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                <title>सिंगल स्क्रीन सिनेमाघर: वक्त के साथ अपनी धरोहर को संजोए हुए या लुप्त हो रहा अस्तित्व</title>
                                    <description><![CDATA[सिनेमाघर जहां सपने उड़ान भरते हैं और सितारे जमीं पर उतरते हैं, जहां 3 घंटे में आप हर वो एहसास कर लेते हैं। ख्वाबों के महल, बचपन की यादें, पहला प्यार, दोस्ती-दुश्मनी, दर्द और लड़ने का जज्बा, वो शहर वो गली, वो जगह, हर अनुभव महसूस करते हैं। अपनी हर परेशानी भूल कर पूरी जिंदगी जी लेते हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/with-time--the-existence-of-its-heritage-is-being-preserved-or-vanishing/article-13142"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/cinema.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर।</strong> सिनेमाघर जहां सपने उड़ान भरते हैं और सितारे जमीं पर उतरते हैं, जहां 3 घंटे में आप हर वो एहसास कर लेते हैं। ख्वाबों के महल, बचपन की यादें, पहला प्यार, दोस्ती-दुश्मनी, दर्द और लड़ने का जज्बा, वो शहर वो गली, वो जगह, हर अनुभव महसूस करते हैं। अपनी हर परेशानी भूल कर पूरी जिंदगी जी लेते हैं।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>सिनेमाघर और राजस्थान राज घराना</strong></span><br />दोनों ही एक दूजे से जुड़े है। महाराजा स्वामी राम सिंह द्वितीय का फिल्मों से रिश्ता बरसों पुराना रहा है, जिसे उन्होंने 1879 में एक थिएटर के रूप में बनवाया और जयपुर को पहला सिनेमाघर मिला, जिसका नाम राम प्रकाश टॉकीज था।  इसने नाटकों व फिल्मों को हमसे जोड़ा और वो सब दिया, जो हर दिल चाहता है ‘एंटरटेनमेंट’, लेकिन अब ये बंद हो चुका है। जयपुर और शानो शौकत का अटूट संबध है, एशिया का सबसे बड़ा सिनेमाघर यानी राज मंदिर, इसकी शान का  जीता जागता नमूना है।</p>
<p>इसकी सजावट, बनावट, नक्काशी और रॉयल टच के साथ यह पूरी दुनिया में मशहूर है। देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए राज मंदिर उनकी यादों का हिस्सा बन जाता है। बड़े स्क्रीन पर मखमली पर्दे, जो प्राकृतिक फूलों की खुशबू से भरे हैं, झूमरों से सजी ऊंची छत और नौ सितारे यहां आने वालों को खुद सितारा होने का एहसास कराते हैं। इसे मेहताब चंद्र जी गोलेछा ने बनवाया था। इसकी नींव 1966 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया ने रखी थी और 1976 में पूर्व मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी ने इसका उद्घाटन किया था। राजमंदिर में पहली फिल्म चरस लगी थी, जिसका नशा, आज भी सिर चढ़ कर बोल रहा है।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>गोलेछा सिनेमा :</strong> </span>गोलेछा सिनेमा का पूर्व नाम प्रेम प्रकाश था, जो राजस्थान में 70 मिमी स्क्रीन का एकमात्र हॉल, जो आज चंद्रमहल के नाम से जाना जाता है। अब ये सिनेमा हॉल तीन स्क्रीन वाला मल्टीप्लेक्स है। प्रसिद्ध प्रेम प्रकाश समोसा, इसकी बड़ी स्क्रीन की तरह बहुत मशहूर है।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>पोलो विक्ट्री सिनेमा :</strong> </span>भारत ने 1933 में पोलो में विश्व कप जीता था। ये हॉल उसी उपलक्ष्य में एक गर्व के रूप में बनाया गया, जिसका उद्घाटन स्वतंत्र भारत के राज्यपाल जनरल लॉर्ड माउंटबेटन ने किया। यह भी अब मल्टीप्लेक्स बन चुका है।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>जेम सिनेमा :</strong></span> फिल्म प्रेमियों का रत्न हुआ करता था, लेकिन प्रतिस्पर्धा के कारण ये बंद हो गया। कई वर्षों बाद नए लुक में यह फिर शुरू हुआ और दर्शकों से अपना रिश्ता बनाने लगा है।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>कोहिनूर सिनेमा :</strong> </span>नवीनीकृत करने के बाद ये दर्शकों की भीड़ को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।<br /><span style="color:#ff0000;"><strong>पारस सिनेमा :</strong> </span>गुलाबी रंग की दीवारों से सजा ये दर्शकों को खूब लुभाता है।<br /><span style="color:#ff0000;"><strong>लक्ष्मी मंदिर :</strong></span> बेहतरीन सिनेमा हॉल में से एक, लेकिन अब धीरे-धीरे अपना वजूद खो रहा है।