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                <title>international women's day - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस विशेष : हौसलों की उड़ान हो तुम, सपनों की पहचान हो तुम</title>
                                    <description><![CDATA[कई महिलाएँ चुनौतियों को पार कर अपने सपनों को साकार करती हैं।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/international-women-s-day-special--you-are-the-flight-of-courage--you-are-the-identity-of-dreams/article-145790"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/200-x-60-px)-(1)13.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।"हौसलों की उड़ान से ही मंजिलें मिलती हैं,रास्ते आसान हों तो पहचान नहीं बनती।" महिलाओं की सफलता के पीछे अक्सर संघर्ष, धैर्य और मजबूत इरादों की कहानी छिपी होती है। घर, परिवार, समाज और करियर की जिम्मेदारियों के बीच अपनी अलग पहचान बनाना आसान नहीं होता। फिर भी कई महिलाएँ चुनौतियों को पार कर अपने सपनों को साकार करती हैं। महिला दिवस के अवसर पर दैनिक नवज्योति ने शहर की ऐसी ही प्रेरणादायक महिलाओं से बातचीत की और जाना कि उन्होंने अपनी मंजिÞल तक पहुँचने के लिए किन संघर्षों और चुनौतियों का सामना किया। उनकी जुबानी सुनिए सफलता की यात्रा।</p>
<p><strong>महिला जीवन की चुनौतियां और संकल्प की शक्ति</strong><br />महिला होने के नाते जीवन के हर पड़ाव पर अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। बचपन में अक्सर ऐसा होता है कि परिवार में भाई को अधिक प्राथमिकता दी जाती है, जबकि लड़कियों पर कई तरह की पाबंदियाँ लगा दी जाती हैं, कैसे रहना है, क्या पहनना है और कहाँ जाना है। मेरे जीवन में भी ऐसे अनुभव रहे। जैसे-जैसे उम्र बढ़ी, चुनौतियों का स्वरूप भी बदलता गया। घर की चौखट से बाहर निकलकर  नौकरी की ओर कदम बढ़ाने पर कई तरह के आक्षेप और सवाल सामने आए। फिर भी जब मन में दृढ़ निश्चय हो कि हमारा विचार सही है और हमें अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना है, तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती। चुनौतियों को मैंने हमेशा सकारात्मक रूप में लिया, क्योंकि उनसे सीखने और खुद को और अधिक मजबूत बनाने का अवसर मिलता है। आज जिस मुकाम पर हूं, उसमें सभी का हाथ है। जब माता-पिता के पास थे तो उनकी भूमिका सबसे ज्यादा रही। मैं बीकानेर की रहने वाली हूँ। मेरे पिता का हमेशा मानना था कि अच्छी शिक्षा मिलनी चाहिए और  आत्मनिर्भर बनना चाहिए। इसी सोच के साथ उन्होंने मुझे घर से दूर वनस्थली विद्यापीठ भेजा, जहाँ से मैंने स्कूल से लेकर कॉलेज तक की पढ़ाई पूरी की। वहाँ की शिक्षा ने मेरे जीवन की मजबूत नींव तैयार की। मेरी माँ स्वयं  पढ़ी-लिखी नहीं थीं, लेकिन हम सभी  को पढ़ाने के लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। पति से भी जीवन में कई महत्वपूर्ण बातें सीखने का अवसर मिला और आज मैं जिस मुकाम पर हूँ, उसमें परिवार के समर्थन की बड़ी भूमिका रही है। </p>
<p><strong>महिला दिवस पर संदेश</strong><br />बच्चियां और महिलाएं अपनी प्रतिभा को पहचानें, बड़े सपने देखें और उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत, समर्पण और साहस के साथ आगे बढ़ें। साथ ही उन्हें वित्तीय प्रबंधन, सामुदायिक सहयोग और नेतृत्व की जिम्मेदारियों को भी समझना होगा। बाधाएं जीवन में आती हैं, लेकिन सकारात्मक सोच और दृढ़ संकल्प से उन्हें पार कर एक स्थायी और उज्ज्वल भविष्य बनाया जा सकता है।<br /><strong>-डॉ. विमला डुकवाल, कुलगुरु, कृषि विश्वविद्यालय, कोटा</strong></p>
<p><strong>फॉरेंसिक विज्ञान में बनाई मजबूत पहचान</strong><br />मैंने वर्ष 1998 में इस क्षेत्र में कार्य करना शुरू किया। उस समय महिलाओं और लड़कियों में इस क्षेत्र के प्रति जागरूकता बहुत कम थी। फॉरेंसिक विज्ञान का कार्य केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं होता, बल्कि कई बार क्राइम सीन इन्वेस्टिगेशन के लिए किसी भी समय ड्यूटी देनी पड़ती है। कई घटनास्थल बेहद भयावह होते हैं और कई बार गहन जंगलों या एकांत स्थानों पर भी जांच करनी पड़ती है। ऐसे में वैज्ञानिक साक्ष्यों को संकलित करते समय धैर्य, साहस और समझदारी बेहद जरूरी होती है। समाज में जब रेप जैसे जघन्य अपराध सामने आते हैं, तो एक महिला होने के नाते ये दृश्य मन को गहराई से झकझोर देते हैं। आज के समय में मानसिक, शारीरिक और तकनीकी रूप से मजबूत बने बिना आगे बढ़ना संभव नहीं है, इसलिए हर चुनौती का दृढ़ता से सामना करना पड़ता है।</p>
<p>पुरुष प्रधान समाज में बिना किसी समझौते के आगे बढ़ना भी अपने आप में एक चुनौती रहा है। कई बार परिवार और समाज की पारंपरिक सोच भी सामने आती है। समय के साथ कदम मिलाने की कोशिश में कई बार परिवार और बच्चों को उतना समय नहीं दे पाते, जितना देना चाहते हैं। वहीं कार्यस्थल पर भी जब एक महिला अधिकारी उच्च पद पर होती है, तो कई बार पुरुष सहकर्मियों और अधीनस्थों के लिए उसे सहज रूप से स्वीकार करना आसान नहीं होता। फिर भी निरंतर मेहनत और समर्पण के साथ आगे बढ़ना ही सफलता का रास्ता बनाता है। मैं अपनी सोच और मूल्यों का श्रेय अपनी मां शांति देवी, पिता भरत सिंह, सास प्रेम खन्ना और पति राजेश खन्ना को देना चाहूंगी। परिवार ही वह आधार है, जिससे जुड़कर हम समाज के लिए भी बेहतर कार्य कर सकते हैं।</p>
<p><strong>महिला दिवस पर संदेश</strong><br />एक सशक्त महिला या बालिका को अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए मन और तन दोनों को मजबूत बनाना होगा। निरंतर प्रयास के साथ जीवन में संतुलन बनाए रखना जरूरी है।  विशेष रूप से अपराध के मामलों में महिलाओं को खुद को केवल पीड़ित न मानते हुए साहस के साथ आगे आना चाहिए और साक्ष्य प्रस्तुत करने में सहयोग देना चाहिए। इससे अपराधियों में भय पैदा होगा और उन्हें उनके अपराध की सजा भी मिलेगी।<br /><strong>-डॉ. राखी खन्ना,  एडिशनल डायरेक्टर रीजनल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी कोटा रेंज</strong></p>
<p><strong>संघर्ष, धैर्य और आत्मविश्वास से सफलता का मार्ग</strong><br />जी वन में चुनौतियों का सामना हर व्यक्ति को करना पड़ता है। मेरे जीवन में भी संघर्ष मुख्य रूप से पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े रहे। पढ़ाई के दौरान कई बार असफलताएँ भी मिलीं, लेकिन ऐसे समय में धैर्य और दृढ़ निश्चय सबसे अधिक जरूरी होता है। मेरे माता-पिता का हमेशा पूरा समर्थन मिला और उन्होंने हर परिस्थिति में मुझे प्रेरित किया। यूपीएससी की तैयारी के दौरान मेरा चयन तीसरे प्रयास में हुआ। इससे पहले के प्रयास में केवल एक अंक से चयन छूट गया था, उस समय बहुत निराशाजनक लगता था। लेकिन परिवार के सहयोग और अपने धैर्य की वजह से मैंने हिम्मत नहीं हारी लगातार अपने प्रयास जारी रखे। हमेशा यही कोशिश रही कि मनोबल बनाए रखा जाए और लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित किया जाए।</p>
<p>-कॉलेज के समय से ही मेरा लक्ष्य था कि मुझे सार्वजनिक सेवा के क्षेत्र में जाना है। मैंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बिजनेस स्टडीज में स्नातक किया और उसी दौरान इस दिशा में आगे बढ़ने का निर्णय लिया। इस पूरे सफर में मेरे माता-पिता की प्रेरणा सबसे बड़ी ताकत रही। जब हम मेहनत करते हैं और हमारे काम से हमारे अपने लोग खुश होते हैं, तो उससे और अधिक ऊर्जा मिलती है। आज भी उनका मार्गदर्शन और प्रोत्साहन मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। जीवन में हर भूमिका को संतुलन के साथ निभाना भी बहुत जरूरी है। जब मैं काम पर होती हूँ तो पूरी तरह अपने कार्य पर ध्यान देती हूँ, और जब घर पर होती हूँ तो परिवार को समय देने की कोशिश करती हूँ। कई बार काम का दबाव होता है और कभी पारिवारिक जिम्मेदारियाँ बढ़ जाती हैं, लेकिन इन दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना ही सबसे महत्वपूर्ण है।</p>
<p><strong>महिला दिवस पर संदेश</strong><br /> महिलाओं और युवतियों के लिए मेरा संदेश है कि सबसे पहले खुद पर विश्वास रखें। मेहनत और लगन के साथ काम करें, क्योंकि इंसान की सबसे बड़ी सीमा उसकी सोच होती है। यदि आप आत्मविश्वास के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते हैं, तो आप जो चाहें वह हासिल कर सकते हैं।<br /><strong>-चारु शंकर, एसडीएम रामगंजमंडी</strong></p>
<p><strong> संघर्ष, संकल्प और बड़े सपनों की उड़ान</strong><br />सिविल सेवा में आने से पहले का मेरा सफर संघर्ष और धैर्य से भरा रहा। यूपीएससी की परीक्षा मैंने चौथे प्रयास में सफलतापूर्वक पास की। इन चार वर्षों की तैयारी काफी मेहनत और धैर्य की परीक्षा लेने वाली रही। कई बार ऐसे क्षण आए जब निराशा भी हुई। दो बार मैंने परीक्षा दी, एक बार इंटरव्यू तक पहुँची, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो पाया। ऐसे झटके किसी भी अभ्यर्थी के लिए कठिन होते हैं। कई बार हम योजनाएँ बनाते हैं, लेकिन परिणाम उम्मीद के अनुसार नहीं मिलते। ऐसे समय में परिवार और समाज का दबाव भी महसूस होता है और कई लोग बीच रास्ते में हार मान लेते हैं।मेरे लिए सबसे बड़ी ताकत मेरा परिवार रहा। उन्होंने हमेशा मेरा हौसला बढ़ाया और कहा कि जितना समय चाहिए, उतना लेकर पूरी लगन से तैयारी करो। इसी समर्थन और आत्मविश्वास के साथ मैंने चौथे प्रयास में सफलता प्राप्त की। मेरे पिता राज्य सरकार में कार्यरत थे और उन्हें देखकर ही मुझे शुरूआत से ही कुछ करने की प्रेरणा मिली। बाद में जब मैंने कॉपोर्रेट क्षेत्र में काम करना शुरू किया, तब मुझे एहसास हुआ कि निजी क्षेत्र में पब्लिक इंटरफेस और सामाजिक प्रभाव अपेक्षाकृत कम होता है। वहीं से यह विचार और मजबूत हुआ कि सरकारी व्यवस्था में काम करके समाज पर अधिक सकारात्मक प्रभाव डाला जा सकता है।मेरी प्रेरणा मेरी माँ और बहनें रही हैं। उन्होंने हमेशा यही सिखाया कि जो भी काम करें, पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ करें, क्योंकि हर काम के अपने सकारात्मक और नकारात्मक पहलू होते हैं।</p>
<p><strong>महिला दिवस पर संदेश</strong><br />अगर आपको लगता है कि आप कुछ बड़ा करना चाहते हैं, तो शुरूआत करने से कभी न डरें। अपने सपनों को साकार करने के लिए पहला कदम उठाइए। कहीं न कहीं से सहयोग अवश्य मिलेगा। सबसे जरूरी है कि बड़े सपने देखने का साहस हमेशा बनाए रखें।<br /><strong>-आराधना चौहान, प्रशिक्षु आईएएस</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 12:32:59 +0530</pubDate>
