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                <title>15 lakh - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>15 lakh RSS Feed</description>
                
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                <title>नवज्योति की ख़बर का असर: 15 लाख बेरोजगारों को मिलेगा संशोधन का मौका </title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) की वन टाइम रजिस्ट्रेशन के प्रोसेस की खामियों को दूर करने के लिए अब बेरोजगार युवाओं को एक मौका मिलेगा। इससे प्रदेश के करीब 15 लाख से अधिक युवाओं को राहत मिलेगी, क्योंकि वे द्वितीय श्रेणी शिक्षक का आवेदन नहीं कर पा रहे थे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-15-lakh-unemployed-will-get-chance-for-amendment/article-9522"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/rpse-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) की वन टाइम रजिस्ट्रेशन के प्रोसेस की खामियों को दूर करने के लिए अब बेरोजगार युवाओं को एक मौका मिलेगा। इससे प्रदेश के करीब 15 लाख से अधिक युवाओं को राहत मिलेगी, क्योंकि वे द्वितीय श्रेणी शिक्षक का आवेदन नहीं कर पा रहे थे। आयोग द्वारा विभिन्न परीक्षाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन पत्र लिए जाते हैं।  इसके लिए जनआधार व आधार के अनुसार वन टाइम रजिस्ट्रेशन (ओटीआर) के तहत आने वाली कठिनाइयों के निराकरण के लिए एक बार संशोधन प्रक्रिया का मौका दिया जाएगा। अभ्यर्थी इसके लिए आयोग की वेबसाइट देखते रहे। इस मुद्दे को दैनिक नवज्योति ने प्रमुखता से उठाते हुए अपने 5 मई के अंक में ‘आरपीएससी की वन टाइम रजिस्ट्रेशन की प्रोसेस बेरोजगारों के लिए बनी परेशानी’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ के अध्यक्ष उपेन यादव ने सोशल मीडिया के माध्यम से रजिस्ट्रेशन में संशोधन का समय देने की मांग की और खबर की कटिंग को आरपीएससी में भेजा। इसके बाद आरपीएससी ने लाखों बेरोजगार अभ्यर्थियों को राहत देते हुए वन टाइम रजिस्ट्रेशन में संशोधन का मौका देने का निर्णय लिया है।</p>
<p><strong>यह था मामला</strong><br />आरपीएससी ने वन टाइम रजिस्ट्रेशन का प्रोसेस बेरोजगारों की बार-बार परीक्षाओं के आवेदन से छुटकारा पाने के लिए शुरू की थी, लेकिन आरपीएससी प्रशासन ने इसमें त्रुटी सुधार का एक बार भी विकल्प नहीं दिया है, जिससे बेरोजगारों को कई परेशानियां हो रही हैं। वह द्वितीय श्रेणी शिक्षक भर्ती और स्कूल व्याख्याता भर्ती परीक्षा के लिए आवेदन भी नहीं कर पा रहे थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 May 2022 12:19:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>चित्तौड़गढ़ के बस्सी में किले की तलहटी में मिले पाषाणकालीन औजार</title>
                                    <description><![CDATA[करीब पांच किलोमीटर के दायरे में और औजारों की तलाश हुई तेज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/udaipur/stone-tools-found-at-the-foot-of-the-fort-in-bassi-of-chittorgarh--experts-claim--tools-are-15-lakh-years-old--search-for-more-tools-intensified-within-a-radius-of-about-five-kilometers/article-6105"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/66.jpg" alt=""></a><br /><p>उदयपुर। चित्तौड़गढ़ के बस्सी में हाल ही एक सर्वेक्षण में पाषाणकालीन औजारों की खोज हुई है। विशेषज्ञों ने दावा किया है कि ये करीब 15 लाख साल पुराने पाषाणकालीन औजार है। ये औजार राजस्थान में मानव जीवन की उत्पत्ति को सिद्ध करने में सहायक हो सकते हैं। राजस्थान विद्यापीठ के संघटक साहित्य संस्थान के निदेशक प्रो. जीवनसिंह खरकवाल, चिंतन ठाकर, स्वाति वर्मा ने इस स्थल का सर्वेक्षण कर तथ्य स्पष्ट किए हैं। प्रो. खरकवाल ने बताया कि इससे पूर्व निम्बाहेड़ा में वर्ष 1960 से 1965 में हुए सर्वेक्षण में इस तरह के औजार प्राप्त हुए थे, लेकिन बस्सी के किले की तलहटी में पहाड़ी का ढलान जहां समाप्त होता है, वहीं पर ये औजार मिले हैं। इन औजारों के क्रमबद्ध तरीके से आसपास ही प्राप्त होने से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि यह वही स्थान है जहां इन औजारों को बनाया जाता था। खरकवाल ने बताया कि आदिकाल से जब मानव की उत्पत्ति मानी जाती है, उस समय की तिथियों आदि में काफी बदलाव आए हैं। इनको देखने से स्पष्ट होता है कि ये आदिकालीन पाषाण औजारों के नमूने हैं। इसमें कतई संदेह भी नहीं है कि ये औजार 15 लाख साल पुराने होंगे। करीब पांच किलोमीटर के दायरे में और औजारों की तलाश की जा रही है। <br /><br /><strong>आशुलियिन परंपरा के हैं औजार</strong><br />प्रो. खरकवाल ने बताया कि बस्सी गढ़ के निकट विंध्य की पहाड़ी की ढलान पर पाषाण काल की हाथ की कुलहड़िया, क्लीवर, स्क्रैपर आदि बडी संख्या मे पाए गए। ये औजार सेल चट्टान के ऊपर कोलूवियल जमाव में पाए गए हैं, जहां पर दो संस्कृति निम्न पुरा पाषाण काल तथा मध्य पाषाण काल के औजार खोजे गए हैं। यह औजार अशुलियिन परम्परा के है जिनकी तिथि भारत में 15 लाख से वर्ष पूर्व में है। इस तरह के औजार बस्सी के अतिरिक्त बूंदी में भी खोजे गए हैं। बनास औरे बेडच की घाटियों में इस तरह के औजार पिछली शताब्दी में 60 के दशक के प्रख्यात पुरातत्वविद वीएन मिश्र ने खोजे थे, उनके द्वारा खोजे गए औजार मुख्यत: नदियों की घाटियों में थे परन्तु पहली बार बस्सी में ये औजार पहाड़ी के ढलान पर मूल जगह पर खोजे गए हैं। <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चित्तौड़गढ़</category>
                                            <category>उदयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Mar 2022 12:23:27 +0530</pubDate>
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