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                <title>women power - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>राष्ट्रीय सिविल सेवा दिवस : ब्यूरोक्रेसी में नारी शक्ति, महिला अफसरों पर बढ़ता सरकार का भरोसा</title>
                                    <description><![CDATA[राज्य की ब्यूरोक्रेसी में महिलाओं की भागीदारी नारी शक्ति की तस्वीर पेश करती है, जहां एक ओर महिलाओं को राजनीति में 33 फीसदी आरक्षण देने पर सियासी पारा चढ़ा। वहीं दूसरी ओर प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी में महिलाएं अपनी क्षमता और नेतृत्व से मजबूत पहचान बना रही। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/national-civil-services-day-women-power-in-bureaucracy-governments-confidence/article-151130"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)29.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य की ब्यूरोक्रेसी में महिलाओं की भागीदारी नारी शक्ति की तस्वीर पेश करती है, जहां एक ओर महिलाओं को राजनीति में 33 फीसदी आरक्षण देने पर सियासी पारा चढ़ा हुआ है। वहीं दूसरी ओर प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी में महिलाएं अपनी क्षमता और नेतृत्व से मजबूत पहचान बना रही हैं। महिलाओं ने केवल आईएएस-आईपीएस और आरएएस परीक्षा पास कर पद ही नहीं लिया है, बल्कि वर्तमान में वे चिकित्सा, बिजली, खान, पर्यटन, कृषि, बजट और राजस्व जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी भी बखूबी निभा रही हैं।</p>
<p>प्रदेश में वर्तमान में 282 आईएएस अधिकारियों में से 67 यानी 23.75 प्रतिशत महिलाएं हैं। वहीं 211 आईपीएस अधिकारियों में 34 यानी 16.11 प्रतिशत और 977 आरएएस अधिकारियों में 302 यानी 30.91 प्रतिशत महिलाएं कार्यरत हैं। आमजन की सरकारी योजनाओं की प्लानिंग, क्रियान्वयन और सुशासन में अहम भूमिका निभाकर साबित कर रहीं है। सशक्त नारी-सशक्त प्रशासन देने की उनकी क्षमताएं हैं। </p>
<p><strong>महिला आईएएस: चिकित्सा, बिजली, पर्यटन, कृषि, बजट व खजाने को भरने जैसे बड़े काममें जुटी हैं  </strong><br />अर्पणा अरोड़ा: 1993 बैच की एसीएस स्तर की आईएएस हैं। प्रदेश में खनन और पेट्रोलियम विभाग का बड़ा जिम्मा है। <br />श्रेया गुहा: 1994 बैच की एसीएस स्तर की आईएएस हैं। एचसीएम रीपा की डीजी और आरएफसी की एमडी हैं। <br />रोली सिंह: 1994 बैच की सीनियर आईएएस, दिल्ली में नेशन एथोरिटी कैमिकल वैपन कनवेंशन की चैयरपर्सन हैं।<br />गायत्री ए.राठौड: 1997 बैच की प्रमुख सचिव स्तर की आईएएस, प्रदेश के हेल्थ विभाग का बड़ा जिम्मा संभाल रही हैं।<br />मुग्धा सिन्हा: 1999 बैच की आईएएस, दिल्ली में देश के पर्यटन विकास निगम की एमडी हैं। <br />मंजू राजपाल: 2000 बैच की प्रमुख सचिव स्तर की आईएएस, कृषि और उद्यानिकी विभाग का बड़ा जिम्मा। <br />पूनम: 2005 बैच की सचिव स्तर की अफसर, महिला एवं बाल विकास विभाग संभाल रहीं। <br />आरती डोगरा: 2006 बैच की आईएएस हैं, प्रदेश में बिजली तंत्र, आपूर्ति-वितरण का काम उनके जिम्मे है। <br />आनंदी: 2007 बैच की आईएएस हैं,  कर्मशियल टैक्स विभाग आयुक्त हैं। सरकारी खजाने को टैक्स कलेक्शन सेभरने का बड़ा जिम्मा है। <br />शुचि त्यागी: 2007 बेच की आईएएस हैं, प्रदेश में पर्यटन, कला-संस्कृति, देवस्थान का जिम्मा है। <br />शिवांगी स्वर्णकार: 2011 बैच की आईएएस हैं,  प्रदेश के बजट बनाने में सहयोगी के रूप में विशेष सचिव। </p>
<p><strong>महिला आईपीएस: पुलिस आधुनिकरण, भ्रष्टाचार रोकने के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा का बड़ा जिम्मा </strong><br />मालिनी अग्रवाल: 1994 बैच की डीजी रैंक की आईपीएस अफसर हैं। <br />डॉ.प्रशाखा माथुर: 1995 बैच की एडीजी रैंक की आईपीएस, पुलिस में प्लानिंग, आधुनिकरण का काम है। <br />स्मिता श्रीवास्तव: 1995 बैच की एडीजी रैंक की आईपीएस, एसीबी में भ्रष्टाचार पर अंकुश का बड़ा काम है। <br />सत्यप्रिया सिंह: 1999 बैच की एडीजी रैंक की आईपीएस, दिल्ली में आईबी में संयुक्त निदेशक हैं। <br />लता मनोज कुमार: 2000 बैच की एडीजी रैंक की आईपीएस, एंटी ह्युमन ट्रेफिकिंग, सिविल राइट्स, कम्यूनिटी पुलिसिंग का काम है।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 10:00:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नांदड़ी में शराब दुकान के विरोध में धरना, ज्ञापन के बाद मिला स्थान परिवर्तन का आश्वासन</title>
