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                            <item>
                <title>होर्मुज में बढ़ा युद्ध का खतरा: होर्मुज में अमेरिका और ईरान आमने-सामने, मिसाइल और ड्रोन हमलों से टूटा युद्धविराम</title>
                                    <description><![CDATA[होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच भारी गोलाबारी शुरू हो गई है। ईरान ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागीं, जिन्हें अमेरिकी सेना (CENTCOM) ने इंटरसेप्ट कर नाकाम कर दिया। यह टकराव अमेरिकी विमान द्वारा ईरान की ओर बढ़ रहे एक टैंकर पर हेलफायर मिसाइल दागने के बाद बढ़ा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/danger-of-war-increases-in-hormuz-america-and-iran-face/article-155847"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran2.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर सैन्य टकराव शुरू हो गया है। ईरानी की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया कि केश्म द्वीप पर हुए अमेरिकी हमले के जवाब में उसने कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। ईरान के मुताबिक, अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के मुख्यालय, सैन्य एयरबेस और हेलीकॉप्टरों पर मिसाइलों और ड्रोन से हमले किये गये। उधर अमेरिका ने कहा है कि उसने कुवैत और बहरीन पर हुए ईरानी मिसाइल एवं ड्रोन हमलों को नाकाम कर दिया है।</p>
<p>अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम )ने बताया कि कुवैत पर दागी गई दो ईरानी मिसाइलें रास्ते में ही गिर गईं या टूट गईं, जबकि बहरीन को निशाना बनाने वाली तीन मिसाइलों को अमेरिका और बहरीन के रक्षा बलों ने इंटरसेप्ट (रोक) कर लिया। इसके अतिरिक्त, कुवैत में अमेरिकी बलों को निशाना बनाने वाले छोडे़ गये असंख्य ड्रोन को बिना किसी नुकसान के निष्क्रिय कर दिया गया। इससे पहले अमेरिकी बलों ने ईरान के केश्म द्वीप पर स्थित सैन्य ठिकानों और एक ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन पर भी हवाई हमले किये। सेंटकॉम ने यह भी जानकारी दी कि उसने क्षेत्रीय जलक्षेत्र से वैध रूप से गुजर रहे नागरिक नाविकों की ओर ईरान द्वारा लॉन्च किए गए तीन 'वन-वे अटैक ड्रोन' को हवा में ही मार गिराया।</p>
<p>दोनों तरफ से हुई इस भारी गोलाबारी ने ईरान-अमेरिका के बीच लागू युद्धविराम समझौते पर संकट गहरा गया है। सेंटकॉम के अनुसार, यह ताजा विवाद तब शुरू हुआ जब मंगलवार को अमेरिकी बलों ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में होर्मुज जलडमरूमध्य की अमेरिकी नाकेबंदी को तोड़ने का प्रयास कर रहे एक खाली टैंकर को रोकने की कार्रवाई की। बोत्सवाना के ध्वज वाले इस 'एम/टी लेक्सी' नामक टैंकर को चालक दल ने 24 घंटे की अवधि में बार-बार दी चेतावनियों को नजरअंदाज करने के बाद निशाना बनाया। जब यह टैंकर कुवैत के पास जलडमरूमध्य के उत्तर में स्थित ईरान के खार्ग द्वीप की ओर बढ़ रहा था, तब अमेरिकी विमान ने इसके इंजन को निष्क्रिय करने के लिए एक हेलफायर मिसाइल दागी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 16:21:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>बुधवार रात फारस की खाड़ी में अवैध रूप से प्रवेश करने की कोशिश कर रहे दो जहाजों को रोका: आईआरजीसी नौसेना</title>
                                    <description><![CDATA[फारस की खाड़ी में तनाव चरम पर है। आईआरजीसी (IRGC) नौसेना ने नेविगेशन सिस्टम बंद कर अवैध प्रवेश कर रहे दो जहाजों को जब्त कर लिया। इसके बाद अमेरिकी सेना द्वारा बंदर अब्बास पर किए गए मिसाइल हमलों के जवाब में ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर पलटवार किया और कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/irgc-navy-stopped-two-ships-trying-to-enter-the-persian/article-155372"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/irani-oil-tanker.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) नौसेना ने कहा कि उसने बुधवार रात फारस की खाड़ी में अवैध रूप से प्रवेश करने की कोशिश कर रहे दो जहाजों को रोका, जबकि कई अन्य जहाजों को वापस लौटने पर मजबूर होना पड़ा। प्रेस टीवी ने बुधवार रात बताया कि दक्षिणी ईरानी शहर बंदर अब्बास में कई विस्फोटों की आवाज सुनी गई। एक्सियोस समाचार पोर्टल ने बताया कि अमेरिकी सेना ने एक ईरानी ड्रोन लॉन्चर और चार आत्मघाती ड्रोन नष्ट कर दिए, जिन्हें कथित तौर पर एक अमेरिकी नौसेना के जहाज और एक व्यापारिक पोत पर दागा गया था।</p>
