<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/mohan-bhagwat/tag-1452" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>Mohan Bhagwat - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/1452/rss</link>
                <description>Mohan Bhagwat RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मोहन भागवत ने दिया हिंदू एकता पर बल, कहा-मंदिर, कुएं और श्मशान सभी हिंदुओं के लिए खुले हों, कोई भेदभाव न हो</title>
                                    <description><![CDATA[RSS प्रमुख मोहन भागवत ने लखनऊ में हिंदू एकता और सामाजिक समरसता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जातिगत भेदभाव खत्म कर राष्ट्र निर्माण और पारिवारिक मूल्यों को प्राथमिकता देनी चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/mohan-bhagwat-laid-emphasis-on-hindu-unity-and-said-%E2%80%93/article-143710"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/mohan-bhagwat.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने हिन्दू एकता पर बल देते हुये कहा कि मंदिर, कुएं और श्मशान सभी हिंदुओं के लिए खुले होने चाहिए, इनमें किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। लखनऊ के निराला नगर स्थित सरस्वती विद्या मंदिर के माधव सभागार में मंगलवार देर शाम आयोजित कार्यकर्ता कुटुंब मिलन कार्यक्रम को संबोधित करते हुये उन्होने कहा कि बच्चों को यह समझाना होगा कि करियर का अर्थ केवल पैसा कमाना और उपभोग करना नहीं है। असली करियर वह है, जिसमें व्यक्ति समाज और देश के लिए कुछ कर सके। उन्होंने कहा कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए, जिससे बच्चे अमीर बनकर दान देना और दूसरों के लिए जीना सीखें। विद्या और धन देश के हित में अर्जित किए जाने चाहिए और बच्चों में यह संस्कार विकसित हों कि राष्ट्र सर्वोपरि है।  </p>
<p>डॉ. भागवत ने कहा कि संघ पूरे हिंदू समाज को एक मानता है और सामाजिक समरसता भाषणों से नहीं, बल्कि व्यवहार से आती है। इसके लिए व्यक्तिगत और पारिवारिक स्तर पर मेलजोल बढ़ाना होगा। उन्होंने कहा कि संघ के कुटुंब में जाति-पाति का कोई स्थान नहीं है और यही भाव समाज में भी स्थापित करना होगा।  </p>
<p>उन्होंने कहा कि समाज की मूल इकाई व्यक्ति नहीं, बल्कि परिवार है। सामाजिक व्यवहार की पहली पाठशाला परिवार ही होता है। बच्चों में मातृभाषा का ज्ञान, देशभक्ति, ईमानदारी, अनुशासन और कुटुंब गौरव का भाव विकसित करना आवश्यक है। साथ ही तकनीक के उपयोग पर नियंत्रण की आवश्यकता बताते हुए उन्होंने कहा कि स्क्रीन टाइम तय होना चाहिए और नई पीढ़ी को इसके दुष्प्रभावों से अवगत कराना होगा। </p>
<p>सरसंघचालक ने कहा कि हिंदुस्तान एक हिंदू राष्ट्र है और सभी हिंदू आपस में सहोदर हैं। संघ कार्यकर्ताओं को समाज के उन वर्गों तक भी पहुंचना चाहिए, जो अभी संघ के निकट नहीं हैं, और उनसे आत्मीय संबंध स्थापित करने चाहिए। उन्होंने कहा कि संघ चिरतरुण संगठन है और आज देश के सबसे अधिक युवा संघ से जुड़े हुए हैं, जो भारत की शक्ति का प्रतीक है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/mohan-bhagwat-laid-emphasis-on-hindu-unity-and-said-%E2%80%93/article-143710</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/mohan-bhagwat-laid-emphasis-on-hindu-unity-and-said-%E2%80%93/article-143710</guid>
                <pubDate>Wed, 18 Feb 2026 17:59:23 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-02/mohan-bhagwat.png"                         length="644633"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महाराष्ट्र में निकाय चुनाव के लिए मतदान जारी: मोहन भागव, सचिन तेंदुलकर, शाइना एनसी सहित कई प्रमुख हस्तियों ने डाला वोट</title>
                                    <description><![CDATA[महाराष्ट्र में 29 नगर निकायों के लिए मतदान जारी, मोहन भागवत, शाइना एनसी सहित कई दिग्गजों ने वोट डाला।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/voting-continues-for-civic-elections-in-maharashtra-many-prominent-personalities/article-139624"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/bmc-election-2026.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। महाराष्ट्र में लंबे अंतराल के बाद आज 29 नगर निकायों के चुनाव के लिए आज मतदान हो रहा है और अब तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत और आरएसएस नेता सुरेश भैयाजी तथा शिवसेना नेता शाइना एनसी समेत कई प्रमुख हस्तियों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर दिया है। </p>
