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                <title>water supply department - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>water supply department RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>डिमांड से 9 करोड़ लीटर पानी ज्यादा, फिर भी कोटा रह रहा प्यासा</title>
                                    <description><![CDATA[41 करोड़ लीटर रोज सप्लाई के बावजूद टैंकरों पर निर्भर लोग,प्रति व्यक्ति आवश्यकता से अधिक पानी कर रहा खर्च।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/90-million-liters-of-surplus-water%E2%80%94yet-kota-remains-thirsty/article-151824"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(3).jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा शहर में पानी की कमी नहीं है लेकिन प्रबंधन की खामी व लोगों की गलत आदतें प्यास बढ़ा रही है। हालात ये हैं कि शहर को जरूरत से करीब 20% ज्यादा पानी मिल रहा है, इसके बावजूद टेल क्षेत्रों में लोग आज भी टैंकरों के भरोसे जी रहे हैं। करोड़ों लीटर पानी रोजाना सप्लाई होने के बावजूद नलों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा। पेश है नवज्योति की ग्राउंड रिपोर्ट।</p>
<p><strong>32 करोड़ डिमांड सप्लाई 41 करोड़ लीटर पानी</strong></p>
<p>जलदाय विभाग के अनुसार, कोटा शहर की कुल आबादी करीब 20 लाख है। इनमें 16.50 लाख स्थानीय निवासी हैं और 3 से 4 लाख फ्लोटिंग यानी बाहरी लोग शामिल हैं। ऐसे में प्रति व्यक्ति 135 लीटर पानी प्रतिदिन डिमांड के हिसाब से बीस लाख आबादी को रोजाना 32 करोड़ लीटर पानी की आवश्यकता रहती है। जबकि, जलदाय विभाग के तीनों जलशोधन केंद्र अकेलगढ़, सकतपुरा व श्रीनाथपुरम से प्रतिदिन 410 एमएलडी यानी 41 करोड़ लीटर पानी की सप्लाई की जा रही है। यानी, डिमांड से 9 करोड़ लीटर पानी ज्यादा दिया जा रहा है। इसके शहरवासियों को टैंकरों से प्यास बुझानी पड़ रही है।</p>
<p><strong>प्रति व्यक्ति 135 लीटर जरूरत, खर्च हो रहा 170 से ज्यादा</strong></p>
<p>सरकारी नियमों के अनुसार, प्रति व्यक्ति को प्रतिदिन 135 लीटर पानी की जरूरत मानी गई है, लेकिन शहरवासी170 से 200 लीटर पानी खर्च कर रहे हैं। जिससे जल वितरण व्यवस्था गड़बड़ा रही है। वहीं, कई जगह पाइप लाइनों के लीकेज के कारण भी पानी व्यर्थ बह जाता है। नतीजन, कुल आबादी को डिमांड से 20% ज्यादा पानी मिलने के बावजूद अंतिम छोर तक पानी पहुंच ही नहीं पा रहा।</p>
<p><strong>आखिर क्यों मच रही हाय-तौबा</strong></p>
<p><strong>-असंतुलित जल वितरण : </strong>शहर के हेड क्षेत्रों में पर्याप्त दबाव से पानी मिल रहा है, जिससे दोहन बढ़ रहा लेकिन विभाग द्वारा अंकुश नहीं लगाया जा रहा। नतीजन, टेल क्षेत्रों तक पानी पहुंचते-पहुंचते सप्लाई कमजोर हो जाती है।<br /><strong>- एक ही प्लांट पर ज्यादा निर्भरता : </strong>अकेलगढ़ प्लांट पर शहर का बड़ा हिस्सा निर्भर है, जिससे वितरण में असमानता बढ़ रही है। जिसकी वजह से टैंकर चलाने पड़ रहे हैं।<br /><strong>- पाइपलाइन और प्रेशर मैनेजमेंट की कमी : </strong>अंतिम छोर तक पर्याप्त प्रेशर से पानी पहुंचे, इसकी कोई व्यवस्था नहीं है। जिससे कई इलाकों में सप्लाई अधूरी रह जाती है।<br /><strong>- टेल एरिया की उपेक्षा : </strong>आंवली, रोजड़ी, नयागांव, दौलतगंज, रानपुर, जगपुरा, बंधा धर्मपुरा जैसे इलाकों में पाइप लाइनों को अकेलगढ़ प्लांट से नहीं जोड़ा गया। नतीजन, नियमित सप्लाई के बजाय टैंकरों से पानी देना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>क्षेत्रवाइज फिल्टर प्लांट बने तो हो समाधान</strong></p>
<p>क्षेत्रवार फिल्टर प्लांट की जरूरत : जलदाय विभाग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक हर क्षेत्र में अलग-अलग जल शोधन केंद्र यानी फिल्टर प्लांट नहीं बनेंगे, तब तक समस्या बनी रहेगी।<br />अमृत 2.0 योजना बनेगी गेमचेंजर : अमृत 2.0 योजना के तहत उद्योग नगर क्षेत्र में शिवाजी पार्क के पास 100 एमएलडी का नया फिल्टर प्लांट प्रस्तावित है। जिसके बनने के बाद से डीसीएम, प्रेम नगर, रायपुरा, कंसुआ, गोविंद नगर सहित अन्य इलाकों को सीधी सप्लाई मिलेगी और अकेलगढ़ पर दबाव खत्म होगा।</p>
<p>हेड-टेल गैप खत्म करना होगा : शिवाजी पार्क के अलावा रानपुर में भी अमृत 2.0 योजना के तहत नया प्लांट बनना है। यहां 40 एमएलडी क्षमता का फिल्टर प्लांट प्रस्तावित है। जिसके बनने के बाद लखावा, रानपुर, देवनारायण कॉलोनी जैसे दूरस्थ क्षेत्रों को राहत मिलेगी। साथ ही पानी का समान वितरण संभव होगा और अंतिम छोर तक पानी पहुंचाना आसान हो जाएगा।</p>
<p>टैंकर होंगे बंद, घरों तक सीधे पहुंचेगा पानी : अमृत 2.0 योजना में दो जगहों पर नए फिल्टर प्लांट बनने से शहर की बड़ी आबादी में जल वितरण के दबाव से अकेलगढ़ से मुक्त होगा और इसका फायदा आंवली, रोजड़ी, नयागांव, दौलतगंज, बंधा धर्मपुरा हाड़ौती कॉलोनी सहित अन्य इलाकों के बाशिंदों को मिलेगा। यहां टैंकरों से सप्लाई बंद होगी और सीधे अकेलगढ़ से पाइप लाइन के जरिए पानी मिल सकेगा।</p>
<p>शहर को डिमांड से करीब 20 प्रतिशत ज्यादा पानी सप्लाई किया जा रहा है। गर्मी में पानी की डिमांड बढ़ जाती है। टैंकर अधिकतर ऐसे इलाकों में चल रहे हैं जहां हमारी पाइप लाइन नहीं है लेकिन केडीए द्वारा आधारभूत सुविधाएं विकसित कर दी गई है। वहीं, आंवली, रोजड़ी क्षेत्रों में पाइप लाइन डालने का कार्य चल रहा है। मई के आखिरी सप्ताह तक सप्लाई पाइप लाइन से करने की पूरी कोशिश की जा रही है।</p>
