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                <title>medical education - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>medical education RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>जनगणना ड्यूटी से SMS हॉस्पिटल में हड़कंप : 38 कर्मचारियों को मुक्त करने की सिफारिश, जयपुर कलेक्टर को लिखा पत्र </title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर के SMS हॉस्पिटल में 38 मंत्रालयिक कर्मचारियों की जनगणना ड्यूटी लगाए जाने से हड़कंप मच गया है। अधीक्षक ने चेतावनी दी है कि इससे आयुष्मान और RGHS जैसी आवश्यक सेवाएं ठप हो सकती हैं। मेडिकल एजुकेशन आयुक्त ने मरीजों के हित में जयपुर कलेक्टर को पत्र लिखकर इन कर्मचारियों की ड्यूटी तुरंत निरस्त करने की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/stir-in-sms-hospital-recommendation-to-relieve-38-employees-from/article-151576"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/sms-hospital1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य के सबसे बड़े सरकारी हॉस्पिटल सवाई मानसिंह (SMS) में जनगणना ड्यूटी के कारण प्रशासन में हड़कंप मच गया है। हॉस्पिटल में तैनात कुल 65 मंत्रालयिक कर्मचारियों में से 38 कर्मचारियों की ड्यूटी जनगणना कार्य में लगाए जाने से कई आवश्यक सेवाओं के प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। जानकारी के अनुसार, 13 अप्रैल को नगर निगम आदर्श नगर जोन उपायुक्त एवं जनगणना अधिकारी द्वारा आदेश जारी कर इन कर्मचारियों की ड्यूटी जनगणना कार्य में लगाई गई थी। आदेश मिलते ही हॉस्पिटल प्रशासन सतर्क हो गया और इस निर्णय पर चिंता जताई गई।</p>
<p>हॉस्पिटल अधीक्षक ने मेडिकल एजुकेशन आयुक्त को भेजे पत्र में बताया कि इन कर्मचारियों की अनुपस्थिति से मेडिकल बोर्ड, दिव्यांगता प्रमाणन, वीवीआईपी प्रोटोकॉल, कोर्ट के आदेशों के तहत स्वास्थ्य परीक्षण तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं जैसे मां योजना, आरजीएचएस और आयुष्मान योजना के संचालन में बाधा आ सकती है। अधीक्षक की सिफारिश पर आयुक्त मेडिकल एजुकेशन ने जयपुर कलेक्टर को पत्र लिखकर इन कर्मचारियों की जनगणना ड्यूटी निरस्त करने की मांग की है। साथ ही भविष्य में चुनाव और जनगणना ड्यूटी से भी इन्हें मुक्त रखने की सिफारिश की गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/stir-in-sms-hospital-recommendation-to-relieve-38-employees-from/article-151576</link>
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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 16:14:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एसएमएस को विश्वस्तरीय संस्थान बनाने के लिए मुख्य सचिव ने किया वरिष्ठ चिकित्सकों के साथ संवाद, चिकित्सकों से मांगे सुझाव, कई बिंदुओं पर सहमति भी बनी, एसएमएस मेडिकल कॉलेज में हुआ कार्यक्रम</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने एसएमएस मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने हेतु संवाद किया। सरकार कैंसर और स्त्री रोग विभागों को विश्वस्तरीय संस्थानों के साथ एमओयू कर अत्याधुनिक बनाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/to-make-sms-a-world-class-institute-the-chief-secretary/article-143225"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(12200-x-600-px)-(4)12.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने शनिवार को सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सकों के साथ संवाद  किया। इस अवसर पर चिकित्सा विभाग की प्रिंसिपल सेक्रेट्री गायत्री राठौड़, चिकित्सा विभाग के कमिश्नर नरेश गोयल और सवाई मानसिंह चिकित्सालय के प्राचार्य डॉ. दीपक माहेश्वरी सहित अनेक वरिष्ठ चिकित्सक उपस्थित रहे। मुख्य सचिव ने बताया कि राज्य सरकार प्रदेश के नागरिकों को बेहतरीन चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने के लिए कटिबद्ध है। इस संदर्भ में वर्तमान बजट में चिकित्सा व्यवस्थाओं के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं। </p>
