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                <title>ud tax - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>असर खबर का : शुभम लॉजिस्टिक्स को किया सीज तो जमा कराया बकाया 25 लाख टैक्स</title>
                                    <description><![CDATA[टैक्स जमा नहीं करवाने का मामला दैनिक नवज्योति ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news--shubham-logistics-seized--then-paid-the-outstanding-25-lakh-tax/article-142109"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)-(6)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगरीय विकास कर(यूडी टैक्स) के बकायादारों के खिलाफ टैक्स वसूली को लेकर नगर निगम एक्शन मोड में आ गया है। निगम की टीम ने गुरूवार सुबह यूडी टैक्स जमा नहीं करवाने पर कैथून रोड स्थित एक वेयरहाउस को सीज कर दिया। शाम होते-होते वेयरहाउस संचालक ने निगम में 2009 से बकाया चल रही 25 लाख से अधिक की राशि जमा करवा दी। निगम आयुक्त ओमप्रकाश मेहरा ने बताया कि कैथून रोड पर कोटा क्लब के सामने स्थित शुभम लॉजिस्टिक्स पर वर्ष 2009 से नगरीय विकास कर बकाया चल रहा था। निगम द्वारा वेयरहाउस संचालक को यूडी टेक्स जमा करवाने के लिए कई बार नोटिस देने के साथ व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर भी दिया गया था, परन्तु उसने यूडी टेक्स जमा नहीं करवाया।</p>
<p><strong>व्यवसायिक गतिविधियां हो रही थी संचालित</strong><br />इस वेयरहाउस में व्यवसायिक गतिविधियां भी की जा रही थीं। इस पर गुरूवार सुबह उपायुक्त राजस्व धीरज कुमार सोनी के नेतृत्व में गठित निगम अधिकारियों की टीम ने वेयरहाउस को सीज कर दिया गया। इसके बाद वेयरहाउस संचालक निगम कार्यालय पहुंच गया और 2009 से बकाया चल रही 25 लाख 29 हजार 574 रूपए की कर की राशि जमा करवा दी। टेक्स जमा होने के बाद सीजिंग को खोल दिया गया।</p>
<p><strong>कई अन्य सम्पत्तियां चिन्हित</strong><br />आयुक्त ओमप्रकाश मेहरा ने बताया कि निगम ने यूडी टेक्स के बकाएदारों की सूची तैयार कर ली है। इन सभी को नोटिस भी दिए जा चुके हैं। ऐसी कई सम्पत्तियों को चिन्हित भी किया गया है जिन पर लम्बे समय से मोटा यूडी टेक्स बकाया चल रहा है। निगम आने वाले दिनों में इनको भी सीज करने की कार्रवाई करेगी।</p>
<p><strong>छूट का लाभ लेकर जमा करवाएं यूडी टेक्स</strong><br />आयुक्त ओमप्रकाश मेहरा ने बताया कि 2700 वर्गफीट से अधिक के आवासीय भवन व प्लॉट और 900 वर्गफीट से अधिक वाणिज्यिक भवन व प्लॉट नगरीय विकास कर के दायरे में आते हैं। नगरीय विकास कर भूखण्ड स्वामी के स्वनिर्धारण पर आधारित है। इस कारण कोई भी व्यक्ति नोटिस नहीं मिलने की बात कहकर कर जमा करवाने से बच नहीं सकता।</p>
<p><strong>31 मार्च तक छूट का प्रावधान</strong><br />वर्तमान में राज्य सरकार के आदेशानुसार पेनल्टी पर 100 प्रतिशत की छूट व वर्ष 2007-08 से 2010-11 तक मूल कर राशि पर 50 प्रतिशत की छूट का लाभ दिया जा रहा है। आयुक्त ने अपील की कि जिन भी व्यक्तियों और संस्थाओं की सम्पत्ति यूडी टैक्स के दायरे में आती है, वह अविलम्ब अपना यूडी टैक्स जमा करवाएं। राज्य सरकार की ओर से बकाया पर ब्जाय पेनल्टी में छूट का प्रावधान 31 मार्च तक किया हुआ है।</p>
<p><strong>नवज्योति ने किया था समाचार प्रकाशित</strong><br />गौरतलब है कि नगरीय विकास कर के दायरे में आने वाली सम्पत्तियों व उनके द्वारा टैक्स जमा नहीं करवाने का मामला दैनिक नवज्योति ने प्रमुखता से प्रकाशित किया। समाचार पत्र में ज्ञ फरवरी के अंक में पेज 7 पर'यूडी टैक्स:ढाई हजार प्रोपर्टी कर के दायरे में बकाया कर जमा नहीं करवाने वालों पर अब होगी सीजिंग की कार्रवाई शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें निगम द्वारा शीघ्र ही एक् शन करने की जानकारी दी थी। नवज्योति में समाचार प्रकाशित होते ही निगम टीम ने गुरुवार को पहले ही दिन कार्रवाई करते हुए एक वेयर हाउस को सीज किया। जिससे निगम में 25 लाख रुपए टैक्स जमा हो गया।</p>
<p><strong>ये अधिकारी रहे निगम टीम में शामिल</strong><br />सीजिंग की कार्रवाई के दौरान उपायुक्त राजस्व धीरज कुमार सोनी, राजस्व अधिकारी, महावीर सिंह सिसोदिया, राजस्व अधिकारी विजय अग्निहोत्री, सहायक अभियन्ता व अतिक्रमण प्रभारी तौसिफ खान, विद्युत अभियन्ता लक्ष्मीनारायण बडारिया, सहायक राजस्व निरीक्षक, रियाजुद्दीन, संवेदक फर्म एसएसपीएल के प्रतिनिधि भुवनेश गोस्वामी उपस्थित रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Feb 2026 12:34:02 +0530</pubDate>
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                <title>यूडी टैक्स: ढाई हजार प्रोपर्टी कर के दायरे में, नगर निगम ने दिए नोटिस</title>
                                    <description><![CDATA[वर्तमान में यूडी टैक्स का लक्ष्य करीब 18 करोड़ रुपए उसमें से अभी 50 फीसदी से ही अधिक लक्ष्य प्राप्त हुआ ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/ud-tax--2-500-properties-under-the-tax-net--municipal-corporation-issues-notices/article-142042"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)-(4)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम की ओर से हर साल वसूल किया जाने वाला नगरीय विकास कर(यूडी टैक्स) समय पर जमा नहीं करवाने वालों पर अब शिकंजा कसा जाएगा। निगम द्वारा बड़े बकायादारों को नोटिस देने के बाद अब उनके प्रतिष्ठान की सीजिंग की कार्रवाई की जाएगी। पूर्व में जब कोटा में दो नगर निगम उत्तर व दक्षिण थे। उस समय दोनों नगर निगम की बजट बोर्ड बैठकों में अन्य मदों के साथ ही नगरीय विकास कर के भी बजट लक्ष्य तय किए गए थे। हालांकि बोर्ड का कार्यकाल समाप्त होने के बाद फिर से नगर निगम एक हो गया है। ऐसे में वर्तमान में नगरीय विकास कर का लक्ष्य करीब 18 करोड़ रुपए हो गया है। लेकिन उसमें से अभी 50 फीसदी से ही अधिक लक्ष्य प्राप्त हुआ है।</p>
