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                <title>election seats - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>केरलम चुनाव में कम अंतर वाली सीटों पर बिगड़ सकता है गेम</title>
                                    <description><![CDATA[केरलम विधानसभा चुनाव अपने अंतिम दौर में है और वोटिंग में चंद दिन ही बचे हैं, सियासी दलों ने अपनी अपनी जीत के लिए पूरी ताकत झोंक रखी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/the-game-may-get-worse-on-seats-with-less-margin/article-148924"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/122200-x-60-px)2.png" alt=""></a><br /><p>केरलम विधानसभा चुनाव अपने अंतिम दौर में है और वोटिंग में चंद दिन ही बचे हैं, सियासी दलों ने अपनी अपनी जीत के लिए पूरी ताकत झोंक रखी है, लेकिन ईरान के साथ अमेरिका और इजरायल की चल रही जंग का सियासी असर केरलम चुनाव वोटिंग पर पड़ सकता है, इसके चलते कई सीटों में सियासी उल्टफेर हो सकता है, क्योंकि मलयाली के लोग बड़ी संख्या में गल्फ में रहते हैं और जंग के चलते इस बार मतदान करने नहीं आ पा रहे हैं। दुबई, कतर, सउदी अरब, बहरीन सहित सभी खाड़ी देशों में बड़ी तादाद में मलयाली लोग हेल्थ और सर्विस सेक्टर में काम करते हैं, आम तौर पर मलयाली वोटर चुनाव के दौरान केरल आकर मतदान करते हैं, ईरान के साथ चल रही जंग के कारण फिलहाल फ्लाइट के मंहगे टिकट और जॉब पर गहराते संकट के चलते गल्फ में रहने वाले मलियाली वोटरों का इस बार आना मुश्किल है।</p>
<p>केरलम की सभी 140 विधानसभा सीटों पर 9 अप्रैल को मतदान है और नतीजे 4 मई को आएंगे, गल्फ देशों में रह रहे मलयाली वोटर्स अमेरिका ईरान युद्ध के कारण यात्रा करने से परहेज ही कर रहे हैं, इसके विधानसभा चुनाव के वोटिंग में हिस्सा लेने की कम संभावना है, जिससे राज्य की कम अंतर से हार जीत वाली सीटों का गेम बदल सकता है।</p>
<p><strong>केरलम की 50 सीटों पर :</strong></p>
<p>केरलम के तकरीबन 22 लाख लोग गल्फ के अलग अलग देशों में नौकरी या कारोबार के लिए रहते हैं, जो केरल के मालाबार इलाके वाली सीटों पर सियासी प्रभाव रखते हैं, कन्नूर से पलक्कड़ तक फैली 50 विधानसभा सीटों पर प्रवासी वोटर्स हमेशा महत्वपूर्ण रोल अदा करते रहे हैं, पिछले कई चुनावों में देखने को मिला है कि अधिकांश एनआरआई वोटिंग के समय आते हैं और अपने मताधिकार का इस्तेमाल करते हैं, इनके वोटिंग पैटर्न से कई नेताओं की किस्मत बुलंद होती है तो कई का गेम बिगड़ जाता है, गल्फ में रहने वाले ज्यादातर लोग इस बार मतदान के लिए देश नहीं लौटेंगे, इसका सीधा असर वोटिंग पर पड़ने के साथ साथ सीटों के गणित को भी प्रभावित करेगा, केरल की 140 सीटों में से 50 सीटों पर सियासी गेम खराब होने से सत्ता का पूरा समीकरण बदल सकता है।</p>
<p><strong>कम मार्जिन वाली सीटें :</strong></p>
<p>गल्फ में रहने वाले मलयाली वोटर अगर मतदान के लिए नहीं आते हैं, तो सीधा असर कम मार्जिन वाली सीटों के नतीजों को प्रभावित कर सकती है, 2021 के विधानसभा चुनाव में कई सीटों पर जीत और हार का फैसला बेहद कम अंतर से हुआ, पेरिनथलमान्ना में जीत हार का अंतर 38 वोट का था तो कुट्टियाडी में 333 वोटों की मार्जिन रही, तनूर, त्रिथला और पलक्कड़ निर्वाचन क्षेत्रों में बहुमत 5,000 से कम था।<br />कम अंतर वाली विधानसभा सीटों पर मतदान करने आने वाले प्रवासी मतदाताओं के न आने से राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों को निराश कर रही है, पिछले लोकसभा चुनावों के दौरान सांसद शफी परम्बिल सहित अन्य सांसदों द्वारा विदेशों में किए गए प्रचार अभियान बेहद रोचक रहा था, इस बार प्रमुख नेताओं द्वारा वोट मांगने के लिए खाड़ी देशों का दौरा करने की तस्वीर देखने को नहीं मिल रही हैं।</p>
<p><strong>जीत हार का मार्जिन :</strong></p>
