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                <title>restructuring - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>सीएम सतीशन ने पेश किया संशोधित बजट, 'मिशन समुद्र' और वित्तीय सुदृढ़ीकरण से बनेगा 'नया केरल'</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने केरल का संशोधित बजट पेश किया। इसमें ₹400 करोड़ की 'मिशन समुद्र' योजना मुख्य आकर्षण है, जो तटीय विकास और विझिनजम में जहाज निर्माण को बढ़ावा देगी। आर्थिक चुनौतियों के बीच बजट में 'इंदिरा गारंटी' वादों को पूरा करने और वित्तीय सुदृढ़ीकरण पर जोर दिया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/cm-satheesan-presented-the-revised-budget-announced-mission-samudra-put/article-157425"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/vd-satishanan.png" alt=""></a><br /><p>तिरुवनंतपुरम। केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने शुक्रवार को विधानसभा में वर्ष 2026-27 के लिए संशोधित बजट पेश किया। इसमें संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार ने अवसरंचना के विकास, वित्तीय सुदृढ़ीकरण और जन-कल्याणकारी योजनाओं के विस्तार के जरिए एक 'नये केरल' के निर्माण की रूपरेखा सामने रखी है। वित्त मंत्रालय का कार्यभार भी संभाल रहे सतीशन द्वारा पेश इस बजट की मुख्य विशेषता 'मिशन समुद्र' की घोषणा रही। यह एक महत्वाकांक्षी समुद्री विकास कार्यक्रम है, जिसके लिए 400 करोड़ रुपये की राशि तय की गयी है। इस योजना का उद्देश्य केरल के समुद्र तट, बंदरगाहों और आंतरिक जलमार्गों को आपस में जोड़ना है, ताकि सड़क, समुद्र और जल परिवहन का एक सुगम और एकीकृत तंत्र बनाया जा सके।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना का लक्ष्य केरल को एक बड़ा समुद्री केंद्र बनाना है। इसके तहत विझिनजम में जहाज निर्माण की सुविधा भी स्थापित की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस पहल से रोजगार के नये अवसर मिलेंगे और तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की आजीविका बेहतर होगी। इस समुद्री कार्ययोजना के तहत सरकार कोल्लम, बेपोर और अझिक्कल बंदरगाहों का आधुनिकीकरण करेगी, एक व्यापक समुद्री नीति तैयार करेगी और एक समुद्री संग्रहालय स्थापित करेगी, जिसके लिए 50 करोड़ रुपये सुरक्षित रखे गये हैं।</p>
<p>संशोधित बजट पेश करते हुए सतीशन ने कहा कि सरकार सुशासन और संवेदनशीलता के सिद्धांतों पर आधारित 'नये केरल' के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि बुनियादी ढांचे के विकास और सामाजिक कल्याण के काम साथ-साथ आगे बढ़ सकें। चूंकि पिछली वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (एलडीएफ) की सरकार चालू वित्त वर्ष के लिए पूर्ण बजट पहले ही पारित कर चुकी थी, इसलिए नयी चुनी गयी सरकार ने अपनी नीतिगत प्राथमिकताओं को दर्शाते हुए यह संशोधित बजट पेश किया है।</p>
<p>इस बजट को पेश करने के साथ ही सीएम सतीशन, आर. शंकर और ओमान चांडी के बाद राज्य का बजट खुद पेश करने वाले केरल के तीसरे मुख्यमंत्री बन गये हैं। यह बजट सरकार द्वारा राज्य की वित्तीय स्थिति पर एक श्वेत पत्र जारी करने के ठीक दो सप्ताह बाद आया है। केरल की वित्तीय स्थिति को बेहद चिंताजनक बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र से मिलने वाली राशि में 20,500 करोड़ रुपये की कमी आयी है, जबकि आगामी वेतन संशोधन से कर्ज का बोझ और बढ़ जाएगा।</p>
<p>सीएम सतीशन ने कहा कि इन आर्थिक चुनौतियों के बावजूद सरकार ने 'इंदिरा गारंटी' के कई वादों को पूरा कर दिया है, जिसमें राज्य परिवहन निगम की बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में वृद्धि शामिल है। बजट में राज्य की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए केरल अवसंरचना निवेश कोष बोर्ड (किफबी) के पुनर्गठन, अतिरिक्त वित्तीय संसाधन जुटाने, कर चोरी रोकने, बकाया राशि वसूलने और खर्चों को नियंत्रित करने को प्राथमिकता दी गयी है। मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि सरकार केरल के भीतर ही उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए व्यापक कार्यक्रम शुरू करेगी, ताकि उन कुशल युवाओं को राज्य में ही रोका जा सके जो नौकरियों के लिए विदेशों की ओर रुख करते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 15:07:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>क्या