<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/water-supply-department/tag-13692" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>water supply department - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/13692/rss</link>
                <description>water supply department RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title> बड़ा सवाल - कहां गायब हो रहा पानी, इतना पानी की 31 लाख की आबादी पले, यहां तो 15 लाख में भी पानी का टोटा</title>
                                    <description><![CDATA[प्रति व्यक्ति 345 लीटर प्रतिदिन जल उपलब्धता, जो BIS मानक (135 लीटर) से दोगुने से अधिक और राष्ट्रीय औसत से लगभग तीन गुना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-big-question--where-is-the-water-vanishing--there-is-enough-water-here-to-sustain-a-population-of-3-1-million--yet-even-a-population-of-1-5-million-faces-a-water-shortage/article-156880"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(7)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शिक्षा नगरी कोटा में पानी की उपलब्धता और उसकी असल सप्लाई के बीच एक ऐसा चौंकाने वाला गणित सामने आया है, जो न केवल पानी के अत्यधिक दोहन को दर्शाता है, बल्कि सिस्टम की लाचारी और आमजन की लापरवाही को भी उजागर करता है। ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) नई दिल्ली के स्वच्छता मानकों के मुताबिक, हॉस्टलों या सामान्य रिहायशी इलाकों में प्रति व्यक्ति 135 लीटर पानी (LPHD) की आवश्यकता होती है। लेकिन कोटा में प्रति व्यक्ति आबादी के अनुपात को देखा जाए, तो यहाँ 345 लीटर प्रति व्यक्ति की भारी-भरकम खपत सामने आ रही है। यह राष्ट्रीय औसत से दोगुने से भी ज्यादा है, जो पानी के प्रति गंभीर लापरवाही का सबसे बड़ा सबूत है।</p>
<p><strong>मेट्रो शहर जैसी क्षमता, फिर भी मांग और आपूर्ति में बड़ा फेरबदल</strong><br />जलदाय विभाग के दावों और आंकड़ों को देखें, तो कोटा शहर में स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने के लिए भारी-भरकम इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है। शहर में पानी की कुल उत्पादन क्षमता 517 मिलियन लीटर प्रतिदिन (MLD) है, जिसमें से वर्तमान में 425 MLD पानी का रोजाना उत्पादन किया जा रहा है:<br />अकेलगढ़ प्लांट: 64 MLD के 3 और 75 MLD का 1 संयंत्र (कुल 267 MLD)<br />श्रीनाथपुरम प्लांट: 50 MLD<br />नदी पार क्षेत्र: 130 MLD और 70 MLD के दो संयंत्र (कुल 200 MLD)<br />यदि राष्ट्रीय मानक के हिसाब से गणना की जाए, तो यह 425 MLD पानी करीब 31 लाख 45 हजार की आबादी की दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी है। लेकिन विडंबना देखिए कि मात्र 15 लाख की आबादी (फ्लोटिंग पापुलेशन सहित) वाले कोटा शहर में यह पानी भी कम पड़ता दिखाई दे रहा है। वर्तमान में यहाँ औसतन 280 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन के हिसाब से पानी की सप्लाई का गणित बैठ रहा है, जो कि किसी भी बड़े मेट्रो शहर की तुलना में बहुत अधिक है।</p>
<p><strong>आखिर कहाँ जा रहा है चम्बल का पानी?</strong><br />इतने बड़े पैमाने पर उत्पादन होने के बाद भी कोटा की प्यास पूरी तरह क्यों नहीं बुझ पा रही है? 'दैनिक नवज्योति' के विश्लेषणात्मक आंकलन में इसके पीछे कुछ बेहद गंभीर कारण सामने आए हैं।</p>
<p><strong>अस्पतालों और हॉस्टल हब में पानी का गणित</strong><br />कोटा में पानी की सबसे ज्यादा खपत वाले क्षेत्रों में अस्पताल और यहाँ का मशहूर कोचिंग-हॉस्टल एरिया शामिल है।<br />अस्पतालों का हाल: कोटा के एमबीएस अस्पताल,न्यू मेडिकल कॉलेज, सुपर स्पेशलिटी विंग सहित अन्य सरकारी चिकित्सा संस्थानों को मिला लिया जाए, तो यहाँ करीब 2,500 बेड्स की क्षमता है। चिकित्सा मानकों के अनुसार, अस्पताल में प्रति बेड 450 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। इस लिहाज से अस्पतालों में प्रतिदिन 11 लाख लीटर पानी की खपत हो रही है।</p>
<p><strong>हॉस्टल और पीजी हब</strong><br />कोटा में वर्तमान में 3,800 से अधिक रजिस्टर्ड हॉस्टल और 40,000 से अधिक पीजी संचालित हैं। कुन्हाड़ी, राजीव गांधी नगर, तलवंडी, जवाहर नगर और विज्ञान नगर जैसे पॉश और कोचिंग इलाकों में स्थित इन हॉस्टलों में हजारों छात्र रह रहे हैं। यहाँ पानी की मांग सबसे ज्यादा रहती है।</p>
<p><strong>सप्लाई नेटवर्क से बाहर 150 कॉलोनियां</strong><br />शहर की 150 से अधिक कॉलोनियां और कई आधुनिक मल्टी-स्टोरी बिल्डिंग्स आज भी पीएचईडी की मुख्य पाइपलाइन सप्लाई से बाहर हैं। इनमें बून्दी रोड़, बारां रोड़ थेकड़ा,रायपुरा व अनन्तपुरा के अलावा नान्ता, सीन्ता क्षेत्र की 3 दर्जन से अधिक मल्टी स्टोरीज है व कॉलोनियां है जो पुरी तरह आबाद है लेकिन सरकार के नियमानुसार पानी की आपुर्ति से अभी तक दुर है।</p>
<p><strong>चम्बल के पानी को चखा तक नहीं</strong><br />लैंडमार्क (कुन्हाड़ी) व कोरल पार्क जैसे बड़े हॉस्टल एरिया जहां 60 हजार से अधिक हॉस्टल छात्र रहते है। यहां छात्रों ने तो अभी तक कोटा व चम्बल के पानी के स्वाद को चखा ही नहीं। यह एरिया तो आज भी पानी की मुख्य लाइन से वंचित हैं और निजी साधनों व टैंकरों पर निर्भर हैं। यानी जो पानी कागजों में सप्लाई हो रहा है, वह असल में इन नलों तक पहुँच ही नहीं पा रहा। मुख्य शहर के अलावा कोचिंग क्षेत्रों में कोरल व लैण्ड़ मार्क जैसे इलाकों में तो आज तक जलदाय विभाग ने सप्लाई दी ही नहीं।</p>
<p><strong>185 हजार उपभोक्ता कनेक्शन,लाइन लॉस और लीकेज</strong><br />425 MLD पानी ट्रीट होने के बाद जब प्लांट से निकलता है, तो पुरानी पाइपलाइनों में लीकेज और अवैध कनेक्शनों के कारण पानी का एक बड़ा हिस्सा जमीन में समा जाता है या बर्बाद हो जाता है। दीपक झा ने बताया कि अब तक शहर में विभाग के द्वारा जारी किये गये कुल कनेक्शन 1 लाख 85 हजार है। ऐसे में यदि प्रति परिवार 6 लोग भी जोडें तो यह आंकडा 11 लाख व्यक्तियों का हो जाता है। जबकि हमारी क्षमता 31 लाख से अधिक लोगो को पानी की सुविधा देने की है। इतना पानी आखिर जा कहां रहा है। यह तो बडी बात है। इस और हमारी टीम काम कर रही है।</p>
<p><strong>अत्यधिक दोहन और जागरूकता की कमी</strong><br />चम्बल नदी के मुहाने पर बसे होने के कारण कोटा के लोगों में पानी को सहेजने की प्रवृत्ति कम देखी गई है। फुल फ्लशिंग टॉयलेट्स और हॉस्टलों में पानी की अनियंत्रित बर्बादी के कारण प्रति व्यक्ति खपत 345 लीटर तक पहुँच गई है।<br /><strong>-शैलेन्द्र कुमार सक्सेना उपभोक्ता दादाबाड़ी</strong></p>
