे से रात 10 बजे तक धरना चला था। इनकी मांग थी कि कोटा उत्तर में बोर्ड बैठक बुलाई जाए। जनता की समस्याओं का समाधान किया जाए। पार्षदों का आरोप था कि अधिकारी पार्षदों की सुनवाई नहीं कर रहे हैं। उप महापौर को वाहन तक नहीं देने पर वे नाराजगी जता चुके हैं। हालांकि यहां अधिकारियों ने 18 जुलाई को बोर्ड बैठक बुुलाने का आश्वासन दिया था। जिस पर पार्षदों ने सहमति जताई है। उससे पहले भी उप महापौर रोड लाइटें चालू करने समेत कई मामलों को लेकर आयुक्त को पत्र लिख चुके हैं।</p>
<p><strong>दोनों निगमों में एक दिन कैसे होगी बोर्ड बैठक</strong><br />कोटा उत्तर व कोटा दक्षिण में अधिकारियों व पार्षदों में 18 जुुलाई को ही बोर्ड बैठक बुलाने पर सहमति बनी है। जबकि बोर्ड बैठक के लिए निगम का एक ही सभागार है। एक दिन में दोनों निगमों की बोर्ड बैठक एक साथ नहीं हो सकती। बोर्ड बैठक बुलाने के लिए एजेंडा तय करना होगा। साथ ही पार्षदों को एक सप्ताह पहले सूचना देनी होगी। विधानसभा व लोकसभा की कार्यवाही होगी शुरु: इधर जुलाई में विधानसभा व लोकसभा की कार्यवाही शुरु होने वाली है। ऐसे में उस समयावधि में बोर्ड की बैठक किया जाना संभव नहीं होगा। 3 जुलाई से विधानसभा का सत्र शुरू होने वाला है। </p>
<p><strong>पहले दिया कलक्टर को ज्ञापन अब धरना</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण के कांग्रेस पार्षदों द्वारा पहले अतिरिक्त जिला कलक्टर को ज्ञापन दिया गया। उसके बाद अगले दिन जिला कलक्टर को जन सुनवाई में जाकर शिकायत करनी पड़ी थी। उप महापौर पवन मीणा के नेतृत्व में कांग्रेस पार्षद बोर्ड बैठक बुलाने व अधिकारियों द्वारा उनके साथ निर्माण व विकास कार्यों में भेदभाव करने का आरोप लगा चुके हैं। हालत यह है कि फिर भी सुनवाई नहीं हुई तो पार्षदों को धरना देना पड़ा।  कांग्रेस पार्षदों का कहना है कि ज्ञापन व जन सुनवाई के बाद भी काम नहीं होने पर धरना देने को मजबूर होना पड़ा। पार्षदों का कहना है कि धरना देने के बाद 18 जुलाई को बोर्ड बैठक बुलाने पर सहमति बनी है। </p>
<p>बोर्ड बैठक बुलाने के लिए आयुक्त व महापौर को कई बार व्यक्तिगत रूप से मिलकर ज्ञापन दिया जा चुका है। नालों की सफाई से लेकर कई मुद्दों पर समय-समय पर  विपक्ष    द्वारा अधिकारियों को चेताया गया है। अब कांग्रेस पार्षदों को अपने ही बोर्ड  में धरना देना पड़ रहा है। जब कांग्रेस की सरकार थी तो विपक्ष चिल्ला रहा था उस समय इन्होंने कोई सुनवाई नहीं थी। अब धरना देना श्रेय लेने का खेल है।<br /><strong>- लव शर्मा, नेता प्रतिपक्ष नगर निगम कोटा उत्तर</strong></p>
<p>विपक्ष में रहते हुए नेता प्रतिपक्ष के तौर पर आयुक्त व महापौर को चार पत्र लिखे चुके हैं। बोर्ड बैठक बुलाने के लिए। कांग्रेस के महापौर थे उस समय कांग्रेस पार्षदों ने धरना क्यों नहीं दिया। अब श्रेय लेने व प्रचार के लिए धरना दिया जा रहा है। बोर्ड बैठक बुलाने का अधिकार महापौर को है आयुक्त को नहीं। <br /><strong>- विवेक राजवंशी, नेता प्रतिपक्ष, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>
<p>बोर्ड बैठक बुलाने के लिए पूर्व में कई बार यू ओ नोट लिखे जा चुके हैं। अधिकारी पालना रिपोर्ट ही नहीं दे रहे। पूर्व की बोर्ड बैठक के निर्णयों  की पालना के बिना अगली बोर्ड बैठक करने का कोई मतलब नहीं है। अधिकारियों ने बोर्ड बैठक की फाइल भेजी हो और मैने मना किया हो तो बताएं। अभी भी अधिकारी तारीख तय कर दें या तारीख के बारे में राय मांगेंगे तो सहमति दी जाएगी। <br /><strong>- राजीव अग्रवाल, महापौर, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>
<p> कोटा उत्तर में बोर्ड बैठकें हो रही है। पिछले साल दशहरा मेले से पहले भी बोर्ड बैठक हुई थी। इस साल फरवरी में बजट की भी बोर्ड बैठक हो चुकी है। अभी विधानसभा व लोकसभा  चुनाव की आचार सहिता के कारण देरी हुई है। अब विधानसभा व लोकसभा की कार्यवाही को देखते हुए उसके हिसाब से बोर्ड बैठक की तारीख तय की जाएगी। <br /><strong>- मंजू मेहरा, महापौर. नगर निगम कोटा उत्तर </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Jun 2024 15:28:59 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अब कचरा दिखाई दे तो फोन लगाएं </title>
