<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/canals/tag-13270" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>canals - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/13270/rss</link>
                <description>canals RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>नहरें बन रही काल का गाल, हर महीने 3 से 4 लोगों की डूबने से हो रही मौत</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[नहरों की चार दीवारी इतनी छोटी है कि कोई भी नहाने के लिए आसानी से पहुंच रहा है।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/canals-are-becoming-death-traps--3-to-4-people-die-every-month-due-to-drowning/article-145616"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/200-x-60-px)-(3)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। <strong>केस एक : </strong>उद्योग नगर थाना क्षेत्र में डीसीएम स्थित नहर में नहाने गए दो युवक पानी के तेज बहाव में बह गए थे। जिनमें से एक को तो सुरक्षित निकाल लिया। जबकि दूसरे की डूबने से मौत हो गई। युवक की मौत से उसके परिवार पर दु:खों का पहाड़ टूट पड़ा।</p>
<p><strong>केस दो:</strong> कुन्हाड़ी थाना क्षेत्र में गत दिनों नहर में नहाते समय एक युवक का पैर फिसल गया था। जिससे वह पानी के तेज बहाव में बह गया। सूचना पर पुलिस व निगम के गोताखोर पहुंचे। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी है। युवक का शव तीन दिन बाद घटना स्थल से काफी दूर मिला।</p>
<p><strong>केस तीन: </strong>किशोरपुरा थाना क्षेत्र में गोविंद धाम के पास चम्बल नदी में हाथ-पैर धोने के लिए नदी किनारे गए युवक को झटका लगने से वह उसमें गिर गया। सूचना पर गोताखोर पहुंचे लेकिन उसका कहीं पता नहीं चला। बाद में तलाश करने पर उसका शव मिला।</p>
<p>ये तो उदाहरण मात्र हैं उन हालातों को बताने के लिए जिनका सामान शहर वासियों को रोजाना करना पड़ रहा है। स्मार्ट सिटी की श्रेणी में आए कोटा जैसे शहर में जो अब पर्यटन नगरी के रूप में अपनी पहचान बनाने वाला है। उस शहर के बीच रिहायशी इलाकों से नहर निकल रही है। वह भी दांयी और बांयी मुख्य नहर। इन नहरों की चार दीवारी या तो इतनी छोटी है कि वहां से कोई भी नहाने के लिए आसानी से पहुंच रहा है या फिर नहरों की सुरक्षा दीवार ही कई जगह से टूटी हुई है। जिससे लोगों को नहाने की जगह आसानी से मिल रही है। ऐसे में हादसे अधिक हो रहे हैं।</p>
<p><strong>धुलंडी पर एक दिन की पाबंदी</strong><br />पिछले कुछ सालों में धुलंडी के दिन कई लोगों के नदी, तालाब व नहर में नहाने जाने के दौरान पैर फिसलने और पानी का बहाव तेज होने से लोगों के उनमें डूबने की घटनाएं हो चुकी है। कुछ समय पहले तो एक ही दिन में करीब आधा दर्जन लोगों की डूबने से मौत होगई थी। उसके बाद पुलिस व प्रशासन की ओर से धुलंडी के दिन नहर और नदी तालाब में नहाने जाने पर ही पाबंदी लगा दी है। लेकिन हालत यह है कि यह पाबंदी सिर्फ एक ही दिन के लिए हो रही है। उसके बाद फिर से वही ढाक के तीन पात वाली स्थिति बन गई है।</p>
<p><strong>अभी भी नहा रहे नहर पर</strong><br />धुलंडी के दिन तो नहरों में पानी का बहाव भी कम कर दिया गया था। पुलिस व प्रशासन का पहरा व सख्ती भी दिखी। लेकिन उसके बाद इस पर किसी का कोई ध्यान नहीं है। यही कारण है कि अभी भी शहर में कई जगह पर नहरों में लोग विशेष रूप से युवा और बच्चे नहा रहे हैं। जिससे फिर से कभी भी कोई बड़ा हादसा या लोगों के डूबने से मौत की घटना होने का खतरा बना हुआ है। हालांकि नवज्योति ने होली से पहले ही इस संबंध में चेताया था। उसके बाद भी हालातों में कोई सुधार नहीं हुआ है।</p>
<p><strong>हर साल 35 से 40 की डूबने से हो रही मौत</strong><br />एक तरफ तो कोटा व हाड़ौती के लिए चम्बल नदी बरदान है। वहीं दूसरी तरफ यह जानलेवा भी साबित हो रही है। चम्बल नदी, नहर व तालाब में हर साल डूबने से करीब 35 से 40 लोगों की मौत हो रही है।नगर निगम के फायर अनुभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार हर महीने करीब 3 या उससे अधिक लोगों की यानि दसवें दिन एक व्यक्ति की डृबने से मौत हो रही है। हालांकि निगम के गोताखोरों की टीम ने कई डूबे हुए लोगों को सुरक्षित भी बाहर निकाला है।</p>
<p><strong>यह है स्थिति</strong><br />जानकारी के अनुसार वर्ष 2020-21 में कोटा शहर में 33 लोगों की डूबने से मौत हुई जबकि 4 को जीवित व सुरक्षित बाहर निकाला गया। वर्ष 2021-22 में 38 लोगों की डूबने से मौत हुई और 136 को सुरक्षित निकाला गया। वर्ष 2022-23 में 44 लोगों की डूबने से मौत हुई और 222 को सुरक्षित निकाला गया। वर्ष 2023-24 में 30 की डूबने से मौत हुई व 1 को सुरक्षित बाहर निकाला गया। वहीं वर्ष 2024-25 में 34 लोगों की डूबने से मौत हो चुकी है और 9 को सुरक्षित निकाला गया है। उसके बाद भी आए दिन लोगों के डूबने व मौत की घटनाएं हो रही हैं।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />शहर के बीच व रिहायशी इलाकों से नहर व चम्बल नदी गुजर रही है। नहरों की सुरक्षा दीवार इतनी छोटी है कि वहां से कोई भी नहाने के लिए जा सकता है। नहर में पानी का बहाव अधिक होने पर तैरने वाला जानकार भी कई बार बह जाता है। जिससे उसकी डूबने पर मौत हो जाती है। हालांकि किशोरपुरा से गुमानपुरा वाली नहर की सुरक्षा दीवार 8 फद्दीट करने से अब वहां घटनाएं कम हो रही है। सिचाई विभाग को चाहिए कि नहरों की सुरक्षा दीवार को इतना ऊंचा किया जाए या उन पर फेंसिंग की जाए कि लोग वहां से चढ़कर पानी तक नहीं जा सके। आत्म हत्या करने के अलावा हादसों के कारण भी लोगों की डूबने से मौत हो रही है। शहर में अधिकतर नहरों की सुरक्षा दीवार छोटी है। नगर निगम के पास पर्याप्त गोताखोर व स्कूबा डाइविंग सेट समेत नाव व अन्य संसाधन पर्याप्त हैं। लेकिन अधिकतर लोगों की मौत का कारण सूचना देरी से मिलना होता है। देर से सूचना मिलने पर बहे लोग काफी आगे निकल जाते हैं। नहर में झाड़ झंकार में फंस जाते हैं। जिससे उनकी तलाश में देरी होने पर मौत अधिक होती है। वैसे तुरंत सूचना मिलने पर कई लोगों को जीवित व सुरक्षित भी निकाला गया।<br /><strong>- विष्णु श्रृंगी, गोताखोर नगर निगम कोटा</strong></p>
<p>समय-समय पर नहरों में पानी का जल प्रवाह कम करते रहते हैं। हालांकि कई जगह पर नहरों की दीवार को ऊंचा भी कराया गया है। लेकिन जहां भी सुरक्षा दीवार टूटी हुई है या फेंसिंग की जरूरत होगी उसे भी सही करवाने का प्रयास किया जाएगा।<br /><strong>- संजय कुमार सिंह, अधीक्षण अभियंता सिंचाई वृत्त सीएडी</strong></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/canals-are-becoming-death-traps--3-to-4-people-die-every-month-due-to-drowning/article-145616</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/canals-are-becoming-death-traps--3-to-4-people-die-every-month-due-to-drowning/article-145616</guid>
