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                <title>असर खबर का : नए रंग में नजर आने लगी एमबीएस इमरजेन्सी की ट्रालियां, कांच के कमरे से निकलकर मरीजों की सेवा में पहुंची</title>
                                    <description><![CDATA[नीले रंग की पहचान से खत्म होगी स्ट्रेचर की किल्लत।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report--mbs-emergency-department-s-trolleys-now-visible-in-a-new-color/article-149666"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/1200-x-600-px)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। एमबीएस अस्पताल में इमरजेंसी में आने वाले गंभीर मरीजों को अब स्ट्रेचर के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। अस्पताल प्रशासन ने एक अनूठा प्रयोग करते हुए इमरजेंसी की 18 ट्रॉलियों को विशेष नीले रंग से पुतवा दिया है। प्रशासन ने 8 अन्य नई ट्रॉलियां भी इमरजेंसी विभाग को हैंडओवर कर दी हैं, जिससे अब स्ट्रेचरों की कुल उपलब्धता 26 हो गयी है। साथ ही ट्राली मेन और ईचार्ज काे भी इन्हें संभालने और ऑपरेट करने में लगने वाले समय में भी भारी कमी आयेगी।</p>
<p><strong>पहचान और रिकवरी आसान</strong><br />नीले रंग की वजह से अब ये ट्रॉलियां वार्डों में गुम नहीं होंगी। अस्पताल परिसर में कहीं भी नीला स्ट्रेचर दिखने पर ट्रॉली इंचार्ज उसे तुरंत रिकवर कर इमरजेंसी में ला सकेंगे। प्रबधंधन की और से बताया गया है कि पहले मरीज अपनी सुविधा के लिये ले जाते थे जिन्हे कहीं भी छोड़ देते थे ऐसे में इन्हे ढुढ़ंने मे खासी परेशानी होती थी।</p>
<p><strong>स्थान में बदलाव- बेसमेंट के पास बना नया 'ट्रॉली स्टैंड'</strong><br />अधीक्षक डॉ. धर्मराज मीणा ने बताया कि समस्या के समाधान के लिए अब नई बिल्डिंग के मेन गेट के पास, बेसमेंट पार्किंग के बगल में एक स्थाई ट्रॉली स्टैंड बना दिया गया है। अब सभी ट्रॉलियां एक ही स्थान पर मिलेंगी। जिससें आने वाले मरीजों को अब बाहर से ही इन्हे उपलब्धता हो जायेगी।</p>
<p><strong>खबर का असर</strong><br />दैनिक नवज्योति ने 26 मार्च को 25 ट्रॉलियां कांच के कमरे में शीर्षक से प्रकाशित समाचार में अस्पताल प्रशासन की लापरवाही को उजागर किया गया था कि कैसे एक तरफ मरीज स्ट्रेचर के लिए तड़प रहे हैं और दूसरी तरफ नई ट्रॉलियां तालों में बंद हैं। इस खबर के बाद हरकत में आए अस्पताल प्रशासन ने बुधवार को न केवल ट्रॉलियों को बाहर निकाला, बल्कि उनकी सुचारू उपलब्धता के लिए नई व्यवस्था भी लागू कर दी।</p>
<p>अस्पताल में संसाधनों की कमी नहीं थी, लेकिन उनके मिस-मैनेजमेंट को सुधारने के लिए अब कलर कोडिंग और नया पार्किंग बेसमेंट बनाया गया है ताकि आपातकालीन स्थिति में तुरंत स्ट्रेचर मिल सके। नर्सिंग अधीक्षक की देखरेख में ट्रॉली इंचार्ज इसकी जिम्मेदारी संभालेंगे।<br /><strong>- डाॅ.धर्मराज मीणा, अधीक्षक एमबीएस हॉस्पिटल </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 14:10:22 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का : एमबीएस अस्पताल में सुविधाओं के विकास को लेकर संभागीय आयुक्त ने दिए निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[पुराने भवन के बेसमेंट हॉल में जमा मलबे की सफाई हेतु निरीक्षण दल गठित कर शीघ्र कार्रवाई के निर्देश दिए ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report--divisional-commissioner-issues-directives-regarding-facility-upgrades-at-mbs-hospital/article-147958"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(1)69.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="en" style="font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="en">कोटा । संभागीय आयुक्त अनिल कुमार अग्रवाल ने निर्देश दिए कि एम.बी.एस. चिकित्सालय से संबंधित समस्याओं का समाधान शीघ्र किया जाए ताकि मरीजों को कोई असुविधा ना हो। उन्होंने ये निर्देश उनकी अध्यक्षता में बुधवार को आयोजित बैठक में दिए। बैठक में चिकित्सा सुविधाओं के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।संभागीय आयुक्त ने एम.बी.एस व जे.के. लोन चिकित्सालय परिसर की चार दीवारी के संबंध में स्पष्ट निर्देश दिए कि इस काम के लिए दोनों चिकित्सालय 50-50 प्रतिशत की राशि आगामी तीन कार्य दिवस में सार्वजनिक निर्माण विभाग को हस्तांतरित करना सुनिश्चित करें। एम.बी.एस. चिकित्सालय में करीब 49.95 लाख रुपए लागत से इन्टरनल वायरिंग मरम्मत के निर्देश दिए गए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="en">अनुपयोगी व जर्जर भवनों को गिराएंगे</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="en">एम.बी.एस. चिकित्सालय परिसर स्थित अनुपयोगी, असुरक्षित व जर्जर और नकारा घोषित भवन, राजकीय आवास व लेक्चर थियेटर को गिराए जाने के संबंध में अधिशाषी अभियंता, सा. नि.वि. प्रोजेक्ट खण्ड ने बताया कि एक दो दिवस में कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="en"> </span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="en">ड्रेनेज सिस्टम सुधारें</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="en" style="font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="en">एम.बी.एस. व जे. के. लोन चिकित्सालय परिसर में ड्रेनेज सिस्टम कार्य के संबंध में एम.बी.एस. अधीक्षक को फोलोअप के लिए निर्देशित किया गया। जे. के. लोन व एम.बी.एस. चिकित्सालय परिसर में एस.टी.पी. निर्माण के संबंध में केडीए मुख्य अभियंता ने कार्य शीघ्र प्रारंभ कराने की बात कही।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="en">मां योजना के काउंटर बनाएं</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="en">संभागीय आयुक्त ने एम.बी.एस. चिकित्सालय में पुराने ओ.पी.डी. में कक्षों का रिनोवेशन कर मां योजना काउंटर में परिवर्तित करने, पुराने भवन के भूतल पर स्थित सम्पूर्ण कॉरिडोर में टाइल्स की मरम्मत व पेंटिंग, पुरानी खिडकियों को एल्यूमिनियम की खिड़की में बदलने, विभिन्न वार्ड में टॉयलेटस की मरम्मत, फीमेल सर्जिकल ए, बी, सी व कॉरिडोर की मरम्मत व चिकित्सालय के अन्य कार्य के संबंध में निर्देश दिए। एम.बी.