<p>ईरानी प्रसारक एसएनएन ने गुरुवार को आईआरजीसी के हवाले से कहा, "आज रात, कई जहाजों ने अपने नेविगेशन सिस्टम को निष्क्रिय करके अवैध रूप से फारस की खाड़ी में प्रवेश करने की कोशिश की। कई रेडियो चेतावनियों के बाद, आईआरजीसी नौसेना ने उनमें से दो को रोक दिया और बाकी को वापस लौटने पर मजबूर कर दिया।" रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि अमेरिकी सेना ने फिर युद्धविराम का उल्लंघन किया और बंदर अब्बास शहर में हवाई अड्डे के पास के इलाकों पर कई मिसाइलें दागीं, जिससे कोई नुकसान नहीं हुआ।</p>
<p>आईआरजीसी ने कथित तौर पर कहा, "इन हमलों के जवाब में, उस अमेरिकी अड्डे पर हमला किया गया जहाँ से मिसाइलें दागी गई थीं। अगर ऐसा दोबारा हुआ, तो अमेरिकी सेना को हमारी कड़ी प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ेगा।" इसके अलावा, आईआरजीसी ने बताया कि बुधवार को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति मिलने के बाद उसकी नौसेना ने 26 व्यापारिक जहाजों और टैंकरों को सुरक्षा प्रदान की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 18:40:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरान का पलटवार: अमेरिकी मिलिट्री बेस पर दागे मिसाइल और ड्रोन, सीजफायर तोड़ने का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। बंदर अब्बास में अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान (IRGC) ने कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ताबड़तोड़ मिसाइल और ड्रोन हमले किए। डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान की शर्तें ठुकराने के बाद दोनों देशों के बीच युद्ध का खतरा और गहरा गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iran-retaliates-by-firing-missiles-at-american-military-base-accused/article-155294"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran-attack1.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। दक्षिणी ईरान के बंदर अब्बास क्षेत्र में अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने हमले की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि यह कार्रवाई अमेरिकी हमलों के जवाब में की गई है। कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने भी मिसाइल और ड्रोन हमलों की पुष्टि की है और उन्हें रोकने के प्रयास जारी होने की बात कही है।</p>
<p>ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि यदि हमले जारी रहे तो जवाब और अधिक कड़ा होगा। वहीं अमेरिका ने अपने हालिया हमलों को आत्मरक्षा में उठाया गया कदम बताया है। दूसरी ओर ईरान और अमेरिका के बीच संभावित समझौते की खबरें भी सामने आई हैं, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की शर्तों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 May 2026 16:32:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>इजरायल ने ईरान पर हवाई हमले करने के लिए इराक में बनाया गुप्त सैन्य अड्डा : यह बेस वायु सेना के लिए रसद केंद्र के रूप में भी करेगा काम, सूत्रों का दावा- सैन्य कार्रवाई शुरू होने के पहले हुई थी बेस की स्थापना</title>