                                    <description><![CDATA[जोधपुर के नांदड़ी क्षेत्र में प्रस्तावित शराब दुकान के खिलाफ निवासियों ने आबकारी कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। मंदिर, स्कूल और अस्पताल के पास दुकान खुलने से नाराज महिलाओं ने अधिकारियों का घेराव किया। पुलिस की समझाइश और प्रशासन द्वारा दुकान स्थानांतरित करने के लिखित आश्वासन के बाद ही धरना समाप्त हुआ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jodhpur/after-protest-memorandum-against-liquor-shop-in-nandadi-assurance-of/article-148628"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/scaled_1005371869.jpg" alt=""></a><br /><p>जोधपुर। नांदड़ी क्षेत्र में प्रस्तावित शराब की दुकान को लेकर मंगलवार को क्षेत्रवासियों का विरोध तेज हो गया। बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष जिला आबकारी कार्यालय पहुंचे और गेट के सामने बैठकर धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने आबकारी अधिकारी की गाड़ी के आगे बैठकर नाराजगी जताई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए उदयमंदिर थाना पुलिस को मौके पर बुलाना पड़ा।</p>
<p>पुलिस की समझाइश के बाद माहौल शांत हुआ। प्रदर्शनकारियों की ओर से शंकर बिश्नोई ने बताया कि प्रस्तावित शराब दुकान के आसपास बस स्टैंड, स्कूल, अस्पताल, मंदिर और आवासीय कॉलोनी स्थित है। ऐसे में दुकान खुलने से आमजन, विशेषकर महिलाओं और बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। क्षेत्रवासियों ने जिला आबकारी अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर दुकान को अन्यत्र स्थानांतरित करने की मांग की। अधिकारियों ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए लिखित आश्वासन देने और दुकान को अन्य स्थान पर शिफ्ट करने का भरोसा दिलाया। आश्वासन मिलने के बाद प्रदर्शनकारियों ने विरोध समाप्त किया और प्रशासन का आभार व्यक्त किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जोधपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 18:13:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बजट 2026-27 : आम बजट से विकसित भारत को मिलेगी नई ऊर्जा और गति, जानें बजट 2026 पर क्या क्या बोलें पीएम मोदी ?</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री मोदी ने बजट 2026-27 को विकसित भारत 2047 की मजबूत नींव बताया। उन्होंने कहा, यह सुधारों, युवाओं, महिला शक्ति और उच्च विकास को नई गति देगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/budget-2026-developed-india-will-get-new-energy-and-momentum/article-141584"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(4).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बजट को 2047 तक विकसित भारत की ओर हमारी उच्च उड़ान के लिए एक मजबूत आधार बताते हुए कहा कि भारत जिस सुधार की रफ्तार पर सवार है, उसे इस बजट से नई ऊर्जा और गति मिलेगी। पीएम मोदी ने कहा कि यह बजट विश्वास आधारित शासन और मानव-केंद्रित आर्थिक ढांचे की परिकल्पना को दर्शाता है।</p>
<p>पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया के एक ट्रस्टेड डेमोक्रेटिक पार्टनर और ट्रस्टेड क्वालिटी सप्लायर के रूप में भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है,  हाल ही में जो बड़ी-बड़ी ट्रेड डील्स भारत ने की हैं, 'मदर ऑफ ऑल डील' का अधिकतम लाभ भारत के युवाओं को मिले, भारत के लघु और मध्यम उद्योग वालों को मिले, इस दिशा में बजट में बड़े-बड़े कदम उठाए गए हैं।</p>
<p>पीएम मोदी ने कहा कि आज भारत जिस रिफाॅर्म एक्सप्रेस पर सवार है, इस बजट से उसे नई ऊर्जा, नई गति मिलेगी, जो पाथ ब्रेकिंग रिफॉर्म्स किए गए हैं, वो एस्पिरेशन से भरे हुए भारत के साहसिक, टैलेंटेड युवाओं को उड़ने के लिए खुला आसमान देते हैं। ये बजट भारत की वैश्विक भूमिका को नए सिरे से सशक्त करता है, भारत के 140 करोड़ नागरिक सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बनकर ही संतुष्ट नहीं हैं, हम जल्द से जल्द दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना चाहते हैं, ये करोड़ों देशवासियों का संकल्प है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि यह एक विशिष्ट बजट है जो राजकोषीय घाटे को कम करने और मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने को प्राथमिकता देता है। साथ ही उच्च पूंजीगत व्यय को मजबूत आर्थिक विकास के साथ संतुलित करता है। उन्होंने कहा, 'आज का बजट ऐतिहासिक है, यह देश की महिला शक्ति के सशक्त सशक्तिकरण को दर्शाता है, महिला वित्त मंत्री के रूप में निर्मला जी ने लगातार नौवीं बार देश का बजट पेश करके एक नया रिकॉर्ड बनाया है,  यह बजट अपार अवसरों का द्वार है, यह आज की आकांक्षाओं को वास्तविकता में बदलता है और भारत के उज्ज्वल भविष्य की नींव को मजबूत करता है।' पीएम मोदी ने कहा कि यह एक ऐसा यूनिक बजट है, जिसमें फिसकल डेफिसिट कम करने पर फोकस है, इसके साथ बजट में हाई कैपेक्स और हाई ग्रोथ का समन्वय है, यह देश की ग्लोबल भूमिका को नए सिरे सशक्त करता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Feb 2026 16:15:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस विशेष 4 :अपने से आधी उम्र वालों को पावर लिफ्टिंग में दी मात</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा की महिलाओं ने फुटबॉल और पावरलिफ्टिंग में अंतराष्ट्रीय स्तर पर  अपनी काबिलियत का परचम लहराया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/international-women-s-day-special-4--defeated-people-half-her-age-in-power-lifting/article-71856"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/transfer-(4)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। खेल जिसे आमतौर पर पुरूषों का क्षेत्र माना जाता है, बात फिर फुटबाल की हो क्रिकेट की हो या पावर वेटलिफ्टिंग की, खेल के हर क्षेत्र में पुरूषों का ही दबदबा माना जाता रहा है। लेकिन ऐसे समय में भी कोटा की महिलाओं ने फुटबॉल और पावरलिफ्टिंग जैसे खेलों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाकर अपनी काबिलियत और क्षमता का परचम लहराया की देखने चाले दंग रह गए। महिला दिवस पर नवज्योति की खास पेशकश में आज बात करेंगे कोटा की उन महिला खिलाड़ियों की जिन्होनें न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोटा का नाम रोशन किया बल्कि आज कई खिलाडियों को ट्रेनिंग देकर उन्हें खेलों के दांव पेंच सीखा रही हैं।</p>
<p><strong>अलग पहचान बनाने की चाह ने बनाया पावर लिफ्टर</strong><br />पावर लिफ्टिंग को आज भी पुरूषों का ही खेल माना जाता है क्योंकि इसमें सारा गुणा भाग शारीरिक क्षमता का होता है जिसमें प्रतिभागी तीन अलग तरीकों से भारी वजन उठाता है। लेकिन कोटा की शोभा माथुर ने इसी अवधारणा को ही बदल दिया और कई टुर्नामेंट में अपने से आधी उम्र की महिलाओं को मात देकर कई पदक अपने नाम किए। शोभा बताती हैं कि स्कूल के समय में वो खो खो खेला करती थी, समय के साथ खेलना तो छुट गया लेकिन एक दिन अपने भांजे और भांजी को पावर लिफ्टिंग करते देखा तो उसकी ललक जगी और पावर लिफ्टिंग में जाने का फैसला कर लिया। शुरूआत में तो मुश्किल लगा लेकिन जिम और प्रैक्टिस करती रही। नतीजन शोभा शिक्षक होने के बावजूद आॅल इंडिया सिविल सर्विसेज के आॅपन नेशनल में गोल्ड, एशियन गेम्स में गोल्ड, सिविल सर्विसेज की ऑपन में ब्रॉन्ज सहित कई मेडल अपने नाम कर चुकी हैं। वहीं शोभा एशिया के बेस्ट लिफ्टर कैटेगरी में भी सैकंड रनरअप का स्थान हासिल कर चुकी हैं। शोभा माथुर का कहना है कि महिलाओं को अपनी झिझक को भूलकर हर क्षेत्र में आगे रहना चाहिए और अपनी काबिलियत को हमेशा निखारते रहना चाहिए।</p>
<p><strong>दादा पिता के नक्शे कदम पर बनी फुटबॉल प्लेयर</strong><br />कोटा से इंटरनेशनल फुटबॉल प्लेयर रहीं मीनू सोलंकी बताती हैं कि उनके दादा और पिता दोनों नेशनल फुटबॉल प्लेयर रहे, जो उन्हें फुटबॉल की और खींच ले गया। मीनू खुद इंटरनेशनल फुटबॉल प्लेयर रह चुकी हैं, और आज भी उनका फुटबॉल खेलना जारी है। मीनू का उस समय में फुटबॉल खेलने का फैसला करना जब फुटबॉल को महिलाओं के लिए नहीं माना जाता था एक साहसिक कदम था। मीनू सीढ़ी दर सीढ़ी चढ़ती गई जिला स्तर फिर राज्य उसके बाद नेशनल और फिर इंटरनेशनल तक खेलकर मीनू परिवार के साथ कोटा का भी नाम रोशन किया। मीनू ने साल 1997 में चीन के बुहांजा में आयोजित हुई 11वीं एशियन महिला फुटबॉल चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इसके अलावा मीनू भारत की ओर से जर्मनी, संयुक्त अरब अमीरात, बांग्लादेश सहित कई देशों में फुटबॉल चैंपियनशिप में खेल चुकी हैं और कई मेडल अपने नाम कर चुकी हैं। मीनू अभी नई उम्र की खिलाडियों को फुटबॉल के दांव पेंच सिखाने के साथ गंगापुर सिटी और सवाई मधोपुर की जिला खेल अधिकारी के रुप में कार्यरत हैं।</p>
<p><strong>स्टेडियम में लड़कों को खेलते देखा और सोच लिया फुटबॉल खेलने का</strong><br />मैदान पर किसी को खेलते देखकर उसके जैसे खेलने की सोचना और खेलकर दिखाना अपने आप में बहुत बड़ी बात होती है जो करके दिखाया कोटा की इंटरनेशनल फुटबॉल प्लेयर रह चुकी मधु चौहान ने। मधु बताती हैं कि स्कूल के समय जब जिला स्तर पर खो खो खेलने आई तो स्टेडियम में लड़कों को फुटबॉल खेलते देखा जहां फुटबॉल इतना पसंद आया कि उसे ही करियर बनाने का सोच लिया। जब पहली बार स्कूल से जिला स्तर पर खेली तो अच्छा लगा और मनोबल बढ़ता गया। जिसके बाद पिछे मुड़कर नहीं देखा और 1984 से 1989 के बीच 10 सब जुनियर नेशनल व इंटरनेशनल प्रतियोगिताओं के साथ तीन नेशनल व इंटर नेशनल सीनियर प्रतियोगिता खेलकर कई पदक अपने नाम किए। मधु आज कोटा जिला खेलअधिकारी के पद पर तैनात हैं और खिलाड़ियों को फुटबॉल के गुर सिखाने के साथ में खुद भी खेलती हैं। मधु कहती हैं कि खेलने से महिलाओं की शारीरिक क्षमता बढ़ती है और आत्मविश्वास बढ़ता है इसलिए महिलाओं को अपनी झिझक निकालते हुए खेलों में आगे आना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Mar 2024 16:11:11 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस विशेष 3 : सर्जरी से पोस्टमार्टम तक कर रहीं बेटियां, मर्डर मिस्ट्री खोल दिलाया इंसाफ</title>