                <pubDate>Sat, 07 Mar 2026 15:46:09 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-03/200-x-60-px%29-%283%296.png"                         length="1428729"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[kota]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का .... जर्जर नहरों की होगी सफाई, मिलेंगे 25 करोड़</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[नवज्योति ने जर्जर नहरों का प्रमुखता से उठाया था मामला।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news---dilapidated-canals-will-be-cleaned--25-crore-rupees-will-be-provided/article-144900"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/200-x-60-px)-(2).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। राज्य विधानसभा में शुक्रवार को एप्रोप्रिएशन बिल पर बहस का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कोटा सहित संभाग के लिए कई घोषणाएं की। विधानसभा में घोषणा के अनुसार कोटा-बूंदी जिले में चंबल की दायीं और बायीं सहित अन्य नहरों की सफाई एवं ड्रेनेज संबंधी कार्य किए जाएंगे। कोटा-बूंदी जिले में इन नहरों की सफाई एवं ड्रेनेज संबंधी कार्य के लिए 25 करोड़ रुपए दिए गए हैं। चंबल की दोनों नहरों की पर्याप्त सफाई नहीं होने से टेल क्षेत्र तक समय पर पानी नहीं पहुंच पाता है। इससे किसानों को परेशानी को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस सम्बंध में दैनिक नवज्योति ने गत 12 नवंबर को वितरिकाओं की नहीं हुई सफाई, कैसे पहुंचेगा टेल तक पानी शीर्षक से प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था। अब सरकार ने नहरों के लिए 25 करोड़ रुपए मंजूर कर किसानों को राहत दी है। इसके अलावा नगर पालिका रामगंजमंडी, इटावा सुल्तानपुर में विभिन्न विकास कार्य होंगे। सिनोता (पीपल्दा ) में नवीन पशु चिकित्सालय खोला जाएगा।</p>
<p><strong>कोटा सहित संभाग के लिए यह हुई घोषणाएं</strong><br />-संभाग में टाउन प्लानिंग योजना लाई जाएगी।<br />-कोटा और बूंदी जिले की मिसिंग लिंक सड़कों के लिए 70 करोड़ की घोषणा।<br />-सावनभादो से कनवास के रास्ते पर अरु नदी पर पुलिया निर्माण कार्य (सांगोद) 2 करोड़।<br />-मानसगांव पंचायत मानसगांव गोपीलाल यादव के खेत से बावड़ी के हनुमान जी तक सड़क निर्माण का कार्य 3 किमी (लाडपुरा) 2 करोड़।<br />-रामराजपुरा पंचायत मानस गांव से रामराजपुरा से भीमपुरा माताजी तक सड़क 3.8 किमी (लाडपुरा) 3 करोड़ 80 लाख।<br />-कोटा- बूंदी जिले में एमएलसी और आरएमसी व अन्य नहरों की सफाई एवं ड्रेनेज संबंधी कार्य (25 करोड)।<br />-कोटा में नगरपालिका रामगंजमंडी,सुल्तानपुर, इटावा में विभिन्न विकास कार्य के लिए 15 करोड।<br />-कोटा सांगोद (50 बेड क्षमता) सावित्रीबाई फुले छात्रावास।<br />-कोटा और बूंदी जिले में तीन-तीन नए उप स्वास्थ्य केंद्र खोले जाएंगे। 3 उप स्वास्थ्य केंद्र आयुष्मान आरोग्य मंदिर में, 3 प्राथमिक स्वास्थ्य केदो को सामुदायिक केदो में कमोन्नत किया जाएगा।<br />-बावड़ी खेड़ा में स्कूल के पीछे चिवड़िया के खाल पर एनिकट निर्माण कार्य (लाडपुरा) 70 लाख।<br />-सिनोता (पीपल्दा ) में नवीन पशु चिकित्सालय खोला जाएगा।<br />-केशोरायपाटन बूंदी में शुगर मिल के पीपीपी मोड पर संचालन के आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news---dilapidated-canals-will-be-cleaned--25-crore-rupees-will-be-provided/article-144900</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news---dilapidated-canals-will-be-cleaned--25-crore-rupees-will-be-provided/article-144900</guid>
                <pubDate>Sat, 28 Feb 2026 11:42:02 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-02/200-x-60-px%29-%282%29.png"                         length="1105417"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[kota]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बाकली बांध : नहरों के रिनोवेशन का कार्य प्रगतिरत, खालों के पक्केकरण पर विचार जारी</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[बांकली मध्यम सिंचाई परियोजना के खालों को पक्का करने का कार्य अभी विचाराधीन है। इन खालों का रखरखाव संबंधित जल उपयोगिता संघ (डब्ल्यूयूए) के माध्यम से काश्तकारों द्वारा स्वयं किया जाता है।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/renewing-work-of-renovation-of-bakali-dam-canals-continues/article-107940"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/6622-copy144.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। बाकली बांध की सभी नहरें पक्की हैं, और इनके रिपेयर एवं रिनोवेशन का कार्य बजट घोषणा 2023-24 के अंतर्गत स्वीकृत किया गया है। वर्तमान में यह कार्य तेजी से प्रगति पर है। नहरों के सुदृढ़ीकरण के लिए आवश्यक संसाधन जुटाए जा रहे हैं, ताकि सिंचाई के दौरान किसानों को किसी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े।</p>
<p>वहीं बांकली मध्यम सिंचाई परियोजना के खालों को पक्का करने का कार्य अभी विचाराधीन है। इन खालों का रखरखाव संबंधित जल उपयोगिता संघ (डब्ल्यूयूए) के माध्यम से काश्तकारों द्वारा स्वयं किया जाता है। खालों के कच्चा होने के बावजूद सिंचाई के दौरान अब तक कोई शिकायत लंबित नहीं है। संसाधनों की सीमित उपलब्धता के कारण खालों को पक्का करने का कार्य फिलहाल प्रस्तावित नहीं किया गया है। सरकार ने बताया है कि खालों को पक्का करने का निर्णय क्षेत्र की आवश्यकता और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर लिया जाएगा। संबंधित विभाग इस पर विचार कर रहा है, और जल्द ही उचित कदम उठाए जाने की संभावना है।</p>
<p> </p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/renewing-work-of-renovation-of-bakali-dam-canals-continues/article-107940</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/renewing-work-of-renovation-of-bakali-dam-canals-continues/article-107940</guid>
                <pubDate>Wed, 19 Mar 2025 14:25:40 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-03/6622-copy144.jpg"                         length="153121"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Jaipur ]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सीएडी की लापरवाही किसानों पर पड़ रही भारी : किसानों को नहीं मिल रहा पानी, नहरों में नहीं हो पा रहा पानी का पूरी तरह संचालन</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[नहरों में पानी संचालन नहीं होने के कारण खेत सूखे पड़े हैं। ]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/algae-has-accumulated-in-the-canals-due-to-lack-of-timely-cleaning/article-102522"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/78-(4)9.png" alt=""></a><br /><p>इटावा। सीएडी विभाग की लापरवाही किसानों के लिए परेशानी बन गई है। नहरों में जगह जगह काई काई जम गई है। जिससे पानी का संचालन नहीं हो पा रहा है। जबकि अब फसलों के लिए पानी की आवश्यकता है। किसान फसलों को लेकर चिंतित ओर परेशान हैं। इटावा  ब्रांच केनाल और इससे निकली वितरिकाओं में रेगुलेशन के दौरान समय रहते सफाई कार्य नहीं होने के कारण जलीय वनस्पति के साथ काई जम गई है। जिसके चलते नहरों में पानी का प्रवाह बढ़ नहीं रहा है और नहरों की स्थिति ओवरफ्लो की बनी हुई है। लेकिन सीएडी के अधिकारी सिर्फ कागजों में खानापूर्ति करने में लगे हुए हैं। </p>
