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                <title>टिकट कैंसिलेशन नियमों में बदलाव : अब यात्रियों का समय के अनुसार कटेगा पैसा, पढ़ें रेलवे कितना देगा रिफंड</title>
                                    <description><![CDATA[रेलवे ने टिकट कैंसिलेशन नियमों में बदलाव किया है। अब रिफंड समय के आधार पर मिलेगा। 72 घंटे पहले रद्द करने पर 75%, 24 घंटे के भीतर 25% और 8-24 घंटे के बीच 50% रिफंड मिलेगा। 8 घंटे से कम समय पर कोई रिफंड नहीं। बोर्डिंग स्टेशन ट्रेन से 30 मिनट पहले तक बदला जा सकेगा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/changes-in-ticket-cancellation-rules-now-passengers-will-be-deducted/article-147679"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/train.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने टिकट के कैंसिलेशन नियमों में बदलाव किया है। अब यात्रियों का समय के अनुसार पैसा कटेगा। इसके अलावा रेलवे की ओर से बोर्डिंग स्टेशन बदलने के नियम में भी बदलाव किया गया है। नए नियमों के अनुसार यात्री ट्रेन चलने से कितनी देर पहले टिकट रद्द करते है, उसी अनुसार यात्रियों को रिफंड दिया जाएगा। पेनल्टी भी इसी बात पर निर्भर करेगी कि ट्रेन का जो समय है, उससे कितने घंटे पहले टिकट को रद्द किया गया है। रेलवे के अनुसार नियम बदलने का उद्देश्य सिस्टम के दुरुपयोग को रोकना है।</p>
<p>नए नियमों के मुताबिक अगर यात्री ट्रेन चलने से 72 घंटे पहले अपने टिकट को रद़्द करता है, तो उसे 75 प्रतिशत, 24 घंटे के बीच 25% और 24 घंटे से 8 घंटे के बीच टिकट रद्द करने पर 50% रिफंड दिया जाएगा। वहीं ट्रेन चलने से 8 घंटे से कम समय पहले टिकट कैंसिल करने पर कोई रिफंड नहीं मिलेगा। इसके अलावा ट्रेन के निर्धारित समय से 30 मिनट पहले तक यात्रियों को अपना बोर्डिंग पॉइंट बदलने की भी सुविधा मिलेगी। इससे बड़े शहरों में रहने वाले यात्रियों को अधिक लाभ मिलेगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 14:17:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिल्ली में निजी स्कूलों की फीस बढ़ोतरी पर लगेगी रोक : उपराज्यपाल ने जारी की अधिसूचना, नया कानून औपचारिक रूप से लागू</title>
                                    <description><![CDATA[अभिभावकों को राहत भी मिलने की उम्मीद है। इस अधिनियम के लागू होने के साथ ही अब प्राइवेट स्कूल मनमाने तरीके से फीस में बढ़ोतरी नहीं कर सकेंगे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/there-will-be-a-ban-on-increasing-fees-of-private/article-135907"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(3)5.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। निजी स्कूलों की ओर से फीस बढ़ोतरी को लेकर की जा रही मनमानी पर अब रोक लगने वाली है। उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने दिल्ली एजुकेशन बिल अधिनियम, 2025 को लेकर अधिसूचना जारी की है। इसके साथ ही नया कानून औपचारिक रूप से लागू हो गया है। इस कानून से निजी स्कूलों की फीस बढ़ोतरी में पारदर्शिता आएगी। साथ ही अभिभावकों को राहत भी मिलने की उम्मीद है। इस अधिनियम के लागू होने के साथ ही अब प्राइवेट स्कूल मनमाने तरीके से फीस में बढ़ोतरी नहीं कर सकेंगे। </p>
<p>इस नए कानून के दायरे में 1700 से अधिक प्राइवेट स्कूल आएंगे। नए कानून के तहत स्कूलों को फीस संरचना, खर्च और वित्तीय जरूरतों को पूरी पारदर्शिता के साथ प्रस्तुत करना होगा। इस कानून को लागू कर के मनमानी फीस बढ़ोतरी को रोकना सरकार का उद्देश्य है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Dec 2025 13:07:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सेमेस्टर बना जी का जंजाल, डबल फीस और परीक्षा बढ़ा रही दर्द </title>
                                    <description><![CDATA[शिक्षक बोले-सालभर परीक्षा फिर एडमिशन में ड्यूटी, कक्षाओं में पढ़ाएं कब?
