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                <title>disruption - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>disruption RSS Feed</description>
                
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                <title>दुनिया में फिर मंडराया ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने का खतरा : ईधनों की कीमतों में उछाल आने की चेतावनी, डेस्काल्जी ने कहा- खराब हो सकते है हालात</title>
                                    <description><![CDATA[संघर्ष दोबारा भड़कने और होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। दुनिया के 20% तेल-एलएनजी के प्रमुख मार्ग पर असर से कच्चे तेल और गैस की कीमतें बढ़ने की आशंका है। इटली की ऊर्जा कंपनी ENI ने चेताया है कि घटते भंडार और बढ़ती मांग से आने वाले महीनों में संकट और गहरा सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/danger-of-energy-supply-disruption-looms-over-the-world-again/article-159620"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/6622-copy21.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">रोम। अमेरिका और ईरान के बीच फिर से तनाव बढऩे के कारण ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने और ईधनों की कीमतों में उछाल आने का खतरा मंडराने गया है। बड़ी तेल कंपनियों ने दोनों के बीच फिर से शुरू हुई दुश्मनी से दुनिया भर में ऊर्जा आपूर्ति कम होने और इनकी कीमतों में वृद्धि होने को लेकर चेतावनी जारी की है। इटली की बड़ी ऊर्जा कंपनी ईएनआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्लाउडियो डेस्काल्जी ने कहा कि दुनिया में तेल का भंडार कम होने और ऊर्जा स्रोतों के लिए बढ़ती होड़ के बीच हालात कुछ समय के लिए और खराब हो सकते हैं। डेस्काल्जी ने कहा, हम सभी को लगा था कि अमेरिका और ईरान ने संघर्ष का समाधान खोज लिया है। उन्होंने कहा कि वास्तव में, युद्ध का दोबारा शुरू होना एक ऐसी घटना थी, जिसकी आशंका पहले से ही जताई जा रही थी। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">गौरतलब है कि खाड़ी संघर्ष शुरू होने के बाद से वैश्विक तेल भंडार औसतन 38 लाख बैरल प्रतिदिन की दर से घट रहा है। मई में यह गिरावट बढ़कर 46 लाख बैरल प्रतिदिन हो गई। एशियाई खरीदारों के दोबारा बाजार में लौटने के साथ ही ऊर्जा संसाधनों के लिए प्रतिस्पर्धा और तेज होने की संभावना है। इटली को छोड़कर यूरोप में गैस भंडारण क्षमता फिलहाल करीब 47 प्रतिशत ही भरी है, जो निर्धारित 80 प्रतिशत लक्ष्य से काफी कम है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए यूरोपीय देशों को अतिरिक्त 35 अरब घन मीटर गैस की आवश्यकता होगी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">डेस्काल्जी ने कहा कि सर्दियों से पहले गैस भंडारण केंद्रों को भरने के लिए यूरोपीय देशों को लगभग 35 अरब घन मीटर गैस की व्यवस्था करनी होगी।ये आशंका ऐसे समय में जतायी गयी है जब 60 दिन के संघर्षविराम खत्म होने से पहले ही अमेरिका और ईरान एक-दूसरे पर हमले कर रहे हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य<span>  </span>को ईरान ने अब बंद कर दिया है। इस मार्ग से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी गुजरता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';"> </span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 17:57:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिका-जीसीसी गठजोड़ पर ईरान का पलटवार, विदेशी दखल को बताया खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने अमेरिका और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के संयुक्त बयान की कड़ी निंदा करते हुए इसे गैर-जिम्मेदाराना बताया है। ईरान का कहना है कि क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति ही असुरक्षा और विभाजन का मुख्य कारण है। उसने अपनी संप्रभुता, मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं की रक्षा के लिए प्रतिबद्धता दोहराई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iran-hits-back-at-us-gcc-alliance-calls-it-a-threat/article-158172"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/trump1.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान ने शुक्रवार को खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) और अमेरिका के जारी संयुक्त बयान की कड़ी निंदा करते हुए 'हस्तक्षेपकारी, गैर-जिम्मेदाराना और उकसाने वाला' बताते हुए यह कहकर खारिज कर दिया है कि यह क्षेत्र में टकराव बढ़ाने वाली नीति है। यह बयान 25 जून को बहरीन में आयोजित जीसीसी-अमेरिका मंत्री स्तरीय बैठक के बाद आया है, जहां अमेरिकी विदेश मंत्री और जीसीसी के विदेश मंत्रियों ने संयुक्त विज्ञप्ति जारी की थी। ईरान ने कहा कि इस दस्तावेज में शत्रुतापूर्ण रुख अपनाया गया है और क्षेत्रीय मामलों में दखलंदाजी को दोहराया गया है। उसने जीसीसी सदस्य देशों की सुरक्षा के प्रति अमेरिका की 'स्थायी प्रतिबद्धता' के दावे को 'महज बयानबाजी' और सच्चाई को तोड़-मरोड़ कर पेश करना बताया। ईरान का तर्क है कि इस क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति असुरक्षा और विभाजन का कारण बन गयी है।</p>
