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                <title>exports - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>हाडौती के टैक्सटाइल, इंजीनियरिंग और कृषि उत्पादों के निर्यात को मिलेगा बढ़ावा</title>
                                    <description><![CDATA[ब्रिटेन से जुड़ेगा कोटा का कारोबार, बढ़ेंगे अवसर व रोजगार।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/exports-of-hadauti%E2%80%99s-textile--engineering--and-agricultural-products-to-get-a-boost/article-160020"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)62.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । भारत और ब्रिटेन के बीच लागू होने जा रहे मुक्त व्यापार समझौते (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट-एफटीए) को देश की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ राजस्थान के कोटा संभाग के उद्योगों और कृषि क्षेत्र के लिए भी बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इस समझौते के तहत ब्रिटेन भारतीय उत्पादों पर लगने वाले अधिकांश आयात शुल्क को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करेगा, जिससे भारतीय उत्पाद ब्रिटेन के बाजार में पहले की तुलना में अधिक प्रतिस्पर्धी होंगे। इसका सीधा लाभ कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ जिले के निर्यातकों और उद्यमियों को मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। कोटा संभाग में टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग उत्पाद, स्टोन, मसाले, धनिया, सोयाबीन आधारित उत्पाद, लहसुन, खाद्य प्रसंस्करण और एमएसएमई इकाइयों का मजबूत आधार है। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिटेन में भारतीय उत्पादों के लिए शुल्क कम होने से इन क्षेत्रों के उत्पादों की मांग बढ़ सकती है। इससे स्थानीय उद्योगों को नए आॅर्डर मिलने के साथ उत्पादन और निवेश में भी वृद्धि होगी।</p>
<p><strong>विदेश में महकेगी यहां के मसालों की खुशबू</strong><br />कोटा देश के प्रमुख औद्योगिक शहरों में शामिल है। यहां इंस्ट्रूमेंटेशन, इंजीनियरिंग उपकरण, केबल, विद्युत उपकरण, मशीन पार्ट्स और विभिन्न मैन्युफैक्चरिंग इकाइयां कार्यरत हैं। एफटीए के बाद इन उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार तक अपेक्षाकृत कम लागत में पहुंचाने का अवसर मिलेगा। वहीं बारां और झालावाड़ जैसे कृषि प्रधान जिलों में उत्पादित धनिया, मसाले, सोयाबीन और अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात की संभावनाएं भी मजबूत होंगी। उद्योग जगत का मानना है कि यह समझौता केवल बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि छोटे और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) को भी वैश्विक बाजार से जुड़ने का अवसर देगा। निर्यात बढ़ने से उत्पादन क्षमता का विस्तार होगा और इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। इस समझौते से परिवहन, पैकेजिंग, वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में भी गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।</p>
<p><strong>अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोटा संभाग की बनेगी पहचान</strong><br />आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता कोटा संभाग के उद्योग, कृषि और एमएसएमई क्षेत्र के लिए नई संभावनाओं का द्वार खोल सकता है। यदि स्थानीय उद्योग आधुनिक तकनीक, गुणवत्ता सुधार और नियार्तोन्मुख उत्पादन पर ध्यान दें तो आने वाले समय में कोटा संभाग अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि ब्रिटेन जैसे विकसित बाजार में टिके रहने के लिए स्थानीय उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों, आधुनिक पैकेजिंग, प्रमाणन और समयबद्ध आपूर्ति पर विशेष ध्यान देना होगा। यदि उद्योग समय रहते अपनी उत्पादन प्रणाली को वैश्विक मानकों के अनुरूप तैयार करते हैं तो आने वाले वर्षों में कोटा संभाग का निर्यात उल्लेखनीय रूप से बढ़ सकता है।</p>
<p><strong>आम लोगों को क्या फायदा होगा?</strong><br />-ब्रिटिश लग्जरी कारें होंगी सस्ती: रॉल्स-रॉयस, लैंड रोवर, जगुआर जैसी ब्रिटिश कारों पर आयात शुल्क चरणबद्ध तरीके से कम होने से इनकी कीमतों में आने वाले वर्षों में कमी आ सकती है।<br />-रोजगार के अवसर बढ़ेंगे: कोटा संभाग में इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल, कृषि प्रसंस्करण और एमएसएमई इकाइयों को नए निर्यात आॅर्डर मिलने पर उत्पादन बढ़ेगा, जिससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।<br />-किसानों को बेहतर दाम मिलने की संभावना: कोटा, बारां और झालावाड़ के धनिया, सोयाबीन, मसाले और अन्य कृषि उत्पादों का निर्यात बढ़ने पर किसानों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिलने की उम्मीद रहेगी।<br />-स्थानीय कारोबार को मिलेगा बढ़ावा: निर्यात बढ़ने से परिवहन, पैकेजिंग, कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउस, लॉजिस्टिक्स और छोटे व्यापारियों के काम में भी तेजी आएगी।<br />-विदेश में नौकरी और प्रोफेशनल्स को फायदा: भारतीय इंजीनियर, आईटी विशेषज्ञ, चार्टर्ड अकाउंटेंट, आर्किटेक्ट और अन्य पेशेवरों के लिए ब्रिटेन में काम करने के अवसर बढ़ सकते हैं। इससे कोटा जैसे शिक्षा केंद्र के विद्यार्थियों को भी भविष्य में नए अवसर मिलेंगे।<br />-कुछ आयातित उत्पाद सस्ते हो सकते हैं: ब्रिटेन से आने वाले कुछ कॉस्मेटिक्स, चॉकलेट, प्रीमियम फूड आइटम, मेडिकल उपकरण और अन्य उत्पादों की कीमतों में भी समय के साथ कमी आ सकती है।</p>
<p>भारत-ब्रिटेन एफटीए निर्यातकों के लिए बड़ा अवसर है। कोटा संभाग के व्यापार जगत के लिए यह समझौता काफी लाभकारी साबित हो सकता है। यहां की इंजीनियरिंग, एमएसएमई इकाइयों सहित अन्य उद्योगों को ब्रिटेन में नए बाजार मिल सकेंगे।<br /><strong>-अशोक माहेश्वरी, महासचिव, कोटा व्यापार महासंघ</strong></p>
<p>ब्रिटेन में शुल्क कम होने से भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी। इससे कोटा के उद्योगों को नए आॅर्डर मिलने और उत्पादन बढ़ाने का अवसर मिलेगा। यहां की सामग्री को निर्यात में छूट मिलने से मंद हो रहे कई उद्योग को संजीवनी मिल सकती है।<br /><strong>-भूपेन्द्र सोनी, उद्योगपति व व्यापारी</strong></p>
<p>कोटा, झालावाड़ और बारां क्षेत्र में मसाले, धनिया और सोयाबीन का अच्छा उत्पादन होता है। यदि इन उत्पादों की प्रोसेसिंग और गुणवत्ता पर ध्यान दिया जाए तो ब्रिटेन सहित यूरोपीय बाजार में अच्छी मांग मिल सकती है।<br /><strong>-आर.के. शर्मा, कृषि विशेषज्ञ</strong></p>
<p>एफटीए का वास्तविक लाभ उन्हीं उद्योगों को मिलेगा जो अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता, पैकेजिंग और प्रमाणन के मानकों का पालन करेंगे। यह समझौता निर्यातकों के लिए दीर्घकालिक अवसर लेकर आया है।<br /><strong>-रोहित जैन, सीए व निर्यात सलाहकार</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 15:00:24 +0530</pubDate>
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                <title>एक्सपोर्ट ठप: 200 करोड़ का चावल बीच राह में अटका</title>
