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                            <item>
                <title>कोटा के पीडब्ल्यू  विद्यापीठ के छात्र हर्ष वर्धन कुमार का कमाल, जेईई मेंन्स में 66 से 99 पर्सेंटाइल तक पहुँचे</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा के हर्ष वर्धन कुमार ने JEE Main में चमत्कारिक सुधार कर सबको चौंका दिया। सेशन 1 में 66 परसेंटाइल लाने के बाद, उन्होंने हार नहीं मानी और सटीक रणनीति व PW विद्यापीठ के गुरुजनों के मार्गदर्शन से सेशन 2 में 99 परसेंटाइल हासिल किए। उनकी यह सफलता निरंतरता और खुद पर भरोसे की जीत है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/amazing-feat-of-harsh-vardhan-kumar-student-of-pw-vidyapeeth/article-152137"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)17.png" alt=""></a><br /><p><span style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';">प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में सफलता पाने के लिए मेहनत, सही रणनीति और लगातार प्रयास बहुत जरूरी होते हैं। इसका बेहतरीन उदाहरण कोटा में तैयारी कर रहे छात्र हर्ष वर्धन कुमार ने पेश किया है, जिन्होंने JEE Main Session 1 में 66 पर्सेंटाइल से Session 2 में 99 पर्सेंटाइल हासिल कर एक शानदार सुधार दर्ज किया। उनकी यह यात्रा न केवल संघर्ष और आत्मविश्वास की मिसाल है, बल्कि यह दिखाती है कि सही दिशा में की गई मेहनत से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। </span><span style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';">इस शानदार उपलब्धि के पीछे की कहानी और उनकी तैयारी की रणनीति को जानने के लिए हमने हर्ष वर्धन कुमार से खास बातचीत की:</span></p>
<p class="MsoNormal" style="line-height:115%;background:#FFFFFF;margin:10pt 0in 10pt 0in;"><strong><span style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';color:#222222;">आपकी JEE Main Session 1 से Session 2 तक की यात्रा कैसी रही? इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण क्या था?</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="line-height:115%;background:#FFFFFF;margin:10pt 0in 10pt 0in;"><span style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';color:#222222;">मेरी JEE Mains Session 1 से Session 2 तक की यात्रा इतनी अप्रत्याशित रही है कि मुझे खुद भी विश्वास नहीं था कि मैं इतना अच्छा परिणाम हासिल कर पाऊँगा। इस बड़े बदलाव के पीछे मुख्य रूप से 2-3 कारण थे। जब मैं छठ पूजा के बाद कोटा वापस आया, तब मुझे एहसास हुआ कि समय हाथ से निकलता जा रहा है। मुझे लगा कि अगर अब कुछ नहीं किया, तो खाली हाथ घर वापस जाना पड़ेगा। दूसरी बात यह थी कि मुझे खुद पर थोड़ा भरोसा था; क्योंकि मैंने पहले भी कई एग्जाम्स आखिरी समय में एक सटीक रणनीति के दम पर निकाले थे। बस इसी आत्मविश्वास ने मुझे आगे बढ़ाया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="line-height:115%;background:#FFFFFF;margin:10pt 0in 10pt 0in;"><strong><span style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';color:#222222;">आपने खुद बताया कि शुरुआत में पढ़ाई में ज्यादा रुचि नहीं थी—तो फिर ऐसा कौन-सा मोड़ आया जिसने आपको मेहनत करने के लिए प्रेरित किया?</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="background:#FFFFFF;margin:10pt 0in 10pt 0in;"><span style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';color:#222222;">ऐसा नहीं था कि मेरी पढ़ाई में रुचि नहीं थी, लेकिन जब कुछ समझ नहीं आता था, तो पढ़ने का मन भी नहीं करता था। उदाहरण के लिए, मेरी केमिस्ट्री बहुत कमजोर थी, यहाँ तक कि मुझे 11वीं की केमिस्ट्री भी समझ नहीं आती थी। इसके विपरीत, मैथ्स में मैं शुरू से अच्छा था और फिजिक्स भी औसत था। लेकिन Session 1 के बाद मुझे समझ आया कि अगर स्कोर बढ़ाना है, तो केमिस्ट्री पर फोकस करना ही होगा, और मैंने वही किया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="line-height:115%;background:#FFFFFF;margin:10pt 0in 10pt 0in;"><strong><span style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';color:#222222;">PW Vidyapeeth Kota ने आपकी सफलता में किस तरह से भूमिका निभाई? क्या कोई खास शिक्षक या रणनीति थी जिसने आपको मदद की?