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                            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, रैबीज पीड़ित कुत्ताें को दया मृत्यु देने की अनुमति संबंधी एनजीओ की याचिका पर सुनवाई से इनकार</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को अंधाधुंध मारने के खिलाफ दायर एनजीओ की याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्रियों के बयानों के आधार पर आदेश नहीं बदले जाते। पूर्व आदेश के तहत केवल रैबीज पीड़ित, लाइलाज और अत्यधिक आक्रामक कुत्तों को ही दया मृत्यु देने की अनुमति है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/big-decision-of-supreme-court-refusal-to-hear-ngos-clarification/article-154951"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/dog.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने एक एनजीओ की ओर से दायर उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया है जिसमें यह स्पष्टीकरण मांगा गया था कि कुछ खास परिस्थितियों में कुत्तों को दया मृत्यु देने की अनुमति देने वाले उसके हालिया आदेश का अर्थ आवारा कुत्तों को अंधाधुंध मारने की मंजूरी देना नहीं निकाला जाना चाहिए। उच्चतम न्यायालय के समक्ष यह याचिका एनजीओ 'एनिमल्स आर पीपल टू' ने दायर की थी। इसमें चिंता जतायी गयी थी कि अधिकारी कुत्तों को गैरकानूनी तरीके से मारने या उन्हें हटाने को सही ठहराने के लिए अदालत के निर्देशों की गलत व्याख्या कर रहे हैं।</p>
<p>इस मामले में पेश हुए अधिवक्ता ने दलील दी कि उच्चतम न्यायालय के आदेश की गलत व्याख्या की जा रही है और इसे कानून के खिलाफ जाकर लागू किया जा रहा है। पंजाब के मुख्यमंत्री के एक सार्वजनिक बयान का जिक्र करते हुए अधिवक्ता ने कहा, "पंजाब के मुख्यमंत्री ने ट्वीट किया है कि उच्चतम न्यायालय ने सभी स्वानों को मारने की खुली छूट दे दी है।" न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने टिप्पणी की, कि सार्वजनिक पद संभालने वाले लोगों के बयानों के आधार पर अदालत से आदेश में बदलाव की उम्मीद नहीं की जा सकती। न्यायमूर्ति नाथ ने कहा, "अगर मुख्यमंत्री कोई बयान देते हैं, तो क्या इसका मतलब यह है कि हमें अपना आदेश बदलने की जरूरत है।" शीर्ष अदालत ने 19 मई के अपने आदेश में सख्त वैधानिक नियमों के अनुसार रैबीज पीड़ित, लाइलाज और प्रत्यक्ष रूप से खतरनाक या आक्रामक कुत्तों को दया मृत्यु देने की अनुमति दी थी।</p>
<p>आवारा कुत्तों के मुद्दे से जुड़े स्वतः संज्ञान मामले की कार्यवाही में न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ ने ये निर्देश जारी किये थे। पीठ ने आवारा कुत्तों के काटने की 'अत्यंत परेशान करने वाली' घटनाओं, विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों से जुड़े मामलों की रिपोर्टों पर गौर करने के बाद नवंबर में जारी अपने पिछले निर्देशों में किसी तरह के संशोधन से इनकार कर दिया था। इनमें अधिकारियों को विभिन्न सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने का निर्देश दिया गया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 May 2026 15:48:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>आधे शहर को मिलेगी आवारा श्वानों से मुक्ति</title>
