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                <title>milk - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>राजस्थान दुग्ध सहकारी संस्थाओं के भर्ती नियमों में संशोधन लागू, भारी व हल्के वाहनों के लिए ड्राइविंग लाइसेंस अनिवार्य</title>
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                        <![CDATA[राजस्थान को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (आरसीडीएफ) और इससे संबद्ध जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघों (डीयूएसएस) के कर्मचारियों के लिए 2020 में जारी भर्ती नियमों में संशोधन किया गया है]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/amendment-in-the-recruitment-rules-of-rajasthan-milk-cooperatives-applied/article-111761"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/144.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (आरसीडीएफ) और इससे संबद्ध जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघों (डीयूएसएस) के कर्मचारियों के लिए 2020 में जारी भर्ती नियमों में संशोधन किया गया है। यह संशोधन राजस्थान सहकारी सोसायटी नियम 2003 के नियम 39 के तहत रजिस्ट्रार मंजू राजपाल द्वारा किए गए हैं। संशोधित नियम तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं।</p>
<p>भर्ती नियमों में संशोधन के अनुसार "दस्तावेज़ सत्यापन और अंतिम परिणाम की घोषणा" को अपडेट किया गया है। अब प्रत्येक पद/कैडर की रिक्तियों के अनुपात में (1:1) उम्मीदवारों को दस्तावेज़ सत्यापन के लिए बुलाया जाएगा। चयन प्रक्रिया ऑनलाइन परीक्षा, कौशल परीक्षा (जहां अनिवार्य हो) या साक्षात्कार पर आधारित होगी। अंतिम चयन मेरिट के आधार पर किया जाएगा और परिणाम राजस्थान सहकारी भर्ती बोर्ड की वेबसाइट पर उपलब्ध होगा।</p>
<p>इसके अलावा"टेबल E" में भी कई संशोधन किए गए हैं। विभिन्न पदों के लिए योग्यता और अनुभव के मानदंड अद्यतन किए गए हैं। जैसे, ड्राइवर पद के लिए 10वीं कक्षा उत्तीर्ण और भारी व हल्के वाहनों के लिए ड्राइविंग लाइसेंस अनिवार्य है। हेल्पर पद के लिए साक्षरता के साथ एक वर्ष का अनुभव और ड्राइविंग लाइसेंस के साथ ट्रेड टेस्ट पास करना आवश्यक होगा। संशोधित नियमों में तकनीकी पदों, जैसे फेरोमैन और डेयरी वर्कर, के लिए न्यूनतम योग्यता 10वीं कक्षा उत्तीर्ण निर्धारित की गई है। यह संशोधन दुग्ध सहकारी संस्थाओं की भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और कुशल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Apr 2025 14:24:16 +0530</pubDate>
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                <title>देव नारायण योजना के पशु पालकों को शहर में लाकर बेचना पड़ रहा दूध </title>
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                        <![CDATA[जिससे पशु पालक अपना जीवन स्तर सुधार सके। इसके साथ ही यहां पशु पालकों के दूध क्रय करने के लिए डेयरी प्लांट भी लगाया गया है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-animal-breeders-of-dev-narayan-yojana-have-to-bring-milk-to-the-city-and-sell-it/article-91165"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/427rtrer-(1)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर विकास न्यास की ओर से बंधा धर्मपुरा में पशु पालकों के लिए विकसित की गई देव नारायण आवासीय योजना में लगाए गए डेयरी प्लांट का स्थानीय पशु पालकों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। डेयरी में बाहर से दूर लिया जा रहा है और योजना के पशु पालकों को शहर में लाकर दूध बेचना पड़ रहा है। कांग्रेस सरकार के समय में तत्कालीन स्वायत्त शासन मंत्री  शांति धारीवाल के प्रयासों से बंधा धर्मपुरा में देव नारायण आवासीय योजना विकसित की गई थी। जिसमें शहर में बाड़े बनाकर व सरकारी भूमि पर अतिक्रमण कर रह रहे पशु पालकों को शिफ्ट किया गया है। यहां सभी को मकान व पशुओं के लिए बाड़े बनाकर दिए गए हैं। जिससे पशु पालक अपना जीवन स्तर सुधार सके। इसके साथ ही यहां पशु पालकों के दूध क्रय करने के लिए डेयरी प्लांट भी लगाया गया है। जिससे स्थानीय पशु पालकों द्वारा योजना में ही अपना दूध डेयरी में दिया जा सके। जिससे उन्हें दूध बेचने के लिए परेशान नहीं होना पड़े। लेकिन जिस मकसद से डेयरी प्लांट लगाया गया था उसका स्थानीय पशु पालकों को लाभ नहीं मिल रहा है। </p>