<p>कोटा में पानी की कोई कमी नहीं है, कमी है तो सिर्फ बेहतर प्रबंधन और वितरण प्रणाली की। यदि जलदाय विभाग लीकेज को रोकने और टेल-एंड (आखिरी छोर) तक पानी पहुँचाने में कामयाब हो जाए, तथा नागरिक पानी की बर्बादी रोकें, तो कोटा का यह पानी आने वाले कई सालों तक की आबादी के लिए अमृत साबित हो सकता है। फिलहाल, 15 लाख की आबादी में मेट्रो जितना पानी खपा देने का यह रहस्य सिस्टम पर कई बड़े सवाल खड़े करता है।<br /><strong>- राजू सोनी उपभोक्ता नांता</strong></p>
<p>हमारे यहां पिछले सालों में करीब 1 दर्जन मल्टी स्टोरीज ने पीएचडी की पाईप लाईन से कनेक्शन के लिये आवेदन किया था हमनें जैसे ही डिमाण्ड़ नोट जारी किया उसके बाद से केवल 3 मल्टी स्टोरीज ने ही पैसे जमा कराये बाकि के आवेदन अभी आगे नहीं बढ़ सके है। हमारी तरफ से जैसे ही अमृत 2.0 का काम आगे बढता है वैसे ही अन्य इलाकों को भी पानी के लिये जोडा जायेगा।<br /><strong>-दीपक झा अतिरिक्त मुख्य अभियन्ता पीएचईडी कोटा</strong></p>
<p>कोटा में प्रति व्यक्ति पानी की खपत 380 लीटर तक पहुंचना जल संसाधनों के अत्यधिक दोहन और भविष्य के बड़े संकट का सीधा संकेत है। पीने के साफ पानी से सड़कें धोना और खुले नलों से होने वाली बर्बादी पर्यावरण और जल सुरक्षा के लिहाज से एक नासूर बन चुकी है।<br />पानी की उपलब्धता से ज्यादा पानी के महत्व से लोगों को जोडना होगा। पानी की बर्बादी पर सभी को मुखरता से आवाज उठानी ही होगी। सरकार 1 लीटर पानी तैयार करने मे जितना समय और पैसा लगा रही है उतने से भी कम यदि सही वितरण और सख्ती से प्रबंधन पर लगा दे तो सारी परेशानी दूर हो जाए सभी को पर्याप्त व शुद्ध पानी मिल जाए।<br /><strong>-अनिल रावत वरिष्ठ वैज्ञानिक केन्दीय प्रदूषण नियंत्रक बोर्ड</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-big-question--where-is-the-water-vanishing--there-is-enough-water-here-to-sustain-a-population-of-3-1-million--yet-even-a-population-of-1-5-million-faces-a-water-shortage/article-156880</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-big-question--where-is-the-water-vanishing--there-is-enough-water-here-to-sustain-a-population-of-3-1-million--yet-even-a-population-of-1-5-million-faces-a-water-shortage/article-156880</guid>
                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 15:26:40 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-06/111200-x-600-px%29-%287%292.png"                         length="1587236"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>साल के अंत तक ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट पर पहुंच जाएगा पानी</title>
                                    <description><![CDATA[जलदाय विभाग की ओर से  डाली जा रही है पाइपलाइन ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/water-to-reach-the-greenfield-airport-by-the-end-of-this-year/article-156651"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(3)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा-बूंदी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट पर पहले और दूसरे फेज का निर्माण कार्य तो चल ही रहा है। वहीं एयरपोर्ट पर पानी पहुंचाने के लिए पाइप लाइन डालने का काम भी तेजी से किया जा रहा है। इस साल के अंत तक एयरपोर्ट पर पानी पहुंचने की संभावना है। एयरपोर्ट अथोरिटी ऑफ इंडिया की ओर से शम्भूपुरा में 440.646 हैक्टेयर भूमि पर एयरपोर्ट का निर्माण किया जाना है। यह कार्य दो फेज में किया जा रहा है। पहले फेज में जहां रनवे निर्माण का काम तेजी से किया जा रहा है। वहीं फेज दो के तहत टर्निनल बिल्डिंग निर्र्माण का काम भी शुरु हो गया है। दोनों काम को अलग-अलग कम्पनियों द्वारा किया जा रहा है। जिससे काम तेजी से व समय पर पूरा हो सके। वहीं एयरपोर्ट तक पानी पहुंचाने के लिए जलदाय विभाग की ओर से पाइप लाइन डालने का काम भी किया जा रहा है।</p>
<p><strong>17.46 करोड़ से डलेगी लाइन</strong><br />एयरपोर्ट तक पानी पहुंचाने के लिए करीब 17.46 करोड़ रुपए खर्च होंगे। जलदाय विभाग व एयरपोर्ट अथोरिटी ऑफï इंडिया के बीच अक्टूबर 2025 में इसका एमओयू भी हो गया था। एमओयू के तहत सकतपुरा स्थित मिनी अकेलगढ़ से ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट तक 21 कि.मी. पाइप लाइन डाली जाएगी। </p>
<p>जलदाय विभाग के अधीक्षण अभियंता दीपक कुमार झा ने बताया कि पाइप लाइन डालने का काम शुरु हो गया है। सकतपरिा स्थित मिनी अकेलगढ़ से कैनाल के सहारे-सहारे खुदाई कर पाइप लाइन डाली जा रही है। अभी तक करीब 4 कि.मी. लाइन डाली जा चुकी है। जबकि 4 कि.मी. लाइन डालने का काम तेजी से किया जा रहा है। खुदाई होते ही उसमें भी पाइप बिछा दिए जाएंगे। झा ने बताया कि कैनाल के सहारे होते हुए हाइवे से एयरपोर्ट तक पाइप लाइन डालने का काम पूरा होने में करीब 6 माह का समय लगेगा। इस साल के अंत तक यह काम पूरा होने के बाद एयरपोर्ट तक पानी पहुंचा दिया जाएगा।</p>
<p>इधर एयरपोर्ट अधिकारियों का कहना है कि रनवे समेत टर्मिनल बिल्डिंग निर्माण का काम तेजी से किया जा रहा है। बरसात शुरु होने से पहले काफी काम हो जाएगा। निर्माण कार्य की बारीकी से मॉनिटरिंग की जा रही है। जिससे दिसम्बर 2027 तक काम पूरा होकर यहां से हवाई सेवा शुरु की जा सकेगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/water-to-reach-the-greenfield-airport-by-the-end-of-this-year/article-156651</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/water-to-reach-the-greenfield-airport-by-the-end-of-this-year/article-156651</guid>
                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 14:37:20 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-06/111200-x-600-px%29-%283%294.png"                         length="1407698"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का : जलदाय विभाग ने शुरू की टंकियों की सफाई</title>
