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                <title>kidney - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>पथरी के ऑपरेशन में निकाली किडनी, सदमे से मरीज की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[सरकारी अस्पताल जाने पर हुआ खुलासा, परिजनों ने थाने के बाहर किया हंगामा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/pali/kidney-removed-during-stone-operation-patient-dies-of-shock/article-86755"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/4111u1rer-(1)2.png" alt=""></a><br /><p>सुमेरपुर। यहां संचालित एक निजी अस्पताल में पथरी का ऑपरेशन करने के दौरान मरीज की किडनी निकालने और बाद में उसकी मौत होने का मामला प्रकाश में आया है। मृतक के परिजनों और समाज के लोगों ने शनिवार को डॉक्टर की गिरफ्तारी मांग को लेकर पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन किया। मामले की गंभीरता को देख पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जिला मुख्यालय पर मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराया।</p>
<p>सुमेरपुर निवासी मुकेश पुत्र कानाराम सरगरा ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसके ससुर रमेश पुत्र नाथूराम सरगरा को पेट में दर्द होने पर गत 3 जुलाई को शहर के तहसील रोड स्थित निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद बताया कि मरीज के पेट में पथरी और पित्त की थैली में कैंसर है। इस पर उन्हें अस्पताल में भर्ती करा दिया गया। तीन दिन बाद मरीज को छुट्टी दे दी गई। 8 जुलाई को मरीज को फिर अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां उसे भर्ती कर लिया गया। दूसरे दिन बताया कि पित्त की थैली से कैंसर की गांठ निकालने के लिए ऑपरेशन करना पड़ेगा। 9 जुलाई को डॉक्टर ने रमेश का ऑपरेशन किया। 15 जुलाई को डॉक्टर ने कहा, कैंसर पूरे शरीर में फैल गया है, इन्हें घर लेकर जाओ। सुधार नहीं होने से 19 जुलाई को गीतांजलि अस्पताल उदयपुर लेकर गए। जहां से दवाइयां लेकर घर लौट गए।</p>
<p>2 अगस्त को बांगड़ अस्पताल पाली लेकर पहुंचे। जहां चिकित्सकों ने पेट की जांच करवाने को कहा। रिपोर्ट देखकर चिकित्सकों ने बताया, कि मरीज के शरीर में एक किडनी नहीं है। जब मरीज को शरीर में एक किडनी नहीं होने की बात पता चली तो सदमे से उसकी मौत हो गई। उधर, निजी अस्पताल संचालक का कहना है कि हमारे हॉस्पिटल में कैंसर का इलाज करने वाले डॉक्टर अनुभवी विशेषज्ञ हैं। किडनी गायब करने की बात गलत है। केवल ऑपरेशन के दौरान कैंसरग्रस्त गाल ब्लेडर निकाला गया। पाली में करवाई गई सोनोग्राफी की रिपोर्ट त्रुटिपूर्ण हैं।  </p>
<p>सुमेरपुर के थानाधिकारी भारतसिंह रावत ने कहा कि मामला दर्ज कर शव का मेडिकल बोर्ड से पीएम कराया गया है। रिपोर्ट आने पर संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>पाली</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 04 Aug 2024 14:36:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>गलत की जगह सही किड़नी निकालने का मामला, डॉ. धनखड़ दोषी</title>