<p>मोहन भागवत ने मतदान शुरू होते ही नागपुर के महाल इलाके के भाउजी दपतारी एनएमसी स्कूल में बने मतदान केंद्र में वोट डाला। वहीं सुरेश भैयाजी ने नागपुर में मतदान करने के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए कहा, हर नागरिक को अपने मताधिकार का इस्तेमाल करना चाहिए। वे जिसे चाहेंगे उन्हें वोट करेंगे, ये उनकी इच्छा पर निर्भर है, लेकिन जो लोग चुने जाएंगे, ये उनका कर्तव्य है कि वे लोगों की उम्मीदों को पूरा करें।</p>
<p>शाइना एनसी ने बीएमसी चुनाव के लिए वोट डालने के बाद संवाददाताओं से कहा,'मां मुंबा देवी और श्री सिद्धिविनायक की कृपा से मतदान शुरू हो गया है। मैं सभी मुंबईकर से अपील करती हूं कि वे मतदान जरूर करें। लोकतंत्र की यही खूबसूरती है कि ये आपकी आवाज को मजबूत करती है। उन्होंने कहा कि विपक्ष अपनी हार के बहाने ढूंढ रहा है। मुंबई का मेयर मराठी और हिंदू होगा। फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार सहित कई अन्य फिल्मी हस्तियों ने भी अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर लिया है।  </p>
<p>बृहन्मुंबई महानगरपालिका में प्रत्येक वार्ड से केवल एक सदस्य चुना जाना है, इसलिए यहां हर मतदाता को सिर्फ एक वोट डालना होगा। वहीं, राज्य की अन्य 28 नगरपालिकाओं में बहु-सदस्यीय वार्ड प्रणाली लागू है। इन नगर निकायों में प्रत्येक वार्ड में तीन से पांच सीटें हैं, जिसके कारण मतदाताओं को तीन से पांच वोट डालने होंगे। इस व्यवस्था के चलते मतदान प्रक्रिया को लेकर मतदाताओं को पहले से जागरूक किया गया है, ताकि किसी तरह की भ्रम की स्थिति न बने और मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।</p>
<p>मतदान की प्रक्रिया आज सुबह 7:30 बजे शुरू हुई और शाम 5:30 बजे तक मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर पाएंगे। निकाय चुनाव के लिए मुंबई में कुल 10,231 मतदान केंद्र स्थापित किए गए हैं और 64,375 अधिकारियों और कर्मचारियों को ड्यूटी पर तैनात किया गया है। महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर, नवी मुंबई, वसई-विरार, कल्याण-डोंबिवली, कोल्हापुर, नागपुर, मुंबई, सोलापुर, अमरावती, अकोला, नासिक, पिपरी-चिंचवाड़, पुणे, उल्हासनगर, ठाणे, चंद्रपुर, परभणी, मीरा-भायंदर, नांदेड़-वाघाला, पनवेल, भिवंडी-निजामपुर, लातूर, मालेगांव, सांगली-मिराज-कुपवाड, जलगांव, अहिल्यानगर, धुले, जालना और इचलकरंजी में नगर निकाय चुनाव के लिए मतदान हो रहा है।  </p>
<p>बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के चुनाव में 227 सीटों के लिए करीब 1,700 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं। देश के सबसे अमीर नगर निकाय पर कब्जे की लड़ाई में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)  के नेतृत्व वाली महायुति और उद्धव-राज ठाकरे के गठबंधन के बीच कड़ा मुकाबला माना जा रहा है। कुल 29 नगर निकाय के 893 वार्डों की 2,869 सीटों के लिए होने वाले मतदान में 3.48 करोड़ मतदाता 15,931 उम्मीदवारों के राजनीतिक भविष्य का फैसला करेंगे। अकेले बीएमसी की 227 सीटों पर 1,700 प्रत्याशी मैदान में हैं और 74 हजार करोड़ रुपये के वार्षिक बजट वाली इस संस्था पर सभी दलों की नजर है। शिवसेना विभाजन के बाद यह पहला बीएमसी चुनाव है, जिससे इसका राजनीतिक महत्व और बढ़ गया है। प्रचार में आरोप-प्रत्यारोप, गठबंधन टूट-जुड़ और लोकलुभावन वादों ने माहौल को और दिलचस्प बना दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/voting-continues-for-civic-elections-in-maharashtra-many-prominent-personalities/article-139624</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/voting-continues-for-civic-elections-in-maharashtra-many-prominent-personalities/article-139624</guid>
