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                <title>gaushalas - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>आश्रय को तरस रहे निराश्रित नंदी, नहीं खुली नंदीशाला</title>
                                    <description><![CDATA[जिले में नंदीशाला के लिए एक भी नहीं आया आवेदन।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/destitute-nandis-are-yearning-for-shelter--nandishala-is-not-opened/article-116848"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/rtroer-(1)38.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जिले सहित प्रदेश भर में सड़कों पर विचरण करने वाले निराश्रित नंदी को आश्रय देने के लिए शुरू की गई नंदीशाला योजना जमीन के अड़ंगे से आगे नहीं बढ़ पा रही है। पिछले पांच साल में प्रदेश में सिर्फ 57 नंदीशाला ही खुल पाई हैं जबकि कोटा जिले में अभी तक एक भी नंदीशाला नहीं खुल पाई है।  यहां इस योजना में किसी भी संस्था ने आवेदन ही नहीं किया है। सरकार की ओर से सड़कों पर विचरण कर रहे नंदियों के लिए नंदीशाला खोलने की योजना शुरू की गई थी। जिसके तहत प्रदेश की सभी 426 तहसीलों में नंदीशालाएं खोली जानी थी, लेकिन, वर्ष 2021-22 से वर्ष 2024-25 तक केवल 57 नंदीशालाएं ही खुल सकी हैं। ये भी केवल 19 जिलों में खुली हैं। जबकि प्रदेश के 22 जिलों में अब तक एक भी नंदीशाला नहीं खुली है। इसमें कोटा जिला भी शामिल है। </p>
<p><strong>नंदीशाला में यह कार्य होंगे</strong><br />- ग्रेवल रोड एवं इंटरलॉकिंग टाइल्स<br />- प्रशासनिक भवन, पशु चिकित्सा सुविधा व अन्य निर्माण<br />- चारा भंडार गृह और काऊ शैड का निर्माण<br />- अंडर ग्राउंड वाटर टैंक/ट्यूबवैल की व्यवस्था</p>
<p><strong>नंदीशाला खोलने में यह आ रहा रोड़ा</strong><br />जानकारी के अनुसार नंदीशाला खोलने में सबसे बड़ा अड़ंगा जमीन का आ रहा है। आवेदन करने वाली संस्था आदि के पास 250 नंदी के लिए 10 बीघा जमीन होनी चाहिए। गोवंश की बढ़ोतरी होने पर उसी अनुपात में भूमि भी बढ़ानी होगी। 250 नर गोवंश की बीस साल तक देखभाल करना आवश्यक है। इतनी जमीन और लंबा समय होने के कारण अधिकांश संस्थाएं इस योजना  में रुचि नहीं दिखा रही है। अभी तक कोटा जिले में एक भी आवेदन नहीं आया है। इस कारण शहर सहित जिले की सड़कों पर निराश्रित नंदी विचरण कर रहे हैं। प्रदेश की बात की जए तो नंदीशाला खोलने के लिए वर्ष 2021-22 से 2024-25 तक 256 आवेदन मिले। उनमें से 109 आवेदन स्वीकृत हुए। स्वीकृत आवेदनों में से 65 कार्य अभी चल रहे हैं। जबकि 10 कार्य पूर्ण हो चुके हैं। शेष में अभी कार्य शुरू नहीं हुआ है। वहीं कोटा जिले में कोई आवेदन नहीं आया है।</p>
<p><strong>यह है अनुदान का नियम</strong><br />तकनीकी मापदण्ड के लिए संस्था के पास निर्माण कार्यों के लिए विषय विशेषज्ञों की टीम होना जरूरी हैं। संस्था को 10 प्रतिशत अंशदान राशि का सीए की ओर से जारी प्रमाण-पत्र जमा कराना होता है। नन्दीशाला की स्थापना व निर्माण के लिए लागत 1.57 करोड़ है। जिसका 90 प्रतिशत राज्य व 10 प्रतिशत संस्था को देना है। सहायता राशि तीन किस्तों में 40-40 प्रतिशत व 10 प्रतिशत दी जाएगी। नवस्थापित नंदीशालाओं में एक वर्ष में न्यूनतम 250 नंदियों को संधारित करना अनिवार्य होगा, लेकिन भरण-पोषण के लिए सहायता राशि निधि नियमों के अनुसार 9 माह की देय होगी। इसमें 3 वर्ष से छोटे गौवंश के लिए 20 रुपए प्रतिदिन तथा 3 वर्ष से बड़े गौवंश के लिए 40 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से अनुदान दिया जाएगा। पंचायत समिति स्तर पर न्यूनतम 250 नर गोवंश की नंदीशाला के लिए 10 बीघा या 16 हजार वर्गमीटर जमीन संस्था के स्वयं के स्वामित्व/लीज/आवंटन की होना आवश्यक है। </p>
<p>सरकार ने नंदीशाला खोलने के लिए कई नियम बना रखे हैं। इनमें सबसे दिक्कत दस बीघा जमीन होने के नियम से आ रही है। अधिकांश गोशालाओं संस्थाओं के इतनी जमीन नहीं है। जिससे उन्होंने अभी तक इस योजना से दूरी बना रखी है। <br /><strong>- प्रकाश शाह, गोशाला संचालक</strong></p>