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                <title>पीएम मोदी ने दी अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिलाओं को शुभकामनाएं, कहा-महिलाएं पक्के इरादे, रचनात्मकता और बेमिसाल जोश के साथ भारत की तरक्की को दे रही आकार</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर देश की 'नारी शक्ति' को बधाई देते हुए उन्हें विकसित भारत का आधार बताया। उन्होंने कहा कि पिछले दशक की सरकारी योजनाओं ने महिलाओं के लिए समान अवसर सुनिश्चित किए हैं। पीएम ने जमीनी स्तर पर आए बदलावों का उल्लेख करते हुए राष्ट्र निर्माण में उनके अतुलनीय जोश और रचनात्मकता की सराहना की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pm-modi-congratulated-women-on-international-womens-day-and-said/article-145698"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/modi-1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर रविवार को देश भर की महिलाओं को बधाई दी और भारत के विकास में उनके योगदान की सराहना करते हुए कहा कि नारी शक्ति की उपलब्धियां देश को प्रेरित करती हैं और एक विकसित भारत की ओर इसके सफऱ को मजबूत करती हैं। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर किये गये सिलसिलेवार पोस्ट में कहा कि महिलाएं सभी क्षेत्रों में बदलाव लाने वाली भूमिका निभा रही हैं और देश की तरक्की के केंद्र में हैं। उन्होंने लिखा, अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर मैं हमारी सभी नारी शक्ति को बधाई देता हूं। हर क्षेत्र में महिलाएं पक्के इरादे, रचनात्मकता और बेमिसाल जोश के साथ भारत की तरक्की को आकार दे रही हैं। उनकी उपलब्धियां हमारे देश को प्रेरित करती हैं और विकसित भारत बनाने के हमारे सामूहिक इरादे को मजबूत करती हैं।</p>
<p>पीएम मोदी ने महिला सशक्तिकरण पर सरकार के ध्यान का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले दस सालों में शुरू की गई कई पहल और योजनाओं का मकसद अवसरों को बढ़ाना और महिलाओं को उनकी पूरी क्षमता का एहसास कराना है। उन्होंने कहा, महिलाओं का सशक्तिकरण हमारी अलग-अलग योजनाओं और पहलों का मुख्य हिस्सा है। हम ऐसे मौके बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं जिनसे हर महिला अपनी पूरी क्षमता का एहसास कर सके और भारत के विकास के सफऱ में योगदान दे सके। </p>
<p>उन्होंने एक अन्य पोस्ट में लिखा कि देश भर में महिलाओं की उपलब्धियां भारत के भविष्य को आकार दे रही हैं। पीएम मोदी ने लिखा, भारत की नारी शक्ति की उपलब्धियां गर्व का विषय हैं और राष्ट्र निर्माण में बदलाव लाने वाली भूमिका की एक मजबूत याद दिलाती हैं। जैसे-जैसे भारत आगे बढ़ेगा, महिलाओं की उम्मीदें और योगदान एक मजबूत और खुशहाल देश की ओर हमारी सामूहिक यात्रा को प्रोत्साहित करते रहेंगे।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने जमीनी स्तर पर महिलाओं की सफलता की कहानियों को दिखाने वाला एक वीडियो शेयर करते हुए नये भारत की नारी शक्ति हैशटैग का इस्तेमाल करके लिखा, यह पिछले एक दशक में जमीनी स्तर पर महिलाओं की जिंदगी कैसे बदली है, इसकी एक झलक दिखाता है।</p>
<p>केंद्र सरकार ने हाल के सालों में महिलाओं के सशक्तिकरण पर केन्द्रित कई कार्यक्रम शुरू किये हैं, जिनमें वित्तीय समावेशन, उद्यमिता, स्वास्थ्य, शिक्षा और स्वच्छता से जुड़े पहलें शामिल हैं। सरकार ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, शासन और सशस्त्र बल जैसे क्षेत्रों में भी महिलाओं की भागीदारी पर जोर दिया है। </p>
<p>उल्लेखनीय है कि हर साल दुनिया भर में आठ मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के तौर पर मनाया जाता है। इसे महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक उपलब्धियों का जश्न मनाने के साथ ही दुनिया भर में महिलाओं के लिए लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के तौर पर मनाया जाता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Mar 2026 13:05:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>महिला दिवस 2026 के उपलक्ष्य में “एक्सीलेंसी अवार्ड्स 2026” का पोस्टर लॉन्च</title>
                                    <description><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर राजस्थान सरकार के उद्योग विभाग द्वारा "एक्सीलेंसी अवार्ड्स 2026" का आयोजन किया जाएगा। गुरुवार को इसका पोस्टर जारी किया गया। 8 मार्च को संविधान क्लब में होने वाले इस कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को सम्मानित करेंगे। नामांकन हेतु ऑनलाइन आवेदन शुरू हो चुके हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/poster-launch-of-%E2%80%9Cexcellence-awards-2026%E2%80%9D-on-the-occasion-of/article-145407"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/rajasthali.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च के अवसर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को सम्मानित करने के उद्देश्य से उद्योग एवं वाणिज्य विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थली एम्पोरियम, जयपुर के सहयोग से आयोजित किए जाने वाले प्रतिष्ठित “एक्सीलेंसी अवार्ड्स 2026” का पोस्टर गुरुवार को जारी किया गया।<br />इस अवसर पर राजस्थली एम्पोरियम की निदेशक माया ठाकुर ने जानकारी देते हुए बताया कि इस पहल का उद्देश्य उन प्रेरणादायी महिलाओं को सम्मानित करना है, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्ट नेतृत्व, नवाचार और समर्पण के माध्यम से समाज में उल्लेखनीय योगदान दिया है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में उद्योग एवं उद्यमिता, हैंडलूम एवं हस्तशिल्प, खेल, रक्षा एवं सार्वजनिक सेवा, स्टार्टअप एवं नवाचार तथा सोशल मीडिया एवं क्रिएटिव लीडरशिप जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को “एक्सीलेंसी अवार्ड्स 2026” से सम्मानित किया जाएगा। श्रीमती माया ठाकुर ने बताया कि कार्यक्रम का आयोजन 8 मार्च 2026 को संविधान क्लब ऑफ राजस्थान, जयपुर में किया जाएगा, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में राज्यवर्धन सिंह राठौड़, कैबिनेट मंत्री, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग, राजस्थान सरकार उपस्थित रहेंगे।</p>
<p>उन्होंने प्रदेश की विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत महिलाओं से अपील की कि वे इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए अपनी या अन्य योग्य महिलाओं की नामांकन प्रविष्टि अवश्य भेजें। नामांकन के लिए ऑनलाइन फॉर्म उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन महिलाओं की उपलब्धियों को मंच प्रदान करने और समाज में उनके योगदान को सम्मानित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Mar 2026 18:17:46 +0530</pubDate>
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                <title>अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस - नारी है शक्ति, नारी है ज्योति, नारी बिना ये दुनिया है खोती ....</title>
                                    <description><![CDATA[महिला अगर हम ठान लें तो हर चुनौती को पार कर सफ लता की नई कहानी लिख सकती हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/international-women-s-day---woman-is-power--woman-is-light--without-woman-this-world-is-lost/article-106839"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/257rtrer47.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।  नारी शक्ति अगर ठान ले तो हर मुकाम पर अपना परचम लहरा देती है। आज के युग में महिलाएं पुरूषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है। वे अपनी आत्मनिर्भरता, जोश और जज्बे से अपने सपने साकार कर रही है। शिक्षा, व्यवसाय, उच्च सरकारी पद, खेल, बिजनेस, राजनीति जैसे हर क्षेत्र में कामयाबी के शिखर पर पहुंच रही है। अंतरराष्टÑीय महिला दिवस पर हम ऐसे ही हाड़ौती की महिलाओं से आपको मुखातिब करवा रहे है। इन महिलाओं का कहना है कि बेटियों को सपने देखने दीजिए। उन्हें उड़ने दीजिए। अगर सही दिशा और अवसर मिले, तो वे हर मंजिÞल को हासिल कर सकती हैं। हर महिला में असीम शक्ति है। अगर हम ठान लें तो हर चुनौती को पार कर सफ लता की नई कहानी लिख सकते हैं। </p>
<p>मेहनत से सफलता तक अपनी कड़ी मेहनत, लगन और ईमानदारी से प्रशासनिक सेवा में अपनी पहचान बनाई। माता-पिता एवं परिवार की प्रेरणा से मैंने अपनी क्षमताओं को निखारा। शिक्षा, आत्मनिर्भरता और संकल्प ही सफलता की कुंजी हैं। जब एक महिला ठान लेती है, तो हर चुनौती छोटी हो जाती है। एक सुरक्षित समाज ही महिला सशक्तिकरण की नींव है। जागरूकता, सशक्त कानून और समाज की सकारात्मक सोच से महिलाएं निर्भय होकर आगे बढ़ सकती हैं। कड़ी मेहनत, सही मार्गदर्शन और आत्मविश्वास से हर महिला अपने लक्ष्य को हासिल कर सकती है। महिला शक्ति, समाज की असली ताकत है। <br /><strong>-भावना सिंह,एसडीएम  लाखेरी </strong></p>
<p><strong>निरंतर मेहनत पर ही अपनी मंजिल मिल सकती है</strong><br /> शुरू से ही परिवार का सहयोग रहा तो संघर्ष तो नही करना पड़ा लेकिन मेहनत बहुत करनी पड़ी है। जो भी  महिला जीवन मे कुछ करना चाहती है वो लक्ष्य निर्धारित कर के निरंतर मेहनत कर अपनी मंजिल को हासिल कर सकती है। महिला मजूबत और सफल हो सके इसके लिए जरूरी हो कि महिला अंदर से मजबूत हो अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित हो, क्योंकि जीवन में कैसी भी परिस्थितियां आ जाए हमे हमारी नाकामी के पीछे परिस्थियों का हवाला नही देना चाहिए।  सकारात्मक ऊर्जा के साथ परिस्थितियों का सामने करते हुए आगे बढ़ते रहना चाहिए। समाज में महिला अपने आप को सुरक्षित महसूस करे इसके लिए जरूरी है कि लोग अपने लड़के और लड़कियों की परवरिश समानता के साथ करे। उनमें किसी प्रकार का भेदभाव नही करें। क्योंकि अगर माता पिता अपनी लड़कियों के साथ ही लड़कों को भी सही संस्कार देंगे तो समाज मे निश्चित ही महिलाएं सुरक्षित माहौल को महसूस करेंगी।<br /><strong>-सपना कुमारी, उपखण्ड अधिकारी सांगोद</strong></p>
<p><strong>बदलाव लाने के लिए सिर्फ  इच्छा ही नहीं , निरंतर प्रयास भी जरूरी हैं</strong><br />आशा शर्मा जो कभी एक साधारण गृहिणी थीं। उन्होंने अपने संघर्ष और संकल्प के बल पर लाखेरी नगर परिषद की चेयरमैन बनने का गौरव हासिल किया। पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए भी उन्होंने समाज सेवा को प्राथमिकता दी और यह साबित किया कि इच्छाशक्ति से हर सपना साकार किया जा सकता है। चेयरमैन बनने के बाद आशा शर्मा ने शहर को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का दृढ़ निश्चय किया। उन्होंने स्वच्छता, विकास और नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। उनका मानना है कि बदलाव लाने के लिए सिर्फ  इच्छा ही नहीं बल्कि निरंतर प्रयास भी जरूरी हैं। अंतरराष्टीय महिला दिवस के अवसर पर उन्होंने युवा छात्राओं और महिलाओं को संदेश दिया कि महिला शक्ति आज किसी से कम नहीं है। आशा शर्मा ने कहा हर महिला में असीम शक्ति है। अगर हम ठान लें तो हर चुनौती को पार कर सफ लता की नई कहानी लिख सकते हैं। आशा शर्मा हर उस महिला के लिए प्रेरणा है जो अपने सपनों को साकार करना चाहती है। उनका संघर्ष और सफ लता यह साबित करता है कि अगर हौसला बुलंद हो तो कोई भी मुकाम दूर नहीं। <br /><strong>-आशा शर्मा, चेयरमैन, नगर पालिका लाखेरी</strong></p>