<p>ईरान ने कहा कि हाल ही में उस पर हुए अमेरिकी-इजरायली हमलों के दौरान क्षेत्रीय देशों में सैन्य ठिकानों और सुविधाओं का इस्तेमाल इस बात का सबूत है कि अमेरिका अपने क्षेत्रीय सहयोगियों की सुरक्षा को कोई अहमियत नहीं देता। क्षेत्र में अमेरिका की भूमिका पर सवाल उठाते हुए ईरान ने कहा, "जीसीसी की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का अमेरिकी दावा सच्चाई को तोड़ना-मरोड़ना है।" उसने कहा, "इस क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति महज बोझ है, जो क्षेत्र के लोगों पर थोपा गया है और यह असुरक्षा तथा विभाजन का स्रोत रहा है।"</p>
<p>अपने बयान में मंत्रालय ने खाड़ी अरब देशों से ईरान के खिलाफ किसी भी कार्रवाई को बढ़ावा देने से बचने का आग्रह किया। ईरान ने उनसे अपील की है कि वे 'अपने क्षेत्रों और सुविधाओं का उपयोग गैर-कानूनी कृत्यों की योजना बनाने, समर्थन करने या उन्हें अंजाम देने' के लिए न होने दें। ईरान ने क्षेत्रीय देशों से अपने रुख पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया। उसने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून और अच्छे पड़ोसी होने के सिद्धांतों के तहत इन देशों का यह दायित्व है कि वे किसी तीसरे पक्ष को ईरान के खिलाफ शत्रुतापूर्ण गतिविधियों के लिए अपनी धरती का उपयोग करने से रोकें। उसने ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े आरोपों को खारिज करते हुए क्षेत्रीय सरकारों पर 'परमाणु हथियारों से मुक्त' पश्चिम एशिया का समर्थन करने के लिए भी दबाव डाला।.</p>
<p>ईरान ने इसके साथ ही जीसीसी के सदस्य देशों से पश्चिम एशिया में परमाणु हथियारों से मुक्त क्षेत्र स्थापित करने के लिए ईरान से सहयोग करने का आग्रह किया। ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं की आलोचना करने के लिए जीसीसी-अमेरिका संयुक्त विज्ञप्ति पर तीखा हमला करते हुए ईरान ने कहा कि वह अपनी संप्रभुता और सैन्य प्रतिरोधक क्षमता की रक्षा करने में 'बिल्कुल भी ढिलाई' नहीं बरतेगा। उसने फिलिस्तीनी-लेबनानी सशस्त्र समूहों को 'ईरानी प्रॉक्सी' बताने के मामले में अमेरिका-इजरायल के सुर में सुर मिलाने वाले खाड़ी देशों के रुख पर भी सवाल उठाया। ईरान ने इसके विपरीत यह तर्क दिया कि इजरायल खुद इस क्षेत्र में प्राथमिक प्रॉक्सी के रूप में काम करता है।समुद्री सुरक्षा पर ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अपने रुख का बचाव किया। उसने कहा कि इस जलमार्ग में कोई भी व्यवधान हालिया अमेरिकी और इजरायली कार्रवाइयों का नतीजा था। उसने दावा किया कि यह जलडमरूमध्य ईरान-ओमान के क्षेत्रीय समुद्र तट के भीतर आता है और इसका प्रबंधन ओमान के साथ हाल ही में हुए एक समझौता पत्र (एमओयू) के तहत संचालित होता है।</p>
<p>ईरान ने जीसीसी देशों से अपने क्षेत्रीय सुरक्षा दृष्टिकोण पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया। उसने इस बात पर जोर दिया कि स्थायी स्थिरता विदेशी सैन्य उपस्थिति के बिना केवल क्षेत्रीय देशों के बीच सहयोग के माध्यम से ही हासिल की जा सकती है।ईरान का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब सिंगापुर के नौवहन अधिकारियों ने रिपोर्ट दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे एक जहाज पर 'बिना उकसावे के और अनुचित' हमला किया गया, हालांकि चालक दल के सदस्य सुरक्षित हैं और जहाज ने अपनी यात्रा जारी रखी है। ईरानी बयान में अपने इस पुराने रुख को भी दोहराया गया है कि क्षेत्रीय सुरक्षा को बाहरी सैन्य उपस्थिति के बिना क्षेत्रीय देशों द्वारा ही संभाला जाना चाहिए, क्योंकि विदेशी संलिप्तता ने बार-बार स्थिरता को नुकसान पहुंचाया है</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 18:25:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नीट पेपर लीक पर 'आप' का हमला,  केजरीवाल और संजय सिंह ने सरकार के कदमों को बताया 'नौटंकी'</title>