                                    <description><![CDATA[जांच में डॉ.धनखड़ पर कई सवाल खड़े किए हैं। जल्द एफआईआर दर्ज कराके उन पर कानूनी कार्रवाई की तैयारी है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/case-of-removing-the-right-kidney-instead-of-the-wrong/article-80316"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/2903408-1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। झुंझुनूं के धनखड़ हॉस्पिटल में महिला की खराब की जगह सही किड़नी निकालने के मामले में जांच टीम ने नया खुलासा किया है। जानकारी के अनुसार अस्पताल में डॉ.संजय धनखड़ ने महिला का ऑपरेशन बिना एनेस्थेटिक डॉक्टर (ऑपरेशन के वक्त मरीजों को बेहोश करने वाले डॉक्टर) के ही उसका ऑपरेशन किया जबकि बिना एनेस्थेटिक डॉक्टर के कोई भी डॉक्टर ऑपरेशन नहीं कर सकता है। गफलत में सही किड़नी निकाल दी। उसको बॉयोप्सी जांच को भी नहीं भेजा गया। जांच में डॉ.धनखड़ पर कई सवाल खड़े किए हैं। जल्द एफआईआर दर्ज कराके उन पर कानूनी कार्रवाई की तैयारी है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Jun 2024 13:26:44 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>किडनी से निकाली किडनी से भी पांच गुना बड़ी पथरी, बना वर्ल्ड रिकार्ड</title>
                                    <description><![CDATA[सेना के सर्जन ने कहा कि हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इतनी बड़ी पथरी निकाले जाने के बावजूद किडनी सामान्य रूप से काम कर रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/world-record-made-of-stone-five-times-bigger-than-the/article-49026"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/img_1686898504603_215.jpg" alt=""></a><br /><p>श्रीलंका में सैन्य डॉक्टरों ने एक 62 वर्षीय सेवानिवृत्त सैनिक के गुर्दे से 801 ग्राम वजन की पथरी निकाली है। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने पुष्टि की है कि इस पत्थर ने दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे भारी गुर्दा पत्थर होने का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अनुसार, श्रीलंकाई मामले से पहले 2008 में पाकिस्तान में एक मरीज का 620 ग्राम का किडनी स्‍टोन निकाला गया था, जो कि सबसे बड़े किडनी स्‍टोन के रूप में दर्ज था।</p>
<p>गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स द्वारा मान्यता दिए जाने के बाद अधिकारियों ने बुधवार को इसकी घोषणा की। सेना के सर्जन ने कहा कि हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इतनी बड़ी पथरी निकाले जाने के बावजूद किडनी सामान्य रूप से काम कर रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 16 Jun 2023 15:04:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हर दस में से एक व्यक्ति गंभीर  किडनी रोग से पीड़ित</title>
                                    <description><![CDATA[डॉ. कमल कस्वां ने बताया कि प्रारंभिक क्रोनिक किडनी डिजिज में अक्सर लक्षण दिखाई नहीं देते। किसी भी लक्षण का अनुभव करने से पहले व्यक्ति 90 प्रतिशत तक गुर्दे की कार्यप्रणाली खो सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/one-in-ten-people-suffering-from-chronic-kidney-disease/article-39308"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/a-72.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। किडनी हमारे शरीर का महत्वपूर्ण अंग है, जो खून को साफ  करती है। विश्व में क्रोनिक किडनी रोग खतरनाक स्थिति पर है। हर 10 में से एक व्यक्ति कुछ हद तक गंभीर किडनी रोग से प्रभावित है। यह जानकारी वर्ल्ड किडनी डे पर नारायणा मल्टीस्पेशियालिटी हॉस्पिटल में हुए जागरुकता कार्यक्रम में अस्पताल के गुर्दा रोग विशेषज्ञ डॉ. कमल कुमार कस्वां, डॉ. लवदीप डोगरा एवं यूरोलॉजिस्ट डॉ. उदय बेनीवाल और हरीश कस्वां ने दी। डॉ. कमल कस्वां ने बताया कि प्रारंभिक क्रोनिक किडनी डिजिज में अक्सर लक्षण दिखाई नहीं देते। किसी भी लक्षण का अनुभव करने से पहले व्यक्ति 90 प्रतिशत तक गुर्दे की कार्यप्रणाली खो सकता है। डॉ. डोगरा ने बताया कि सीकेडी जब अपने अंतिम चरण में होती है तो डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट ही इसका उपचार होता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Mar 2023 10:35:04 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>अपने पिता को किडनी दान करेंगी लालू की बेटी  </title>
