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                <title>statistics - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>statistics RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>कांग्रेस का केंद्र पर तीखा हमला: जयराम ने लगाया ग्रामीण मजदूरी के आंकड़ों में हेराफेरी की राजनीति का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया है कि सरकार ने सैंपलिंग ढांचे में बदलाव कर ग्रामीण मजदूरी में कृत्रिम वृद्धि दिखाई है। उन्होंने दावा किया कि वास्तविक मजदूरी वृद्धि दर 4.3% के साथ चार साल के निचले स्तर पर है। इस आंकड़ों की बाजीगरी से उपभोग घटा है और निजी निवेश बुरी तरह प्रभावित हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/congresss-sharp-attack-on-the-centre-alleging-politics-of-manipulation/article-157731"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/ajiram-ramesh-17.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा है कि केंद्र सरकार ग्रामीण मजदूरी के आंकड़ों में हेराफेरी से कृत्रिम वृद्धि का भ्रम पैदा कर रही है, जबकि वास्तविक मजदूरी वृद्धि पिछले चार वर्षों में सबसे कमजोर स्तर पर है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने सोमवार को सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि कांग्रेस ने 2024 में ही आगाह कर दिया था कि सरकार ने रिजर्व बैंक के माध्यम से रोजगार की परिभाषा बदलकर वित्त वर्ष 2018 के बाद 16.8 करोड़ नई नौकरियां सृजित होने का दावा किया था। अब सरकार ग्रामीण मजदूरी के आंकड़ों के साथ भी वैसा ही खेल कर रही है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की सुस्ती का मूल कारण वास्तविक मजदूरी का ठहराव है, जिससे उपभोग वृद्धि घटी है और निजी निवेश प्रभावित हुआ है। इसका असर देश के श्रमिक वर्ग पर भी पड़ा है। रमेश ने आरोप लगाया कि जून 2025 से मार्च 2026 के बीच ग्रामीण मजदूरी वृद्धि दर में दिखाई गई तेज बढ़ोतरी कार्यप्रणाली में बदलाव का परिणाम है। उनका यह भी कहना है कि श्रम ब्यूरो ने बिना किसी सार्वजनिक सूचना के नया सैंपलिंग ढांचा अपनाया जिसके तहत पूर्वोत्तर के कई राज्यों, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और गोवा के श्रमिकों को नमूने में शामिल किया गया। </p>
<p>उनके अनुसार इन क्षेत्रों की औसत मजदूरी पुराने नमूने की तुलना में 50 से 55 प्रतिशत अधिक है, जिससे आंकड़ों में कृत्रिम उछाल दिखाई दे रहा है। उन्होंने दावा किया कि वास्तविक मजदूरी वृद्धि दर लगभग 4.3 प्रतिशत है, जो पिछले चार वर्षों में सबसे कमजोर वृद्धि है और यह पूरा मामला "आंकड़ों में हेराफेरी की राजनीति" को दर्शाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 17:33:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>हनुमान बेनीवाल का भाजपा सरकार पर हमला : खाद्य नमूनों में 22 फीसदी नमूने फेल, बोले - सफलता के ढिंढोरे पीट रही सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[आरएलपी प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने खाद्य सुरक्षा दिवस पर राजस्थान सरकार को घेरा है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2022 से 2026 तक 15,644 खाद्य नमूने अमानक पाए गए, लेकिन सिर्फ 3 लाइसेंस निलंबित हुए। बेनीवाल ने मिलावटखोरों पर जुर्माना लगाने के बजाय जेल भेजने की मांग की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/government-beniwal-is-trumpeting-success-even-after-22-percent-samples/article-156264"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/hanuman-beniwal.