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                <title>women's day - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर सीएम ममता बनर्जी ने दी देश की महिलाओं को शुभकामनाएं, गैस कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर केंद्र पर साधा निशाना</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने महिला दिवस पर केंद्र द्वारा रसोई गैस की कीमतें बढ़ाने की तीखी आलोचना की। उन्होंने महिलाओं से काली साड़ी पहनकर विरोध प्रदर्शन करने की अपील की। ममता ने अपनी सरकार की लक्ष्मी भंडार और कन्याश्री जैसी योजनाओं का जिक्र करते हुए बंगाल को महिला सशक्तिकरण का केंद्र बताया और सुरक्षा हेतु अपराजिता विधेयक पर जोर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/cm-mamata-banerjee-congratulated-the-women-of-the-country-on/article-145727"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/mama.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रविवार को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर लोगों को शुभकामनाएं दीं और रसोई गैस की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने राज्य की महिलाओं से इसके विरोध में प्रदर्शन में शामिल होने की अपील भी की।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट संदेश में समाज में महिलाओं के योगदान को रेखांकित करते हुए बंगाल के इतिहास से जुड़ी कई महान महिलाओं को याद किया। उन्होंने लिखा, मैं बंगाल की इस मिट्टी को नमन करती हूं-यह प्रीतिलता वद्देदार, मातंगिनी हाजरा, कल्पना दत्ता, बीना दास, सुनीति चौधरी और मदर टेरेसा की भूमि है। साथ ही उन्होंने घरेलू और वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। </p>
<p>सीएम ममता बनर्जी ने लिखा कि उनकी सरकार हमेशा लोगों के साथ खड़ी रहने की कोशिश करती है, जबकि केंद्र सरकार का काम लोगों को परेशान करना बन गया है। उन्होंने कहा कि गैस की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर लोगों की रसोई पर पड़ेगा। उन्होंने कहा, गैस की कीमतें जिस तरह बढ़ाई गई हैं, उससे लोगों की रसोई प्रभावित होगी। इसलिए बंगाल की महिलाएं आज काली साड़ी पहनकर सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगी।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने रविवार को गैस कीमतों में बढ़ोतरी के खिलाफ महिलाओं के नेतृत्व में राज्य में विरोध मार्च निकालने का आह्वान किया है और प्रदर्शन में शामिल होने वाली महिलाओं से काले कपड़े पहनने को कहा है। इस मौके पर उन्होंने महिलाओं के लिए अपनी सरकार द्वारा शुरू की गई विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि लक्ष्मी भंडार योजना के तहत फिलहाल करीब 2.41 करोड़ महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं। इस योजना के तहत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति परिवारों की महिलाओं को 1,700 रुपये प्रति माह तथा अन्य महिलाओं को हाल ही में 500 रुपये की बढ़ोतरी के बाद 1,500 रुपये प्रति माह दिए जा रहे हैं।</p>
<p>ममता बनर्जी ने कहा कि स्वास्थ्य साथी के तहत लगभग 2.42 करोड़ महिलाओं को स्मार्ट कार्ड मिले हैं, जबकि करीब एक करोड़ लड़कियां कन्याश्री प्रकल्प की लाभार्थी हैं, जिसे यूनेस्को से अंतरराष्ट्रीय मान्यता भी मिली है। अन्य योजनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि रूपाश्री प्रकल्प के तहत करीब 23 लाख महिलाओं को वित्तीय सहायता दी गई है और सबुज साथी के तहत लगभग 1.48 करोड़ साइकिलें वितरित की गई हैं, जिनमें करीब 79 लाख साइकिलें लड़कियों को मिली हैं।</p>