<p><strong>फसलों के पकाव का समय </strong><br />किसानों का कहना हे कि इस बार जनवरी के शुरूआत में बारिश होने के कारण किसानों के खेतो में एक पानी की पूर्ति हो गई। लेकिन मौसम के खुलने के साथ ही एक साथ फसलों के लिए पानी की आवश्यकता हुई है। लेकिन नहरों में पानी संचालन नहीं होने के कारण खेत सूखे पड़े हैं। किसान रामपाल, धर्मराज नागर, केदार लाल मीना सहित कई किसानों ने बताया कि इस बार मौसम ने साथ दिया है। अभी तक फसलों की पैदावार बढ़िया है। लेकिन अगर समय रहते पानी नहीं मिला तो सब कुछ बर्बाद हो जाएगा। क्योंकि अब फसलों के पकाव के साथ दाना पड़ने का समय है। </p>
<p><strong>निर्माण कार्यों की भी खुली पोल</strong><br />नहरी क्षेत्र में जो नहरों के निर्माण कार्य हुए थे, उनकी भी पोल खुल गई है। नहरों में पानी के संचालन के दौरान कई जगह निर्माण क्षतिग्रस्त हो गए। किसानों ने इटावा ब्रांच केनाल के निर्माण कार्यों की भी जांच कराने की मांग की है। इसके साथ ही लाखों रुपए के नहरी पानी पहुंचाने के लिए टेंडर हुए हैं। लेकिन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से खानापूर्ति हो रही है। </p>
<p>फसलों में पानी की डिमांड बढ़ गई है। लेकिन नहरों में प्रवाह कम है। काई और जलीय वनस्पति कांजी जमी हुई है जिससे जरा से प्रवाह से ही नहरें ओवरफ्लो हो जाती हैं। ऐसे में सिस्टम की खामी किसानों के लिए आने वाले समय में परेशानी बढ़ेगी। फसलों को पानी नहीं मिलने से फसलों में नुकसान होगा।<br /><strong>- अर्जुनलाल मीना, अध्यक्ष, जल वितरिका समिति, खातौली</strong></p>
<p> नहरों में सफाई का कार्य कराया जा रहा है। नहरों में पानी का किसानों की डिमांड को देखते हुए पानी बढ़ाया जा रहा है। जल्द किसानों को पूर्ण प्रवाह से पानी देने का प्रयास रहेगा।<br /><strong>- विष्णु कुमार मीना, सहायक अभियंता, सीएडी, इटावा</strong></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/algae-has-accumulated-in-the-canals-due-to-lack-of-timely-cleaning/article-102522</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/algae-has-accumulated-in-the-canals-due-to-lack-of-timely-cleaning/article-102522</guid>
                <pubDate>Thu, 30 Jan 2025 16:25:34 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-01/78-%284%299.png"                         length="581110"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[kota]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का - खुशखबरी: फसलों के लिए चम्बल की नहरों में दौड़ेगा अमृत</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[क्षतिग्रस्त नहरों की मरम्मत का कार्य भी किया गया, ताकि नहरों से पानी व्यर्थ नहीं बह सके।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/asar-khabar-ka---good-news--amrit-will-run-in-chambal-canals-for-crops/article-93269"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/4427rtrer-(11)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । फसलों के लिए नहरी पानी का इंतजार कर रहे किसानों के लिए खुशखबरी है। रबी फसल 2024-25 के लिए चंबल सिंचित क्षेत्र के कृषकों की मांग के अनुसार चंबल की दोनों नहरों में जलप्रवाह किया जाएगा। दायीं नहर में 19 अक्टूबर और बायीं नहर में 25 अक्टूबर से पानी छोड़ा जाएगा। इससे पूर्व पर सीएडी विभाग की ओर से नहरों और वितरिकाओं की मरम्मत और साफ-सफाई का कार्य करवाया गया। इसके लिए विभाग ने मशीनों का उपयोग किया और युद्ध स्तर पर सफाई का कार्य चलाया। इस दौरान क्षतिग्रस्त नहरों की मरम्मत का कार्य भी किया गया, ताकि नहरों से पानी व्यर्थ नहीं बह सके।</p>
<p><strong>नवज्योति ने उठाया मामला तो हरकत में आया विभाग</strong><br />चम्बल की नहरों की दुर्दशा के सम्बंध में दैनिक नवज्योति में 10 अक्टूबर के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था। जिसमें बताया था कि दायीं व बायीं मुख्य नहर में आगामी दिनों में जल प्रवाह शुरू होने वाला है, लेकिन अभी तक सफाई का काम शुरू नहीं हो पाया है। वहीं नहरों की सेहत पूरी तरह से नहीं सुधर पाई है। शहरी क्षेत्र में मुख्य नहरों के धोरों की जमीन पर अतिक्रमण हो गया है। दायीं मुख्य नहर की किशनपुरा ब्रांच की करीब पांच किमी लम्बी नहर कचरे से अटी हुई है। लोगों ने इस नहर को कचरा पात्र बना दिया है। समाचार प्रकाशित होने के बाद सीएडी विभाग हरकत में आया और नहरों की मरम्मत और सफाई का कार्य करवाया। जेसीबी मशीनों के माध्यम से नहरों से काफी मात्रा में कचरा निकाला गया।  </p>
<p><strong>किसान मांग रहे थे नहरी पानी </strong><br />कोटा जिले सहित अन्य क्षेत्रों में रबी फसलों की बुवाई का कार्य गति पकड़ने लगा है। ऐसे में किसानों को नहरी पानी की जरूरत होने लगी थी। जिले के अधिकांश क्षेत्रों में तय समय पर रबी फसलों की बुवाई हो गई है। फसलों की बढ़वार अच्छी हो इसलिए नहरी पानी की दरकार थी। किसानों की जरूरत को देखते हुए सीएडी प्रशासन ने नहरी पानी छोड़ने का निर्णय किया है। अतिरिक्त क्षेत्रीय विकास आयुक्त सीएडी ममता कुमारी तिवारी ने बताया कि रबी फसल 2024- 25 के लिए चंबल सिंचित क्षेत्र के कृषकों की मांग के अनुसार संभागीय आयुक्त पदेन क्षेत्रीय विकास आयुक्त के निर्देशानुसार दायीं मुख्य नहर में 19 अक्टूबर एवं बायीं मुख्य नहर में 25 अक्टूबर से आवश्यकतानुसार जल प्रवाह किया जाएगा। </p>
<p>रबी फसलों की बुवाई होने के बाद नहरी पानी की जरूरत हो रही थी।  हर साल नहरों में कचरा होने से जलप्रवाह में बाधा आती है। अब सीएडी की ओर से नहरों की सफाई करवाने से टेल क्षेत्र के किसानों को समय पर नहरी पानी मिल सकेगा।   <br /><strong>-नेमीचंद नागर, किसान </strong></p>
<p>प्हले मनरेगा मजदूरों से नहरों की सफाई करवाई जा रही थी। बाद में जेसीबी मशीनें लगाकर व्यापक स्तर पर नहरों की सफाई का अभियान चलाया गया।  लोगों ने नहरों में काफी मात्रा में कचरा डाल रखा था। इस दौरान नहरों की मरम्मत भी करवाई गई है।  <br /><strong>-लखनलाल गुप्ता, अधीक्षण अभियंता, सीएडी कोटा </strong></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/asar-khabar-ka---good-news--amrit-will-run-in-chambal-canals-for-crops/article-93269</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/asar-khabar-ka---good-news--amrit-will-run-in-chambal-canals-for-crops/article-93269</guid>
