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                <title>tobacco - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>असर खबर का - चिकित्सा विभाग की टीम ने स्कूलों के आस-पास तम्बाकू बेचने वाले चार विक्रेताओं पर की कार्रवाई </title>
                                    <description><![CDATA[तम्बाकू विज्ञापन संबधी सामग्री को हटाकर नष्ट करवाया। वहीं सभी दुकानदारों को कोटपा नियमों का पालन करते हुए ही सामग्री विक्रय करने के निर्देश दिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/medical-department-team-took-action-against-four-vendors-selling-tobacco-near-schools/article-68846"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/kota.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में स्कूलों के बाहर बिकने वाले तंबाकू बिक्री पर आखिरकार प्रशासन ने सूध ले ही ली। बुधवार को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम हरकत में आई और आनन- फानन में चार तंबाकू विक्रेताओं के चालान काटकर तंबाकू व विज्ञापन सामग्री को हटाया। उल्लेखनीय है कि दैनिक नवज्योति ने बुधवार के अंक में 'ना गाइडलाइन का खौफ ना बच्चों की चिंता, शहर में खुल्ले आम विद्यालयों के बाहर बिक रहा तंबाकू' शीर्षक से खबर प्रकाशित करने के बाद कलक्टर व सीएमएचओं हरकत में आए और चार लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर जुर्माना वसूला और नोटिस जारी किए। </p>
<p><strong>अब स्कूल के आसपास बिक्री रोकने का चलेगा सघन अभियान</strong><br />सीएमएचओ डॉ. जगदीश सोनी ने बताया कि शहर में स्कूलों एवं शिक्षण संस्थानों के आस-पास तम्बाकू बिक्री की नवज्योति में खबर लगने की सूचना मिलने पर चिकित्सा विभाग का तम्बाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ हरकत में आ गया। कलक्टर डॉ. रविन्द्र गोस्वामी व सीएमएचओ डॉ. जगदीश सोनी के निर्देश पर बुधवार को चिकित्सा विभाग की टीम ने रामपुरा व गुमानपुरा में स्कूलों के आस-पास के क्षेत्र में निरीक्षण कर स्कूलों के निकट 4 तम्बाकू विक्रेताओं के चालान काटे।</p>
<p><strong>सामग्री नष्ट करवाई</strong><br />तम्बाकू विज्ञापन संबधी सामग्री को हटाकर नष्ट करवाया। वहीं सभी दुकानदारों को कोटपा नियमों का पालन करते हुए ही सामग्री विक्रय करने के निर्देश दिए। उल्लंघन होने पर कोटपा अधिनियम के तहत नियामानुसार कार्रवाई करने की चेतावनी दी। इसके साथ ही विभाग द्वारा पुलिस थानों में समन्वय करके विद्यालयों के निकट तंबाकू बिक्री रोकने के लिए सघन अभियान चलाने के संबध में भी वार्ता की गई। कार्रवाई टीम में डिप्टी सीएमएचओ हैल्थ डॉ.घनश्याम मीणा, डॉ सतोष नागर व तम्बाकू नियत्रंण प्रकोष्ठ के कार्मिक शामिल थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 Feb 2024 13:26:31 +0530</pubDate>
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                <title>सरकारी स्कूलों के बाहर सरेआम बिक रहा गुटखा</title>
                                    <description><![CDATA[शहर में कई प्रमुख इलाके ऐसे हैं जहां विद्यालयों के या तो आस पास या उनके गेट के बाहर खुल्ले आम तम्बाकु की बिक्री और धुम्रपान का सेवन किया जा रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/gutkha-being-sold-openly-outside-government-schools/article-68729"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/sarkari-school-k-bhr-sare-aam-bik-rha-gutka...kota-news-31-01-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। विद्यार्थी के जीवन में शिक्षा ग्रहण करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव उसका विद्यालय होता है जीवन में क्या बुरा है क्या सही उसे विद्यालय से ही सीखने को मिलता है जहां विद्यालय और उसके आस पास होने वाली गतिविधियां व वातावरण इन सब में एक बड़ा रोल निभाता है। इसी वातावरण को लेकर सरकारी गाइडलाइंस के अनुसार विद्यालय परिसर के 100 गज के भीतर किसी भी प्रकार के तम्बाकु का क्रय विक्रय या सेवन करना वर्जित है। लेकिन शहर के कई बड़े विद्यालयों के बाहर तम्बाकु पदार्थ बेचते और उनका सेवन करते हुए लोग आसानी से मिल जाएंगे। इन बड़े विद्यालयों में कक्षा 1 से लेकर कक्षा 12 तक सैंकडों विद्यार्थी अध्ययनरत हैं जो रोज विद्यालय के समय में इन गतिविधियों को देखकर उनकी और आकर्षित होते हैं।</p>
<p><strong>कई में सूचना बोर्ड तक नहीं</strong><br />शिक्षा विभाग की ओर से जारी गाइडलाइंस के मुताबिक किसी भी शिक्षण संस्था के अंदर और संस्था परिसर के 100 गज दायर के भीतर तम्बाकु से जुड़ी किसी भी प्रकार की गतिविधि करना सख्त मना है। ऐसा करने पर आरोपी पर 1 हजार रुपए तक जुर्माना या 6 महीने की सजा या दोनों हो सकते हैं। वहीं इसकी सूचना के लिए विद्यालय द्वारा 100 गज दायर में ऐसे स्थान पर धुम्रपान निषेध क्षेत्र का बोर्ड लगाना अनिवार्य है जहां से सभी को साफ दिखाई दे वहीं बोर्ड पर ऐसी गतिविधि की शिकायत के लिए नोडल अधिकारी का नाम, पद मय फोन नंबर अंकित होना जरुरी है लेकिन शहर के लगभग सभी विद्यालयों में या तो बोर्ड मौजूद नहीं है या वो क्षतिग्रत है जिसमें ना नोडल अधिकारी का नाम ठीक से अंकित है और ना ही संपर्क संख्या।</p>