<p><strong>इन मुद्दों पर भी हुई चर्चा</strong></p>
<ul>
<li>मरीजों को चिकित्सालयों में सेवाएं सुगमता से उपलब्ध कराने और उपचार में लगने वाले समय को कम करने पर विस्तृत चर्चा की गई।  </li>
<li>मरीजों में रोगों के प्रति जागरुकता बढ़ाने के लिए महाविद्यालय के विभिन्न विभागों द्वारा नियमित रूप से जन-शिक्षा कार्यक्रम आयोजित किए जाने का भी निर्णय लिया गया।</li>
<li>दीर्घकालीन बीमारियों के उपचार की गुणवत्ता एवं प्रभावशीलता का मूल्यांकन करने के लिए को-होर्ट स्टडी प्रारंभ करने पर विचार किया गया, जिससे की रोगों की जटिलताओं को कम करने और तथ्य आधारित स्वास्थ्य नीति निर्धारण में सहायता मिल सके। इसलिए कोहोर्ट स्टडी के लिए प्रस्ताव तैयार करने का निर्णय लिया गया।</li>
<li>एसएमएस मेडिकल कॉलेज में चिकित्सा शिक्षा एवं सेवाओं की गुणवत्ता को विश्व स्तरीय बनाने के लिए नवीनतम तकनीकों एवं उपचार पद्धतियों को अपनाने और उच्च स्तरीय अनुसंधान को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया।</li>
<li>इसके लिए देश-विदेश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों के साथ सहयोग एवं समन्वय स्थापित करने के लिए एमओयू किया जाएगा। इसमें विशेष रूप से स्त्री रोग विभाग एवं कैंसर विभाग को विश्वस्तरीय विद्यालयों के सहयोग से अत्याधुनिक बनाने के लिए विशेष जोर दिया जाएगा।</li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Feb 2026 12:25:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पीजी बॉन्ड की नई शर्तों से भविष्य के सुपरस्पेशलिस्ट संकट में, जार्ड ने जताया कड़ा विरोध, जानें क्या है पूरा मामला ?</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर में राजस्थान के PG डॉक्टरों के सामने संकट, नए आदेश के अनुसार सुपरस्पेशलिटी प्रवेश के लिए 25 लाख से 1.5 करोड़ की बैंक गारंटी अनिवार्य। JARD ने विरोध जताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jard-expressed-strong-opposition-to-the-future-superspecialist-crisis-due/article-141780"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(6)2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान के सरकारी मेडिकल कॉलेजों से पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) कर चुके उन मेधावी डॉक्टरों के सामने करियर का सबसे बड़ा संकट खड़ा हो गया है, जिन्होंने अपनी मेहनत से नीट एसएस (सुपरस्पेशलिटी) की कठिन परीक्षा पास की है। 28 जनवरी 2025 को सचिवालय से संयुक्त शासन सचिव द्वारा जारी नए आदेशों ने प्रदेश के रेजिडेंट्स की चिंता बढ़ा दी है। नए नियमों के अनुसार, अब सुपरस्पेशलिटी कोर्स में प्रवेश पाने के लिए रिलीव होने से पहले रेजिडेंट्स को बॉन्ड राशि के बराबर की बैंक गारंटी सरकार के पास जमा करानी होगी।</p>
<p><strong>क्या है विवाद की मुख्य जड़?</strong></p>
<p>पूर्व में नियम यह था कि यदि किसी रेजिडेंट का चयन पीजी के दौरान या बाद में सुपरस्पेशलिटी के लिए होता था, तो सरकार उनसे 25 लाख रुपये का एफिडेविट (शपथ पत्र) लेकर उन्हें रिलीव कर देती थी। छात्र अपना कोर्स पूरा करने के बाद वापस राज्य में आकर बॉन्ड की सेवा शर्तें पूरी करते थे।<br />लेकिन नए आदेशों ने इस प्रक्रिया को अत्यंत जटिल बना दिया है:</p>
