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                <title>diabetes - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>20 फरवरी को विभिन्न विभागों के कार्मिकों की होगी एनसीडी स्क्रीनिंग: उच्च रक्तचाप, मधुमेह और कैंसर जैसी गैर-संचारी बीमारियों की होगी जाँच</title>
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                        <![CDATA[जिला कलक्टर के निर्देशानुसार, जयपुर में 20 फरवरी को 30 वर्ष से अधिक आयु के शिक्षा एवं महिला अधिकारिता विभाग के कर्मियों की एनसीडी स्क्रीनिंग होगी। इसमें कैंसर, मधुमेह और बीपी की जांच की जाएगी।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/ncd-screening-of-personnel-of-various-departments-will-be-done/article-143551"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/health.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी के निर्देशानुसार आगामी 20 फरवरी को महिला अधिकारिता विभाग, महिला एवं विकास विभाग, बाल अधिकारिता विभाग एवं शिक्षा विभाग में कार्यरत समस्त 30 वर्ष से अधिक कार्मिकों की एनसीडी स्क्रीनिंग की जाएगी। </p>
<p>मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जयपुर प्रथम डॉ. रवि शेखावत और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जयपुर द्वितीय डॉ. मनीष मित्तल ने बताया कि जिला कलक्टर महोदय के निर्देशानुसार जिले के विभिन्न विभागों यथा महिला अधिकारिता विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, बाल अधिकारिता विभाग एवं शिक्षा विभाग में कार्यरत 30 वर्ष से अधिक समस्त कार्मिकों की एनसीडी स्क्रीनिंग की जाएगी। इसमे चिकित्साकर्मियों द्वारा कार्मिकों के रक्तचाप, मधुमेह, ओरल कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर, सवाईकल कैंसर जैसी गैर-संचारी बीमारियों (NCD) की स्क्रीनिंग की जाएगी।</p>
<p>उन्होंने बताया कि एनसीडी स्क्रीनिंग के सफल आयोजन हेतु समस्त खंड मुख्य चिकित्सा अधिकारी, प्रमुख चिकित्सा अधिकारी, प्रमुख चिकित्सा अधिकारी, समस्त सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देशित किया गया है।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 17:00:35 +0530</pubDate>
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                <title>इन्सुलिन एक्सेस विषय पर WHO SEARO ऑफिस में हुई स्टेटहोल्डर मीटिंग, डॉ. तोमर- मधुमेह से जूझती दुनिया के लिए इन्सुलिन सिर्फ़ दवा नहीं, जीवन की डोर हैं </title>
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                        <![CDATA[WHO SEARO कार्यालय में “इंसुलिन एक्सेस के लिए नीति और कूटनीति” विषय पर उच्च स्तरीय बैठक हुई। विशेषज्ञों ने मधुमेह के बढ़ते वैश्विक संकट के बीच इंसुलिन की असमान उपलब्धता पर चिंता जताई। प्रो. डॉ. बलवीर सिंह तोमर ने अंतर-क्षेत्रीय सहयोग और हेल्थ डिप्लोमेसी से लागत घटाकर समान पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/stateholder-meeting-held-in-who-searo-office-on-the-topic/article-142928"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/meeting.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। इंसुलिन की खोज को एक सदी से अधिक समय बीत चुका है, फिर भी आज भी दुनिया भर में करोड़ों लोगों के लिए यह जीवनरक्षक दवा समान रूप से उपलब्ध नहीं है। इसी गंभीर वैश्विक चुनौती को केंद्र में रखते हुए निम्स इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ एंड गवर्नेंस द्वारा “इंसुलिन एक्सेस के लिए नीति और कूटनीति” विषय पर एक उच्च स्तरीय स्टेकहोल्डर मीटिंग का WHO SEARO के दिल्ली स्थित ऑफिस में आयोजन किया गया। इस संवाद में देश–विदेश के नीति विशेषज्ञों, ग्लोबल हेल्थ लीडर्स, शिक्षाविदों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।</p>