एस. चिकित्सालय के बर्न वार्ड का मरम्मत कार्य सी.एस.आर. फण्ड से करवाने के लिए निर्देशित किया गया। पुराने भवन के बेसमेन्ट में बने हॉल में भरे मलबे की सफाई के लिए निरीक्षण दल गठित कर शीघ्र कार्रवाई के निर्देश दिए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="en"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="en">जेके लोन में मेडिसिन आउटडोर शुरू करें</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="en" style="font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="en">जे.के. लोन न्यू आई.पी.डी. के बाहर खाली पड़े हुए हॉल में तुरन्त प्रभाव से शिशु औषध विभाग का आउटडोर प्रारंभ करने के निर्देश दिए। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे इन सभी कार्यों का निरीक्षण करें। बैठक में जिला कलक्टर पीयूष समारिया, अतिरिक्त संभागीय आयुक्त ममता तिवारी, डॉ. निलेश कुमार जैन, प्रधानाचार्य, डॉ. धर्मराज मीणा, अधीक्षक एमबीएस चिकित्सालय, रविन्द्र माथुर निदेशक अभियांत्रिकी केडीए, अशोक सनाढ्य अधिशाषी अभियन्ता प्रोजेक्ट खण्ड, डॉ विधि शर्मा वित्तीय सलाहकार, चिकित्सा महाविद्यालय, महावीर सांवरिया नर्सिंग अधीक्षक एम.बी.एस. व अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 13:01:42 +0530</pubDate>
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                <title>विकलांगता आवेदन पत्रों में फजीर्वाड़ा : मचा हड़कम्प,  सभी ऑफलाईन प्रक्रिया की बंद </title>
                                    <description><![CDATA[कई फार्मो में ''घुटने के नीचे एक पैर कटा'' लिखा असेसमेन्ट बना शक का कारण। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/fraud-uncovered-in-disability-applications--uproar-ensues--all-offline-processing-halted/article-147547"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)57.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जिले में विकलांगता प्रमाण पत्रों को लेकर बड़ा गडबड़ झाला सामने आया है। कोटा एमबीएस में प्राप्त आफलाईन व आनलाईन आवेदनों में गम्भीर प्रकार की गड़बड़ी देखने में आयी है। जहां डॉ. द्वारा जांच पत्र में भरी गयी जानकारी की हूबहू नकल करके अन्य आवेदकों के फार्माे पर लगा कर मिथ्या टिप्पणियां बना दी गयी है। हांलाकि मेडिकल बोर्ड द्वारा समय पर इन गड़बड़ियों को पकड़ लिया गया, जिससे इन आवेदकों के फर्जी विकलांगता प्रमाण पत्र बनने से रह गये । जबकि अस्पताल प्रबंधन द्वारा मामले का परिवाद नयापुरा थाने में भी दिया जा चुका हे।</p>
<p>कोटा के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में विकलांगता प्रमाणपत्र बनवाने के लिये लोग सीधे ही कोटा आते है। ऐसे आवेदनों की संख्या व लोगों को राहत देने के लिये एमबीएस प्रशासन ने अभी भी आॅफलाईन प्रक्रिया जारी की हुई हे। हांलाकि राज्य सरकार ने ऐसे किसी भी आवेदन के लिये वऊकऊ यूनिक डिस एबिलिटि पहचान पत्र पोर्टल पर आवेदन को अनिवार्य रूप से करने का भी निर्देश जारी किया हुआ है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों से आये लोगों द्वारा अभी भी सीधे एमबीएस आने के कारण यहां पर कार्य भार बढ़ता जा रहा है । ऐसे में सीधे कार्यालय में किये गये आवेदनों का जांचने में काफी चूक होने की संभावना रहती है।</p>
<p><strong>घुटने के नीचे एक पैर कटा'' से खुला मामला</strong><br />यहां आये आवेदनों में एक बात सभी में कॉमन थी की सभी आवेदकों के चिकित्सकीय प्रमाणीकरण में घुटने के नीचे एक पैर कटा वाली टिप्पणी लिखी हुयी थी। ऐसे में किसी भी चिकित्सक द्वारा एक जैसी लैखनी व टिप्पणी की गयी थी। जिससे इन आवेदकों के बारें में शक हुआ।विकलांगता के लिये भरे गये पत्र में भी चिकित्सीय टिप्पणी में एक टांग के कटे वाली टिप्पणी से पैनल को सारी कहानी समझ में आ गयी।वहीं दो अन्य मामलों मे प्राप्त आवेदन में भूनेश सुमन वार्ड नं 5 पिपल्दा व मनोहरी बाई ख्यावदा निवासी द्वारा दिये गये प्रपत्र में भी ऐसी ही टिप्पणी की गयी हे।</p>
<p><strong>सभी ने एक ही ई मित्र संचालक का नाम लिया</strong><br />बनवारी सुमन मनोहरी बाई सुमन के पति 4 साल पहले मोटर सायकिल से गिरकर एक्सीडेन्ट हो गया था एक पैर ने काम करना बन्द कर दिया कोटा एमबीएस में आॅपरेशन करवाया था,जिसके बाद पैर पतला पड़ गया। पैर से चलने में लाचार है सरकारी पेंशन मिल जायें तो काम आये इसी लिये हमनें आवेदन किया है। हमने पिपल्दा के ई-मित्र से हमने फार्म भरवाया था। मामले में जानकारी जुटाने के दौरान सभी आवेदक एक ही क्षेत्र के निकले वहीं सभी ने आवेदन प्रक्रिया में ई मित्र संचालक का नाम भी लिया। वही ई मित्र संचालक का कहना है कि मैने किसी का कोई आवेदन नहीं किया।</p>
<p><strong>अब आवेदन केवल आॅनलाईन ही मान्य</strong><br />एम बी एस अस्पताल द्वारा ऐसे मामले सामने आने के बाद हड़कम्प मच गया था। अधीक्षक डॉ धर्मराज मीणा इस संदर्भ में जानकारी देते हुये बताया कि जिसके बाद से ही आॅफलाईन आवेदनों को पूरी तरह बन्द कर दिया गया है। डॉ मीणा ने बताया की हमारी तरफ से उपरोक्त प्रकरण को नयापुरा थाने में भिजवाया गया है ।</p>
<p><strong>चिकित्सकों की डिजिटल मैपिंग</strong><br />अब वऊकऊ की समस्त कार्यप्रणाली आॅनलाइन होगी। अधिकृत चिकित्सकों की प्रोफाइल पोर्टल पर मैप की जा रही है ताकि आंकलन सीधे आॅनलाइन भरा जा सके।सत्यापन प्रक्रिया आॅनलाइन आवेदकों को अस्पताल द्वारा स्वयं कॉल करके बुलाया जाएगा। जांच और आॅनलाइन एंट्री के बाद ही वऊकऊ कार्ड जारी होगा। निश्चित समय सीमा: इस पूरी प्रक्रिया (जांच से कार्ड जारी होने तक) के लिए एक माह की अवधि निर्धारित की गई है।</p>
<p>आम जन की सुविधा के लिये दोनों प्रकार से काम चलाया हुआ था लेकिन गड़बडी मिलने के बाद अब केवल आॅनलाईन ही काम होंगे। हमने पुलिस को भी जानकारी भिजवा दी है।<br /><strong>-डॉ धर्मराज मीणा,  अधीक्षक एमबीएस कोटा</strong></p>
<p>अभी जानकारी में आया हे यदि ऐसा हे तो मामले में जांच की करवायी जायेगी।<br /><strong>- विनोद कुमार,  थानाधिकारी नयापुरा कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 15:41:20 +0530</pubDate>