                                    <description><![CDATA[आम आदमी पार्टी (AAP) ने नीट पेपर लीक रोकने के सरकारी दावों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया कि अरबों रुपये के इस काले कारोबार को प्रभावशाली लोगों का संरक्षण प्राप्त है। संजय सिंह ने टेलीग्राम बैन जैसे कदमों को मूल समस्या से ध्यान भटकाने वाली नौटंकी बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/aap-raised-questions-on-the-steps-being-taken-by-the/article-157377"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/sanjay-singh.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (आप) ने नीट परीक्षा में पेपर लीक रोकने के लिए केंद्र सरकार की ओर से उठाये जा रहे कदमों पर सवाल खड़े किये हैं। आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर जारी वीडियो संदेश में कहा कि सरकार की प्राथमिकता पेपर लीक रोकना नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक का कारोबार अरबों-खरबों रुपये का है और इसके पीछे प्रभावशाली लोगों का संरक्षण है। उन्होंने दावा किया कि यदि सरकार वास्तव में इस समस्या को समाप्त करना चाहती तो अब तक प्रभावी और स्थायी कदम उठाये जा चुके होते।</p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक से होने वाली कमाई का इस्तेमाल राजनीतिक गतिविधियों और जनप्रतिनिधियों की खरीद-फरोख्त में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक इस पूरे तंत्र को नहीं बदला जायेगा, तब तक पेपर लीक की घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं। उन्होंने युवाओं और आम जनता से इस मुद्दे पर आवाज उठाने और व्यवस्था परिवर्तन के लिए आगे आने की अपील की। उन्होंने कहा कि पहले परीक्षा प्रश्नपत्रों के परिवहन के लिए भारतीय वायुसेना के विमानों का उपयोग करने की बात कही गयी और अब टेलीग्राम पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की जा रही है। उन्होंने इसे सरकार की विफलता बताते हुए कहा कि ऐसे कदमों से पेपर लीक की समस्या का समाधान नहीं होगा।</p>
<p>आप के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि कभी वायुसेना के माध्यम से प्रश्नपत्र पहुंचाने और कभी टेलीग्राम पर प्रतिबंध लगाने जैसे कदमों को पेपर लीक रोकने का समाधान बताना केवल "नौटंकी" है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मूल समस्या से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है और वास्तविक सुधारों की दिशा में गंभीर प्रयास नहीं कर रही।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 16:28:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नीट पुनर्परीक्षा को लेकर केंद्र का बड़ा फैसला: टेलीग्राम एप पर अस्थायी प्रतिबंध, एडिट फीचर भी प्रतिबंधित</title>
                                    <description><![CDATA[नीट-यूजी परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सरकार ने टेलीग्राम ऐप पर 22 जून तक अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया है। एनटीए की सिफारिश पर उठाए गए इस कदम के तहत 30 जून तक मैसेज एडिटिंग फीचर भी ब्लॉक रहेगा। पेपर लीक के फर्जी दावों और धोखाधड़ी रोकने के लिए यह फैसला लिया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/centers-big-decision-regarding-neet-re-examination-temporary-ban-on-telegram/article-157121"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/neet.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सरकार ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट-यूजी) की पुनर्परीक्षा के मद्देनजर इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम पर 22 जून तक अस्थायी पाबंदी लगा दी है। यह कदम राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की सिफारिश पर इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (मैटी) ने उठाया है। सरकार के इस निर्णय के बाद कोई भी उपभोक्ता 22 जून तक इस ऐप का इस्तेमाल नहीं कर पाएगा। इसके अलावा 30 जून तक टेलीग्राम पर किसी मैसेज को एडिट भी नहीं कर पाएंगे।</p>
<p>एनटीए ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा है कि धोखाधड़ी करने वाले गिरोह कथित तौर पर नीट उम्मीदवारों को ठगने के लिए टेलीग्राम का इस्तेमाल करते थे और पेपर लीक होने के झूठे दावे करते थे। एनटीए के अनुसार भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र ने एनटीए और राज्य पुलिस से मिली जानकारी के आधार पर कई टेलीग्राम चैनलों, ग्रुप्स और बॉट्स को बंद करवाने में मदद की है। एनटीए ने बताया है कि एक-एक करके चैनलों पर कार्रवाई करने से भी खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होने पर प्लेटफ़ॉर्म-स्तर पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया।</p>
<p>एनटीए के मुताबिक 'पेपर लीक' और 'री-एग्जाम 2026' जैसे नामों वाले चैनलों ने कथित तौर पर नकली पेपर के लिए उम्मीदवारों से हज़ारों से लेकर लाखों रुपये की मांग की। एनटीए ने दावा किया है कि टेलीग्राम के एडिटिंग फीचर की वजह से एडमिन पुरानी फाइलों को बदलकर उनकी जगह नयी फाइलें डाल सकते थे, जबकि ओरिजिनल टाइमस्टैम्प वही रहता था। इस वजह से परीक्षा के बाद गुमराह करने वाले सबूत बन जाते थे। एनटीए ने कहा है कि इस निर्णय से असली उपभोक्ता भी प्रभावित होंगे लेकिन यह सिर्फ परीक्षा की अवधि तक ही लागू रहेगी और इसका मकसद परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखना है। एनटीए ने इस परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों को भरोसा दिलाया है कि 21 जून 2026 को होने वाली पुनर्परीक्षा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही होगी। इसके साथ ही एनटीए ने विद्यार्थियों से अपील की है कि वे सिर्फ एनटीए की आधिकारिक जानकारी पर ही विश्वास करें।</p>