<p><strong>-    दीपक कुमार झा, एसई जलदाय विभाग कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 14:28:11 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>निजीकरण के विरोध में जलदाय कर्मचारी कल करेंगे जलभवन का घेराव, हजारों कर्मचारी होंगे शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[प्रान्तीय नल मजदूर यूनियन (इंटक) के आह्वान पर जलदाय विभाग के हजारों कर्मचारी जलभवन पर ओएंडएम निजीकरण के विरोध में घेराव और प्रदर्शन। प्रदेशाध्यक्ष संजय सिंह शेखावत और कार्यकारी अध्यक्ष बाबूलाल शर्मा ने बताया कि आंदोलन में तकनीकी कर्मचारी, मंत्रालय स्टाफ और अभियंता बड़ी संख्या में शामिल।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/water-supply-employees-will-surround-jal-bhavan-tomorrow-in-protest/article-146193"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/jal-bhavan.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रान्तीय नल मजदूर यूनियन (इंटक) राजस्थान (जलदाय विभाग) के आह्वान पर शुक्रवार को दोपहर एक बजे प्रदेश भर के हजारों की संख्या में कर्मचारी जलभवन पर एकत्रित होकर ओएंडएम निजीकरण के विरुद्ध करंगे जलभवन का घेराव व विरोध प्रदर्शन।</p>
<p>संघ के प्रदेशाध्यक्ष संजय सिंह शेखावत कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष बाबूलाल शर्मा ने संयुक्त रूप से बताया कि यह विरोध निजीकरण करने के विरुद्ध में किया जा रहा है इस विरोध में भारी संख्या में तकनीकी कर्मचारी मंत्रालय कर्मचारी सहित अभियन्ता इस विरोध में शामिल होंगे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Mar 2026 15:54:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>खतरा बैठा ग्राउंड वाटर टैंक में...कोई जानवर गिर जाए तो निकालना भी मुश्किल</title>
                                    <description><![CDATA[जलदाय विभाग के पंप हाउस  के पास स्थित  21 लाख लीटर का ग्राउंड वाटर टैंक।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/danger-lurks-in-the-groundwater-tank----even-rescuing-an-animal-that-falls-in-is-difficult/article-143054"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(12200-x-600-px)-(7)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। एमबीएस परिसर मोर्चरी के पास स्थापित जलदाय विभाग का पंप हाउस , इसी के पास में 21 लाख लीटर का ग्राउंड वाटर टैंक बना हुआ है जिसकी जमीन से ऊंचाई मात्र 7 फीट है और यहां पर चारों तरफ मिट्टी  पड़ी हुई है जिससे कोई भी जानवर इस टंकी की छत/ ढकान पर जा सकता है। छत का हाल ऐसा है कि इसमें छोटा जानवर तो क्या पूरा हाथी उतर जाए ऐसे में यदि कोई जानवर इतने बड़े पानी के जल स्रोत/ स्टोरेज टैंक में उतर जाए या गिर जाए तो उसको निकालने की संभावना तो नगण्य है । क्योंकि बाकी जगह यह ढकी हुई है ऐसे में गिरे हुए जानवर का पता चलना लगभग संभव नहीं है । ऐसी अवस्था में पानी के अंदर मरे  हुए और मर जाने की स्थिति में जल प्रदूषण या जल में होने वाली संभावित बीमारियोंसे भारी नुकसान हो सकता है।</p>
<p>खुले टैंक की उपयोगिता और लगातार उसके द्वारा सप्लाई जारी रखने के मामले पर अधिकारी पहले तो बचते नजर आए बाद में अमृत 2.0 का हवाला देते हुए जल्दी ही नया वाटर टैंक और पंप हाउस तैयार करने की बात कहने लगे। जलदाय विभाग का कहना है कि नये प्रोजेक्ट का मामला 2023 से लंबित चल रहा है, खेडली फाटक क्षेत्र में स्थान चिन्हित हो चुका है जैसे ही प्रस्तावित बजट को मंजूरी मिलती है वहां पर नया टैंक बना दिया जाएगा। अभी जो भी स्थिति है उसे हम रिपेयर करवाएंगे</p>
<p><strong>हैजा,रैबीज जेसी गंभीर बीमारियों का खतरा</strong><br />दूषित जल के पीने से काफी ज्यादा गंभीर बीमारियों के फैलने की संभावना बढ़ जाती है ऐसे में एक साथ पूरे क्षेत्र में यदि ऐसे पानी की सप्लाई होती है तो वहां पर महामारी फैलने की प्रबल संभावना है।यही नहीं जल जनित रोगों में से हैजा अंग्रेजी में जिसे कॉलरा भी कहा जाता है टाइफाइड, हेपेटाइटिस ए एंड ई  होती है।<br />डिसेंट्री सामान्य भाषा में पेचिश या डायरिया कहा जाता है परजीवी संक्रमण के कारण अभी हाल ही में कुछ दिनों पूर्व मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में बड़ी भयावह स्थिति हो गई थी ऐसे में अस्पताल परिसर के भीतर ही जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के द्वारा सप्लाई के काम में ली जा रही इस भूतल जल संग्रह की ऐसी स्थिति से अस्पताल सहित क्षेत्र के लोगों के लिए गंभीर समस्या पैदा हो गई है।</p>
<p>खुले पानी के स्रोतों में यदि कोई रैबीज जैसी गंभीर बीमारी से संक्रमित जानवर गिर जाये तो पानी के जरिए भी यह गंभीर बीमारी फैल सकती है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />ऐसे पानी जिसमे यदि कोई संक्रमित जानवर गिरा है जो गंभीर बीमारी से संक्रमित हो तो पानी के जरिये बीमारी आगे तक फैलने की प्रबल संभावना हो सकती है। इस मामले में जलदाय विभाग व जिम्मेदारों को ध्यान देने की जरूरत है।<br /><strong>-सुरेन्द्र सनाढ्य, नया नोहरा निवासी मरीज के परिजन</strong></p>
<p>किसी प्रकार का खुला जल पीना मानव शरीर के साथ बीमारियों को निमंत्रण देना जैसा है गंभीर बीमारियों को फैलने से नहीं रोका जा सकता यदि पानी में कोई गंभीर संक्रमित वस्तु जानवर या बाहर से कोई पदार्थ मिला दिया जाए!<br /><strong>डॉ. अभिमन्यु शर्मा , वरिष्ठ चिकित्साधिकारी</strong></p>
<p>टैंक बहुत पुराना है नया प्रोजेक्ट प्रपोजल खेडली फाटक जिंद बाबा के प्रस्तावित है अमृत 2.0 में मंजूरी के बाद काम तैयार करवायेंगे।<br /><strong>-श्याम माहेश्वरी, एक्सईएन पीएचईडी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Feb 2026 16:29:30 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का : जलदाय विभाग सक्रिय, टूटी पेयजल लाइन की दुरुस्त, रात 2 बजे तक चला कार्य </title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति में खबर प्रकाशित  होने के बाद विभाग सक्रिय हुआ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news--the-water-supply-department-activated--repaired-the-broken-drinking-water-line--work-continued-until-2-a-m/article-134679"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px)-(4)5.png" alt=""></a><br /><p>कवाई। कस्बे में सड़क निर्माण के दौरान जलदाय विभाग की मुख्य पेयजल लाइन टूटने से करीब एक सप्ताह से हजारों लीटर पानी व्यर्थ बह रहा था। इस समस्या को लेकर दैनिक नवज्योति ने मंगलवार को प्रमुखता से खबर प्रकाशित कि, खबर प्रकाशित होने के बाद  विभाग सक्रिय हुआ और देर रात तक कार्य कर पेयजल लाइने डलवाई। मंगलवार देर शाम सहायक अभियंता रविन्द्र सिंह मीणा, कनिष्ठ अभियंता तुलसी कुमारी पटवा तथा जलदाय विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे। जेसीबी की सहायता से लगभग डेढ़ फीट गहरा व 35 फीट लंबा गड्ढा कर क्षतिग्रस्त पाइपलाइन को दुरुस्त किया गया। साथ ही भविष्य में पुन: समस्या उत्पन्न न हो, इसके लिए दूसरी नई पाइपलाइन भी बिछाई गई। टीम ने रात करीब 2 बजे तक लगातार कार्य कर मरम्मत एवं लाइन बिछाने का कार्य पूरा किया, जबकि शेष फिनिशिंग कार्य बुधवार सुबह किया गया।</p>
