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                <title>expenditure - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>वित्तीय वर्ष 2025-26 के व्यय का विवरण IFMS पर अपलोड करने के निर्देश, 7 अप्रैल तक रिपोर्ट अनिवार्य</title>
                                    <description><![CDATA[वित्त विभाग ने सभी विभागाध्यक्षों और बजट नियंत्रण अधिकारियों को वित्तीय वर्ष 2025-26 के आय-व्यय और बचत का विवरण IFMS पोर्टल पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। 31 मार्च 2026 तक के वास्तविक व्यय का सत्यापन कर 1 अप्रैल को अपलोड करना होगा। 
 ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/instructions-to-upload-details-of-expenditure-for-the-financial-year/article-146330"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/secratrait2.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। वित्त (आय-व्ययक) विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के वार्षिक व्यय का विवरण एकीकृत वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (IFMS) के माध्यम से उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए हैं। इस संबंध में विभाग ने सभी विभागाध्यक्षों और बजट नियंत्रण अधिकारियों को पत्र जारी कर आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने को कहा है।</p>
<p>जारी निर्देशों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 समाप्ति की ओर है, ऐसे में 31 मार्च 2026 तक राज्य सरकार के लेखों का आय-व्यय और बचत का विवरण (Excess/Saving Statement) तथा पुनर्विनियोजन आदेश (Re-appropriation Orders) महालेखाकार राजस्थान को उपलब्ध कराया जाना आवश्यक है। इसके लिए विभागों को 1 अप्रैल 2026 को IFMS पोर्टल पर उपलब्ध 31 मार्च 2026 तक के वास्तविक व्यय का विभागीय लॉगिन के माध्यम से सत्यापन कर अपलोड करना होगा।</p>
<p>विभाग ने बताया कि इसके लिए एक्सेल फाइल उपलब्ध कराई जाएगी, जिसमें बीएफसी टाइप, हेड टाइप, मेजर हेड, सब मेजर हेड, माइनर हेड, सब हेड, ग्रुप हेड, ऑब्जेक्ट हेड, राजकोष के अनुसार व्यय तथा विभाग द्वारा जोड़ी या घटाई गई राशि सहित अंतिम व्यय का विवरण दर्ज करना होगा।</p>
<p>साथ ही निर्देश दिए गए हैं कि विभागीय स्तर पर आवश्यक प्रविष्टियां सावधानीपूर्वक की जाएं और यदि IFMS के बाहर कोई व्यय हुआ है तो उसका भी समायोजन किया जाए। विभागों को यह जानकारी 7 अप्रैल 2026 तक बजट विभाग को उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Mar 2026 12:02:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आमदनी अठन्नी, खर्चा रूपय्या...</title>
                                    <description><![CDATA[वर्तमान में रिवर फ्रंट पर कमाई से ज्यादा खर्चा हो रहा है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/income-is-8-paise--expenditure-is-one-rupee/article-89774"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/1rtrer-(5)7.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। आमदनी अठन्नी, खर्चा रूपय्या...यह कहावत इन  दिनों सही साबित हो रही है चम्बल रिवर फ्रंट पर। नगर विकास न्यास की ओर से करोड़ों रुपए खर्च कर चम्बल नदी के किनारे विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल चम्बल रिवर फ्रंट तो बना दिया। लेकिन अब यह केडीए के लिए सफेद हाथी साबित होता जा रहा है। केडीए की ओर से यहां  हर महीने करीब दो करोड़ रुपए का खर्चा किया जा रहा है जबकि कमाई मात्र एक करोड़ रुपए के करीब हो ही रही है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय में नगर विकास न्यास के माध्यम से करीब 1442 करोड़ रुपए खर्च करके चम्बल नदी के किनारे रिवर फ्रंट का निर्माण किया गया। कोटा बैराज से नयापुरा की रियासतकालीन पुलिया तक करीब पौने तीन किलोमीटर एक तरफ यानि दोनों तरफ करेीब साढ़े पांच कि.मी. का निर्माण किया गया। यहां नदी के दोनों किनारों पर करीब 26 घाट बनाए गए। जिन्हें देखने के लिए शहर ही नहीं दूरदराज से लोग तो आ रहे हैं लेकिन यह केडीए के लिए फायदे का सौदा नहीं बन सका है। </p>