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। आरएलपी प्रमुख सांसद हनुमान बेनीवाल ने खाद्य दिवस के मौके पर राज्य सरकार पर हमला बोला है। बेनीवाल ने कहा है कि आज विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस है, राजस्थान सीएम ने इस दिवस की बधाई देकर इतिश्री कर ली, लेकिन उन्हें अपनी जिम्मेदारी को केवल बधाई तक सीमित ना रखते हुए राजस्थान की जनता को यह बताना चाहिए कि वर्ष 2022 से 2026 तक लिए गए 69,287 खाद्य नमूनों में से 15,644 नमूने अमानक पाए गए, लेकिन इतनी बड़ी मिलावटखोरी के बावजूद सिर्फ 3 लाइसेंस ही क्यों निलंबित किए गए। वर्तमान सरकार और पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के समय से जुड़े यह आंकड़े प्रदेश की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था की हकीकत को लेकर सरकार के दावों की पोल खोल रही है और जनता के मन में सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब लाखों लोगों की सेहत से खिलवाड़ हो रहा है, तो कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित क्यों है? क्या जुर्माना भरकर मिलावटखोरों को फिर से जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने की खुली छूट दे दी जाती है।</p>
<p>सरकार को यह समझना चाहिए कि  मिलावट केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि जनता के जीवन और स्वास्थ्य के खिलाफ बड़ा अपराध है। जब लाखों परिवारों की थाली में जहर परोसा जा रहा था, तब जिम्मेदार विभाग क्या कर रहे थे। अगर हजारों मामलों में मिलावट साबित हुई, तो फिर कार्रवाई केवल जुर्माना वसूलने तक ही क्यों सीमित रही ? क्या राजस्थान में मिलावटखोरों के लिए कानून का मतलब सिर्फ जुर्माना भरो और मिलावटखोरी जारी रखो रह गया है।</p>
<p>राजस्थान की जनता यह जानना चाहती है कि 22.6 प्रतिशत नमूने फेल होने के बावजूद आखिर सरकार किस बात की सफलता का ढोल पीट रही है। राज्य सरकार से मांग करता हूं कि सभी दोषी प्रतिष्ठानों के नाम सार्वजनिक करते हुए गंभीर मामलों में लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द किए जाएं तथा  मिलावटखोरों पर आपराधिक मुकदमे दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाए और मिलावटखोरों के खिलाफ विशेष अभियान हर महीने चलाया जाए |</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 18:28:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पहले समझाइश, अब सख्ती: राजस्थान पुलिस की ट्रैफिक स्ट्राइक में 7,249 वाहन चालक रडार पर</title>
                                    <description><![CDATA[डीजीपी राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर विशेष सड़क सुरक्षा अभियान के पांचवें दिन 7,249 वाहन चालकों के चालान काटे गए। ब्लैक फिल्म और नियम विरुद्ध नंबर प्लेट पर सर्वाधिक कार्रवाई हुई। एडीजी डॉ. बी.एल. मीणा ने बताया कि जून माह में 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/first-advice-now-strictness-7249-drivers-on-radar-in-rajasthan/article-156238"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/police3.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान पुलिस द्वारा महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर चलाए जा रहे विशेष सड़क सुरक्षा अभियान के पांचवें दिन व्यापक कार्रवाई करते हुए 7,249 वाहन चालकों के खिलाफ प्रवर्तन किया गया। अभियान के तहत यातायात नियमों की अनदेखी करने वालों पर सख्ती बरती जा रही है। अभियान के दौरान सबसे अधिक 2,945 वाहनों पर अवैध काली फिल्म (ब्लैक फिल्म) लगाए जाने के मामलों में कार्रवाई की गई। वहीं नियम विरुद्ध नंबर प्लेट एवं पंजीयन चिन्ह प्रदर्शित करने वाले 2,080 वाहनों के चालान काटे गए। इसके अलावा वाहनों पर अनाधिकृत शब्द, चिन्ह एवं लेखन के 804 मामले सामने आए, जबकि 674 वाहन अवैध मॉडिफिकेशन (बॉडी एवं साइलेंसर परिवर्तन) के दोषी पाए गए।</p>
<p>पुलिस ने 376 वाहनों पर प्रेशर हॉर्न एवं एयर हॉर्न के उपयोग को लेकर कार्रवाई की। वहीं 370 वाहनों में अवैध लाल-नीली बत्ती, फ्लैशर, स्ट्रोब लाइट एवं हूटर पाए जाने पर भी चालान किए गए। जिलेवार कार्रवाई में कोटा शहर सबसे आगे रहा, जहां अकेले 1,079 वाहनों के खिलाफ प्रवर्तन किया गया। जयपुर ट्रैफिक पुलिस ने 622 तथा अजमेर पुलिस ने 356 वाहनों पर कार्रवाई कर अभियान को गति दी। एडीजी ट्रैफिक डॉ. बी.एल. मीणा ने कहा कि सड़क सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ पूरे जून माह में ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत अभियान जारी रहेगा। उन्होंने वाहन चालकों से यातायात नियमों का पालन करने और सुरक्षित सड़क परिवेश बनाने में सहयोग की अपील की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 11:03:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>वैश्विक कारकों के साथ घरेलू आंकड़ों से तय होगी शेयर बाजार की दिशा, आगामी सप्ताह में RBI नीति और जीडीपी आंकड़ों पर टिकी नजरें</title>
