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                <title>अमेरिका-इजरायल व ईरान युद्ध : 15 सौ करोड़  का निर्यात अटका, हाड़ौती की अर्थव्यवस्था होगी प्रभावित</title>
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                        <![CDATA[प्रभावित होगा कोटा का नियार्त: पेट्रोल-डीजल की किल्लत, वस्तुओं की कीमतें बढ़ेगी ।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/us-israel-iran-war--exports-worth-1500-crore-rupees-stalled/article-145622"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/200-x-60-px)-(2)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । पहले अमेरिका द्वारा भारत पर पचास फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा से निर्यात उद्योग प्रभावित हुआ था। उससे अभी पूरी तरह से उबरा भी नहीं था कि अब अमेरिका-इजरायल व इरान के बीच युद्ध से कोटा समेत हाड़ौती का निर्यात और अधिक प्रभावित हुआ है। करीब 15 सौ करोड़ से अधिक का निर्यात अटक गया है। वहीं आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की किल्लत होने व अन्य वस्तुओं की कीमतें बढ?े की भी संभावना है। अमेरिका और इजरायल व ईरान के बीच पिछले कई दिन से युद्ध चल रहा है। जिससे उन देशों में तो लोग परेशान हो ही रहे हैं। इसका सबसे अधिक असर भारत पर भी पड़ रहा है। भारत के अन्य प्रदेशों के साथ ही कोटा से भी बड़ी मात्रा में सामान अमेरिका और इजरायल व ईरान को निर्यात  होता है। लेकिन युद्ध के कारण वहां हालात इतने अधिक बिगड़े हुए हैं कि वहां कोई भी सामान नहीं पहुंचाया जा सकता है।</p>
<p><strong>मसालों व कैमिकल का अटका निर्यात</strong><br />कोटा व हाड़ौती संभाग से अमेरिका व अन्य देशों को सबसे अधिक चावल के अलावा मसाले जिनमें धनिया व जीरा और गेंहू का निर्यात किया जाता है। साथ ही कैमिकल और सेंड स्टोन का भी निर्यात  होता है। लेकिन युद्ध के कारण नया माल तो वहां निर्यात नहीं हो पा रहा है। साथ ही जो माल कुछ समय पहले सप्लाई हो चुका है वह भी रास्ते में ही अटका हुआ है। जिससे या तो उस माल को पहुंचने में समय अधिक लगेगा। अन्य लम्बे मार्ग से उस सामान को पहुंचाने पर उसका खर्चा अधिक हो जाएगा। या फिर संभावना है कि वह भेजा हुआ माल वापस कोटा व अन्य जगहों पर आ सकता है। जिससे पहले से ही बिगड़ी कोटा की अर्थव्यवस्था पर दोहरी मार पड़ सकती है।</p>
<p><strong>भारत की जीडीपी एक फीसदी प्रभावित</strong><br />दी एसएसआई एसोसिएशन के संस्थापक अध्यक्ष गोविंद राम मित्तल ने बताया कि अमेरिका और इजरायल व ईरान के बीच युद्ध होने से कोटा व हाड़ौती से निर्यात होने वाले मसाले, सेंड स्टोन व कोटा स्टोन, कैमिकल का निर्यात सबसे अधिक प्रभावित होगा। करीब 15 सौ करोड़ का निर्यात इस युद्ध के कारण अटक गया है। उन्होंने बताया कि साथ ही जो माल कुछ समय पहले ही निर्यात हुआ है वह रास्ते में अटका हुआ है। आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल का आयात कम होने से यहां उसकी किल्लत होगी। जिससे सभी वस्तुओं के भाव बढ?े की संभावना है। उन्होंने बताया कि पहले अमेरिका द्वारा पचास फीसदी टैरिफ की घोषणा से निर्यात प्रभावित हुआ था और अब युद्ध से। इस युद्ध से भारत की जीडीपी 1 फीसदी प्रभावित होगी।मित्तल ने बताया कि वैसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दृूरदर्शिता के चलते उन्होंने अन्य देशों से जो डील की है उसके कारण बहुत जल्दी किसी भी चीज की किल्लत का सामना भारतीयों को नहीं करना पड़ेगा।</p>
<p><strong>निर्यात घटेगा और महंगाई बढ़ेगी</strong><br />कोटा व्यापार महासंघ के महासचिव अशोक माहेश्वरी का कहना है कि युद्ध किसी भी देश में हो उससे अन्य देश भी प्रभावित होते हैं। अमेरिका समेत अन्य देशों को हाड़ौती से निर्यात होने वाले मसाले, आटा, सेंड स्टोन पर तो असर पड़ेगा ही। अमेरिका-इजरायल व ईरान में निर्यात पूरी तरह से बंद हो रहा है। वहां से आयात भी नहीं हो पा रहा है। ऐसे में आयात व निर्यात कम होने के साथ ही ईरान से पेट्रोल-डीजल का आयात नहीं होगा। जिससे उनकी किल्लत होने पर अन्य वस्तुओं की कीमतों में उछाल आने से महंगाई बढ़ेगी।</p>
<p><strong>युद्ध लम्बे समय तक चला तो होगी परेशानी</strong><br />कोटा पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष तरूमीत सिंह बेदी ने बताया कि अमेरिका और इजरायल व ईरान में हो रहे युद्ध से सामान्य उद्योग व व्यापार तो प्रभावित हुआ ही है। लेकिन अभी पेट्रोल व डीजल की किल्लत नहीं है। भारत के पास पर्याप्त स्टॉक है। लेकिन यदि युद्ध लम्बे समय तक चला तो खाड़ी देशों से आने वाले तेल का आयात कम या बंद हो जाएगा। उसके बाद इसकी किल्लत व परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।</p>
<p><strong>हाड़ौती की अर्थव्यवस्था होगी प्रभावित</strong><br />कैट के जिला अध्यक्ष अनिल मूंदड़ा ने बताया कि कोचिंग विद्याथियों की कमी से कोटा की अर्थव्यवस्था पहले से ही काफी प्रभावित हुई है। उसके बाद अमेरिका के टैरिफ की घोषणा और अब अमेरिका और इजरायल के बीच युद्ध से हाड़ौती के व्यापार उद्योग की कमर ही टूट जाएगी। यहां से जो माल अन्य देशों को निर्यात होता है वह या तो पूरी तरह से ठप हो जाएगा या कम हो जाएगा। जिससे अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी।</p>
<p><strong>व्यापार-उद्योग पर असर</strong><br />कोटा व्यापार महासंघ के अध्यक्ष क्रांति जैन ने बताया कि युद्ध भले ही अमेरिका और इजरायल व ईरान के बीच हो रहा हो। लेकिन वहां से होने वाला आयात और वहां होने वाला निर्यात बंद या कम होने से व्यापार उद्योग पर असर पड़ता है। कोटा व हाड़ौती से भी मसाले और खाद्य पदार्थ वहां निर्यात होते हैं। जिससे युद्ध के कारण निर्यात नहीं होने से कोटा व हाड़ौती का व्यापार-उद्योग भी प्रभावित होगा।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Mar 2026 15:44:51 +0530</pubDate>