<p><strong>योजना में रोजाना 8 हजार लीटर दूध उत्पादन</strong><br />स्थानीय पशु पालक मंगला गुंजल का कहना है कि यहां योजना में करीब 400 पशु पालक है। अधिकतर पशु पालकों के पास पशु होने से हर घर में दूध निकल रहा है। रोजाना करीब 200 टंकी यानि करीब 8 हजार लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। ऐसे में उस दूध को खपाने के लिए डेयरी माध्यम है लेकिन वहां दूध नहीं लेने से उसे शहर में लाकर बेचना पड़ रहा है। जिससे पशु पालकों को न तो डेयरी का लाभ मिल रहा है । वरन् पशु पालकों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। </p>
<p><strong>शहर में बेचने पर हो रहा नुकसान</strong><br />देव नारायण योजना निवासी पशु पालक  रंगलाल कटारिया ने बताया कि डेयरी में दूध नहीं लेने से पशु पालकों को कोटा शहर में आकर दूध बेचना पड़ रहा है। अधिक लीटर दूध वालों को तो शहर में आने-जाने पर खर्चा निकलने से अधिक नुकसान नहीं हो रहा है। जबकि 10 से 15 लीटर दूध वालों को शहर में आने पर एक बार में 100 रुपए का पेट्रोल व चाय नाश्ते समेत अन्य खर्चा की करना पड़ रहा है। जिससे जितने का दूध नहीं बिकता उससे ज्यादा तो खर्चा हो रहा है। साथ ही शहर में आने-जाने पर समय भी अधिक लग रहा है। </p>
<p><strong>फैट के हिसाब से नहीं दिया जा रहा अतिरिक्त भुगतान</strong><br />देव नारायण आवासीय योजना विकास समिति के अध्यक्ष किरण लांगड़ी ने बताया कि न्यास की ओर से डेयरी प्लांट लगाते समय कार्यादेश दिया गया था। जिसके तहत स्थानीय पशु पालकों को उनके दूध में फैट के हिसाब से प्रति फैट 50 पैसे का अतिरिक्त भुगतान किया जाएगा। लेकिन हालत यह है कि डेयरी में उस शर्त की पालना नहीं हो रही है। जिससे पशु पालकों को डेयरी में दूध देने पर नुकसान हो रहा है। डेयरी में बाहर से लिए जा रहे सस्ते दाम पर ही भुगतान किया जा रहा है। ऐसे में पशु पालक यहां दूध नहीं दे रहे है। डेयरी में बाहर से ही दूध क्रय किया जा रहा है।  लांगड़ी ने बताया कि एक लीटर दूध में यदि 6 से 8 फैट होते हैं तो प्रति लीटर 3 से चार रुपए का नुकसान हो रहा है।  </p>
<p><strong>पशु चिकित्सा केन्द्र व डिस्पेंसरी में डॉक्टर नहीं</strong><br />देव नारायण आवासीय योजना निवासी पशु पालक  जीवराज काड ने बताया कि योजना में पशुओं के उपचार के लिए पशु चिकित्सा केन्द्र तो बना रखा हैै। उसका भवन भी बना हुआ है लेकिन उस पर ताला लटका है। इसका कारण वहां चिकित्सक ही नहीं है। इसी तरह से बीमार लोगों के उपचार के लिए डिस्पेंसरी तो बनी हुई है लेकिन वहां भी डॉक्टर नहीं होने से उस पर भी ताला लटका हुआ है। ऐसे में न तो पशुओं का उपचार हो पा रहा है और न ही लोगों का। इनके लिए शहर में ही जाना पड़ रहा है।  उन्होंने बताया कि योजना में इंगलिश मीडियम स्कूल का संचालन रोटरी क्लब कोटा द्वारा किया जा रहा है। वह सही ढंग से चल रहा है। </p>
<p><strong>पशु पालकों को करेंगे तैयार</strong><br />डेयरी में स्थानीय पशु पालकों से ही दूध लेने की योजना है लेकिन पशु पालक डेयरी में दूध ही नहीं दे रहे है। अधिकतर पशु पालक शहर में दूध बेचना पसंद कर रहे हैं। ऐसे में बाहर से ही दूध लेना पड़ रहा है। प्रयास करेंगे कि स्थानीय पशु पालकों से बात कर उन्हें डेयरी में दूध देने के लिए तैयार किया जाएगा। <br /><strong>- जगदीश शर्मा, एक्स ईएन केडीए</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Sep 2024 16:29:31 +0530</pubDate>
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                <title>सरस डेयरी की बड़ी चूक, खराब पानी मिलाने से दूध हो रहा लाल</title>