<p><strong>एनटीए ने किया फैसले का स्वागत</strong></p>
<p>राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (स्नातक) 2026 की पुनर्परीक्षा को सुरक्षित और निष्पक्ष बनाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा टेलीग्राम प्लेटफॉर्म पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध का स्वागत किया है। एनटीए ने मंगलवार को बताया इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69ए के तहत टेलीग्राम की भारत में पहुंच को 22 जून तक सीमित करने का निर्देश दिया है। साथ ही 30 जून तक प्लेटफॉर्म पर पहले से पोस्ट किये गये संदेशों के संपादन (मैसेज एडिटिंग) फीचर को भी निष्क्रिय करने के निर्देश दिये गये हैं।</p>
<p>एनटीए ने कहा कि यह कार्रवाई उन संगठित गिरोहों के खिलाफ की गई है जो टेलीग्राम के माध्यम से नीट पुनर्परीक्षा के प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के झूठे दावे कर अभ्यर्थियों और उनके परिवारों से ठगी कर रहे थे। एजेंसी ने बताया कि गृह मंत्रालय के अधीन भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4सी), विभिन्न राज्यों की पुलिस तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से ऐसे कई चैनलों, समूहों और बॉट्स पर लगातार कार्रवाई की गई, जो फर्जी और भ्रामक सामग्री प्रसारित कर रहे थे।</p>
<p>एनटीए और उच्च शिक्षा विभाग ने सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित किया था कि केवल अलग-अलग चैनलों को हटाने की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। इसके बाद प्लेटफॉर्म स्तर पर सीमित और समयबद्ध प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया। एनटीए ने स्पष्ट किया कि यह कदम अंतिम उपाय के रूप में उठाया गया है और इसका उद्देश्य केवल परीक्षा अवधि के दौरान सार्वजनिक व्यवस्था तथा परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखना है।</p>
<p>एनटीए ने आश्वस्त किया है कि नीट(यूजी) 2026 की पुनर्परीक्षा 21 जून को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आयोजित होगी और परीक्षा की सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित है। एजेंसी ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि वे किसी भी अपुष्ट जानकारी पर विश्वास न करें तथा केवल आधिकारिक वेबसाइट और एनटीए के सत्यापित माध्यमों से ही जानकारी प्राप्त करें। किसी भी प्रकार की ऑनलाइन ठगी या संदिग्ध गतिविधि की सूचना राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 अथवा साइबर क्राइम पोर्टल पर देने की सलाह भी दी गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 12:29:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>राहुल गांधी का तीखा प्रहार, बोले- केंद्र सरकार में शिक्षा व्यवस्था हुई बर्बाद, आकांक्षा की मौत इसी विफलता का परिणाम</title>
                                    <description><![CDATA[लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने नीट पेपर लीक मामले में केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने छात्रा आकांक्षा की मृत्यु पर गहरा दुख जताते हुए इसे आत्महत्या नहीं, बल्कि लगातार लीक होते पेपरों और प्रशासनिक विफलता का नतीजा बताया। राहुल ने कहा कि इस टूटी व्यवस्था की कीमत पूरी युवा पीढ़ी चुका रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rahul-gandhis-sharp-attack-said-the-education-system-in/article-155967"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/rahul-gandhi2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने नीट परीक्षा गड़बड़ी के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि नीट पेपर लीक के कारण जान गंवाने वाली आकांक्षा की मौत आत्महत्या नहीं, बल्कि एक भ्रष्ट और टूटी हुई व्यवस्था का परिणाम है। राहुल गांधी ने गुरुवार को सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि आकांक्षा डॉक्टर बनकर देश और समाज की सेवा करना चाहती थी। उसके पिता किसान हैं, जिन्होंने बेटी के सपने को पूरा करने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड पर तीन लाख रुपये का कर्ज लिया और नागपुर में रसोइए की नौकरी की, ताकि वह कोचिंग कर सके।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा कि एक पिता ने अपनी ओर से हर संभव प्रयास किया, लेकिन नीट पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के बाद पैदा हुई अनिश्चितता के बीच आकांक्षा हमें छोड़कर चली गई। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि यह केवल एक छात्रा की त्रासदी नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की विफलता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री अब भी पद पर बने हुए हैं और सरकार की ओर से केवल समितियां गठित करने, अधिकारियों के तबादले करने तथा जांच की घोषणा करने तक ही कार्रवाई सीमित है।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा कि सत्ता स्थायी नहीं होती, लेकिन पिछले 12 वर्षों में शिक्षा व्यवस्था को जिस स्थिति में पहुंचाया गया है, उसकी कीमत देश की पूरी युवा पीढ़ी चुका रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार होने वाले परीक्षा विवादों, पेपर लीक और प्रशासनिक अव्यवस्था ने छात्रों के भविष्य को संकट में डाल दिया है।</p>
<p><br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 18:51:24 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान: मोजतबा खामेनेई अमेरिका के साथ चल रही बातचीत में पूरी तरह शामिल, संघर्ष-विराम पर बन सकती है सहमति</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई शांति वार्ता में पूरी तरह सक्रिय हैं। ट्रंप ने कहा कि नाजुक युद्धविराम के बावजूद दोनों पक्षों में आपसी समझ बन रही है। हवाई हमले में घायल मोजतबा से ट्रंप ने भविष्य में मुलाकात की इच्छा भी जताई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/trump-claims-mojtaba-khamenei-is-fully-involved-in-the-ongoing/article-155930"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई अमेरिका के साथ ईरान की चल रही बातचीत में पूरी तरह शामिल हैं। ट्रंप ने न्यूयार्क पोस्ट से कहा कि नाजुक संघर्ष-विराम और शांति वार्ता के पूरी तरह से ठप पड़ जाने के बावजूद दोनों नेताओं के बीच काफी अच्छी बन रही है। मोजतबा के बारे में ट्रंप ने कहा, "वह इसमें शामिल हैं, बिल्कुल। हां, मुझे लगता है कि वह उनका बहुत सम्मान करते हैं। मुझे उनसे मिलने का सौभाग्य नहीं मिला है... अगर आप कहानियों पर विश्वास करें, तो उनके शरीर के कई अंग गायब हैं।"</p>
<p>उन्होंने आगे कहा, "वे कहते हैं कि वह मंजूरी दे रहे हैं, क्योंकि लंबे समय से ऐसा ही होता आया है। पहले उनके पिता और फिर वह, मुझे लगता है कि यह एक उत्तराधिकार है। लेकिन ऐसा लगता है कि हमारी आपस में काफी अच्छी बन रही है।" ईरानी नेता के साथ संभावित मुलाकात के बारे में उन्होंने कहा, "हां, मैं उनसे मिलना चाहूंगा। मैं हर किसी से मिलना पसंद करूंगा। मैं उनसे मिलना चाहूंगा और शायद हम किसी न किसी मोड़ पर मिलेंगे, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि सब कुछ कैसे आगे बढ़ता है।"</p>
<p>छप्पन वर्षीय मोजतबा अमेरिका-इजराइल के साथ ईरान की युद्ध की शुरुआत के बाद से सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए हैं। खुफिया रिपोर्टों से हालांकि पता चला है कि अचानक हुए हवाई हमलों में वह बुरी तरह घायल हो गए थे और कथित तौर पर उनका चेहरा भी बिगड़ गया था। इन हमलों में उनके पिता दिवंगत सर्वोच्च नेता अली खामेनेई और ईरानी नेतृत्व के कई शीर्ष सदस्य मारे गए थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 11:46:42 +0530</pubDate>
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                <title>सीआईके की बड़ी कार्रवाई, आतंकवाद से जुड़े मामले में कश्मीर घाटी में चलाया तलाशी अभियान</title>
                                    <description><![CDATA[जम्मू-कश्मीर पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस विंग (CIK) ने आतंकवाद से जुड़े एक मामले में घाटी में व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया है। अधिकारियों के अनुसार, श्रीनगर, कुलगाम, अनंतनाग, बांदीपोरा, सोपोर और कुपवाड़ा जिलों में कई ठिकानों पर छापेमारी जारी है। एजेंसी जल्द ही मामले से जुड़े साक्ष्य साझा करेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/big-action-by-cik-search-operation-conducted-in-kashmir-valley/article-155816"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/cik-raid.webp" alt=""></a><br /><p>श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस कश्मीर (सीआईके) शाखा ने बुधवार को आतंकवाद से जुड़े एक मामले की जांच के सिलसिले में घाटी में कई जगहों पर तलाशी अभियान शुरू किया। अधिकारियों ने बताया कि यह तलाशी अभियान कुलगाम, अनंतनाग, श्रीनगर, बांदीपोरा, सोपोर और कुपवाड़ा सहित कई जिलों में चलाया गया। अधिकारियों ने बताया कि ये छापेमारी एजेंसी द्वारा जांच किये जा रहे एक आतंकवाद-संबंधी मामले की चल रही जांच के तहत की गयी है। उन्होंने कहा, “तलाशी अभियान फिलहाल जारी है। मामले से संबंधित विस्तृत जानकारी बाद में साझा की जाएगी।” उन्होंने बताया कि ये छापे एजेंसी द्वारा जांच किये जा रहे आतंकवाद से जुड़े एक मामले की चल रही जांच का ही हिस्सा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 15:39:06 +0530</pubDate>