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                <title>मुक्त व्यापार समझौते के करीब ऑस्ट्रेलिया-ईयू: विवादास्पद मुद्दों को हल करने के बाद समझौते पर कर सकते हैं हस्ताक्षर</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर जल्द हस्ताक्षर हो सकते हैं। प्रधानमंत्री अल्बानीज और उर्सला वॉन डेर लेयन लाल मांस निर्यात से जुड़े शेष विवादों को सुलझाने के करीब हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/australia-eu-close-to-free-trade-agreement-can-sign-agreement-after/article-143376"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)-(14)1.png" alt=""></a><br /><p>कैनबेरा। ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच संभावित मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत अपने अंतिम दौर में है और आने वाले हफ्तों में इस पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। ऑस्ट्रेलिया के समाचार चैनल एबीसी न्यूज ने ईयू और ऑस्ट्रेलियाई प्रशासन के हवाले से यह जानकारी दी <br />है। </p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सला वॉन डेर लेयन बचे हुए विवादास्पद मुद्दों को हल करने के बाद समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, ये विवादास्पद मुद्दे लाल गोश्त के निर्यात से संबंधित हैं। वॉन डेर लेयन ऑस्ट्रेलिया का दौरा भी कर सकती हैं, जहां वह न सिर्फ व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करेंगी, बल्कि एक सुरक्षा साझेदारी पर भी मुहर लगाएंगी। उनके दौरे की अंतिम तारीख अभी निर्धारित नहीं हुई है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि इससे पहले ऑस्ट्रेलिया और ईयू के बीच बातचीत कई सालों तक चलने के बाद 2023 में रुक गयी थी। ऑस्ट्रेलिया के व्यापार मंत्री डॉन फरेल ने इससे पहले कहा था कि वह तब तक समझौता नहीं करेंगे, जब तक ईयू लाल गोश्त सहित ऑस्ट्रेलिया के अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए टैरिफ कम नहीं कर देता। </p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Feb 2026 14:59:37 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>अमेरिका-बांग्लादेश व्यापार समझौता: अमेरिका ने बांग्लादेशी वस्तुओं पर आयात शुल्क घटाकर 19% किया, द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को मजबूती पर दिया जोर</title>
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                        <![CDATA[अमेरिका-बांग्लादेश के बीच नए व्यापार समझौते से आयात शुल्क घटेगा। वस्त्र, कृषि, ऊर्जा क्षेत्रों में सहयोग बढ़ेगा, जिससे द्विपक्षीय आर्थिक संबंध मजबूत होंगे।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/us-bangladesh-trade-agreement-us-reduced-import-duty-on-bangladeshi-goods/article-142561"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)8.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका और बांग्लादेश के बीच एक पारस्परिक व्यापार समझौता हुआ है, जो बांग्लादेश वस्तुओं पर आयात शुल्क घटाकर 19 प्रतिशत कर देगा और कुछ वस्त्र एवं परिधान उत्पादों पर छूट प्रदान करेगा और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यालय ने बताया कि यह समझौता एक ऐसा तंत्र स्थापित करेगा जिसके तहत बांग्लादेश के कुछ कपड़ों और परिधान एवं उत्पादों को शून्य पारस्परिक आयात शुल्क प्रदान किया जाएगा। इसके तहत अमेरिकी मूल की सामग्रियों का उपयोग करके बनाए गए कुछ कपड़ा और परिधान उत्पादों के लिए भी छूट दिया गया है। पात्रा आयात की मात्रा का निर्धारण बांग्लादेश द्वारा उपयोग किये गये कपास और मानव निर्मित फाइबर के साथ-साथ अमेरिकी सामग्री के इस्तेमाल के आधार पर किया जाएगा।</p>
<p>व्हाइट हाउस के बयान में बताया गया है कि बांग्लादेश लगभग 3.5 अरब डॉलर के अमेरिकी कृषि उत्पादों की खरीद करेगा, जिसमें गेहूं, सोया, कपास और मक्का शामिल हैं। इसके अतिरिक्त 15 वर्षों में लगभग 15 अरब डॉलर ऊर्जा उत्पादों की भी खरीददारी बांग्लादेश द्वारा की जाएगी। साथ ही इसमें अमेरिकी विमानों के खरीद का भी उल्लेख किया गया है।</p>
<p>यह समझौता 2013 में हस्ताक्षरित अमेरिका-बांग्लादेश व्यापार और निवेश सहयोग मंच समझौते (टीआईसीएफए) पर आधारित है। अमेरिकी अधिकारियों ने इसे एक-दूसरे के बाजारों तक अभूतपूर्व पहुंच के रूप में वर्णित किया है। अमेरिका और बांग्लादेश ने कहा कि इस समझौते का उद्देश्य द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को गहरा करना और दोनों देशों के निर्यातकों के लिए बाजार पहुंच का विस्तार करना है।</p>
<p>सौदे के तहत, बांग्लादेश, अमेरिकी औद्योगिक और कृषि सामानों के लिए महत्वपूर्ण तरजीही बाजार पहुंच प्रदान करेगा, जिसमें रसायन, चिकित्सा उपकरण, मशीनरी, मोटर वाहन और पुर्जे, सूचना और संचार प्रौद्योगिकी उपकरण, ऊर्जा उत्पाद, सोयाबीन, डेयरी उत्पाद, गोमांस, पोल्ट्री, ट्री नट्स और फल शामिल हैं।</p>
<p>दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को प्रभावित करने वाली गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करने के लिए प्रतिबद्धता जताई है, जिसमें बांग्लादेश, अमेरिकी वाहन सुरक्षा और उत्सर्जन मानकों को स्वीकार करने, चिकित्सा उपकरणों और फार्मास्यूटिकल्स के लिए अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) प्रमाणपत्रों को मान्यता देने और अमेरिकी पुनर्मानिर्मित वस्तुओं और पुर्जों पर प्रतिबंध हटाने के लिए सहमत हुआ है।</p>
<p>बांग्लादेश ने विश्वसनीय सीमाओं के पार डेटा के मुफ्त हस्तांतरण की अनुमति देने और विश्व व्यापार संगठन में इलेक्ट्रॉनिक प्रसारण पर सीमा शुल्क पर स्थायी रोक का समर्थन करने पर भी सहमति जतायी है। साथ ही कृषि आयात के लिए विज्ञान और जोखिम-आधारित मानकों को अपनाने, बीमा क्षेत्र में बाधाओं को कम करने, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाने और अच्छी नियामक प्रथाओं को लागू करने की भी प्रतिबद्धता जताई है।</p>
<p>इसके अतिरिक्त बांग्लादेश ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त श्रम अधिकारों की रक्षा करने का संकल्प लिया है, जिसमें जबरन श्रम से उत्पादित वस्तुओं के आयात को प्रतिबंधित करना और श्रम कानूनों में संशोधन करके संघों की स्वतंत्रता और सामूहिक सौदेबाजी की पूरी तरह से रक्षा करना एवं प्रवर्तन को मजबूत करना शामिल है। समझौते में पर्यावरण संरक्षण, भ्रष्टाचार विरोधी उपाय, बौद्धिक संपदा अधिकारों की रक्षा और सब्सिडी तथा राज्य के स्वामित्व वाले उद्यमों के कारण होने वाली विकृतियों को दूर करने की प्रतिबद्धताएं भी शामिल हैं। बांग्लादेश भौगोलिक संकेतों पर महत्वपूर्ण प्रावधानों पर सहमत हुआ है, विशेष रूप से पनीर और मांस उत्पादों के लिए।</p>