                                    <description><![CDATA[बरसों से पुरूषों का प्रोफेशनल माने जाने वाले चिकित्सा क्षेत्रों में महिलाएं अपना जौहर दिखा रही हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/international-women-s-day-special-3--daughters-doing-everything-from-surgery-to-post-mortem--murder-mystery-solved-and-justice-provided/article-71774"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/ph.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुर्दाघर, जिसका नाम सुनते ही रूह कांप उठती है। जहां चीखने-चिल्लाने और बिलखने की दर्दभरी आवाजें जब मोर्चरी के सन्नाटे को चीरती कानों से गुजरती है तो मन विचलित कर जाती है। घटना-दुर्घटना में अपनों को खोने का दर्द और मातम का विलाप आत्मा झकझौर देता है। वहीं, हादसों में कटे-फटे अंग-भंग हुए शरीर के टुकड़े देखना हर किसी के बस की बात नहीं है। लेकिन, ऐसे चुनौतियों से भरे क्षेत्र में नारी शक्ति अदम्य साहस के साथ डटी है, जो न केवल अपना फर्ज निभा रहीं बल्कि गमजदा पीड़ित परिवार को इंसाफ भी दिला रही है। दरअसल, बरसों से पुरूषों का प्रोफेशनल माने जाने वाले चिकित्सा क्षेत्रों में महिलाएं अपना जौहर दिखा रही हैं। कोटा में पहली बार मेडिकल कॉलेज के फोरेंसिक मेडिसीन टॉक्सोक्लॉजी डिपार्टमेंट में 4 महिला रेजीडेंट ने पीजी में प्रवेश लिया है। अब तक 200 से ज्यादा पोस्टमार्टम कर चुकीं हैं। साक्ष्यों के परीक्षण के आधार पर मडर मिस्ट्री सुलझाने में पुलिस की मदद कर रहीं हैं। वहीं, 22 साल में पहली बार ऑथोपेडिक विभाग में भी महिला रेजीडेंट ने पीजी में दाखिला लिया है।  </p>
<p><strong>पहली बार पोस्टमार्टम देखा तो रो पड़ी थी</strong><br />पीजी तृतीय वर्ष की छात्रा डॉ. मोनिशा राजेश्वरन बतातीं हैं, तमिलनाडू मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस किया। इंटर्नशिप के लिए हॉस्पिटल जाते तो देखते थे कि आधे से ज्यादा केसों में महिलाएं विक्टिम होती हैं, जिन्हें मेडिकल मुआयने के लिए शरीर पर आई चोट डॉक्टर को दिखानी होती हैं लेकिन महिला डॉक्टर नहीं होने से वे असहज महसूस करतीं हैं। यह देख मैंने फोरेंसिक मेडिसीन टॉक्सोक्लॉजी में आने का ठान लिया। ताऊजी ने यह कहते हुए रोका था कि यह क्षेत्र चुनौतियों से भरा है। राजनेतिक प्रेशर आएंगे, तुम से नहीं होगा लेकिन मैं अपने निर्णय पर अड़िग थी। यूजी सैंकड ईयर में पहली बार पोस्टमार्टम करते हुए देखा तो रो पड़ी थी। लेकिन जब प्रोफेसर ने इसका महत्व समझाया तो खुद को मजबूत किया। हाल ही में बीकानेर के एसपी मेडिकल कॉलेज में हुई क्रॉन्फ्रेंस में मोनिशा ने नाबालिग किशोरियों की शादी व गर्भवती होने से उत्पन्न कानूनी समस्याओं पर शोध पत्र प्रस्तुत किया था, जिसे सर्वेश्रेष्ठ शोधपत्र का पुरस्कार दिया गया। वे अब तक 70 से ज्यादा पोस्टमार्टम कर चुकीं हैं। मुनीषा डॉक्टर होने के साथ मां भी है। परिवार और काम में परिवार व पति के सहयोग से बैलेंस कर फर्ज निभा रहे हैं। </p>
<p><strong>मदद करने का जूनून ही मुझे इस फील्ड में लाया</strong><br />पीजी सैकंड ईयर की छात्रा डॉ. पारस रावल कहतीं हैं, राजकोट गुजरात से एमबीबीएस किया। मैं हमेशा से ही प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं करना चाहती थी, लोगों को न्याय दिलाने में मदद करने का जूनून ही मुझे इस फिल्ड में लेकर आया। ऐसा मिथक बन गया है कि फोरेंसिक मेडिसीन टॉक्सोक्लॉजी में पुरूष ही काम कर सकते हैं, क्योंकि, इसमें पुलिस, कोर्ट तथा हर तरह के लोगों से डील करनी होती है लेकिन महिला ने इस सोच को गलत साबित कर दिया है। महिला हर चैलेंजिंग काम कर सकती हैं और कर रहीं हैं। डॉक्टरी के पेशे में यह सबसे न्यायसंगत पेशा है। अपने फैसले पर कभी संदेह न करें क्योंकि जहां संदेह किया वहां कोई और सदस्य आपका निर्णय बदल सकता है। मेरा छोटा भाई रेडिएशन ऑन्कोलॉजी में डॉक्टर है। मेरी काबीलियत देख उसने फोरेंसिक मेडिसीन लेने के लिए आत्मविश्वास बढ़ाया। परिवार ने भी काफी सपोर्ट किया। पारस ने अब तक 60 से ज्यादा पोस्टमार्टम कर चुकी हैं। </p>
<p><strong>बॉडी खुद अपनी कहानी  बताती है</strong><br />पीजी द्वितीय वर्ष की छात्रा डॉ. काव्या शर्मा कहतीं हैं, बचपन से ही चैलेंजिंग काम करना पसंद था। वर्ष 2015 में कोटा मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस किया। फोरेंसिक मेडिसीन टॉक्सोक्लॉजी  में भी पीजी यहीं से कर रही हूं। यह न्याय संगत क्षेत्र है। पोस्टमार्टम में जब ऐसा सुराग निकाल लेते हैं, जो पीड़ित परिवार को न्याय दिला सके, तब दिल को सुकून मिलता है। मृत शरीर खुद अपनी कहानी बयां करता है कि उसके साथ क्या घटित हुआ, बस समझने वाला होना चाहिए। हाल ही में नहर में एक महिला की लाश मिली थी। जिसे आत्महत्या का रूप दिया गया था। हमने पोस्टमार्टम किया तो कई ऐसे सुराग मिले जिससे यह पता चला कि महिला की मौत पानी में डूबने से नहीं, सिर पर चोट से हुई। हमारी रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने इंवेस्टिगेशन किया तो मडर मिस्ट्री खुली और पति ही कातिल निकला। पहले मां ने इस क्षेत्र में आने का विरोध किया लेकिन मेरा काम देख 90 वर्षीय दादी, पिता और मां अब मुझ पर गर्व करती हैं। काव्या अब तक 60 पोस्टमार्टम कर चुकी हैं। </p>