<p>सहायक अभियंता रविन्द्र सिंह मीणा ने स्वयं मौके पर रहकर कार्य की निगरानी की। रात में भी निरंतर निरीक्षण व मार्गदर्शन देते हुए उन्होंने कर्मचारियों का उत्साह बढ़ाया। स्थानीय लोगों ने भी उनके इस त्वरित एक्शन और जनसमस्या के प्रति संवेदनशीलता की प्रशंसा की साथ ही कहा कि इस प्रकार का त्वरित समाधान जनहित में सराहनीय कदम है। बुधवार दोपहर लगभग 2 बजे दोबारा हल्का रिसाव दिखाई देने पर सड़क निर्माण संवेदक मौके पर पहुंचे और कनिष्ठ अभियंता को समस्या से अवगत कराया। संवेदक का कहना है कि पाइपलाइन क्षतिग्रस्त रहने से निर्माण कार्य प्रभावित हो रहा था। उन्होंने जलदाय विभाग से स्थायी समाधान कर लाइन को सुरक्षित करने की मांग की है ताकि सड़क निर्माण कार्य गति पकड़ सके। सड़क निर्माण संवेदक हुक्मचंद नागर ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि जिन उपभोक्ताओं ने पेयजल लाइन से अपने घरों तक कनेक्शन ले रखे हैं, वे सड़क निर्माण प्रारंभ होने से पहले अपनी पाइपलाइनें निकाल लें ताकि आगे निर्माण कार्य में बाधा न आए और क्षति से बचा जा सके।</p>
<p><strong> अधिकारी का कहना </strong><br /> आमजन की समस्या को ध्यान में रखते हुए हमारी टीम ने मंगलवार रात देर तक लगातार कार्य किया। करीब रात 2 बजे तक कार्य कर पाइपलाइन बिछाने का काम पूरा कर दिया गया है। अब हमारी मुख्य पेयजल लाइनों से सप्लाई सुचारु रूप से शुरू हो चुकी है। हल्का-फुल्का रिसाव दिखाई देने पर उसका मरम्मत कार्य भी निरंतर जारी है।<br /><strong>- रवींद्र सिंह मीणा, सहायक अभियंता</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Dec 2025 15:29:14 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>43 करोड़ तो वसूल नहीं कर पाए अब 33 करोड़ का और दे दिया टारगेट, सरकारी विभागों पर करोड़ों रुपए बकाया, कैसे होगा टारगेट पूरा ?</title>
                                    <description><![CDATA[इस बार जलदाय विभाग को मिला 78.11 करोड़ का टारगेट।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/they-couldn-t-recover-43-crores--now-they-ve-given-another-target-of-33-crores--government-departments-owe-crores-of-rupees--how-will-the-target-be-met/article-127978"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news-(4)15.png" alt=""></a><br /><p> कोटा। जलदाय विभाग को इस बार राजस्व वसूली के लिए 78.11 करोड़ रुपए का टारगेट मिला है, जिसे पूरा करना अधिकारियों के लिए चुनौती बन गई। गत वर्ष भी 43 करोड़ रुपए की वसूली बकाया रह गई थी। ऐसे में नए वित्तीय वर्ष 2025-26 के टारगेट में 33.11 करोड़ रुपए और जोड़ दिए गए। अब पुराने और नए बकाया बिलों की राशि को मिलाकर कुल 78 करोड़ 11 लाख रुपए का राजस्व विभाग को वसूलना है, जो अधिकारियों के लिए गले की फांस बना हुआ है। क्योंकि,  एक तरफ विभाग कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है तो वहीं, दूसरी तरफ सरकारी विभाग ही वसूली की राह में रोड़ा बने हुए हैं। वर्तमान में सरकारी विभागों पर करोड़ों रुपए की राशि बकाया चल रही है। जिसकी वजह से हर साल जलदाय विभाग का अधूरा रह जाता है। </p>
<p><strong>वसूली के दौरान मिलती है धमकियां</strong><br />नाम न छापने की शर्त पर एईएन ने बताया कि शहर के विभिन्न इलाकों में बकाया वसूली कर रहे हैं। हर दो माह में घरों पर पानी के बिल भेजे जाते हैं लेकिन लोग महीनों तक जमा नहीं करवाते। जब बकाया बिल वसूलने के लिए कर्मचारी घरों पर जाते हैं तो उन्हें धमकियां दी जाती है। अपशब्द कहकर अपमानित किया जाता है। गत वर्ष भी इस तरह की घटना हो चुकी है।  </p>
<p><strong>दो सरकारी विभागों पर तीन साल से 11 करोड़ बकाया</strong><br />सरकारी विभागों में सबसे ज्यादा बकाया नगर निगम कोटा दक्षिण और केडीए पर है। मात्र इन दो विभाग पर ही 11 करोड़ रुपए से ज्यादा पानी का बिल बकाया चल रहा है। जिसे पिछले 3 सालों से जमा नहीं करवाया गया। हालांकि, जल अफसरों द्वारा नोटिस, रिमाइंडर भी दे चुके हैं, इसके बावजूद बिल जमा नहीं करवाया। इस तरह अन्य सरकारी विभागों पर भी करोड़ों पर रुपए बकाया चल रहा है। ऐसे में सरकारी विभाग अपना बकाया बिल राशि जमा करवा दे तो जलदाय विभाग का 90% से ज्यादा टारगेट पूरा हो सकता है। </p>
<p><strong>नगर निगम दक्षिण पर 7.60 करोड़ बकाया</strong><br />जलदाय विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, नगर निगम कोटा दक्षिण पर 7 करोड़ 60 लाख रुपए पानी का बिल बकाया चल रहा है। यह राशि पिछले तीन सालों से बकाया है। गत वर्ष 19 नवम्बर को निगम आयुक्त को नोटिस दिया था। इसके बाद रिमाइंडर भी भेजे गए। लेकिन, निगम द्वारा जल राजस्व जमा नहीं करवाया। जिससे सरकार द्वारा जलदाय विभाग को दिए गए राजस्व लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया। अधिकारियों का कहना है कि नगर निगम ने अपने कार्यक्षेत्र अधीन विभिन्न स्थानों पर कनेक्शन ले रखे हैं, जहां उपभोग हुए पानी का बिल लंबे समय से बकाया चल रहा है। </p>
<p><strong>केडीए ने नहीं भरा 3.50 करोड़ का बिल </strong><br />कोटा विकास प्राधिकरण (केडीए) पर 3 करोड़ 50 लाख रुपए का बिल बकाया चल रहा है। जिसे जमा करवाने के लिए जल अधिकारियों ने गत वर्ष तत्कालीन केडीए सचिव को बकाया राशि जमा करवाने के नोटिस दिए थे। इसके बावजूद विभाग द्वारा अब तक  जल शुल्क जमा नहीं करवाया गया।  जबकि, केडीए के अधीन श्रीनाथपुरम स्टेडियम पर 5.79 लाख, यूआईटी कॉलोनी प्रताप नगर का 9.41 लाख तथा सीएडी रोड स्थित फ्वारा सर्किल का 5.92 लाख रुपए सहित अन्य केडीए अधीन कार्यक्षेत्रों पर लाखों रुपयों का बिल बकाया चल रहा है। </p>