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                <title>30 साल पुरानी एक मात्र मशीन पर धुलाई का जिम्मा, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[एमबीएस अस्पताल प्रशासन की  लापरवाही से लॉन्ड्री मशीन हुई नाकारा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/a-single-30-year-old-machine-is-responsible-for-laundry/article-143783"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/12200-x-600-px)-(2)9.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। लाखों की मशीनरी भी प्रशासनिक लापरवाही के चलते किस तरह कण्डम हो जाती है इसकी बानगी कोटा के एमबीएस अस्पताल के लॉन्ड्री सेक्शन में देखने को मिली । बेपरवाही का आलम यह है कि अस्पताल में मरीजों की चादरें, कंबल और अन्य कपड़ों की धुलाई अभी भी लगभग 25 वर्ष पुरानी मशीनों से की जा रही है, जिससे काम की रफ्तार और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो रही हैं। अस्पताल से आए दिन दाग लगे चद्दरों की शिकायतें भी कितनी  बार परिजनों द्वारा सामने आती रहती है । लॉन्ड्री सेक्शन के प्रभारी ने बताया कि यहां पर सोमवार और गुरुवार को ही कपड़े लिए और दिए जाते हैं, क्योंकि पुरानी मशीनें होने के कारण लगातार धुलाई का काम चल रहा है। इसी वजह से पूरे सप्ताह में नियमित और समय पर कपड़ों की आपूर्ति करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।</p>
<p><strong>मात्र 70 हजार की दरकार</strong><br />जानकारी के अनुसार वर्ष 2020 में अस्पताल प्रशासन को एक आधुनिक कपड़ा धुलाई मशीन स्थापित की गई थी, जिसे एक आॅयल कम्पनी के सहयोग से उपलब्ध कराया गया था। यह मशीन अत्याधुनिक तकनीक से लैस थी । पारम्परिक ब्लीच,सोडा व सर्फ के प्रयोग से कपडो व त्वचा को भी परेशानी होती है जबकि नई मशीन व उन्नत कैमिकल से अधिक मात्रा में साफ-सफाई सुनिश्चित करने में सक्षम थी । यहां काम करने वाले लोगों ने बताया कि इसको देखने के लिए इंजीनियर भी आए थे जिन्होने 70 हजार खर्चा  बताया था । कार्मिकों ने बताया कि नई लगाई गई मशीन को पहले तो करीब दो सालों तक चालू ही नहीं किया गया। 2022-23 में मशीन को चालू किया गया तब काम में थोड़ा आराम और सुधार आया था लेकिन पिछले करीब 14 माह से भी अधिक का समय गुजर गया लेकिन मशीन चालू नहीं हो पायी है।</p>
<p><strong>बेड़शीट सहित ओटी ड्रेस की धुलाई</strong><br />परिसर में स्थापित इस धुलाई केन्द्र पर रोजाना करीब 600 बेडशीट के अलावा आई ओटी, जनरल व न्यूरो आॅपरेशन थियेटर के भी कपडे़ आते है। यहां पर पुराने समय की धुलाई करने वाली दो मशीनें है इनमें से एक तो पूरी तरह गल चुकी है जबकि दूसरी को  किसी तरह जुगाड़ करके चलाया जा रहा है जो भी बंद हो जाए अस्पताल में भारी परेशानी पैदा हो सकती है।</p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />मशीन की कम्पनी का पता कराया है, मशीन की मरम्मत के लिए आवश्यक पत्रावलियां तैयार की जा चुकी है, विशेषज्ञों के अनुसार करीब 70-80 हजार का खर्च आने का एस्टीमेट है। इसको चालू करवाया जाएगा।<br /><strong>- डॉ. कर्नेश गोयल, उपाधीक्षक एमबीएस असपताल </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Feb 2026 14:46:44 +0530</pubDate>
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                <title>अस्पताल परिसर में जेबकतरों की भरमार</title>
                                    <description><![CDATA[घटना के बाद पीड़ित ने पूरे परिसर में तलाश की, लेकिन मोबाइल का कोई सुराग नहीं मिला। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/hospital-premises-full-of-pickpockets/article-123945"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1w5s-(2).png" alt=""></a><br /><p>कोटा।  शहर के एमबीएस अस्पताल में आने वाले मरीजों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान  लग रहा है। आए दिन एमबीएस अस्पताल में मरीजों की जेब से पैसे चुराने, मोबाइल झपटकर भागने तथा मरीजों के साथ जेबकतरे भी लाइन में लग वारदात को अंजाम दे जाते हैं। इस तरह की वारदातों के कारण मरीजों व परिजनों की परेशानी बढ़ गई है। जानकारी के अनुसार एमीबएस अस्पताल में एक आरजीएचएस काउंटर के पास 11.30 बजे करीब लाइन में लगे एक पीड़ित सफी मोहम्मद पुत्र मोहम्मद हुसैन की जेब से जेबकतरे ने एक मोबाइल पार कर लिया। घटना के बाद पीड़ित ने पूरे परिसर में तलाश की, लेकिन मोबाइल का कोई सुराग नहीं मिला। पीड़ित के अनुसार आरजीएचएस काउंटर लाइन पर खड़ा होने के दौरान किसी ने मोबाइल चुरा लिया। अभी पीड़ित ने नयापुरा पुलिस थाने में मोबाइल चोरी का कोई मामला दर्ज नहीं करवाया है।</p>
<p><strong>कर्मचारियों की चिंता, प्रबंधन की चुप्पी</strong><br />प्रयोगशाला में काम कर रहे कार्मिकों के अनुसार काफी समय से कैमरे खराब पड़े है। प्रशासन को इस बारे में कई बार अवगत भी करवा चुके है। लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं अस्पताल प्रबंधन इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है।</p>
<p><strong>तीन दिन पहले भी नए अस्पताल में हुई थी वारदात</strong><br />कोटा मेडिकल कॉलेज से जुड़े सुपर स्पेशियलिटी (एसएसबी) से बुधवार देर रात झालावाड़ के शेरपुर तहसील के पिड़ावा से आए तिमारदार धर्मेंद्र का मोबाइल रात एक बजे जेब से चोरी हो गया था। तीन बजे नींद खुलने के बाद जब मोबाइल नहीं मिला तो आसपास गार्ड को भी सूचित किया। मोबाइल नहीं मिलने पर उसने महावीर थाने में मोबाइल चोरी की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी</p>
<p><strong> तीसरी आंख को मोतियाबिंद</strong><br />कोटा के एमबीएस अस्पताल की केंद्रीय प्रयोगशाला में तीसरी आंख पर झाला लगा हुआ है। यानी कैमरे तो लगे हैं लेकिन काम नहीं कर रहे है। मरीजों की जांच रिपोर्ट व उनकी सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। आए दिन मरीजों के साथ चोरी की वारदाता होती रहती है। केंद्रीय प्रयोगशाला वह जगह है जहां आने वाले मरीजों के खून, यूरिन और अन्य जांचों के सैंपल जमा होते हैं और रिपोर्ट तैयार की जाती है। यहां हर दिन बड़ी संख्या में मरीज और स्टाफ आते हैं, लेकिन निगरानी के अभाव में सैंपल की अदला-बदली, चोरी या अनियमितता की आशंका बनी रहती है। जांच करवाने आए मरीजों का कहना है कि यहां अस्पताल में पहले भी कई मरीजों व परिजनों की जेब से पैसे पार हो चुके है। यहां पर सीसीटीवी भी नहीं है। वहीं प्रयोगशाला में कार्मिकों ने बताया कि कैमरे तो है पर खराब है। तकनीकी कारणों के चलते अभी खराब है।</p>