                                    <description><![CDATA[कमजोर मानसून की भविष्यवाणी और पश्चिम एशिया संकट से घरेलू शेयर बाजार में सेंसेक्स 639 अंक और निफ्टी 123 अंक टूटकर बंद हुआ। आगामी सप्ताह में बाजार की दिशा आरबीआई की मौद्रिक नीति समीक्षा, वित्त वर्ष 2025-26 के जीडीपी आंकड़ों और औद्योगिक उत्पादन के नतीजों से तय होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/domestic-data-along-with-global-factors-will-decide-the-direction/article-155550"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/share-market7.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। बीते सप्ताह घरेलू शेयर बाजारों में रही गिरावट के बाद आने वाले सप्ताह में निवेशकों की नजर वैश्विक कारकों के अलावा कुछ महत्वपूर्ण घरेलू आंकड़ों पर भी रहेगी। पश्चिम एशिया संकट का असर तो शेयर बाजारों पर दिखेगा ही, मानसून की प्रगति, अप्रैल के औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े, मई के पीएमआई के आंकड़े और वित्त वर्ष 2025-26 के जीडीपी के आंकड़े निवेश धारणा को काफी प्रभावित करेंगे। इसके अलावा रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद शुक्रवार को जारी बयान भी बाजार को दिशा देंगे।</p>
<p>गत सप्ताह 28 मई को बकरीद का अवकाश होने के कारण बाजार में चार दिन ही कारोबार हुआ। मौसम विभाग की कमजोर मानसून की भविष्यवाणी से शुक्रवार को बीएसई का सेंसेक्स लगभग 1,100 अंक लुढ़क गया। कुल मिलाकर चार दिन में यह 639.61 अंक यानी 0.85 प्रतिशत टूटा और सप्ताहांत पर 74,775.74 अंक पर बंद हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 सूचकांक भी 123.25 अंक (0.52 प्रतिशत) की गिरावट में शुक्रवार को 23,547.75 अंक पर बंद हुआ। वृहत बाजार में निवेशकों का विश्वास बना रहा। निफ्टी मिडकैप-50 सूचकांक 0.07 प्रतिशत और स्मॉलकैप-100 सूचकांक 1.02 प्रतिशत ऊपर बंद हुआ।</p>
<p>सेंसेक्स की कंपनियों में सप्ताह के दौरान 19 कंपनियों के शेयर गिरावट में रहे। आईटीसी ने सबसे ज्यादा 4.89 प्रतिशत का नुकसान उठाया। एचडीएफसी बैंक का शेयर 2.82 फीसदी, टीसीएस का 2.73, हिंदुस्तान यूनीलिवर का 2.55, रिलायंस इंडस्ट्रीज का 2.51, सन फार्मा का 2.40 और भारती एयरटेल का 2.23 प्रतिशत गिर गया। पावर ग्रिड में 1.56 फीसदी, महिंद्रा एंड महिंद्रा में 1.54, ट्रेंट में 1.52, बीईएल में 1.36, बजाज फाइनेंस में 1.27, इंफोसिस में 1.25 और अल्ट्राटेक सीमेंट में 1.09 प्रतिशत की गिरावट रही। इंडिगो, आईसीआईसीआई बैंक और एनटीपीसी के शेयर भी नीचे बंद हुए।</p>
<p>टेक महिंद्रा का शेयर सबसे ज्यादा 4.32 प्रतिशत चढ़ा। एलएंडटी में 3.81 फीसदी और इटरनल में 3.70 फीसदी की तेजी रही। एचसीएल टेक्नोलॉजीज का शेयर 1.77 प्रतिशत, भारतीय स्टेट बैंक का 1.57, एशियन पेंट्स का 1.26, बजाज फिनसर्व का 1.10 और मारुति सुजुकी तथा अडानी पोर्ट्स दोनों के शेयर 1.02 प्रतिशत ऊपर बंद हुए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 31 May 2026 14:20:08 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>विश्व तंबाकू निषेध दिवस आज: विशेषज्ञों ने युवाओं में तंबाकू के बढ़ते सेवन पर जताई चिंता ; राजस्थान में तंबाकू सेवन से हर दिन 211 लोगों की मौत, ‘वेपिंग’ के कारण भी युवाओं की सेहत पर मंडरा रहा गंभीर संकट</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान में तंबाकू जनित रोगों से प्रतिदिन 211 और सालाना 77 हजार लोगों की मौत हो रही है। सर्वे के अनुसार, प्रदेश में 24.7% लोग तंबाकू के आदी हैं, जबकि रोज 300 से अधिक बच्चे इसकी गिरफ्त में आ रहे हैं। डॉक्टरों ने युवाओं में बढ़ते वेपिंग और निकोटीन निर्भरता पर गंभीर चिंता जताई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/world-no-tobacco-day-today-experts-expressed-concern-over-the/article-155537"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/tabacco-day.