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                <title>health care - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>प्रिडेक्टिव हेल्थ केयर में मील का पत्थर साबित होगी एआई</title>
                                    <description><![CDATA[ चिकित्सा विज्ञान का हर विभाग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंश के प्रयोग से मरीजों को लाभ पहुंचा सकता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/ai-will-prove-to-be-a-milestone-in-predictive-health-care/article-54951"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/predective-healthcare-me-mil-ka-patthar-sabit-hogi-ai...kota-news-19-08-2023-(2).jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। आपसे कहा जाए कि आपको भविष्य में हार्ट अटैक आएगा या नहीं, ये बात आपको पहले से बताई जा सकती है, तो हो सकता है कि आपको यकीन न हो।  लेकिन ये सच है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए आपके दिल का एम आर आई और सिटी स्केन देखकर ये बताया जा सकता है कि आप कितने खतरे पर हैं। भविष्य  लोगों में भविष्य में होने वाली बीमारियों की सटीक जानकारी के लिए अब चिकित्सा विभाग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एआई का उपयोग कर रहा है। आने वाले चार पांच साल में चिकित्सा क्षेत्र में इसका व्यापक उपयोग होगा। इसको लेकर शुक्रवार को मेडिकिल एज्यूकेशन यूनिट के तत्वावधान में मेडिकल कालेज आॅडिटोरियम में एक सतत शिक्षा कार्यक्रम सीएमई की ओर से  चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका को लेकर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में 170 संकाय सदस्यों, 150 रेजिडेन्ट डाक्टर्स एवं 700 मेडिकल छात्रों ने भाग लिया साथ ही राजस्थान टेक्निकल यूनिवर्सिटी के संकाय सदस्यों एवं पीजी छात्रों ने भी भाग लिया। प्रधानाचार्य डॉ. संगीता सक्सेना ने कार्यक्रम का शुभारम्भ किया उन्होंने कहा कि जिस प्रकार रेडियोडाइग्नोसिस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंश ने क्रान्ति ला दी है, उसी प्रकार चिकित्सा विज्ञान का हर विभाग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंश के प्रयोग से मरीजों को लाभ पहुंचा सकता है। </p>
<p><strong>चिकित्सा क्षेत्र में एआई लाएगा क्रांति</strong><br />आईसीएमआर इंसीट्युट के पूर्व निदेशक एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंश विभाग के प्रमुख डॉ. विश्ववर्धन राव  ने बताया कि  आने वाले चार पांच साल में में चिकित्सा के क्षेत्र में ये बहुत उपयोगी साबित होगा। उन्होनें बताया कि चिकित्सा विभाग का डाटा जटिल प्रकृति का होता है, इसके विश्लेषण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंश का प्रयोग क्रान्ति ला सकता है।</p>
<p><strong>की जा सकेंगी बीमारियों की सटीक भविष्यवाणी</strong><br />इंडियन इन्सटीट्यूट आॅफ साइंस बंगलौर की डॉ. वानती सुन्दरेशन ने बताया कि न्यूरोलोजी के मस्तिष्क रोगों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंश की मदद से दशकों पहले के पूवार्नुमान एवं भविष्यवाणी की जा सकती है। इस विषय पर उनकी टीम ने कई शोध कार्य किए हैं। आप कह सकते हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से अब डॉक्टर आपकी सेहत की कुंडली बना रहे हैं और भविष्यवाणी भी कर रहे हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 19 Aug 2023 15:37:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>डायबिटीज से शरीर में कई तरह के होते हैं नुकसान, 77 मिलियन लोग है पीड़ित :  परचानी</title>
