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                <title>रणथंभौर की खंडार रेंज में मृत अवस्था में मिली बाघिन टी 94,बाघिन के लंग्स फेलियर बताया जा रहा मौत का कारण</title>
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                        <![CDATA[रणथंभौर टाइगर रिजर्व के खंडार रेंज में रविवार सुबह 11 वर्षीय बाघिन टी-94 मृत पाई गई। गश्त के दौरान वन विभाग की टीम ने घोड़ा घाटी क्षेत्र में शव बरामद किया। डीसीएफ मानस सिंह के अनुसार, बाघिन के सभी अंग सुरक्षित हैं। मौत के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम और प्रोटोकॉल आधारित जांच की जा रही है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/sawai-madhopur/tigress-t94-found-dead-in-khandar-range-of-ranthambore-lung/article-145692"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/ranthambhor.png" alt=""></a><br /><p>सवाई माधोपुर।देश के सबसे बड़े रणथंभौर नेशनल पार्क से आज एक दुखद ख़बर सामने आई । जहा रणथंभौर की खंडार रेंज में विचरण करने वाली बाघिन टी 94 की आज मौत हो गई। बाघिन की मौत को लेकर रणथंभौर वन प्रशासन सहित वन्यजीव प्रेमियों में शोक की लहर है । </p>
<p>जानकारी के मुताबिक आज सुबह जब वन विभाग की टीम खंडार रेंज में गस्त कर रही थी ऐसे में गस्त के दौरान वन विभाग की टीम को घोड़ा घाटी के नीचे वन क्षेत्र में बाघिन टी 94 मृत अवस्था में पड़ी हुई नजर आई। जिसके बाद वनकर्मियों ने बाघिन  की मौत की सूचना वन विभाग के अधिकारियों को दी। </p>
<p>सूचना रणथंभौर वन प्रशासन के आलाधिकारी मौके पर पहुंचे और बाघिन के शव को कब्जे में लेकर राजबाग वन चौकी लाया गया। जहाँ वेटिनरी बोर्ड द्वारा गठित पशु चिकित्सकों ने बाघिन के शव का पोस्टमार्टम किया और पोस्टमार्टम के बाद एनटीसीए की गाइडलाइन के अनुसार वन एंव जिला प्रशासन के अधिकारियों की मौजूदगी में बाघिन के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया । </p>
<p>वेटिनरी डॉक्टर सीपी मीणा ने बताया कि प्रथम दृष्टया बाघिन की मौत का कारण लंग्स फेलियर लग रहा है। उन्होंने कहा कि बाघिन के लंग्स ओर लिवर सहित अधिकतर ऑर्गन्स खराब हो चुके थे संभवतया इसी वजह से बाघिन की प्राकृतिक मौत हुई है। वेटिनरी डॉक्टर का कहना है कि पोस्टमार्टम के दौरान सैम्पल लिए गए है जिन्हें लेब में जाँच के लिए भेजा जायेगा ओर जाँच रिपोर्ट आने के बाद ही बाघिन की मौत के सही कारणों का पता लग सकेगा।</p>
<p>वही रणथंभौर के डीएफओ मानस सिंह ने बताया कि बाघिन की उम्र तकरीबन 11 वर्ष है। बाघिन  टी 94 का विचरण क्षेत्र रणथंभौर की खंडार रेंज के ओंदी खोह , मूड घुसा, इंडाला, खटोला, कासेरा, बालाजी , घोड़ा घाटी, विंध्यकड़ा, फरिया आदि वन क्षेत्र में रहता था । डीएफओ ने बताया कि बाघिन का शव पूरी तरह सुरक्षित मिला था। डीएफओ ने बताया कि वेटिनरी डॉक्टर के मुताबिक बाघिन की मौत लंग्स फेलियर की वजह से हुई है। डॉक्टर्स द्वारा सैम्पल लिए गए है जिन्हें जांच के लिए भेजा जायेगा और जाँच रिपोर्ट आने के बाद ही बाघिन टी 94 की मौत के सही कारणों का पता लग सकेगा। डीएफओ ने कहा कि बाघिन के शव का पोस्टमार्टम के बाद एनटीसीए की गाइडलाइन के अनुसार अंतिम संस्कार कर दिया गया है। इस दौरान डीएफओ मानस सिंह सहित वन एंव प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे ।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>सवाई माधोपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Mar 2026 18:05:19 +0530</pubDate>
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                <title>वन्यजीव सुरक्षा पर फिर उठा सवाल : शिकारियों के लगाए तार के फंदे में फंसा पैंथर, वन विभाग की सतर्कता से बची जान ; एक माह के अंदर क्षेत्र में दूसरी घटना </title>
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                        <![CDATA[रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व कोर क्षेत्र के समीप वन्यजीव सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर मामला सामने आया है। बूंदी वन मंडल के अधीन केसरपुरा वन क्षेत्र में मेज नदी के पास एक पैंथर शिकारियों की ओर से लगाए गए तार के फंदे में फंस गया। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम ने तत्परता दिखाते हुए पैंथर का सुरक्षित रेस्क्यू किया। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/questions-raised-again-on-wildlife-safety-panther-trapped-in-wire/article-136577"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px-(2)14.png" alt=""></a><br /><p>नमाना रोड। रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व कोर क्षेत्र के समीप वन्यजीव सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर मामला सामने आया है। बूंदी वन मंडल के अधीन केसरपुरा वन क्षेत्र में मेज नदी के पास एक पैंथर शिकारियों की ओर से लगाए गए तार के फंदे में फंस गया। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम ने तत्परता दिखाते हुए पैंथर का सुरक्षित रेस्क्यू किया। जानकारी के अनुसार पैंथर की कमर में तार से बना फंदा बुरी तरह फंसा हुआ था। शिकारियों की ओर से क्षेत्र में जंगली सुअर के शिकार के लिए ऐसे फंदे लगाए जाते हैं। सर्दियों के मौसम में शिकार की घटनाओं में वृद्धि होने से वन्यजीवों के लिए खतरा और बढ़ गया है। पिछले एक माह में पैंथर के शिकारियों के फंदे में फंसने की यह दूसरी घटना है। जिससे वन्यजीवों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।</p>