                <pubDate>Thu, 15 Jan 2026 12:14:31 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-01/bmc-election-2026.png"                         length="826159"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मोहन भागवत ने धानक्या स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय स्मारक का किया अवलोकन, उपाध्याय की प्रतिमा पर अर्पित की पुष्पांजलि </title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन राव भागवत शुक्रवार सुबह जयपुर के धानक्या गांव स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय स्मारक पहुंचे। यहां उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और उनके जीवन, कार्य और विचारों पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/mohan-bhagwat-visited-the-pandit-deendayal-upadhyaya-national-memorial-at/article-132419"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/11-(41).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन राव भागवत शुक्रवार सुबह जयपुर के धानक्या गांव स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय स्मारक पहुंचे। यहां उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और उनके जीवन, कार्य और विचारों पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। सरसंघचालक ने स्मारक परिसर का भ्रमण करते हुए समिति के सदस्यों के साथ अनौपचारिक चर्चा भी की तथा स्मारक के ऐतिहासिक महत्व और इसके वर्तमान स्वरूप की जानकारी ली।</p>
<p>इस अवसर पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति समारोह समिति के अध्यक्ष प्रो. मोहनलाल छीपा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राजस्थान क्षेत्र संघचालक डॉ. रमेश अग्रवाल सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे। स्मारक परिसर में सरसंघचालक का आगमन साधारण श्रद्धांजलि कार्यक्रम के साथ एक प्रेरणादायी संदेश का रूप ले गया, जिसमें पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद और राष्ट्रसेवा की भावना को स्मरण किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/mohan-bhagwat-visited-the-pandit-deendayal-upadhyaya-national-memorial-at/article-132419</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/mohan-bhagwat-visited-the-pandit-deendayal-upadhyaya-national-memorial-at/article-132419</guid>
                <pubDate>Fri, 14 Nov 2025 17:35:54 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-11/11-%2841%29.png"                         length="1054483"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यह लड़ाई संप्रदायों या धर्मों के बीच नहीं, बल्कि धर्म और अधर्म के बीच : मोहन भागवत</title>
                                    <description><![CDATA[अगर ऐसा हमेशा होता रहा तो कोई भी हमारी तरफ टेढ़ी नजर से देखने की हिम्मत नहीं करेगा और अगर कोई ऐसा करेगा तो उसकी आंख फोड़ दी जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/this-fight-is-not-between-sects-or-religions-but-mohan/article-112068"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/rtrer38.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की निंदा करते हुए शुक्रवार को कहा कि यह लड़ाई संप्रदायों या धर्मों के बीच नहीं, बल्कि धर्म और अधर्म के बीच है। भागवत ने पंडित दीनानाथ मंगेशकर की 83वीं पुण्यतिथि के अवसर पर मुंबई के विले पार्ले में एक पुरस्कार समारोह में कहा कि हमारे सैनिक या अन्य लोग किसी का धर्म पूछकर उसे नहीं मारेंगे। हिंदू ऐसा कभी नहीं करेंगे। </p>
<p><strong>किसी ने इसमें जाति, धर्म या संप्रदाय नहीं देखा</strong><br />उन्होंने कहा कि आतंकवादी हमले के बाद पूरे देश में गुस्से की लहर दौड़ गई है। भागवत ने कहा कि किसी ने इसमें जाति, धर्म या संप्रदाय नहीं देखा। अगर ऐसा हमेशा होता रहा तो कोई भी हमारी तरफ टेढ़ी नजर से देखने की हिम्मत नहीं करेगा और अगर कोई ऐसा करेगा तो उसकी आंख फोड़ दी जाएगी।</p>
<p><strong>हम हर किसी में अच्छाई देखते हैं </strong><br />भागवत ने कहा कि हम ऐसे लोग हैं जो हर किसी में अच्छाई देखते हैं और उसे स्वीकार करते हैं। आज हमारे पास सेना है। लेकिन एक समय था जब हमें सेना की जरूरत महसूस नहीं होती थी। हम शांत रहे क्योंकि युद्ध नहीं होगा और फिर वर्ष 1962 में हमें सबक मिला। तब से हम अपनी सेना की ताकत बढ़ा रहे हैं। बुराइयों का नाश होना चाहिए।</p>