<p>कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में प्रो. डॉ. बलवीर सिंह तोमर, संस्थापक एवं चांसलर, निम्स यूनिवर्सिटी राजस्थान ने कहा की “इंसुलिन तक समान पहुँच केवल स्वास्थ्य मंत्रालय या डॉक्टरों की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं, उद्योग, शैक्षणिक संस्थानों और नागरिक समाज के बीच मजबूत अंतर-क्षेत्रीय सहयोग आवश्यक है। जब तक हम सामूहिक नेतृत्व और साझा उत्तरदायित्व की भावना से काम नहीं करेंगे, तब तक यह जीवनरक्षक दवा हर जरूरतमंद तक नहीं पहुँच पाएगी।” उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि हेल्थ डिप्लोमेसी के माध्यम से देशों के बीच सहयोग बढ़ाकर, साझा निर्माण क्षमता और नॉलेज एक्सचेंज से इंसुलिन की लागत को कम किया जा सकता है।</p>
<p><strong>बढ़ता मधुमेह संकट और इंसुलिन की असमान उपलब्धता : </strong></p>
<p>आज मधुमेह (डायबिटीज़) केवल एक बीमारी नहीं रह गई है, बल्कि यह एक गंभीर वैश्विक विकास और सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन चुकी है। विश्व स्तर पर लगभग 83 करोड़ लोग मधुमेह से प्रभावित हैं, जो 1990 की तुलना में लगभग चार गुना अधिक है। सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि इसका बोझ निम्न और मध्यम आय वाले देशों में सबसे तेज़ी से बढ़ रहा है, जहाँ स्वास्थ्य प्रणालियाँ पहले से ही संक्रामक रोगों, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य समस्याओं और संसाधनों की कमी से जूझ रही हैं।</p>
<p>वर्ष 2022–23 के दौरान मधुमेह और इससे संबंधित किडनी रोगों के कारण 20 लाख से अधिक मौतें दर्ज की गईं। उच्च रक्त शर्करा, हृदय रोगों से होने वाली मृत्यु का भी एक प्रमुख कारण बना हुआ है। टाइप-1 मधुमेह से पीड़ित सभी लोगों के लिए इंसुलिन अनिवार्य है, जबकि टाइप-2 मधुमेह से ग्रस्त करोड़ों लोगों के लिए भी यह जीवन को सुरक्षित रखने में अत्यंत आवश्यक है। इसके बावजूद, अनुमान बताते हैं कि टाइप-2 मधुमेह के लगभग आधे मरीजों को नियमित रूप से इंसुलिन उपलब्ध नहीं हो पाती, जिसका मुख्य कारण महँगी कीमतें, आपूर्ति श्रृंखला की कमजोरियाँ और नीति स्तर पर अपर्याप्त प्राथमिकता है।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Feb 2026 18:27:56 +0530</pubDate>
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                <title>डायबिटीज के 20% मरीजों में हो रही फ्रोजन शोल्डर की समस्या, पुणे के आर्थोस्कोपी सर्जन डॉ. आशीष बाबुलकर ने दी जानकारी</title>
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                        <![CDATA[भारत में डायबिटीज के सबसे ज्यादा मरीज हैं और इनमें से 20 प्रतिशत मरीज कंधे की गंभीर समस्या फ्रोजन शोल्डर की समस्या से ग्रसित हैं।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-problem-of-frozen-shoulder-in-20-patients-of-diabetes/article-109904"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/news-(9)2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भारत में डायबिटीज के सबसे ज्यादा मरीज हैं और इनमें से 20 प्रतिशत मरीज कंधे की गंभीर समस्या फ्रोजन शोल्डर की समस्या से ग्रसित हैं। ये मरीज अपना हाथ उठाने में भी समर्थ नहीं हो पाता है। अगर इन मरीजों के एक कंधे में साल भर तक यह समस्या रही तो अगले कंधे में भी फ्रोजन शोल्डर हो जाता है। शहर में रविवार को आयोजित एक दिवसीय वर्कशॉप जयपुर शोल्डर कोर्स में पुणे के प्रसिद्ध शोल्डर एंड आर्थोस्कोपी सर्जन डॉ. आशीष बाबुलकर ने यह जानकारी दी। </p>