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>अंकुर सिनेमा :</strong> </span>अपना अस्तित्व बनाए रखने में नाकाम हो रहा है।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>बंद हो चुके सिनेमा हॉल: </strong></span>सम्राट, संगम, मिनर्वा, मयूर, मान प्रकाश, मोती महल सिनेमाघर शहर की अमिट विरासत का हिस्सा रहे, लेकिन आर्थिक तंगी, आधुनिक तकनीक और रखरखाव के बिना बंद हो चुके हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Jun 2022 13:20:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता</title>
                                    <description><![CDATA[। पहला दिन मां शैलपुत्री, दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी, तीसरा दिन मां चंद्रघंटा, चौथे दिन मां कुष्मांडा, पांचवें दिन मां स्कंदमाता, छठे दिन मां कात्यायनी, सातवें दिन मां कालरात्रि, आठवें दिन मां महागौरी और नौवें दिन मां सिद्धिदात्रि की पूजा-अर्चना की जाती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur--or-goddess-sarvabhuteshu-shakti/article-7187"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/mata.jpg" alt=""></a><br /><p>शक्ति की आराधना दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती इन तीन रूपों में करते हैं। शास्त्रों में कहा गया है या देवी सर्वभुतेषु चेतनेत्यभिधीयते यानी सभी जीव जंतुओं में चेतना के रूप में ही मां देवी तुम स्थित हो। <br /><br />चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की आराधना की जाती है। पहला दिन मां शैलपुत्री, दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी, तीसरा दिन मां चंद्रघंटा, चौथे दिन मां कुष्मांडा, पांचवें दिन मां स्कंदमाता, छठे दिन मां कात्यायनी, सातवें दिन मां कालरात्रि, आठवें दिन मां महागौरी और नौवें दिन मां सिद्धिदात्रि की पूजा-अर्चना की जाती है। शक्ति की आराधना दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती इन तीन रूपों में करते हैं। शास्त्रों में कहा गया है या देवी सर्वभुतेषु चेतनेत्यभिधीयते यानी सभी जीव जंतुओं में चेतना के रूप में ही मां देवी तुम स्थित हो। ऐसे में नवरात्रि के नौ दिनों में मां के अलग-अलग रूपों को निहारने और उनकी आराधना की जाती है।  या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता नवरात्रि के इन 9 दिनों में मां की आराधना हमें शक्ति प्रदान करती है। प्रकृति के साथ इसी चेतना के उत्सव को नवरात्रि कहते है। नवरात्रि के 9 दिनों में पहले तीन दिन तमोगुणी प्रकृति की आराधना करते हैं, दूसरे तीन दिन रजोगुणी और आखरी तीन दिन सतोगुणी प्रकृति की आराधना का महत्व है।आखिरी दिन भक्त विजयोत्सव मनाते हैं, क्योंकि हम तीनो गुणों के परे त्रिगुणातीत अवस्था में आ जाते हैं। काम, क्रोध, मद, मत्सर, लोभ आदि जितने भी राक्षशी प्रवृति हैं उसका हनन करके विजय का उत्सव मनाते है।</p>
<p><br />हर एक व्यक्ति इससे मुक्त होकर शरीर की शुद्धि, मन की शुद्धि और बुद्धि में शुद्धि के लिए नवरात्रि के 9 दिनों में मां की अलग-अलग रूपों की आराधना करते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Apr 2022 11:23:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राजस्थान में तीसरी लहर में एक फीसदी से कम भर्ती हुए, मौतें प्रति हजार एक या इससे कम रही</title>
                                    <description><![CDATA[ओमिक्रॉन वेरिएंट से यूं मिला सुरक्षा कवच प्राकृतिक इम्यूनिटी विकसित हुई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/less-than-one-percent-were-admitted-in-the-third-wave-in-rajasthan--deaths-were-one-per-thousand-or-less--we-defeated-the-corona-that-caused-havoc-in-china--18-percent-of-the-variants-of-the-variant-came--but-neither-got-seriously-ill-nor-died/article-6565"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/corona2.