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                <title>statistics - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>statistics RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>बाल विवाह पर SRS रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता: पश्चिम बंगाल और झारखंड में सबसे ज्यादा नाबालिग लड़कियों की हो रही शादी</title>
                                    <description><![CDATA[‘सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम’ की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में महिलाओं की औसत विवाह उम्र 23.1 वर्ष हो गई है। इसके बावजूद 2.1% लड़कियों की शादी 18 साल से पहले हो रही है। इस सामाजिक बुराई में पश्चिम बंगाल (6.3%) शीर्ष पर और झारखंड दूसरे स्थान पर है, जबकि दिल्ली में एक भी मामला नहीं आया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/srs-report-on-child-marriage-increases-concern-highest-number-of/article-155356"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/baal-vivah.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। देश में बाल विवाह रोकने और बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन कई राज्यों में यह सामाजिक बुराई अब भी चिंता का विषय बनी हुई है। ‘सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) 2024’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल और झारखंड में सबसे ज्यादा नाबालिग लड़कियों की शादी हो रही है। रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं की औसत शादी की उम्र बढ़कर 23.1 वर्ष हो गई है और 73.5 प्रतिशत महिलाएं 21 साल के बाद विवाह कर रही हैं।</p>
<p>इसके बावजूद 2.1 प्रतिशत लड़कियों की शादी 18 वर्ष से पहले हो रही है। पश्चिम बंगाल में यह आंकड़ा सबसे ज्यादा 6.3 प्रतिशत दर्ज किया गया, जबकि झारखंड दूसरे स्थान पर रहा। ग्रामीण क्षेत्रों में बाल विवाह के मामले शहरी इलाकों की तुलना में अधिक पाए गए। वहीं, दिल्ली में बाल विवाह का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ और केरल में इसकी दर सबसे कम रही। विशेषज्ञों ने कम उम्र में शादी को लड़कियों की शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 15:47:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कमलनाथ का केंद्र सरकार पर निशाना, बोले- ईंधन कीमतों में वृद्धि जनता पर आर्थिक बोझ, टैक्स घटाकर जनता को तुरंत राहत देने की मांग  </title>
                                    <description><![CDATA[मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने डीजल, पेट्रोल और सीएनजी के बढ़ते दामों पर केंद्र सरकार को घेरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनियां 28 से 78 प्रतिशत तक भारी मुनाफा कमा रही हैं और सरकार ₹30 प्रति लीटर टैक्स वसूल रही है। कमलनाथ ने टैक्स और कंपनियों का मुनाफा घटाकर जनता को तुरंत राहत देने की मांग की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/kamal-nath-targeted-the-central-government-and-said-increase/article-155046"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/kamal-nathh.png" alt=""></a><br /><p>भोपाल। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने डीज़ल, पेट्रोल और सीएनजी की कीमतों में वृद्धि को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का बहाना बनाकर जनता पर आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। कमलनाथ ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी ट्वीट में कहा कि सरकारी आंकड़े खुद इस बात की गवाही देते हैं कि सरकार डीज़ल और पेट्रोल पर प्रति लीटर कम से कम 30 रुपए टैक्स वसूल रही है। वहीं पेट्रोलियम कंपनियों के आंकड़े बताते हैं कि इन कंपनियों ने पिछले कुछ वर्षों के साथ इस वर्ष भी लाखों करोड़ रुपए का मुनाफा कमाया है।</p>
