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                <title>reverence - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने किए दर्शन, यदाद्री लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी मंदिर में की विशेष पूजा-अर्चना</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने तेलंगाना के प्रसिद्ध यदाद्री लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी मंदिर का दौरा किया। उन्होंने भगवान के दर्शन कर विशेष अनुष्ठान किए और आशीर्वाद लिया। पूजा के बाद मंदिर के पुजारियों ने उन्हें 'वेदाशीर्वचन' और तीर्थ-प्रसाद भेंट किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/union-minister-g-kishan-reddy-visited-yadadri-lakshmi-narasimha-swamy/article-156252"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/kishan-radday.png" alt=""></a><br /><p>हैदराबाद। केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने रविवार को यदाद्री लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी मंदिर का दौरा किया और भगवान लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी की विशेष पूजा-अर्चना की। केन्द्रीय मंत्री ने इस दौरान विशेष अनुष्ठान किए और देवता का आशीर्वाद लिया। पूजा के बाद, पंडितों ने श्री किशन रेड्डी को 'वेदाशीर्वचन' दिया और मंदिर परिसर में उन्हें तीर्थ-प्रसाद भेंट किया। इस मंदिर को एक पवित्र तीर्थ स्थल और स्वयं प्रकट हुए नरसिम्हा स्वामी का निवास स्थान माना जाता है। यह तेलंगाना के लोगों के बीच बहुत आध्यात्मिक महत्व रखता है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु और मंदिर के अधिकारी मौजूद थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 14:15:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>चैत्र नवरात्रि विशेष: श्रद्धाभाव से करें मां की पूजा</title>
                                    <description><![CDATA[इस बार माता का आगमन घोड़े पर होने जा रहा है जिसे देवी भगवत पुराण में सत्ता, जनता और राष्ट्र के लिए बहुत अच्छा नहीं माना जाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/chaitra-navratri-special--worship-mother-with-reverence/article-7155"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/navratri.jpg" alt=""></a><br /><p>चैत्र नवरात्रि का आरंभ कल 2 अप्रैल से हो रहा है। अबकी बार नवरात्रि पूरे नौ दिनों की हैं जो भक्तों के लिए माता की कृपा पाने का बेहतर अवसर है। लेकिन इस बार माता का आगमन घोड़े पर होने जा रहा है जिसे देवी भगवत पुराण में सत्ता, जनता और राष्ट्र के लिए बहुत अच्छा नहीं माना जाता है।<br /><br />पुराण के अनुसार जब नवरात्र का आरंभ मंगलवार या शनिवार के दिन होता है तो देवी का वाहन घोड़ा यानी अश्व होता है। सोमवार और रविवार के दिन नवरात्र का आरंभ होने पर देवी का वाहन हाथी होता है। गुरुवार और शुक्रवार के दिन नवरात्रि आरंभ होने पर देवी डोली पर आती हैं जबकि बुधवार को नवरात्रि आरंभ होने पर देवी नाव पर आती हैं। देवी के सभी वाहनों पर आगमन और गमन का अलग-अलग प्रभाव होता है। जिस दिन नवरात्रि समाप्त होती है उस दिन के अनुसार देवी का अलग-अलग वाहन माना जाता है। शनिवार और मंगलवार को नवरात्रि समाप्त होने पर देवी बिना किसी वाहन के यानी पैदल ही जाती हैं। देवी का पैदल वापस जाना अच्छा नहीं माना जाता है। बुधवार और शुक्रवार के दिन नवरात्रि समाप्त होने पर देवी हाथी पर वापस जाती हैं जिसे अच्छी बरसात और खूब फ सल होने का सूचक माना जाता है। गुरुवार को नवरात्रि के समाप्त होने पर देवी का वाहन मनुष्य माना जाता है। यानी देवी मानव के कंधे पर सवार होकर जाती हैं। जबकि रविवार और सोमवार के दिन नवरात्रि समाप्त होने पर देवी भैंस पर सवार होकर जाती हैं। भैंस पर देवी की वापसी को बहुत ही अशुभ माना गया है।</p>