                                    <description><![CDATA[क्लोरीनेशन व नियमित जांच की व्यवस्था का दिया आश्वासन ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report--water-supply-department-initiates-cleaning-of-water-tanks/article-154051"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(7)9.png" alt=""></a><br /><p>सुकेत । दैनिक नवज्योति में जलदाय विभाग की टंकियों की नहीं होती नियमित सफाई शीर्षक से खबर प्रकाशित होने खबर का असर दिखाई देने लगा है। खबर प्रकाशित होते ही जलदाय विभाग की टीम ने सुकेत क्षेत्र की पानी की टंकियों और मुख्य ओवरहेड टंकी की सफाई अभियान शुरू कर दिया। विभाग की कार्रवाई से नगरवासियों ने राहत की सांस ली है। जानकारी के अनुसार शुक्रवार सुबह जेईएन के नेतृत्व में विभागीय टीम मौके पर पहुंची। कर्मचारियों ने टंकियों को खाली कर उनमें जमी काई, गंदगी और तलछट को बाहर निकाला। इसके बाद टंकी की दीवारों को ब्लीचिंग पाउडर से साफ किया गया। विभाग ने टंकी में दोबारा पानी भरने से पहले क्लोरीन की उचित मात्रा भी डाली। अधिकारियों ने बताया कि अब प्रत्येक 15 दिन में पानी की गुणवत्ता की जांच की जाएगी।</p>
<p><strong>स्टाफ की कमी से नहीं हो रही नियमित सफाई</strong><br />जलदाय विभाग के एईएन बच्चू सिंह ने माना कि स्टाफ की कमी के कारण नियमित सफाई नहीं हो पा रही थी। उन्होंने कहा कि खबर के माध्यम से मामला संज्ञान में आने के बाद अब रोस्टर बनाकर प्रत्येक छह माह में टंकियों की सफाई सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों को नोटिस भी जारी किएगए हैं।</p>
<p><strong>लोगों ने विभाग की कार्रवाई पर जताया संतोष</strong><br />स्थानीय निवासियों ने विभाग की कार्रवाई पर संतोष जताते हुए कहा कि अखबार में खबर प्रकाशित होने के बाद विभाग सक्रिय हुआ है और अब लोगों को साफ पानी मिलने लगा है। महिलाओं ने भी उम्मीद जताई कि भविष्य में नियमित सफाई व्यवस्था जारी रहेगी।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />विभाग ने नगरपालिका क्षेत्र की सभी पानी की टंकियों और जलाशयों की सफाई एक सप्ताह में पूरी करने का लक्ष्य तय किया है। साथ ही पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रत्येक टंकी पर सफाई की तारीख अंकित करने वाला बोर्ड भी लगाया जाएगा।<br /><strong>-बच्चू सिंह, एईएन, जलदाय विभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report--water-supply-department-initiates-cleaning-of-water-tanks/article-154051</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report--water-supply-department-initiates-cleaning-of-water-tanks/article-154051</guid>
                <pubDate>Sat, 16 May 2026 15:04:52 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-05/1111200-x-600-px%29-%287%299.png"                         length="1163244"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का : मांगली नदी पम्प हाउस पर ओवरफ्लो से व्यर्थ बहता पानी रोका</title>
                                    <description><![CDATA[समाचार प्रकाशित होते ही  अभियंताओं और कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर  निरीक्षण किया।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/impact-of-news---water-wasted-due-to-overflow-at-mangli-river-pump-house-halted/article-153915"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(1)62.png" alt=""></a><br /><p>नमाना रोड। मांगली नदी स्थित जलदाय विभाग के पम्प हाउस से ओवरफ्लो होकर हजारों लीटर पेयजल व्यर्थ बहने के मामले में प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए तुरंत कार्रवाई की है।</p>
<p>प्रमुख समाचार पत्र 'दैनिक नवज्योति'  में 14 मई के अंक में समाचार  प्रकाशित होने के बाद विभागीय अधिकारी हरकत में आए और व्यर्थ बहते पानी को रोक दिया गया।जानकारी के अनुसार मांगली नदी स्थित पम्प हाउस से पिछले कई दिनों से बड़ी मात्रा में पेयजल ओवरफ्लो होकर नदी में बह रहा था। भीषण गर्मी के दौर में पानी की बर्बादी को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी बनी हुई थी। </p>
<p>मामले को 'दैनिक नवज्योति' ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। समाचार प्रकाशित होते ही जलदाय विभाग के अभियंताओं और कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण किया। तकनीकी टीम द्वारा आवश्यक सुधार कार्य  करते हुए ओवरफ्लो की समस्या को नियंत्रित कर लिया गया। विभागीय कर्मचारियों ने पम्प हाउस की व्यवस्था दुरुस्त कर पानी के व्यर्थ बहाव को पूरी तरह रोक दिया। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही दोबारा नहीं हो. इसके लिए कर्मचारियों को नियमित निगरानी रखने और समय-समय पर निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। स्थानीय लोगों ने समस्या के त्वरित समाधान पर संतोष जताते हुए कहा कि जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने से प्रशासनिक स्तर पर सकारात्मक कार्रवाई संभव हो पाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/impact-of-news---water-wasted-due-to-overflow-at-mangli-river-pump-house-halted/article-153915</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/impact-of-news---water-wasted-due-to-overflow-at-mangli-river-pump-house-halted/article-153915</guid>
                <pubDate>Fri, 15 May 2026 14:23:45 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-05/1111200-x-600-px%29-%281%2962.png"                         length="1322076"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डिमांड से 9 करोड़ लीटर पानी ज्यादा, फिर भी कोटा रह रहा प्यासा</title>
                                    <description><![CDATA[41 करोड़ लीटर रोज सप्लाई के बावजूद टैंकरों पर निर्भर लोग,प्रति व्यक्ति आवश्यकता से अधिक पानी कर रहा खर्च।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/90-million-liters-of-surplus-water%E2%80%94yet-kota-remains-thirsty/article-151824"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(3).jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा शहर में पानी की कमी नहीं है लेकिन प्रबंधन की खामी व लोगों की गलत आदतें प्यास बढ़ा रही है। हालात ये हैं कि शहर को जरूरत से करीब 20% ज्यादा पानी मिल रहा है, इसके बावजूद टेल क्षेत्रों में लोग आज भी टैंकरों के भरोसे जी रहे हैं। करोड़ों लीटर पानी रोजाना सप्लाई होने के बावजूद नलों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा। पेश है नवज्योति की ग्राउंड रिपोर्ट।</p>
<p><strong>32 करोड़ डिमांड सप्लाई 41 करोड़ लीटर पानी</strong></p>