<p>उन्होंने दावा किया कि पिछली तिमाही में ही पेट्रोलियम कंपनियों ने 28 से 78 प्रतिशत तक मुनाफा अर्जित किया है। उन्होंने कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम थीं, तब सरकार डीज़ल और पेट्रोल के दाम घटाकर जनता को राहत पहुंचा सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया और कंपनियों ने भारी मुनाफा कमाया। उन्होंने कहा कि अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में थोड़ी वृद्धि होते ही पूरा बोझ जनता पर डाला जा रहा है। सरकार अपना टैक्स और पेट्रोलियम कंपनियां अपना कुछ मुनाफा कम कर आम लोगों को राहत पहुंचा सकती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 May 2026 18:34:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चारधाम में आस्था का सैलाब: शनिवार को रिकॉर्ड 96 हजार से अधिक तीर्थयात्रियों ने किए दर्शन, कुल आंकड़ा 20 लाख के पार</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तराखंड की चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं का रिकॉर्ड आंकड़ा पार हो गया है। मात्र 35 दिनों में 20 लाख 76 हजार से अधिक तीर्थयात्रियों ने दर्शन किए हैं, जबकि शनिवार को रिकॉर्ड 96,116 लोग पहुंचे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल प्रबंधन और अलर्ट आपदा तंत्र के कारण यात्रा सुचारु रूप से जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/flood-of-faith-in-chardham-a-record-96-thousand-pilgrims/article-154842"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/chardham1.png" alt=""></a><br /><p>देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड स्थित गंगोत्री, यमुनोत्री, बदरीनाथ और केदारनाथ यानि चारधाम दर्शन को आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। चारों धामों में दर्शन को श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग रही हैं, लेकिन व्यवस्थाएं दुरुस्त होने से यात्रा सुचारु रूप से चल रही है। शनिवार को रिकॉर्ड 96 हजार 116 तीर्थयात्रियों ने चारधाम दर्शन किए। कुल दर्शनार्थियों का आंकड़ा 20 लाख 76 हजार को पार कर चुका है, जबकि केदारनाथ में 08 लाख 11 हजार से अधिक तीर्थयात्री दर्शन कर चुके हैं।</p>
<p>उच्च हिमालयी क्षेत्र की यात्रा होने से आपदा प्रबंधन को अलर्ट मोड पर रखा गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शीर्ष अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मौसम प्रतिकूल होने पर हर एक श्रद्धालु की सुरक्षा और सुविधा का पूरा ध्यान रखा जाए। पुष्कर सिंह धामी के मुख्यमंत्रित्व वाली सरकार के कुशल यात्रा प्रबंधन के चलते चारधाम यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यात्रा का बीते 19 अप्रैल को श्रीगणेश हुआ और आज 23 मई तक यानी 35 दिनों में 20 लाख 76 हजार 553 श्रद्धालु चारधाम दर्शन कर चुके हैं। इनमें केदारनाथ में 8,11,923, बद्रीनाथ में 5,56,437, गंगोत्री में 3,52,162 और यमुनोत्री धाम में 3,56,031तीर्थयात्री पहुंचे हैं। मात्र आज एक दिन में ही चारों धामों में 96 हजार 116 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। श्री बदरीनाथ में सर्वाधिक 32,219 तीर्थयात्री पहुंचे। जबकि केदारनाथ में 29,787, यमुनोत्री में 16,213 और गंगोत्री धाम में 17,897 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।</p>
<p>इतना ही नहीं, सिक्खों के विश्व प्रसिद्ध तीर्थस्थल श्री हेमकुंड साहिब के कपाट भी आज श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए हैं। जहां पहले दिन 06 हजार 605 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। पंच प्यारों की अगुवाई में सिख श्रद्धालुओं का पहला जत्था शनिवार सुबह रवाना होकर हेमकुंट साहिब पहुंचा. 'बोले सो निहाल, सत श्री अकाल' के जयकारों से पूरी लोकपाल घाटी गूंज उठी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 May 2026 13:01:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>डब्ल्यूएचओ का दावा: वैश्विक कोरोना मौतों का आंकड़ा आधिकारिक संख्या से तीन गुना अधिक, रिपोर्ट जारी  </title>
