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                <title>digital payment - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>सीबीएसई ने प्रैक्टिकल परीक्षाओं के लिए शुरू किया इंटीग्रेटेड पेमेंट सिस्टम, </title>
                                    <description><![CDATA[केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 2026 की प्रयोगात्मक परीक्षाओं के लिए इंटीग्रेटेड पेमेंट सिस्टम (IPS) शुरू किया है। बोर्ड ने परीक्षकों के पारिश्रमिक और परिवहन दरों में संशोधन किया है। स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि वे डेटा फ्रीज करने से पहले बैंक विवरण की समीक्षा करें ताकि भुगतान में देरी न हो।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/cbse-starts-integrated-payment-system-for-practical-examinations/article-147059"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/cbsc.png" alt=""></a><br /><p>अजमेर। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने 2026 की प्रैक्टिकल परीक्षाओं के लिए स्कूलों, पर्यवेक्षकों और बाहरी परीक्षकों को भुगतान करने के लिए एकीकृत भुगतान प्रणाली यानी इंटीग्रेटेड पेमेंट सिस्टम शुरू किया है। बोर्ड के परीक्षा नियंत्रक डॉक्टर संयम भारद्वाज के अनुसार प्रैक्टिकल परीक्षाओं के लिए कार्मिकों के पारिश्रमिक, परिवहन, जलपान और अन्य संबंधित खचों की दरों में इस बार संशोधन किया है। ये दरें बोर्ड परीक्षा 2026 से लागू होंगी। बोर्ड ने सभी स्कूलों से अनुरोध किया है कि वे आवश्यक डेटा प्रतिष्टि पूरी करें और अपने डेटा को फ्रीज करें ताकि विभिन्न कार्मिकों को भुगतान तुरंत जारी किया जा सके।</p>
<p>बोर्ड ने स्कूलों से कहा है कि यह सुनिश्चित करें कि बैंक खाता विवरण सही ढंग से दर्ज किए गए हैं। इधर प्रभानाचायों को कहा है कि  इंटीग्रेटेड पेमेंट सिस्टम पोर्टल पर डेटा को अंतिम रूप देने और फ्रीज करने से पहले व्यक्तिगत रूप से उसकी समीक्षा करे ताकि बाद में किसी भी प्रकार की  असुविधा से बचा जा सके । उल्लेखनीय है कि बोर्ड, प्रैक्टिकल परीक्षा में विभिन्न कार्मिकों की ड्यूटी लगाता है और बाद में उसका उन्हें भुगतान किया जाता है। इसके लिए कुछ साल पहले ही बोर्ड ने ऑनलाइन सिस्टम इंटीग्रेटेड पेमेंट सिस्टम को लांच किया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 18:10:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कमजोर पड़ रही नकली नोटों की साजिश</title>
                                    <description><![CDATA[आरबीआई द्वारा जारी एक चौंकाने वाली रिपोर्ट ने न केवल अर्थव्यवस्था को, बल्कि राष्ट्र की सुरक्षा और नागरिकों की जागरूकता को भी झकझोर कर रख दिया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/conspiracy-for-fake-notes-weakening/article-120637"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/8842roer26.png" alt=""></a><br /><p>भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा हाल ही में जारी एक चौंकाने वाली रिपोर्ट ने न केवल अर्थव्यवस्था को, बल्कि राष्ट्र की सुरक्षा और नागरिकों की जागरूकता को भी झकझोर कर रख दिया है। आरबीआई के गवर्नर द्वारा संसदीय समिति में प्रस्तुत एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024-25 में 500 रूपये के लगभग 1.8 लाख नोट नकली पाए गए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 