<p>जलदाय विभाग के अनुसार, कोटा शहर की कुल आबादी करीब 20 लाख है। इनमें 16.50 लाख स्थानीय निवासी हैं और 3 से 4 लाख फ्लोटिंग यानी बाहरी लोग शामिल हैं। ऐसे में प्रति व्यक्ति 135 लीटर पानी प्रतिदिन डिमांड के हिसाब से बीस लाख आबादी को रोजाना 32 करोड़ लीटर पानी की आवश्यकता रहती है। जबकि, जलदाय विभाग के तीनों जलशोधन केंद्र अकेलगढ़, सकतपुरा व श्रीनाथपुरम से प्रतिदिन 410 एमएलडी यानी 41 करोड़ लीटर पानी की सप्लाई की जा रही है। यानी, डिमांड से 9 करोड़ लीटर पानी ज्यादा दिया जा रहा है। इसके शहरवासियों को टैंकरों से प्यास बुझानी पड़ रही है।</p>
<p><strong>प्रति व्यक्ति 135 लीटर जरूरत, खर्च हो रहा 170 से ज्यादा</strong></p>
<p>सरकारी नियमों के अनुसार, प्रति व्यक्ति को प्रतिदिन 135 लीटर पानी की जरूरत मानी गई है, लेकिन शहरवासी170 से 200 लीटर पानी खर्च कर रहे हैं। जिससे जल वितरण व्यवस्था गड़बड़ा रही है। वहीं, कई जगह पाइप लाइनों के लीकेज के कारण भी पानी व्यर्थ बह जाता है। नतीजन, कुल आबादी को डिमांड से 20% ज्यादा पानी मिलने के बावजूद अंतिम छोर तक पानी पहुंच ही नहीं पा रहा।</p>
<p><strong>आखिर क्यों मच रही हाय-तौबा</strong></p>
<p><strong>-असंतुलित जल वितरण : </strong>शहर के हेड क्षेत्रों में पर्याप्त दबाव से पानी मिल रहा है, जिससे दोहन बढ़ रहा लेकिन विभाग द्वारा अंकुश नहीं लगाया जा रहा। नतीजन, टेल क्षेत्रों तक पानी पहुंचते-पहुंचते सप्लाई कमजोर हो जाती है।<br /><strong>- एक ही प्लांट पर ज्यादा निर्भरता : </strong>अकेलगढ़ प्लांट पर शहर का बड़ा हिस्सा निर्भर है, जिससे वितरण में असमानता बढ़ रही है। जिसकी वजह से टैंकर चलाने पड़ रहे हैं।<br /><strong>- पाइपलाइन और प्रेशर मैनेजमेंट की कमी : </strong>अंतिम छोर तक पर्याप्त प्रेशर से पानी पहुंचे, इसकी कोई व्यवस्था नहीं है। जिससे कई इलाकों में सप्लाई अधूरी रह जाती है।<br /><strong>- टेल एरिया की उपेक्षा : </strong>आंवली, रोजड़ी, नयागांव, दौलतगंज, रानपुर, जगपुरा, बंधा धर्मपुरा जैसे इलाकों में पाइप लाइनों को अकेलगढ़ प्लांट से नहीं जोड़ा गया। नतीजन, नियमित सप्लाई के बजाय टैंकरों से पानी देना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>क्षेत्रवाइज फिल्टर प्लांट बने तो हो समाधान</strong></p>
<p>क्षेत्रवार फिल्टर प्लांट की जरूरत : जलदाय विभाग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक हर क्षेत्र में अलग-अलग जल शोधन केंद्र यानी फिल्टर प्लांट नहीं बनेंगे, तब तक समस्या बनी रहेगी।<br />अमृत 2.0 योजना बनेगी गेमचेंजर : अमृत 2.0 योजना के तहत उद्योग नगर क्षेत्र में शिवाजी पार्क के पास 100 एमएलडी का नया फिल्टर प्लांट प्रस्तावित है। जिसके बनने के बाद से डीसीएम, प्रेम नगर, रायपुरा, कंसुआ, गोविंद नगर सहित अन्य इलाकों को सीधी सप्लाई मिलेगी और अकेलगढ़ पर दबाव खत्म होगा।</p>
<p>हेड-टेल गैप खत्म करना होगा : शिवाजी पार्क के अलावा रानपुर में भी अमृत 2.0 योजना के तहत नया प्लांट बनना है। यहां 40 एमएलडी क्षमता का फिल्टर प्लांट प्रस्तावित है। जिसके बनने के बाद लखावा, रानपुर, देवनारायण कॉलोनी जैसे दूरस्थ क्षेत्रों को राहत मिलेगी। साथ ही पानी का समान वितरण संभव होगा और अंतिम छोर तक पानी पहुंचाना आसान हो जाएगा।</p>
<p>टैंकर होंगे बंद, घरों तक सीधे पहुंचेगा पानी : अमृत 2.0 योजना में दो जगहों पर नए फिल्टर प्लांट बनने से शहर की बड़ी आबादी में जल वितरण के दबाव से अकेलगढ़ से मुक्त होगा और इसका फायदा आंवली, रोजड़ी, नयागांव, दौलतगंज, बंधा धर्मपुरा हाड़ौती कॉलोनी सहित अन्य इलाकों के बाशिंदों को मिलेगा। यहां टैंकरों से सप्लाई बंद होगी और सीधे अकेलगढ़ से पाइप लाइन के जरिए पानी मिल सकेगा।</p>
<p>शहर को डिमांड से करीब 20 प्रतिशत ज्यादा पानी सप्लाई किया जा रहा है। गर्मी में पानी की डिमांड बढ़ जाती है। टैंकर अधिकतर ऐसे इलाकों में चल रहे हैं जहां हमारी पाइप लाइन नहीं है लेकिन केडीए द्वारा आधारभूत सुविधाएं विकसित कर दी गई है। वहीं, आंवली, रोजड़ी क्षेत्रों में पाइप लाइन डालने का कार्य चल रहा है। मई के आखिरी सप्ताह तक सप्लाई पाइप लाइन से करने की पूरी कोशिश की जा रही है।</p>
<p><strong>-    दीपक कुमार झा, एसई जलदाय विभाग कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/90-million-liters-of-surplus-water%E2%80%94yet-kota-remains-thirsty/article-151824</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/90-million-liters-of-surplus-water%E2%80%94yet-kota-remains-thirsty/article-151824</guid>
                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 14:28:11 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-04/111200-x-600-px%29-%283%29.jpg"                         length="111596"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>निजीकरण के विरोध में जलदाय कर्मचारी कल करेंगे जलभवन का घेराव, हजारों कर्मचारी होंगे शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[प्रान्तीय नल मजदूर यूनियन (इंटक) के आह्वान पर जलदाय विभाग के हजारों कर्मचारी जलभवन पर ओएंडएम निजीकरण के विरोध में घेराव और प्रदर्शन। प्रदेशाध्यक्ष संजय सिंह शेखावत और कार्यकारी अध्यक्ष बाबूलाल शर्मा ने बताया कि आंदोलन में तकनीकी कर्मचारी, मंत्रालय स्टाफ और अभियंता बड़ी संख्या में शामिल।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/water-supply-employees-will-surround-jal-bhavan-tomorrow-in-protest/article-146193"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/jal-bhavan.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रान्तीय नल मजदूर यूनियन (इंटक) राजस्थान (जलदाय विभाग) के आह्वान पर शुक्रवार को दोपहर एक बजे प्रदेश भर के हजारों की संख्या में कर्मचारी जलभवन पर एकत्रित होकर ओएंडएम निजीकरण के विरुद्ध करंगे जलभवन का घेराव व विरोध प्रदर्शन।</p>
<p>संघ के प्रदेशाध्यक्ष संजय सिंह शेखावत कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष बाबूलाल शर्मा ने संयुक्त रूप से बताया कि यह विरोध निजीकरण करने के विरुद्ध में किया जा रहा है इस विरोध में भारी संख्या में तकनीकी कर्मचारी मंत्रालय कर्मचारी सहित अभियन्ता इस विरोध में शामिल होंगे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/water-supply-employees-will-surround-jal-bhavan-tomorrow-in-protest/article-146193</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/water-supply-employees-will-surround-jal-bhavan-tomorrow-in-protest/article-146193</guid>