<p><strong>इन विभागोें पर भी लाखों का बिल बकाया </strong><br />सरकारी विभागों पर लाखों-करोड़ों रुपए जल शुल्क राशि बकाया चल रही है। विभाग द्वारा बकाया जमा नहीं करवाने से जल विभाग हर साल अपना टारगेट पूरा नहीं कर पाता। सरकारी विभागों में बीएसएनएल, पोस्ट आॅफिस, कृषि विभाग, सरकारी अस्पताल, पुलिस थाने सहित कई विभागों पर लाखों का बिल बकाया है। </p>
<p><strong>वसूली लक्ष्य पूरा करने के कर रहे प्रयास</strong><br />सरकार से वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए जो राजस्व वसूली लक्ष्य मिला है, उसे शत-प्रतिशत पूरा करने के प्रयास कर रहे हैं।  कर्मचारियों की कमी है। वर्तमान में जो साधन-संसाधन उपलब्ध हैं, उनका पूरा उपयोग कर राजस्व वसूली की जा रही है। वहीं, जिन सरकारी विभागों पर बकाया चल रहा है, उन्हें नोटिस दिए जा रहे हैं। साथ ही आपसी समन्वय व वार्तालाप के माध्यम से भी बकाया जमा करवाने की कोशिश की जा रही है। <br /><strong>- जीवनधर राठौर, एक्सईएन जलदाय विभाग खंड प्रथम</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Sep 2025 15:54:18 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - 78 साल, फिर भी हाल बेहाल पानी तक नहीं पीने को </title>
                                    <description><![CDATA[जिस नदी से ग्रामीण पानी लाते हैं, उसी में जानवर नहाते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/impact-of-the-news--78-years-later--the-situation-is-still-dire--with-no-drinking-water/article-127425"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/_4500-px)-(1)17.png" alt=""></a><br /><p>छीपाबड़ौद। छीपाबड़ौद तहसील क्षेत्र की सहजनपुर ग्राम पंचायत का बिस्लाई गांव आजादी के 78 साल बाद भी पानी जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित है। राजस्थान के अंतिम छोर पर बसे इस गांव के हाल बेहाल हैं। यहां आज भी ग्रामीण नदी से पेयजल लाने को मजबूर हैं। महिलाएं कोसों दूर नदी से मटकी में पानी ढोकर लाती हैं। जिस नदी से ग्रामीण पानी लाते हैं, उसी में जानवर नहाते हैं और किनारे मृत मवेशी भी फेंक दिए जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरपंच से लेकर विधायक तक से कई बार गुहार लगाई, लेकिन चुनाव बाद कोई जनप्रतिनिधि झांकने तक नहीं आया। न शासन ने ध्यान दिया और न ही प्रशासन ने।  </p>
<p>19 सितम्बर को दैनिक नवज्योति में खबर प्रकाशित होने का असर यह हुआ कि जलदाय विभाग की टीम मौके पर पहुंची। सहायक अभियंता रवि गुप्ता, कनिष्ठ अभियंता अखिल रावत सहित विभागीय कर्मचारी गांव पहुंचे और समस्या का जायजा लिया। विभाग ने हेड पंप को ठीक कर पेयजल आपूर्ति सुधारने का प्रयास किया। हालांकि, ग्रामीण रामभरोस का कहना है कि मात्र हेड पंप ठीक करने से समस्या हल नहीं होगी। अब तक गांव में न तो सरकारी ट्यूबवेल स्वीकृत हुआ है और न ही घर-घर नल योजना लागू हुई है। यही कारण है कि बिस्लाई गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Sep 2025 16:20:37 +0530</pubDate>
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                <title>पेयजल पाइप लाइन के लिए खोदी सड़कें: मरम्मत के नाम पर गड्ढों में भर दी मिट्टी </title>
                                    <description><![CDATA[आमजन व राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/roads-dug-for-drinking-water-pipeline--in-the-name-of-repair--soil-was-filled-in-the-potholes/article-119820"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/882roer1.png" alt=""></a><br /><p>सुकेत। पेयजल पाइप लाइन के लिए खोदी सड़कों के गड्ढों में मरम्मत के नाम पर जलदाय विभाग ने मिट्टी भर दी है। अब यह मिट्टी बरसाती पानी के साथ मिलकर कीचड़ में तब्दील हो रही है। जिससे आमजन व राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार जलदाय विभाग सुकेत ने नगर वासियों को पानी की सुविधा उपलब्ध कराने के नाम पर नगर के महावीर कॉलोनी मोहल्ले में कई दिनों पहले पाइप लाइन डालने के लिए सड़कों को खोद दिया। जलदाय विभाग द्वारा पाइप लाइन डालने के लिए नगर के मुख्य मार्ग सहित प्रत्येक गली मोहल्ले की सड़कें खोदकर नगर की सूरत को बिगाड़ दिया है। महावीर कॉलोनी मोहल्ले में बनी सीसी सड़क को खोदकर मोहल्ले की खूबसूरत सड़क गौरव पथ के सौंदर्य पर दाग लगा दिया है। </p>
<p><strong> वाहन चालक फिसल कर होंगे चोटिल:</strong> नगर वासियों ने बताया कि कई जगह तो खुदाई के दौरान निकली मिट्टी भी जहां की तहां छोड़ रखी है। जब तक खोदी गई सड़क फिर से नहीं बन पाएगी, तब तक गुजरने वाले वाहनों से मिट्टी कीचड़ के साथ उड़ती रहेगी। कीचड़ से वाहन चालक भी फिसल कर चोटिल होते रहेंगे। लोगों ने अधिकारियों से इस संबंध में शिकायत भी की है।</p>
<p><strong>स्कूली बच्चों को हो रही अधिक परेशानी</strong><br />मोहल्ले वासियों ने बताया कि एक जुलाई से बच्चों के विद्यालय खुल चुके हैं। जिससे बच्चों की आवाजाही भी अधिक है। बच्चों को मजबूरन कपड़े खराब करके कीचड़ से होकर निकलना पड़ता है। </p>
<p><strong>कुछ समय पहले ही बना था गौरव पथ </strong><br />नगर में ग्राम पंचायत समय में सार्वजनिक निर्माण विभाग के माध्यम से सड़कों का निर्माण करवाया था। कुछ हिस्से में सड़कें ग्राम पंचायत ने बनवाई थीं। विभागीय तालमेल के अभाव में सड़क बनने के बाद फिर खोद देने से जनता की परेशानी बढ़ रही है। आमजन का कहना है कि सड़कों का निर्माण करने से पहले इससे जुड़े सभी विभागों के साथ तालमेल किया जाना चाहिए। जिससे भविष्य में इस तरह की परेशानी नहीं आए।</p>
<p>बच्चों के विद्यालय खुल चुके हैं। विद्यालय जाने का मुख्य रास्ता यही है। बच्चों को कीचड़ में होकर जाना पड़ता है। जिससे उनकी यूनिफॉर्म खराब हो जाती है। <br /><strong>-परमानन्द मेहर, मोहल्लावासी</strong></p>