37 प्रतिशत अधिक हैं। यह संख्या किसी सामान्य अपराध की नहीं, बल्कि राष्ट्र के विरुद्ध एक षड्यंत्र की कहानी कहती है। जो यह दर्शाता है कि कालाबाजारी करने वाले राष्ट्र विरोधी तत्व देश में मुद्रा की मांग का गलत फायदा उठा रहे हैं। विडंबना यह है कि राजस्व खुफिया निदेशालय द्वारा नोट में इस्तेमाल होने वाले आयातित कागज और नकली नोट छापने में शामिल ऑपरेटरों पर लगातार कार्रवाई के बावजूद यह गंभीर समस्या बनी हुई है। यह न केवल नकली मुद्रा के बढ़ते खतरे को रेखांकित करता है, बल्कि राष्ट्र विरोधी तंत्र की सुनियोजित साजिश का भी पर्दापाश करता है। जबकि 2016 में नोटबंदी के ऐतिहासिक निर्णय के साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यह स्पष्ट कर दिया था कि भ्रष्टाचार, कालेधन और नकली नोटों के खिलाफ लड़ाई उनकी प्राथमिकताओं में है। नोटबंदी केवल एक आर्थिक सुधार नहीं, बल्कि डिजिटल अर्थव्यवस्था की नींव रखने वाला साहसी एवं युगांतरकारी कदम था।</p>
<p><strong>नकली मुद्रा के खिलाफ :</strong></p>
<p>आज भारत को सिर्फ बाहरी सीमाओं पर नहीं, बल्कि आर्थिक मोर्चे पर भी एक युद्ध लड़ना पड़ रहा है, नकली मुद्रा के खिलाफ, भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ और राष्ट्रविरोधी मानसिकता के खिलाफ इसमें विजय तभी संभव है, जब हम सब डिजिटल भारत के निर्माण में सहभागी बनें। नकली मुद्रा का मुद्दा केवल एक आर्थिक अपराध नहीं है। यह एक प्रकार का आर्थिक आतंकवाद है, जिसका उद्देश्य भारत की अर्थव्यवस्था को अस्थिर करना, महंगाई को बढ़ाना, काले धन को बढ़ावा देना और आतंकवाद को वित्त पोषण देना है। ये नकली नोट अधिकतर सीमापार से संचालित तंत्रों द्वारा भारत में भेजे जाते हैं, जो भारत की राजनीतिक स्थिरता, आर्थिक विकास और आंतरिक सुरक्षा को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं।</p>
<p><strong>राष्ट्र के विरुद्ध षड़यंत्र :</strong></p>
<p>इस तरह राष्ट्र के विरुद्ध षड़यंत्र, साजिश एवं बड़े खतरों को अंजाम दिया जा रहा है। क्योंकि नकली नोट बाजार में असली नोटों के साथ मिलकर मुद्रा व्यवस्था को प्रभावित करते हैं। आम नागरिक अनजाने में इन्हें ले लेता है और आर्थिक नुकसान उठाता है। यह काले धन और आतंकवाद को पोषित करता है। नकली नोट सरकारी योजनाओं की निष्पक्षता और वितरण प्रणाली को भी प्रभावित करते हैं। प्रधानमंत्री मोदी की डिजिटल क्रांति न केवल नकली नोटों को नियंत्रित करने का बल्कि राष्ट्र-विरोधी तत्वों को नेस्तनाबूद करने का सशक्त माध्यम है। यह मोदी की दूरदृष्टि एवं नए भारत-विकसित भारत के विजन की विजय है, उनके ही विचारों में डिजिटल लेन-देन केवल तकनीक नहीं, यह राष्ट्र निर्माण का माध्यम है। आज के भारत की अर्थव्यवस्था एक निर्णायक दौर से गुजर रही है। डिजिटल ग्राम योजना, ई-गवर्नेंस, डिजिटल साक्षरता अभियान यानी तकनीक को गांव और गरीब तक पहुंचाने की पहल है।</p>
<p><strong>सुरक्षा को चुनौती :</strong></p>