                                    <description><![CDATA[रिहायशी इलाकों से पकड़े जाएंगे स्ट्रीट डॉग]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/half-the-city-will-get-rid-of-stray-dogs/article-124056"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(4)29.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । आधे शहर को  शीघ्र ही आवारा श्वानों से मुक्ति मिलने वाली है।  नगर निगम कोटा दक्षिण आयुक्त ने सोमवार को आदेश जारी कर आवारा श्वानों को पकड़ने के वाहनों की संख्या बढ़ाकर  पकड़े गए श्वानों को डॉग शेल्टर में सुरक्षित रखने को कहा है। इस आदेश के अनुसार अब बधियाकरण व टीकाकरण के लिए पकड़े गए श्वानों को फिलहाल वापस उसी जगह पर नहीं छोड़ा जाएगा।  शहर में आए दिन आवारा श्वानों द्वारा छोटे बच्चों व महिलाओं और बुजुर्गों को काटने व उन पर हमला करने की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही है। लगातार घटनाएं होने से आमजन काफी भयभीत है। कई लोग तो अपने छोटे बच्चों को घर से बाहर तक भेजने व खेलने जाने देने से घबराने लगे है। सोमवार को जयपुर में भी घर के बाहर खेल रहे छोटे बच्चों पर श्वानों ने हमला कर उसे घायल कर दिया। श्वानों की समस्या कोटा शहर ही नहीं पूरे प्रदेश व देश में है।  वहीं सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली एनसीआर को दिए गए आदेश व राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा भी इस संबंध में आदेश जारी कर आवारा श्वानों को शेल्टर होम में रखने को कहा गया है।  नगर निगम कोटा दक्षिण के आयुक्त अनुराग भार्गव ने सोमवार को महाराष्ट्र के ओशामाबाद स्थित अरिहंत वेलफेयर सोसायटी के नाम आदेश जारी किया है। उस आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि नगर निगम द्वारा संस्था को आवारा श्वानों का बधियाकरण व टीकाकरण करने का कार्यादेश दिया हुआ है। वहीं वर्तमान में शहर में आवारा श्वानों द्वारा आमजन को नुकसान पहुंचाने की शिकायतें बढ़ती ही जा रही है। ऐसे में निर्देशित किया जाता है कि आवारा श्वानों के बधियाकरण व टीकाकरण के लिए तत्काल प्रभाव से डॉग पकड़ने वाले 5 वाहनों का संचालन किया जाए।  वहीं पकड़े गए श्वानों को नियमानुसार बंधा धर्मपुरा स्थित डॉग शेल्टर में सुरक्षित रखने की व्यवस्था की जाए। नियमों की अवहेलना पाए जाने पर निविदा शर्तों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।  सूत्रों के अनुसार अभी तक जहां बधियाकरण व  टीकाकरण के लिए पकड़े गए श्वानों को निर्धारित समय बाद वापस उसी जगह पर छोड़ा जा रहा था जहां से पकड़ा गया था। लेकिन कोटा दक्षिण आयुक्त द्वारा जारी आदेश के अनुसार अब ऐसा नहीं होगा। अब श्वानों को फिलहाल श्वानशाला के शेल्टर में ही रखा जाएगा। जब तक इस संबंध में कोई अग्रिम आदेश नहीं आ जाता। </p>
<p><strong>गिनती के कैनाल, सीमित डॉग रखे जाएंगे</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण की श्वानशाला में फिलहाल 33 ही कैनल बनी हुई है। जहां बधियाकरण व टीकाकरण वाले श्वानों को कुछ दिन रखा जाता है। यहां सीमित डॉग को रखा जा सकेगा। जबकि अधिक श्वानों को रखने के  लिए अलग से व्यवस्था करनी होगी।  बधियाकरण व टीकाकण करने वाली फर्म के प्रतिनिधियों का कहना है कि आयुक्त का आदेश देर से प्राप्त हुआ। उसकी पालना की जाएगी। लेकिन नियमित प्रक्रिया के तहत अभी तक एक -दो वाहनों से ही श्वान पकड़ रहे थे। अब इनकी संख्या बढ़ाकर 5 कर दी जाएगी।</p>
<p><strong>पशु प्रेमियों में हडकम्प, आमजन में खुशी</strong><br />कोटा दक्षिण आयुक्त द्वारा जारी आदेश की जानकारी मिलते ही जहां पशु प्रेमियों में हडकम्प मच गया है। वहीं आमजन ने इससे राहत महसूस की है। पशु प्रेमियों ने सोमवार को ही नगर निगम कार्यालय पहुंचकर इस संबंध में जानकारी लेने व इससे संबंधित काम को स्वयं करने की इच्छा जाहिर  की है। वहीं लोगों का कहना है कि इस  तरह का आदेश काफी समय पहले ही जारी कर दिया जाना चाहिए था। कम से कम शहर से श्वानों की संख्या तो कम होगी। श्वानों को नुकसान नहीं पहुंचाया जाए लेकिन उन्हें शहर से दूर किया जाए।  