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                <title>ये लक्षण करते हैं फैटी लीवर की ओर इशारा, हो जाएं सतर्क</title>
                                    <description><![CDATA[इस परेशानी की सबसे बड़ी वजह खानपान में गड़बड़ी और शराब का ज्यादा सेवन है। वैसे फैटी लीवर की समस्या शराब पीने और न पीने वालों दोनों को ही सकती है। जहां शराब पीने वालों को एल्कोहोलिक फैटी लीवर की प्रॉब्लम होती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/these-symptoms-indicate-fatty-liver-be-alert/article-25602"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/focus-2.jpg" alt=""></a><br /><p>फैटी लीवर लीवर से जुड़ी एक सीरियस प्रॉब्लम है, जिससे लीवर का फंक्शन प्रभावित होता है। इस परेशानी की सबसे बड़ी वजह खानपान में गड़बड़ी और शराब का ज्यादा सेवन है। वैसे फैटी लीवर की समस्या शराब पीने और न पीने वालों दोनों को ही सकती है। जहां शराब पीने वालों को एल्कोहोलिक फैटी लीवर की प्रॉब्लम होती है। वहीं न पीने वालों को नॉन एल्कोहोलिक फैटी लीवर। शराब न पीने वालों को फैटी लीवर की प्रॉब्लम सही डाइट न लेने की वजह से होती है। अन्य वजहों में वजन ज्यादा होना और टाइप.2 डाइबिटीज शामिल है। फैटी लीवर होने की समस्या होने पर हमारी बॉडी कई तरह के संकेत देती है, जिन्हें पहचानना जरूरी है। सही समय पर पहचान करए इलाज और एतिहात बरत कर इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। <br /> <br /><strong>फैटी लीवर के लक्षण </strong><br />   - फैटी लीवर की प्रॉब्लम में पेट की ऊपर दाहिने ओर दर्द होता है।<br />   -भूख कम होने लगती है और कुछ लोगों का वजन भी तेजी से गिरने लगता है।<br />   -आंखें का रंग पीला रहने लगता हैं।<br />   -पैरों में हलकी सूजन बनी रहती है। <br />   - हर वक्त थकान और कमजोरी का एहसास होता रहता है।</p>
<p><strong>फैटी लीवर का इलाज</strong>  <br />शरीर में इनमें से कोई भी लक्षण ज्यादा दिनों तक बने रहें तो बिना देर किए डॉक्टर को दिखाएं। जरूरी दवाइयों का सेवन करें। साथ ही साथ खानपान में भी परहेज करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Oct 2022 14:24:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>मां की जान पर बन आई तो बेटे ने डोनेट किया लीवर </title>
                                    <description><![CDATA[मनोहरथाना क्षेत्र में एक बेटे ने मां के दूध का कर्ज चुकाते हुए अपने मां को लीवर डोनेट कर अपने मां की जान बचाई है। सफल लिवर ट्रांसप्लांट का संभवत: प्रदेश का यह पहला मामला है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/son-donate-liver-for-mother-s-life/article-12147"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/ss.jpg" alt=""></a><br /><p>मनोहरथाना। मनोहरथाना क्षेत्र में एक बेटे ने मां के दूध का कर्ज चुकाते हुए अपने मां को लीवर डोनेट कर अपने मां की जान बचाई है। सफल लिवर ट्रांसप्लांट का संभवत: प्रदेश का यह पहला मामला है। <br /><br />मुख्य लिवर ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. नैमिष मेहता ने बताया कि ड्रग साइड इफेक्ट से झालावाड़ क्षेत्र की काली बाई मीना का लीवर फैल हो गया था, जान बचाने के लिए एक मात्र विकल्प लीवर प्रत्यारोपण था। हेमोटोलॉजिस्ट  डॉ. करण कुमार ने परिवार की काउंसलिंग की तो बेटे राजेश कुमार मीना ने लीवर डोनेट करने के लिए सहमति जताई। इस सहमति में राजेश कुमार मीना की अर्धांगिनी कृष्णा धंधोरिया की भी अहम भूमिका रही। पत्नी ने भी अपने पति का हौसला बढ़ाया। डॉ.