<p><strong>रणथंभोर की विशेष टीम ने किया रेस्क्यू</strong><br />पैंथर के रेस्क्यू के लिए रणथंभोर से विशेष टीम को बुलाया गया। बूंदी वन मंडल की टीम एसीएफ सुनील धाभाई के नेतृत्व में मौके पर मौजूद रही। वहीं रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व की टीम रेंजर सुमित कनोजिया के नेतृत्व में रेस्क्यू अभियान में शामिल रही। वन विभाग की सतर्कता से पैंथर को सुरक्षित बचा लिया गया। वन विभाग ने क्षेत्र में अवैध शिकार के खिलाफ सख्ती बढ़ाने और निगरानी तेज करने की बात कही है।  </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Dec 2025 11:02:59 +0530</pubDate>
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                <title>सुरक्षा और संरक्षण को लेकर अरण्य भवन में हुई बैठक : सीसीटीवी, ड्रोन सर्विलांस को और अधिक प्रभावी बनाते हुए टाइगर रिजर्व की निगरानी सुदृढ़ की जाएं- संजय शर्मा</title>
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                        <![CDATA[बैठक में सांसद दुष्यंत सिंह, हरीश मीना, विधायक संदीप शर्मा, एसीएस फोरेस्ट आनंद कुमार, पीसीसीएफ हॉफ अरिजीत बनर्जी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/meeting-held-in-aranya-bhavan-on-security-and-protection-should/article-120988"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/45621.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य में बाघों के संरक्षण और टाइगर रिजर्व की प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से गठित राजस्थान बाघ संरक्षण फाउंडेशन के शासी निकाय की तीसरी बैठक शुक्रवार को अरण्य भवन में हुई। इसकी अध्यक्षता वन राज्य मंत्री संजय शर्मा ने की। बैठक में रणथम्भौर, सरिस्का, रामगढ़ विषधारी, धौलपुर और मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में बाघों की वर्तमान संख्या, उनके मूवमेंट पैटर्न, मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति, निगरानी व्यवस्था में तकनीकी संसाधनों का उपयोग तथा बाघ संरक्षण से जुड़ी प्रमुख योजनाओं और भावी रणनीतियों पर चर्चा हुई। वन राज्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सीसीटीवी, ड्रोन सर्विलांस और ई-गश्त प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाते हुए टाइगर रिजर्व की निगरानी को सुदृढ़ किया जाए। शर्मा ने निर्देश दिए कि अभयारण्यों में आने वाले पर्यटकों के लिए सभी मूलभूत सुविधाएं, स्वच्छता और रख-रखाव की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। </p>
<p><strong>कार्मिकों और स्थानीय लोगों का बीमा: </strong>वन विभाग कार्मिकों और टाइगर रिजर्व से सटे क्षेत्रों के निवासियों के लिए जीवन बीमा किए जा रहे हैं। फाउंडेशन की ओर से रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में एक करोड़ रुपए के पेट्रोलिंग वाहन एवं एंटी-पोचिंग कैंप के लिए किए गए एमओयू का अनुमोदन हुआ। बैठक में सांसद दुष्यंत सिंह, हरीश मीना, विधायक संदीप शर्मा, एसीएस फोरेस्ट आनंद कुमार, पीसीसीएफ हॉफ अरिजीत बनर्जी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Sat, 19 Jul 2025 12:32:01 +0530</pubDate>
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                <title>मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती चुनौती</title>
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                        <![CDATA[राजस्थान का रणथंभौर टाइगर रिजर्व कभी बाघ संरक्षण की मिसाल माना जाता था। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/increasing-challenge-of-human-livelihood-struggle/article-114423"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtrer99.png" alt=""></a><br /><p>राजस्थान का रणथंभौर टाइगर रिजर्व कभी बाघ संरक्षण की मिसाल माना जाता था, परंतु अब यह सफलता संकट में बदलती प्रतीत हो रही है। हाल के दिनों में ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं, जो इस बात की ओर इशारा करती हैं कि रिजर्व की वहन क्षमता कैरीइंग कैपेसिटी पर दबाव बढ़ता जा रहा है। रणथंभौर में बाघों की संख्या अब 80 से अधिक हो चुकी है। सीमित क्षेत्र में इतनी अधिक संख्या के कारण खासकर युवा बाघों में आक्रामकता बढ़ रही है। वे एक-दूसरे से टेरिटरी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। मानव बस्तियों के नजदीक पहुंचने की घटनाएं भी लगातार बढ़ रही हैं। इसी साल बाघ द्वारा मानव पर हमलों की दो घटनाओं से हर किसी का दिल दहल गया। पूर्व की घटना में रणथम्भौर किला स्थित त्रिनेत्र गणेश जी के दर्शन कर वापस लौट रहे एक परिवार के सात वर्षीय बच्चे को टाइगर ने मौत के घाट उतार दिया, तो हालिया घटना में आक्रामक बाघ ने वन विभाग के रेंजर को ही किले के मुख्य द्वार के सामने स्थित जोगी महल के पास शिकार बनाया। बाघ ने रेंजर के मुंह और गर्दन पर नाखूनों और मुंह से वार कर मार डाला। टेरिटरी की लड़ाई युवा बाघों की बेचैनी बढ़ा रही है। </p>
<p>विशेषज्ञ मानते हैं कि युवा बाघों को अपना क्षेत्र स्थापित करने के लिए जब पर्याप्त जगह नहीं मिलती, तो उनमें तनाव और हिंसा की प्रवृत्ति बढ़ती है। वर्ष 2019 में बाघ टी-104 द्वारा मानव पर हमले की घटना के बाद उसे स्थायी निगरानी में रखा गया। यह उदाहरण बताता है कि केवल संख्या में वृद्धि ही सफलता नहीं मानी जा सकती, जब तक उनके लिए सुरक्षित और उपयुक्त आवास न हो। पर्यटन का दबाव और निगरानी की सीमाएं भी कारण बने हैं। रणथंभौर में प्रतिदिन लगभग 100 वाहन पर्यटकों को जंगल में ले जाते हैं। यह अनियंत्रित पर्यटन बाघों के स्वाभाविक व्यवहार में बाधा डालता है। दूसरी ओर बाघों की निगरानी के लिए आवश्यक तकनीकी संसाधनों जैसे रेडियो कॉलर या सघन ट्रैकिंग प्रणाली का अभाव गंभीर चिंता का विषय है। हालिया समाचार रिपोर्टों के अनुसार, दो युवा बाघों के बीच हुए संघर्ष में एक की मृत्यु हो गई। </p>