                <pubDate>Thu, 12 Mar 2026 15:54:12 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-03/jal-bhavan.png"                         length="603778"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खतरा बैठा ग्राउंड वाटर टैंक में...कोई जानवर गिर जाए तो निकालना भी मुश्किल</title>
                                    <description><![CDATA[जलदाय विभाग के पंप हाउस  के पास स्थित  21 लाख लीटर का ग्राउंड वाटर टैंक।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/danger-lurks-in-the-groundwater-tank----even-rescuing-an-animal-that-falls-in-is-difficult/article-143054"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(12200-x-600-px)-(7)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। एमबीएस परिसर मोर्चरी के पास स्थापित जलदाय विभाग का पंप हाउस , इसी के पास में 21 लाख लीटर का ग्राउंड वाटर टैंक बना हुआ है जिसकी जमीन से ऊंचाई मात्र 7 फीट है और यहां पर चारों तरफ मिट्टी  पड़ी हुई है जिससे कोई भी जानवर इस टंकी की छत/ ढकान पर जा सकता है। छत का हाल ऐसा है कि इसमें छोटा जानवर तो क्या पूरा हाथी उतर जाए ऐसे में यदि कोई जानवर इतने बड़े पानी के जल स्रोत/ स्टोरेज टैंक में उतर जाए या गिर जाए तो उसको निकालने की संभावना तो नगण्य है । क्योंकि बाकी जगह यह ढकी हुई है ऐसे में गिरे हुए जानवर का पता चलना लगभग संभव नहीं है । ऐसी अवस्था में पानी के अंदर मरे  हुए और मर जाने की स्थिति में जल प्रदूषण या जल में होने वाली संभावित बीमारियोंसे भारी नुकसान हो सकता है।</p>
<p>खुले टैंक की उपयोगिता और लगातार उसके द्वारा सप्लाई जारी रखने के मामले पर अधिकारी पहले तो बचते नजर आए बाद में अमृत 2.0 का हवाला देते हुए जल्दी ही नया वाटर टैंक और पंप हाउस तैयार करने की बात कहने लगे। जलदाय विभाग का कहना है कि नये प्रोजेक्ट का मामला 2023 से लंबित चल रहा है, खेडली फाटक क्षेत्र में स्थान चिन्हित हो चुका है जैसे ही प्रस्तावित बजट को मंजूरी मिलती है वहां पर नया टैंक बना दिया जाएगा। अभी जो भी स्थिति है उसे हम रिपेयर करवाएंगे</p>
<p><strong>हैजा,रैबीज जेसी गंभीर बीमारियों का खतरा</strong><br />दूषित जल के पीने से काफी ज्यादा गंभीर बीमारियों के फैलने की संभावना बढ़ जाती है ऐसे में एक साथ पूरे क्षेत्र में यदि ऐसे पानी की सप्लाई होती है तो वहां पर महामारी फैलने की प्रबल संभावना है।यही नहीं जल जनित रोगों में से हैजा अंग्रेजी में जिसे कॉलरा भी कहा जाता है टाइफाइड, हेपेटाइटिस ए एंड ई  होती है।<br />डिसेंट्री सामान्य भाषा में पेचिश या डायरिया कहा जाता है परजीवी संक्रमण के कारण अभी हाल ही में कुछ दिनों पूर्व मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में बड़ी भयावह स्थिति हो गई थी ऐसे में अस्पताल परिसर के भीतर ही जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के द्वारा सप्लाई के काम में ली जा रही इस भूतल जल संग्रह की ऐसी स्थिति से अस्पताल सहित क्षेत्र के लोगों के लिए गंभीर समस्या पैदा हो गई है।</p>
<p>खुले पानी के स्रोतों में यदि कोई रैबीज जैसी गंभीर बीमारी से संक्रमित जानवर गिर जाये तो पानी के जरिए भी यह गंभीर बीमारी फैल सकती है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />ऐसे पानी जिसमे यदि कोई संक्रमित जानवर गिरा है जो गंभीर बीमारी से संक्रमित हो तो पानी के जरिये बीमारी आगे तक फैलने की प्रबल संभावना हो सकती है। इस मामले में जलदाय विभाग व जिम्मेदारों को ध्यान देने की जरूरत है।<br /><strong>-सुरेन्द्र सनाढ्य, नया नोहरा निवासी मरीज के परिजन</strong></p>
<p>किसी प्रकार का खुला जल पीना मानव शरीर के साथ बीमारियों को निमंत्रण देना जैसा है गंभीर बीमारियों को फैलने से नहीं रोका जा सकता यदि पानी में कोई गंभीर संक्रमित वस्तु जानवर या बाहर से कोई पदार्थ मिला दिया जाए!<br /><strong>डॉ. अभिमन्यु शर्मा , वरिष्ठ चिकित्साधिकारी</strong></p>
<p>टैंक बहुत पुराना है नया प्रोजेक्ट प्रपोजल खेडली फाटक जिंद बाबा के प्रस्तावित है अमृत 2.0 में मंजूरी के बाद काम तैयार करवायेंगे।<br /><strong>-श्याम माहेश्वरी, एक्सईएन पीएचईडी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/danger-lurks-in-the-groundwater-tank----even-rescuing-an-animal-that-falls-in-is-difficult/article-143054</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/danger-lurks-in-the-groundwater-tank----even-rescuing-an-animal-that-falls-in-is-difficult/article-143054</guid>
                <pubDate>Fri, 13 Feb 2026 16:29:30 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-02/%2812200-x-600-px%29-%287%295.png"                         length="724880"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का : जलदाय विभाग सक्रिय, टूटी पेयजल लाइन की दुरुस्त, रात 2 बजे तक चला कार्य </title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति में खबर प्रकाशित  होने के बाद विभाग सक्रिय हुआ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news--the-water-supply-department-activated--repaired-the-broken-drinking-water-line--work-continued-until-2-a-m/article-134679"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px)-(4)5.png" alt=""></a><br /><p>कवाई। कस्बे में सड़क निर्माण के दौरान जलदाय विभाग की मुख्य पेयजल लाइन टूटने से करीब एक सप्ताह से हजारों लीटर पानी व्यर्थ बह रहा था। इस समस्या को लेकर दैनिक नवज्योति ने मंगलवार को प्रमुखता से खबर प्रकाशित कि, खबर प्रकाशित होने के बाद  विभाग सक्रिय हुआ और देर रात तक कार्य कर पेयजल लाइने डलवाई। मंगलवार देर शाम सहायक अभियंता रविन्द्र सिंह मीणा, कनिष्ठ अभियंता तुलसी कुमारी पटवा तथा जलदाय विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे। जेसीबी की सहायता से लगभग डेढ़ फीट गहरा व 35 फीट लंबा गड्ढा कर क्षतिग्रस्त पाइपलाइन को दुरुस्त किया गया। साथ ही भविष्य में पुन: समस्या उत्पन्न न हो, इसके लिए दूसरी नई पाइपलाइन भी बिछाई गई। टीम ने रात करीब 2 बजे तक लगातार कार्य कर मरम्मत एवं लाइन बिछाने का कार्य पूरा किया, जबकि शेष फिनिशिंग कार्य बुधवार सुबह किया गया।</p>