एमएल स्वर्णकार का कहना है कि प्रदेश में महात्मा गांधी अस्पताल ही लिवर ट्रांसप्लांट केंद्र हैं। राजेश कुमार मीना राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय मोग्या बेह भीलान (पिण्डोला, मनोहरथाना) में साइंस-मैथ के अध्यापक लेवल-2 में कार्यरत है, बड़े भाई मनोज मीना भी वरिष्ठ अध्यापक (अंग्रेजी) है, पिता खानपुर थाना(झालावाड़)में पुलिस विभाग में सेवारत है, छोटा भाई व बड़े भाई मां की सेवा में अभी भी जयपुर में ही है,जबकि राजेश कुमार मीना स्वस्थ होकर घर पर आ गए हैं। राजेश कुमार मीना कहते हैं कि जिस मां ने मुझे इस दुनिया में लाने के लिए जो कष्ट सहे है, उस मां को बचाने के लिए अगर मेरी जिंदगी दांव पर लगे तो यह मेरे लिए सौभाग्य की बात होगी। <br /><br />वहीं चिकित्सकों ने बताया कि डोनर की जांच तथा ट्रांसप्लांट संबंधित कागजी कार्यवाही तथा सरकारी अनुमति में सामान्यत: लगभग आठ से दस दिन का समय लगता है। इस आपात सर्जरी में महज 8 से 10 घंटे में सारी प्रक्रिया पूरी की गई। टीम में डॉ. नैमिष मेहता,डॉ.विनय कपूर,डॉ.अजय शर्मा,डॉ. आरपी चौबे,डॉ.आनन्द नगर,डॉ.शाश्वत सरीन,डॉ.विनय महला, डॉ.अरविंदो दास, डॉ.विवेक आनन्द सास्वत,डॉ.करण कुमार,डॉ.गणेश निमझे, डॉ.गौरव गोयल,डॉ.विपिन, व कॉर्डिनेटर आर्यन माथुर आदि की भूमिका रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Jun 2022 15:44:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राज्य का पहला इमरजेंसी लिवर ट्रांसप्लाण्ट रहा सफल, बचाई रोगी की जान</title>
                                    <description><![CDATA[सीतापुरा स्थित महात्मा गांधी अस्पताल की डॉक्टर्स टीम को एक और चमत्कारिक सफलता मिली है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/states-first-emergency-liver-transplant-was-successful-patients-life-was/article-11890"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/cfds-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सीतापुरा स्थित महात्मा गांधी अस्पताल की डॉक्टर्स टीम को एक और चमत्कारिक सफलता मिली है। हाल ही में अस्पताल की लिवर ट्रांसप्लांट टीम ने एक्यूट लिवर फेलियर की आपात स्थिति में झालावाड़ की 50 वर्षीय महिला का लिवर ट्रांसप्लांट किया है। लिवर ट्रासप्लाण्ट विभाग के डाइरेक्टर तथा मुख्य लिवर ट्रांसप्लान्ट सर्जन डॉ. नैमिश मेहता ने बताया कि यह राज्य में आपातकालीन लिवर ट्रांसप्लाण्ट का यह पहला मामला है। यह ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा है। रोगी कालीबाई तथा डोनर राजेश अब स्वस्थ हैं। महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइन्सेज एण्ड टैक्नोलोजी जयपुर के एमेरिटस चयरपर्सन डॉ. एमएल स्वर्णकार ने बताया कि महात्मा गांधी अस्पताल राज्य का प्रमुख लिवर ट्रांसप्लाण्ट सेंटर है जहां अब तक 26 लिवर प्रत्यारोपण हो चुके हैं। अस्पताल द्वारा अंगदान तथा अंग प्रत्यारोपण के लिए अहम प्रयास किये जा रह है। समाज में अंगदान खासकर लिंकिंग डॉगर डोनेशन के लिए सभी अस्पतालों, स्वयंसेवी संगठनों को आगे आना चाहिए। चेयर पसंन डा विकास स्वर्णकार ने बताया कि यदि समय पर अंगदान किया जाये तो हर साल सैकड़ों जरूरतमंद रोगियों की जान बचाई जा सकती है। महात्मा गाधी अस्पताल जयपुर में यह लिवर प्रत्यारोपण राजस्थान गवर्नमेंट है। स्कीम के तहत किया गया जिसमें रोगी को कैशलेस उपचार दिया गया।</p>