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                        <![CDATA[शहर में किसी ने कहा दूध फट गया, किसी ने कहा लाल हो गया। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/saras-dairy-s-big-mistake--milk-is-turning-red-due-to-mixing-of-bad-water/article-85922"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/saras-dairy-ki-badi-chok-kharab-gya-pani-milane-se-doodh-ho-raha-lala...kota-news-26.07.2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा सरस डेयरी मैं तैयार किए जा रहे दूध में संस्थान की बड़ी चूक  सामने आई है। डेयरी के कारिन्दों ने गंदे पानी को ट्यूबवैल के जरिए छोड़ दिया। इस दूध को सप्लाई भी कर दिया गया। बाद में उपभोक्ताओं की शिकायत सामने आने पर आनन फानन में  मीटिंग बुलाकर कारणों की जांच की गई। इधर उपभोक्ताओं ने बताया कि दो दिन से दूध को गर्म करने पर वह नारंगी जैसे रंग का नजर आ रहा है। कई उपभोक्ताओं ने दूध फटने की भी शिकायत की है। हालांकि इस गड़बड़ी को एक ही दिन में ठीक कर लिया बताते हैं। कोटा सरस डेयरी में दूध की शुद्धता के लिए आधुनिक मशीन और पूरा टेस्टिंग विभाग बना हुआ है। उसके बावजूद पिछले दो दिन से दूध के रंग बदलने की शिकायतें आने से इसकी   शुद्धता पर प्रश्न चिन्ह खड़ा हो गया है। डेयरी मिल्क पशुपालकों से इकट्ठा होने के बाद आपके घर तक पैकेट के जरिए पहुंचता है।  उसके बावजूद दूध का रंग चेज होना सिस्टम में खामियों को उजागर कर रहा है। इस बारे में डेयरी चैयरमेन चेनसिंह ने बताया कि कोटा डेयरी में हाल में एक नया ट्यूबवैल लगाया है। गलती से उसका पानी उपयोग में लिया गया है। इसके चलते यह समस्या आ रही है।  दो दिन तक बिना फिल्टर पानी का दूध में शामिल होने से गुणवत्ता पर असर पड़ा है। डॉक्टरों का कहना है कि पहले ही मानसून सक्रिय होने से पेट जननित बीमारियों के मरीज बढ़ रहे हैं। ऐसे ऐसा दूध पीने से पेट दर्द और दस्त की शिकायत होने की संभावना रहती है। </p>
<p><strong>इन मानको से होकर गुजरता है दूध फिर भी हुई गड़बड़</strong><br />सरस डेयरी प्रबंधक  दिलकुश मीणा ने बताया कि सरस दूध को पैकेट में पैक करने से पहले कई मानकों पर जांच किया जाता है। जिससे दूध की गुणवत्ता निर्धारित होती है। आम परीक्षण सोमैटिक सेल काउंट (एससीसी), स्टैंडर्ड प्लेट काउंट (एसपीसी), प्रारंभिक ऊष्मायन गणना (पीआईसी), लैब पाश्चुरीकृत गणना (एलपीसी) और कोलीफॉर्म गणना हैं। डेयरी के पानी सप्लाई वाले सेक्शन में छोटी तकनीकी खराबी आई थी उसके ठीक कर लिया गया है। दूध में किसी प्रकार कोई गड़बड़ नहीं है। पूरी तरह गुणवत्ता युक्त है।</p>
<p><strong>दो तीन दिन से दूध गर्म करते हल्का लाल रंग का हो रहा</strong><br />पिछले दो तीन दिन से सरस दूध की नीली थैली का दूध को गर्म करने पर उसका रंग हल्का लाल रंग का हो रहा है। इसकी शिकायत डेयरी बूथ वाले से भी की लेकिन वो भी संतोषप्रद जबाव नहीं दे सका । बच्चे दूध का कलर देखकर नहीं पी रहे है। अभी चाय और कॉफी इसका उपयोग ले रहे हैं। <br /><strong>-सोनू कंवर, गृहणी निवासी कुन्हाडी </strong></p>
<p><strong>शिकायत आने पर दूध के लेंगे सैंपल</strong><br />सरस दूध में किसी प्रकार कोई खराबी आ रही है तो इसका सैंपल लिया जाएगा। डेयरी में दूध की गुणवत्ता को लेकर आधुनिक मशीनें लगी हुई है। फिर भी दूध में लाल रंग की शिकायत पर इसके नमूने लेकर जांच की जाएगी। <br /><strong>-संदीप अग्रवाल, खाद्य सुरक्षा अधिकारी कोटा </strong></p>
<p><strong>डाक्टर कहते हैं </strong><br />डेयरी का दूध वैसे तो पाश्चयुरीकृत होता है। इसके प्रोसेस के दौरान फिल्टर पानी का प्रयोग नहीं करने से या अन्य कोई पदार्थ  दूध में यदि मिल जाता है तो दस्त की शिकायत और पेट दर्द की शिकायत हो सकती है। पेट में मरोड उठ सकते हंै।  दूध के गर्म करने पर लाल रंग का हो रहा है तो इसकी गुणवत्ता कहीं ना कहीं प्रभावित हुई है। जो शरीर के लिए हानिकारक हो सकती है। <br /><strong>-डॉ. ओपी मीणा, फिजिशियन </strong></p>
<p><strong>इनका कहना </strong><br />सरस की नीले पैकेट वाले पैकेट में गर्म करने के बाद दूध का रंग लाल होने की शिकायत आ रही थी उसको लेकर गुरुवार को बैठक ली है। इसमें एक नए बोरिंग का पानी आ गया था जिससे यह समस्या आई थी उसको बंद कर दिया। अब दूसरे बोरिंग से पानी ले रहे हंै। डेयरी में दो बोरिंग है एक पानी कम होने से किसी ने दूसरे बोरिंग का पानी चालू कर दिया था जो फिल्टर नहीं हुआ । डायरेक्ट वॉल खोलने से यह समस्या आई। इसको जांच कर ठीक कर दिया गया है। <br /><strong>-चैनसिंह, डेयरी चेयरमैन सरस डेयरी कोटा</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jul 2024 17:21:47 +0530</pubDate>