</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="background:#FFFFFF;margin:10pt 0in 10pt 0in;"><span style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';color:#222222;">मेरी सफलता की कहानी में कोटा PW विद्यापीठ और वहां के अनुभवी गुरुजनों का योगदान अतुलनीय है। यहाँ के शिक्षकों के मार्गदर्शन ने न केवल मेरे ज्ञान को बढ़ाया, बल्कि मुश्किल विषयों के प्रति मेरा नजरिया भी बदल दिया। जैसे कि ऑर्गेनिक केमिस्ट्री में राहुल पारीक सर (RP Sir) जैसा कोई नहीं है; मेरा मानना है कि अगर किसी छात्र को उनसे यह विषय समझ नहीं आया, तो शायद ही कोई और उसे समझा पाएगा। फिजिक्स में अंशुल गुप्ता सर ने मेरी नींव मजबूत की, उन्होंने मुझे केवल फॉर्मूले रटने के बजाय वैचारिक स्पष्टता पर ध्यान केंद्रित करना सिखाया, जो परीक्षा के दौरान बहुत मददगार साबित हुआ। वहीं गणित के क्षेत्र में महेश जैन सर एक सच्चे 'लिजेंड' हैं, जिनसे बेहतर शिक्षक मैंने आज तक नहीं देखा। साथ ही, राजीव रस्तोगी सर की विशेषज्ञता का दायरा सिर्फ JEE तक सीमित नहीं था, बल्कि वे दुनिया भर के विभिन्न और कठिन प्रकार के सवालों से हमारा परिचय कराते थे; उनकी मेहनत का स्तर यह है कि अक्सर उनके नोट्स से सीधे सवाल मुख्य परीक्षा में मिल जाते हैं। इन सभी गुरुजनों के सामूहिक प्रयासों और कोटा विद्यापीठ के बेहतरीन माहौल ने ही मेरी सफलता का मार्ग प्रशस्त किया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="line-height:115%;background:#FFFFFF;margin:10pt 0in 10pt 0in;"><strong><span style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';color:#222222;">इस सफर में आपको किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा और आपने उन्हें कैसे पार किया?</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="background:#FFFFFF;margin:10pt 0in 10pt 0in;"><span style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';color:#222222;">66 परसेंटाइल से 99 परसेंटाइल तक का सफर बहुत कठिन था, लेकिन नामुमकिन नहीं। सबसे बड़ी चुनौती थी उन 2-3 महीनों में कंसिस्टेंसी बनाए रखना। अक्सर ऐसा होता था कि एक हफ्ते तक 10-12 घंटे पढ़ने के बाद मन भटकने लगता था कि 'आज रहने देते हैं', लेकिन मैंने खुद को रुकने नहीं दिया। मैंने पहले दिन जो JEE Mains का एनालिसिस करके प्लान बनाया था, उसे पूरी ईमानदारी से फॉलो किया कि क्या पढ़ना है और क्या छोड़ना है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="line-height:115%;background:#FFFFFF;margin:10pt 0in 10pt 0in;"><strong><span style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';color:#222222;">अब आगे के लिए आपके क्या लक्ष्य और भविष्य की योजनाएँ हैं? क्या आप अन्य छात्रों को कोई संदेश देना चाहेंगे?</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';">फिलहाल मैं अपनी पूरी ऊर्जा के साथ JEE Advanced की तैयारी में जुटा हूँ और अपना शत-प्रतिशत योगदान दे रहा हूँ। हालाँकि मुझे इस बात का सटीक अंदाजा नहीं है कि मैं सिर्फ कट-ऑफ क्लियर कर पाऊँगा या मेरी रैंक अंडर 5000 आएगी, लेकिन मैं अपनी ओर से सर्वश्रेष्ठ प्रयास करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा हूँ। अब मैं मानसिक रूप से काफी शांत और तनावमुक्त महसूस करता हूँ क्योंकि मैं स्वयं को एक सुरक्षित स्थिति में पाता हूँ। अन्य तैयारी करने वाले छात्रों को मैं यही मशविरा दूँगा कि सबसे पहले अपने शिक्षकों पर अटूट भरोसा रखें; उनका अनुभव आपसे कहीं अधिक है और उनकी बातें भले ही कभी कड़वी लगें, पर वे हमेशा आपके हित में होती हैं। साथ ही, अपनी पढ़ाई में कंसिस्टेंसी बनाए रखें, चाहे क्लासेस ऑनलाइन हों या ऑफलाइन, उन्हें नियमित रूप से अटेंड करें। केवल लेक्चर देखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अधिक से अधिक अभ्यास और PYQs को हल करना अनिवार्य है। कभी भी यह गलतफहमी न पालें कि आप केवल दो विषयों के सहारे JEE फतह कर लेंगे; यदि कोई विषय कठिन लगता है, तो उससे जी चुराने के बजाय उस पर डटकर मेहनत करना ही एकमात्र विकल्प है। अंत में मेरा यही मानना है कि यदि आप पूरी ईमानदारी से अपनी प्रक्रिया यानी 'प्रोसेस' को फॉलो करते हैं, तो लक्ष्य स्वयं ही हासिल हो जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';"> </span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 15:40:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>प्रतिभा और मेहनत के दम पर प्रेरणा का स्त्रोत बनी बालिकाएं</title>