<p>बैंक गारंटी की अनिवार्यता: अब एफिडेविट के स्थान पर बैंक गारंटी मांगी जा रही है।</p>
<p>भारी भरकम राशि: पीजी बैच 2023 और 2024 के लिए यह राशि 25 लाख रुपये है, जबकि बैच 2025 के लिए बॉन्ड राशि को बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपये कर दिया गया है।</p>
<p>वित्तीय बोझ: किसी भी मध्यमवर्गीय या मेधावी छात्र के लिए 25 लाख से लेकर 1.5 करोड़ रुपये तक की बैंक गारंटी देना व्यावहारिक रूप से असंभव है।<br />जार्ड का विरोध और डॉक्टरों की मांग</p>
<p>जयपुर एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (JARD) ने इस आदेश को प्रतिभा विरोधी करार दिया है। जार्ड अध्यक्ष डॉ. राजपाल सिंह मीना का कहना है कि सरकार का यह कदम प्रदेश के सबसे होनहार डॉक्टरों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। पीजी के बाद बॉन्ड की अनिवार्यता और इतनी बड़ी राशि की बैंक गारंटी के कारण मेधावी डॉक्टर सुपरस्पेशलिटी कोर्स करने से वंचित रह जाएंगे। हम सेवा करने से मना नहीं कर रहे, लेकिन बैंक गारंटी की शर्त हटाकर पुरानी एफिडेविट व्यवस्था बहाल की जानी चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Feb 2026 18:37:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एसएमएस मेडिकल कॉलेज में शुरू किया क्रमिक अनशन : चिकित्सा शिक्षा में लैटरल एंट्री का विरोध चिकित्सक शिक्षकों का आंदोलन</title>
                                    <description><![CDATA[सचिव डॉ. राजकुमार हर्षवाल ने कहा कि लेटरल एंट्री और असमान पात्रता मानदंड से विद्यार्थियों की शिक्षा और शोध संस्कृति पर गहरा असर पड़ेगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/sms-medical-college-started-in-gradual-fasting-medical-education/article-126281"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news-(4)1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान मेडिकल कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन ने चिकित्सा शिक्षा में लेटरल एंट्री का विरोध शुरू कर दिया है। सोमवार से एसएमएस अस्पताल परिसर में क्रमिक धरना शुरू किया गया है। इस दौरान बड़ी संख्या में संकाय सदस्यों ने भाग लिया और चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षकों के अधिकारों पर चिंता जताई। संघ के अध्यक्ष डॉ. धीरज जेफ  ने कहा कि यह संघर्ष केवल चिकित्सक शिक्षकों के हितों का नहीं बल्कि पूरे प्रदेश की चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता बचाने का है। यदि सरकार ने पारदर्शी और समान भर्ती प्रक्रिया लागू नहीं की तो एसोसिएशन को उग्र आंदोलन की राह अपनानी पड़ेगी। सचिव डॉ. राजकुमार हर्षवाल ने कहा कि लेटरल एंट्री और असमान पात्रता मानदंड से विद्यार्थियों की शिक्षा और शोध संस्कृति पर गहरा असर पड़ेगा।  </p>
<p><strong>ये हैं मुख्य मांगें</strong><br />चिकित्सा शिक्षा में लेटरल एंट्री तत्काल समाप्त की जाए।<br />भर्ती केवल प्रवेश स्तर यानी असिस्टेंट प्रोफेसर स्तर पर हो।<br />भर्ती की एकमात्र एजेंसी राजस्थान लोक सेवा आयोग हो।<br />राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के अनुसार समय पर डीएसीपी लागू किया जाए।<br />नियमित एवं पारदर्शी भर्ती नीति अपनाई जाए।<br />स्नातकोत्तर डिग्रीधारी डेमॉन्स्ट्रेटरों को सहायक आचार्य पद पर पदोन्नति मिले।