<p><strong>देश में इसको लेकर गुस्सा है, लेकिन उम्मीदें भी बहुत </strong><br />उन्होंने कहा कि आज देश में इसको लेकर गुस्सा है, लेकिन उम्मीदें भी बहुत हैं। हमें उम्मीद करनी चाहिए कि ये उम्मीदें पूरी होंगी। भागवत ने मंगेशकर परिवार के योगदान की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने कला के माध्यम से देश की सेवा की और उनमें देशभक्ति की भावना भी प्रबल थी। सभी को ईमानदारी और निस्वार्थ भाव से देश की सेवा करनी चाहिए। इसके लिए ऐसा नहीं है कि सभी संघ या राष्ट्रीय पार्टी से जुड़ जाएं। हमारे पास जो कुछ भी है उससे हमें देश की सेवा करनी चाहिए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/this-fight-is-not-between-sects-or-religions-but-mohan/article-112068</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/this-fight-is-not-between-sects-or-religions-but-mohan/article-112068</guid>
                <pubDate>Sat, 26 Apr 2025 09:59:38 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-04/rtrer38.png"                         length="362419"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत की ओर देख रहा विश्व, शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होनी चाहिए : मोहन भागवत</title>
                                    <description><![CDATA[भागवत ने कहा कि विद्या भारती केवल शिक्षा प्रदान करने का कार्य नहीं करती, बल्कि समाज को सही दिशा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/world-education-looking-towards-india-should-not-be-limited-to/article-106411"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/257rtrer-(5)6.png" alt=""></a><br /><p>भोपाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख डॉ. मोहनराव भागवत ने मंगलवार को कहा कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसे व्यापक दृष्टिकोण से देखना होगा और विश्व भारत की ओर देख रहा है उसे मानवता की दिशा देनी होगी। डॉ. भागवत विद्या भारती द्वारा आयोजित पांच दिवसीय पूर्णकालिक कार्यकर्ता अभ्यास वर्ग 2025 के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में विद्या भारती के अखिल भारतीय अध्यक्ष दूसी रामकृष्ण राव भी उपस्थित थे। भागवत ने कहा कि विद्या भारती केवल शिक्षा प्रदान करने का कार्य नहीं करती, बल्कि समाज को सही दिशा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। विश्व भारत की ओर देख रहा है उसे मानवता की दिशा देनी होगी।</p>
<p><strong>परिवर्तन आवश्यक</strong><br />उन्होंने कहा कि मानवता को सही दिशा देने के लिए आवश्यक है कि हमें अपने कार्य को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाना है। परिवर्तन आवश्यक है, क्योंकि संसार स्वयं परिवर्तनशील है, लेकिन यह अधिक महत्वपूर्ण है कि परिवर्तन की दिशा क्या होनी चाहिए। </p>
<p><strong>हमारी शिक्षा का उद्देश्य समाज को नैतिक रूप से समृद्ध बनाना </strong><br />उन्होंने कहा कि हमारी शिक्षा का कार्य व्यापक है, जो केवल ज्ञान देने तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि इसका उद्देश्य समाज को नैतिक रूप से समृद्ध बनाना भी है। समय के अनुसार परिवर्तन आवश्यक है, लेकिन इसमें निष्क्रिय होकर बैठना उचित नहीं होगा। मानव अपने मस्तिष्क के बल पर समाज में परिवर्तन लाता है और उसे यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यह परिवर्तन सकारात्मक हो। आज के समय में तकनीक समाज के हर क्षेत्र में अपना प्रभाव डाल रही है। हमें टेक्नोलॉजी के लिए एक मानवीय नीति बनानी होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/world-education-looking-towards-india-should-not-be-limited-to/article-106411</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/world-education-looking-towards-india-should-not-be-limited-to/article-106411</guid>
                <pubDate>Wed, 05 Mar 2025 09:31:52 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-03/257rtrer-%285%296.png"                         length="362422"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>केजरीवाल के भागवत से पूछे गए सवालों के जवाब नहीं मिले : आप</title>