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में तंबाकू और धूम्रपान उत्पादों के सेवन से होने वाली बीमारियां लगातार जानलेवा साबित हो रही हैं। ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में प्रतिदिन लगभग 211 लोग तंबाकू जनित रोगों के कारण असामयिक मृत्यु का शिकार हो रहे हैं, जबकि वर्षभर में यह संख्या करीब 77 हजार तक पहुंच जाती है। वैश्विक स्तर पर हर साल 70 लाख से अधिक और भारत में लगभग 13.5 लाख लोगों की मौत तंबाकू सेवन से जुड़ी बीमारियों के कारण होती है। सर्वे के अनुसार प्रदेश में प्रतिदिन 300 से अधिक बच्चे और देशभर में करीब 5500 बच्चे तंबाकू उत्पादों का सेवन शुरू कर रहे हैं। राजस्थान में वर्तमान समय में 24.7 प्रतिशत लोग किसी न किसी रूप में तंबाकू उत्पादों का उपयोग करते हैं। इनमें 13.2 प्रतिशत लोग धूम्रपान करते हैं, जबकि 14.1 प्रतिशत लोग चबाने वाले तंबाकू उत्पादों का सेवन करते हैं।</p>
<p><strong>युवाओं में बढ़ रहा वेपिंग का चलन</strong></p>
<p>तंबाकू सेवन के साथ ही युवाओं और किशोरों में वेपिंग यानी ई-सिगरेट या वेप पेन जैसे उपकरणों के माध्यम से धूम्रपान करना काफी प्रचलन में है। एसएमएस अस्पताल जयपुर के ईएनटी विभाग के सीनियर प्रोफेसर डॉ. पवन सिंघल ने बताया कि तंबाकू कंपनियां इन उत्पादों को फैशन और आधुनिक जीवनशैली के रूप में प्रस्तुत करती हैं, जिससे युवा प्रभावित होकर इसकी गिरफ्त में आ जाते हैं। ई-सिगरेट जैसे आधुनिक निकोटीन उत्पादों के खतरों के प्रति भी युवाओं को जागरूक किया जाना बेहद जरूरी है।  </p>
<p><strong>इसलिए खतरनाक है तंबाकू</strong></p>
<p>डॉ. सिंघल ने बताया कि तंबाकू का सेवन मुंह, जीभ, गले और पेट के कैंसर का प्रमुख कारण माना जाता है। इसके अतिरिक्त यह उच्च रक्तचाप, हृदयाघात, फेफड़ों की गंभीर बीमारियों, सीओपीडी, एम्फीसेमा और स्ट्रोक जैसी जानलेवा स्थितियों का भी कारण बनता है।</p>
<p><strong>ब्रेन के रिवॉर्ड सिस्टम पर पड़ता है गंभीर असर</strong></p>
<p>भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर जयपुर की साइको-ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. प्रियसी सुरोलिया ने बताया कि निकोटिन धीरे-धीरे मस्तिष्क के रिवॉर्ड सिस्टम पर प्रभाव डालता है और निर्भरता पैदा करता है। तंबाकू के सेवन पर हजारों जहरीले रसायन निकलते हैं, जिनमें टार और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसे तत्व शामिल हैं जो शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे में निकोटिन रिप्लेसमेंट थेरेपी धूम्रपान छोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसमें नियंत्रित मात्रा में फार्मास्यूटिकल-ग्रेड निकोटिन दिया जाता है, लेकिन सिगरेट या बीड़ी में मौजूद हानिकारक तत्व इसमें नहीं होते। धूम्रपान छोड़ने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए यह एक सुरक्षित विकल्प माना जाता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 31 May 2026 10:22:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बाल विवाह पर SRS रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता: पश्चिम बंगाल और झारखंड में सबसे ज्यादा नाबालिग लड़कियों की हो रही शादी</title>
                                    <description><![CDATA[‘सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम’ की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में महिलाओं की औसत विवाह उम्र 23.1 वर्ष हो गई है। इसके बावजूद 2.1% लड़कियों की शादी 18 साल से पहले हो रही है। इस सामाजिक बुराई में पश्चिम बंगाल (6.3%) शीर्ष पर और झारखंड दूसरे स्थान पर है, जबकि दिल्ली में एक भी मामला नहीं आया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/srs-report-on-child-marriage-increases-concern-highest-number-of/article-155356"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/baal-vivah.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। देश में बाल विवाह रोकने और बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन कई राज्यों में यह सामाजिक बुराई अब भी चिंता का विषय बनी हुई है। ‘सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) 2024’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल और झारखंड में सबसे ज्यादा नाबालिग लड़कियों की शादी हो रही है। रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं की औसत शादी की उम्र बढ़कर 23.1 वर्ष हो गई है और 73.5 प्रतिशत महिलाएं 21 साल के बाद विवाह कर रही हैं।</p>