<p>सहायक अभियंता रविन्द्र सिंह मीणा ने स्वयं मौके पर रहकर कार्य की निगरानी की। रात में भी निरंतर निरीक्षण व मार्गदर्शन देते हुए उन्होंने कर्मचारियों का उत्साह बढ़ाया। स्थानीय लोगों ने भी उनके इस त्वरित एक्शन और जनसमस्या के प्रति संवेदनशीलता की प्रशंसा की साथ ही कहा कि इस प्रकार का त्वरित समाधान जनहित में सराहनीय कदम है। बुधवार दोपहर लगभग 2 बजे दोबारा हल्का रिसाव दिखाई देने पर सड़क निर्माण संवेदक मौके पर पहुंचे और कनिष्ठ अभियंता को समस्या से अवगत कराया। संवेदक का कहना है कि पाइपलाइन क्षतिग्रस्त रहने से निर्माण कार्य प्रभावित हो रहा था। उन्होंने जलदाय विभाग से स्थायी समाधान कर लाइन को सुरक्षित करने की मांग की है ताकि सड़क निर्माण कार्य गति पकड़ सके। सड़क निर्माण संवेदक हुक्मचंद नागर ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि जिन उपभोक्ताओं ने पेयजल लाइन से अपने घरों तक कनेक्शन ले रखे हैं, वे सड़क निर्माण प्रारंभ होने से पहले अपनी पाइपलाइनें निकाल लें ताकि आगे निर्माण कार्य में बाधा न आए और क्षति से बचा जा सके।</p>
<p><strong> अधिकारी का कहना </strong><br /> आमजन की समस्या को ध्यान में रखते हुए हमारी टीम ने मंगलवार रात देर तक लगातार कार्य किया। करीब रात 2 बजे तक कार्य कर पाइपलाइन बिछाने का काम पूरा कर दिया गया है। अब हमारी मुख्य पेयजल लाइनों से सप्लाई सुचारु रूप से शुरू हो चुकी है। हल्का-फुल्का रिसाव दिखाई देने पर उसका मरम्मत कार्य भी निरंतर जारी है।<br /><strong>- रवींद्र सिंह मीणा, सहायक अभियंता</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news--the-water-supply-department-activated--repaired-the-broken-drinking-water-line--work-continued-until-2-a-m/article-134679</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news--the-water-supply-department-activated--repaired-the-broken-drinking-water-line--work-continued-until-2-a-m/article-134679</guid>
                <pubDate>Thu, 04 Dec 2025 15:29:14 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-12/1200-x-600-px%29-%284%295.png"                         length="1158570"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>43 करोड़ तो वसूल नहीं कर पाए अब 33 करोड़ का और दे दिया टारगेट, सरकारी विभागों पर करोड़ों रुपए बकाया, कैसे होगा टारगेट पूरा ?</title>
                                    <description><![CDATA[इस बार जलदाय विभाग को मिला 78.11 करोड़ का टारगेट।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/they-couldn-t-recover-43-crores--now-they-ve-given-another-target-of-33-crores--government-departments-owe-crores-of-rupees--how-will-the-target-be-met/article-127978"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news-(4)15.png" alt=""></a><br /><p> कोटा। जलदाय विभाग को इस बार राजस्व वसूली के लिए 78.11 करोड़ रुपए का टारगेट मिला है, जिसे पूरा करना अधिकारियों के लिए चुनौती बन गई। गत वर्ष भी 43 करोड़ रुपए की वसूली बकाया रह गई थी। ऐसे में नए वित्तीय वर्ष 2025-26 के टारगेट में 33.11 करोड़ रुपए और जोड़ दिए गए। अब पुराने और नए बकाया बिलों की राशि को मिलाकर कुल 78 करोड़ 11 लाख रुपए का राजस्व विभाग को वसूलना है, जो अधिकारियों के लिए गले की फांस बना हुआ है। क्योंकि,  एक तरफ विभाग कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है तो वहीं, दूसरी तरफ सरकारी विभाग ही वसूली की राह में रोड़ा बने हुए हैं। वर्तमान में सरकारी विभागों पर करोड़ों रुपए की राशि बकाया चल रही है। जिसकी वजह से हर साल जलदाय विभाग का अधूरा रह जाता है। </p>
<p><strong>वसूली के दौरान मिलती है धमकियां</strong><br />नाम न छापने की शर्त पर एईएन ने बताया कि शहर के विभिन्न इलाकों में बकाया वसूली कर रहे हैं। हर दो माह में घरों पर पानी के बिल भेजे जाते हैं लेकिन लोग महीनों तक जमा नहीं करवाते। जब बकाया बिल वसूलने के लिए कर्मचारी घरों पर जाते हैं तो उन्हें धमकियां दी जाती है। अपशब्द कहकर अपमानित किया जाता है। गत वर्ष भी इस तरह की घटना हो चुकी है।  </p>
<p><strong>दो सरकारी विभागों पर तीन साल से 11 करोड़ बकाया</strong><br />सरकारी विभागों में सबसे ज्यादा बकाया नगर निगम कोटा दक्षिण और केडीए पर है। मात्र इन दो विभाग पर ही 11 करोड़ रुपए से ज्यादा पानी का बिल बकाया चल रहा है। जिसे पिछले 3 सालों से जमा नहीं करवाया गया। हालांकि, जल अफसरों द्वारा नोटिस, रिमाइंडर भी दे चुके हैं, इसके बावजूद बिल जमा नहीं करवाया। इस तरह अन्य सरकारी विभागों पर भी करोड़ों पर रुपए बकाया चल रहा है। ऐसे में सरकारी विभाग अपना बकाया बिल राशि जमा करवा दे तो जलदाय विभाग का 90% से ज्यादा टारगेट पूरा हो सकता है। </p>
<p><strong>नगर निगम दक्षिण पर 7.60 करोड़ बकाया</strong><br />जलदाय विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, नगर निगम कोटा दक्षिण पर 7 करोड़ 60 लाख रुपए पानी का बिल बकाया चल रहा है। यह राशि पिछले तीन सालों से बकाया है। गत वर्ष 19 नवम्बर को निगम आयुक्त को नोटिस दिया था। इसके बाद रिमाइंडर भी भेजे गए। लेकिन, निगम द्वारा जल राजस्व जमा नहीं करवाया। जिससे सरकार द्वारा जलदाय विभाग को दिए गए राजस्व लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया। अधिकारियों का कहना है कि नगर निगम ने अपने कार्यक्षेत्र अधीन विभिन्न स्थानों पर कनेक्शन ले रखे हैं, जहां उपभोग हुए पानी का बिल लंबे समय से बकाया चल रहा है। </p>
<p><strong>केडीए ने नहीं भरा 3.50 करोड़ का बिल </strong><br />कोटा विकास प्राधिकरण (केडीए) पर 3 करोड़ 50 लाख रुपए का बिल बकाया चल रहा है। जिसे जमा करवाने के लिए जल अधिकारियों ने गत वर्ष तत्कालीन केडीए सचिव को बकाया राशि जमा करवाने के नोटिस दिए थे। इसके बावजूद विभाग द्वारा अब तक  जल शुल्क जमा नहीं करवाया गया।  जबकि, केडीए के अधीन श्रीनाथपुरम स्टेडियम पर 5.79 लाख, यूआईटी कॉलोनी प्रताप नगर का 9.41 लाख तथा सीएडी रोड स्थित फ्वारा सर्किल का 5.92 लाख रुपए सहित अन्य केडीए अधीन कार्यक्षेत्रों पर लाखों रुपयों का बिल बकाया चल रहा है। </p>
<p><strong>इन विभागोें पर भी लाखों का बिल बकाया </strong><br />सरकारी विभागों पर लाखों-करोड़ों रुपए जल शुल्क राशि बकाया चल रही है। विभाग द्वारा बकाया जमा नहीं करवाने से जल विभाग हर साल अपना टारगेट पूरा नहीं कर पाता। सरकारी विभागों में बीएसएनएल, पोस्ट आॅफिस, कृषि विभाग, सरकारी अस्पताल, पुलिस थाने सहित कई विभागों पर लाखों का बिल बकाया है। </p>