                                    <description><![CDATA[प्रशिक्षण देने वाली संस्थान की निदेशक ने बताया कि बच्चियां बेहद जिज्ञासु और मेहनती हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-girls-have-become-a-source-of-inspiration-on-the-basis-of-talent-and-hard-work/article-126442"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news-(1)9.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। संघर्ष भले कठिन हो, लेकिन संकल्प और मेहनत से हर सपना पूरा किया जा सकता है इन पंक्तियों को चरितार्थ कर रही नारी निकेतन संस्थान अधीक्षक अंशुल मेहंदीरत्ता जो कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा संचालित नांता स्थित नारी निकेतन में रह रही बालिकाएं अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर समाज के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बनी हुई है। निकेतन की बच्चियां अनुशासन और नियमित प्रशिक्षण से न केवल आत्मनिर्भर बन रही हैं बल्कि वेस्ट मटेरियल को उपयोगी वस्तुओं में बदलकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रही हैं। अधीक्षक ने बताया कि नारी निकेतन में रहने वाली बालिकाओं को विभिन्न संस्थाओं और प्रशिक्षण केंद्रों की मदद से सिलाई, कढ़ाई, पेंटिंग व हस्ताकला जैसे अन्य प्रशिक्षण दिया जाता है। इन प्रशिक्षणों के दौरान बच्चियां अपनी रुचि व स्टॉफ की मदद से हुनर सीखकर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही हैं।</p>
<p><strong>वेस्ट मटेरियल से ये बना रहे आइटम </strong><br />कांच की बोतल पर पेंटिंग करके उसको घर पर सजावट के काम में लाना, वेस्ट कपड़े से मांगलिक कार्यों में दिए जाने वाले लिफाफे बनाया, कपड़े से विभिन्न प्रकार के दीवार हैंगिंग, साइट बैग, टोकरियां, शो-पीस, दीवार हैंगिंग, बैग और सजावटी सामान सहित आकर्षक व उपयोगी वस्तुएं तैयार कर रही हैं।</p>
<p><strong>इन प्लेटफॉर्म पर बेचा जाता है </strong><br />अधीक्षक ने बताया कि इन वस्तुओं की प्रदर्शनी समय-समय पर शहर में आयोजित होने वाले विभिन्न त्यौहार जिनमे रक्षाबंधन, दीपावली और दशहरे सहित अन्य विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शनी के दौरान बेचे जाते है। बनाए सामान प्रदर्शनी में खरीददारी करने आने वाले देखकर आश्चर्यचकित हो जाते है और जमकर सराहना करते है। प्रशिक्षण देने वाली संस्थान की निदेशक भारतीय कौल ने बताया कि बच्चियां बेहद जिज्ञासु और मेहनती हैं। उन्हें थोड़ी सी दिशा मिलते ही वे नए-नए डिजाइन और आइडिया पर काम करने लगती हैं। कुछ बच्चियां तो मोबाइल पर विभिन्न प्रकार की डिज्ञाइन देखकर भी सामान बनाती है। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद बालिकाएं शादी होने के बाद भी सामान बनाकर आत्मनिर्भर बन रही हैं।</p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />नारी निकेतन की बालिकाएं किसी भी रूप से सामान्य बच्चियों से कम नहीं हैं। बस उन्हें अवसर और मार्गदर्शन की जरूरत होती है। <br /><strong>- अंशुल मेहंदीरत्ता, नारी निकेतन संस्थान अधीक्षक </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Sep 2025 16:24:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस विशेष : कुछ नया और मेहनत करने वाले ही रचते है इतिहास </title>
                                    <description><![CDATA[षड्यंत्र की पूर्व सूचना जुटाकर दंगे रोकने में निभाई है अहम भूमिका। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/international-women-s-day-special--only-those-who-do-something-new-and-work-hard-create-history/article-72174"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/antarrshtriye-mahila-diwas-vishesh----kuch-nya-or-mehnat-krne-wale-hi-rchte-h-itihas...harnavdashahji,-baran-news-08-03-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>हरनावदाशाहजी। आधुनिक समाज में महिलाएं भी पुरुषों से किसी भी दृष्टि से पीछे नहीं है। यदि कुछ नया करने का इरादा हो, विचार उन्नत तथा मकसद सार्थक हो तो परिणाम भी आशा जनक ही प्राप्त होते हैं तथा ऐसे व्यक्ति ही इतिहास रचते हैं। हरनावदाशाहजी निवासी ललिता लोधा सेवानिवृत पुलिस निरीक्षक ने अपराध से लड़ने और अपराधियों को कड़ा संदेश देते हुए पुलिस में सेवाएं दी। सेवा के दौरान झालावाड़ जिले के मनोहर थाना तथा इकलेरा क्षेत्र में सांप्रदायिक दंगे के षड्यंत्र की पूर्व सूचना संकलित कर तत्काल उच्चाधिकारियों को प्रेषित की। जिससे इस अप्रिय घटना की रोकथाम संभव हो सकी और जिला प्रशासन ने राहत की सांस ली। राजस्थान पुलिस विभाग में अपने सेवाकाल के दौरान कई उल्लेखनीय कार्य किए जिनकी सर्वत्र प्रशंसा हुई  इस दौरान विभाग द्वारा अनगिनत प्रशंसा पत्र एवं नगद पुरस्कार, उत्तम सेवा चिन्ह, अति उत्तम सेवा चिन्ह तथा अलंकरण आदि भी प्रदान किए। पुलिस विभाग में उनकी उल्लेखनीय सेवाओं के दृष्टिगत भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा इन्हें गत वर्ष अति विशिष्ट सेवा पदक से भी नवाजा गया है। समाजोपयोगी कार्यक्रम भी प्रारंभ किए: इन्होंने लोधा जाति को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने और महिलाओं को उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए प्रेरित किया एवं उनके  उत्थान के लिए अनेक समाजोपयोगी कार्यक्रम भी प्रारंभ किए। जिसमें प्रौढ़ शिक्षा भी सम्मिलित है। इसके अतिरिक्त उनके पास अखिल भारतीय लोधा लोधी अधिकारी कर्मचारी संगठन (आलोक) के राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष का भी दायित्व है। यह हरित क्रांति, पौधारोपण, महिला सुरक्षा, स्वच्छ भारत मिशन, पर्यटन पर्यावरण कार्यों के साथ-साथ पीड़ित महिलाओं को निस्वार्थ भावना से कानूनी सहायता भी उपलब्ध कराती हैं।</p>