                                    <description><![CDATA[विश्व स्वास्थ्य संगठन की 'वर्ल्ड हेल्थ स्टैटिस्टिक्स 2026' रिपोर्ट के अनुसार, महामारी से वास्तविक मौतें 2.2 करोड़ के पार पहुंच गई हैं। यह सरकारी आंकड़ों से तीन गुना ज्यादा है। कम रिपोर्टिंग और स्वास्थ्य सेवाओं में व्यवधान के कारण जीवन प्रत्याशा में हुई एक दशक की प्रगति भी समाप्त हो गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/who-claims-global-corona-death-toll-three-times-higher-than/article-153780"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/who.png" alt=""></a><br /><p>जिनेवा। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा है कि कोविड-19 महामारी से दुनिया भर में मौतों की वास्तविक संख्या 2.2 करोड़ से अधिक पहुंच गई है, जो आधिकारिक तौर पर दर्ज 70 लाख मौतों से करीब तीन गुना ज्यादा है। डब्ल्यूएचओ की बुधवार को जारी "वर्ल्ड हेल्थ स्टैटिस्टिक्स 2026" रिपोर्ट में कहा गया, "वर्ष 2020 से 2023 के बीच सभी कारणों से वैश्विक अतिरिक्त मौतों (एक्सेस डेथ्स) का अनुमान 2.21 करोड़ लगाया गया, जबकि कोविड-19 से आधिकारिक तौर पर 70 लाख मौतें दर्ज की गईं। </p>
<p>इसका मतलब है कि कोविड से दर्ज हर एक मौत के मुकाबले महामारी से जुड़ी लगभग दो अतिरिक्त मौतें हुईं।"संगठन के अनुसार, इसका मुख्य कारण कई देशों द्वारा मौतों की कम रिपोर्टिंग करना है। इसके अलावा, 2022 के बाद अनेक देशों ने बड़े पैमाने पर कोविड-19 जांच अभियान बंद कर दिये, जिससे वास्तविक आंकड़े सामने नहीं आ सके। रिपोर्ट में कहा गया, "यह निष्कर्ष न केवल वायरस से सीधे हुई मौतों की कम रिपोर्टिंग को दर्शाता है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं में व्यवधान, आर्थिक चुनौतियों और अन्य सामाजिक कारणों से हुई अप्रत्यक्ष मौतों को भी उजागर करता है।"</p>
<p>डब्ल्यूएचओ ने यह भी कहा कि महामारी ने वैश्विक स्तर पर जीवन प्रत्याशा में एक दशक की प्रगति को खत्म कर दिया और विभिन्न क्षेत्रों में इसकी भरपाई अब भी असमान बनी हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 14:11:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>NITI आयोग रिपोर्ट: देश में हर 10 में से 1 छात्र छोड़ रहा स्कूल, माध्यमिक शिक्षा पर बढ़ी चिंता</title>
                                    <description><![CDATA[नीति आयोग की मई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 11.5% छात्र माध्यमिक शिक्षा बीच में छोड़ रहे हैं। चंडीगढ़ 2% के साथ सबसे बेहतर, जबकि गुजरात और एमपी में यह दर 16% से अधिक है। आर्थिक तंगी प्रमुख कारण है। हालांकि, राजस्थान ने अपनी दर 18.8% से घटाकर 7.7% कर सराहनीय सुधार दिखाया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/niti-commission-report-1-out-of-every-10-students-in/article-153283"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/rera2.pdf-(1200-x-600-px)-(1)2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। नीति आयोग की मई 2026 में जारी रिपोर्ट ‘भारत में स्कूली शिक्षा प्रणाली’ ने माध्यमिक शिक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में हर दस में से एक छात्र सेकेंडरी स्तर पर पढ़ाई बीच में छोड़ रहा है। हालांकि पिछले एक दशक में स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन माध्यमिक स्तर अब भी सबसे ज्यादा ड्रॉप आउट वाला चरण बना हुआ है। रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2024-25 में माध्यमिक स्तर पर स्कूल छोड़ने की राष्ट्रीय औसत दर 11.5 प्रतिशत रही। आर्थिक तंगी, कम उम्र में कामकाज में लग जाना और संस्थागत सहयोग की कमी इसके प्रमुख कारण बताए गए हैं।</p>