                                    <description><![CDATA[हर दिन 30 मिनट व्यायाम करने से एक स्वस्थ जीवन जिया जा सकता है। इस मौके पर अनिल से शारीरिक, मानसिक , सामाजिक और अध्यात्मिक स्वास्थ्य की बात की। नेचुरोपैथी के बारे मे बताते हुए उन्होंने कहा की बीमारी का जड़ है हेल्दी खाना ना खाना। कोरोना काल में नेचुरोपैथी काफी लाभदायक और सफल रही।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/77-million-people-are-suffering-from-diabetes-today-anil-parchani/article-26686"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/a-11.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जेईसीआरसी के इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर द एक्सचेंज ऑफ स्टूडेंट्स फॉर टेक्निकल एक्सपीरियंस की ओर से वर्कशॉप आयोजित हुई, जिसमें 100 से भी अधिक बच्चों ने हिस्सा लिया। अनिल परचानी, प्रख्यात लेखक, हेल्थ कोच और न्यूट्रीशनिस्ट और डॉ प्रभात पंकज, डायरेक्टर, जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट ने स्वस्थ लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर चर्चा की। अनिल परचानी ने बताया की 77 मिलियन लोग डायबिटीज से पीड़ित है। डायबिटीज से शरीर में कई तरह के नुकसान होते हैं और अगर समय रहते सही कदम नहीं उठाए गए तो 2045 तक ये संख्या 77 मिलियन से बढ़कर ये 166 मिलीयन तक जाने का अनुमान लगाया जा रहा है ।</p>
<p>व्यायाम न करना एक अस्वस्थ शारीर का मुख्या कारण बताया गया। हर दिन 30 मिनट व्यायाम करने से एक स्वस्थ जीवन जिया जा सकता है। इस मौके पर अनिल से शारीरिक, मानसिक , सामाजिक और अध्यात्मिक स्वास्थ्य की बात की। नेचुरोपैथी के बारे मे बताते हुए उन्होंने कहा की बीमारी का जड़ है हेल्दी खाना ना खाना। कोरोना काल में नेचुरोपैथी काफी लाभदायक और सफल रही। शरीर को डिटॉक्स करने के तरीके बताएं और कहा कि हफ्ते में एक बर व्रत/फास्ट रखना चाहिए। अर्पित अग्रवाल,वाइस चेयरपर्सन, जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी ने दोनो प्रवक्ताओं का धन्यवाद करते हुए बच्चों को एक स्वस्थ जीवन जीने का सुझाव दिया । अर्पित अग्रवाल ने इस मौके पर अपनी भागदौड़ से भरी जिंदगी में हेल्थ और न्यूट्रिशन को कैसे व्यवस्थित किया है इस बारे में वर्कशॉप मे बताया। आईएईएसटीई की हेड नीलाक्षी चतुर्वेदी ने धन्यवाद ज्ञापन किया और कहाँ की हमारी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी में ज़रूरी हैं की थोड़ा समय हम अपने लिए निकाले जिस से की हम स्वस्थ और गुणवत्ता जीवन जी सकेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Oct 2022 15:23:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वर्ल्ड ऑर्थराइटिस डे : रूमेटॉयड ऑर्थराइटिस-बुढ़ापे में होने वाली बीमारी अब युवाओं को बना रही शिकार </title>
                                    <description><![CDATA[सीनियर हैड एंड माइक्रो सर्जन डॉ. विनीत अरोड़ा ने बताया कि अंगूठे में भी ऑर्थराइटिस होती है। इसे सीएमसी ज्वाइंट ऑफ  थम्ब ऑर्थराइटिस कहा जाता है। शुरुआती चरण में दवाइयों द्वारा इसका उपचार किया जाता है। वहीं स्थिति अधिक बिगड़ने पर घुटने की तरह अंगूठे की ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी भी की जाती है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/world-arthritis-day-rheumatoid-arthritis-the-disease-of-old/article-26248"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/p-22.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। बिगड़ी लाइफ  स्टाइल के कारण ऑर्थराइटिस तेजी से बढ़ रहा है। बुढ़ापे में होने वाली यह बीमारी अब युवाओं को भी तेजी से अपना शिकार बना रही है। देश में हर 100 में से एक व्यक्ति को रूमेटॉयड ऑर्थराइटिस है। हर 200 में से एक व्यक्ति को कमर का गठिया है। हालांकि जागरूकता बढ़ने से शुरुआती लक्षण दिखते ही इसका उपचार शुरू हो जाता है। टारगेटेड थैरेपी, लाइफ  स्टाइल में परिवर्तन कर ऑर्थराइटिस को काबू में किया जा सकता है। यदि जोड़ पूरी तरह से खराब हो जाए तो ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी ही इसका एकमात्र उपचार है। </p>
