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                <title>पेट की आग झुलसा रही मासूमों का भविष्य</title>
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                        <![CDATA[सरकार के साक्षरता अभियान और चरागाह स्कूल के बाद भी हजारों बच्चे शिक्षा से वंचित ।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-future-of-the-innocent-is-burning-due-to-hunger/article-82149"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/pet-ki-aag-jhulsa-rhi-masoomo-ka-bhavishya...kota-news-20-06-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। प्रदेश के सभी विद्यालयों में शैक्षणिक सत्र 2024-25 की कक्षाएं 26 जून से शुरू हो जाएंगी। वहीं सरकारी विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने के लिए शिक्षा विभाग की ओर से प्रवेशोत्सव चलाया जाएगा। लेकिन शहर में सड़क किनारे और झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले अधिकांश बच्चे इस सत्र में भी विद्यालय नहीं जा पाएंगे। क्योंकि इनके प्रवेश विद्यालयों में हो पाए हैं ना किसी संस्थान की ओर से इन बच्चों की मदद के लिए कोई मुहिम चलाई गई है। हलांकि शिक्षा विभाग की ओर से चारागाह विद्यालय भी चलाए जाते हैं लेकिन वो गिने चुने ही हैं। ऐसे में जिन्हें सरकारी विद्यालयों की सबसे ज्यादा अवश्यकता है वहीं इसका लाभ नहीं ले पा रहे हैं।</p>
<p><strong>कमाने के लिए दूसरे जिलों से आकर रह रहे</strong><br />कोटा में सड़क किनारे और झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले अधिकतर बाहर के रहवासी हैं। जिनमें प्रमुख रूप से बारां और झालावाड़ के निवासी हैं। जो यहां काम की तलाश में आते हैं लेकिन घर नहीं होने और आर्थिक रूप से कमजोर होने के चलते सड़क पर ही रहते हैं। बारां के निवासी सलमान ने बताया कि वो  ढोलकी बनाकर बेचने का काम करते हैं। जिससे केवल खाने का ही इंतजाम होता है ऐसे में बच्चों को पढ़ाने के बजाए उन्हें भी ढोलकी बनाने में लगा देते हैं, क्योंकि पढ़ाने के लिए पैसा नहीं है। रंगबाड़ी मेडिकल कॉलेज के सामने रहने वाले बजरंग रेबारी ने बताया कि घर में पांच सदस्य हैं जिनमें चार सदस्य पास में बन रही इमारत में मजदूरी करते हैं। एक बच्ची छोटी है लेकिन वो भी काम करने लगी है। स्थाई ठिकाना नहीं होने से बच्चे को स्कूल में नहीं रख पाते क्योंकि बार बार स्थान बदलने से पढ़ाई नहीं हो पाती है।</p>
<p><strong>कई अपने बच्चों को पढ़ा भी रहे</strong><br />अधिकांश झुग्गी झोपड़ी वाले अपने बच्चों को नहीं पढ़ा पाते लेकिन कुछ ऐसे भी हैं जो अपने बच्चों को पढ़ा रहे हैं। सीएडी रोड पर कब्रिस्तान के पास रहने वाले मुकेश बताते हैं कि उनके और आस पास रहने वालों के सभी बच्चे पास के सरकारी स्कूल में जाते हैं, लेकिन कक्षाएं पूरी नहीं ले पाते हैं क्योंकि अतिक्रमण दस्ता हटा देता है तो गांव चले जाते हैं। वहीं कुछ बच्चों को ट्यूशन भी लगाई हुई है। </p>
<p>हम भी स्कूल जाना चाहते हैं लेकिन रहने का कोई पता नहीं है कभी भी निगम वाले हटा देते हैं। वहीं रहने के लिए कोई स्थाई जगह नहीं है और इतना पैसा भी नहीं है कि अच्छी पढ़ाई कर सकें इसलिए पापा के साथ ही ढोलक बनाने का काम करते हैं।<br /><strong>- अभिषेक, सीएडी रोड</strong></p>
<p>घर और पैसे की परेशानी खत्म हो जाए तो स्कूल चले जाएं, एक दिन में ज्यादा से ज्यादा 200 रुपए की कमाई होती है जो खाने में ही चला जाता है अब उसमें पढ़ाई का खर्च कैसे निकाले इसलिए परिवार के साथ ही काम करते हैं।<br /><strong>- प्रमोद, डीसीएम रोड</strong></p>