                                    <description><![CDATA[समुद्री जलमार्ग पर आवागमन बाधित होने से चावल उद्योग प्रभावित।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/exports-stalled--rice-worth-%E2%82%B9200-crore-stuck-in-transit/article-158760"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/12200-x-600-px)13.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मिडिल ईस्ट के तनाव का असर हाड़ौती के चावल उद्योग पर भी पड़ा है। भारत से 25 से 30 फीसदी तक चावल का निर्यात केवल ईरान में ही होता है, जिसमें हाड़ौती का बासमती चावल सबसे ज्यादा वहां भेजा जाता है। समुद्री जलमार्ग पर जहाजों का आवागमन बाधित होने के कारण हाड़ौती से बासमती चावल के निर्यात से जुड़ी सारी प्रक्रिया थम गई है। हालांकि अब अमेरिका व ईरान के बीच युद्ध विराम हो गया है, लेकिन अभी तक कारोबार शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में हाड़ौती का करीब 200 करोड़ का बासमती चावल का कारोबार मझधार में अटका हुआ है। करोड़ों का माल बंदरगाहों पर अटका पड़ा है। एक्सपोर्टर्स की ओर से विदेश में पहले से किए हुए बासमती चावल के सौदे भी खत्म होने की कगार पर हैं। निर्यात रुक जाने और जलमार्ग बंद होने से उठाव नहीं हो रहा है। इन हालातों के चलते एक्सपोर्टर से लेकर व्यापारी और मिल मालिक भी परेशान हो गए हैं। दूसरी तरफ मंडियों में धान के दाम गिर गए हैं, जिससे किसानों को भी परेशानी हो रही है।</p>
<p><strong>कुछ माल गोदाम तो कुछ बंदरगाहों पर अटका</strong><br />चावल एक्सपोर्टरों के अनुसार हाड़ौती की लगभग सभी राइस मिलों के पास अभी तक करीब 40 से 50 करोड़ के सौदे हैं, लेकिन यह सब कुछ अटक गए हैं। इनका माल मिल मालिकों के पास गोदाम में तैयार है। इसी तरह से 40 से 50 करोड़ का माल कांडला पोर्ट पर पड़ा हुआ है। इनका भुगतान भी आना बाकी है। एक महीने का प्रोडक्शन इन्होंने तैयार किया हुआ है। दो महीने का कच्चा माल भी उनके पास है। यह सब कुछ मिलाकर 200 करोड़ से ज्यादा का व्यापार फिलहाल अटक गया है। इसके अलावा माल खरीदा हुआ है, जिसका भुगतान करना शेष है। ऐसे में सकुर्लेशन पूरी तरह से ठप हो जाने पर मिलर्स को बड़ी हानि होने की संभावना बनी हुई है।</p>
<p><strong>इन देशों में निर्यात होता है चावल</strong><br />भामाशाहमंडी सहित कोटा संभाग के अन्य जिले बारां और बूंदी की मंडियों में बासमती चावल बिकने के लिए ज्यादा आता है, जिसमें से करीब 90 फीसदी चावल एक्सपोर्ट होता है। मिडिल ईस्ट में ईरान, इराक, दमाम, जेद्दा, बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब व संयुक्त अरब अमीरात में भारत से चावल जाता है। भारत के कुल निर्यात का 25 से 30 फीसदी केवल ईरान में ही जाता है, जबकि 5 से 10 फीसदी यूएसए और यूके में जाता है। वहां तनाव जैसे हालात होने से सब रुक गया है। हाड़ौती में वर्तमान में 30 से आिक राइस मिल हैं, इनमें धान से तैयार चावल पड़ा हुआ है, लेकिन अब खरीददार नहीं हैं। एक्सपोर्ट होने वाला एक महीने का माल उनके पास है, जबकि तीन माह का उनके पास कच्चा माल है, ऐसे में इनके दाम लगातार कम होने से नुकसान मिल मालिकों को हो रहा है। मिल में आगे आॅर्डर नहीं आने के चलते काम बंद करने की स्थिति आ गई है।</p>
<p><strong>दामों में आ रहा उतार-चढ़ाव</strong><br />थोक चावल व्यापारी अंकित अग्रवाल ने बताया कि एक्सपोर्ट होने वाली 17-18 वैरायटी के दाम 5200 से 7100 के बीच चल रहे थे, जो अब 6350 के आसपास रह गए हैं। उम्मीद की जा रही थी कि यह बढ़कर 7500 के आसपास हो जाएंगे। इसी तरह से वैरायटी 1509 के दाम 5200 से लेकर 6800 के बीच थे, इसके दाम 5750 रह गए हैं। वैरायटी 1847 के दाम 4900 से 6600 प्रति क्विंटल के बीच रहते हैं, यह 5800 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास हैं। इनके दाम 6300 के आसपास पहुंच जाने का अनुमान था, हालांकि, 1509 से नीचे की क्वालिटी होने के बावजूद भी इसके दाम ऊंचे हो गए हैं।</p>
<p><strong>फैक्ट फाइल</strong><br />-200 करोड़ का कारोबार हुआ प्रभावित<br />-30 फीसदी चावल का निर्यात केवल ईरान में<br />-30 से अधिक राइस मिल हाड़ौती में<br />-47 लाख क्विंटल चावल होता है निर्यात</p>
<p>मिडिल ईस्ट में चले युद्ध के कारण बासमती चावल का कारोबार पूरी तरह से प्रभावित हुआ है। अब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध विराम हो गया है, लेकिन अभी तक समुद्री जलमार्ग पर आवागमन सुचारू नहींं हो पाया है। इस कारण करोड़ों का माल बंदरगाहों पर अटका पड़ा है।<br /><strong>- भूपेन्द्र सोनी, प्रमुख व्यापारी, भामाशाहमंडी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 14:21:24 +0530</pubDate>
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                <title>समुद्री ताकत में इजाफा : नौसेना के बेड़े में शामिल INS दूनागिरी; संशोधक और अग्रय, मोदी बोले - अब आयातक नहीं, निर्माता है भारत</title>
                                    <description><![CDATA[मोदी ने कोलकाता के श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह पर 75% स्वदेशी सामग्री से निर्मित तीन जहाज —INS दूनागिरी, INS संशोधक और INS अग्रय—राष्ट्र को समर्पित किए। पीएम ने भारत के 'ब्लू इकॉनॉमी' विजन और ₹1.8 लाख करोड़ के रक्षा उत्पादन स्तर को छूने की आत्मनिर्भरता की सराहना की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/big-increase-in-indias-maritime-power-ins-dunagiri-modifier-and/article-157654"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/image-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को पश्चिम बंगाल के श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह पर भारतीय नौसेना के लिए तीन स्वदेश निर्मित युद्धक जहाजों को राष्ट्र को समर्पित किया। प्रधानमंत्री ने यहां के श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह पर भारतीय नौसेना के लिए स्वदेश निर्मित तीन युद्ध जहाज को राष्ट्र को समर्पित किया। इस अवसर पर उन्होंने पश्चिम बंगाल को भारत की समुद्री और रक्षा निर्माण महत्वाकांक्षाओं के एक प्रमुख चालक के रूप में प्रस्तुत किया और कहा कि यह राज्य भारत के पुनरुत्थान में सबसे आगे रहा है।</p>
<p>पीएम मोदी ने हुगली नदी का संदर्भ देते हुए कहा कि इस नदी ने इतिहास को बनते देखा है। उद्योग, प्रतिभा और शिल्प कौशल के क्षेत्र में राज्य की ताकत समुद्री आर्थिक विकास के एक नये चरण को गति दे सकती है। उन्होंने कहा, “ बंदरगाहों, उद्योग और समुद्री ढांचे के मामले में राज्य की ताकत ने इसे भारत की तटीय और 'ब्लू इकॉनॉमी' (समुद्री अर्थव्यवस्था) की महत्वाकांक्षाओं में बड़ी भूमिका निभाने के लिए तैयार किया है। यह समुद्री निर्माण, रसद और तटीय विकास के एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर सकता है।”</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने खुद को दुनिया के सबसे बड़े रक्षा आयातकों में से एक से बदलकर अब उन्नत हथियार प्रणालियों के डिजाइन और निर्माण में सक्षम देश के रूप में स्थापित कर लिया है। उन्होंने कहा, “ पहले भारत रक्षा आयात पर बहुत अधिक निर्भर था और इस निर्भरता के कारण हमें रणनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता था। सत्ता में आने के बाद, हमने रक्षा क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सुधार शुरू किये। आज भारत आधुनिक हथियार प्रणालियों का डिजाइन और निर्माण कर सकता है।”</p>
<p>पीएम मोदी ने इस क्षेत्र में विकास को रेखांकित करते हुए कहा कि रक्षा उत्पादन, जो 2014 में लगभग 40,000 करोड़ रुपये था, अब बढ़कर 1.8 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने यह भी बताया कि रक्षा निर्यात में भी भारी बढ़ोतरी हुई है, जो पहले लगभग 700 करोड़ रुपये था, वह अब बढ़कर लगभग 40,000 करोड़ रुपये हो गया है, जिसके तहत भारत 80 से अधिक देशों को हथियार और रक्षा उपकरण आपूर्ति कर रहा है।</p>