<p><strong>जांच करवाएंगे</strong><br />अस्पताल में आने वाले मरीजों या परिजनों का मोबाइल चोरी होता है तो काफी चिंताजनक बात हंै। शनिवार को घटित हुई घटना की जानकारी अभी मिली नहीं है। पता करवाता हूं। वहीं केन्द्रीय प्रयोगशाला में जल्द ही कैमरों की व्यवस्था की जाएगी। जो खराब है उसे सही करवाएंगे। यहां आने वाले मरीजों की सुरक्षा के लिए और पुख्ता इंतजाम करेंगे।<br /><strong>- डॉ. धर्मराज मीणा, अधीक्षक, एमबीएस अस्पताल, कोटा</strong></p>
<p><strong>जानकारी नहीं है</strong><br />एमबीएस अस्पताल में मोबाइल चोरी की घटना की जानकारी मेरे सामने नहीं आई है। ना ही कोई पीड़ित व्यक्ति ने यहां आकर शिकायत दी है।<br /><strong>- विनोद कुमार नागर, एसएचओ, नयापुरा थाना</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Aug 2025 17:38:00 +0530</pubDate>
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                <title>नहीं दिखते ट्रॉली मेन, तीमारदार खुद स्ट्रेचर खींचने को मजबूर</title>
                                    <description><![CDATA[अस्पताल में स्ट्रेचर और व्हीचेयर की कमी के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/-trolley-men-are-not-seen--attendants-are-forced-to-pull-the-stretchers-themselves/article-120046"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/882roer-(3)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। संभाग के सबसे बड़े अस्पताल एमबीएस की व्यवस्था बेपटरी पर चल रही है। यहां आकर मरीज अपने को असहाय महसूस करता है। पहले तो लंबी कतार में खड़े होकर पर्ची बनाने का दर्द झेलना पड़ता है। इसके बाद डॉक्टर को दिखाने से लेकर वार्ड में भर्ती होने तक उसे कई परेशानियों से दोचार होना पड़ता है। सबसे ज्यादा परेशानी तो गंभीर रूप से बीमार और घायल मरीजों को आती है। वाहन से उतार कर डॉक्टर तक ले जाने के लिए अस्पताल के गेट पर स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं होते है। तीमारदारों  को पहले तो स्ट्रेचर ढूंढना पड़ता है, फिर मरीज को लेटाकर स्वयं ही इमजेंसी तक ले जाना पड़ता है। जबकि अस्पताल प्रशासन की ओर से अस्पताल के प्रवेश द्वार के पास ही ट्रॉली स्टैंड बना रखा है और वहां ट्रॉलीमैन की ड्यूटी भी लगा रखी है।  लेकिन स्टैंड पर ना तो ट्रॉली मिलती है ना ही ट्रॉलीमैन।  अस्पताल प्रशासन का कहना है कि तीमारदार ट्रॉली से मरीज वार्ड में ले जाने के बाद ट्रॉली वहीं छोड़ देते है। जिससे स्टैंड पर ट्रॉलियां नहीं मिलती है। जबकि ट्रॉली उपयोग करने के बाद उसे स्टैंड पर पहुंचा दें तो ुअन्य मरीजों परेशानी नहीं होगी। उधर तीमारदारों का कहना है कि अस्पताल में स्ट्रेचर और व्हीचेयर की कमी के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को तीमारदार ट्रोली नहीं मिलने के कारण गोद में उठाकर ले जाते हंै। अस्पताल प्रशासन का कहना है की तीमारदार अपने मरीजों को जिस वार्ड में लेकर जाते है वहीं पर स्ट्रेचर व व्हीलचेयर को वहीं छोड़ देते है। अगर वह उनकी निर्धारित जगह पर लाकर रखते है तो जरूरत पड़ने पर इधर उधर तलाश नहीं करना पड़ता है।</p>
<p><strong>ढूंढ कर लाना पड़ता स्ट्रेचर</strong><br />स्ट्रेचर नहीं मिलने से उसे इधर उधर ढूंढना पड़ता है। मरीजों को ओटी, वार्ड और सीटी स्केन के लिए ले जाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। अस्पताल के वार्डो से ढूंढ कर व्हीलच्चेयर व स्ट्रेचर लाना पड़ता है। <br /><strong>-दीपक प्रजापति, तीमारदार</strong></p>
<p><strong>ट्रॉलीमैन का स्थान नहीं है निर्धारित,ढूंढना होता मुश्किल</strong><br />मेरे पड़ोसी के बीमार होने पर अस्पताल लेकर गया। डॉक्टर ने इमजेंसी में ले जाने के लिए कहा मैंने स्ट्रेचर और ट्रॉलीमैन को तलाशा लेकिन वो नहीं मिला तो मैं स्वयं ही पड़ोसी को ट्रॉली पर लेटाकर इमरजेेंंसी कक्ष में लेकर गया। अस्पताल में व्यवस्था चरमराई हुई है। अस्पताल में वार्ड में वार्ड बॉय नजर तक नहीं आते है।  वहीं ट्रॉली काउंटर पर लगाए गए कर्मचारी भी वहां नजर नहीं आते हंै। अस्पताल में इलाज के लिए आए मरीजों को तीमारदार ही चिकित्सकों के कक्ष से लेकर वार्ड तक लाते ले जाते हैं। कभी व्हीलचेयर तो कभी स्ट्रेचर स्वयं ही ले जाना मजबूरी है। <br /><strong>-मनीष सामरिया, बोरखेड़ा निवासी</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में स्ट्रेचर व व्हीलचेयर है। मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो इसका पूरा प्रयास किया जाता है। फिर भी स्ट्रेचर की कमी होती है तो स्टोर से उपलब्ध करा दिया जाता है। <br /><strong>-धर्मराज मीणा, अधीक्षक , एमबीएस अस्पताल कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Jul 2025 15:35:30 +0530</pubDate>
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                <title>एमबीएस, जेकेलोन व रामपुरा अस्पताल के पास 65 डेसिबल से ज्यादा शोर</title>
                                    <description><![CDATA[अस्पताल की 100 मीटर की परिधि में साइलेंस जोन होने के बाद शोर कम नहीं हो रहा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/more-than-65-decibel-noise-near-mbs--jk-lon-and-rampura-hospital/article-96890"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/6633-copy110.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में तेज आवाज के डीजे पर प्रतिबंध होने बावजूद शहर में इसका उपयोग हो रहा है। खासतौर पर नो साइलेंस जोन में भी लोग तेज आवाज में डीज और हॉर्न बजा रहे इनको रोकने के संकेत तक गायब हो चुके है। शहर में ध्वनि प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। हालात यह है कि कोटा के सरकारी अस्पताल के साइलेंस जोन भी ध्वनि प्रदूषण की चपेट में आ चुके हैं। अस्पताल की 100 मीटर की परिधि में साइलेंस जोन होता है। लेकिन यहां भी कानफोडू शोरगुल हैं, जो दिन के साथ रात में भी मरीजों को चैन नहीं लेने देता है। एमबीएस में स्ट्रोक, हार्ट, और गंभीर बीमारियों के मरीज भर्ती है लेकिन रोड पर वाहनों के शोर के साथ हार्न और डीजे का शोर मरीजों की परेशानी का सबब बन रहा है। जबकि इन क्षेत्रों में ध्वनी प्रदूषण की मॉनिटरिंग होने के बावजूद शोर रूक नहीं रहा है। </p>