<br />नियुक्ति या समायोजन समिति भंग की जाए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Sep 2025 11:00:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रूसी विश्वविद्यालय भारतीय स्टूडेंट्स को कर रहे आकर्षित, रूस में चिकित्सा शिक्षा का खर्च तुलनात्मक रूप से कम  </title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी विश्वविद्यालयों में विदेशी विद्यार्थियों के प्रवेश पर अंकुश लगाने के ट्रम्प प्रशासन के प्रयास में रूसी विश्वविद्यालयों तथा उच्च शिक्षा संस्थानों को नया अवसर दिख रहा है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/russian-university-attracts-indian-students-the-expenses-of-medical-education/article-116030"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/news-(17).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। अमेरिकी विश्वविद्यालयों में विदेशी विद्यार्थियों के प्रवेश पर अंकुश लगाने के ट्रम्प प्रशासन के प्रयास में रूसी विश्वविद्यालयों तथा उच्च शिक्षा संस्थानों को नया अवसर दिख रहा है और वे भारतीय छात्र-छात्राओं को अपनी तरफ आकर्षित करने के अभियान में लगे हैं। रूसी विश्वविद्यालयों तथा उच्च शिक्षा संस्थान प्रमुख भारतीय शहरों में विशेष सम्पर्क कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं।  रूसी संस्थान इस अभियान में अन्य बातों के साथ बता रहे हैं कि उनके यहां विशेष रूप से चिकित्सा (मेडिकल)शिक्षा का खर्च तुलनात्मक रूप से कम है और इस लिए  रूस भारतीय विद्यार्थियों के लिए चिकित्सा विज्ञान की पढ़ाई का पसंदीदा स्थान बन गया है। </p>
<p>इसी तरह के एक अभियान में शनिवार को यहां रूसी हाउस में आयोजित शिक्षा-मेले सैकड़ों विद्यार्थी और अभिभावक आए थे। मेले में रूस के प्रमुख मेडिकल विश्वविद्यालयों ऑरेनबर्ग स्टेट मेडिकल विश्वविद्यालय, पर्म स्टेट मेडिकल विश्वविद्यालय, बीबी गोरोडोविकोव कलमीक स्टेट विश्वविद्यालय , प्सकोव स्टेट विश्वविद्यालय और मारी स्टेट विश्वविद्यालय सहित कई प्रमुख रूसी विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों ने उनके साथ संवाद किया। इस वर्ष रूसी शिक्षा मेला भारत के सात शहरों- मुंबई, त्रिवेंद्रम, कोलकाता, नयी दिल्ली, पटना, अहमदाबाद, इंदौर, चंडीगढ़ और जयपुर में आयोजित किया जा रहा है। दिल्ली में शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में इन विश्वविद्यालयों ने अपने यहां प्रवेश प्रक्रिया, शैक्षणिक कार्यक्रमों, बुनियादी ढांचे, छात्रावास सुविधाओं और रूस में जीवन के बारे में जानकारी दी और इससे संबंधित प्रश्नों का समाधान किया। मेले मे मौजूद मारी स्टेट विश्वविद्यालय की कुलपति पेट्रोवा इरीना ने कहा, हम भारतीय छात्रों को विश्वस्तरीय सुविधाएं प्रदान करने के साथ विश्व के अन्य देशों की तुलना में मेडिकल संबधी उच्च शिक्षा को किफायती रूप में उपलब्ध कराते हैं। </p>
<p>पिछले साल करीब 40000 भारतीय छात्र रूस में आए जिसे हम अपनी उपलब्धि मानते हैं। इस अवसर पर रूसी हाउस की निदेशक डॉ. एलेना रेमीज़ोवा ने कहा शिक्षा भारत-रूस सहयोग के सबसे मजबूत स्तंभों में से एक है। रूसी शिक्षा मेले जैसी पहलों के माध्यम से हमारा लक्ष्य कि भारतीय छात्रों को रूस में विश्वस्तरीय विश्वविद्यालयों तक पहुँच प्रदान करना है। ये सहयोग न केवल शैक्षिक आदान-प्रदान हैं बल्कि हमारे देशों के बीच गहरी दोस्ती का प्रतीक भी हैं। अमेरिकी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में 2023-24 में 3.31 लाख छात्र-छात्राएं पढ़ रहे थे और वहां के लिए भारत विदेशी विद्यार्थियों का सबसे बड़ा स्रोत था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने राजनीतिक निर्णयों के तहत आमेरिका में आव्रजन के नियम सख्त करने के साथ अमेरिकी विश्वविद्यालयों की  विदेशी विद्यार्थियों को प्रवेश देने की क्षमता पर नियामकीय और वित्तीय अंकुश लगाने शुरू कर दिए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Jun 2025 14:32:11 +0530</pubDate>