<p>एक वरिष्ठ रक्षा अधिकारी ने बताया कि इन तीन नौसैनिक जहाजों, आईएनएस दूनागिरी, आईएनएस संशोधक और आईएनएस अग्रय का निर्माण ‘गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स’ (जीआरएसई) द्वारा 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्रियों के साथ किया गया है। मोदी के नेतृत्व में आयोजित एक औपचारिक समारोह में इन जहाजों को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया। इस कार्यक्रम में राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, राज्यपाल आर.एन. रवि और भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन भी उपस्थित थे। ये तीनों जहाज अलग-अलग समुद्री भूमिकाएं निभाते हैं। आईएनएस दूनागिरी पांचवां ‘प्रोजेक्ट 17ए’ स्टील्थ फ्रिगेट है और यह सतह से सतह पर मार करने वाली ब्रह्मोस मिसाइल तथा मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली सहित उन्नत हथियारों से लैस है।</p>
<p>आईएनएस संशोधक चौथा बड़ा सर्वेक्षण जहाज है। इसे तटीय और गहरे पानी के सर्वेक्षणों के लिए तथा रक्षा और नागरिक अनुप्रयोगों के लिए समुद्र विज्ञान और भू-भौतिकीय डेटा एकत्र करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। तीसरा जहाज, आईएनएस अग्रय, एक पनडुब्बी शिकारी है। यह अर्नाला-श्रेणी का पनडुब्बी-रोधी युद्धक जहाज है, जो उथले पानी में दुश्मनों का पता लगाने और उनसे निपटने के लिए हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर और सोनार प्रणालियों से लैस है। नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने कहा कि इन तीन जहाजों का नौसेना में शामिल होना भारत के निर्माण कार्यक्रम में नयी गति को दर्शाता है और स्वदेशी जहाज निर्माण में बढ़ते विश्वास को रेखांकित करता है। </p>
<p>उन्होंने कहा, “ आज इस ऐतिहासिक अवसर पर, मैं जीआरएसई की समर्पित टीम को हार्दिक बधाई देता हूं। मैं अपने उद्योग भागीदारों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) के प्रति भी आभार व्यक्त करता हूं, जिनके सहयोग ने इस सफलता को संभव बनाया है।” नौसेना प्रमुख ने कहा, “ पिछले वर्ष मुंबई में प्रधानमंत्री द्वारा स्वतंत्र भारत के पहले तीन जहाजों के समर्पण के ठीक 17 महीने बाद कोलकाता में आयोजित यह दूसरा समारोह, भारत की जहाज निर्माण क्षमताओं में आधुनिकता, आत्मनिर्भरता और बढ़ते आत्मविश्वास को दर्शाता है।” एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा कि इन परियोजनाओं ने कई नए कीर्तिमान स्थापित किये हैं। साथ ही, उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इन पहलों में 200 से अधिक एमएसएमई शामिल रहे, जिससे बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित हुए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 16:53:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>India-New Zealand FTA : PM Christopher Luxon ने बताया ऐतिहासिक समझौता, व्यापार में आएगा बड़ा बदलाव</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौते को "एक पीढ़ी का अवसर" बताया। इस डील का लक्ष्य अगले 5 वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करना है। हालांकि, मंत्री शेन जोन्स की 'बटर चिकन' टिप्पणी पर विवाद हुआ, जिसे विपक्ष ने अपमानजनक बताया। यह समझौता आर्थिक संबंधों में नए युग की शुरुआत करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/india-new-zealand-fta-pm-christopher-luxon-said-historic-agreement-will/article-151859"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/modi16.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री Christopher Luxon ने भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में बड़ा बदलाव लाएगा। उन्होंने इसे “एक पीढ़ी में एक बार होने वाला अवसर” करार देते हुए कहा कि इस समझौते से न्यूजीलैंड के निर्यातकों को भारत जैसे विशाल बाजार तक सीधी पहुंच मिलेगी। हालांकि इस डील को लेकर न्यूजीलैंड की राजनीति में विवाद भी देखने को मिला। मंत्री Shane Jones की ‘बटर चिकन सुनामी’ वाली टिप्पणी पर विपक्ष और प्रवासी समुदाय ने कड़ी आपत्ति जताई। कई नेताओं ने इसे अपमानजनक बताते हुए आलोचना की, जबकि प्रधानमंत्री लक्सन ने इसे अनावश्यक टिप्पणी कहा, लेकिन नस्लवादी मानने से इनकार किया।</p>
<p>वहीं, सांसद Carlos Cheung और अन्य नेताओं ने इस बयान को अनुचित बताया और प्रवासी समुदाय के सम्मान की बात उठाई। ACT पार्टी के नेता David Seymour ने भी ऐसे बयानों को गैरजरूरी करार दिया। इसी बीच India और New Zealand के बीच नई दिल्ली में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इसका लक्ष्य अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करना है। समझौते के तहत दोनों देश एक-दूसरे के उत्पादों पर शुल्क में बड़ी कटौती करेंगे, जिससे व्यापार और निवेश के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 17:00:03 +0530</pubDate>
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                <title>भारत और मिस्र ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के लिए जताई सहमति : उन्मुख भविष्य के लिए रूपरेखा तैयार, भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने हेलियोपोलिस युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की</title>
                                    <description><![CDATA[काहिरा में आयोजित 11वीं संयुक्त रक्षा समिति की बैठक में भारत और मिस्र ने 2026-27 के लिए रक्षा सहयोग योजना पर मुहर लगाई। दोनों देश अब रक्षा विनिर्माण में सह-उत्पादन और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करेंगे। भारत ने अपनी $20 अरब की रक्षा निर्माण क्षमता का प्रदर्शन करते हुए रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/india-and-egypt-agree-on-plan-for-bilateral-defense-cooperation/article-151451"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/भारत-और-मिस्र.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत और मिस्र ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को प्रगाढ बनाने के लिए द्विपक्षीय रक्षा सहयोग योजना पर सहमति व्यक्त की है। भारत–मिस्र संयुक्त रक्षा समिति ने बुधवार को काहिरा में संपन्न् तीन दिन की अपनी 11वीं बैठक के दौरान द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए सार्थक चर्चा की। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संयुक्त सचिव (अंतरराष्ट्रीय सहयोग) अमिताभ प्रसाद ने किया और इसमें रक्षा मंत्रालय तथा सशस्त्र बलों के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल थे। मिस्र के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व रक्षा बलों और रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने किया।</p>
<p>रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि दोनों पक्षों ने पिछली संयुक्त रक्षा समिति बैठक के बाद हुई प्रगति की व्यापक समीक्षा की और रक्षा सहभागिता के लिए एक भविष्य उन्मुख रूपरेखा तैयार की। उन्होंने 2026-27 के लिए द्विपक्षीय रक्षा सहयोग योजना पर सहमति व्यक्त की, जिसमें संरचित सैन्य संपर्क तंत्र का विस्तार, संयुक्त प्रशिक्षण आदान-प्रदान को मजबूत करना, समुद्री सुरक्षा सहयोग को बढ़ाना, सैन्य अभ्यासों के दायरे और जटिलता को बढ़ाना तथा रक्षा उत्पादन और प्रौद्योगिकी में सहयोग को प्रोत्साहित करना शामिल है।</p>