<p><strong>वसूली लक्ष्य पूरा करने के कर रहे प्रयास</strong><br />सरकार से वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए जो राजस्व वसूली लक्ष्य मिला है, उसे शत-प्रतिशत पूरा करने के प्रयास कर रहे हैं।  कर्मचारियों की कमी है। वर्तमान में जो साधन-संसाधन उपलब्ध हैं, उनका पूरा उपयोग कर राजस्व वसूली की जा रही है। वहीं, जिन सरकारी विभागों पर बकाया चल रहा है, उन्हें नोटिस दिए जा रहे हैं। साथ ही आपसी समन्वय व वार्तालाप के माध्यम से भी बकाया जमा करवाने की कोशिश की जा रही है। <br /><strong>- जीवनधर राठौर, एक्सईएन जलदाय विभाग खंड प्रथम</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/they-couldn-t-recover-43-crores--now-they-ve-given-another-target-of-33-crores--government-departments-owe-crores-of-rupees--how-will-the-target-be-met/article-127978</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/they-couldn-t-recover-43-crores--now-they-ve-given-another-target-of-33-crores--government-departments-owe-crores-of-rupees--how-will-the-target-be-met/article-127978</guid>
                <pubDate>Fri, 26 Sep 2025 15:54:18 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-09/copy-of-news-%284%2915.png"                         length="661342"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का - 78 साल, फिर भी हाल बेहाल पानी तक नहीं पीने को </title>
                                    <description><![CDATA[जिस नदी से ग्रामीण पानी लाते हैं, उसी में जानवर नहाते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/impact-of-the-news--78-years-later--the-situation-is-still-dire--with-no-drinking-water/article-127425"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/_4500-px)-(1)17.png" alt=""></a><br /><p>छीपाबड़ौद। छीपाबड़ौद तहसील क्षेत्र की सहजनपुर ग्राम पंचायत का बिस्लाई गांव आजादी के 78 साल बाद भी पानी जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित है। राजस्थान के अंतिम छोर पर बसे इस गांव के हाल बेहाल हैं। यहां आज भी ग्रामीण नदी से पेयजल लाने को मजबूर हैं। महिलाएं कोसों दूर नदी से मटकी में पानी ढोकर लाती हैं। जिस नदी से ग्रामीण पानी लाते हैं, उसी में जानवर नहाते हैं और किनारे मृत मवेशी भी फेंक दिए जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरपंच से लेकर विधायक तक से कई बार गुहार लगाई, लेकिन चुनाव बाद कोई जनप्रतिनिधि झांकने तक नहीं आया। न शासन ने ध्यान दिया और न ही प्रशासन ने।  </p>
<p>19 सितम्बर को दैनिक नवज्योति में खबर प्रकाशित होने का असर यह हुआ कि जलदाय विभाग की टीम मौके पर पहुंची। सहायक अभियंता रवि गुप्ता, कनिष्ठ अभियंता अखिल रावत सहित विभागीय कर्मचारी गांव पहुंचे और समस्या का जायजा लिया। विभाग ने हेड पंप को ठीक कर पेयजल आपूर्ति सुधारने का प्रयास किया। हालांकि, ग्रामीण रामभरोस का कहना है कि मात्र हेड पंप ठीक करने से समस्या हल नहीं होगी। अब तक गांव में न तो सरकारी ट्यूबवेल स्वीकृत हुआ है और न ही घर-घर नल योजना लागू हुई है। यही कारण है कि बिस्लाई गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/impact-of-the-news--78-years-later--the-situation-is-still-dire--with-no-drinking-water/article-127425</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/impact-of-the-news--78-years-later--the-situation-is-still-dire--with-no-drinking-water/article-127425</guid>
                <pubDate>Sat, 20 Sep 2025 16:20:37 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-09/_4500-px%29-%281%2917.png"                         length="311832"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पेयजल पाइप लाइन के लिए खोदी सड़कें: मरम्मत के नाम पर गड्ढों में भर दी मिट्टी </title>
                                    <description><![CDATA[आमजन व राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/roads-dug-for-drinking-water-pipeline--in-the-name-of-repair--soil-was-filled-in-the-potholes/article-119820"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/882roer1.png" alt=""></a><br /><p>सुकेत। पेयजल पाइप लाइन के लिए खोदी सड़कों के गड्ढों में मरम्मत के नाम पर जलदाय विभाग ने मिट्टी भर दी है। अब यह मिट्टी बरसाती पानी के साथ मिलकर कीचड़ में तब्दील हो रही है। जिससे आमजन व राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार जलदाय विभाग सुकेत ने नगर वासियों को पानी की सुविधा उपलब्ध कराने के नाम पर नगर के महावीर कॉलोनी मोहल्ले में कई दिनों पहले पाइप लाइन डालने के लिए सड़कों को खोद दिया। जलदाय विभाग द्वारा पाइप लाइन डालने के लिए नगर के मुख्य मार्ग सहित प्रत्येक गली मोहल्ले की सड़कें खोदकर नगर की सूरत को बिगाड़ दिया है। महावीर कॉलोनी मोहल्ले में बनी सीसी सड़क को खोदकर मोहल्ले की खूबसूरत सड़क गौरव पथ के सौंदर्य पर दाग लगा दिया है। </p>
<p><strong> वाहन चालक फिसल कर होंगे चोटिल:</strong> नगर वासियों ने बताया कि कई जगह तो खुदाई के दौरान निकली मिट्टी भी जहां की तहां छोड़ रखी है। जब तक खोदी गई सड़क फिर से नहीं बन पाएगी, तब तक गुजरने वाले वाहनों से मिट्टी कीचड़ के साथ उड़ती रहेगी। कीचड़ से वाहन चालक भी फिसल कर चोटिल होते रहेंगे। लोगों ने अधिकारियों से इस संबंध में शिकायत भी की है।</p>
<p><strong>स्कूली बच्चों को हो रही अधिक परेशानी</strong><br />मोहल्ले वासियों ने बताया कि एक जुलाई से बच्चों के विद्यालय खुल चुके हैं। जिससे बच्चों की आवाजाही भी अधिक है। बच्चों को मजबूरन कपड़े खराब करके कीचड़ से होकर निकलना पड़ता है। </p>
<p><strong>कुछ समय पहले ही बना था गौरव पथ </strong><br />नगर में ग्राम पंचायत समय में सार्वजनिक निर्माण विभाग के माध्यम से सड़कों का निर्माण करवाया था। कुछ हिस्से में सड़कें ग्राम पंचायत ने बनवाई थीं। विभागीय तालमेल के अभाव में सड़क बनने के बाद फिर खोद देने से जनता की परेशानी बढ़ रही है। आमजन का कहना है कि सड़कों का निर्माण करने से पहले इससे जुड़े सभी विभागों के साथ तालमेल किया जाना चाहिए। जिससे भविष्य में इस तरह की परेशानी नहीं आए।</p>
<p>बच्चों के विद्यालय खुल चुके हैं। विद्यालय जाने का मुख्य रास्ता यही है। बच्चों को कीचड़ में होकर जाना पड़ता है। जिससे उनकी यूनिफॉर्म खराब हो जाती है। <br /><strong>-परमानन्द मेहर, मोहल्लावासी</strong></p>