<p><strong>छूट का इंतजार</strong><br />राज्य सरकार द्वारा हर साल टैक्स जमा नहीं करवाने वालों को राहत देने के लिए ब्याज पेनल्टी में छूट का प्रावधान करती है। जिससे अधिक से अधिक बकायादार बिना ब्याज पेनल्टी के टैक्स जमा करवा सके। हालाकि फरवरी का महीना शुरू हो गया है। अभी तक सरकार ने छूट की घोषणा नहीं की है। जबकि बड़े बकायादार सरकार की छूट का इंतजार कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार वर्तमान वित्त वर्ष में कर जमा करवाने वालों के लिए अभी समय है। लेकिन जो कर दाता बरसों से बकाया कर जमा नहीं करवा रहे हैं उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p><strong>वित्तीय वर्ष समाप्त होने में दो माह का समय</strong><br />वित्तीय वर्ष 2025-26 के समाप्त होने में अब मात्र दो माह का ही समय शेष है। 31 मार्च को वित्त वर्ष समाप्त हो जाएगा। ऐसे में यूडी टैक्स वसूली के लक्ष्य को इन शेष दो माह की अवधि में ही पूरा करना है। जबकि हालत यह है कि अभी भी बड़ी संख्या में ऐसे कर दाता हैं जिन्होंने टैक्स जमा नहीं कराया है। साथ ही कई कर दाता तो ऐसे हैं जो पिछले काफी समय से टैक्स जमा नहीं करवा रहे हैं। उनके खिलाफ नगर निगम अब सख्त कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है।</p>
<p><strong>दक्षिण में 15 सौ व उत्तर में एक हजार </strong><br />नगर निगम की ओर से नगरीय कर की वसूली निजी फर्म के माध्यम से की जा रही है। फर्म द्वारा किए गए सर्वे के अनुसार शहर में करीब 25 सौ प्रोपर्टी ऐसी हैं जो यूडी टैक्स के दायरे में आती हैं। जिनमें से दक्षिण में 15 सौ व उत्तर में एक हजार हैं। जिनमें से करीब एक चौथाई ने ही कर जमा कराया है।</p>
<p><strong>टैक्स जमा नहीं करवाने वालों पर हो सख्ती</strong><br />लोगों का कहना है कि नगरीय कर के दायरे में आने वाले प्रतिष्ठानों को समय पर टैक्स जमा करवाना चाहिए। कर जमा नहीं करवाने वालों पर सख्ती होनी चाहिए। नयापुरा निवासी महेश खत्री का कहना है सरकार ऐसे लोगों को पेनल्टी व सजा देने की जगह टैक्स जमा नहीं करवाने वालों को हर साल छूट का लाभ देकर उपकृत करती है। ऐसा करना गलत है। जबकि समय पर टैक्स जमा करवाने वालों को कोई लाभ नहीं दिया जाता। दादाबाड़ी निवासी रामबाबू नागर का कहना है कि व्यवसायिक प्रतिष्ठान जब कमाई करते हैं तो उन्हें टैक्स भी समय पर देना चाहिए। यह उनकी जिम्मेदारी है। लेकिन कई कर दाता कार्रवाई का डर नहीं होने से टैक्स जमा नहीं करवाते हैं। जिससे कर जमा करवाने वालों को नुकसान होता है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />वित्त वर्ष समाप्त होने में अब मात्र दो माह का भी समय शेष नहीं है। ऐसे में नगरीय विकास कर जमा नहीं करवाने वाले सभी कर दाताओं को धारा 131 के नोटिस दो से तीन बार दिए जा चुके हैं। उसके बाद भी विशेष रूप से बड़े बकायादारों द्वारा टैक्स जमा नहीं करवाने वालों पर अब निगम सख्ती करेगा। ऐसे प्रतिष्ठानों पर अब सीजिंग की कार्रवाई की जाएगी। यह कार्रवाई शीघ्र ही चालू की जाएगी।<br /><strong>- धीरज सोनी, उपायुक्त राजस्व, नगर निगम कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 15:24:29 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>यूडी टैक्स बकायादारों पर निगम की सख्ती, 10 संपत्तियां कुर्क</title>
                                    <description><![CDATA[हवामहल आमेर जोन में नगरीय विकास कर नहीं जमा कराने पर 6 संपत्तियों को कुर्क किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/corporation-strict-on-ud-tax-defaulters-10-properties-attached/article-139508"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/6622-copy42.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। नगरीय विकास कर वसूलने के लिए नगर निगम ने बकायादारों पर सख्त कार्रवाई शुरू की है। कार्रवाई के दौरान दस संपत्तियों को कुर्क किया गया जिसमें एक संपत्तिधारक के मौके पर राशि जमा करने से उसे कुर्की से मुक्त किया। निगम आयुक्त डॉ. गौरव सैनी के निर्देश पर जोन स्तर पर नगरीय विकास कर वसूलने के वृहद प्रयास किए जा रहे हैं। उपायुक्त विद्याधर नगर जोन करणी सिंह नेतृत्व में मंगलवार को 4 सम्पत्तियों के नगरीय विकास कर बकाया होने पर कुर्की की कारवाई की गई। एक सम्पत्तिधारक द्वारा मौके पर ही राज्य सरकार द्वारा वर्तमान में ब्याज पेनल्टी पर देय छूट का लाभ लेते हुए संपत्ति पर बकाया नगरीय विकास कर राशि निगम कोष में जमा करवाई गई। इसके बाद संपत्ति को कुर्की से मुक्त कर दिया और शेष 3 संपत्तियों को कुर्क किया गया।</p>
<p>इसके साथ ही हवामहल आमेर जोन में नगरीय विकास कर नहीं जमा कराने पर 6 संपत्तियों को कुर्क किया गया। हवामहल आमेर जोन उपायुक्त सीमा चौधरी ने बताया कि नगरीय विकास कर का समय पर भुगतान नहीं करने वालों पर लगातार सख्ती की जा रही है। उन्होंने बताया कि कार्रवाई में कार्यवाहक राजस्व अधिकारी पार्वती सोनी, राजस्व निरीक्षक मोहम्मद कासिम और सतर्कता शाखा मुख्यालय की टीम ने 6 संपत्तियों को कुर्क किया। उन्होंने बताया कि इन बकायादारों पर 19 लाख 51 हजार 197 रुपए की राशि बकाया चल रही है। संपत्तिधारकों को बार बार नोटिस देने के बावजूद कर बकाया राशि जमा नहीं कराने पर संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई की गई। उन्होंने बातया कि नगरीय विकास कर वसूली में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। बकायादारों के खिलाफ  आगे भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। निगम ने सभी संपत्ति मालिकों से समय पर कर जमा कराने की अपील की है, अन्यथा कुर्की जैसी कार्रवाई के लिए तैयार रहें।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 14 Jan 2026 10:58:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>15 से 27 फीसदी हॉस्टलों व मैरिज गार्डनों का ही जमा हुआ यूडी टैक्स</title>