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                <title>दूध में मिला बर्ड फ्लू वायरस, डब्ल्यूएचओ ने की पुष्टि</title>
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                        <![CDATA[विश्व स्वास्थ्य संगठन में वैश्विक इन्फ्लूएंजा कार्यक्रम के प्रमुख वेनकिंग झांग ने कहा कि इन मौजूदा प्रकोपों के दौरान पक्षी से गाय, गाय से गाय और गाय से पक्षी में संचरण भी दर्ज किया गया है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/who-confirms-bird-flu-virus-found-in-milk/article-75472"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/milk.png" alt=""></a><br /><p>जिनेवा। कच्चे दूध में पहली बार बर्ड फ्लू वायरस मिला है। डब्ल्यूएचओ ने दूध में एच5एन1 होने की पुष्टि की है। डब्ल्यूएचओ ने कहा कि एच5एन1  बर्ड फ्लू वायरस  स्ट्रेन संक्रमित जानवरों के कच्चे दूध में बहुत अधिक मात्रा में पाया गया है। इस बात की अभी जानकारी नहीं है कि यह दूध में कितने समय तक प्रभावी रह सकता है। इस वायरस के कारण लाखों मुर्गे-मुर्गियों की मृत्यु होती है। इस वायरस से जंगली पक्षी और भूमि और समुद्री जीव भी संक्रमित हो चुके है। हाल ही में इस वायरस के गायों और बकरियों में लक्षण मिले थे।</p>
<p>विश्व स्वास्थ्य संगठन में वैश्विक इन्फ्लूएंजा कार्यक्रम के प्रमुख वेनकिंग झांग ने कहा कि इन मौजूदा प्रकोपों के दौरान पक्षी से गाय, गाय से गाय और गाय से पक्षी में संचरण भी दर्ज किया गया है। इससे पता चलता है कि वायरस को फैलने के लिए रास्ता मिल रहा है। वायरस से संक्रमित जानवरों के दूध में भी यह वायरस मिला है। </p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Apr 2024 12:01:43 +0530</pubDate>
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                <title>आठ माह से बाल गोपाल दुग्ध योजना उधारी पर चल रही</title>
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                        <![CDATA[सप्लाई अक्टूबर से दिसंबर त्रैमासिक की अभी तक भी शुरू नहीं हुई है जिससे शिक्षक गांवों में जाकर उधार गेंहू लेकर योजना का बड़ी मशक्कत से संचालन कर रहे है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/bal-gopal-milk-scheme-is-running-on-loan-for-eight-months/article-60360"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/sizte--(1)5.jpg" alt=""></a><br /><p>करवर। राजकीय स्कूलों में कक्षा 1 से 8 वीं तक के विद्यार्थियों के लिए शुरू की गई बाल गोपाल योजना उधारी पर चल रही है। वर्तमान में नैनवां ब्लॉक के 22 हजार 892 बच्चों के लिए दूध का प्रबंध अध्यापक विगत आठ माह से इस योजना के लिए पैसा नहीं मिलने से टीचर अपनी जेब से पैसा खर्च कर बच्चों के लिए दूध का प्रबंध कर रहे है। ऐसे में योजना के प्रभारी सहित स्कूलों के टीचर पैसा नहीं मिलने से परेशानी झेल रहे है। हैरत की बात है कि विभाग की ओर से रुपए नहीं मिलने के बावजूद अध्यापक बच्चों को दूध से वंचित नहीं होने दे रहे। अपने स्तर पर दूध का प्रबंध कर रहे है। सरकार द्वारा मुख्यमंत्री बाल गोपाल योजना को प्रारंभ करने का मुख्य उद्देश्य राज्य के  प्राइमरी विद्यालय, मदरसों, विशेष प्रशिक्षण केंद्रों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को पोषण युक्त दूध बच्चों को पिलाया जाता है। साथ ही सरकारी स्कूलों में नामांकन वृद्धि एवं ठहराव को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री बाल गोपाल दूध योजना की शुरूआत की गई थी। इस योजना का शुभारंभ 29 नवंबर 2022 को किया गया। योजना के तहत सरकारी स्कूलों में कक्षा एक से आठ तक के विद्यार्थियों को पाउडर से निर्मित दूध देने का प्रावधान है। योजनांतर्गत कक्षा एक से पांच तक के विद्यार्थी को 15 ग्राम मिल्क पाउडर से निर्मित 150 मिली दूध तथा कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों को 20 ग्राम मिल्क पाउडर से निर्मित 200 मिली दूध तैयार कर दिया जाता है। इसके लिए प्राथमिक कक्षा वर्ग के विद्यार्थियों के दूध में 8.4 ग्राम चीनी प्रति विद्यार्थी एवं उच्च प्राथमिक वर्ग के विद्यार्थियों को 10.2 ग्राम चीनी प्रति विद्यार्थी दूध में मिलाकर दिए जाने की व्यवस्था है, इसके लिए 45 रुपए प्रति किलो चीनी की राशि भी निर्धारित की गई है। जो मार्च माह से नहीं मिलीं, इस लिए पोषाहार प्रभारी अध्यापक अपने पास से रुपए खर्च करके या उधारी करके। इस योजना को चला रहे हैं। </p>