<p>भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय रक्षा उद्योग की तेजी से बढ़ती विनिर्माण क्षमताओं पर प्रस्तुति दी। इसमें बताया गया कि भारत का रक्षा उत्पादन 20 अरब डॉलर से अधिक हो चुका है और भारत 100 से अधिक देशों को लगभग 4 अरब डॉलर के उत्पाद निर्यात कर रहा है। दोनों पक्षों ने रक्षा उद्योग सहयोग योजना विकसित करने के लिए साथ मिलकर काम करने पर सहमति व्यक्त की। रक्षा उद्योग सहयोग भारत–मिस्र रक्षा संबंधों का एक प्रमुख स्तंभ बनकर उभर रहा है, जिसमें दोनों पक्ष रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में सह-विकास और सह-उत्पादन के अवसरों की तलाश कर रहे हैं।</p>
<p>बैठक के दौरान पहली बार नौसेना-से-नौसेना स्टाफ वार्ता भी आयोजित की गई। भारतीय नौसेना द्वारा हिंद महासागर क्षेत्र में नौवहन की स्वतंत्रता को बढ़ावा देने में निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका की जानकारी दी गई और समुद्री सुरक्षा को प्रोत्साहित करने में भारत के सूचना संलयन केंद्र की प्रमुख भूमिका को रेखांकित किया गया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने मिस्र वायु सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल अम्र अब्देल रहमान सक्र से भी मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने दोनों देशों की वायु सेनाओं के बीच घनिष्ठ सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।</p>
<p>भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने हेलियोपोलिस युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की और प्रथम तथा द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने वाले भारतीय वीरों को श्रद्धांजलि दी। भारत–मिस्र रक्षा साझेदारी में सितंबर 2022 में रक्षा मंत्री की मिस्र यात्रा के दौरान रक्षा क्षेत्र में सहयोग पर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करना एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर था। वर्ष 2023 में द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया गया। 11वीं बैठक ने दोनों देशों के बीच घनिष्ठ संबंधों की पुष्टि की और क्षेत्रीय सुरक्षा तथा स्थिरता के प्रति उनकी पारस्परिक प्रतिबद्धता को सुदृढ़ किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 15:02:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका-इजरायल व ईरान युद्ध : 15 सौ करोड़  का निर्यात अटका, हाड़ौती की अर्थव्यवस्था होगी प्रभावित</title>
                                    <description><![CDATA[प्रभावित होगा कोटा का नियार्त: पेट्रोल-डीजल की किल्लत, वस्तुओं की कीमतें बढ़ेगी ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/us-israel-iran-war--exports-worth-1500-crore-rupees-stalled/article-145622"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/200-x-60-px)-(2)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । पहले अमेरिका द्वारा भारत पर पचास फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा से निर्यात उद्योग प्रभावित हुआ था। उससे अभी पूरी तरह से उबरा भी नहीं था कि अब अमेरिका-इजरायल व इरान के बीच युद्ध से कोटा समेत हाड़ौती का निर्यात और अधिक प्रभावित हुआ है। करीब 15 सौ करोड़ से अधिक का निर्यात अटक गया है। वहीं आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की किल्लत होने व अन्य वस्तुओं की कीमतें बढ?े की भी संभावना है। अमेरिका और इजरायल व ईरान के बीच पिछले कई दिन से युद्ध चल रहा है। जिससे उन देशों में तो लोग परेशान हो ही रहे हैं। इसका सबसे अधिक असर भारत पर भी पड़ रहा है। भारत के अन्य प्रदेशों के साथ ही कोटा से भी बड़ी मात्रा में सामान अमेरिका और इजरायल व ईरान को निर्यात  होता है। लेकिन युद्ध के कारण वहां हालात इतने अधिक बिगड़े हुए हैं कि वहां कोई भी सामान नहीं पहुंचाया जा सकता है।</p>
<p><strong>मसालों व कैमिकल का अटका निर्यात</strong><br />कोटा व हाड़ौती संभाग से अमेरिका व अन्य देशों को सबसे अधिक चावल के अलावा मसाले जिनमें धनिया व जीरा और गेंहू का निर्यात किया जाता है। साथ ही कैमिकल और सेंड स्टोन का भी निर्यात  होता है। लेकिन युद्ध के कारण नया माल तो वहां निर्यात नहीं हो पा रहा है। साथ ही जो माल कुछ समय पहले सप्लाई हो चुका है वह भी रास्ते में ही अटका हुआ है। जिससे या तो उस माल को पहुंचने में समय अधिक लगेगा। अन्य लम्बे मार्ग से उस सामान को पहुंचाने पर उसका खर्चा अधिक हो जाएगा। या फिर संभावना है कि वह भेजा हुआ माल वापस कोटा व अन्य जगहों पर आ सकता है। जिससे पहले से ही बिगड़ी कोटा की अर्थव्यवस्था पर दोहरी मार पड़ सकती है।</p>
<p><strong>भारत की जीडीपी एक फीसदी प्रभावित</strong><br />दी एसएसआई एसोसिएशन के संस्थापक अध्यक्ष गोविंद राम मित्तल ने बताया कि अमेरिका और इजरायल व ईरान के बीच युद्ध होने से कोटा व हाड़ौती से निर्यात होने वाले मसाले, सेंड स्टोन व कोटा स्टोन, कैमिकल का निर्यात सबसे अधिक प्रभावित होगा। करीब 15 सौ करोड़ का निर्यात इस युद्ध के कारण अटक गया है। उन्होंने बताया कि साथ ही जो माल कुछ समय पहले ही निर्यात हुआ है वह रास्ते में अटका हुआ है। आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल का आयात कम होने से यहां उसकी किल्लत होगी। जिससे सभी वस्तुओं के भाव बढ?े की संभावना है। उन्होंने बताया कि पहले अमेरिका द्वारा पचास फीसदी टैरिफ की घोषणा से निर्यात प्रभावित हुआ था और अब युद्ध से। इस युद्ध से भारत की जीडीपी 1 फीसदी प्रभावित होगी।मित्तल ने बताया कि वैसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दृूरदर्शिता के चलते उन्होंने अन्य देशों से जो डील की है उसके कारण बहुत जल्दी किसी भी चीज की किल्लत का सामना भारतीयों को नहीं करना पड़ेगा।</p>
<p><strong>निर्यात घटेगा और महंगाई बढ़ेगी</strong><br />कोटा व्यापार महासंघ के महासचिव अशोक माहेश्वरी का कहना है कि युद्ध किसी भी देश में हो उससे अन्य देश भी प्रभावित होते हैं। अमेरिका समेत अन्य देशों को हाड़ौती से निर्यात होने वाले मसाले, आटा, सेंड स्टोन पर तो असर पड़ेगा ही। अमेरिका-इजरायल व ईरान में निर्यात पूरी तरह से बंद हो रहा है। वहां से आयात भी नहीं हो पा रहा है। ऐसे में आयात व निर्यात कम होने के साथ ही ईरान से पेट्रोल-डीजल का आयात नहीं होगा। जिससे उनकी किल्लत होने पर अन्य वस्तुओं की कीमतों में उछाल आने से महंगाई बढ़ेगी।</p>
<p><strong>युद्ध लम्बे समय तक चला तो होगी परेशानी</strong><br />कोटा पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष तरूमीत सिंह बेदी ने बताया कि अमेरिका और इजरायल व ईरान में हो रहे युद्ध से सामान्य उद्योग व व्यापार तो प्रभावित हुआ ही है। लेकिन अभी पेट्रोल व डीजल की किल्लत नहीं है। भारत के पास पर्याप्त स्टॉक है। लेकिन यदि युद्ध लम्बे समय तक चला तो खाड़ी देशों से आने वाले तेल का आयात कम या बंद हो जाएगा। उसके बाद इसकी किल्लत व परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।</p>
<p><strong>हाड़ौती की अर्थव्यवस्था होगी प्रभावित</strong><br />कैट के जिला अध्यक्ष अनिल मूंदड़ा ने बताया कि कोचिंग विद्याथियों की कमी से कोटा की अर्थव्यवस्था पहले से ही काफी प्रभावित हुई है। उसके बाद अमेरिका के टैरिफ की घोषणा और अब अमेरिका और इजरायल के बीच युद्ध से हाड़ौती के व्यापार उद्योग की कमर ही टूट जाएगी। यहां से जो माल अन्य देशों को निर्यात होता है वह या तो पूरी तरह से ठप हो जाएगा या कम हो जाएगा। जिससे अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी।</p>