<p><strong>इन इलाकों में विद्यालयों के आस पास तम्बाकु की गतिविधियां </strong><br />शहर में कई प्रमुख इलाके ऐसे हैं जहां विद्यालयों के या तो आस पास या उनके गेट के बाहर खुल्ले आम तम्बाकु की बिक्री और धुम्रपान का सेवन किया जा रहा है। शहर के सबसे प्रमुख इलाके गुमानपुरा में स्थित मल्टी परपज स्कूल के बाहर कई सारी दुकानें संचालित हैं। इन दुकानों में बीच में ही चाय के स्टॉल के नाम से संचालित दुकानों में तम्बाकु और सिगरेट की बिक्री हो रही है। वहीं महावीर नगर तृतीय स्थित उच्च माध्यमिक विद्यालय के गेट नं 2 के पास ही संचालित डेयरी में तम्बाकु पदार्थ बेचे जा रहे हैं। इसके अलावा दादाबाड़ी स्थित सरकारी विद्यालय के बाहर भी कई थड़ियां लगी हुई हैं जिनमें सभी तरह के तम्बाकु पदार्थों की बिक्री की जा रही है। छावनी स्थित राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय के सामने भी ऐसे दुकानें संचालित हैं जिन पर तम्बाकु की बिक्री होती है। इनके अलावा भी शहर में कई विद्यालय ऐसे हैं जिनके या तो गेट के बाहर या 100 गज के अंदर तम्बाकु से संबंधित गतिविधियां संचालित होती हैं।</p>
<p><strong>विद्यार्थियों का कहना है</strong><br />विद्यालय के आस पास थड़ियां लगी हुई हैं जिनमें हर रोज कई तरह के लोग आकर तम्बाकु का सेवन और धुम्रपान करते हैं। स्कूल के अध्यापक भी इस पर ध्यान नहीं देते हैं। <br /><strong>- मुकेश सुमन, विद्यार्थी, दादाबाड़ी</strong></p>
<p>सार्वजनिक स्थान पर तम्बाकु का सेवन या धुम्रपान बैन हैं लेकिन स्कूलों के बाहर आराम से चलता है इनका कोई विरोध नहीं करता ना कारवाई। नई उम्र के बच्चे इन्हें देखकर गलत आदतों की और आकर्षित होते हैं।<br /><strong>- मुस्कान तोगडिया, विद्यार्थी, छावनी</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />विद्यालय परिसर के सौ गज के भीतर तम्बाकु से जुड़ी हुई गतिविधियां वर्जित हैं सभी विद्यालयों में इसकी पालन और नए बोर्ड लगाने के लिए अभी आदेश निकाले हैं। किसी विद्यालय के बाहर ऐसी कोई गतिविधि की शिकायत आने पर तुरंत जिला प्रशासन को दुकान हटाने या कारवाई के लिए अवगत कराते हैं। अगर कहीं पर ऐसा है तो उस पर कारवाई करेंगे।<br /><strong>- चारुमित्र सोनी, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 31 Jan 2024 18:44:53 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>प्रदेश के स्कूलों में तंबाकू नियंत्रण पर शिक्षा विभाग सख्त, अब बनाई कमेटी </title>
                                    <description><![CDATA[ स्कूलों, स्कूलों के आसपास और 18 साल से कम उम्र के बच्चों को तंबाकू नहीं बेचने का कानून पहले से ही राज्य में लागू है। इसके बावजूद खुलेआम स्कूलों के बाहर 18 साल से कम उम्र के बच्चों को तंबाकू बेचा रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/education-department-is-strict-on-tobacco-control-in-schools-of-the-state--now-formed-a-committee/article-68111"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/tobacco.jpg" alt=""></a><br /><p>ब्यूरो/नवज्योति, जयपुर। प्रदेश के स्कूलों में तंबाकू नियंत्रण को लेकर शिक्षा विभाग सख्त है। जो इसकी पालना नहीं करेगा उस पर विभाग कार्रवाई करेगा। अभिभावक संघ बोल रहे है कि विभाग के अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रहे और तंबाकू नियंत्रण की कमेटी में बिना अभिभावकों के कैसे बेहतर काम हो सकता है। दरअसल विद्यार्थियों के किए जा रहे तंबाकू सेवन पर नियंत्रण को लेकर शिक्षा विभाग ने यह कवायद की है और प्रदेश के 70 हजार स्कूलों में तंबाकू नियंत्रण कमेटी गठित करने की घोषणा की है। इस पर संयुक्त अभिभावक संघ ने कहा कि विभाग जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रहा है और तंबाकू मुक्त स्कूल का ढिंढोरा पीटने के लिए बिना अभिभावक कमेटी गठन कर रहा है। स्कूलों, स्कूलों के आसपास और 18 साल से कम उम्र के बच्चों को तंबाकू नहीं बेचने का कानून पहले से ही राज्य में लागू है। इसके बावजूद खुलेआम स्कूलों के बाहर 18 साल से कम उम्र के बच्चों को तंबाकू बेचा रहा है। संयुक्त अभिभावक संघ ना केवल शिक्षा विभाग में बल्कि राजस्थान राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग तक में अनगिनत बार लिखित शिकायत दर्ज करवा चुका है इसके बाद भी आज तक कार्रवाई नहीं हुई है। <br /><br /><strong>तंबाकू मुक्त रहना चाहिए</strong><br />प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन ने कहा कि विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य के लिए प्रदेशभर के सभी स्कूलों को तंबाकू मुक्त रहना चाहिए। साथ ही स्कूलों के बाहर सख्त कानून लागू किया जाए और स्कूल परिसर के 500 मी. दायरे में सभी प्रकार के तंबाकू बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगा दी जाए तो विद्यार्थियों को तंबाकू सेवन से बचाया जा सकता है, किंतु शिक्षा विभाग केवल अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ कर बिना अभिभावक तंबाकू नियंत्रण कमेटी बना केवल स्कूलों का मुनाफा बढ़ाने का कानून बना रहे हैं।