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                <title>outflow - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>भूंकप से थर्राया वेनेजुएला: 32 मौतें, 700 घायल, राष्ट्रपति ने घोषित किया आपातकाल</title>
                                    <description><![CDATA[वेनेजुएला में आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के दोहरे भूकंप में मरने वालों की संख्या बढ़कर 32 हो गई है और 700 घायल हैं। कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने आपातकाल लागू कर टास्क फोर्स गठित की है। स्कूल, ट्रेन और हवाई अड्डे बंद कर दिए गए हैं। अमेरिका और अन्य देशों ने तुरंत मानवीय सहायता भेजने की घोषणा की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/venezuela-shaken-by-earthquake-32-dead-700-injured-president-declared/article-158055"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/1200-x-600-px)-(5)2.png" alt=""></a><br /><p>काराकास। दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में आये भूकंप के कारण हुए हादसों में 32 हो गयी है, जबकि करीब 700 लोग घायल हुए हैं। इस हादसे में हताहत लोगों की संख्या में और इजाफा होने की आशंका है। कार्यवाहक राष्ट्रपति ने हादसे की व्यापकता को देखते हुए देश में इमरजेंसी लगा दी है। अमेरिकी संस्था यूएसजीएस ने बताया कि कहा कि एक भूकंप के तुरंत बाद ही दूसरा भूकंप आया। ये दो भूकंप वेनेजुएला के मोरोन शहर से 16 किलोमीटर और सैन फेलिप से 24 किलोमीटर दूर बुधवार शाम 6:04 बजे (भारतीय समयानुसार गुरुवार तड़के 3:34 बजे) आये। रिक्टर स्केल पर इनकी तीव्रता 7.2 और 7.5 मापी गयी। इससे राजधानी काराकस सहित कई इलाकों में भारी तबाही हुई है भूकंप के झटके पूरे देश में और कोलंबिया सहित लैटिन अमेरिका के अन्य हिस्सों में भी महसूस किये गये। अमेरिकी सुनामी चेतावनी केंद्रों के अनुसार, अब सुनामी का कोई खतरा नहीं है।</p>
<p>राष्ट्रपति रोड्रिगेज के अनुसार, राजधानी काराकस से लेकर तटीय शहर कैटिया ला मार तक पूरे देश में इमारतें गिरने की खबर है। वेनेजुएला की नेशनल असेंबली के अध्यक्ष के अनुसार, अब तक तटीय राज्य ला गुएरा सबसे बुरी तरह प्रभावित हुआ है। सुश्री रोड्रिगेज ने खोज और बचाव के लिए एक विशेष टास्क फोर्स की घोषणा की। देश भर में स्कूलों में कक्षाएं एक सप्ताह के लिए स्थगित कर दी गयी हैं, और रेल सेवाएं और गैर-जरूरी गतिविधियां अस्थायी रूप से रद्द कर दी गयी हैं। काराकस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा अस्थायी रूप से बंद है। वेनेजुएला के सुरक्षा बलों सहित सैकड़ों कर्मचारी अब संकट से निपटने के लिए मौके पर मौजूद हैं।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वाशिंगटन ‘मदद के लिए तैयार और सक्षम है।’ अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका ‘तुरंत वेनेजुएला में खोज और बचाव दल, चिकित्सा संसाधन और मानवीय सहायता भेज रहा है।’ कोलंबिया, मैक्सिको, पेरू, अर्जेंटीना, तुर्की और पनामा सहित कई अन्य देशों ने संवेदना और सहायता की पेशकश की है। रोड्रिगेज के मुताबिक अमेरिका, पनामा, कतर, क्यूबा, निकारागुआ, तुर्की, जॉर्डन, कोलंबिया, बारबाडोस, इंगलैंड, ब्राजील और मेक्सिको तुरंत वेनेजुएला का सहयोग करने के लिए आगे आये। अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी वेनेजुएला सरकार से संपर्क किया और प्राकृतिक आपदा से निपटने में मदद करने का आश्वासन दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 14:24:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>वैश्विक कारकों और घरेलू आंकड़ों से तय होगी अगले सप्ताह बाजार की दिशा, इन शेयरों में दिखेगा गज़ब का एक्शन</title>