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। चीन में कोरोना के ओमिक्रॉन बी-टू वेरिएंट से कोहराम मचा हुआ है। लाखों लोग न केवल गंभीर बीमार हो रहे हैं, बल्कि रिपोर्टस के मुताबिक करीब पांच फीसदी के करीब मौतें भी हो रही हैं। यही वेरिएंट राजस्थान की तीसरी लहर में बेअसर सा रहा। इससे लोग संक्रमित जरूर हुए, लेकिन ना गंभीर बीमार हुए और ना ही मौतें हुईं। चिकित्सा विभाग के जीनोम सिक्वेंसिंग की रिपोर्ट की माने तो ओमिक्रॉन के सामान्य वेरिएंट के अलावा बी-टू वेरिएंट ने राजस्थान में तीसरी लहर में कुल मरीजों में से करीब 18 फीसदी संक्रमित हुए, लेकिन संक्रमित होने वाले लोगों ने उसे मात दी। एक फीसदी मरीजों को भर्ती करने की जरूरत पड़ी और मौतें तो न के बराबर 0.001 फीसदी ही इससे हुई। जिनकी मौत हुई, उनमें भी ज्यादातर उम्रदराज, बीमारियों से ग्रस्त लोग ही थे। <br /><br /><strong>ओमिक्रॉन वेरिएंट से यूं मिला सुरक्षा कवच प्राकृतिक इम्यूनिटी विकसित हुई</strong><br />पहली और दूसरी डेल्टा वेरिएंट की लहर में आईसीएमआर के सीरो सर्वे में करीब 80 फीसदी लोगों में कोविड के खिलाफ एंडी बॉडीज मिली। अर्थात वायरस का संक्रमण हुआ, लेकिन वे लक्षण विहीन रहे। बीमार नहीं हुए। इस बड़ी आबादी में प्राकृतिक इम्यूनिटी वायरस के खिलाफ विकसित हो गई। इसके चलते हल्के वेरिएंट बी-टू ओमिक्रॉन के संक्रमण से लोगों में आई प्रतिरोधक क्षमता ने आसानी से मुकाबला कर लिया। <br /><br /><strong>टीकाकरण ने बूस्ट किया</strong><br />पहली लहर में सीरो सर्वे के मुताबिक 50 फीसदी से ज्यादा लोग सामान्य कोविड वायरस से संक्रमित हुए। हालांकि बीमार कम ही हुए, लेकिन एंडी बॉडीज बनी। फिर कोरोना टीकाकरण शुरू हो गया। पहले से एंटी बॉडीज और फिर कोरोना टीकाकरण की दो डोजों ने बूस्टर की तरह काम किया। दूसरी लहर में ही वैक्सीनेशन जारी रहा। ऐसे में लोग तीसरी लहर में ओमिक्रॉन से लड़ सके। <br /><br /><strong>चीन में संक्रमण का तांडव क्यों</strong><br />चीन में मौतें क्यों हो रही है, संक्रमण का तांडव क्यों है। इसकी डिटेल स्टडी सामने नहीं आई है। लगता है कि वहां प्राकृतिक इम्यूनिटी हमारे मुकाबले कम विकसित हुई। संभवत: जो वैक्सीन उपयोग में आई, वह कम असरकारक रही होगी। <br />-<strong>डॉ. रमन शर्मा, सीनियर प्रोफेसर</strong><br /><br /><strong>चीन में इम्यूनिटी नहीं मिली</strong><br />चीन और उसके पड़ोसी देशों में शुरुआती दो लहरों में कम केसेज आए। इससे प्राकृतिक इम्यूनिटी विकसित नहीं हुई। वैक्सीनेशन भी कम असरकारक दिख रहा है। हमारे यहां प्राकृतिक और वेक्सीन से इम्यूनिटी दोनों प्रभावी रहे। <br />-<strong>डॉ. वीरेन्द्र सिंह, सदस्य सीएम सलाहकार समिति</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Mar 2022 11:18:04 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>यूपी में कल खुलेगा 403 सीटों पर किस्मत का पिटारा, क्या एग्जिट पोल के आकड़े होंगे सच या एक बार फिर होंगे फेल</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव के लिये मतदान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी राज्यों के चुनाव की मतगणना एक साथ 10 मार्च को सुबह आठ बजे से शुरु होगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/the-box-of-luck-will-open-in-up-tomorrow-for-403-seats--will-the-exit-polls-prove-to-be-true-or-will-the-exit-polls-fail-once-again/article-5799"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/up1.jpg" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। बात यूपी चुनावों की करें तो  उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के दौरान सात चरण में 403 सीटों के लिये हुए मतदान का परिणाम उजागर होने का इंतजार कल 10 मार्च को मतगणना के साथ ही पूरा हो जायेगा। सात मार्च को सातवें और अंतिम चरण का मतदान होने के बाद चुनाव आयोग ने 10 मार्च को मतगणना की तैयारियां पूरी कर ली हैं।  गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव के लिये मतदान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी राज्यों के चुनाव की मतगणना एक साथ 10 मार्च को सुबह आठ बजे से शुरु होगी। उत्तर प्रदेश में 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 39.67 प्रतिशत मत हासिल कर 312 सीटें जीत कर इतिहास बनाया था। वहीं, सपा को 47 सीटों से संतोष करना पड़ा था और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को 19 एवं कांग्रेस को सिर्फ सात सीटें मिल सकी थी। 2022 के उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में ऊंट किस करवट बैठता है देशभर में इस बात की चर्चा जोरों पर है।</p>