<p>महिलाओं की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में अपराजिता विधेयक पारित किया गया है, 49 महिला पुलिस थाने स्थापित किए गए हैं और महिलाओं से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे के लिए 52 फास्ट-ट्रैक अदालतें बनाई गई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Mar 2026 18:55:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पुरातत्व विभाग: पहली बार महिला दिवस पर बालिकाओं और महिलाओं को स्मारकों में मिलेगा निशुल्क प्रवेश</title>
                                    <description><![CDATA[अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिला सशक्तिकरण को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से 8 मार्च को राज्य में पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के अधीन झाने बाले समस्त संरक्षित स्मारकों और संग्रहालयों में महिलाओं और बालिकाओं को निशुल्क प्रवेश दिया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/archeology-department-for-the-first-time-on-womens-day-girls/article-71901"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/transfer-(11).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिला सशक्तिकरण को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से 8 मार्च को राज्य में पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के अधीन झाने बाले समस्त संरक्षित स्मारकों और संग्रहालयों में महिलाओं और बालिकाओं को निशुल्क प्रवेश दिया जाएगा। इसके लिए मंगलबार को पुरातत्व विभाग के निदेशक ब्रजेश कुमार चान्दोलिया ने आदेश जारी किए।</p>
<p>अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार महिला दिवस पर पहली बार पुरातत्व विभाग के अधीन आने वाले समस्त स्मारकों और संग्रहालयों में महिलाओं और बालिकाओं को निशुल्क प्रवेश देने के आदेश जारी हुए हैं। गौरतलब है कि 30 मार्च राजस्थान दिवस, 18 अप्रेल बिश्व धरोहर दिवस, 18 मई विश्व संग्रहालय दिनस और 27 सितम्बर निश्न पर्यटन दिवस के अवसर पर देसी और विदेशी पर्यटकों को पुरातत्व विभाग के अधीन आने नाले समस्त स्मारकों और संग्रहालयों में निशुल्क प्रवेश दिया जाता है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Mar 2024 19:01:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title> महिला दिवस के उपलक्ष्य में होगा शिमर मिसेज राजस्थान सीजन-3</title>
                                    <description><![CDATA[10 मार्च को बिरला सभागार में होगा ग्रैंड फिनाले]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/shimmer-mrs-rajasthan-season-3-will-be-held-on-the/article-71554"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/ph-(11).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। आम महिलाओं को तराशकर खास बनाना। मॉडल्स नहीं उन्हें रोल मॉडल बनाना। खुद की शक्ति को पहचान दूसरे को भी मोटिवेट करना, ऐसे जज्बे को सलाम करते हुए 10 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपल्क्ष में महिलाओं की छुपी प्रतिभा को पहचान देने के उद्देश्य से एंटरप्रेन्योर वूमेन आर्गेनाइजेशन की ओर से सशक्त महिला, सशक्त समाज की थीम पर ब्यूटी पेजेंट शिमर मिसेज राजस्थान का आयोजन नारायणा हॉस्पिटल, ज्योति विद्यापीठ यूनिवर्सिटी और एजुकेट गर्ल्स के संयुक्त तत्वाधान से आयोजित किया जा रहा है। जिसका ग्रैंड फिनाले बिरला सभागार में 10 मार्च को शाम 5 बजे होगा। जिसमें बतौर सेलिब्रिटी गेस्ट बॉलीवुड प्लेबैक सिंगर शिबानी कश्यप क्राउनिंग और परफॉर्म करेंगी।</p>
