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                <title>world wildlife day today - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>world wildlife day today RSS Feed</description>
                
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                <title>वन्यजीव दिवस पर विशेष शेर का साक्षात्कार : असली बहादुर हम शेर नहीं, हमारी शेरनियां होती हैं!</title>
                                    <description><![CDATA[शेरों की आदत पर कहा, शिकार-विकार मैडम लोग कर लाती है और मजबूरी में हम भोर या संध्या में तभी निकलते हैं, जब मौसम थोड़ा ठंडा और बेहतर हो। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/special-lion-interview-on-wildlife-day-is-real-brave-we/article-106157"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/257rtrer-(5)3.png" alt=""></a><br /><div>जयपुर। नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में पहुंचते हैं तो क्या देखते हैं कि शेर साहब सोए पड़े हैं। पूछा तो पता चला महाशय 16 से 20 घंटे सोते हैं। शेर इसलिए भी ज्यादा सोते हैं, क्योंकि वे भोजन खाते हैं, उसमें प्रोटीन बहुत होता है और इस प्रोटीन को अच्छे से पचाने के लिए नींद की बहुत जरूरत होती है। </div>
<div> </div>
<div><strong>शेर जी, इतना ज्यादा क्यों सोते हो </strong></div>
<div>हम जैसे उससे पूछते हैं कि शेर महोदय आप इतना क्यों सोते हो? वह नींद में ही जैसे बोले, एनर्जी बचाता हूँ। गरमी बहुत लगती है तो पूरे दिन सोकर थोड़ा राहत पाने की कोशिश करता हूँ। शेरों की आदत पर कहा, शिकार-विकार मैडम लोग कर लाती है और मजबूरी में हम भोर या संध्या में तभी निकलते हैं, जब मौसम थोड़ा ठंडा और बेहतर हो। </div>
<div> </div>
<div><strong>नींद के अनोखे अंदाज की वजह </strong></div>
<div>हम अक्सर गुट (प्राइड) में सोते हैं, जिससे हमें सुरक्षा मिलती है। हम छायादार स्थानों जैसे पेड़ के नीचे या झाड़ियों में आराम करना पसंद करते हैं। हम किसी भी मुद्रा में सो सकते हैं—पीठ के बल, फैले हुए, या गोल-गोल सिकुड़कर। आराम करते हुए भी हम हमेशा चौकस रहते हैं और खतरे को भांप सकते हैं।</div>
<div> </div>
<div><strong>शेर की नींद से जुड़े दिलचस्प तथ्यहम शेर हैं और कहीं भी सो सकते हैं</strong></div>
<div>पेड़ों के नीचे, गहरी ऊंची घास, चट्टानों या सड़क के बीच-कहीं भी सो सकते हैं। बस हमें सुरक्षित महसूस होना चाहिए।</div>
<div> </div>
<div><strong>शेर के सोने की अजीबोगरीब मुद्राएं</strong></div>
<div>हम बिल्लियों की तरह फैले हुए, गोल घुमावदार या यहा तक कि चारों पैर हवा में करके भी सो सकते हैं—पूरी तरह रिलैक्स।</div>
<div> </div>
<div><strong>हम गहरी नींद में भी सो सकते हैं</strong></div>
<div>जब तक कोई खतरा न हो, हम तेज हवाओं, बारिश और अन्य जानवरों की आवाजों के बीच भी चैन की नींद सो सकते हैं।</div>
<div> </div>
<div><strong>मैडम कम और मैं ज्यादा सोता हूँ</strong></div>
<div>हमारे लिए 20-20 घंटे तक सोना आम बात है। लेकिन मैडम जरा कम सोती हैं, क्योंकि शिकार अधिकतर वहीं करती हैं।</div>
<div> </div>
<div><strong>पावर नैप लेना पसंद करते हैं</strong></div>
<div>शेर लंबे समय तक लगातार नहीं सोते, बल्कि दिन में कई बार छोटे-छोटे झपकी लेते हैं और समय-समय पर जागकर अपने आस-पास की निगरानी करते हैं।</div>
<div> </div>
<div><strong>बच्चों की तरह सोते हैं शावक </strong></div>
<div>शेर के नन्हे-मुन्ने वयस्कों से भी ज्यादा सोते हैं। वे अपनी मां या भाई-बहनों के साथ चिपककर सोते हैं, जिससे उन्हें सुरक्षा और गर्मी मिलती है।</div>
<div> </div>
<div><strong>गहरी नींद में भी तत्काल जग जाते हैं</strong></div>
<div>गहरी नींद में भी यदि कोई खतरा हो या शिकार की गंध आए तो हम तुरंत जागकर सतर्क हो जाते हैं। </div>
<div> </div>
<div><strong>जंभाई लेना सिर्फ नींद का संकेत नहीं</strong></div>
<div>जंभाई लेना शक्ति प्रदर्शन, संचार और खुद को तैयार करने का संकेत भी हो सकता है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Mar 2025 11:41:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ डे : नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में बेसहारा शावकों को दिया नया जीवन, ममता ने ठुकराया, वन्यजीव डॉक्टर ने थामा दामन</title>