<p>एमबीएस अस्पताल व नयापुरा क्षेत्र में दिन में 67.6 डेसिबल व रात में 60 डेसिलब ध्वनी प्रदूषण हो रहा है। जबकि इसको साइलेंस जोन घोषित कर रखा उसके बावजूद यहां शोर बढ रहा है। राजस्थान के प्रमुख शहरों में राजकीय अस्पताल क्षेत्रों में लगातार 24 घंटे ध्वनि प्रदूषण की मॉनिटरिंग की जा रही है। उसके बावजूद यहां शोर नहीं रूक रहा है। राजस्थान पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की ओर से यहां पर अस्पतालों के साइलेंस जोन में दिन में 50 और रात में 40 डेसिबल ध्वनि स्टैंडर्ड मानक है। इससे ज्यादा होने पर प्रदूषण की निगरानी के लिए सिस्टम लगाया गया है, जो डेटा संग्रहण करता है, जिससे अस्पताल के आस-पास रात और दिन में शोर के स्तर का पता चलता है। अक्टूबर की रिपोर्ट में कोटा में 67.6 डेसिबल आया है जो ज्यादा है। </p>
<p><strong>अक्टूबर में इन अस्पतालों के बाहर रहा ध्वनि प्रदूषण डेसिबल में</strong></p>
<p><strong>अस्पताल    क्षेत्र     दिन में    रात में</strong><br />एमबीएस    नयापुरा    67.6    60.3<br />जेकेलोन     नयापुरा    68.3    59.6<br />रामपुरा    रामपुरा       62.5.    54.4<br />मेडिकल    रंगबाडी     62.2    54.8<br />(स्रोत: आरएसपीसीबी (आंकड़े अक्टूबर 2024 की रिपोर्ट)</p>
<p><strong>इन शहरों में हो रही मॉनिटरिंग</strong><br />राजस्थान पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की ओर से 33 जिलो के सरकारी अस्पतालों में ध्वनी प्रदूषण की मॉनिटरिंग की जा रही लेकिन उसके कम करने पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। अस्पतालों में कोटा, बूंदी, झालावाड़, बारां, अजमेर, अलवर, बांसवाड़ा, बाड़मेर, भरतपुर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, बीकानेर, चित्तौड़गढ़, दौसा, धौलपुर, डूंगरपुर, हनुमानगढ़, जयपुर, जैसलमेर, जालोर, झुंझुनू, जोधपुर, करौली, नागौर, पाली, प्रतापगढ़, राजसमंद, सवाईमाधोपुर, सीकर, सिरोही, श्रीगंगानगर, तिजारा सिटी, टोंक व उदयपुर शहर में राजकीय अस्पतालों के आस-पास ध्वनि प्रदूषण स्वर की मॉनिटरिंग होती है।</p>
<p><strong>साइलेंस जोन से मरीजों को शीघ्र मिलता है स्वास्थ्य लाभ</strong><br />न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. विजय सरदाना ने बताया कि अस्पताल क्षेत्र साइलेंस जोन की रेंज में आता है। यहां गंभीर बीमारियों के मरीज भर्ती होते जिनको शांत वातावरण की आश्यकता होती है। शांत क्षेत्र में ही व्यक्ति को आराम मिलता है और तनाव मुक्त रहता है। अस्पताल का क्षेत्र मरीजों के स्वास्थ्य के चलते साइलेंस जोन होता है। साइलेंस जोन में दिन में 50 व रात में 40 डिसेबल ध्वनी स्टैंडर्ड नानक है। इससे ज्यादा होने पर प्रदूषण ही रेंज में आता है एमबीएस अस्पताल के पास अक्टूबर माह में ध्वनि प्रदूषण का स्तर दिन में 67.8 व रात में 60.3 डेसिबल रेकॉर्ड हुआ है। जिससे अस्पताल के मरीजों को दिन और रात में भी राहत नहीं है। </p>
<p><strong>कानफोडू शोरगुल से मरीज हो रहे परेशान</strong><br />अस्पताल में मरीज शीघ्र स्वस्थ के लिए आता है। एमबीएस व जेकेलोन अस्पताल को साइलेंस जोन घोषित कर रखा उसके बावजूद यहां शोर थमने का नाम नहीं ले रहा है। यहां वाहनों की तेज आवाज प्रेशर हॉर्न, डीजे की आवाजे मरीजों को सोने नहीं देती है। वाहनों की आवाजाही और प्रेशर हॉर्न के उपयोग से साइलेंस जोन में शोरगुल बढ़ता जा रहा है। तेज आवाज तनाव और चिंता के स्तर को बढा रहा है। निंद पूरी नहीं होने से मरीज अवसाद आ रहे है।<br /><strong>-  उपाध्याय, तीमारदार </strong></p>
<p>तेज ध्वनी प्रदूषण से मरीज के स्वास्थ्य पर विपरित प्रभाव पड़ता है अन्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बनता है। वहीं तेज आवाज के कारण हम दूसरों की बात स्पष्ट रूप से नहीं सुन पाते हैं। कुछ स्टडी से यह भी सामने आया है कि लंबे समय तक तेज शोर के संपर्क में रहने से उच्च रक्तचाप, दिल की धड़कन बढ़ता और हृदय रोग के खतरे की आशंका भी बढ सकती है।<br /><strong>- डॉ. संजय सायर, चिकित्सा प्रभारी कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Dec 2024 18:43:52 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - निगम ने एमबीएस व जेकेलोन अस्पताल के मेन गेट से फिर हटाए अतिक्रमण</title>
                                    <description><![CDATA[नवज्योति में मामला प्रकाशित होने के बाद निगम हरकत में आया।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-news----the-corporation-again-removed-encroachment-from-the-main-gate-of-mbs-and-jk-lon-hospital/article-96847"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/9930400-sizee-(9)1.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम कोटा उत्तर के अतिक्रमण निरोधक दस्ते द्वारा  गुरुवार को एमबीएस व जेकेलोन हॉस्पिटल के क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को अंजाम दिया।  साथ ही दुकानों के बाहर सामान रखने वालों पर 7 हजार रुपए का जुर्माना किया गया। अतिक्रमियों को भविष्य मे अतिक्रमण नही करने की  चेतावनी दी । नगर निगम कोटा उत्तर के आयुक्त अशोक त्यागी ने बताया कि नगर निगम के अतिक्रमण निरोधक दस्ते द्वारा पुलिस उप अधिक्षक तरूण कांत सोमानी, सहायक अतिक्रमण प्रभारी हनुमाना राम की अगुवाई में  सुबह सेवन वंडर्स पार्क रोड पर कार्रवाई की गई। दस्ते ने मुख्य सड़क के फुटपाथ पर अवैध रूप से व्यवसाय करने वाले विक्रताओं को हटाकर विक्रय संबंधी बाट व तराजू को जब्त कर लिया गया। इसके बाद निगम के दस्ते ने दोपहर बाद एमबीएस हॉस्पिटल व जेकेलोन हॉस्पिटल के सामने और नयापुरा विवेकानंद सर्किल से बस स्टैण्ड तक के क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की। उन्होने बताया कि दस्ते ने इन अस्पतालो के मुख्य मार्ग पर ठेले लगाकर सामान बेचने वालों को हटाया। साथ ही इस क्षेत्र मे लगी दुकानों के बाहर रखे गए सामानों को भी दुकानदारों से दुकानों के अंदर करवाया। उन्हें चेतावनी दी कि भविष्य में दुकान के बाहर सामान पाए जाने पर जब्त कर लिया जाएगा। इस दौरान निगम दस्ते ने दुकानदारों से सात हजार रुपए की जुर्माना राशि भी वसूल की।</p>