<p>वन विभाग अब ऐसे बाघों को स्थानांतरित करने पर विचार कर रहा है, जो बार-बार संघर्ष में शामिल हो रहे हैं या मानव बस्तियों के निकट देखे जाते हैं। समस्या का समाधान जरूरी है, इसके लिए बहुआयामी रणनीति की आवश्यकता है। संरक्षित क्षेत्रों का नेटवर्क निर्माण-रणथंभौर से लगे संरक्षित क्षेत्र जैसे कैलादेवी, मुकुंदरा, रामगढ़ विषधारी और कुंभलगढ़ को आपस में जोड़ने की आवश्यकता है, जिससे बाघों को विस्तृत गलियारे मिल सकें। इन क्षेत्रों में शिकार प्रजातियों की संख्या बढ़ाना और मानवीय हस्तक्षेप को सीमित करना आवश्यक है। वैज्ञानिक पुनर्वास एवं स्थानांतरण-अत्यधिक घनत्व वाले क्षेत्रों से युवा और संघर्षशील बाघों को अन्य उपयुक्त अभयारण्यों में स्थानांतरित किया जाना चाहिए। यह कार्य राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण एनटीसीए की देखरेख में किया जाए। मानव-वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन-संघर्ष संभावित क्षेत्रों की पहचान के लिए कैमरा ट्रैप, जीपीएस कॉलर और स्थलीय सर्वेक्षण की व्यवस्था हो। त्वरित कार्यवाही हेतु विशेष दल, ड्रोन निगरानी और फास्ट मुआवजा प्रणाली की स्थापना जरूरी है। </p>
<p>ईको-टूरिज्म का संतुलन-अनियंत्रित पर्यटन पर रोक लगाकर ग्राम स्तर पर ईको-टूरिज्म को बढ़ावा दिया जाए। इससे स्थानीय लोगों को आजीविका मिलेगी और संरक्षण में उनकी भागीदारी भी सुनिश्चित होगी। पुनर्वास और भूमि नियमन-रणथंभौर से सटे संवेदनशील गांवों को ईको-सेंसिटिव जोन घोषित कर निर्माण गतिविधियों को नियंत्रित किया जाए। प्रेरित पुनर्वास योजनाओं से इच्छुक परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाए। तकनीकी निगरानी और रिपोर्टिंग-आधुनिक तकनीकों जैसे एआई आधारित कैमरा विश्लेषण, मोबाइल एप द्वारा त्वरित रिपोर्टिंग और सभी संवेदनशील बाघों की जीपीएस निगरानी से स्थिति पर नियंत्रण संभव है। नीतिगत सुझाव और आगे की राह-अब समय आ गया है कि राजस्थान एक समग्र बाघ संरक्षण नीति बनाए, जिसमें वहन क्षमता आधारित प्रबंधन मॉडल को अपनाया जाए।</p>
<p>साझा प्रबंधन प्रणाली विकसित की जाए, जिसमें वन विभाग, पंचायतें, गैर-सरकारी संगठन और समुदाय मिलकर कार्य करें। प्रभावित ग्रामीणों के लिए बीमा योजनाएं, वैकल्पिक आजीविका और संरक्षण-केन्द्रित शिक्षा कार्यक्रम लागू किए जाएं, ताकि संरक्षण और सहअस्तित्व एक साथ आगे बढ़ सकें। रणथंभौर में बाघों की बढ़ती संख्या एक अवसर भी है और एक चेतावनी भी। यदि इसे समुचित योजना, संवेदनशील नीति और स्थानीय सहभागिता के साथ न संभाला गया, तो यह सफलता जल्द ही संकट में तब्दील हो सकती है।</p>
<p><strong>-प्रकाश चंद्र शर्मा</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]>
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                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 17 May 2025 12:21:55 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur KD]]>
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                <title>करौली-धौलपुर में पांचवां बाघ अभ्यारण शीघ्र लेगा आकार, प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा</title>
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                        <![CDATA[धौलपुर जिले में केसरबाग, वन विहार, रामसागर, चंबल अभयारण्य और धौलपुर सेंचुरी पहले से, अब करौली को मिला विशाल टाइगर रिजर्व क्षेत्र बनाने की कयावद 
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/karauli/fifth-tiger-reserve-in-karauli-dholpur-will-soon-take-shape-proposal/article-97948"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/5554-(13)1.png" alt=""></a><br /><p>सैंपऊ। धौलपुर-करौली में पांचवा टाइगर रिजर्व बनाने पर सरकार के निर्णय के बाद क्षेत्रीय लोगों में खलबली मच गई है। राज्य सरकार ने वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को स्वीकृति के लिए प्रस्ताव भिजवा दिया है। वर्तमान में धौलपुर जिले में केसरबाग, वन विहार, रामसागर, चंबल अभयारण्य एवं धौलपुर सेंचुरी शामिल हैं। इन सब के साथ करौली को मिलाकर विशाल टाइगर रिजर्व क्षेत्र बनाने की कयावद राज्य सरकार ने शुरू कर दी है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने 22 अगस्त 2023 को राजस्थान के करौली एवं धौलपुर जिला में बाघ अभ्यारण बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी के बाद राज्य सरकार ने प्रस्ताव केंद्र सरकार को स्वीकृति के लिए भिजवा दिया है। जिस पर शीघ्र ही काम शुरू किया जाएगा। टाइगर रिजर्व का कोर एरिया 599 वर्ग किलोमीटर घोषित किया गया है तथा बफर एरिया 457 वर्ग किलोमीटर है।</p>
<p>जिसमें धौलपुर के 60 एवं करौली के 48 गांव शामिल हैं। जिसमें कुल 31 ग्राम पंचायत को इसमें शामिल किया गया है। शीघ्र ही अनुमति के बाद इन्हें विस्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। टाइगर रिजर्व का क्षेत्रफल 1075 किलोमीटर कोर एरिया है तथा 457 स्क्वायर किलोमीटर बफर एरिया है। इस टाइगर रिजर्व के बनाने से यह देश का 54 वां अभ्यारण बनेगा। राजस्थान में  रणथंभोर, सरिस्का, मुकुंदा हिल्स, रामगढ़-विषधारी के बाद यह पांचवां अभ्यारण होगा। भूमि को चिन्हित करने का काम शीघ्र शुरू किया जाएगा। विस्थापितों को राज्य सरकार की ओर से निर्धारित 18 वर्ष से ऊपर के लोगों को 15 लाख रुपए दिए जाएंगे।</p>
<p><strong>लोगों को सता रहा विस्थापन का डर</strong><br />सरकार जहां एक ओर धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व से धौलपुर को विशेष फायदे का दावा कर रही है। वहीं क्षेत्रीय नागरिकों में विरोध के स्वर देखने को मिल रहे हैं तथा लोगों को विस्थापन का भय सताने लगा है। इसी क्रम में हाल ही में बड़ी संख्या में लोगों ने इकट्ठे होकर मथारा गांव में टाइगर रिजर्व को लेकर बैठक का आयोजन किया। जिसमें क्राइटेरिया का विरोध किया गया तथा जल, जंगल, जमीन बचाने के लिए हर समय तैयार रहने का संकल्प लिया गया। लोगों का कहना था कि सरकार सैकड़ों वर्षों से आम आदमी की बसी हुई चमन बस्तियों को उजाडकर जंगली जानवरों को बसाना चाहती है जो कहां की मानवता है। इससे अच्छा तो क्षेत्र में उद्योग धंधे लगाकर रोजगार बढ़ाए जा सकते थे।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>धौलपुर</category>
