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                <title>Health News - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>राजस्थान में रोबोटिक सर्जरी का नया रिकॉर्ड, जयपुर के CK बिरला हॉस्पिटल ने पूरी की 700 सफल सर्जरी</title>
                                    <description><![CDATA[सीके बिरला हॉस्पिटल्स (आरबीएच), जयपुर 700 रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी सफलता पूर्वक करने वाला राजस्थान का पहला प्राइवेट हॉस्पिटल बन गया है। दा विंची सर्जिकल सिस्टम की मदद से यूरोलॉजी, गायनेकोलॉजी और जनरल सर्जरी के जटिल ऑपरेशनों को मिनिमली इन्वेसिव तकनीक से अंजाम दिया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/new-record-of-robotic-surgery-in-rajasthan-ck-birla-hospital/article-162785"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)13.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सीके बिरला हॉस्पिटल्स, (रुकमणि बिरला हॉस्पिटल), जयपुर राजस्थान में 700 रोबोटिक असिस्टेड सर्जरी करने वाला पहला प्राईवेट हॉस्पिटल बन गया है। यह उपलब्धि हॉस्पिटल में जनरल सर्जरी, ऑन्को-गायनेकोलॉजी, यूरोलॉजी और गैस्ट्रोइंटेस्टाईनल सर्जरी में पाँच प्रशिक्षित सर्जनों के साथ मल्टीडिसिप्लिनरी रोबोटिक सर्जरी टीम की मदद से मिली है, जिसमें डॉ. देवेंद्र शर्मा, डायरेक्टर, यूरोलॉजी एवं रीनल ट्रांसप्लांट, डॉ. सी.पी दधीच, डायरेक्टर, ऑब्सटेट्रिक्स एवं गायनेकोलॉजी और डॉ. राजेश शर्मा, डायरेक्टर, जनरल सर्जरी, मिनिमल एक्सेस और बेरियाट्रिक सर्जरी शामिल हैं।</p>
<p>इस हॉस्पिटल में अलग-अलग स्पेशियलिटीज में दा विंची सर्जिकल सिस्टम की मदद से रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी की जाती है, जिसमें किडनी कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, गायनेकोलॉजिकल कैंसर, एंड-स्टेज रीनल डिजीज और कॉम्प्लेक्स एब्डॉमिनल वॉल डिसऑर्डर जैसी कई समस्याओं के लिए मिनिमली इन्वेजिव सर्जरी शामिल है। पिछले सालों में इस सिस्टम का काफी विकास हुआ है और इसकी मदद से जटिल से जटिल मामलों को संभालना भी संभव हुआ है। इस सिस्टम ने राजस्थान और पड़ोसी क्षेत्रों के मरीजों के लिए आधुनिक सर्जिकल केयर की उपलब्धता बढ़ाई है। </p>
<p>रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम के बढ़ते उपयोग के बारे में डॉ. सी.पी दधीच, डायरेक्टर, ऑब्सटेट्रिक्स एवं गायनेकोलॉजी, सीके बिरला हॉस्पिटल्स, जयपुर ने कहा, ‘‘रोबोटिक असिस्टेड सर्जरी जटिल ऑपरेशन करने का तरीका बदल रही है। अब अलग-अलग स्पेशियलिटीज में सर्जन को बेहतर विज्युअलाईजेशन, प्रेसिजन और कंट्रोल मिलता है। गायनेकोलॉजी के क्षेत्र में इसने जटिल समस्याओं के लिए मिनिमिली इन्वेजिव सर्जरी का विस्तार किया है, जिससे मरीजों को ज्यादा तेज रिकवरी और बेहतर नतीजे प्राप्त करने में मदद मिली है। 700 रोबोटिक असिस्टेड सर्जरी पूरी होने से आधुनिक सर्जिकल टेक्नोलॉजी और बेहतर नतीजे देने की इसकी क्षमता में क्लिनिशियन और मरीजों का बढ़ता विश्वास प्रदर्शित होता है। </p>
<p>यह उपलब्धि विभिन्न स्पेशियलिटीज, जैसे गायनेकोलॉजिकल ऑन्कोलॉजी, यूरोलॉजी, रीनल ट्रांसप्लांटेशन और एडवांस्ड एब्डॉमिनल वॉल रिकॉन्सट्रक्शन में रोबोटिक असिस्टेड सर्जरी का योगदान प्रदर्शित करती है। हाल ही में हॉस्पिटल ने राजस्थान का पहला रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट और बायोरिजॉर्बेबल मेश की मदद से पहला रोबोटिक असिस्टेड ईटीईपी-आरएस (एक्सटेंडेड टोटली एक्स्ट्रापेरिटोनियल रेट्रोमस्कुलर सबले) हर्निया रिपेयर करके इस प्रोग्राम की बढ़ती क्लिनिकल क्षमताओं को उजागर किया है।</p>
<p>रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट एक 33 साल के मरीज का किया गया, जिन्हें एडवांस्ड किडनी डिजीज थी, जिसके कारण उन्हें नियमित तौर से हेमोडायलिसिस कराना पड़ता था। उन्हें उनकी माँ ने अपनी किडनी दी। डोनर किडनी की एनाटोमिकल बनावट काफी मुश्किल थी, जिसमें कई सारी नसें और यूरेटर शामिल थे। इसलिए ट्रांसप्लांट के लिए बहुत सतर्क योजना और सर्जिकल प्रेसिजन की जरूरत थी। यह सर्जरी एक छोटा सा चीरा लगाकर बहुत सटीकता से की गई। मरीज के शरीर में ग्राफ्ट ने बहुत जल्दी काम करना शुरू कर दिया और उन्हें पाँच दिनों में ही हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी गई।</p>
<p>डॉ. देवेंद्र शर्मा, डायरेक्टर - यूरोलॉजी एवं रीनल ट्रांसप्लांट, सीके बिरला हॉस्पिटल्स, जयपुर ने कहा, ‘‘किडनी ट्रांसप्लांट के हर मामले की अलग क्लिनिकल चुनौतियाँ होती हैं। इसलिए सबसे बेहतर नतीजे पाने के लिए सर्जरी का सबसे सही दृष्टिकोण चुनना बहुत जरूरी होता है। इस मरीज के मामले में डोनर किडनी की एनाटोमी में अंतर था। इसलिए बहुत सतर्क योजना और प्रेसिजन रखना बहुत जरूरी था। रोबोटिक प्लेटफॉर्म ने इस मुश्किल ट्रांसप्लांट के लिए जरूरी एक्युरेसी प्रदान की, जिससे मिनिमली इन्वेजिव प्रक्रिया संभव हो सकी। इस मामले से प्रदर्शित होता है कि मल्टीडिसिप्लिनरी टीम के सहयोग और एडवांस्ड सर्जिकल क्षमताओं द्वारा स्पेशियलाईज्ड ट्रांसप्लांट केयर की उपलब्धता बढ़ाई जा सकती है।’’</p>