                                    <description><![CDATA[नोटिस के बाद भी टैक्स जमा नहीं करवाया जाएगा पर संपत्ति होगी सीज। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/only-15-to-27-percent-of-hostels-and-marriage-gardens-have-paid-ud-tax/article-136253"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/etws-(1200-x-600-px)-(4)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। वर्तमान वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही समाप्त होने को है। लेकिन अभी भी शहर में बड़ी संख्या में ऐसी सम्पत्तियां हैं जिनका नगरीय विकास कर(यूडी टैक्स) जमा नहीं हुआ है। विशेष रूप से मैरिज गार्डन व हॉस्टलों का काफी टैक्स बकाया है। ऐसे में अब नगर निगम की ओर से शहर में बड़े बकायादारों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।<br />नगर निगम की ओर से हर साल आवासीय व व्यवसायिक सम्पत्तियों से वसूल किया जाने वाला नगरीय विकास कर(यूडी टैक्स) जमा नहीं करवाने वालों पर नगर निगम सख्त कार्रवाई करेगा। विशेष रूप से बड़े बकायादारों पर सख्ती की जाएगी। यह कार्रवाई आने वाले दिनों में होगी।राज्य सरकार की गाइड लाइन के अनुसार निर्धारित मापदंड के तहत आवासीय, व्यवसायिक, संस्थानिक व इंडस्ट्रीयल सम्पत्तियों से नगरीय कर हर साल वसूल किया जाता है। इस वार्षिक टैक्स की अधिक से अधिक वसूली हो सके।</p>
<p> इसके लिए सरकार की ओर से अप्रैल से जून तक पहली तिमाही में टैक्स जमा करवाने वालों को दस फीसदी की और दूसरी तिमाही जुलाई से सितम्बर तक चालू वित्त वर्ष का टैक्स जमा करवाने वालों को पांच फीसदी की छूट का प्रावधान किया हुआ है। जबकि तीसरी व चौथी तिमाही में किसी तरह की छूट का कोई प्रावधान नहीं है। वरन् टैक्स जमा नहीं करवाने वालों को नगर निगम की ओर से नोटिस जारी किए जाते हैं। एक या दो नोटिस के बाद भी टैक्स जमा नहीं करवाने वालों पर निगम की ओर से नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाती है।हालत यह है कि पूर्व में कोटा उत्तर व दक्षिण निगम में नगरीय विकास कर के अलग-अलग उत्तर में 8 और दक्षिण में 10 करोड़ का लक्ष्य तय किया गया था। लेकिन तीसरी तिमाही समाप्त होने को है अभी तक तो करीब आधा ही टैक्स जमा हुआ है। हालत यह है कि हॉस्टल, मैरिज गार्डन, बिल्डरों के अलावा शोरूम व व्यवसायिक प्रतिष्ठानों पर सबसे अधिक टैक्स बकाया है।</p>
<p><strong>करीब 9.50 करोड़ टैक्स जमा</strong><br />नगर निगम से प्राप्त जानकारी के अनुसार दोनों निगमों का यूडी टैक्स लक्ष्य करीब 18 करोड़ रुपए है। जिसमें से करीब 9.50 करोड़ रुपए ही टैक्स जमा हो सका है। जानकारी के अनुसार उत्तर क्षेत्र में करीब 4 करोड़ रुपए और दक्षिण क्षेत्र में करीब 5.50 करोड़ रुपए टैक्स जमा हुआ है।</p>
<p><strong>22 सौ में से करीब 18 सौ हॉस्टलों का बकाया</strong><br />नगर निगम से प्राप्त जानकारी के अनुसार कोटा शहर में वर्तमान में करीब 22 सौ हॉस्टल संचालित हं। जिनमें से करीब 18 सौ हॉस्टल ऐसे हैं जिनके द्वारा यूडी टैक्स जमा नहीं हुआ है। मात्र एक चौथाई हॉस्टलों का भी टैक्स जमा नहीं है। हॉस्टलों पर करीब 25 करोड़ से अधिक का टैक्स बकाया है।</p>
<p><strong>एक चौथाई मैरिज गार्डन का ही टैक्स जमा</strong><br />जानकारी के अनुसार कोटा शहर में वर्तमान में करीब 80 मैरिज गार्डन संचालित हैं। हालांकि नगर निगम में इनमें से गिनती के ही गार्डन पंजीकृत हैं। लेकिन संस्थाओं की ओर से संचालित इन मैरिज गार्डनों का व्यवसायिक उपयोग किया जा रहा है। हालत यह है उनमें से मात्र एक चौथाई 20 मैरिज गार्डनों का ही टैक्स जमा है। इन पर करीब 5 करोड़ रुपए टैक्स बकाया है।</p>
<p><strong>फायर एनओसी के लिए यूडी टैक्स आवश्यक</strong><br />राज्य सरकार के आदेशानुसार किसी भी व्यवसायिक सम्पति विशेष रूप से मैरिज गार्डन व हॉस्टलों के संचालन के लिए फायर एनओसी आवश्यक है। वहीं फायर एनओसी तभी मिलेगी जब उसका यूडी टैक्स जमा होगा। जबकि कई बार देखने में आया है कि बिना यूडी टैक्स जमा करवाए हुए थी फायर एनओसी जारी की जा चुकी है। पूर्व में इस तरह का मामला सामने आया था।<br />सूत्रों के अनुसार शहर में संचालित अधिकतर हॉस्टलों व मैरिज गार्डन सचालकों के पास न तो फायर सिस्टम है। यदि सिस्टम लगा हुआ भी है तो एनओसी नहीं है। एनओसी लेने के लिए आवेदन के साथ यूडी टैक्स जमा होने की रसीद लगाना आवश्यक है। यही कारण है कि अधिकतर के पास फायर एनओसी ही नहीं है। जिससे कभी आग लगने की बड़ी घटना होने के समय इसका खुलासा हो चुका है।</p>
<p><br />गत दिनों यूडी टैक्स कार्यालय का निरीक्षण कियाथा। उस समय शहर में यूडी टैक्स के दायरे में आने वाली सम्पतियों और उनके द्वारा जमा व बकाया टैक्स की जानकारी ली थी। टैक्स के दायरे में आने वाले सभी बड़े बकायादारों से टैक्स वसूली व समय से पहले जमा करवाने के लिए पहले नोटिस जारी किए जाएंगे। दो नोटिस तक और समय पर टैक्स जमा नहीं करवाने वालों पर सख्ती करते हुए नियमानुसार सीजिंत तक की कार्रवाई की जाएगी। हॉस्टल व मैरिज गार्डनों के लिए फायर एनओसी आवश्यक है। फायर एनओसी तभी मिलती है जब यूडी टैक्स की रसीद उसके साथ लगी हो। हॉस्टलों की हालत को देखते हुए उन पर भली ही सख्ती न हो लेकिन जो जमा करवा सकता है उससे लिया जाएगा। साथ ही शेष व्यवसायिक बकायादारों पर सख्ती से कार्रवाई की जाएगी।<br /><strong>- ओम प्रकाश मेहरा, आयुक्त नगर निगम कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Dec 2025 14:42:16 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>टैक्स जमा नहीं करवाने वालों पर निगम हो रहा मेहरबान</title>
                                    <description><![CDATA[नगरीय विकास कर (यूडी टैक्स) का मामला। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-corporation-is-being-lenient-towards-those-who-do-not-pay-the-tax/article-110739"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/257rtrer-(5)18.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। सरकार व सरकारी विभागों द्वारा नियमों की पालना करने वालों पर तो सख्ती की जा रही है लेकिन जो न तो नियमों की पालना कर रहे हैं और न ही समय पर सरकारी टैक्स जमा करवा रहे हैं उन पर सख्ती करना तो दूर सरकार मेहरबानी कर रही है। इसका उदाहरण है नगर निगम में नगरीय विकास कर(यूडी टैक्स) जमा नहीं करवाने वाले। नगर निगम के राजस्व विभाग की ओर से हर साल आवासीय व व्यवसायिक प्रतिष्ठानों से निर्धारित भूखंड के आधार पर नगरीय विकास कर वसूल किया जाता है। वित्त वर्ष शुरु होने अप्रैल से मार्च के बीच टैक्स जमा करवाने का समय रहता है। लेकिन हालत यह है कि गिनती के ही लोग समय पर टैक्स जमा करवा रहे है। टैक्स जमा नहीं करवाने वालों की संख्या अधिक है। उसके बावजूद भी संबंधित विभाग व सरकार द्वारा उनके खिलाफ सख्ती करने या दंडित करने की जगह उन पर मेहरबानी की जा रही है। सरकार हर बार दे रही छूट: शहर  में टैक्स के दायरे में आने वाले कर दाताओं में से जो समय पर टैक्स जमा करवा रहे हैं उन्हें तो सरकार प्रोत्साहित नहीं कर रही। वरन् जो समय पर और बरसों से टैक्स जमा नहीं करवा रही उन्हें ब्याज व पेनल्टी में हर साल छूट दी जा रही है। इस बार भी सरकार की ओर से छृूट का प्रावधान किया गया था। उसके बाद भी कई लोग ऐसे हैं जो छूट के बाद भी टैक्स जमा नहीं करवा सके। </p>
