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                <title>एडहॉक कमेटी को अनुदान राशि जारी नहीं कर रहा बीसीसीआई, आरसीए के चुनाव जल्द नहीं हुए तो घरेलू क्रिकेट संकट में होगी</title>
                                    <description><![CDATA[संभवत: अपने गठन के बाद पहली बार गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा राजस्थान क्रिकेट संघ अब घरेलू क्रिकेट कराने में भी समर्थ नहीं है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/bcci-is-not-releasing-grant-money-to-adhoc-committee-domestic/article-78414"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/rca.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। संभवत: अपने गठन के बाद पहली बार गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा राजस्थान क्रिकेट संघ अब घरेलू क्रिकेट कराने में भी समर्थ नहीं है। आरसीए में नये सत्र का आगाज हर साल मई-जून के माह में हो जाता है लेकिन भंग आरसीए का कामकाज संभाल रही एडहॉक कमेटी के पदाधिकारी अब तक एक भी टूर्नामेंट की तारीखों का ऐलान नहीं कर पाए हैं। एडहॉक कमेटी ने पूर्व में 20 मई से काल्विन शील्ड और एक जून से अंडर-16 का टूर्नामेंट कराने की घोषणा की थी लेकिन तंगी के हालात में उसे भी रद्द कर दिया है। कमेटी अब जिलों में समर कैंप के आयोजन की औपचारिकता निभाने में जुटी है।</p>
<p>जानकारों के मुताबिक आरसीए के हालात नई कार्यकारिणी के चुनाव के बाद ही सुधरेंगे। एडहॉक कमेटी ने हालांकि कई बार बीसीसीआई को पत्र लिखकर अनुदान राशि जारी करने की मांग की है लेकिन बीसीसीआई एडहॉक बॉडी को सरकारी हस्तक्षेप मानते हुए उसके पत्रों पर भी कोई संज्ञान नहीं ले रहा। </p>
<p><strong>20 हजार से ज्यादा खिलाड़ियों का भविष्य दांव पर</strong><br />राजस्थान के घरेलू क्रिकेट सत्र में विभिन्न आयु वर्ग की प्रतियोगिताओं में जिले से राज्य स्तर तक 20 हजार से ज्यादा खिलाड़ियों की भागीदारी रहती है।  अगर फंड  नहीं होने की वजह से प्रतियोगिताओं का आयोजन नहीं होता है तो इतने खिलाड़ी प्रभावित होंगे।  अक्सर आरसीए की अंडर-19 और अंडर-23 की प्रतियोगिता मई-जून में कराई जाती है, जबकि सीनियर कॉल्विन शील्ड और जूनियर अंडर-16 के टूर्नामेंट जुलाई-अगस्त के महीने में होते रहे हैं। इसके अलावा अंडर-14 का आयोजन अक्टूबर-नवम्बर और कंडीशनिंग कैंप का आयोजन जून-जुलाई में होता है। </p>
<p><strong>दस माह से नहीं मिल रहा फंड</strong><br />आरसीए को बोर्ड से सालाना 40 करोड़ रुपए अनुदान के रूप में मिलते हैं लेकिन पहले आरसीए पदाधिकारियों के बीच विवाद और फिर एडहॉक कमेटी के गठन की वजह से पिछले करीब 10 माह से बोर्ड ने अनुदान जारी नहीं किया है। ऐसे में आरसीए की सभी गतिविधियां उधारी पर ही चल रही हैं। लेकिन फंड नहीं होने की वजह से प्रतियोगिताओं का आयोजन कराना संभव नहीं होगा।</p>
<p><strong>70 करोड़ रुपए की उधारी</strong><br />जिला संघ के एक सचिव के मुताबिक आरसीए पर करीब 70 करोड़ रुपए की उधारी है। इसमें करीब 35 करोड़ रुपए का नये स्टेडियम का लोन है, जबकि 11 करोड़ रुपए स्टाफ और ग्राउण्ड स्टाफ के वेतन के  बाकी हैं। खिलाड़ियों का टीए/डीए, चयनकर्ताओं की फीस, बसों और होटलों का किराया भी 15 करोड़ से ज्यादा बाकी है। इसके अलावा करीब 10 करोड़ रुपए की राशि राजस्थान प्रीमियर लीग में खिलाड़ियों की फीस और वैंडरों को भुगतान की जानी है। बीसीसीआई से बजट मिलने के बाद ही इन देनदारियों का भुगतान संभव हो सकेगा। </p>