<p>वर्कशॉप के समन्वयक डॉ. नवीन शर्मा ने बताया कि इस वर्कशॉप के प्रदेश के 250 से अधिक जॉइंट रिप्लेसमेंट और आर्थोस्कोपी सर्जन ने भाग लिया। इस दौरान कंधे की समस्याएं जैसे फ्रोजन शोल्डर, रोटेटर कफ इंजरी,बर्साइटिस, टेंडिनाइटिस, डिसलोकेशन, शोल्डर इम्पिन्जमेंट सिंड्रोम की पहचान और उसकी सर्जरी के नए तरीकों के बारे में बताया गया।</p>
<p><strong>शरीर में घुल जाएंगे बायोकंपोजिट इंप्लांट :</strong></p>
<p>एक्सपर्ट्स ने बताया कि रोटेटर कफ टियर जैसी जटिल समस्याओं के उपचार में अब बायोकंपोजिट इंप्लांट नई क्रांति ला रहे हैं। ये इंप्लांट बायोटेक्नोलॉजी से बने होते हैं, जो सर्जरी के दौरान मात्र पांच मिनट में लगाए जा सकते हैं। इन्हें दूरबीन की मदद से कंधे की मांसपेशियों से जोड़ा जाता है। छह माह में यह इंप्लांट घुलकर मांसपेशी जैसा रूप ले लेता है और उसे मजबूती देता है।</p>
<p><strong>डायबिटीज के कारण 30 से 40 उम्र में भी आ रहे फ्रोजन शोल्डर के मामले :</strong></p>
<p>बाबुलकर ने बताया कि कई बार कंधे में इतना तेज दर्द होता है कि मरीज के लिए सामान्य मूवमेंट कर पाना भी बेहद मुश्किल होता है। कंधे का यह लंबे समय तक होता है तो यह फ्रोजन शोल्डर के संकेत हैं। 60 वर्ष या इससे ज्यादा उम्र के 30 प्रतिशत लोगों में और 80 साल से ज्यादा उम्र होने पर 40 प्रतिशत लोगों में फ्रोजन शोल्डर देखने को मिलता है, लेकिन अब डायबिटीज के कारण 30 से 40 साल के लोग भी फ्रोजन शोल्डर की समस्या से जूझ रहे हैं। इनमें ज्यादातर लोगों को कम से कम पांच साल से डायबिटीज होती है। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Apr 2025 10:58:25 +0530</pubDate>
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                <title>क्या दूध पीने से कम होता है डायबिटीज का जोखिम ?</title>
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                        <![CDATA[विशेष रूप से बढ़ते बच्चों और महिलाओं को जिन्हें कैल्शियम और प्रोटीन दोनों की आवश्यकता होती है उनके लिए यह बहुत लाभकारी है।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/does-drinking-milk-reduce-the-risk-of-diabetes/article-49326"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/630-400-size-की-कॉपी11.png" alt=""></a><br /><p>डायबिटीज का जोखिम वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ा है,आलम यह है कि कम उम्र के लोग भी इसके शिकार होते जा रहे हैं। अध्ययन में पाया गया है कि शुगर का बढ़ा हुआ स्तर शरीर के कई अंगों जैसे किडनी, तंत्रिकाओं और आंखों को क्षति पहुंचाने के साथ कई प्रकार की अन्य क्रोनिक स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिमों को भी बढ़ा देता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी लोगों को निरंतर डायबिटीज को कंट्रोल करने वाले उपाय करते रहना चाहिए। <br /><br />यदि आपके परिवार में पहले से किसी को डायबिटीज की समस्या रही है तो आपको और भी अलर्ट हो जाने की आवश्यकता है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि यदि आप नियमित रूप से दूध का सेवन करते हैं तो ये डायिटीज के खतरे को कम कर सकता है।  <br /><br /><strong>आहार विशेषज्ञ कहते हैं: </strong>मधुमेह वाले लोगों को अपने आहार को डिजाइन करते समय बहुत सावधान रहने की जरूरत है, क्योंकि कई चीजें तेजी से आपके ब्लड शुगर लेवल को बढ़ा सकती हैं। जहां तक बात दूध की है तो इसे संपूर्ण आहार माना जाता है। दूध, प्रोटीन, कैल्शियम, स्वस्थ वसा और अन्य महत्वपूर्ण पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण हमारी सेहत के लिए कई प्रकार से लाभकारी है। कई वैज्ञानिक अध्ययनों में दूध पीने और टाइप 2 मधुमेह के जोखिम के बीच संबंध खोजने का प्रयास किया गया है।<br /><br /><strong>क्या पता चला:</strong> प्रकाशित एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने 82,000 से अधिक महिलाओं की जांच की, ये सभी मेनोपॉज को पूरा कर चुकी थीं। अध्ययन की शुरुआत में इनमें मधुमेह की समस्या नहीं थी। 8 वर्षों के इस अध्ययन के दौरान, शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों के दूध और दही सहित कुल डेयरी उत्पादों के सेवन और इसके प्रभावों को जानने की कोशिश की। इनमें पाया गया कि जिन महिलाओं ने लो फैट वाले डेयरी उत्पादों का सेवन किया उनमें पोस्टमेनोपॉजल स्थिति में मधुमेह का जोखिम कम था। यानी कि लो फैट वाले डेयरी उत्पाद आपको जोखिमों को कम कर सकते हैं। <br /><br /><strong>टाइप-2 डायबिटीज:</strong> एक अन्य अध्ययन में शोधकर्ताओं ने किशोरावस्था के दौरान डेयरी उत्पादों के दैनिक सेवन से वयस्कावस्था में टाइप-2 डायबिटीज के जोखिमों के बीच के संबंधों को ट्रैक किया।  इस अध्ययन में पाया गया कि किशोरावस्था के दौरान जिन लोगों ने अधिक डेयरी उत्पादों का सेवन उनमें टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम कम हो सकता है।  <br /><br /><strong>क्या कहते हैं शोधकर्ता:</strong> अध्ययनकर्ताओं का कहना है, दूध और डेयरी उत्पाद मेटाबोलिक सिंड्रोम, मोटापा और उच्च रक्तचाप को रोकने के साथ डायबिटीज के खतरे को भी कम कर सकते हैं।</p>
<p>हालांकि ज्यादातर अध्ययन कहते हैं, लो फैट डेयरी उत्पाद  लाभकारी हैं। दूध और दही दोनों को अध्ययनों में मेटाबोलिक सिंड्रोम और टाइप-2 डायबिटीज के खिलाफ सुरक्षा देते हुए देखा गया है।<br /><br />दूध कैल्शियम और प्रोटीन दोनों का शानदार स्रोत है, इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि सभी लोग आहार में इसे जरूर शामिल करें। विशेष रूप से बढ़ते बच्चों और महिलाओं को जिन्हें कैल्शियम और प्रोटीन दोनों की आवश्यकता होती है उनके लिए यह बहुत लाभकारी है। दूध के सेवन की आदत शरीर को स्वस्थ रखने के साथ क्रोनिक बीमारियों के जोखिम को कम करने वाला हो सकता है। </p>]]>
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                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Jun 2023 13:06:56 +0530</pubDate>
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                <title>हर पांचवां व्यक्ति मधुमेह का शिकार, गांवों में भी रहा पांव पसार</title>
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                        <![CDATA[अब यह बीमारी शहरी लोगों के साथ साथ ग्रामीणों में भी बड़ी तेजी से बढ़ रही है। महानगरों में रहने वाले 12 से 14 प्रतिशत लोग इससे ग्रसित हैं। ]]>