विपक्ष को फिर एकजुट करेंगी ममता? राहुल से मुलाकात के बाद तेज हुई अटकलें ; बढ़ी सियासी हलचल, 6 जून को होगी भविष्य की रणनीति तय</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु चुनाव में हार के बाद विपक्षी खेमे को एकजुट करने के लिए 6 जून को 'INDIA' गठबंधन की बैठक होगी। राहुल गांधी से लंबी बातचीत के बाद तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के इसमें शामिल होने की संभावना है। बैठक में भाजपा विरोधी दलों की एकजुटता और भविष्य की रणनीति तय की जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/will-mamata-unite-the-opposition-again-speculations-intensified-after-meeting/article-155486"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/rahul1.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के छह जून को होने वाली 'इंडिया' गठबंधन की बैठक में शामिल होने की संभावना है। इसे एक बेहद महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम की तरह देखा जा रहा है। देश के बदलते राजनीतिक माहौल के बीच बनर्जी के इस अहम बैठक में शामिल हो सकने की सूचना तब सामने आई, जब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को बनर्जी से आधे घंटे से भी अधिक समय तक बातचीत की। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, चुनावी मोर्चे पर गठबंधन के कई मुख्य सहयोगियों को मिली लगातार हार के बाद विपक्षी खेमे की रणनीति निशाने पर है। ऐसे माहौल में ममता बनर्जी का इस बैठक में जाना सियासत के लिहाज से काफी मायने रखता है।</p>
<p>हालिया विधानसभा चुनावों में मिले निराशाजनक नतीजों के बाद गठबंधन के भविष्य की रणनीति तय करने के लिए इस बैठक को बेहद जरूरी माना जा रहा है। इसकी अहम वजह यह है कि हाल ही में आये चुनावी नतीजों ने देश के कई राज्यों में विपक्षी खेमे को पूरी तरह से झकझोर कर रख दिया है। खेमे के दो बड़े दलों को हार मिली है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को शिकस्त का सामना करना पड़ा और द्रमुक तमिलनाडु में सत्ता बचाने में नाकाम रही है।</p>
<p>राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि छह जून की बैठक का ध्यान न सिर्फ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का मुकाबला करने की रणनीति पर होगा, बल्कि बदले हुए राजनीतिक परिदृश्य में गठबंधन के सहयोगियों के राजनीतिक वजूद और उनकी प्रासंगिकता को बचाये रखने के तौर-तरीकों पर भी रहेगा। ममता बनर्जी के शामिल होने की संभावना ने इस बैठक की अहमियत को और बढ़ा दिया है, क्योंकि कई लोग उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में देख रहे हैं, जो विपक्षी राजनीति में एक बार फिर निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के लिए इस बैठक को उनके नेतृत्व की कड़ी परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि वे एक ऐसे समय में विपक्षी गठबंधन को एकजुट रखने की कोशिश कर रहे हैं, जब इसकी एकजुटता और भविष्य पर सवाल उठ रहे हैं।</p>
<p>तमिलनाडु के सियासी घटनाक्रमों की वजह से भी 'इंडिया' गठबंधन की स्थिरता को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गयी हैं। हालांकि कांग्रेस और द्रमुक ने मिलकर चुनाव लड़ा था, लेकिन ख़बरों के मुताबिक चुनावी नतीजों के बाद दोनों पार्टियों के रिश्तों में कड़वाहट आ गयी है, क्योंकि कांग्रेस कथित तौर पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलापति विजय की पार्टी टीवीके के करीब जा रही है। इस बढ़ते तनाव ने इन अटकलों को हवा दे दी है कि द्रमुक गठबंधन के साथ अपने जुड़ाव पर दोबारा विचार कर सकती है।</p>
<p>इसी तरह केरल में वामपंथियों के हाथ से सत्ता जाने के बाद राजनीतिक विश्लेषक माकपा नेतृत्व के रुख पर भी पैनी नजर रख रहे हैं। यह पार्टी 'इंडिया' गठबंधन के भीतर सक्रिय रूप से जुड़ी रहेगी या नहीं, इस बात पर भी बैठक में चर्चा होने की उम्मीद है। इस पूरे ताने-बाने के बीच छह जून की यह बैठक काफी ज्यादा अहमियत रखती है, क्योंकि इसमें होने वाले मंथन से भाजपा विरोधी दलों की भावी दिशा और उनकी एकजुटता की एक साफ तस्वीर सामने आने की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 18:41:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दिल्ली संगठन में बड़ा फेरबदल: हर्ष मल्होत्रा बने नए प्रदेश अध्यक्ष, चार राज्यों में प्रदेश अध्यक्षों के नामों का ऐलान</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली भाजपा संगठन में बड़ा प्रशासनिक बदलाव। पार्टी आलाकमान ने वीरेंद्र सचदेवा की जगह केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा को नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया । आगामी चुनावों और दिल्ली-पंजाब के रणनीतिक सामाजिक समीकरणों को देखते हुए इस नियुक्ति को बेहद अहम माना जा रहा ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/major-reshuffle-in-delhi-organization-harsh-malhotra-becomes-the-new/article-155243"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/harsh-malhotra.