<p>उन्हें देखकर जनसेवा का जज्बा जगा। पूर्व मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे सिंधिया का विधानसभा क्षेत्र हैं । वो भी एक महिला है तो उनसे प्रेरित होकर राजनीति के जरिए जनसेवा का मौका मिला। अपने पालिकाध्यक्ष के कार्यकाल में लोगों के लिए जी जान से विकास कार्य किए। जिस मुकाम पर मैं हू वह परिवार के सहयोग से ही सम्भव हो पाता है। समय का बेहतर प्रबंधन दोनों कार्य मे सफलता दिलाता है और परिवार के सहयोग से ऊर्जा मिलती है। समाजसेवा हो या राजनीति, संघर्ष तो कदम कदम पर हर होते है, विरोध भी होते है खासकर जब आप महिला है तो हौसला तोड़ने वाले भी मिलते है लेकिन जनता के प्यार से हौसला और ताकत मिलती रहती है।<br /><strong>-वर्षा मनीष चांदवाड़, नगरपालिका अध्यक्ष, झालरापाटन</strong><br /><strong> </strong><br /><strong> डर को छोडो, हौसले को पकडो</strong><br />बचपन से ही डॉक्टर बनने का सपना देखती थी। परंतु समाज में बेटियों की पढाई लिखाई पर खर्चा व्यर्थ समझा जाता था फि र भी मेरे माता पिता के बेटे बेटी को समान शिक्षा प्रदान करने के विचार व मेरे अथक परिश्रम व लगन के चलते मैंने एसएमएस मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया।  इन्द्रगढ कस्बे से पहली महिला डॉक्टर बनी।  नीट परीक्षा की तैयारी के लिए दिन में 14 से 15 घंटे तक अध्ययन किया। शारिरीक विकलांगता होने के बावजूद मैंने कभी इसे अपनी कमजोरी नही माना और निरंतर मेहनत की। अपने अथक प्रयासों के दम पर ये मुकाम हासिल किया। पिता बैंक मैनेजर और माता गृहिणी है। जिनका मेरी इस सफ लता में अहम योगदान है। मेरे तीन छोटे भाई बहिन भी डॉक्टरी की तैयारी कर रहे है तथा एक बहिन आईएएस की तैयारी कर रही है। बाद में मेरे पति डॉ0 चन्दन मीना के प्रोत्साहन से पीजी की पढाई पूरी कर स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ के रूप में अपने कस्बे के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में अपनी सेवाएं दे रही हूं। महिला सुरक्षा समान कानून और व्यक्तिगत जागरूकता से जुडा मुद्दा है। सख्त कानून आत्मरक्षा शिक्षा व जागरुकता से इसे मजबूत किया जा सकता है। महिलाओं को सुरक्षित माहौल प्रदान करने में समाज की भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। महिला सशक्तिकरण का मतलब सिर्फ अधिकार हासिल करना नही बल्कि अपने आत्मविश्वास स्वाभिमान और काबिलियत को पहचानना भी है। महिला दिवस पर सभी महिलाओं व बालिकाओं को मेरा संदेश है कि  डर को छोडा, हौसले को पकड़ो। शिक्षा तुम्हारा सबसे बडा हथियार है, इसे कभी मत छोड़ो। आर्थिक स्वतंत्रता तुम्हे आत्मनिर्भर बनाएगी इसे अपनाओ। गलत के खिलाफ आवाज उठाओ, क्योंकि चुप्पी भी अन्याय को बढ़ावा देती है।<br /><strong> -डॉ. प्रियंका मीना महिला एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र इन्द्रगढ़।</strong></p>
<p><strong>सही दिशा और अवसर मिले तो बेटियां हर मंजिÞल को हासिल कर सकती हैं</strong><br />छीपाबड़ौद कस्बे के ही राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय से 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की लेकिन  सपना इससे कहीं आगे था।  एमबीबीएस की तैयारी के लिए कोटा जाने की इच्छा जताई तो समाज ने सवाल उठाए। लड़की को इतना पढ़ाने की क्या जरूरत। इतनी दूर भेजकर क्या करेंगे? लेकिन  माता-पिता ने समाज की परवाह किए बिना उन्हें पूरा समर्थन दिया। कोटा में  दिन-रात मेहनत की। 16-16 घंटे पढ़ाई की। न मनोरंजन देखा, न पारिवारिक कार्यक्रमों में भाग लिया। एक ही लक्ष्य था डॉक्टर बनकर अपने क्षेत्र की महिलाओं के लिए कुछ करना। लगातार पांच वर्षों की मेहनत के बाद विजय लक्ष्मी का चयन अलीगढ़ यूनिवर्सिटी में हुआ। जहां से उन्होंने स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उनका सरकारी नौकरी में चयन हुआ और 2021 में छीपाबड़ौद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अपनी सेवाएं शुरू कीं। लड़कियों को सिर्फ  स्कूल भेजना काफ ी नहीं है, उन्हें उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करना और सही संसाधन उपलब्ध कराना भी जरूरी है। महिला सुरक्षा को लेकर वे कहती हैं। सरकार को सख्त कानून लागू करने चाहिए और पुलिस को महिलाओं की शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए ताकि वे खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें। आज भी कई महिलाओं के साथ हिंसा होती है। हर लड़की के माता-पिता से यह कहना है कि बेटियों को सपने देखने दीजिए। उन्हें उड़ने दीजिए। अगर सही दिशा और अवसर मिले, तो वे हर मंजिÞल को हासिल कर सकती हैं।<br /><strong>-डॉ विजय लक्ष्मी चौरसिया, स्त्री एवं प्रसूति विशेषज्ञ, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र छीपाबडौद</strong></p>
<p>मैं पेशे से एक ब्यूटीशियन है। पिछले 4 सालों में लगभग 500 से ज्यादा युवतियों व महिलाओं को ब्यूटीपार्लर का कोर्स करवा कर हुनरमंद बनाया है। ब्यूटी कोर्स का कोई चार्ज नही लिया, यह बिल्कुल निशुल्क है। जो आज भी अनवरत जारी है। स्कूल व कॉलेज की युवतियों के लिए यह फ्री ब्यूटी कोर्स समर वेकेशन के समय करवाया जाता है। यह सब नारी सशक्तिकरण की दिशा में एक अच्छा कदम है। साथ ही प्रधानमंत्री मोदी के कौशल विकास व आत्मनिर्भर भारत, नारी सशक्तिकरण जैसे ध्येय को भी बढ़ावा दे रही है। हर महिला को अपनी जिद और जुनून से अपने जीवन की कहानी खुद लिखनी चाहिए। मैं  इंदौर जैसे बड़े शहर की रहने वाली थी, शादी भवानीमंडी में हुई। एक बेटी का अपने पापा के प्रति अटूट विश्वास ने ही उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है। सब में उनके माता-पिता व पति का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। <br /><strong>-सविता घुता -ब्यूटीशियन, भवानीमंडी</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Mar 2025 16:00:02 +0530</pubDate>
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                <title>अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस - लहरा दो, लहरा दो सरजमीं का परचम लहरा दो...</title>
                                    <description><![CDATA[शहर की उन सशक्त महिलाओं से रुबरु करवा रहें हैं, जिन्होंने अपने प्रयासों के चलते कामयाबी हासिल की और अपना एक खास मुकाम बनाया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/international-women-s-day---wave-it--wave-it--wave-the-flag-of-the-land/article-106816"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/lahara-do,-lahara-do-sarajamen-ka-paracham-lahara-do...kota-news-8.03.2025.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। "यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:" अर्थात जहां नारी की पूजा होती है, उनका सम्मान किया जाता है वहां देवता निवास करते हैं। मुस्कुराकर, दर्द भूलकर,रिश्तों में बंद थी दुनिया सारी, हर पग को रोशन करने वाली वो शक्ति हैं नारी ! नारी केवल एक शब्द नहीं, बल्कि संपूर्ण सृष्टि का आधार है, वह जीवनदायिनी है, प्रेम की मूर्ति और रिश्ते संवारने वाली शक्ति है। नारी समाज का मूल आधार है, नारी है तो समाज है नारी समाज का आईना है, क्योंकि वह समाज में कई तरह की भूमिकाएं निभाती है। आज नारी ने शिक्षा, राजनीति, व्यवसाय, और सामाजिक सेवाओं में अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। इन्होंने यह भी बता दिया है कि वे किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए सक्षम हैं। किसी भी प्रोफेशन को ले लीजिए महिलाएं अब पुरुषों से कंधा मिलाकर चल रही हैं। यह अब अपवाद नहीं रह गया है। बीते जमाने की बात हो गई है कि महिलाएं सिर्फ घर की चाहरदीवारी में ही रहेंगी। आज की महिलाएं जागृत हैं और अनेक क्षेत्रों में नेतृत्व भी कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर शहर की उन सशक्त महिलाओं से रुबरु करवा रहें हैं, जिन्होंने अपने प्रयासों के चलते कामयाबी हासिल की और अपना एक खास मुकाम बनाया।</p>
<p>हमारा परिवार इस विचारधारा को मानने वाला था कि लड़कियों की समय पर शादी उनकी शिक्षा से ज्यादा जरूरी है। मेरी बड़ी बहिन की शादी 18 साल की होते ही कर दी गई। मेरे आगे पढ़ने की इच्छा को जानकर मेरी दादी ने मेरे घर वालों  को मुझे उचित माहौल देने का मार्ग प्रशस्त किया। समस्या यह थी कि  परिवार में सभी बड़े लोग निजी क्षेत्र में कार्यरत थे।  ऐसे में परिवारजनों के समुचित सहयोग के बावजूद उचित मार्गदर्शन के अभाव में कई दिक्कतें आई।  प्रतियोगिता पत्रिकाओं में प्रकाशित होने वाले सफल अभ्यर्थियों के साक्षात्कार पढ़कर प्रशासनिक सेवा में जाने का संकल्प लिया। कोचिंग नहीं करने की वजह से तैयारी के दौरान कई चुनौतियां आई लेकिन  कड़ी मेहनत का परिणाम मिला कि  मेरा चयन राजस्थान प्रशासनिक सेवा में हो गया।  महिलाओं को अभी भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद, महिलाएं लगातार आगे बढ़ रही हैं। महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए  उन महिलाओं को देखने की जरूरत है जो विभिन्न क्षेत्रों में सफल हुई है। महिलाओं को अपने लक्ष्यों को निर्धारित करने और उन्हें प्राप्त करने के लिए योजना निर्माण करना चाहिए।  नए कौशल सीखने और अपनी प्रतिभा को विकसित करने के लिए प्रयासरत रहना होगा। महिलाओं को अपनी आवाज उठाने और अपने अधिकारों के लिए जागरूक रहना होगा। एक महिला  को दूसरी महिला का समर्थन करने और एक-दूसरे को आगे बढ़ने में मदद करने के लिए प्रोत्साहित करना होगा।<br /><strong>-ममता तिवारी, अतिरिक्त संभागीय आयुक्त कोटा</strong></p>
<p>आपकी जो आज की परिस्थिति है उसको अगर बदलने का जज्बा है वो इच्छाश्क्ति अगर आप में है तो हालातों को बदल सकते है। मेरा ग्रामीण परिवेश था। मुझे एक ही इच्छा थी कि मुझे अपने पैरों पर खड़े होना है। मैं कभी नहीं चाहुंगी कि मैं किसी पर निर्भर रहुं अपने फैसले लेने में या अपनी लाइफ के छोटे-छोटे फैसले लेने में या कहीं आने जाने में। इसी ने मुझे प्रेरित किया। आजकल लाइफ में डिस्ट्रेक्शन बहुत ज्यादा है सबसे पहले अपने उद्देश्य पर केंद्रित रहे, डिस्ट्रेक्शन को अपने ऊपर बहुत हावी नहीं होने दें। आज आप जिस परिस्थिति में हैं और उसे बदलना चाहते है तो निश्चित रूप से आपको कुछ अलग करना होगा।<br /><strong>- गीता चौधरी, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, सचिव विधिक सेवा प्राधिकरण</strong></p>