<p><strong>नवज्योति ने किया था मामला प्रकाशित</strong><br />जे.के. लोन व एमबीएस अस्पताल के मेन गेट पर बार-बार हो रहे अतिक्रमण का मामला दैनिक नवज्योति ने प्रकाशित किया था। समाचार पत्र में 2 दिसम्बर के अंक में पेज 2 पर ‘नगर निगम के नो वेंडिंग जोन की अनदेखी, हर कोई चला रहा दुकान’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें बताया कि नगर निगम द्वारा हटाने के बाद भी फिर से दोनों जगह पर मेन गेट के सामने अतिक्रमण हो रहा है। इसके बाद नगर निगम के अधिकारियों ने कार्ययोजना बनाकर  गुरुवार को दोनों जगह से न केवल अतिक्रमण हटाए। वरन. अतिक्रमियों को दोबारा अतिक्रमण नहीं करने की चेतावनी दी और उनसे जुर्माना भी वसूल किया। पुलिस उप अधीक्षक तरूण कांत सोमानी ने बताया कि अस्थायी अतिक्रमण बार-बार हो जाते हैं। उनके खिलाफ समय-समय पर कार्रवाई की जाती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Dec 2024 13:32:07 +0530</pubDate>
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                <title>कई महीनों से बंद पड़े ऑक्सीजन प्लांट</title>
                                    <description><![CDATA[सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इन प्लांटों के भुगतान की फाइल मेडिकल कॉलेज और राज्य सरकार के बीच घूम रही है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/oxygen-plants-closed-for-many-months/article-91524"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/630400-size-(13)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जिले के अस्पतालों में कोरोना महामारी के समय दर्जन भर ऑक्सीजन प्लांट लगाए गए थे। लेकिन समय के साथ रखरखाव और मरम्मत की कमी के चलते ये प्लांट बंद होते गए और हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि अस्पतालों में प्लांट होने के बावजूद बाहर से ऑक्सीजन के सिलेंडर मंगाने पड़ रहे हैं। जिले के लगभग सभी अस्पतालों मात्र एक से दो प्लांट ही संचालन की अवस्था में हैं बाकि प्लांट या तो खराब पड़े हैं या उन्हें चलाने की स्वीकृति नहीं मिल पाई है। ऐसे में अस्पताल प्रशासन हर रोज 100 से 150 सिलेंडर बाहर से मंगा रहे हैं। वहीं अस्पतालों के अधीक्षकों का दावा है कि प्लांटों के संचालन के लिए मेडिकल कॉलेज प्रशासन को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया हुआ है।</p>
<p><strong>मेडिकल कॉलेज और एमबीएस में दो-दो प्लांट चालू</strong><br />कोटा संभाग में एमबीएस और मेडिकल कॉलेज अस्पताल दो सबसे बड़े अस्पताल हैं। जहां दोनों की कुल क्षमता करीब 1100 बेड की है। जिसके चलते दोनों अस्पतालों में ऑक्सीजन की खपत भी हर रोज करीब 400-500 सिलेंडर की होती है। जबकि इससे ज्यादा क्षमता के प्लांट दोनों अस्पतालों में मौजूद हैं। इसके बाद भी अस्पताल प्रशासन बाहर से महंगे दामों पर सिलेंडर मंगा रहा है। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रतिदिन 100 से 120 सिलेंडर और एमबीएस अस्पताल में 200 से 250 सिलेंडर बाहर से मंगाए जा रहे हैं। वहीं देखा जाए तो मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पांच ऑक्सीजन प्लांट और एमबीएस अस्पताल में 9 ऑक्सीजन प्लांट मौजूद हैं। इनमें से मेडिकल कॉलेज के केवल दो चालू हैं और एमबीएस में एक भी प्लांट चालू अवस्था में नहीं हैं। जिनकी भरपाई के लिए बाहर से सिलेंडर मंगाए जा रहे हैं।</p>
<p><strong>जेके लोन और एसएसएच में भी यही स्थिति</strong><br />मेडिकल कॉलेज और एमबीएस अस्पताल के अलावा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और जे के लोन अस्पताल में भी यही स्थिति है। यहां भी जेके लोन में एक और एसएसएच में दो प्लांट ही संचालित हो रहे हैं। जबकि जे के लोन में 4 और एसएसएच में 6 प्लांट मौजूद हैं। वहीं सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में हर महीने करीब 150 सिलेंडर और जेके लोन अस्पताल में हर दिन 125 से 135 सिलेंडर बाहर से मंगाए जा रहे हैं। </p>
<p><strong>मेडिकल कॉलेज और सरकार के बीच फंसे प्लांट</strong><br />जिला अस्पतालों में मौजूद ऑक्सीजन प्लांटों के निर्माण और संचालन से संबंधित भुगतान को लेकर मामला मेडिकल कॉलेज और राज्य सरकार के बीच फंसा हुआ है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इन प्लांटों के भुगतान की फाइल मेडिकल कॉलेज और राज्य सरकार के बीच घूम रही है। जिसके चलते प्लांटों के संचालन की स्वीकृति नहीं मिलने के कारण बाहर से सिलेंडर मंगाने पड़ रहे हैं।</p>
<p><strong>केडीए से नहीं मिली स्वीकृति </strong><br />कोरोना काल में अस्पतालों में केडीए और अन्य संस्थाओं की ओर से ऑक्सीजन प्लांट लगाए गए थे। जिनमें लिक्विड और जनरेशन प्लांट शामिल थे। लेकिन बावजूद इसके इन अस्पतालों में प्रशासन की देखरेख में कमी के चलते से सभी प्लांट महीनों से बंद पड़े हैं। जिसमें 500 एलएमपी में 100 सिलेंडर की कैपिसिटी तथा 1000 एलएमपी के प्लांट में 200 सिलेंडर उत्पादन की कैपिसिटी है। कंपनी की आरे से 3 साल की गारंटी पर ये प्लांट लगाए गए थे जिसमें प्लांट में किसी भी प्रकार की तकनीकी खराबी होने पर मरम्मत व देखरेख की जिम्मेदारी कंपनी की थी। कंपनी की समयावधि समाप्त होने के बाद अधिकतर ऑक्सीजन प्लांट तकनीकी खराबी से बन्द पड़ गए। इनमें कुछ प्लांटो में कम्प्रेशर खराब है तो ओर कुछ में ऑयल से सम्बन्धित समस्या आने के कारण बन्द है। इसके अलावा कई प्लांटों में केडीए और चिकित्सा विभाग के बीच मामला फंसा हुआ है। सूत्रों के अनुसार प्लांटों के निर्माण और संचालन से संबंधित बकाया शेष राशि का भुगतान नहीं होने से केडीए की ओर से इनके संचालन की स्वीकृति नहीं मिली है। </p>
<p><strong>लोगों का कहना है</strong><br />कोरोना के समय लगाए गए ये प्लांट अस्पताल और प्रशासन के बीच लटके हैं। कई प्लांटों को बंद हुए सालभर से ज्यादा हो गया है। इमरजेंसी की स्थिति में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा।<br /><strong>- दिनेश सुमन, छावनी</strong></p>