<p>केरलम में हमेशा से ही 76 फीसदी मतदान होता रहा है, इस कारण जीत हार का मार्जिन भी बड़ा होता रहा है,उत्तरी केरल में मार्जिन वैसे भी दक्षिण के मुकाबले ज्यादा होती है, हालांकि खाड़ी देशों से आने वाले प्रवासियों का अपना आधार है, जिससे वोटों का अंतर ही कम होगा, कुत्तियाडी सीट पर करीब 16,000 मतदाता हैं, जहां पर पिछली बार जीत का अंतर सिर्फ 333 वोट था, नडापुरम में 12,000 के करीब मतदाता रजिस्टर्ड है, इस सीट पर पिछली बार जीत का अंतर 3,385 वोट ही था, ऐसे ही पय्योली से मेप्पयूर तक कई ऐसे इलाके हैं, जहां पर 40 प्रतिशत एनआरआई मतदाता हैं, अझिकोडे,कुथुपरंबा, कोयिलांडी, कन्नूर, तलिपरंबा, मलप्पुरम, त्रिशूर इत्यादि शामिल है।</p>
<p><strong>जंग के चलते चुनाव पर असर :</strong></p>
<p>युद्ध के कारण हवाई सफर में आई बाधा ने चुनाव प्रचार को भी प्रभावित किया, हालांकि, इस बार खाड़ी देशों में घर घर जाकर प्रचार किया जा रहा है और ऑनलाइन बैठकें आयोजित की जा रही हैं, साथ ही प्रवासी भारतीयों की अपने देश में मतदान करने की इच्छा का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है। केएमसीसी और चार्टर्ड उड़ानें हर साल, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग की सहयोगी संस्था केरल मुस्लिम कल्चरल सेंटर विभिन्न खाड़ी देशों और अमीरात के प्रवासी मतदाताओं के लिए निर्वाचन क्षेत्र समितियों के तत्वावधान में विशेष उड़ानें आयोजित करती है, इस संस्था के मिडिल ईस्ट में 7 लाख से अधिक सदस्य हैं, चुनाव नजदीक आने पर, निर्वाचन क्षेत्र समितियां खाड़ी देशों में प्रचार अभियान और जनसभाएं आयोजित करती हैं।</p>
<p><strong>समीकरणों में गड़बड़ी होना तय :</strong></p>
<p>युद्ध के चलते गल्फ से भारत आने वाली फ्लाइट के टिकट काफी महंगे हो गए हैं,एक हजार से अधिक उड़ानों के रद्द होने के कारण मलयालियों के लिए 9 अप्रैल के चुनावों के लिए घर लौटना मुश्किल हो गया है।</p>
<p>फ्लाइट के टिकट की कीमत सामान्य कीमत से चार गुना बढ़ जाना भी एक झटका है, हालांकि,स्कूल की छुट्टियां होने के कारण कई प्रवासी परिवार इस समय देश में हैं, उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इससे यूडीएफ के वोटों में आई कमी को पूरा करने में मदद मिलेगी। भारत में ई वोटिंग प्रणाली नहीं है, जबकि फिलीपींस जैसे देश विदेश से मतदान की अनुमति देते हैं। यूएई में हजारों प्रवासी स्थानीय युद्ध की स्थिति और हवाई सेवाओं की अनुपलब्धता के कारण अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग करने में असमर्थ हैं, इस बात की चिंता जताई जा रही है कि आर्थिक रूप से सक्षम लोग भी मतदान के बाद वापस लौट पाएंगे या नहीं। केरलम की आर्थिक रीढ़ माने जाने वाले प्रवासी समुदाय के सामने आने वाले ऐसे संकट आगामी विधानसभा चुनावों के नतीजों में बड़ा बदलाव ला सकते हैं, प्रवासियों की अनुपस्थिति से राजनीतिक समीकरणों में भारी गड़बड़ी होना तय है, खासकर मालाबार क्षेत्र में, जहां हर वोट महत्वपूर्ण है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 11:15:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बिहार विधानसभा के दूसरे फेज का मतदान : दूसरे चरण का चुनाव प्रचार समाप्त, 122 सीटों पर 11 को मतदान, नवरत्नों से लेकर स्टार कैंडिडेट्स की किस्मत का होगा फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में 20 जिलों की 122 सीटों पर 11 नवंबर को मतदान होगा। कुल 1302 प्रत्याशी मैदान में हैं, जिनमें 136 महिलाएं शामिल हैं। 3.7 करोड़ मतदाता 45,399 बूथों पर वोट डालेंगे। मतदान खत्म होने के बाद मतगणना 14 नवंबर को होगी। भारत-नेपाल सीमा 11 नवंबर तक सील रहेगी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/voting-for-the-second-phase-of-bihar-assembly-campaign-for/article-131940"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/111-(7).png" alt=""></a><br /><p>पटना। बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे फेज की 20 जिलों की 122 सीटों पर चुनाव प्रचार खत्म हो गया। इन सीटों पर वोटिंग 11 नंवबर को होगी। सभी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। चुनाव आयोग ने 14 नवंबर को मतगणना की तारीख तय की है। बिहार में दूसरे चरण के मतदान से पहले भारत-नेपाल सीमा पर निगरानी बढ़ा दी गई है। भारत-नेपाल बॉर्डर को 11 नवंबर की रात तक सील कर दी गई है। इस दौरान सीमा पर लोगों के आने-जाने पर रोक लगा दी गई है।</p>