                                    <description><![CDATA[डॉक्टरों ने लालू प्रसाद यादव को किडनी ट्रांसप्लांट कराने की सलाह दी है। ऐसे में सिंगापुर में रहने वाली उनकी बेटी रोहिणी आचार्या ने उन्हें किडनी दान करने का फैसला लिया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/lalus-daughter-will-donate-kidney-to-her-father/article-29211"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/ll.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव लंबे समय से कई बिमारियों से पीड़ित हैं। वह सिंगापुर में अपना इलाज करा रहे हैं। डॉक्टरों ने लालू प्रसाद यादव को किडनी ट्रांसप्लांट कराने की सलाह दी है। ऐसे में सिंगापुर में रहने वाली उनकी बेटी रोहिणी आचार्या ने उन्हें किडनी दान करने का फैसला लिया है। </p>
<p>रोहिणी के इस फैसले पर पहले लालू तैयार नहीं थे। बाद में रोहिणी और परिवार के दबाव के कारण वह मान गए हैं। लालू 20 से 24 नवंबर के बीच सिंगापुर जा सकते हैं, जहां उनके ऑपरेशन होने की संभावना है। इससे पहले एम्स के डॉक्टरों ने लालू को किडनी ट्रांलप्लांट की सलाह नहीं दी थी, जबकि सिंगापुर में डॉक्टरों ने उन्हें किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह दी है। रोहिणी ने इससे पहले सिंगापुर में ही डॉक्टर्स की सलाह लेने में उनकी मदद की थी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Nov 2022 15:10:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बेटी की दोनों किडनियां खराब थी, मां ने किडनी देकर बेटी को दिया नया जीवन</title>
                                    <description><![CDATA[कहा जाता है कि संतान अपने फर्ज को छोड़ सकती है, लेकिन मां कभी भी अपनी संतान का बुरा नहीं देख सकती। वह अपनी जान की बाजी लगाकर भी बच्चों की रक्षा करती है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/-daughter-s-both-kidneys-were-bad--mother-gave-new-life-to-daughter-by-giving-kidney/article-12861"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/yyyy.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कोटपूतली।</strong> कहा जाता है कि संतान अपने फर्ज को छोड़ सकती है, लेकिन मां कभी भी अपनी संतान का बुरा नहीं देख सकती। वह अपनी जान की बाजी लगाकर भी बच्चों की रक्षा करती है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है ग्राम पूतली के किसान परिवार से आने वाली एक महिला सुनहरी देवी पत्नी हीरालाल गुर्जर ने, जिन्होंने अपनी बेटी की जान पर आए संकट को टालते हुए अपने जीवन का खतरा मोल लेकर बेटी के प्राणों को बचा लिया। मानवता का परिचय देने के साथ-साथ एक मां होने के दायित्व को बेहद कुशलतापूर्वक निभाकर उन्होंने सम्पूर्ण समाज व क्षेत्र के समक्ष एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया है। हिन्दू धर्म शास्त्रों में मां का दर्जा भगवान से भी ऊंचा बताया जाता है। पुत्र महेश कुमार गुर्जर ने बताया कि उसकी बहन ममता देवी (28) पत्नी कृष्ण कुमार गुर्जर निवासी ग्राम खेड़की मुक्कड़ की दोनों किडनियां प्राकृतिक कारणों के चलते खराब हो गई थी। जिससे उनकी बहन के जीवन पर