<p>जलदाय विभाग की लापरवाही से खोदी सीसी सड़क में पाइप लाइन भी नहीं डाली गई और सीसी सड़क खोदकर मिट्टी से भर दी गई। जिससे राहगीर, स्कूली बच्चे एवं दोपहिया वाहन चालक चोटिल हो जाते हैं।<br /><strong>-गजेन्द्र खटीक, मोहल्लावासी</strong></p>
<p>जलदाय विभाग ने ग्राम पंचायत से एनओसी ली थी। उस आधार पर  जलदाय विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से बात कर समस्या का समाधान जल्द करवाया जाएगा।<br /><strong>-हेमेन्द्र सांखला, ईओ, नगर पालिका, सुकेत</strong></p>
<p>मौका दिखाकर समस्या का समाधान करवा दिया जाएगा। जिससे आमजन को समस्या से निजात मिल सके। <br /><strong>-बच्चू सिंह मीणा, एक्सईएन, जलदाय विभाग, रामगंजमंडी    </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 08 Jul 2025 14:59:51 +0530</pubDate>
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                <title>जल संकट : कवाई में पानी की किल्लत, कस्बेवासी परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[पुरानी पानी की टंकी की क्षमता कम, आबादी अधिक]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/water-crisis--water-shortage-in-kawai--town-residents-are-worried/article-116248"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/rtroer-(4)3.png" alt=""></a><br /><p>कवाई। भीषण गर्मी के बीच कवाई कस्बे में जल संकट गहराता जा रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि कस्बे की बढ़ती आबादी के मुकाबले वर्तमान में मौजूद पानी की टंकी पर्याप्त साबित नहीं हो रही है। ऐसे में एक और पानी की टंकी बनाए जाने की जरूरत लगातार महसूस की जा रही है। जलदाय विभाग के कर्मचारियों ने भी माना है कि कस्बे में समय पर जल आपूर्ति कर पाना अब चुनौती बन गया है। विभाग के एक कर्मचारी ने बताया कि हम समय पर पूरे कस्बे में जलापूर्ति नहीं कर पाते क्योंकि पानी का स्टॉक सीमित है। यदि एक और पानी की टंकी बन जाए तो हम नियमित और संतुलित आपूर्ति सुनिश्चित कर सकते हैं। पानी की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए एक ओर पानी की टंकी का निर्माण अत्यंत आवश्यक है। स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों को इस दिशा में शीघ्र कदम उठाने चाहिए ताकि कस्बेवासियों को समय पर पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। स्थानीय लोगों ने विभाग और प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द नई पानी की टंकी का निर्माण कराया जाए ताकि गर्मी के मौसम में लोगों को राहत मिल सके। </p>
<p><strong>पुरानी टंकी की क्षमता है कम</strong><br />कवाई कस्बे में टंकी पुराने समय की है। जिसकी क्षमता काफी कम है। आबादी लगभग 20 हजार से अधिक है। कवाई में एक नई बड़ी पानी की टंकी बनाने की सख्त आवश्यकता है। आबादी के हिसाब से पानी की सप्लाई पर्याप्त नही हो पाती। पानी की सप्लाई एक दिन छोड़कर एक दिन होती है नल का प्रेशर भी कम आता है। पानी की समस्या का समाधान तब हो सकता है, जब कस्बे में एक नई टंकी बने। </p>
<p>कवाई कस्बे में एक और पानी की नई टंकी बनाने की मांग को लेकर पीएचडी को अवगत करा दिया है। जिसमें कवाई की बढ़ती आबादी को देखते हुए एक ओर पानी की नई टंकी बनाने की मांग की है। कवाई कस्बे में टंकी पुराने समय की है जिसकी क्षमता काफी कम है और आबादी लगभग 20 हजार से अधिक है।  <br /><strong>- वीरेंद्र सिंह हाडा,  मंडल अध्यक्ष</strong></p>
<p>हर साल गर्मियों में पानी की भारी किल्लत होती है। कई बार हमें इधर-उधर से पानी लाना पड़ता है। अब समय आ गया है कि यहां एक नई पानी की टंकी बनाई जाए।<br /><strong>-अशोक यदुवंशी, कस्बेवासी </strong></p>
<p>हर साल गर्मियों में यही हाल रहता है। केवल आश्वासन देते है लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ।<br /><strong>-सुदर्शन शर्मा, भाजपा नेता</strong></p>
<p>पानी की आपूर्ति की समस्या गंभीर होती जा रही है। जिससे कई कॉलोनियों के निवासी प्रभावित हो रहे हैं। पानी की टंकी अपर्याप्तता के कारण पानी समय पर नहीं मिल पा रहा है। जिससे लोगों को दैनिक जीवन में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।<br /><strong>-विष्णु चक्रधारी भाया, मंडल अध्यक्ष, भाजपा युवा मोर्चा</strong></p>
<p>टंकी से पानी छोड़ने के बाद 10 मिनिट तक नल से हवा आती रहती है फिर पानी आता है। हमारा घर खानपुर रोड पर थोड़ी दूरी पर होने से नल देरी से आता है और जल्दी चला जाता है। जिसकी वजह से टंकिया खाली रह जाती है। कई बार 181 पर भी शिकायत दी लेकिन कोई संतुष्टि पूर्ण जवाब नहीं मिल पाता है। जलदाय विभाग को सरकार से कवाई में पानी की क्षमता बढ़ाने के लिए प्रयास करना चाहिए और नल की सप्लाई को प्रत्येक दिन सुचारु करना चाहिए ताकि समस्या का समाधान हो सके।<br /><strong>- रोहित पारेता, कस्बेवासी। </strong></p>
<p>मेरे द्वारा विकास कार्यों पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है। आमजन की हर समस्या का समाधान करने का पूरा प्रयास कर रहा हूं। इस पानी की टंकी को लेकर जल्द ही प्रपोजल बनाकर जल्द से जल्द निर्माण कार्य चालू करवाने का पूरा प्रयास करूंगा। वही अंबेडकर बस्ती थाने के पीछे भी जल्द पानी की पाइपलाइन बिछाई जाएगी। <br /><strong>- राधेश्याम बैरवा, विधायक, बारां अटरु</strong></p>
<p>प्रपोजल बनाकर भेज रखा है। अकावद परवन परियोजना प्रोजेक्ट में स्वीकृत है। वर्क आर्डर जारी होने के बाद ही निर्माण कार्य चालू होगा। <br /><strong>-चंद्रप्रकाश मीणा, कार्यवाहक सहायक अभियंता </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Jun 2025 16:41:56 +0530</pubDate>
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                <title>अब घर बैठे मिलेगा नल कनेक्शन, मोबाइल पर मिलेगी आवेदन स्वीकृत-अस्वीकृत की जानकारी</title>