सूत्रों के अनुसार इस आदेश से श्वानों को रिहायशी इलाकों से हटाया जाएगा।  बधियाकरण व टीकाकरण करने वाली फर्म के प्रतिनिधियों का कहना है कि आदेश के तहत फिलहाल जिन श्वानों को पकड़ा गया है उन्हें शेल्टर  में ही रखा जाएगा। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />आयुक्त द्वारा यह आदेश जनहित में है। इस संबंध में उन्होंने यू ओ नोट भी लिखा था। लेकिन श्वानों को रखने के लिए शेल्टर की व्यवस्था करनी होेगी। निगम के पास बंधा में जगह है जहां टीनशेड बना हुआ है और एंगल भी लगी हुई है। वहां फेसिंग करवाकर जितने श्वानों को रखा जा सकता है उन्हें रखेंगे। साथ ही टेंडर जारी कर अलग से व्यवस्था करने के आदेश भी दिए गए हैं। यदि कोई संस्था निगम द्वारा किए जा रहे खर्च से कम खर्च में शेल्टर होग की व्यवस्था संभालने को तैयार होगी तो उस पर भी विचार किया जाएगा। निगम का मकसद श्वानों को नुकसान पहुंचाना या पशु प्रेमियों की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है। लेकिन आमजन को राहत देने के लिए उनके हित में भी काम करना आवश्यक है। इसके लिए जो भी संभव होगा किया जाएगा। <br /><strong>-राजीव अग्रवाल, महापौर, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>
<p>सुप्रीम कोर्ट द्वारा जो आदेश दिया था वह दिल्ली एनसीआर के लिए था। हालांकि उस पर भी पुन: विचार किया जा रहा है। फिलहाल कोटा उत्तर में श्वानों को शेल्टर में रखने का कोई आदेश जारी नहीं किया है। रा’य सरकार द्वारा जो भी आदेश प्राप्त होगा। उसके अनुसार श्वानों को रखने, खिलाने व उनकी देखभाल कीपुख्ता व्यवस्था करने के बाद भी आगे की कार्यवाही की जाएगी। <br /><strong>-अशोक त्यागी, आयुक्त, नगर निगम कोटा उत्तर </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Aug 2025 15:16:03 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सड़कों पर मवेशियों का हुडदंग, संकट में बच्चों की जान</title>
                                    <description><![CDATA[निगम में शिकायतों का अम्बार लगा लेकिन सड़कों से आवारा मवेशी नहीं हट सके। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/cattle-clash-on-the-roads--lives-of-children-in-danger/article-55265"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/sadako-pr-maveshiyo-ka-huddang,-sankat-me-bachho-ki-jaan...kota-news-23-08-2023-(2).jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। विज्ञान नगर छत्रपुरा तालाब की मुख्य सड़क पर स्कूली बच्चों की जान जोखिम में रहती है। डेढ़ किमी लम्बी सड़क पर 4 स्कूल, 2 मदरसे और 2 धार्मिक स्थल हैं। घड़ी के कांटे दोपहर 12 से 2 के बीच पहुंचते ही स्कूल संचालक और अभिभावकों की धड़कनें तेज हो जाती है। अनहोनी के डर से माथे पर चिंता की लकीरें उभर आती है। वहीं, जनप्रतिनिधियों व निगम अधिकारियों के  रवैये से बाशिंदों में नाराजगी है। पार्षदों की निष्क्रियता से चार वार्डों को जोड़ती सड़क आवारा मवेशियों का अड्ढ़ा बन गई। बच्चों के घर से स्कूल-आने जाने के दौरान हादसे का डर लगा रहता है। निगम में शिकायतों का अम्बार लगा लेकिन सड़कों से आवारा मवेशी नहीं हट सके।  </p>
<p><strong>4 वार्डों की सीमा फिर भी मवेशियों का जमावड़ा  </strong><br />छात्रपुरा तालाब निवासी मोहम्मद हनीफ, जगदीश प्रजापति ने बताया कि ईएसआई हॉस्पिटल स्थित लिंक रोड से मस्जिद चौराहे तक छत्रपुरा तालाब रोड डेढ़ किमी लम्बा है, यह सड़क वार्ड 40, 41, 57 और 39 की सीमा है। रोड के आमने-सामने की कॉलोनी इन चार वार्डों में बंटी हैं। जिनके बाशिंदों ने अपने पार्षदों को  शिकायत दी लेकिन ध्यान नहीं दिया। हालांकि, वार्ड 41 के पार्षद ने आयुक्त व जिला कलक्टर को ज्ञापन देकर समाधान की गुहार लगाई फिर भी कार्रवाई नहीं हुई। </p>