<p>दोनों देशों ने यह भी कहा कि वे आपूर्ति श्रृंखला की लचीलापन बढ़ाने, शुल्क चोरी का मुकाबला करने, निर्यात नियंत्रण पर सहयोग करने और निवेश पर जानकारी साझा करने के लिए आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा को भी मजबूत करने की दिशा में काम करेंगे। राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा कि अमेरिका के निर्यात-आयात बैंक और अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय विकास वित्त निगम सहित अमेरिकी संस्थान पात्रता और कानून के अधीन बांग्लादेश में महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निवेश का समर्थन करने पर विचार करेंगे।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Feb 2026 11:49:57 +0530</pubDate>
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                <title>ट्रम्प टैरिफ कम होने से 12 सौ करोड़ हो जाएगा हाड़ौती का निर्यात</title>
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                        <![CDATA[ अब पहले से भी कम टैरिफ, अमेरिका में रहने वाले भारतीयों को यहां की वस्तुएं मिलेंगी सस्ती ।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/hadoti-s-exports-will-reach-1200-crore-rupees-due-to-the-trump-tariff-reduction/article-142050"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/trump&#039;s-tariffs-kam-hone-se-12-sau-crore-ho-jaega-hadoti-ka-niryat...kota-news-05.02.2026.jpg.jpeg" alt=""></a><br /><p>कोटा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा भारत पर लगाए टैरिफ को पहले से भी कम करने की घोषणा की है। इससे हाड़ौती से अमेरिका में होने वाला निर्यात पहले से करीब डेढ़ गुना यानि करीब 12 सौ करोड़ रुपए का होने की संभावना है। साथ ही यहां से निर्यात होने वाले चावल, धनिया, कोटा स्टोन व सैंड स्टोन उद्योग में बढ़ोतरी होगी। अमेरिका द्वारा पूर्व में जहां भारत पर पारम्परिक शुल्क(टैरिफ) 25 फीसदी लगाया हुआ था। उसे कुछ समय पहले बढ़ाकर 50 फीसदी करने की घोषणा कर दी थी। उस घोषणा के साथ ही भारत से अमेरिका में निर्यात होने वाले सामान पर एक तरह से रोक लग गई थी। भारत उसे मानने को तैयार नहीं था और अमेरिका उसे कम करने को राजी नहीं था। ऐसे में भारत ने भी अमेरिका को किए जाने वाले निर्यात को बंद कर दिया था। इससे भारत के अलग-अलग राज्यों से होने वाले सामान का जहां निर्यात घटा था। वहीं उन वस्तुओं की अमेरिका में रहने वाले भारतीय को उपलब्धता होना या तो बंद हो गया था या फिर वह वस्तुएं महंगी हो गई थी।</p>
<p><strong>कई महीनों तक रही असमंजस की स्थिति</strong></p>
<p>ट्रम्प द्वारा टैरिफ बढ़ाने की घोषणा का असर हाड़ौती संभाग पर भी पड़ा था। यहां भी असमंजस की स्थिति बनी रही। जिससे यहां से अमेरिका को निर्यात होने वाले सामान पर रोक लगा दी गई थी। जिससे यहां से होने वाला निर्यात कम हो गया था। हालांकि इससे कोटा के कई उद्योग प्रभावित हुए। लेकिन इसी बीच प्रधानमंत्री द्वारा ब्रिटेन व यूरोप से जो ट्रेड डील की उससे और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने से व्यापार व उद्योग में उम्मीद की किरण जगी थी।</p>
<p><strong>इन वस्तुओं का होता है निर्यात</strong></p>
<p>कोटा व हाड़ौती संभाग के अन्य जिलों से अमेरिका समेत कई अन्य देशों को चावल, धनिया, कोटा स्टोन, सैंड स्टोन, कैमिकल, आटे का निर्यात होता है। जिससे यहां के इन उद्योगों को अमेरिका में मार्केट उपलब्ध होता है। पहले जहां 25 फीसदी टैरिफ लगने से जितना निर्यात यहां से हो रहा था। उस टैरिफ को घटाकर 18 फीसदी करने से अब उस निर्यात में बढ़ोतरी होगी।</p>
<p><strong>800 से 12 सौ करोड़ हो जाएगा निर्यात</strong></p>
<p>हाड़ौती से प्रमुख रूप से चावल, धनिया, कोटा स्टोन, सैंड स्टोन व कैमिकल का अमेरिका में अधिक निर्यात होता है। जिससे वहां रहने वाले भारतीयों को यहां के सामान उपलब्ध होते हैं। लेकिन ट्रम्प द्वारा टैरिफ बढ़ाने की घोषणा से यहां से निर्यात बंद कर दिया था। जिससे यहां से निर्यात तो कम हुआ था लेकिन उससे अधिक नुकसान अमेरिका में आयात घटने से वहां के लोगों को भारतीय वस्तुएं महंगी मिल रही थी। पूर्व में हाड़ौती से जहां करीब आठ सौ करोड़ रुपए सालाना निर्यात हो रहा था। अब टैरिफ पहले से भी कम होने से एक तरफ से अमेरिका ने काफी राहत दी है। जिससे हाड़ौती से निर्यात बढ़कर करीब 12 सौ करोड़ रुपए का हो जाएगा।</p>
<p><strong>- गोविंद राम मित्तल, संस्थापक अध्यक्ष, दी एसएसआई एसोसिएशन</strong></p>
<p><strong>अमेरिका में भारतीय को सस्ती मिलेगी वस्तुएं</strong></p>
<p>कोटा व हाड़ौती से काफी सामान विशेष रूप से खाद्यान से जुड़ी वस्तुओं का अमेरिका में अधिक निर्यात होता है। आटा, चावल व धनिया समेत कई ऐसी वस्तुए़ं हैं जिनकी वहां रहने वाले भारतीयों में अधिक डिमांड है। टैरिफ कम होने से यहां से निर्यात तो बढ़ेगा ही। साथ ही अमेरिका में रहने वाले भारतीयों को यहां की वस्तुएं सस्ती मिलेगी। कुछ समय तक निर्यात बंद रहने से वहां कई वस्तुओं की कीमतें काफी अधिक बढ़ गई थी।</p>
<p><strong>- अशोक माहेश्वरी, महासचिव, कोटा व्यापार महासंघ</strong></p>
<p><strong>अमेरिका में मिलेगा अधिक मार्केट</strong></p>
<p>ट्रम्प टैरिफ कम होना भारत व हाड़ौती के लिए अच्छा संकेत है। इससे यहां से अमेरिका में जाने वाली वस्तुओं का निर्यात बढ़ेगा। यहां की वस्तुओं को अमेरिका में अधिक मार्केट मिलेगा। विशेष रूप से हाड़ौती से चावल, धनिया व अन्य वस्तुएं शामिल हैं।</p>
<p><strong>- मनोज राठी, अध्यक्ष, दी एसएसआई एसोसिएशन</strong></p>
<p><strong>आने वाले समय में होगा लाभ</strong></p>
<p>अमेरिका ने टैरिफ 25 से 50 फीसदी लगाने की घोषणा की थी। जिससे हाड़ौती से वहां होने वाले निर्यात को बंद कर दिया था। जिससे यहां का उद्योग व व्यापार तो प्रभावित हुआ ही था साथ ही सबसे अधिक नुकसान अमेरिका को भी हुआ था। लेकिन अब पहले से कम टैरिफ करने से इसका आने वाले समय में अधिक लाभ होगा। हाड़ौती के व्यापार व उद्योग को फिर से आर्थिक लाभ होगा।</p>
<p><strong>- अनिल मूंदड़ा, अध्यक्ष कैट</strong></p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 15:18:09 +0530</pubDate>
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                <title>दोस्ती की नई मिशाल कायम! पीएम मोदी ने कहा, भारत-ईयू के बीच ऐतिहासिक व्यापार समझौता </title>