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/semester-has-become-a-problem--double-fees-and-exams-are-increasing-the-pain/article-112754"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtrer-(1)9.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। उच्च शिक्षा में जिस उद्देश्य से राष्टÑीय शिक्षा नीति के तहत सेमेस्टर प्रणाली लागू की गई वो सरकारी मशीनरी की लचरता से जी-का जंजाल बन गई। राजकीय महाविद्यालयों में मानव व भौतिक संसाधनों की आवश्यकता पूरी किए बिना ही सेमेस्टर स्कीम थोप दी गई। जिससे न केवल उच्च शिक्षा बेपटरी हुई बल्कि विद्यार्थी मानसिक व आर्थिक बोझ तले दब गए। उच्च शिक्षा में सेमेस्टर स्कीम लॉन्च हुए दो साल से ज्यादा समय बीत चुका है लेकिन फायदा होने की जगह विद्यार्थियों के परेशानी का सबब बन गया। परीक्षाएं तीन-तीन महीने लेट होने लगी, जिसका असर रिजल्ट में देरी  के रूप में सामने आने लगा। हालात यह हैं, राजसेस व रेगुलर कॉलेजों में छात्रसंख्या  के मुकाबले भौतिक व मानव संसाधनों के अभाव के बीच सेमेस्टर ने उच्च शिक्षा का ढर्रा ही बिगाड़ रख दिया। बीए, बीएससी व बीकॉम में हजारों विद्यार्थी बेक  की मार झेल रहे हैं। तीन साल की ग्रेजुएशन डिग्री चार साल में भी पूरी नहीं हो पा रही। दैनिक नवज्योति ने गत वर्षों से सेमेस्टर स्कीम को अनुभव  कर रहे शिक्षकों व विद्यार्थियों से सुधारात्मक नतीजों पर बात की तो छात्रों का दर्द दिल से जुबां पर आ गया। पेश है रिपोर्ट के खास अंश...</p>
<p><strong>सुझाव : सेमेस्टर पर हो सेमीनार </strong><br />गवर्नमेंट कॉलेज कोटा के निवर्तमान छात्रसंघ अध्यक्ष आशीष मीणा का कहना है, 12वीं कक्षा पार कर प्रथम वर्ष में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थी सेमेस्टर से अनजान होते हैं, सभी नवप्रवेशित विद्यार्थियों को सेमेस्टर प्रणाली क्या है, सिलेबस व पढ़ाई की तैयारी, प्रेक्टिकल तथा मिर्ड टर्म कैसे होंगे, इसकी जानकारी के लिए शुरुआती स्तर पर ही सेमीनार आयोजित कर देनी चाहिए। </p>
<p><strong>कॉलेज स्तर पर हो काउंसलर नियुक्त</strong><br />एनईपी के तहत सेमेस्टर स्कीम के तहत मिर्ड टर्म की तैयारी, प्रेक्टिकल, असाइनमेंट, रिपोर्ट वर्क तैयार करने के तरीके सिखाए जाने तथा क्रेडिट सिस्टम समझाने के लिए कॉलेज स्तर पर काउंसलर्स की नियुक्ति की जानी चाहिए ताकि नवप्रेवेशित विद्यार्थी पहले दिन से ही एग्जाम पैटर्न व प्रक्रिया से रुबरू हो सके।</p>
<p><strong>3 साल की ग्रेजुएशन 4 साल में  </strong><br />राजकीय महाविद्यालयों के छात्रों का कहना है, सरकार कॉलेजों की जमीनी हकीकत से कोसों दूर है, पढ़ाने को शिक्षक नहीं, प्रेक्टिकल के लिए संसाधन नहीं। इसके बावजूद आनन-फानन में सेमेस्टर प्रणाली थोप दी गई। जिसका नकारात्मक प्रभाव कई रूपों में नजर आया। दिसम्बर में होने वाले प्रथम सेमेस्टर के एग्जाम तीन माह देरी से अप्रेल में हो रहे हैं। वहीं, द्वितीय सेमेस्टर जून की जगह अगले वर्ष सितम्बर में हो रही। छात्र प्रकाश कुमार झा, अक्षय मेहता का कहना है, यूजी प्रथम वर्ष के पहले सेमेस्टर का एग्जाम दिसम्बर 2024 में होना था, जो अप्रेल 2025 में हुए। इसी तरह द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षा जून में हो रही। जिसके परिणाम भी देरी से जारी हो रहे। इसकी वजह से 3 साल की ग्रेजुएशन की डिग्री पूरी होने में 4 साल लग रहे। </p>
<p><strong>डबल फीस का बोझ </strong><br />सेमेस्टर स्कीम का सबसे बड़ा नुकसान आर्थिक रूप से  हो रहा है। इस प्रणाली 6-6 माह में साल में दो बार एग्जाम हो रहे हैं, जिसकी फीस दो से ढाई हजार रुपए  के हिसाब से चार से पांच हजार रुपए प्रति स्टूडेंट्स से यूनिवर्सिटी वसूलती है। इसके अलावा बेक आने पर फिर से एग्जाम फीस, रिचेकिंग फीस से भी आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। जबकि, वार्षिक स्कीम में साल में एक बार पेपर और एक बार ही एग्जाम फीस देनी होती थी।  </p>
<p><strong>क्या कहते हैं विद्यार्थी  </strong><br />वर्ष 2023 से सेमेस्टर सिस्टम लागू हुआ लेकिन कॉलेजों में शिक्षकों की कमी पूरी नहीं की गई। कई विषयों की क्लासें नहीं लग पाती। ओल्ड स्कीम में साल में एक बार एग्जाम व एक बार ही एग्जाम फीस तथा समय पर सिलेबस पूरा हो जाता था लेकिन सेमेस्टर सिस्टम में सब दोगुना हो गई। परीक्षाओं के साथ परीणाम में भी अनावश्यक देरी से कॅरियर प्रभावित हो रहा है।<br /><strong>- सलोनी सेन, छात्रा, तृतीय वर्ष गवर्नमेंट कॉलेज</strong></p>
<p>कॉलेजों में मानव व भौतिक संसाधनों की कमी दूर करने के बजाए सेमेस्टर प्रणाली लागू कर देने से उच्च शिक्षा बेपटरी हो गई।  हालांकि क्रेडिट ट्रांसफर और एबीसी आईडी सिस्टम होने से कॉलेज बदलना या ब्रेक लेना आसान हो गया है और मोडूलर परीक्षाएं होने से छात्रों में स्ट्रेस भी कम रहता है। <br /><strong>- चित्रांक्षा कंवर, बीएससी थर्ड सेमेस्टर </strong></p>