<p>जलदाय विभाग की लापरवाही से खोदी सीसी सड़क में पाइप लाइन भी नहीं डाली गई और सीसी सड़क खोदकर मिट्टी से भर दी गई। जिससे राहगीर, स्कूली बच्चे एवं दोपहिया वाहन चालक चोटिल हो जाते हैं।<br /><strong>-गजेन्द्र खटीक, मोहल्लावासी</strong></p>
<p>जलदाय विभाग ने ग्राम पंचायत से एनओसी ली थी। उस आधार पर  जलदाय विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से बात कर समस्या का समाधान जल्द करवाया जाएगा।<br /><strong>-हेमेन्द्र सांखला, ईओ, नगर पालिका, सुकेत</strong></p>
<p>मौका दिखाकर समस्या का समाधान करवा दिया जाएगा। जिससे आमजन को समस्या से निजात मिल सके। <br /><strong>-बच्चू सिंह मीणा, एक्सईएन, जलदाय विभाग, रामगंजमंडी    </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/roads-dug-for-drinking-water-pipeline--in-the-name-of-repair--soil-was-filled-in-the-potholes/article-119820</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/roads-dug-for-drinking-water-pipeline--in-the-name-of-repair--soil-was-filled-in-the-potholes/article-119820</guid>
                <pubDate>Tue, 08 Jul 2025 14:59:51 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-07/882roer1.png"                         length="600914"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जल संकट : कवाई में पानी की किल्लत, कस्बेवासी परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[पुरानी पानी की टंकी की क्षमता कम, आबादी अधिक]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/water-crisis--water-shortage-in-kawai--town-residents-are-worried/article-116248"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/rtroer-(4)3.png" alt=""></a><br /><p>कवाई। भीषण गर्मी के बीच कवाई कस्बे में जल संकट गहराता जा रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि कस्बे की बढ़ती आबादी के मुकाबले वर्तमान में मौजूद पानी की टंकी पर्याप्त साबित नहीं हो रही है। ऐसे में एक और पानी की टंकी बनाए जाने की जरूरत लगातार महसूस की जा रही है। जलदाय विभाग के कर्मचारियों ने भी माना है कि कस्बे में समय पर जल आपूर्ति कर पाना अब चुनौती बन गया है। विभाग के एक कर्मचारी ने बताया कि हम समय पर पूरे कस्बे में जलापूर्ति नहीं कर पाते क्योंकि पानी का स्टॉक सीमित है। यदि एक और पानी की टंकी बन जाए तो हम नियमित और संतुलित आपूर्ति सुनिश्चित कर सकते हैं। पानी की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए एक ओर पानी की टंकी का निर्माण अत्यंत आवश्यक है। स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों को इस दिशा में शीघ्र कदम उठाने चाहिए ताकि कस्बेवासियों को समय पर पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। स्थानीय लोगों ने विभाग और प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द नई पानी की टंकी का निर्माण कराया जाए ताकि गर्मी के मौसम में लोगों को राहत मिल सके। </p>
<p><strong>पुरानी टंकी की क्षमता है कम</strong><br />कवाई कस्बे में टंकी पुराने समय की है। जिसकी क्षमता काफी कम है। आबादी लगभग 20 हजार से अधिक है। कवाई में एक नई बड़ी पानी की टंकी बनाने की सख्त आवश्यकता है। आबादी के हिसाब से पानी की सप्लाई पर्याप्त नही हो पाती। पानी की सप्लाई एक दिन छोड़कर एक दिन होती है नल का प्रेशर भी कम आता है। पानी की समस्या का समाधान तब हो सकता है, जब कस्बे में एक नई टंकी बने। </p>
<p>कवाई कस्बे में एक और पानी की नई टंकी बनाने की मांग को लेकर पीएचडी को अवगत करा दिया है। जिसमें कवाई की बढ़ती आबादी को देखते हुए एक ओर पानी की नई टंकी बनाने की मांग की है। कवाई कस्बे में टंकी पुराने समय की है जिसकी क्षमता काफी कम है और आबादी लगभग 20 हजार से अधिक है।  <br /><strong>- वीरेंद्र सिंह हाडा,  मंडल अध्यक्ष</strong></p>
<p>हर साल गर्मियों में पानी की भारी किल्लत होती है। कई बार हमें इधर-उधर से पानी लाना पड़ता है। अब समय आ गया है कि यहां एक नई पानी की टंकी बनाई जाए।<br /><strong>-अशोक यदुवंशी, कस्बेवासी </strong></p>
<p>हर साल गर्मियों में यही हाल रहता है। केवल आश्वासन देते है लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ।<br /><strong>-सुदर्शन शर्मा, भाजपा नेता</strong></p>
<p>पानी की आपूर्ति की समस्या गंभीर होती जा रही है। जिससे कई कॉलोनियों के निवासी प्रभावित हो रहे हैं। पानी की टंकी अपर्याप्तता के कारण पानी समय पर नहीं मिल पा रहा है। जिससे लोगों को दैनिक जीवन में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।<br /><strong>-विष्णु चक्रधारी भाया, मंडल अध्यक्ष, भाजपा युवा मोर्चा</strong></p>
<p>टंकी से पानी छोड़ने के बाद 10 मिनिट तक नल से हवा आती रहती है फिर पानी आता है। हमारा घर खानपुर रोड पर थोड़ी दूरी पर होने से नल देरी से आता है और जल्दी चला जाता है। जिसकी वजह से टंकिया खाली रह जाती है। कई बार 181 पर भी शिकायत दी लेकिन कोई संतुष्टि पूर्ण जवाब नहीं मिल पाता है। जलदाय विभाग को सरकार से कवाई में पानी की क्षमता बढ़ाने के लिए प्रयास करना चाहिए और नल की सप्लाई को प्रत्येक दिन सुचारु करना चाहिए ताकि समस्या का समाधान हो सके।<br /><strong>- रोहित पारेता, कस्बेवासी। </strong></p>
<p>मेरे द्वारा विकास कार्यों पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है। आमजन की हर समस्या का समाधान करने का पूरा प्रयास कर रहा हूं। इस पानी की टंकी को लेकर जल्द ही प्रपोजल बनाकर जल्द से जल्द निर्माण कार्य चालू करवाने का पूरा प्रयास करूंगा। वही अंबेडकर बस्ती थाने के पीछे भी जल्द पानी की पाइपलाइन बिछाई जाएगी। <br /><strong>- राधेश्याम बैरवा, विधायक, बारां अटरु</strong></p>
<p>प्रपोजल बनाकर भेज रखा है। अकावद परवन परियोजना प्रोजेक्ट में स्वीकृत है। वर्क आर्डर जारी होने के बाद ही निर्माण कार्य चालू होगा। <br /><strong>-चंद्रप्रकाश मीणा, कार्यवाहक सहायक अभियंता </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/water-crisis--water-shortage-in-kawai--town-residents-are-worried/article-116248</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/water-crisis--water-shortage-in-kawai--town-residents-are-worried/article-116248</guid>
                <pubDate>Tue, 03 Jun 2025 16:41:56 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-06/rtroer-%284%293.png"                         length="447039"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        