<p>आयोजिका अलका अग्रवाल ने शुक्रवार को टोंक रोड स्थित एक होटल में प्रेसवार्ता के दौरान बताया कि  राजस्थान के विभिन्न जिलों से आई एंट्रीज में से 15 महिलाओं को चयनित किया गया, जिनके लिए 10 दिन के विभिन्न  ग्रूमिंग सेशंस होंगे। जिनमे कई एक्सपर्ट अपनी राय देंगे। <br />वैलनेस पार्टनर न्यूट्री आर्ग और कबीरा ऑयल्स द्वारा गुडनेस एंड वैलनेस ब्रांड एंबेसेडर भी इनमें से चयनित किए जाएंगे। जो कि महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना के मुख्य उद्देश्य से लीडरशिप, फिटनेस, एजुकेशन, सीनियर सिटीजन, ऑटिज्म और गर्भवती महिलाओं जैसे सामाजिक मुद्दों के क्षेत्र में काम करने के लिए प्रतिभागियों को ब्रांड एंबेसडर बनाया जाएगा।</p>
<p>अलका अग्रवाल ने बताया कि इससे पहले 7 मार्च को प्री फिनाले एमआई रोड स्थित नाइट जार रेस्टोरेंट में होगा। जिसमें सबटाइटलएस और टैलेंट राउंड की जजिंग की जाएगी। बिड़ला ऑडिटोरियम में आयोजित ग्रैंड फिनाले में बतौर जज गुजरात से मिसेस इंडिया वेस्ट नेहा चावड़ा, आर्च अकादमी की अर्चना सुराणा, सीए अनिल यादव, एसोचैम महिला विग कि अध्यक्ष  श्वेता चोपड़ा उपस्थित रहेंगे।</p>
<p>राजस्थानी संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हर साल राजस्थान के जिलों की टेक्सटाइल्स को शोकेस किया जाता है। इस बार खास आर्च अकादमी के खादी इंस्पायर्ड डिजाइनर आउटफिट्स प्रतिभागी द्वारा रैंप पर शोकेस किए जाएंगे। साथ ही ट्रायबल धरोहर को सहेजने के लिए माउंट आबू और गरासिया कम्युनिटी की महिलाएं खुद के परिधान पहनकर रैंप पर उतरेंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Mar 2024 18:27:11 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>महिला दिवस पर फ्लीका इंडिया ने जेंडर गैप को कम करने के लिए उठाए जरूरी कदम</title>
                                    <description><![CDATA[<p>जयपुर। टायर प्रबंधन कंपनी फ्लीका इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने टायर प्रबंधन उद्योग में महिला सशक्तिकरण की दिशा में आवश्यक कदम उठाए हैं। कंपनी ने ऑटोमोबाइल, लॉजिस्टिक्स और फ्लीट उद्योगों में करियर बनाने के लिए महिलाओं को सशक्त बनाने और उनका समर्थन करने के लिए एक अनूठी पहल की है। साथ ही, कंपनी ने अपनी वर्कफोर्स में जेंडर गैप को कम करने के लिए भी जरूरी कदम उठाए हैं।</p>
<p>मैकिन्से ग्लोबल इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार, ‘भारत की श्रम शक्ति में केवल 25 प्रतिशत हिस्सा ही महिलाओं का है।’ यही स्थिति ऑटोमोबाइल उद्योग में भी है।<br />ऑटोमोबाइल उद्योग को लंबे समय</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/on-women-s-day--fleeka-india-took-necessary-steps-to-reduce-the-gender-gap--decision-to-recruit-women-service-engineers-for-tire-services-on-highways/article-5693"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/11.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। टायर प्रबंधन कंपनी फ्लीका इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने टायर प्रबंधन उद्योग में महिला सशक्तिकरण की दिशा में आवश्यक कदम उठाए हैं। कंपनी ने ऑटोमोबाइल, लॉजिस्टिक्स और फ्लीट उद्योगों में करियर बनाने के लिए महिलाओं को सशक्त बनाने और उनका समर्थन करने के लिए एक अनूठी पहल की है। साथ ही, कंपनी ने अपनी वर्कफोर्स में जेंडर गैप को कम करने के लिए भी जरूरी कदम उठाए हैं।</p>
