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                <title>चंबल से मिली खुशखबरी: अप स्ट्रीम में नजर आए ऊदबिलाव के दो बच्चे</title>
                                    <description><![CDATA[लुप्त हो रहे ऊदबिलाव का एक बार फिर से कुनबा बढ़ा है। चंबल की डाउन स्ट्रीम क्षेत्र में दो नए बच्चों का आगमन हुआ है। ऐसे में इनके परिवार की संख्या 6 हो गई है। हालांकि, एक सदस्य अभी भी गायब है। गायब सदस्य को मिलाकर संख्या सात है, लेकिन ये नजर नहीं आ रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/good-news-from-chambal--two-children-of-the-beaver-were-seen-in-the-up-stream/article-6112"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/41.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती की जमीं को सरसब्ज करने वाली चंबल नदी से खुशखबरी मिली  है। लुप्त हो रहे ऊदबिलाव का एक बार फिर से कुनबा बढ़ा है। चंबल की डाउन स्ट्रीम क्षेत्र में दो नए बच्चों का आगमन हुआ है। ऐसे में इनके परिवार की संख्या 6 हो गई है। हालांकि, चिंता की बात यह है कि एक सदस्य अभी भी गायब है। गायब सदस्य को मिलाकर संख्या सात है, लेकिन ये नजर नहीं आ रहा है। फिर भी इनके परिवार में नए सदस्य का आना राहत की खबर है। क्योंकि, इनका कुनबा लगातार कम हो रहा था। वन्यजीव प्रेमियों ने इनको परिवार के साथ उछल कूद करते देखा। एक्सपर्ट का कहना है कि ऊदबिलाव की तीन प्रजातियां मिलती है। यहां अभी स्मूत कोटर प्रजाति है। जबकि, यूरेशिएन और स्कॉमन क्लो ओटर यहां नहीं मिलती है। ये भारत के अन्य क्षेत्रों में मिलती है। कोटा में पाई जाने वाली प्रजाति सभी जगह पर मिलती है। ये कॉमन प्रजाति है। हालांकि, इनकी संख्या लगातार घट रही है। ऐसे में इनका संरक्षण करना जरूरी है।<br /><br /><strong>अभी 31 के करीब संख्या</strong><br />एक्सपर्ट का कहना है कि कोटा बैराज के अप स्ट्रीम क्षेत्र में ही ऊदबिलाव पाए जाते हैं। इनकी संख्या इस समय 31 हो गई है। ये राणा प्रताप सागर तक है। एक्सपर्ट का कहना है कि अवैध आखेट से इनको नुकसान पहुंच रहा है। मछलियों को पकड़ने के लिए लगाई गई जाल इसमें प्रमुख है। इनका कहना है कि इसके चलते पिछले दिनों एक ऊदबिलाव की मौत भी हो चुकी है। ऐसे में मुकंदरा टाइगर रिजर्व विभाग को इस पर रोक लगानी चाहिए।<br /><br /><strong>ऐसा होता है उदबिलाव</strong> <br />यह जल और स्थल पर वास करने वाला स्तनधारी जानवर है, जो कि एक मांसाहारी प्राणी है।  इनकी लंबाई 0.6 से 1.8 मीटर और वजन 1 से 45 किलो के बीच होता। ऊदबिलाव बेहद ठंडे पानी में भी रह सकते हैं। इससे खाना पचकर ऊर्जा बनती रहती है। अपना अधिक समय पानी में ही बिताता है। शरीर लंबा, टांगें छोटी, सर चपटा और थूथन चौड़ा होता है। इसकी आंखें छोटी, मूंछे घनी और कान छोटे तथा गोलाकार होते हैं। पानी में घेरा डालकर मछलियों का शिकार करते हैं। इनका मुख्य भोजन तो मछली ही है, लेकिन पानी की चिडियां छोटे जानवर और कीड़े मकोड़ों से भी अपना पेट भरते हैं। मादा अपने बिल में मार्च-अप्रैल में दो तीन शावक को जन्म देती है। <br /><br /><strong>इसलिए जरूरी है उदबिलाव</strong><br />उदबिलाव जलीय जीवों में बहुत जरूरी है। मच्छलियों की बढ़ती तादाद पर नियंत्रण करता है। इससे पानी में इनका संतुलन बना रहता है, लेकिन इनकी संख्या दिनों दिन कम हो रही है। प्रदेश में केवल कोटा चंबल नदी में मिलता है। यह शैड्यल-1 प्रजाति में शामिल है। अंतर्राष्टÑीय प्रकृति संरक्षण संघ (आइयूसीएन) ने इसे लुप्त प्रजाति की श्रेणी में रखा है। इनकी घटती तादाद चिंता का विषय है।<br /><strong>विशेषताएं</strong><br />प्रजाति- शैड्यूल-1<br />लंबाई- 0.6 से 1.8 मीटर<br />वजन- 1 से 45 किलोग्राम<br />भोजन- मांसाहारी<br /><br />चंबल के अप स्ट्रीम में इनकी फैमिली में दो नए बच्चे देखे गए है। इस तरह इनकी संख्या वापस 6 हो गई है। हालांकि, पहले भी छह थी। लेकिन, एक की मौत हो गई है। जबकि, एक गायब है।<br />- <strong>बनवारी यदुवंशी, वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट</strong><br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Mar 2022 14:58:43 +0530</pubDate>