                                    <description><![CDATA[15 सितम्बर, 2023 को रणथम्भौर टाइगर रिजर्व से बाघिन टी-79 के ढाई माह के नर शावक को गंभीर अवस्था में बायोलॉजिकल पार्क में लाया गया था। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/world-wildlife-day-nahargarh-biological-park-gave-new-life-to/article-106131"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/257rtrer-(4)2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। हर साल तीन मार्च को वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ डे मनाया जाता है। जो हमें प्रकृति और वन्यजीवों की रक्षा का संदेश देता है। लेकिन क्या हो जब कोई मासूम शावक जन्म लेने के साथ ही अपनी मां के स्नेह से वंचित रह जाए? नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में ऐसे ही बेसहारा शावकों को नया जीवन दिया गया। वरिष्ठ वन्यजीव चिकित्सक अरविंद माथुर ने मां की भूमिका निभाकर इन नन्हें जीवों को अपने स्नेह, देखभाल और उपचार से बड़ा किया। यह कहानी सिर्फ  बचाव की नहीं, बल्कि प्रकृति के परित्यक्त शावकों को नया जीवन देने की है। यह कहानी केवल वन्यजीव संरक्षण की नहीं, बल्कि प्रकृति और इंसान के बीच के उस अनमोल रिश्ते की भी है। जहां ममता सिर्फ  जन्म देने तक सीमित नहीं रहती। अब ये मासूम न केवल जीवित हैं, बल्कि बायोलॉजिकल पार्क में देश विदेश से आने वाले पर्यटकों को लुभा भी रहे हैं। इस वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ  डे पर आइए, हम सभी संकल्प लें कि हर जीव का जीवन उतना ही कीमती है, जितना हमारा खुद का।</p>
<p><strong>अब बायोलॉजिकल पार्क के चमकते सितारे हैं भीम-स्कंदी </strong><br />बाघिन रानी के शावक भीम और स्कंदी की कहानी एक अद्भुत संघर्ष की मिसाल है। जन्म के बाद मां का स्नेह न मिलने से इनके जीवन पर संकट था। लेकिन सही देखभाल और प्यार ने इन्हें अब नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क का आकर्षण बना दिया है। 10 मई 2024 को बाघिन रानी ने दो शावकों को जन्म दिया, लेकिन उसकी बेरुखी के चलते 2 जून, 2024 को इन्हें नियोनेटल केयर यूनिट में लाया गया। जन्म के समय भीम का वजन 3.18 किलोग्राम और स्कंदी का 2.25 किलोग्राम था। लगातार देखभाल, वैक्सीनेशन, डिवॉर्मिंग के बाद अब दोनों 50 किलो से अधिक के हो चुके हैं। अब ये शावक नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क के आकर्षण का केंद्र बन चुके हैं।</p>
<p><strong>दो घंटे भूखा रहा शावक, फिर मिला नया जीवन</strong><br />शेरनी तारा के नवजात शावक को जब मां का प्यार नहीं मिला, तो उसका जीवन खतरे में था। लेकिन डॉ.माथुर सहित स्टाफ की देखभाल ने उसे फिर से खड़ा कर दिया। अब यह मजबूत और स्वस्थ है, और जल्द ही इसे नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में शिफ्ट कर दिया जाएगा। इससे पहले लायन सफारी में रह रही शेरनी तारा ने अक्टूबर, 2024 में एक शावक को जन्म दिया, लेकिन मां का स्नेह उसे नहीं मिला। 14 अक्टूबर को 970 ग्राम वजन वाले इस कमजोर शावक को नियोनेटल केयर यूनिट में लाया गया। 24 घंटे निगरानी और पोषण से अब यह 15 किलो से अधिक वजन का हो चुका है। जल्द ही इसे बायोलॉजिकल पार्क में शिफ्ट किया जाएगा। जहां यह अब स्वतंत्र रूप से विचरण करेगा। रेस्क्यू प्रभारी सरिता मीणा सीसीटीवी कैमरे से शावक की हर गतिविधि पर नजर बनाए रहती हैं। </p>
<p><strong>रणथम्भौर से लाए थे गंभीर अवस्था में, अब ये स्वस्थ हैं</strong><br />15 सितम्बर, 2023 को रणथम्भौर टाइगर रिजर्व से बाघिन टी-79 के ढाई माह के नर शावक को गंभीर अवस्था में बायोलॉजिकल पार्क में लाया गया था। यहां नियो निटेल केयर यूनिट में उपचार के बाद अब ये स्वस्थ है। इसे अभी पार्क के ऑफ डिस्प्ले एरिया में रखा गया है। इसकी उम्र करीब डेढ़ साल हो गई है।</p>
<p><strong>हिप्पो, भालू और हाइना में सफल प्रजनन</strong><br />सिर्फ बाघ और शेर ही नहीं, बल्कि नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में हिप्पो, भालू और हाइना का भी सफल प्रजनन हो रहा है। <br />हिप्पो: 2020 और 2024 में सफल प्रजनन, अब पार्क में दो नर और दो मादा हिप्पो मौजूद हैं।<br />भालू: मादा भालू झुमरी ने 2020, 2022 और 2024 में 5 शावकों को जन्म दिया।<br />हाइना: इनका भी सफल प्रजनन हो रहा है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Mar 2025 10:00:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विश्व वन्यजीव दिवस आज: स्लोथ बियर और हिप्पो में सफल प्रजनन प्रदेश में केवल नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क</title>