<p>जिस उद्देश्य के साथ सेमेस्टर स्कीम लागू की गई, वह संसाधनों की कमी से पूरे नहीं हो पाए। सेमेस्टर एग्जाम तीन-तीन माह देरी से हो रहे। जिनके परिणाम भी देरी से आ रहे। जिसकी वजह से शैक्षणिक सत्र लेट होता है। बाद में यूनिवर्सिटी द्वारा विद्यार्थियों पर परीक्षा का दबाव डाला जाता है। उन्हें परीक्षा की तैयारी करने का समय नहीं दिया जाता। जिससे विद्यार्थी मानसिक तनाव से गुजरते हैं। इसका खामियाजा परीक्षा परिणाम के रूप में भुगतना पड़ता है। सरकार को संसाधनों में सुधार करना चाहिए। <br /><strong>- आशीष मीणा, निवर्तमान छात्रसंघ अध्यक्ष, राजकीय महाविद्यालय कोटा</strong></p>
<p>सिस्टम लागू होने से अभी तक छात्रों को कोई फायदा नहीं हुआ है, बल्कि कई गुना नुकसान हो गया। तीन साल की गे्रजुएशन की डिग्री 4 साल से ज्यादा समय में हो रही है। हर सेमेस्टर एग्जाम फीस जमा करने से आर्थिक भार पड़ रहा है। यूनिवर्सिटी भी विद्यार्थियों  की शिकायतों का समाधान भी समय पर नहीं कर रही। जिससे छात्र परेशान हैं।  <br /><strong>- रिद्धम शर्मा, छात्र नेता,राजकीय कला महाविद्यालय कोटा</strong></p>
<p><strong>एक एग्जाम खत्म तो दूसरे शुरू, टीचर ड्यूटी में तो पढ़ाए कौन</strong><br />सेमेस्टर स्कीम को सैद्धांतिक रूप से लागू किया गया है। मानव संसाधन उपलब्ध कराए बिना इस प्रणाली की सफलता पर संशय है। समेस्टर के तहत कॉलेज में पूरे साल परीक्षा होती है। एक सेमेस्टर की परीक्षा खत्म होती तो दूसरे सेमेस्टर की शुरू हो जाती है। जिसके एग्जाम खत्म हुए उनकी कक्षाएं प्रारंभ हो जाती है। इसी बीच एडमिशन प्रक्रिया भी शुरू हो जाती है। जिनमें शिक्षकों की ड्यूटी लगी  होती है। ऐसे में शिक्षक परीक्षा व एडमिशन भी कराए तो क्लासों में कब पढ़ाएंगे।  <br /><strong>- रघुराज परिहार, प्रदेशाध्यक्ष विवि एवं महाविद्यालय संघ रुक्टा </strong></p>
<p>सेमेस्टर प्रक्रिया से उच्च शिक्षा का व्यवस्थित ढांचा बिगड़ गया। स्टूडेंट्स ही नहीं कई टीचर्स को भी सेमेस्टर स्कीम के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है।  मिड टर्म व प्रेक्टिकल भी देरी से हो रहे हैं। साल में दो बार एग्जाम से चार से पांच हजार रुपए अतिरिक्त  फीस लग रही है। डिग्री करने में तीन की जगह चार साल तक लग रहे हैं।   <br /><strong>- कृतिका गौतम, छात्रा गवर्नमेंट गर्ल्स कॉलेज </strong></p>
<p>नई शिक्षा नीति के तहत सेमेस्टर स्कीम लागू की गई है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों का सर्वार्गिंण विकास करना है। हर 6 माह में परीक्षा होने से कक्षाओं में विद्यार्थियों की उपस्थिति बढ़ती है। जिससे ज्ञान और कौशल का विकास होता है। हालांकि, संसाधनों की कमी के कारण समय पर परीक्षाएं करवाना चूनौतिपूर्ण है। जिसमें सुधार के प्रयास लगातार जारी है। <br /><strong>- प्रो. कैलाश सोडाणी, कुलपति कोटा विवि </strong></p>
<p>जुलाई से शुरू होने वाले नए शिक्षा सत्र 2025-26 में यूजी फाइनल ईयर भी सेमेस्टर प्रणाली के तहत संचालित होगी। इसी के साथ पूरी ग्रेजुएशन नई शिक्षा नीति के तहत सेमेस्टर स्कीम मे हो सकेगी। सेमेस्टर प्रणाली से शिक्षा में गुणवत्ता बढ़ रही है।   <br /><strong>- डॉ. विजय पंचौली, सहायक क्षेत्रीय निदेशक आयुक्तालय कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 May 2025 15:08:17 +0530</pubDate>
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                <title>एलन कोचिंग ने नहीं लौटाई फीस </title>
                                    <description><![CDATA[एलन कॅरियर कोचिंग इंस्टीट्यूट से कोचिंग करने के दौरान आत्महत्या करने अथवा अन्य कारणों से काल का ग्रास बने कई बच्चों के परिजनों को अब तक संस्थान ने फीस तक वापस नहीं लौटाई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/jaipur-allen-coaching-not-return-of-fees/article-12512"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/44654652.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। एलन कॅरियर कोचिंग इंस्टीट्यूट से कोचिंग करने के दौरान आत्महत्या करने अथवा अन्य कारणों से काल का ग्रास बने कई बच्चों के परिजनों को अब तक संस्थान ने फीस तक वापस नहीं लौटाई है। कलक्टर द्वारा तय गाइड लाइन के अनुसार ऐसे बच्चों के परिजनों को फीस लौटाई जानी चाहिए। इसके बावजूद संस्थान ने कई बच्चों के परिजनों की फीस नहीं लौटाई है। परिजनों ने बताया कि संस्थान ने अब तक कोई राशि नहीं लौटाई है।</p>
<p><strong>हमसे कोई संपर्क नहीं किया</strong><br />मेरी बच्ची ऐसे हाथों से निकल जाएगी सोचा नहीं था। एलन ने हमसे कोई संपर्क नहीं किया। ना ही किसी तरह का कोई पैसा लौटाया। कोटा से केवल पुलिस का फोन आया था कि आप बयान देने आ जाओ। मैने सितम्बर माह में 1.10 लाख रुपए जमा कराए थे। मुझे हमेशा अफसोस रहेगा कि मैने बेटी को कोटा क्यूं भेजा। 4 जून 2022 को आयुषी की लैंडमार्क स्थित हॉस्टल में तबीयत खराब हो गई थी। उसे अस्पताल लेकर गए तो मृत घोषित कर दिया।<strong>- मृत छात्रा आयुषी के पिता कप्तान सिंह</strong></p>