<p><strong>दूसरे चरण की रण में 1302 प्रत्याशी :</strong></p>
<p>बिहार में दूसरे चरण की रण में 20 जिलों की 122 विधानसभा सीट पर 11 नवंबर को सुबह सात बजे से मतदान होगा। इस चरण में 1302 प्रत्याशी मैदान में हैं, जिनमें 136 महिलाएं, 1165 पुरुष और एक थर्ड जेंडर कैंडिडेट शामिल हैं। कुल 3,70,13,556 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। इस चरण में 45,399 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें 40,073 ग्रामीण और 5326 शहरी बूथ हैं।</p>
<p><strong>20 जिलों की 122 सीटों पर मतदान :</strong></p>
<p>    <strong>गयाजी : </strong>(10 सीटें) बेलागंज, गया टाउन, बोधगया, टिकारी, शेरघाटी, बाराचट्टी (एससी), अतरी, इमामगंज (एससी), गुरुवा, वजीरगंज<br />   <strong> कैमूर :</strong> (4 सीटें)- चैनपुर, मोहनिया, भभुआ, रामगढ़<br />    <strong>रोहतास : </strong>(7 सीटें) नोखा, डेहरी, काराकाट, करगहर, सासाराम, चेनारी, दिनारा<br />   <strong> औरंगाबाद : </strong>(6 सीटें) गोह, ओबरा, नवीनगर, कुटुम्बा (एससी), औरंगाबाद, रफीगंज<br />    <strong>अरवल : </strong>(2 सीटें) अरवल, कुर्था<br />    <strong>जहानाबाद :</strong> (3 सीटें) जहानाबाद, मखदुमपुर (एससी), घोसी<br />    <strong>नवादा :</strong> (5 सीटें) हिसुआ, नवादा, गोविंदपुर, वारसलीगंज, रजौली (एससी)<br />    <strong>भागलपुर : </strong>(7 सीटें) बिहपुर, गोपालपुर, पीरपैंती (एससी), कहलगांव, भागलपुर, सुल्तानगंज, नाथनगर<br />   <strong> बांका : (</strong>5 सीटें) बांका, अमरपुर, कटोरिया (एसटी), धोरैया (एससी), बेलहर<br />    <strong>जमुई :</strong> (4 सीटें) सिकंदरा (एससी), जमुई, झाझा, चकाई<br />   <strong> सीतामढ़ी :</strong> (8 सीटें) बेलसंड, बथनाहा (एससी), परिहार, सुरसंड, रीगा, सीतामढ़ी, रून्नीसैदपुर, बाजपट्टी<br />   <strong> शिवहर :</strong> (1 सीट) शिवहर<br />    <strong>मधुबनी : </strong>(10 सीटें) हरलाखी, बेनीपट्टी, खजौली, बाबूबरही, बिस्फी, मधुबनी, राजनगर, झंझारपुर, फुलपरास, लौकहा<br />   <strong> सुपौल : </strong>(5 सीटें) त्रिवेणीगंज (एससी), छातापुर, निर्मली, सुपौल, पिपरा<br />    <strong>पूर्णिया :</strong> (7 सीटें) अमौर, कसबा, बनमनखी (एससी), रूपौली, धमदाहा, पूर्णिया, बायसी<br />   <strong> अररिया :</strong> (6 सीटें) नरपतगंज, रानीगंज (एससी), फारबिसगंज, अररिया, जोकीहाट, सिकटी<br />    <strong>कटिहार : </strong>(7 सीटें) बरारी, कोढ़ा, कटिहार, कदवा, बलरामपुर, प्राणपुर, मनिहारी<br />   <strong> किशनगंज : </strong>(4 सीटें) ठाकुरगंज, किशनगंज, बहादुरगंज, कोचाधामन (एससी)<br />    <strong>पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) : </strong>(12 सीटें) रक्सौल, सुगौली, नरकटिया, हरसिद्धि, गोबिन्दगंज, केसरिया, कल्याणपुर, पीपरा, मोतिहारी, मधुबन, चिरैया, ढाका<br />   <strong> पश्चिमी चंपारण (बेतिया) : </strong>(9 सीटें) वाल्मीकिनगर, रामनगर, नरकटियागंज, बगहा, लौरिया, नौतन, चनपटिया, बेतिया, सिकटा।</p>
<p><strong>पहले फेज में भारी पड़ी महिलाएं :</strong></p>
<p>पहले चरण में महिलाओं ने पुरुषों से ज्यादा मतदान किया। कुल मतदान प्रतिशत 65.08 फीसदी रहा। महिलाओं का मतदान प्रतिशत 69.04 जबकि पुरुषों का 61.56 फीसद रहा। मीनापुर सीट पर सबसे ज्यादा 77.54 प्रतिशत मतदान हुआ।</p>