<p><strong>निगम ने नोटिस दिए लेकिन सख्ती नहीं की</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण की ओर से नगरीय विकास कर जमा नहीं करवाने वाले कर दाताओं को फरवरी व मार्च में नोटिस तो दिए गए। जिनमें टैक्स जमा नहीं करवाने वालों के खिलाफ सम्पति को सीजिंग व उनकी कुर्की करने तक की चेतावनी दी गई थी।  लेकिन हालत यह है कि फरवरी और मार्च के महीने के साथ ही वित्त वर्ष समाप्त हो गया। नोटिस वालों में से कुछ ही लोगों ने टैक्स जमा करवाया। लेकिन जिन्होंने टैक्स जमा नहीं करवाया उनके खिलाफ निगम ने कोई कार्रवाई नहीं की। </p>
<p><strong>कोटा उत्तर में 60 फीसदी ही जमा हुआ टैक्स</strong><br />निगम कोटा उत्तर व दक्षिण में गत वित्त वर्ष का यूडी टैक्स का लक्ष्य दस-दस करोड़ रुपए रखा गया था। जिसमें से कोटा दक्षिण में तो 98 फीसदी से अधिक 9.81 करोड़ रुपए टैक्स जमा हो चुका है। जबकि कोटा उत्तर में करीब 58 फीसदी 5.79 करोड़ रुपए ही टैक्स जमा हो सका है। कोटा उत्तर  में करीब 40 फीसदी से अधिक टैक्स जमा नहीं हुआ।  नगरीय विकास कर वसूल कर रही निजी फर्म से प्राप्त जानकारी के अनुसार कोटा उत्तर में 1635 सम्पतियां कर के दायरे में है। जिनमें आवासीय 517 व व्यवसायिक 443 सम्पतियां है। जिनके द्वारा टैक्स जमा कराया गया है। वहीं कोटा दक्षिण में 2427 सम्पतियां हैं जिनके द्वारा टैक्स जमा कराया गया है। उनमें 1037 आवासीय व 506 व्यवसायिक सम्पतियां है।</p>
<p><strong>छूट नहीं, सजा का हो प्रावधान</strong><br />छावनी निवासी राकेश नायक का कहना है कि सरकारी सिस्टम गलत है। जो समय पर टैक्स जमा नहीं करवा रहा है उसे हर साल ब्याज पेनल्टी में छूट दी जा रही है। जबकि उन्हें सजा या दोगुनी ब्याज पेनल्टी वसूल की जानी चाहिए।  प्रताप नगर बोरखेड़ा निवासी अरुण वर्मा का कहना है कि समय पर टैक्स जमा करवाने वालों को विभाग की ओर से सम्मानित किया जाना चाहिए। जिससे टैक्स जमा नहीं करवाने वालें भी प्रेरित हो। जबकि सरकार का नियम उल्टा है। टैक्स जमा नहीं करवाने वालों को छूट दी जाती है। जिससे ऐसे लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। उन्हें पता है कि सरकार को टैक्स वसूल करना है तो उन्हें छूट मिलेगी। वे मार्च के महीने का इंतजार करते है।</p>
<p>नगर निगम की ओर से फरवरी मार्च में टैक्स जमा नहीं करवाने वाले करदाताओं को नोटिस जारी किए गए थे। लेकिन उसमें से कई लोगों ने टैक्स जमा करवा दिया। इस कारण से सख्ती नहीं की गई। अब नया वित्त वर्ष चालू हो गया है। जिसमें पहली तिमाही में टैक्स जमा करवाने वालों को 10 फीसदी व दूसरी तिमाही में टैक्स जमा करवाने वालों को मूल टैक्स डिमांड में 5 फीसदी की छूट दी जा रही है। समय पर टैक्स जमा करवाने वाले सरकारी परेशानी से बचे रहते है। जबकि टैक्स जमा नहीं करवाने वालों पर सरकारी सख्ती की तलवार हमेशा लटकी रहती है। <br /><strong>- महावीर सिंह सिसोदिया, उपायुक्त नगर निगम कोटा उत्तर </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Apr 2025 15:41:11 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>28 फीसदी आवासीय व 36 फीसदी व्यवसायिक प्रतिष्ठानों ने जमा कराया यूडी टैक्स, फर्म ने नए सिरे से किया सर्वे </title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम की ओर से जहां वर्ष 2007 के सर्वे के आधार पर ही टैक्स वसूल किया जा रहा था। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/28--residential-and-36--commercial-establishments-deposited-ud-tax/article-110423"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/257rtrer-(3)18.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम की ओर से हर साल वसूल किया जाने वाला नगरीय विकास कर(यूडी टैक्स) जमा करवाने में पहले जहां बहुत कम लोग रूचि लेते थे। वहीं अब इसमें पहले की तुलना में बढ़ोतरी तो हुई है लेकिन अभी भी टैक्स जमा करवाने वालों की संख्या एक चौथाई से तीन चौथाई ही है। नगर निगम कोटा द्वारा आवासीय व व्यवसायिक प्रतिष्ठानों से वर्ष 2007 में नगरीय विकास कर वसूल करना शुरु किया था। पहले यह काम नगर निगम के राजस्व अनुभाग के माध्यम से किया जा रहा था। लेकिन विभाग द्वारा लक्ष्य से काफी कम टैक्स जमा किया जा रहा था। उसे देखते हुए नगर निगम अधिकारियों द्वारा टैक्स वसूली का काम निजी फर्म को दे दिया गया। पहले कोटा दक्षिण ने और उसके बाद कोटा उत्तर में निजी फर्म ने यह काम शुरु किया। हालांकि नगर निगम की बोर्ड बैठकों में निजी फर्म से यूडी टैक्स वसूल करने का विरोध भी जताया गया। लेकिन उसके बाद भी सरकार ने बोर्ड के निर्णय को न मानते हुए निजी फर्म से ही टैक्स वसूल करने का आदेश जारी किया था। पिछले काफी से यूडी टैक्स निजी फर्म द्वारा ही वसूल किया जा रहा है। हालांकि आवासीय व व्यवसायिक दोनों श्रेणियों में टैक्स का दायरा अलग -अलग है। जो सम्पतियां इस दायरे में आ रही है। उनसे ही यह टैक्स वसूल किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार कुल सर्वे में से 38 फीसदी सम्पति आवासीय और 23 फीसदी व्यवसायिक सम्पतियां टैक्स के दायरे में आई है। उनमें से आवासीय में 28 फीसदी व व्यवसायिक में 36 फीसदी ने टैक्स जमा कराया है। </p>
<p><strong>फर्म ने नए सिरे से किया सर्वे</strong><br />नगर निगम की ओर से जहां वर्ष 2007 के सर्वे के आधार पर ही टैक्स वसूल किया जा रहा था। लेकिन निजी फर्म को यह काम मिलने के बाद फर्म ने नए सिरे से सभी सम्पतियों का सर्वे किया। आवासीय व व्यवसायिक समेत अन्य श्रेणियों में आने वाले सम्पतियों में यदि निर्माण होने से बहलाव हुआ है तो उसका टैक्स बढ़ाया गया है। यदि पूर्व में गलत टैक्स लिया जा रहा था तो उसे सही भी किया गया है। </p>