<p><strong>न्याय दिलाना ही जिंदगी का मकसद</strong><br />पीजी फर्स्ट ईयर की छात्रा डॉ. अदिती गुप्ता कहती हैं, भोपाल में एमबीबीएस करने के दौरान ही फोरेंसिक मेडिसीन टॉक्सोक्लॉजी  में मेरी रुचि जागी। जब सेकेंड ईयर में थी तब फॉरेंसिक पढ़ाया गया। उसमें होने वाले इन्वेस्टिगेशन और फॉरेंसिक एक्सपर्ट की भूमिका को देख मुझे प्रेरणा मिली। मानती हूं, इस फील्ड में ज्यादा चैलेंज हैं, लेकिन मैं कर सकती हूं, इस आत्मविश्वास के साथ मैंने फॉरेंसिक में जाने का मन बना लिया। यूजी में 15 दिन के लिए इंटर्नशिप दी जाती है, जिसमें मैंने फोरेंसिक मेडिसीन टॉक्सोक्लॉजी  चूना। कई विभत्सक केस देखें हैं, ट्रेन से कटकर शरीर के टुकड़े, बॉक्स व बोरों में भरकर लाए गए अंग शामिल हैं। तब मन में ख्याल आया कि क्या यह किसी साजिश का शिकार तो नहीं हुए। तब से ठान लिया था कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाऊंगी, इसी संकल्प को जिंदगी का मकसद बना लिया। पापा व रिश्तेदारों ने इस फिल्ड में जाने से मना किया था लेकिन मेरी रूचि देखते हुए मम्मी ने सपोर्ट किया। अभी फोरेंसिक मेडिसीन टॉक्सोक्लॉजी  विभाग में आए 6 माह ही हुए हैं, अब तक करीब 60 पोस्टमार्टम कर चुकी हूं। </p>
<p><strong>श्रुति ने तोड़ी धारणा, बनेगी आर्थोपेडिक सर्जन </strong><br />जयपुर निवासी पीजी प्रथम वर्ष की छात्रा डॉ. श्रुति अग्रवाल कहतीं हैं, आम तौर पर ऐसी धारणा बनी हुई है कि आर्थोपेडिक में जोखिम अधिक होता है, इसलिए इसमें पुरूष ही जाते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है, हर क्षेत्र चैलेंजिंग होता है और महिलाएं तमाम चुनौती पार कर मुकाम हासिल कर रहीं हैं। इसी आत्मविश्वास के साथ मैंने कोटा मेडिकल कॉलेज के आर्थोपेडिक विभाग में प्रवेश लिया है। श्रुति बतातीं हैं, जब मैं 10 वर्ष की थी, मेरे भाई का हाथ फे्रक्चर हो गया था, उसका इलाज के लिए मैं एसएमएस अस्पताल ले गई थी, जहां आर्थोपेडिक में एकमात्र डॉ. पूनम पाटनी ही महिला डॉक्टर थी। उनके जूनून से लबरेज आत्मविश्वास से प्रभावित हुई और वहीं से ही आथोपेडिक डॉक्टर बनने का मन बना लिया। एमबीबीएस पूरी करने के बाद मेने आथोपेडिक में जाने का इरादा घरवालों को बताया तो माता-पिता ने सपोर्ट किया लेकिन रिश्तेदारों ने डी-मोटिवेट किया और कहा-इस फिल्ड में तुम काम नहीं कर पाओगे। लेकिन मैं अपने फैसले पर अडिग थी। नीट पीजी में मेरी 6000 तथा एम्स में 600 रैंक थी। इस रैंक पर एम्स ऋषिकेश में प्लास्टिक सर्जरी और एम्स बठिंडा में आर्थो मिल गई लेकिन मैंने कोटा चुना। विभागाध्यक्ष डॉ. आरपी मीना सर ने सपोर्ट किया। मोटिवेट किया, उनके अंडर में प्रेक्टिस कर रही हूं। यहां लेटेस्ट तकनीक के साथ सीखने को बहुत कुछ है। मैं स्पाईन सर्जन बनना चाहती हूं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Mar 2024 17:58:10 +0530</pubDate>
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                <title>अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस विशेष 2 : सीखने की कोई उम्र नहीं होती, चाह लो तो सब आसान</title>
                                    <description><![CDATA[नवज्योति की खास श्रृंखला में आज पेश है कोटा की पेशेवर महिलाएं जिन्होंने घर के सारे दायित्वों को पूरा करने के साथ ही साथ अपने पेशे को भी निखारा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/international-women-s-day-special-2--there-is-no-age-to-learn/article-71766"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/antarrashtriye-mahila-diwas-vishesh-2-;-sikhne-ki-koi-umr-nhi-hoti,-chah-lo-to-sb-asan-h...kota-news-04-03-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। देश की आधी आबादी जो आज के दौर में घर को सम्भालने के साथ देश को भी सम्भाल रही हैं। कहते हैं शारीरिक बल भले ही पुरुषों में ज्यादा हो लेकिन मानसिक रुप से क्षमता की बात आए तो महिलाओं को ही श्रेष्ठ माना जाता है। क्योंकि सरकारी दफ्तरों, कार्यालयों और विभागों में तो भारतीय महिलाएं अपनी काबिलियत दिखा ही रही हैं। इसके अलावा भी कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां महिलाएं अपना लौहा मनवा रही हैं। ब्यूटीशियन से लेकर इंजीनियरिंग तक हर क्षेत्र में महिलाएं तमाम जिम्मेदारियों को निभाते हुए बड़ा नाम कर रही हैं। नवज्योति की खास श्रृंखला में आज पेश है कोटा की पेशेवर महिलाएं जिन्होंने घर के सारे दायित्वों को पूरा करने के साथ ही साथ अपने पेशे को भी निखारा।</p>