<p>एक ओर प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश डिजिटल इंडिया की ओर तेजी से बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर नकली नोटों की बाढ़ एक अदृश्य आतंकवाद बनकर देश की अर्थव्यवस्था, समाज और सुरक्षा को चुनौती दे रही है। निस्संदेह, हाल के वर्षों में, भारत ने नकली नोटों की कालाबाजारी पर अंकुश लगाने व काले धन पर रोक के लिए डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने के लिए अपनी स्थिति खासी मजबूत की है। सरकार की सोच है कि काले धन पर रोक लगाने के लिए नगद लेन-देन को हतोत्साहित किया जाए। इस संकट की घड़ी में डिजिटल लेन-देन एक बड़ी राहत और समाधान बनकर उभरा है। यूपीआई, भीम मोबाइल वॉलेट्स, नेट बैंकिंग और कार्ड पेमेंट्स जैसे साधन नकली नोटों की समस्या को जड़ से समाप्त करने में सहायक हो सकते हैं। डिजिटल लेन-देन के लाभ ही लाभ है, पूर्ण पारदर्शिता यानी हर लेन-देन का डिजिटल रिकॉर्ड होता है, जिससे भ्रष्टाचार में कमी आती है।</p>
<p><strong>डिजिटल लेन-देन :</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने हर मंच पर डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने की बात कही है। उन्होंने गांव-गांव जाकर लोगों को मोबाइल बैंकिंग, क्यूआर कोड, और कार्ड से भुगतान की शिक्षा देने की मुहिम चलाई है। इसका असर यह है कि आज भारत यूपीआई ट्रांजैक्शन में दुनिया में नंबर 1 है। डिजिटल इंडिया गरीब को ताकत देता है, मिडल क्लास को सुविधा देता है और राष्ट्र को मजबूती देता है। भारत की असली शक्ति अब डिजिटल प्रचलन बन रही है, जहां एक बटन से करोड़ों का ट्रांजैक्शन सुरक्षित होता है। मोदी की डिजिटल क्रांति ने भारत को इक्कीसवीं सदी की आर्थिक महाशक्ति बनने की दिशा में मजबूत आधार दे दिया है। हम सबकी जिम्मेदारी है कि इस डिजिटल युद्ध में सहभागी बनें।</p>
<p><strong>तमाम बाधाएं विद्यमान :</strong></p>
<p>नकदी रहित अर्थव्यवस्था का सरकारी महत्वाकांक्षी लक्ष्य हासिल करने के मार्ग में अभी तमाम बाधाएं विद्यमान है। यह और भी बड़ी चिंता की बात है कि नोटबंदी के आठ साल बाद भी रियल एस्टेट क्षेत्र में काले धन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल बना हुआ है। निस्संदेह, डिजिटल युग में भी ‘नकदी ही राजा है’ मानने वालों को रोकने के लिए जांच और कानूनों को सख्ती से लागू करने की जरूरत है। साथ ही इस दिशा में भी गंभीरता से विचार करना चाहिए कि भारतीय अर्थव्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश में लगी विदेशी ताकतों की नकली करेंसी के प्रसार में कितनी बड़ी भूमिका है।</p>
<p><strong>- ललित गर्ग</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Jul 2025 11:45:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डिजिटल भुगतान की क्रांति का जनक ‘यूपीआई’</title>
                                    <description><![CDATA[वॉलमार्ट द्वारा फोनपे और गूगल द्वारा गूगल पे का विदेशी स्वामित्व व्यक्तिगत वित्तीय डेटा की सुरक्षा और विदेशी संस्थाओं द्वारा अनाधिकृत पहुंच की संभावना पर चिंताएं बढ़ाता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/upi-the-father-of-digital-payment-revolution/article-99877"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/6622-copy19.jpg" alt=""></a><br /><p>फोनपे और गूगल पे की बाजार में जबरदस्त मौजूदगी ने पेटीएम जैसे छोटे प्रतिस्पर्धियों के लिए विकास करना और बाजार में अभिनव समाधान लाना मुश्किल बना दिया है, जिससे संभावित प्रगति रुक गई है। विदेशी स्वामित्व वाले टीपीएपी का प्रभुत्व डेटा सुरक्षा, उपयोगकर्ता गोपनीयता और भारतीय नागरिकों की संवेदनशील वित्तीय जानकारी से संबंधित जोखिम पेश करता है। वॉलमार्ट द्वारा फोनपे और गूगल द्वारा गूगल पे का विदेशी स्वामित्व व्यक्तिगत वित्तीय डेटा की सुरक्षा और विदेशी संस्थाओं