<p><strong>मेरा तो सब कुछ लुट गया</strong> <br />मेरा बेटा दो दिन कमरे में पड़ा रहा । किसी ने बताया तक नहीं। हमने ही 11 मई 2022 को फोन लगाया तो उसने फोन नहीं उठाया। हॉस्टल संचालक को कहा तब उसने कमरा खोल कर देखा तो बताते हैं मेरा बेटा कमरे में  पड़ा है। मेरा तो सब कुछ लुट गया साहब। मैने फीस के रूप में 1.10 लाख रुपए जमा करवाए थे। लेकिन एलन कोचिंग संस्थान ने नहीं लौटाए। ना ही किसी ने मुझसे संपर्क किया। <br /><strong>मृत छात्र रितेश के पिता </strong></p>
<p><strong>इस वर्ष साढ़े पांच माह में ही सात की मौत</strong> <br />अकेले इसी वर्ष के साढ़े पांच माह में ही एलन कोचिंग संस्थान से कोचिंग ले रहे सात छात्र-छात्राओं की मृत्यु हो चुकी है। इनमें से अधिकतर ने तनाव अथवा अन्य कारणों से आत्म हत्या की है। एक छात्र तो अब भी अस्पताल में जीवन और मृत्यु से लड़ रहा है।</p>
<p><strong>कोई जवाब नहीं दिया</strong><br />एलन कोचिंग संस्थान के निदेशक नवीन माहेश्वरी ने फोन रिसीव नहीं किया। वाट्सएप मैसेज भी किया। लेकिन कोई जवाब नहीं दिया।</p>
<p>नियमानुसार सभी कोचिंग संस्थानों को आत्महत्या,संदिग्ध मौत, या बीच में कोचिंग छोडने वाले छात्रों के परिजनों को फीस लौटाने के लिए पाबंद किया हुआ है। लेकिन फिर भी यदि किसी बच्चे के परिजन को फीस नहीं लौटाई है तो इस मामले को दिखवाकर उन्हें फीस लौटाई जाएगी। <br /><strong>- हरि मोहन मीणा, जिला कलक्टर कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Jun 2022 11:45:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> कार्तिक आर्यन ने नहीं बढ़ाई फीस</title>
                                    <description><![CDATA[बॉलीवुड अभिनेता कार्तिक आर्यन का कहना है कि उन्होंने भूल भुलैया 2 की सफलता के बाद अपनी फीस नहीं बढ़ाई है। कार्तिक आर्यन की फिल्म भूल भुलैया 2 बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट हुयी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/movie-fun/karthik-aryan-not-increase-fees-after-film/article-10947"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/465456456.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। बॉलीवुड अभिनेता कार्तिक आर्यन का कहना है कि उन्होंने भूल भुलैया 2 की सफलता के बाद अपनी फीस नहीं बढ़ाई है। कार्तिक आर्यन की फिल्म भूल भुलैया 2 बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट हुयी है। इस फिल्म की सफलता के बाद से चर्चा है कि कार्तिक आर्यन ने अपनी फीस बढ़ाने का फैसला कर लिया है। कार्तिक पहले एक फिल्म के लिए 15 से 20 करोड़ रुपए चार्ज करते थे, लेकिन अब वह एक फिल्म के लिए इससे ज्यादा फीस लेने वाले हैं।</p>
<p>कहा जा रहा है कि कार्तिक ने अपनी फीस को बढ़ाकर 35 से 40 करोड़ रुपए कर दिया है। कार्तिक ने बताया कि उन्होंने अपनी फीस नहीं बढ़ाई है। कार्तिक ने अपने पोस्ट में लिखा कि प्रमोशन हुआ है। इंक्रीमेंट नहीं। <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jun 2022 12:33:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वेबसाइट पर डालनी होगी फीस लौटाने की जानकारी </title>
                                    <description><![CDATA[ शिक्षा नगरी कोटा में विद्यार्थियों को तनाव रहित वातावरण में शिक्षा मिले इसके लिए जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। कोचिंग संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों में बढ़ती आत्महत्या की घटना और फीस पॉलिसी को लेकर जिला प्रशासन अब गंभीर नजर आ रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/information-about-refund-of-fees-will-have-to-be-put-on-the-website/article-10415"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/website-par-fees.jpg" alt=""></a><br /><p> कोटा । कोचिंग संस्थानों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को मानसिक संबल एवं सुरक्षा प्रदान करने के लिए सरकार द्वारा जारी निर्देशों की पालना एवं क्रियान्विति के संबन्ध में मंगलवार को  कलक्टर हरिमोहन मीना की अध्यक्षता में यूआईटी आॅडिटोरियम में कार्यशाला का आयोजन किया गया।  जिसमें अतिरिक्त कलक्टर शहर बृजमोहन बैरवा, उपायुक्त नगर निगम गजेन्द्र सिंह, उप सचिव मोहम्मद ताहिर सहित कोचिंग व हॉस्टल एसोसिएशन के प्रतिनिधि एवं वार्डन मौजूद रहे।  कलक्टर ने कहा कि कोटा की पहचान शैक्षणिक नगरी के रूप में जानी जाती है। उन्होंने कहा कि कोचिंग संस्थान के साथ-साथ हॉस्टल एवं उनमें कार्यरत वार्डन को इस प्रकार से प्रशिक्षित किया जाए कि वे विद्यार्थियों में होने वाले मानसिक तनाव को पहचान सकें। हम सभी को मिलकर समन्वित प्रयास करने होंगे तभी जाकर हम विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य को साकार करने में अपनी सहभागिता निभा सकेंगे। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों का जीवन अमूल्य है और विद्यार्थी ही देश का आने वाला भविष्य है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन ने नवाचार के तौर पर आॅपरेशन सम्बल अभियान के तहत पात्र लोगों को लाभान्वित करने में कोटा प्रथम रहा है।  