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                        <![CDATA[भारत और यूरोपीय संघ के बीच एफटीए पर सहमति बनी। इससे निर्यात बढ़ेगा, व्यापार सरप्लस मजबूत होगा और वैश्विक आपूर्ति शृंखला को नई गति मिलेगी।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/agreement-on-free-trade-fta-between-india-and-european-union/article-140921"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(5)3.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">नई दिल्ली। भारत</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">और</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">यूरोपीय</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">यूनियन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बीच</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मुक्त</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">व्यापार </span>(FTA) <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को लेकर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">समझौता</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हो गया है। 2007 से चली आ रही कोशिश सफल हो गई है। इसे</span> '<span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मदर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ऑफ</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ऑल</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">डील्</span>‍<span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">स</span>' <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">संज्ञा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">गई है। रिपोर्ट्स</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मुताबिक</span>, <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">भारत</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ईयू</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">साथ</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ट्रेड</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सरप्लस</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">वित्त</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">वर्ष</span> 31 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">तक</span> 51 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अरब</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">डॉलर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">तक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पहुंच सकता है। इस</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">समझौते</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">से</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">वित्त</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">वर्ष</span> 2031 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">तक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">यूरोपीय</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">संघ</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">साथ</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">भारत</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">का</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ट्रेड</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सरप्लस</span> 50 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अरब</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">डॉलर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">से</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अधिक की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बढ़ोतरी हो सकती है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">इससे</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">भारत</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कुल</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">निर्यात</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ईयू</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">संघ</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हिस्सेदारी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">वित्त</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">वर्ष</span> 2025 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> 17.3 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">प्रतिशत</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">तुलना</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बढ़कर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">लगभग</span> 22-23 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">प्रतिशत</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हो</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सकती</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">है</span>, <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जिससे</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">भारत</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">निर्यात</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">वृद्धि</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जबरदस्त</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बढ़ावा देखने को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मिलेगा। </span>भारत और यूरोप के 27 देशों के साझा बार-बार यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में सहमति हुई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को इसकी घोषणा करते हुए इस समझौते को ऐतिहासिक करार दिया। </p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा, कल ही भारत और यूरोपीय संघ के बीच एक बहुत बड़ा समझौता हुआ है। दुनिया के लोग इसकी चर्चा मदर ऑफ ऑल डील्स (अब तक के सबसे बड़े व्यापार समझौते) के रूप में कर रहे हैं। उन्होंने कहा, यह समझौता ब्रिटेन के साथ और यूरोप के चार देशों के मुक्त व्यापार संघ एफ्टा के साथ हुए समझौते के पूरक के रूप में कार्य करेगा। भारत और यूरोपीय संघ के बीच इस समझौते से द्विपक्षीय व्यापार और वैश्विक आपूर्ति शृंखला को मजबूती मिलेगी। </p>