<p>बच्चों को पढ़ाने के लिए स्कूल में रख दें लेकिन कमाने के लिए परिवार में एक ही इंसान है बच्चों के स्कूल जाने पर पैसे कमाने के लिए जो काम करते हैं उसमें हाथ नहीं बंटा पाते इस कारण स्कूल नहीं भेजते।     <br /><strong>- बजरंग रेबारी, रंगबाड़ीडाढ़देवी में चलता है चरागाह विद्यालय</strong></p>
<p>कोटा में केवल डाढ़देवी में ही चारगाह विद्यालय चलता है। जिसमें करीब 50 बच्चे पढ़ने आते हैं जो सभी घुमंतु जातियों से होते हैं। वहीं ऐसे परिवारों के बच्चों की शिक्षा के लिए विभाग द्वारा सर्वे कराया जाता है। जिसके बाद इस प्रकार के बच्चों साक्षरता अभियान के तहत उनके रहने के स्थान के आसपास ही शिक्षा दी जाती है या चारगाह स्कूल के माध्यम से पढ़ाया जाता है। आगे भी ऐसे बच्चों के नामांकन को बढ़ाने के लिए विभाग की ओर से अभियान चलाया जाएगा ताकि उन्हें भी उचित शिक्षा मिल सके।<br /><strong>- के के शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी, कोटा</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Jun 2024 16:19:39 +0530</pubDate>
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                <title>नशे से धुआं-धुआं हो रही युवाओं की जिंदगी</title>
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                        <![CDATA[स्मैक खरीदने व पीने के लिये युवा चोरियां लूटपाट डकैती हत्या जैसे संगीन अपराध तक कर रहे है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/lives-of-youth-are-going-up-in-smoke-due-to-drugs/article-69974"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/nashe-s-dhua-dhua-ho-rhi-yuvao-ki-zindagi...bundi-news-13-02-2024.jpeg" alt=""></a><br /><p>बून्दी। आशा भोंसले का एक गीत सबको याद होगा, दम मारो दम, मिट जाए गम....। इस गीत में जिस तरह युवा धुआं उ़ड़ाते नजर आते हैं, ठीक वैसे ही स्थिति बून्दी शहर में इन दिनों कच्ची बस्तियों सहित गली मोहल्लों में देखी जा सकती हैं। जहां नशे व सट्टे का कारोबार मकड़ी के जाल की तरह चारों तरफ फैल रहा है और शहर के नौजवान युवाओं को अपनी गिरफ्त में लेकर उनका जीवन तबाह कर रहा है। शहर में खुलेआम हो रहे नशे व सट्टे के कारोबार के सामने पुलिस प्रशासन नतमस्तक दिखाई दे रहा है या दूसरे शब्दों में कहें तो पुलिस की मिली भगत से ही यह कारोबार शहर में फल फूल रहा है। पुलिस द्वारा दिखावे के नाम पर हरबार केवल फौरी कार्यवाही कर इतिश्री कर ली जाती है। यहां नशे के व्यापारी खुलेआम घरों, होटलों, रेस्टोरेंट गली मोहल्लों में युवाओं को नशा परोसा जा रहा हैं। वर्तमान में चल रहा कैफे कल्चर भी इसके लिए कम जिम्मेदार नहीं हैं, जहां धुआं उड़ाते नौजवान बड़ी तादाद में नजर आ जाते हैं। </p>
<p><strong>युवाओं में हावी हो रहा सफेद नशा</strong><br />नाम नहीं बताने की शर्त पर इस कारोबार में लिप्त व्यक्ति ने बताया कि शहर में इन दिनों स्मैक का नशा सबसे ज्यादा युवाको को अपनी जकड़ में लिए हुए हैं। जिसकी गिरफ्त में 16 से 30 वर्ष की आयु के युवा ज्यादा है और इसकी लत के चलते युवा अपना जीवन तबाह कर रहे हैं। सफेद पाउडर स्मैक का नशा युवाओं में इस कदर हावी है कि युवा सीधे इंजेक्शन से ही स्मैक ले रहे हैं। इसको पाने के लिए वह किसी भी हद तक जा सकते हैं। शहर में कहीं ऐसे स्थान है जहां खुलेआम युवाओं को स्मैक परोसी जा रही है। स्मैक खरीदने व पीने के लिये युवा चोरियां लूटपाट डकैती हत्या जैसे संगीन अपराध तक कर रहे है।</p>