खतरा मंडरा रहा था। परिवार में केवल उनकी मां सुनहरी देवी की किडनी ही अपनी बेटी से मिलान खा रही थी। इस पर किसान परिवार से आने वाली सुनहरी देवी ने 52 वर्ष की उम्र में अपने जीवन का खतरा मोल लेते हुए बेटी के जीवन को बचा लिया। बुधवार को उनकी एक किडनी बेटी ममता को जयपुर के महात्मा गांधी अस्पताल में लगाई गई। जहां प्रात: 8 से दोपहर 3 बजे तक लगभग 8 घण्टे तक चले सफल आॅपरेशन में डॉ. सूरज गोदारा के नेतृत्व में चिकित्सकों की टीम ने सफलतापूर्वक किडनी ट्रांसप्लांट का सफल आॅपरेशन किया। ट्रांसप्लांट के बाद दोनों की स्थिति सामान्य है। सुनहरी देवी की बड़ी बेटी उर्मिला देवी व दामाद हवासिंह गुर्जर राजस्थान पुलिस में कार्यरत है, जो जयपुर में अपनी सेवाएं दे रहे हंै। इस प्रकार एक किसान मां ने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ को सही मायनों में चरितार्थ किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jun 2022 14:50:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोटा में पहली बार सफल किडनी ट्रांसप्लांट</title>
                                    <description><![CDATA[मेडिकल कॉलेज कोटा में बुधवार को पहली बार किडनी ट्रांसप्लांट किया गया जो सफल रहा। एक मां ने अपने बेटे को किड़नी दी। कोटा के 16 डॉक्टरों की टीम ने करीब पांच घंटे से अधिक समय में किडनी ट्रांसप्लांट किया।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/first-successful-kidney-transplant-in-kota/article-9622"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/safal-kidney-transplant.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। मेडिकल कॉलेज कोटा में बुधवार को पहली बार किडनी ट्रांसप्लांट किया गया जो सफल रहा। एक मां ने अपने बेटे को किड़नी दी। कोटा के 16 डॉक्टरों की टीम ने करीब पांच घंटे से अधिक समय में किडनी ट्रांसप्लांट किया। इसके साथ ही कोटा मेडिकल कॉलेज की उपलब्धियों में एक नया अध्याय जुड़ गया।  <br /><br />बूंदी जिले के नैनवा निवासी 40 वर्षीय गुमान सिंह की दोनों किड़नी खराब थी। उसे किडनी की जरूरत थी। इसके लिए कई लोगों से सम्पर्क किया। लेकिन उसकी मां की किडनी उससे मैच हुई। इसके बाद करीब 6 माह तक वह मेडिकल कॉलेज कोटा में भर्ती रहा। इस दौरान उसकी व उसकी मां की सभी जांचें की गई। सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद बुधवार को जयपुर के दो डॉक्टरों की मौजूदगी में कोटा के डॉक्टरों ने पहला सफल किडनी ट्रांसप्लांट किया।  बुधवार को गुमान सिंह की मां की किडनी आॅपरेशन में करीब दो घंटे से अधिक और गुमान सिंह के आॅपरेशन में करीब 3 घंटे से अधिक समय लगा। <br /><br />मेडिकल कॉलेज कोटा के प्राचार्य डॉ. विजय सरदाना ने बताया कि किडनी प्रत्यारोपण के लिए चिकित्सा मानकों के अनुरूप आवश्यक प्रक्रिया अपनाई गई । जिसमें किडनी दान करने वाले व्यक्ति की सभी  आवश्यक  जांचे करवाई गई। रोगी को उसकी माँ ने अपनी किड्नी दान की जो सफलतार्पूक सम्पन्न हुई। इससे पहले दान करने वाले का ब्लड टेस्ट, एचएलए टेस्ट का मिलान किया गया, जो सभी सामान्य पाए गए। उन्होंने बताया कि किडनी प्रत्यारोपण के लिए स्टेट लेवल ओथरिजेशन कमेटी से स्वीकृति भी प्राप्त की गई है। सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज जयपुर से बेकअप के लिए यूरोलोजी विभाग से डॉ. एस.एस यादव व डॉ. अनुपमा गुप्ता उपस्थित रही। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज कोटा की टीम से यूरोलोजी विभाग से डॉ. निलेश जैन, डॉ. शैलेंद्र गोयल, डॉ अंकुर, डॉ. शिव शंकर  और  नेफ्रÞोलोजी विभाग से डॉ विकास खंडेलिया  व  अनेस्थेसिया विभाग से डॉ. एस.