<p>उन्होंने इसके लिये देश के सभी नौजवानों और नागरिकों को बधाई देते हुए कहा कि भारत के कपड़ा, रत्न और आभूषण, चमड़ा और चमड़े के सामान जैसे अनेक क्षेत्रों के लिए यह समझौता बहुत सहायक सिद्ध होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत-ईयू एफटीए से न सिर्फ देश के विनिर्माण क्षेत्र को बल मिलेगा बल्कि सेवा क्षेत्र का भी विस्तार होगा। उल्लेखनीय है कि ईयू भारत का एक प्रमुख व्यापारिक और आर्थिक भागीदार है। साल 2024-2025 में दोनों के बीच 136 अरब डॉलर के सामान का व्यापार हुआ था।</p>
<p>भारत वहां से मुख्य रूप से मशीनें, परिवहन उपकरण और रसायनों का आयात करता है, जबकि भारत की ओर से वहां मशीनें, रसायन, लोहा, एल्मुनियम और तांबा जैसी प्राथमिक धातुएं, खनिज उत्पाद तथा कपड़ा और चमड़े के सामान आदि का निर्यात होता है। उल्लेखनीय है कि यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा इस समय भारत में हैं। दोनों सोमवार को गणतंत्र दिवस परेड में मुख्य अतिथि थे। </p>
<p>वॉन डेर लेयेन ने पिछले दिनों दावोस में विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की बैठक में दोनों पक्षों के बीच समझौते पर सहमति का संकेत देते हुए कहा था कि यह समझौता मदर ऑफ ऑल डील्स (अब तक का सबसे बड़ा व्यापारिक समझौता) होगा। उन्होंने कहा था कि इस समझौते से भारत और ईयू की दो अरब की सम्मिलित आबादी का एक बड़ा और उदार बार-बार तैयार होगा। इस समझौते के ब्यौरे की घोषणा आज शाम पीयूष गोयल करेंगे। </p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 27 Jan 2026 13:01:33 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>केंद्र सरकार का दावा, 2030 तक 5G उपभोक्ता एक करोड़ के पार होने का अनुमान </title>
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                        <![CDATA[सरकार ने बताया कि देश में टेलीकॉम उपकरणों का निर्माण और निर्यात तेजी से बढ़ रहा है। संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि भारत में 36 करोड़ 5जी उपभोक्ता हैं, जो 2030 तक 100 करोड़ से ज्यादा हो सकते हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/gadgets/central-government-claims-that-5g-users-will-cross-one-crore/article-136239"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/5g-service.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सरकार ने कहा है कि देश मे टेलीकॉम उपकरणों का तेजी से निर्माण हो रहा है और इसका निर्यात भी तेजी से बढ़ रहा है और अगले पांच साल में 5जी उपभोक्ताओं की संख्या अगले एक करोड़ से ज्यादा होने का अनुमान है। संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने लोकसभा में बुधवार को एक पूरक प्रश्न के उत्तर में कहा कि हाल ही में टेलीकॉम उपकरणों की देश में बड़े स्तर पर वृद्धि हुई है और इसको लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजन भी हुए जिनमें भारतीय डेलिकेट और 1200 से ज्यादा विदेशी डेलिगेट्स उपस्थित रहे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि टेलीकॉम से संबंध उपकरणों का बड़े स्तर पर कई देशों में निर्यात किया जा रहा है। संचार मंत्री ने 5जी को भारत की नहीं बल्कि विश्व की उपलब्धि बताया और कहा कि आज 5जी के जरिए पांच लाख जीपीएस देश भर लग चुके हैं और 99.9 प्रतिशत जिले इसमें कवर हो चुके हैं। देश में आज 36 करोड़ से ज्यादा 5जी उपभोक्ता हैं और इसकी गति जिस तेजी से बढ़ रही है उससे अनुमान है कि 2030 तक 5जी उपभोक्ताओं का आंकड़ा 100 करोड़ से ज्यादा होने का अनुमान है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>गैजेट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Dec 2025 13:05:06 +0530</pubDate>
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                <title>ट्रम्प ट्रैरिफ : हाड़ौती में 500 करोड़ का निर्यात गड़बड़ाया</title>
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                        <![CDATA[अमेरिका में करीब 50 लाख से अधिक भारतीय, टैरिफ बढ़ने से महंगे मिलेंगे उत्पाद]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/trump-tariff--exports-worth-rs-500-crore-in-hadoti-affected/article-125257"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/54.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा भारत पर 50 फीसदी ट्रैरिफ लगाने से जहां देशभर से अमेरिका को होने वाले भारतीय उत्पादों का निर्यात प्रभावित होगा। वहीं इसका हाड़ौती संभाग पर भी सीधा असर पड़ेगा। यहां से अमेरिका को भेजे जाने वाले उत्पादों का निर्यात कम होगा। जिससे करीब 500 करोड़  का कारोबार प्रभावित होने का अनुमान है। हाड़ौती संभाग के चारों जिलों में कई उत्पाद ऐसे हैं जिनकी अमेरिका में काफी डिमांड रहती है। अमेरिका में रहने वाले करीब 50 लाख से अधिक भारतीय उन स्थानीय उत्पादों का उपयोग भी करते हैं। उन उत्पादों को भारत सरकार के माध्यम से अमेरिका में निर्यात किया जाता है। लेकिन हालत यह है कि पहले जहां अमिरिका द्वारा भारत पर 25 फीसदी ही टैरिफ लगाया हुआ था। वहीं उसे बढ़ाकर अब 50 फीसदी कर दिया है। इससे अमेरिका में निर्यात होने वाले भारतीय उत्पादों की जहां कीमत तो अधिक होगी ही साथ ही महंगी होने से वहां इन उत्पादों की मांग कम होने से निर्यात पर इसका सीधा असर पड़ेगा।  हालांकि भारत सरकार द्वारा टैरिफ का तोड़ निकालते हुए स्थानीय बाजार व अन्य देशों को निर्यात करने की योजना बनाई गई है। लेकिन उसमें समय लगने से निर्यात कम होने से हर उत्पाद का बाजार प्रभावित हुआ है। </p>
<p><strong>सबसे अधिक कोटा स्टोन व सेंड स्टोन उद्योग पर असर</strong><br />कोटा का कोटा स्टोन व डाबी का सेंड स्टोन उच्च क्वा लिटी का होने से इसकी डिमांड अमेरिका समेत अन्य देशो में अधिक है। ऐसे में अमेरिका द्वारा टैरिफ बढ़ाने से न तो कोटा स्टोन का निर्यात हो सकेगा और न ही सेंड स्टोन का। उद्यमियों के अनुसार इससे दोनों का सालाना निर्यात करीब 100-100 करोड़ का होता है। जिससे कोटा संभाग से करीब 200 करोड़ का पत्थर उद्योग प्रभावित होगा। </p>