                <pubDate>Thu, 17 Oct 2024 11:30:08 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-10/4427rtrer-%2811%294.png"                         length="520745"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[kota]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जर्जर नहरों से कैसे होगा हरित क्रांति का संचार ? </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[नहर से निकलने वाली मुख्य दोनों नहरे अभी भी पूर्णतया क्षतिग्रस्त है । जिससे समय पर उच्च अधिकारियों तथा संवेदक द्वारा परीक्षण नहीं करने के कारण रबी की फसलों को समय पर पानी का लाभ नहीं मिलेगा।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/how-will-the-green-revolution-be-spread-through-dilapidated-canals/article-92730"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/4427rtrer17.png" alt=""></a><br /><p>सुनेल। सुनेल क्षेत्र में रोशनबाड़ी लघु सिंचाई परियोजना के नाम से रिछड़ नदी पर बने ओवरफ्लो डैम का कार्य पिछले वर्ष पूर्ण हो चुका था, लेकिन पर्याप्त बारिश नही होने के कारण बांध में मात्र 1 से 2 फीट पानी ही भर कर रह गया था। इस वर्ष लगातार बारिश होने के कारण बांध ओवरफ्लो हो गया है , लेकिन बांध से छोड़े जाने वाले पानी को लेकर किसान चिंतित है क्योंकि नहर से निकलने वाली मुख्य दोनों नहरे अभी भी पूर्णतया क्षतिग्रस्त है । जिससे समय पर उच्च अधिकारियों तथा संवेदक द्वारा परीक्षण नहीं करने के कारण रबी की फसलों को समय पर पानी का लाभ नहीं मिलेगा। किसान बालचंद धाकड़ ,निर्मल धाकड़, रजनीश मंडलोई, मनोहरसिह, दिनेश मंडलोई, आदि किसानों ने बताया कि 24 जनवरी 2017 को तत्कालीन भाजपा सरकार द्वारा बांध के नींव का शिलान्यास किया गया था । 7 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद आखिर कार इस वर्ष लगातार बारिश के कारण बांध ओवरफ्लो होकर बहने लगा है। जिससे लंबे इंतजार के बाद किसानों के चेहरे पर खुशी छाई थी । वहीं अब रबी की फसलों के लिए खेतों में नहर व फुव्वारा पद्धति से 14 गांवों की 2860 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होना था, लेकिन क्षतिग्रस्त नहरों के कारण क्षेत्र में हरित क्रांति का संचार कैसे होगा।</p>
<p><strong>7 साल पहले शुरू हुआ था बांध का निर्माण कार्य</strong><br /> दरअसल, सुनेल क्षेत्र से 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित लघु सिंचाई परियोजना रोशनबाड़ी बांध का निर्माण कार्य 9272 लाख रुपए की लागत से 24 जनवरी 2017 को तत्कालीन सरकार के द्वारा  उद्घाटन किया गया था । इस बांध से सुनेल क्षेत्र के गांव फाऊखेड़ी, राजपुरा, सुनेल, घाटाखेड़ी, रोशनबाड़ी, अकोदिया, चछलाई ,चंद्रपुरा, कांदलखेड़ी,  कालियाखेड़ी, लालगांव  ,भटखेड़ा ,मालपुरा, छीतरखेड़ा,  उन्हेल, केसरपुरा ,सेमला, कादरनगर  सहित  अन्य गांवों को सिंचाई का नहरों तथा फव्वारा पद्धति से रबी की फसलों के लिए पानी पहुंचाने का कार्य होना था।</p>
<p><strong>बांध से मुख्य रूप से  निकाली थी दो नहरें</strong><br /> रोशनबाड़ी बांध  से मुख्य रूप से दो नहरे क्षेत्र में सिंचाई के लिए निकाली गई । जिनकी लागत 17 करोड़ 26 लाख की स्वीकृति 24 दिसंबर 2017 को हुई । जिसमें  दाई मुख्य नहर 6.50 किमी और बाई मुख्य नहर 7.14 किमी का निर्माण हो चुका है। यह बांध पूरी तरह से स्प्रिंकलर सिस्टम पर आधारित है। स्प्रिंकलर सिस्टम के माध्यम से सिंचाई होने से इसमें रकबा बढ़ाया गया है। साथ ही इसके आसपास के क्षेत्रों में  90 एमएम से 180 एमएम  के पाइप लाइन बिछा दी गई है  । जिसमें किसानों के खेतों में  पॉइंट दिए हुए हैं।  फंव्वारा  सिस्टम तथा मिनी स्पीक्लर के माध्यम से किसानों को अपनी फसलों को सिंचित करने की पूर्ण आजादी होगी। रबी की फसलों को अक्टूबर-नवंबर के महीने में बोया जाता है और अप्रैल-जून के महीने में काटा जाता है, लेकिन अभी तक नहरीकरण पद्धति को सुधारा ही नहीं गया और जिसके चलते हैं संवेदक की कार्य शैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं वहीं क्षतिग्रस्त नहरो में पानी छोड़े जाना  असंभव है ।</p>
<p>बांध के दोनों और विभाग के द्वारा नहरे निकली गई है ,जिसमें प्रत्येक 1 किलोमीटर की दूरी पर विभाग के द्वारा पानी की पंपिंग के लिए डिग्गियां बनाई गई है।  जिसमें पंपिंग करने के लिए पंप सेट तो लगा दिए गए हैं लेकिन अभी बिजली के कनेक्शन बकाया है । <br /><strong>- निर्मल धाकड़, किसान </strong></p>
<p>वहीं नहरो में बारिश के कारण मिट्टी भर गई तो कहीं झाड़ झाड़ियां उग आई।  वही घटिया निर्माण के कारण नहरे 8 से 10 जगह टूट गई जिनका प्रशासन के अधिकारियों को अवगत कराने के बावजूद भी संवेदक के खिलाफ कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हो पाई नाही क्षतिग्रस्त नहरो को सुधार गया । जिसके चलते नहरे घटिया निर्माण की भेंट चढ गई । वहीं किसानों के सामने असमंजस की स्थिति बनी हुई है कि इस वर्ष भी पानी मिलेगा या नहीं मिलेगा।<br /><strong>- प्रहलाद गुर्जर, किसान  </strong></p>
<p>संवेदक को क्षतिग्रस्त नहरों को दुरुस्त करने के लिए बोला गया है, वही नहरों में जल्द से जल्द पानी छोड़कर उनकी टेस्टिंग की जाएगी । वही फव्वारा पद्धति के लिए पंप सेट तथि बिजली कनेक्शन करवा दिए गए हैं जिसके चलते किसानों को सिंचाई के लिए जल्द से जल्द पानी उपलब्ध हो सके।<br /><strong>-  रामअवतार मीणा,  सहायक अभियंता, ,लघुसिंचाई परियोजना, भवानीमंडी । </strong></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/how-will-the-green-revolution-be-spread-through-dilapidated-canals/article-92730</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/how-will-the-green-revolution-be-spread-through-dilapidated-canals/article-92730</guid>
                <pubDate>Thu, 10 Oct 2024 17:09:04 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-10/4427rtrer17.png"                         length="672022"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[kota]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कचरे से अटी नहरें, खेतों में कैसे पहुंचेगा पानी?</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[शहरी क्षेत्र में मुख्य नहरों के धोरों की जमीन पर अतिक्रमण हो गया है। वहीं नहरों में जगह-जगह घुमाव दे दिए। इस कारण टेल तक पानी नहीं पहुंच पाता है। ]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/canals-are-filled-with-garbage--how-will-water-reach-the-fields/article-92723"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/4427rtrer-(3)9.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। चम्बल की दायीं व बायीं मुख्य नहर में आगामी दिनों में जल प्रवाह शुरू होने वाला है, लेकिन अभी तक सफाई का काम शुरू नहीं हो पाया है। नहरों की मरम्मत के लिए करोड़ों रुपए का बजट खर्च हो चुका है, लेकिन नहरों की सेहत पूरी तरह से नहीं सुधर पाई है। नहरों की जो पक्की लाइनिंग की गई थी, वह जगह-जगह से दरक गई। इस कारण प्रतिदिन 800 क्यूसेक पानी व्यर्थ बह जाता है। दायीं मुख्य नहर से कोटा और बारां जिले के अलावा मध्यप्रदेश के किसानों की भी जमीन सिंचित होती है। साठ के दशक में बनी नहरों की समुचित मरम्मत नहीं होने से जल प्रवाह के वक्त बार-बार नहर टूट जाती है। इससे खेतों में समय पर पानी नहीं पहुंच पाता। शहरी क्षेत्र में मुख्य नहरों के धोरों की जमीन पर अतिक्रमण हो गया है। वहीं नहरों में जगह-जगह घुमाव दे दिए। इस कारण टेल तक पानी नहीं पहुंच पाता है। </p>