<p><strong>शादी के 15 साल बाद किया सीए का कोर्स</strong><br />कहावत है कि कुछ करने की ठान लो तो सारी कायनात उसे पूरा करने में लग जाती है। ऐसी ही कहानी है चार्टेड अकाउंटेंट अंजली जैन की जिन्होंने ऐसे समय सीए का कोर्स किया जब कोई करने की भी शायद ही सोचे। अंजली की पढ़ाई तो आर्ट्स संकाय में पूरी हुई लेकिन शादी के बाद जब पति को चार्टेड अकाउंटेंट का काम देखा तो उन्हें भी इसकी ललक जगी। शादी को 15 साल हो चुके थे उम्र भी काफी हो चुकी थी लेकिन बावजूद इसके अंजली अपने पति की सहायता से सीए कोर्स की तैयारी में जुट गई। कोर्स पूरा अंजली आज घर के साथ परिवार चार्टेड अंकाउंटेंट का काम भी बखूबी कर रही हैं। साथ ही अपने पति की भी मदद कर रही हैं। अंजली का कहना है कि महिला हो या पुरुष हमेशा कुछ न कुछ सीखते रहना चाहिए और अपने अंदर की कला को पहचानने की कोशिश करते रहना चाहिए।</p>
<p><strong>ससुराल पक्ष ने कहा और बन गई वकील</strong><br />एक औरत के लिए शादी के बाद ससुराल ही उसका घर होता है, जहां हर कदम पर जिम्मेदारियां होती हैं। वहीं ससुराल पक्ष जिम्मेदारियों से इतर अगर आपके सपने पूरे करने में आपकी सहायता करे तो बात ही कुछ अलग होती है। यही करीब 30 साल पहले एडवोकेट कल्पना शर्मा के साथ हुआ। जहां कल्पना शर्मा के ससुर ने उन्हें एलएलबी की पढ़ाई करने के लिए कहा और तब से ही कल्पना का पूरा जीवन बदल गया। उम्र के 34 साल बाद वकालात शुरु करने वाली कल्पना ने बिना फीस से अपने पेशे की शुरुआत की ताकी वो असमर्थ लोगों की मदद कर सकें। आज कल्पना कोटा की जानी मानी वकील हैं और उनका कहना है कि जो भी आप करना चाहती हैं उसे लगन और ईमानदारी से करें क्योंकि आपकी लगन और ईमानदारी से लोग आपकी अहमियत को पहचानते हैं।</p>
<p><strong>बातों बातों में बनी सिविल इंजीनियर</strong><br />इंजीनियरिंग ऐसा क्षेत्र है जिसे कुछ समय पहले सामान्यतया पुरुषों का ही क्षेत्र माना जाता था। लेकिन उस समय में भी सुनीता जैन ने सिविल इंजीनियरिंग करने का जज्बा दिखाया। सुनीता अभी कोटा थर्मल पावर प्लांट में अधिशासी अभियंता पद पर मौजूद हैं। सुनीता बताती हैं कि शुरुआत में उनका सिविल इंजीनियरिंग करने का प्लान नहीं था लेकिन घर के सदस्य इंजीनियर थे तो बातों बातों में इसे ही करियर के तौर पर चुन लिया। शुरुआत में परेशानी हुई लेकिन पढ़ाई और काम करने में संतुष्टि और रूची बढ़ने लगी तो पूरा कार्यक्षेत्र इसे ही बना लिया। परिवार और ससुराल पक्ष की ओर से भी पूरा सहयोग मिला तो कम्पीटिशन एग्जाम निकाल लिया, और आज थर्मल पावर प्लांट में अधिशासी अभियंता पद पर तैनात हैं। सुनीता कहती हैं कि लड़कियां कभी ये नहीं सोचे कि कोई कार्यक्षेत्र उनके लिए है या नहीं वो कहीं भी अपना श्रेष्ठ प्रर्दशन कर सकती हैं। बस उनमें इच्छा शक्ति हो तो वो कई बड़ी जिम्मदारियों को सम्भाल सकती हैं।</p>
<p><strong>पति का हाथ बंटाने कि लिए शुरु किया पार्लर</strong><br />शादी के बाद घर में पति पत्नी की जिम्मेदारियां बराबर की हो जाती है क्योंकि पत्नी और पति एक ही गाड़ी के दो पहिए होते हैं जिन पर गाड़ी का एक समान भार होता है। इसी बात को सही साबित कर रही हैं, डीसीएम क्षेत्र में ब्यूटी पार्लर संचालित करने वाली अमिता चौरसिया। अमिता ने ग्रेजुएशन के साथ साथ ब्यूटिशियन का भी कोर्स किया हुआ है जो खुद तो पार्लर चलाती हैं ही साथ ही नई उम्र की लड़कियों को भी ब्यूटिशियन का काम सिखाती हैं। पति की आर्थिक सहायता के लिए साल 2014 में शुरु किया पार्लर अब एक ट्रेनिंग सेंटर बन चुका है जहां अमिता अब तक करीब 25 लड़कियों को ट्रेनिंग दे चुकी हैं और अभी 10 लड़कियों को ट्रेनिंग दे रही हैं। अमिता कहती हैं कि अगर आप में हुनर हैं तो उसे निखारना चाहिए और हो सके तो उससे दूसरों की मदद भी करनी चाहिए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Mar 2024 16:59:43 +0530</pubDate>
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                <title>अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस विशेष 1: कोचिंग नगरी में मनचलों के छक्के छुड़ा रही नीली वर्दी की कमांडो</title>
                                    <description><![CDATA[नीली वर्दी में यह महिला कमांडों कोचिंग छात्राओं के बीच लेडी सिंघम की पहचान बना चुकी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/international-women-s-day-special-1--blue-uniform-commandos-are-getting-rid-of-miscreants-in-the-coaching-town/article-71625"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/antarrashtriye-mahila-diwas-vishesh-1-;-coaching-nagri-k-machalo-k-chakke-chuda-rhi-nili-vardi-ki-commando...kota-news-02-03-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। <strong><em>घर-परिवार के साथ फर्ज निभा रही महिला पुलिस कर्मी</em></strong><br /><strong><em>तूफानों से लड़ी हूं, चट्टानों पर खड़ी हूं। </em></strong><br /><strong><em>रुख मोड़ दूं आंधी का, सामने वो आए। </em></strong><br /><strong><em>मुश्किलें क्या रोकेगी, बुलंद हौसला मेरा। </em></strong><br /><strong><em>जिगर में साहस इतना पहाड़ों का सीना चीर जाऊं।</em></strong><br /><strong><em>ढाल बन जाऊं तेरी, जब आसमां से बरसे चुनौतियों के अंगारे। </em></strong><br /><strong><em>फूलों में बदल दूं तानों के वो कांटे जो मुझसे टकराए।</em></strong></p>