<p>एक दूसरे मामले में सर्जिकल टीम ने राजस्थान का पहला रोबोटिक असिस्टेड ईटीईपी-आरएस हर्निया रिपेयर किया, जिसमें मरीज की एब्डॉमिनल वॉल के एक बड़े हिस्से के कमजोर हो जाने के कारण एक बायोरिजॉर्बेबल मेश का इस्तेमाल किया गया। इस तरीके की मदद से सर्जन बड़ा चीरा लगाए बिना ही एब्डॉमिनल वॉल को रिकॉन्स्ट्रक्ट करने और हर्निया रिपेयर करने में समर्थ बने। ऑपरेशन के बाद मरीज को बहुत कम दर्द हुआ और उन्होंने अच्छी रिकवरी की। सर्जरी के बाद 38 घंटों में ही उन्हें हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी गई।</p>
<p>डॉ. राजेश शर्मा, डायरेक्टर, जनरल सर्जरी, मिनिमल एक्सेस एवं बेरियाट्रिक सर्जरी, सीके बिरला हॉस्पिटल्स, जयपुर ने कहा, ‘‘एब्डॉमिनल वॉल का बड़ा हिस्सा कमजोर होने पर केवल साधारण हर्निया रिपेयर काफी नहीं होता है। इस तरह के मामलों में हमारा उद्देश्य मरीजों पर सर्जरी का कम से कम प्रभाव डाले बिना उन्हें शक्ति, कार्यक्षमता और लंबे समय तक स्वास्थ्य प्रदान करना होता है। ईटीईपी-आरएस तकनीक एब्डॉमिनल वॉल का एनाटोमिकल रिकॉन्स्ट्रक्शन और ऑप्टिमल मेश प्लेसमेंट संभव बनाती है, जिससे बेहतर नतीजे प्राप्त करने में मदद मिलती है। मरीजों में बायोरिजॉर्बेबल मेश के इस्तेमाल से व्यक्तिगत सर्जिकल केयर में सुधार होता है।’’</p>
<p>अर्पित जैन, यूनिट हेड, सीके बिरला हॉस्पिटल्स, जयपुर ने कहा, ‘‘700 रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी पूरी होने से हमारी टीमों द्वारा विभिन्न स्पेशियलिटीज में सालों की मेहनत से हासिल की गई क्लिनिकल विशेषज्ञता, सहयोग और प्रतिबद्धता प्रदर्शित होती है। इससे राजस्थान में एडवांस्ड सर्जिकल केयर की उपलब्धता बढ़ी है, जिससे मरीजों को उनके घर के नजदीक ही स्पेशियलाईज्ड ट्रीटमेंट मिल पाया है। हम अपनी क्षमताओं को मजबूत बनाने और यह सुनिश्चित करने पर केंद्रित हैं कि बेहतर सर्जिकल नतीजों और रिकवरी का लाभ ज्यादा से ज्यादा मरीजों तक पहुँचे।’’रोबोटिक असिस्टेड सर्जरी का जैसे-जैसे विकास हो रहा है, वैसे-वैसे सीके बिरला हॉस्पिटल क्लिनिकल विशेषज्ञता बढ़ाने, सर्जन के प्रशिक्षण में निवेश करने और मल्टीडिसिप्लिनरी सहयोग का विस्तार करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि एडवांस्ड मिनिमली इन्वेजिव केयर क्षेत्र में ज्यादा से ज्यादा मरीजों तक पहुँच सके।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 14:45:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>तंबाकू जनित कैंसर से राजस्थान में हर साल 77 हजार से ज्यादा मौतें</title>
                                    <description><![CDATA[ राजस्थान सहित देशभर में प्रतिवर्ष 13.5 लाख से अधिक लोग तंबाकू से होने वाली बीमारियों से दम तोड़ रहे हैं। इनमें अधिकतर संख्या युवाओं की है, जिसका मुख्य कारण मुंह व गले का कैंसर है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/more-than-77-thousand-deaths-every-year-in-rajasthan-due/article-52875"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/news-(7).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान सहित देशभर में प्रतिवर्ष 13.5 लाख से अधिक लोग तंबाकू से होने वाली बीमारियों से दम तोड़ रहे हैं। इनमें अधिकतर संख्या युवाओं की है, जिसका मुख्य कारण मुंह व गले का कैंसर है। वहीं राजस्थान में भी प्रतिवर्ष 77 हजार से अधिक मौतें तंबाकू जनित कैंसर से हो रही हैं। राजस्थान में वर्तमान में 24.7 प्रतिशत लोग (5 में से 2 पुरुष और 10 में से एक महिला यूजर) किसी न किसी रूप में तंबाकू उत्पादों का उपभोग करते है, जिसमें 13.2 प्रतिशत लोग धूम्रपान करते हैं, जिसमें 22 प्रतिशत पुरुष, 3.7 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं। यहां पर 14.1 प्रतिशत लोग चबाने वाले तंबाकू उत्पादों का प्रयोग करते हैं, जिसमें 22 प्रतिशत पुरुष व 5.8 प्रतिशत महिलाएं शामिल है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Jul 2023 10:35:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बारिश में संक्रामक बीमारियां होने का खतरा ज्यादा</title>