<br /><br /><strong>हो कानूनी कार्रवाई </strong><br />प्रदेश अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल ने कहा कि सत्ता परिवर्तन होते ही हर सरकार में पुराने कानूनों को छुपा दिया जाता है और वाहवाही लूटने और पब्लिक सिटी पाने के लिए नए कानूनों को थोप दिया जाता है। बच्चों में तंबाकू नियंत्रण को लेकर पहले से ही कानून बना हुआ है उसकी पालना तो शिक्षा विभाग से नहीं हो रही है और अब नया प्रोपोगंडा लेकर आ गए है, बेहतर होगा शिक्षा विभाग के अधिकारी और कर्मचारी कार्यालयों से बाहर निकले और तंबाकू नियंत्रण को लेकर बने कानूनों की पालना सुनिश्चित करवाते हुए स्कूलों के बाहर खुलेआम बिक रहे तंबाकू बिकी पर रोक लगाएं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jan 2024 10:42:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अधिकारियों-कर्मचारियों ने तंबाकू सेवन न करने की ली शपथ</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जयपुर प्रथम डॉ. विजय सिंह फौजदार ने बताया कि तम्बाकू फ्री यूथ कैंपियन  अभियान की 60 दिवसीय कार्य योजना के तहत जिले में अधीनस्थ चिकित्सा संस्थानों में तम्बाकू निषेध की शपथ दिलाई गई। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/officers-employees-took-oath-not-to-consume-tobacco/article-51473"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/rj-(5)8.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। तम्बाकू फ्री यूथ कैंपैन अभियान के तहत सीएमएचओ कार्यालय और  चिकित्सा संस्थानों में तम्बाकू निषेध संबंधी शपथ ली गई। सीएमएचओ कार्यालय में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जयपुर प्रथम डॉ. विजय सिंह फौजदार ने कार्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों को तम्बाकू निषेध और तंबाकू का सेवन नहीं करने की शपथ दिलाई। </p>
<p>मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जयपुर प्रथम डॉ. विजय सिंह फौजदार ने बताया कि तम्बाकू फ्री यूथ कैंपियन  अभियान की 60 दिवसीय कार्य योजना के तहत जिले में अधीनस्थ चिकित्सा संस्थानों में तम्बाकू निषेध की शपथ दिलाई गई। इसी कड़ी में सीएमएचओ कार्यालय में कार्मिकों को तंबाकू सेवन न करने की एवं परिजनों मित्रों एवं परिजनों को भी तंबाकू उत्पादों और नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करने के लिए प्रेरित करने की शपथ दिलाई गई।</p>
<p>डॉ. फौजदार ने बताया कि अभियान के तहत ग्राम स्तर, ब्लॉक स्तर एवं जिला स्तर पर तंबाकू नियंत्रण पर कई गतिविधियां आयोजित की जा रही। इसमें स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का भी सहयोग लिया जा रहा हैं। इस दौरान जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारी जयपुर प्रथम डॉ. अमन माथुर, जिला कार्यक्रम प्रबंधक, जयपुर प्रथम अखिलेश शर्मा, सोशल वर्कर, जिला तम्बाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ, जयपुर प्रथम संजना जैन उपस्थित रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Jul 2023 15:26:35 +0530</pubDate>
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                <title>भारत में जीएसटी एवं करारोपण नीति</title>
                                    <description><![CDATA[ सुदृढ़ करारोपण नीति वह मानी जाती है जिसमें कर भार डाला भी जाए, लेकिन करदाता महसूस नहीं करें, चाहे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष कर हो।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/gst-and-taxation-policy-in-india/article-16879"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/p-6.jpg" alt=""></a><br /><p>किसी भी देश के आर्थिक विकास एवं प्रगति में सुदृढ़ करारोपण नीति का अत्यधिक महत्व है। सुदृढ़ करारोपण नीति वह मानी जाती है जिसमें कर भार डाला भी जाए, लेकिन करदाता महसूस नहीं करें, चाहे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष कर हो। यदि कर भार करदाता के मध्य असंतोष पैदा करता है, कर चोरी को बढ़ाता है, सरलता खो देता है, तो प्रजातांत्रिक देश में विरोध के स्वर पैदा हो जाते हैं। भारत में लगभग 5 वर्ष पूर्व एक देश, एक कर की अवधारणा पर आधारित अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था जीएसटी को लागू किया था। इससे पूर्व बिक्री कर तथा वैट व्यवस्था चल रही थी, लेकिन राज्यों के मध्य समान कर की दर का अभाव तथा सेवा क्षेत्र में लगाए गए कर बिक्री एवं वैट से बाहर थे। भारत राज्यों का देश है तथा संवैधानिक व्यवस्था यह है कि करारोपण के क्षेत्र में संघीय व्यवस्था है, कर आमदनी का बंटवारा केंद्रीय एवं राज्यों के मध्य निश्चित फार्मुले के तहत किया जाता है। देश में जीएसटी लागू किया गया जिसके अंतर्गत सर्वोच्च निर्धारण शक्ति ना केंद्र के पास है, न ही राज्यों के पास। सभी राज्यों ने मिलकर एक काउंसिल बनाई है, जो कि मिलकर जीएसटी से संबंधित निर्णय एकमतता से लेती है यदि किसी तरह का विरोध भी राज्यों के मध्य पाया जाता है तो एक कमेटी बनाई जाती है, जो अपनी सिफारिशें देती हैं तथा उसकी सिफारिश पर निर्णय जीएसटी की बैठक में ही लिया जाता है।</p>