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                <title>अब एमबीबीएस मेेंं पढ़ेंगे नैतिकता का पाठ </title>
                                    <description><![CDATA[ कोटा मेडिकल कॉलेज ने परिवार गोद लेने का अनूठा कार्यक्रम शुरू कर दिया किया है। जिसके तहत एमबीबीएस प्रथम वर्ष के प्रत्येक छात्र को 5 परिवार गोद दिए गए हैं। ऐसे में स्टूडेंट्स पढ़ाई के साथ गोद लिए परिवार के स्वास्थ्य की सम्पूर्ण जिम्मेदारी निभाएंगे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/now-the-lesson-of-ethics-will-be-read-in-mbbs/article-41214"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/aaaa.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । नेशनल मेडिकल कमीशन ने चिकित्सा शिक्षा में बड़ा बदलाव किया है। अब एमबीबीएस स्टूडेंट्स को किताबी ज्ञान ही नहीं बल्कि नैतिकता का पाठ भी पढ़ाया जा रहा है। ताकि, भविष्य में मरीज और डॉर्क्ट्स के बीच टकराव रोका जा सके। इसके लिए एनएमसी ने सिलेबस में फैमिली एडॉप्शन कार्यक्रम जोड़ा है। इस दिशा में पहल करते हुए कोटा मेडिकल कॉलेज ने परिवार गोद लेने का अनूठा कार्यक्रम शुरू कर दिया किया है। जिसके तहत एमबीबीएस प्रथम वर्ष के प्रत्येक छात्र को 5 परिवार गोद दिए गए हैं। ऐसे में स्टूडेंट्स पढ़ाई के साथ गोद लिए परिवार के स्वास्थ्य की सम्पूर्ण जिम्मेदारी निभाएंगे। </p>
<p><strong>1250 परिवारों के स्वास्थ्य का रखेंगे ध्यान</strong><br />कोटा मेडिकल कॉलेज में प्रथम वर्ष में कुल 250 स्टूडेंट्स हैं। फैमिली एडॉप्शन कार्यक्रम के तहत प्रत्येक स्टूडेंट्स को 5 परिवारों की सेहत का जिम्मा सौंपा गया है। स्टूडेंट तीन साल तक पढ़ाई के साथ अपने-अपने परिवार के सभी सदस्यों के व्यवहार, बीमारियां, रहन-सहन सहित स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों का अध्ययन करेंगे। उनकी समस्याओं का समाधान करवाएंगे। साथ ही परिवारों को स्वास्थ्य के प्रति जागरुक करेंगे। बच्चों का टीकाकरण और बीमारों का उपचार में भी मदद करेंगे। इलाज के लिए संबंधित डॉक्टर्स से समन्वय स्थापित करवाएंगे। छात्र फैमिली डॉक्टर की पूरी भूमिका निभाएंगे। </p>
<p><strong>25 छात्रों पर एक प्रोफेसर को बनाया मेंटर </strong><br />मेडिकल कॉलेज में चीफ एकेडमिक ॉफिसर डॉ. दीपिका मित्तल ने बताया कि 25 एमबीबीएस छात्रों पर 1 प्रोफेसर को मेंटर नियुक्त किया है। स्टूडेंट्स को दवा या इलाज नहीं बल्कि कॉमन सलाह देने के लिए कहा गया है। बड़ी समस्या होने पर स्टूडेंट्स अपने मेंटर से बात कर उन्हें उचित सलाह दे सकते हैं। जैसे, परिवार के किसी सदस्य को कोई बीमारी है तो उसे किस डॉक्टर को दिखाना है, संबंधित डॉक्टर से मरीज का अपॉइमेंट फिक्स करना, दवाइयां समझाना, जांचें करवाने सहित अन्य मदद कर सकते हैं। इसके अलावा बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में भी मदद कर सकते हैं।   </p>
<p><strong>परिवार की हेल्थ हिस्ट्री रखेंगे स्टूडेंट्स</strong><br />शहर और नजदीक गांव के परिवार को उनकी सहमति के बाद ही फैमिली एडोप्शन कार्यक्रम में जोड़ते हैं। ताकि, कभी स्टूडेंट्स चाहे तो उनके घर जाकर भी परिवार की हेल्थ स्थिति देख सकता है। परिवार की पूरी हेल्थ हिस्ट्री, सभी के मोबाइल नंबर स्टूडेंट्स के पास होते हैं। देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए स्टूडेंट्स को जहां एक फैमिली मिलती है। वहीं, मेडिकल हॉस्पिटल आने वाले परिवार को अपना फैमिली डॉक्टर मिलता है। इससे स्टूडेंट्स और मरीजों के बीच कम्यूनिकेशन बेहतर होगा। वहीं, फैमिली में हेल्थ को लेकर कोई प्रोब्लम हो तो स्टूडेंट्स के पास पूरी जानकारी होती है। सभी मेंबर्स के नंबर होते हैं। \</p>