                                    <description><![CDATA[ कई अध्ययनों में पाया गया है कि सुबह खाली पेट गुनगुना पानी का सेवन करना सेहत के लिए बहुत लाभकारी हो सकता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/more-risk-of-infectious-diseases-in-rain/article-51832"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/black-futuristic-roadmap-your-story.png" alt=""></a><br /><p> इन दिनों तेज बारिश का दौर जारी है। बारिश के कारण तापमान में उतार-चढ़ाव भी देखा जा रहा है, इस तरह का मौसम कई बीमारियों के जोखिमों को बढ़ाने वाला हो सकता है। डॉक्टर कहते हैं, बारिश के दिनों में संक्रामक बीमारियों का खतरा अधिक होता है। जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, उन्हें मौसम में हो रहे बदलाव के कारण फ्लू जैसे संक्रमण का जोखिम हो सकता है।  सर्दी-जुकाम, बुखार के साथ गले में खराश, सिरदर्द की समस्याएं इन दिनों में अधिक देखी जाती रही हैं। इसके अलावा बारिश और नम वातावरण के कारण कई अन्य प्रकार की बैक्टीरियल-वायरल संक्रमण का भी खतरा हो सकता है। इन सबसे सुरक्षित रहने के लिए जरूरी है कि हम सभी अपनी इम्युनिटी को बढ़ावा देने वाले उपाय करें।  <br /><br />पिएं हल्का गुनगुना पानी : कई अध्ययनों में पाया गया है कि सुबह खाली पेट गुनगुना पानी का सेवन करना सेहत के लिए बहुत लाभकारी हो सकता है। गुनगुना पानी पीने से शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकलने में मदद मिलती है। इन दिनों में गुनगुना पानी का सबसे ज्यादा लाभ गले में संक्रमण के जोखिमों को दूर करने में है। गुनगुना पानी पीने से गला साफ रहता है और रोगजनकों के कारण होने वाले संक्रमण-दर्द की समस्या कम होती है। <br /><br />पेट की समस्या कम : सामान्य तापमान वाले पानी की तुलना में गुनगुना पानी पीने से पेट से हानिकारक विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में भी मदद मिलती है। यह आपके शरीर को डिटॉक्स करने का एक आसान और अत्यधिक प्रभावी तरीका है। चूंकि मानसून के दिनों में पेट में संक्रमण होने का जोखिम अधिक होता है साथ ही खान-पान में गड़बड़ी के कारण कब्ज, अपच जैसी दिक्कत हो सकती हैए इन सभी समस्याओं में सुबह गुनगुना पानी पीना आपके लिए  <br /><br />इम्युनिटी बढ़ाने वाली  : संक्रामक बीमारियों का सबसे जोखिम उन लोगों में होता है जिनकी इम्युनिटी कमजोर होती है। ऐसे लोगों में मौसम के बदलाव के साथ फ्लू संक्रमण होना सबसे आम है। इसलिए जरूरी है कि आप रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ावा देने वाले उपाय करें। बरसात के दिनों में रोजाना घरेलू औषधियों-मसालों से तैयार काढ़ा का सेवन करें। आहार में फलों-सब्जियों की मात्रा बढाएं, इससे लाभ मिलता है। <br /><br />हाथों की स्वच्छता  : बरसात के दिनों में नम वातावरण के कारण सतहों पर बैक्टीरिया और वायरस हो सकते हैं। अगर आप हाथों की सफाई का ध्यान नहीं रखते हैं तो ये दूषित हाथों के माध्यम से आपके नाक-मुंह के रास्ते शरीर में प्रवेश करके संक्रामक रोगों के खतरे को बढ़ावा दे सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि नियमित रूप से हाथों को साबुन-पानी से अच्छे से साफ करते रहें। ये संक्रामक रोगों से बचाने में आपके लिए बहुत मददगार है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Jul 2023 11:51:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>कैलोरी बर्न करने के लिए क्या बेहतर है वॉक या फिर ट्रैडमिल</title>
                                    <description><![CDATA[जब आप पैदल चलते है तो आपको कई परेशानियों से गुजरना पड़ता है। जो कि आपको कड़ी मेहनत करने के लिए मजबूर करती है। और जब आपकी बॉडी को अधिक एनर्जी ड़ालनी पड़ती है तो अधिक कैलोरी बर्न होती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/which-is-better-to-burn-calories--walk-or-treadmill/article-51462"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/rj-(15)1.png" alt=""></a><br /><p>जब बात फिटनेस पाने की आती है तो एक्सपर्ट सबसे पहले वॉकिंग की सलाह देते है। क्यूंकि ये सबसे आसान एक्सरसाइज है, जिसे बड़ी आसानी से अपने डेली रूटीन में शामिल किया जा सकता है। देखा जाए तो वॉक एक ऐसी एक्सरसाइज है,जिसे करने से कई हेल्थ बेनिफिटस मिलते है।  वॉक करने के दो तरीके है, आउटडोर वॉकिंग तो दूसरा ट्रेडमिल पर जॉगिंग । वैसे तो ये दोनों तरीके सेहत के लिए फायदेमंद है। लेकिन नॉर्मल वॉक करना ट्रेडमिल पर चलने से अलग है।  <br /><br /><strong>वॉकिंग के फायदे</strong><br />जब आप पैदल चलते है तो आपको कई परेशानियों से गुजरना पड़ता है। जो कि आपको कड़ी मेहनत करने के लिए मजबूर करती है। और जब आपकी बॉडी को अधिक एनर्जी ड़ालनी पड़ती है तो अधिक कैलोरी बर्न होती है। जबकि ट्रेडमिल पर चलते समय आपको इतने प्रयास करने की जरूरत नहीं।<br /><br />आउटडोर वॉकिंग आपको स्क्रीन और स्ट्रेस से दूर रहने का समय,आपके माइंड और बॉडी को एक ब्रेक लेने,प्रकृति से जुड़ते हुए ताजी हवा में सांस लेने और अपने समुदाय के लोगों से जुड़ने का मौका देती है।