<p>इसके बावजूद 2.1 प्रतिशत लड़कियों की शादी 18 वर्ष से पहले हो रही है। पश्चिम बंगाल में यह आंकड़ा सबसे ज्यादा 6.3 प्रतिशत दर्ज किया गया, जबकि झारखंड दूसरे स्थान पर रहा। ग्रामीण क्षेत्रों में बाल विवाह के मामले शहरी इलाकों की तुलना में अधिक पाए गए। वहीं, दिल्ली में बाल विवाह का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ और केरल में इसकी दर सबसे कम रही। विशेषज्ञों ने कम उम्र में शादी को लड़कियों की शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 15:47:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कमलनाथ का केंद्र सरकार पर निशाना, बोले- ईंधन कीमतों में वृद्धि जनता पर आर्थिक बोझ, टैक्स घटाकर जनता को तुरंत राहत देने की मांग  </title>
                                    <description><![CDATA[मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने डीजल, पेट्रोल और सीएनजी के बढ़ते दामों पर केंद्र सरकार को घेरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनियां 28 से 78 प्रतिशत तक भारी मुनाफा कमा रही हैं और सरकार ₹30 प्रति लीटर टैक्स वसूल रही है। कमलनाथ ने टैक्स और कंपनियों का मुनाफा घटाकर जनता को तुरंत राहत देने की मांग की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/kamal-nath-targeted-the-central-government-and-said-increase/article-155046"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/kamal-nathh.png" alt=""></a><br /><p>भोपाल। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने डीज़ल, पेट्रोल और सीएनजी की कीमतों में वृद्धि को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का बहाना बनाकर जनता पर आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। कमलनाथ ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी ट्वीट में कहा कि सरकारी आंकड़े खुद इस बात की गवाही देते हैं कि सरकार डीज़ल और पेट्रोल पर प्रति लीटर कम से कम 30 रुपए टैक्स वसूल रही है। वहीं पेट्रोलियम कंपनियों के आंकड़े बताते हैं कि इन कंपनियों ने पिछले कुछ वर्षों के साथ इस वर्ष भी लाखों करोड़ रुपए का मुनाफा कमाया है।</p>
<p>उन्होंने दावा किया कि पिछली तिमाही में ही पेट्रोलियम कंपनियों ने 28 से 78 प्रतिशत तक मुनाफा अर्जित किया है। उन्होंने कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम थीं, तब सरकार डीज़ल और पेट्रोल के दाम घटाकर जनता को राहत पहुंचा सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया और कंपनियों ने भारी मुनाफा कमाया। उन्होंने कहा कि अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में थोड़ी वृद्धि होते ही पूरा बोझ जनता पर डाला जा रहा है। सरकार अपना टैक्स और पेट्रोलियम कंपनियां अपना कुछ मुनाफा कम कर आम लोगों को राहत पहुंचा सकती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 May 2026 18:34:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चारधाम में आस्था का सैलाब: शनिवार को रिकॉर्ड 96 हजार से अधिक तीर्थयात्रियों ने किए दर्शन, कुल आंकड़ा 20 लाख के पार</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तराखंड की चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं का रिकॉर्ड आंकड़ा पार हो गया है। मात्र 35 दिनों में 20 लाख 76 हजार से अधिक तीर्थयात्रियों ने दर्शन किए हैं, जबकि शनिवार को रिकॉर्ड 96,116 लोग पहुंचे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल प्रबंधन और अलर्ट आपदा तंत्र के कारण यात्रा सुचारु रूप से जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/flood-of-faith-in-chardham-a-record-96-thousand-pilgrims/article-154842"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/chardham1.png" alt=""></a><br /><p>देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड स्थित गंगोत्री, यमुनोत्री, बदरीनाथ और केदारनाथ यानि चारधाम दर्शन को आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। चारों धामों में दर्शन को श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग रही हैं, लेकिन व्यवस्थाएं दुरुस्त होने से यात्रा सुचारु रूप से चल रही है। शनिवार को रिकॉर्ड 96 हजार 116 तीर्थयात्रियों ने चारधाम दर्शन किए। कुल दर्शनार्थियों का आंकड़ा 20 लाख 76 हजार को पार कर चुका है, जबकि केदारनाथ में 08 लाख 11 हजार से अधिक तीर्थयात्री दर्शन कर चुके हैं।</p>
<p>उच्च हिमालयी क्षेत्र की यात्रा होने से आपदा प्रबंधन को अलर्ट मोड पर रखा गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शीर्ष अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मौसम प्रतिकूल होने पर हर एक श्रद्धालु की सुरक्षा और सुविधा का पूरा ध्यान रखा जाए। पुष्कर सिंह धामी के मुख्यमंत्रित्व वाली सरकार के कुशल यात्रा प्रबंधन के चलते चारधाम यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यात्रा का बीते 19 अप्रैल को श्रीगणेश हुआ और आज 23 मई तक यानी 35 दिनों में 20 लाख 76 हजार 553 श्रद्धालु चारधाम दर्शन कर चुके हैं। इनमें केदारनाथ में 8,11,923, बद्रीनाथ में 5,56,437, गंगोत्री में 3,52,162 और यमुनोत्री धाम में 3,56,031तीर्थयात्री पहुंचे हैं। मात्र आज एक दिन में ही चारों धामों में 96 हजार 116 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। श्री बदरीनाथ में सर्वाधिक 32,219 तीर्थयात्री पहुंचे। जबकि केदारनाथ में 29,787, यमुनोत्री में 16,213 और गंगोत्री धाम में 17,897 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।</p>
<p>इतना ही नहीं, सिक्खों के विश्व प्रसिद्ध तीर्थस्थल श्री हेमकुंड साहिब के कपाट भी आज श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए हैं। जहां पहले दिन 06 हजार 605 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। पंच प्यारों की अगुवाई में सिख श्रद्धालुओं का पहला जत्था शनिवार सुबह रवाना होकर हेमकुंट साहिब पहुंचा. 'बोले सो निहाल, सत श्री अकाल' के जयकारों से पूरी लोकपाल घाटी गूंज उठी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 May 2026 13:01:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>डब्ल्यूएचओ का दावा: वैश्विक कोरोना मौतों का आंकड़ा आधिकारिक संख्या से तीन गुना अधिक, रिपोर्ट जारी  </title>
                                    <description><![CDATA[विश्व स्वास्थ्य संगठन की 'वर्ल्ड हेल्थ स्टैटिस्टिक्स 2026' रिपोर्ट के अनुसार, महामारी से वास्तविक मौतें 2.2 करोड़ के पार पहुंच गई हैं। यह सरकारी आंकड़ों से तीन गुना ज्यादा है। कम रिपोर्टिंग और स्वास्थ्य सेवाओं में व्यवधान के कारण जीवन प्रत्याशा में हुई एक दशक की प्रगति भी समाप्त हो गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/who-claims-global-corona-death-toll-three-times-higher-than/article-153780"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/who.png" alt=""></a><br /><p>जिनेवा। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा है कि कोविड-19 महामारी से दुनिया भर में मौतों की वास्तविक संख्या 2.2 करोड़ से अधिक पहुंच गई है, जो आधिकारिक तौर पर दर्ज 70 लाख मौतों से करीब तीन गुना ज्यादा है। डब्ल्यूएचओ की बुधवार को जारी "वर्ल्ड हेल्थ स्टैटिस्टिक्स 2026" रिपोर्ट में कहा गया, "वर्ष 2020 से 2023 के बीच सभी कारणों से वैश्विक अतिरिक्त मौतों (एक्सेस डेथ्स) का अनुमान 2.21 करोड़ लगाया गया, जबकि कोविड-19 से आधिकारिक तौर पर 70 लाख मौतें दर्ज की गईं। </p>