<p><strong>सेवानिवृत्ति के बाद भी कर रही समाजसेवा</strong><br />सितंबर 2022 में राज्य सेवा से निवृत होने के उपरांत इन्होंने अपना संपूर्ण जीवन समाज सेवा एवं सेवा निवृत कर्मचारियों की सेवार्थ समर्पित करने का निर्णय लिया।  यह वर्तमान में अखिल भारतीय लोधा लोधी एवं लोध समाज की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष होने के साथ-साथ राजस्थान पुलिस सेवानिवृत्त पुलिस कर्मचारी कल्याण संस्थान,  कोटा संभाग की मीडिया प्रभारी के पद पर भी नियुक्त हैं तथा अपने कार्य को समर्पण की भावना के साथ निरंतर संपादित कर रही हैं। </p>
<p><strong>जलवाड़ा की बेटी योग एवं आयुर्वेद को पहुंचा रही आमजन तक </strong><br /><strong>किशनगंज। </strong>किशनगंज सरोकार के क्षेत्र में महिलाएं आगे बढ़ रही है। किशनगंज क्षेत्र के जलवाड़ा गांव की बेटी आचार्य सुगन नागर की बचपन से ही सामाजिक कार्यो में रुचि रही है। मध्यमवर्गीय परिवार होने से सामाजिक रूढ़िवादिता के चलते अनेक कठिनाइयों का सामना किया। जगद्गुरुरामानंद अचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय से साहित्याचार्य एवं ज्योतिषाचार्य की उपाधि प्राप्त की। महात्मा गांधी संस्थान से योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा में डॉक्टरी कर रही है। ज्योतिष के क्षेत्र में समाज की प्रथम ज्योतिषाचार्य बनने का गौरव प्राप्त हुआ। ज्योतिष वास्तु योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा संस्थान के माध्यम से योग एवं आयुर्वेद को आमजन तक पहुंचाने का निरंतर कार्य कर रही है। समाजसेवा में हमेशा तत्पर आचार्य नागर ने ज्योतिष में शोध कर डायमंड आॅफ इंडिया अवार्ड, इंडियन टॉप 100 एस्ट्रोलॉजर अवार्ड, शान ए भारत अवार्ड, मध्य प्रदेश गौरव रत्न, शान-ए- राजस्थान सम्मान सहित 11 राष्ट्रीय अवार्ड अपने नाम किए। विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर दैवज्ञ शिरोमणि रजत पदक से भी नवाजा जा चुका है।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Mar 2024 19:12:56 +0530</pubDate>
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                <title>किसान के बेटे ने शिक्षक भर्ती में पहली रैंक हासिल की, चाय वाले का बेटा बना टीचर</title>
                                    <description><![CDATA[चयनित अभ्यर्थियों को कस्बेवासियों व परिवारजनों ने बधाई दी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/farmer-s-son-secured-first-rank-in-teacher-recruitment--tea-seller-s-son-also-became-a-teacher/article-57503"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/kisan-k-bete-ne-shikshak-bhrti-me-phli-rank-hasil-ki,-chai-wale-ka-beta-bhi-bna-teacher...harnavdashahji,-baran-news-19-09-2023.png" alt=""></a><br /><p>हरनावदाशाहजी। बिना संघर्ष के चमक नहीं मिलती, जो जल रहा है तिल-तिल उसी दीए में उजाला होता है। मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा और दृढ़ इच्छा शक्ति हो तो कोई भी लक्ष्य नामुमकिन नहीं होता। इन्हीं कहावतों को सार्थक कर दिखाया कस्बे के उन युवा अभ्यर्थियों ने जिन्होंने पारिवारिक और आर्थिक स्थितियां विपरीत होने के बावजूद मेहनत, लगन व कठोर परिश्रम से मंजिल तय कर अपने गरीब मां बाप ओर परिवारजनों का नाम रोशन किया। इसमें किसान के बेटे सोनू कुशवाह ने जिले में तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती में पहली रैंक हासिल की। चाय वाले के बेटे ने भी शिक्षक बनने मुकाम हासिल किया। पानी पतासे बेचकर परिवार चलाते हुए दिनेश राठौर ने भी अपने टीचर बनने का सपना पूरा करने में कामयाबी हासिल की। कस्बे के इस प्रार छह अभ्यर्थियों की पारिवारिक व आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद भी हालही में आए तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती में सफलता हासिल करने से परिवार व रिश्तेदारों को ही नहीं कस्बेवासियों को खुशी हुई है। चयनित अभ्यर्थियों को कस्बेवासियों व परिवारजनों ने बधाई दी। </p>