<br /><br />वॉकिंग आपके मूड को बेहतर बनाने में मदद करती है, साथ ही इससे आपको एक्सरसाइज करने का मॉटिवेशन मिलता है। सूर्य से निकलने वाली किरणें विटामिन डी का सबसे अच्छा स्रोत है,इसलिए आउटडोर वॉकिंग इस महत्वपूर्ण विटामिन के लेवल को बढ़ाने का एक शानदार तरीका है। <br /><br /><strong>ट्रेडमिल के फायदे</strong><br />- मौसम के बदलते मिजाज के बीच आउटडोर वॉकिंग करना मुश्किल हो जाता है। जबकि ट्रेडमिल का यूज दिन या रात किसी भी समय किया जा सकता है।<br />- ट्रेडमिल में एक डिजिटल स्क्रीन होती है जो हार्ट रेट, कैलोरी बर्न और एवरेज स्पीड-फीडबैक जैसे चीजों को प्रदर्शित करती है जो आपके अगले कदम को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। <br /><br /><strong>दोनों में से कौन बेहतर  </strong><br />आउटडोर वॉकिंग और ट्रेडमिल में से किसी एक को चुनना आपकी पर्सनल प्रायोरिटीज  सिचुएशन और गोल पर निर्भर करता है। आउटडोर वॉकिंग फ्रेश एयर, नेचुरल एनवायरमेंट और फ्रीडम की भावना देती है, जबकि ट्रेडमिल वॉकिंग फेसिलिटी और कंट्रोल एनवायरमेंट देती है। आउटडोर वॉकिंग आपको नेचर से जुड़ने का मौका देती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Jul 2023 11:45:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हर काम में परफेक्ट बनने की चाहत में बन रही हैं, सिंड्रोम का शिकार</title>
                                    <description><![CDATA[कई महिलाओं में यह देखा जाता है कि वे हर वक्त चिड़चिड़ापन महसूस करती हैं। छोटी- छोटी बातें उन्हें इरिटेट करती हैं और वे किसी सिंपल सी बात पर भी ओवर रिऐक्ट कर जाती हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/in-the-desire-to-be-perfect-in-every-work--she-is-becoming-a-victim-of-the-syndrome/article-51196"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/multipurpose-timeline-infographic-based-on-years-(2)6.png" alt=""></a><br /><p>आज के लाइफस्टाइल में मल्टी टास्किंग होना समय की मांग है,महिलाओं में तो ये स्किल बचपन से ही डेवलप होने लगता है, कहा जाता है कि पुरुषों की तुलना में महिलाएं एक साथ कई काम कर सकती हैं,घर के कामकाज से लेकर बच्चों की परवरिश,उनकी जरूरतों को पूरा करना,दफ्तर के काम और सही बजट में घर चलाना जैसी जिम्मेदारियां अधिकतर महिलाएं ही उठाती रही हैं,लेकिन आज के मॉडर्न लाइफ में हर काम को अकेले पूरा करना और परफेक्ट तरीके से करना आसान काम नहीं होता। <br /><br />प्रतियोगिता के इस युग में कई बार महिलाएं इसकी वजह से  स्ट्रेस और एग्जायटी की शिकार हो जाती हैं,कई बार तो उनमें डिप्रेशन के लक्षण भी नजर आने लगते हैं।<br /><br />मनोवैज्ञानिक भाषा में इसे सुपरवूमन सिंड्रोम या डिजीज का नाम दिया गया है,आॅफिस गोइंग, न्यू मॉम, होममेकर जैसी जिम्मेदारियों को एक साथ निभा रही कई महिलाओं में नींद ना आने से लेकर चक्कर आना, अत्यधिक तनाव में रहना आदि जैसे लक्षण दिखते हैं जिसे सुपरवुमन सिंड्रोम माना जा सकता हैं।<br /><br /><strong>चिड़चिड़ापन</strong><br />कई महिलाओं में यह देखा जाता है कि वे हर वक्त चिड़चिड़ापन महसूस करती हैं। छोटी- छोटी बातें उन्हें इरिटेट करती हैं और वे किसी सिंपल सी बात पर भी ओवर रिऐक्ट कर जाती हैं। यह हर काम में परफेक्ट परफॉर्म करने का दबाव हो सकता है। <br /><br /><strong>नींद न आना</strong><br />अगर आप रात भर नहीं सो पातीं या आपको दिन भर बिस्तर से बाहर आने का मन नहीं करता तो थकान, स्ट्रेस और एंग्जायटी का ये कारण हो सकता है, यह भी सुपरवूमन सिंड्रोम का एक बड़ा लक्षण है, ऐसा होने पर जरूरी है कि आप अपने डेली रुटीन से थोड़ा ब्रेक लें और सेल्फकेयर पर ध्यान दें। <br /><br /><strong>बातों को भूलना</strong><br />अगर आप इन दिनों छोटी -छोटी बातें भूल जाती हैं तो यह भी सुपरवूमन सिंड्रोम का लक्षण हो सकता है,दरअसल  आपका दिमाग हर वक्त किसी दूसरे काम को सोचने और प्लान बनाने में व्यस्त होता है,ऐसे में अगर आप बिना ध्यान दिए कोई काम निपटा रही हैं तो भूलना स्वाभाविक ही है, इस वजह से आपका मन काम में नहीं लगता । <br /><br /><strong>तनाव और पसीना</strong><br />कई महिलाएं काम के दौरान मांसपेशियों में खिंचाव महसूस करती हैं और थोड़ा भी काम करने पर पसीने से तर हो जाता है,यही नहींए आपके शरीर में जगह जगह दर्द और खिंचाव भी महसूस होता रहता है,इस तरह के लक्षण बताते हैं कि आपको रिलैक्स होने की जरूरत है, फिजिकली और मेंटली भी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Jul 2023 11:52:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रोजाना डाइट में शामिल करें खजूर सेहत के लिए होते हैं फायदेमंद</title>