<p>राज्यों के आंकड़ों में बड़ा अंतर देखने को मिला। चंडीगढ़ में ड्रॉप आउट दर सबसे कम 2 प्रतिशत रही, जबकि झारखंड 3.5 प्रतिशत, उत्तराखंड 4.6 प्रतिशत और केरल 4.8 प्रतिशत के साथ बेहतर स्थिति में रहे। दूसरी ओर गुजरात में 16.9 प्रतिशत, मध्य प्रदेश में 16.8 प्रतिशत और लद्दाख में 16.2 प्रतिशत छात्र माध्यमिक शिक्षा बीच में छोड़ रहे हैं। रिपोर्ट में ओडिशा, झारखंड, बिहार और राजस्थान जैसे राज्यों में सुधार को भी रेखांकित किया गया है। राजस्थान में ड्रॉप आउट दर 18.8 प्रतिशत से घटकर 7.7 प्रतिशत पहुंच गई है। नीति आयोग ने माना कि प्रगति के बावजूद माध्यमिक शिक्षा में छात्रों को स्कूल से जोड़े रखना अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 18:36:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कांग्रेस अध्यक्ष का केंद्र पर हमला: महिला सुरक्षा पर एनसीआरबी आंकड़ों ने खोली सरकार की पोल, आदिवासियों के खिलाफ अपराधों में वृद्धि का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एनसीआरबी आंकड़ों के आधार पर केंद्र पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में महिलाओं के खिलाफ अपराध 42% और साइबर अपराध 1600% से अधिक बढ़े हैं। खरगे ने किसानों और छात्रों की आत्महत्या पर चिंता जताते हुए सरकार के सुरक्षा दावों को खोखला बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-president-attacks-centre-ncrb-data-exposes-government-on-womens/article-153181"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/kharge.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा के मोर्चे पर विफल रहने का आरोप लगाते हुए कहा है कि पिछले 12 वर्षों में सरकार के दावों की वास्तविकता देश के सामने आ चुकी है। खड़गे ने शुक्रवार को सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि 2013 के बाद से महिलाओं के खिलाफ अपराधों में 42.6 प्रतिशत, बच्चों के खिलाफ अपराधों में 204.6 प्रतिशत, दलितों के खिलाफ अत्याचारों में 41.3 प्रतिशत तथा आदिवासियों के खिलाफ अपराधों में 46.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।</p>
<p>उन्होंने साइबर अपराधों में हुई बढ़ोतरी का भी जिक्र किया और कहा कि इस अवधि में साइबर अपराधों में 1,689 प्रतिशत का भारी इजाफा हुआ है। उनका यह भी कहना था कि 2024 में 10,546 किसानों, 52,931 दिहाड़ी मजदूरों और 14,488 विद्यार्थियों ने आत्महत्या की है। कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे करती रही, लेकिन वास्तविक आंकड़े इन दावों की पोल खोलते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 17:57:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कांग्रेस का हल्ला-बोल, एक तरफ बजट तो दूसरी तरफ आधार वर्ष में बदलाव करना नीतिगत समन्वय में कमी </title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस ने केंद्रीय बजट 2026-27 से पहले जीडीपी और सीपीआई के बेस ईयर बदलने पर सवाल उठाए। कहा, इससे बजट अनुमानों और नीति-निर्माण में भ्रम पैदा होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/congresss-uproar-on-one-side-is-budget-and-on-the/article-141437"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/500-px)-(10)1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट की पूर्व संध्या पर सांख्यिकीय आंकड़ों के जारी होने के समय को लेकर गंभीर चिंताएं जताते हुए कहा है कि बजट के वित्तीय अनुमान पुरानी गणनाओं पर आधारित हो सकते हैं, क्योंकि बजट पेश होने के मात्र कुछ ही दिनों के भीतर देश की विकास दर (जीडीपी) और महंगाई दर (सीपीआई) के गणना आधार (बेस ईयर) में बड़े बदलाव होने जा रहे हैं।</p>