<p><strong>मसाले व चावल उद्योग प्रभावित</strong><br />बूंदी व रामगंजमंडी में सबसे अधिक उच्च क्वालिटी का चावल पैदा होता है। जिसकी अमेरिका में सबसे अधिक डिमांड है। वहीं झालावाड़ व मंडी के धनिया की अमेरिका में अधिक खपत होती है। इसी तरह से कोटा में बनने वाला आशीर्वाद आटा भी सबसे अधिक अमेरिका में रहने वाले भारतीयों द्वारा उपयोग किया जाता है। ऐसे में करीब 100 करोड़ से अधिक के इन कृषि उत्पादों का हाड़ौती संभाग से निर्यात प्रभावित होगा।</p>
<p><strong>कैमिकल का निर्यात भी होगा कम</strong><br />हाड़ौती में करीब आधा दर्जन से अधिक कैमिकल उद्योग है। इन उद्योगों में तैयार होने वाला कैमिकल भी काफी मात्रा में अमेरिका में निर्यात होता है। अमेरिका के ट्रम्प टैरिफ का संभाग के कैमिकल उद्योग पर भी असर पडेÞगा। उद्यमियों के अनुसार करीब 100 करोड़ से अधिक का कैमिकल यहां से हर साल निर्यात किया जाता है। इनके अलावा भी कई ऐसे उत्पाद हैं जिनका हाड़ौती के चारों जिलों से कम मात्रा में ही सही निर्यात होता है। टैरिफ बढ़ने से ये सभी चीजें अमेरिका में तो महंगी होंगी ही। साथ ही इनका निर्यात करना भी महंगा हो जाएगा। ऐसे में यहां से होने वाला निर्यात प्रभावित होगा। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />अमेरिका में करीब 50 लाख से अधिक भारतीय निवास कर रहे है। वे सभी अधिकतर भारत में तैयार सामानों का ही उपयोग करते हैं। हाड़ौती से कोटा स्टोन, सैंड स्टोन, धनिया,मसाले व आटा निर्यात किया जाता है। टैरिफ बढ़ाने से ये सभी वस्तुएं महंगी होने से वहां उनकी खपत कम होगी। साथ ही निर्यात भी प्रभावित होगी। सभी उद्योगों  का 400 से 500 करोड़ का निर्यात प्रभावित होने का अनुमान है।  <br /><strong>- अशोक माहेश्वरी, महासचिव कोटा व्यापार महासंघ</strong></p>
<p>अमेरिका द्वारा भारत पर दो गुना टैरिफ लगाना गलत है। इससे कोटा संभाग ही नहीं पूरे देश का निर्यात उद्योग प्रभावित होगा। हाड़ौती से भी कई उत्पादों का अमेरिका में निर्यात होता है। टैरिफ बढ़ने से निर्यात करना महंगा होगा। साथ ही वहां रहनगे वाले भारतीयों को भी अधिक महंगे दाम में वस्तुएं मिलेंगी तो लोग भारत की वस्तुओं को कम खरीदेंगे। हालांकि भारत सरकार के स्तर पर इसमें सुधार के प्रयास किए जा रहे है। लेकिन उसमें समय लगेगा।<br /><strong>- अंकुर गुप्ता, अध्यक्षलघु उद्योग भारती</strong></p>
<p>हाड़ौती से केवल कोटा स्टोन व सेंड स्टोन ही अमेरिका को निर्यात नहीं होता है। यहां के मसाले, चावल व आटा समेत कई ऐसे उत्पाद हैं जिनकी  अमेरिका में काफी अधिक खपत है। कोटा संभाग से भी बड़ी संख्या में लोग वहां रहते है। वे केवल यहां के चावल व आटे का ही उपयोग करते है। टैरिफ अधिक होने से अब वे अन्य देशों के सामान खरीदेंगे तो हाड़ौती के उद्योगों पर इसका सीधा असर पड़ेगा।<br /><strong>- राजेन्द्र जैन, अध्यक्ष हाड़ौती ग्रामीण उद्योग संघ </strong></p>
<p>कोटा स्टोन व सेंड स्टोन सबसे अधिक निर्यात होता है। इनकी क्वालिटी व फिनिशिंग बेहतर होने से इनकी अमेरिका में डिमांड रहती है। हाड़।ती के कई अन्य उत्पाद भी टैरिफ अधिक होने से अमेरिका को भेजना महंगा होगा। साथ ही वहां रहने वालों के  लिए खरीदना भी महंगा होगा। ऐसे में ये वस्तुएं जिन देशों की सस्ती होंगी वहां की खरीदी जाएंगी। अमेरिका में डिमांड व खपत कम होने का सीधा असर निर्यात पर पड़ेगा। अमेरिका में निर्यात कम होने से भारत में उनकी खपत का प्रयास तो किया जा रहा है लेकिन टैरिफ बढ़ाने से निर्यात पर तो सीधा असर पड़ेगा। <br /><strong>- राकेश पाटौदी, अध्यक्ष स्टोन मर्चेंट विकास समिति</strong></p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 Aug 2025 17:20:05 +0530</pubDate>
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                <title>जापान ने रूस की संस्थाओं को निर्यात पर प्रतिबंध लगाया</title>
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                        <![CDATA[रूस पर लगाए गए नये प्रतिबंध पैकेज के अंतर्गत सैन्य-तकनीकी सहयोग के लिए रूसी संघीय सेवा, उन्नत अनुसंधान परियोजनाओं के लिए रूसी फाउंडेशन एवं अन्य संस्थाओं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/japan-bans-exports-to-russian-entities/article-46746"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/jamapan.jpg" alt=""></a><br /><p>टोक्यो। जापान ने यूक्रेन में रूस के विशेष सैन्य अभियान के खिलाफ रूस पर लगाए गए नये प्रतिबंध पैकेज के अंतर्गत सैन्य-तकनीकी सहयोग के लिए रूसी संघीय सेवा, उन्नत अनुसंधान परियोजनाओं के लिए रूसी फाउंडेशन एवं अन्य संस्थाओं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया है। यह जानकारी शुक्रवार को जापानी सरकार की वेबसाइट पर जारी एक बुलेटिन से प्राप्त हुई।</p>
<p>जापान द्वारा रूस पर लगाए गए नए प्रतिबंधों की सूची में रूसी वैज्ञानिक-विनिर्माण परिसर टेक्नोलॉजिकल सेंटर, रूसी विज्ञान अकादमी प्रणाली विश्लेषण का वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थान और रूसी कंपनी पैपिलोन- कई देशों में बायोमेट्रिक और बैलिस्टिक पहचान प्रणालियों का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता और साथ ही रूस में रक्षा उद्योग एवं अनुसंधान केंद्रों के लिए नियंत्रण प्रणाली, भी शामिल हैं।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 May 2023 11:48:19 +0530</pubDate>
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                <title>परिष्कृत पेट्रोलियम आयल निर्यात में अभूतपूर्व उपलब्धि</title>