<p>जब कोई महिला घर से बाहर निकल कर कुछ करती है तो बहुत अड़चनें आती है। पुरूष तो करें ही पर हर महिला को महिला का भी सपोर्ट जरूरी है। महिला अगर ठान ले कि मुझे इस मुकाम तक पहुंचना है चाहे कितना भी संघर्ष करना पड़े, कोई कुछ भी कहें मुझे आगे बढ़ना है यह लक्ष्य लेकर चलें तो वह वहां तक पहुचेंगी। अपनी व अपने अंदर की सुनें तो अवश्य मंजिल को छूएंगी। मैं जब 9वीं कक्षा में पढ़ती थी तभी विवाह हो गया था। ससुराल से भी पढ़ने जाती थी। पति, सास व ससुर ने मुझे बहुत सपोर्ट किया। मेरी इच्छा शुरू से टीचर बनने की थी। स्कूल में बच्चों को पढ़ाया भी, समाज सेवा भी करती थी। सब जगह मंजू मैडम के नाम से जानी जाती थी जब कहीं महिला की सीट आती और किसको खड़ा करें यह बात आई तो उस समय मुझसे कहा गया एक  बार तो मैंने सोचा यह सब नहीं पर सबने कहां कि आप सब कुछ कर सकती है इस तरह राजनीति में आ गई। यहां भी सास, ससुर, पति के सपोर्ट से आई। मैं चाहती हूं कि मेरे पीछे की महिलाएं भी आगे बढ़े। महिला अपने आस-पास, अपने क्षेत्र, अपने ग्रुप में जो महिलाएं हैं उन्हें सपोर्ट करके आगे बढ़ाए। माता-पिता अपनी बेटियों को संपूर्ण शिक्षा दिलाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाकर ही उनका विवाह करें।<br /><strong>- मंजू मेहरा, महापौर कोटा उत्तर</strong></p>
<p>व्यक्ति के पूरे जीवन के लिए अर्थात जन्म से लेकर अंत तक के लिए कानूनी प्रावधान हैं।  कानून में हर तरह की स्थिति का प्रावधान हैं। महिला को सशक्त होने, स्वाभिमान से जीवन जीने, हर वो काम करने की आजादी है जो वह करना चाहती है। लेकिन यह जरूरी है कि महिलाओं को अपने अधिकारों की जानकारी होना चाहिए। महिलाओं को यह पता होना  चाहिए कि वर्क प्लेस, घर ससुराल,या अन्य स्थान  पर किसी भी तरह की घटना होती है वह क्या करे, कैसे बचे, किससे सहायता लें आदि। इसके साथ महिला को कभी अपने आप को किसी भी परिस्थिति में कमजोर नहीं समझना चहिए।  आज हर महिला को अपने पैरों पर खड़ा होना चाहिए, ताकि वह कठिन समय का सामना आसानी से कर पाए। मैं इस अवसर पर यह भी कहना चाहती हूं कि कभी भी अपने अधिकार व कानून का मिस्यूज नहीं करें। <br /><strong>- डॉ. अमृता दुहन पुलिस अधीक्षक कोटा शहर</strong></p>
<p>शिक्षा वह है जो हर व्यक्ति में आत्मविश्वास भी लाती है और उसका व्यक्तित्व भी निखारती है। हर लड़की को चाहिए कि वह अपनी शिक्षा पर पूरा ध्यान दें। अपनी रूचि के अनुरूप अपना करियर चुनें। हर परिस्थिति में अपने पैरों पर खड़ी हो। हर परिस्थिति में सही-गलत को सोच विचार कर निर्णय करें। क्षेत्र पूरे आत्मविश्वास, पूरी लगन व मेहनत से काम करें तो महिलाएं अपने को ऊंचाई तक ले जा सकती है। हमारा विभाग गरीब, दुखी व वंचित वर्ग के लिए काम करता है। मेरा सौभाग्य था कि ईश्वर ने मुझे इस काम के लिए चुना ताकि मैं लोगों की कुछ मदद कर सकूं। सरकार की योजनाओं से जोड़कर परोक्ष या अपरोक्ष रूप से किसी भी तरह मदद कर सकूं। मैंने कभी सोचा नहीं था कि इस फील्ड में जाउंगी । सोशलॉजी में उच्च शिक्षा प्राप्त की थी। उसके बाद जब इस फील्ड में आई तो धीरे-धीरे समाज को जाना और समझा तो लगा कि सहीं दिशा थी। मैं सेतुष्ट हुं इस विभाग में काम करके। शादी के तीन साल बाद जॉब ज्वाइन किया तो पति व सभी लोगों का मोटीवेशन व सपोर्ट मिला।<br /><strong>- सविता कृष्णैया, संयुक्त निदेशक सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग</strong></p>
<p>आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है। लेकिन आज भी बालिका शिक्षा में हम काफी पिछड़े हुए है। आज भी ग्रामीण परिवेश में बालिकाओं को उच्च शिक्षा के लिए भेजने में संकोच करते हैं। मैं अपनी बात करूं तो मैं एक मध्यमवर्गीय परिवार से आई हूं। हमारे समय में लड़कियों को उच्च शिक्षा के लिए नहीं भेजते थे। लेकिन इस बारे में लकी हूं मेरे पिता ने मुझे पढ़ाई के लिए हमेशा प्रोत्साहित किया। दादाजी मेडिकल लाइन में नहीं भेजना चाहते थे लेकिन पिता के सहयोग से आज मैं इस मुकाम पर पहुंची हूं। बालिकाओं को किसी भी फील्ड में जाना है तो इसके लिए  अपना लक्ष्य तय करना चाहिए। जब तक अपना लक्ष्य हासिल नहीं हो तब तक प्रयास करते रहना चाहिए। मैं कोटा आई तो पहली स्त्री रोग विभाग में महिला सर्जन थी पुरुष प्रधान समाज में इसको लेकर काफी भ्रांतियां भी फैलाई एक महिला सर्जन रूप में कई नकारात्मक चीजें आई उनका डटकर मुकाबला किया।  मुझे काम करना था तो मैंने हर चुनौती का स्वीकार कर इस फील्ड में आगे बढ़ती चली गई। स्त्रीरोग विशेषज्ञ से सफर की शुरुआत हुई उसके बाद विभागाध्यक्ष, बूंदी मेडिकल कॉलेज की प्रधानाचार्य फिर ब्लड बैंक प्रभारी बनी । वर्तमान में जेकेलोन अधीक्षक पद पर हूं। सभी महिलाओं से कहना चाहती हूं कि लगन से किया गया हर कार्य संभव हो जाता है।<br /><strong> - निर्मला शर्मा, अधीक्षक जेकेलोन अस्पताल कोटा</strong></p>
<p> एक कोर टेक्निकल ब्रांच से इंजीनियरिंग करने के लिए वर्कशॉप मैनेजर बनने तक के सफर में हर कदम पर पुरुषों के साथ मिलकर काम शुरू किया। शुरू में एडजस्ट करने के लिए मुझे कुछ दिक्कतें भी आई पर जब मन में सोच लिया कि कुछ अलग करना है तो डर की जगह नहीं रहती। मेरे अनुसार महिलाओं के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता सबसे ज्यादा जरूरी है। हर लड़की को अपनी पसंद की किसी भी फील्ड में बिना डरे आगे बढ़ने के लिए प्रयास करना चाहिए।<br /><strong>- सुचिता गुप्ता, मुख्य आगार प्रबंधक यातायात, कोटा</strong></p>
<p>महिला दिवस के शुभ अवसर पर मैं सभी साथी महिलाओं को बधाई देना चाहती हूॅ। परन्तु ये जोश ये जुनून सिर्फ आज तक सीमित न रहे। हर दिन महिला सशक्तिकरण सही अर्थों में तभी होगा । जब महिलाऐं न  सिर्फ अर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होगी बल्कि अपने जीवन के सभी निर्णय लेने का अधिकार होगा। वे अपने पिता, भाई, पति और पुत्र पर निर्भर नहीं होगी। वे पैसा कमाने के साथ पैसा का व्यय, नियोजन व निवेश का निर्णय भी स्वयं लें। पिछले 4 सालों से राजीविका स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से जुड़ी हुई हंू। इस अनुभव ने मेरी सोच बदली है- मैं आम ग्रामीण महिला की शक्ति का अनुभव करती हंू। महिलाएं हर दिन अपने आप को बेहतर बनाने का प्रयास कर रही हैं। नई विधाएं सीख रही, साक्षर हो रही हैं। यहीं चाहती हंू। कि ये सभी महिलाएं निरंतर इस मार्ग पर आगे बढ़ती रहें।<br /><strong>-नेहा चतुर्वेदी, जिला परियोजना प्रबंधक राजीविका</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Mar 2025 14:56:16 +0530</pubDate>
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                <title>International Women's Day:  आधी आबादी की पूरी उड़ान अभी अधूरी</title>
                                    <description><![CDATA[73.4 फीसदी महिलाओं के नाम खुद की कोई संपत्ति नहीं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/international-womens-day-the-full-flight-of-half-the-population/article-72146"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/transfer3.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में महिलाओं की आबादी करीब 4 करोड़ (48 फीसदी) है। करीब 2.50 करोड़ गृहणियां हैं। शाश्वत सत्य है कि मां-बहन-बेटी के बिना परिवार अधूरा है। परिवार की जिम्मेदारियां को संभालने में तो वे सदियों से संपूर्ण है, लेकिन अधिकारों-सशक्तिकरण में अभी पूर्णता बाकी है।</p>
<p>नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 रिपोर्ट की माने तो प्रदेश में 73.4 फीसदी घर की महिलाओं के पास संपत्ति के नाम पर ना जमीन है और ना ही कोई घर। आज भी इन पर पुरुषों का ही एकाधिकार है। 20.4 फीसदी महिलाओं के बैंक बैलेंस जीरो है, क्योंकि इनके खाते तक नहीं हैं। गांवों में 21 फीसदी और शहरों में 18.3 फीसदी के बैंक खाते नहीं हैं। इस डिजिटल युग में भी आधी आबादी 49.8 फीसदी महिलाओं के पास मोबाइल तक नहीं है। गांवों में 54.7 फीसदी और शहरों में 34.5 फीसदी ऐसी महिलाएं हैं। 2011 के अनुसार साक्षरता दर भी 52.66 फीसदी ही है। हालांकि 2018-19 में एनएसओ के अनुसार यह 57.6 फीसदी हुई है, लेकिन अभी भी करीब 40 फीसदी साक्षरता बाकी है।</p>
<p><strong>महिलाओं को लेकर ये भी चिंता</strong></p>
<p><strong> हिंसा की शिकार 24.3%</strong><br />प्रदेश में 18-49 साल की शादीशुदा महिलाओं में से 24.3 फीसदी ऐसी हैं, जो जीवन में कभी ना कभी घरेलू हिंसा का शिकार होती हैं। शहरों में 22.4 और गांवों में 24.9 फीसदी ऐसी महिलाएं हैं।</p>
<p><strong>मां बनते ही 2886 दम तोड़ती हैं </strong><br />प्रदेश में हर साल करीब 2886 महिलाएं मां बनते ही दम तोड़ देती हैं। परिवार की जिम्मेदारियां के चलते खुद के स्वास्थ्य से बेफ्रिक, परिजनों की चिकित्सकी सार-संभाल में बरती लापरवाही के कारण 46 फीसदी गर्भवती खून की कमी की शिकार हो जाती हैं। </p>
<p><strong> बाल विवाह सशक्तिकरण में रोड़ा</strong><br />गांवों में 28.3 और शहरों 15.1 फीसदी बेटियां ऐसी हैं, जिनके बाल विवाह हो रहे हैं और वे घर की जिम्मेदारियों का बोझ उठा रही हैं। गांवों में तो 4.2 फीसदी बेटियां 19 साल से पहले ही मां बन जाती हैं। शहरों में भी ऐसी मांओ की संख्या 1.8 फीसदी है।</p>
<p><strong>54.4 फीसदी एनीमिक, 19 फीसदी का बीएमआई खराब </strong><br />प्रदेश में 49 साल की आधी से ज्यादा 54.4 फीसदी महिलाएं ऐसी है, जिनमें खून की कमी यानी एनीमिक है। सही से पोषक खाद पदार्थ नहीं खा रही है। गांवों में 55.7 फीसदी और शहरों में 49.9 फीसदी महिलाएं सर्वे में ऐसी मिली। वहीं 19.6 फीसदी महिलाओं का वजन उसकी उम्र-लंबाई के मुताबिक कम है। गांवों में 21.3 और शहरों में 14 फीसदी महिलाओं का बॉडी मास इंडेक्स तय मापदंडों से कम है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Mar 2024 19:45:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस विशेष : कुछ नया और मेहनत करने वाले ही रचते है इतिहास </title>
                                    <description><![CDATA[षड्यंत्र की पूर्व सूचना जुटाकर दंगे रोकने में निभाई है अहम भूमिका। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/international-women-s-day-special--only-those-who-do-something-new-and-work-hard-create-history/article-72174"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/antarrshtriye-mahila-diwas-vishesh----kuch-nya-or-mehnat-krne-wale-hi-rchte-h-itihas...harnavdashahji,-baran-news-08-03-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>हरनावदाशाहजी। आधुनिक समाज में महिलाएं भी पुरुषों से किसी भी दृष्टि से पीछे नहीं है। यदि कुछ नया करने का इरादा हो, विचार उन्नत तथा मकसद सार्थक हो तो परिणाम भी आशा जनक ही प्राप्त होते हैं तथा ऐसे व्यक्ति ही इतिहास रचते हैं। हरनावदाशाहजी निवासी ललिता लोधा सेवानिवृत पुलिस निरीक्षक ने अपराध से लड़ने और अपराधियों को कड़ा संदेश देते हुए पुलिस में सेवाएं दी। सेवा के दौरान झालावाड़ जिले के मनोहर थाना तथा इकलेरा क्षेत्र में सांप्रदायिक दंगे के षड्यंत्र की पूर्व सूचना संकलित कर तत्काल उच्चाधिकारियों को प्रेषित की। जिससे इस अप्रिय घटना की रोकथाम संभव हो सकी और जिला प्रशासन ने राहत की सांस ली। राजस्थान पुलिस विभाग में अपने सेवाकाल के दौरान कई उल्लेखनीय कार्य किए जिनकी सर्वत्र प्रशंसा हुई  इस दौरान विभाग द्वारा अनगिनत प्रशंसा पत्र एवं नगद पुरस्कार, उत्तम सेवा चिन्ह, अति उत्तम सेवा चिन्ह तथा अलंकरण आदि भी प्रदान किए। पुलिस विभाग में उनकी उल्लेखनीय सेवाओं के दृष्टिगत भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा इन्हें गत वर्ष अति विशिष्ट सेवा पदक से भी नवाजा गया है। समाजोपयोगी कार्यक्रम भी प्रारंभ किए: इन्होंने लोधा जाति को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने और महिलाओं को उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए प्रेरित किया एवं उनके  उत्थान के लिए अनेक समाजोपयोगी कार्यक्रम भी प्रारंभ किए। जिसमें प्रौढ़ शिक्षा भी सम्मिलित है। इसके अतिरिक्त उनके पास अखिल भारतीय लोधा लोधी अधिकारी कर्मचारी संगठन (आलोक) के राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष का भी दायित्व है। यह हरित क्रांति, पौधारोपण, महिला सुरक्षा, स्वच्छ भारत मिशन, पर्यटन पर्यावरण कार्यों के साथ-साथ पीड़ित महिलाओं को निस्वार्थ भावना से कानूनी सहायता भी उपलब्ध कराती हैं।</p>