<p>कांग्रेस के जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर चिंता का साझा करते हुए कहा कि आधार वर्ष में इस बदलाव से बजट के प्रमुख आंकड़ों, जैसे कि राजकोषीय घाटा और विकास दर के लक्ष्यों में भारी विसंगति पैदा हो सकती है। इसे नीति-निर्माण की प्रक्रिया में समन्वय की कमी आ सकती है, जिससे बजट के वास्तविक प्रभाव का सटीक आकलन करना चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।</p>
<p>उन्होंने लिखा कि बजट के कई आँकड़े सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के प्रतिशत के रूप में पेश होंगे लेकिन कुछ दिनों बाद ही 2022-23 को आधार वर्ष मानकर नयी जीडीपी शृंखला जारी होने वाली है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या  रविवार को पेश किए जाने वाले बजट के आँकड़ों में इसके तुरंत बाद संशोधन किया जाएगा? </p>
<p>उन्होंने एक और चिंता प्रकट करते हुए कहा कि 2024 को आधार मानकर नई उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) शृंखला 12 फरवरी को जारी होने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि इस नई शृंखला में खाद्य कीमतों की हिस्सेदारी में तेज गिरावट दिखाई दे सकती है। अगर ऐसा होता है, तो इसका भी बजट के आँकड़ों पर असर पड़ेगा। थोक मूल्य सूचकांक में भी संशोधन किया जा रहा है और संभवत: इसे आने वाले कुछ महीनों में सार्वजनिक किया जाएगा।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा कि जो भी स्थिति हो, यह नीति-निर्माण में तालमेल की कमी को ही दर्शाता है। उन्होंने यह भी लिखा कि वित्त वर्ष 2026-27 का बजट कल पेश किया जाएगा। राज्य सरकारें बेसब्री से प्रतीक्षा कर रही होंगी कि उनके लिए इसमें क्या है, क्योंकि वित्त मंत्री 16वें वित्त आयोग की सिफ़ारिशों को लागू करने की घोषणा करने वाली हैं।</p>
<p>गौरतलब है कि वित्त आयोग एक संवैधानिक निकाय है। इसे हर पांच साल में बनाया जाता है। इसका काम केंद्र के एकत्र राजस्व में राज्यों की हिस्सेदारी, पाँच वर्षों की अवधि के लिए विशेष अनुदानों की सिफ़ारिशें करना है। नया 16वां वित्त आयोग 2026-27 से 2030-31 की अवधि से संबंधित है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 31 Jan 2026 15:03:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डेंगू फंसा आकड़ों में, लक्षण साफ लेकिन रिपोर्ट नेगेटिव</title>
                                    <description><![CDATA[मौसमी बीमारियों और फ्लू के मरीजों की संख्या लगतार बढ़ रही है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/dengue-trapped-in-statistics--symptoms-clear-but-report-negative/article-53052"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/news-(1)1.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के निजी अस्पतालों में बड़ी संख्या में डेंगू के मरीज आ रहे हैं। लेकिन सरकारी अस्पतालों के आकड़ों में यह पकड़ नहीं आ रहा। दरअसल सरकारी अस्पतालों में डेंगू के मरीज का इलाज तो डेंगू का किया जा रहा है लेकिन रिपोर्ट में उसे डेंगूं नहीं बताया जा रहा। किसी रिपोर्ट में डेंगू नहीं लिखा जाता। मौसमी बीमारी लिखकर चिकित्सा विभाग अपना बचाव करने में जुटा है। दरअसल पिछले कुछ सालों में डेंगू ने ऐसा कहर बरपाया कि सरकारी अस्पतालों ने उसे अपनी रिपोर्ट से ही नदारद कर दिया। अस्पतालों में ओपीडी में डेंगू के लक्षण जैसे मरीज आ रहे हैं लेकिन सरकारी डंडा ऐसा की मरीजों की जांच नेगेटिव ही आ रही है। शहर में मच्छरों का प्रकोप होने के बावजूद जनवरी से जून तक मात्र 24 डेंगू के मरीज ही अस्पताल में रजिस्टर्ड हुए है। वहीं स्क्रब टाइफस के 18 मरीज, एक मरीज पी वी मलेरिया का आया है।  जबकि निजी अस्पतालों में डेंगू मलेरिया के मरीजों का इलाज चल रहा एसडीपी चढ़ाई जा रही है। लेकिन सरकारी आंकड़ों में डेंगू व मलेरिया के मरीज निल आ रही है।  एमबीएस अस्पताल की ओपीडी सहित सभी सरकारी अस्पतालों में डेंगू और मलेरिया के लक्षण वाले मरीजों की संख्या में लगतार इजाफा  हो रहा है। इनका इलाज भी डेंगू व मलेरिया के संदिग्ध मरीज मानकर किया जा रहा है लेकिन रिपोर्ट में  ये सभी मरीज डेंगू नेगिटव ही नजर आ रहे है। ओपीडी में प्रतिदिन 12 से 15 मरीज डेंगू मलेरिया के लक्षण वाले आ रहे है। इसके अलावा मौसमी बीमारियों और फ्लू के मरीजों की संख्या लगतार बढ़ रही है। </p>