<p><strong>एक साल हुआ उद्घाटन हुए</strong><br />चम्बल रिवर फ्रंट का उद्घाटन पिछले साल 12 सितम्बर 2023 को किया गया था। उसके बाद से शुरुआत के दो महीने तक यहां कोटा वालों के लिए प्रवेश नि:शुल्क रखा गया। साथ ही बाहर से आने वालों से दो सौ रुपए प्रवेश टिकट लगाया गया। रिवर फ्रंट का उद्घाटन हुए एक साल का समय हो गया है। लेकिन अभी तक केडीए यहां न तो कमाई के संसाधनों को विकसित कर सका है और न ही इसे फायदे का सौदा बना सका है। </p>
<p><strong>मेन पावर सप्लाई पर दो करोड़ रुपए खर्चा</strong><br />पूर्व की कांग्रेस सरकार के समय ही इस रिवर फ्रंट के संचालन का ठेका किया गया। गुरुग्राम की निजी फर्म को यहां मेन पावर सप्लाई का ठेका दिया गया। जिसमें साफ सफाई से लेकर सुरक्षा गार्ड तक और टिकट काटने से लेकर अन्य व्यवस्थाओं के लिए कम्पनी ने यहां अपने कर्मचारी लगाए हुए हैंÞ। उसकी ऐवज में केडीए निजी फर्म को हर महीने दो करोड़ रुपए का भुगतान किया जा रहा है। </p>
<p><strong>कमाई का जरिया सीमित</strong><br />रिवर फ्रंट पर कमाई का सबसे बड़ा जरिया यहां बनी करीब दो सौ दुकानें हैं। जिन्हें किराए पर देकर केडीए मोटी कमाई कर सकता है। लेकिन एक साल बाद भी अभी तक यहां गिनती की मात्र एक दर्जन दुकानें भी किराए पर नहीं दी जा सकी है। जिससे केडीए को कमाई बहुत कम हो रही है। वहीं दो सौ रुपए प्रवेश टिकट के अलावा यहां प्री वेडिंग शूटिंग, वाटर पार्क व अन्य शूडिंग के चार्ज भी घंटों के हिसाब से वसूल किए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार रिवर फ्रंट पर हर दिन औसत करीब दो हजार से अधिक लोग घूमने के ुलिए आ रहे हैं। केडीए को यहां से हर महीने करीब एक से सवा करोड़ रुपए ही कमाई हो रही है जबकि खर्चा इससे दोगुना हो रहा है। </p>
<p><strong>दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया करेेंगे</strong><br />केडीए के सचिव कुशल कोठारी का कहना है कि रिवर फ्रंट पर दुकानें तो काफी संख्या में है जिनके आवंटन की पूर्व में प्रक्रिया की गई थी। लेकिन कई दुकानदारों ने एनजीटी के विवाद के चलते यहां दुकानें शुरू नहीं की थी। अब वहां से मामला स्पष्ट हो गया है। जिससे दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया शीघ्र ही शुरू की जाएगी। वर्तमान में रिवर फ्रंट पर कमाई से ज्यादा खर्चा हो रहा है। ऐसे में यहां कमाई के संसाधन बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। जिला कलक्टर व केडीए आयुक्त डॉ. रविन्द्र गोस्वामी ने गुरुवार शाम को केडीए कार्यालय में अधिकारियों की बैठक ली थी। जिसमें शहर के विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। साथ ही केडीए की आय बढ़ाने समेत कई अन्य विषयों पर भी चर्चा हुई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Sep 2024 15:47:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हीरो मोटोकॉर्प पर आई-टी सर्च ऑपरेशन पड़ताल: हीरो मोटोकॉर्प ने 7% टैंक शेयर किया,  जिसमें 1,000 करोड़ रुपये के फर्जी खर्च का खुलासा </title>
                                    <description><![CDATA[कंपनी ने दिल्ली में एक फार्महाउस के लिए 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का फर्जी खर्च और 100 करोड़ रुपये से अधिक का नकद लेनदेन किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/it-search-operation-probe-on-hero-motocorp--hero-motocorp-shares-7--tank--exposes-fraudulent-expenditure-of-rs-1-000-crore/article-6958"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/hero1.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। हीरो मोटोकॉर्प के शेयरों में मंगलवार को 8 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई, जब मीडिया रिपोर्टों में कहा गया कि आयकर विभाग ने पाया है कि कंपनी ने दिल्ली में एक फार्महाउस के लिए 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का फर्जी खर्च और 100 करोड़ रुपये से अधिक का नकद लेनदेन किया है।</p>