                                    <description><![CDATA[आम आदमी पार्टी ने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की ओर से आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से पूछे गए पांच सवालों का अभी तक जवाब नहीं आया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/aap-did-not-get-answers-to-kejriwals-questions-asked-to/article-91355"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/aap-mp-sanjay-singh.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी(आप) ने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की ओर से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत से पूछे गए पांच सवालों का अभी तक जवाब नहीं आया है। </p>
<p>आप के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने आज यहां संवाददाताओं से कहा कि अपने आपको देशभक्त और राष्ट्रवादी कहने वाली संस्था आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत से केजरीवाल ने केवल पांच सवाल पूछे हैं और यह सवाल सिद्धांतों, वसूलों और सच्चाई से जुड़े हुए हैं। एक तरफ अरविंद केजरीवाल जैसे सच्चे और ईमानदार नेता हैं, जो मुख्यमंत्री की कुर्सी दो-दो बार छोड़ कर ईमानदारी, वसूलों और सच्चाई की लड़ाई लड़ते हैं और दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हैं जो 75 साल में भी अपनी कुर्सी नहीं छोड़ना चाहते हैं। केजरीवाल के पांच सवालों का जवाब मोहन भागवत और भाजपा को देना चाहिए। </p>
<p>उन्होंने कहा कि 75 साल की उम्र पूरी होने पर लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, बीसी खंडूरी, कलराज मिश्रा समेत तमाम नेताओं को पद से हटा दिया गया और चुनाव नहीं लड़ने दिया गया। उन्होंने कहा कि आरएसएस और मोदी ने जो नियम पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के लिए बनाया, क्या वह नियम उन नेताओं को राजनीति से बेदखल करने और निपटाने के लिए बनाया। अगर आपने यह नियम बनाया है तो आप पर वह नियम क्यों नहीं लागू होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/aap-did-not-get-answers-to-kejriwals-questions-asked-to/article-91355</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/aap-did-not-get-answers-to-kejriwals-questions-asked-to/article-91355</guid>
                <pubDate>Mon, 23 Sep 2024 14:55:32 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2023-10/aap-mp-sanjay-singh.png"                         length="354557"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Ram Mandir Pran Pratistha:  प्राण प्रतिष्ठा के बाद बोले भागवत- रामराज्य आने वाला है, यह कार्यक्रम नए भारत का प्रतीक है</title>
                                    <description><![CDATA[भागवत ने कहा कि पीएम मोदी तपस्वी है। पीएम अकेले तप कर रहे हैं उन्होंने कठोर व्रत किया है। उनके बाद अब हमारे तप करने की बारी है। आज त्रासदी से राहत देने वाले भारत का उदय हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/ram-mandir-pran-pratistha-after-pran-pratistha-bhagwat-said-ramrajya-is-about-to-come-this-program-is-a-symbol-of-new-india/article-67804"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/mohan-bhagwat.png" alt=""></a><br /><p>अयोध्या। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि यह कार्यक्रम नए भारत का प्रतीक है। आज के आनंद को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। रामलला के साथ भारत का स्व लौट आया है।<br /><br />भागवत ने कहा कि पीएम मोदी तपस्वी है। पीएम अकेले तप कर रहे हैं उन्होंने कठोर व्रत किया है। उनके बाद अब हमारे तप करने की बारी है। आज त्रासदी से राहत देने वाले भारत का उदय हुआ है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में कोई कलह नहीं है। 500 साल बाद रामलला लौटे हैं। रामराज्य आने वाला है। हमें छोटे-छोटे विवादों को छोड़ना होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/ram-mandir-pran-pratistha-after-pran-pratistha-bhagwat-said-ramrajya-is-about-to-come-this-program-is-a-symbol-of-new-india/article-67804</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/ram-mandir-pran-pratistha-after-pran-pratistha-bhagwat-said-ramrajya-is-about-to-come-this-program-is-a-symbol-of-new-india/article-67804</guid>