<p>मैकिन्से ग्लोबल इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार, ‘भारत की श्रम शक्ति में केवल 25 प्रतिशत हिस्सा ही महिलाओं का है।’ यही स्थिति ऑटोमोबाइल उद्योग में भी है।<br />ऑटोमोबाइल उद्योग को लंबे समय से महिलाओं के लिए अनुपयुक्त माना जाता है, जिसका नतीजा यह है कि आज इस पेशे में महिलाओं की भागीदारी बहुत कम है। समझ की कमी, उद्योगों में निर्माण संबंधी कार्यों में विविधता और कौशल विकास कार्यक्रमों तक सीमित पहुंच के कारण भी महिलाओं का प्रतिनिधित्व बहुत कम हो पाया है।<br /><br />ऐसे माहौल में फ्लीका इंडिया कंपनी ने महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए अपने कार्यबल में जेंडर गैप को कम करने के लिए जरूरी कदम उठाए हैं। फ्लीका का मिशन लड़कियों और महिलाओं को और अधिक सशक्त बनाना है, ताकि वे टायर उद्योग को और अधिक गहराई से समझ सकें, उपकरणों और प्रशिक्षण तक उन्हें पहुंच मिल सके और टायर प्रबंधन के क्षेत्र में करियर बनाने की दिशा में विचार करने के लिए उन्हें प्रेरित किया जा सके। <br /><br /> योगिता रघुवंशी के जीवन से ही प्रेरणा लें। उन्हें लॉजिस्टिक्स और परिवहन उद्योग में एक सच्ची सुपरवुमन माना जाता है, वे पहली महिला ट्रक ड्राइवर हैं और यहां तक पहुंचने के लिए उन्होंने जेंडर संबंधी नियमों को धता बताया, जिन्होंने एक ऐसी महिला का सबसे शानदार उदाहरण पेश किया जो कुछ भी हासिल कर सकती है। पहली और एकमात्र महिला ट्रक/टायर मैकेनिक सुश्री शांति देवी को भी ऐसे ही एक और उदाहरण के तौर पर याद किया जाता है। ये दोनों ही सच्ची प्रेरणा हैं जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों को पार करते हुए पुरुष प्रधान सड़क परिवहन उद्योग में अपनी महत्वपूर्ण भागीदारी निभाने के लिए कदम उठाए।</p>
<p><br />इस पहल की शुरुआत करते हुए फ्लीका इंडिया के सीईओ और संस्थापक टीकम जैन ने कहा, ‘‘हमारा मकसद टायर प्रबंधन, टायर सेवा और टायर रखरखाव के क्षेत्र में महिला शक्ति को भी जोड़ना है। हालांकि यह एक मुश्किल काम है, क्योंकि यह एक कठोर और चुनौतीपूर्ण क्षेत्र है, एक ऐसा सेक्टर जिसे महिलाओं के लिए उपयुक्त नहीं समझा जाता। शुरू में मुझे भी यही लगता रहा कि अपने इरादों को हम अमल में कैसे ला पाएंगे, लेकिन जब मैंने देखा कि बड़ी संख्या में महिलाएं भी लाॅजिस्टिक और ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री के साथ जुड़ती जा रही हैं, तो मेरे मन का भय भी दूर हो गया। इस स्थिति ने मुझे प्रेरित किया है, और हम फ्लीका का हिस्सा बनने और संगठन में योगदान करने के लिए नारी शक्ति से सज्जित वर्कफोर्स की तलाश में जुट गए। आज फ्लीका इंडिया ने अधिक से अधिक महिला कर्मचारियों के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं।’’<br /><br />‘‘फ्लीका ने पहले से अधिक जेंडर बैलेंस्ड लॉजिस्टिक्स सोसायटी के लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रतिभावान महिलाओं को तैयार करने और तैनात करने का संकल्प लिया है। सभी स्तरों पर महिलाओं के लिए सीखने की पहल शुरू की गई है, साथ ही उनके लिए आवश्यक कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है और उन्हें जरूरी सलाह और मार्गनिर्देशन भी प्रदान किया जा रहा है। हम इस क्षेत्र में महिलाओं की उपस्थिति के परिणामस्वरूप उद्योग में एक महत्वपूर्ण बदलाव देख रहे हैं, क्योंकि यह ऐसा कार्यबल है, जो अधिक संगठित हैं, जो अधिक कुशल और अनुशासित हैं। इस तरह हम एक स्वच्छ और सस्टेनेबल इकोसिस्टम का निर्माण कर रहे हैं।’’</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 08 Mar 2022 14:13:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>तीन साल में  5793  दुष्कर्म के मामले दर्ज, केवल 129 प्रकरणों में हुई 398 आरोपियों को न्यायालय से सजा</title>