<p><strong>व्यापार-उद्योग पर असर</strong><br />कोटा व्यापार महासंघ के अध्यक्ष क्रांति जैन ने बताया कि युद्ध भले ही अमेरिका और इजरायल व ईरान के बीच हो रहा हो। लेकिन वहां से होने वाला आयात और वहां होने वाला निर्यात बंद या कम होने से व्यापार उद्योग पर असर पड़ता है। कोटा व हाड़ौती से भी मसाले और खाद्य पदार्थ वहां निर्यात होते हैं। जिससे युद्ध के कारण निर्यात नहीं होने से कोटा व हाड़ौती का व्यापार-उद्योग भी प्रभावित होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Mar 2026 15:44:51 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मुक्त व्यापार समझौते के करीब ऑस्ट्रेलिया-ईयू: विवादास्पद मुद्दों को हल करने के बाद समझौते पर कर सकते हैं हस्ताक्षर</title>
                                    <description><![CDATA[ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर जल्द हस्ताक्षर हो सकते हैं। प्रधानमंत्री अल्बानीज और उर्सला वॉन डेर लेयन लाल मांस निर्यात से जुड़े शेष विवादों को सुलझाने के करीब हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/australia-eu-close-to-free-trade-agreement-can-sign-agreement-after/article-143376"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)-(14)1.png" alt=""></a><br /><p>कैनबेरा। ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच संभावित मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत अपने अंतिम दौर में है और आने वाले हफ्तों में इस पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। ऑस्ट्रेलिया के समाचार चैनल एबीसी न्यूज ने ईयू और ऑस्ट्रेलियाई प्रशासन के हवाले से यह जानकारी दी <br />है। </p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सला वॉन डेर लेयन बचे हुए विवादास्पद मुद्दों को हल करने के बाद समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, ये विवादास्पद मुद्दे लाल गोश्त के निर्यात से संबंधित हैं। वॉन डेर लेयन ऑस्ट्रेलिया का दौरा भी कर सकती हैं, जहां वह न सिर्फ व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करेंगी, बल्कि एक सुरक्षा साझेदारी पर भी मुहर लगाएंगी। उनके दौरे की अंतिम तारीख अभी निर्धारित नहीं हुई है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि इससे पहले ऑस्ट्रेलिया और ईयू के बीच बातचीत कई सालों तक चलने के बाद 2023 में रुक गयी थी। ऑस्ट्रेलिया के व्यापार मंत्री डॉन फरेल ने इससे पहले कहा था कि वह तब तक समझौता नहीं करेंगे, जब तक ईयू लाल गोश्त सहित ऑस्ट्रेलिया के अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए टैरिफ कम नहीं कर देता। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Feb 2026 14:59:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका-बांग्लादेश व्यापार समझौता: अमेरिका ने बांग्लादेशी वस्तुओं पर आयात शुल्क घटाकर 19% किया, द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को मजबूती पर दिया जोर</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-बांग्लादेश के बीच नए व्यापार समझौते से आयात शुल्क घटेगा। वस्त्र, कृषि, ऊर्जा क्षेत्रों में सहयोग बढ़ेगा, जिससे द्विपक्षीय आर्थिक संबंध मजबूत होंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/us-bangladesh-trade-agreement-us-reduced-import-duty-on-bangladeshi-goods/article-142561"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)8.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका और बांग्लादेश के बीच एक पारस्परिक व्यापार समझौता हुआ है, जो बांग्लादेश वस्तुओं पर आयात शुल्क घटाकर 19 प्रतिशत कर देगा और कुछ वस्त्र एवं परिधान उत्पादों पर छूट प्रदान करेगा और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यालय ने बताया कि यह समझौता एक ऐसा तंत्र स्थापित करेगा जिसके तहत बांग्लादेश के कुछ कपड़ों और परिधान एवं उत्पादों को शून्य पारस्परिक आयात शुल्क प्रदान किया जाएगा। इसके तहत अमेरिकी मूल की सामग्रियों का उपयोग करके बनाए गए कुछ कपड़ा और परिधान उत्पादों के लिए भी छूट दिया गया है। पात्रा आयात की मात्रा का निर्धारण बांग्लादेश द्वारा उपयोग किये गये कपास और मानव निर्मित फाइबर के साथ-साथ अमेरिकी सामग्री के इस्तेमाल के आधार पर किया जाएगा।</p>
<p>व्हाइट हाउस के बयान में बताया गया है कि बांग्लादेश लगभग 3.5 अरब डॉलर के अमेरिकी कृषि उत्पादों की खरीद करेगा, जिसमें गेहूं, सोया, कपास और मक्का शामिल हैं। इसके अतिरिक्त 15 वर्षों में लगभग 15 अरब डॉलर ऊर्जा उत्पादों की भी खरीददारी बांग्लादेश द्वारा की जाएगी। साथ ही इसमें अमेरिकी विमानों के खरीद का भी उल्लेख किया गया है।</p>
<p>यह समझौता 2013 में हस्ताक्षरित अमेरिका-बांग्लादेश व्यापार और निवेश सहयोग मंच समझौते (टीआईसीएफए) पर आधारित है। अमेरिकी अधिकारियों ने इसे एक-दूसरे के बाजारों तक अभूतपूर्व पहुंच के रूप में वर्णित किया है। अमेरिका और बांग्लादेश ने कहा कि इस समझौते का उद्देश्य द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को गहरा करना और दोनों देशों के निर्यातकों के लिए बाजार पहुंच का विस्तार करना है।</p>
<p>सौदे के तहत, बांग्लादेश, अमेरिकी औद्योगिक और कृषि सामानों के लिए महत्वपूर्ण तरजीही बाजार पहुंच प्रदान करेगा, जिसमें रसायन, चिकित्सा उपकरण, मशीनरी, मोटर वाहन और पुर्जे, सूचना और संचार प्रौद्योगिकी उपकरण, ऊर्जा उत्पाद, सोयाबीन, डेयरी उत्पाद, गोमांस, पोल्ट्री, ट्री नट्स और फल शामिल हैं।</p>
<p>दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को प्रभावित करने वाली गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करने के लिए प्रतिबद्धता जताई है, जिसमें बांग्लादेश, अमेरिकी वाहन सुरक्षा और उत्सर्जन मानकों को स्वीकार करने, चिकित्सा उपकरणों और फार्मास्यूटिकल्स के लिए अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) प्रमाणपत्रों को मान्यता देने और अमेरिकी पुनर्मानिर्मित वस्तुओं और पुर्जों पर प्रतिबंध हटाने के लिए सहमत हुआ है।</p>
<p>बांग्लादेश ने विश्वसनीय सीमाओं के पार डेटा के मुफ्त हस्तांतरण की अनुमति देने और विश्व व्यापार संगठन में इलेक्ट्रॉनिक प्रसारण पर सीमा शुल्क पर स्थायी रोक का समर्थन करने पर भी सहमति जतायी है। साथ ही कृषि आयात के लिए विज्ञान और जोखिम-आधारित मानकों को अपनाने, बीमा क्षेत्र में बाधाओं को कम करने, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाने और अच्छी नियामक प्रथाओं को लागू करने की भी प्रतिबद्धता जताई है।</p>
<p>इसके अतिरिक्त बांग्लादेश ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त श्रम अधिकारों की रक्षा करने का संकल्प लिया है, जिसमें जबरन श्रम से उत्पादित वस्तुओं के आयात को प्रतिबंधित करना और श्रम कानूनों में संशोधन करके संघों की स्वतंत्रता और सामूहिक सौदेबाजी की पूरी तरह से रक्षा करना एवं प्रवर्तन को मजबूत करना शामिल है। समझौते में पर्यावरण संरक्षण, भ्रष्टाचार विरोधी उपाय, बौद्धिक संपदा अधिकारों की रक्षा और सब्सिडी तथा राज्य के स्वामित्व वाले उद्यमों के कारण होने वाली विकृतियों को दूर करने की प्रतिबद्धताएं भी शामिल हैं। बांग्लादेश भौगोलिक संकेतों पर महत्वपूर्ण प्रावधानों पर सहमत हुआ है, विशेष रूप से पनीर और मांस उत्पादों के लिए।</p>