<p><strong>घास और झाड़ियों ने कर दी दुर्दशा</strong><br />यहां पर जगह-जगह नहरें टूटी पड़ी हैं। नहरें घास व झाड़ियों से अटी हुई हैं। बोरखेडा, कन्सुआ, काला तालाब क्षेत्र की छोटी नहरों पर अतिक्रमण हो रहा है। छावनी और डाढ़देवी रोड पर दायीं मुख्य नहर में ही अतिक्रमण कर मकान खड़े कर लिए हैं। इटावा, अयाना आदि क्षेत्र में नहरें टूटी पड़ी हुई हैं। गणेशगंज लिफ्ट परियोजना की नहरें दुर्दशा की शिकार हो रही हैं। इस कारण खेतों में पानी नहीं पहुंचा पाता है। इससे किसानों को खासी परेशानी होती है। जल प्रवाह शुरू होने से पहले नहरों व लिफ्ट परियोजना की सफाई की जाए तो टेल तक पानी पहुंच सकता है। चार दशक पहले शुरू की गई इस परियोजना की नहरों की बरसों से सुध नहीं लेने के कारण दर्जनों स्थानों पर टूट पड़ी हैं।</p>
<p><strong>किशनपुरा ब्रांच को बना दिया कचरा पात्र</strong><br />चम्बल की दायीं मुख्य नहर की किशनपुरा ब्रांच की करीब पांच किमी लम्बी नहर कचरे से अटी हुई है। अर्से से इस नहर की सफाई नहीं हुई है। किसान जल प्रवाह से पहले नहरों की सफाई की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक ज्यादातर नहरों में सफाई का काम शुरू नहीं हुआ है। दायीं मुख्य नहर से थेगड़ा से किशनपुरा ब्रांच की करीब पांच किमी नहर जगह-जगह से टूटी पड़ी है। शहरी क्षेत्र में होने के कारण लोगों ने इस नहर को कचरा पात्र बना दिया है। आसपास के लोग नहर में ही कचरा डालते हैं। किसानों ने बताया कि किशनपुरा ब्रांच से करीब 20 गांवों के किसानों के खेत सिंचित होते हैं, लेकिन सीएडी के अधिकारियों की अनदेखी के कारण अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच पाता है।</p>
<p><strong>इस तरह का है हाड़ौती का नहरी तंत्र</strong><br />965 किमी चम्बल नदी की कुल लंबाई<br />376 किमी तक बहती है राजस्थान में<br />2.29 लाख हैक्टेयर जमीन सिंचित होती है हाड़ौती की<br />2.29 लाख हैक्टेयर जमीन सिंचित होती है मध्यप्रदेश की<br />29 हजार हैक्टेयर में लिफ्ट परियोजनाओं से होती है सिंचाई<br />6656 क्यूसेक दायीं मुख्य नहर की जल प्रवाह क्षमता<br />1500 क्यूसेक बायीं मुख्य नहर की जल प्रवाह क्षमता<br />03 लाख कोटा, बूंदी व बारां के किसान लाभान्वित</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />दायीं मुख्य नहर से जुड़े आधा दर्जन माइनरों की समय पर साफ-सफाई नहीं होने से उनका अस्तित्व ही नष्ट हो गया। मुख्य नहर की कई स्थानों से टाइलें उखड़ने से जल संचालन में बाधा उत्पन्न होती है। माइनर झाड़ियों व घास से अटे हुए हैं। इस कारण अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंचा पाता है।<br /><strong>- लक्ष्मीचंद नागर, किसान जाखडोंद</strong></p>
<p> किशनपुरा ब्रांच पर प्रभावशाली लोगों ने जगह-जगह अतिक्रमण कर रखा है। धोरों को ही बंद कर दिया है। भ्किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने पिछले दिनों जिला कलक्टर और सीएडी के क्षेत्रीय आयुक्त को किशनपुरा ब्रांच में हो रहे अतिक्रमण को हटाने की मांग की थी, लेकिन अतिक्रमण नहीं हटा है।<br /><strong>- जगदीश कुमार, किसान नेता</strong></p>
<p>नहरों की सफाई का कार्य शुरू कर दिया है। मनरेगा श्रमिकों के माध्यम से सफाई करवाई जा रही है। इसके अलावा मशीनों के माध्यम से भी सफाई का कार्य हो रहा है। नहरों पर हो रहे अतिक्रमण हटाने के संबंध में भी अभियंताओं को निर्देश दिए जा चुके हैं। अभियंताओं को नहरों की मरम्मत कार्य पूरी गुणवत्ता से करवाने को कहा है।<br /><strong>- लखनलाल गुप्ता, अधीक्षण अभियंता, सीएडी कोटा </strong></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/canals-are-filled-with-garbage--how-will-water-reach-the-fields/article-92723</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/canals-are-filled-with-garbage--how-will-water-reach-the-fields/article-92723</guid>
                <pubDate>Thu, 10 Oct 2024 16:44:37 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-10/4427rtrer-%283%299.png"                         length="603919"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[kota]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जमीन की सिंचाई वाली नहरें बन रही मौत का जाल</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[शहर के बीच से निकल रही दोनों नहरों में कई इलाकों में जानलेवा स्थान मौजूद हैं।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/land-irrigation-canals-are-becoming-a-death-trap/article-69222"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/photo-(6)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के दोनों ओर निकली नहरों में आए दिन किसी ना किसी के डूबने की खबर आती रहती है। ऐेसे ही शनिवार को भी कुन्हाड़ी थाना क्षेत्र में एक युवक बाई मुख्य नहर में पानी भरते समय फिसल कर गिर गया था। गनीमत रही की उस समय वहां पुलिस की चेतक गाड़ी गश्त लगा रही थी। जिसमें मौजूद कांस्टेबलों ने युवक को बाहर निकाला और सीपीआर देकर उसकी जान बचाई। लेकिन शहर में यह तो एक घटना है जिसमें युवक को बचा लिया गया इसके अलावा हर महीने किसी ना किसी के नहर में डूबने की खबर आती रहती है। शहर के बीच से निकल रही नहरों में कई स्थान ऐसे हैं, जहां व्यक्ति आसानी से गिर या फिसल सकता है। लेकिन इतने हादसों के बाद भी इन नहरों के किनारे नहाने और अवैध गतिविधियां करने वालों की संख्या में कोई कमी नहीं आ रही है। ना ही प्रशासन कोई कारवाई कर पा रहा है।</p>
<p><strong>दोनों नहरों में कई जानलेवा स्थान</strong><br />शहर के बीच से निकल रही दोनों नहरों में कई इलाकों में जानलेवा स्थान मौजूद हैं। जहां कोई भी व्यक्ति आसानी से गिरकर बह सकता है। दार्इं मुख्य नहर की बात करें तो इस पर कैथून तक कई स्पॉट ऐसे हैं जहां या तो सुरक्षा दीवार टूटी है या सुरक्षा दीवार नहीं है। इस नहर पर छावनी के पास लोगों ने नहाने के लिए स्थान बनाया हुआ है जहां से किसी ना किसी के बहने की खबर आती रहती है। लेकिन बार बार होने वाली इन घटनाओं के बावजूद ना आमजन इसमें नहाने और अन्य कार्य करने से बाज नहीं आ रहे। इसी तरह बार्इं मुख्य नहर में भी नांता मार्ग पर कई स्थानों पर या तो सुरक्षा दीवार नहीं है या जो है वह टूटी हुई जहां से लोग आसानी से नहर में चले जाते हैं।</p>