सी दुलारा, डॉ. सीएल  खेड़िया और रेजिडेंट डॉ. द्वारा किड़नी ट्रांसप्लांट का सफलतार्पूक आॅपरेशन किया गया। <br /><br /><strong>संभागीय आयुक्त ने चिकित्सकीय टीम को दी बधाई</strong><br />न्यू मेडिकल कॉलेज के सुपरस्पेश्यलिटी चिकित्सालय में कोटा संभाग का पहला किडनी ट्रांसप्लांट का आॅपरेशन सफलतार्पूक करने पर बधाई दी।संभागीय आयुक्त दीपक नन्दी ने  मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. विजय सरदाना, सुपरस्पेश्यलिटी चिकित्सालय के अधीक्षक डॉ. निलेश जैन और  उनकी पूरी टीम को प्रशस्ति पत्र जारी कर बधाई और शुभकामनाएं दी है । <br /><br /><strong>जुलाई 2021 में मिली थी स्वीकृति</strong><br />मेडिकल कॉलेज कोटा को किडनी प्रत्यारोपण की स्वीकृति 30 जुलाई 2021 को प्राप्त हुई थी। जिसमें आवश्यक सुविधाओं व उपकरणों का विस्तार किया गया। करीब 7 करोड़ रुपए की लागत से किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट स्थापित की गई थी। यहां पूर्व में 22 अप्रैल को पहला किडनी ट्रांसप्लांट होना था। लेकिन उस समय डॉक्टरों की टीम जयपुर से कोटा नहीं आ सकी थी। जिससे ट्रांसप्लांट को टालना पड़ा था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 May 2022 15:57:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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                <title>किडनी को नुकसान पहुंचाती है डायबिटीज</title>
                                    <description><![CDATA[ बदलाव जरूरी हैं ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/diabetes-damages-the-kidney/article-6008"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/kidni.jpg" alt=""></a><br /><p>अगर आप लंबे समय से डायबिटीज से जूझ रहे हैं और अपने ब्लड शुगर स्तर को सही तरीके से मैनेज नहीं कर रहे हैं, तो आपकी किडनी को नुकसान पहुंचने का ख़तरा काफी ज़्यादा हो जाता है। डायबिटीज तेजी से किडनी पर प्रभाव डालती है और शुरुआत में इससे जुड़े चेतावनी के संकेतों को पहचानना मुश्किल होता है।</p>
<p><br />ऐसा होता है कि जब रक्त शर्करा लंबे समय तक रक्तप्रवाह में रहता है, तो वे धीरे-धीरे आपके गुर्दे में रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे आपके शरीर से अपशिष्ट और अतिरिक्त पानी को छानने का काम करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे कई तरीके हैं जिनसे डायबिटीजÞ किडनी की क्षति में योगदान देती है, जिसमें रक्त वाहिका का लीक करना, मूत्राशय में पेशाब का जमा होना, बैक्टीरिया का बढ़ना शामिल है। चिंता की बात यह है कि डायबिटिक किडनी की बीमारी के शुरुआती चरण में किसी तरह के लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। सिर्फ नियमित तौर पर चेकअप कराने से ही इस समस्या का पता लगाया जा सकता है।</p>
<p><br />    स्वस्थ खाने की आदत डालें और दिन में कई बार छोटे-छोटे मील्स लें। डाइट में सब्जियां और लीन प्रोटीन को शामिल करें। चीनी, तेल और प्रोसेस्ड फूड्स से दूर रहें। हाई सोडियम डाइट से बचें क्योंकि ये शरीर में तरल पदार्थ के जमाव का कारण बनती है।</p>
<p><br />    स्मोकिंग या तंबाकू चबाने की आदत छोड़ें क्योंकि यह किडनी को और ज़्यादा नुकसान पहुंचा सकती है।<br />    किडनी को और ज़्याादा नुकसान न पहुंचे इसके लिए शराब का सेवन बिल्कुल कम कर दें। <br />    लंबाई के हिसाब से सही वजन बनाए रखें।<br />    ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल में रखें।<br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 12 Mar 2022 13:20:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>मरीजों को 80 फीसदी महिलाएं देती है किडनी </title>