<p>इसका मतलब है कि कोविड से दर्ज हर एक मौत के मुकाबले महामारी से जुड़ी लगभग दो अतिरिक्त मौतें हुईं।"संगठन के अनुसार, इसका मुख्य कारण कई देशों द्वारा मौतों की कम रिपोर्टिंग करना है। इसके अलावा, 2022 के बाद अनेक देशों ने बड़े पैमाने पर कोविड-19 जांच अभियान बंद कर दिये, जिससे वास्तविक आंकड़े सामने नहीं आ सके। रिपोर्ट में कहा गया, "यह निष्कर्ष न केवल वायरस से सीधे हुई मौतों की कम रिपोर्टिंग को दर्शाता है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं में व्यवधान, आर्थिक चुनौतियों और अन्य सामाजिक कारणों से हुई अप्रत्यक्ष मौतों को भी उजागर करता है।"</p>
<p>डब्ल्यूएचओ ने यह भी कहा कि महामारी ने वैश्विक स्तर पर जीवन प्रत्याशा में एक दशक की प्रगति को खत्म कर दिया और विभिन्न क्षेत्रों में इसकी भरपाई अब भी असमान बनी हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 14:11:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>NITI आयोग रिपोर्ट: देश में हर 10 में से 1 छात्र छोड़ रहा स्कूल, माध्यमिक शिक्षा पर बढ़ी चिंता</title>
                                    <description><![CDATA[नीति आयोग की मई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 11.5% छात्र माध्यमिक शिक्षा बीच में छोड़ रहे हैं। चंडीगढ़ 2% के साथ सबसे बेहतर, जबकि गुजरात और एमपी में यह दर 16% से अधिक है। आर्थिक तंगी प्रमुख कारण है। हालांकि, राजस्थान ने अपनी दर 18.8% से घटाकर 7.7% कर सराहनीय सुधार दिखाया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/niti-commission-report-1-out-of-every-10-students-in/article-153283"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/rera2.pdf-(1200-x-600-px)-(1)2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। नीति आयोग की मई 2026 में जारी रिपोर्ट ‘भारत में स्कूली शिक्षा प्रणाली’ ने माध्यमिक शिक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में हर दस में से एक छात्र सेकेंडरी स्तर पर पढ़ाई बीच में छोड़ रहा है। हालांकि पिछले एक दशक में स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन माध्यमिक स्तर अब भी सबसे ज्यादा ड्रॉप आउट वाला चरण बना हुआ है। रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2024-25 में माध्यमिक स्तर पर स्कूल छोड़ने की राष्ट्रीय औसत दर 11.5 प्रतिशत रही। आर्थिक तंगी, कम उम्र में कामकाज में लग जाना और संस्थागत सहयोग की कमी इसके प्रमुख कारण बताए गए हैं।</p>
<p>राज्यों के आंकड़ों में बड़ा अंतर देखने को मिला। चंडीगढ़ में ड्रॉप आउट दर सबसे कम 2 प्रतिशत रही, जबकि झारखंड 3.5 प्रतिशत, उत्तराखंड 4.6 प्रतिशत और केरल 4.8 प्रतिशत के साथ बेहतर स्थिति में रहे। दूसरी ओर गुजरात में 16.9 प्रतिशत, मध्य प्रदेश में 16.8 प्रतिशत और लद्दाख में 16.2 प्रतिशत छात्र माध्यमिक शिक्षा बीच में छोड़ रहे हैं। रिपोर्ट में ओडिशा, झारखंड, बिहार और राजस्थान जैसे राज्यों में सुधार को भी रेखांकित किया गया है। राजस्थान में ड्रॉप आउट दर 18.8 प्रतिशत से घटकर 7.7 प्रतिशत पहुंच गई है। नीति आयोग ने माना कि प्रगति के बावजूद माध्यमिक शिक्षा में छात्रों को स्कूल से जोड़े रखना अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 18:36:52 +0530</pubDate>
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                <title>कांग्रेस अध्यक्ष का केंद्र पर हमला: महिला सुरक्षा पर एनसीआरबी आंकड़ों ने खोली सरकार की पोल, आदिवासियों के खिलाफ अपराधों में वृद्धि का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एनसीआरबी आंकड़ों के आधार पर केंद्र पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में महिलाओं के खिलाफ अपराध 42% और साइबर अपराध 1600% से अधिक बढ़े हैं। खरगे ने किसानों और छात्रों की आत्महत्या पर चिंता जताते हुए सरकार के सुरक्षा दावों को खोखला बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-president-attacks-centre-ncrb-data-exposes-government-on-womens/article-153181"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/kharge.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा के मोर्चे पर विफल रहने का आरोप लगाते हुए कहा है कि पिछले 12 वर्षों में सरकार के दावों की वास्तविकता देश के सामने आ चुकी है। खड़गे ने शुक्रवार को सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि 2013 के बाद से महिलाओं के खिलाफ अपराधों में 42.6 प्रतिशत, बच्चों के खिलाफ अपराधों में 204.6 प्रतिशत, दलितों के खिलाफ अत्याचारों में 41.3 प्रतिशत तथा आदिवासियों के खिलाफ अपराधों में 46.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।</p>