                                    <description><![CDATA[पिछले सप्ताह की शानदार बढ़त के बाद घरेलू शेयर बाजार आने वाले हफ्ते में नए ट्रिगर्स के लिए तैयार है। निवेशकों की नजर मुख्य रूप से अमेरिका-ईरान शांति वार्ता की प्रगति, यूएस फेडरल रिजर्व की बैठक (16-17 जून) और थोक महंगाई के आंकड़ों पर रहेगी। मानसून की चाल भी बाजार की दिशा तय करेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/global-factors-and-domestic-data-will-decide-the-direction-of/article-156943"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/share-market4.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। बीते सप्ताह घरेलू शेयर बाजारों में रही लिवाली के बाद आने वाले सप्ताह में निवेशकों की नजर ईरान शांति वार्ता और विभिन्न वृहत आर्थिक संकेतकों पर होगी। ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता की उम्मीद में गत शुक्रवार को हुई जबरदस्त लिवाली से पिछले सप्ताह घरेलू शेयर बाजारों में साप्ताहिक तेजी देखी गयी। आने वाले सप्ताह में भी शांति वार्ता की प्रगति सबसे प्रमुख कारक होगा। घरेलू स्तर पर महंगाई और आयात-निर्यात के आंकड़ों के साथ मानसून की प्रगति का असर बाजार पर दिखेगा। </p>
<p>खुदरा महंगाई के आंकड़े शुक्रवार शाम जारी हुए हैं जबकि थोक महंगाई के आंकड़े सोमवार दोपहर जारी होने हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक 16 और 17 जून को होनी है। फेड का बयान भी शेयर बाजार को प्रभावित करेगा। गत सप्ताह सोमवार और गुरुवार को छोड़कर शेष तीन दिन बाजार में तेजी रही। विशेषकर, शुक्रवार को प्रमुख सूचकांक दो प्रतिशत चढ़ गये। बीएसई का सेंसेक्स 1,284.61 अंक (1.73 प्रतिशत) की साप्ताहिक बढ़त के साथ सप्ताहांत पर 75,527.95 अंक पर बंद हुआ।</p>
<p>नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 सूचकांक भी 256.20 अंक यानी 1.10 प्रतिशत चढ़कर 23,622.90 अंक पर पहुंच गया। वृहत बाजार में निवेशकों ने कुछ कम पैसा लगाया। निफ्टी मिडकैप-50 सूचकांक 0.39 प्रतिशत और स्मॉलकैप-100 सूचकांक 0.48 प्रतिशत चढ़ा। बैंकिंग और वित्तीय कंपनियों में जहां लिवाली हावी रही, वहीं आईटी कंपनियां दबाव में रहीं। सेंसेक्स में कोटक महिंद्रा बैंक में सबसे अधिक 6.85 प्रतिशत की साप्ताहिक तेजी देखी गयी। एक्सिस बैंक का शेयर 6.47 प्रतिशत, आईसीआईसीआई बैंक का 6.19, इंडिगो का 5.14, भारतीय स्टेट बैंक का 4.00, एचडीएफसी बैंक का 3.35 और बजाज फाइनेंस का 3.32 प्रतिशत ऊपर बंद हुआ।</p>
<p>मारुति सुजुकी का शेयर 2.47 प्रतिशत, एलएंडटी का 2.43, एशियन पेंट्स का 2.28 और हिंदुस्तान यूनीलिवर का 2.20 प्रतिशत चढ़ा। अल्ट्राटेक सीमेंट में 1.81 प्रतिशत, आईटीसी में 1.57, सनफार्मा में 1.33 और भारती एयरटेल में 1.31 प्रतिशत की तेजी रही। इंफोसिस का शेयर सबसे अधिक 6.73 प्रतिशत गिर गया। इटरनल का शेयर 4.93 फीसदी, टाटा स्टील का 4.33, एचसीएल टेक्नोलॉजीज का 3.92, टेक महिंद्रा का 3.59, एनटीपीसी का 2.13, टाइटन का 1.71 और टीसीएस का 1.67 प्रतिशत उतर गया। बजाज फिनसर्व, ट्रेंट, अडानी पोर्ट्स और बीईएल के शेयर भी नीचे बंद हुए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 14:51:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>टीएमसी को बड़ा झटका: अभिनेत्री कोयल मल्लिक ने राज्यसभा से दिया इस्तीफा, उच्च सदन में तृणमूल के बचे सिर्फ 9 सांसद</title>