<p><strong>गांवों के लिए तैयार हो सकेंगे डॉक्टर्स</strong><br />ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की भारी कमी है, जिसे दूर करने के लिए समय-समय पर प्रयास किए गए लेकिन सफल नहीं हुए।  मेडिकल छात्र यदि कोर्स के दौरान ही ग्रामीण परिवारों के सम्पर्क में रहेंगे तो वह गांवों की जरूरतों को समझ सकेंगे और भविष्य में गांवों में तैनाती के लिए भी तैयार हो सकेंगे। इसके अलावा छात्र परिवार के बच्चों का वजन, स्वास्थ्य देखेंगे। वहीं, परिवार की महिलाओं व पुरुषों के ब्लड प्रेशर, शुगर, बुखार समेत अन्य दिक्कतों को जानकर उनका समाधान कराएंगे। हालत गंभीर होने पर रेफर करवाने से अस्पताल में भर्ती करवाने तक इलाज में हरसंभव मदद करेंगे।  </p>
<p><strong>पूछे जाएंगे कार्यक्रम से संबंधित प्रश्न </strong><br />फैमिली एडोप्शन कार्यक्रम से विद्यार्थी ने क्या सीखा। इससे संबंधित प्रश्न परीक्षा में पूछे जाएंगे। जिसमें सही जवाब देने पर 10 अंकों में से विद्यार्थियों को नंबर मिलेंगे। अगले वर्ष 20 अंकों के प्रश्न परीक्षा में आएंगे।  </p>
<p><strong>ढाई हजार परिवार का किया सर्वे</strong><br />डॉ. मित्तल के अनुसार, नेशनल मेडिकल कमीशन ने यह कॉन्सेप्ट वर्ष 2021 में शुरू किया था। लेकिन कोराना की वजह से स्टूडेंट्स को फैमिली गोद नहीं दी गई थी और न ही सर्वे हो सका। ऐसे में वर्ष 2022 में मेडिकल कॉलेज के शिक्षकों, स्टूडेंट्स और आशा सहयोगिनयों की मदद से हॉस्पिटल के सामने वाली बस्ती का सर्वे करवाया। वहां लोगों को इस कार्यक्रम की जानकारी दी। इसके बाद परिवारों की स्वीकृति मिलने पर प्रत्येक विद्यार्थियों को परिवार गोद दिए गए।  </p>
<p><strong>क्या कहते हैं स्टूडेंट</strong><br />पांच परिवारों की जिम्मेदारी उठाने का मौका मिला है। यह एक चुनौती के तौर पर लिया है। प्रयास है कि गोद लिए परिवार के सभी सदस्यों को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभा सकें।  हमारी पूरी कोशिश है कि कॉलेज ने जो जिम्मा सौंपा है, उस पर खरे उतरने का पूरा प्रयास करेंगे। <br /><strong>-सुमित शर्मा, स्टूडेंट, प्रथम वर्ष </strong></p>
<p>मुझे पांच परिवारों के स्वास्थय का जिम्मा मिला है, जिसे पूरी ईमानदारी से निभाऊंगा। फैमिली एडोप्शन पॉलिसी से हमें लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझने का अवसर मिला है। उनके दुख-तकलीफ को समझेंगे, तभी डॉक्टर बनने के बाद उनके साथ सहानुभूतिपूर्वक व्यवहार कर सकेंगे। <br /><strong>-मनोहर मेहता, स्टूडेंट प्रथम वर्ष</strong></p>
<p>कोटा में मुझे फैमिली मिली है। जिनके स्वास्थ्य का ख्याल रखना हमारा कर्त्तव्य होगा। हमारी क्लिनिकल ट्रैनिंग मजबूत होने के साथ सहयोग की भावना विकसित होगी। पढ़ाई के साथ नई-नई बीमारियां जानने-समझने का मौका मिलेगा। वहीं, रिसर्च का दायरा भी बढ़ेगा। इस कार्यक्रम से डॉक्टर व मरीज के बीच रिश्ता सुधरेगा। <br /><strong>-आरनव चावला, स्टूडेंट, प्रथम वर्ष </strong></p>
<p><strong>मरीज और डॉक्टर्स के बीच कायम होगा रिश्ता</strong><br />फैमिली एडॉप्शन यूनिक कार्यक्रम है। जिसका उद्देश्य मरीज और डॉक्टर के बीच कम्युनिकेशन गेप खत्म करना है। इस पॉलिसी से मरीज और डॉक्टर्स दोनों को ही फायदा हो रहा हैं। मरीज जहां खुलकर स्टूडेंट्स को अपनी समस्याएं व  बीमारियों के बारे में बता सकेंगे। वहीं, स्टूडेंट्स पढ़ाई के साथ स्थानीय बीमारियों के बारे में जान सकेंगे। साथ ही संबंधित बिमारियों के बारे में पढ़ने की रूची पैदा होगी, जिससे उनकी स्किल और नॉलेज डवलप होगी। <br /><strong>-डॉ. दीपिका मित्तल, चीफ एकेडमिक आॉफिसर, मेडिकल कॉलेज कोटा  </strong></p>