<p>यह महज पंक्तियां नहीं, बल्कि जोश और जुनून से लबरेज नारी शक्ति के अद्म्य साहस का परिचय है। जो घर-परिवार की जिम्मेदारी के साथ अपना फर्ज भी शिद्दत से निभा रहीं हैं। यहां बात हो रही है, कोटा पुलिस की अभया महिला कमांडो की। नीली वर्दी में यह महिला कमांडों अपनी फिटनेस, यूनिफॉर्म और सख्त अंदाज से कोचिंग छात्राओं के बीच लेडी सिंघम की पहचान बना चुकी है। इनके खौफ से मनचले भी कांप उठते हैं। जब सड़कों पर लेडी कमांडो गश्त करतीं हैं तो उनके साय में हजारों बेटियां खुद को सुरक्षित महसूस करती हैं। यह न केवल छात्राओं को आत्मरक्षा करना सीखा रही बल्कि असमाजिक तत्वों को कॉर्लर से घसीट सलाखों तक भी पहुंचा रहीं हैं। महिला दिवस पर हम आपको ऐसी ही अभया कमांडों से मिलवा रहे हैं, जिनके जज्बे को कोटा सलाम करता है। पेश है खास रिपोर्ट...</p>
<p><strong>फर्ज के आगे झुका राजनीतिक रसूख </strong><br />अभया कमांडो मनभर सुमन बतातीं हैं, कुछ समय पहले जवाहर नगर गर्ल्स हॉस्टल से घटिया खाने की शिकायत मिली थी। हॉस्टल पहुंचे तो वार्डन ने हंगामा कर अंदर घुसने नहीं दिया। हॉस्टल मालिक ने राजनेतिक रसूख का रौब दिखाया। परवाह न करते हुए हम हॉस्टल में घुसे। छात्राओं को दिए जाने वाला भोजन देखा तो उसमें कोकरोच मिले। लड़कियों के लिहाज से सुविधाएं नहीं थी। अधिकारियों के निर्देश पर कार्रवाई कर छात्राओं को वो सभी सुविधाएं दिलाई, जो उन्हें मिलनी चाहिए थी। सुमन बताती हैं, परिवार में एक बेटा है। पति भी नौकरी में है। ऐसे में नौकरी और परिवार की काफी जिम्मेदारियां हैं, लेकिन दोनों में तालमेल स्थापित कर डयूटी करती हूं। एक दिन बेटे ने साथ खाना खाने की जिद की लेकिन समय पर घर नहीं पहुंच सकी। सुबह पता चला बच्चा भूखा ही सो गया। उसे मां की डयूटी समझाई फिर उसने कभी जिद नहीं की बल्कि पिता के साथ सपोर्ट किया। </p>
<p><strong>600 मीटर दौड़कर पकड़े नशेड़ी</strong><br />कमांडो अलका बतातीं हैं, तलवंडी में कोचिंग के पास पार्क में चार युवक नशा कर रहे थे और लड़कियों पर फब्तियां कसते हैं। शिकायत पर हम 4 कमांडों मौके पर पहुंची तो वे हमें देखकर भागे। हम भी पीछे दौड़े, एक को शर्ट से पकड़ा तो वह शर्ट खोलकर भाग गया। मैं भी पीछे दौड़ती रही और 600 मीटर दौड़कर उसे पकड़ लिया। वहीं, हमारी टीम मेंबर ने दो जनों को पकड़ा। इस तरह चार में से तीन नशेड़ियों को हमने दबोचा। बाद में थाने से गाड़ी बुलाकर पुलिस के हवाले किया। महिला होने के नाते परिवार की पूरी जिम्मेदारी होती है। पुलिस की नौकरी और परिवार दोनों के लिए अपना बेहतर देने का प्रयास करती हूं। इसमें परिवार का पूरा सहयोग मिलता है।</p>
<p><strong>लहराकर दौड़ा रहे थे पावर बाइक, सिखाया सबक</strong><br />गीता गुर्जर ने बताया कि राजीव गांधी नगर में शाम के वक्त नाबालिग लड़के पावर बाइक लहराकर दौड़ा रहे थे और राहगीरों को कट मार हुड़दंग मचा रहे थे। इसी दौरान कहीं चैन स्नेचिंग की वारदात हुई थी, जिसमें इसी मॉडल व कलर की बाइक का उपयोग हुआ था। जैसे ही तेज रफ्तार से यह बाइक हमारे सामने से गुजरी तो हमने पीछा कर आईएल पेट्रोल पम्प के पास रोका तो उनके 15-20 साथी भी वहां आ गए और हावी होने लगे। जिन्हें फटकार कर खदेड़ा। नाबालिगों के पास गाड़ी के कागजात नहीं थे। पूछताछ में पता चला कि वे किराए पर वाहन लेकर दौड़ाते हैं। थाने से गाड़ी बुलाकर उनके सुपुर्द किया। गीता कहतीं हैं, परिवार में बच्चे हैं, पति नौकरी में हैं, जो अजमेर रहते हैं। ऐसे में समस्याएं तो आती हैं लेकिन पड़ोसियों व हमारी महिला कमांडों के सहयोग से मैनेज कर लेते हैं। </p>
<p><strong>सड़कों पर फेंक रहे थे बर्तन, अनहोनी टाली</strong><br />कमांडों रहनुमा बताती हैं, कुछ माह पहले गुमानपुरा इंद्रा सर्किल पर ढाबा संचालक और ग्राहक आपस में भिड़ गए थे। दोनों एक-दूसरे पर बर्तन फेंक रहे थे। जिससे सड़क पर जाम लग गया। लोग परेशान थे, दोनों के बीच मारपीट की नौबत आ गई थी। हालातों को देखते हुए अनहोनी की आशंका थी। ऐसे में हमारी टीम भीड़ में घुसकर दोनों को पकड़ा और थाने से चेतक बुलाकर पुलिस के हवाले कर रास्ता बहाल करवाया। रहनुमा बतातीं हैं, परिवार में दो बच्चे हैं, पति भी रेलवे में नौकरी में हैं। ऐसे में परिवार संभालने में मुश्किलें तो आती हैं लेकिन पति के सहयोग से डयूटी और परिवार के बीच बैलेंस बनाकर अपना फर्ज निभाते हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Mar 2024 19:51:58 +0530</pubDate>