<p><br />करारोपण नीति के अनेक पहलू है लेकिन कर की दरें अपना प्रमुख महत्व रखती है। जीएसटी के अंतर्गत किस वस्तु पर कितनी कर की दर हो एवं सेवाओं पर कितनी कर की दर हो, इसका निर्णय भी जीएसटी की बैठक में ही लिया जाता है। निर्णय में न तो केंद्र अपना प्रभुत्व रखता है न ही कोई राज्य विशेष। सभी रज्यों के पक्ष को सुना जाता है तथा निर्णय लिया जाता है जिसे केंद्र एवं राज्यों के स्तर पर संबंधित संसद एवं विधानसभा में पारित किया जाता है तथा अनुमोदन महामहिम राष्टÑपति एवं संबंधित राज्यपालों द्वारा किया जाता है। देश में लगभग 1300 वस्तुएं एवं 500 सेवाएं जीएसटी के दायरे में आती है। इसके अंतर्गत 5 प्रकार की कर की दरें क्रमश: 0.5, 12.18, 28 प्रतिशत है। अनेकों आवश्यक वस्तुएं एवं सेवाएं कर के दायरे से बाहर है जिन पर कोई कर नहीं लगता है, लेकिन कराधीन वस्तुओं एवं सेवाओं पर 5 प्रतिशत से लेकर 28 प्रतिशत तक कर लगता है। सोने पर 3 प्रतिशत कर लगता है तथा कच्चे एवं बहुमूल्य स्टोंस 0.25 प्रतिशत कर लगता है।</p>
<p><br />जीएसटी के अंतर्गत पेट्रोल एवं डीजल, तंबाकू एवं पदार्थ संपत्तियों आदि पर वैट एवं बिक्री कर व्यवस्था है लेकिन 5 वर्ष पश्चात भी कर की दरों को लेकर परस्पर विरोध एवं विसंगतियां मौजूद हैं, जो कर चोरी को प्रोत्साहित करती है। इनपुट टैक्स क्रेडिट भी एक समस्या है, जो कि बिक्री की घोषणा पर आधारित है तथा कर चोरी एवं सरकारी कर राजस्व में कमी का कारण बन जाती है।<br />हाल ही में चंडीगढ़ में 47 जीएसटी की बैठक में यह निर्णय लिया गया की गैर ब्रांडेड एवं डिब्बाबंद आदि वस्तुओं पर 5 प्रतिशत जीएसटी लगाया जाएगा, जो कि पहले केवल ब्रांडेड एवं डिब्बाबंद वस्तु पर ही लगाया जाता था। ब्रांडेड एवं डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों जैसे खाद्यान्न, डेरी प्रोडक्ट, दालों, खाद्य तेलों व घी एवं अन्य वस्तुओं का निर्माण देश में नामी कंपनियों के द्वारा ब्रांडिंग के आधार पर डिब्बाबंद रूप से किया जाता है, लेकिन यही कार्य देश में लघु स्तर पर भी स्थानीय इकाइयों द्वारा बिना ब्रांडिंग के लेकिन डिब्बाबंद रूप से किया जाता है, उस पर कोई जीएसटी नहीं था। यदि आवश्यक वस्तुएं खाद्यान्न, तेल एवं घी, डेयरी प्रोडक्ट, दालें आदि यदि खुले रूप से बेचे जाते हैं तो कोई जीएसटी नहीं लगता है। ऐसे में ब्रांडेड कंपनियों ने अपने माल को जीएसटी बचाने के कारण अनब्रांडेड रूप से भी बेचना शुरू कर दिया, जिसकी शिकायतें आ रही थीं। बैठक में जीएसटी के कर आधार को बढ़ा दिया गया जिससे गैर ब्रांडेड एवं डिब्बाबंद वस्तुओं के दाम पांच 5 से 8 प्रतिशत तक बढ़ गई। यदि जीएसटी की दरें बढ़ती है तथा कर आधार बढ़ता है तो निश्चित ही मुद्दा महंगाई से जुड़ता है, यदि आवश्यक वस्तु एवं सेवा से संबंधित है लेकिन क्योंकि इस विसंगति के कारण सरकार को कर राजस्व का नुकसान हो रहा था, बड़ी-बड़ी कंपनियों को फायदा हो रहा था। एक विरोधाभास यह भी है कि यदि पैकिंग 25 किलो तक है तो ही 5 प्रतिशत कर लगेगा इससे अधिक वजन पर नहीं। इसका एक उपाय यह है कि पैकिंग को 25 किलो से अधिक की बना दी जाए तथा उसे खुले रुप से वितरित किया जाए, तो कोई भी जीएसटी नहीं लगेगा। आवश्यकता इस बात की है कि उत्पादकों, व्यापारियों एवं उपभोक्ताओं के मध्य भ्रम की स्थिति ना हो। हो यह रहा है कि 5 से 8 प्रतिशत आवश्यक वस्तु के मूल्य बढ़ा दिए गए हैं, जो कि आमजन की जेब को लूटने का कार्य कर रहे हैं। राज्य के स्तर पर तुरंत कार्यवाही की जानी चाहिए।  </p>
<p><strong>      -डॉ. सुभाष गंगवाल</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong><br /><br /><strong>अर्थजगत</strong><br />जीएसटी के अंतर्गत पेट्रोल एवं डीजल, तंबाकू एवं पदार्थ संपत्तियों आदि पर वैट एवं बिक्री कर व्यवस्था है लेकिन 5 वर्ष पश्चात भी कर की दरों को लेकर परस्पर विरोध एवं विसंगतियां मौजूद हैं, जो कर चोरी को प्रोत्साहित करती है। इनपुट टैक्स क्रेडिट भी एक समस्या है, जो कि बिक्री की घोषणा पर आधारित है तथा कर चोरी एवं सरकारी कर राजस्व में कमी का कारण बन जाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                

                <link>https://dainiknavajyoti.com/gst-and-taxation-policy-in-india/article-16879</link>