                                    <description><![CDATA[तृणमूल कांग्रेस में जारी उथल-पुथल के बीच प्रसिद्ध अभिनेत्री कोयल मल्लिक ने राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। सुखेंदु शेखर रॉय, सुस्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाइक के बाद यह चौथा बड़ा इस्तीफा है। इस सियासी संकट से उच्च सदन में टीएमसी की संख्या घटकर महज 9 रह गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/big-blow-to-tmc-actress-koel-mallik-resigns-from-rajya/article-156704"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/koel-mullick.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी राजनीतिक अनिश्चितता और उथल-पुथल के बीच मशहूर अभिनेत्री और नेता कोयल मल्लिक ने गुरुवार को राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। मल्लिक के इस कदम से पहले राज्यसभा सदस्य सुखेंदु शेखर रॉय और सुस्मिता देव भी उच्च सदन से इस्तीफा दे चुके हैं। वहीं, आज ही सुबह एक और टीएमसी सांसद प्रकाश चिक बड़ाइक ने उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन को अपना औपचारिक इस्तीफा सौंपा था। बड़ाइक के इस्तीफे के बाद उच्च सदन में टीएमसी की सदस्य संख्या घटकर 10 रह गई थी, जो दोपहर बाद कोयल मल्लिक के इस्तीफे के साथ ही अब गिरकर महज 9 पर आ गई है।</p>
<p>बंगाली फिल्म इंडस्ट्री की बेहद लोकप्रिय अभिनेत्री कोयल मल्लिक को टीएमसी नेतृत्व द्वारा विधानसभा चुनावों से ठीक पहले राज्यसभा के लिए नामित किया गया था। इसे पार्टी की एक बड़ी रणनीतिक चाल के रूप में देखा गया था। सांसद बनने के बाद कोयल अपने पिता व दिग्गज अभिनेता रंजित मल्लिक और परिवार के साथ नई दिल्ली में नए संसद भवन भी गई थीं और उन्होंने कई मौकों पर पार्टी के चुनाव प्रचार में सक्रिय भूमिका निभाई थी।</p>
<p>राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कोयल मल्लिक का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब टीएमसी चौतरफा राजनीतिक चुनौतियों और लगातार लग रहे झटकों का सामना कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, अभिनेत्री पिछले कुछ समय से चल रहे राजनीतिक विवादों से खुद को दूर रखना चाहती थीं और उन्होंने इस बढ़ती सियासी हलचल में उलझने के बजाय गरिमापूर्ण तरीके से पद छोड़ना बेहतर समझा। विधानसभा चुनाव के नतीजों की घोषणा के बाद से ही टीएमसी के भीतर असंतोष के सुर उभरने लगे थे। कयास लगाए जा रहे हैं कि इस्तीफों का यह सिलसिला यहीं नहीं रुकने वाला है और आने वाले दिनों में कुछ और सांसद भी इसी राह पर चल सकते हैं। </p>
<p>हालांकि, पार्टी ने अभी तक इन सामूहिक इस्तीफों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। पद छोड़ने वाले अधिकांश नेताओं ने भी अभी तक अपने भविष्य के राजनीतिक पत्तों को नहीं खोला है। सांसद पद की शपथ लेते समय देश सेवा का संकल्प दोहराने वाली कोयल मल्लिक का महज कुछ महीनों के भीतर ही इस्तीफा दे देना, राष्ट्रीय राजनीति में टीएमसी के घटते प्रभाव और पार्टी के भीतर चल रहे गहरे आंतरिक संकट की ओर साफ इशारा कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 18:18:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पूंजी का पलायन रोके रिजर्व बैंक</title>