                                    <description><![CDATA[जलदाय विभाग कैम्प लगाकर लोगों को सिखा रहा आवेदन करने के तौर-तरीके]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/now-you-will-get-tap-connection-sitting-at-home/article-115228"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtroer24.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहरवासियों के लिए खुश खबर है। अब नल कनेक्शन लेने के लिए उन्हें सरकारी विभागों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, बस एक क्लिक पर ही कनेक्शन मिल जाएगा। नल फिटिंग से लेकर रोड कटिंग तक का सारा काम जलदाय विभाग खुद करेगा। जिसके दो फायदे होंगे,पहला-संबंधित सरकारी एजेंसियों के चक्कर काटने में व्यर्थ होने वाला समय की बचत हो सकेगी। दूसरा-रोड कटिंग से लेकर नल फिटिंग करवाने के लिए प्राइवेट वकर्स द्वारा मनमाना शुल्क वसूलने की समस्या से निजाद मिलेगी। दरअसल, जलदाय विभाग द्वारा नागरिक सेवाओं में सुशासन को बढ़ावा देने के लिए सरलीकृत जल कनेक्शन प्रक्रिया लांच की गई है। जिसमें नया नल कनेक्शन लेने के लिए उपभोक्ता को जल मित्र पोर्टल या ई-मित्र के माध्यम से जरूरी दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन आवेदन करना होगा। साथ ही 8100 रुपए डिमांड नोट राशि जमा करवानी होगी। विभाग इस राशि के जमा होने पर उपभोक्ता के घर तक नल कनेक्शन की सारी कार्यवाही पूरी करेगा। </p>
<p><strong>नल फिटिंग से रोड कटिंग तक सारा काम विभाग का</strong><br />नल कनेक्शन के लिए उपभोक्ताओं को अब संबंधित विभागों के चक्कर नहीं काटने पडेंÞगे। नल फिटिंग,रोड कटिंग, सड़क मरम्मत, मीटर लगाना सहित अन्य सभी कार्य जलदाय विभाग के कर्मचारी ही करेंगे।  जबकि, अभी तक नल कनेक्शन लेने के लिए आवेदक को पाइप बिछाने के लिए सड़क कटाई के लिए केडीए या नगर निगम से परमिशन लेनी पड़ती है और इसका शुल्क भी अलग से जमा करवाना पड़ता है। जिसकी रसीद जलदाय विभाग को देने के बाद कनेक्शन और सुरक्षा राशि जमा के संबंध में पीएचईडी से डिमांड नोटिस जारी किया जाता था। फिर मीटर जमा करने, प्लम्बर चयन की औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती थी। इसके बाद ही कनेक्शन जारी किया जाता था। लेकिन, अब उपभोक्ता को सिर्फ 8100 रुपए का शुल्क जमा करवाना होगा। नल कनेक्शन के लिए सड़क कटाई, कनेक्शन के लिए पाइप व मीटर व कनेक्शन जोड़ने का सारा कार्य विभाग करेगा।</p>
<p><strong>मोबाइल पर मिलेगी आवेदन स्वीकृत-अस्वीकृत की जानकारी</strong><br />जलदाय विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, नल कनेक्शन के लिए उपभोक्ता ई-मित्र के माध्यम से संबंधित दस्तावेजों के साथ आॅनलाइन आवेदन करेगा। जिसकी विभाग द्वारा जांच की जाएगी। इसके बाद आवेदन स्वीकृत या अस्वीकृत की जानकारी आवेदन में दिए गए मोबाइल नम्बर पर दी जाएगी। इसके अलावा दस्तावेजों में कोई कमी होने पर सुधार का मैसेज भी दिया जाएगा। ताकि, विभाग और उपभोक्ता के बीच पारदर्शिता बनी रहे।</p>
<p><strong>मनमाने शुल्क वसूली से मिलेगी निजात</strong><br />जलदाय विभाग की इस सुविधा से उपभोक्ताओं को प्राइवेट पलम्बर द्वारा वसूले जाने वाला मनमाना शुल्क से छुटकारा मिल सकेगा। आवेदक को आवेदन के साथ 8100 रुपए जमा करवाने पर कनेक्शन से संबंधित सभी कार्य विभाग द्वारा करवाए जाएंगे। जबकि, पहले उपभोक्ता को सड़क काटने के लिए संबंधित विभाग से परमिशन लानी पड़ती थी और मीटर सहित पाइप भी खुद ही लाने पड़ते थे। जिसमें काफी परेशानी होती थी। यह सब समस्या का निवारण विभाग की इस सुविधा से हो सकेगा।</p>
<p><strong>यह दस्तावेज कराने होंगे जमा </strong><br />आॅनलाइन आवेदन के दौरान आवेदक को घर के पते का  प्रमाण के लिए आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी, पासपोर्ट, भूस्वामित्व का प्रमाण पत्र, रजिस्ट्री-पट्टा, राशन कार्ड  या राज्य सरकार द्वारा निर्धारित दस्तावेज जमा करवाने होंगे। किराएदारको कनेक्शन नहीं दिया जाएगा। क्योंकि, कनेक्शन के लिए मकान का मालिकाना हक होना चाहिए, जिसके दस्तावेज आवेदन में लगते हैं।</p>
<p><strong>कैम्प लगाकर जागरूक कर रहा विभाग</strong><br />ऑनलाइन नल कनेक्शन दिए जाने की सुविधा की जानकारी देने के लिए जलदाय विभाग द्वारा शहरभर में कैम्प लगाए जा रहे हैं। जहां विभाग के अधिकारी-कर्मचारी स्थानीय लोगों को आॅनलाइन कनेक्शन लेने के तौर-तरीके, दस्तावेजों की उपलब्धता तथा घर बैठे कनेक्शन मिलने सहित सम्पूर्ण जानकारी देकर जागरूक किया जा रहा है। साथ ही इलाके के ई-मित्र संचालकों को भी शिविर में ऑनलाइन फाइलिंग कैसे होगी, इससे संबंधित जानकारी दी जा रही है। </p>
<p><strong>एक क्लिक पर नल कनेक्शन </strong><br />सरकार का यह प्रयास सराहनीय है। जलदाय विभाग ने शहरवासियों को आॅनलाइन नल कनेक्शन दिए जाने की सुविधा दी है। उपभोक्ताओं को  विभागों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, वह घर बैठे ही आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए शहर के विभिन्न इलाकों में कैम्प लगाकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं और सरकार की योजना के उद्देश्य व फायदों से अवगत करा रहे हैं। इलाके के ई-मित्र संचालकों को भी ट्रैनिंग दे रहे हैं, ताकि आवेदकों को परेशानी न हो और उनके आवेदन सही तरह से हो सके।  <br /><strong>-प्रकाशवीर नथानी, एक्सईएन जलदाय विभाग कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 24 May 2025 15:42:12 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>असर खबर का - पेयजल संकट से मिली निजात</title>
                                    <description><![CDATA[आमजन की पीड़ा को नवज्योति टीम ने समाचार पत्र में हैंडपंप मे पाइप लाइन डलवाने की मांग" शीर्षक से प्रमुखता से खबर प्रकाशित की गई थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/pipeline-laid-in-the-bore-of-the-hand-pump/article-114957"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/asar-khabar-ka---peyajal-sankat-se-mile-nijat...bakani,-jhalawar-news-22.05.2025.jpg" alt=""></a><br /><p>बकानी । झालावाड़ जिले के बकानी में दशहरा मैदान के आगे मोगया बस्ती में हैंडपंप के लिए करवाएं गए बोर को करीब दो महीने होने को आया थे, लेकिन इसमें पाइप लाइन नहीं उतरवाने के कारण यह बोर मात्र शोपीस बनकर रह गया था।</p>