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                <title>पटना में खान ग्लोबल स्टडीज संस्थान पर हमला: शक की सुई प्रतिद्वंद्वी कोचिंग संस्थानों की तरफ, ज्ञान बिंदु कोचिंग के डायरेक्टर समेत 3 लोग गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[पटना में खान सर के कोचिंग सेंटर पर असामाजिक तत्वों ने हमला कर तोड़फोड़ की और गार्ड को पीटा। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ज्ञान बिंदु कोचिंग के डायरेक्टर रोशन आनंद और दो सहयोगियों को गिरफ्तार किया है। इस घटना के बाद बिहार शिक्षा विभाग ने नई कोचिंग नीति बनाने की घोषणा की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/attack-on-khan-global-studies-institute-in-patna-points-needle/article-155842"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/patna.png" alt=""></a><br /><p>पटना। बिहार की राजधानी पटना के कदमकुआँ थाना क्षेत्र स्थित खान सर के कोचिंग सेंटर के बाहर मंगलवार देर रात कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा तोड़फोड़ और मारपीट की गई। इस हमले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में कुछ लोग गार्ड को पीटते दिख रहे हैं। जिससे वह घायल हो गया। घायल गार्ड को उपचार के लिए भेजा गया है। इस मामले में त्वतरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने ज्ञान बिंदु कोचिंग के डायरेक्टर रोशन आनंद समेत उनके दो सहयोगी अभिषेक और गौरव को गिरफ्तार किया है। फिलहाल पुलिस तीनों से पूछताछ कर रही है। इस घटना के बाद बिहार शिक्षा विभाग ने कोचिंग नीति बनाए जाने की घोषणा की है। </p>
<p>पुलिस सूत्रों के अनुसार 02 जून रात्रि करीब 10 बजे 15-20 लोगों के एक समूह ने कथित तौर पर संस्थान परिसर में घुसकर तोड़फोड़ के साथ पथराव किया। इस दौरान हमलावरों ने सुरक्षा कर्मियों के साथ मारपीट की, जिसमे एक सुरक्षा गार्ड घायल हो गया। घायल सुरक्षाकर्मी को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर संस्थान एवं आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में कुछ संदिग्धों की पहचान होने की बात कही जा रही है, हालांकि पुलिस ने अभी तक किसी गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। नगर पुलिस अधीक्षक के कार्यालय से जारी सूचना में कहा गया है कि घटना में पहचान किये गए अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है और शीघ्र ही इस पर विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p>इस घटना के बारे में संस्थान के मालिक खान सर (फैसल खान) के मैनेजर अजित ने मीडिया को बताया कि मंगलवार रात 10 बजे जब सुरक्षाकर्मी गेट बंद कर रहा था, उसी समय 10-15 की संख्या में लोग गेट पर आ गये और उसके साथ दुर्व्यवहार करने लगे। सुरक्षाकर्मी ने जब विरोध किया तो उसे पकड़ लिया गया और मारपीट की गई, जिसमे वह बुरी तरह घायल हो गया। उन्होंने बताया कि घटना की सूचना मिलने पर पुलिस तेजी से हरकत में आई और मामले को नियंत्रण में लिया। </p>
<p>पुलिस के आने पर तोड़फोड़ कर रहे असामाजिक तत्व घटना स्थल से भाग लिए। अजीत ने इस मामले में पुलिस की भूमिका की सराहना की और किसी का नाम रखे बगैर कहा कि इस घटना के पीछे खान सर से इर्ष्या करने वाले किसी कोचिंग संस्थान के मालिक का हाथ हो सकता है। उन्होंने कहा कि इस वारदात के समय गोली चलने जैसी आवाज तो आई थी लेकिन उन्होंने इसे प्रत्यक्ष तौर पर नही देखा था। उन्होंने कहा कि आज एहतियात के तौर पर संस्थान को बंद रखा गया है, लेकिन छात्र इस घटना के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं। संस्थान के संचालक खान सर ने भी घटना के पीछे साजिश की आशंका जताई है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की मांग की है। घटना के विरोध में बुधवार को बड़ी संख्या में छात्र संस्थान के बाहर एकत्र हुए और दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की। एहतियात के तौर पर इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। पुलिस ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 14:51:36 +0530</pubDate>
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                <title>जापान में तूफान जोंगमी ने मचाई तबाही : मूसलाधार बारिश और तेज हवाओं से 60 हजार घरों की बत्ती गुल, अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानें रद्द </title>