                                            <category>करौली</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Dec 2024 10:52:48 +0530</pubDate>
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                <title>दीया कुमारी ने टाइगर रिजर्व में साप्ताहिक अवकाश पर पुनर्विचार का किया आग्रह </title>
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                        <![CDATA[दीया कुमारी ने अपने पत्र में कहा कि देश के टाइगर पार्क मानसून के दिनों में 92 दिन तक बंद रहते है और अतिरिक्त 52 साप्ताहिक अवकाश पर्यटकों के लिए रिजर्व में जाने के लिए उपलब्ध दिनों की संख्या को काफी कम कर देंगे।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/diya-kumari-urges-reconsideration-of-weekly-holiday-in-tiger-reserve/article-49441"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/diya-kumari.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजसमंद सांसद और नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) की सदस्य दीया कुमारी ने केन्द्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेन्द्र यादव को पत्र लिखकर देश के टाइगर रिजर्व में 1 जुलाई से साप्ताहिक अवकाश के फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है। दीया कुमारी ने अपने पत्र में कहा कि देश के टाइगर पार्क मानसून के दिनों में 92 दिन तक बंद रहते है और अतिरिक्त 52 साप्ताहिक अवकाश पर्यटकों के लिए रिजर्व में जाने के लिए उपलब्ध दिनों की संख्या को काफी कम कर देंगे। इससे पूरे देश में पर्यटन पर काफी प्रभाव पड़ सकता है।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Jun 2023 12:16:44 +0530</pubDate>
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                <title>कहीं आनुवांशिक बीमारी के शिकार तो नहीं प्रदेश के बाघ-बाघिन!</title>
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                        <![CDATA[ पूर्व में नेशनल इंस्टिट्यूट आॅफ बॉयोलोजिकल साइसेंस बैंगलुरू की एक टीम ने देश के कई टाइगर रिजर्व का सर्वे कर बाघ बाघिनों के नमूने एकत्र किए थे। जिसके अध्ययन के बाद यह सारांश आया था कि एक ही जीन पूल के बाघ-बाघिनों में कई तरह की बीमारी व समस्या होने की आशंका रहती है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/are-the-tigers-and-tigresses-of-the-state-victims-of-genetic-disease/article-44458"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/kahi-bhi-bimari-ke-shikar-to-nahi-pradesh-ke-bagh-baghin...kota-news-02-05-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। रणथम्भौर को यूं तो बाघों की नर्सरी कहा जाता है। प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व को भी रणथम्भौर के ही बाघ- बाघिनों ने ही आबाद किया है। लेकिन, रणथम्भौर के बाघ-बाघिनों में एक ओर चीज कॉमन नजर आ रही है। यहां के बाघ-बाघिनों को बार-बार पेट संबंधी खासकर मल त्याग नहीं कर पाने की बीमारी से जूझना पड़ा है। इसका ताजा मामला मुकुंदरा में देखने को मिला है। यहां पर बाघिन एमटी-4 यानि लाइटनिंग की भी तबीयत मल त्याग नहीं कर पाने के कारण बिगड़ी है। ऐसे में अब एक बार फिर से वन्यजीव प्रेमियों व वन अधिकारियों की चिंताएं बढ़ गई हैं। </p>
<p><strong>बाघिन एमटी-4 की भांजी रिद्दी भी रही परेशान</strong><br />24 मई 2022 को रणथंभौर में रिद्दी नाम से मशहूर बाघिन टी-124 भी स्केट पास नहीं करने की समस्या से जूझ चुकी है। इसकी वजह से उसकी बड़ी आंत में इंफेक्शन हो गया था। एनटीसीए के प्रोटोकॉल के अनुसार उसे ट्रैंकुलाइज कर इलाज करना पड़ा था। उसके ऐनस में घाव व सूजन थी। बाघिन की मॉनिटरिंग के दौरान पाया गया था कि वह काफी प्रयास के बाद भी स्टूल पास (मल त्याग) नहीं कर पा रही थी। इससे वह वोमिटिंग (उल्टियां) करने से परेशान हालात में थी। उसे भी ट्रैंकुलाइज कर एनीमा दिया था। गौरतलब है कि बाघिन रिद्दी बाघिन एमटी-4 की बहन की बेटी है। ऐसे में रिद्दी टाइग्रेस एमटी-4 यानी लाइटिंग की भांजी हुई और लाइटिंग मछली की पौती और रिद्दी पड़पौत्री है। </p>
<p><strong>रणथम्भौर के बाघ-बाघिन झेल चुके दर्द</strong><br />प्रदेश के हर टाइगर रिजर्व में रणथम्भौर से ही बाघ बाघिनों को शिफ्ट किया गया है। इनमें से अधिकतर बाघ-बाघिनों का संबंध रणथम्भौर की मशहूर बाघिन टी-16 यानि मछली से ही रहा है। ऐसे में पेट की बीमारी या मल त्याग में आ रही समस्या के जैनेटिक होने से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। पूर्व में नेशनल इंस्टिट्यूट आॅफ बॉयोलोजिकल साइसेंस बैंगलुरू की एक टीम ने देश के कई टाइगर रिजर्व का सर्वे कर बाघ बाघिनों के नमूने एकत्र किए थे। जिसके अध्ययन के बाद यह सारांश आया था कि एक ही जीन पूल के बाघ-बाघिनों में कई तरह की बीमारी व समस्या होने की आशंका रहती है। </p>
<p><strong>बाघ टी-57 को देनी पड़ी थी फ्लूड थैरेपी</strong><br />वर्ष 2022 में बाघ टी-57 पेट की तकलीफ के कारण तबीयत खराब हो गई थी। बाघ टी-57 को भोजन पचाने में परेशानी हो रही थी। साथ ही वह मल त्याग नहीं कर पा रहा था। इसके चलते बाघ चल-फिर नहीं पा रहा था। उपचार के दौरान उसे फ्लूड थैरेपी देनी पड़ी और ड्रिप चढ़ाकर पाचन क्रिया को ठीक करने वाली दवाएं तथा विटामिन दिए गए थे। हालांकि, बाद में वन विभाग की ओर से रिपोर्ट जारी की गई थी, जिसमें उसकी मौत का कारण कैंसर से होना बताया गया था।</p>