                                    <description><![CDATA[नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया की ओर से उठाए गए इस सवाल के जवाब में संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल ने कहा कि एक जनवरी 2019 से 31 जनवरी 2022 तक कुल प्रकरण 5793 दर्ज हुए हैं। इनमें 129 मामलों में न्यायालय की ओर से 398 आरोपियों को सजा सुनाई गई है।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/5793-rape-cases-registered-in-three-years--in-only-129-cases--398-accused-were-punished-by-the-court--women-and-child-development-minister-mamta-bhupesh-protested-on-this-question-on-women-s-day/article-5686"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/kat.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य विधानसभा में मंगलवार को प्रश्नकाल के दौरान प्रदेश में नाबालिग एवं छोटी बच्चियों के साथ दुष्कर्म/बलात्कार के मामलों को लेकर विपक्ष में सरकार को घेरने की कोशिश की। नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया की ओर से उठाए गए इस सवाल के जवाब में संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल ने कहा कि एक जनवरी 2019 से 31 जनवरी 2022 तक कुल प्रकरण 5793 दर्ज हुए हैं। इनमें 129 मामलों में न्यायालय की ओर से 398 आरोपियों को सजा सुनाई गई है।<br /><br />हालांकि महिला एवं बाल विकास मंत्री ममता भूपेश ने सदन की कार्रवाई शुरू होते ही कहा कि आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस है, ऐसे में महिलाओं अत्याचार से जुड़े सवाल को स्थगित किया जाए। स्पीकर सीपी जोशी ने उन्हें अनुमति नहीं दी और प्रश्नकाल शुरू कर दिया। पहला सवाल नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने हंसते हुए कहा कि प्रदेश में 3 साल में जो दुष्कर्म के मामले दर्ज हुए हैं उनमें केवल 129 मामलों में ही पोक्सो कोर्ट की ओर से आरोपियों को सजा दी गई है ऐसे में यहां तो पोक्सो कोर्ट में आरोपियों के खिलाफ चालान समय पर पेश नहीं हो पाया या इन औरतों की ओर से निर्धारित समय में आरोपियों को सजा नहीं देगी जवाब में संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल ने कहा कि प्रदेश में नाबालिग एवं छोटी बच्चियों के साथ दुष्कर्म/बलात्कार के मामलों में वर्ष 2019 से 31 जनवरी 2022 तक कुल 6628 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें से  कुल 129 प्रकरणों में 398 आरोपियों को न्यायालय से सजा हुई। कुल 4631 प्रकरणों में न्यायालय में चालान पेश किया तथा  283 प्रकरणों में चालान पेश किया जाना शेष है। पुलिस मुख्यालय की ओर से समय-समय पर आदेश निर्देश परिपत्र जारी किये गये हैं। ऐसे अपराधों को रोकने के लिए किए सरकार की ओर से कई कदम उठाए जा रहे है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 08 Mar 2022 13:09:33 +0530</pubDate>
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                <title>मुख्यमंत्री ने दी मंजूरी : अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस पर रोडवेज की बसों में महिलाओं को मिलेगी निःशुल्क यात्रा की सुविधा</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस पर आगामी 8 मार्च को राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम की बसों में यात्रा करने वाली सभी महिलाओं एवं बालिकाओं को निःशुल्क यात्रा सुविधा प्रदान करने का निर्णय किया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/chief-minister-approved--women-will-get-free-travel-facility-in-roadways-buses-on-international-women-s-day/article-5482"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/sahok.