<p><strong>शहर में 4062 सम्पतियों का सर्वे</strong><br />निजी फर्म द्वारा शहर में किए गए नए सिरे से सर्वे में कुल 4062 सम्पतियों का सर्वे किया गया है। फर्म के प्रतिनिधियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार कोटा उत्तर में 1635 और कोटा दक्षिण निगम में 2427 यानि कुल 4062 सम्पतियों का अभी तक सर्वे किया जा चुका है। </p>
<p><strong>38 फीसदी आवासीय व 23 फीसदी व्यवसायिक सम्पतियां</strong><br />निजी फर्म से प्राप्त जानकारी के अनुसार शहर में किए गए सर्वे में से करीब 38 फीसदी आवासीय व 23 फीसदी व्यवसायिक प्रतिष्ठान ऐसे हैं जो यूडी टैक्स के दायरे में आए हैं। शहर में हुए कुल 4062 सर्वे में दोनों निगम क्षेत्र में कुल 1554 आवासीय जिनमें 517 कोटा उत्तर में और 1037 कोटा दक्षिण निगम क्षेत्र में है। इसी तरह से कोटा उत्तर निगम क्षेत्र में 441 और कोटा दक्षिण क्षेत्र में 506 व्यवसायिक प्रतिष्ठान टैक्स के दायरे में  आए हैं। </p>
<p><strong>यह है आवासीय व व्यवसायिक टैक्स की स्थिति</strong><br />निजी फर्म से प्राप्त जानकारी के अनुसार दोनों निगम क्षेत्रों में आवासीय प्रतिष्ठानों से कुल 4 करोड़ 31 लाख 71 हजार 951 रुपए और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों से 5 करोड़ 59 लाख 30 हजार 705 रुपए टैक्स जमा किया गया।  कुल जमा टैक्स में से आवासीय भवनों से जहां 28 फीसदी टैक्स वसूल किया गया वहीं व्यवसायिक प्रतिष्ठानों का प्रतिशत 36 रहा। </p>
<p><strong>15.60 करोड़ से अधिक जमा हुआ टैक्स</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण की ओर से बोर्ड की बजट बैठकों में वित्त वर्ष का यूडी टैक्स वसूली का लक्ष्य 10-10 करोड़ यानि कुल 20 करोड़ रखा गया था। जिसमें से निजी फर्म द्वारा कुल 15 करोड़ 60 लाख 58 हजार 973 रुपए टैक्स वसूल किया गया। जिसमें से कोटा उत्तर में 5 करोड़ 79 लाख 14 हजार 694 रुपए है। वहीं कोटा दक्षिण में 9 करोड़ 81 लाख 44 हजार 279 रुपए है। </p>
<p><strong>ये सम्पतियां भी हैं टैक्स के दायरे मे</strong><br />आवासीय व व्यवसायिक प्रतिष्ठानों के अलावा शहर में कई ऐसी सम्पतियां भी हैं जो यूडी टैक्स के दायरे में आती है। जिनमें इंस्टीट्यूशनल, इंडस्ट्रीयल व अन्य सम्पतियां भी है।  कोटा उत्तर में 232 व दक्षिण में 192 इंस्टीट्यूशनल, कोटा उत्तर में 32 व दक्षिण में 29 इंडस्ट्रीयल  और कोटा उत्तर में 411 व दक्षिण में 663 अन्य सम्पतियां हैं जो टैक्स के दारे में आती है। उनसे भी करोड़ों रुपए टैक्स वसूल किया गया है। </p>
<p><strong>पहले से काफी सुधार हुआ है</strong><br />इधर निजी फर्म के प्रतिनिधियों का कहना है कि यूडी टैक्स की वसूली में पहले से काफी सुधार हुआ है। पहले टैक्स का लक्ष्य कम था वह भी वसूल नहीं हो पा रहा था या बहुत कम लोग जमा करवाते थे। जिसके लिए निगम को सख्ती करनी पड़ती थी। सीजिंग तक की कार्रवाई करने पर टैक्स बहुत कम जमा होता था। जबकि इस बार बिना सख्ती किए ही अच्छा टैक्स जमा हुआ है।  हालांकि कुल सम्पतियों के सर्वे में आवासीय व व्यवसायिक प्रतिष्ठानों की संख्या टैक्स के दायरे में आने वालों की कम है। उनमें से भी अधिकतर लोगों से टैक्स वसूल किया गया है। </p>
<p>                             <strong>     नगर निगम उत्तर         नगर निगम  दक्षिण</strong><br />कुल सम्पति                           1635                        2428<br />आवासीय सम्पति                     517                        1037<br />संस्थानिक सम्पति                   232                          192<br />औद्योगिक सम्पति                     32                             29<br />अन्य सम्पति                          411                           663<br />व्यवसायिक सम्पति                 443                           506 <br />कुल जमा टैक्स              57914694                  98144279<br />आवासीय टैक्स              16766224                   26405721<br />व्यवसायिक टैक्स           19037725                   36892980 </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Apr 2025 15:32:21 +0530</pubDate>
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                <title>यूडी टैक्स और विज्ञापन शुल्क वसूली के लिए शिविर आयोजित, 46 लाख 27 हजार से अधिक का प्राप्त किया राजस्व</title>
                                    <description><![CDATA[शिविरों में नगरीय विकास कर, गृहकर एवं विज्ञापन शुल्क जमा करा कराने पर राज्य सरकार द्वारा प्रदत्त छूट का लाभ मौके पर ही दिया जा रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/camp-organized-for-ud-tax-and-advertising-fee-recovery/article-103295"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer-(2)10.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। नगरीय विकास कर एवं विज्ञापन शुल्क की शत प्रतिशत वसूली के लिए नगर निगम जयपुर ग्रेटर के जोनवार वार्डवाइज शिविरों में दूसरे दिन बुधवार को 46 लाख रुपए से अधिक का राजस्व मिला। उपायुक्त राजस्व प्रथम अशोक कुमार शर्मा ने बताया कि प्रतिदिन एक या दो वार्डों के संयुक्त शिविर आयोजित किए जा रहे है। शिविरों में बुधवार को जगतपुरा जोन में 2.07 लाख रुपए, झोटवाड़ा जोन में 7.24 लाख, मालवीय नगर जोन में 20.64 लाख, मानसरोवर जोन में 7.52 लाख, मुरलीपुरा जोन में 5.20 लाख,  सांगानेर जोन में 1.80 लाख एवं विद्याधर नगर जोन में 1.79 लाख रुपए से अधिक का राजस्व प्राप्त किया। शिविरों में नगरीय विकास कर, गृहकर एवं विज्ञापन शुल्क जमा करा कराने पर राज्य सरकार द्वारा प्रदत्त छूट का लाभ मौके पर ही दिया जा रहा है। </p>
<p>आज यहां लगेंगे शिविर: गुरुवार को जगतपुरा जोन के वार्ड नं. 106, झोटवाड़ा जोन के वार्ड नं. 45 व 48, मालवीय नगर जोन के वार्ड नं. 125 व 129, मानसरोवर जोन वार्ड नं. 84 व 85, मुरलीपुरा जोन वार्ड नं. 18, सांगानेर जोन के वार्ड नं. 93 एवं विद्याधर नगर जोन में वार्ड नं. 23 व 24 में शिविर आयोजित किए जाएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Feb 2025 09:31:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>असर खबर का - बकाया यूडी टैक्स एक मुश्त जमा करवाने पर ब्याज-पैनल्टी में शत प्रतिशत की मिली छूट</title>