<p><strong>22 हजार 892 बच्चों को अध्यापक अपनी जेब से पीला रहे दूध</strong><br />अकेले नैनवां ब्लॉक में मदरसा सहित 283 विद्यालयों में कक्षा 1 से 8 वीं तक  करीब 22 हजार 892 नामांकन है जिनको एमडीएम और बाल गोपाल योजना का लाभ मिल रहा है। बाल गोपाल योजना में कक्षा 1 से पांचवी तक प्रत्येक छात्र को 15 ग्राम मिल्क पाउडर से 150 एम एल दूध तैयार किया जाता है जिसमें 8. 4 ग्राम चीनी की मात्रा होती है, इसी प्रकार कक्षा 6 से आठवीं तक के छात्रों को प्रति छात्र 20 ग्राम मिल्क पाउडर में 10.2 ग्राम चीनी मिलाई जाती है।</p>
<p><strong>गेंहू-चावल हुए खत्म</strong><br />एमडीएम योजना में गेहूं चावल सरकार स्कूलों में भेजती है और पोषाहार बनाने के तेल, मिर्च, सब्जी,आटा पिसाई, गैस आदि के लिए कुल कुकिंग कन्वर्जन राशि कक्षा 1 से 5 तक के लिए 5 रुपए 45 पैसे प्रति छात्र व कक्षा 6 से 8 वीं तक के लिए 8 रुपए 17 पैसे के हिसाब से स्कूलों को भुगतान किया जाता है। जिसमे गेहूं चावल अधिकांश स्कूलों में खत्म है। सप्लाई अक्टूबर से दिसंबर त्रैमासिक की अभी तक भी शुरू नहीं हुई है जिससे शिक्षक गांवों में जाकर उधार गेंहू लेकर योजना का बड़ी मशक्कत से संचालन कर रहे है।<br /> <br /><strong>सरकारी योजनाओं को चलाने की है चुनौती</strong><br />बाल गोपाल योजना की त्रैमासिक के हिसाब से सभी विद्यालयों में यह राशि उनके बैंक अकाउंट में डालीं गई  इसके बाद  मार्च माह से अक्टूबर माह भी खत्म होने चला। उधारी से सब काम चल रहा है जबकि ब्लॉक में काफी संख्या में शिक्षक अन्य जिले के निवासी है वो अपना घर चलाए या सरकारी योजनाएं अपने घर के खर्चों में कटौती करके चलाए।</p>
<p><strong>दूध तैयार करने,वितरण और बर्तन सफाई का मेहनताना सिर्फ 500 रू मासिक</strong><br />पिछले सत्र में कक्षा 1 से 8 वी तक के विद्यार्थियों को पाउडर युक्त दूध सप्ताह में मंगलवार और शुक्रवार फिर बाद में बुधवार और शुक्रवार को दिया जाने लगा। उसके बाद  एक जुलाई से सप्ताह में रोज दूध का वितरण किया जा रहा है। ऐसे में विद्यालय के पूरे बच्चों  को दूध बनाकर पिलाने,  फिर बर्तन सफाई का मानदेय सिर्फ 500 रू मासिक रखना कुक के साथ अन्याय है। शिक्षकों की पीड़ांबाल गोपाल योजना भी उधारी से चल रही है, इसमें कार्यरत व्यक्ति का मानदेय17 रू प्रतिदिन है जो कि अन्याय है जिसे 500 रू से बढ़ाकर कम से कम 2 हजार रु मासिक किया जाना चाहिए। जिसका मानदेय भी फरवरी के बाद से नही आया है। <br /><strong>- पंकज जैन,मिडिया प्रभारी शिक्षक संघ राष्ट्रीय नैनवां</strong></p>
<p>बाल गोपाल योजना और एमडीएम योजना दोनों उधारी से चल रही है जिससे शिक्षकों को काफी परेशानी हो रही है। खाद्यान्न सप्लाई और दोनों योजना की राशि का भुगतान जल्द नही हुआ तो बड़ा प्रदर्शन करेंगे।<br /><strong>- बाबूलाल शर्मा,अध्यक्ष, संयुक्त कर्मचारी महासंघ एकीकृत ब्लॉक नैनवां</strong></p>
<p>शिक्षक गांवों में जाकर गेंहू मांगकर पौषाहार बनवा रहे है। दूध योजना की राशि भी मार्च से नही आई जिससे शिक्षक अपने घर के खर्चे में कटौती कर योजनाओं का संचालन कर रहे है।<br /><strong>- सुगनचंद मीणा, अध्यक्ष शिक्षक संघ राष्ट्रीय नैनवां</strong></p>
<p>मुख्यमंत्री बाल गोपाल दुग्ध योजना के तहत मार्च 2023 से ही हमें मानदेय नहीं मिला है। एक तो मानदेय 500 रुपए प्रति माह हे उस पर भी समय पर नहीं मिलने से बहुत परेशानी होती है। सरकार को  हमारा मानदेय बढ़ाना चाहिए व समय पर मानदेय मिले ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए।<br /><strong>- सीमा सेन, कुक कम हैल्पर</strong></p>