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस पर आगामी 8 मार्च को राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम की बसों में यात्रा करने वाली सभी महिलाओं एवं बालिकाओं को निःशुल्क यात्रा सुविधा प्रदान करने का निर्णय किया है। गहलोत ने इस संबंध में प्रस्ताव को मंजूरी दी है। वातानुकूलित एवं वॉल्वो के अतिरिक्त निगम की समस्त साधारण एवं द्रुतगामी बसों में राजस्थान की सीमा तक इस दिन यात्रा करने वाली सभी महिलाएं एवं बालिकाएं निःशुल्क यात्रा सुविधा का लाभ उठा सकेंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
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                <pubDate>Fri, 04 Mar 2022 16:14:35 +0530</pubDate>
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                <title>अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च को है : नारी सम्मान के लिए बदलें मानसिकता</title>
                                    <description><![CDATA[वैसे तो प्राचीन काल से ही दुनिया भर में महिलाओ को पुरुषों की अपेक्षा वो दर्जा नहीं मिल सका है जिसकी वह हकदार हैं,परन्तु शिक्षा और औद्योगिक विकास के साथ-साथ विकसित देशों में महिलाओं के प्रति सोच में परिवर्तन आया है और नारी समाज को पुरुष के बराबर मान-सम्मान और न्याय प्राप्त होने लगा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/international-women-s-day-is-on-march-8--change-mindset-to-respect-women/article-5329"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/women&#039;s-day.jpg" alt=""></a><br /><p>वैसे तो प्राचीन काल से ही दुनिया भर में महिलाओ को पुरुषों की अपेक्षा वो दर्जा नहीं मिल सका है जिसकी वह हकदार हैं,परन्तु शिक्षा और औद्योगिक विकास के साथ-साथ विकसित देशों में महिलाओं के प्रति सोच में परिवर्तन आया है और नारी समाज को पुरुष के बराबर मान-सम्मान और न्याय प्राप्त होने लगा है। उन्हें पूरी स्वतंत्रता, स्वच्छंदता, सुरक्षा एवं बराबरी के अधिकार प्राप्त हैं। कोई भी सामाजिक नियम महिलाओं और पुरुषो में भेद भाव नहीं करता। हमारे देश में स्थिति अभी भी प्रथक है, यद्यपि कानूनी रूप से महिला एवं पुरुषों को समान अधिकार मिल गए हैं। परन्तु सामाजिक ताने-बाने में आज भी नारी का स्थान दोयम दर्जे का है। हमारा समाज अपनी परम्पराओं को तोड़ने को तैयार नहीं है। जो कुछ बदलाव आ भी रहा है उसकी गति बहुत धीमी है। शिक्षित पुरुष भी अपने स्वार्थ के कारण अपनी सोच को बदलने में रूचि नहीं लेता, उसे अपनी प्राथमिकता को छोड़ना आत्मघाती प्रतीत होता है।</p>
<p><br /><strong>लड़की का नहीं स्वतंत्र अस्तित्व</strong> <br />लड़की का संरक्षक बदलना मात्र है, क्योंकि लड़की का अपना स्वतंत्र अस्तित्व नहीं है। उसको एक रखवाला चाहिये। उसकी अपनी कोई भावना इच्छा कोई मायने नहीं रखती। उसे जिस खूंटे बांध दिया जाए उसकी सेवा करना ही उसकी नियति बन जाती है। विवाह पश्चात् वर पक्ष द्वारा भी कहा जाता है की आपकी बेटी अब हमारी जिम्मेदारी हो गयी।  अब मां-बाप को अपनी बेटी को अपने दु:ख दर्द में शामिल करने के लिए वर पक्ष से याचना करनी पड़ती है। उनकी इच्छा होगी तो आज्ञा मिलेगी वर्ना बेटी खून के आसूं पीकर ससुराल वालों की सेवा करती रहेगी।</p>