<p><strong>नहर किनारे करते मछली शिकार</strong><br />दोनों नहरों के किनारे लोग मछली का शिकार करते नजर आ रहे हैं। जिस पर सीएडी विभाग व प्रशासन आंख मूंदे बैठा है। लोग नहरों की दीवारों पर बैठकर तेज बहाव में शिकार कर रहे हैं। जरा सी चूक से जान गवानी पड़ सकती है।</p>
<p><strong>अपनी ही जान की चिंता नहीं</strong><br />इन नहरों में तेज बहाव के दौरान नहाने वाले लोगों को अपनी ही जान की चिंता नहीं है। प्रशासन के साथ साथ आम नागरिकों भी जिम्मेदारी बनती है कि वो ऐसे हालात में नहरों से दूर रहें क्योंकि एक छोटी सी गलती पूरा जीवन समाप्त कर सकती है।</p>
<p><strong>पिछले साल हुई दर्जन भर मौतें फिर भी हालत ज्यों के त्यों</strong><br />नहरों में डूबने से कोटा में पिछले साल दर्जन मौतें हो चुकी है। जहां सबसे ज्यादा मामले नहरों में नहाते समय के हैं। क्योंकि कई स्थानों पर नहर के खुली होने से बच्चे भी इनमें नहाने आ सकते हैं वहीं नहर का बहाव तेज होने के कारण उसमें फंसकर अपनी जान से हाथ धो बैठते हैं। इतनी घटनाएं होने के बावजूद भी इन नहरों में हालत ज्यों के त्यों हैं। जगह जगह पर दीवारें तोड़ कर नहाने के स्थान बनाए हुए हैं।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />सीएडी विभाग की ओर से जो डिजाइन के अनुरुप नहाने के स्थल बने हुए हैं उन्हें छोड़कर बाकी सभी जगहों को हटाया जा रहा है। सुरक्षा दीवारों को भी पुन: बनाया जा रहा है। आम नागरिकों भी तेज बहाव के समय नहरों से दूर रहना चाहिए ताकि हादसा ना हो।<br /><strong>- एमपर सामरिया, अधिशाषी अभियंता, सीएडी कोटा</strong></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/land-irrigation-canals-are-becoming-a-death-trap/article-69222</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/land-irrigation-canals-are-becoming-a-death-trap/article-69222</guid>
                <pubDate>Mon, 05 Feb 2024 17:47:45 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-02/photo-%286%291.png"                         length="563530"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[kota]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>काल का गाल बन रही शहर के बीच से निकल रही नहरें</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[पिछले साल मार्च में भी नहर में डूबने की घटनाएं हुई थी जिसमें चार युवकों की मौत हो गई थी। ]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-canals-coming-out-of-the-middle-of-the-city-are-becoming-the-cheek-of-time/article-60285"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/kaal-ka-gaal-ban-rahi-shahar-k-beech-se-nikal-rahi-naharei..kota-news..23.10.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । शहर के बीच से निकल रही दांयी व बांयी मुख्य नहर में आए दिन लोगों के डूबने की घटनाएं हो रही हैं। उसके बाद भी न तो लोग समझ रहे हैं और न ही पुलिस व प्रशासन चेत रहे हैं। पिछले साल होली पर भी चार युवकों की नहर में डूबने से मौत हो चुकी है। बोरखेड़ा थाना क्षेत्र में शनिवार को नहर में नहाते समय  दो युवक बह गए। यह पहला मौका नहीं है जब नहर में नहाते समय युवक डूबे हों। उसके बाद भी न तो पुलिस प्रशासन चेता है और न ही लोग सचेत हुए हैं। जिसका खामियाजा उस परिवार को भुगतना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>यह हैं दुर्घटना का पॉइंट</strong><br />शहर के बीच से निकल रही दांयी व बायी मुख्य नहर में केवल एक दो जगह ही ऐसी नहीं है जहां लोग नहाते हैं। वरन् नहर  पर जगह-जगह इस तरह के दृश्य देखे जा सकते हैं। फिर चाहे वह कुन्हाड़ी क्षेत्र का इलाका हो या किशोरपुरा गोविंद धाम के पास। गुमानपुरा का क्षेत्र हो या नाग नागिन मंदिर रोड। बोरखेड़ा का क्षेत्र हो या थेगड़ा का।  थर्मल चौराहे से नांता रोड के बीच भी नहर  की चार दीवारी क्षतिग्रस्त हो रही है। शनिवार को भी कई जगह पर लोग नहाते हुए मिले। </p>
<p><strong>पिछले साल धुलंडी पर हुआ था हादसा</strong><br />पिछले साल मार्च 2022 में भी नहर में डूबने की घटनाएं हुई थी। जिसमें चार युवकों की मौत हो गई थी। धुलंडी के  दिन होली खेलने के बाद कुन्हाड़ी थाना क्षेत्र स्थित बांयी मुख्य नहर में अलग-अलग जगह पर नहाने गए तीन युवकों का पैर फिसलने से डूबने पर मौत हो गई थी। जिससे त्योहार के दिन उन परिवारों में मातम छा गया था।  वहीं उद्योग नगर थाना क्षेत्र में भी एक युवक की डूबने से मौत हो गई थी। एक ही दिन में दो थाना क्षेत्रों में एक साथ चार युवकों की मौत से  पुलिस व प्रशासन के अधिकारी हरकत में आए थे। </p>
<p><strong>कलक्टर एसपी ने जारी किए थे आदेश</strong><br />मार्च 2022 में धुलंडी के दिन हुए हादसे के बाद तत्कालीन जिला कलक्टर व पुलिस अधीक्षक ने आदेश जारी दिए थे। जिसमें सभी संबंधित थाना अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि नहर में कोई भी व्यक्ति नहाने नहीं जाए। इसके लिए थाने का जाब्ता नियमित गश्त करेगा और निगरानी रखेगा। इस आदेश की कुछ समय तक तो पालना हुई। लेकिन अधिकारियों के बदलने के साथ ही आदेश भी हवा हो गए।  जिससे फिर से वही पुराना ढर्रा शुरु हो गया। शहर में जगह पर लोग विशेष रूप से बच्चे व युवाओं को नहरों पर नहाते हुए देखा जा सकता है। </p>
<p><strong>क्षतिग्रस्त हो रही नहरें</strong><br />शहर के बीच से निकल रही नहर की चार दीवारी जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो रही है। जिससे वहां से नहर में नीचे की तरफ जाने की लोगों को जगह मिल रही है। जिससे लोग काफी देर तक नहरों में नहाते रहते हैं। कई लोग नशा करने के बाद भी नहर में नहाने चले जाते हैं। जिससे उनके पैर फिसलने व डूबने की घटनाएं हो रही हैं। नाग नागिन मंदिर से 80 फीट रोड स्टिल ब्रिज के बीच नहर की चार दीवारी कई जगह से क्षतिग्रस्त हो रही है। हालांकि सीएडी कीओर से कुछ समय पहले चार दीवारी को सही भी कराया गया था। लेकिन उसके बाद भी वह कई जगह से टूटी हुई है। जहां से लोग नहाने के लिए नीचे तक जा रहे हैं। उद्योग नगर थाना क्षेत्र में शिवाजी पार्क के पीछे कंसुआ और डीसीएम की तरफ जा रही नहर में कई जगह पर नहर के दीवारों में मोखे हो रहे हैं। जिससे लोग वहां नहाने के लिए जा रहे हैं।  थेगड़ा रोड पर भैरूजी मंदिर के पास भी नहर की चार दीवारी कई जगह से क्षतिग्रस्त है। बोरखेड़ा से काला तालाब की तरफ जाने वाले रास्ते में भी नहर की चार दीवारी काफी जगह से क्षतिग्रस्त हो रही है। वर्तमान में नहर में पानी छोड़ा हुआ है। जिससे लोग उसमें नहाने जा रहे हैं।  नांता की तरफ नहर में भी दिनभर बच्चों को कूदकर नहाते हुए देखा जा सकता है। </p>