<p><strong>सेवानिवृत्ति के बाद भी कर रही समाजसेवा</strong><br />सितंबर 2022 में राज्य सेवा से निवृत होने के उपरांत इन्होंने अपना संपूर्ण जीवन समाज सेवा एवं सेवा निवृत कर्मचारियों की सेवार्थ समर्पित करने का निर्णय लिया।  यह वर्तमान में अखिल भारतीय लोधा लोधी एवं लोध समाज की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष होने के साथ-साथ राजस्थान पुलिस सेवानिवृत्त पुलिस कर्मचारी कल्याण संस्थान,  कोटा संभाग की मीडिया प्रभारी के पद पर भी नियुक्त हैं तथा अपने कार्य को समर्पण की भावना के साथ निरंतर संपादित कर रही हैं। </p>
<p><strong>जलवाड़ा की बेटी योग एवं आयुर्वेद को पहुंचा रही आमजन तक </strong><br /><strong>किशनगंज। </strong>किशनगंज सरोकार के क्षेत्र में महिलाएं आगे बढ़ रही है। किशनगंज क्षेत्र के जलवाड़ा गांव की बेटी आचार्य सुगन नागर की बचपन से ही सामाजिक कार्यो में रुचि रही है। मध्यमवर्गीय परिवार होने से सामाजिक रूढ़िवादिता के चलते अनेक कठिनाइयों का सामना किया। जगद्गुरुरामानंद अचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय से साहित्याचार्य एवं ज्योतिषाचार्य की उपाधि प्राप्त की। महात्मा गांधी संस्थान से योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा में डॉक्टरी कर रही है। ज्योतिष के क्षेत्र में समाज की प्रथम ज्योतिषाचार्य बनने का गौरव प्राप्त हुआ। ज्योतिष वास्तु योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा संस्थान के माध्यम से योग एवं आयुर्वेद को आमजन तक पहुंचाने का निरंतर कार्य कर रही है। समाजसेवा में हमेशा तत्पर आचार्य नागर ने ज्योतिष में शोध कर डायमंड आॅफ इंडिया अवार्ड, इंडियन टॉप 100 एस्ट्रोलॉजर अवार्ड, शान ए भारत अवार्ड, मध्य प्रदेश गौरव रत्न, शान-ए- राजस्थान सम्मान सहित 11 राष्ट्रीय अवार्ड अपने नाम किए। विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर दैवज्ञ शिरोमणि रजत पदक से भी नवाजा जा चुका है।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Mar 2024 19:12:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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                <title>अभी तो हमने केवल छुई है बुलंदियां, आसमां अभी बाकी है</title>
                                    <description><![CDATA[प्रतियोगिता में भाग लेने वाले छात्र-छात्राओं ने बेबाकी के साथ अपने विचारों को रखा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/right-now-we-have-only-touched-the-heights--the-sky-is-yet-to-come/article-72166"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/abhi-to-hmne-keval-chuyi-h-bulandiya,-asma-abhi-baki-h...kota-news-08-03-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। जब समाज में महिला-पुरूष समानता की बात आती है तो यह काफी कम देखने को मिलता है। आज भी महिलाएं पुरूषों से कम ही आंकी जाती है। हर एक चीज उन्हें बहुत मशक्कत के बाद मिलती हैं। पिछले कुछ सालों की बात करें तो कई महिलाओं ने सभी क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया हैं। इसके बावजूद भी स्वयं के लिए लड़ती आ रही है। आज भी इस पुरूष प्रधान समाज में महिलाओं को अभी भी कई मुद्दों व समस्याओं का समाज करना पड़ता हैं। वास्तव में सफलता तब हासिल होगी जब पुरूषों की मानसिकता में बदलाव होगा तभी महिलाओं का पूरा अस्तित्व विकसित हो सकता हैं। यदि पुरूषों की मानसिकता में बदलाव नहीं होगा तो महिलाओं की इक्वेलिटी नहीं आ सकती। घरेलू या कामकाजी महिला के अधिकारों की बात हो, विधवा-विवाह, पिता की संपत्ति में बेटियों के हक की बात हो, कार्यस्थल पर समानता की हो, देहज समस्या, महिलासुरक्षा, भ्रूण हत्या, हर स्तर पर असमानता हैं। आज भी सामान्य घरों की या पढ़े लिखें घरों की लगभग सभी महिलाओं को चाहे वह घरेलू हो या कामकाजी परिवार के पुरूषों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कुछ बातों से दो-चार होना पड़ता है। महिला-पुरूष समानता की शुरूआत हर घर से होनी चाहिए। हम बेटों के अधिकारों के प्रति तो जागरूक रहते हैं किंतु जब बात बेटियों की आती है तो परंपरावादी रूख अपना लिया जाता है। बेटा-बेटी दोनों के हक और अधिकार समान हैं। इसलिए बंदिशें या पाबंदियां और स्वतंत्रता भी दोनों के लिए समान होनी चाहिए। अंतरराष्टÑीय महिला दिवस के अवसर पर दैनिक नवज्योति ने ह्यओम कोठारी इंस्टीट्यूट आॅफ मैनेजमेंट एण्ड रिसर्चह्व के विद्यार्थियों के साथ प्रतियोगिता आयोजित की। जिसमें उनसे यह पूछा गया कि ह्लआपके अनुसार महिला समानता क्या हैं और इसकी वास्तविकता क्या है!ह्व  प्रतियोगिता में भाग लेने वाले छात्र-छात्राओं ने बेबाकी के साथ अपने विचारों को रखा।</p>
<p>आज भी कई गांवों और यहां तक की शहरों में भी लोग रूढ़ीवादी सोच के शिकार हैं। वे नहीं चाहते कि उनके घर की लड़कियां आगे बढ़े। इससे देश में साक्षरता में कमी आती हैं और भावी पीढ़ी पर भी इसका प्रभाव साफ दिखाई देता है। <br /><strong>- सरफराज अहमद, बीएड, छात्र</strong></p>
<p>ग्रामीण क्षेत्र में महिलाओं की स्थिति में कुछ ज्यादा सुधार नहीं हुआ हैं आज भी बहुत सी जगह बाल-विवाह, लौंगिक उत्पीड़न, दहेज प्रथा जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ग्रामीण इलाकों में शिक्षा के क्षेत्र में भी  महिलाएं काफी हद तक पीछे हैं। <br />- <strong>दीपक गोचर, बीएड, छात्र</strong></p>
<p>लैंगिक समानता ना केवल महिलाओं को बल्कि पुरूषों को भी सामाजिक  रूढ़ियों से मुक्त करती हैं क्योंकि पैसा कमाने का बोझ सिर्फ पुरूषों पर नहीं आता । <br /><strong>- निशा ओरा, बीएड, छात्रा</strong></p>
<p>समाज में जो सोच बनी हुई हैं कि लड़कियां- महिलाएं सिर्फ घर के काम के लिए बनी है इस सोच को बदलना चाहिए।  <br /><strong>- लोकेश कुमार मीणा, डीएलएड, छात्र</strong></p>
<p>देश के अंदर महिलाओं की स्थिति में सुधार की गति धीमी हैं। महिलाएं आज भी अपने आप को सुरक्षित महसूस नहीं करती । किसी लड़की या महिला के साथ अनहोनी घटना होने पर उस लड़की को ही दोषी ठहराया जाता है। कभी उसके कपड़ों तो कभी चाल-चलन पर टिप्पणी की जाती है। उन्हें चुप रहने , बदनामी व समाज के डर से पुलिस स्टेशन न जाने को कहा जाता है। <br /><strong>- रितिका कोटवानी, डीएलएड, छात्रा</strong></p>
<p>महिलाओं पर बढ़ते अपराधों को भी हमें रोकने का भरसक प्रयास करना चाहिए। वर्तमान में महिलाओं पर अत्याचार की घटनाएं बढ़ती जा रही है। यह प्रयास करना चाहिए कि नारी को वहीं सम्मान मिले जो एक पुरूष को मिलता है। <br /><strong>- आकाश महावर, बीएड, छात्र</strong></p>
<p>जब बेटी का जन्म होता है तो बहुत कम लोग है जो उसके पैदा होने पर खुश होते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी यहीं माहौल है। <br /><strong>- तबस्सुम, बीबीए, छात्रा</strong></p>
<p>महिलाओं को सशक्त बनाना होगा । नए-नए कानून बनाने से कुछ नहीं होगा। समाज को जागरूक करने की जरूरत है। समाज जागरूक होगा तो महिलाओं के ऊपर होने वाले अपराध स्वयं ही कम हो जाएंगें। <br /><strong>- कुलदीप मेहता, बीबीए, छात्र</strong></p>
<p>आज जब हम किसी भी अवसर या कार्यक्रम में महिलाओं को समानता देने की बातें तो करते हैं, लेकिन वास्तव में इस बात को कोई भी पुरूष अपने स्वयं पर लागू करने की बात पर ना तो इसे स्वीकार करता हैं और ना ही लागू करता हैं। <br /><strong>- शिवराज मीना, बीएड, छात्र</strong></p>
<p>महिलाओं के प्रति हमारी सोच में बदलाव लाना जरूरी हैं। महिलाएं भी देश का भविष्य होती हैं ऐसी हमारी सोच होनी चाहिए। इसके लिए सरकार ही नहीं बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को इस बारे में कदम उठाने की आवश्यकता है तभी देश तथा महिलाएं आगे बढ़ सकेगें। <br /><strong>- मनीषा सैनी, डीएलएड, छात्रा</strong></p>
<p>माता-पिता को अपनी बेटियों को आगे बढ़ने देना चाहिए। उनकी शादियां करने की जगह उन्हें शिक्षित करना चाहिए। यदि उनके साथ कभी कोई दुर्व्यवहार ससुराल या समाज की तरफ से होता हैं तो भी उन्हें अपनी बेटी को स्वीकार करना चाहिए और उसका साथ देना चाहिए।<br /><strong>- दीपकंवर शक्तावत, बीएड, छात्रा</strong></p>
<p>हम केवल कहते हैं बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ लेकिन इसे वास्तविकता में नहीं निभाते। महिला समानता केवल एक उद्धरण नहीं है बल्कि एक ऐसी चीज है जिसे हमारे सभी कार्यों, विचारों और भावनाओं द्वारा वास्तविकता में व्यवहार में लाया जाना चाहिए। <br /><strong>- साक्षी शर्मा, बीएड, छात्रा</strong></p>
<p>उच्च शिक्षा और पारंपरिक रूप से पुरुषों के प्रभुत्व वाले क्षेत्रों तक महिलाओं की पहुंच के बावजूद  महिलाओं को कार्यबल में भेदभाव और वेतन अंतर का सामना करना पड़ रहा है, जिससे नेतृत्व की स्थिति में उनकी प्रगति में बाधा आ रही है। <br /><strong>- अलफेज मंसूरी, बीसीए, छात्र</strong></p>
<p><strong>प्रतियोगिता का परिणाम</strong><br />प्रतियोगिता में तीन विद्यार्थी विजेता रहे। प्रतियोगिता को सम्पन्न करवाने में ह्लओम कोठारी ग्रुप आॅफ एजूकेशनल इंस्टीट्यूट्सह्व के ग्रुप डायरेक्टर डॉ. अमित सिंह राठौड़ एवं फैकल्टी का सराहनीय योगदान रहा।</p>
<p><strong>प्रथम - गर्वित गुप्ता, बीबीए, फाइनल ईयर</strong><br />-  भारत में महिलाओं को देवी का दर्जा दिया जाता हैं। वहीं दूसरी तरफ उन्हें समाज में हमेशा किसी ना किसी समस्या का सामना करना पड़ता है। भारत में महिलाएं गर्भ से लेकर कब्र तक हिंसा का  सामना करती रहती हैं। <br />- भारत में महिलाओं के सामने आने वाले मुद्दों से लड़ने हेतु हम सभी को एक साथ आना चाहिए। प्रत्येक नागरिक और सरकार को इसे महिलाओं के लिए एक सुरक्षित स्थान बनाने का प्रयास करना चाहिए।<br />-  महिलाओं के खिलाफ अपराधों के लिए कानून और अधिक सख्त बनाया जाना चाहिए।<br />-  महिलाओं को अपने निर्णय लेने हेतु सशक्त बनाना चाहिए ताकि  महिलाओं को भेदभाव का सामना नहीं करना पड़े।</p>