<p>डॉ. नैमिश मेहता ने बताया कि ड्रग साइड इफेक्ट के कारण रोगी को लियर फेलियर की स्थिति का सामना करना पड़ा। अस्पताल पहुंचते ही रोगी को पेंटीलेटर की मदद की जरूरत पड़ी। उसके दिमाग पर सूजन का गंभीर खतरा भी था। ऐसी स्थिति में 80-85 प्रतिशत रोगी जान चा देते हैं। रोगी की जान बचाने का एकमात्र विकल्प लिवर प्रत्यारोपण था। इसकी सबसे बड़ी समस्या यह थी कि घर वालों को अचानक हुए लिवर फेलियर की जानलेवा स्थिति का आभास भी नहीं होता है और वे इतनी बड़ी सर्जरी के लिए तैयार नहीं हो पाते हैं। हिमेटोलोजिस्ट डॉ करण कुमार ने परिवार की फासिलिंग कर गंभीरता के बारे में बताया। तब इनके तीनों बेटा लिवर डोनेशन की इच्छा व्यक्त की। जांचों में बेटे राजेश को लिवर डोनेशन के लिए उपयुक्त पाया गया। ट्रांसप्लाण्ट सम्बन्धित दस्तावेज तैयार कर स्टेट ऑथराइजेशन कमेटी से स्वीकृति ली गई।</p>
<p>आपात स्थिति में देर रात ऑपरेशन शुरू हुआ जो बारह घण्टे तक चला। एक साथ दो ऑपरेशन थियेटर्स में ऑपरेशन हुए। पहले में लिवर डोनर के लिवर का एक हिस्सा निकाला गया। दूसरे ऑपरेशन थियेटर में महिला का खराब हुआ लिवर निकाला गया तथा डोनेशन से प्राप्त लिवर का हिस्सा प्रत्यारोपित किया गया। खास बात यह है कि अस्पताल में भर्ती होते समय भी रोगी वेंटीलेटर पर था। डोनर की जाँच तथा ट्रांसप्लाण्ट सम्बन्धित डॉक्यूमेंटेशन तथा सरकारी अनुमति में भी लगभग आठ से दस दिन का समय लग जाता है। इस आपात सर्जरी में महज एक दिन में सारी प्रक्रिया पूरी की गई। दोनों ही ऑपरेशन सफल रहे हैं। डोनर का लिवर पहले की तरह दो माह में सामान्य आकार ले लेगा।</p>
<p>टीम में डॉ. नैमिश मेहता,  डॉ. विनय कपूर, डॉ. अजय शर्मा, डॉ. आर पी चौबे, डॉ. आनन्द नागर, डॉ शाश्वत सरीन, डॉ. विनय महला, डॉ. अरविन्दो कुमार दास तथा हिपेटोलोजिस्ट डॉ. विवेक आनन्द सारस्वत तथा डॉ करण कुमार तथा निश्चेतना विशेषज्ञ डॉ. गणेश निमझे तथा डॉ. गोयल तथा ट्रांसप्लान्ट कोर्डिनेटर आर्यन माथुर प्रमुख सहयोगी रहे।<br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jun 2022 13:18:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंह से नियमित बदबू आना लीवर रोग के हो सकते है लक्षण </title>
                                    <description><![CDATA[अगर आपके मुंह से नियमित रूप से बदबू आना लीवर रोग के लक्षण हो सकते है। लोगों में यह भ्रांति है कि शराब के अधिक सेवन से ही लिवर खराब होता है, लेकिन शराब के साथ अनियमित दिनचर्या और खानपान में अनियमितता, खाने में तेल और मसालों का अधिक प्रयोग और फास्ट फूड का अत्यधिक सेवन लिवर को कमजोर बनाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/liver-damages-to-alcohol/article-8113"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/54665464.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। अगर आपके मुंह से नियमित रूप से बदबू आना लीवर रोग के लक्षण हो सकते है। लोगों में यह भ्रांति है कि शराब के अधिक सेवन से ही लिवर खराब होता है, लेकिन शराब के साथ अनियमित दिनचर्या और खानपान में अनियमितता, खाने में तेल और मसालों का अधिक प्रयोग और फास्ट फूड का अत्यधिक सेवन लिवर को कमजोर बनाता है। विशेषज्ञों की मानें तो लिवर में खराबी होने से लिवर कैंसर, लिवर सिरोसिस, हेपेटाइटिस-ए, बी, सी और ई, पीलिया आदि समस्याएं होती हैं। इन सबसे बचने के लिए जरूरी है कि सही समय पर लिवर खराबी के लक्षणों को जानकर इलाज कराया जाए।</p>