<p><strong>सड़कों पर धमाचौकड़ी, 12 बच्चे जख्मी </strong><br />छत्रपुरा तालाब मुख्य सड़क पर दो दर्जन से अधिक मवेशियों का जमावड़ा लगा रहता है, जो दिनभर धमाचौकड़ी मचाते हैं। यहां से गुजरने के दौरान कई वाहन चालक मवेशियों से टकराकर चोटिल हो चुके हैं। वहीं, बच्चोें के स्कूल से घर लौटते समय हादसे का डर रहता है। पूर्व में मवेशियों की टक्कर से 10 से 12  बच्चे जख्मी हो चुके हैं।  </p>
<p><strong>वाहन चालक व स्टूडेंट्स हो चुके चोटिल</strong><br />स्थानीय निवासी शमशेर, ब्रजबिहारी, महेंद्र, मनोज सैनी ने बताया कि स्कूलों के बाहर ही आवारा मवेशियों का झुंड़ लगा रहता है। सात दिन पहले ही महात्मा गांधी पार्क के पास मवेशी की टक्कर से बाइक सवार जख्मी हो गया। वहीं, गत माह मस्जिद रोड पर स्कूल जाते समय सांड ने दो बच्चों को चोटिल कर दिया। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं वार्ड पार्षद</strong><br />क्षेत्रवासियों की शिकायत पर मवेशियों को पकड़ने के लिए गाड़ी बुलाते हैं लेकिन मवेशी मिलते ही नहीं। अब फिर से गोशाला चेयरमैन से आग्रह कर समाधान करवाएंगे। <br /><strong>- कपिल शर्मा, पार्षद, वार्ड 57</strong></p>
<p>छत्रपुरा तालाब मार्ग पर मवेशियों की समस्या को लेकर  वार्ड वासियों के साथ निगम कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन करेंगे। वहीं, सड़क पर चारा डालने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ निगम द्वारा नियमानुसार कार्रवाई करवाएंगे। <br /><strong>- साहिब हुसैन, पार्षद वार्ड 41</strong></p>
<p><strong>क्या कहते हैं स्कूल संचालक</strong><br />निगम में कमीशन का खेल छत्रपुरा तालाब मुख्य मार्ग पर आवारा मवेशी ज्वलंत समस्या है। दिनरात सड़कों पर दौड़ते-लड़ते रहते हैं। कई बार विद्यार्थी जख्मी हो चुके हैं। स्कूल व घरों के बाहर खड़े वाहनों को टक्कर मारकर क्षतिग्रस्त कर दिया। सड़क के आमने-सामने के वार्ड 41 व 57 दोनों पार्षदों से शिकायत की लेकिन उन्होंने निगम अधिकारियों द्वारा सुनवाई न करने का हवाला देकर लाचारी दिखाते हैं। अधिकारी भी बिना मौका मुआयना किए कैटल केप्चर वाहनों के बिल पास कर रहे हैं।  <br /><strong>- अजिम पठान, स्कूल संचालक, वार्ड 41 </strong></p>
<p><strong>बच्चे हो गए जख्मी</strong><br />हाल ही में स्कूल की छुट्टी होने पर एक स्टूडेंट्स घर जा रहा था, तभी मस्जिद चौराहे पर दौड़ते हुए सांड ने टक्कर मारकर घायल कर दिया। लोग सड़कों पर चारा डालते हैं। जिसकी वजह से मवेशी आपस में लड़ते हैं, धमाचौकड़ी मचाते हैं। वाहन चालकों व राहगीरों को दुकानों में घुसकर जान बचानी पड़ती है। पिछले साल भी आठ से दस बच्चे मवेशियों के कारण चोटिल हो चुके हैं। <br /><strong>- मोहन सैनी, स्कूल संचालक, वार्ड 39</strong></p>
<p>मेरे वार्ड से अब तक पांच-छह बार मवेशियों को पकड़वा चुका हूं।  यूडीएच मंत्री ने शहर को कैटल फ्री करने के लिए देवनारायण योजना में गौशाला बनाई और चारे-पानी की व्यवस्था भी कर रखी है। इसके बावजूद अधिकारियों की लापरवाही से शहर कैटल फ्री नहीं हो पा रहा। वहीं, गोशाला अध्यक्ष की जिम्मेदारी है कि वे शहर के अंदरूनी इलाकों को कैटल फ्री करवाएं।  <br /><strong>- गफ्फार अंसारी, पार्षद, वार्ड 40 दक्षिण</strong></p>
<p>वार्ड में आवारा मवेशियों की समस्या है, शिकायत मिलने पर मवेशियों को पकड़ने के लिए गाड़ी बुलवाते हैं। वार्डवासियों को भी जागरूक होने की जरूरत है। स्कूलों के आसपास मवेशियों का झुंड रहता है तो हमें सूचना दें, हम मवेशी पकड़वाएंगे।<br /><strong>-मनोज गुप्ता, पार्षद, वार्ड 39 दक्षिण</strong></p>