द्वारा अनाधिकृत पहुंच की संभावना पर चिंताएं बढ़ाता है। भारत में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) का उदय परिवर्तनकारी रहा है, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ  इंडिया के अनुसार वित्त वर्ष 2023-24 में यूपीआई लेनदेन 11.5 बिलियन से अधिक हो गए, जिनका मूल्य 26.9 लाख करोड़ था। यूपीआई के उदय ने व्यापक रूप से भारत में डिजिटल भुगतान में क्रांति ला दी है। भारत में सभी डिजिटल लेनदेन का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा यूपीआई का है, जिसने भुगतान परिदृश्य को बदल दिया है। अगस्त 2024 में यूपीआई ने  20.60 लाख करोड़ से अधिक के लेनदेन संसाधित किए, जो भारत के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में इसके व्यापक उपयोग और अपनाने को दर्शाता है। यूपीआई उपयोगकर्ताओं के लिए शून्य शुल्क प्रदान करता है, जिससे भारत की आर्थिक रूप से विविध आबादी के लिए डिजिटल लेनदेन किफायती और अत्यधिक सुलभ हो जाता है। यूपीआई का लागत मुक्त मॉडल ग्रामीण क्षेत्रों में व्यक्तियों को बिना किसी चिंता के डिजिटल भुगतान प्रणाली तक स्वतंत्र रूप से पहुंचने और उसका उपयोग करने की अनुमति देता है। </p>
<p>यूपीआई ने डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के लिए एक आसान लागत प्रभावी और स्केलेबल तरीका प्रदान करके छोटे विक्रेताओं, व्यवसायों और उद्यमियों को महत्वपूर्ण रूप से सशक्त बनाया है। भारत भर में स्ट्रीट वेंडर, छोटे व्यापारी और किराना स्टोर अब डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के लिए यूपीआई का उपयोग करते हैं। यूपीआई ने पहले से बैंकिंग सेवाओं से वंचित आबादी को औपचारिक वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र में प्रभावी रूप से लाकर वित्तीय समावेशन को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। लाखों ग्रामीण और वंचित भारतीय यूपीआई के माध्यम से महत्वपूर्ण डिजिटल वित्तीय सेवाओं तक पहुंचने में सक्षम हुए हैं, जिससे ऐतिहासिक रूप से कम बैंकिंग पहुंच वाले क्षेत्रों में अधिक आर्थिक भागीदारी को बढ़ावा मिला है। यूपीआई ने सरकारी सेवाओं के साथ एकीकृत सुरक्षित, विश्वसनीय और सुविधाजनक प्लेटफॉर्म प्रदान करके डिजिटल भुगतान में महत्वपूर्ण सार्वजनिक विश्वास विकसित किया है। दो थर्ड पार्टी ऐप प्रदाताओं के बीच बाजार एकाग्रता महत्वपूर्ण जोखिम पैदा करती है। कुछ खिलाड़ियों की उच्च बाजार एकाग्रता महत्वपूर्ण प्रणालीगत जोखिम पैदा करती है, जहां सेवाओं में किसी भी व्यवधान का पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर व्यापक प्रभाव हो सकता है। उदाहरण के लिए अगर फोनपे या गूगल पे में अचानक कोई तकनीकी खराबी आ जाती है, तो इससे 80 प्रतिशत तक यूपीआई लेनदेन बाधित हो सकता है,  जिससे राष्टÑीय स्तर पर व्यवधान और घबराहट पैदा हो सकती है। </p>
<p>केवल दो प्रमुख खिलाड़ियों के वर्चस्व वाला बाजार स्वस्थ प्रतिस्पर्धा में बाधा डालता है, उभरते बाजार में प्रवेश करने वालों द्वारा नवाचार और नई सुविधाओं या भुगतान सेवाओं के विकास को हतोत्साहित करता है। फोनपे और गूगल पे की बाजार में जबरदस्त मौजूदगी ने पेटीएम जैसे छोटे प्रतिस्पर्धियों के लिए विकास करना और बाजार में अभिनव समाधान लाना मुश्किल बना दिया है, जिससे संभावित प्रगति रुक गई है। विदेशी स्वामित्व वाले टीपीएपी का प्रभुत्व डेटा सुरक्षा, उपयोगकर्ता गोपनीयता और भारतीय नागरिकों की