<p><strong>मजदूर के बेटे ने मेहनत कर मुकाम पाया</strong><br />कस्बे के असलम बेग के बेटे दानिश का तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती परीक्षा में चयन हुआ है। पिता मजदूरी करते हैं, माता सिलाई कर परिवार का जीवन-यापन करती है। दानिश ने पारिवारिक व आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बाद भी मेहनत जारी रखी। वे बताते हैं कि प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी करने के साथ साथ कार्य भी किया। बड़ी बहन भी प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रही है। इसी प्रकार 49 मील रेगर बस्ती निवासी पूरणमल रेगर पुत्र चतुर्भुज रेगर का तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती में चयन हुआ है। इनके पिता मजदूरी कर घर चलाते हैं। माता का निधन हो गया है। इनकी पारिवारिक व आर्थिक स्थिति खराब होने के बाद भी मेहनत जारी रखी। रेगर ने कई कठिनाइयों का सामना किया। पूरणमल का शिक्षक भर्ती में चयन होने पर परिवार में खुशी का माहौल है।</p>
<p>मेहनत से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। मनुष्य को सही दिशा में मेहनत करने के पश्चात समय आने पर जो फल प्राप्त होता है, वह सुकून भरा होता हैं। छीपाबड़ौद रोड पर टी स्टॉल लगाकर परिवार चलाने वाले कुंजबिहारी प्रजापति के पुत्र हेमंत प्रजापति ने भी न केवल माता-पिता का गर्व से सीना तान दिया, बल्कि परिवार का नाम भी रोशन किया। पारिवारिक व आर्थिक स्थिति शुरू से ही खराब होने के बावजूद माता पिता ने मेहनत कर उच्च शिक्षा हासिल करवाई।</p>
<p><strong>गरीब भाई-बहन गजेंद्र व मनीषा ने भी मान बढाया</strong><br />नागर मोहल्ला निवासी भाई-बहन गजेंद्र नागर व मनीषा नागर ने एक साथ तृतीय श्रेणी शिक्षक बनकर मेहनत मजदूरी से घर का गुजारा करने वाली मां का सपना न केवल पूरा किया, बल्कि समाज में अपना मान भी बढाया है। मां ने मेहनत-मजदूरी कर कर बच्चों को पढ़ाया। शिक्षक भर्ती परीक्षा 2022 में जनरल फाइट कर तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती में दोनों भाई बहन का एक साथ चयन हुआ है। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बाद भी दोनों ने शिक्षा जारी रखी और सफलता हासिल की। दोनों भाई-बहन अपनी इय सफलता का श्रेय कड़ी लगन, शिक्षकों और परिजन को देते हैं।</p>
<p><strong>पानी पतासे बेचकर परिवार को पाला फिर टीचर बनने का सपना पूरा किया</strong><br />दिनेश राठौर पतासी का ठेला लगाकर अपने घर का खर्चा चलाता है। दिनेश राठौर ने ठेला लगाने के बाद अपनी पढ़ाई भी जारी रखते हुए 7 साल पढ़ाई कर शिक्षक भर्ती में सफलता हासिल की। इसके लिए वो अपने माता पिता व गुरुजनों को श्रय देते हैं। इसी प्रकार कमलेश कुशवाह ने खेती-बाडी व सब्जी बेचकर परिवार चलाने वाले पिता के पुत्र कमलेश कुशवाह ने भी विपरीत हालात में उच्च शिक्षा पढकर शिक्षक बनने का गौरव हासिल किया।</p>
<p><strong>किसान के बेटे सोनू कुशवाह ने जिले में पहली रैंक की हासिल</strong><br />श्रेणी अध्यापक शिक्षक भर्ती में बारां जिले में प्रथम रैंक हासिल की है। जिसके बाद से गांव व परिवार में खुशी का माहौल है। वहीं आॅल राजस्थान में 245 वीं रैंक प्राप्त की। ग्रामीणों व परिवारजनों ने अभ्यर्थी मोतीपुरा कलां निवासी सोनू कुशवाह तृतीय श्रेणी अध्यापक भर्ती में अंतिम रूप से चयनित होने पर बधाई दी। चयनित सोनू कुशवाह ने इस सफलता का श्रेय अपने संयुक्त परिवार को दिया है। बता दे कि सोनू के  पिता-माता किसान है। यह पूरा परिवार खेती से जुड़ा हुआ है। सोनू कुशवाह बताते हैं कि संघर्ष की हमेशा जीत होती है। कठिन मेहनत करने से सफलता जरूर मिलती है। सोनू ने नर्सरी से ही सरकारी विद्यालय में अध्ययन कर उच्च शिक्षा प्राप्त की। किसान माता-पिता ने खेती किसानी कर उच्च शिक्षा हासिल करवाई। पढ़ने के लिए शहर में जाने के लिए और कोचिंग के पैसे न होने के कारण घर पर रहकर स्वयं अध्ययन किया। पिछली तृतीय श्रेणी अध्यापक भर्ती की तैयारी करने के लिए छबड़ा शहर में किराए से रहकर पढ़ाई की। लेकिन दो अंकों से असफल रहे। फिर से कठिन मेहनत कर तृतीय श्रेणी अध्यापक भर्ती 2022 में चयन होकर माता-पिता, परिवार, गुरुजनों और गांव नाम रोशन किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Sep 2023 16:23:45 +0530</pubDate>
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                <title>हर धागे में मिला मेहनत का रंग और प्रेम का बंधन</title>