<p><strong>द्वितीय - आशीष जसवानी, एमबीए</strong><br />- महिलाओं का सम्मान करना और उन्हें समान अधिकार और विशेषाधिकार देना, महिलाओं को सुरक्षित महसूस कराना  हमारा कर्तव्य है, लेकिन हमारे समाज में महिलाओं के साथ असमान व्यवहार किया जाता है और पुरुषों द्वारा उनका शोषण किया जाता है। <br />- लैंगिक असमानता आज की दुनिया में सबसे बड़ा मुद्दा है और हमें इस अंतर को दूर करने के लिए पर्याप्त उपाय करने होंगे। भेदभाव से बचने और महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर समान रूप से दिए जाने चाहिए।</p>
<p><strong>तृतीय -  ज्योत्स्ना सोनी, डीएलएड द्वितीय वर्ष</strong><br />- कहीं ना कहीं हम महिला को वंश बढ़ाने का माध्यम मानते हैं तथा घेरलू कार्य की भूमिका में उनका महत्व मानते हैं।<br />- ज्ञान की देवी सरस्वती, धन की देवी लक्ष्मी तथा शक्ति की देवी मां दुर्गा हैं अर्थात् तीनों महत्वपूर्ण आवश्यकताओं की जननी देवी होने के बाद वर्तमान समाज में महिलाओं का अस्तित्व नाम मात्र का है।<br />- रूढ़ीवादी धारणा व्याप्त हैं कि बुढ़ापे का सहारा लड़के होते हैं वर्तमान स्थिति हमें कुछ और संकेत दे रही हैं लड़के अपने मां-पिता का सहारा छोड़ देते हैं लेकिन लड़कियां मरते दम तक दोनों परिवारों को निभाकर चलती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Mar 2024 18:50:24 +0530</pubDate>
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                <title>अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस विशेष : सबसे कठिन था दूध पीते बच्चे को छोड़कर जाना: ऋचा तोमर</title>
                                    <description><![CDATA[ऋचा के पति भी दिल्ली में असिस्टेंट कमिश्नर आॅफ पुलिस है ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/international-women-s-day-special--the-most-difficult-thing-was-to-leave-the-suckling-child--richa-tomar/article-72175"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/antarrshtriye-mahila-diwas-vishesh----sbse-kathin-tha-dudh-pite-bachhe-ko-chordkr-jana---rucha-tomar...jhalawar-news-08-03-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>झालावाड़। उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव के किसान की बेटी ऋचा तोमर के आईपीएस आॅफिसर बनने की कहानी काफी संघर्षों भरी रही है लेकिन यही कहानी कई लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी है।  ऋचा  तोमर ने जीवन में आई सभी चुनौतियों का डटकर सामना किया। आज उनकी सफलता की कहानी से कई लोग सबक ले रहे हैं और हम सभी को सबक लेना चाहिए कि, जीवन में मुश्किलें हमें कमजोर करने के लिए नहीं, बल्कि मजबूत बनाने के लिए आती हैं। आईपीएस  ऋचा  तोमर 2016 बैच की आईपीएस हैं और  राजस्थान कैडर से आती हैं, ऋचा फिलहाल प्रदेश के झालावाड़ जिले की एसपी हैं। जहां उनके काम की हर कोई तारीफ करता नजर आता है। आइए विश्व महिला दिवस के अवसर पर जानते हैं इस महिला आॅफिसर के संघर्ष की प्रेरणादायक कहानी।  ऋचा यूपी के बागपत जिले के हसनपुर जिवानी गांव से आती हैं। उनके पिता किसान हैं और उनके कुल 6 भाई बहन हैं, जिनमें वे चौथे नंबर पर हैं।  उनकी सभी बहनें उच्च शिक्षा प्राप्त हैं और भाई ने भी गेट परीक्षा पास की है। ऋचा स्कूली दिनों से ही पढ़ाई में काफी तेज थीं, उनकी शुरूआती पढ़ाई-लिखाई बागपत शहर क्यों सरकारी विद्यालयों से ही हुई है, इसके बाद उन्होंने चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी, मेरठ से बीएससी किया है जिसमें वे टॉपर रही, वहीं उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएशन में माइक्रो बायोलॉजी से एमएससी किया। ऋचा तोमर ने नेट परीक्षा और जेआरएफ भी पास किया, रिचा ने वर्ष 2015 में यूपीएससी परीक्षा पास की थी, लेकिन उस वक्त उनका तीन महीने का बच्चा था, जिसे छोड़कर वह ट्रेनिंग पर नहीं जा सकती थीं, बच्चे के 1 साल होने पर वह उसे अपने सास-ससुर के पास छोड़कर 2016 में वह ट्रेनिंग के लिए गईं। ऋचा ने बताया कि बच्चे से दूर होना, उनके लिए काफी मुश्किल भरा रहा था, लेकिन उन्होंने अपनी ट्रेनिंग सफलतापूर्वक पूरी की और वह उस बैच के टॉपर्स में से एक रहीं। ट्रेनिंग के बाद उन्हें राजस्थान कैडर अलॉट किया गया। ऋचा के पति भी दिल्ली में असिस्टेंट कमिश्नर आॅफ पुलिस हैं। </p>
<p><strong>जिंदगी एक हॉलिस्टिक पैकेज है</strong><br />एनडीटीवी से खास बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि जिंदगी एक हॉलिस्टिक पैकेज है जिसमें संपूर्ण जा चुकी हुई है ईश्वर सबको बराबर मौके देता है। उन्होंने कहा कि किसी को कहीं कुछ ज्यादा मिल जाता है तो दूसरी जगह कमी हो जाती है इसी प्रकार से किसी और व्यक्ति को वहां ज्यादा मिल जाता है। जहां से आपको काम मिला है लेकिन जहां आपको ज्यादा मिला है वहां से उसको कम मिला होता है।</p>
<p><strong>ऐसे आया अलग पहचान बनाने का ख्याल</strong><br />उन्होंने बताया कि जब वह छोटी थी और अपने गांव के आसपास के लोगों से मिलती थी तो लोग अक्सर पूछते थे कि तुम कौन से नंबर की हो?  यानी की लोग उन्हें नाम से नहीं पहचान कर उनके माता-पिता की वह किस नंबर की संतान है इससे पहचाना करते थे। इसको देखते हुए ऋचा तोमर ने अपने मन में यह ठान लिया कि वह अब अलग पहचान बनाएंगी ताकि लोग उनको उनके नाम से जाने और उनके परिवार को अलग पहचान मिले।</p>
<p><strong>पहली ही बार में क्लियर किया यूपीएससी </strong><br />ऋचा तोमर ने बताया कि उनकी लाइफ स्टाइल में यह संभव नहीं था कि वह लगातार कहीं रहकर कोचिंग करें और महंगी पढ़ाई का खर्च उठा सकें, ऐसे में उनके पिता के कुछ परिचित व्यक्ति जो इस लाइन में पहले निकल गए थे उनसे बातचीत करके उन्होंने गाइडेंस ली और मन लगाकर पढ़ते हुए पहले ही बार में यूपीएससी क्लियर कर लिया। उन्होंने कहा कि अगर वह पहली बार में क्लियर नहीं कर पाती तो आगे उनके लिए टिके रहना बड़ा ही मुश्किल हो जाता।</p>
<p><strong>बच्चे के जन्म के तुरंत बाद ट्रेनिंग में शामिल हुई</strong><br />आईपीएस ऋचाा तोमर ने बताया कि जब उनका यूपीएससी में सिलेक्शन हुआ उससे पहले ही उनकी शादी हो चुकी थी और वह गर्भवती थीं, ऐसे में वर्ष 2015 में वह प्रेगनेंसी के चलते 15 बैच की ट्रेनिंग के लिए नहीं जा पाई और बच्चे को जन्म देने के बाद 2016 बैच की ट्रेनिंग में उनका जाना तय हुआ। लेकिन तब उनका बेटा कुछ ही महीना का था और वह फिजिकली भी पूरी तरह फिट नहीं थी। ऐसे में उनका ट्रेनिंग के शुरूआती दौर में बेहद तकलीफों का सामना करना पड़ा किंतु उन्होंने अपने संघर्ष को लगातार जारी रखा और मुश्किलें पार करती हुई सफलतापूर्वक ट्रेनिंग पूरी की ओर टॉपर रहीं।</p>
<p><strong>झालावाड़ को दी बेहतर कानून व्यवस्था</strong><br />आईपीएस ऋचा तोमर को लगभग 2 साल का समय झालावाड़ एसपी बने हुए हो गया है जहां पर उन्होंने खास तौर पर कम्युनिटी पुलिसिंग को काफी बल दिया है तथा जिले को बेहतरीन कानून व्यवस्था देने की पूरी कोशिश की है जिसमें वह कामयाब भी रही है। इसके अलावा उन्होंने कई बेहद पेचीदा आपराधिक मामलों को भी बड़ी ही सरलता से सुलझाया है, जो उनकी खास उपलब्धि है। झालावाड़ जिला मध्य प्रदेश की सीमा पर है ऐसे में यहां कई तरह के अपराध होते हैं यहां विशेष तौर पर तस्करी के मामले बहुत ज्यादा होते हैं जिन पर वह काफी हद तक शिकंजा करने में कामयाब रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Mar 2024 18:38:44 +0530</pubDate>
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                <title>अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस विशेष : कोई पति के निधन पर ढाबा खोल कर बच्चों की कर रही परवरिश तो कोई कर रही जन सेवा</title>
                                    <description><![CDATA[भले ही दु:खों का पहाड़ टूटा फिर भी महिलाएं हारी नहीं, संकट से परिवार को उबारा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/international-women-s-day-special--after-the-death-of-her-husband--some-are-raising-their-children-by-opening-a-dhaba-and-some-are-doing-public-service/article-72172"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/antarrshtriye-mahila-diwas-vishesh----koi-pati-k-nidhan-pr-dhaba-khol-kr-bachho-ki-kr-rhi-parvarish-to-koi-kr-rhi-jan-seva...sangod,-kota-news-08-03-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>सांगोद।  महिलाएं आज के समाज की एक अहम हिस्सा हैं, हर क्षेत्र और कार्य में महिलाएं पूरी क्षमता के साथ अपना योगदान दे रही हैं। वहीं वर्तमान परिदृश्य में महिलाएं परिवार चलाने से लेकर देश तक को बखूबी संभाल रही है। महिला दिवस को लेकर नवज्योति ने महिलाओं से खास बात की। उन महिलाओं की जो परिवार को संभालने के साथ में बिजनेस, स्कूल और संस्थाएं भी संभाल रही है। इसके अलावा अपने पारिवारिक और सामाजिक जीवन के बीच एक बेहतर सामंजस्य बना रही है। </p>
<p><strong>रचना सिलाई कर बच्चों की अच्छी परवरिश की</strong><br />रचना गोस्वामी( 6-7 साल से सिलाई करके पूरे परिवार को पालना) ने बताया की कि जीवन में कोई भी काम छोटा नहीं होता, और ना ही किसी काम में शर्म करनी चाहिए। रचना गोस्वामी पिछले कई वर्षों से सिलाई का काम कर रही है। रोजमर्रा के काम के बाद दिन भर सिलाई का काम करना, बच्चों की अच्छी परवरिश, पढ़ाई  अच्छे स्कूल में करवाना चुकी पति मंदिर में पुजारी है, इसलिए पूरा खर्च का बोझ इन्ही पर है फिर भी इन्होंने हिम्मत नहीं हारी और खुशी से अपना काम करके जीवन व्यतीत कर रही है।</p>
<p><strong>मीना ने पति के निधन पर ढाबा खोलकर बच्चें को पढ़ाया</strong><br />मीना देवी कुशवाहा ने बताया की आजकल एक कमरे में दो जने रहना पसंद नहीं करते वही हम पांच सदस्य 30 साल से किराए के केवल एक कमरे में रह रहे हैं, 4 वर्ष पहले नहाण के प्रसिद्ध कलाकार पति प्रेम शंकर का हृदयाघात से अचानक निधन हो गया था, उसके बाद दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, मेहनत करके खुद के दम पर ढाबा खोला और बच्चों को पढ़ाया साथ ही पति के निधन के बाद दो लड़कों राजकुमार, दीपक और एक बेटी ममता को पालने की जिम्मेदारी थी। बेटी ने भी मां के संघर्ष को देखा और और पढ़ाई में की जान लगा दी जिससे मेरी बेटी ने 2013 में टॉप किया और उसे लैपटॉप मिला साथ ही व 2012 में गार्गी पुरुस्कार के लिए चयन हुआ।</p>
<p><strong>नहीं हारी, अब जनसेवकर बन कर गांव की सेवा कर रही</strong><br />डाबरी खुर्द की जनसेवन बृजबाला शर्मा ने बताया कि जीवन में कुछ करने की जिद को लेकर आगे बढ़ती रही, जब होश संभाला और पिता के प्यार की सबसे ज्यादा जरूरत थी उसी समय पिता आचार्य पंडित रामचंद्र शर्मा की दुर्घटना में मृत्यु हो गई, उस समय 15 वर्ष की थी, लगा सब कुछ खत्म हो गया, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। पॉलीटिकल साइंस डबल एएम किया, संस्कृत में एएम किया और बच्चों को संस्कृत पढ़ना शुरू कर दिया, मेरे बाबूजी 2014 में शांत होने के बाद अनाथ बच्ची को मेरे बाबू जी के अच्छे मित्र उन्होंने मुझे अपनी बेटी बनाकर मेरी शिक्षा दीक्षा इनके सानिध्य में हुई। 2016 मेरा सिलेक्शन आर्मी ट्रेनिंग के लिए हो गया था लेकिन पारिवारिक कारणों की वजह से नही जा पाई, फिर सोचा देश की नही सही, जन सेवक बनकर काम करूंगा, इसके बाद मुझे गांव वालों का प्यार मिलने लगा, गांव वालों की समस्याएं व मुद्दों को लेकर कभी पीछे नहीं हटी, देखा आपने ही गांव में पीने का पानी, लाइट, सड़क नहीं है गांव के विद्यालय में पर्याप्त कमरे नहीं है, तो चुनाव लडने का मानस बनाया और गांव वालों की वजह से चुनाव जीतकर जिला पंचायत समिति सदस्य के रूप में जनप्रतिनिधि बनी।</p>