                                    <description><![CDATA[भीषण उष्णकटिबंधीय तूफान 'जोंगमी' ने जापान में भारी तबाही मचाई है। ग्रेटर टोक्यो की ओर बढ़ रहे इस तूफान के कारण 60,000 घरों की बिजली गुल हो गई है। प्रशासन ने लाखों निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है और सुरक्षा कारणों से 900 उड़ानें रद्द कर दी गई हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/typhoon-jongmi-caused-devastation-in-japan-power-supply-to-60000/article-155832"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/japan.png" alt=""></a><br /><p>टोक्यो। उष्णकटिबंधीय भीषण तूफान जोंगमी के चलते तेज हवाओं और मूसलाधार बारिश ने बुधवार सुबह जापान के विभिन्न हिस्सों में कहर बरपाया जिससे लगभग 60 हजार से घर प्रभावित हुए हैं। जापान की मौसम विज्ञान एजेंसी ने कहा कि तूफान का केंद्र मुख्य मध्य द्वीप होंशू से दूर था, जो 25 मीटर प्रति सेकंड की अधिकतम निरंतर हवा की गति के साथ उत्तर-पूर्व में ग्रेटर टोक्यो क्षेत्र की ओर बढ़ रहा था। एजेंसी ने यह भी कहा कि प्रशांत तट के किनारे स्थित कुछ क्षेत्रों में 'भयावह प्राकृतिक आपदाओं' के कारण यहां रखना खतरनाक होता जा रहा है।</p>
<p>सरकारी प्रवक्ता मिनोरू किहारा ने नियमित प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि इस सीजन का यह छठा चक्रवाती तूफान है। इसके स्तर को कम कर उष्णकटिबंधीय तूफान में बदल दिया गया था, उसका केंद्रीय दबाव 980 एचपीए है। इसकी वजह से लगभग 60,000 घरों की बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है। किहारा ने लोगों को सलाह दी, "अगर आपको किसी भी खतरे का आभास होता है, तो कृपया अपनी जान बचाने के लिए जल्द से जल्द कदम उठाने में संकोच न करें।" दक्षिण-पश्चिमी, मध्य और पूर्वी जापान के आठ प्रांतों में लाखों निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गयी थी। तूफान के कारण बुधवार सुबह करीब 900 अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानें रद्द कर दी गयीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 13:16:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>फारस की खाड़ी में फिर बढ़ा युद्ध का खतरा: अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौता टूटने की आशंका प्रबल, ईरान बोला- जल्दबाजी मंजूर नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मेहरान कामरावा के अनुसार, अमेरिका-ईरान शांति समझौता टूटने की कगार पर है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा नए संशोधनों के दबाव और प्रतिबंध हटाने की शर्तों पर दोनों पक्षों में गहरा मतभेद है। ईरान जहां धीमी प्रक्रिया चाहता है, वहीं अमेरिका त्वरित समझौते के पक्ष में है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/danger-of-war-increases-again-in-the-persian-gulf-fear/article-155814"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/america-and-iran.png" alt=""></a><br /><p>दोहा। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे शांति समझौते की टूटने की आशंका जतायी जा रही है। कतर में जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मेहरान कामरावा ने बताया कि फारस की खाड़ी में तनाव और सैन्य टकराव किसी भी पल फिर से शुरू हो सकता है। उन्होंने कहा कि ईरान की परिसंपत्तियों पर लगी रोक और ईरान के खिलाफ प्रतिबंधों को हटाने का प्रश्न अब भी बातचीत में प्रमुख गतिरोध बना हुआ है। उन्होंने कहा कि हालांकि समझौते पर मोटेतौर पर रूपरेखा पर सहमति बन गई है लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार नए संशोधन करने की प्रयास कर रहे हैं, जिसे ईरान भरोसे के लायक नहीं मानता है।</p>
<p>उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि ईरान चाहता है कि अमेरिका उसके खिलाफ लगे प्रतिबंधों को हटा ले, जबकि ट्रंप का कहना है कि प्रतिबंधों में राहत "ईरान के बर्ताव' के आधार पर दी जानी चाहिये। राष्ट्रपति ट्रंप इस बात पर भी अड़े हैं कि समझौते के तहत ईरान की जब्त की गयी राशि जारी नहीं की जायेगी, भले ही मसौदा समझौते में इन संपत्तियों का आधा हिस्सा जारी करने का प्रावधान है। समझौते के स्वरूप को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच मतभेद बरकरार हैं।</p>
<p>प्रो. कमरावा बताते हैं, "ईरानियों और अमेरिकियों की इस बात को लेकर बिल्कुल अलग-अलग धारणाएं हैं कि किसी समझौते का स्वरूप कैसा होना चाहिए। ईरान एक अपेक्षाकृत धीमी गति से आगे बढ़ने वाले समझौते का पक्षधर है। वह इस प्रक्रिया में पर्याप्त समय लेना चाहता है और जरूरी नहीं कि किसी त्वरित समझौते पर पहुंचे। दूसरी ओर, अमेरिका एक शीघ्र और तेजी से संपन्न होने वाला समझौता चाहता है।"