                                    <description><![CDATA[वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, इजरायल ने ईरान पर हवाई हमलों की तैयारी के लिए इराक में सीक्रेट बेस बनाया, जहां विशेष बल, खोज-बचाव टीम और लॉजिस्टिक सपोर्ट तैनात थे। रिपोर्ट में अमेरिकी एफ-15 गिराए जाने और बढ़ते ईरान-अमेरिका-इजरायल तनाव का भी दावा किया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/israel-built-a-secret-military-base-in-iraq-to-carry/article-153311"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/6622-copy35.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">तेहरान। इजरायली अधिकारियों ने ईरान के खिलाफ हवाई हमले शुरू करने के लिए इराकी रेगिस्तान में गुप्त सैन्य अड्डा स्थापित किया है। यह जानकारी रविवार को वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अमेरिकी अधिकारियों सहित अन्य स्रोतों के हवाले से दी। सूत्रों के अनुसार, इजरायली सेना ने विशेष बलों को रखने के लिए एक ठिकाना बनाया है। यह बेस इजरायली वायु सेना के लिए रसद केंद्र<span>  </span>के रूप में भी काम करता है। सूत्रों का दावा है कि इस बेस की स्थापना ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू होने के ठीक पहले हुई थी। प्रकाशन ने स्पष्ट किया कि वहां खोज और बचाव दल भी तैनात किये गये हैं, ताकि विमान गिरने पर इजरायली पायलटों की तलाश की जा सके। एक अनाम सूत्र ने बताया कि इजरायली वायु सेना के विशेष बल, जिन्हें दुश्मन के इलाके में तोडफ़ोड़ की कार्रवाई का प्रशिक्षण दिया गया है, वे भी इस बेस पर तैनात हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सूत्रों ने वॉल स्ट्रीट जर्नल को बताया कि इराकी रेगिस्तान में स्थित यह इजरायली बेस का पता लगभग मार्च में लगा था। अखबार ने अनाम इराकी सरकारी मीडिया का हवाला देते हुए लिखा कि एक स्थानीय चरवाहे ने इलाके में असामान्य सैन्य गतिविधि, विशेष रूप से हेलीकॉप्टर की उड़ानों की जानकारी दी थी। इसके बाद इराकी बलों को उस सैन्य सुविधा की जांच के लिए भेजा गया लेकिन इजरायल ने हवाई हमलों के जरिए उनकी बढ़त को रोक दिया। <span> </span>अखबार ने इराक में बेस के सटीक स्थान का उल्लेख नहीं किया है। एक अनाम सूत्र ने बताया कि जब ईरानी शहर इस्फहान के पास एक अमेरिकी एफ-15 लड़ाकू विमान को मार गिराया गया था, तब इजरायल ने मदद की पेशकश की थी, लेकिन अमेरिकी सेना ने स्वतंत्र रूप से दोनों पायलटों को बचा लिया। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने आगे कहा कि इजरायल ने इस अभियान की सुरक्षा के लिए हवाई हमले भी किये थे।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ईरान के ऊपर एक एफ-15ई फाइटर-बॉम्बर को मार गिराया गया था। तीन अप्रैल को खोज अभियान शुरू हुआ। इसमें दो पायलटों में से एक को जल्द ही ढूंढ़ लिया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पांच अप्रैल की रात को दूसरे पायलट की वापसी का एलान किया। 28 फरवरी को, अमेरिका और इजरायल ने ईरान में ठिकानों पर हमला करना शुरू किया, जिसमें 3,000 से अधिक लोग मारे गए। वाङ्क्षशगटन और तेहरान ने आठ अप्रैल को युद्धविराम की घोषणा की। इसके बाद इस्लामाबाद में हुई बातचीत बेनतीजा रही, हालांकि दोबारा जंग शुरू होने की कोई खबर नहीं है। फिर भी, अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू कर दी है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 May 2026 14:06:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>भारत के चारों ओर सैन्य बेस बनाने की तैयारी में चीन : रिपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[चीन ने अफ्रीका के पूर्वी तट पर जिबूती में नेवल बेस बनाया था। यहां बड़ी तादाद में सैनिक मौजूद हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/china-preparing-to-build-army-bases-around-india/article-72733"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/ph-(7)6.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। भारत के खिलाफ खतरनाक मंसूबे रखने वाला चीन अब हिंदुस्तान के चारों ओर मौजूद पड़ोसी देशों में सैन्य अड्डा बनाने की तैयारी में है। अमेरिका के इंटेलिजेंस कम्युनिटी की ताजा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि चीन श्रीलंका, पाकिस्तान, म्यांमार जैसे भारत के पड़ोसी देशों के अलावा क्यूबा, मित्र राष्ट्र यूएई, सेशेल्स, ताजिकिस्तान और तंजानिया भी सैन्य बेस बनाने की संभावना पर काम कर रहा है। चीन के इस कदम का मकसद अपनी ताकत का प्रदर्शन करना है और अपने राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा करना है। अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट के खुलासे से भारत के लिए परेशानी बढ़ गई है जो हिमालय में पहले ही चीन के खतरे से जूझ रहा है। भारत ने हाल ही में चीन की सीमा पर 10 हजार अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की है। अब दोनों देशों की ओर से करीब 60-60 हजार सैनिक आमने-सामने हैं। यही नहीं चीन की कोशिश है कि अमेरिका को चेतावनी दी जाए और इसी वजह से क्यूबा और अफ्रीका के पश्चिमी तट पर मौजूद देश इक्वटोरियल गिनी में सैन्य अड्डा बनाने की संभावना पर काम कर रहा है। अफ्रीका के ठीक दूसरी ओर अमेरिका है और इसी वजह से चीन की नजर इस देश पर है। इससे पहले चीन ने अफ्रीका के पूर्वी तट पर जिबूती में नेवल बेस बनाया था। यहां बड़ी तादाद में सैनिक मौजूद हैं।