                                    <description><![CDATA[डाइट में खजूर को एड करने से बॉडी में विटामिन बी 6 और आयरन की कमी पूरी होती है,साथ ही खजूर में काफी कम मात्रा में कैलोरी होती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/include-dates-in-daily-diet--they-are-beneficial-for-health/article-51193"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/multipurpose-timeline-infographic-based-on-years-(1)3.png" alt=""></a><br /><p>खजूर में प्रोटीन, विटामिन बी 6,आयरन, मैग्नीशियम, पोटैशियम, कैलोरी,कार्बोहाइड्रेट और फाइबर जैसे कई पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जो सेहत के लिए फायदेमंद माने जाते हैं,ऐसे में सीमित मात्रा में रोजाना खजूर का सेवन कई तरह की दिक्कतों को दूर करने में मदद करता है।<br /><br /><strong>सूजन से राहत<br /></strong>खजूर खाने से आपको सूजन से छुटकारा मिल सकता है,बता दें कि को खजूर एंटीआॅक्सीडेंट तत्वों का बेहतर सोर्स माना जाता है,साथ ही इनमें बाकी फू्रट्स और वेजिटेबल्स की अपेक्षा पॉलीफेनोल्स एंटीआॅक्सीडेंट भी अच्छी मात्रा में होते हैं, जो स्वेलिंग दूर करने में मदद करते हैं। <br /><br />डाइट में खजूर को एड करने से बॉडी में विटामिन बी 6 और आयरन की कमी पूरी होती है,साथ ही खजूर में काफी कम मात्रा में कैलोरी होती है,जिसके चलते मीठा खाने की क्रेविंग होने पर भी आप इसका सेवन कर सकते है। <br /><br /><strong>वेट लॉस होता है</strong><br />वेट लॉस में भी खजूर अच्छी भूमिका निभाता है, इसमें काफी मात्रा में फाइबर मौजूद होता है,जिसकी वजह से खजूर खाने के बाद भूख कम लगती है और वजन कम करने में मदद मिलती है,ऐसे में डाइटिंग के दौरान खजूर खाना आपके लिए बेहतर आॅप्शन हो सकता है। <br /><br /><strong>मसल्स स्ट्रॉन्ग होती हैं</strong><br />खजूर खाने से मसल्स को भी मजबूती मिलती है, खजूर में अच्छी मात्रा में पोटैशियम मौजूद होता है, जो मांसपेशियों को स्ट्रॉन्ग बनाने में काफी मदद करता है,इसके साथ ही खजूर बॉडी का ब्लड सर्कुलेशन बेहतर बनाने और हार्ट हेल्थ को मेंटेन रखने में भी  असरदार है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Jul 2023 11:50:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>गलत तरीके से पानी पीना नुकसानदायक</title>
                                    <description><![CDATA[आचार्य भाव मिश्र ने बताया था कि आपको खाली पेट 640 मिलीलीटर गुनगुना पानी पीना चाहिए। स्वस्थ रहने के लिए यह बहुत बढ़िया तरीका है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/drinking-water-in-wrong-way-is-harmful/article-50983"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/multipurpose-timeline-infographic-based-on-years-(1)1.png" alt=""></a><br /><p>सुबह खाली पेट पानी पीने को आयुर्वेद में उषापान कहा जाता है। आचार्य भाव मिश्र ने बताया था कि आपको खाली पेट 640 मिलीलीटर गुनगुना पानी पीना चाहिए। स्वस्थ रहने के लिए यह बहुत बढ़िया तरीका है। <br /><br /><strong>पानी पीने का सही वक्त-</strong> आयुर्वेदिक आचार्य ने उषापान के सही वक्त के बारे में भी जानकारी दी थी।  उन्होंने इसके लिए ब्रह्म मुहूर्त का समय या सूरज उगने से पहले का टाइम सुझाया था। लेकिन आज की लाइफस्टाइल में इस वक्त तक उठना सभी के लिए नामुमकिन है।<br /><br />डॉक्टर वारालक्ष्मी कहती हैं कि आजकल अधिकतर लोग सुबह 6 से 10 बजे के बीच उठते हैं। आयुर्वेद इसे कफ काल कहता है और इस दौरान हमारा मेटाबॉलिज्म काफी कमजोर होता है। इसलिए इस टाइम इतना सारा पानी पचाना मुश्किल काम है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Jul 2023 11:15:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हरदम सनग्लासेस पहनने का है शौक, तो जानें इसके नुकसान</title>
                                    <description><![CDATA[ हमारा स्लीप साइकल हमारे आसपास की बदलती परिस्थितियों के जवाब में हरदिन रिलीज होने वाले हार्मोन द्वारा नियंत्रित होता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/always-fond-of-wearing-sunglasses--then-know-its-disadvantages/article-50895"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/630-400-size-की-कॉपी-(5)1.png" alt=""></a><br /><p>सनग्लासेस पहनने का चलन पिछले काफी समय से बढ़ गया है। धूप में बाहर निकलने से पहले हम सभी सनग्लासेस पहनते हैं। यह सच है कि सनग्लासेस आंखों को सूरज की हानिकारक किरणों से बचाने में मदद कर सकता है।  हालांकि, इसका इस्तेमाल सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है। अगर इसे पहना जाता है तो इससे व्यक्ति का लुक भी  अच्छा लगता है। यही कारण है कि अधिकतर लोग हमेशा ही सनग्लासेस पहनते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि हरदम सनग्लासेस पहनना आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है। इससे व्यक्ति को अनिद्रा से लेकर हार्मोन असंतुलन, विटामिन डी की कमी और अन्य कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।  <br /><br /><strong>नहीं मिलता विटामिन डी:</strong> हरदम सनग्लासेस पहनने से व्यक्ति को पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी नहीं मिल पाता है। दरअसल  सनलाइट की वेवलेंथ आंखों से गुजरती हैं। जिससे पिट्यूटरी और पीनियल ग्रंथियों के जरिए मस्तिष्क को सूचित किया जाता है कि यह धूप है।  उस स्थिति में स्किन सन एक्सप्रोजर और विटामिन डी के लिए तैयार होती है। लेकिन जब आप हरवक्त सनग्लास पहनते हैं तो इससे पीनियल ग्रंथि पर बुरा असर पड़ता है। जिसके चलते माइंड तक यह सिग्नल नहीं पहुंच पाता है। मस्तिष्क को यही लगता है कि बादल छाए हुए हैं। ऐसे में स्किन को पर्याप्त सन एक्सपोजर नहीं मिल पाता है। <br /><br /><strong>हार्मोनल साइकल प्रभावित:</strong> सनग्लासेस आपकी बॉडी को भीतर से भी प्रभावित कर सकते हैं।  हरवक्त सनग्लासेस पहनने से जब आपकी आंखें सनलाइट को स्वाभाविक रूप से अवशोषित नहीं करती हैं, तो इससे शरीर का हार्मोन साइकल डिस्टर्ब होता है। ऐसे में आपके बॉडी सिस्टम और मूड्स पर बहुत बुरा असर पड़ता है। <br /><br /><strong>आंखों को थकान:</strong> हमारी आंखें इस तरह से बनी हैं कि उन्हें धूप की जरूरत होती है। इसलिए,हमें उन्हें लंबे समय तक ढक कर नहीं रखना चाहिए। लेकिन लगातार सनग्लासेस पहनने की आदत के चलते आपकी आंखों को नेचुरल लाइट पहनने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है, जिससे वे थकने लगती हैं। जब आंखें लगातार तनाव में रहती हैं, तो वे आंखों की थकान का अनुभव करती हैं।  <br /><br /><strong>नींद की होती है समस्या:</strong> सनग्लासेस आपकी नींद पर भी नेगेटिव इफेक्ट डालते हैं। हमारा स्लीप साइकल हमारे आसपास की बदलती परिस्थितियों के जवाब में हरदिन रिलीज होने वाले हार्मोन द्वारा नियंत्रित होता है। हमारे रेटिना में लाइट सेंसेटिव फोटोरिसेप्टर सर्केडियन रिदम को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब आप लगातार सनग्लासेस पहनते हैं तो इससे सर्केडियन रिदम पर बुरा असर पड़ता है। जिसके चलते व्यक्ति को ठीक ढंग से नींद नहीं आती है।  <br /> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Jul 2023 12:17:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वजन कम करने के लिए एक्सरसाइज के साथ डाइट का भी रखें ध्यान</title>
                                    <description><![CDATA[वेट लॉस की कोशिश करने वाले लोग हेल्दी डाइट लेने के बजाय जंक फूड खा लेते हैं,उन्हें लगता है इससे उनका वजन कम होगा,लेकिन यह गलतफहमी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/take-care-of-diet-along-with-exercise-to-lose-weight/article-50777"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/loss.png" alt=""></a><br /><p>आज के जमाने में मोटापा महामारी की तरह फैल रहा है,दुनियाभर में करोड़ों लोग मोटापे और ज्यादा वजन की समस्या से जूझ रहे हैं,मोटापा कम करने के लिए बड़ी तादाद में लोगों को टहलते, दौड़ लगाते और एक्सरसाइज करते हुए देखा जा सकता है,बाजार में वजन कम करने का दावा करने वाले प्रोडक्ट भी मिल रहे हैं,तमाम लोग इन प्रोडक्ट्स का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं,कोशिशों के बाद भी कई लोगों को वजन कम नहीं होता और उनके शरीर पर चर्बी जमी रहती है,अब सवाल उठता है कि खूब एक्सरसाइज के बावजूद वजन न घटने की क्या वजह हैं। <br /> वजन कम करने के लिए सिर्फ एक्सरसाइज करना ही काफी नहीं होता है,मोटापा और वजन कम करने के लिए डाइट सबसे जरूरी होती है,बेहतर डाइट को फॉलो करके एक्सरसाइज की जाए,तो वजन तेजी से कम किया जा सकता है। -बड़ी तादाद में लोग वजन कम करने के लिए ब्रेकफास्ट नहीं करते हैं, लेकिन यह सबसे बड़ी गलती है,ब्रेकफास्ट सेहत के लिए बेहद जरूरी होता है,जरूरी पोषक तत्व और एनर्जी देता है।<br /><br />वेट लॉस की कोशिश करने वाले लोग हेल्दी डाइट लेने के बजाय जंक फूड खा लेते हैं,उन्हें लगता है इससे उनका वजन कम होगा,लेकिन यह गलतफहमी है। वजन कम करने के लिए कुछ लोग रोटी-सब्जी समेत सॉलिड फूड्स आइटम्स खाना छोड़े देते हैं और शुगरी ड्रिंक्स का ज्यादा सेवन करते हैं,जिससे कई बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। ज्यादा बार खाने के बजाय एक बार में अत्यधिक खाना खा लेते हैं, लेकिन ऐसा करना फायदेमंद नहीं होता है। प्रोटीन वाले फूड्स को अवॉइड करना भी गलती होती है,ऐसा करने से आपकी मसल्स को मजबूती नहीं मिल पाएगी और आपको परेशानी होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Jul 2023 10:33:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>उपभोक्ता कंपनियों के सॉफ्ट टारगेट हैं बच्चे</title>