                                    <description><![CDATA[  कोटा में निर्मित कोटा डोरिया साड़ियों ने देश-प्रदेश सहित विश्व में अपनी पहचान कायम की है। वर्तमान में हुनर के बाजीगर परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। वजह है बाजार में साड़ियों के खरीदार नहीं होना और नकली साड़ियों का कम दामों में बिकना। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-color-of-hard-work-and-the-bond-of-love-found-in-every-thread/article-12135"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/ii1.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा में निर्मित कोटा डोरिया साड़ियों ने देश-प्रदेश सहित विश्व में अपनी पहचान कायम की है। कोटा डोरिया ने शिक्षा नगरी की ख्याति में चार चांद लगाए हैं। कोटा से 20 किलोमीटर दूर कैथून नगरपालिका के बुनकरों के हुनर के परदेशी भी कायल हैं, लेकिन वर्तमान में हुनर के बाजीगर परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। वजह है बाजार में साड़ियों के खरीदार नहीं होना और नकली साड़ियों का कम दामों में बिकना। जिसके चलते कोटा डोरिया की चमक फीकी पड़ गई है। कैथून में लगभग 3 हजार से ज्यादा हथकरघे है। यहां हर घर में साड़ियां बनाने के लिए हथकरघे लगे हुए हैं जहां प्रसिद्ध कोटा डोरिया साड़ियां बुनी जाती हैं। लेकिन अब अधिकांश हथकरघे लुप्त होने होने की कगार पर है। कुछ हथकरघे जो अभी भी संचालित हो रहे हैं वह आने वाले दिनों में बंद होने के कगार पर है। कैथून के बुनकरों का कहना है केंद्र व राज्य सरकारें योजनाएं तो लागू करती है,लेकिन यह योजनाएं बुनकरों तक नहीं पहुंच पाती,ऐसे में कोटा डोरिया बनाने वाले बुनकर मायूस है।<br /><br /><strong>एक साड़ी बनने में लगते है 20 से 40 दिन</strong><br />कोटा डोरिया साड़ी की शुरूआती कीमत ढाई हजार रुपये है। कीमतें रेशम-कपास के मिश्रण,जरी के किनारों की चौड़ाई और रूपांकनों के मिश्रण पर निर्भर करती हैं। एक साड़ी को बुनने में लगभग 20 दिन लगते हैं, और जटिल रूपांकनों वाली साड़ी को पूरा होने में 40 दिन तक का समय लग सकता है। कैथून में लगभग हर घर में एक विशेष रूप से डिजाइन किया गया पिट लूम होता है, जिसमें पैडल होते हैं जो एक संकीर्ण आयताकार गड्ढे में लटके होते हैं। एक बुनकर फर्श पर बैठता है और करघे को चलाने के लिए पैडल का उपयोग करता है। कुछ घरों में दो करघे होते हैं।<br /><br /><strong>मशीनों से तैयार हो रहा नकली कोटा डोरिया</strong><br />बुनकर रुखसाना ने बताया है कि उत्तरप्रदेश, बिहार, गुजरात के सूरत व पश्चिम बंगाल में पावरलूम पर कोटा डोरिया ब्रांड की नकली साड़ी तैयार की जाती है। वहां मशीन से तैयार साड़ी को कम दामों में बेचा जा रहा है। कई बार असली व नकली की पहचान नहीं हो पाने के कारण लोग सस्ते दाम में नकली कोटा डोरिया खरीद लेते हैं। मोटे अनुमान से कोॉटा में कोटा डोरिया के नाम से 10 से 15 हजार साड़ीयां नकली बिक जाती है।<br /><br /><strong>नई बुनकर नीति को लागू करे सरकार</strong> <br />मास्टर बुनकर इसरार हुसैन का कहना है कि उन्होंने राजस्थान हैंडलूम एंड हैंडीक्राफ्ट जोधपुर से इस विषय में डिग्री ली हुई है। कोटा डोरिया बनाना उनका पुश्तैनी काम है। वह पिछले 7 वर्षों से कोटा डोरिया साड़ियों का व्यापार कर रहे हैं और वह बुनकर भी है। हुसैन का कहना है कि केंद्र व राज्य सरकार की बुनकरों के लिए बहुत सारे योजनाएं तो है लेकिन वह प्रचार-प्रसार के अभाव में बुनकरों तक नहीं पहुंच पाती। अभी भी ऐसे सैंकड़ो बुनकर है जिन्हें हैंडलूम या हैंडिक्राफ्ट राजस्थान की तरफ से कार्ड नहीं मिले। वहीं दूसरी और खादी ग्रामोंद्योग या हैंडीक्राफ्ट हैंडलूम की और से किसी प्रदर्शनी,कार्यक्रम में उन्हें जगह नहीं मिल पाती और वह अपना माल बेचने से वंचित रह जाते है। जितने भी मास्टर बुनकर है उन्हें खादी ग्रामोद्योग में आरक्षण दिया जाए ताकि उन्हें भी सरकारी नौकरी का लाभ मिले। इसके साथ ही जयपुर,जोधपुर,कोटा मुख्य बाजार में दुकानें उपलब्ध करवाई जाए जहां पर्यटक ज्यादा आते हों, क्योंकि कैथून में ज्यादा बड़ी मार्केट नहीं है। पालिका की तंग गलियों में  व्यापारी कोटा डोरिया बेचते हंै। साउथ इंडिया के ज्यादातर लोग कोटा डोरिया खरीदने के लिए कैथून आते हैं। कोटा डोरिया का 99 प्रतिशत निर्यात साउथ इंडिया में होता है। हुसैन ने कहा है कि सरकार को बुनकर पॉलिसी बनाकर लागू करनी चाहिए ताकि बुनकरों को लाभ मिल सके। इसके साथ ही सरकार को कोटा डोरिया की सरकारी खरीद भी करनी चाहिए। <br /><br /><strong>कोटा डोरिया से सालाना 5 करोड का कारोबार</strong><br />कोटा डोरिया से सलाना 5 करोड का कारोबार  होता है। 90 प्रतिशत कोटा डोरिया का निर्यात साउथ में होता है। कोटा शहर में 30 दुकानों पर कोटा डोरिया बेचा जाता है। कैथून की एक बुनकर फरीदन बताती है कि एक कोटा डोरिया,जटिल रूपांकनों के साथ बनने वाली साड़ी में लगभग 4 से 5 हजार रुपए का खर्च आता है,ऐसे में साड़ियां नहीं बिकने से परिवार की आर्थिक स्थिति खराब हो जाती है और गुजारा करना मुश्किल हो जाता है। सरकार द्वारा इन साड़ियों की सरकारी खरीद भी नहीं कि जाती। हैंडलूम और क्राफ्ट सेंटर सरकार ने सिर्फ दिखावे के लिए बनाए है।<br /><br /><strong>10 हजार लोगोें को मिला रोजगार</strong><br />कोटा डोरिया से 10 लोगों को रोजगार मिला हुआ है। 5 हजार हैण्डलूम हाडौती अंचल में चल रहे हैं। 4 हजार हैण्डलूम कोटा के कैथून कस्बे में चल रहे है। कैथून में हर घर में लूम चल रही है। कैथून में रोजाना 800 साडियां तैयार होती है। जिसमें 70 प्रतिशत महिला बुनकर काम करती है। कैथून में 80 हजार से 1 लाख रूपए तक की साडी बनती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Jun 2022 15:49:06 +0530</pubDate>