<p><br /><strong>माता का वाहन प्रभाव</strong><br />अबकी बार चैत्र नवरात्रि पर ऐसे संयोग बना है कि देवी घोड़े पर सवार होकर आ रही हैं जबकि भैंस पर सवार होकर जा रही हैं। देवी का आगमन और गमन दोनों ही प्रतिकूल फ लदायी है। ऐसे में प्राकृतिक आपदा और रोग से जन धन की हानि हो सकती है।  चैत्र नवरात्रि के दिन से नया संवत यानी हिंदू नववर्ष भी आरंभ हो रहा है जो नल नाम का संवत होगा। यह संवत दुनिया के कई देशों में उथल-पुथल और युद्ध का योग बना रहा है। ऐसे में अपने जीवन में सुख-शांति और अनुकूलता को बनाए रखने के लिए नवरात्रि में देवी की श्रद्धा भाव से उपासना करें। नियमित कवच, कीलक और अर्गलास्तोत्र का पाठ करते रहें।</p>
<p><br /><strong>कलश स्थापना</strong> <br />नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि यानी कि पहले दिन 2 अप्रैल को सुबह 06 बजकर 01 मिनट से सुबह 08 बजकर 31 मिनट तक के बीच का समय कलश स्थापना के लिए शुभ है। वहीं कलश स्थापना का अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजे से 12 बजकर 50 मिनट तक है। भक्त इस मुहूर्त में भी घट स्थापना कर सकते हैं।</p>
<p><br /><strong>पूजा विधि</strong><br />नवरात्रि के पहले दिन सुबह जल्दी उठकर गंगाजल मिले पानी से स्रान करें। साफ कपड़े पहनें और फिर मंदिर साफ  करें। चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और इस पर मां की मूर्ति या चित्र लगाएं। अब साफ मिट्टी में जौ बोकर इस पर कलश स्थापित करें। इसके बाद मां का आह्वान करें फि र मंत्र और आरती का पाठ करें। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Apr 2022 14:24:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>केसरिया रंग में रंगा खाटू का दरबार</title>
                                    <description><![CDATA[हाथ में निशान, मुख पर जय बाबा की, चाहत बाबा श्याम के दरबार में धोक लगाने और मनोकामना मांगने की। ना मीलों के सफर की थकान और ना ही पैरों में पड़े छालों की परवाह।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/sikar/khatu-s-court-painted-in-saffron-color--flood-of-reverence--neither-the-fatigue-of-the-journey-nor-the-care-of-the-ulcers-in-the-feet/article-5977"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/khatushyam-ji.jpg" alt=""></a><br /><p>खाटूश्यामजी। हाथ में निशान, मुख पर जय बाबा की, चाहत बाबा श्याम के दरबार में धोक लगाने और मनोकामना मांगने की। ना मीलों के सफर की थकान और ना ही पैरों में पड़े छालों की परवाह। हर कोई आस्था की डोर के सहारे खाटू दरबार की ओर खिंचा चला आ रहा है। केसरिया रंग में रंगे बाबा के इन भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा है। ऐसे नजारे बाबा श्याम के फाल्गुनी लक्खी मेले के दौरान खाटूधाम की ओर जाने वाले हर रास्ते में पग-पग पर नजर आ रहे हैं। मेले के पांचवें दिन गुरुवार को एक लाख श्रद्धालुओं ने बाबा श्याम के दरबार में मत्था टेककर परिवार की खुशहाली की कामना की। मेले के पांचवें दिन भी हारे के सहारे का अलौकिक शृंगार किया। श्याम भक्तों ने बाबा श्याम के दर पर प्रसाद चढ़ाकर धोक लगायी। रींगस रोड पर पदयात्रियों के जत्थों की रेलमपेल लगी हुई है। स्वयसेवी संस्थाओं की ओर से लगाए भण्डारों में भक्तों को भोजन की मनुहार की जा रही है।</p>
<p><br /><strong> बाबा की मोरछड़ी में है जादू</strong> <br /> बाबा श्याम के लक्खी मेले में लाखों की तादाद में श्याम भक्त खाटूनगरी में पहुंचते हैं। बाबा श्याम के दरबार में श्रद्धालु शीश नवाकर मनौतयां मांगते हैं। बाबा श्याम के दरबार में मोरछड़ी का भी बहुत महत्व है। बाबा के दर पर मोरछड़ी के झाड़े से ना केवल दु:ख दूर होते हैं, वहीे मनोकामना भी पूरी होती है। कहते हैं कि झुक गए बड़े बड़े सरकार तेरी मोरछड़ी के आगे....।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>सीकर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Mar 2022 15:54:20 +0530</pubDate>
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