<p>फरवरी माह के बाद से बाल गोपाल दूध योजना उधारी से चल रही है, कुक कम हेल्पर कों भी समय पर मानदेय नहीं मिलने से परेशान हैं। <br /><strong>- महेश कुमार, अध्यापक का बदला हुआ नाम</strong></p>
<p>डिमांड बनाकर संबंधित उच्च अधिकारी को भिजवा दी गई है ।जैसे ही विभाग को राशि प्राप्त होगी, संबंधित विद्यालयों के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी। <br /><strong>- अनिल गोयल, मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी नैनवां</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Oct 2023 17:51:58 +0530</pubDate>
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                <title>सरकारी स्कूलों में आठवीं तक के बच्चों को मिलेगा सप्ताह में 2 दिन दूध</title>
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                        <![CDATA[विद्यालयों, मदरसों और विशेष प्रशिक्षण केन्द्रों के विद्यार्थियों को सप्ताह में मंगलवार और शुक्रवार को पाउडर से तैयार दूध दिया जाएगा। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/children-up-to-eighth-grade-will-get-milk-two-days/article-31076"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/125.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में पहली से आठवीं तक के सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को सप्ताह में दो दिन मिल्क पाउडर से बना दूध और निशुल्क यूनिफॉर्म का कपड़ा मिलेगा। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आज सीएमआर पर राज्यस्तरीय कार्यक्रम में योजना की शुुरुआत की। योजना के तहत राजकीय विद्यालयों, मदरसों और विशेष प्रशिक्षण केन्द्रों के विद्यार्थियों को सप्ताह में मंगलवार और शुक्रवार को पाउडर से तैयार दूध दिया जाएगा। दूध प्रार्थना सभा के तत्काल बाद दिया जाएगा। सरकार ने वर्ष 2022-23 की बजट घोषणा में योजना के तहत पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों को सप्ताह में दो दिन डिब्बे का गर्म दूध उपलब्ध कराने की घोषणा की थी। इसके लिए 476.44 करोड़ रुपए का अतिरिक्त वित्तीय प्रावधान किया गया है। पहली कक्षा से पांचवीं तक के बच्चों को 150 मिलीलीटर और छठी से आठवीं तक के बच्चों को 200 मिलीलीटर दूध पिलाया जाएगा। इसमें चीनी की मात्रा भी तय की गई है। 150 मिलीलीटर दूध में 8.4 ग्राम और 200 मिलीलीटर दूध में 10.2 ग्राम चीनी मिलाई जाएगी। 15 ग्राम पाउडर दूध से 150 मिलीलीटर दूध और 20 ग्राम पाउडर से 200 मिलीलीटर दूध तैयार होगा।</p>
<p>दरअसल सरकार का मानना है कि स्कूल में दूध देने की योजना शुरू होने से पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चों के पोषण के स्तर में सुधार होगा साथ ही स्कूलों में बच्चों के नामांकन वृद्धि.ठहराव. ड्रॉप आउट भी रुक सकेगा। गौरतलब है कि जब सरकार ने स्कूलों में मिड डे.मील योजना शुरू की थी उस दौरान भी स्कूलों में ड्रॉप आउट में कमी आई थी।</p>
<p><strong>दो सेट यूनिफॉर्म मिलेंगे निशुल्क</strong></p>
<p>इसी तरह निशुल्क यूनिफॉर्म वितरण योजना के तहत पहली से 8वीं तक के राजकीय विद्यालयों के सभी विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म के 2 सेट निशुल्क दिए जाएंगे। सिलाई के लिए 200 रुपए सीधे विद्यार्थी के खाते में जमा होंगे। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ने वर्ष 2021 के बजट भाषण में पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चों को निशुल्क यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने की घोषणा की थी। प्रदेश के 64 हजार 479 सरकारी स्कूलों के 67 लाख 58 हजार से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित होंगे। योजना में 500.10 करोड़ रुपए की राशि व्यय होगी।</p>
<p><strong>मुख्यमंत्री निशुल्क यूनिफॉर्म वितरण योजना का लोगो लॉन्च</strong></p>
<p>मुख्यमंत्री बाल गोपाल योजना का लोगो ने लॉन्च किया। राजस्थान के शिक्षा में बढ़ते कदम के दक्षता आधारित रिपोर्ट कार्ड का विमोचन किया। महात्मा गांधी स्कूलों में बाल वाटिका की प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ के पोस्टर का विमोचन किया।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 29 Nov 2022 14:21:19 +0530</pubDate>