                                    <description><![CDATA[देश में हर साल 1.20 लाख लोगों की किडनी खराब हो जाती है। किडनी ट्रांसप्लांट के लिए प्रदेश में कई अस्पताल है, लेकिन डोनेट करने वालों की कमी है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/80-percent-women-give-kidney-of-peoples/article-5819"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/01-copy2.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। देश में हर साल 1.20 लाख लोगों की किडनी खराब हो जाती है। किडनी ट्रांसप्लांट के लिए प्रदेश में कई अस्पताल है, लेकिन डोनेट करने वालों की कमी है। स्थिति यह है कि केवल 10 फीसदी किडनी खराब होने के बाद रोगियों की किडनी ट्रांसप्लांट हो रही है। इसका कारण कानूनी पेंच है। किडनी के अवैध बेचान को रोकने के लिए कानून आवश्यक है, लेकिन लोगों को बचाने के लिए कैडेबर ट्रांसप्लांट का दायरा बढ़ाने की आवश्यकता है। एसएमएस अस्पताल के नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. धनंजय अग्रवाल ने बताया कि परिजनों के अलावा कानून में मरीज से भावनात्मक रूप से जुड़े या फिर मित्र-रिश्तेदार भी किडनी देने की बाध्यता को समाप्त किया है। इससे कुछ राहत है, लेकिन मृत्युपरांत अंगदान को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। मरीजों को किडनी 80 फीसदी उनकी मां, बहन या बेटी ही देती है, जबकि किडनी लेने वालों में 90 फीसदी पुरुष हैं। 10 फीसदी रोगी महिलाएं ऐसी है। इन्हें परिजन किडनी देते हैं।</p>
<p><strong>बेटी अनमोल है मां चंदा की इस जिद के आगे मौत भी हारी</strong><br />कीर्ति नगर की 60 वर्षीय चंदा बंसाली की जिद 40 वर्षीय बेटी सीमा बरडिया को बचाने की थी। सीमा की किडनी खराब हो गई थी। चंदा बुजुर्ग थी। अंगदान रिस्की था, लेकिन जिद थी खुद की जान से ज्यादा बेटी सीमा को बचाने की। दो साल बीत गए पर किडनी कहीं से डोनेट नहीं हो पाई। परिवार में किसी की किडनी मैच नहीं हुई। मां अड़ी थी, लेकिन जब उसकी जांच हुई तो वे अंगदान में फेल बताई गई। बाद में चंड़ीगढ़ में जांच हुई, डॉक्टरों ने यस कह दिया। आखिरकार बेटी को बचाने की जंग को मां जीत गई। चंदा और सीमा अब स्वस्थ्य हैं।</p>
<p><strong>पत्नी से जिदंगी मिली दोनों थे बुजुर्ग, अब स्वस्थ हैं</strong> <br />श्याम नगर के 67 वर्षीय निर्मल कुमार जैन पांच साल पहले बीमार हुए। डॉक्टरों ने किडनी खराब बता दी। जैन ने बताया कि पहले उन्हें लगा कि अब जीवन खत्म हो गया है, लेकिन पत्नी मंजू जैन मौत के सामने खड़ी थी। बुजुर्ग वह भी थी, लेकिन जज्बा मुझे बचाने का था। डोनर नहीं मिला, उसने अपनी किड़नी मुझे दे दी। तब लगा महिला घर ही नहीं जिदंगी भी बचाती है। मेरा जीवन उसी का कर्जदार है। आज दोनों स्वस्थ हैं, लेकिन यह सोच जरूरी है कि महिला को हम उसके त्याग-समर्पण के अनुसार तवज्जो दें। अभी महिलाओं की यह तस्वीर बनना अधूरी है।</p>
<p><strong>डोनर बन डॉक्टर पति ने दम तोड़ती पत्नी को बचाया</strong><br />विनिता शर्मा की किडनी 2007 में जब खराब हुई, तो वे 38 साल की थी। सात साल इलाज लिया, लेकिन 2014 में डॉक्टरों ने जवाब दे दिया। मौत सामने थी। पेशे से डॉक्टर पति डॉ. चन्द्रप्रकाश शर्मा ने क्षणिक भी नहीं सोचा। वर्ल्ड किडनी डे आता था, तो अस्पतालों में देखती थी कि सौ में से एक ही पति डोनर बन अपनी पति को बचाते हैं। इसलिए अभी समाज को महिलाओं के प्रति सोच बदलने की आवश्यकता है। मेरे पति ने उलट उदाहरण पेश किया। सभी पुरुषों की सोच ऐसी हो, तो महिलाओं की उड़ान आसमां से भी ऊपर हो। <br /><br /><br /><br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Mar 2022 10:22:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पति की दोनों किडनियां हो गई थी खराब, पत्नी ने किडनी देकर बचाई जान</title>