<p><strong>ममता गौतम महिलाओं के लिए आवाज उठा रही</strong><br />चार हाटडी, निवासी ममता गौतम ने बताया की महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है, आज का जमाना महिलाओं का ही है चाहे शिक्षा का क्षेत्र हो या कोई और मैं खुद पिछले 10 सालों से महिलाओं और आमजन के लिए आवाज उठा रही हूं, ऐसा कोई मुद्दा नहीं है, जिसके लिए मैं आगे नहीं रही हूं। आज जो मुकाम मैंने मुकाम हासिल किया है। वह कई वर्षों की मेहनत का फल है, सफलता का कोई शॉर्टकट नही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Mar 2024 18:20:34 +0530</pubDate>
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                <title>अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस विशेष : महिलाएं यदि ठान ले तो बहुत कुछ कर सकती हैं</title>
                                    <description><![CDATA[शिक्षा, साहित्य में नाम कमाया और समाजसेवा कर रही है नारी शक्ति ।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/international-women-s-day-special--women-can-do-a-lot-if-they-are-determined/article-72173"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/ph-(1)5.png" alt=""></a><br /><p>बून्दी। कहा गया है कि जब व्यक्ति के दिल और दिमाग की सोच केंद्रित होकर विचार करती हैं तो सेवा का भाव प्रकट होने लगता है, फिर सकारात्मक सोच के साथ आम व्यक्ति भी सेवा के कार्य में जुड़ जाता है। धीरे धीरे यह कारवां बढ़़ता जाता हैं और लोग जुड़ते जाते है। इन सेवा कार्य से मिलने वाली आत्मसंतुष्टि ऐसे सेवाभावी लोगों को प्रतिदिन नई ऊर्जा प्रदान करती है। चाहे वह सेवा किसी प्राणी मात्र की हो, कला की हो या फिर साहित्य की हो। सेवा किसी भी रूप में हो सकती हैं, बस सेवा करने वाला शुद्ध व सात्विक मन से कसारातमक सोच से जुड़ा होना चाहिए। आज महिला दिवस पर आपको ऐसी महिलाओं से रूबरू करवा रहे हैं, जिन्होंने अपने गृहस्थ जीवन को साधते हुए सेवा के इस जज्बें को सार्थक किया। इन्होंने अपने व्यस्ततम समय में से कुछ समय निकाल कर सकारात्मक सोच के साथ सेवा के काय में संलग्न रही। जहां सुमित्रा ओझा अन्नपूर्णा की पर्याय बन क्षुधापीड़ितों की सेवा कर रही हैं, वहीं रेखा शर्मा शिक्षा व साहित्य और ऊषा शर्मा की संगीत की सेवा में शामिल हैं, तो अनुराधा ने तय किया आखर ज्ञान से डिजिटल लर्निंग तक का सफर।</p>
<p><strong>अन्नपूर्णा की पर्याय बनी  सुमित्रा ओझा</strong><br />ईश्वर जिस व्यक्ति को सेवा के लिए प्रेरित करता हैं, उसके अंतरात्मा में ही सेवा का जज्बा जगाता हैं और वहीं व्यक्ति सेवा के लिए समर्पित भी होता हैं। सेवा की इसी प्रेरणा से जुड़ी हुई हैं, 72 वर्षीय सेवानिवृत व्याख्याता सुमित्रा ओझा। पिछले 22 वर्षों से वह बून्दी शहर के खोजागेट स्थित गणेश मन्दिर परिसर में संचालित श्री गणपति सेवा आश्रम की संरक्षिका बन असहाय, निर्धन, निराश्रित व्यक्तियों को निशुल्क भोजन कराने की सेवा में संलग्न हैं। नौकरी के साथ इस सेवा कार्य में इन्हें कई समस्याओं का सामना भी करना पड़ा। कहीं बार बच्चों की समस्या सामने अई तो कहीं बार विद्यालय की समस्याऐं, लेकिन इन्होंने अपने सेवा के व्रत को नहीं छोड़ा। वर्ष 2012 में  सेवानिवृति के बाद यह पूरी तरह से इस सेवा कार्य के प्रति समर्पित हो गई। श्री गणपति सेवा आश्रम में हर दिन हर दिन लगभग 50 से 80 असहाय व निर्धन लोग निशुल्क भोजन ग्रहण करते हैं। खासकर इन लोगों में मानसिक विमंदित भी शामिल हैं, जो अपने परिवार के साथ नहीं रहते। इनमें कुछ लोग ऐसे भी हैं जो काफी वृद्ध और असहाय हैं तो उनके लिए खाना टिफिन में पैक किया जाता है। सुमित्रा ओझा ने एक बच्ची को गोद लिया हुआ है, जिसके पिता की मौत हो चुकी है और मां लकवाग्रस्त है।  बच्ची पढ़ाई लिखाई आदि सभी आम जरूरतों का जिम्मा यहीं उठा रही हैं। सुनिया ओझा की इस सेवा व लगन के चलते शहर के दानदाता मी इस पुण्य कार्य में दरियादिली से अपना सहयोग समय समय पर करते रहते है। आज आश्रम के भंडार में 6 माह तक का राशन हर समय उपलब्ध रहता है, जो उनके इस सेवा कार्य की सफलता बयां कर रहा हैं। आज वहां की बेहतर व्यवस्था को देख कई लोग विभिन्न अवसरों जन्मदिन, वैवाहिक वर्षगांठ या पुण्य स्मृति के अवसर पर भोजन करवाने में आर्थिक सहयोग दरियादिली से करते हैं। इसके अतिरिक्त वहां आए लोगों को जरूरत व मौसम अनुसार कपड़े, जूते, चप्पल व अन्य तरह का सहयोग भी किया जा रहा है। श्रीगणपती सेना आश्रय की सेवाओं तथा इनरव्हील बूंदी की अध्यक्ष के रूप में विभिन्न प्रोजेक्ट्स के माध्यम से सेवा कार्य कर चुकी सुमित्रा ओझा को जिला प्रशासन द्वारा गणतंत्र दिवस सम्मान, वुमेन इंस्पायर अवार्ड 2019 सम्मानित किया गया। सेवा के लिए ओझा की सोच है, कि सेवा से बढ़ करकर कोई सुख नहीं होता। प्रेम से बढ़कर कोई प्रार्थना नहीं होती और सहानुभूति बढ़ कर कोई सौन्दर्य कहीं होता।</p>
<p><strong>नौकरी के प्रस्ताव छोड़ की शिक्षा व साहित्य की सेवा</strong><br />उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में जन्मी रेखा शर्मा 1976 में विवाह के बाद अपने पति अनिल शर्मा एडवोकेट के साथ बून्दी आई और तन मन से बून्दी की होकर रह गई। कानपुर के क्राइस्ट चर्च कॉलेज से पढ़ी लिखी रेखा शर्मा की बचपन से ही संगीत, नृत्य, खेल कूद, साहित्य में रुचि रही। इन्होंने एनसीसी कैडेट, इंटरमीडिएट  में खो-खो तथा बैडमिंटन, डिस्कस, जैवलिन, शॉटपुट में मेडल्स प्राप्त किए तो कॉलेज प्रेसीडेंट भी रही और कॉलेज मैगजीन की एडिटर भी रही। इंटरमीडिएट, बीए तथा एमए में कॉलेज टॉपर रही रेखा शर्मा ने बीए में यूनिवर्सिटी में मेरिट लेकर नेशनल स्कॉलरशिप प्राप्त की। विवाह के पश्चात इन्हें बाहर से बाहर से नौकरी के बहुत प्रस्ताव आए, लेकिन बूंदी में गृहस्थ जीवन को सुचारू चलाने की सोच से उन सभी प्रस्तावों को ठुकरा दिया। उस समय बून्दी में शिक्षा की स्थिति उतनी अच्छी नहीं थी, जितनी आज हैं, विशेष तौर से बालिकाओं की। उच्च शिक्षित बहुमुखी प्रतिभा की धनी रेखा शर्मा ने कुछ अच्छा व कुछ सार्थक करने के विचार से 1986 में लिटिल एंजील शिक्षा समिति की स्थापना कर कड़ी मेहनत तथा निस्वार्थ समर्पण से अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की। रेखा शर्मा को शिक्षा ,संस्कृति तथा सामाजिक क्षेत्र में जिला स्तर पर दो बार सम्मानित ,राज्य स्तर पर शिक्षक रत्न ,समाज कल्याण विभाग जयपुर द्वारा वृद्धजन सम्मान, साहित्य क्षेत्र में नीरज काव्य स्मृति सम्मान ,महादेवी कवियत्री सम्मान ,अमृता प्रीतम मेमोरियल सम्मान ,कल्पना चावला शिक्षक रत्न सम्मान ,राष्ट्र भाषा भूषण सम्मान ,नारी गौरव सम्मान,नारी रत्न सम्मान , हाड़ौती सम्मान ,प्रेमचंद शोध सम्मान , आइडियल इंडियन वूमन सम्मान तथा अन्य अनेक संस्थाओं से अनेकों सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। इनके सफल निर्देशन व नेतृत्व में छात्राएं अंतरराष्ट्रीय किचन जंबूरी में फूड टेबल प्रेजेंटेशन में भारत में प्रथम स्थान पर भी रही हैं। अपने गृहस्थ जीवन को कुशलता से चलाते हुए उन्होंने शहर की बालिकाओं को सर्वगुण संपन्न बनाने की पहल पर निरन्तर चलती रही। यह उस दौर में जब राजस्थान में महिलाओं को घर से बाहर निकलने की मनाई हुआ करती थी, तब न केवल शिक्षा की सेवा में संलग्न रही, साथ ही सभी पारिवारिक दायित्वों को पूरा करते हुए लेखन, समाज सेवा, असहाय शोषित जरूरतमंद वर्ग की सहायता में समर्पित रही हैं। पिछले 45 वर्षो से इनके सफल निर्देशन व नेतृत्व में शहर की कई बालिकाऐं कामयाबी के शिखर तक पहुंची हैं औश्र जिले ही अपितु राज्य राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय स्तर तक अपनी छाप छोड़ चुकी हैं।</p>
<p><strong>अनुराधा का रहा आखर ज्ञान से डिजिटल लर्निंग तक का सफर</strong><br />आज चारों ओर डिजिटल का दौर है, फिर भला शिक्षा विभाग इसमें कैसे पीछे रह सकता था। शिक्षा के क्षेत्र में जब हम प्राथमिक शिक्षा की बात करते हैं, तो सुकोमल अबोध बच्चे व उनकी स्लेट कॉपी का चित्र उभरता है। परंतु यदि प्राथमिक विद्यालय में सभी कक्षाओं के बच्चे स्मार्ट डिजिटल एजुकेशन से जुड़े हुए मिले तो एक स्वप्न सा ही लगता है, ऐसे ही एक स्वप्न को साकार किया बूंदी जिले की नवाचारी शिक्षिका अनुराधा जैन ने। आज से 5 वर्ष पूर्व 2018 में डिजिटल शिक्षा की ओर पहला कदम बढ़ाया और राजकीय प्राथमिक विद्यालय झापड़ी पंचायत समिति हिंडोली जिला बूंदी में 2018 में प्रथम एलईडी लगाई गई। शिक्षिका का उद्देश्य था की अबोध बालक जब पहली बार विद्यालय में कदम रखें तो उन्हें विद्यालय का वातावरण रुचिकर और आनंदमय लगे। नामांकन के साथ ठहराव में भी हो और प्रगति भी हो। जब प्रथम एलईडी जो की भामाशाहों व विद्यालय परिवार के सहयोग से लगाई गई, तो उसके परिणाम सकारात्मक मिलने प्रारंभ हुए। विद्यालय के नामांकन में अत्यधिक वृद्धि हुई, बच्चे गीत कविताओं के माध्यम से अध्ययन में रुचि लेने लगे। तब अध्यापिका ने इसकी उपयोगिता को समझते हुए दूसरी एलईडी भामाशाह  के सहयोग से लगवाई। डिजिटल लर्निंग से बच्चे विद्यालय में बैठे-बैठे ही देश-विदेश की जानकारियां प्राप्त करने लगे अंग्रेजी के उच्चारण में सुधार हुआ। शिक्षिका अनुराधा जैन ने बताया कि सबसे ज्यादा लाभ कोविड़ के समय में मिला जब शिक्षण संस्थाएं बंद थी, परंतु झापड़ी के बच्चों का अध्ययन निर्बाध चलता रहा। अब नन्हें हाथ युटयुब व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से पढ़ाई भी कर रहे हैं और होमवर्क भी कर रहे हैं। डिजिटल लर्निंग के सकारात्मक परिणाम को देखते हुए बच्चों के हित में संपूर्ण विद्यालयों को ही डिजिटल बनाने की ठानी और विद्यालय परिवार तथा मुख्यमंत्री जनसहभागिता से गीत वह भामाशाहों के सहयोग से संपूर्ण विद्यालयों को डिजिटल कर दिखाया अभी हाल में ही दिसंबर माह में एक संस्था के द्वारा पांचवी एलइडी विद्यालय को भेंट की गई इसके साथ-साथ 2018 में देखा गया स्वप्न डिजिटल विद्यालय का 2023 में सरकार हुआ शिक्षिका ने अपने जुनून वी हौसले से प्राथमिक विद्यालयों को राजस्थान के प्रथम पायदान पर लाकर खड़ा कर दिया बिना किसी सरकारी सुविधा सहयोग के डिजिटल विद्यालय का सपना साकार हुआ।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Fri, 08 Mar 2024 17:18:18 +0530</pubDate>
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                <title>अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस विशेष : यह हैं कोटा की कमांडर, जिनके साय में महफूज शिक्षा नगरी</title>