<p>मवेशियों को पकड़ने में सबसे बड़ी समस्या सुरक्षा इंतजामों का अभाव है। आवारा मवेशी पकड़ने के दौरान कर्मचारियों के साथ तीन-चार बार मारपीट हो चुकी है। पशुपालक उनसे अभद्रता व हाथापाई कर गाड़ी में बंद दूसरे मवेशियों को भी छुड़ा लेते हैं। मैंने दक्षिण निगम आयुक्त को लिखित में पत्र देकर सुरक्षा जाब्ता उपलब्ध करवाने की मांग की है लेकिन अब तक नहीं मिला। ऐसे में कर्मचारियों ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं। पूर्व में बरसात के समय शहरी सीमा पर नाकाबंदी करवाई जाती थी लेकिन इस बार तो करवाई ही नहीं। <br /><strong>-जितेंद्र सिंह, चेयरमैन, गोशाला समिति नगर निगम दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 24 Aug 2023 11:50:10 +0530</pubDate>
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                <title>आवारा कुत्तों को खिलाने के अधिकार पर हाई कोर्ट के फैसले पर 'सुप्रीम' रोक</title>
                                    <description><![CDATA[उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली उच्च न्यायालय उस आदेश के अमल पर रोक लगा दिया है जिसमें सामुदायिक कुत्तों को खाने का अधिकार है और नागरिकों को उन्हें खिलाने का अधिकार है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/supreme-stay-on-high-court-s-decision-on-right-to-feed-stray-dogs/article-5555"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/supreme-court.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली उच्च न्यायालय उस आदेश के अमल पर रोक लगा दिया है जिसमें सामुदायिक कुत्तों को खाने का अधिकार है और नागरिकों को उन्हें खिलाने का अधिकार है। न्यायमूर्ति विनीत सरन और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की शीर्ष अदालत की पीठ ने शुक्रवार को स्वयंसेवी संस्था'ह्यूमन फाउंडेशन फॉर पीपल एंड एनिमल' की विशेष अनुमति याचिका पर दिल्ली सरकार और एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया तथा अन्य को को नोटिस जारी जवाब तलब किया है।<br /><br />दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति जे आर मिधा की एकल पीठ ने पिछले वर्ष जून के अपने फैसले में कहा था कि आवारा कुत्ते एक समुदाय के जीव हैं। उन्हें भोजन का अधिकार है। आम लोगों को उन्हें एक तय स्थान पर खिलाने का अधिकार है। आवारा कुत्तों को खाने का स्थान नगर निगम या रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के विचार विमर्श के आधार पर  तय किए जाएंगे।<br /><br />'ह्यूमन फाउंडेशन फॉर पीपल एंड एनिमल्स' ने उच्च न्यायालय के ऐसे फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है। याचिकाकर्ता में कहा गया है कि दिल्ली उच्च न्यायालय का यह फैसला उच्चतम न्यायालय के 2015 के एक फैसले  के उलट है। फैसले के खिलाफ अपील दायरकर्ता के वकील निर्निमेश दुबे ने दलील देते हुए कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले के कारण लोगों की जान के लिए खतरनाक साबित हो रहे आवारा कुत्तों को भी नहीं पकड़ा जा सकता। याचिका में कहा गया है कि उच्च न्यायालय के फैसले से आवारा कुत्तों की संख्या में तेज वृद्धि होगी जिससे लोगों की जान को खतरा बढ़ गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/supreme-stay-on-high-court-s-decision-on-right-to-feed-stray-dogs/article-5555</link>
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                <pubDate>Sat, 05 Mar 2022 19:03:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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