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। दिल्ली संगठन में बड़ा फेरबदल हुआ है और अब दिल्ली भाजपा को नया प्रदेश अध्यक्ष मिल गया है। इस पद के लिए दिल्ली सरकार ने केंद्रीय राज्‍य मंत्री हर्ष मल्होत्रा को कमान सौंपी है। रिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले इस पद की जिम्मेदारी वीरेंद्र सचदेवा के पास थी। राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को माहौल गर्मी है और ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि पार्टी आलाकमान नए प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव के लिए अगले साल प्रस्तावित पंजाब विधानसभा चुनाव को भी प्रमुख आधार बनाने पर विचार कर रही थी। पंजाब और दिल्ली के सामाजिक समीकरणों के मध्यनजर उनके नाम को रणनीतिक दृष्टि से भी काफी अहम माना जा रहा है।</p>
<p>भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने गुरुवार को दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और त्रिपुरा के नये अध्यक्षों की घोषणा करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा को पार्टी की दिल्ली इकाई का अध्यक्ष नियुक्त किया है। वहीं, डॉ. अर्चना गुप्ता को पार्टी की हरियाणा इकाई की जिम्मेदारी सौंपी है। इसके साथ ही भाजपा ने केवल सिंह ढिल्लों को पार्टी की पंजाब इकाई का अध्यक्ष बनाया है और अभिषेक देबरॉय को त्रिपुरा प्रदेश भाजपा का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह ने गुरुवार को विज्ञप्ति जारी कर बताया कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरुण सिंह ने मल्होत्रा को दिल्ली, डॉ. गुप्ता को हरियाणा, ढिल्लों को पंजाब और देबरॉय को त्रिपुरा प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष नियुक्त किया है। ये नियुक्तियां तत्काल रूप से प्रभावी होंगी।</p>
<p>मल्होत्रा मौजूदा समय में कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय में राज्य मंत्री हैं। उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार के रूप में पूर्वी दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की थी। वह वर्ष 2015 से 2016 के दौरान पूर्वी दिल्ली नगर निगम के महापौर भी रह चुके हैं। पार्षद रहते हुए उन्होंने सरकारी स्कूलों में कुपोषण के खिलाफ सफल अभियान चलाया था। मल्होत्रा वीरेंद्र सचदेवा की जगह दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष बने हैं। मोहन लाल बड़ौली के स्थान पर हरियाणा भाजपा की अध्यक्ष बनीं डॉ. गुप्ता इससे पहले हरियाणा प्रदेश भाजपा की महामंत्री के रूप में कार्य कर रही थीं। इसके अलावा वह पानीपत जिले की जिलाध्यक्ष भी रह चुकी हैं। वह पेशे से एक डॉक्टर हैं और रेडियोलॉजी में गोल्ड मेडल हासिल कर चुकी हैं।</p>
<p>पंजाब प्रदेश भाजपा के नये अध्यक्ष ढिल्लों पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के बेहद करीबी माने जाते हैं। ढिल्लों भाजपा में शामिल होने से पहले लंबे समय तक कांग्रेस में रह चुके हैं तथा पंजाब प्रदेश कांग्रेस समिति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। वह साल 2007 से 2017 तक बरनाला विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर लगातार दो बार विधायक निर्वाचित हुए। श्री ढिल्लों ने जून 2022 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था। त्रिपुरा भाजपा के नये अध्यक्ष देबरॉय पहली बार 2023 में गोमती जिले के मटरबारी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर विधायक बने थे। उन्होंने कर्नाटक के राजीव गांधी स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय 2020 में फार्मेसी में स्नातक की उपाधि प्राप्त की थी। वहीं भाजपा के गोमती जिला के अध्यक्ष भी रह चुके हैं और जनता के बीच उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। देबरॉय (44) बूथ स्तर पर रणनीति बनाने के लिए जाने जाते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Thu, 28 May 2026 13:22:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title> एनसीआर का नए सिरे से पुनर्गठन, राजस्थान का 7000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र बाहर</title>