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/every-fifth-person-suffering-of-diabetes-was-widespread-in-villages-too/article-39105"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/s-9.png" alt=""></a><br /><p>अजमेर। आधुनिकखानपान एवं मेहनत कम करने की प्रवृति केकारण ही विश्वभर में चीन के बाद सबसे ज्यादा मधुमेह रोगी भारत में हैं। हमारे देश का प्रत्येक पांचवां व्यक्ति इस रोग से ग्रसित है और विश्वभर में प्रत्येक दस सैकंड में एक व्यक्ति की मौत हो जाती है। यही हाल रहे तो आने वाले समय में हर तीसरा व्यक्ति इससे पीड़ित होगा और 2025 तक भारत में 69.8 करोड़ लोग इससे ग्रसित हो जाएंगे। </p>
<p>अब यह बीमारी शहरी लोगों के साथ साथ ग्रामीणों में भी बड़ी तेजी से बढ़ रही है। महानगरों में रहने वाले 12 से 14 प्रतिशत लोग इससे ग्रसित हैं। इससे बचने के लिए तीस से चालीस या उससे अधिक आयु में अपने भोजन में मीठे पदार्थ, बाजार के डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ, फास्ट फूड, आइसक्रीम आदि से परहेज करना चाहिए। इसके साथ ही उन्हें नियमित रूप से प्रति वर्ष चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। यह सार निकल कर आया है रिसर्च सोसायटी फोर दा स्टडी आफ डायबिटीज इन इंडिया (आरएसएसडीआई) राजस्थान चैप्टर की ओर से पुष्कर में आयोजित दो दिवसीय 10वें राज्य स्तरीय अधिवेशन में।</p>
<p>तेजी से बदलती जीवन शैली, शारीरिक श्रम का अभाव, आनुवांशिक कारण, बदलता खान-पान डायबिटीज को न्यौता देता है। यही नहीं हमारे प्रत्येक सामाजिक एवं धार्मिक उत्सव में मीठे की उपस्थिति ने भी इस बीमारी को बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभाई है। साथ ही मधुमेह की बढ़ती संख्या का मुख्य कारण पाश्चात्य संस्कृति की ओर झुकाव, दिनचर्या एवं खानपान में बदलाव, शारीरिक व्यायाम का अभाव है। रक्त में शर्करा की मात्रा अनियमित रहने पर रोगी को भयंकर दीर्घकालीन परिणाम भुगतने पड़ते हैैं जैसे अंधता, पक्षाघात, दिल का दौरा, गुर्दों की बीमारी, पांव में गेंगरीन आदि है।</p>
<p><strong>कांफ्रेस में आए विशेषज्ञों ने नवज्योति से अपनी बात कुछ इस तरह बयां की</strong><br /><strong>विद्यार्थी भी जांचें कराएं: डॉ.पारीक</strong><br />कोटा से आए वरिष्ठ डायबिटोलॉजिस्ट डॉ. केके पारीक ने बताया कि कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों के बीपी, शुगर, कॉलेस्ट्रॉल सहित सभी तरह की आवश्यक जांचें करानी चाहिए। उन्होंने बताया कि 75 फीसदी में डायबिटीज एवं बीपी होता है। ओपीडी में आने वाले मरीजों की बीपी और डायबिटीज की जांच अवश्य करानी चाहिए, क्योंकि ये दोनों ही साइलेंट बीमारियां हैं और एक दूसरे के साथ मिलकर एक और एक ग्यारह हो जाते हैं। वर्तमान में हमारे पास बहुत अच्छी दवाएं उपलब्ध हैं। जिनसे डायबिटीज को दूर किया जा सकता है। </p>
<p><strong>भारतीयों में रोग ज्यादा: डॉ.गुप्ता </strong><br />ग्लास्गो के डॉ.अरविंद गुप्ता ने बताया कि भारतीय जीवन शैली में पर्व, त्योहार, विवाह, जन्मोत्सव सहित अनेक आयोजन होते रहते हैं। जिनमें मिठाइयां और वसायुक्त भोजन की अधिकता होती है। यही कारण है कि हमारे यहां बाल्यावस्था से ही मिठाई की ओर झुकाव बढ़ जाता हैै। नतीजन हमारे देश में मधुमेह रोगियों की संख्या में लगातार प्रतिवर्ष इजाफा हो रहा है। मधुमेह के रोगी को अपनी आयु, व्यवसाय, जीवन शैली के अनुरूप भोजन लेना चाहिए और उसमें अधिक से अधिक अंकुरित दालें, अनाज, हरी सब्जियां, वसा रहित दूध, छाछ, सूप एवं रेशेदार फल, मेवे का सेवन करना चाहिए।</p>
<p><strong>जीवन शैली बदलकर रोकें: डॉ.सामरिया</strong><br />संयोजक एवं मधुमेह रोग विशेषज्ञ डॉ.अनिल सामरिया ने बताया कि डीपीपी शोध के निष्कर्ष के अनुसार आनुंवाशिकता के आधार पर हाइरिस्क व्यक्ति जिन्हें इम्पेनन्ड ग्लूकोज टॉलरेन्स है यदि समय रहते जीवन शैली में परिवर्तन कर शरीर के वजन को सामान्य रखे तो इस रोग को काफी समय तक रोका जा सकता है। </p>