                                    <description><![CDATA[यूनाइटेड स्टेट्स की आधिकारिक वेबसाइट नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन पर दिए गए तथ्य इस पॉलिसी की पोल खोलते हैं।  टेलीविजन पर दिखाए जाने वाले कुल विज्ञापनों में से 18 फीसदी खाद्य पदार्थों से जुड़े होते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/consumer-companies/article-50600"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/630-400-size-की-कॉपी2.png" alt=""></a><br /><p>बच्चे मन के सच्चे होते हैं। उन्हें आसानी से बरगलाया जा सकता है, क्योंकि बच्चे बहुत भोले भी होते हैं। बच्चों से संबंधित इसी सच्चाई को खासकर खाद्य और पेय उत्पाद बनाने वाली कंपनियां बखूबी भुना रही हैं। बच्चों को सॉफ्ट टारगेट समझकर इन कंपनियों ने विज्ञापन का ऐसा जाल बुना है, जिसमें फंसकर अभिभावक न सिर्फ अपनी जेब हल्की कर रहे हैं बल्कि अनजाने में अपने बच्चों के जीवन के लिए भी खतरा मोल ले रहे हैं। मेडिकल जर्नल बीएमजे के एक व्यापक शोध से तो यही साबित होता है।<br /><br />आजकल टेलीविजन से लेकर सोशल मीडिया पर ऐसे विज्ञापनों की भरमार है, जिनमें बच्चों की लंबाई, इम्यूनिटी, स्टेमिना और मेमोरी तक बढ़ाने के दावे के साथ उत्पाद पेश किए जा रहे हैं। लेकिन हकीकत क्या है? इसका भंडाफोड़ बीएमजे में प्रकाशित शोध कर रहा है। वैज्ञानिकों ने भारत समेत 15 देशों में 757 बच्चों से संबंधित उत्पादों का अध्ययन करने के बाद नतीजे तैयार किए हैं। अप्रैल, 2020 से जुलाई, 2022 तक किए गए इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े उत्पादों में से 700 से अधिक उत्पादों को लेकर किए गए दावे वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। <br /><br />यूनाइटेड स्टेट्स की आधिकारिक वेबसाइट नेशनल लाइब्रेरी आॅफ मेडिसिन पर दिए गए तथ्य इस पॉलिसी की पोल खोलते हैं।  टेलीविजन पर दिखाए जाने वाले कुल विज्ञापनों में से 18 फीसदी खाद्य पदार्थों से जुड़े होते हैं, जिनका प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष निशाना बच्चे होते हैं। एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि 3-13 साल के बच्चों के मोटापे का सीधा संबंध खाद्य पदार्थों के विज्ञापनों से पाया गया है। न्यूजीलैंड की यूनिवर्सिटी आॅफ ओटागो से सम्बद्ध वेलिंगटन स्कूल आॅफ पब्लिक हेल्थ की प्रमुख प्रोफेसर लुईस सिगनल की टीम का अध्ययन भी इस मकड़जाल की तरफ इशारा करता है। स्वास्थ्य शोध से संबंधित वैज्ञानिक पत्रिका द लैंसेट प्लैनेटरी हेल्थ में प्रकाशित शोध बताता है कि कंपनियों ने विज्ञापनों के जरिए 11-13 साल के बच्चों को हर 10 घंटे में 554 ब्रांड से अवगत कराया। मतलब, हर मिनट बच्चों ने कम से कम एक ब्रांड के बारे में जान लिया। बच्चों ने बड़ी संख्या में जंक फूड के विज्ञापन भी देखे।   बात अगर भारत की करें, तो कहने को यहां पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम-2019 लागू है। इसका मकसद अनुचित व्यापार प्रथाओं और भ्रामक विज्ञापनों पर अंकुश लगाना है, लेकिन टेलीविजन से लेकर सोशल मीडिया में हर घड़ी प्रसारित होने वाले अधिकतर विज्ञापनों में किए जा रहे हवा-हवाई दावे अधिनियम के प्रभाव को झुठलाते नजर आते हैं। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि भारत में डिजिटल विज्ञापन का कारोबार तेजी से बढ़ा है। पिछले साल विज्ञापन बाजार का आंकड़ा 1275  करोड़ का था, जिसके 2025 तक 2800 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान जताया जा रहा है। विज्ञापन बाजार के आंकड़े साबित करते हैं कि दुनिया भर की कंपनियों की निगाहें भारतीय बाजार पर लगी हैं। कंपनी अपने उत्पाद बेचने के लिए हर तरह की तिकड़मबाजी में जुटी हैं। ऐसे में विज्ञापन से जुड़ी मयार्दाएं टिक पाएंगी, इसकी उम्मीद नहीं की जा सकती। बहुत संभव है कि कंपनियों की विज्ञापन पॉलिसी का स्तर और अधिक गिर जाए। इसका सबसे नकारात्मक असर बच्चों पर ही पड़ेगा, जो पहले से ही कंपनियों के लिए सॉफ्ट टारगेट हैं। इसी साल फरवरी में मुंबई में हुई एडवरटाइजिंग स्टैंडर्ड काउंसिल आॅफ इंडिया की बैठक में मंत्रालय के जिम्मेदार अधिकारियों ने कंपनियों को विज्ञापनों के प्रति और अधिक जिम्मेदार बनने की नसीहत तो दी है लेकिन, अब देखना यह है कि इसका धरातल पर कोई असर दिखाई पड़ेगा या नहीं। <br /><br />संजीव रघुवंशी<br />- यह लेखक के स्वयं के विचार हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 Jul 2023 10:26:20 +0530</pubDate>
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                <title>खून में जमे कोलेस्ट्रॉल को बाहर निकालेंगे ये फूड्स</title>