<p>बीएसई पर शेयर 7 फीसदी की गिरावट के साथ 2,208.35 रुपये पर बंद हुआ। इसने दिन के निचले स्तर 2,155 रुपये को छुआ और 52 सप्ताह के निचले स्तर 2,148 रुपये से बहुत दूर था।<br /><br /> एलकेपी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ अनुसंधान विश्लेषक अश्विन पाटिल ने कहा कि एक कमजोर दृष्टिकोण के कारण और महामारी शुरू होने के बाद से दोपहिया वाहनों की अधिग्रहण लागत में गिरावट के बावजूद, लंबी अवधि में स्टॉक हमारे लिए बहुत आकर्षक नहीं लग रहा है, मुख्य रूप से इसकी मात्रा पर दबाव और ईंधन की लागत में वृद्धि, शहरी और ग्रामीण दोनों बाजारों में धीमी रिकवरी और 25-30% की बढ़ोतरी को देखते हुए। पाटिल ने कहा कि स्टॉक में आज दिखाई गई घुटने की प्रतिक्रिया में कल कुछ सुधार हो सकता है, बशर्ते प्रबंधन सड़क पर संतोषजनक स्पष्टीकरण दे।<br /><br />उल्लेखनिय है कि आयकर विभाग ने 23 मार्च को हीरो मोटोकॉर्प और उसके अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक पवन मुंजाल पर दिल्ली एनसीआर में कई स्थानों पर तलाशी और जब्ती अभियान चलाया था, जो 26 मार्च को समाप्त हुआ था। तलाशी अभियान में दिल्ली एनसीआर के विभिन्न स्थानों में फैले 40 से अधिक परिसर शामिल थे। <br /><br />सूत्रों के अनुसार तलाशी अभियान के दौरान बड़ी संख्या में आपत्तिजनक सबूत हार्ड कॉपी दस्तावेजों और डिजिटल डेटा के रूप में जब्त किए गए हैं। इन सबूतों से पता चला कि समूह ने फर्जी खरीदारी की थी, भारी मात्रा में बेहिसाब नकद खर्च किया था और आवास प्रविष्टियां प्राप्त की थीं, जो कुल मिलाकर 1000 करोड़ रुपये से अधिक थी। विभाग को दिल्ली के छतरपुर में एक फार्महाउस की खरीद में 100 करोड़ रुपये से अधिक के नकद लेनदेन के सबूत भी मिले।<br /><br />सू्त्रों के अनुसार मुंजाल ने छतरपुर में एक फार्महाउस खरीदा जहां टैक्स बचाने के लिए फार्म हाउस के बाजार मूल्य में हेरफेर किया गया और काले धन का इस्तेमाल 100 करोड़ रुपये से अधिक नकद भुगतान करने के लिए किया गया जो कि आईटी अधिनियम की धारा 269एसएस का उल्लंघन है। आयकर अधिनियम की धारा 269SS के अनुसार, अचल संपत्ति का लेन-देन करते समय, 100 प्रतिशत जुर्माना लगाया जाएगा यदि विक्रेता ने खरीदार से 20,000 रुपये या उससे अधिक की राशि नकद में स्वीकार की है। आयकर विभाग ने पवन मुंजाल के साथ-साथ कंपनी के कुछ अधिकारियों के ठिकानों पर भी छापेमारी की है। मुंजाल के खिलाफ आरोप है कि उन्होंने अपने खातों में बोगस खर्च दिखाए हैं। आईटी की टीम को जो संदेहास्पद खर्च मिले हैं, उसमें कुछ इनहाउस कंपनियों के भी हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 29 Mar 2022 18:35:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>प्रदेश सरकार एक टाइगर पर 50 लाख कर रही है खर्च  </title>
                                    <description><![CDATA[केन्द्र और प्रदेश सरकार एक टाइगर पर मिलकर करीब 50 लाख 85 हजार रुपए प्रति वर्ष खर्च कर रही है। दरअसल, प्रदेश के तीनों बाघ अभयारण्यों में अभी करीब 90 बाघ हैं, जिन पर केन्द्र और राज्य सरकार ने मिलकर 45 करोड़, 85 लाख रुपए खर्च किए हैं। जिसमें केन्द्र सरकार ने वर्ष 2021-22 में  करीब 21 करोड़, 85 लाख रुपए खर्च किए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/state-govt-doing-expenditure-50-lakh-at-one-tiger/article-5560"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/5mar52.u-copy1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। केन्द्र और प्रदेश सरकार एक टाइगर पर मिलकर करीब 50 लाख 85 हजार रुपए प्रति वर्ष खर्च कर रही है। दरअसल, प्रदेश के तीनों बाघ अभयारण्यों में अभी करीब 90 बाघ हैं, जिन पर केन्द्र और राज्य सरकार ने मिलकर 45 करोड़, 85 लाख रुपए खर्च किए हैं। केन्द्र सरकार ने  करीब 21 करोड़, 85 लाख रुपए खर्च किए। तीनों बाघ परियोजना में तैनात अधिकारी-कर्मचारियों को राज्य सरकार ने वेतन के तौर पर 24 करोड़ रुपए दिए हैं।</p>
<p>केन्द्र सरकार प्रतिवर्ष एक निश्चित राशि देती है। इस राशि से बाघों के संरक्षण के साथ ही पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन का विकास होता है।<br /><strong>- डॉ. डीएन पाण्डेय, प्रधान मुख्य वन संरक्षक   </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 06 Mar 2022 11:43:21 +0530</pubDate>
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