<p><strong>ज्यादा सीखने को मिला: डॉ.लालवानी</strong><br />नई दिल्ली से आए राजकुमार लालवानी ने बताया कि इस कॉन्फ्रेंस में मधुमेह मरीजों से जुडेÞ सब्जेक्ट और टॉपिक को ज्यादा महत्व दिया गया है। कॉन्फ्रेंस से पैराफेरी में कार्यरत चिकित्सकों को अपने मरीजों के उपचार के लिए नवीनतम जानकारी मिली है, जो बहुत महत्वपूर्ण है और मरीजों के उपचार में सहायक  होगी।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Mar 2023 10:19:23 +0530</pubDate>
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                <title>IDF की रिपोर्ट के अनुसार लाखों बच्चे टाइप-1 डायबिटीज के शिकार</title>
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                        <![CDATA[कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच टाइप 1 डायबिटीज मरीजों के इलाज के लिए नई गाइडलाइन सामने आई है। डायबिटीज के मरीजों को कोरोना का खतरा सबसे ज्यादा है, टाइप 1 डायबिटीज बच्चों और कम उम्र के लोगों को अपना शिकार बनाता है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/heath-news--idf--report--lakhs--children--victim--type-1--diabetes--international-diabetes-federation--heath-updates/article-11639"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/ww4.jpg" alt=""></a><br /><p>कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच टाइप 1 डायबिटीज मरीजों के इलाज के लिए नई गाइडलाइन सामने आई है। डायबिटीज के मरीजों को कोरोना का खतरा सबसे ज्यादा है, टाइप 1 डायबिटीज बच्चों और कम उम्र के लोगों को अपना शिकार बनाता है।</p>
<p><strong><span style="color:#ff6600;">ये हैं कुछ आंकड़े</span> </strong></p>
<p>दुनिया में टाइप 1 डायबिटीज से पीड़ित सबसे ज्यादा बच्चे और किशोर भारत में रहते हैं।टाइप 1 डायबिटीज से पीड़ित दुनिया का हर पांचवा बच्चा या किशोर भारतीय है।भारत में हर दिन 65 बच्चे या किशोर टाइप 1 डायबिटीज की चपेट में आ रहे हैं। भारत में टाइप 1 डायबिटीज कितनी बड़ी समस्या बनती जा रही है, इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन के मुताबिक डायबिटीज के कारण पिछले साल दुनियाभर में डायबिटीज से 67 लाख से ज्यादा मौतें हुई थीं, ये मौतें 20 से 79 साल की उम्र के लोगों की थी।</p>
<p><span style="color:#ff6600;"><strong>आईडीएफ की ताजा रिपोर्ट</strong></span></p>
<p>दुनियाभर में टाइप 1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चों और किशोरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है,2021 तक दुनियाभर में 12.11 लाख से ज्यादा बच्चे और किशोर टाइप 1 डायबिटीज से जूझ रहे थे, इनमें से आधे से ज्यादा की उम्र 15 साल से कम है, इनमें भी सबसे ज्यादा संख्या भारतीयों की है,भारत में 2.29 लाख से ज्यादा बच्चे और किशोरों को टाइप 1 डायबिटीज है।<br /><br /><span style="color:#ff6600;"><strong>डायबिटीज दो तरह की</strong></span></p>
<p>टाइप 1 और टाइप 2, टाइप 1 डायबिटीज कम उम्र में ही हो जाती है,इससे पीड़ित व्यक्ति को जीने के लिए इंसुलिन के इंजेक्शन की जरूरत पड़ती है,इसका कोई ठोस इलाज भी नहीं है,वहीं टाइप 2 से जूझ रहे लोगों का दवाओं और थैरेपी के जरिए इलाज तो हो सकता है।</p>
<p><span style="color:#ff6600;"><strong>नए मरीज सामने आए</strong></span></p>