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                <title>प्रदेश में प्रतिदिन हो रहा है 25 लाख लीटर दुग्ध संकलन</title>
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                        <![CDATA[दूध उत्पादकों को मिल रही सुविधाओं में इजाफा होने से प्रदेश में दूध संकलन तेजी से बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बजट घोषणा में दुग्ध उत्पादकों के हित में अनुदान 2 रुपए से बढ़ाकर 5 रुपए प्रतिलीटर किया था।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-25-lakh-liters-of-milk-is-being-collected-daily-in-state/article-10984"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/milk-day.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। दूध उत्पादकों को मिल रही सुविधाओं में इजाफा होने से प्रदेश में दूध संकलन तेजी से बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बजट घोषणा में दुग्ध उत्पादकों के हित में अनुदान 2 रुपए से बढ़ाकर 5 रुपए प्रतिलीटर किया था। 500 करोड़ रुपए अनुदान के रूप में दुग्ध उत्पादकों को मिल रहे है। राजस्थान को-ऑपरेटिव डेयरी फैडरेशन लिमिटेड से मिले आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में प्रतिदिन औसतन 25 लाख लीटर सरस दुग्ध का उत्पादन हो रहा है, जिसमें 24 लाख लीटर दूध बिक जाता है। फैडरेशन इस साल 40 लाख लीटर दुग्ध प्रतिदिन संकलन का लक्ष्य लेकर चल रहा है।</p>
<p><strong>दुग्ध संकलन में जयपुर पहले नम्बर पर</strong><br />सर्वाधिक दुग्ध संकलन के मामले में प्रदेश में जयपुर का पहला स्थान है। यहां आबादी अधिक है, इसलिए सरस दूध ज्यादा मात्रा में बिकता है। इसके बाद भीलवाड़ा, अजमेर, अलवर और गंगानगर इन पांच जिलों में सबसे ज्यादा दूध संकलन किया जा रहा है।</p>
<p><strong>जैसलमेर और राजसमंद हाल ही में बने जिला दुग्ध संघ</strong> <br />आरसीडीएफ के 23 जिला दुग्ध संघ है, जिनमें से जैसलमेर और राजसमंद हाल ही में जिला दुग्ध संघ बने हैं। दुग्ध उत्पादन में 17 हजार प्राथमिक दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियां कार्यरत है। कुल 8 लाख से अधिक दुग्ध उत्पादक है। सात हजार से अधिक महिला सहकारी समितियां हैं। जयपुर डेयरी प्लांट दूध की गुणवत्ता की जांच से लेकर प्रोसेसिंग, पैकिंग आदि के कार्य करके लोगों तक उच्च गुणवत्ता वाला सरस दूध पहुंचाने का कार्य कर रहा है। जयपुर जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ ने जयपुर सहित कोटपूतली और दौसा में दूध की मिलावट से बचने के लिए सम्पूर्ण डेयरी प्लांट में 300 सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं। इन हाई रेज्योल्यूशन जूम कैमरों से अब दूध प्लांट, पाउडर प्लांट सहित समस्त डेयरी परिसर निगरानी में रहेगा। इसके साथ ही डेयरी में दूध संकलित करने वाले टैंकरों में जीपीएस ट्रेकर लगाए हैं, जिसकी मदद से टैंकरों की लाइव लोकेशन डेयरी प्रशासन के पास मौजूद रहेगी।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jun 2022 15:07:13 +0530</pubDate>
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                <title>देश में 80 से 90% दूध मिलावटी, घातक बीमारियों का खतरा, हाई कोर्ट में रखी रिपोर्ट में हुआ खुलासा</title>
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                        <![CDATA[विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर भारत के दुग्ध उत्पादों की जांच नहीं की गई तो 2025 तक 87 प्रतिशत भारतीय घातक बीमारियां कैंसर आदि का शिकार हो सकते हैं। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/chandigarh--80-to-90--of-milk-adulterated-in-the-country--the-risk-of-fatal-diseases--revealed-in-the-report-placed-in-the-high-court/article-10299"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/milk.jpg" alt=""></a><br /><p>चंडीगढ़। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) तथा केंद्र सरकार के मंत्रालयों की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दाखिल जनहित याचिका में बताया गया कि देश में मिल रहे दूध व दूध से जुड़े 80 से 90 प्रतिशत उत्पाद मिलावटी हैं। हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ ने इसे रोकने के लिए उठाए कदमों की जानकारी दी। इस जानकारी को रिकार्ड में रखते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने आगे भी इसी प्रकार जांच जारी रखने का आदेश दिया है। सर्विंग इन आगेर्नाइजेशन इन लीगल इनिशिएटिव संस्था ने एडवोकेट कीरत पाल सिंह के माध्यम से याचिका दायर कर बताया कि प्रकाशित एक आर्टिकल में बताया है कि भारत के 70 प्रतिशत से अधिक दुग्ध उत्पाद राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मानकों पर सही नहीं उतरे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर भारत के दुग्ध उत्पादों की जांच नहीं की गई तो 2025 तक 87 प्रतिशत भारतीय घातक बीमारियां कैंसर आदि का शिकार हो सकते हैं।</p>
<p> </p>
<p>विज्ञानं एवं तकनीकी मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार 89.2 प्रतिशत दुग्ध उत्पादों में किसी न किसी तरह की मिलावट पाई है। हाई कोर्ट को बताया गया कि भारत दुग्ध उत्पाद के मामले में विश्व के अग्रणी देशों में शामिल है, लेकिन यहां मिलावटी दुग्ध उत्पाद कहीं ज्यादा है। अगर आंकड़ों को देखें तो तो देश में 14 करोड़ लीटर दूध का उत्पादन होता है, जबकि खपत 65 करोड़ लीटर है। उत्पादन और खपत के बीच अंतर से साफ है कि मांग मिलावटी दूध और दुग्ध उत्पादों से पूरी की जा रही है।  केंद्र सरकार समय-समय पर मिलावटी दूध और दुग्ध उत्पादों की जांच के निर्देश जारी करती है बावजूद इसके इन निदेर्शों का पालन सख्ती से नहीं हो रहा। याची ने हाई कोर्ट से अपील की कि केंद्र सहित राज्य सरकारों को निर्देश जारी कर दूध और दुग्ध उत्पादों की नियमित जांच सुनिश्चित की जाए और आम लोगों को जागरूक किया जाए कि वह कैसे मिलावटी दुग्ध उत्पादों की जांच कर सकते हैं। हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ ने जवाब दाखिल करते हुए बताया कि नियमित जांच जारी है। हाईकोर्ट ने जांच को भविष्य में भी ऐसे ही जारी रखने का आदेश देते हुए याचिका का निपटारा कर दिया।<br /><br /><strong>नकली दूध बनाने में घातक पदार्थों का होता है इस्तेमाल</strong><br />हाई कोर्ट को बताया गया कि नकली दूध बनाने में घातक डिटर्जेंट, कास्टिक सोडा, सफेद पेंट, हाईड्रोपेरॉक्साइड, वनस्पति तेल, फर्टिलाइजर जैसे घातक पदार्थों का इस्तेमाल होता है। यह सभी पदार्थ मानवीय स्वास्थ्य के लिए घातक हैं और कैंसर जैसे कई घातक रोगों का कारक है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 May 2022 16:38:59 +0530</pubDate>
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                <title>सरस दूध और छाछ दो रु. लीटर महंगे</title>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/saras-milk-and-buttermilk-for-rs--liters-expensive--new-rates-applicable-from-today-evening/article-5946"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/saras-milk.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड (जयपुर डेयरी) ने गोल्ड, स्टेण्डर्ड दूध एवं सादा छाछ के मूल्य में 2 रुपए प्रतिलीटर की वृद्धि की है। नई दरें 11 मार्च की शाम से लागू होंगी।</p>
<p><br /><strong>कितना बढ़ा मूल्य :</strong>  सरस गोल्ड दूध का आधा लीटर पैक 28 रुपए के स्थान पर 29, एक लीटर पैक 56 के स्थान पर 58 रुपए और 6 लीटर पैक 348 रुपए में उपलब्ध होगा। सरस स्टेण्डर्ड दूध का आधा लीटर पैक 25 के स्थान पर 26 रुपए और एक लीटर पैक 50 के स्थान पर 52 रुपए में उपलब्ध होगा। सरस टोण्ड दूध का आधा लीटर पैक 22 के स्थान पर 23 रुपए एवं एक लीटर पैक 44 के स्थान पर 46 रुपए और 6 लीटर पैक 270 रुपए में मिलेगा। इसके अलावा सरस लाइट दूध 400 एमएल पैक 10 की जगह 12 रुपए में मिलेगा। इसी प्रकार सादा छाछ में भी 2 रुपए प्रतिलीटर की वृद्धि की है। सरस आधा लीटर छाछ का पैक 14 रुपए के स्थान पर 15 रुपए प्रति पैक में उपलब्ध होगा।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Mar 2022 12:54:10 +0530</pubDate>
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