इस अभियान की सफलता से ही प्रशासन कोटा में विभिन्न प्रदेश से आने वाले विद्यार्थियों को इको फ्रेंडली एवं तनाव मुक्त शै़क्षणिक वातावरण किस प्रकार से मिले इस ओर कदम बढ़ा रहा है। <br /><br /><strong>कोचिंग व हॉस्टलों में शुल्क और रेट लिस्ट की लगानी होगी सूची</strong><br />कलक्टर ने कहा कि  प्रशासन द्वारा विभिन्न कोचिंग एवं हॉस्टल संस्थानों में लिए जाने वाले शुल्क को लेकर रेट कानून के तहत जो प्रावधान हैं उसे अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगाा। उन्होंने कहा कि अपने-अपने संस्थानों में प्रशिक्षित मनोचिकित्सक की नियुक्ति की जाए जिससे यदि कोई विद्यार्थी मानसिक तनाव में हो तो उसकी तुरंत काउंसलिंग की जाए। उसकी शंका व समस्याओं का समाधान किया जाए। <br /><br /><strong>इको फ्रेंडली एवं तनाव मुक्त शै़क्षणिक वातावरण तैयार करें</strong><br />नगर निगम उपायुक्त ने कहा कि जिला प्रशासन, कोचिंग संस्थान एवं हॉस्टल एसोसिएशन मिलकर विद्यार्थियों को शिक्षा के लिए बेहतर वातावरण बनाने के आवश्यकता है। हम सभी को विद्यार्थियों को सही दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना होगा तभी जाकर जिला प्रशासन द्वारा किए जा रहे इस पुनीत अभियान की सार्थकता सिद्ध हो सकेगी। कार्यशाला में मेडिकल कॉलेज के डॉ. विनोद कुमार दंडिया ने पीपीटी के माध्यम से विद्यार्थियों में होने वाले मानसिक तनाव एवं उसके रोकथाम के लिए किए जाने वाले प्रयासों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधि व वार्डन मौजूद रहे। <br /><br /><strong>शीघ्र तैयार होगा एप, हर सप्ताह मॉनिटरिंंंग करेगी आठ सदस्यीय टीम</strong> <br /><br /> कोटा। शिक्षा नगरी कोटा में विद्यार्थियों को तनाव रहित वातावरण में शिक्षा मिले इसके लिए जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। कोचिंग संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों में बढ़ती आत्महत्या की घटना और फीस पॉलिसी को लेकर जिला प्रशासन अब गंभीर नजर आ रहा है। कोचिंग संस्थानों व हॉस्टलों की मनमानी फीस वसूली रोकने, ईजी एजिक्ट पॉलिसी को कढ़ाई से लागू करने के लिए कलक्टर हरिमोहन मीणा सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। कोचिंग व हॉस्टलों के लिए एक गाइड लाइन तैयार की जा रही है जो जून माह से लागू हो जाएगी। कोचिंग संस्थानों व हॉस्टलों पर निगरानी के लिए आठ सदस्यों की टीम हर सप्ताह मॉनिटरिंग कर बच्चों व अभिभावकों की समस्याओं का समाधान करेगी। संस्थानों को फीस लौटाने संबंधी जानकारी अपनी वेब साइट पर डालनी होगी जिससे पारदर्शिता बनी रहे। <br /><br /><strong>नवज्योति ने जिला कलक्टर हरिमोहन मीणा से विस्तार में बातचीत की, प्रस्तुत हैं इसके अंश-</strong><br /><br /><strong>-    ईजी एजिक्ट पॉलिसी की पालना सही से हो रही इसका आमजन को कैसे पता चलेगा ?</strong><br />-      ईजी एजिक्ट पॉलिसी की पालना और फीस लौटाने में पारदर्शिता बनाने के लिए हर कोचिंग संस्थान और हॉस्टल में फीस शुल्क की सूची लगवाई जाएगी। जिससे मनमानी फीस पर अंकुश लगेगा। साथ ही किसी कारणवश विद्यार्थी बीच में कोचिंग और हॉस्टल छोड़ता है तो उसकी अमानत राशि लौटाने के नियम भी बोर्ड पर डिसप्ले करने होंगे। <br /><br /><strong>-     फीस नहीं लौटाने की दशा में अभिभावक कहां शिकायत करें ?</strong><br />-    कोचिंग व हॉस्टलों की मनमानी रोकने और तनाव रहित वातावरण तैयार करने के लिए हर कोचिंग व हॉस्टल में प्रशासन के हेल्प लाइन नंबर और ई-मेल आइडी का बोर्ड लगाया जाएगा। ताकि अभिभावक और बच्चे शिकायत दर्ज करा सकेंगे। हर सप्ताह प्रशासन की ओर से गठित टीम मॉनिटरिंग करेगी और मेल पर आई शिकायतों के निस्तारण पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी।<br /><br /><strong>-      कोचिंग संस्थानों द्वारा निस्तारण की गई समस्याओं की कहां मिलेगी जानकारी?</strong><br />-     कोचिंग संस्थानों को अभिभावकों की फीस और अन्य समस्याओं के निस्तारण की जानकारी अपनी वेबसाइट पर डालनी होगी। इसके  जरिये की गई कार्रवाई का सबको पता चल सकेगा और इस मामले में पारदर्शिता बनी रहेगी। इसके अलावा फीस लौटाने और अन्य शिकायतों के निस्तारण और पेडिंग की जानकारी संस्थानों के एप और वेबसाइट पर डालनी होगी। <br /><br /><strong>-     नियमों की पालना सही से हो रही है या नहीं इसके लिए क्या चैक पॉइंट हैं ?</strong><br />-     एडीएम सिटी के नेतृत्व में आठ सदस्यों की टीम गठित की है। हमारी हेल्प लाइन के नंबर और ई मेल आइडी के बोर्ड लगाना शुरू हो गया है। एडीएम सिटी मॉनिटरिंग कर रहे हैं। किन- किन संस्थानों में बोर्ड लगा लिए, किसने नहीं लगाए उनको पाबंद किया जाएगा। जून के पहले सप्ताह से गाइड लाइन की पूरी पालना होना शुरू हो जाएगा। <br /><br /><strong>-    आत्महत्या कर चुके विद्यार्थियों की फीस लौटाने को लेकर क्या नियम बनाए हैं?