<p><strong>इस चरण में 9 मंत्रियों की किस्मत दांव पर :</strong></p>
<p>इस चरण में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कई मंत्री चुनाव लड़ रहे हैं, जिनमें सुपौल से बिजेंद्र प्रसाद यादव, चकाई से सुमित कुमार सिंह, झंझारपुर से नीतीश मिश्रा, अमरपुर से जयंत राज, छातापुर से नीरज कुमार सिंह बबलू, बेतिया से रेणु देवी, धमदाहा से लेशी सिंह, हरसिद्धि से कृष्णनंदन पासवान और चैनपुर से जमा खान शामिल हैं।</p>
<p><strong>महागठबंधन के इन स्टार चेहरों के लिए परीक्षा की घड़ी :</strong></p>
<p>वहीं, दूसरे चरण में महागठबंधन की ओर से राजद के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम, कटिहार की कदवा सीट से कांग्रेस विधायक दल के नेता शकील अहमद खान, तथा भाकपा (माले) विधायक दल के नेता महबूब आलम उम्मीदवार हैं।</p>
<p><strong>दूसरे फेज में एनडीए और महागठबंधन की कैंडिडेट लिस्ट को समझिए :</strong></p>
<p>दूसरे चरण में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के घटक दलों के भारतीय जनता पार्टी के 53 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला होना है। पहले चरण में भाजपा के 48 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में बंद हो चुकी है। जनता दल (यूनाइटेड) के 44, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के 15, राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के चार और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के छह उम्मीदवार भी दूसरे चरण में चुनावी मैदान में हैं। दूसरी ओर, महागठबंधन में राजद 72 सीटों, कांग्रेस 37 सीटों, विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) 10 सीटों और अन्य सहयोगी दल पांच सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं।</p>
<p><strong>सबसे छोटे और सबसे बड़े विधानसभा क्षेत्र के बारे में जानिए :</strong></p>
<p>क्षेत्रफल के लिहाज से इस चरण का सबसे छोटा विधानसभा क्षेत्र भागलपुर (23.887 वर्ग किमी) है, जबकि सबसे बड़ा चैनपुर (1814.15 वर्ग किमी) है। मतदाताओं की संख्या के अनुसार मखदुमपुर में सबसे कम 2,47,574, और हिसुआ में सबसे अधिक 3,67,667 मतदाता हैं।</p>
<p><strong>इन सीटों पर दोपहर 3, शाम 4 और शाम 5 बजे तक ही होगी वोटिंग :</strong></p>
<p>दूसरे चरण में सर्वाधिक संवेदनशील विधानसभा क्षेत्रों और बूथ की पहचान की गई है। इमामगंज विधानसभा क्षेत्र के सात बूथ पर मतदान अपराह्न तीन बजे तक, और 354 बूथ पर चार बजे तक होगा। बोधगया की 200 बूथ पर चार बजे तक और 106 बूथ पर शाम पांच बजे तक मतदान होगा। वहीं चैनपुर, रजौली, गोविंदपुर, सिकंदर, जमुई, झाझा और चकाई की सभी बूथों पर शाम चार बजे तक वोटिंग कराई जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Nov 2025 12:02:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>औरंगाबाद की 6 सीटों पर महागठबंधन की अग्निपरीक्षा, जातीय समीकरण से कटेगी जीत की फसल</title>
                                    <description><![CDATA[औरंगाबाद जिले की छह सीटों पर 11 नवंबर को मतदान होगा। कुल 76 प्रत्याशी मैदान में हैं। 2020 में सभी सीटें महागठबंधन ने जीती थीं, पर इस बार समीकरण बदले हैं। गोह, रफीगंज और कुटुंबा में त्रिकोणीय मुकाबले हैं। एनडीए के बागियों से स्थिति जटिल बनी है, जिससे कई सीटों पर कांटे की टक्कर संभावित है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/grand-alliances-litmus-test-on-6-seats-of-aurangabad-victory/article-131655"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/111-(1).png" alt=""></a><br /><p>औरंगाबाद। औरंगाबाद की छह सीटों पर एनडीए और महागठबंधन की अग्निपरीक्षा है। जिले के औरंगाबाद, ओबरा, गोह, रफीगंज, कुटुंबा एवं नबीनगर विधानसभा क्षेत्र में चुनाव हो रहा है। कुल 76 प्रत्याशी मैदान में हैं। वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में कुल 79 प्रत्याशी मैदान में थे। यहां दूसरे चरण में 11 नवंबर को मतदान होना है। वर्ष 2015 के चुनाव में महागठबंधन को तीन एवं एनडीए को तीन सीट मिली थी। वर्ष 2020 के चुनाव में एनडीए का यहां खाता नहीं खुला था। सभी सीटों पर महागठबंधन ने कब्जा कर लिया था। दो सीट पर कांग्रेस एवं चार सीट पर राजद विजयी बना था।</p>