<p>दोनों देशों ने यह भी कहा कि वे आपूर्ति श्रृंखला की लचीलापन बढ़ाने, शुल्क चोरी का मुकाबला करने, निर्यात नियंत्रण पर सहयोग करने और निवेश पर जानकारी साझा करने के लिए आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा को भी मजबूत करने की दिशा में काम करेंगे। राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा कि अमेरिका के निर्यात-आयात बैंक और अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय विकास वित्त निगम सहित अमेरिकी संस्थान पात्रता और कानून के अधीन बांग्लादेश में महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निवेश का समर्थन करने पर विचार करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Feb 2026 11:49:57 +0530</pubDate>
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                <title>ट्रम्प टैरिफ कम होने से 12 सौ करोड़ हो जाएगा हाड़ौती का निर्यात</title>
                                    <description><![CDATA[ अब पहले से भी कम टैरिफ, अमेरिका में रहने वाले भारतीयों को यहां की वस्तुएं मिलेंगी सस्ती ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/hadoti-s-exports-will-reach-1200-crore-rupees-due-to-the-trump-tariff-reduction/article-142050"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/trump&#039;s-tariffs-kam-hone-se-12-sau-crore-ho-jaega-hadoti-ka-niryat...kota-news-05.02.2026.jpg.jpeg" alt=""></a><br /><p>कोटा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा भारत पर लगाए टैरिफ को पहले से भी कम करने की घोषणा की है। इससे हाड़ौती से अमेरिका में होने वाला निर्यात पहले से करीब डेढ़ गुना यानि करीब 12 सौ करोड़ रुपए का होने की संभावना है। साथ ही यहां से निर्यात होने वाले चावल, धनिया, कोटा स्टोन व सैंड स्टोन उद्योग में बढ़ोतरी होगी। अमेरिका द्वारा पूर्व में जहां भारत पर पारम्परिक शुल्क(टैरिफ) 25 फीसदी लगाया हुआ था। उसे कुछ समय पहले बढ़ाकर 50 फीसदी करने की घोषणा कर दी थी। उस घोषणा के साथ ही भारत से अमेरिका में निर्यात होने वाले सामान पर एक तरह से रोक लग गई थी। भारत उसे मानने को तैयार नहीं था और अमेरिका उसे कम करने को राजी नहीं था। ऐसे में भारत ने भी अमेरिका को किए जाने वाले निर्यात को बंद कर दिया था। इससे भारत के अलग-अलग राज्यों से होने वाले सामान का जहां निर्यात घटा था। वहीं उन वस्तुओं की अमेरिका में रहने वाले भारतीय को उपलब्धता होना या तो बंद हो गया था या फिर वह वस्तुएं महंगी हो गई थी।</p>
<p><strong>कई महीनों तक रही असमंजस की स्थिति</strong></p>
<p>ट्रम्प द्वारा टैरिफ बढ़ाने की घोषणा का असर हाड़ौती संभाग पर भी पड़ा था। यहां भी असमंजस की स्थिति बनी रही। जिससे यहां से अमेरिका को निर्यात होने वाले सामान पर रोक लगा दी गई थी। जिससे यहां से होने वाला निर्यात कम हो गया था। हालांकि इससे कोटा के कई उद्योग प्रभावित हुए। लेकिन इसी बीच प्रधानमंत्री द्वारा ब्रिटेन व यूरोप से जो ट्रेड डील की उससे और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने से व्यापार व उद्योग में उम्मीद की किरण जगी थी।</p>
<p><strong>इन वस्तुओं का होता है निर्यात</strong></p>
<p>कोटा व हाड़ौती संभाग के अन्य जिलों से अमेरिका समेत कई अन्य देशों को चावल, धनिया, कोटा स्टोन, सैंड स्टोन, कैमिकल, आटे का निर्यात होता है। जिससे यहां के इन उद्योगों को अमेरिका में मार्केट उपलब्ध होता है। पहले जहां 25 फीसदी टैरिफ लगने से जितना निर्यात यहां से हो रहा था। उस टैरिफ को घटाकर 18 फीसदी करने से अब उस निर्यात में बढ़ोतरी होगी।</p>
<p><strong>800 से 12 सौ करोड़ हो जाएगा निर्यात</strong></p>
<p>हाड़ौती से प्रमुख रूप से चावल, धनिया, कोटा स्टोन, सैंड स्टोन व कैमिकल का अमेरिका में अधिक निर्यात होता है। जिससे वहां रहने वाले भारतीयों को यहां के सामान उपलब्ध होते हैं। लेकिन ट्रम्प द्वारा टैरिफ बढ़ाने की घोषणा से यहां से निर्यात बंद कर दिया था। जिससे यहां से निर्यात तो कम हुआ था लेकिन उससे अधिक नुकसान अमेरिका में आयात घटने से वहां के लोगों को भारतीय वस्तुएं महंगी मिल रही थी। पूर्व में हाड़ौती से जहां करीब आठ सौ करोड़ रुपए सालाना निर्यात हो रहा था। अब टैरिफ पहले से भी कम होने से एक तरफ से अमेरिका ने काफी राहत दी है। जिससे हाड़ौती से निर्यात बढ़कर करीब 12 सौ करोड़ रुपए का हो जाएगा।</p>
<p><strong>- गोविंद राम मित्तल, संस्थापक अध्यक्ष, दी एसएसआई एसोसिएशन</strong></p>
<p><strong>अमेरिका में भारतीय को सस्ती मिलेगी वस्तुएं</strong></p>
<p>कोटा व हाड़ौती से काफी सामान विशेष रूप से खाद्यान से जुड़ी वस्तुओं का अमेरिका में अधिक निर्यात होता है। आटा, चावल व धनिया समेत कई ऐसी वस्तुए़ं हैं जिनकी वहां रहने वाले भारतीयों में अधिक डिमांड है। टैरिफ कम होने से यहां से निर्यात तो बढ़ेगा ही। साथ ही अमेरिका में रहने वाले भारतीयों को यहां की वस्तुएं सस्ती मिलेगी। कुछ समय तक निर्यात बंद रहने से वहां कई वस्तुओं की कीमतें काफी अधिक बढ़ गई थी।</p>
<p><strong>- अशोक माहेश्वरी, महासचिव, कोटा व्यापार महासंघ</strong></p>
<p><strong>अमेरिका में मिलेगा अधिक मार्केट</strong></p>
<p>ट्रम्प टैरिफ कम होना भारत व हाड़ौती के लिए अच्छा संकेत है। इससे यहां से अमेरिका में जाने वाली वस्तुओं का निर्यात बढ़ेगा। यहां की वस्तुओं को अमेरिका में अधिक मार्केट मिलेगा। विशेष रूप से हाड़ौती से चावल, धनिया व अन्य वस्तुएं शामिल हैं।</p>
<p><strong>- मनोज राठी, अध्यक्ष, दी एसएसआई एसोसिएशन</strong></p>
<p><strong>आने वाले समय में होगा लाभ</strong></p>
<p>अमेरिका ने टैरिफ 25 से 50 फीसदी लगाने की घोषणा की थी। जिससे हाड़ौती से वहां होने वाले निर्यात को बंद कर दिया था। जिससे यहां का उद्योग व व्यापार तो प्रभावित हुआ ही था साथ ही सबसे अधिक नुकसान अमेरिका को भी हुआ था। लेकिन अब पहले से कम टैरिफ करने से इसका आने वाले समय में अधिक लाभ होगा। हाड़ौती के व्यापार व उद्योग को फिर से आर्थिक लाभ होगा।</p>
<p><strong>- अनिल मूंदड़ा, अध्यक्ष कैट</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 15:18:09 +0530</pubDate>
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                <title>दोस्ती की नई मिशाल कायम! पीएम मोदी ने कहा, भारत-ईयू के बीच ऐतिहासिक व्यापार समझौता </title>
                                    <description><![CDATA[भारत और यूरोपीय संघ के बीच एफटीए पर सहमति बनी। इससे निर्यात बढ़ेगा, व्यापार सरप्लस मजबूत होगा और वैश्विक आपूर्ति शृंखला को नई गति मिलेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/agreement-on-free-trade-fta-between-india-and-european-union/article-140921"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(5)3.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">नई दिल्ली। भारत</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">और</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">यूरोपीय</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">यूनियन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बीच</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मुक्त</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">व्यापार </span>(FTA) <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को लेकर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">समझौता</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हो गया है। 