</strong> <br />-      कोचिंग व हॉस्टलों में फीस ईजी एजिक्ट पॉलिसी तैयार की है। जिसमें कोटा के किसी भी कोचिंग संस्थान में अध्ययनरत विद्यार्थियों को गाइडलाइन के अनुसार फीस रिफण्ड करते समय मापदंडों को आधार माना जाएगा। जिनमें यदि विद्यार्थी के परिवार में माता-पिता अथवा निजी संबंधी की मृत्यु हो जाने या गम्भीर रोग से ग्रसित होने जाने पर, यदि विद्यार्थी कोचिंग प्राप्त करने के दौरान मानसिक तनाव में आ जाता है तो मेडिकल रिपोर्ट या कोचिंग के मनोचिकित्सक की रिपोर्ट के आधार पर कोचिंग छोड़ने पर फीस रिफण्ड की जा सकेगी। हाल में एलन के  विद्यार्थी रितेश द्वारा आत्महत्या करने के बाद उसकी फीस रिफंड हुई या नहीं इसकी जानकारी ली जाएगी। नियमानुसार उसकी फीस रिफंड करवाई जाएगी। <br /><br /><strong>-      विद्यार्थियों को तनाव रहित वातावरण में शिक्षा मिल रही है इसकी मॉनिटरिंग कैसे होगी?</strong> <br />-      कोचिंग व हॉस्टलों को हर माह मनोरंजन और खेल गतिविधियां करने के लिए पाबंद किया है। एक मनोचिकित्सक नियुक्त करने का भी गाइड लाइन में नियम बनाया है। तनाव वाले विद्यार्थियों की हर सप्ताह काउसलिंग करने लिए कहा है। इन नियमों की पालना के लिए प्रशासन की टीम कोचिंग व हॉस्टलों का औचक निरीक्षण करेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 May 2022 16:52:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छात्रों के शुल्क में नहीं की किसी भी तरह की वृद्धि </title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान विश्वविद्यालय सिंडिकेट की बैठक हुई। कुलपति प्रो. राजीव जैन की अध्यक्षता में बैठक में वित्तीय वर्ष के लिए 343 करोड़ 93 लाख रुपए की आय एवं 423 करोड़ 83 लाख रुपए के व्यय अनुमान के प्रस्तावों को सिंडिकेट ने अनुमोदित किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world-of-education/fees-not-increase-of-student-in-meeting/article-9187"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/ru-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय सिंडिकेट की बैठक हुई। कुलपति प्रो. राजीव जैन की अध्यक्षता में बैठक में वित्तीय वर्ष के लिए 343 करोड़ 93 लाख रुपए की आय एवं 423 करोड़ 83 लाख रुपए के व्यय अनुमान के प्रस्तावों को सिंडिकेट ने अनुमोदित किया। 80 करोड़ रुपए के नुकसान के साथ अनुमोदन किया। आरयू में पिछले दो दशक से भी अधिक साल से नुकसान के साथ ही बजट पारित हो रहा है।  </p>
<p><strong>कैम्पस में खुलेगा ई-मित्र</strong><br />बजट प्रस्तावों के अनुमोदन के साथ विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों की सुविधा के लिए एक ई-मित्र कियोस्क खोलने की भी सिद्धांतत: मंजूरी दी है। बैठक में यह भी बताया कि पिछले दो वर्षों में कोरोना के प्रभावों के कारण छात्रों के शुल्क में किसी भी तरह की वृद्धि नहीं की। विश्वविद्यालय ने अपने खर्चों को भी कम करने का प्रयास किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 May 2022 10:09:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कमर्शियल/सरकारी उपयोगकर्ताओं से ट्विटर ले सकता है शुल्क</title>
                                    <description><![CDATA[ट्विटर वाणिज्यिक, सरकारी यूजर्स से शुल्क ले सकता है: मस्क]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/twitter-may-charge-fees-from-commercial-government-users/article-9106"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/elon-musk.jpg" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। टेस्ला के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) एलन मस्क ने कहा कि एक बार जब वह आधिकारिक तौर पर ट्विटर का अधिग्रहण कर लेते हैं, तो यह सेवा वाणिज्यिक और सरकारी उपयोगकर्ताओं के लिए थोड़ी महंगी हो सकती है। मस्क ने मंगलवार को ट्विटर पर लिखा,''कैजुअल यूजर्स के लिए ट्विटर हमेशा फ्री रहेगा, लेकिन कमर्शियल/सरकारी उपयोगकर्ताओं के लिए यह थोड़ी सी कीमती हो सकती है।''<br /><br />वॉल स्ट्रीट जर्नल ने बताया कि मस्क ने निवेशकों से कहा कि वह लगभग तीन साल बाद फिर से ट्विटर को सार्वजनिक करने की योजना बना रहे हैं। ट्विटर ने पिछले हफ्ते कहा था कि वह मस्क द्वारा 44 अरब डॉलर के सौदे में अधिग्रहण करने के लिए सहमत है।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 May 2022 13:54:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>निजी स्कूलों के लिए करेगी नियामक प्राधिकरण का गठन </title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश के निजी स्कूलों पर अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। सरकार नई शिक्षा नीति के तहत विद्यालय नियामक प्राधिकरण का गठन करेगी, जिससे स्कूल शिक्षा और कोचिंग संस्थानों में फीस निर्धारण एवं अन्य समस्याओं पर नजर रखी जा सके।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world-of-education/jaipur-govt-will-constitute-regulatory-authority-for-schools/article-8763"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/5466465464.