<p>हालांकि, इस बार चुनावी समीकरण अलग हो गया है। एनडीए के दो प्रत्याशी यहां बागी हो गए हैं। टिकट कटने से प्रत्याशी व उनके समर्थक नाराज रहे हैं। एनडीए से जदयू के दो, बीजेपी के दो, लोजपा से एक एवं हिंदुस्तानी आवागम मोर्चा से एक प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं।</p>
<p><strong>दिग्गजों के बीच त्रिकोणीय मुकाबला :</strong></p>
<p>गोह विधानसभा में इस बार तीन दिग्गजों के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। भाजपा से डॉ. रणविजय कुमार, राजद से अमरेंद्र कुशवाहा एवं जन सुराज से सीताराम दुखारी चुनावी मैदान में डटे हैं। जदयू से तीन बार विधायक रहे डॉ. रणविजय के भाजपा से आने के कारण एनडीए के कार्यकर्ता एकजुट हैं। यहां राजनीति किस करवट बैठेगी कहना मुश्किल हो गया है।</p>
<p><strong>रफीगंज में रोचक दिख रहा मुकाबला :</strong></p>
<p>रफीगंज विधानसभा क्षेत्र में मुकाबला रोचक हो गया है। चुनाव से पहले लोजपा रामविलास में रहे प्रमोद कुमार सिंह के टिकट मिलने से पार्टी कार्यकर्ता नाराज हैं। विरोध कर रहे हैं। राजद से डॉ. गुलाम शाहिद चुनावी जंग में हैं। यहां मुकाबला को रोचक बनाने में जन सुराज के विकास कुमार सिंह उर्फ बबलू सिंह मैदान में हैं। रफीगंज से कुल 12 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं।</p>
<p><strong>आसान नहीं जीत, 15 प्रत्याशी मैदान में :</strong></p>
<p>औरंगाबाद विधानसभा क्षेत्र से इस बार 15 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं। भाजपा से त्रिविक्रम नारायण सिंह एवं कांग्रेस से आनंद शंकर सिंह के अलावा जन सुराज से नंदकिशोर यादव मैदान में हैं।</p>
<p><strong>सांसद लवली आनंद के पुत्र भी मैदान में :</strong></p>
<p>नबीनगर को मिनी चितौड़गढ़ कहा जाता है। यहां इस बार मुकाबला रोचक दिख रहा है। जदयू ने सांसद लवली आनंद के पुत्र शिवहर से विधायक चेतन आनंद को टिकट दिया है। राजद ने यहां से अमोद चंद्रवंशी को टिकट दिया।</p>
<p><strong>चुनावी रण में पूर्व मंत्री के पुत्र ऋषि भी :</strong></p>
<p>ओबरा विधानसभा में पूर्व मंत्री कांति सिंह के पुत्र ऋषि कुमार दूसरी बार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। यहां लोजपा के टिकट पर डॉ. प्रकाश चंद्र एनडीए के उम्मीदवार हैं। यहां जन सुराज से सुधीर शर्मा एवं बसपा से संजय कुमार प्रत्याशी हैं। यहां से सबसे अधिक कुल 18 प्रत्याशी मैदान में हैं।</p>
<p><strong>कुटुंबा में दिख रहा त्रिकोणीय मुकाबला :</strong></p>
<p>कुटुंबा विधानसभा सीट आरक्षित है। यहां इस बार चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल गया है। कुल 11 प्रत्याशी मैदान में हैं। जदयू से पूर्व विधायक ललन भुइयां इस बार हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा सेक्यूलर के टिकट पर मैदान में हैं। ये कांग्रेस विधायक राजेश कुमार के सामने खड़े हैं। यहां से इस बार एनडीए ने ललन भुइयां पर भरोसा जताया है। राजेश कुमार वर्ष 2015 एवं 2020 में चुनाव जीत चुके हैं। श्यामबली पासवान को जन सुराज पार्टी ने टिकट दिया है। त्रिकोणीय मुकाबला होने का आसार हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Nov 2025 13:29:44 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बिहार में पीके-ओवैसी का मुस्लिम समीकरण मायावती की रणनीति जैसा : बिहार चुनाव में मुस्लिम वोटर के प्रभाव वाली हैं 11 सीटें, एनडीए ने भी 4 मुस्लिमों को दिया टिकट </title>