                                    <description><![CDATA[नगरीय विकास कर में अभी तक छूट नहीं मिलने का मुद्दा दैनिक नवज्योति ने उठाया था। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news---100--exemption-in-interest-and-penalty-on-depositing-the-outstanding-ud-tax-in-lump-sum/article-100379"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/257rtrer-(4)9.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। स्वायत्त शासन विभाग की ओर से गृह कर व नगरीय विकास कर की बकााय राशि एक मुश्त जमा करवाने पर छूट की घोषणा की है। इस संबंध में शुक्ववार को अधिसूचना जारी की गई।  स्वायत्त शासन विभाग के आयुक्त एवं शासन सचिव द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 2009 की धारा 107(4) के तहत यह छूट प्रदान की गई है। अधिसूचना के अनुसार वर्ष 2023-24 तक का  एक मुश्त नगरीय विकास कर की राशि जमा करवाने पर ब्याज एवं पेनल्टी में शत प्रतिशत की छूट होगी। जिन प्रकरणों में वर्ष 2011-12 से पहले का नगरीय विकास कर बकाया है उन प्रकरणों में एक मुश्त राशि जमा करवाने पर उस अवधि के नगरीय विकास कर में  पेनल्टी की छूट के साथ  मूल बकाया में भी 50  फीसदी की छूट मिलेगी। इसी तरह से सम्पूर्ण बकाया गृहकर आवासीय/ व्यवसायिक भूखंड व भवनों का एक मुश्त जमा करवाने पर  मूल गृहकर की राशि पर 50 फीसदीकी छूट और पेनल्टी  में शत प्रतिशत की छूट दी जाएगी। </p>
<p><strong>करोड़ों रुपए जमा होगा पुराना बकाया</strong><br />नगर निगम अधिकारियों  का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा हर साल पुराने बकाया यूडी टैक्स पर सितम्बर से मार्च के बीच छूट देती रही है। लेकिन इस बार इसमें देरी हुई है। लेकिन अब सरकार ने बकाया पर छूट की घोषणा कर दी है।जिससे अभी तक छूट के इंतजार मेंबकाया जमा नहीं करवा पा रहे थे वे जमा करवा देंगे। जिससे लोगों को तो लाभ होगा ही। साथ ही नगर निगम में भी करोड़ों रुपए का राजस्व प्राप्त होगा।  निगम अधिकारियों का कहना है कि पूर्व में भी इसी तरह की छूट का प्रावधान किया गया था। यह छूट 31 मार्च तक प्रभावी रहेगी। </p>
<p><strong>नवज्योति ने उठाया था मुद्दा</strong><br />नगरीय विकास कर में अभी तक छूट नहीं मिलने का मुद्दा दैनिक नवज्योति ने उठाया था। समाचार पत्र में 9 जनवरी के अंक में पेज 6 पर‘ अंतिम तिमाही शुरु, नहीं मिली बकाया पर छूट’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था।  जिसमें बताया था कि  छूट के इंतजार में बकाया यूडी टैक्स जमा नहीं हो रहा है। समाचार प्रकाशित होने के बाद स्वायत्त शासन विभाग हरकत में आया और अगले ही दिन शुक्रवार को यूडी टैक्स की बकाया राशि एक मुश्त जमा करवाने पर ब्याज पेनल्टी में छूट की अधिसूचना जारी कर दी है। इससे कोटा के भी हजारों कर दाताओं को लाभ होगा और निगम में राजस्व आएगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jan 2025 18:05:45 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>एक होटल संचालक ने बकाया 6 लाख यूडी टैक्स जमा कराया, दूसरे होटल से 41 हजार का जुर्माना वसूला</title>
                                    <description><![CDATA[नगर परिषद की सख्ती पर व्यावसायिक प्रतिष्ठान के संचालकों में हड़कंप मच गया। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/one-hotel-operator-deposited-the-outstanding-ud-tax-of-6-lakhs--a-fine-of-41-thousand-was-collected-from-another-hotel/article-87303"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/4111u1rer-(3)13.png" alt=""></a><br /><p>बारां। दिल्ली में कोचिंग संस्थान के बेसमेंट में पानी भरने से तीन विद्यार्थियों की मौत के बाद राज्य सरकारी सख्ती बारां शहर में नगर परिषद की ओर से कड़ी कार्रवाई की जा रही है। शहर के कोचिंग संस्थान, होटल, रेस्टोरेंट में सर्वे के बाद 16 संस्थानों में भारी अनियमितता पाई गई थी। अग्निशमन विभाग के प्रभारी उवेश शेख ने बताया कि नगर परिषद शहर में अग्निशमन विभाग के दिशा निर्देश तथा मानको के अनुसार नहीं चलने वाले व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बार बार नोटिस जारी करने के बाद भी नियमों का उल्लंघन करने को लेकर आयुक्त सौरभ जिंदल के दिशा निर्देश पर अनियमितता बरतने पर सीज करने को चेताया गया था। इस पर नगर परिषद ने गुरुवार को बारां शहर के श्रीजी होटल से 41 हजार का जुर्माना वसूला। इस  होटल के यूडी टैक्स जमा नहीं थे। फायर एनओसी भी नहीं थी। इसी प्रकार होटल दावत रेस्टोरेंट ने अपने बकाया यूडी टैक्स के 6 लाख रुपए जमा परिषद में जमा करा दिए। इसके साथ ही फायर एनओसी के लिए भी इस होटल से आॅनलाइन आवेदन कर दिया। </p>
<p><strong>आनन-फानन में होटल संचालकों ने फायर एनओसी के लिए किए आवेदन</strong><br />नगर परिषद की सख्ती पर व्यावसायिक प्रतिष्ठान के संचालकों में हड़कंप मच गया। सभी ने आनन-फानन से फायर एनओसी के लिए आॅनलाइन आवेदन करना शुरू कर दिया। अब तक12 प्रतिष्ठानों की ओर से आवेदन कर लिए गए है। इनमें होटल राधिका, होटल महक, होटल कंचन, महावीर गार्डन, होटल सिटी सेंटर, होटल रेड स्टोन आदि ने फायर एनओसी के लिए आवेदन कर दिया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 09 Aug 2024 17:00:28 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>निकायों को मिलेगा पूरा पैसा, बिजली बिल के साथ होगी यूडी टैक्स की वसूली</title>
                                    <description><![CDATA[फिलहाल बिजली बिल में पहले से ही चार तरह के टैक्स वसूले जा रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/municipal-bodies-will-get-full-money-and-ud-tax-will/article-83420"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/jhabar-singh-kharra.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश की स्थानीय निकायों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार बड़ा फैसला करने की तैयारी कर रही है। आमजन से यूडी टैक्स की वसूली बिजली बिल के जरिए होगी। फिलहाल बिजली बिल में पहले से ही चार तरह के टैक्स वसूले जा रहे हैं। समस्त निकायों की करोड़ों का टैक्स बकाया होने के कारण आर्थिक स्थिति खराब है।</p>