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                <title>UPSC के फाइनल रिजल्ट में गुदड़ी के लालों ने रचा इतिहास</title>
                                    <description><![CDATA[गंगापुर सिटी। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा 2021 का फाइनल रिजल्ट सोमवार को जारी किया। 685 कैंडिडेट्स पास हुए हैं। इसमें गंगापुर सिटी क्षेत्र से वंदना मीणा, सिद्धार्थ बरवाल, गगन मीणा, अभिषेक मीणा, अंशुल नागर भी शामिल है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/sawai-madhopur/gangapur-city--guddi-s-lalon-created-history-in-the-final-result-of-upsc--achieved-the-goal-with-hard-work/article-10940"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/itihas.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>गंगापुर सिटी।</strong> संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा 2021 का फाइनल रिजल्ट सोमवार को जारी किया। 685 कैंडिडेट्स पास हुए हैं। इसमें गंगापुर सिटी क्षेत्र से वंदना मीणा, सिद्धार्थ बरवाल, गगन मीणा, अभिषेक मीणा, अंशुल नागर भी शामिल है। इन अभ्यर्थियों ने रोजाना 7-8 घंटे और परीक्षा के दिनों में 15-16 घंटे तक पढ़ाई की और सफलता हासिल की। इनकी सफलता पर दैनिक नवज्योति ने इनसे बातचीत की</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>वंदना मीणा को मिली 331वीं रैंक</strong> </span>: एक छोटे से गांव टोकसी की बेटी ने यूपीएससी एक्जाम के्रक कर साबित कर दिया कि प्रतिभाएं किसी की मोहताज नहीं होती हैं। कल तक गांव की एक साधारण सी लड़की आज गांव के युवाओं की हीरो हो गई है। बात कर रहे हैं वंदना मीणा की जिसने आईएएस एक्जाम में 331वीं रैंक हासिल कर अपने गांव और परिवार का नाम रोशन कर दिया। पढ़ाई में शुरू से ही प्रतिभाशाली रही वंदना ने अपना ग्रेजुएशन 2018 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के आचार्य नरेंद्र जैन कॉलेज से किया। उन्होंने मैथ्स में आॅनर्स के साथ ग्रेजुएट किया। वंदना के पिता पृथ्वीराज मीणा दिल्ली पुलिस में हैं और मां संपति देवी गृहिणी हैं। वंदना के अनुसार सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। उसने परीक्षा के दिनों में 15 से 16 घंटे तक पढ़ाई की। साल के बाकी दिनों में करीब 10 घंटे रोजाना पढ़ाई करना उसका रूटीन रहा है।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>सिद्धार्थ बोले</strong></span>- मैं कर्मयोगी हूं, भारतीय लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा 2021 के जारी हुए परिणामों में सिद्धार्थ बरवाल ने एसटी वर्ग में 18वीं रैंक हासिल की है। सिद्धार्थ के पिता बीएल मीणा अभी एक पखवाड़े पहले तक गंगापुर में मंडी सचिव थे, उनका हाल ही में जयपुर स्थानांतरण हुआ है। वहीं माता नीलम राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में शिक्षिका हैं। सिद्धार्थ का कहना है कि मैं कर्मयोगी हूं। कर्म पर विश्वास करता हूं। 2021 में आईआईटी कानपुर पास आउट होने के बाद आईपीएस में सफलता हासिल करने का लक्ष्य बनाया।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>अंशुल नागर को भी मिली सफलता</strong></span> : बामनवास के गांव कोयला के निवासी अंशुल नागर का भी यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में चयन हुआ है। अंशुल के पिता डॉ. बीएल नागर फिलहाल निवाई में वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्साधिकारी हैं। अंशुल ने अपनी स्कूली शिक्षा एम्मानुएल मिशन स्कूल से की जबकि उच्च माध्यमिक परीक्षा केंद्रीय विद्यालय नंबर तीन जयपुर से प्राप्त की।<br />तनुश्री को पहले प्रयास में मिली सफलता:बामनवास का एक छोटा सा गांव है नाहरसिंह पुरा। इसी गांव की एक बेटी तनुश्री मीणा ने सफलता की नई इबारत लिख दी। तनुश्री का पहले ही प्रयास में आईएएस में चयन हो गया है। तनुश्री के पिता पुरुषोत्तम मीणा बीएसएनएल में अधिशासी अभियंता हैं और मां नारंगी देवी गृहिणी हैं। तनुश्री की पूरी शिक्षा जयपुर में ही हुई और उसने पहले ही प्रयास में आईएएस क्रेक किया।</p>