                                    <description><![CDATA[ रिजर्व बैंक के ही आंकड़े बताते हैं कि पिछले 3 वर्षों में हमारा पूंजी खाता ऋणात्मक रहा है यानी जितनी विदेशी पूंजी अपने देश में आई है उससे ज्यादा पूंजी अपने देश से बाहर गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/reserve-bank-to-stop-capital-outflow/article-5652"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/rbi_new-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>रिजर्व बैंक की कमेटी ने संस्तुति की है कि देश को पूंजी के मुक्त आवागमन की छूट देनी चाहिए। यानी विदेशी निवेशक भारत में स्वच्छंदता से आ सके और भारतीय निवेशक अपनी पूंजी को स्वच्छंदता से भारत से बाहर ले जाकर निवेश कर सकें, ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए। कमेटी का कहना है इसके चार लाभ हैं- पहला यह कि देश में पूंजी की उपलब्धि बढ़ जाएगी। यह सही है कि यदि विदेशी पूंजी का भारत में आना सरल हो जाएगा। जो निवेशक विदेशी भारत में निवेश करेंगे, उनके लिए समय क्रम में अपनी पूंजी को निकाल कर अपने देश वापस ले जाना आसान हो जाएगा। लेकिन यह दो धारी तलवार है। यदि विदेशी निवेशकों के लिए भारत में पूंजी लाना आसान हो जाएगा तो उसी प्रकार भारतीयों के लिए भी अपनी पूंजी को बाहर ले जाना भी आसान हो जाएगा। रिजर्व बैंक के ही आंकड़े बताते हैं कि पिछले 3 वर्षों में हमारा पूंजी खाता ऋणात्मक रहा है यानी जितनी विदेशी पूंजी अपने देश में आई है उससे ज्यादा पूंजी अपने देश से बाहर गई है। इससे प्रमाणित होता है कि पूंजी का मुक्त आवागमन विपरीत दिशा में ज्यादा चल रहा है। जैसे दो टंकियों के बीच में एक वॉल लगा हो तो पानी उस तरफ ज्यादा जाएगा, जहां पानी का स्तर कम होगा। इसी प्रकार विदेशी और भारतीय पूंजी के बीच में वॉल को खोल दें तो किस तरफ  पूंजी का बहाव होगा, यह इस पर निर्भर करेगा कि पूंजी का आकर्षण किस तरफ  अधिक है।</p>
<p><br />कमेटी का दूसरा कथन है कि पूंजी के मुक्त आवागमन से अपने देश में पूंजी की लागत कम हो जाएगी और ब्याज दर कम हो जाएगी। लेकिन रिजर्व बैंक के ही आंकड़े इसी के विपरीत खड़े हैं, जो की बता रहे हैं हमारा पूंजी खाता ऋणात्मक है यानी पूंजी बाहर जा रही है और जिसके कारण अपने देश में पूंजी का मूल्य बढ़ रहा है, घट नहीं रहा है। कमेटी ने तीसरा तर्क दिया है की पूंजी के मुक्त आवागमन से भारतीय कंपनियों द्वारा लिए जाने वाले लोन का विविधिकरण हो जाएगा। जैसे किसी कंपनी को यदि फैक्ट्री लगानी हो तो कुछ पूंजी वह भारतीय बैंक से लेंगे, कुछ विदेशी बैंक से लेंगे, कुछ विदेशी निदेशकों से लेंगे। इस प्रकार उनके ऊपर जो लोन का भार है वह किसी एक स्रोत पर निर्भर होने के स्थान पर विविध स्रोतों पर बंट जाएगा और ज्यादा टिकाऊ होगा। यह बात सही है कई कंपनियों ने हाल में विदेशी पूंजी का लोन लिया भी है। लेकिन जितना इन्होंने लिया है उससे ज्यादा बाहर भी गया है इसलिए इस विविधिकरण कंपनियों के लिए लाभप्रद रहा हो सकता है, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था को लाभ हुआ हो ऐसा नहीं दिखता है। कमेटी के अनुसार चौथा लाभ भारतीय निवेशकों के लिए निवेश का विविधिकरण है। भारतीय निवेशक विदेशी प्रॉपर्टी एवं शेयर बाजार के साथ-साथ भारतीय प्रॉपर्टी एवं शेयर बाजार में निवेश कर सकेंगे। लेकिन पुन: यह लाभ निवेशक विशेष को होगा। यह देश का लाभ नहीं है, क्योंकि जब भारतीय निवेशक अपनी पूंजी को विदेशों में निवेश करते हैं तो भारत की पूंजी बाहर जाती है और भारत की अर्थव्यवस्था कमजोर होती है। इन कारणों से मेरी दृष्टि से कमेटी के दिए गए तर्क मान्य नहीं है।</p>