<p><strong>रणथम्भौर में पहले भी सामने आ चुके हैं कई मामले </strong><br />रणथम्भौर के बाघ-बाघिन पहले भी पेट की बीमारी खास तौर पर मल त्याग नहीं कर पाने की बीमारी से जूझ चुके हैं। इन सभी का बाघिन मछली से कोई न कोई संबंध जरूर है। वर्ष 2014-15 के बीच सबसे पहले रणथम्भौर के खूंखार बाघ टी-24 यानि उस्ताद को मल त्याग में परेशानी का सामना करना पड़ा था। इसके बाद वन विभाग की ओर से बाघ को तीन दिनों तक पिंजरे में रखकर उसका उपचार किया था। तब कहीं जाकर बाघ की हालत में सुधार हुआ था। बाघ उस्ताद मां मछली और पिता बाघ टी-20 यानी झुमरू का बेटा था। <br />- वर्ष 2017-18 के बीच बाघिन टी-8 यानी लाडली का शावक भी इसी प्रकार की बीमारी से जूझ चुका है।</p>
<p><strong>मुकुंदरा की बाघिन एमटी-4 दर्द से गुजरी</strong><br />रणथम्भौर की लाइटिंग यानी मुकुंदरा की रानी बाघिन एमटी-4 हाल ही में 28 अप्रेल से पेट की तकलीफ से गुजरी है। वह पिछले कुछ दिनों से मल त्याग नहीं कर पाने की वजह से दर्द में थी। चिकित्सकों की टीम ने सोमवार को ट्रैंकुलाइज कर उसके मलाश्य से दो सूखे मल के टुकड़े 4.5 तथा 2.5 इंच के टुकड़े निकाल उपचार किया। ये टुकड़े पत्थर की तरह सख्त थे।  बता दें, एमटी-4 बाघिन मछली की पौती है। </p>
<p><strong>एक्सपर्ट व्यू...</strong><br />समान जीन पूल के बाघ बाघिनों में कई प्रकार की आनुवांशिक बीमारी होने की आशंका रहती है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। कई संस्थाओं की ओर से इस दिशा में शोध भी किए जा रहे हैं।<br /><strong>-आरएन महरोत्रा, पूर्व पीसीसीएफ, वन विभाग जयपुर।</strong></p>]]>
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                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 May 2023 14:10:44 +0530</pubDate>
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                <title>मुकुंदरा का राजा अब भी पिंजरे में, आजादी को तरस रहा टाइगर</title>
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                        <![CDATA[बाघ टी-110 को पंद्रह दिन बीतने के बाद भी खुले जंगल में नहीं छोड़ा जा रहा। वहीं, अधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बाघ पूरी तरह से स्वस्थ है। इसके बावजूद उसे एनक्लोजर से बाहर नहीं निकालने और इस संबंध में अधिकारियों की चुप्पी बाघ को लेकर कई तरह की आशंकाओं को जन्म दे रही है।  ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-king-of-mukundra-is-still-in-the-cage--tiger-yearns-for-freedom/article-29961"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/mukundra-ka-raja-ab-bhi-pinjare-mei-aazadi-ko-taras-raha-tiger...kota-news-17.11.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। टाइगर टी-110 को 15 दिन बाद भी एनक्लोजर से आजादी नहीं मिली। उसे 3 नवम्बर को रणथम्भौर से मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में शिफ्ट किया गया था। तब से ही वह सेल्जर में एक हैक्टेयर में बने सॉफ्ट एनक्लोजर में रह रहा है। एक पखवाड़े बाद भी उसे एनक्लोजर से आजाद नहीं किया जा रहा। जबकि, वर्ष 2018 में रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व से ट्रैंकुलाइज कर मुकुंदरा लाए बाघ एमटी-1 को दरा एनक्लोजर से करीब 8 दिन बाद ही रिलीज कर दिया गया था। वहीं, बाघिन एमटी-4 को मात्र तीन दिन में ही बोराबांस रेंज में बने एनक्लोजर से सेल्जर में छोड़ दिया था। इसके विपरीत बाघ टी-110 को पंद्रह दिन बीतने के बाद भी खुले जंगल में नहीं छोड़ा जा रहा। वहीं, अधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बाघ पूरी तरह से स्वस्थ है। इसके बावजूद उसे एनक्लोजर से बाहर नहीं निकालने और इस संबंध में अधिकारियों की चुप्पी बाघ को लेकर कई तरह की आशंकाओं को जन्म दे रही है।  </p>
<p><strong>सवालों के जवाब देने से कतराते रहे अधिकारी </strong><br />एनक्लोजर से टाइगर के रिलीज करने को लेकर नीचे से लेकर ऊपर तक के तमाम अधिकारी कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं। दैनिक नवज्योति ने डीएफओ बीजो रॉय को फोन किया तो उन्होंने सीसीएफ एसपी सिंह से बात करने को कहा। उन्हें फोन व मैसेज किए लेकिन उन्होंने न तो फोन उठाया और न ही मैसेज का जवाब दिया। इसके बाद वाइल्ड लाइफ चीफ वार्डन अरविंदम तोमर,  प्रधान मुख्य वन संरक्षक दीप नारायण पांड्य व वन विभाग के शासन सचिव शिखर अग्रवाल को भी फोन व मैसेज किए लेकिन सभी अधिकारियों ने न तो फोन उठाए और न ही मैसेज का जवाब दिया। </p>
<p><strong>शिकार किया लेकिन खाया कम</strong><br />सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बाघ टी-110 ने सॉफ्ट एनक्लोजर में सबसे पहले 6 नवम्बर की रात पाड़े का शिकार किया था। लेकिन उस दिन मांस का भक्षण बहुत कम किया। इसके बाद अगले कुछ दिनों तक थोड़ा-थोड़ा मांस खाया।  </p>
<p><strong>बाहर निकले तो बने जोड़ी</strong><br />टाइगर रिजर्व में बाघ टी-110 की बाघिन एमटी-4 के साथ जोड़ी बनाई जाएगी। क्षेत्र में दो साल से एकमात्र बाघिन है। पहले बाघ-बाघिन के दो जोड़े व दो शावक हो गए थे। एक बाघ, एक बाघिन व शावक की मौत के बाद टाइगर रिजर्व में एक बाघिन एमटी-4 पूरे जंगल में एकाकी जीवन काट रही है। अब एक बार फिर से जोड़ी बनने की उम्मीद है। वन्यजीवप्रेमी दो साल से बाघिन के नए जोड़ीदार को लाने का इंतजार कर रहे थे, जो 3 नवम्बर को पूरा हुआ लेकिन बाघ व बाघिन के बीच एनक्लोजर दीवार बनी है।</p>