<p><strong>महिलाओं में खतरा ज्यादा</strong> </p>
<p>सीनियर ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. एसएस सोनी ने बताया कि महिलाओं में ऑर्थराइटिस का खतरा ज्यादा होता है। उम्र बढ़ने के साथ जब महिला को मीनोपॉज होता है तो ऑर्थराइटिस के खतरे को कम करने वाले फीमेल हॉर्मोन कम हो जाते हैं, जिससे उनमें आर्थराइटिस होने की संभावना पुरुषों से अधिक होती है।  </p>
<p><strong>अंगूठे में भी हो सकता है ऑर्थराइटिस</strong></p>
<p>सीनियर हैड एंड माइक्रो सर्जन डॉ. विनीत अरोड़ा ने बताया कि अंगूठे में भी ऑर्थराइटिस होती है। इसे सीएमसी ज्वाइंट ऑफ  थम्ब ऑर्थराइटिस कहा जाता है। शुरुआती चरण में दवाइयों द्वारा इसका उपचार किया जाता है। वहीं स्थिति अधिक बिगड़ने पर घुटने की तरह अंगूठे की ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी भी की जाती है। </p>
<p><strong>नर्व ब्लॉक तकनीक भी है कारगर</strong></p>
<p>सीनियर पेन एक्सपर्ट डॉ. संजीव शर्मा ने बताया कि ऑर्थराइटिस के दर्द को कम करने के लिए नर्व ब्लॉक ट्रीटमेंट भी हैं। अधिक उम्र, दिल की बीमारियां, अत्यधिक वजन, कमर की बीमारियां, हाई रिस्क सर्जरी के कारण जो मरीज ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी नहीं करा सकते या नहीं कराना चाहते उनके लिए यह तकनीक कारगर है। इसमें अल्ट्रासाउंड मशीन से घुटनों की जेनिकुलर नसों को ढूंढ कर, आरएफए नीडल से नसों की जांच करके, उन्हें सुन्न कर दिया जाता है, जिससे नसों की दर्द पैदा करने की क्षमता काफी कम हो जाती है। </p>
<p><strong>अंतिम उपचार ज्वाइंट रिप्लेसमेंट</strong></p>
<p>सीनियर ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. नीरज अग्रवाल ने बताया कि ऑस्टियो आर्थराइटिस आमतौर पर घुटनों को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है। दवाइयों से आराम नहीं मिलने पर एक स्टेज के बाद इसका अंतिम उपचार नी रिप्लेसमेंट सर्जरी ही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Oct 2022 10:12:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>न्यूरोइंटरवेंशन रेडियोलॉजी तकनीक बनी मरीजों के लिए वरदान </title>
                                    <description><![CDATA[शहर के एक निजी अस्पताल के चिकित्सकों ने आधुनिक न्यूरोइंटरवेंशन मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी तकनीक से बिना सर्जरी किए दिमाग की मुख्य नस में फंसे हुए क्लॉट को तार के जरिए निकालकर मरीज की जान बचाई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/neurointervention-radiology-technology-became-a-boon-for-patients/article-13133"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/open.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर</strong>। शहर के एक निजी अस्पताल के चिकित्सकों ने आधुनिक न्यूरोइंटरवेंशन मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी तकनीक से बिना सर्जरी किए दिमाग की मुख्य नस में फंसे हुए क्लॉट को तार के जरिए निकालकर मरीज की जान बचाई है। जयपुर निवासी 65 वर्षीय बुजुर्ग को अचानक बोलने में तकलीफ हुई और वे बेहोश हो गए, उन्हें तुरंत इटरनल अस्पताल की इमरजेंसी में लाया गया। यहां उनका एमआरआई और एंजियोग्राफी कराई, जिसमें दिमाग की बड़ी मुख्य नस में ब्लॉकेज मिला।</p>