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                <pubDate>Sat, 30 Jul 2022 11:31:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तम्बाकू: एक ऐसा जहर है जो पच्चीस रोगों और चालीस तरह के कैंसर को जन्म देता है। </title>
                                    <description><![CDATA[विश्व स्वास्थ्य संगठन की मानें तो तम्बाकू के सेवन से इंसान जिन रोगों का शिकार होता है उनमें कैंसर, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, फेफड़े और श्वांस सम्बंधी रोग प्रमुख हैं। कैंसर में खासतौर से मुंह का कैंसर, गले का कैंसर, फेफड़े का कैंसर, प्रोस्टेट ग्रंथि का कैंसर, पेट का कैंसर और ब्रेन ट्यूमर आदि प्रमुख रूप से शामिल हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/aditorial---world-tobacco-day--tobacco--poison---twenty-five-diseases---diseases--forty-types-of-cancer-cancer-smoking--death/article-10859"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/tambaku.jpg" alt=""></a><br /><p>तम्बाकू एक ऐसा जहर है जो पच्चीस रोगों और चालीस तरह के कैंसर को जन्म देता है। अगर विश्व स्वास्थ्य संगठन की मानें तो तम्बाकू के सेवन से इंसान जिन रोगों का शिकार होता है उनमें कैंसर, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, फेफड़े और श्वांस सम्बंधी रोग प्रमुख हैं। कैंसर में खासतौर से मुंह का कैंसर, गले का कैंसर, फेफड़े का कैंसर, प्रोस्टेट ग्रंथि का कैंसर, पेट का कैंसर और ब्रेन ट्यूमर आदि प्रमुख रूप से शामिल हैं। <strong>तम्बाकू सेवन के मामले में बांग्लादेश 43.3 फीसदी के साथ पहले, रूस 39.3 फीसदी के साथ दूसरे, 34.6 फीसदी के साथ भारत तीसरे नम्बर पर है। चीन 28.1 फीसदी के साथ चौथे स्थान पर है।</strong></p>
<p>विश्व स्वास्थ्य संगठन प्रतिवर्ष 31 मई को विश्व तम्बाकू रहित दिवस के रूप में मनाता है। वह बरसों से तम्बाकू रहित विकास का नारा दे रहा है। उसके अनुसार सभी सरकारों का दायित्व है कि वे धूम्रपान के बढ़ते प्रचलन को खासकर बच्चों व नौजवानों पर विशेष ध्यान दें और उन्हें हमेशा के लिए इस अभिशाप से मुक्ति दिलाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करें। उस दशा में ही हम अपना और अपने बच्चों का भविष्य सुखी और स्वस्थ रखने में कामयाब हो सकेंगे। धूम्रपान की लत जितनी जल्दी शुरू होती है, उसका दुष्परिणाम उतना ही गंभीर होता है।</p>
<p>वयस्क व्यक्ति के नियमित धूम्रपान करने के कारण 50 फीसदी अधिक मृत्यु की संभावना रहती है। इनमें आधे से अधिक तो अधेड़ अवस्था में ही अपनी जीवन लीला समाप्त कर देते हैं। ऐसे लोगों की उम्र 22 साल कम हो जाती है। <strong>दुनिया में धूम्रपान करने वालों की तादाद एक बिलियन है। इनमें 19 फीसदी वयस्क जिसमें 33 फीसदी पुरुष और 6 फीसदी महिलाएं हैं। 80 फीसदी मध्य एवं निम्न आय वर्ग के हैं। 13 से 15 साल के धूम्रपान करने वाले युवाओं की तादाद 24 मिलियन है जिनमें 13 मिलियन तम्बाकू उत्पाद का प्रयोग करते हैं। तम्बाकू के सेवन से दुनिया में 7 मिलियन लोगों की हर साल मौत होती है।</strong> 20वीं सदी में धूम्रपान से 100 मिलियन लोगों की मौत हुई जबकि आशंका है कि 21वीं सदी में तकरीब एक बिलियन लोग इसके शिकार होंगे। अमेरिका में 40 मिलियन लोग धूम्रपान करते हैं।</p>
<p>इनमें 4.7 मिलियन हाईस्कूल में पढ़ने वाले छात्र हैं। वहां धूम्रपान से हर साल तकरीब 5 लाख की मौत होती है। हमारे यहां प्रतिवर्ष 120 मिलियन लोग धूम्रपान करते हैं। हमारे देश में धूम्रपान करने वालों की तादाद दुनिया की 12 फीसदी है। यह जानते -समझते हुए कि तम्बाकू में कैंसर के 70 रसायन पाए जाते हैं। एक सिगरेट में लगभग 400 रसायन तथा 20 कैंसर पैदा करने वाले पदार्थ होते हैं। धूम्रपान करने वाले व्यक्ति में सामान्य व्यक्ति की अपेक्षा हृदयरोग तथा कैंसर की संभावना 25 से 30 फीसदी अधिक होती है। इसके बावजूद 1998 से लेकर देश में तम्बाकू का सेवन करने वाले लोगों की तादाद में 36 फीसदी से ज्यादा का इजाफा हुआ है।</p>
<p>यह जानने के बाद कि तम्बाकू के पौधे से कृषि, मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण को काफी नुकसान होता है। ग्लोबल एडल्ट टोबेको सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार भारत की कुल 130 करोड़ की आबादी में से 28.6 फीसदी लोग तम्बाकू का सेवन करते हैं। 18.4 फीसदी युवा न सिर्फ  तम्बाकू, बल्कि बीड़ी, खैनी, गुटका और अफीम का भी सेवन करते हैं। देश में तकरीब 15 करोड़ पुरुष और 15 साल से अधिक की 7.8 करोड़ से अधिक महिलाएं नियमित रूप से धूम्रपान की लत की शिकार हैं। 40 लाख के करीब 15 साल से कम उम्र के बालक इसके शिकार हैं। देश में मिजोरम ऐसा राज्य है जहां 34.4 फीसदी लोग धूम्रपान करते हैं जो पूरे देश में सबसे ज्यादा हैं। आजकल नवयुवतियों-कॉलेज छात्राओं और महिलाओं में धूम्रपान एक फैशन और नौजवान पीढ़ी की पहली पसंद हुक्का बन गया है। यह खतरनाक संकेत है। हमारे यहां हर साल 85,000 पुरुषों में और 34,000 महिलाओं में कैंसर के नए मामले सामने आते हैं जिनमें 90 फीसदी से ज्यादा मामलों में तम्बाकू का प्रयोग होता है।</p>