2007 से चली आ रही कोशिश सफल हो गई है। इसे</span> '<span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मदर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ऑफ</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ऑल</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">डील्</span>‍<span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">स</span>' <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">संज्ञा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">गई है। रिपोर्ट्स</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मुताबिक</span>, <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">भारत</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ईयू</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">साथ</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ट्रेड</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सरप्लस</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">वित्त</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">वर्ष</span> 31 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">तक</span> 51 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अरब</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">डॉलर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">तक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पहुंच सकता है। इस</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">समझौते</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">से</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">वित्त</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">वर्ष</span> 2031 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">तक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">यूरोपीय</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">संघ</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">साथ</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">भारत</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">का</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ट्रेड</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सरप्लस</span> 50 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अरब</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">डॉलर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">से</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अधिक की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बढ़ोतरी हो सकती है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">इससे</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">भारत</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कुल</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">निर्यात</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ईयू</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">संघ</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हिस्सेदारी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">वित्त</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">वर्ष</span> 2025 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> 17.3 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">प्रतिशत</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">तुलना</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बढ़कर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">लगभग</span> 22-23 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">प्रतिशत</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हो</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सकती</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">है</span>, <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जिससे</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">भारत</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">निर्यात</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">वृद्धि</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जबरदस्त</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बढ़ावा देखने को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मिलेगा। </span>भारत और यूरोप के 27 देशों के साझा बार-बार यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में सहमति हुई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को इसकी घोषणा करते हुए इस समझौते को ऐतिहासिक करार दिया। </p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा, कल ही भारत और यूरोपीय संघ के बीच एक बहुत बड़ा समझौता हुआ है। दुनिया के लोग इसकी चर्चा मदर ऑफ ऑल डील्स (अब तक के सबसे बड़े व्यापार समझौते) के रूप में कर रहे हैं। उन्होंने कहा, यह समझौता ब्रिटेन के साथ और यूरोप के चार देशों के मुक्त व्यापार संघ एफ्टा के साथ हुए समझौते के पूरक के रूप में कार्य करेगा। भारत और यूरोपीय संघ के बीच इस समझौते से द्विपक्षीय व्यापार और वैश्विक आपूर्ति शृंखला को मजबूती मिलेगी। </p>
<p>उन्होंने इसके लिये देश के सभी नौजवानों और नागरिकों को बधाई देते हुए कहा कि भारत के कपड़ा, रत्न और आभूषण, चमड़ा और चमड़े के सामान जैसे अनेक क्षेत्रों के लिए यह समझौता बहुत सहायक सिद्ध होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत-ईयू एफटीए से न सिर्फ देश के विनिर्माण क्षेत्र को बल मिलेगा बल्कि सेवा क्षेत्र का भी विस्तार होगा। उल्लेखनीय है कि ईयू भारत का एक प्रमुख व्यापारिक और आर्थिक भागीदार है। साल 2024-2025 में दोनों के बीच 136 अरब डॉलर के सामान का व्यापार हुआ था।</p>
<p>भारत वहां से मुख्य रूप से मशीनें, परिवहन उपकरण और रसायनों का आयात करता है, जबकि भारत की ओर से वहां मशीनें, रसायन, लोहा, एल्मुनियम और तांबा जैसी प्राथमिक धातुएं, खनिज उत्पाद तथा कपड़ा और चमड़े के सामान आदि का निर्यात होता है। उल्लेखनीय है कि यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा इस समय भारत में हैं। दोनों सोमवार को गणतंत्र दिवस परेड में मुख्य अतिथि थे। </p>
<p>वॉन डेर लेयेन ने पिछले दिनों दावोस में विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की बैठक में दोनों पक्षों के बीच समझौते पर सहमति का संकेत देते हुए कहा था कि यह समझौता मदर ऑफ ऑल डील्स (अब तक का सबसे बड़ा व्यापारिक समझौता) होगा। उन्होंने कहा था कि इस समझौते से भारत और ईयू की दो अरब की सम्मिलित आबादी का एक बड़ा और उदार बार-बार तैयार होगा। इस समझौते के ब्यौरे की घोषणा आज शाम पीयूष गोयल करेंगे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 27 Jan 2026 13:01:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>केंद्र सरकार का दावा, 2030 तक 5G उपभोक्ता एक करोड़ के पार होने का अनुमान </title>