<p><strong>चुनाव से पहले फंड जारी होना संभव नहीं</strong><br />आरसीए में एडहॉक कमेटी का गठन हुए 50 दिन पूरे होने को हैं, जबकि कमेटी का कार्यकाल 90 दिन निर्धारित किया गया था। एडहॉक कमेटी का कार्य तीन माह के भीतर नये चुनाव कराना है जिसके लिए कम से कम 25 दिनों की जरूरत होगी। लेकिन कमेटी  क्रिकेट गतिविधियों के संचालन, चयनकर्ताओं की नियुक्ति जैसे कामों में लगे हैं। जब तक नई कार्यकारिणी के चुनाव नहीं हो जाते बोर्ड की ओर से पैसा जारी होना संभव नहीं लगता। एडहॉक कमेटी ने इसके लिए प्रयास किए हैं लेकिन बीसीसीआई ने इसमें कोई रुचि नहीं दिखाई। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>खेल</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 May 2024 10:42:59 +0530</pubDate>
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                <title>गौ शालाओं को अनुदान राशि 90 दिन की बजाय पूरे 365 दिन देने के प्रस्ताव विचाराधीन</title>
                                    <description><![CDATA[ भाया ने प्रश्नकाल में विधायकों की ओर से इस संबंध में पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब देते हुए बताया कि वर्तमान में 3 हजार 222 गोशालाओं में 10 लाख 61हजार गौवंश है, जिसमें बड़ा गो वंश 8 लाख 23 हजार तथा छोटा गो वंश 2 लाख 38 हजार है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/rajasthan-legislative-assembly--proposal-to-give-grant-money-to-gaushalas-for-365-days-instead-of-90-days-is-under-consideration/article-5792"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/pramod-jain-bhaya.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। गोपालन मंत्री प्रमोद भाया ने बुधवार को विधानसभा में कहा कि राज्य सरकार के पास नंदी शालाओं को वर्ष में 90 दिन के बजाय पूरे 365 दिन का अनुदान देने के लिए विभिन्न विधायकों तथा संस्थाओं के प्रतिनिधियों के ज्ञापन एवं सुझाव प्राप्त हुए है। उन्होंने कहा कि इनका परीक्षण करवाया जा रहा है और संसाधनों की उपलब्धता तथा प्राथमिकता के आधार पर इस संबंध में निर्णय लिया जाएगा।<br /><br /> भाया ने प्रश्नकाल में विधायकों की ओर से इस संबंध में पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब देते हुए बताया कि वर्तमान में 3 हजार 222 गोशालाओं में 10 लाख 61हजार गौवंश है, जिसमें बड़ा गो वंश 8 लाख 23 हजार तथा छोटा गो वंश 2 लाख 38 हजार है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की ओर से 2 हजार 221 पात्र गोशालाओं को अनुदान दिया जा रहा है। जिनमें 9 लाख 91 हजार गो वंश है तथा अपात्र गोशालाएं 1 हजार 101 है। गोपालन मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री गौ वंश के संरक्षण तथा संर्वधन के लिए समर्पित है और उन्होंने संत सम्मेलन आयोजित करके मार्च 2019 में छोटे पशु को दिया जाने वाला अनुदान 16 रुपये से बढ़ाकर 20 रुपए तथा बड़े पशु का 32 से बढ़ाकर 40 रुपए कर दिया। उन्होंने कहा कि नई पंचायत समितियों में जब नंदी शालाएं शुरु होगी तो उनमें 9 महीने के अनुदान का प्रावधान है। <br /><br />इससे पहले  भाया ने विधायक अनिता भदेल के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में बताया कि वर्तमान में प्रदेश में कुल 3 हजार 222 पंजीकृत गौशालाएं है जिनमें 10.61 लाख गौवंश संधारित है। उन्होंने इसका जिलेवार विवरण सदन के पटल पर रखा। उन्होंने बताया कि गौ संरक्षण एवं संवर्धन निधि नियम 2016 के अन्तर्गत एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 180 दिवस की सहायता राशि दो चरणों में 90-90 दिवसों हेतु पात्र गौशालाओं में संधारित गौवंश के भरण पोषण के लिये वर्तमान में बडे गौवंश हेतु 40 रु. तथा छोटे गौवंश हेतु 20 रु. प्रतिदिन प्रति गौवंश की दर से दिये जाने का प्रावधान है।<br /><br /><br class="MsoNormal" /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Wed, 09 Mar 2022 17:04:36 +0530</pubDate>
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