                <pubDate>Mon, 22 Jan 2024 14:17:02 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-01/mohan-bhagwat.png"                         length="416769"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पंडितों ने बनाए जाति, वर्ण और संप्रदाय : भागवत</title>
                                    <description><![CDATA[उन्होंने कहा कि जब हम आजीविका कमाते हैं तो समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारी होती है। जब हर काम समाज के लिए होता है तो कोई भी काम छोटा या बड़ा कैसे हो सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pandits-made-caste-characters-and-sect-bhagwat/article-36579"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/mohna.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि जाति, वर्ण और संप्रदाय पंडितों के द्वारा बनाए गए थे। उन्होंने कहा कि जब हम आजीविका कमाते हैं तो समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारी होती है। जब हर काम समाज के लिए होता है तो कोई भी काम छोटा या बड़ा कैसे हो सकता है। भगवान ने हमेशा कहा है कि हर कोई उनके लिए समान है और कोई जाति या वर्ण नहीं है, उसके लिए संप्रदाय नहीं है, यह पंडितों द्वारा बनाई गई थी जो गलत है। संत शिरोमणि रोहिदास जयंती के अवसर पर मुंबई में एक कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि संत रोहिदास ने कहा कर्म करो, धर्म के अनुसार कर्म करो। पूरे समाज को जोड़ो, समाज की उन्नति के लिए काम करना यही धर्म है। सिर्फ  अपने बारे में सोचना और पेट भरना ही धर्म नहीं है और यही वजह है कि समाज के बड़े-बड़े लोग संत रोहिदास के भक्त बनें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/pandits-made-caste-characters-and-sect-bhagwat/article-36579</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/pandits-made-caste-characters-and-sect-bhagwat/article-36579</guid>
                <pubDate>Mon, 06 Feb 2023 10:22:03 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2023-02/mohna.jpg"                         length="148247"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जल-संकट पर भागवत का सीधा संवाद</title>
                                    <description><![CDATA[पशु और पौधों की बहुत सारी महत्वपूर्ण प्रजातियां जल प्रदूषकों के कारण खत्म हो चुकी है। ये एक वैश्विक समस्या है जो विकसित और विकासशील दोनों देशों को प्रभावित कर रही हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/bhagwats-direct-dialogue-on-water-crisis/article-33995"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-01/q-61.jpg" alt=""></a><br /><p>जल प्रदूषण एवं पीने के स्वच्छ जल की निरन्तर घटती मात्रा को लेकर बड़े खतरे खड़े हैं। धरती पर जीवन के लिए जल सबसे जरूरी वस्तु है, जल है तो जीवन है। जल ही किसी भी प्रकार के जीवन और उसके अस्तित्व को संभव बनाता है। जीव मंडल में पारिस्थितिकी संतुलन को यह बनाए रखता है। पीने, नहाने, ऊर्जा उत्पादन, फसलों की सिंचाई, सीवेज के निपटान, उत्पादन प्रक्रिया आदि बहुत उद्देश्यों को पूरा करने के लिए स्वच्छ जल बहुत जरूरी है। जल-संकट के प्रति सचेत करते हुए राष्टÑीय स्वयं सेवक संघ के सर-संघचालक डॉ. मोहन भागवत ने जल का भंडारण बढ़ाने की बात कहीं। उन्होंने कहा कि जल को जितना बचा सकते हैं बचाएं और जितना बढ़ा सकते हैं बढ़ाएं, क्योंकि जल पृथ्वी की संचित संपत्ति है। हम जल को कैसे स्टोर कर सके, इसका उपाय करना चाहिए। भागवत की इस पर्यावरण चिन्ता की परिक्रमा करने के बाद ऐसा लगा कि भारतीय परम्परा का मंचमहाभूत एक कल्पवृक्ष है, जिसकी छांव में रहने वाले लोग पूरी तरह से निश्चिंत रहते हैं। संघ प्रमुख ने पर्यावरण पर भारतीय ज्ञान परंपरा आधारित समकालीन विमर्श स्थापित करने के लिए पंचमहाभूत के जल तत्व पर सुजलाम अंतरराष्टÑीय सेमिनार को संबोधित करते हुए जल का संयमित उपयोग करने एवं जल को बचाने का आह्वान किया, जो जल-संकट से उभरने की एक रोशनी दे रहा है। उज्जैन में सुजलाम जल महोत्सव में मोहन भागवत ने महाकाल में 60 किलो चांदी से बनाए गए जल स्तंभ का भी अनावरण किया। यह सम्मेलन ‘सुमंगलम’ नामक कार्यक्रमों की एक श्रृंखला का हिस्सा है। इसका उद्देश्य प्रकृति के पांच मूल तत्वों या ‘पंचमहाभूत’-पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और अंतरिक्ष की शुद्धता को सुरक्षित रखने की अनूठी भारतीय अवधारणा को प्रस्तुत करना है। पर्यावरण संकट पर भारत सहित पूरी दुनिया में गहरा संकट देखने को मिल रहा है।  