<p><br />विशेष बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने कहा है कि आपदा के समय विकासशील देशों को पूंजी के मुक्त आवागमन पर रोक लगानी चाहिए। उन्होंने कोरिया और पेरू द्वारा कोविड संकट के दौरान ऐसे प्रतिबंध लगाने का स्वागत किया है। हमें भी इस दिशा पर विचार करना चाहिए। वर्तमान में हमारे सामने एक और संकट है कि अभी तक अमेरिकी फेडडरल रिजर्व बोर्ड ने ब्याज दर शून्य के लगभग कर रखी थी। निवेशकों के लिए लाभप्रद था कि अमेरिका में लोन लेते और भारत में निवेश करते। लेकिन अब फेडरल रिजर्व बोर्ड ने संकेत दिए हैं कि वे शीघ्र ही ब्याज दरों में वृद्धि करेंगे। यदि ऐसा होता है तो निवेशकों के लिए अपनी पूंजी को भारत से निकालकर अमेरिका ले जाना ज्यादा लाभप्रद हो जाएगा, क्योंकि अमेरिका में निवेश को ज्यादा स्थाई और टिकाऊ माना जाता है। इसलिए हमको विचार करना चाहिए कि आखिर हमारी देश से पूंजी का पलायन हो क्यों रहा है। दो टंकियों के बीच में वॉल को खोलने से पानी का बहाव बहार की तरफ  क्यों जा रहा है?</p>
<p><br />जर्नल ऑफ इंडियन एसोसिएशन ऑफ  सोशल साइंस इंस्टिट्यूशन में छपे एक पर्चे के अनुसार भारत से पूंजी के पलायन के चार कारण है। पहला कारण भ्रष्टाचार का है। यह सही है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल के स्तर पर भ्रष्टाचार में भारी कमी आई है, लेकिन यह भी सही है की जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार में उससे ज्यादा वृद्धि हुई है। इसलिए सरकार को नीचे से भ्रष्टाचार को दूर करने के कदम उठाने चाहिए। दूसरा कारण बताया गया है कि सरकारी ऋण ज्यादा होने से निवेशकों को भय होता है कि ऋण की भरपाई करने के लिए आने वाले समय में रिजर्व बैंक नोटों को ज्यादा मात्रा में छपेगा, जिससे देश में महंगाई बढ़ेगी और भारतीय रुपए का अवमूल्यन होगा। तब उनकी पूंजी का मूल्य स्वत: घट जाएगा। </p>
<p>इसलिए सरकारी ऋण की अधिकता से पूंजी का पलायन होता है। वर्तमान में कोविड संकट के कारण ही क्यों ना हो फिर भी यह तो सत्य है ही कि अपनी सरकार द्वारा लिए गए ऋण में भारी वृद्धि हुई है। इस परिस्थिति में भारत सरकार को ऋण कम लेना चाहिए। लेकिन इससे निवेश में कमी नहीं होनी चाहिए अन्यथा पुन: आर्थिक विकास की गति में ठहराव आएगा। इसलिए सरकार को चाहिए कि अपनी खपत को कम करें, जिससे की सरकार को लोन कम लेने पड़े और पूंजी का पलायन न हो। तीसरा कारण बताया गया है कि मुक्त व्यापार को अपनाने से भी पूंजी का पलायन होता है। इसका कारण यह दिखता है कि जब हम मुक्त व्यापार को अपनाते हैं तो उद्यमियों के लिए आसान हो जाता है कि अपनी पूंजी को उस देश में ले जाए जहां पर उत्पादन करना सुलभ हो। जैसे भारतीय उद्यमी के लिए यह सुलभ हो जाएगा कि वह अपनी फैक्ट्री को बांग्लादेश में लगाए और बांग्लादेश में माल का उत्पादन करके भारत को निर्यात कर दे। ऐसे में मुक्त व्यापार के कारण पूंजी का पलायन बढ़ता है। इसलिए सरकार को चाहिए कि रिजर्व बैंक की कमेटी की रिपोर्ट को अमान्य करते हुए और भ्रष्टाचार पर रोक लगाए सरकारी खपत को घटाए और मुक्त व्यापार को अपनाने के स्थान पर आयात कर बढ़ाए। तब ही अपने देश से पूंजी का पलायन कम होगा और देश की आर्थिक विकास दर बढ़ेगी।</p>
<p><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
<p><br /><strong>मुद्दा</strong><br />विशेष बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने कहा है कि आपदा के समय विकासशील देशों को पूंजी के मुक्त आवागमन पर रोक लगानी चाहिए। उन्होंने कोरिया और पेरू द्वारा कोविड संकट के दौरान ऐसे प्रतिबंध लगाने का स्वागत किया है। हमें भी इस दिशा पर विचार करना चाहिए। वर्तमान में हमारे सामने एक और संकट है कि अभी तक अमेरिकी फेडडरल रिजर्व बोर्ड ने ब्याज दर शून्य के लगभग कर रखी थी।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Mon, 07 Mar 2022 18:50:25 +0530</pubDate>
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