<p><strong>रोज बिक रही 50 से 60 लाख रुपए की स्मैक</strong><br />एक अनुमान के अनुसार शहर में 150 ग्राम स्मैक रोज बिक रही है जिसे हम अगर रुपए में अनुमान लगाए तो 50 से 60 लाख की केवल स्मैक बाजार में बिक रही है। जानकारी के अनुसार बूंदी शहर में स्मैक की सप्लाई कोटा से हो रही है। 1 ग्राम स्मैक 4000 रुपए में आ रही है। जो 8000 रुपए तक बिक रही है। 1 ग्राम स्मैक के 16 पैकेट बनाई जाते है एक पैकेट 500 में बिकता है। यानी बेचने वाले को 1 ग्राम स्मैक पर 4000 का प्रॉफिट हो रहा है। और एक सप्लायर मिनिमम 10 ग्राम स्मैक तक बेच रहा है। यह कार्य शहर की कच्ची बस्तियों में ज्यादा हो रहा है तथा इस कार्य में महिलाएं ज्यादा जुड़ी हुई है। यही नहीं स्मैक को कोटा से बूंदी लाने के लिए व्यक्ति को 1000 रुपये प्रति ग्राम तक दिए जा रहे हैं।</p>
<p><strong>चार तरह के नशे का हो रहा कारोबार</strong><br />नशे के कारोबार की बात करें तो बूंदी शहर में चार तरह के नशे का ज्यादा कारोबार हो रहा है, जिसमें सबसे ज्यादा स्मैक, चरस, अफीम, गांजा का व्यापार चरम पर है। इस नशे की गिरफ्त में युवा इस कदर फंस चुके हैं कि उन्हें ना होश है ना भविष्य की चिंता। दिन-रात केवल नशे में और नशे को पाने में लगे रहते हैं। इसके लिए वह चोरियां लूटपाट डकैती हत्या तक कर रहे हैं। स्मैक का नशा सबसे खराब माना जाता है। इसकी एक बार लत लगने पर व्यक्ति का पूरा जीवन व परिवार तबाह हो जाता है। </p>
<p><strong>शहर में फल फूल रहा सट्टे का कारोबार</strong><br />इसी प्रकार सट्टे की बात करें तो बूंदी में सट्टे का कारोबार भी खूब फल फूल रहा है रोजाना करोड़ों रुपए का सट्टा बूंदी में लगाया जा रहा है। जिसमें कई नाम की व्यक्ति अपने घरों में सट्टा का कारोबार करवा रहे हैं। सट्टा व्यापार से जुड़े व्यक्ति ने बताया कि गली मोहल्ले जहां पर सट्टे का ज्यादा कारोबार किया जाता है वहां कैमरे लगाए हुए हैं। पुलिस द्वारा की गई हर एक हरकत का पहले ही पता चल जाता है और पुलिस आने से पहले ही सारा मामला समेट लिया जाता है। बूंदी शहर की बात करें तो शहर के माउतीपाड़ा, लुहारों के जमातखाने नाले के पास ,ब्रह्मपुरी बड़ी मज्जिद के पास, घुलधोया की गली,मनोहर बावड़ी, कागजी देवरा,छत्रपुरा में घरों में खुलेआम सट्टा खिलाया जाता है। </p>
<p><strong>यहां चल रहा खुलेआम स्मैक का कारोबार</strong><br />बूंदी शहर की बात करें तो शहर के महावीर कॉलोनी, ब्रह्मपुरी बड़ी मज्जिद के आगे, होली का खुट,बाईपास रोड़, नायकों की गली पावर हाउस के पीछे, नगरपरिषद की गली, माउती पाड़ा, उन्दालिया की डूंगरी, छत्रपुरा, कागजी देवरा, बालचंदपाड़ा, नाहर का चोहट्टा, पुरानी धानमंडी लंगाकेट में खुलेआम स्मैक का कारोबार किया जा रहा है। सबसे भी बड़ी बात यह है कि आमजन को ही जब इस बात का पता है कि यहां खुलेआम स्मैक व अन्य नशे का कारोबार किया जा रहा है तो पुलिस द्वारा कार्रवाई नहीं करना पुलिस की कार्य प्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लगा देता है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />शहर में दीमक की तरह फैल रहे स्मैक व सट्टे के कारोबार पर प्रभावी कार्यवाही कर पूर्णतया अकुश लगाने की जरूरत है। स्मैक के नशे व सट्टे ने युवा वर्ग के साथ सैंकड़ों परिवारों को बर्बाद कर दिया हैं।<br /><strong>- संजय शर्मा, समाजसेवी व युवा नेता</strong></p>
<p>स्मैक का धंधा करने वालों पर पुलिस की ठोस कार्यवाही होनी चाहिए, जबकि पुलिस पीने वालों पर कार्यवाही कर इतिश्री कर लेती हैं। नशे की लत ने शहर की युवा पीढ़़ी को तबाह कर दिया हैं। <br /><strong>- संतोष कटारा, पूर्व उपसभापति, नगर परिषद, बून्दी</strong></p>