<p><strong>शुरुआत में इलाज संभव</strong><br />जीआई सर्जन डॉ. मोनिका गुप्ता ने बताया कि शुरुआती दौर में ही बीमारी के लक्षणों को पहचान कर दूर किया जा सकता है। लम्बे समय तक लिवर खराब होने से बचाने के लिए पित्त की थैली की पथरी, लिवर में वसा व लिवर की अन्य गांठो का इलाज जरूरी है। शोध की मानें तो लिवर की बीमारी के लिए सबसे अधिक जिम्मेदार शराब है।</p>
<p><strong>मुख्य लक्षण</strong></p>
<p>स्किन का क्षतिग्रस्त होना, चेहरे पर ज्यादा थकान दिखाई देना। लिवर की खराबी में कई बार पानी भी नहीं पचता है। त्वचा पर सफेद धब्बे पड़ना, इन्हे लिवर स्पॉट कहा जाता है।<br />- यूरीन का रंग गहरा पीला होना।<br />- नाखून पीले दिखना यानी लिवर का संक्रमण हो सकता है।<br />- पेट का फूल जाना या टाइट रहना, लिवर में सूजन।<br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/health/liver-damages-to-alcohol/article-8113</link>
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                <pubDate>Tue, 19 Apr 2022 12:11:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महिला ने सिलाई करते वक्त दांतों के बीच फंसाई सुई, सांस लेने से पेट में गई</title>
                                    <description><![CDATA[हली बार ऐसा हुआ है जब कोई सुई या पिन जैसी चीज दूरबीन के जरिए लीवर से निकाली गई हो।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/doctors-at-sms-hospital-have-removed-a-needle-stuck-in-the-intestine-and-liver-of-a-woman-with-a-telescopic-method--woman-stuck-needle-between-teeth-while-sewing--went-into-stomach-due-to-breathing/article-6295"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/27.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। एसएमएस अस्पताल के चिकित्सकों ने एक महिला की आंत और लिवर में फंसी सुई को दूरबीन पद्धति से निकाला है। एक 25 वर्षीय महिला को सिलाई करते समय मुंह में दांतों के बीच सुई फंसाना महंगा पड़ गया। सांस लेने के दौरान सुई महिला के पेट में चली गई। दो-तीन दिन इंतजार करने और पेट दर्द सहने के बाद आखिर में महिला ने एसएमएस में आकर डॉक्टर को दिखाया, जहां महिला का दूरबीन पद्धति से ऑपरेशन करके सुई को लीवर से निकाला गया। पहली बार ऐसा हुआ है जब कोई सुई या पिन जैसी चीज दूरबीन के जरिए लीवर से निकाली गई हो। इसमें बड़ी बात ये है कि सुई इस कदर फंसी हुई थी कि एक बार तो वह निकलते समय टूट गई और उसका बड़ा हिस्सा फंस गया, लेकिन कुछ देर बाद दोबारा उसे निकाला गया। <br /><br /><strong>ऐसे चली प्रक्रिया</strong><br />एसएमएस हॉस्पिटल में जनरल सर्जन और सीनियर प्रोफेसर डॉ. ऋचा जैन ने बताया कि गंगानगर की रहने वाली 25 साल की महिला सिलाई का काम कर रही थी। उसने मुंह में दांतों के बीच सुई फंसा रखी थी। जब उसने सांस ली तो अचानक सुई पेट में चली गई। अस्पताल आने के बाद जब एक्सरे कराया गया तो सुई पहले आंतों में दिखी। मरीज को भर्ती किए 10 दिन हो गए थे। इस दौरान सोनोग्राफी, एंडोस्कॉपी, एक्सरे, सीटी स्कैन समेत कई जांचे बार-बार करवानी पड़ी। हमने एक बार तो मरीज को वापस घर भेजने का फैसला किया, लेकिन आखिरी बार जब सोनोग्राफी की तो लीवर के अंदर सुई डिटेक्ट हुई।