<p>ऐसे में राज्य सरकार इस वसूली को गति देने के लिए बिजली बिल में शामिल करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए उच्च स्तरीय मंथन शुरू हो गया है। यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा का कहना है कि निकायों को मजबूत करना है, तो शत प्रतिशत यूडी टैक्स की वसूली जरूरी है। इसके लिए विचार कर रहे हैं कि क्यों नहीं यूडी टैक्स को भी बिजली के बिल के साथ  जोडा जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jul 2024 17:57:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मात्र 10 फीसदी हॉस्टल संचालकों ने ही जमा कराया यूडी टैक्स </title>
                                    <description><![CDATA[सितम्बर से मार्च तक टैक्स जमा करवाने पर कोई छूट का प्रावधान नहीं है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/only-10-percent-hostel-operators-have-deposited-ud-tax/article-80109"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/matr-10-fisdi-hostel-sanchalako-ne-hi-jma-kraya-ud-tax...kota-news-01-06-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में आए दिन हॉस्टल व बहुमंजिला इमारतों में आग लगने की घटनाओं को देखते हुए वहां फायर सिस्टम लगाने व एनओसी लेना आवश्यक कर दिया है। इसे देखते हुए हॉस्टल संचालकों ने फायर एनओसी के लिए आवेदन तो बड़ी संख्या   में किया लेकिन एनओसी के लिए आवश्यक होने पर भी मात्र10 फीसदी  हॉस्टल संचालकों ने भी इस वित्त वर्ष में यूडी टैक्स जमा कराया है। नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण की ओर से हॉस्टल व व्यवसायिक प्रतिष्ठानों से उनके भूखंड व निर्माण के आधार पर नगरीय विकास कर (यूडी टैक्स) हर साल वसूल किया जा रहा है। यह टैक्स अब निजी फर्म के माध्यम से वसूल किया जा रहा है। हॉस्टलों में आग लगने की घटनाओं को देखते हुए प्रशासन की ओर से सभी हॉस्टलों में फायर सिस्टम लगाना व  फायर एनओसी लेना आवश्यक कर दिया है। इसे देखते हुए पिछले कुछ समय में फायर एनओसी के लिए नगर निगम के फायर अनुभाग में आवेदनों की संख्या काफी अधिक बढ़ गई है। </p>
<p><strong>करीब एक हजार ने किया आवेदन, टैक्स 50 ने जमा कराया</strong><br />शहर में वैसे तो करीब 4 हजार से अधिक हॉस्टल हैं। लेकिन उनमें से नगर निगम में नियमित रूप से तो करीब 500 हॉस्टल संचालक ही यूडी टैक्स जमा करवा रहे हैं। इस वित्त वर्ष के शुरुआती दो माह अप्रैेल व मई में अभी तक मात्र 50 हॉस्टल संचालकों ने ही यूडी टैक्स जमा कराया है।  यूडी टैक्स वसूल करने वाली कम्पनी के प्रतिनिधियों के अनुसार नगरीय कर अप्रैल से मार्च तक के वित्त वर्ष में जमा कराना होता है। चालू वित्त वर्ष 2024-25 अप्रैेल में शुरु हुआ है। इस वर्ष के शुरुआती दो माह में अभी तक करीब 50 से 60 हॉस्टल संचालकों ने ही टैक्स जमा कराया है। हालांकि टैक्स जमा करवाने के लिए हॉस्टल संचालक नियमित सम्पर्क कर जानकारी ले रहे हैं। हॉस्टलों से न तो आवासीय और न ही व्यवसायिक रन् इंस्टीट्यूशनल टैक्स वसूल किया जाता है। वहीं निगम के फायर अनुभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण में अभी तक कुल करीब 1 हजार हॉस्टल संचालकों ने फायर एनओसी के रिनुअल व नए आवेदन किए हैं। </p>
<p><strong>फायर सिस्टम व एनओसी नहीं होने पर किए थे हॉस्टल सीज</strong><br />शहर के विभिन्न क्षेत्रों में गत दिनों हॉस्टलों में आग लगने और फायर सिस्टम नहीं होने व प्रशासन की गाइड लाइन की पालना नहीं करने पर करीब आधा दर्जन से अधिक हॉस्टलों को सीज किया था। कुन्हाड़ी क्षेत्र के हॉस्टल में आग लगने पर कई बच्चों की जान खतरे में आ गई थी। वहां न तो फायर सिस्टम था और न ही एनओसी। प्रशासन के निर्देश पर निगम टीम ने उसे सीज किया था। अन्य हॉस्टलों की जांच में कमियां पाई जाने पर उन्हें सीज किया गया था। </p>
<p><strong>दो माह में जमा हुआ 1.67 लाख टैक्स</strong><br />वित्त वर्ष के शुरुआती दो माह अप्रैल व मई में अभी तक कुल 1 करोड़ 67 लाख 30 हजार रुपए की टैक्स जमा हुआ है।  सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार नगर निगम कोटा उत्तर में अभी तक कुल 69 लाख 74 हजार रुपए और कोटा दक्षिण निगम में 97 लाख 56 हजार रुपए टैक्स जमा हुआ है। जबकि चालू वित्त में दोनों नगर निगमों में यूडी टैक्स का लक्ष्य बढ़ाकर 10-10 करोड़ रुपए कर दिया गया है। </p>
<p><strong>गत वर्ष लक्ष्य से अधिक जमा</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण में गत वित्त वर्ष में लक्ष्य से अधिक यूड़ी टैक्स जमा हुआ था। निगम से प्राप्त जानकारी के अनुसार कोटा उत्तर में लक्ष्य 6 करोड़ रुपए था और वसूली 6.30 करोड़ रुपए हुई थी। वहीं कोटा दक्षिण का लक्ष्य 8 करोड़ रुपए था और वसूली 9.85 करोड़ रुपए हुई थी। सि तरह कुल 14 करोड़ की तुलना में 16.15 करोड़ रुपए टैक्स जमा हुआ था। </p>
<p><strong>शुरुआती 6 माह में टैक्स जमा करवाने पर छूट का प्रावधान</strong><br />स्वायत्त शासन विभाग के आदेशानुसार चालू वित्त वर्ष के शुरुआती तीन माह अप्रैल से जून तक  यूडी टैक्स जमा करवाने पर मूल राशि में 10 फीसदी की छूट दी जाती है। वहीं दूसरी तिमाही जुलाई से सितम्बर तक टैक्स जमा करवाने पर मूल राशि में 5 फीसदी की छूट दी जाती है। सितम्बर से मार्च तक टैक्स जमा करवाने पर कोई छूट का प्रावधान नहीं है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />अभी तक  दोनों निगमों में करीब एक हजार हॉस्टल संचालकों ने रिनुअल के लिए व नए आवेदन किए हैं। फायर एनओसी के आवेदनों की जांच की जा रही है। एनओसी के लिए यूडी टैक्स जमा होने की रसीद लगाना आवश्यक है। बिना यूडी टैक्स जमा हुए फायर एनओसी जारी नहीं की जाएगी। आवेदन करना ही पर्याप्त नहीं है। <br /><strong>- राकेश व्यास, सीएफओ नगर निगम कोटा दक्षिण </strong></p>