<br />गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती नजदीकियों का लगातार विरोध कर रहा इजरायल अब भी ऐसा अनिश्चित तत्व बना हुआ है, जो किसी भी समय शांति समझौते को विफल कर सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 11:33:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>जयराम रमेश का बड़ा हमला: पश्चिम एशिया संकट और तेल कीमतों पर केंद्र की खामोशी अनुचित, कहा- भारत का बहुत कुछ दांव पर</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने अमेरिका-ईरान वार्ता और लेबनान में इजरायली सैन्य कार्रवाई पर केंद्र सरकार की चुप्पी की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि इस भू-राजनीतिक संकट का सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और तेल की कीमतों पर पड़ेगा, इसलिए सरकार को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/jairam-rameshs-big-attack-centres-silence-on-west-asia-crisis/article-155704"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/jairamm-ramesh.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने पश्चिम एशिया में तनाव और ईरान-अमेरिका वार्ता का भारत पर पड़ने वाले प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा है कि इसमें भारत का बहुत कुछ दाव पर लगा हुआ है और ऐसे में केंद्र सरकार की चुप्पी को उचित नहीं कहा जा सकता है। पार्टी का कहना है कि यदि वार्ता सफल होती है तो होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खुल सकता है और वैश्विक तेल कीमतों पर दबाव कम होगा, जिसका सीधा लाभ भारत को मिलेगा।</p>
<p>कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच पश्चिम एशिया में युद्ध जैसी स्थिति को समाप्त करने के लिए बातचीत चल रही है लेकिन इस बीच इज़रायल की लेबनान में जारी सैन्य कार्रवाई के कारण किसी भी समझौते को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की नीतियों पर नाराजगी जता चुके हैं और दुनिया के कई अन्य देश भी लेबनान में इज़रायली अभियान की आलोचना कर रहे हैं।</p>
<p>जयराम रमेश ने कहा कि ऐसे समय में जब इज़रायल की कार्रवाई संभावित अमेरिका-ईरान समझौते को प्रभावित कर सकती है। केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर पूरी तरह चुप्पी साध रखी है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की यह चुप्पी कई सवाल खड़े करती है, जबकि इस पूरे घटनाक्रम का असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और तेल कीमतों पर पड़ सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 15:31:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>दिल्ली रूट पर निजी बस परमिट की तैयारी : रोडवेज प्रशासन ने जताया विरोध, कहा- नए निजी परमिट से रोडवेज को होगा आर्थिक नुकसान </title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली रूट पर निजी बसों को उपनगरीय परमिट देने के फैसले के खिलाफ राजस्थान रोडवेज ने परिवहन विभाग में कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। रोडवेज ने तर्क दिया कि हाईवे पर पहले से ही 232 सरकारी बसें चल रही हैं। नए परमिट देने से रोडवेज को भारी आर्थिक नुकसान होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/roadways-administration-expressed-opposition-to-the-preparation-of-private-bus/article-155639"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/bus.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। दिल्ली रूट पर निजी बसों को उपनगरीय परमिट देने की तैयारी के बीच राजस्थान रोडवेज प्रशासन ने विरोध दर्ज कराया है। रोडवेज ने परिवहन विभाग को भेजी आपत्ति में कहा है कि कोटपूतली-शाहपुरा हाईवे और दिल्ली मार्ग पर पहले से ही पर्याप्त सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध है, ऐसे में नए निजी परमिट जारी किए जाने से रोडवेज को आर्थिक नुकसान होगा और भविष्य की परिवहन योजनाएं प्रभावित होंगी। रोडवेज प्रशासन के अनुसार दिल्ली रूट पर राजस्थान रोडवेज की 168 बसें संचालित हो रही हैं, जबकि अन्य राज्यों के परिवहन निगमों की 64 बसें भी इस मार्ग पर चल रही हैं। इस प्रकार कुल 232 बसें एकतरफा रूप से इस रूट पर सेवा दे रही हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में अवैध वाहन भी दिल्ली मार्ग पर संचालित हो रहे हैं, जिनके विरुद्ध प्रभावी प्रवर्तन कार्रवाई नहीं होने से स्थिति और जटिल बनी हुई है।</p>
<p>रोडवेज ने यह भी बताया कि राज्य सरकार की बजट घोषणा के तहत 1500 नई बसें शामिल की जानी हैं तथा जल्द ही 300 इलेक्ट्रिक बसें भी बेड़े में जुड़ेंगी। इनमें से बड़ी संख्या में बसों का संचालन शाहपुरा, कोटपूतली और दिल्ली रूट पर प्रस्तावित है। वर्तमान में हीरापुरा-खाटूश्यामजी और हीरापुरा-शाहपुरा मार्ग की रोडवेज बसें भी हाईवे से होकर संचालित हो रही हैं। रोडवेज प्रशासन ने मांग की है कि निजी बसों को परमिट जारी करने से पहले उसका पक्ष सुना जाए, ताकि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और यात्रियों के हितों को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लिया जा सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 19:00:17 +0530</pubDate>
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