<p><br /><strong>पति की अपेक्षा</strong><br />इसी प्रकार पति अपनी पत्नी से अपेक्षा करता है की वह उसके माता-पिता की सेवा में कोई कसर न छोड़े, परन्तु वह स्वयं उसके माता-पिता से कैसा भी व्यव्हार भी करे तो चलेगा, अर्थात पत्नी को अपने माता-पिता का अपमान भी बर्दाश्त करना पड़ता है, यानि लड़के के माता-पिता सर्वोपरि हैं और लड़की के माता पिता दोयम दर्जे के हैं, क्योंकि उन्होंने लड़की को जन्म दिया था। क्या आज भी समाज नारी को दोयम दर्जा ही देना चाहता है। माता-पिता लड़के के हों या लड़की के बराबर का सम्मान मिलना चाहिये। यही कारण है की परिवार में पुत्री होने पर परिजन निराश होते हैं,और लड़का होने पर उत्साहित। जब तक समाज एवं परिवार लड़का-लड़की को संतान समझ कर समान व्यवहार नहीं देगा नारी उत्थान संभव नहीं है।</p>
<p><br /><strong>लड़की से ही किए जाते हैं सवाल</strong><br />कहां जाना है, कब तक आओगी, क्यों जाना है, किसके साथ जा रही हो, फ्रेंड से बात करवा दो, फ्रेंड का मोबाइल नम्बर दे कर जाओ, जल्दी आ जाना... ये सब सवाल आखिर लड़की से ही क्यों पूछे जाते हैं। सब समाज कहता है लड़का-लड़की एक सम्मान, तो यहां सम्मान नहीं नजर आता है।</p>
<p><br /><strong>शादी किसी दूसरे शहर में पर नौकरी नहीं</strong><br />आज के समाज में कई ऐसे परिवार भी है जो अपनी लड़कियों को केवल पढ़ाना जानते हैं,उन्हें नौकरी करवाना नहीं। नौकरी करना उनके लिए केवल लड़का करें ये नियत होता है। फिर वहीं घर वाले लड़की की शादी दूर दराज शहर या विदेश में करवा सकते हैं। लेकिन उनकी मेहनत से लगी नौकरी को करने की इजाजत नहीं देते है।</p>
<p><br /><strong> प्रथाएं जो चलती आ रही हैं</strong> <br />अतीत में नारी के प्रति अन्याय, अत्याचार की गवाह सती प्रथा, विधवा विवाह निषेध, बाल विवाह,पर्दा प्रथा जैसी प्रथाओं का अंत होने बावजूद नारी शोषण आज भी जारी है। आज भी समाज में दहेज, हत्याएं, बलात्कार, घरेलु हिंसा की संख्या कम नहीं हो रही है।<br /><br /><strong>अधिकारों के प्रति सजग</strong><br />प्रत्येक वर्ष 8 मार्च पूरे विश्व में महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है। महिला दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य नारी का समाज में सम्मानित स्थान दिलाना और उसके स्वयं में निहित शक्तियों से उसका ही परिचय कराना होता है।<br /><br />वर्तमान युग को नारी उत्थान का युग कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। आज हमारे देश भारत की महिलाएं हर क्षेत्र में अपना पताका फहरा रही हैं। मौजूदा सरकार भी महिलाओं को हर क्षेत्र में अपना भविष्य निर्माण करने का अवसर उपलब्ध करा रही है, जो महिलाओं के विकास के लिए रामबाण साबित हो रहा है। आज भारतीय नारी संकुचित सोच से निकलकर अपने अधिकारों के प्रति सजग हो गई है। शिक्षित होकर विभिन्न क्षेत्रों में वो अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं। नारी को भोग्या मानने वाले पुरुष प्रधान समाज में नारी ने प्रमाणित कर दिया कि वो भी इस पुरुष प्रधान देश में अपना लोहा रख सकती है। साहित्य,समाज, विज्ञान अनेक ऐसे क्षेत्र हैं जिसमें नारी ने अपनी प्रतिभा दिखाई है।</p>
<p><br />देवी अहिल्या बाई होलकर, मदर टेरेसा और कस्तूरबा गांधी जैसी कुछ प्रसिद्ध महिलाओं ने अपने मन-वचन व कर्म से सारे जग संसार में अपना नाम रोशन किया है। इंदिरा गांधी ने अपने दृढ़ संकल्प के बल पर भारत व विश्व राजनीति को प्रभावित किया है। इंदिरा गांधी ने पिता, पति व एक पुत्र के निधन के बावजूद हौसला नहीं खोया और दृढ़ चट्टान की तरह वे अपने कर्म क्षेत्र में कार्यरत रहीं। नारी देवी की प्रतिमूर्ति होती है, जो हर परिस्थिति को सहन कर प्रेमभाव का विकास करती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Mar 2022 14:17:54 +0530</pubDate>
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