                                    <description><![CDATA[कामयाब कोटा अभियान के तहत दोनों नगर निगमों में जन स्वास्थ्य अनुभाग को अलग से जिम्मेदारी दी गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/now-if-you-see-garbage-then-call/article-70297"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/transfer-(3)10.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। जहां भी कचरा दिखाई देवे हमें बताएं, हम 6 घंटे में उठवाएंगे। इस तरह का संदेश लिखे बोर्ड शहर में जगह-जगह पर दिखाई देने लगे हैं। ऐसा कामयाब कोटा अभियान के तहत नगर निगम कोटा उत्तर व कोटा दक्षिण द्वारा किया जा रहा है। दोनों निगमों की ओर से अपने-अपने क्षेत्रों में साफ सफाई संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए हैल्प लाइन नम्बर जारी किए हैं। रा’य में भाजपा सरकार बनने के बाद से ही शहर में साफ सलाई पर विशेष फोकस किया जा रहा है। जिसके तहत न केवल शहर की सड़कों व मुख्य मार्गों को वरन् सरकारी कार्यालयों तक को साफ करने का अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत शहर में संभागीय आयुक्त, कलक्ट्रेट और नगर निगम समेत कई अन्य सरकारी कार्यालयों में अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा सफाई अभियान चलाया जा चुका है। शहर में नगर निगम कार्यालय के आस-पास, नगर विकास न्यास कार्यालय समेत ऐसे स्थान जहां आमजन का आवागमन अधिक रहता है। वहां हैल्प लाइन नम्बरों के बोर्ड लगाए गए हैं।</p>
<p><strong>जन स्वास्थ्य की टीम को दी जिम्मेदारी</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण की ओर से वैसे तो शहर में सामान्य तौर पर स्थायी व अस्थायी कर्मचारियों के माध्यम से साफ सफाई का कार्य कराया जा रहा है। वहीं कामयाब कोटा अभियान के तहत दोनों नगर निगमों में जन स्वास्थ्य अनुभाग को अलग से जिम्मेदारी दी गई है। जिसमें आमजन द्वारा हैल्प लाइन नम्बर के माध्यम से गंदगी संबंधित कोई भी सूचना दी जाती है तो उसे रजिस्टर में दर्ज किया जा रहा है। साथ ही इसके लिए अलग से टीम गठित की गई है। टीम के सदस्य उस संबंधित जगह पर जाकर साफ सफाई करते हैं और वापस आकर सूचना देते हैं।</p>
<p><strong>उत्तर में हर सेक्टर में एक टीम, दक्षिण में 10 कर्मचारी</strong><br />इस अभियान के तहत आने वाली सूचनाओं के निस्तारण के लिए नगर निगम कोटा दक्षिण में जहां 10 सफाई कर्मचारियों की टीम गठित की गई है। वहीं कोटा उत्तर क्षेत्र में हर सेक्टर में एक टीम बनाई गई है। जिसमें 5-5 लेबर को शामिल किया गया है। </p>
<p><strong>ये हैं हैल्प लाइन नम्बर</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर क्षेत्र में साफ सफाई संबंधित सूचना के लिए हैल्प लाइन नम्बर 0744-2503611 जारी किया गया है। जबकि कोटा दक्षिण निगम में इसी तरह की सूचना के लिए हैल्प लाइन नम्बर 0744 250 5787 जारी किया गया है। </p>
<p>नगर निगम कोटा दक्षिण क्षेत्र में कामयाब कोटा अभियान के तहत कई दिन से साफ सफाई संबंधी शिकायतों का निस्तारण किया जा रहा है। अब अधिक से अधिक लोगों तक इस तरह की सूचना पहुंचाने के लिए हैल्प लाइन नम्बर जारी किए हैं। जिससे सूचना मिलते ही 6 घंटे में सफाई के लिए टीम पहुंच रही है। दक्षिण क्षेत्र में इसके लिए अलग से रजिस्टर रखा हुआ है। अब तक करीब 110 शिकायतों का निस्तारण किया जा चुका है। <br /><strong>- सरिता सिंह, आयुक्त नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>
<p>कोटा उत्तर क्षेत्र में अभियान के तहत हर सेक्टर पर एक टीम गठित की है। हैल्प लाइन नम्बर पर सूचना मिलते ही संबंधित सेक्टर की टीम को अवगत करवा दिया जाता है। जिससे गंदगी संबंधी समस्या का 6 घंटे के भीतर निस्तारण किया जा रहा है। आने वाले समय में हर टीम को एक टिपर भी उपलब्ध कराया जाएगा। अब आमजन को इस बारे में जानकारी देने के लिए हैल्प लाइन नम्बर जारी किए हैं। <br /><strong>- तनुज शर्मा, स्वास्थ्य अधिकारी नगर निगम कोटा उत्तर </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 16 Feb 2024 18:41:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नई सरकार ने बोर्ड, निगम और आयोगों में सभी राजनीतिक नियुक्तियां समाप्त कीं</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान में भजनलाल सरकार ने पूर्ववर्ती सरकार के समय बोर्ड-निगम और आयोगों में की राजनीतिक नियुक्तियों को समाप्त कर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-new-government-ended-all-political-appointments-in-boards-corporations/article-64416"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/cm-bhajan-lal-lharma.