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                        <![CDATA[एक वर्ष से अधिक समय से चल रहे इस युद्ध से दुनिया में बहुत कुछ परिवर्तित हुआ है। ये परिवर्तन किसी देश के लिए हानिकारक तो किसी के लिए लाभदायक सिद्ध हुए।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/unprecedented-achievement-in-refined-petroleum-oil-exports/article-45940"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/a-7.png" alt=""></a><br /><p>चौबीस फरवरी 2022 से प्रारंभ हुआ रूस और यूक्रेन युद्ध, वैश्विक राजनीति बदलने का बड़ा कारण बना है। एक वर्ष से अधिक समय से चल रहे इस युद्ध से दुनिया में बहुत कुछ परिवर्तित हुआ है। ये परिवर्तन किसी देश के लिए हानिकारक तो किसी के लिए लाभदायक सिद्ध हुए। युद्ध प्रारंभ होने से पूर्व और बाद में यूरोपीय संघ में सम्मिलित सभी देश एक सुर में रूस का विरोध कर रहे थे। रूस विरोधी अभियान में अपना साथ देने संघ ने अमेरिकी समर्थन भी प्राप्त कर लिया था। अमेरिकी नेतृत्व में ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस इत्यादि देश युद्ध भड़काने के लिए रूस पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाने और वर्तमान में उस पर लगे प्रतिबंधों को अधिक कड़ा करने की कूटनीति पर कार्य करने लगे। इसलिए उन्होंने दक्षिण एशियाई राष्ट्रों भारत, चीन, जापान, आस्ट्रेलिया, दक्षिण व उत्तर कोरिया समेत पूर्व-पश्चिम के मध्य में स्थित अरब व अफ्रीकी देशों को भी साथ लेने की पूरी चेष्टा की, परंतु ये सभी देश इस प्रकरण में तटस्थ बने रहे। चूंकि अपने संघीय हितों की रक्षा के लिए यूरोपीय संघ हर हाल में रूस पर अंतरराष्ट्रीय मान्यता से पुष्ट प्रतिबंध लगाना ही लगाना चाहता था, इसलिए उसने अपरिष्कृत तेल (क्रूड आयल) का निर्यात करने वाले राष्ट्रों के मध्य तेल आयात की अपनी शर्तों में तत्काल परिवर्तन कर दिया। इस परिवर्तन के तहत यूरोपीय संघ ने नवनीति बनाई कि वह उसी निर्यातक देश से तेल खरीदेगा, जो परिष्कृत तेल कम मूल्य में निर्यात करेगा। संघ का यह निर्णय वैसे तो रूस से तेल आयात और तेल से होने वाली उसकी आय रोकने की मंशा से लिया गया था, ताकि वह युद्ध को विराम दे दे, परंतु इससे यूक्रेन के उकसावे पर यूरोपीय संघ और इसमें पृष्ठपटल से इन दोनों की सहायता कर रहे अमेरिका को कोई लाभ नहीं हुआ। रूस ने युद्ध नहीं रोका। उसने युद्ध में अपनी मारक क्षमता पहले से अधिक कर दी। परिणामत: यूक्रेन में विध्वंश की नित नई-नई घटनाएं घटने लगीं। यूक्रेन आधारित वैश्विक व्यापार ठप हो गया। यूक्रेन और उससे संबद्ध राष्ट्रों का व्यापार, लेन-देन और आयात- निर्यात ठप होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था संकुचित हो गई। विश्व के प्रमुख तेल निर्यातक देशों सउदी अरब, रूस, अमेरिका, इराक, कनाडा, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, इरान, वेनेजुएला और नाइजीरिया के सम्मुख तेल उत्पादन, संग्रहण, वितरण और निर्यात की नीतियां बदलने की विवशता उत्पन्न हो गई। चूंकि रूस और अमेरिका को छोड़कर बाकी तेल निर्यातक देश ओपेक (पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज) समूह में सम्मिलित हैं और इनके राजनीतिक-आर्थिक हित रूस विरोधी अंतरराष्ट्रीय लॉबी से अधिक जुड़े हुए हैं, इसीलिए इन्होंने तेल निर्यात में प्रमुखता से सक्रिय ओपेक, अमेरिका और रूस के मध्य मूल्य प्रतिस्पर्द्धा बढ़ाने और इस प्रयोजन में रूस को हानि पहुंचाने की मंशा से नई-नई नीतियां बनाईं। एक प्रकार से यह कदम रूस-यूक्रेन युद्ध को ध्यान में रखकर रूस पर प्रतिबंध लगाने और उसे असहाय अकेला छोड़ने की गुप्त गुट सापेक्षता साकार करने के लिए उठाया गया था। इस प्रयोजन में अमेरिका, ओपेक देश, यूरोपीय यूनियन और यूक्रेन एक गुट बनकर उभरे और रूस की तेल-निर्यात नीतियों पर कुठाराघात करने की मंशा से अवसरवाद की आड़ में इकट्ठा हुए।</p>
<p>इस गुट की यह अपेक्षा अमेरिका के माध्यम से भारत और चीन के सम्मुख भी रखी गई कि वे रूस से तेल मंगाना बंद कर दें, परंतु रूस विरोधी वैश्विक षड्यंत्र में भारत और चीन षड्यंत्रकारियों के लिए बना रोड़ा बन गए। तेल निर्यातक के रूप में कभी पहले तो दूसरे नंबर पर रहने वाले रूस पर यूक्रेन युद्ध के समय लगे वैश्विक प्रतिबंधों और उससे तेल मंगाने वाले अधिकतर देशों द्वारा उसका विरोध किए जाने के बाद भी, भारत ने 2022-23  में रूस से इतना तेल आयात किया कि रूस की अर्थव्यवस्था पर वैश्विक प्रतिबंधों का कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ा। इस समयावधि में चीन ने भी रूस से अत्यधिक तेल आयात किया। भारत के इस उपक्रम से रूस तो आर्थिक रूप में स्थिर रहा ही रहा, साथ ही इस कारण यूक्रेन के नेतृत्व में गोपनीय ढंग से गठित रूस-विरोधी वैश्विक गुटसापेक्षता की आड़ में पल रही मंशा भी पूरी तरह ध्वस्त हो गई। इस पूरे चक्र में भारत सर्वाधिक लाभ की स्थिति में रहा। </p>
<p>भारत के पास गुजरात के जामनगर में विश्व की नवोन्नत और अत्याधुनिक आयल रिफाइनरियां हैं, जो रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के स्वामित्वधारण में हैं। इन दोनों रिफाइनरियों की संयुक्त क्षमता प्रतिदिन 1.24 मिलियन बैरल तेल परिष्कृत करने की है। फरवरी 2022 के बाद, रूस से आयातित क्रूड आयल को इस रिफाइनरी में परिष्कृत किया गया और यूरोपीय संघ में सम्मिलित उन्हीं देशों को सबसे ज्यादा आयात किया गया, जो यूक्रेन की आड़ में रूस का विरोध करने और उसके तेल व्यापार को चौपट करने का चक्रव्यूह तैयार कर रहे थे। रूस-यूक्रेन युद्ध प्रारंभ होने के बाद यूरोपीय संघ के देशों को उनकी घरेलू आवश्यकताओं के लिए न तो ओपेक समूह और ना ही अमेरिका द्वारा अनुकूल, उचित मूल्य पर तेल उपलब्ध कराया गया। इस विश्वासघात से यूरोपीय संघ के देश सचेत हो उठे। इसके बाद उन्होंने केवल और केवल कम मूल्य पर घरेलू तेल आवश्यकताओं की पूर्ति को प्राथमिकता देना प्रारंभ कर दिया। <br />           </p>
<p><strong> -विकेश कुमार बडोला</strong></p>]]>
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                <pubDate>Fri, 19 May 2023 10:23:17 +0530</pubDate>
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                <title>भारत का निर्यात 750 अरब डॉलर के पार: गोयल</title>
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                        <![CDATA[वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को यहां बताया कि चालू वित्त वर्ष में आज तक के आंकड़ों के अनुसार माल एवं सेवाओं सहित भारत का कुल निर्यात 750 अरब डॉलर के स्तर को पार कर गया है]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/indias-exports-cross-750-billion-goyal/article-41084"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/piyush.jpg" alt=""></a><br /><p> </p>
<p>नयी दिल्ली । वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को यहां बताया कि चालू वित्त वर्ष में आज तक के आंकड़ों के अनुसार माल एवं सेवाओं सहित भारत का कुल निर्यात 750 अरब डॉलर के स्तर को पार कर गया है।</p>
<p>गोयल ने कहा कि आजादी के 75वें साल यह वार्षिक उपलब्धि एक रिकॉर्ड है। निर्यात का यह रिकॉर्ड ऐसे समय कायम हुआ है, जबकि विश्व की आर्थिक स्थिति अत्यधिक चुनौतीपूर्ण है।</p>