संवेदनशील वित्तीय जानकारी संबंधित जोखिम पेश करता है। फोनपे और गूगल द्वारा गूगल पे का विदेशी स्वामित्व व्यक्तिगत वित्तीय डेटा की सुरक्षा पर चिंताएं बढ़ाता है। फोनपे और गूगल पे का प्रभुत्व क्षेत्रीय जरूरतों या प्राथमिकताओं को अनदेखा कर सकता है, जिससे स्थानीय समाधानों के लिए गति प्राप्त करना मुश्किल हो जाता है। क्षेत्रीय भाषाओं या स्थानीय व्यावसायिक जरूरतों के लिए तैयार किए गए यूपीआई ऐप अक्सर गूगल पे और फोनपे जैसे स्थापित बाजार नेताओं के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए संघर्ष करते हैं।</p>
<p> प्रमुख पेटीएम और एक्सिस बैंक थर्ड पार्टी एप्लिकेशन प्रोवाइडर के लिए बाजार हिस्सेदारी पर सीमा निर्धारित करने से बेहतर प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित हो सकती है और प्रणालीगत जोखिम कम हो सकते हैं। फोनपे और गूगल पे की बाजार हिस्सेदारी को 30 प्रतिशत तक सीमित करने के भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम के पहले के प्रयास बाजार प्रभुत्व को संतुलित कर सकते हैं। भारतीय स्वामित्व वाले पेटीएम और एक्सिस बैंक थर्ड पार्टी एप्लिकेशन प्रोवाइडर का समर्थन करने से विदेशी खिलाड़ियों पर निर्भरता कम हो सकती है और नियामक निगरानी में सुधार हो सकता है। स्थानीय ऐप या सार्वजनिक निजी भागीदारी के लिए फंडिंग जैसी पहल भारतीय पेटीएम और एक्सिस बैंक थर्ड पार्टी एप्लिकेशन प्रोवाइडर को अधिक प्रभावी ढंग से प्रतिस्पर्धा करने में मदद कर सकती है।</p>
<p><strong>- डॉ. सत्यवान सौरभ </strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jan 2025 11:16:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Jan Dhan Yojna के 9 साल पर बोली वित्त मंत्री- डिजिटल बदलाव से वित्तीय समावेशन में आयी क्रांति</title>
                                    <description><![CDATA[रधानमंत्री जन धन योजना के राष्ट्रीय मिशन के सफल कार्यान्वयन के आज नौ साल पूरे हो गए हैं और अब इस मिशन के तहत 50 करोड़ से अधिक खाते खुले हैं जिनमें 2.03 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/jan-dhan-yojna-revolution-in-financial-inclusion-through-digital-transformation/article-55664"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/nirmala-sitharaman.jpg-2.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सभी देशवासियों विशेषकर बैंकिंग सेवायें से वंचितों को वित्तीय तंत्र की मुख्य धारा में शामिल करने और वित्तीय समावेशन को गति देने के उद्देश्य से शुरू की गयी प्रधानमंत्री जन धन योजना के राष्ट्रीय मिशन के सफल कार्यान्वयन के आज नौ साल पूरे हो गए हैं और अब इस मिशन के तहत 50 करोड़ से अधिक खाते खुले हैं जिनमें 2.03 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा है।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त 2014 को लाल किले की प्राचीर से इस योजना की घोषणा की थी और 28 अगस्त 2014 को इसकी शुरूआत की गयी। इस योजना के नौ वर्ष पूर्ण होने के मौके पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि पीएमजेडीवाई की अगुवाई में ठोस उपायों के 9 साल के महत्वपूर्ण दौर और डिजिटल बदलाव ने भारत में वित्तीय समावेशन में क्रांति ला दी है। यह अत्यंत प्रसन्नता की बात है कि जन धन खाते खोलकर 50 करोड़ से भी अधिक लोगों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली में लाया