<p>अस्पताल के न्यूरोइंटरवेंशन विशेषज्ञ डॉ. मदनमोहन गुप्ता ने डीएसए और मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी कर बिना चीरे टांके के कैथलेब में ले जाकर दिमाग की नस से क्लॉट निकाल दिया और मुख्य नस को भी खोल दिया। डॉ. गुप्ता ने बताया कि मरीज को तीन दिन बाद अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया है। प्रोसीजर टीम में न्यूरोसाइंस विभाग के चेयरमैन डॉ. सुरेश गुप्ता, डॉ. सुरेन्द्र, डॉ. अरुण, डॉ. ताराचंद, आईसीयू के डॉ. अरुण शर्मा सहित अन्य स्टाफ मौजूद रहा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Jun 2022 12:28:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हेल्थ की देखभाल अब होगी ऑनलाइन </title>
                                    <description><![CDATA[64 हजार हेल्थकर्मी एप से जुड़ेंगे, मरीज-लाभार्थी का डाटा बताएगा किसको दवा-जांच के लिए लाना है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/health-care-will-now-be-online--64-thousand-health-workers-will-connect-with-the-app--the-patient-beneficiary-data-will-tell-whom-to-bring-for-drug-testing/article-5943"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/india-feature.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। चिकित्सा विभाग निरोगी राजस्थान बनाने के लिए अब टेक्नोलॉजी का भी इस्तेमाल करने जा रहा है। हाईटेक ऑनलाइन सिस्टम विकसित किया जा रहा है, जिसके माध्यम से प्रदेश की 52 हजार आशा सहयोगिनियों और 12 हजार कम्यूनिटी हेल्थ वर्कर्स अत्याधुनिक एप से आमजन के स्वास्थ्य का ख्याल रखेंगे। किसे टीका लगना है। किसकी जांच होनी बाकी है।</p>
<p><br />कुपोषित बच्चों को पोषाहार और दवा की दोबारा से डोज कब देनी है। गर्भवती को आंगनबाड़ी केन्द्र और अस्पताल देखभाल के लिए कब ले जाना है। यह सब अब आशा-कम्यूनिटी हेल्थ वर्कर्स के मोबाइल में होगा। बस केवल एक बारगी उन्हें टारगेट गु्रप के घर जाकर संपर्क करना होगा। बार-बार जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। डाटा एक बार अपलोड कर दिया जाएगा। फिर एप स्वत: ही आगामी रिकॉलिंग करवाएगा। रोज बताएगा कि आज किन-किन को फिर से अस्पताल दवा-जांच इत्यादि के लिए बुलाना है। उनके मोबाइल या संपर्क दूरभाष नंबर से फोन पर वे उसे याद दिलाएंगे कि आज आपको अस्पताल जाना है।<br /><br /><strong>यूं समझे कैसे होगी : हाईटेक मॉनिटरिंग</strong><br />हर आशा के एरिया में जो गर्भवती महिलाएं होंगी उनका अस्पताल से सीधा डाटा अपलोड होगा और आशा के पास पहुंचेगा। उसकी जांच-दवा और टीके फिर से कब लगने हैं। अलर्ट मैसेज एप पर आ जाएगा। वे संपर्क करेगी और उसकी चिकित्सकीय देखभाल को फोलो कर अस्पताल लाने की जिम्मेदारी पूरी कर आॅनलाइन अपडेट भी करेगी। बाल स्वास्थ्य में चिन्हित कुपोषित बच्चों का पूरा रिकॉर्ड आशा फील्ड से ही अपलोड करेगी। दवा-जांच और पोषाहार दिलवाएगी, इनके खत्म होने पर अलर्ट मोबाइल पर आएगा। फिर से उसे डोज दिलवाने ले जाएगी। नवजात के टीकाकरण का भी समय-समय पर यूं ही अपडेट आएगा।<br /><br />सभी 64 हजार कर्मियों को एप हैडलिंग की ट्रेनिंग दी जाएगी। आशा को फील्ड में परेशानी से निजाद मिलेगी। हेल्थ की मॉनिटरिंग भी प्रोपर होगी। आशा और कम्यूनिटी हेल्थ वर्कर्स को इंसेंटिव भी ऑनलाइन दिया जाएगा। - <strong>आशुतोष ऐटी पेडणेकर, शासन सचिव, चिकित्सा विभाग।</strong>  <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Mar 2022 12:47:21 +0530</pubDate>
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