<p><br /><span style="color:#ff0000;"><strong>रोज 7-8 घंटे की पढ़ाई से मिली सफलता:</strong></span> सिविल सेवा परीक्षा में गगन सिंह मीणा का चयन आईएएस में हुआ है। गगन के पिता चरण सिंह मीणा किसान है और मां बच्ची देवी गृहिणी है। गगन के एक भाई है जो रेलवे में ईसीआरसी विभाग में कार्यरत है। गगन प्रतिदिन 7-8 घंटे नियमित पढ़ाई करते और उनका सपना आईएएस बनना था। हाल ही जारी की गई मेरिट में गगन को 592वीं मैरिट मिली है।<br />अभिषेक को मिली 670 वीं रैंक: इसी तरह इसी गांव मीणा बड़ौदा के अभिषेक मीणा का चयन यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में हुआ है। अभिषेक के पिता देशराज मीणा जलदाय विभाग में एसई है जबकि मांग सुशीला देवी गृहिणी है। अभिषेक बताते है कि उन्होंने जयपुर से बी-टेक कर दिगी से आईएस की तैयारी शुरू की और आईएएस बनना उनका सपना था। आईएएस की सूची में अभिषेक को 670वीं रैंक मिली है।<br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>सवाई माधोपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jun 2022 12:45:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>महिला दिवस विशेष: बचपन से पायलट बनने का ख्वाब- वृषाली</title>
                                    <description><![CDATA[आज के युग में महिलाए हर सेक्टर में काम कर रही है, चाहे वह सेना हो या अन्य विभाग हो।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur--indigo-airline-s-captain-vrushali-bhandarkar-said-that-since-childhood-he-had-a-dream-to-become-a-pilot--after-hard-work-today-she-is-flying-the-plane/article-5715"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/22.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। इंडिगो एयरलाइन की कैप्टन वृषाली भंडारकर ने कहा कि बचपन से उसका पायलट बनने का सपना था। कड़ी मेहनत के बाद आज वह विमान उड़ा रही है।<br />सन 2006 से विमान का संचालन कारी जयपुर निवासी वृषाली भंडारकर ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सभी महिलाओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज के युग में महिलाएं हर क्षेत्र में काम कर रही है। शुरुआती दिनों में उन्हें विमान संचालन में काफी झिझक थी। लेकिन अब आसानी से विमान का संचालन करती है। इस कार्य में परिवार जनों का पूरा सहयोग रहा। पहले महिलाएं घर से बाहर नहीं निकलती थी। लेकिन आज के युग में महिलाए हर सेक्टर में काम कर रही है, चाहे वह सेना हो या अन्य विभाग हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 08 Mar 2022 16:26:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>मिताली राज: अपनी मेहनत के दम पर आगे बढ़कर दिखाया</title>
                                    <description><![CDATA[ पुरस्कार : 2003 की क्रिकेट उपलब्धियों के लिए मिताली राज को 21 सितम्बर 2004 को अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jodhpur/mithali-raj--showed-ahead-on-the-strength-of-her-hard-work/article-5639"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/k2new.jpg" alt=""></a><br /><p>मिताली राज का जन्म 3 दिसम्बर 1982 को जोधपुर, राजस्थान में हुआ था। उन्होंने भरतनाट्यम नृत्य में भी ट्रेंनिग प्राप्त की है। <br />क्रिकेट के कारण वह अपनी भरतनाट्यम् नृत्य कक्षाओं से बहुत समय तक दूर रहती थी। तब नृत्य अध्यापक ने उन्हे क्रिकेट और नृत्य में से एक चुनने की सलाह दी थी। उनकी मां लीला राज एक अधिकारी थी। उनके पिता धीरज राज डोराई राज बैंक में नौकरी करने के पूर्व एयर फोर्स में थे। वे स्वयं भी क्रिकेटर रहे हैं, उन्होंने मिताली को प्रोत्साहित करने के लिए हर संभव प्रयत्न किया। उसके यात्रा खर्च उठाने के लिए अपने खर्चों में कटौती की। उनकी मां  ने बेटी की के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी ताकि जब खेलों के अभ्यास के पश्चात थकी-हारी लौटे तो वह अपनी बेटी का ख्याल रख सके।   मिताली के माता-पिता ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया, जिसके कारण वह अपने इस मुकाम तक पहुँच सकी है। मिताली राज ने एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच में 1999 में पहली बार भाग लिया। यह मैच मिल्टन कीनेस, आयरलैंड में हुआ था जिसमें मिताली ने नाबाद 114 रन बनाए। उन्होंने 2001-2002 में लखनऊ में इंग्लैंड के विरुद्ध प्रथम टैस्ट मैच खेला। मिताली जब प्रथम बार अंतराराष्ट्रीय टेस्ट मैच में शामिल हुईं तो बिना कोई रन बनाए   आउट हो गई। लेकिन अपनी मेहनत के दम पर आगे बढ़कर दिखाया और अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट में आज तक का सर्वाधिक स्कोर  बना कर कीर्तिमान स्थापित किया।   <br /> पुरस्कार : 2003 की क्रिकेट उपलब्धियों के लिए मिताली राज को 21 सितम्बर 2004 को अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                            <category>जोधपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Mar 2022 16:20:58 +0530</pubDate>
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