<p>दुनियाभर में टाइप 1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चों और किशोरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है,बीते साल भारत में टाइप 1 डायबिटीज के 24 हजार से ज्यादा नए मरीज सामने आए हैं,यानी,हर दिन 65 से ज्यादा बच्चे और किशोर टाइप 1 डायबिटीज का शिकार बन गए।</p>
<p><span style="color:#ff6600;"><strong>इंडियन काउंसिल आॅफ मेडिकल</strong></span></p>
<p>इस रिसर्च में टाइप 1 डायबिटीज के मरीजों के लिए नई गाइडलाइन जारी की है, ये गाइडलाइन ऐसे समय आई है जब एक बार फिर से कोरोना के मामलों में रफ्तार आने लगी है। डायबिटीज से जूझ रहे लोगों के कोरोना संक्रमित होने का खतरा ज्यादा है।<br /><br /><span style="color:#ff6600;"><strong>भारत में स्थिति</strong></span></p>
<p>ताजा रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 7.4 करोड़ लोग डायबिटीज से जूझ रहे हैं, दुनिया में भारत दूसरे नंबर पर है, जहां सबसे ज्यादा डायबिटीज पीड़ित हैं, 2045 तक डायबिटीज पीड़ितों की संख्या साढ़े 12 करोड़ पहुंचने का अनुमान है।</p>
<p><span style="color:#ff6600;"><strong>भारत में ताजा स्थिति</strong></span></p>
<p>भारत में 20 साल से कम उम्र के 2.29 लाख से ज्यादा लोग टाइप 1 डायबिटीज से जूझ रहे हैं, ये संख्या दुनिया में सबसे ज्यादा है। 2021 में दुनियाभर में डायबिटीज से 67 लाख मौतें हुई थीं, सबसे ज्यादा 14 लाख मौतें चीन में और 6 लाख मौतें भारत में हुई थीं।</p>]]>
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                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jun 2022 15:17:08 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur ]]>
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                <title>डायबिटीज से अब संभव होगी मुक्ति</title>
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                        <![CDATA[देश में डायबिटीज के करीब 7.42 करोड़ मरीज है। डायबिटीज दो प्रकार का होता है, टाइप वन और टाइप टू। अब तक धारणा थी कि एक बार डायबिटीज होने के बाद उसका इलाज संभव नहीं है, लेकिन एक रिसर्च में सामने आया है कि जिन लोगों में डायबिटीज को डायग्नोज हुए एक से डेढ़ साल हुआ है उन्हें आने वाले समय में इस खतरनाक समस्या से हमेशा के लिए निजात मिल सकेगी।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/discovery-of-diabetes-hormones/article-8177"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/dibites-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। देश में डायबिटीज के करीब 7.42 करोड़ मरीज है। डायबिटीज दो प्रकार का होता है, टाइप वन और टाइप टू। अब तक धारणा थी कि एक बार डायबिटीज होने के बाद उसका इलाज संभव नहीं है, लेकिन एक रिसर्च में सामने आया है कि जिन लोगों में डायबिटीज को डायग्नोज हुए एक से डेढ़ साल हुआ है उन्हें आने वाले समय में इस खतरनाक समस्या से हमेशा के लिए निजात मिल सकेगी। जिस हार्मोन के कारण डायबिटीज होती है। उसकी खोज कर ली गई है। इसके साथ ही रिसर्च में यह भी स्पष्ट हो गया है कि शरीर में से उस हार्मोन को कम कर दिया जाए तो मरीज में से डायबिटीज पूरी तरह से खत्म हो सकती है। फैबकिन नामक इस हार्मोन के कारण लोग डायबिटीज से ग्रसित हो जाते है।</p>