                                    <description><![CDATA[गुलाबी नगरी स्थित नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क, झालाना लेपर्ड रिजर्व, हाथी गांव, लॉयन सफारी में वन्यजीवों को देखने की चाह लिए हजारों पर्यटक यहां की विजिट करते हैं। खासकर एगजोटिक पार्क में रहवास कर रहा हिप्पो परिवार विजिटर्स की पहली पसंद बना हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/world-wildlife-day-today--successful-breeding-in-sloth-bear-and-hippo-only-nahargarh-biological-park-in-the-state--beaver-can-be-brought-from-gujarat/article-5374"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/nahargarh-biological-park.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। गुलाबी नगरी स्थित नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क, झालाना लेपर्ड रिजर्व, हाथी गांव, लॉयन सफारी में वन्यजीवों को देखने की चाह लिए हजारों पर्यटक यहां की विजिट करते हैं। खासकर एगजोटिक पार्क में रहवास कर रहा हिप्पो परिवार विजिटर्स की पहली पसंद बना हुआ है। प्रदेश में नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क ऐसी पहली जगह है, जहां विजिटर्स को हिप्पो देखने को मिलते हैं। इसके अतिरिक्त यहां 26 विभिन्न प्रजातियों के तकरीबन 270 से अधिक वन्यजीव रहवास कर रहे हैं।<br /><br /><strong>स्लोथ बियर का हुआ सफल प्रजनन</strong><br />प्रदेश के बायोलॉजिकल पार्कों और चिड़ियाघरों की बात करें तो जयपुर स्थित नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में रहवास कर रहे स्लोथ बियर में (कैप्टिविटी में) पहली बार सफल प्रजनन हुआ। दूसरे जिलों के बायोलॉजिकल पार्कों और चिड़ियाघर में (कैप्टिविटी में) ऐसा अब तक नहीं हो पाया है। नर भालू शम्भू, मादा झुमरी और बच्चा गणेश अपने एन्क्लोजर में चहल-कदमी करते हुए देखे जा सकते हैं।<br /><br /><strong>एक जोड़ा लाए, अब संख्या तीन हुई</strong> <br />दिल्ली चिड़ियाघर से अगस्त, 2019 में हिप्पो का पहला और एकमात्र जोड़ा नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क लाया गया। जहां 17 जुलाई, 2020 में इसका (कैप्टिविटी में) सफल प्रजनन हुआ। प्रदेश में इसकी उपस्थिति केवल जयपुर में देखने को मिलती है। साथ ही प्रदेश के बायोलॉजिकल पार्कों के इतिहास में पहली बार इस प्रजाति के एनीमल में सफल प्रजनन भी यहीं हुआ है। अभी ये हिप्पो जोड़ा बायोलॉजिकल पार्क स्थित एगजोटिक पार्क में रहवास कर रहा है। साथ ही ये जोड़ा फिर से खुशखबरी दे सकता है। <br /><br /><strong>सबसे ज्यादा वुल्फ यहां</strong><br />प्रदेश के बायोलॉजिकल पार्कों की बात करें तो सबसे ज्यादा वुल्फ नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में ही देखने को मिलते हैं। नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरविंद माथुर ने बताया कि यहां इनमें कैप्टिविटी में अच्छी ब्रीडिंग भी हो रही है। इसी का नतीजा है कि वन्यजीव एक्सचेंज कार्यक्रम के तहत वुल्फ के बदले देश के विभिन्न बायोलॉजिकल पार्कों और चिड़ियाघरों से जयपुर को अच्छ एनीमल्स मिले हैं। साथ ही स्लोथ बियर और हिप्पो में सफल प्रजनन केवल यहीं देखने को मिला है।<br /><br /><strong>8 विभिन्न प्रजातियों के हिरण भी यहां</strong><br />नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क ऐसी पहली जगह है। जहां विजिटस को 8 विभिन्न प्रजातियों के हिरण देखने को मिलते हैं। इनमें चीतल, चिंकारा, सिक्का डियर, हॉक डियर, सांभर, ब्लैक बग, बारहसिंघा और चौसिंघा के नाम शामिल है। साथ ही इनमें सफल प्रजनन भी हो रहा है। खासकर चिंकारा में अच्छी ब्रीडिंग हो रही है। इन्हें एक्सचेंज कार्यक्रम के तहत देश के अन्य चिड़ियाघरों में दिया जा चुका है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Mar 2022 10:45:05 +0530</pubDate>
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