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश के निजी स्कूलों पर अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। सरकार नई शिक्षा नीति के तहत विद्यालय नियामक प्राधिकरण का गठन करेगी, जिससे स्कूल शिक्षा और कोचिंग संस्थानों में फीस निर्धारण एवं अन्य समस्याओं पर नजर रखी जा सके। यह नियामक सरकार, शिक्षण संस्थानों और अभिभावक सहित अन्य सभी  के हितों के संबंध में निर्णय करेगा। नई शिक्षा पॉलिसी की पालना में अन्य राज्यों की भांति राजस्थान में भी विद्यालय नियामक प्राधिकरण का गठन होने के बाद निजी स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों के बीच टकराव रुकेगा।</p>
<p><strong>फीस एक्ट-2016 लागू करे सरकार</strong> <br />अभिभावक संघ के अभिषेक जैन ने कहा कि सरकार को निजी स्कूलों की फीस बढ़ोतरी वाला फीस एक्ट-2016 तत्काल लागू करना चाहिए। कोरोना के चलते अगले पांच साल तक फीस को नहीं बढ़ाने जैसे सुझाव भी सरकार को दिए गए हैं। उधर शिक्षा मंत्री डॉ. बीडी कल्ला ने कहा कि मुख्यमंत्री स्तर पर विद्यालय नियामक प्राधिकरण के गठन को लेकर एक्सरसाइज जारी है।</p>
<p><strong>फैक्ट फाइल</strong> <br />- राज्य में 9वीं से 12वीं तक के निजी स्कूल 16180 और कुल स्टूडेंट्स 25 लाख<br />- प्राइवेट व सरकारी स्कूलों के कुल छात्रों की संख्या करीब 1.65 करोड़ हैं।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 Apr 2022 11:08:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>अब इंजीनियरिंग कॉलेज नहीं वसूल पाएंगे मनमानी फीस </title>
                                    <description><![CDATA[इंजीनियरिंग कॉलेज अब बीटेक और बीई में मनमानी फीस नहीं वसूल पाएंगे। पहली बार इंजीनियरिंग, डिजाइन, आर्ट एंड क्राफ्ट प्रोग्राम में स्नातक और स्नातकोत्तर प्रोग्राम के लिए न्यूनतम और अधिकतम फीस का स्लैब निर्धारित किया है। इसमें पहले वर्ष इंजीनियरिंग प्रोग्राम की फीस करीब 79 हजार रुपए से लेकर 1.89 लाख रुपए सालाना निर्धारित की गई है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/-now-engineering-colleges-will-not-be-able-to-charge-arbitrary-fees/article-7741"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/university.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। इंजीनियरिंग कॉलेज अब बीटेक और बीई में मनमानी फीस नहीं वसूल पाएंगे। पहली बार इंजीनियरिंग, डिजाइन, आर्ट एंड क्राफ्ट प्रोग्राम में स्नातक और स्नातकोत्तर प्रोग्राम के लिए न्यूनतम और अधिकतम फीस का स्लैब निर्धारित किया है। इसमें पहले वर्ष इंजीनियरिंग प्रोग्राम की फीस करीब 79 हजार रुपए से लेकर 1.89 लाख रुपए सालाना निर्धारित की गई है। तकनीकी कॉलेज सुविधाओं (कंप्यूटर लैब, शिक्षक, लाइब्रेरी) और शहर ( मेट्रो सिटी, ए, बी, सी श्रेणी) के आधार पर फीस निर्धारित कर सकेंगे। खास बात यह है कि दूसरे, तीसरे  चौथे वर्ष कॉलेज पहले वर्ष में लागू फीस में हर वर्ष पांच फीसदी तक की ही बढ़ोतरी कर सकेंगे। शैक्षणिक सत्र 2022-23 से इंजीनियरिंग, डिजाइन, एप्लाइड आर्ट एंड क्राफ्ट प्रोग्राम में यह फीस सभी सरकारी और निजी कॉलेजों में लागू होगी।<br /><br />अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) ने जस्टिस श्रीकृष्णन कमेटी और प्रो. मनोज कुमार तिवारी कमेटी की सिफारिशों और रिव्यू के आधार पर तैयार रिपोर्ट को फरवरी में आयोजित काउंसिल बैठक में पास कर दिया है। इसके बाद रिपोर्ट को मार्च के पहले हफ्ते  में शिक्षा मंत्रालय की मंजूरी के लिए भेजा है। शिक्षा मंत्रालय की मंजूरी के साथ ही एआईसीटीई आगामी शैक्षणिक सत्र से इसे लागू करने के लिए अधिसूचना जारी करेगा।<br /><br /><strong>हर साल पांच फीसदी की बढ़ोतरी को मंजूरी</strong><br />तकनीकी कॉलेज हर साल पांच फीसदी तक फीस में बढ़ोतरी कर सकेंगे। यह फीस बढ़ोतरी सभी प्रोग्राम में दूसरे वर्ष से अंतिम वर्ष तक के प्रोग्राम में लागू होगी। पहले वर्ष में कॉलेज सुविधाओं और शहर की श्रेणी के आधार पर जितनी फीस निर्धारित करेंगे, उसके आधार पर आगे बढ़ोतरी कर सकेंगे। तकनीकी शिक्षण संस्थान सिर्फ चार वर्गों में ही फीस ले सकते हैं, जिसमें ट्यूशन, डवलपमेंट, एग्जामिनेशन और अन्य (ट्यूशन फीस का एक फीसदी या एक हजार रुपए से अधिक न हो) शामिल हैं। इसमें संस्थान को इन चार वर्गों के फीस की जानकारी अपनी अधिकारिक वेबसाइट पर भी अपलोड करना होगा। इस रिपोर्ट में ड्यूल डिग्री व इंटीग्रेटिड प्रोग्राम की अवधि की फीस भी निर्धारित है।<br /><br /><strong>आर्किटेक्चर व फॉर्मेंसी की फीस उनकी काउंसिल करेगी तय</strong><br />आर्किटेक्चर और  फार्मेंसी कॉलेज बेशक एआईसीटीई के अधीन हैं, लेकिन उसकी फीस निर्धारित नहीं करेगी। दरअसल, आर्किटेक्चर प्रोग्राम में फीस, पाठ्यक्रम, परीक्षा आदि के सभी फैसले काउंसिल आॅफ आर्किटेक्चर करेगी। ऐसे ही फार्मेसी कॉलेज की भी फार्मेसी काउंसिल आॅफ इंडिया तय करेगी।