<p>इस कारण बस्ती की महिलाएं व बच्चे कही किलोमीटर दूर से पानी लाने को मजबूर थे। इस समस्या से जन जागृति विकास समिति सचिव आशिक हुसैन नीलगर ने जलदाय विभाग की सहायक अभियंता भावना मेहरा को ज्ञापन भेजकर अवगत करवाकर समाधान की मांग की थी। जिस आमजन की पीड़ा को नवज्योति टीम ने समाचार पत्र में हैंडपंप मे पाइप लाइन डलवाने की मांग" शीर्षक से प्रमुखता से खबर प्रकाशित की गई थी। जिसकी खबर को जलदाय विभाग की सहायक अभियंता ने गंभीरता से लिया और तुरंत खबर प्रकाशित होने के कुछ घंटो के बाद बुधवार को ही हैंडपंप बोर में पाइप लाइन डलवाई गई, जिससे इस बस्ती सहित आसपास के लोगों में खुशी की लहर है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 May 2025 14:49:06 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>चंबल की गहराई से खींचते हैं पानी, 2 किमी दूर होता फिल्टर, तब घरों में पहुंचता है अमृत</title>
                                    <description><![CDATA[पानी को शुद्ध बनाने में बड़ी मेहनत लगती है, पानी का मोल समझें।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/water-is-drawn-from-the-depth-of-chambal--it-is-filtered-2-km-away--then-amrit-reaches-homes/article-113308"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/news-(2)9.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। चंबल से घर तक पानी का सफर आसान नहीं है। इसके पीछे जलदाय विभाग का पूरा मैकेनिज्म काम करता है। चंबल के पानी को पीने योग्य बनाने फिर घरों तक पहुंचाने के लिए चार प्रक्रियाएं अपनानी पड़ती है। जिसमें नदी से पानी उठाना, फिल्टर प्लांट तक पहुंचाना, प्लांट पर पानी को शुद्ध करना, गुणवत्ता परखना, मिनरल्स, आयरन, कैल्शियम सहित अन्य खनीज पदार्थ की जांच कर सप्लाई करना शामिल है। विशालकाय मशीनों के बीच 24 घंटे कर्मचारियों की हाड़तोड़ मेहनत, अथक परिश्रम और अधिकारियों का सुपरविजन, पानी की राह आसान बनाता है। दैनिक नवज्योति में पढ़िए, चंबल से घर तक पानी का सफर....</p>
<p><strong>चंबल से फिल्टर प्लांट तक यूं पहुंचता पानी</strong><br />चंबल नदी से पानी उठाने से लेकर दो किमी दूर फिल्टर प्लांट तक पहुंचाने के लिए तीन विशालकाय पम्प हाउस बने हैं, हर पम्प हाउस की नदी से पानी उठाने की क्षमता अलग-अलग होती है, जो इस प्रकार है। <br /></p>
<p><strong>आरयूआईडीपी पम्प हाउस :</strong> इस पम्पहाउस में 715 होर्स पावर के 4 पम्प चंबल से पानी खींचने के लिए लगे होते हैं। इनमें से 3 पम्प वर्किंग में और 1 स्टैंड बाय में रखा जाता है, जिसे जरूरत होने पर चला लिया जाता है। इस पम्प हाउस से 130 एमएलडी यानी 1300 लाख लीटर रॉ वाटर नदी से उठाया जाता है। <br /><strong>- वर्ल्डबैंक पम्प हाउस : </strong>इसमें 375 होर्स पावर के 4 पम्प लगे होते हैं। जिनमें 3 पम्प वर्किंग में और 1 एक्सट्रा में रहता है। जिसे जरूरत के मुताबिक यूज किया जाता है। इस पम्प हाउस से 100 एमएलडी यानी 1 हजार लाख लीटर पानी चंबल से उठाया जाता है। <br /><strong>- ओल्ड पम्प हाउस : </strong>इस पम्पहाउस में नदी से पानी खींचने के लिए 300 होर्स पावर के 4 पम्प लगे होते हैं। इससे 40 एमएलडी यानी 400 लाख लीटर पानी लिया जाता है। यह तीनों पम्प हाउस 24 घंटे लगातार चलते हैं। </p>
<p><strong>पहली प्रक्रिया : नदी से 30 करोड़ लीटर रॉ वाटर उठाना</strong><br />अकेलगढ़ पम्प हाउस के एईएन विमल नागर ने  बताया कि चंबल की कराइयों में नदी से पानी उठाने के लिए तीन पम्प हाउस बने हुए हैं। जिनमें आरयूआईडीपी, वर्ल्डबैंक और ओल्ड पम्प हाउस शामिल हैं। इन पम्पहाउस में विशालकाय मशीनों से तीन बड़ी-बड़ी पाइप लाइनें जुड़ी हैं। जिनके माध्यम से 28 से 30 एमएलडी पानी उठाया जाता है। इसके बाद पम्पहाउस से करीब 2 किमी दूर फिल्टर प्लांट में शुद्धिकरण के लिए भेज दिया जाता है। </p>
<p><strong>दूसरी प्रक्रिया : क्लोरिनेशन पानी से गंदगी दूर करना</strong><br />आरयूआईडीपी, वर्ल्डबैंक और ओल्ड पम्प हाउस को मिलाकर कुल 2100 लाख लीटर अशुद्ध पानी को फिल्टर करने के लिए रिसिविंग चेम्बर में पहुंचाया जाता है, जिसमें क्लोरिन मिलाकर पानी में जमा गंदगी को दूर किया जाता है। हालांकि, बरसात के दिनों में टरबिर्टी बढ़ने से पानी में एलम, ब्लिचिंग, चूना और क्लोरिन मिलाकर शुद्ध किया जाता है। इससे पानी में जमा गंदगी नीचे बैठ जाती है और साफ पानी विभिन्न पाइपलाइनों के जरिए इनलेंट से जुड़े 6 क्लेरिफायर में पहुंचता है। जहां पानी को फिर से शुद्ध करने के लिए प्री-क्लोरिनेशन की जाती है। प्रत्येक क्लेरिफायर चेम्बर 350 लाख लीटर क्षमता का होता है। चेम्बर में आए पानी में एलम और ब्लिचिंग मिलाकर डोजिंग की जाती है। जिससे पानी में मौजूद अशुद्धियां जैसे, काई, मिटटी, बारिक कंकड, रेत आदि नीचे बैठ जाते हैं और शुद्ध पानी पाइप लाइनों के जरिए आगे मैन चेनल में पहुंच जाता है। इस प्रक्रिया में करीब 45 से 50 मिनट लगते हैं।</p>
<p><strong>तीसरी प्रक्रिया : पोस्ट क्लोरिनेशन यानी फिल्टर प्रक्रिया </strong><br />दूसरी प्रक्रिया में पानी शुद्ध होने के बाद तीसरी प्रक्रिया में फिर से पानी को फिल्टर किया जाता है। इसके लिए पोस्ट क्लोरिनेशन अपनाई जाती है। इनलेट के क्लेरिफायर से पानी अंडरग्राउंड पाइपलाइनों के जरिए सीधे मुख्य चैनल में लाया जाता है। इस चैनल को 64-64 एलडी के तीन फिल्टर यूनिट में बांटा गया है और यह तीनों यूनिटें 12 बेड से जुड़ी होती है। प्रत्येक बेड में तीन फिल्टर लेयर होती है। जिसमें पहली लेयर में कंकड, दूसरी में मोटी रेत, काई और तीसरी लेयर में बारीक रेत व अन्य पार्टिकल्स को पानी से अलग किया जाता है। प्रत्येक बेड से एक और चेम्बर जुड़ा होता है। जिसमें आखिरी बार पानी में क्लोरिन मिलाकर पानी को फिर से शुद्ध किया जाता है। इसके बाद पानी का सैंपल लिया जाता है, जिसमें क्लोरिनेशन की जांच की जाती है, यदि इसमें क्लोरिन की मात्रा कम पाई जाती है तो फिर से पोस्ट क्लोरिनेशन करके पूर्ति की जाती है। </p>