                                    <description><![CDATA[सरकार ने बताया कि देश में टेलीकॉम उपकरणों का निर्माण और निर्यात तेजी से बढ़ रहा है। संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि भारत में 36 करोड़ 5जी उपभोक्ता हैं, जो 2030 तक 100 करोड़ से ज्यादा हो सकते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/gadgets/central-government-claims-that-5g-users-will-cross-one-crore/article-136239"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/5g-service.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सरकार ने कहा है कि देश मे टेलीकॉम उपकरणों का तेजी से निर्माण हो रहा है और इसका निर्यात भी तेजी से बढ़ रहा है और अगले पांच साल में 5जी उपभोक्ताओं की संख्या अगले एक करोड़ से ज्यादा होने का अनुमान है। संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने लोकसभा में बुधवार को एक पूरक प्रश्न के उत्तर में कहा कि हाल ही में टेलीकॉम उपकरणों की देश में बड़े स्तर पर वृद्धि हुई है और इसको लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजन भी हुए जिनमें भारतीय डेलिकेट और 1200 से ज्यादा विदेशी डेलिगेट्स उपस्थित रहे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि टेलीकॉम से संबंध उपकरणों का बड़े स्तर पर कई देशों में निर्यात किया जा रहा है। संचार मंत्री ने 5जी को भारत की नहीं बल्कि विश्व की उपलब्धि बताया और कहा कि आज 5जी के जरिए पांच लाख जीपीएस देश भर लग चुके हैं और 99.9 प्रतिशत जिले इसमें कवर हो चुके हैं। देश में आज 36 करोड़ से ज्यादा 5जी उपभोक्ता हैं और इसकी गति जिस तेजी से बढ़ रही है उससे अनुमान है कि 2030 तक 5जी उपभोक्ताओं का आंकड़ा 100 करोड़ से ज्यादा होने का अनुमान है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>गैजेट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Dec 2025 13:05:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ट्रम्प ट्रैरिफ : हाड़ौती में 500 करोड़ का निर्यात गड़बड़ाया</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका में करीब 50 लाख से अधिक भारतीय, टैरिफ बढ़ने से महंगे मिलेंगे उत्पाद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/trump-tariff--exports-worth-rs-500-crore-in-hadoti-affected/article-125257"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/54.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा भारत पर 50 फीसदी ट्रैरिफ लगाने से जहां देशभर से अमेरिका को होने वाले भारतीय उत्पादों का निर्यात प्रभावित होगा। वहीं इसका हाड़ौती संभाग पर भी सीधा असर पड़ेगा। यहां से अमेरिका को भेजे जाने वाले उत्पादों का निर्यात कम होगा। जिससे करीब 500 करोड़  का कारोबार प्रभावित होने का अनुमान है। हाड़ौती संभाग के चारों जिलों में कई उत्पाद ऐसे हैं जिनकी अमेरिका में काफी डिमांड रहती है। अमेरिका में रहने वाले करीब 50 लाख से अधिक भारतीय उन स्थानीय उत्पादों का उपयोग भी करते हैं। उन उत्पादों को भारत सरकार के माध्यम से अमेरिका में निर्यात किया जाता है। लेकिन हालत यह है कि पहले जहां अमिरिका द्वारा भारत पर 25 फीसदी ही टैरिफ लगाया हुआ था। वहीं उसे बढ़ाकर अब 50 फीसदी कर दिया है। इससे अमेरिका में निर्यात होने वाले भारतीय उत्पादों की जहां कीमत तो अधिक होगी ही साथ ही महंगी होने से वहां इन उत्पादों की मांग कम होने से निर्यात पर इसका सीधा असर पड़ेगा।  हालांकि भारत सरकार द्वारा टैरिफ का तोड़ निकालते हुए स्थानीय बाजार व अन्य देशों को निर्यात करने की योजना बनाई गई है। लेकिन उसमें समय लगने से निर्यात कम होने से हर उत्पाद का बाजार प्रभावित हुआ है। </p>
<p><strong>सबसे अधिक कोटा स्टोन व सेंड स्टोन उद्योग पर असर</strong><br />कोटा का कोटा स्टोन व डाबी का सेंड स्टोन उच्च क्वा लिटी का होने से इसकी डिमांड अमेरिका समेत अन्य देशो में अधिक है। ऐसे में अमेरिका द्वारा टैरिफ बढ़ाने से न तो कोटा स्टोन का निर्यात हो सकेगा और न ही सेंड स्टोन का। उद्यमियों के अनुसार इससे दोनों का सालाना निर्यात करीब 100-100 करोड़ का होता है। जिससे कोटा संभाग से करीब 200 करोड़ का पत्थर उद्योग प्रभावित होगा। </p>
<p><strong>मसाले व चावल उद्योग प्रभावित</strong><br />बूंदी व रामगंजमंडी में सबसे अधिक उच्च क्वालिटी का चावल पैदा होता है। जिसकी अमेरिका में सबसे अधिक डिमांड है। वहीं झालावाड़ व मंडी के धनिया की अमेरिका में अधिक खपत होती है। इसी तरह से कोटा में बनने वाला आशीर्वाद आटा भी सबसे अधिक अमेरिका में रहने वाले भारतीयों द्वारा उपयोग किया जाता है। ऐसे में करीब 100 करोड़ से अधिक के इन कृषि उत्पादों का हाड़ौती संभाग से निर्यात प्रभावित होगा।</p>
<p><strong>कैमिकल का निर्यात भी होगा कम</strong><br />हाड़ौती में करीब आधा दर्जन से अधिक कैमिकल उद्योग है। इन उद्योगों में तैयार होने वाला कैमिकल भी काफी मात्रा में अमेरिका में निर्यात होता है। अमेरिका के ट्रम्प टैरिफ का संभाग के कैमिकल उद्योग पर भी असर पडेÞगा। उद्यमियों के अनुसार करीब 100 करोड़ से अधिक का कैमिकल यहां से हर साल निर्यात किया जाता है। इनके अलावा भी कई ऐसे उत्पाद हैं जिनका हाड़ौती के चारों जिलों से कम मात्रा में ही सही निर्यात होता है। टैरिफ बढ़ने से ये सभी चीजें अमेरिका में तो महंगी होंगी ही। साथ ही इनका निर्यात करना भी महंगा हो जाएगा। ऐसे में यहां से होने वाला निर्यात प्रभावित होगा। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />अमेरिका में करीब 50 लाख से अधिक भारतीय निवास कर रहे है। वे सभी अधिकतर भारत में तैयार सामानों का ही उपयोग करते हैं। हाड़ौती से कोटा स्टोन, सैंड स्टोन, धनिया,मसाले व आटा निर्यात किया जाता है। टैरिफ बढ़ाने से ये सभी वस्तुएं महंगी होने से वहां उनकी खपत कम होगी। साथ ही निर्यात भी प्रभावित होगी। सभी उद्योगों  का 400 से 500 करोड़ का निर्यात प्रभावित होने का अनुमान है।  <br /><strong>- अशोक माहेश्वरी, महासचिव कोटा व्यापार महासंघ</strong></p>
<p>अमेरिका द्वारा भारत पर दो गुना टैरिफ लगाना गलत है। इससे कोटा संभाग ही नहीं पूरे देश का निर्यात उद्योग प्रभावित होगा। हाड़ौती से भी कई उत्पादों का अमेरिका में निर्यात होता है। टैरिफ बढ़ने से निर्यात करना महंगा होगा। साथ ही वहां रहनगे वाले भारतीयों को भी अधिक महंगे दाम में वस्तुएं मिलेंगी तो लोग भारत की वस्तुओं को कम खरीदेंगे। हालांकि भारत सरकार के स्तर पर इसमें सुधार के प्रयास किए जा रहे है। लेकिन उसमें समय लगेगा।<br /><strong>- अंकुर गुप्ता, अध्यक्षलघु उद्योग भारती</strong></p>
<p>हाड़ौती से केवल कोटा स्टोन व सेंड स्टोन ही अमेरिका को निर्यात नहीं होता है। यहां के मसाले, चावल व आटा समेत कई ऐसे उत्पाद हैं जिनकी  अमेरिका में काफी अधिक खपत है। कोटा संभाग से भी बड़ी संख्या में लोग वहां रहते है। वे केवल यहां के चावल व आटे का ही उपयोग करते है। टैरिफ अधिक होने से अब वे अन्य देशों के सामान खरीदेंगे तो हाड़ौती के उद्योगों पर इसका सीधा असर पड़ेगा।<br /><strong>- राजेन्द्र जैन, अध्यक्ष हाड़ौती ग्रामीण उद्योग संघ </strong></p>
<p>कोटा स्टोन व सेंड स्टोन सबसे अधिक निर्यात होता है। इनकी क्वालिटी व फिनिशिंग बेहतर होने से इनकी अमेरिका में डिमांड रहती है। हाड़।ती के कई अन्य उत्पाद भी टैरिफ अधिक होने से अमेरिका को भेजना महंगा होगा। साथ ही वहां रहने वालों के  लिए खरीदना भी महंगा होगा। ऐसे में ये वस्तुएं जिन देशों की सस्ती होंगी वहां की खरीदी जाएंगी। अमेरिका में डिमांड व खपत कम होने का सीधा असर निर्यात पर पड़ेगा। अमेरिका में निर्यात कम होने से भारत में उनकी खपत का प्रयास तो किया जा रहा है लेकिन टैरिफ बढ़ाने से निर्यात पर तो सीधा असर पड़ेगा। <br /><strong>- राकेश पाटौदी, अध्यक्ष स्टोन मर्चेंट विकास समिति</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 Aug 2025 17:20:05 +0530</pubDate>
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