<p><strong>बाघ स्वस्थ्य तो क्यों नहीं छोड़ रहे एनक्लोजर से बाहर </strong><br />विभागीय अफसर बाघ के स्वस्थ होने और शिकार करने से लेकर विचरण करने तक सभी गतिविधियां समान्य बताई जा रही है। इसके बावजूद उसे सॉफ्ट एनक्लोजर से बाहर नहीं छोड़ा जा रहा। इस संबंध में एसीएफ से लेकर सीसीएफ तक के अधिकारी जवाब देने से कतरा रहे हैं। इनकी चुप्पी पर वन्यजीव प्रेमियों ने बाघ के जख्मी या अन्य शारीरिक परेशानी से जुड़ी आशंकाएं जताई है। </p>
<p><strong>इसलिए रखते हैं सॉफ्ट एनक्लोजर में </strong><br />विभाग के रिटायर्ड अधिकारी ने बताया कि बाघ को एक स्थान से दूसरे स्थान पर शिफ्ट करने के बाद सॉफ्ट एनक्लोजर में कुछ दिन देखरेख में रखा जाता है, ताकि वन्यजीव नई जगह के वातावरण में ढल सके। यह परिस्थितियों पर निर्भर करता है। बाघ की एक्टिविटी कैसी है। शिकार कर रहा है या नहीं, मांस कितना खा रहा है, कितने समय तक चल रहा है, सब कुछ सामान्य हो तो जल्द रिलीज किया जा सकता है।</p>
<p><strong>यह लगाए जा रहे कयास </strong><br />बाघ टी-110 को 15 दिन बाद भी एनक्लोजर से बाहर नहीं छोड़ने के सवाल पर मुकुंदरा अधिकारियों द्वारा चुप्पी साधने से कई तरह के सवाल खड़े हो गए। वन्यजीव प्रेमियों द्वारा कयास लगाए जा रहे हैं। जिनमें कुछ इस तरह हैं। <br /> बाघ पूरी तरह से स्वस्थ्य नहीं हो, शिफ्टिंग के दौरान ट्रैंकुलाइज करने पर चोट लगी हो जो अधिकारी छुपा रहे हैं। <br /> व्यवहार अभी तक पूरी तरह से समान्य नहीं हुआ हो।<br /> एनक्लोजर में बैचेन नजर आना, गुर्राना, तार फेंसिंग पर जोर-जोर से हाथ मारने के दौरान चोटिल हो गया हो। <br /> किसी भी कारण से परिस्थितियां उसके अनुकूल नहीं होना। <br /> शिकार कर रहा लेकिन डाइट अनुरूप नहीं खा रहा, क्योंकि बाघ एक बार में 15 से 20 किलो मांस खाता है। <br /> रिलीज करने को लेकर अधिकारियों में एक राय नहीं होना या संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों जैसे-एनटीसीए, स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड, नेशनल वाइल्ड लाइफ इंस्टिट्यूड देहरादून, संबंधित रिजर्व के अधिकारी व पशु चिकित्सकों का एकत्रित नहीं होना। <br /> मांस भक्षण के बाद टाइगर का चलना फिरना, फड़फड़ाना यानी आक्रोशित,  फेंसिंग पर जोर-जोर से पंजे मारना यह गतिविधियां दो आशंकाओं  की ओर इशारा करती है पहला- या तो वह बाहर निकलना चाहता है और दूसरी- उसे किसी तरह की शारीरिक परेशानी है। </p>
<p>बाघ टी-110 को अभी सॉफ्ट एनक्लोजर से बाहर नहीं छोड़ा गया है। इस संबंध में सभी तरह की जानकारी के लिए सीसीएफ शारदा प्रताप सिंह से सम्पर्क कर सकते हैं। <br /><strong> - बीजो रॉय, डीएफओ मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व कोटा</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Nov 2022 16:23:19 +0530</pubDate>
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                <title>मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में बसते-बसते रह गए नामीबिया के चीते</title>
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                        <![CDATA[नामीबिया से देश में लाये जाने वाले चीतों को मुकुंदरा में बसाने की संभावना नजर आ रही थी और इसके लिए राज्य सरकार ने प्रस्ताव भी केन्द्र सरकार को भेज दिया गया था लेकिन केन्द्र में राज्य की तरफ से मजबूत पक्ष रखने के अभाव में मुुकुंदरा के दावों के बीच चीते कूनो में आबाद हो गए। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/namibian-cheetahs-kept-on-settling-in-mukundara-hills-tiger-reserve/article-23336"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-09/tt.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। राजस्थान के कोटा जिले के मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में नामीबिया के अध्ययन दल द्वारा अफ्रीकन चीते बसाने के लिए उपयुक्त पाये जाने और राज्य सरकार के इस संबंध में केन्द्र सरकार को प्रस्ताव भेजने के बावजूद फिलहाल मुकुंदरा में चीते बसाने का सपना साकार नहीं हो सका है। <br /><br />नामीबिया से भारत आए अध्ययन दल ने मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के कूनो राष्ट्रीय अभयारण्य के साथ कोटा जिले के मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में दरा अभयारण्य क्षेत्र वाले 80 वर्ग किलोमीटर के एनक्लोजर को अफ्रीकन चीते बसाने की दृष्टि से उपयुक्त पाया था। इसके बाद नामीबिया से देश में लाये जाने वाले चीतों को मुकुंदरा में बसाने की संभावना नजर आ रही थी और इसके लिए राज्य सरकार ने प्रस्ताव भी केन्द्र सरकार को भेज दिया गया था लेकिन केन्द्र में राज्य की तरफ से मजबूत पक्ष रखने के अभाव में मुुकुंदरा के दावों के बीच चीते कूनो में आबाद हो गए। </p>
<p>हालांकि कूनों में यह प्रयोग सफल रहने पर इसके बाद मुकुंदरा में भी चीते बसाये जाने की उम्मीद की जा रही हैं। कोटा जिले की सांगोद विधानसभा सीट से कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री भरत सिंह कुंदनपुर ने कहा है कि कोटा का कोई नेता चीते की चिंता करने को तैयार नहीं है। हर कोई अपनी राजनीति चमकाने में लगा है जबकि कोटा, झालावाड़ और चित्तौडग़ढ़ जिले के रावतभाटा क्षेत्र तक विस्तृत मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में चीते को बसाया जाना कम महत्वपूर्ण नहीं है क्योंकि यह आने वाले समय में कोटा में पर्यटन के विकास और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो सकता था। <br /><br />वन्यजीव और पर्यावरण प्रेमियों में इस बात को लेकर गहरी चिंता है कि नामीबिया की अध्ययन दौरे पर आई टीम ने मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के कूनो राष्ट्रीय अभयारण्य के साथ कोटा जिले के मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में दरा अभयारण्य क्षेत्र वाले 80 वर्ग किलोमीटर के एनक्लोजर को अफ्रीकन चीते बसाने की दृष्टि से उपयुक्त पाया था लेकिन केंद्र में कोटा का पक्ष मजबूती से नहीं रख पाने से साल 1952 के बाद देश से विलुप्त घोषित कर दिए गए चीतों को भारत में फिर से आबाद करने का श्रेय मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क के हिस्से में गया। </p>