<p>अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट के बंद होने की समस्या के बारे में जानकारी है। लेकिन अभी ऑक्सीजन सप्लाई में कोई दिक्कत नहीं लेकिन अस्पतालों को आपातकालीन स्थिति के लिए प्लांटों को तैयार रखना चाहिए। क्योंकि कभी भी बड़ी दुर्घटना होने पर हाथों हाथ ऑक्सीजन की सप्लाई कैसे मिल पाएगी।<br /><strong>- मोहम्मद खालिद, विज्ञान नगर</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />अस्पतालों में कितने प्लांट बंद हैं कितने संचालित हैं और कितने सिलेंडर बाहर से मंगाए जा रहे हैं, इसकी जानकारी अधीक्षक बेहतर ढंग से बता पाएंगे। फिर भी मामले को दिखाकर समस्या को हल करने का प्रयास करेंगे।<br /><strong>- डॉ. संगीता सक्सेना, प्रधानाचार्य एवं नियंत्रक, मेडिकल कॉलेज, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Sep 2024 17:11:28 +0530</pubDate>
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                <title>एमबीएस ओपीडी ब्लॉक की सात में से पांच लिफ्ट खराब</title>
                                    <description><![CDATA[अस्पताल की रोजाना लगभग 3000 की ओपीडी रहती है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/five-out-of-seven-lifts-of-mbs-opd-block-are-not-working/article-90040"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/1rtrer15.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। एमबीएस अस्पताल के नए ओपीडी ब्लॉक में मौजूद सात लिफ्ट में से केवल दो लिफ्ट ही चालू अवस्था में हैं बाकी पांच लिफ्ट कई दिनों से बंद पड़ी हैं। जिसके चलते अस्पताल में आने वाले मरीजों को समस्या का सामना करना पड़ रहा है। वहीं अस्पताल की कई विभागों की ओपीडी द्वितीय तल पर संचालित होती हैं जो समस्या को और बढ़ा देती हैं। लिफ्ट के बंद होने के चलते मरीजों को सीढ़ियों से चढ़ना पड़ रहा है। करीब एक महीने से बंद पड़ी लिफ्ट : अस्पताल की नई ओपीडी में मरीजों की सुविधा हेतु कुल सात लिफ्ट लगाई गई थी। जो शुरूआत में तो अच्छे से चली लेकिन समय के साथ एक एक करके खराब होती रही। वहीं वर्तमान में आलम यह है कि ओपीडी में मौजूद सात में से पांच लिफ्ट बंद हैं जिनका सारा भार केवल दो लिफ्ट पर आ गया है। जिसके कारण पैर में फैक्चर वाले मरीज भी सीढ़ियों से जाने पर मजबूर हैं। करीब एक महीने से बंद पड़ी इन लिफ्टों को अभी चालू नहीं किया जा सका है। अस्पताल में हड्डियों से लेकर अस्थमा तक के मरीज दिखाने आती हैं। साथ ही अस्पताल की रोजाना लगभग 3000 की ओपीडी रहती है। ऐसे में लिफ्ट की आवश्यकता और बढ़ जाती है।</p>
<p><strong>लोगों का कहना है</strong><br />ओपीडी की लिफ्ट कई दिनों से बंद पड़ी हैं, जिसके चलते लोगों को सीढ़ियां से दूसरे तल पर जाना पड़ रहा है। अस्पताल में सुविधा होने के बाद भी लोगों को उसके लिए परेशान होना पड़ रहा है।<br /><strong>- साहिद मोहम्मद, गुमानपुरा</strong></p>
<p>अस्पताल की सात में से केवल दो लिफ्ट चालू हैं पांच बंद पड़ी हैं, सारा भार दो लिफ्टों पर आ जाने से जिन मरीजों को लिफ्ट की सबसे ज्यादा आवश्यकता है वो भी इससे वंचित रह जाते हैं। <br /><strong>- दिलीप शर्मा, बोरखेड़ा</strong></p>
<p>मैं गुरूवार को एमबीएस अस्पताल में दिखाने गया था, मुझे अस्थमा की शिकायत है। अस्पताल पहुंचा तो पता चला कि लिफ्ट बंद हैं। सीढ़ियां चढ़ना मरे लिए मना है, फिर भी मजबूरन सीढ़ियों से जाना पड़ा।<br /><strong>- अदनान कुरैशी, रामपुरा</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />ओपीडी ब्लॉक की बंद पड़ी लिफ्टों की मरम्मत के लिए बिल्डिंग प्रभारी को पत्र लिखा हुआ है। साथ ही केडीए को भी समस्या से अवगत कराकर मरम्मत के लिए लिखा हुआ है। लिफ्टों को जल्दी ठीक कराने की कोशिश की जा रही है।</p>
<p><strong>-धर्मराज मीणा, अधीक्षक, एमबीएस अस्पताल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Sep 2024 18:12:05 +0530</pubDate>
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                <title>एमबीएस बना मच्छरों का घर, मरीजों को मार रहे डंक</title>
                                    <description><![CDATA[परिसर में जगह जगह खुली नालियों में मच्छरों की भरमार है लेकिन इनको नष्ट करने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mbs-becomes-home-to-mosquitoes-stings-are-killing-patients/article-56245"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/mbs-bna-machharo-ka-ghr,-marizo-ko-mar-rhe-dank...kota-news-04-09-2023.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में डेंगू स्क्रब टायफस और मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। शनिवार को 37 मरीज डेंगू पॉजीटिव आए। पिछले दो दिन से रक्षाबंधन का अवकाश और धूप में आए तेजी के कारण डेंगू के मच्छरों का हमला कम रहा है लेकिन शनिवार को एकबार फिर से सर्वे शुरू होते ही 37 मरीज डेंगू के पॉजीटिव आए है। शहर में लगातार डेंगू का कहर जारी है। पूरे शहर में एंटी लार्वा गतिविधियां जोरो पर चल रही है। लेकिन एमबीएस अस्पताल की नालियों और गड्डों में लार्वा तेजी पनप  कर अस्पताल में भर्ती मरीजों को डंक मार रहे है। परिसर में जगह जगह खुली नालियों में मच्छरों की भरमार है लेकिन इनको नष्ट करने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे है। जिसके चलते दिन में और रात में मच्छर वार्डो भर्ती मरीजों के डंक मार रहे है। </p>
<p><strong>गलियारे में पनप रहे मच्छर मारना भूले</strong><br />अस्पताल में इलाज कराने आए राजाराम बैरवा ने बताया कि एमबीएस के महिला वार्ड में मरीजों को मच्छरों से बचाने के लिए मच्छरदानी लगाकर इतिश्री कर ली, लेकिन ये मच्छर कहां से आ रहे है। इस ओर अस्पताल प्रशासन ध्यान नहीं दिया। अस्पताल के महिला वार्ड के पास बने गलियारे में नालियों में जमा गंदगी और पानी के कारण यहां मच्छर पनप रहे है। जिम्मेदारों की इन नालियों और गंदगी पर नजर नहीं पड़े इसलिए कर्मचारियों ने एमबीएस की ट्रॉली स्टेड के पास बने गलियार के चैनल गेट को ही बंद कर दिया। जिससे डॉक्टरों की इस गंदगी और पनप रहे मच्छरों पर निगाह नहीं पड़े। मच्छरदानी लगाने के बजाए मच्छरों को मारते तो लोगों भला होता।</p>