<p><strong>समाज के प्रति बनेंगे जिम्मेदारी </strong><br />स्टूडेंट्स तीन साल पढ़ाई के साथ अपने-अपने परिवार के मेम्बर्स के व्यवहार, बीमारियां, रहन-सहन सहित स्वास्थ्य से जुड़े सभी मुद्दों का अध्ययन कर उनकी समस्याओं का समाधान करवाएंगे। इससे स्टूडेंट्स में समाज के प्रति जिम्मेदारी के गुण विकसित होंगे। वहीं, लोगों को  स्टूडेंट्स के रूप में मददगार मिल सकेगा। भविष्य में मरीज और डॉक्टर्स के बीच टकराव की स्थिति खत्म करने में फैमिली एडोप्शन कार्यक्रम कारगर साबित होगा। <br /><strong>-डॉ. संगीता सक्सेना, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Mar 2023 18:41:41 +0530</pubDate>
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                <title>मेडिकल शिक्षा के ढांचे में बदलाव जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक विसंगति और है। देश के उत्तरी राज्यों में आबादी अधिक है, उसके अनुरूप चिकित्सा शिक्षा के संस्थान कम हैं। इससे उलट कम आबादी वाले दक्षिणी राज्यों में 48 फीसदी चिकित्सा शिक्षण संस्थान हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/need-to-change-structure-of-medical-education/article-5751"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/doctor-logo-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक विसंगति और है। देश के उत्तरी राज्यों में आबादी अधिक है, उसके अनुरूप चिकित्सा शिक्षा के संस्थान कम हैं। इससे उलट कम आबादी वाले दक्षिणी राज्यों में 48 फीसदी चिकित्सा शिक्षण संस्थान हैं। फिर देश में मौजूदा आरक्षण व्यवस्था की वजह से आधी से अधिक सीटें भर जाती हैं। ऐसे में नब्बे फीसदी से अधिक अंक पाने वाले प्रतिभाशाली छात्रों का निराश होना स्वाभाविक है। क्रेन-रूस के बीच चल रहा युद्ध अभी थमने का नाम नहीं ले रहा। कीव, खारकीव, पिसोचिन, सूमी आदि क्षेत्रों में फंसे भारतीय नागरिकों एवं मेडिकल छात्रों की सुरक्षित स्वदेश वापसी के प्रयास जारी हैं। युद्ध जनित चिंताओं और चुनौतियों बीच, हमारे देश के समक्ष मेडिकल शिक्षा के मौजूदा बुनियादी ढांचे में सुधार की जरूरतों ने भी अपनी ओर ध्यान खींचा है। जिन पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, चिकित्सा आयोग और नीति आयोग को मिलकर गौर करना चाहिए। भले ही फारेन मेडिकल ग्रेजुएट लाइसेंसिंग एक्ट में संशोधन ही क्यों ना करना पड़े। युद्ध की वजह से यूक्रेन से लौटे बीस हजार से अधिक मेडिकल छात्रों के सामने अपनी पढ़ाई जारी रखने का संकट उठ खड़ा हुआ है। इस क्रम में सरकार की यह घोषणा स्वागत योग्य है कि उसने मेडिकल छात्रों से इंटर्नशिप के लिए कोई शुल्क नहीं लेने और इस दौरान उन्हें नियमानुसार भत्ते देने का फैसला लिया है। लेकिन अभी जिनकी पढ़ाई अधूरी है, उनका समय बेकार ना चला जाए, उनके बारे में कोई फैसला नहीं लिया गया है। जो कि अपेक्षित है। इस मामले में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि वह ऐसे मेडिकल छात्रों की शिक्षा को जारी रखने के लिए देश के मेडिकल कॉलेजों में अतिरिक्त सीटों और परीक्षाएं कराने के वैकल्पिक इंतजाम करें। इस क्रम में कोरोना महामारी दौरान चीन से अपनी मेडिकल पढ़ाई बीच में छोड़कर स्वदेश आए उन छात्रों के बारे में भी कोई फैसला लेना चाहिए जिन्हें चीन सरकार ने अपने यहां आने की अनुमति अब तक नहीं दी है।</p>