इस महासंकट से निजात दिलाने में भारत सक्षम है। पर्यावरण संरक्षण के लिए पंचतत्वों को समझने और व्यापक नीति बनाने के मकसद से देश में सुमंगलम अभियान शुरू किया गया है। <br /><br />संघ एवं भागवत की बहुआयामी प्रवृत्तियों में एक है पर्यावरण। जल प्रदूषण एवं पीने लायक जल की घटती मात्रा दुनिया के सामने एक बड़ी चुनौती बन चुका है। पर्यावरण से जुड़ी इस तरह की समस्याओं एवं खतरों को लेकर वैश्विक स्तर पर चिन्ता तो जाहिर की जाती है, मगर अब तक इस दिशा में कोई खास समाधान की पहल नहीं हो सकी है। परिणाम है कि बढ़ती जनसंख्या के कारण तेज औद्योगिकीकरण और अनियोजित शहरीकरण बढ़ रहा है, जो बड़े और छोटे पानी के स्रोतों में ढेर सारा कचरा छोड़ रहें हैं जो अंतत: पानी की गुणवत्ता को गिरा रहा है। जल में ऐसे प्रदूषकों के सीधे और लगातार मिलने से पानी में उपलब्ध खतरनाक सूक्ष्म जीवों को मारने की क्षमता वाले ओजोन के घटने के कारण जल की स्व-शुद्धिकरण क्षमता घट रही है। इससे जल की रसायनिक, भौतिक और जैविक विशेषताएं बिगड़ रही है, जो पूरे विश्व में सभी पौड़-पौधों, मानव और जानवरों के लिए बहुत खतरनाक है। <br /><br />पशु और पौधों की बहुत सारी महत्वपूर्ण प्रजातियां जल प्रदूषकों के कारण खत्म हो चुकी है। ये एक वैश्विक समस्या है जो विकसित और विकासशील दोनों देशों को प्रभावित कर रही हैं। खनन, कृषि, मछली पालन, स्टॉकब्रिडींग, विभिन्न उद्योग, शहरी मानव क्रियाएं, शहरीकरण, निर्माण उद्योगों की बढ़ती संख्या, घरेलू सीवेज आदि के कारण बड़े स्तर पर जल एवं जलस्रोत प्रदूषित हो रहे हैं। मोहन भागवत ने इन संकटों से मुक्ति के लिए सार्थक उपक्रम किए जाने की आवश्यकता व्यक्त करते हुए शाकाहार को अपनाने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि मांसाहार से पानी की खपत बढ़ गई है। मांसाहार नहीं होगा तो कत्लखाने बंद हो जाएंगे। बेहतर यह है कि शाकाहारी बने। हमें किसी भी तरह जल का अनादर न करना चाहिए। हमारी प्रकृति का सम्मान हो और इसकी सदैव पूजा की जाना चाहिए। पूरे विश्व के लिए शुद्ध जल की मात्रा का लगातार घटना एवं जल प्रदूषण एक बड़ा पर्यावरणीय और सामाजिक मुद्दा है। यह अपने चरम बिंदु पर पहुंच चुका है। इन संकटों से घिरती विश्व मानवता को बचाने के लिए डॉ. भागवत ने जहां प्रकृति को बचाने के लिए हर प्रकार से कोशिश करने की बात कहीं वहीं उन्होंने खेती के धंधे की पद्धति में बदलाव भी करना पड़े तो करने का सुझाव दिया। हमें अधिक से अधिक जैविक खेती करने की आवश्यकता है। जल का भंडारण अधिक से अधिक धरती पर किया जाए। पानी की खपत कैसे कम हो, कम पानी में हमारा काम हो, इस पर जोर देना जरूरी है। राष्टÑीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (नीरी), नागपुर ने चेताया है कि नदी जल का 70 प्रतिशत बड़े स्तर पर प्रदूषित हो गया है।  भारत की मुख्य नदी व्यवस्था जैसे गंगा, ब्रह्मपुत्र, सिंधु, यमुना आदि बड़े पैमाने पर प्रभावित हो चुकी है। भारत में मुख्य नदी खासतौर से गंगा भारतीय संस्कृति और विरासत से अत्यधिक गहरे रूप में जुड़ी हुई है। आमतौर पर लोग जल्दी सुबह नहाते हैं और किसी भी व्रत या उत्सव में गंगा जल को देवी-देवताओं को अर्पण करते हैं।<br /><br />-ललित गर्ग<br />(ये लेखक के अपने विचार हैं)</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/opinion/bhagwats-direct-dialogue-on-water-crisis/article-33995</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/opinion/bhagwats-direct-dialogue-on-water-crisis/article-33995</guid>
                <pubDate>Tue, 03 Jan 2023 14:50:41 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2023-01/q-61.jpg"                         length="136087"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कश्मीर में हिन्दुओं की वापसी राष्ट्रीय मुद्दा बने</title>