<p><strong>क्या और कैसे काम करता है फैबकिन हार्मोन</strong><br />सीनियर डायबिटीज विशेषज्ञ डॉ. पीपी पाटीदार ने बताया कि मोटापा जितना अधिक होगा डायबिटीज होने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है। शरीर के एडिपोज टिश्यू में जमा यह फैट जब पिघलता है तब एफएबीपी-4 नामक एक प्रोटीन निकलता है जो कि पैनक्रियाज में पहुंचता है। यहां आने के बाद दो अन्य एंजाइम, एडीके और एनडीपीके के साथ मिलकर यह फैबकिन हार्मोन बन जाता है जो पैनक्रियाज में मौजूद बीटा सेल्स को तेजी से खत्म करने लगता है। इसके कारण बीटी सेल्स में इंसुलिन का निर्माण बंद या कम हो जाता है। इससे कारण उस व्यक्ति को डायबिटीज हो जाती है। फैबकिन हार्मोन को एंटीडॉट से नष्ट करने से डायबिटीज को हमेशा के लिए समाप्त किया और रोका जा सकता है।<br /><br /><br /></p>]]>
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                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/health/discovery-of-diabetes-hormones/article-8177</link>
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                <pubDate>Wed, 20 Apr 2022 10:23:16 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur]]>
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                <title>किडनी को नुकसान पहुंचाती है डायबिटीज</title>
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                        <![CDATA[ बदलाव जरूरी हैं ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/diabetes-damages-the-kidney/article-6008"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/kidni.jpg" alt=""></a><br /><p>अगर आप लंबे समय से डायबिटीज से जूझ रहे हैं और अपने ब्लड शुगर स्तर को सही तरीके से मैनेज नहीं कर रहे हैं, तो आपकी किडनी को नुकसान पहुंचने का ख़तरा काफी ज़्यादा हो जाता है। डायबिटीज तेजी से किडनी पर प्रभाव डालती है और शुरुआत में इससे जुड़े चेतावनी के संकेतों को पहचानना मुश्किल होता है।</p>
<p><br />ऐसा होता है कि जब रक्त शर्करा लंबे समय तक रक्तप्रवाह में रहता है, तो वे धीरे-धीरे आपके गुर्दे में रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे आपके शरीर से अपशिष्ट और अतिरिक्त पानी को छानने का काम करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे कई तरीके हैं जिनसे डायबिटीजÞ किडनी की क्षति में योगदान देती है, जिसमें रक्त वाहिका का लीक करना, मूत्राशय में पेशाब का जमा होना, बैक्टीरिया का बढ़ना शामिल है। चिंता की बात यह है कि डायबिटिक किडनी की बीमारी के शुरुआती चरण में किसी तरह के लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। सिर्फ नियमित तौर पर चेकअप कराने से ही इस समस्या का पता लगाया जा सकता है।</p>
<p><br />    स्वस्थ खाने की आदत डालें और दिन में कई बार छोटे-छोटे मील्स लें। डाइट में सब्जियां और लीन प्रोटीन को शामिल करें। चीनी, तेल और प्रोसेस्ड फूड्स से दूर रहें। हाई सोडियम डाइट से बचें क्योंकि ये शरीर में तरल पदार्थ के जमाव का कारण बनती है।</p>
<p><br />    स्मोकिंग या तंबाकू चबाने की आदत छोड़ें क्योंकि यह किडनी को और ज़्यादा नुकसान पहुंचा सकती है।<br />    किडनी को और ज़्याादा नुकसान न पहुंचे इसके लिए शराब का सेवन बिल्कुल कम कर दें। <br />    लंबाई के हिसाब से सही वजन बनाए रखें।<br />    ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल में रखें।<br /><br /><br /></p>]]>
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                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 12 Mar 2022 13:20:36 +0530</pubDate>
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