<p>धूम्रपान के कारण महिलाओं में कैंसर के मामलों के अलावा मासिक धर्म के कम होने, दर्द होने, विटामिन सी की कमी, शरीर पर बाल अधिक होने, चेहरे पर झुर्रियां होने और उनके दूध में निकोटिन की मात्रा बढ़ने की शिकायतें आम होती हैं। गर्भवती महिला के धूम्रपान करने से बच्चे के मंदबुद्धि होने, वजन कम होने और श्वांस नली में विकार होने की आशंका बनी रहती है। तम्बाकू 41 फीसदी कैंसर से होने वाली मौतों के लिए तो जिम्मेवार है ही, वह न सिर्फ इसका सेवन करने वालों को बीमार कर रहा है बल्कि आसपास रहने वाले लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।</p>
<p>एम्स के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर एस वी एस देव का कहना है कि एम्स में पिछले कई सालों से ऐसे रोगी आ रहे हैं जिनको ये बीमारी उनके आसपड़ोस, घर में रहने वाले लोगों से हुई। एम्स के ही एक अन्य प्रोफेसर डा. आलोक ठक्कर कहते हैं कि अब तो ऐसे बच्चों के केस आ रहे हैं जो घरवालों के धूम्रपान करने के कारण अस्थमा और कान की बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। यही नहीं घरवालों के धूम्रपान या तम्बाकू सेवन के कारण महिलाओं में बच्चेदानी के कैंसर के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है।</p>
<p>इसका खुलासा करते हुए एमजीएम मेडीकल कालेज, जमशेदपुर की गायनिक विभाग की प्रोफेसर डा. बनीता सहाय का कहना है कि तम्बाकू के सेवन से पुरुषों के वीर्य में एचपी वायरस फैल जाता है। एचपी वायरस को सर्विक्स यानी बच्चेदानी के मुख के कैंसर का प्रमुख कारणों में से एक माना जाता है। उनके अनुसार पहले महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामले अधिक पाए जाते थे लेकिन अब बीते बरसों से बच्चेदानी के मुख के कैंसर के मामले तेजी से बढ़े हैं।</p>
<p>देश में ऐसे मामले दूसरे देशों की तुलना में अधिक सामने आ रहे हैं। ऐसे मामलों में देश में हर आठ मिनट में एक महिला की मौत हो रही है। एम्स की प्रोफेसर डा. नीरजा बटाला का कहना है कि यदि 45 साल तक की महिलाओं को एचपीवी का टीका लग जाए तो बच्चेदानी के मुख के कैंसर से 80 फीसदी तक बचा जा सकता है। तम्बाकू के सेवन से देश में हर साल एक मिलियन यानी दस लाख लोगों की मौत हो जाती है। जबकि 2 अक्टूबर 2008 से सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान करने पर पाबंदी है। शुरू में तो इस पाबंदी का कुछ असर दिखाई भी दिया लेकिन उसके बाद यह बेमानी हो गई। यही हाल तम्बाकू नियंत्रण एवं उद्योगों की जबावदेही के लिए बनी अंतरराष्ट्रीय संधि ‘‘फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन टोबेको कन्ट्रोल’’ का है।</p>
<p>यह दुनिया में पहली संधि है जो जन स्वास्थ्य व उद्योगों की जबावदेही के लिए बनी है। विडम्बना यह कि सिगरेट निर्माता कंपनियां उपभोक्ताओं को ही केन्द्र बिन्दु नहीं बना रहीं बल्कि सरकारी माध्यमों का भी अपने हिसाब से इस्तेमाल कर रही हैं। अब सवाल यह उठता है कि प्रभावकारी तम्बाकू नियंत्रण एवं उद्योगों की जबावदेही के लिए बनी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संधि होने के बावजूद आखिर इन कंपनियों पर प्रभावकारी नियंत्रण क्यों नहीं लग पा रहा है। कारण इनका वैश्विक स्तर पर इतना जबरदस्त जाल फैला है जिसके चलते केवल संधियों से तम्बाकू नियंत्रण की आशा बेमानी है। सबसे बड़ी बात यह कि तम्बाकू से होने वाली हर मौत को रोका जा सकता है यदि तम्बाकू सेवन पर अंकुश लगे। इस दिवस का यही पाथेय है।<br /><br /><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>तम्बाकू निषेध दिवस</strong></span><br />धूम्रपान की लत जितनी जल्दी शुरू होती है, उसका दुष्परिणाम उतना ही गंभीर होता है। वयस्क व्यक्ति के नियमित धूम्रपान करने के कारण 50 फीसदी अधिक मृत्यु की संभावना रहती है। इनमें आधे से अधिक तो अधेड़ अवस्था में ही अपनी जीवन लीला समाप्त कर देते हैं। ऐसे लोगों की उम्र 22 साल कम हो जाती है। दुनिया में धूम्रपान करने वालों की तादाद एक बिलियन है। <br />  <br /> <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 May 2022 12:48:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> तंबाकू निषेध दिवस  आज : तंबाकू का सेवन मानव शरीर के लिए ही नही, पर्यावरण के लिए भी है कैंसर</title>