<p>उन्होंने साइबर अपराधों में हुई बढ़ोतरी का भी जिक्र किया और कहा कि इस अवधि में साइबर अपराधों में 1,689 प्रतिशत का भारी इजाफा हुआ है। उनका यह भी कहना था कि 2024 में 10,546 किसानों, 52,931 दिहाड़ी मजदूरों और 14,488 विद्यार्थियों ने आत्महत्या की है। कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे करती रही, लेकिन वास्तविक आंकड़े इन दावों की पोल खोलते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 17:57:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>कांग्रेस का हल्ला-बोल, एक तरफ बजट तो दूसरी तरफ आधार वर्ष में बदलाव करना नीतिगत समन्वय में कमी </title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस ने केंद्रीय बजट 2026-27 से पहले जीडीपी और सीपीआई के बेस ईयर बदलने पर सवाल उठाए। कहा, इससे बजट अनुमानों और नीति-निर्माण में भ्रम पैदा होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/congresss-uproar-on-one-side-is-budget-and-on-the/article-141437"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/500-px)-(10)1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट की पूर्व संध्या पर सांख्यिकीय आंकड़ों के जारी होने के समय को लेकर गंभीर चिंताएं जताते हुए कहा है कि बजट के वित्तीय अनुमान पुरानी गणनाओं पर आधारित हो सकते हैं, क्योंकि बजट पेश होने के मात्र कुछ ही दिनों के भीतर देश की विकास दर (जीडीपी) और महंगाई दर (सीपीआई) के गणना आधार (बेस ईयर) में बड़े बदलाव होने जा रहे हैं।</p>
<p>कांग्रेस के जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर चिंता का साझा करते हुए कहा कि आधार वर्ष में इस बदलाव से बजट के प्रमुख आंकड़ों, जैसे कि राजकोषीय घाटा और विकास दर के लक्ष्यों में भारी विसंगति पैदा हो सकती है। इसे नीति-निर्माण की प्रक्रिया में समन्वय की कमी आ सकती है, जिससे बजट के वास्तविक प्रभाव का सटीक आकलन करना चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।</p>
<p>उन्होंने लिखा कि बजट के कई आँकड़े सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के प्रतिशत के रूप में पेश होंगे लेकिन कुछ दिनों बाद ही 2022-23 को आधार वर्ष मानकर नयी जीडीपी शृंखला जारी होने वाली है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या  रविवार को पेश किए जाने वाले बजट के आँकड़ों में इसके तुरंत बाद संशोधन किया जाएगा? </p>
<p>उन्होंने एक और चिंता प्रकट करते हुए कहा कि 2024 को आधार मानकर नई उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) शृंखला 12 फरवरी को जारी होने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि इस नई शृंखला में खाद्य कीमतों की हिस्सेदारी में तेज गिरावट दिखाई दे सकती है। अगर ऐसा होता है, तो इसका भी बजट के आँकड़ों पर असर पड़ेगा। थोक मूल्य सूचकांक में भी संशोधन किया जा रहा है और संभवत: इसे आने वाले कुछ महीनों में सार्वजनिक किया जाएगा।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा कि जो भी स्थिति हो, यह नीति-निर्माण में तालमेल की कमी को ही दर्शाता है। उन्होंने यह भी लिखा कि वित्त वर्ष 2026-27 का बजट कल पेश किया जाएगा। राज्य सरकारें बेसब्री से प्रतीक्षा कर रही होंगी कि उनके लिए इसमें क्या है, क्योंकि वित्त मंत्री 16वें वित्त आयोग की सिफ़ारिशों को लागू करने की घोषणा करने वाली हैं।</p>
<p>गौरतलब है कि वित्त आयोग एक संवैधानिक निकाय है। इसे हर पांच साल में बनाया जाता है। इसका काम केंद्र के एकत्र राजस्व में राज्यों की हिस्सेदारी, पाँच वर्षों की अवधि के लिए विशेष अनुदानों की सिफ़ारिशें करना है। नया 16वां वित्त आयोग 2026-27 से 2030-31 की अवधि से संबंधित है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 31 Jan 2026 15:03:07 +0530</pubDate>
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