<p>नहरों की समय-समय पर मरम्मत करवाई जाती है। लोगों को नहर में पानी छोड़ने के दौरान नहाने से मना किया हुआ है। लेकिन उसके बाद भी लोग नहीं समझते हैं। जिससे इस तरह की घटनाएं हो जाती हैं। बजट आने पर जहां से भी नहरें क्षतिग्रस्त हैं उन्हें सही करवा दिया जाएगा। <br /><strong>- एम.पी. सामरिया, अधीक्षण अभियंता, सिचाई विभाग</strong></p>
<p>नहरों पर होली के समय में पुलिस की ओर से निगरानी व गश्त की जाती है। जिससे उस समय कोई नहर में नहाने नहीं जाए। जिससे हादसों को रोका जा सके। अन्य दिनों में यह काम सिचाई विभाग व निगम प्रशासन का है। नहर में नहाने से लोगों को बचना चाहिए।  <br /><strong>- शरद चौधरी, एसपी कोटा शहर </strong></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-canals-coming-out-of-the-middle-of-the-city-are-becoming-the-cheek-of-time/article-60285</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-canals-coming-out-of-the-middle-of-the-city-are-becoming-the-cheek-of-time/article-60285</guid>
                <pubDate>Mon, 23 Oct 2023 16:04:07 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2023-10/kaal-ka-gaal-ban-rahi-shahar-k-beech-se-nikal-rahi-naharei..kota-news..23.10.2023.jpg"                         length="559733"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[kota]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का - नहरों एवं वितरिकाओं में स्नान पर रोक लगाने के निर्देश</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[जल प्रवाह के दौरान मुख्य नहरों तथा इसकी वितरिकाओं में स्थानीय लोग स्नान करने चले जाते हैं। नहरों में तेज जल प्रवाह के दौरान कई व्यक्ति डूबने से असमय काल का ग्रास बन जाते हैं। ]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-news-instructions-to-ban-bathing-in-canals-and-distributaries/article-60256"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/sizte--(3)1.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। जिला कलक्टर एवं मजिस्ट्रेट एम पी मीना ने शनिवार को नहर में डूबने की दुर्घटना को गंभीरता से लेते हुए जिले में नहरों तथा इनकी वितरिकाओं में स्नान पर रोक लगाने को लेकर जिला पुलिस अधीक्षक शहर एवं ग्रामीण तथां आयुक्त नगर निगम उत्तर एवं दक्षिण को निर्देश दिए हैं। इस सम्बंध में दैनिक नवज्योति में नहरों में हो रहे हादसों को लेकर प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था। जिला कलक्टर एवं मजिस्ट्रेट ने बताया कि वर्तमान में चम्बल की दायीं एवं बायीं मुख्य नहरों से सिंचाई के लिए जल प्रवाह किया जा रहा है। जल प्रवाह के दौरान मुख्य नहरों तथा इसकी वितरिकाओं में स्थानीय लोग स्नान करने चले जाते हैं। नहरों में तेज जल प्रवाह के दौरान कई व्यक्ति डूबने से असमय काल का ग्रास बन जाते हैं। 21 अक्टूबर को ऐसी ही एक घटना में पांच व्यक्ति बह गए जिनमें से तीन को सुरक्षित बचा लिया गया। जिला मजिस्ट्रेट ने निर्देश दिए कि वर्तमान में जिले में धारा 144 की निषेधाज्ञा प्रभावी होने के चलते नहरों एवं वितरिकाओं में स्नान करने पर पूर्णतया प्रतिबंध लगाया जाए ताकि कोई दुर्घटना ना घटे। नहरों वितरिकाओं पर निगरानी भी रखी जाए। दोनों नगर निगम के क्षेत्राधिकार में जहां जहां नहरों पर घाट बने हैं या किनारे पर तालाब बने हुए हैं, वहां मजबूत जाली लगाएं ताकि ऐसे स्थलों पर लोग प्रवेश ना कर पाएं।</p>
<p><strong>दैनिक नवज्योति ने उठाया था मामला</strong><br />शहर के बीच से निकल रही दायंी व बायीं मुख्य नहर में आए दिन लोगों के डूबने की घटनाएं होने के सम्बंध में दैनिक नवज्योति ने रविवार के अंक में समाचार प्रकाशित कर प्रमुखता से मामला उठाया था। इसमें बताया था कि नहरों में आए दिन हादसे होने के बाद भी न तो लोग समझ रहे हैं और न ही पुलिस व प्रशासन चेत रहे हैं। पिछले साल होली पर भी चार युवकों की नहर में डूबने से मौत हो गई थी। शहर के बीच से निकल रही नहर की चारदीवारी भी जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो रही है। जिससे वहां से नहर में नीचे की तरफ जाने की लोगों को जगह मिल रही है। जिससे लोग काफी देर तक नहरों में नहाते रहते हैं। कई लोग नशा करने के बाद भी नहर में नहाने चले जाते हैं। जिससे उनके पैर फिसलने व डूबने की घटनाएं हो रही हैं। नाग नागिन मंदिर से 80 फीट रोड स्टिल ब्रिज के बीच नहर की चार दीवारी कई जगह से क्षतिग्रस्त हो रही है। हालांकि सीएडी कीओर से कुछ समय पहले चार दीवारी को सही भी कराया गया था। लेकिन उसके बाद भी वह कई जगह से टूटी हुई है। जहां से लोग नहाने के लिए नीचे तक जा रहे हैं। </p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-news-instructions-to-ban-bathing-in-canals-and-distributaries/article-60256</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-news-instructions-to-ban-bathing-in-canals-and-distributaries/article-60256</guid>
                <pubDate>Mon, 23 Oct 2023 12:33:59 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2023-10/sizte--%283%291.jpg"                         length="329798"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[kota]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>क्यों सूखने लगी हैं वेनिस की नहरें?</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[वेनिस शहर की नहरें सूख रहीं है। तस्वीरें ऐसी हैं जिनमें नौका विहार कराने वाली नावें सूखी नहरों में पड़ी हुई दिखाई दे रही है। लोगों के चेहरों पर मायूसी है। पर्यटन के आलावा वहां के सामान्य जीवन पर भी इसका बड़ा असर पड़ने लगा है। ]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/why-are-the-canals-of-venice-drying-up/article-38162"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/hh1.jpg" alt=""></a><br /><p>इटली का वेनिस शहर पर्यटन के लिहाज से विख्यात रहा है। यहां सैलानी तमाम तरह के खेल में भाग लेने के लिए आते हैं। इटली का सांस्कृतिक और व्यापारिक केंद्र कहा जाने वाला यह शहर नौका विहार के लिए भी मशहूर है। यहां पर्यटक नहर परिवहन का आनंद लेते हैं। यहां तक की यह नहरें यातायात का साधन होने के साथ साथ लोगों की दिनचर्या में शामिल हैं। यह शहर अपनी नहरों में होने वाले नौका परिवहन को खुब प्रचारित भी करता रहा है, लेकिन पिछले दिनों ऐसा क्या हुआ है कि इस शहर की चमक ही खत्म हो गई है, लोगों का जन- जीवन ठप क्यों होने लगा है। वेनिस के नहरों की ऐसी तस्वीरें आ रहीं है कि लोग हैरान है। दरहअसल वेनिस शहर की नहरें सूख रहीं है। तस्वीरें ऐसी हैं जिनमें नौका विहार कराने वाली नावें सूखी नहरों में पड़ी हुई दिखाई दे रही है। लोगों के चेहरों पर मायूसी है। पर्यटन के आलावा वहां के सामान्य जीवन पर भी इसका बड़ा असर पड़ने लगा है। </p>