                                    <description><![CDATA[बिहार चुनाव के पहले चरण के मतदान दिन ही मायावती ने कैमूर के भभुआ से प्रचार शुरू किया। बीएसपी ने सभी 243 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। मुस्लिम प्रभाव वाली 11 सीटों पर एआईएमआईएम, जन सुराज और महागठबंधन के कई मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में हैं। इससे वोट बंटने की संभावना बढ़ी है, जिसका फायदा एनडीए को मिल सकता है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pk-owaisis-muslim-equation-in-bihar-is-like-mayawatis-strategy-11/article-131649"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/1111.png" alt=""></a><br /><p>पटना। मायावती की भी बिहार चुनाव में एंट्री हो गई है और, यह ठीक उसी दिन हुआ है जब बिहार में पहले चरण का मतदान हो रहा है। मायावती ने कैमूर के भभुआ क्षेत्र का रुख किया है, ताकि उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे आसपास के इलाकों तक बीएसपी की बात पहुंचाई जा सके। बिहार की 200 से ज्यादा सीटों पर तो मायावती पहले भी चुनाव लड़ती रही हैं, 2025 के लिए पहले ही सभी 243 सीटों पर बीएसपी के चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया था। सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी करने वालों में प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी के अलावा आप पार्टी भी है और मकसद के हिसाब से देखें तो लब्बोलुआब सभी की भूमिका वोटकटवा से ज्यादा नजर नहीं आ रही है।</p>
<p><strong>बीएसपी पर बीजेपी की मददगार बनने का इल्जाम :</strong></p>
<p>मायावती के राजनीतिक विरोधी यूपी में बीएसपी पर बीजेपी की मददगार बनने का इल्जाम लगाते रहे हैं और, ये आरोप खासतौर पर मुस्लिम आबादी वाले इलाकों के लिए बीएसपी की रणनीति को लेकर लगता है - यूपी की ही तरह बिहार में भी ये नजारा दिखता है, खासकर तब जब प्रशांत किशोर और असदुद्दीन ओवैसी की रणनीति मुस्लिम प्रभाव वाली विधानसभा सीटों पर समझने की कोशिश करते हैं। जिस तरह से मुस्लिम आबादी वाली सीटों पर उम्मीदवार उतारे गए हैं, प्रशांत किशोर और असदुद्दीन ओवैसी भी काफी हद तक उसी रोल में नजर आते हैं, जिस तरह के बीएसपी नेता मायावती पर यूपी में आरोप लगाए जाते हैं।</p>
<p><strong>किसके कितने उम्मीदवार ?</strong></p>
<p>बिहार की अगर मुस्लिम वोटर के प्रभाव वाले 11 सीटों की बात करें।</p>
<p>हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सभी सीटों पर एआईएमआईएम के उम्मीदवार उतारे हैं। प्रशांत किशोर एक सीट छोड़कर 10 सीटों पर जन सुराज पार्टी के उम्मीदवारों को चुनाव लड़ा रहे हैं।</p>
<p>मुस्लिम आबादी वाली इन 11 सीटों में से 3 तो ऐसी हैं, जिन पर एआईएमआईएम और जन सुराज पार्टी के साथ साथ महागठबंधन और एनडीए तक ने मुस्लिम नेताओं को ही टिकट दिया है। वैसे एनडीए ने 11 में से 4 सीटों पर मुस्लिम चेहरों पर ही भरोसा किया है।</p>
<p>नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ने  4 जबकि चिराग पासवान की पार्टी एलजेपी-आर ने एक मुसलमान को टिकट दिया है। बीजेपी की तरफ से एक भी मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में नहीं है।</p>
<p><strong>मुस्लिम वोटों के बंटवारे का फायदा और नुकसान :</strong></p>
<p>चुनाव से पहले प्रशांत किशोर ने मुस्लिम वोट न बंटने देने की तरफ इशारा किया था। प्रशांत किशोर का कहना था, खुद को मुसलमानों का रहनुमा बताने वाली पार्टियों से हमारा यह कहना है कि  अगर मुसलमानों की इतनी चिंता है तो वे भी घोषणा करें कि जन सुराज जहां से मुस्लिम कैंडिडेट को लड़ाएगा, वहां से महागठबंधन अपना मुस्लिम कैंडिडेट नहीं देगा। लेकिन, ऐसा हुआ नहीं। वैसे भी महागठबंधन में ही फ्रेंडली मैच चल रहा हो, तो बिहार के चुनाव मैदान में ताल ठोकने का तो सबको हक मिला हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Nov 2025 12:32:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बिहार विधानसभा चुनाव : कैमूर की 3 सीटों पर चुनावी समर में पूर्व सांसद के पुत्र,  सियासी अखाड़े में अपने प्रतिद्धंदियों से लेंगे लोहा </title>