<p>नगरीय विकास कर जमा नहीं करवाने वालों को पूर्व में नोटिस जारी किए गए थे। उनमें हॉस्टल भी शामिल है। लेकिन वर्तमान में लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लगी हुई है। इसमें कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती। वैसे नियमित टैक्स जमा करवाने वाले टैक्स समय से जमा करवा रहे हैं। हालांकि अभी वित्त वर्ष चालू ही हुआ है। टैक्स जमा करवाने की समयावधि मार्च 2025 तक है। जनवरी-फरवरी तक टैक्स जमा नहीं करवाने वालों को याद दिलवाने के लिए नोटिस जारी करते हैं। पुराना काफी बकाया होने व नोटिस के बाद भी टैक्स जमा नहीं करवाने वालों के खिलाफ सख्ती की जाती है। <br /><strong>- महावीर सिसोदिया,उपायुक्त नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Jun 2024 15:47:31 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>छूट का गुड़ ऐसा कि 80 फीसदी जमा ही नहीं करवाते यूडी टैक्स </title>
                                    <description><![CDATA[कम्पनी के अनुसार नया सर्वे होने से पहले कोटा उत्तर में कुल 22 सौ करदाता थे जो वर्तमान में 78 सौ हो गए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-jaggery-of-exemption-is-such-that-80-percent-of-ud-tax-is-not-deposited/article-57986"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/chuth-ka-gud-esa-ki-80-fisdi-jma-hi-nhi-krwate-ud-tax...kota-news-25-09-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम की ओर से वसूल किए जाने वाले नगरीय विकास कर(यूडी टैक्स) को जमा करवाने में लोगों की रूचि ही नहीं दिख रही है। यही कारण है कि शहर में यूडी टैक्स के दायरे में आने वालों में से मात्र 20 फीसदी लोग ही टैक्स जमा करवा रहे हैं। 80 फीसदी इस पर ध्यान तक नहीं देते। अब तो फायर एनओसी में भी यूडी टैक्स की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है। यूडी टैक्स वसूली का काम पहले जहां नगर निगम का राजस्व अनुभाग करता था। वहीं अब दोनों ही नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण में यह काम निजी फर्म कर रही है। पहले फरवरी 2022 से नगर निगम दक्षिण का और अब फरवरी 2023 से कोटा उत्तर निगम में टैक्स वसूली का काम निजी फर्म को दिया गया है। नगर निगम के राजस्व अनुभाग द्वारा यूडी टैक्स का लक्ष्य पूरा नहीं होने के कारण यह काम निजी फर्म को दिया गया। हालांकि निजी फर्म ने कोटा दक्षिण निगम में गत वित्त वर्ष में यूडी टैक्स लक्ष्य से अधिक जमा किया। लेकिन उसके बाद भी वह टैक्स मात्र 15 से 20 फीसदी लोगों ने ही जमा कराया था। </p>
<p><strong>7 हजार में से 15 सौ ने किया था टैक्स जमा</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण का यूडी टैक्स का वित्तीय वर्ष 2022-23 का लक्ष्य 7 करोड़ रुपए था। जिसके मुकाबले निजी फर्म ने 8.54 करोड़ रुपए टैक्स जमा किया था। कई वर्ष बाद लक्ष्य से अधिक टैक्स तो जमा हो गया लेकिन वह भी मात्र 15 से 20 फीसदी लोगों से ही। निजी फर्म द्वारा कोटा दक्षिण में किए गए सर्वे में उस समय करीब 7 हजार प्रोपर्टी टैक्स के दायरे में आई थी। जिनमें से मात्र 1474 ने भी टैक्स जमा कराया था।  जबकि अप्रैल 2023 से अगस्त तक 1025 कर दाताओं से 3.17 करोड़ रुपए जमा किए जा चुके हैं। वहीं कोटा उत्तर में फरवरी-मार्च 2023 में 319 कर दाताओं ने 2.66 करोड़ रुपए और अप्रेल 2023 से अगस्त तक 508 कर दाताओÞ से 3.43 करोड़  टैक्स जमा हो चुका है। निजी कपनी से प्राप्त जानकारी के अनुसार कोटा उत्तर में करीब तीन गुना व कोटा दक्षिण में पहले से चार गुना तक कर दाता बढ़ गए हैं। कम्पनी के अनुसार नया सर्वे होने से पहले कोटा उत्तर में कुल 22 सौ करदाता थे जो वर्तमान में 78 सौ हो गए। वहीं कोटा दक्षिण में 4 हजार की तुलना में करीब 19 हजार कर दाता हो गए हैं। </p>
<p><strong>छूट का लालच डाल रहा अडंगा</strong><br />सूत्रों के अनुसार  यूडी टैक्स के दायरे में आने वाली हर प्रोपर्टी का वित्तीय वर्ष के अंत तक जमा करवाना आवश्यक होता है। कर जमा नहीं करवाने वालों को सरकार की ओर से हर साल मार्च में छूट योजना का लाभ दिया जाता है। जिसके लालच में कई लोग कर जमा नहीं करवाते हैं। हर साल जहां 31 मार्च तक ही छूट का लाभ मिलता था। वहीं इस बार इसे 30 तिसम्बर तक बढ़ाया हुआ है। सूत्रों के अनुसार इस कारण भी टैक्स कम जमा करवा रहे हैं। </p>
<p><strong>फर्म के पास वसूली, निगम के पास कार्रवाई का अधिकार</strong><br />इधर निजी फर्म के प्रतिनिधियों के अनुसार फर्म के पास केवल सर्वे कर यूडी टैक्स वसूल करने तक का अधिकार है। यदि कोई टैक्स जमा नहीं करवा रहा है तो उसके खिलाफ कार्रवाई व सीजिंग का अधिकारी नगर निगम के पास है। निगम ने मार्च 2022 में ही सीजिंग की कार्रवाई की थी। </p>
<p><strong>फायर एनओसी से भी अनिवार्यता समाप्त</strong><br />एक तरफ तो पहले ही बहुत कम लोग यूडी टैक्स जमा करवा रहे हैं। उसे देखते हुए स्वायत्त शासन विभाग कीओर से पूर्व में फायर एनओसी लेने वालों के लिए यूडी टैक्स जमा करवाना अनिवार्य कर दिया था। आवेदन के साथ ही यूडी टैक्स की रसीद लगाने के बाद ही प्रक्रिया आगे बढ़ती थी। लेकिन अब विभाग ने इस अनिवार्यता को समाप्त कर दिया है। जिससे भी लोग टैक्स जमा नहीं करवा रहे हैं। </p>
<p><strong>अनिवार्यता समाप्त लेकिन टैक्स जमा करवाना होगा</strong><br />नगर निगम के मुख्य अग्निशमन अधिकारी राकेश व्यास ने बताया कि फायर एनओसी के लिए यूडी टैक्स की अनिवार्यता तो समाप्त कर दी है। लेकिन फिर भी फायर एनओसी के लिए आॅनलाइन आवेदन करने वालों को यूडी टैक्स जमा करवाने के लिए कहा जाता है। जिससे फायर एनओसी की संख्या बढ़ने के साथ ही सरकार को यूडी टैक्स से राजस्व भी मिलता रहे। हालांकि विभाग ने फायर एनओसी की फीस में भी बढ़ोेतरी की है। </p>
<p><strong>फैक्ट फाइल</strong><br />सर्वे से पहले कोटा उत्तर में कर दाता    -    2200<br />सर्वे के बाद कोटा उत्तर में कर दाता    -    7800<br />सर्वे से पहले कोटा दक्षिण में करदाता    -    4018<br />सर्वे के बाद कोटा दक्षिण में करदाता    -    19000<br />2022-23 में कोटा दक्षिण में करदाता    -    7000<br />2022-23 में कोटा दक्षिण में कर जमा कराया -        1474 ने<br />2022-23 में कोटा दक्षिण में कर जमा हुआ -          8.54 करोड़ रुपए</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 Sep 2023 16:09:26 +0530</pubDate>
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