<p><strong>डेंगू के आंकडा पहुंचा 367 पार</strong><br />शहर मे डेंगू तेजी से फैल रहा है। शनिवार को एलाइजा टेंस्ट में 37 मरीज पॉजीटिव आए। वहीं स्क्रब टायफस के 73 मरीज अब तक आ चुके है। अब तक डेंगू के 367 मरीज आ चुके है।  शहर के तलवंडी, इंदिरा विहार, विज्ञान नगर, महावीर नगर, तलवंडी सेक्टर 1 से 5 में सबसे ज्यादा मरीज आ रहे है। शनिवार को जेकेलोन की ओपीडी डेंगू के तीन मरीज आए वहीं एक मरीज आईपीडी में भर्ती हुआ। एक को डिस्चार्ज किया गया। शहर के अन्य निजी अस्पतालों में शनिवार को ओपीडी में 25 डेंगू के मरीज आए।  वहीं आईपीडी में दो मरीज भर्ती हुए। एमबीएस अस्पताल में ओपीडी में एक मरीज व आईपी एक मरीज भर्ती हुआ। रामपुरा में एक भी मरीज डेंगू का नहीं आया। </p>
<p><strong>डेंगू पॉजीटिव के सैंपल पूणे भेजने के दिए निर्देश</strong><br />कलक्टर ओपी बुनकर ने शनिवार को डेंगू खतरनाक होने व इसकी चपेट आए चार मरीजों की मौत होने और मल्टीपल आर्गन फैल होने के कारणों को जानने के लिए डेंगू के मरीजों ब्लड सैंपल को पूणे लैब में भेजने के निर्देश दिए है। डेंगू का कौनसा नया स्टेÑन इसका पता लगाया जाएगा। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />डेंगू व मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए प्रभावी मॉनिटरिंग की जा रही है। एंटी लार्वा गतिविधियां लगातार जा रही है। शहर के विभिन्न इलाकों में कूलर, परेंडे और कंटेनरों में लार्वा नष्ट किए जा रहे है। <br /><strong>- डॉ. जगदीश कुमार सोनी, सीएमएचओ कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Sep 2023 16:33:56 +0530</pubDate>
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                <title>जर्जर हॉस्टल मार रहा करंट, खतरे में जान</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व में भी करंट लगने के घटना हो चुकी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/-dilapidated-hostel-is-hit-by-current--life-in-danger/article-53202"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/jajr-maar-rha-current,-khtre-me-jaan...kota-news-31-07-2023.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। एमबीएस व जेकेलोन अस्पताल में स्वच्छता का पाठ पढ़ाने वाले नर्सिंग स्टूडेंटस खुद ही संक्रमण व गंदगी के बीच दिन गुजारने को मजबूर हैं। कमरों के ऊपर बिजली के तार झूल रहे तो दीवारों में सीलन से करंट का खतरा बना है। नयापुरा स्थित 26 साल पुराना राजकीय नर्सिंग हॉस्टल जर्जर हो चुका है। चारों ओर झाड़-झंगाड़ व गंदगी के ढेर लगे हैं। जिससे बीमारियों व जहरीले जीव-जंतुओं की मौजूदगी से जान का खतरा बना रहता है। भवन के पीछे गंदा नाला है, जिसकी बरसों से सफाई नहीं हुई। दुर्गंध से विद्यार्थियों का सांस लेना दुश्वार हो रहा वहीं छतों पर खुली टंकियों में खतरनाक बीमारियों का लार्वा पनप रहा। मच्छरों के प्रकोप से छात्रों के बीमार होने का खतरा मंडरा रहा है। </p>
<p><strong>दीवारों में सीलन, कटे बिजली तार</strong><br />एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष हनुमान मीणा ने बताया कि हॉस्टल की छतें जर्जर हो चुकी है। बारिश में कमरों की छतें टपकती है। दीवारों में सीलिंग रहती है। वहीं, दीवारों में अंडरग्राउड हो रही वायरिंग जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो रही है, जिससे करंट का खतरा बना रहता है। पूर्व में भी करंट लगने के घटना हो चुकी है।</p>
<p><strong>गिर रहे प्लास्टर </strong><br />राजकीय नर्सिंग कॉलेज से जीएनएम कर रहे प्रथम व द्वितीय वर्ष के छात्र ने बताया कि हॉस्टल में सुविधाओं का आभाव है। दीवारों व छतों का प्लास्टर उखड़े हुए हैं। कमरों का मेंटिनेंस भी छात्र खुद के खर्चें पर करवा रहे हैं। सीलनभरी दीवारों से उठती दुर्गंध से सांस लेना मुश्किल होता है।  </p>
<p><strong>टंकियों में पनप रहा लार्वा</strong><br />नर्सेज एसोसिएशन के अध्यक्ष अरूण जांगिड़ ने बताया कि जेकेलोन अस्पताल के पीछे स्थित नर्सिंग हॉस्टल जर्जर अवस्था में है। छतों पर रखी टंकियों के टक्कन टूटे हुए हैं, जिनमें बरसाती पानी व काई जमी हुई है। इनमें  लार्वा पनप रहा है। </p>
<p><strong>कमरों में घुस जाते हैं श्वान-सुअर  </strong><br />हॉस्टल परिसर में दिनरात आवारा मवेशियों का जमावड़ा लगा रहता है। सबसे ज्यादा परेशानी कुत्ते और सुअरों की है। भोजन की तलाश में यह कमरों तक पहुंच जाते हैं। </p>
<p><strong>बिजली पैनल बना कबूतरों का घौंसला</strong>  <br />एसोसिएशन के सचिव मुकुट नागर व अरविंद जांगिड़ ने बताया कि हॉस्टल की हालत डरावनी है। कमरों के बाहर बिजली के पैनल कबूतरों के घौंसले बने हुए हैं। उनके पंजों में उलझकर तार टूट जाते हैं, जिससे आए दिन शॉर्ट सर्किट होता रहता है। छात्र ही तार जोड़ते हैं, जिससे करंट का डर रहता है।  छत पर रखी टंकियों केपाइप जगह-जगह से लीकेज हो रहे हैं। जिससे टंकियां खाली हो जाती है। नलों में टूटियां नहीं हैं। कपड़े ठूंसकर पानी रोका हुआ है। स्टूडेंटस बड़ी परेशानी में है। </p>
<p><strong>4 करोड़ से बनेगा नया हॉस्टल</strong><br />एमबीएस अस्पताल परिसर में जल्द ही जी-5 कैटगरी का नया जीएनएम हॉस्टल बनेगा। इसके लिए 4 करोड़ 8 लाख रूपए का बजट स्वीकृत हो चुका है। हॉस्टल 6 मंजिला होगा। इसमें गर्ल्स और बॉयज दोनों के हॉस्टल होंगे। पूर्व में यूआईटी सचिव को पत्र लिखकर परमिशन मांगी गई थी, जो मिल चुकी है। टैंडर प्रक्रिया फाइनल स्टेज पर है। जल्द ही इसका निर्माण कार्य शुरू होगा। वहीं, मंगलवार को पुराने हॉस्टल का निरीक्षण रिपेयर करवाएंगे।<br /><strong>- विष्णुदत्त यादव, प्रिंसिपल राजकीय जीएनएम कॉलेज कोटा</strong></p>
<p>हाल ही में रेजिडेंट्स हॉस्टल का विजिट किया था। वहां के हालात देख सर्वे करवाकर मरम्मत कार्य करवाए हैं। जिसमें नल कनेक्शन, पानी टंकियां, झूलते बिजली के तारों को सही करवाना व साफ-सफाई शामिल है। इसी परिसर में नर्सिंग हॉस्टल भी है, यहां की समस्याएं संज्ञान में आई है। जल्द ही सर्वे करवाकर मेंटिनेंस करवाएंगे। छात्रों को बेहतर सुविधाएं देना प्राथमिकता में है। समस्याओं का तुरंत समाधान करवाया जाएगा।  <br /><strong>- डॉ. धर्मराज मीणा, अधीक्षक, एमबीएस अस्पताल </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 31 Jul 2023 16:42:37 +0530</pubDate>
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