<p>नशा कोई सा भी हो समाज के लिए नुकसानदेह हैं। वर्तमान में समाज का युवा वर्ग इसकी चपेट में सबसे ज्यादा आ रहा हैं। इसके चलते युवा शारीरिक व मानसिक रूप से खोखले हो रहे हैं। वहीं सट्टा कारोबार समाज को आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचा रहा हैं। इसके खिलाफ ठोस पुलिस कार्यवही होनी चाहिए।<br /><strong>- रेखा शर्मा, समाजसेविका</strong></p>
<p>प्रभावी कार्यवाही के अभाव में शहर में नशे की प्रवृति लगातार बढ़ती जा रही हैं, चाहे वह स्मैक हो, गांजा हो या और कोई नशा। इसकी गिरफ्त में आकर शहर का आम युवा अपने भविष्य को दांव पर लगा रहे हैं। आने वाली पीढ़ी को इस से बचाने के लिए ठोस व प्रभावकारी अंकुश लगाए जाने की आवश्यकता हैं। नशाखोरी की यह प्रवृति अपराधिक गतिविधियों को भी बढ़ावा दे रही हैं। जिस पर सक्रिय कार्यवाही होनी चाहिए।<br /><strong>- हरिमोहन शर्मा, विधायक, बून्दी</strong></p>
<p>पुलिस द्वारा निरंतर नशे व सट्टे के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। अगर शहर में कही खुलेआम इस तरह से नशे व सट्टे का कारोबार हो रहा है तो जल्द पुलिस द्वारा कार्रवाई कर अंकुश लगाया जाएगा। ऐसे लोगों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जाएगी।<br /><strong>- रामकुमार कस्वां अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बूंदी</strong></p>]]>
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                <pubDate>Tue, 13 Feb 2024 18:03:21 +0530</pubDate>
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                <title>हाइवे के किनारे झुग्गियों में रहने वाले 280 परिवारों को चकगर्बी में मिली अपनी जमीन</title>
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                        <![CDATA[बीकानेर। पिछले 30 वर्षों से श्रीगंगानगर रोड पर झुग्गी में रहने वाले मक्खन लाल सांसी सहित 280 गरीब परिवार इन दिनों बहुत प्रसन्न हैं। सभी परिवारों को ग्राम चकगर्बी में 15 गुणा 15 फुट आकार के भूखंड आबंटित कर दिये गए हैं। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bikaner/280-families-living-in-slums-on-the-side-of-the/article-19435"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/310.jpg" alt=""></a><br /><p>बीकानेर। पिछले 30 वर्षों से श्रीगंगानगर रोड पर झुग्गी में रहने वाले मक्खन लाल सांसी सहित 280 गरीब परिवार इन दिनों बहुत प्रसन्न हैं। सभी परिवारों को ग्राम चकगर्बी में 15 गुणा 15 फुट आकार के भूखंड आबंटित कर दिये गए हैं। मक्खन लाल बीकानेर कलक्टर भगवती प्रसाद कलाल का आभार जताते हुए कहते हैं कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उन्हें कभी अपनी जमीन अथवा अपना पक्का घर भी नसीब होगा। मक्खनलाल कहते हैं बीकानेर कलक्टर भगवती प्रसाद कलाल के प्रयासों से वे अब ग्राम चकगर्बी में उनका खुद की जमीन व मकान हो सकेगा। अपनों के बीच सम्मानजनक तरीके से रह पाएंगे। ऐसा ही कुछ हाल 27 वर्षों से यहां झुग्गी में रहते रहे रणजीत सांसी का है। रणजीत कहते हैं कलक्टर साहब ने सैकड़ों लोगों के मन में सरकार के प्रति सम्मान बढ़ा दिया है। इन सभी परिवारों को भूखंड का मालिकाना हक (पट्टा) भी जल्दी ही दिया जाएगा। साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत इनके पक्का आवास बनवाने की कार्यवाही की जाएगी। इतना ही नहीं, इन सभी परिवारों को घरेलू विद्युत कनेक्शन भी दिलवाए जाएंगे। पिछले लगभग 30 वर्षों से श्रीगंगानगर रोड पर झुग्गी-झौंपड़ियां बनाकर रहने वाले लगभग 280 परिवारों ने अब प्रशासन से हरी झंडी