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में भजनलाल सरकार ने पूर्ववर्ती सरकार के समय बोर्ड-निगम और आयोगों में की राजनीतिक नियुक्तियों को समाप्त कर दिया है। प्रशासनिक सुधार विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। अब इन पदों पर नई सरकार नियुक्तियां करेगी। </p>
<p>विभाग की संयुक्त शासन सचिव मुन्नी मीना के जारी आदेश में बताया गया है कि विभिन्न विभागों में राज्य स्तरीय और जिला स्तरीय समितियां, आयोग, बोर्ड, निगम और टास्क फोर्स में जो गैर सरकारी अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य मनोनीत किए गए हैं, राज्य सरकार उन मनोनयन को तुंरत प्रभाव से समाप्त करने का निर्णय लेती है। इसके साथ ही जिन विभागों में गैर सरकारी सदस्यों की सलाहकारी सेवाएं ली जा रही हैं, उन्हें भी समाप्त करने का फैसला लिया गया है। आदेश में सभी विभागों के एसीएस, प्रमुख सचिव और सचिवों को अपने-अपने विभागों में किए मनोनयन और सलाहकार के रूप में गैर सरकारी सदस्यों की सेवाओं को समाप्त करने के आदेश जारी करके रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय भिजवाने के निर्देश दिए हैं।<br /> </p>
<p>साथ ही ऐसे प्रकरण जिनमें वैधानिक दृष्टि से निरस्त किया जाना संभव नहीं है, उनकी पत्रावली भी सीएमओ भिजवाने के लिए निर्देशित किया गया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Dec 2023 10:53:28 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title> बोर्ड एवं निगमों में की गईं अध्यक्षों की नियुक्ति के बाद मंत्री स्तर का दर्जा </title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व में राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके  चंद्रभान, श्री ब्रजकिशोर शर्मा एवं पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी को कैबिनेट मंत्री तथा अन्य सभी अध्यक्षों को राज्यमंत्री का दर्जा दिया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/state-government-has-given-them-ministerial-status-after-the-appointment-of-chairpersons-in-boards-and-corporations/article-5236"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/ram.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। तीन साल के लंबे इंतजार के बाद गहलोत सरकार की ओर से 122 नेताओं को राजनीति नियुक्ति देने के बाद राज्य सरकार ने बोर्ड एवं निगमों में की गईं अध्यक्षों की नियुक्ति के बाद इन्हें मंत्री स्तर का दर्जा दिया है। पूर्व में राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके  चंद्रभान, श्री ब्रजकिशोर शर्मा एवं पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी को कैबिनेट मंत्री तथा अन्य सभी अध्यक्षों को राज्यमंत्री का दर्जा दिया जाएगा।<br /><br />गहलोत ने पहले 44 बोर्ड निगमों और आयोगों में 58 नेताओं को राजनीतिक नियुक्तियां देकर चेयरमैन और उपाध्यक्ष बनाया था। इसके बाद सोमवार को 64 नेताओं को और नियुक्ति दी गई है। इसके बाद से बोर्ड-निगम आयोगों के चेयरमैन और उपाध्यक्षों को राज्य मंत्री या कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिलेगा या नहीं इसे लेकर संशय बना हुआ था। <br /><br /><strong>विधायको के कारण अटका हुआ था मामला</strong><br />दरअसल बोर्ड-निगमों और आयोगों को अभी तक भी मंत्री का दर्जा नहीं दिए जाने के पीछे एक वजह यह भी सामने आ रही है कि गहलोत सरकार ने जिन 58 नेताओं को चेयरमैन और उपाध्यक्ष बनाया है उनमें से 12 विधायक भी शामिल हैं ऐसे में लाभ के पद के चलते बोर्ड-निगमों और आयोगों में चेयरमैन बनाए गए विधायकों को मंत्री का दर्जा दिया जाए या नहीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Mar 2022 14:38:23 +0530</pubDate>
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