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                <title>विश्व वन्यजीव दिवस आज: स्लोथ बियर और हिप्पो में सफल प्रजनन प्रदेश में केवल नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क</title>
                                    <description><![CDATA[गुलाबी नगरी स्थित नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क, झालाना लेपर्ड रिजर्व, हाथी गांव, लॉयन सफारी में वन्यजीवों को देखने की चाह लिए हजारों पर्यटक यहां की विजिट करते हैं। खासकर एगजोटिक पार्क में रहवास कर रहा हिप्पो परिवार विजिटर्स की पहली पसंद बना हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/world-wildlife-day-today--successful-breeding-in-sloth-bear-and-hippo-only-nahargarh-biological-park-in-the-state--beaver-can-be-brought-from-gujarat/article-5374"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/nahargarh-biological-park.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। गुलाबी नगरी स्थित नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क, झालाना लेपर्ड रिजर्व, हाथी गांव, लॉयन सफारी में वन्यजीवों को देखने की चाह लिए हजारों पर्यटक यहां की विजिट करते हैं। खासकर एगजोटिक पार्क में रहवास कर रहा हिप्पो परिवार विजिटर्स की पहली पसंद बना हुआ है। प्रदेश में नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क ऐसी पहली जगह है, जहां विजिटर्स को हिप्पो देखने को मिलते हैं। इसके अतिरिक्त यहां 26 विभिन्न प्रजातियों के तकरीबन 270 से अधिक वन्यजीव रहवास कर रहे हैं।<br /><br /><strong>स्लोथ बियर का हुआ सफल प्रजनन</strong><br />प्रदेश के बायोलॉजिकल पार्कों और चिड़ियाघरों की बात करें तो जयपुर स्थित नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में रहवास कर रहे स्लोथ बियर में (कैप्टिविटी में) पहली बार सफल प्रजनन हुआ। दूसरे जिलों के बायोलॉजिकल पार्कों और चिड़ियाघर में (कैप्टिविटी में) ऐसा अब तक नहीं हो पाया है। नर भालू शम्भू, मादा झुमरी और बच्चा गणेश अपने एन्क्लोजर में चहल-कदमी करते हुए देखे जा सकते हैं।<br /><br /><strong>एक जोड़ा लाए, अब संख्या तीन हुई</strong> <br />दिल्ली चिड़ियाघर से अगस्त, 2019 में हिप्पो का पहला और एकमात्र जोड़ा नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क लाया गया। जहां 17 जुलाई, 2020 में इसका (कैप्टिविटी में) सफल प्रजनन हुआ। प्रदेश में इसकी उपस्थिति केवल जयपुर में देखने को मिलती है। साथ ही प्रदेश के बायोलॉजिकल पार्कों के इतिहास में पहली बार इस प्रजाति के एनीमल में सफल प्रजनन भी यहीं हुआ है। अभी ये हिप्पो जोड़ा बायोलॉजिकल पार्क स्थित एगजोटिक पार्क में रहवास कर रहा है। साथ ही ये जोड़ा फिर से खुशखबरी दे सकता है। <br /><br /><strong>सबसे ज्यादा वुल्फ यहां</strong><br />प्रदेश के बायोलॉजिकल पार्कों की बात करें तो सबसे ज्यादा वुल्फ नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में ही देखने को मिलते हैं। नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरविंद माथुर ने बताया कि यहां इनमें कैप्टिविटी में अच्छी ब्रीडिंग भी हो रही है। इसी का नतीजा है कि वन्यजीव एक्सचेंज कार्यक्रम के तहत वुल्फ के बदले देश के विभिन्न बायोलॉजिकल पार्कों और चिड़ियाघरों से जयपुर को अच्छ एनीमल्स मिले हैं। साथ ही स्लोथ बियर और हिप्पो में सफल प्रजनन केवल यहीं देखने को मिला है।<br /><br /><strong>8 विभिन्न प्रजातियों के हिरण भी यहां</strong><br />नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क ऐसी पहली जगह है। जहां विजिटस को 8 विभिन्न प्रजातियों के हिरण देखने को मिलते हैं। इनमें चीतल, चिंकारा, सिक्का डियर, हॉक डियर, सांभर, ब्लैक बग, बारहसिंघा और चौसिंघा के नाम शामिल है। साथ ही इनमें सफल प्रजनन भी हो रहा है। खासकर चिंकारा में अच्छी ब्रीडिंग हो रही है। इन्हें एक्सचेंज कार्यक्रम के तहत देश के अन्य चिड़ियाघरों में दिया जा चुका है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Mar 2022 10:45:05 +0530</pubDate>
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