मिलने के बाद श्रीगंगानगर रोड पर हाईवे के किनारे अपनी झुग्गियों, झौंपडियों को छोड़ कर ग्राम चकगर्बी में शिफ्ट होना शुरू कर दिया है। कलक्टर भगवती प्रसाद कलाल के सुप्रयासों से इन सभी परिवारों को अपने भूखंड का मालिकाना हक मिलने की राह आसान हुई है। साथ ही इन परिवारों को पेयजल, शौचालय, सड़क और सार्वजनिक प्रकाश जैसी आधारभूत सुविधाएं मिल रही हैं। यही कारण है कि नेशनल हाइवे के दुर्घटना संभावित क्षेत्र को छोड़कर सभी परिवार चकगर्बी में शिफ्ट होने लगे हैं। वैसे भी नेशनल हाइवे पर बनी यह झौंपड़ियां पूर्णतया अवैध थी। यहां हर क्षण दुर्घटना होने की आशंका भी बनी रहती थी। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गरीब, असहाय और जरूरतमंद लोगों की सहायता की संवेदनशील भावना के मद्देनजर बीकानेर प्रशासन ने इन लोगों को सम्मानजनक तरीके से अन्यत्र शिफ्ट किया है। कलक्टर भगवती प्रसाद पिछले लगभग छह महीने से इस योजना को धरातल पर लाने को प्रयासरत थे। झुग्गी में रहने वाले इन परिवारों के साथ शिफ्टिंग की सहमति बनाने को प्राथमिकता दी गई। झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले परिवारों का सर्वे करवाया गया। इस दौरान 279 परिवार चिन्हित हुए, जो बीकानेर जिले के रहने वाले थे, लेकिन उनके पास कहीं भी आवासीय भूमि नहीं थी। दूसरे चरण में चकगर्बी में इन परिवारों को शिफ्ट करने का निर्णय लिया गया। चकगर्बी की इस भूमि की लेवलिंग करवाई गई। यहां 15 गुणा 15 फुट आकार के भूखंडों का चिन्हीकरण किया गया। झुग्गियों में रहने वाले परिवारों को इनका आवंटन किया गया। यहां ट्यूबवेल बनाया गया तथा प्लॉट तक पेयजल कनेक्शन दिए गए। यहां ग्रेवल सड़क, रोड लाइट, सार्वजनिक शौचालय की सुविधा दी गई है। कलक्टर के अनुसार इन परिवारों के लिए यहां सामुदायिक भवन भी बनाया जाएगा।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बीकानेर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Aug 2022 12:41:03 +0530</pubDate>
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                <title>दिल्ली के गोकुलपुरी इलाके में भीषण आग, 60 से ज्यादा झुग्गियां खाक, सात लोगों की मौत</title>
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                        <![CDATA[आग लगने की वजह से 60 से ज्यादा झुग्गियां जलकर खाक ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/more-than-60-slums-destroyed-in-a-massive-fire-in-delhi-s-gokulpuri-area--seven-people-died/article-6000"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/gokulpuri-jhugg.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। दिल्ली के गोकुलपुरी इलाके में शुक्रवार की देर रात आग लगने के कारण सात लोगों की मौत हो गईं। आग लगने की वजह से 60 से ज्यादा झुग्गियां जलकर खाक हो गयी हैं। आग लगने के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है। इस हादसे में कई लोग जख्मी भी हुए हैं, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उत्तर- पूर्व दिल्ली के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (एडीसीपी) देवाश कुमार पांडे ने बताया कि आग पर काबू पा लिया गया है। दमकल विभाग ने सात शव बरामद किए हैं। दमकल विभाग ने बताया कि रात करीब एक बजे आग लगने की सूचना मिली थी और तड़के करीब चार बजे आग पर काबू पा लिया गया। आग की 7 लोगों की मृत्यु हुई है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 12 Mar 2022 11:34:38 +0530</pubDate>
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