                                    <description><![CDATA[ मनोहरथाना कस्बा निवासी नीलू परतानी को जब पता चला कि पति अमित की किडनी खराब है तो अपनी किडनी देकर पति जान की बचाई। पति का हौसला बढ़ाते हुए एवं स्वयं भी हौसला रखते हुए जिंदगी से हार नहीं मानी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/husband-s-both-kidneys-were-damaged--wife-saved-her-life-by-giving-her-kidney/article-5690"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/16.jpg" alt=""></a><br /><p> मनोहरथाना। मनोहरथाना क्षेत्र की नीलू ने अपने पति के प्राणों को बचाने के लिए सावित्री की तरह यमराज से लड़कर अपने पति की जान बचाकर एक मिसाल पेश की है।  मनोहरथाना कस्बा निवासी नीलू परतानी को जब पता चला कि पति अमित किडनी खराब है तो मानो दु:खों का पहाड़ टूट पड़ा। अनेकों परेशानियों का सामना करते हुए पति का हौसला बढ़ाया। इस विपदा की घड़ी में अपनी किडनी देकर पति जान बचाई। महिला दिवस के अवसर पर हम मनोहरथाना कस्बे की एक ऐसी साहसी महिला से आपको परिचित करवाने जा रहे हैं, जिसने अपने पति के दोनों किडनी खराब होने पर अपने पति का हौसला बढ़ाते हुए एवं स्वयं भी हौसला रखते हुए जिंदगी से हार नहीं मानी एवं अपनी किडनी देकर के अपने पति को जीवन दान दिया। <br /><br />दैनिक नवज्योति टीम को अमित एवं नीलू ने बताया कि सर्वप्रथम वर्ष 2014 में ज्ञात हुआ कि एक किडनी खराब है, यहीं से हंसते खेलते दांपत्य जीवन में मानो ग्रहण सा लग गया। हर समय चिंता सताने लगी। घर से डॉक्टर एवं अस्पतालों के चक्कर काट लगाने में ही व्यवस्था इतनी बढ़ गई कि घर को भी संभालना भारी पड़ने लगा। धीरे-धीरे जब पति अमित की तकलीफ बढ़ती गई चिकित्सकों के इलाज से कुछ राहत मिली, किंतु वर्ष 2018 में चिकित्सकों ने बताया कि दोनों ही किडनी डैमेज हो चुकी है, ऐसे में किडनी डोनेट करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं है, जब पत्नी नीलू को यह ज्ञात हुआ पति की दोनों किडनी खराब है तो नीलू परतानी बताती है मैंने तुरंत निर्णय किया एवं अपने पति को इस विपदा की घड़ी में अपनी किडनी देने का निर्णय किया, इसमें परिवार जनों के साथ सभी मित्रों ने एवं मिलने वालों ने मेरा सहयोग किया। मेरे निर्णय को सराहा और मैंने पूर्ण हौसले के साथ अपने आपको तैयार किया। वह दिन भी आ गया जब पति की किडनी ट्रांसप्लांट हुई, इससे पूर्व चिकित्सकों ने मेरी जांच की।<br /><br /> वहीं पति अमित ने बताया कि दोनों किडनी फेल होने के बाद 1 सप्ताह में कम से कम 3 बार डायलिसिस होती थी। मनोहरथाना जैसी जगह पर राजस्थान के सुदूर कोने में जांच चिकित्सा के नाम पर कुछ नहीं है, ऐसे में कोटा, जयपुर एवं गुजरात में इलाज कराया, किंतु हौसला नहीं हारा। पत्नी एवं परिवारजनों का सहयोग बराबर बना रहा। भाई किशन परतानी ने भी किडनी देने के लिए जांच कराई, किंतु उनके एक ही किडनी थी। चिकित्सकों के अनुसार पत्नी की किडनी मैच नहीं हो रही थी, उसके बाद प्लाज्मा थैरेपी से पत्नी की किडनी मैच हुई। किडनी ट्रांसप्लांट के बाद अब दम्पती स्वस्थ है एवं सुखद जीवन जी रहे है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 08 Mar 2022 15:10:02 +0530</pubDate>
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