<br /><br /><strong>आंत में छेद करते हुए लीवर में गई</strong><br />दो दिन प्रोसेस किया तो देखा महिला के आंतों में फंसी सुई आंतों में छेद करके लीवर में बुरी तरह फंस गई थी। कई जांचे और गेस्ट्रो सर्जरी विभाग के डॉक्टर्स से सलाह लेने के बाद महिला का ऑपरेशन किया गया। उसके बाद सुई को बाहर निकाला गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Mar 2022 12:31:40 +0530</pubDate>
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                <title> दो साल की बच्ची के लीवर में घुसी 2 इंच लम्बी सूई ऑपरेशन कर बाहर निकाली, एसएमएस अस्पताल के चिकित्सकों ने फिर किया कमाल</title>
                                    <description><![CDATA[कार्डियक सर्जरी विभाग के चिकित्सकों ने जटिल सर्जरी कर बचाई बच्चे की जान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/-a-2-inch-long-needle-inserted-into-the-liver-of-a-two-year-old-girl-was-operated-and-pulled-out--the-needle-kept-on-the-bed-entered-the-girl-s-chest-while-playing--doctors-of-cardiac-surgery-department-saved-the-child-s-life-by-performing-complex-surgery/article-5471"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/bacha.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। एसएमएस अस्पताल के चिकित्सकों ने चिकित्सा के क्षेत्र में एक बार फिर कमाल कर दिखाया है। अस्पताल के कार्डियक सर्जरी विभाग के चिकित्सकों ने दो वर्षीय बालिका के लिवर में घुसी कपड़े सिलने वाली दो इंच लंबी सूई को सर्जरी कर सफलतापूर्वक निकालने में कामयाबी हासिल की है। बच्ची को सूई घुसने के बाद पहले जेकेलोन अस्पताल में परिजनों द्वारा लाया गया था जहां से उसे एसएमएस अस्पताल के कार्डियक सर्जरी विभाग में रैफर किया गया।<br /><br /><strong>ये था मामला</strong><br />कार्डियक सर्जरी विभाग के सीनियर प्रोफेसर डॉ. अनिल शर्मा ने बताया कि एक दो वर्षीय बालिका जेकेलोन अस्पताल से रैफर होकर आई थी। बच्ची के छाती के एक्सरे में एक दो इंच लंबी कपड़े सिलने वाली सूई दिखाई दे रही थी। बच्ची के माता से पूछने पर उन्होंने बताया कि बच्ची बिस्तर पर खेल रही थी और खेलते खेलते सुईं धागे सहित बच्ची के छाती के निचले हिस्से में घुस गई। इस पर माता पिता बच्ची को तुरंत जेकेलोन अस्पताल ले गए। जहां इमरजेंसी में सूई निकालने का प्रयास किया गया लेकिन केवल धागा ही निकल पाया और सूई अंदर ही रह गई। कार्डियक सर्जरी में आने के बाद हमारी टीम ने बच्ची का एक्सरे किया तो सूई छाती के निचले हिस्से में दिखाई दे रही थी लेकिन जब ऑपरेशन किया गया तो सूई छाती की जगह पेट में लिवर के बांये हिससे में मिली। डॉ. शर्मा ने बताया कि सूई छाती से होती हुई डायफ्राम को पार करते हुए पेट में लिवर के बांये भाग में जाकर घंस गई लेकिन पेट के आंतरिक अंग को नुकसान नहीं हुआ। ऑपरेशन की टीम में शामिल डॉ. सुनील दीक्षित, डॉ. मोहित शर्मा, डॉ. सौरभ मित्तल, डॉ. जमनाराम और डॉ. जील सहित एनेस्थिसिया से डॉ. इंदु डॉ. अंशुल और डॉ. सतवीर के प्रयासों से ऑपरेशन सफल रहा और बच्ची की जान बच गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Mar 2022 14:58:05 +0530</pubDate>
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