<p>राजस्थान के वन्यजीव विभाग ने कोटा के मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के साथ बारां जिले के शेरगढ़ अभयारण्य को भी चीते बसाने के लिए उपर्युक्त बताया है। शेरगढ़ अभयारण्य में चीता बसाने की विपुल संभावना को लेकर कुछ महीनों पहले वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (ड़ब्ल्यूआईआई) की एक टोली ने शेरगढ़ अभयारण्य क्षेत्र का दौरा कर इसे चीतें बसाने के लिए उपर्युक्त पाया। शेरगढ़ अभयारण्य 90 वर्ग किलोमीटर के दायरे में ही फैला होने की वजह से यहां पर्याप्त जगह का अभाव है। बाद में देहरादून से आई भारतीय वन्यजीव संस्थान की टीम ने भी प्रारंभिक अवलोकन के बाद इस बात की तस्दीक की कि शेरगढ़ अभयारण्य का क्षेत्र कम है।</p>
<p>बताया जा रहा है कि इन दावों के बीच वन विभाग शेरगढ़ अभयारण्य में चीते बसाने की तैयारी में जुट भी गया था और शेरगढ़ क्षेत्र के सूरपा ही नहीं बल्कि पांडाखोह गांव का भी विस्थापन की उम्मीद करते हुए शेरगढ़ अभयारण्य का क्षेत्रफल 90 वर्ग किलोमीटर से 300 वर्ग किलोमीटर तक बढ़ाने की तैयारी की गई। इसके लिए गत एक अगस्त से सर्वे शुरू करने की भी तैयारी थी। हालांकि यहां पांच तेंदुए छोड़े गए।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 18 Sep 2022 15:27:47 +0530</pubDate>
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                <title> बाघ और बाघिन के मिलन में सिर्फ डेढ़ किमी का फासला</title>
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                        <![CDATA[बाघ आरवीटी-1 रामगढ़ रिजर्व में करीब ढाई साल से अकेला घूम रहा है। वह अपनी टेरेट्री बना चुका है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-distance-of-only-one-and-a-half-km-in-the-meeting-of-tiger-and-tigress/article-21889"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-09/bagh-aur-baghin-milan...kota-news-6.9.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में सॉफ्ट एनक्लोजर से खुले जंगल में छोड़ी गई बाघिन आरवीटी-2 की किसी भी समय बाघ आरवीटी-1 से मुलाकात हो सकती है। बाघ और बाघिन के बीच मात्र डेढ़ किमी का फासला है। जिसे तय करने मे ज्यादा समय नहीं लगेगा। दोनों के मिलन को लेकर वन विभाग के अधिकारी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। अधिकारी इन बाघों की मिल रही लोकेशन के आधार पर मिलन की राह ताक रहे हैं। रामगढ़ टाइगर रिजर्व के सहायक उप वन संरक्षक तरुण मेहता ने बताया कि बाघिन के गले पर जीपीएस बेस्ड रेडियोकॉलर लगा है। जिससे हर 4 घंटे में बाघिन के मूवमेंट के सिग्नल मिलते हैं, जिससे उसकी लॉकेशन का पता चलता रहता है। हालांकि, 12 सदस्यों की 4 टीमें लगातार बाघिन की मॉनिटरिंग कर रही है। शनिवार को बाघिन ने नील गाय के बछड़े का शिकार किया है। वह जंगल में अपनी टेरेट्री बनाने की कोशिश कर रही है। इस वक्त बाघ आरवीटी-1 का मूवमेंट गुलखेड़ी की गेंदका पहाड़ी इलाके में है, जबकि बाघिन आरवीटी-2 मैदानी इलाके में है। दोनों के बीच महज डेढ़ किमी की दूरी है। किसी भी समय इनका मिलन हो सकता है। </p>
<p><strong>नीलगाय के बछड़े का किया शिकार</strong><br />बाघिन ने हाल ही में नील गाय के बछड़े का शिकार किया है। वाइल्ड लाइफ एक्सपर्टस के अनुसार बाघ व बाघिन शिकार को कभी भी एक साथ नहीं खाते और रोजाना शिकार भी नहीं करते। वह शिकार को थोड़ा-थोड़ा ही खाते हैं। बाघिन जंगल में आराम से घूम रही है। 12 सदस्यों की 4 टीमें लगातार उसकी मॉनिटरिंग कर रही है। रेडियोकॉलर लगे होने से प्रत्येक 4 घंटे में टीम को उसकी लॉकेशन के सिग्नल मिलते रहते हैं। इससे ट्रैकिंग में आसानी रहती है और पल पल का अपडेट मिलता रहता है।  </p>
<p><strong>फाइट की संभावना न के बराबर</strong><br />सिंह के मुताबिक, बाघ और बाघिन दोनों ही अभयारण्य में घूम रहे हैं। खुले जंगल में बाघिन से सामना होने पर दोनों में किसी तरह की फाइट होने की संभावना न के बराबर है, क्योंकि एक-दूसरे के प्रति दोनों में आकर्षण होता है। यदि बाघिन की जगह बाघ होता तो टेरिटोरियल फाइट की संभावना अधिक रहती। वैसे, दो नर बाघ एक जगह नहीं रह सकते, दोनों में वर्चस्व की जंग होती है, जो कमजोर पड़ता है वह इलाका छोड़कर चला जाता है। हालांकि, बाघ और बाघिन की पहली मुलाकात किसी भी समय हो सकती है। </p>
<p><strong>घना के जंगल से आएंगे 150 हिरण व चीतल</strong><br />अधिकारियों के अनुसार रामगढ़ टाइगर रिजर्व में जल्द ही रणथम्भौर से एक टाइग्रेस लाई जाएगी। साथ ही घना के जंगलों से 150 हीरण व चीतल भी यहां लाए जाएंगे। इसकी तैयारियां चल रही है। पूर्व में भी प्री-बेस बढ़ाया गया था। रिजर्व में नीलगाय, सियार, हिरण, भालू, हाईना, जंगली कुत्ते, चीतल, सांभर, जंगली बिल्लियां, तेंदुए, लंगूर, सांप, मगरमच्छ सहित कई प्रकार के वन्यजीव मौजूद हैं।</p>
<p><strong>पहाड़ों पर चढ़-उतर रही बाघिन </strong><br />अधिकारियों के अनुसार बाघिन आरवीटी-2 इस समय जंगल के भौगोलिक वातावरण से परिचित हो रही है और अपनी टेरेटरी बनाने की कोशिश में जुटी है। टाइगर या टाइग्रेस समतल जगह हो तो एक दिन में करीब 25 से 40 किमी का फासला तय कर सकते हैं और यदि उतार-चढ़ाव वाली जगह हो तो 15 से 20 किमी का दायरा कवर करते हैं। बाघिन अभी पहाड़ों पर चढ़ रही उतर रही है। पहाड़ों पर चढ़ती है तो उसे आबादी बसावट व लाइटों की रोशनी नजर आती है तो वह वापस उतरकर घरातल पर पहुंच जाती है। </p>