                                    <description><![CDATA[तंबाकू उत्पादों के सेवन से देशभर में करीब 13 लाख लोग अकारण ही मौत के शिकार होते हैं। राजस्थान में करीब 65 हजार लोगों की मौत होती है। तंबाकू के सेवन से मुंह, फेफड़े, हार्ट और गले का कैंसर होता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-news-health-no-tobacco-day-today--tobacco-consumption-is-not-only-for-the-human-body--it-is-also-for-the-environment--cancer/article-10857"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/world-no-tobacco-day.jpg" alt=""></a><br /><p>अक्सर हम सब सोचते हैं कि बीड़ी, सिगरेट, पान, गुटखा सहित धूम्रपान उत्पादों के सेवन से कैंसर हो सकता है, लेकिन ये उत्पाद हमारे पर्यावरण के लिए भी कैंसर बन रहे हैं। इसकी बड़ी वजह यह है कि उपभोग के बाद इनके रैपर को खुले में फैक दिया जाता है। कुछ ही समय बाद ये सब नालियों में जमा हो जाते हैं। इससे नालियां भी अवरुद्ध होती है और इसके विषैले पदार्थ मिट्टी में या उसके माध्यम से भूमिगत पानी में भी चले जाते हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि तंबाकू उत्पादों में 7 हजार से अधिक विषैले रसायन होते हैं, जो ना केवल मानव स्वास्थ्य, बल्कि पर्यावरण पर भी बड़े खतरे के रूप में उभर रहे हैं ।</p>
<p>सवाई मानसिंह अस्पताल के कान-नाक और गला विभाग के आचार्य डॉ. पवन सिंघल ने बताया कि सिगरेट, बिड़ी के टुकड़े, लोगों द्वारा पान सुपारी, गुटखे की पीक जमीन पर थूकने से जमीन का पानी विषैला हो रहा है। सिगरेट के बट में प्लास्टिक होता है जो कभी गलता नहीं है। सिगरेट बट को बनाने वाले पदार्थ सेल्यूलोज एसीटेट, पेपर और रेयॉन के साथ मिलकर पानी और जमीन को भी प्रदूषित और विषेला बना रहे हैं। </p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>तंबाकू कैंसर का बड़ा कारण</strong></span></p>
<p>तंबाकू उत्पादों के सेवन से देशभर में करीब 13 लाख लोग अकारण ही मौत के शिकार होते हैं। राजस्थान में करीब 65 हजार लोगों की मौत होती है। तंबाकू के सेवन से मुंह, फेफड़े, हार्ट और गले का कैंसर होता है। <span style="background-color:#ffff99;"><strong>ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे 2017 के अनुसार राजस्थान में वर्तमान में 24.7 प्रतिशत लोग किसी न किसी रूप में तंबाकू का उपयोग करते हैं। इसमें 13.2 प्रतिशत लोग धूम्रपान के रूप में सेवन करते हैं, जिसमें 22 प्रतिशत पुरुष, 3.7 प्रतिशत महिलाएं हैं। इनमें से 14.1 प्रतिशत लोग चबाने वाले तंबाकू का प्रयोग करते हैं, जिसमें 22 प्रतिशत पुरुष व 5.8 प्रतिशत महिलाएं है।</strong></span></p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>हैड-नेक कैंसर के 95 प्रतिशत मामले तंबाकू सेवन से</strong></span></p>
<p>नारायणा मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल जयपुर के कंसल्टेंट ईएनटी, हैड एंड नेक सर्जरी डॉ. दीपांशु गुरनानी ने बताया कि हर साल करीब 2 लाख हेड एवं नेक कैंसर से जुड़े मामले आते हैं, जिसमें से करीब 95 प्रतिशत मामले तंबाकू सेवन के हैं। युवाओं में तंबाकू सेवन को बढ़ावा देने का मुख्य कारण सोशल मीडिया और प्रतिष्ठित व्यक्तियों द्वारा किए विज्ञापन हैं। कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. रोहित स्वामी का कहना है कि सैकण्ड हैण्ड स्मोकिंग भी धूम्रपान करने जितना ही खतरनाक है, क्यूंकि ये सीधा फेफड़ों पर असर डालता है, जिससे कई बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए धूम्रपान और निष्क्रिय धूम्रपान से बचें। आजकल तंबाकू छोड़ने के लिए दवाइयां और निकोटिन थेरेपी भी उपलब्ध हैं।</p>
<p><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>कैंसर का उपचार संभव</strong></span></p>
<p>मणिपाल हॉस्पिटल जयपुर की रेडिएशन ओन्कोलोजिस्ट डॉ. पूनम गोयल ने बताया कि तम्बाकू को किसी भी रूप व मात्रा में लेना घातक है। आज के युग में समय रहते पता लगने पर कैंसर का उपचार संभव है। कैंसर के मुख्य लक्षणों की बात करे तो सांस फूलना, भूख नहीं लगना, मूंह से खून आना, वजन कम होना, छाती में दर्द होना आदि है। इन सबको महसूस होते ही अच्छे चिकित्सक की सलाह लेकर तुरंत उपचार करवाना चाहिए। निम्स के मनोचिकित्सक डॉ. तुषार जग्गावत ने बताया कि धूम्रपान के मनोवैज्ञानिक पहलू भी हैं। कुछ लोगों के लिए धूम्रपान एक मजा है और यह उन्हें मनोवैज्ञानिक आनंद देता है साथ ही यह आत्म अभिव्यक्ति की एक कला है। कई लोगों के लिए, यह काम के दौरान आराम करने के लिए और खुशी के क्षण को जीने का एक बहाना है। बिहेवियरल थेरेपी और फार्माकोलॉजिकल थैरेपी दोनों उपचारों को मिलाकर उपचार करने पर तम्बाके छोड़ने की सफलता दर अधिक होती है।</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 May 2022 12:10:26 +0530</pubDate>
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                <title>तंबाकू बेचान पर 9.83 लाख लोगों के काटे चालान</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान में तंबाकू नियंत्रण और जागरूकता के माध्यम से तंबाकू फ्री राजस्थान बनाने के लिए चिकित्सा विभाग ने कोटपा एक्ट के तहत रिकॉर्ड कार्रवाई की और 9,83,466 लोगों के चालान काटे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-invoice-of-9-83-lakh-peoples-were-deducted-on-tobacco/article-8979"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/tobacco-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में तंबाकू नियंत्रण और जागरूकता के माध्यम से तंबाकू फ्री राजस्थान बनाने के लिए चिकित्सा विभाग ने कोटपा एक्ट के तहत रिकॉर्ड कार्रवाई की और 9,83,466 लोगों के चालान काटे। सार्वजनिक स्थानों पर तंबाकू उपयोग और बेचान पर एक दिन में इतनी बड़ी कार्रवाई अब तक प्रदेश में नहीं हुई। महीने के अंतिम दिन विभाग ने तंबाकू की दुकानों को बंद रखने के लिए पाबंद किया है, वहीं सार्वजनिक स्थानों पर सेवन पर भी प्रतिबंध है। चिकित्सा विभाग के शासन सचिव जितेन्द्र कुमार सोनी की मॉनिटरिंग में प्रदेश में विभाग की टीमें सार्वजनिक स्थानों पर पहुंची। बेचान और सेवन करने वालों पर कार्रवाई की।</p>