</p>
<p><strong>चीन के राष्ट्रपति का खतरनाक है सैन्य प्लान</strong><br />अमेरिकी इंटेलिजेंस कम्युनिटी ने अपने वार्षिक आकलन में यह जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि चीन ने जिबूती के अलावा कंबोडिया में भी नेवल बेस बना लिया है। अब वह अन्य जगहों जैसे म्यांमार, क्यूबा, श्रीलंका, पाकिस्तान, सेशेल्स, ताजिकिस्तान, तंजानिया और यूएई में भी सैन्य अड्डा बनाने की ताक में है। चीन का इरादा साल 2035 तक पूरी सेना को आधुनिक बनाने का है और पीएलए को वर्ल्ड क्लास मिलिट्री बनाने की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका बहुत अस्थिर दुनिया का सामना कर रहा है। इसमें वैश्विक ताकतों के बीच तनाव चल रहा है और कई देशों के बीच चुनौतियां हैं और क्षेत्रीय संघर्ष चल रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन, ईरान और रूस वर्तमान अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं। चीन का यह कदम शी जिनपिंग के सेना को बदलने के प्लान का हिस्सा है जो पीएलए को ब्लू वॉटर नेवी बनाना चाहते हैं ताकि वह दुनिया में अपने अभियान को चला सके। चीन ने अभी केवल जिबूती में अपने विदेशी नेवल बेस को स्वीकार किया है। वहीं चीन ने इस कदम को सही ठहराया है और कहा है कि उनका सामान दुनिया के हर हिस्से में जाता है। चीन के लोग भी वहां जाते हैं। इसलिए ऐसी क्षमता को विकसित करना पूरी तरह से न्यायोचित है। चीन ने कहा कि अमेरिका के सैकड़ों मिलिट्री बेस दुनिया में हैं और उसने हजारों सैनिक तैनात कर रखे हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 Mar 2024 10:35:14 +0530</pubDate>
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                <title>रूस ने यूक्रेन के 1,800 से अधिक सैन्य ठिकानों को किया नष्ट </title>
                                    <description><![CDATA[रूस के सशस्त्र बलों ने विशेष अभियान शुरू होने के बाद से यूक्रेन के 1,800 से अधिक सैन्य ठिकानों को नष्ट किया गया है। रूसी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता इगोर कोनाशेनकोव ने यह जानकारी दी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/russia-destroy-1-800-army-base-of-ukraine/article-5494"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/uk-copy1.jpg" alt=""></a><br /><p>मास्को। रूस के सशस्त्र बलों ने विशेष अभियान शुरू होने के बाद से यूक्रेन के 1,800 से अधिक सैन्य ठिकानों को नष्ट किया गया है। रूसी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता इगोर कोनाशेनकोव ने यह जानकारी दी। रूसी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि रूसी सशस्त्र बलों ने यूक्रेन के सैन्य ठिकानों पर निरंतर हमला जारी रखा है। ऑपरेशन के दौरान अब तक 1,812 निशाना बनाया जा चुका है। इनमें यूक्रेनी सेना के 65 कमांड पोस्ट और संचार केंद्र, 56 एस -300, बुक एम -1 और ओसा वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली और 59 रडार स्टेशन शामिल हैं।</p>
<p>नष्ट की गई यूक्रेनी ठिकानों में 49 विमान और हवा में 13 विमान, 635 टैंक और अन्य बख्तरबंद लड़ाकू वाहन, 67 मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर, 252 फील्ड आर्टिलरी पीस और मोर्टार, 442 विशेष सैन्य वाहन तथा 54 मानव रहित हवाई वाहन शामिल है। <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>यूक्रेन-रूस युद्ध</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Mar 2022 17:27:34 +0530</pubDate>
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