<p><strong>चौथी प्रक्रिया : टेस्टिंग के बाद ही पानी सप्लाई </strong><br />तीसरी प्रक्रिया में पानी पूरी तरह से पीने योग्य हो जाता है। लेकिन, शहर में सप्लाई से पहले पानी की गुणवत्ता परखी जाती है। इसके लिए पानी के सैंपल लैब भिजवाए जाते हैं। जहां, सीनियर कैमिस्ट पानी में टीडीएस, प्लोराइड, टरबिटी, हार्डनेस, पीएच वैल्यू, मिनरल्स सहित अन्य पैरामीटर की बारीकी से जांच करते हैं। पानी की क्वालिटी निर्धारित मापदंड पर खरी उतरने के बाद 106 लाख लीटर व 65 लाख लीटर क्षमता के सीडब्ल्यूआर (स्वच्छ जलाशय) में पानी छोड़ा जाता है। यहां केंद्रीयकृत पम्प बना हुआ है, जिसमें सभी जॉन वाइज अलग-अलग पम्प लगे होते हैं, जिसके माध्यम से घरों तक पानी की सप्लाई की जाती है।   </p>
<p><strong>रोज खर्च होते 11 लाख रूपए</strong><br />अकेलगढ़ से प्रतिदिन 280 से 300 एमएलडी यानी 28 से 30 करोड़ लीटर पानी सप्लाई किया जाता है। जिसे शुद्ध करने से लेकर सप्लाई करने तक में प्रतिदिन सरकार 11 लाख रुपए खर्च करती है। इसमें सरकारी कर्मचारी, अधिकारी, ठेकाकर्मी, कैमिकल्स, मशीनों का मेंटिनेंस सहित आॅपरेशन एंड मेंटिनेंस का खर्चा शामिल होता है।<br /><strong>- विमल नागर, एईएन, अकेलगढ़ पम्प हाउस</strong></p>
<p><strong>पानी को अमृत समझें</strong><br />जलदाय विभाग का मूल उद्देश्य हर व्यक्ति को शुद्ध पानी उपलब्ध कराना है। जिसके लिए हर कर्मचारी-अधिकारी कृत संकल्पित है। पानी को शुद्ध बनाने में बड़ी मेहनत लगती है। शहरवासी पानी का मोल समझना चाहिए ताकि आने वाली अपनी पीढ़ियों के लिए अमृतरूपी पानी बचाएं।<br /><strong>- प्रकाशवीर नथानी, एक्सईएन जलदाय विभाग कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 May 2025 16:35:32 +0530</pubDate>
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                <title>स्टाफ की कमी का खामियाजा भुगत रहे आम उपभोक्ता, अपनी समस्याएं लेकर जलदाय विभाग के चक्कर काटने को मजबूर </title>
                                    <description><![CDATA[छोटे-छोटे कामों के लिए कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हैं पेयजल उपभोक्ता]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/common-consumers-are-bearing-the-brunt-of-staff-shortage/article-112418"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/news59.png" alt=""></a><br /><p>सुकेत। सुकेत के जलदाय विभाग में काफी समय से स्टाफ की कमी का खामियाजा आम उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। आम उपभोक्ता अपनी समस्याएं लेकर जलदाय विभाग के चक्कर काटने को मजबूर हैं। कई बार उनको काफी देर तक इंतजार करना पड़ता है। जानकारी के अनुसार नगर के जलदाय विभाग में काफी समय से सहायक अभियंता और कनिष्ठ सहायक के पद रिक्त चल रहे हैं। वहीं एक क्लर्क फील्ड में रहता है। जिसके कारण उपभोक्ताओं को अपने कामों और समस्याओं के लिए दफ्तर के चक्कर लगाने पड़ते हैं। कई बार उनको छोटे-छोटे कामों के लिए काफी देर तक इंतजार करना पड़ता है। हाल ही में विभाग ने जल कनेक्शन के लिए शुल्क में बदलाव किया है। वहीं कब्जा धारियों को भी कनेक्शन लेने की अनुमति दी गई है। जिससे उपभोक्ता काफी भ्रमित हैं। इसकी जानकारी के लिए जब वे विभाग के कार्यालय में जाते हैं तो उनको जानकारी देने के लिए कार्यालय में कोई नहीं मिलता। मजबूर होकर उन्हें या तो इंतजार करना पड़ता है या फिर बाद में आना पड़ता है। कई उपभोक्ताओं ने पानी के बिलों में अनियमितताओं की शिकायत की है। लेकिन  स्टाफ की कमी के कारण उनकी यह समस्या भी हल नहीं हो पा रही है। जिससे ऐसे उपभोक्ता विभागीय कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हैं। </p>
<p><strong>बदलावों के कारण भ्रमित हो रहे उपभोक्ता</strong><br />जलदाय विभाग ने हाल ही में पेयजल कनेक्शन के लिए प्रक्रिया में बदलाव किए हैं। जैसे कि अब कब्जेधारी भी कनेक्शन ले सकते हैं और शुल्क भी पहले से अलग है। इन बदलावों के कारण कई उपभोक्ताओं में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। जानकारी प्राप्त करने के लिए ऐसे उपभोक्ताओं को कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।</p>
<p><strong>पेयजल बिलों में अनियमितता </strong><br />नगर के कुछ उपभोक्ताओं ने अपने पेयजल बिलों में अनियमितता की शिकायत की है। जैसे कि बिल की राशि में अचानक वृद्धि होना। इससे उपभोक्ता परेशान हैं और वे विभाग के दफ्तरों में जानकारी के लिए जा रहे हैं। उपभोक्ताओं ने विभागीय अधिकारियों से इस समस्या को सुलझाने की मांग की है। </p>
<p>भीषण गर्मी में भी अधिकारी कार्यालय में नजर नहीं आते। आने वाले समय में नगर की पेयजल व्यवस्था गड़बड़ा सकती है। नगर वासियों को गंभीर पेयजल संकट का सामना करना पड़ सकता है। <br /><strong>-इमरान, उपभोक्ता, सुकेत </strong></p>
<p>मुझे अपने घर के नल कनेक्शन को स्थानान्तरण करवाना है। जिसके लिए मैं काफी समय से प्रयास कर रहा हूं। लेकिन जलदाय विभाग में काफी समय से कनिष्क अभियंता व कनिष्ठ सहायक दोनों के पद रिक्त हैं। जिससे मेरे कार्य में समय लग रहा है। मुझे बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। <br /><strong>-शाकिर, उपभोक्ता, सुकेत </strong></p>
<p>जलदाय विभाग सुकेत में सहायक अभियंता का पद रिक्त है। पूर्व में इस पद के लिए वंदना शर्मा के आदेश हुए थे। लेकिन उन्होंने चार्ज नहीं संभाला। साथ ही जहां-जहां पाइप लाइन बिछी हुई है, वहां पर रेगुलर पानी की सप्लाई की जा रही है। जहां पाइप लाइन लाइन नहीं बिछी है वहां पर मई-जून तक नई पाइप लाइन बिछा दी जाएगी। जिससे सभी उपभोक्ताओं को पेयजल की सुविधा मिल जाएगी। <br /><strong>-बच्चू सिंह मीणा, एक्सईएन, जलदाय विभाग, रामगंजमंडी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 29 Apr 2025 16:19:39 +0530</pubDate>
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