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                <title>अखाड़ों में उतरी नारी शक्ति, शुरु हुआ अभ्यास</title>
                                    <description><![CDATA[दुर्गा शक्ति व्यायाम शाला का अखाड़ा हो या मंगलेश्वरी व्याजाम शाला का अखाड़ा समेत सभी अखाड़ों में चक्कर से लेकर अन्य सभी तरह के करतबों के अभ्यास शुरू हो गए हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/women-power-descended-in-the-akhadas--practice-started/article-55440"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/akhado-me-utri-nari-shakti,-shuru-hua-abhyas...kota-news-25-08-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। अनंत चतुर्दशी आयोजन समिति की ओर से सितम्बर में निकलने वाली विशाल व भव्य शोभा यात्रा के दौरान निकलने वाले अखाड़ों में पट्टे बाजों ने अभ्यास शुरू कर दिया है। शहर में महिला-पुरुष व बच्चों के करीब 60 से अधिक अखाड़े हैं। छावनी से लेकर केशवपुरा तक और नए कोटा में भी अखाडों का संचालन किया जा रहा है। उनमें नियमित आने वालों ने शोभा यात्रा में दिखाए जाने वाले करतबों का अभ्यास शुरू कर दिया है। दुर्गा शक्ति व्यायाम शाला का अखाड़ा हो या मंगलेश्वरी व्याजाम शाला का अखाड़ा समेत सभी अखाड़ों में चक्कर से लेकर अन्य सभी तरह के करतबों के अभ्यास शुरू हो गए हैं। नाथूलाल पहलवान व जगदीश सुमन ने बताया कि अखाड़ों में नियमित रूप से पहलवान व बच्चे अभ्यास करते हैं। लेकिन साल में एक बार बड़े स्तर पर निकलने वाली अनंत चतुर्दशी शोभा यात्रा में दोपहर से रात तक अखाड़ों का प्रदर्शन होता है। जिसके लिए अधिक व नियमित अभ्यास की आवश्यकता होती है। उसके लिए अभ्यास शुरू कर दिया है। सभी को तैयार किया जा रहा है।</p>
<p><strong>मिट्टी की मूर्तियों का होगा उपयोग</strong><br />इधर अनंत चतुर्दशी महोत्सव आयोजन समिति के संयोजक दिनेश सोनी ने बताया कि अनंत चतुर्दशी के दौरान निकलने वाली शोभा यात्रा में अधिकतर मिट्टी व अन्य वस्तुओं से बनी गणेश प्रतिमाओं को ही शामिल किया जाएगा। इसके फिए सभी समितियों व आयोजन कर्ताओं को निर्देश दिए जा चुके हैं।  उन्होंने बताया कि आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। साथ ही एक दिन पहले ही भारत ने चंद्रयान -3 की सफलता हांसिल की है। इन्हें देखते हुए शोभा यात्रा में भारत माता व चंद्रयान 3 की झांकी भी शामिल हो सकती है। इसकी तैयारियां समितियों में अपने स्तर पर की जा रही है। अगले महीने निकलने वाली शोभा यात्रा के लिए शीघ्र ही समिति की बैठक में कई विषयों पर चर्चा कर उन्हें अंतिम रूप दिया जाएगा। हालांकि गत दिनों समिति की अध्यक्ष महामंडलेश्वर हेमा सरस्वती की अध्यक्षता में बैठक भी हुई थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 25 Aug 2023 16:46:08 +0530</pubDate>
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                <title>महिला शक्ति को विकास यात्रा में आगे रखने के लिए किए प्रयास : मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[देश की महिला शक्ति को भारत की विकास यात्रा में आगे रखने के लिए विभिन्न प्रयास किए गये है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर ट्वीट किया कि महिला दिवस पर देश की नारी शक्ति और विविध क्षेत्रों में उनकी उपलब्धियों को नमन करता हूं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/effort-made-to-keep-women-power-ahead-in-development-tour--says-modi/article-5694"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/modi.jpg02-copy3.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। देश की महिला शक्ति को भारत की विकास यात्रा में आगे रखने के लिए विभिन्न प्रयास किए गये है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर ट्वीट किया कि महिला दिवस पर देश की नारी शक्ति और विविध क्षेत्रों में उनकी उपलब्धियों को नमन करता हूं। भारत की सरकार विभिन्न योजनाओं के जरिए गरिमा और अवसर पर बल देते हुए महिला सशक्तीकरण पर ध्यान देती रहेगी। उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए सरकार के प्रयास और भी अधिक जोश के साथ जारी रहेंगे।</p>
<p>वित्तीय समावेश से लेकर सामाजिक सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा से लेकर आवास, शिक्षा से लेकर उद्यमिता तक नारी शक्ति को भारत की विकास यात्रा में सबसे आगे रखने के लिए विभिन्न प्रयास किए गए हैं। यह प्रयास आने वाले समय में और भी अधिक उत्साह के साथ जारी रहेंगे। <br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 08 Mar 2022 14:26:48 +0530</pubDate>
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