<p><strong>दोनों के बीच 200 मीटर दूरी होने पर होगी कॉलिंग </strong><br />गश्ती दल प्रभारी नरेंद्र सिंह ने बताया कि बाघ आरवीटी-1 रामगढ़ रिजर्व में करीब ढाई साल से अकेला घूम रहा है। वह अपनी टेरेटरी बना चुका है। बाघ-बाघिन दोनों को अपने आसपास एक दूसरे के होने का एहसास हो चुका है। दोनों के बीच की दूरी जब 200-300 मीटर होगी तो गंध के जरिए एक-दूसरे को पहचान जाएंगे और दहाड़ यानी कॉलिंग के माध्यम से एक रास्ते पर होंगे, तब दोनों की साइटिंग हो सकेगी। उन्होंने बताया कि बाघ के गले में रेडियोकॉलर नहीं होने से उसकी लॉकेशन ट्रैस नहीं हो पाती लेकिन पगमार्क मिलने से उसकी उपस्थिति का अंदाजा हो जाता है। हालांकि चारों टीम दोनों की मॉनिटरिंग कर रही है।</p>
<p><strong>मिलन को उत्सुक हैं वनकर्मी </strong><br />बाघ-बाघिन का मिलन रामगढ़ अभयारण्य के अधिकारियों व वनकर्मियों का महत्तवाकांक्षी सपना है, जिसके चलते अधिकारी इस इंतजार में हैं कि बाघ-बाघिन एक दूसरे के नजदीक आएंगे और अभयारण्य में बाघों के कुनबे में विस्तार होने की शुरूआत हो सके। अधिकारियों ने बताया कि रणथम्भोर से लाई गई बाघिन एनक्लोजर से निकलने के बाद पूरी तरह स्वस्थ्य है। भोजन के लिए यहां प्रर्याप्त मात्रा में प्री-बेस भी मौजूद हैं। वह जंगल में अपनी टेरेटरी बनाने की कोशिश कर रही है। </p>
<p><strong>स्वस्थ व सुरक्षित है बाघिन </strong><br />बाघिन पूरी तरह से स्वस्थ और सुरक्षित है, चार टीमें लगातार उसकी मॉनिटरिंग कर रही है। वह जंगल में अपनी टेरेटरी बना रही है। हाल ही में नील गाय के बछड़े का शिकार भी किया। बाघ और बाघिन के बीच करीब डेढ़ किमी की दूरी है। जल्द ही दोनों की पहली मुलाकात हो सकेगी। घना के जंगलों से प्री-बेस लाने की तैयारियां चल रही है। रणथम्भौर से एक और बाघिन लाने की कोशिश जारी है। <br /><strong>- तरुण मेहरा, एसीएफ रामगढ़ टाइगर रिजर्व बूंदी</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Sep 2022 15:09:25 +0530</pubDate>
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                <title>हाईकोर्ट ने वनों के संरक्षण से जुड़े मामले में सरकार को दिए निर्देश </title>
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                        <![CDATA[हाईकोर्ट ने रणथंभौर नेशनल पार्क और टाइगर रिजर्व सहित वनों के संरक्षण से जुड़े मामले में प्रदेश सरकार को दिशा-निर्देश दिए है। अदालत ने राजस्व सचिव और वन सचिव को कहा है कि वे वन भूमि का डिमार्केशन कर उसका रेवेन्यू रिकॉर्ड में इंद्राज कराए। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-high-court-gave-instructions-to-government-in-case-of-tiger-reserve/article-10113"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/court-copy3.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। हाईकोर्ट ने रणथंभौर नेशनल पार्क और टाइगर रिजर्व सहित वनों के संरक्षण से जुड़े मामले में प्रदेश सरकार को दिशा-निर्देश दिए है। अदालत ने राजस्व सचिव और वन सचिव को कहा है कि वे वन भूमि का डिमार्केशन कर उसका रेवेन्यू रिकॉर्ड में इंद्राज कराए। इसके साथ ही अदालत ने राज्य सरकार को पन्द्रह अगस्त तक एनटीसीए को टाइगर कंजर्वेशन प्लान पेश करने को कहा है। जस्टिस प्रकाश गुप्ता और जस्टिस समीर जैन ने यह आदेश प्रकरण में लिए गए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने कहा कि प्रशासन शहरों के संग के साथ-साथ प्रशासन वनों के संग भी मनाना चाहिए।</p>
<p>सुनवाई के दौरान अदालती आदेश की पालना में पीसीसीएफ हॉफ डीएन पांडेय, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक अरिंदम तोमर, प्रमुख वन सचिव, प्रमुख राजस्व सचिव, सवाई माधोपुर कलेक्टर, एसपी और एसडीएम सहित अन्य अधिकारी अदालत में पेश हुए। अदालत ने अधिकारियों से सवाल किया कि वन क्षेत्र में खनन काम कैसे हो रहा है। इसके अलावा नेशनल पार्क की जीरो लाइन पर बने होटल के नियंत्रण के लिए क्या किया जाता है और क्या उनके पास संबंधित विभागों की एनओसी है। इसके अलावा पार्क में खाने-पीने का सामान व प्लास्टिक की बोतल कैसे चली जाती है। अदालत ने यह भी पूछा कि इन एरिया को साइलेंस जोन घोषित किया गया है या नहीं। अदालत ने कहा कि पार्क में हाफ डे और फुल डे सफारी के आदेश पर भी पुनर्विचार करने की जरूरत है। अदालत ने मामले में न्यायमित्र के तौर पर वरिष्ठ अधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद और अधिवक्ता सुनील समदरिया को नियुक्त किया है। अदालत ने कहा कि किसी भी सूरत में वन संरक्षण को लेकर समझौता नहीं किया जाना चाहिए।<br /><br /></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 May 2022 15:38:49 +0530</pubDate>
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                <title>सरिस्का टाइगर रिज़र्व में पानी की तलाई में बाघिन एसटी -9 और एसटी -21 की एकसाथ साईटिंग</title>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/alwar/alwar-news--jaipur-news--simultaneous-sighting-of-tigress-st-9-and-st-21-at-the-bottom-of-water-in-sariska-tiger-reserve/article-9409"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/tiger.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर/अलवर। सरिस्का टाइगर रिज़र्व में इन दिनो टाइगर की अच्छी साईटिंग हो रही है। सोमवार को टाइगर रिज़र्व में बनाई पानी की तलाई में बाघिन एसटी -9 और एसटी -21 एकसाथ दिखाई दिए। इन पलों को पर्यटकों ने अपने कैमरे में क़ैद किया। नेचर गाइड अजय कुमार ने बताया कि अभी एसटी-9 और एसटी-21 को अक्सर साथ देखा जा रहा है। यहां इन दोनो की अच्छी साईटिंग हो रही है।</p>]]>
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                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>अलवर</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 May 2022 13:36:01 +0530</pubDate>
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