<p><strong>बचाव के लिए ये काम करें</strong><br />- सभी मच्छर रुके हुए पानी में अंडे देते हैं। इसलिए रुके पानी को भर दें या कुछ बूंदे मिट्टी के तेल की डाल दें।<br />- डेंगू का मच्छर साफ पानी में जैसे कूलर, टंकियों आदि में पैदा होता है। सप्ताह में एक बार पानी अवश्य बदल दें।<br />- डेंगू का मच्छर दिन में काटता है। इसलिए दिन में पूरे आस्तीन के पकड़े और मौजे पहनें।<br />- घरों और छतों पर रखे पानी भरने वाले पात्रों को हटा दें। जिससे न पानी भरकर जमा होगा और न मच्छर जन्म लेगा।<br />- सोते समय मच्छरदानी, मच्छर भगाने वाली अगरबत्ती या क्रीम का प्रयोग करें।<br />- बुखार आने पर पैरासिटामाल दवा खाएं और नजदीकी <br />अस्पताल में दिखाएं।</p>
<p><strong>जांच रिपोर्ट नेगेटिव  </strong><br />कुन्हाडी निवासी रामनारायण ने बताया कि वो पांच से छह दिन से बुखार से परेशान अस्पताल सारे लक्षण डेंगू थे लेकिन जांच कराई तो रिपोर्ट में डेंगू नहीं निकला। शरीर में कमजोरी हो गई। डॉक्टर ने मलेरिया डेंगू मानकर ही इलाज किया।  बारिश के बाद से ही लोगों को मलेरिया डेंगू के मच्छर डंक मारने से नहीं चूक रहे है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाए जा रहे हमारा स्वास्थ्य हमारी जिम्मेदारी कार्यक्रम का असर शहर में नहीं दिखाई दे रहा है।</p>
<p><strong>मौसम में हो रहा परिवर्तन बन रहा बीमारी का घर</strong><br />मेडिसिन विभाग के डॉ. शिव चरण जेलिया ने बताया कि मौसम में बार बार हो रहे मौसम परिवर्तन के कारण वायरल के साथ अब डेंगू मलेरिया के लक्षणों वाले मरीज भी अस्पताल में आना शुरू हो गए है। बारिश के बाद वायरल के साथ डेंगू मलेरिया के लक्षणों वाले मरीज आने लगे है। अस्पताल में आई फ्लू, सर्दी,गला जाम और बुखार के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। इन दिनों वायरल इंफेक्शन के मरीज लगतार बढ़ रहे है। ओपीडी में सर्दी, खांसी जुकाम के मरीज ज्यादा आ रहे है।  </p>
<p><strong>निजी में ज्यादा मरीज</strong><br />शहर में डेंगू का कहर धीरे धीरे बढ़ रहा है। हालांकि शहर के सरकारी अस्पतालों में डेंगू के मरीज अभी  नजर नहीं आ रहे है। ऐसे में सरकारी रिकार्ड में मरीज दर्ज ही नहीं हो रहे है। वहीं निजी अस्पतालों में डेंगू के मरीजों से बेड फुल चल रहे है। </p>
<p><strong>मलेरिया और डेंगू के लक्षण</strong><br />डॉ ओपी मीणा ने बताया कि मलेरिया में सर्दी के साथ एक दिन छोड़कर बुखार आना है। उल्टी, सिरदर्द, बुखार उतरने के बाद पसीना निकलना, कमजोरी होना आदि मलेरिया के लक्षण है। वहीं, डेंगू में तेज बुखार, सिरदर्द, बदन व जोड़ों में दर्द, शरीर पर लाल दाने, चकत्ते पड़ जाना, खून की उल्टी, पेशाब और मल में खून आना, अत्याधिक घबराहट होना आदि डेंगू के लक्षण हैं।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />मौसमी बीमारियों को नियंत्रण में रखने के लिए सोर्स रिडक्शन पर फोकस किया किया जा रहा है। घरों में कूलर, टंकियों एवं अन्य जल संग्रहण वाले जल पात्रों की सप्ताह में एक बार रगड़कर साफ-सफाई करना जरूरी है। इससे मच्छरों के अण्डे लार्वा बनने से पूर्व ही खत्म हो जाएगें। पोस्टर स्टीकर के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है। साथ ही चिकित्सा संस्थानों को उपचार गाइड लाइन की पालना निर्देश दिए है।  नगर निगम क्षेत्र में दोनो नगर निगम से माइक्रो प्लान अनुसार फागिंग करवाई जा रही है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में नगर पालिका व ब्लॉक स्तर से फोगिंग करवाई जा रही है। हर रविवार जन समुदाय में और हर सोमवार सरकारी कार्यालयो में सूखा दिवस मनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। जिले में कन्ट्रोल रूम की स्थापना कर रखी है, रेपिड रिस्पोंस टीमों किया हुआ है।  ब्लड स्लाइड कलेक्शन भी पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष ज्यादा किए जा रहे है। <br /><strong>- डॉ. जगदीश कुमार सोनी, सीएमएचओ</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Jul 2023 15:08:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महंगाई और बढ़ेगी</title>