<p>उन्होंने राजधानी में उद्योग मंडल एसोचैम के वार्षिक सम्मेलन में मुख्य भाषण देते हुए कहा कि इस वर्ष देश के माल एवं सेवाओं दोनों के निर्यात में स्वस्थ वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि यह देखते हुए कि पूरी दुनिया मंदी और मु्द्रा स्फीति के दौर में है। विकसित देशों में महंगाई दर अपने सर्वकालीन उच्चतम स्तर पर है, ब्याज दरें बढ़ रही हैं। दुनिया के अन्य हिस्सों में निराशा का माहौल है। उन्होंने कहा,'' ऐसी परिस्थितियों में भारत से प्रदर्शन हमें गर्व होता है।''</p>
<p>श्री गोयल ने निर्यात के आंकड़ों का अलग-अलग कोई ब्यौरा नहीं दिया। </p>
<p>पिछले वित्त वर्ष 2021-22 में देश का कुल निर्यात 676 अरब डॉलर के बराबर था़, जिसमें वस्तुओं का निर्यात 422 अरब डालर और सेवाओं के निर्यात का योगदान 254 अरब डॉलर रहा।</p>
<p>गोयल ने बाद में संवाददताओं से कहा, ''संभावना है कि निश्चित रूप से इस समय सेवाओं के निर्यात की वृद्धि दर काफी तेज है जिससे कुल मिलाकर निर्यात अच्छा चल रहा है और चालू वित्त वर्ष के अंत तक हम यदि अधिक नहीं तो 760 अरब डॉलर तक पहुंच जायेंगे। फरवरी में देश का वाणिज्यिक निर्यात सालाना आधार पर 8.82 प्रतिशत और आयात 8.21 फीसदी गिरा था।''</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि विश्व में मंदी के हालात और मांग की कमजोरी के कारण भारत का निर्यात धीमा पड़ सकता है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Mar 2023 20:25:49 +0530</pubDate>
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                <title>वोकल फॉर लोकल अभियान से निर्यात को बढ़ाने में मिली मदद : मोदी</title>
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                        <![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि वोकल फॉर लोकल अभियान से निर्यात को बढ़ाने में भी मदद मिली है तथा अब दुनिया के नए-नए देशों में हमारे अनेक प्रॉडक्ट्स पहली बार निर्यात किए जा रहे है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/helped-to-increase-exports--says-modi/article-12845"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/modi-copy1.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि वोकल फॉर लोकल अभियान से निर्यात को बढ़ाने में भी मदद मिली है तथा अब दुनिया के नए-नए देशों में हमारे अनेक प्रॉडक्ट्स पहली बार निर्यात किए जा रहे है। मोदी ने वाणिज्य मंत्रालय के नए परिसर वाणिज्य भवन का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि सरकार वोकल फॉर लोकल अभियान के तहत वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना के जरिए स्थानीय उत्पादों पर बल दे रही है।</p>
<p>पिछले आठ वर्षो में भारत ने अपना निर्यात बढ़ाने के साथ ही इससे जुड़े लक्ष्यों को हासिल किया है। उन्हेंने कहा कि निर्यात बढ़ाने के लिए बेहतर नीतियों और प्रक्रिया को आसान बनाने के साथ ही उत्पादन को नये बाजार में पेश करने में काफी मदद मिली है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रत्येक मंत्रालय और विभाग निर्यात बढ़ाने को प्राथमिकता दे रहा है। विदेश, कृषि या वाणिज्य मंत्रालय हो अथवा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, सभी एक साझा लक्ष्य के लिए सामूहिक प्रयास कर रहे है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jun 2022 12:42:00 +0530</pubDate>
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                <title>निर्यात 22 फीसदी बढ़कर 33.81 अरब डॉलर पर </title>
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                        <![CDATA[पिछले वर्ष फरवरी के 40.75 अरब डॉलर के आयात की तुलना में 40.75 प्रतिशत अधिक है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/exports-up-22-per-cent-at--33-81-billion/article-5419"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/exports.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष के फरवरी महीने में देश का निर्यात 22.36 प्रतिशत बढ़कर 33.81 अरब डॉलर पर पहुंच गया जबकि पिछले वर्ष फरवरी में यह 27.68 अरब डॉलर रहा था। फरवरी 2020 में कोरोना की पहली लहर के कारण लॉकडाउन लगने से पहले यह 27.74 अरब डॉलर रहा था। इस तरह से फरवरी 2022 में भारतीय निर्यात ने कोरोना काल के पहले स्तर को भी पार लिया है।   वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष में अप्रैल 2021 से फरवरी 2022 तक 11 महीने में देश का कुल निर्यात 374.05 अरब डॉलर रहा है जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के 256.55 अरब डॉलर की तुलना में 45.80 प्रतिशत अधिक है। कोरोना महामारी से पहले मार्च 2020 में समाप्त हुए वित्त वर्ष में इस अवधि में निर्यात 291.87 अरब डॉलर रहा था जिसकी तुलना में चालू वित्त वर्ष के 11 महीने का निर्यात 28.16 प्रतिशत अधिक है।  आंकड़ों के अनुसार फरवरी 2022 में भारत का आयात 55.01 अरब डॉलर रहा जो पिछले वर्ष फरवरी के 40.75 अरब डॉलर के आयात की तुलना में 40.75 प्रतिशत अधिक है।<br /><br /> फरवरी 2020 में आयात 37.90 अरब डॉलर रहा था जिसकी तुलना में इस वर्ष फरवरी में आयात 45.12 प्रतिशत बढ़ा है।   फरवरी में आयात में बढ़ोतरी होने से देश का व्यापार घाटा 21.19 अरब डॉलर रहा है जो फरवरी 2021 के 13.12 अरब डॉलर के व्यापार घाटा की तुलना में 61.59 प्रतिशत अधिक है। चालू वित्त वर्ष में अप्रैल 2021 से फरवरी 2022 के दौरान कुल व्यापार घाटा 176.07 अरब डॉलर रहा है जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के 88.99 अरब डॉलर के व्यापार घाटा की तुलना में 97.86प्रतिशत अधिक है।  चालू वित्त वर्ष में फरवरी 2022 तक 11 महीने में देश का आयात 550.12 अरब डॉलर रहा है जो इसी अवधि में पिछले वित्त वर्ष के 345.54 अरब डॉलर के आयात की तुलना में 59.2 प्रतिशत अधिक है। अप्रैल 2019 से फरवरी 2020 तक 443.24 अरब डॉलर का आयात हुआ था जिसकी तुलना में चालू वित्त वर्ष के 11 महीने में आयात 24.11 प्रतिशत अधिक है।   </p>]]>
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                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Mar 2022 15:50:53 +0530</pubDate>
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