                                    <description><![CDATA[बिहार के कैमूर जिले की रामगढ़, मोहनिया, चैनपुर और भभुआ सीटों पर दूसरे चरण के विधानसभा चुनाव में कांटे की टक्कर है। रामगढ़ में छह बार के सांसद जगतानंद के पुत्र अजीत सिंह और भाजपा के अशोक सिंह मैदान में हैं। मोहनिया, भभुआ में पाला बदलने वाले विधायक भाजपा से चुनावी समर में, चैनपुर में जदयू और राजद के प्रत्याशी भिड़ेंगे।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/in-the-election-battle-for-3-seats-of-kaimur-in/article-131427"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/election.png" alt=""></a><br /><p>पटना। बिहार में 11 नवंबर को दूसरे चरण के 122 सीटों पर होने वाले चुनाव में कैमूर जिले की तीन सीटों रामगढ़, मोहनिया (सुरक्षित) और चैनपुर से पूर्व सांसदों के पुत्र सियासी अखाड़े में अपने प्रतिद्धंदियों से लोहा लेते नजर आएंगे।</p>
<p>कैमूर जिले में चार सीटें रामगढ़, मोहनिया (सुरक्षित), चैनपुर और भभुआ है। इनमें रामगढ़ में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), मोहनिया (सुरक्षित) और भभुआ में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और चैनपुर में जनता दल यूनाईटेड (जदयू) का कब्जा है।</p>
<p>रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक अशोक सिंह चुनावी समर में उतरे हैं। राजद ने यहां पूर्व सांसद जगतानंद के पुत्र और बक्सर के सांसद सुधाकर सिंह के भाई अजीत सिंह को चुनावी दंगल में उतारा है। वर्ष 2020 के चुनाव में रामगढ़ सीट पर हुये चुनाव में राजद के सुधाकर सिंह ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) उम्मीदवार अंबिका ङ्क्षसह को पराजित किया था। भाजपा प्रत्याशी अशोक सिंह तीसरे नंबर पर रहे थे। वर्ष 2024 के लोक सभा चुनाव में बक्सर सीट से सुधाकर सिंह के सांसद बनने के बाद रिक्त हुई रामगढ़ सीट पर हुए उप चुनाव में भाजपा के अशोक सिंह ने जीत दर्ज की थी।रामगढ़ सीट पर जगतानंद सिंह का दबदबा रहा है।वह यहां छह बार लगातार जीत दर्ज कर चुके हैं। वह बक्सर लोकसभा के सांसद भी रहे हैं। रामगढ़ सीट पर छह प्रत्याशी चुनावी दंगल में भाग्य आजमा रहे हैं।</p>
<p>मोहनिया (सुरक्षित) सीट से विधायक संगीता कुमारी पाला बदलकर भाजपा के टिकट पर चुनावी समर में उतरी हैं।राजद ने यहां श्वेता सुमन को चुनावी दंगल में उतारा था, लेकिन उनका नामांकन रद्द हो गया। राजद ने यहां निर्दलीय प्रत्याशी पूर्व सासंद छेदी पासवान के पुत्र रवि शंकर पासवान को समर्थन दिया है। वर्ष 2020 के चुनाव में राजद की संगीता कुमारी ने भाजपा प्रत्याशी निरंजन राम को पराजित किया था। राजद के टिकट पर चुनाव जीती संगीता कुमारी ने अब भाजपा का दामन थाम लिया है। मोहिनयां (सुरक्षित) से 12 उम्मीदवार चुनावी रणभूमि में उतरे हैं।</p>
<p>भभुआ विधानसभा क्षेत्र से विधायक भरत ङ्क्षबद भी पाला बदलकर भाजपा के खेमे में आ गये हैं। भाजपा ने यहां भरत बिंद को चुनावी अखाड़े में उतार दिया है। राजद ने यहां वीरेंद्र कुशवाहा पर दांव लगाया है। वर्ष 2020 में राजद उम्मीदवार भरत बिंद ने भाजपा की प्रत्याशी रिंकी रानी पांडेय को पराजित किया था। राजद के विधायक अरूण ङ्क्षबद ने अब भाजपा की शरण ले ली है और वह अब यहां पार्टी का कमल खिलाने की कोशिश कर रहे हैं। भभुआ से आठ प्रत्याशी चुनावी दंगल में ताल ठोक रहे हैं।</p>