                                    <description><![CDATA[अदम्य साहस और कुशल नेतृत्व से निभा रहीं फर्ज, जिले के महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर आसीन नारी शक्ति । ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/international-women-s-day-special-7--this-is-the-commander-of-kota--with-whom-the-education-city-is-safe/article-72167"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/antarrshtriye-mahila-diwas-vishesh-7---yeh-hai-kota-k-commander-jinke-saye-me-mehfooz-h-shiksha-nagri...kota-news-08-03-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। <em><strong>निगाहों से छलके वो कतरे अब नहीं हैं उसकी पहचान..., </strong></em><br /><em><strong>खामोशी को छोड़ उसने छू लिया है आसमान,</strong></em><br /><em><strong>पथरीली राहों पर चलना अब लगता है उसे आसान, </strong></em><br /><em><strong>हौसला और हिम्मत ही है अब उसकी असली पहचान...</strong></em><br /><em><strong>लाखों परिवारों की निगेहबान हैं महिला अधिकारी </strong></em></p>
<p>कहते हैं, बिजली चमकती हैं तो आकाश बदल देती हैं और जब आंधी उठती हैं तो दिन-रात बदल देती हैं, लेकिन जब-जब नारी शक्ति गरजती है तो, इतिहास ही बदल देती है। महिलाओं के नाम समर्पित आज के इस खास दिन पर हम आपको मिलाने जा रहे हैं, ऐसी शख्सियत से जिन्होंने अपने अदम्य साहस और कुशल नेतृत्व से कोटा की लगाम अपने हाथों में संभाल रखी है। चाहे बात अपराधियों को उनकी औकात दिखाने की हो या फिर बीमारियों के शिकंजे में फंसी जिंदगी को खुशी लौटानी हो। हर क्षेत्र में नारी शक्ति बखूबी अपना फर्ज निभा रहीं हैं।  दरअसल, जिले के महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर महिलाएं आसीन हैं, जो हर दिन चूनौतियों के बीच घर-परिवार की जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्व के प्रति दृढ़ संकल्पित हैं। पेश हैं रिपोर्ट के प्रमुख अंश....</p>
<p><strong>ऐसी आरएएस जिसने बदली महिलाओं की जिंदगी </strong><br />कोटा यूनिवर्सिटी में कुल सचिव ममता तिवारी प्रदेश की पहली ऐसी महिला आरएएस ऑफिसर हैं, जिन्होंने अपने नवाचार से महिलाओं का जीवन बदला। उनकी उपलब्ध्यिों से वे राजस्थान ही नहीं देश-विदेश में भी सुर्खियों में रहीं।  ममता कहतीं हैं, 2017 में बूंदी एडीएम रहते हुए बूंदी जिले में मदर मिल्क बैंक की स्थापना की। इसके लिए सरकार ने आंचल वत्सला पुरस्कार से 2018 में सम्मानित किया। वहीं, सूचना प्रौद्योगिकी में उत्कृष्ट कार्य करने पर पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने आईटी अवार्ड से नवाजा। कोटा में जिला परिषद में सीईओ रहते हुए बेहतरीन कार्यों के लिए राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने 2 अक्टूबर 2022 को नई दिल्ली में राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया गया। हाल ही में 26 जनवरी को राज्यपाल कलराज मिश्र ने विधानसभा चुनाव में कोटा जिले में बेहतरीन कार्य करने पर राज्य स्तरीय निर्वाचन पुरस्कार से पुरस्कृत किया। मई 2021 में जिला परिषद में कई नवाचार किए। जिससे राज्य स्तर पर कोटा प्रथम रहा। मैने जिले की  अनेक ग्राम पंचायतों में खुद की नर्सरी बनवाई। आवास विहीन लोगों के लिए मोड़क में आवासीय कॉलोनी विकसित करवाई। 2021 में अंतरराष्ट्रीय पत्रिका अमेरिकन जर्नल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च में भारत के स्वच्छता अभियान पर लिखे लेख को अमेरिका के अकादमिक जगत में सराहना प्राप्त हुई। रेवेन्यू बोर्ड व राजस्थान विधान सभा के जर्नल में 20 लेख प्रकाशित हो चुके हैं। जिले की सभी आगनबाड़ियों में 100 प्रतिशत शौचालय बनवाए। नरेगा श्रमिकों की मजदूरी में करप्शन पर लगाम लगाने के लिए आधार आधारित भुगतान करवाया।  आरएएस अधिकारी ममता वर्तमान में न्यायालय भू प्रबंध अधिकारी कोटा के पद पर कार्यरत है। </p>
<p><strong>राशन माफियाओं को पहुंचाया जेल </strong><br />कृषि विश्वविद्यालय में कुल सचिव आरएएस ऑफिसर सुनीता डागा बतातीं हैं, वाक्या वर्ष 2012 का है, अजमेर में जिला रसद अधिकारी के रूप में पहली पोस्टिंग मिली। वहां राशन डीलरों की एक यूनियन थी, जो कालाबजारी में लिप्त थे। दुकानें भी उनकी पत्नियों के नाम थी। इलाके में इन यूनियन सदस्यों का इतना खौफ था कि रसद विभाग के कोई भी कर्मचारी इनके खिलाफ नहीं बोलते थे। यह यूनियन रसद सप्लाई में गड़बड़ी करती थी। कमीशन का खेल चलता था। इस पर मैंने इनके खिलाफ एक्शन लिया तो एक दर्जन से ज्यादा लोग ऑफिस आ गए और मेरे चैम्बर के दरवाजे को धक्का देकर अंदर घुस आए। डराने-धमकाने का प्रयास किया। उस दिन मैंने इन्हें सबक सिखाने की ठान ली। इनके खिलाफ कार्रवाई के लिए मेरे ऑफिस का कर्मचारी भी साथ खड़ा नहीं हुआ। लेकिन, तत्कालीन जिला कलक्टर ने सहयोग किया। इसके बाद हमने एफआईआर दर्ज करवाकर आरोपी राशन डीलरों को जेल भिजवाया। इसके बाद से राशन में कालाबजारी व कमीशन का खेल पर अंकुश लग गया। </p>
<p><strong>राजस्थान का मोस्ट वांटेड को दबौचा  </strong><br />2016 बैच की आईपीएस अमृता दुहन लेडी सिंघम के नाम से जानी जाती हैं। जोधपुर में लोरेंस गैंग के ठिकानों पर दबिश देकर 22 बदमाशों को पकड़ सुर्खियों में रहीं। कोटा शहर पुलिस अधीक्षक दुहन कहतीं हैं, वर्ष 2023 में हत्या के मामले में जेल में बंद कुख्यात अपराधी पैरोल से फरार हो गया था। फरारी में ही उसने दो मर्डर और कर दिए थे। वह राजस्थान का टॉप-3 मोस्ट वांटेड था, जिस पर एक लाख का ईनाम था। पुलिस की दबिश से पहले ही वह अपनी जगह बदल देता था। हमें भटकाने के लिए उसने 30 बार से ज्यादा पुलिस के नम्बर पर फेक कॉल करवाए। आसूचनाओं को एकत्रित  सुराग खोजा और 6 महीने बाद आरोपी को गुजरात से धर दबौचा। इसके अलावा नवम्बर 2022 में जोधपुर में एक व्यापारी के साथ 16 करोड़ का साइबर फ्रॉड हुआ। ठगों ने व्यापारी को जाल में फंसाकर 101 बार ट्रांजैक्शन करवाकर करोड़ों ठगे। फ्रॉड में विदेशी गैंग भी शामिल थी। आरोपियों को पकड़ने के साथ रिकवरी करवाना चूनौति था। आखिरकार आरोपियों को गिरफ्तार कर 80 प्रतिशत राशि की रिकवरी भी करवाई। </p>
<p><strong>इस लायक बनो की आपकी आवाज सुनी जाए</strong><br />यूआईटी में वरिष्ठ लेखाधिकारी डॉ. नीतू सिंह कहती हैं, महिलाओं को हर कदम पर खुद को साबित करना पड़ता है। शिक्षा व आत्म कौशल हमें इस लायक बना सकता है कि समाज में आप एक प्रेरणा बन सकें। जेडीबी कॉलेज की छात्र नेता रहीं डॉ  सिंह वर्ष 2010 से छात्राओं में आत्म विश्वास विकास के लिए समर्पित रहीं। महिलाओं व लड़कियों की सुरक्षा के लिए झांसी रानी फोर्स बनाई। पुलिस कॉलेज में तैनात करवाई। ऑटो-रिक्शों को कॉलेज से दूर खड़े करवाए। खुद को एक बार फिर साबित करने के मानस से आरपीएससी फाइट किया। बचपन से ही समाज के लिए कुछ करना चाहती थी इसलिए आरएएस बनना चाहती थी। 2018 की आरएएस परीक्षा फाइट कर आरएएस अधिकारी बनी। डॉ. नीतू कहती हैं, नौकरी के साथ गरीब बच्चों को पढ़ाना चाहती हूं, ताकि उन्हें गुणवत्तापूर्ण जीवन मिल सके। इसके लिए एक एनजीओ से जुड़ी हूं। यदि, कोई बेटी पढ़ना चाहती है तो किसी भी बंदिश की वजह से पढ़ाई न छोड़े, क्योंकि शिक्षा औऱ  कौशल उनकी पहचान बना सकता है, और तब आप समाज को और बेहतर बना सकती हैं। </p>
<p><strong>क्यूआर कोड स्कैन करो, तुरंत होगी सफाई</strong><br />मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य संगीता सक्सैना कहती हैं, कुर्सी पर बैठना स्टेट्स सिंबल नहीं बल्कि जनसमुदाय के प्रति उत्तरदायित्व है। इलाज की राह आसान करना ही मेरा लक्ष्य है। मेरे पास 5 बड़े और 4 छोटे अस्पताल है, जिसे नियंत्रित रखना अपने आप में चुनौतिपूर्ण है। व्यवस्थाएं बनाए रखने के लिए कई बार कड़वे फैसले भी लेने पड़ते हैं। सुबह 10 से शाम 7 बजे तक ऑफिस में रहती हूं। इस दौरान यही कोशिश रहती है कोई भी इलाज के लिए परेशान न रहे। मेरे पास तीन चैलेंज है, पहला सफाई, क्राउड को नियंत्रित करना और हर जगह एरिया एक्सीलेंस डवलप करने पर फोकस है। इसके लिए सभी बड़े अस्पतालों में जगह-जगह क्यूआर कोड लगवाए हैं। कहीं भी गंदगी नजर आए तो दीवारों पर लिखे क्यूआर कोड स्कैन कर ऑनलाइन शिकायत करें, आधे घंटे में सफाईकर्मी मौके पर पहुंच तुरंत सफाई करेंगे। प्लेसमेंट एजेंसी को हायर किया है। अस्पतालों में डॉक्टर व मरीज के बीच परिवार जैसा रिश्ता कायम कर रहे हैं। मरीजों को इलाज के साथ अपनत्व भी मिले, ऐसा परिवेश बना रहे हैं।</p>
<p><strong>हत्यारे व रेपिस्ट को भिजवाया जेल</strong><br />क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला कोटा की अतिरिक्त निदेशक डॉ. राखी खन्ना ने कहती हैं, 1998 में फोरेंसिक डिपार्टमेंट ज्वाइन किया था। जब मौत की असली वजह ढूंढते हैं और उससे पीड़ित परिवार को न्याय मिलता है तो सुकून मिलता है। जयपुर ग्रामीण के फागी क्षेत्र में 7 वर्षीय मासूम से रेप का केस हुआ था। मौके पर हमने सैम्पल कलेक्ट किए। कपड़ों में एक बाल मिला, जिसकी जांच कर पूरी वारदात का पर्दाफाश किया। मौके पर सीमन व ब्लड सैंपल से मिलाकर आरोपी की पहचान करवाई। मेरी रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसी तरह कोटा में नाबालिग छात्रा की हत्या के मामले में भी खुलासा कर आरोपी को आजीवन कारावास की सजा दिलवाई। डॉ. राखी अब तक जयपुर बम ब्लास्ट, आनंदपाल एनकाउंटर केस, वाइल्ड लाइफ, रेप, मर्डर, हत्या को सुसाइड में बदलना, तस्करी सहित कई ब्लाइंड मर्डर की गुत्थी खोल आरोपियों को सजा दिला चुकी हैं। डॉ. खन्ना को कई बेस्ट साइंटिस अवॉर्ड मिले हैं। वहीं, राष्टÑीय व अंतरराष्टÑीय स्तर पर कई जनरल प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने नेशनल इंस्टिट्यूड क्रिमीलोजी एंड साइंटिस नई दिल्ली से फोरेंसिक कोर्सेज, साइबर, टॉक्सीलॉजी सहित कई कोर्सेज किए हैं।</p>
<p><strong>दो बड़े प्रशासनिक पदों को अकेली संभाल रहीं डॉ. दीपिका</strong><br />मेडिकल कॉलेज में कार्यरत डॉ. दीपिका मित्तल नारी शक्ति की अवधारणा साकार कर रहीं हैं। चिकित्सा क्षेत्र में दो बड़े महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों को कुशल नेतृत्व से अकेली संभाल रहीं हैं। एडिशनल प्रिंसिपल द्वितीय  डॉ. मित्तल बतातीं हैं, अप्रेल 2019 में वे चीफ अकेडमिक ऑफिसर बनीं। यह पहला मौका था जब कोटा मेडिकल कॉलेज में पहली बार कोई महिला इस पद तैनात हुई थीं। जब ज्वाइन किया तो लोगों ने बातें बनाई कि ये पद चूनौतियों से भरा है, यह काम महिलाओं के बस का नहीं है। लेकिन, आज भी मुख्य शैक्षणिक पद को संभाल रहीं हूं। वहीं, 1 अक्टूबर 2021 में मुझे मेडिकल कॉलेज का अतिरिक्त प्रधानाचार्य द्वितीय भी बनाया गया। वर्तमान में डॉ. दीपिका, चीफ अकेडमिक ऑफिसर व अतिरिक्त प्रधानाचार्य द्वितीय का कार्यभार संभाल रहीं हैं। अहमदाबाद से मेडिकल एजुकेशन का प्रशिक्षण प्राप्त कर 2013 से 2023 तक डॉ. दीपिका मेडिकल एजुकेशन यूनिट की कोर्डिनेटर रही। अपनी एमईयू टीम के साथ टीचर्स को एनएमसी मानको से फैकल्टी डेवलपमेंट ट्रेनिंग करवाई।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Fri, 08 Mar 2024 15:51:44 +0530</pubDate>
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