<p>वैज्ञानिकों के अनुसार वेनिस शहर पर उच्च दबाव के कारण समुद्र की लहरें नीची रहने लगी है, जिससे नहरों का पानी सूख रहा है। लेकिन कुछ लोगों का कहना है कि पूरे इटली में सूखे की स्थिति है, जिसकी वजह से नहरों का पानी सूख रहा है। पिछली बार की गर्मी से ही इटली की नदियों और झीलों में पानी की भारी कमी देखी गई है। पर्यावरणविदों के एक संगठन ने कहा है कि यह शहर ऐसे समय में पानी की कमी झेल रहा है, जब पानी की सप्लाई पर्याप्त होनी चाहिए थी। इस साल पहले से पचास फीसदी कम बर्फबारी हुई है। बर्फ पानी का एक महत्वपूर्ण स्त्रोत होता है। यह नहरों के सूखने के पीछे एक बड़ी वजह है। गौरतलब है कि इटली में पहले बाढ़ आती रही है। 1966 के बाद से 2019 में इटली में बाढ़ की वजह से भारी तबाही भी हुई थी। इटली की सबसे बड़ी नदी पो में इस समय सामान्य से 61 प्रतिशत पानी कम है। जानकारो का कहना है कि यह स्थिति पहले से और भयावह हो सकती है। </p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/why-are-the-canals-of-venice-drying-up/article-38162</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/world/why-are-the-canals-of-venice-drying-up/article-38162</guid>
                <pubDate>Fri, 24 Feb 2023 13:24:43 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2023-02/hh1.jpg"                         length="239075"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Jaipur]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बूढ़ी नहरें हो रही घायल, प्रवाह में बाधा बन रही कागजी सफाई</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[सीएडी ने अधूरी मरम्मत व बिना साफ-सफाई के नहरों में जल प्रवाहित कर दिया। ग्रामीण क्षेत्र में नहर की ब्रांचें व माइनर झाड़िय़ों से अटी पड़ी हैं। माइनरों की टूटी दीवारों की मरम्मत तक नहीं हुई। इससे टेल क्षेत्र के किसानों को पानी मिल पाएगा या नहीं, इसकों लेकर किसानों को चिंता सताने लगी है।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/old-canals-are-getting-injured--paper-cleaning-is-obstructing-the-flow/article-28509"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/budhi-nahare-ho-rahi-ghayal.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। रबी सीजन की फसलों को जीवनदान देने के लिए चम्बल की नहरों में जलप्रवाह किया जा रहा है। सोमवार को दोनों नहरों में जलप्रवाह बढ़ा दिया गया है, लेकिन झाड़-झंखाड़, घास-फूस व कचरे-गंदगी से अटी नहरें जलप्रवाह में बाधा बन रही है। ऐसी स्थिति में आगामी दिनों में जिले के टेल (अंतिम छोर) तक समय पर पानी पहुंचने में संशय बना हुआ है। फिलहाल दायीं नहर में ढाई हजार और बायीं नहर में 800 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। आगामी दिनों में किसानों की मांग आने पर पानी की मात्रा को धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा। चंबल में पानी की मात्रा भरपूर होने से चारों बांधों लबालब भरे हुए हैं। वर्तमान में सिंचाई के लिए बांध की दायीं व बायीं नहरों में जलप्रवाह किया जा रहा है। रविवार को दायीं नहर में 750 क्यूसेक और बायीं नहर में 400 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था। अब सोमवार को पानी की मात्रा बढ़ाकर दायीं नहर में 2550 और बायीं नहर में 800 क्यूसेक कर दिया गया है। </p>
<p><strong>बिना साफ-सफाई किए छोड़ा पानी</strong><br />सीएडी ने अधूरी मरम्मत व बिना साफ-सफाई के नहरों में जल प्रवाहित कर दिया। ग्रामीण क्षेत्र में नहर की ब्रांचें व माइनर झाड़िय़ों से अटी पड़ी हैं। माइनरों की टूटी दीवारों की मरम्मत तक नहीं हुई। इससे टेल क्षेत्र के किसानों को पानी मिल पाएगा या नहीं, इसकों लेकर किसानों को चिंता सताने लगी है। किसानों का कहना है कि पहले अतिवृष्टि ने मेहनत पर पानी फेर दिया। अब रबी सीजन की फसल में किसान मेहनत कर बुवाई कर रहे हैं, लेकिन सीएडी प्रशासन की ओर से क्षतिग्रस्त नहरों की मरम्मत व साफ-सफाई केवल कागजों में ही करवाने से टेल क्षेत्र तक पानी के लिए तरसना पड़ेगा। फिलहाल पानी की ज्यादा जरूरत नहीं है, लेकिन आगामी दिनों में आवश्यकता होने पर नहरी पानी नहीं मिला तो किसानों के सामने परेशानी हो जाएगी।</p>
<p><strong>यहां भी वितरिकाएं हो रही जर्जर</strong><br />किसान नेता विकास कुमार ने बताया कि दायीं मुख्य नहर से ग्रामीण क्षेत्र में निकलने वाली ब्रांचों, माइनरों व वितरिकाओं के बुरे हाल हैं। किशनपुरा ब्रांच दुर्दशा की शिकार है। मरम्मत के नाम पर सीएडी  ने लीपापोती कर दी। थेगड़ा से बोरखेड़ा तक नहर के दोनों हिस्सों की टूटी दीवारों की मरम्मत के नाम पर कुछ माह पहले सीएडी ने काम शुरू किया, लेकिन कुछ स्थानों पर मरम्मत कर बाकी जगह टूटी पड़ी दीवारों को ऐसे ही छोड़ दिया। नहर में कचरे के ढेर लगे है। नहर में कचरे व मलबे की ट्रॉलियां तक खाली कर रखी है। </p>
<p><strong>मरम्मत के  नाम पर खानापूर्ति</strong><br />अयाना के किसान जानकीलाल धाकड़ ने बताया कि दायीं मुख्य नहर की इटावा केनाल ब्रांच की सफाई नहीं हो पाई है। इस कारण केनाल में जगह जगह मिट्टी जमा हो रही है। वहीं इसकी वितरिका व माइनरों की हालत भी ठीक नहीं है। यह जगह-जगह से टूटी पड़ी हैं या इनमें झाडिय़ां व घास उग आई है। जोरावरपुरा वितरिका की माइनर भी क्षतिग्रस्त हालत में है। उसमें झाड़ झंखाड़ उग रहे हंै। अयाना ब्रांच की मुख्य केनाल में भी घासफूस तथा मलबा जमा है। इस कारण इनमें जलप्रवाह के आगे बढ़ने में परेशानी आएगी।</p>
<p><strong>चंबल का नहरी तंत्र</strong><br /><strong>- दार्इं मुख्य नहर</strong><br />6600 क्यूसेक जल प्रवाह क्षमता<br />124  किलोमीटर राजस्थान में<br />248  किलोमीटर मध्यप्रदेश में<br />1.27  लाख हैक्टेयर भूमि राजस्थान में सिंचित<br />3.70  लाख हैक्टेयर भूमि मध्यप्रदेश में सिंचित</p>
<p><strong>- बार्इं मुख्य नहर</strong><br />1500 क्यूसेक जलप्रवाह क्षमता<br />178  किलोमीटर राजस्थान में<br />1.02  लाख हैक्टेयर भूमि सिंचित</p>
<p>रबी फसलों की सिंचाई के लिए दायीं व बायीं नहर में जलप्रवाह किया जा रहा है। किसानों की मांग के अनुसार पानी छोड़ा जा रहा है। जलप्रवाह से पहले से नहरों और माइनरों की साफ-सफाई करवा दी गई थी। टेल क्षेत्र में समय पर नहरी पानी पहुंच जाएगा।<br /><strong>- लखनलाल गुप्ता, अधीक्षण अभियंता, सीएडी कोटा</strong></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/old-canals-are-getting-injured--paper-cleaning-is-obstructing-the-flow/article-28509</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/old-canals-are-getting-injured--paper-cleaning-is-obstructing-the-flow/article-28509</guid>
                <pubDate>Thu, 03 Nov 2022 16:20:43 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-11/budhi-nahare-ho-rahi-ghayal.jpg"                         length="333890"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[kota]]>
                    </dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        