<p>चैनपुर सीट से जदयू की ओर से अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमा खां चुनावी रण में उतरे हैं। राजद की ओर से पूर्व मंत्री बृजकिशोर बिन्द प्रत्याशी बनाये गए हैं। महागठबंधन के ही घटक दल विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के टिकट पर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बाल गोविन्द बिन्द भी चुनावी अखाड़े में ताल ठोक रहे हैं, जो राजद के उम्मीदवार बृज़किशोर बिंद को चुनौती दे रहे हैं। प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज ने यहां पूर्व सासंद स्व.लालमुनि चौबे के पुत्र हेमंत चौबे को चुनावी अखाड़े में उतार दिया है, जो मुकाबले को रोचक बनाने में लगे हुए हैं। वर्ष 2020 के चुनाव में बसपा उम्मीदवार जमा खान ने भाजपा के बृज किशोर बिंद को चुनावी रणभूमि में मात दी थी। जमा खान ने बाद में बसपा का साथ छोड़ जनता दल यूनाईटेड (जदयू) का दामन थाम लिया था। चैनपुर सीट पर 22 प्रत्याशी चुनावी दंगल में डटे हुए हैं।</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Nov 2025 18:32:43 +0530</pubDate>
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                <title>उत्तराखंड के विधानसभा चुनाव के रुझान में भाजपा को बहुमत</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तराखंड के विधानसभा चुनाव की सभी 70 सीटों के प्रारंभिक रुझान में भारतीय जनता पार्टीबहुमत के साथ 44 सीटों पर आग है। कांग्रेस 22 सीटों पर आगे चल रही है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/bjp-ahead-44-seats-in-uttarakhand-assembly-election/article-5841"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/bjp02-copy1.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उत्तराखंड के विधानसभा चुनाव की सभी 70 सीटों के प्रारंभिक रुझान में भारतीय जनता पार्टीबहुमत के साथ 44 सीटों पर आग है। कांग्रेस 22 सीटों पर आगे चल रही है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार बसपा दो सीटों पर और निर्दलय दो सीटों पर आगे चल रहे हैं। कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत आठ हजार से अधिक वोटों से पीछे चल रहे हैं और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सीट पर 900 सीटों  से पीछे चल रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Mar 2022 11:37:29 +0530</pubDate>
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                <title>उत्तर प्रदेश में रुझानों में भाजपा की 250 सीटों पर बढ़त </title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की 403 सीटों के लिये हो रही मतगणना के शुरुआत में 320 सीटों के रुझानों में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 200 और मुख्य विपक्षी दल समाजवादी (सपा) ने 89 सीटों पर बढ़त बना ली है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/bjp-lead-at-200-seats-in-election/article-5823"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/bjp02-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की 403 सीटों के लिये हो रही मतगणना के शुरुआत में 320 सीटों के रुझानों में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 200 और मुख्य विपक्षी दल समाजवादी (सपा) ने 89 सीटों पर बढ़त बना ली है। चुनाव आयोग के मतगणना संबंधी आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश की 320 सीटों के शुरुआती रुझान में 250 सीट पर भाजपा और 89 सीट पर समजावादी पार्टी के उम्मीदवार आगे है। निषाद पार्टी 04 सीट पर और सपा की सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) 06 पर आगे चल रही है। इसके अलावा कांग्रेस 03 सीट पर आगे चल रही है।</p>
<p>जनसत्ता दल लोकतांत्रिक दो सीट पर और जद यू 01 सीट पर आगे चल रही है। यह रूझान डाक मतपत्रों और ईवीएम के मतों की गिनती के आधार पर जारी किये गये हैं। अभी तक किसी सीट का परिणाम घोषित नहीं हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Mar 2022 10:45:56 +0530</pubDate>
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