<p>बता दे कि उत्तर प्रदेश में मतदान की प्रक्रिया सबसे लंबी चली। पांचों राज्यों में विधानसभा चुनाव के लिये निर्वाचन आयोग ने आठ जनवरी को चुनाव कार्यक्रम जारी किया था। इसके तहत उत्तर प्रदेश में 10 फरवरी से 07 मार्च तक सात चरण में मतदान हुआ। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक पूरे प्रदेश में लगभग 60.16 प्रतिशत मतदान हुआ जबकि 2017 में 61.11 प्रतिशत मतदान हुआ था।    </p>
<p>पहले चरण में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 11 जिलों की 58 विधानसभा सीटों पर 10 फरवरी को 62.43 प्रतिशत मतदान हुआ था। वहीं, दूसरे चरण में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ही नौ जिलों की 55 सीटों पर 14 फरवरी को हुए मतदान में 64.66 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इसके बाद 20 फरवरी को तीसरे चरण में बुंदेलखंड और कानपुर संभाग के 16 जिलों की 59 सीटों पर 62.28 प्रतिशत, चौथे चरण में 23 फरवरी को अवध और प्रयाग क्षेत्र के नौ जिलों की 59 सीटों पर 62.76 प्रतिशत, पांचवें चरण में 27 फरवरी को 12 जिलों की 61 सीटों पर 58.35 प्रतिशत, छठे चरण में 03 मार्च को पूर्वांचल के 10 जिलों की 57 सीटों पर 56.43 प्रतिशत और सातवें एवं अंतिम चरण में 07 मार्च को पूर्वांचल के ही वाराणसी सहित नौ जिलों की 54 सीटों पर 57.73 प्रतिशत मतदान हुआ।</p>
<p> उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) प्रशांत कुमार ने मतगणना की तैयारियों के बारे में बताया कि राज्य के सभी जिलों में 10 मार्च को मतगणना के मद्देनजर मतगणना स्थलों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये गये हैं। इसके लिये केंद्रीय पुलिस बल की 250 कंपनी और 61 कंपनी पीएसी की तैनात की गयी है। इनमें से सुरक्षा बलों की 36 कंपनी ईवीएम की सुरक्षा में तैनात रहेंगी और 214 कम्पनी मतगणना केन्द्रों पर कानून व्यवस्था की निगरानी में तैनात रहेंगी। इस बीच समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मतगणना में धांधली की कोशिशों का आरोप लगाते हुए ईवीएम की रखवाली के लिए 81 जिला प्रभारी नियुक्त किये हैं।    </p>
<p>गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 39.67 प्रतिशत मत हासिल कर 312 सीटें जीत कर इतिहास बनाया था। वहीं, सपा को 47 सीटों से संतोष करना पड़ा था और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को 19 एवं कांग्रेस को सिर्फ सात सीटें मिल सकी थी।</p>
<p>इस चुनाव में जिन प्रमुख उम्मीदवारों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है उनमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री तथा सपा अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के अलावा योगी सरकार के तमाम मंत्री शामिल हैं। योगी गोरखपुर सदर सीट से और अखिलेश मैनपुरी की करहल सीट से चुनाव मैदान में है। योगी को गोरखपुर सदर सीट पर सपा की सुभावती शुक्ला चुनौती दे रही हैं जबकि करहल में केन्द्रीय मंत्री एसपी ङ्क्षसह बघेल बतौर भाजपा उम्मीदवार अखिलेश के सामने चुनाव मैदान में हैं। अन्य प्रमुख उम्मीदवारों में कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही देवरिया की पथरदेवा सीट, परिवहन मंत्री अनिल राजभर शिवपुर सीट से और ऊर्जा राज्य मंत्री रमाशंकर ङ्क्षसह पटेल मडि़हान सीट से किस्मत आजमा रहे हैं। इनके अलावा सपा के वरिष्ठ नेता और सांसद आजम खान रामपुर सदर सीट से और उनके पुत्र अब्दुल्ला आजम खान रामपुर जिले की स्वार सीट से किस्मत आजमा रहे हैं। एक अन्य बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी के पुत्र अब्बास अंसारी मऊ सीट से सुभासपा के उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Wed, 09 Mar 2022 17:46:43 +0530</pubDate>
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