<p>सरकार ने सड़कों पर विचरण कर रहे नंदियों के लिए नंदीशाला खोलने की योजना चला रखी है। कोटा जिले में अभी तक एक भी नंदीशाला नहीं खुल पाई है। यहां इस योजना में किसी भी संस्था ने आवेदन ही नहीं किया है। इसके लिए संस्थाओं को प्रोत्साहित किया जाएगा।<br /><strong>- डॉ. मनोज भारती, वरिष्ठ पशु चिकित्सक</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Jun 2025 17:00:01 +0530</pubDate>
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                <title>पेड़ों की नहीं चढ़ेगी बलि, गोकाष्ठ मशीन बनेगी सहारा</title>
                                    <description><![CDATA[बजट घोषणा की पालना में गोकाष्ठ मशीन उपलब्ध कराई जाएगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/trees-will-not-be-sacrificed--cow-wood-machine-will-be-the-support/article-114042"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/news-(3)19.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । जिले के गौ-पालकों के लिए अच्छी खबर है। अब पेड़ों की लकड़ी की बजाय गोबर की लकड़ी जलाने के काम आएगी। इसके लिए सरकार गोशालाओं को रियायती दर पर गोकाष्ठ मशीनें उपलब्ध कराएगी। इस पूरी योजना में प्रदेश की सौ गोशालाओं का चयन किया जाएगा। इनमें कोटा जिले की गोशालाओं को भी शामिल किया गया है। पशुपालन विभाग के अनुसार सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रदेश की 100 गोशालाओं को रियायती दरों पर गोकाष्ठ मशीनें उपलब्ध करवाने की घोषणा की थी। जिन गोशालाओं में गोवंश 1000 से अधिक है, उनको बजट घोषणा की पालना में गोकाष्ठ मशीन उपलब्ध कराई जाएगी। </p>
<p><strong>हजारों पेड़ कटने से बचेंगे</strong><br />सरकार की इस योजना का उदे्श्य पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने का है। अभी लकड़ी के लिए रोजाना पेडों को काटा जा रहा है। पेड़ों को बचाने के लिए सरकार ने गोबर से बनी लकड़ी का अधिकाधिक उपयोग को बढ़ावा देने का निर्णय किया है। चयन उपरान्त लाभार्थी पात्र गोशाला द्वारा अपने हिस्से की कुल लागत की बीस प्रतिशत राशि संबंधित जिला संयुक्त निदेशक, पशुपालन विभाग को जमा करवाई जाएगी। तत्पश्चात लाभार्थी गोशाला को गोकाष्ठ मशीन चयनित फर्म की ओर से निर्धारित दर पर उपलब्ध करवाई जाएगी।  अब गाय के गोबर से बनी लकड़ी मोक्षधाम में काम आएगी। अंतिम संस्कार के लिए ये गोबर से बनी लकड़ी बेची जाएगी। इससे गोशालाओं की आय में भी बढ़ोतरी होगी। </p>
<p><strong>गोशालाओं की आय में होगी बढ़ोतरी</strong><br />विभागीय अधिकारियों के अनुसार गोवंश के गोबर से मशीन के माध्यम से गोकाष्ठ बनाई जाती है। गोकाष्ठ बनाने वाली मशीन से दो किलोग्राम गोबर से एक किलोग्राम गोकाष्ठ (गोबर के लठ्ठे ) तैयार होते हैं। जिसका उपयोग ईंधन के रूप किया जा सकता है। लाभार्थी गोशाला को गोकाष्ठ के विपणन से होने वाली आय गोशाला की स्वयं की होगी, जिसे गोशाला संचालक गोशाला के हितार्थ उपयोग में ले सकेंगे। गोकाष्ठ की अनुमानित विक्रय दर आठ रुपए प्रति किलोग्राम होगी। इस दर में आवश्यकतानुसार संशोधन जिला गोपालन समिति के स्तर से किया जा सकेगा। गोकाष्ठ को मोक्ष धाम अंत्येष्टि स्थल, फैक्ट्री बॉयलर, रेस्टोरेंट, होटल-ढाबे, मंदिर-हवन आदि जगह जहां भी इसका उपयोग ईंधन के रूप में संभव हो, उसका बेचान किया जा सकेगा।</p>
<p><strong>योजना में यह है नियम</strong><br />- कोई भी लाभार्थी गोशाला इस योजना के तहत प्राप्त गोकाष्ठ मशीन को 10 साल से पहले बेचान नहीं कर सकेंगी ना ही इन्हें किसी अन्य को सुपुर्द कर सकेंगी।<br />- लाभार्थी गोशाला को गोकाष्ठ के विपणन से होने वाली आय गोशाला की स्वयं की आय होगी जिसे गोशाला संचालक गोशाला के हितार्थ उपयोग में ले सकेंगे ।<br />- गोकाष्ठ की अनुमानित विक्रय दर आठ रुपए प्रति किलोग्राम होगी। उक्त दर में आवश्यकतानुसार संशोधन जिला गोपालन समिति के स्तर से किया जा सकेगा।<br />- गोकाष्ठ को मोक्ष धाम / अंत्येष्टि स्थल, फैक्ट्री बॉयलर, रेस्टोरेंट, होटल-ढाबे, मंदिर-हवन इत्यादि जगह जहां भी इसका उपयोग ईंधन के रूप में संभव हो, का बेचान किया जा सकेगा।</p>