<p>जयपुर संभाग में 1,94,392, बीकानेर संभाग में 81,180, जोधपुर संभाग में 81,104, कोटा संभाग में 2,48,069, अजमेर संभाग में 1,54,333 और भरतपुर संभाग में 53,650 चालान काटे गए। तंबाकू नियंत्रण और इससे फ्री राजस्थान बनाने के लिए 100 दिवसीय महाभियान चल रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 May 2022 10:12:37 +0530</pubDate>
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                <title>तंबाकू मुक्त राजस्थान की तैयारी, झुंझुनूं से होगी शुरुआत</title>
                                    <description><![CDATA[जानलेवा तंबाकू :     हर साल 77 हजार की हो रही है मौत, प्रदेश की 24.7 फीसदी आबादी तंबाकू का सेवन कर रही, जयपुर के एसएमएस अस्पताल में ही 15 हजार तंबाकू सेवन से कैंसर ग्रसित होकर आ रहे,  40 फीसदी कैंसर मरीज ऐसे जिन्होंने कभी ना कभी तंबाकू का सेवन किया है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/preparation-for-tobacco-free-rajasthan-will-start-from-jhunjhunu--4-1--of-children-in-the-age-group-of-13-to-15-years-are-also-consuming--deadly-tobacco--77-thousand-are-dying-every-year--24-7--of-the-state-s-population-is-consuming-tobacco/article-5372"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/tobacco.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। नशे से मुक्त करने की कड़ी में चिकित्सा विभाग ने राजस्थान को तंबाकू मुक्त प्रदेश बनाने की कवायद शुरू की है। इसके लिए पहले चरण में सौ दिवसीस प्लान तैयार किया है। खास बात यह है कि इस मुहिम में जिलों के कलेक्टर से लेकर सबसे छोटी हेल्थ वर्कर्स माने जाने वाली आशा सहयोगिनियों तक को लगाया जाएगा। ग्राम पंचायतों में तंबाकू मुक्ति के प्रस्ताव पारित कराए जाएंगे। इसकी शुरुआत झुंझुनूं जिले की 46 ग्राम पंचायतों से होने जा रही है। चिकित्सा मंत्री परसादी लाल मीणा की अध्यक्षता में इसे लेकर पहली बैठक हुई है। इसमें एनएचएम डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी ने तंबाकू मुक्त राजस्थान बनाने का अपना सौ दिवसीय प्लान रखा है। झुंझुनूं के नवलगढ़ ब्लॉक की 46 ग्राम पंचायतों के प्रधान दिनेश सुंडा सबसे पहले इसके लिए आगे आए हैं। जिले के तंबाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ ने मुक्ति के लिए अपनी योजना भी बताई है। अभियान में जिला कलेक्टर, एसडीएम, चिकित्सा विभाग के सभी क्षेत्रीय अफसरों को जिम्मा दिया जाएगा। गुरुवार को प्रदेशभर के अधिकारियों की बैठक भी होगी। जागरूकता के लिए अभियान भी चलेंगे।  <br /><br /><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>यूं चलेगा अभियान</strong></span><br />चिकित्सा विभाग स्थानीय प्रशासन के सहयोग से पंचायत स्तर के जनप्रतिनिधियों को इसके लिए तैयार करेगा। पंचायत में प्रस्ताव पास करवाएगा। इसके बाद यहां पंचायत तंबाकू मुक्त कर अपने अन्य सदस्यों, ग्रामीण इलाकों में वे सरकारी मदद से लोगों के तंबाकू छोड़ने के संकल्प पत्र भरवाएंगे। नशा मुक्ति केन्द्रों में आदतन लोगों को लत छुड़वाने के लिए चिकित्सा सेवा भी दिलवाएंगे। <br /><br /><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>फिर शुरू होगा महीने में आखिरी दिन प्रतिबंध</strong></span><br />दो साल पहले प्रदेश में महीने के अंतिम दिन तंबाकू के बेचान पर प्रतिबंध से एकबारगी इसकी शुरुआत हुई थी, लेकिन बाद में अभियान बंद हो गया। इसे भी फिर से व्यापार मंडलों की मदद से शुरू किया जा रहा है। <br /><br /><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>कोटपा एक्ट से भी होगी सख्ती</strong></span><br />तंबाकू के सार्वजनिक स्थल, दफ्तरों, स्कूलों के पास इत्यादि तय जगहों पर तंबाकू के सेवन पर कोटपा एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई होगी। प्रतिबंधित क्षेत्रों में सेवन करने वालों पर दो सौ रुपए का जुर्माना लगेगा।<br /><br />अभियान के शुरुआती सौ दिन की कार्य योजना तैयार है। पंचायतों में प्रस्ताव पास करवाएंगे। स्कूलों में बच्चों को जागरूक करेंगे। नशा मुक्ति केन्द्रों का भी उपयोग होगा। -<strong>डॉ. एसएन धौलपुरिया, नोडल अफसर, तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Mar 2022 10:26:52 +0530</pubDate>
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