<p>थोड़ी चर्चा, देश के मौजूदा चिकित्सा शिक्षा के ढांचे पर गौर कर लें। देश को आजाद हुए सत्तर साल से अधिक हो गए। आबादी बढ़ने के साथ-साथ हमारे यहां भी चिकित्सा शिक्षा और चिकित्सालयों और चिकित्सकों की मांग भी बढ़ गई। लेकिन इसके अनुपात में बुनियादी ढांचे में अपेक्षित बदलाव नहीं लाया जा सका है। इस पर सरकार का नियंत्रण होना चाहिए था। लेकिन उलटा हो रहा है। इस क्षेत्र को मुनाफे का सौदा बनाने में नेताओं, पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों एवं समृद्ध तबके से जुड़े लोगों ने ऐसा समानांतर तंत्र विकसित कर लिया जिसके तय मापदंडों के अनुसार सरकार को ही नीति बनाने पर विवश कर दिया है। आज पहली जरूरत मेडिकल शिक्षा को इस माफिया से मुक्ति दिलाने की है। ताकि इस देश में मध्यम और गरीब तबके के प्रतिभाशाली छात्र सस्ती मेडिकल शिक्षा हासिल कर सकें। देश से प्रतिभा पलायन और पूंजी के बाहर जाने पर रोक लग सके।</p>
<p>चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक विसंगति और है। देश के उत्तरी राज्यों में आबादी अधिक है, उसके अनुरूप चिकित्सा शिक्षा के संस्थान कम हैं। इससे उलट कम आबादी वाले दक्षिणी राज्यों में अड़तालीस फीसदी चिकित्सा शिक्षण संस्थान हैं। फिर देश में मौजूदा आरक्षण व्यवस्था की वजह से आधी से अधिक सीटें भर जाती हैं। ऐसे में नब्बे फीसदी से अधिक अंक पाने वाले प्रतिभाशाली छात्रों का निराश होना स्वाभाविक है। ऐसे में उनका विदेशों में जाकर मेडिकल शिक्षा ग्रहण करने की विवशता भी एक बड़ा कारण है। यही मुख्य वजह है कि आज यूक्रेन में मेडिकल शिक्षा के लिए उत्तर  भारत के बिहार, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, झारखंड, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल जैसे हिंदी प्रांतों के छात्र अधिक जा रहे हैं। राजस्थान से औसतन हर साल ढाई हजार छात्र विदेश जाते हैं इनमें से यूक्रेन जाने वालों की संख्या एक हजार है। यूक्रेन में ही नहीं, रूस, चीन, कजाकिस्तान सहित मध्य एशियाई देशों में भी छात्र पढ़ने जा रहे हैं।</p>
<p>वर्ष 2021 के सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में कुल 595 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। इनमें 302 सरकारी और 218 निजी मेडिकल कॉलेज हैं। 47 डीम्ड विश्वविद्यालय, तीन केंद्रीय विश्वविद्यालय, 19 एम्स मेडिकल इंस्टीट्यूट्स हैं। इनमें 83 हजार 125 एमबीबीएस, 26 हजार 949 बीडीएस, 52 हजार 720 आयुष, 525 बीवीएससी एंड एच सीट, 542 और 313 मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में सीट हैं। राजस्थान में अभी 26 सरकारी और प्राइवेट मेडिकल कॉलेज हैं। इनमें 15 सरकारी और 9 निजी, एक ईएसआई मेडिकल कॉलेज अलवर व जोधपुर में एम्स मेडिकल कॉलेज है। इनमें कुल 4 हजार 7 सौ पांच सीटें हैं। 15 और सरकारी मेडिकल कॉलेज सरकार के स्तर पर निर्माणाधीन हैं। तीन जिलों प्रतापगढ़, जालोर और राजसमंद में कॉलेज नहीं हैं। हर साल राजस्थान में ही एक लाख सोलह हजार पांच सौ तेरह छात्र परीक्षा देते हैं।</p>
<p>सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रति छात्र दो लाख रुपये प्रति वर्ष फीस है। वहीं निजी कॉलेजों में यह फीस प्रतिवर्ष दस से बीस लाख रुपये लगती है। यानी डॉक्टर बनने के लिए पचास लाख से लेकर पिचहत्तर लाख रुपये खर्च करने पड़ते हैं। जबकि विदेशों में यह फीस पचीस लाख में पूरी हो जाती है। इसमें पढ़ाई के साथ आवास और खाना-पीना भी शामिल है। फिर इन देशों में बारहवीं परीक्षा के प्राप्त अंकों के आधार पर, बिना कोई प्रतिस्पर्धी परीक्षा के प्रवेश मिल जाता है।<br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 09 Mar 2022 10:39:38 +0530</pubDate>
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