<p>लकड़ी का अधिकाधिक उपयोग होने से रोजाना पेड़ों की कटाई की जा रही है। इससे पर्यावरण संतुलन को काफी क्षति पहुंच रही है। ऐसे में गोशालाओं में गोकाष्ठ मशीनें उपलब्ध कराने की सरकार की यह पहल अच्छी है। इससे पर्यावरण को बढ़ावा मिलेगा।<br /><strong>-डॉ. राजू गुप्ता, पर्यावरणविद्</strong></p>
<p>राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रदेश की 100 गोशालाओं को रियायती दरों पर गोकाष्ठ मशीन उपलब्ध करवाए जाने की घोषणा की थी। इनमें कोटा जिले की गोशालाएं भी शामिल हैं। पर्यारण संरक्षण के लिए यह योजना शुरू की गई है।<br /><strong>-डॉ. अनिल कुमार, नोडल अधिकारी, पशुपालन विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 May 2025 17:52:59 +0530</pubDate>
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                <title>गौ शालाओं को अनुदान राशि 90 दिन की बजाय पूरे 365 दिन देने के प्रस्ताव विचाराधीन</title>
                                    <description><![CDATA[ भाया ने प्रश्नकाल में विधायकों की ओर से इस संबंध में पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब देते हुए बताया कि वर्तमान में 3 हजार 222 गोशालाओं में 10 लाख 61हजार गौवंश है, जिसमें बड़ा गो वंश 8 लाख 23 हजार तथा छोटा गो वंश 2 लाख 38 हजार है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/rajasthan-legislative-assembly--proposal-to-give-grant-money-to-gaushalas-for-365-days-instead-of-90-days-is-under-consideration/article-5792"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/pramod-jain-bhaya.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। गोपालन मंत्री प्रमोद भाया ने बुधवार को विधानसभा में कहा कि राज्य सरकार के पास नंदी शालाओं को वर्ष में 90 दिन के बजाय पूरे 365 दिन का अनुदान देने के लिए विभिन्न विधायकों तथा संस्थाओं के प्रतिनिधियों के ज्ञापन एवं सुझाव प्राप्त हुए है। उन्होंने कहा कि इनका परीक्षण करवाया जा रहा है और संसाधनों की उपलब्धता तथा प्राथमिकता के आधार पर इस संबंध में निर्णय लिया जाएगा।<br /><br /> भाया ने प्रश्नकाल में विधायकों की ओर से इस संबंध में पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब देते हुए बताया कि वर्तमान में 3 हजार 222 गोशालाओं में 10 लाख 61हजार गौवंश है, जिसमें बड़ा गो वंश 8 लाख 23 हजार तथा छोटा गो वंश 2 लाख 38 हजार है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की ओर से 2 हजार 221 पात्र गोशालाओं को अनुदान दिया जा रहा है। जिनमें 9 लाख 91 हजार गो वंश है तथा अपात्र गोशालाएं 1 हजार 101 है। गोपालन मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री गौ वंश के संरक्षण तथा संर्वधन के लिए समर्पित है और उन्होंने संत सम्मेलन आयोजित करके मार्च 2019 में छोटे पशु को दिया जाने वाला अनुदान 16 रुपये से बढ़ाकर 20 रुपए तथा बड़े पशु का 32 से बढ़ाकर 40 रुपए कर दिया। उन्होंने कहा कि नई पंचायत समितियों में जब नंदी शालाएं शुरु होगी तो उनमें 9 महीने के अनुदान का प्रावधान है। <br /><br />इससे पहले  भाया ने विधायक अनिता भदेल के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में बताया कि वर्तमान में प्रदेश में कुल 3 हजार 222 पंजीकृत गौशालाएं है जिनमें 10.61 लाख गौवंश संधारित है। उन्होंने इसका जिलेवार विवरण सदन के पटल पर रखा। उन्होंने बताया कि गौ संरक्षण एवं संवर्धन निधि नियम 2016 के अन्तर्गत एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 180 दिवस की सहायता राशि दो चरणों में 90-90 दिवसों हेतु पात्र गौशालाओं में संधारित गौवंश के भरण पोषण के लिये वर्तमान में बडे गौवंश हेतु 40 रु. तथा छोटे गौवंश हेतु 20 रु. प्रतिदिन प्रति गौवंश की दर से दिये जाने का प्रावधान है।<br /><br /><br class="MsoNormal" /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 09 Mar 2022 17:04:36 +0530</pubDate>
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