                                    <description><![CDATA[अलसी के बीजों को कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए रामबाण इलाज माना जा सकता है। इन बीजों में फाइबर,ओमेगा 3 फैटी एसिड समेत कई पोषक तत्वों की भरपूर मात्रा होती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/these-foods-will-remove-the-cholesterol-accumulated-in-the-blood/article-50526"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/630-400-size-की-कॉपी-(14).png" alt=""></a><br /><p>कोलेस्ट्रॉल की समस्या से छुटकारा दिलाने में कुछ फूड्स बेहद मददगार साबित हो सकते हैं,इनमें मौजूद पोषक तत्व खून में जमे कोलेस्ट्रॉल को पिघलाकर बाहर निकाल देते हैं,इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा कम हो जाता है,साथ ही शरीर को मजबूती मिलती है,इनके सेवन से इम्यूनिटी भी मजबूत हो सकती है। <br /><br />कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए सेब को बेहद लाभकारी माना जा सकता है,कई रिसर्च में यह बात सामने आ चुकी है सेब खाने से कोलेस्ट्रॉल लेवल को 40 फीसदी तक कम किया जा सकता है, रिपोर्ट के अनुसार सेब में मौजूद फाइबर और अन्य एंटीआॅक्सीडेंट कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करते हैं,रोज 2 सेब खाना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है। <br /><br />हाई कोलेस्ट्रॉल के मरीजों को सब्जियों का खूब सेवन करना चाहिए,सब्जियों में मौजूद पोषक तत्व कोलेस्ट्रॉल कम करके हार्ट हेल्थ बूस्ट करते हैं,सब्जियों में ब्रोकली, गोभी, टमाटर, मिर्च, अजवाइन, गाजर, पालक और प्याज को कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए सबसे ज्यादा असरदार माना गया है। <br /><br />अलसी के बीजों को कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए रामबाण इलाज माना जा सकता है,इन बीजों में फाइबर,ओमेगा 3 फैटी एसिड समेत कई पोषक तत्वों की भरपूर मात्रा होती है, जिससे शरीर में जमे कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में मदद मिलती है,अलसी के बीजों के अलावा अखरोट, बादाम, चिया सीड्स के सेवन से कोलेस्ट्रॉल कम हो सकता है,ये सभी हार्ट हेल्थ को बेहतर बनाते हैं।<br /><br />कोलेस्ट्रॉल के मरीजों को सोयाबीन और इससे बने प्रोडक्ट्स का सेवन करना चाहिए। टोफू एक लोकप्रिय सोयाबीन फूूड है और सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है,सोयाबीन और टोफू को कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने के लिए  असरदार माना जाता है,इनमें प्रोटीन की भरपूर मात्रा होती है। जिससे शरीर को मजबूती मिलती है </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Jul 2023 10:43:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>बच्चे को परफ्यूम और डिओडोरेंट लगाना कितना है सुरक्षित </title>
                                    <description><![CDATA[परफ्यूम और डिओडोरेंट में मौजूद रंग,सुगंध और केमिकल आपके बच्चे की सेंसिटिव स्किन को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिससे बच्चे की स्किन पर रेडनेस, खुजली, रैसेज, स्किन पर एलर्जी की समस्या हो सकती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/how-safe-is-it-to-apply-perfume-and-deodorant-to-a-child/article-50524"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/630-400-size-की-कॉपी-(13).png" alt=""></a><br /><p>आपके बच्चे को किसी तरह की एलर्जी  या सांस की समस्या होने से बचाने के लिए डॉक्टर भी उन्हें परफ्यूम और डिओडोरेंट का इस्तेमाल न करने की सलाह देते हैं। लेकिन इसके बावजूद भी अगर आप अपने बच्चे को परफ्यूम लगाते हैं तो एक बार इससे होने वाले साइड इफेक्ट्स के बारे में भी जान लें।  <br /><br />स्किन एलर्जी : परफ्यूम और डिओडोरेंट में मौजूद रंग,सुगंध और केमिकल आपके बच्चे की सेंसिटिव स्किन को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिससे बच्चे की स्किन पर रेडनेस, खुजली, रैसेज, स्किन पर एलर्जी की समस्या हो सकती है।<br /><br />एलर्जी की समस्या : बच्चे एलर्जी को लेकर ज्यादा सेंसिटिव होते हैं और परफ्यूम या डिओडोरेंट की स्ट्रॉन्ग फ्रेग्नेंस उनके एलर्जी की समस्या को ट्रिगर कर सकती है। <br /><br />सांस से जुड़ी समस्या : परफ्यूम और डिओडोरेंट की महक एक बच्चे के विकसित हो रहे सांस प्रणाली के लिए बहुत ज्यादा स्ट्रॉन्ग हो सकती है, जिससे सांस लेने में मुश्किल हो सकती है,कई बार बच्चों में इस समस्या के कारण अस्थमा की बीमारी भी होने का खतरा बढ़ जाता है।<br /><br />केमिकल से असर : कई परफ्यूम और डिओडोरेंट में फ्थालेट्स, पैराबेन्स या एल्कोहल जैसे केमिकल पदार्थ होते हैं,जो स्किन के माध्यम से शरीर में मिल जाते हैं। बच्चे बच्चे का शरीर अभी विकसित हो रहा होता है और इन केमिकल्स के से संपर्क में आने से उन्हें कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है।<br /><br />इंफेक्शन का खतरा : परफ्यूम या डिओडोरेंट को बच्चे की स्किन पर लगाने से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है, खासकर अगर परफ्यूम या डिओडोरेंट बच्चों के मुंह या आंखों के पास लगता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Jul 2023 10:37:03 +0530</pubDate>
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