गया है। इन खातों में से लगभग 55.5 प्रतिशत खाते महिलाओं के हैं, और 67 प्रतिशत खाते ग्रामीण/अर्ध-शहरी क्षेत्रों में खोले गए हैं। इन खातों में कुल जमा राशि बढ़कर 2 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक हो गई है। इसके अलावा, इन खातों के लिए लगभग 34 करोड़ रुपे कार्ड बिना शुल्क के जारी किए गए हैं, जिसके तहत 2 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा कवर भी प्रदान किया जाता है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि समस्त हितधारकों, बैंकों, बीमा कंपनियों और सरकारी अधिकारियों के आपसी सहयोग से पीएमजेडीवाई एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में उभर कर सामने आई है, जो देश में वित्तीय समावेशन के परिदृश्य को प्रधानमंत्री की पिरकल्पना के अनुरूप पूरी तरह से बदल रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 Aug 2023 11:39:53 +0530</pubDate>
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                <title>बिना इंटरनेट कनेक्शन के होगा डिजिटल भुगतान </title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने फीचर फोन के जरिए बिना इंटरनेट कनेक्शन के डिजिटल भुगतान की सुविधा शुरू की है। आरबीआई गवर्नर डॉ. शक्तिकांत दास ने यूपीआई123पे की इस सुविधा का उद्घाटन किया जिसके अंतर्गत ग्राहक तीन चरण के प्रक्रिया अपनाते हुए सुरक्षित तरीके से डिजिटल भुगतान कर सकते हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/digital-payment-will-be-without-internet/article-5762"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/rib-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने फीचर फोन के जरिए बिना इंटरनेट कनेक्शन के डिजिटल भुगतान की सुविधा शुरू की है। आरबीआई गवर्नर डॉ. शक्तिकांत दास ने यूपीआई123पे की इस सुविधा का उद्घाटन किया, जिसके अंतर्गत ग्राहक तीन चरण के प्रक्रिया अपनाते हुए सुरक्षित तरीके से डिजिटल भुगतान कर सकते हैं। इस सुविधा से देश में स्मार्ट फोन और समान्य फोन का उपयोग करने वाले ग्राहक डिजिटल लेन-देन की सुविधा के अवसर के मामले में बराबरी पर आ गए हैं। 40 करोड़ लोगों को डिजिटल भुगतान की सुविधा मिल सकती है जो अभी फीचर फोन का ही इस्तेमाल करते हैं। इस सफलता में यूपीआई की बड़ी भूमिका रही है, जिसमे फरवरी 2022 में 8.26 लाख करोड़ रुपए के 453 करोड़ सौदे हुए हैं। यह संख्या बीते वर्ष इसी माह की तुलना में दोगुनी है।</p>
<p><strong>100 लाख करोड़ का लक्ष्य</strong><br />सेवा एवं समाधान प्रदाताओं, एनपीसीआई(नेशनल पेमेंट््स कॉरपोरेशन आॅफ इंडिया) और रिजर्व बैंक के अपने साथियों के सहयोग से यूपीआई पर 100 लाख करोड़ रुपए के लेनदेन के लक्ष्य तक पहुंच चुके होंगे। भारत में 118 करोड़ मोबाइल फोनधारक हैं, इनमें से 74 प्रतिशत स्मार्ट फोन वाले हैं। स्मार्ट फोन रखने वाले इंटरनेट के जरिए विभिन्न प्रकार की डिजिटल सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं, जबकि फीचर फोन पर इसके विकल्प सीमित हैं।      ‘यूपीआई123पे’ में चार अलग-अलग तकनीके अपनायी गयी हैं। जिसमें आईवीआर (फोन से मौखिक निर्देश), एप जैसे कार्य, नजदीक से आवाज के आधार पर भुगतान और मिस्ड कॉल का तरीका शामिल है। <br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 09 Mar 2022 12:29:11 +0530</pubDate>
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