                                    <description><![CDATA[आरपी-2041 को मार्च 2022 तक अंतिम रूप दिया जाएगा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/restructuring-of-ncr--7000-sq-km-area-out-of-rajasthan--world-s-most-populous-region-by-2030--territories-of-other-states-also-outside/article-5299"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/ncr.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) का नए सिरे से पुनर्गठन लगभग फाइनल हो गया है, मार्च में इसे अंतिम रूप दिया जाएगा। नए मापदण्डों के आधार पर पुनर्गठन से राजस्थान का करीब 7000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र एनसीआर से बाहर हो गया है, अब केवल करीब 6000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र ही एनसीआर में रह सकेगा।</p>
<p><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>आरपी-2041 को मार्च 2022 तक अंतिम रूप दिया जाएगा</strong></span><br />दरअसल, दिल्ली के केन्द्र बिन्दु से 100 किलोमीटर की परिधि में क्षेत्र रखा गया है। इसके चलते भरतपुर और अलवर के क्षेत्र इस दायरे से बाहर आ रहे है, जबकि इनके कुछ क्षेत्रों के तो वर्ष 2020 में सब रीजन प्लान भी तैयार किए गए है। इस परिधि में किसी तहसील का 50 प्रतिशत या इससे अधिक क्षेत्र आता है तो उस तहसील का पूरा क्षेत्र एनसीआर में शामिल रहेगा। एनसीआर में बढ़ते शहरीकरण के साथ यह क्षेत्र 2030 तक दुनिया का सबसे बड़ी आबादी वाला क्षेत्र बनने जा रहा है। एनसीआर के मौजूदा क्षेत्र के जिन शहरी क्षेत्रों में मास्टर प्लान बन चुके है, वे इलाके भी एनसीआर में शामिल होंगे। ऐसे नेशनल राजमार्ग और राज्य राजमार्ग जो वर्तमान में जितनी लंबाई तक क्षेत्र में शामिल है, इन राजमार्गों उस लंबाई तक दोनों तरफ एक-एक किलोमीटर का इलाका भी शामिल किया जाएगा। यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने केन्द्र के समक्ष अनुरोध करते हुए कहा था कि एनसीआर में शामिल राजस्थान के अलवर व भरतपुर जिलों को पूरी तरह से शामिल रखा जाए।</p>
<p><br /><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>क्षेत्रीय योजना-2041 का प्रारूप तैयार</strong></span><br />बोर्ड ने कुछ संशोधनों के साथ मसौदा क्षेत्रीय योजना-2041 का प्रारूप तैयार किया। इस प्रारूप पर राज्यों से आपत्ति व सुझाव मांगे गए थे। आरपी-2041 को मार्च 2022 तक अंतिम रूप दिया जाएगा। केन्द्र का मानना है कि एनसीआर में बढ़ते शहरीकरण के साथ यह क्षेत्र 2030 तक दुनिया का सबसे बड़ी आबादी वाला क्षेत्र बनने जा रहा है, जो इस क्षेत्र के भविष्य के लिए बड़ी चुनौती उत्पन्न करेगा। आरपी-2041 के मसौदे में जनसंख्या अनुमान को लेकर राज्यों पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है। राज्य अगले बीस वर्षों के लिए अपने अनुमानों और उनके बुनियादी ढ़ांचे और अन्य विकास आवश्यकताओं के अनुसार आंकड़े ले सकते है।</p>
<p><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>ग्रामीण क्षेत्र में उद्योगों को फायदा</strong></span><br />एनसीआर से जिन क्षेत्रों को बाहर रखा गया है, उनमें शहरी व ग्रामीण दोनों शामिल है। शहरी क्षेत्रों में संबंधित निकाय की ओर से विकास कार्य होते रहेंगे, प्लानिंग बोर्ड से वित्तीय सहायता नहीं मिल सकेगी, जबकि जो ग्रामीण क्षेत्र बाहर हुआ है, उस क्षेत्र में यह फायदा रहेगा कि वहां पर किसी तरह का उद्योग लगाने के लिए जो पहले एनजीटी सहित कई एनओसी लेनी पड़ती थी, अब उनसे राहत मिल सकेगी।<br /><br />इसका भविष्य में पता चल सकेगा कि क्या नुकसान होगा। राज्य की ओर से क्षेत्रीय योजना-2041 के प्रारूप पर सुझाव भी दिए गए है। कुछ क्षेत्रों के तो 2020 में ही सब रीजन प्लान तैयार किए गए थे। राज्य सरकार ने मौजूदा क्षेत्र को रखने का सुझाव दिया था। -<strong>ओम प्रकाश पारीक, सीटीपी एनसीआर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Wed, 02 Mar 2022 10:31:44 +0530</pubDate>
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