<br /><br /><strong>फीस तय करना राज्यों का अधिकार</strong><br />देशभर के सभी तकनीकी कॉलेजों में कोर्स, पाठ्यक्रम, परीक्षा पैटर्न व सीट आदि के लिए नियम एआईसीटीई ही तय करता है। तकनीकी उच्च शिक्षण संस्थान फीस कितनी रखेंगे इसका फैसला सभी राज्यों के उच्च शिक्षा विभाग  प्रदेश सरकार की कमेटी करती है। एआईसीटीई इस फीस निर्धारित रिपोर्ट राज्यों को साझा करके इसे लागू करने का आग्रह करेगी, लेकिन राज्य के पास अधिकार होगा कि वे इसे मानें या न मानें।<br /><br /><strong>छात्रों व अभिभावकों को मिलेगी राहत</strong><br />अधिसूचना के बाद छात्रों और अभिभावकों को सबसे अधिक राहत मिलेगी। दरअसल, अभी 50 हजार रुपए से लेकर दस से 15 लाख रुपए सालाना फीस वसूली जाती है। हर राज्य में सरकारी और निजी कॉलेजों की फीस में अंतर है। इसी अंतर के चलते अच्छे और बेहतरीन छात्र इंजीनियरिंग की बजाय अन्य कोर्स में दाखिला लेने को मजबूर होते हैं। नया नियम लागू होने से अभिभावकों को पहले से पता रहेगा कि फीस कितनी, किस साल देनी है। निजी कॉलेज मनमानी नहीं कर पाएंगे।<br /><br /><strong>पहले वर्ष के लिए फीस का स्लैब:</strong><br />प्रोग्राम- कोर्स- न्यूनतम और अधिकतम फीस (फीस लगभग सालाना रुपए में)<br />यूजी-इंजीनियरिंग- 79, 000-1.89 लाख<br />पीजी- इंजीनियरिंग-1.4?1 लाख -3.03 लाख<br />डिप्लोमा-इंजीनियरिंग- 67,000- 1.40 लाख<br />यूजी- डिजाइन- 94,000-2.25 लाख<br />पीजी -डिजाइन- 1.55 लाख- 3.14 लाख<br />यूजी- एप्लाइड आर्ट एंड क्राफ्ट- 1.10 लाख- 2.53 लाख<br />पीजी-एप्लाइड आर्ट एंड क्राफ्ट- 1.48 लाख- 2.25 लाख<br />डिप्लोमा- एप्लाइड आर्ट एंडक्राफ्ट- 81,000- 1.64 लाख</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 Apr 2022 15:18:38 +0530</pubDate>
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                <title>नीट पीजी काउंसलिंग में गड़बड़ी, एक सीट दो स्टूडेंट्स को अलॉट की</title>
                                    <description><![CDATA[हॉस्पिटल प्रशासन असमंजस में है कि आखिर किस स्टूडेंट को एडमिशन दें और किसे नहीं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/disturbance-in-neet-pg-counselling--one-seat-allotted-to-two-students--both-the-students-deposited-the-fees--jaipuria-hospital-administration-and-counseling-board-are-blaming-each-other/article-5508"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/neet.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। नीट पीजी काउंसलिंग में एक बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। काउंसलिंग में एक ही सीट दो स्टूडेंट्स को अलॉट कर दी गई। मामले में जयपुरिया अस्पताल प्रशासन और राजस्थान नीट पीजी एडमिशन काउंसलिंग बोर्ड के सदस्य अब एक दूसरे पर गलती का ठीकरा फोड़ रहे हैं। हॉस्पिटल प्रशासन असमंजस में है कि आखिर किस स्टूडेंट को एडमिशन दें और किसे नहीं। <br /><br /><strong>ये है मामला</strong><br />दरअसल ऑनलाइन काउंसलिंग के पहले राउंड में जयपुरिया हॉस्पिटल की जनरल मेडिसिन की सीट डॉ. ललित धाकड़ को अलॉट की गई और उन्होंने अपनी फीस के साथ फिजिकल रिपोर्ट भी दे दी, लेकिन ज्वाइनिंग नहीं की। डॉ. धाकड़ सेकंड राउंड का इंतजार करने लगे। जब दो मार्च को सेकंड राउंड की ऑफलाइन काउंसलिंग हुई तो इसी सीट को वैकेंट दिखाते हुए डॉ. साबीर मोहम्मद को अलॉट कर दी गई। उन्होंने भी तीन मार्च को फीस जमा करा दी, लेकिन डॉ. साबीर जयपुरिया हॉस्पिटल में जब रिपोर्टिंग देने पहुंचे तो उन्हें ज्वाइनिंग देने से मना कर दिया गया। इसके पीछे तर्क दिया गया कि ये सीट पहले ही डॉ. धाकड़ को अलॉट है। इस मामले में जब डॉ. साबीर ने नीट पीजी एडमिशन काउंसलिंग के मेम्बर्स से संपर्क कर उन्हें लिखित में दिया तो बोर्ड ने कहा अब कुछ नहीं हो सकता। ये तकनीकी गलती थी। अब तुम्हारी सीट कैंसिल हो जाएगी। वहीं डॉ. साबीर का कहना है कि वे ओबीसी मेरिट में 175वें नंबर पर हैं, जबकि ओवरऑल रैंकिंग में 420 नंबर पर हैं। <br /><br /><strong>अधीक्षक ने पत्र लिखकर मांगा स्पष्टीकरण</strong><br />एक सीट पर जब दो मेडिकल स्टूडेंट ज्वाइनिंग करने पहुंचे तो जयपुरिया हॉस्पिटल प्रशासन भी दुविधा में पड़ गया। हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉ. अशोक गुप्ता ने चेयरमैन नीट पीजी एडमिशन काउंसलिंग को पत्र लिखकर इस मामले में दिशा निर्देश मांगे है कि किस स्टूडेंट को ज्वाइनिंग दे और किसे नहीं, क्योंकि दोनों ही स्टूडेंट को स्टेट कोटे से सीट अलॉट हुई है। वहीं राजस्थान नीट पीजी काउंसलिंग बोर्ड के चेयरमैन डॉ. संदीप टंडन का कहना है कि इस पूरे मामले में बोर्ड की कोई गलती नहीं है। जयपुरिया अस्पताल प्रशासन इसके लिए जिम्मेदार है, फिर भी मैनें राज्य सरकार को पत्र लिखकर पूरे मामले से अवगत करा दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 05 Mar 2022 10:46:24 +0530</pubDate>
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