                                    <description><![CDATA[एक पखवाड़े पहले सांख्यिकी विभाग ने खुदरा महंगाई के आंकड़े जारी कर जानकारी दी थी कि जनवरी में खुदरा महंगाई दर 6.1 प्रतिशत तक पहुंच गई है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/editorial--inflation-will-increase-further--a-fortnight-ago--the-statistics-department-released-the-data-of-retail-inflation-and-informed-that-in-january-the-retail-inflation-rate-has-reached-6-1-percent/article-5486"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/mehangai.jpg" alt=""></a><br /><p>एक पखवाड़े पहले सांख्यिकी विभाग ने खुदरा महंगाई के आंकड़े जारी कर जानकारी दी थी कि जनवरी में खुदरा महंगाई दर 6.1 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह काफी चिंता का विषय है, क्योंकि महंगाई रिजर्व बैंक के निर्धारित 2 से 6 फीसदी के दायरे से ऊपर बनी हुई है। वैसे तो रिजर्व बैंक ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि महंगाई से फिलहाल राहत के आसार नहीं है और यह सिलसिला सितंबर तक जारी रह सकता है। रिजर्व बैंक का अनुमान सही होता भी दिखाई दे रहा है। आम आदमी लंबे समय से महंगाई की मार झेल रहा है। खाद्य तेलों के दाम लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं और इसके अलावा आम जरूरत की हर चीज महंगी होती जा रही है। इस बढ़ती महंगाई के बीच आम आदमी को अब एक और झटका लगा है। कुछ दुग्ध वितरण कंपनियों ने दूध के मूल्यों में 2 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि कर दी है। पहले भी दूध कोई सस्ता नहीं था। इसके अलावा तेल कंपनियों ने व्यावसायिक गैस सिलेण्डर के दामों में 105 रुपए की भारी बढ़ोतरी कर दी है। इससे यह आशंका बलवती हो गई है कि अगले दस दिनों बाद घरेलू गैस सिलेण्डर के दामों में भी इजाफा हो सकता है। संभावना तो इस बात की भी पूरी है कि पेट्रोल-डीजल के दामों में भी वृद्धि होगी। यह पहले ही हो जाती, लेकिन पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों की वजह से रुकी हुई है। दस मार्च को चुनावों के नतीजे आने के बाद दामों में वृद्धि पक्की बनी हुई है। इसकी मुख्य वजह यह होगी कि अन्तरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम 120 डॉलर प्रति बैरल के आसपास चल रहे हैं। जब भी कच्चे तेल के दामों में इजाफा होता है, भारतीय तेल कंपनियां इसका हवाला देकर पेट्रोल-डीजल व गैस सिलेण्डर के दामों में वृद्धि करने में पीछे नहीं रहती। खुदरा महंगाई के अलावा थोक महंगाई दर भी पिछले दस महीने से दो अंकों में बनी हुई है। वैसे भी अभी जिस तरह के घरेलू और वैश्विक हालात बने हुए हैं, उसमें इस साल महंगाई दर ऊंची ही बने रहने की प्रबल संभावना है। यूक्रेन-रूस युद्ध के बाद तो बाजार में खाद्य वस्तुओं के अलावा अन्य कई उत्पादों में वृद्धि की संभावना है। हकीकत यह है कि महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ रखी है। युद्ध की वजह से अर्थव्यवस्था भी प्रभावित होगी। सरकारों ने ध्यान नहीं दिया तो देश की बड़ी आबादी महंगाई की मार सहने को मजबूर होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Mar 2022 16:37:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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