                                    <description><![CDATA[ भागवत का यह बयान न केवल कश्मीरी पंडितों के दर्द, वेदना, उपेक्षा के घावों पर मरहम लगाने का काम कर रहा है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/-return-of-hindus-to-kashmir-became-a-national-issue-mohan-bhagwat/article-7752"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/rss.jpg" alt=""></a><br /><p>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि कश्मीरी हिन्दुओं की कश्मीर में वापसी इस तरह होनी चाहिए कि उन्हें फिर उजाड़ा न जा सके, उस पर सरकार ही नहीं, सभी दलों को भी गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। भागवत का यह बयान न केवल कश्मीरी पंडितों के दर्द, वेदना, उपेक्षा के घावों पर मरहम लगाने का काम कर रहा है, बल्कि उनके दर्द को समझने के साथ ऐसा वातावरण बनाने में सहयोग देने की अपेक्षा को भी उजागर कर रहा है कि कश्मीर में हिन्दुओं की वापसी सम्मानजनक तरीके से हो, उनको इस तरह मजबूती से बसाया जाए कि कोई भी शक्ति उन्हें उजाड़ न सके, उन्हें बहिर्गमन करने की विवशता को न भोगना पड़े। यह एक राष्ट्रीय मुद्दा बनना चाहिए।</p>
<p><br />कश्मीरी हिंदुओं का बहिर्गमन एक त्रासदी थी, एक उत्पीड़न की चरम पराकाष्ठा थी, एक राजनीतिक स्वार्थ की घिनौनी एवं अशोभनीय मानसिकता थी जो वर्ष 1989 के अन्तिम चरण से लेकर 1990 के आरम्भिक दिनों तक जेकेएलएफ  एवं अन्य इस्लामी उपद्रवियों द्वारा निशाना बनाए जाने की शुरुआत के तुरन्त बाद हुए हिंदू विरोधी नरसंहारों और हमलों की श्रृंखला को संदर्भित करती है, जिसमे अंतत: कश्मीरी हिंदू घाटी छोड़कर भागने को मजबूर हुए थे। इसे कश्मीरी पंडितों के पलायन भी कहा जाता है। कांग्रेस, अन्य कश्मीर के राजनीतिक दलों एवं नेताओं ने यह काला अध्याय लिखा और कट्टरवादी शक्तियों ने इसे अंजाम दिया। यही कारण है कि आज भी कांग्रेस सहित कई विपक्षी दल इस बहुचर्चित त्रासदी पर बनी फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ को न केवल खारिज कर रहे हैं, बल्कि उसे झूठी फिल्म भी बता रहे हैं। यह उनकी बौखलाहट है, यह उनकी औछी मानसिकता है जिसके चलते वे इस फिल्म को यूट्यूब पर अपलोड करने जैसे बेतुके बयान दे रहे हैं, वहीं कुछ नेता यह दुष्प्रचार करने में जुटे हैं कि यह फिल्म नफरत फैला रही है। कुछ यह भी समझाने में लगे हैं कि सेंसर बोर्ड को तो यह फिल्म पास ही नहीं करनी चाहिए थी। जबकि यह फिल्म साहस एवं संवेदना की सार्थक एवं सत्य अभिव्यक्ति है, एक सत्य को लम्बे समय तक दबाए रखने की कुचेष्ठा को चुनौती देते हुए उस सत्य को प्रकट करने की वीरतापूर्ण प्रस्तुति है, यह राष्ट्रीयता को मूर्च्छित करने वाली शक्तियों को एक करारा तमाचा है। कश्मीरी हिंदुओं की हत्याओं और उनके भयावह उत्पीड़न की सच्ची घटनाओं पर आधारित कश्मीर फाइल्स सफलता के नए मानदंड स्थापित कर रही है तो इसीलिए कि उसने 32 साल बाद कश्मीर के दिल दहलाने वाले सच को सामने लाने का काम किया है। जो लोग भी कश्मीर फाइल्स को वैमनस्य फैलाने वाली बताने की कुचेष्टा कर रहे हैं, उन्हें एक तो यह जानना चाहिए कि यह फिल्म संयुक्त अरब अमीरात में भी रिलीज होने जा रही है। दुनियाभर में इस फिल्म की चर्चाएं हो रही हैं। सत्य कभी ढ़का नहीं रह सकता, वह देर सवेर प्रकट होता ही है। लेकिन इस फिल्म को लेकर जो दुष्प्रचार किया जा रहा है, वह महज राजनीतिक शरारत ही नहीं, बल्कि कश्मीर से मार भगाए गए लाखों कश्मीरी हिंदुओं के जख्मों पर नमक छिड़कने की कोशिश भी है। इस घोर संवेदनहीनता एवं घृणित मानसिकता के पीछे एक उद्देश्य वोट बैंक की राजनीति को साधना है। वास्तव में माहौल खराब करने की कोशिश तो ऐसे ही लोग कर रहे हैं। वे यह देखने से इन्कार कर रहे हैं कि कोई भी फिल्म तभी लोकप्रिय होती है, जब वह लोगों के दिलों को छूती है। राष्ट्रीय आदर्शों, राष्टÑीय प्रतीकों और राष्ट्रीय मान्यताओं की परिभाषा खोजने के लिए और कहीं नहीं, अपनी विरासत में झांकना होगा, अपने अतीत में खोजना होगा। उन पर राजनीतिक स्वार्थ की रोटियां सेकना बन्द करना होगा। अन्यथा राष्टÑ कमजोर होता रहेगा। हमें राष्ट्रीय स्तर से सोचना चाहिए वरना इन त्रासदियों से देश आक्रांत होता रहेगा।<br />कश्मीर घाटी में रहने वाले हिन्दुओं की संख्या लगभग 3 से 6 लाख तक थी। 2016 में कश्मीर घाटी में केवल 2 से 3 हजार हिन्दू ही शेष हैं, जबकि सन् 1990 में कश्मीरी हिन्दू 19 जनवरी 1990 के दिन को ‘दु:खद बहिर्गमन दिवस’ के रूप में याद करते हैं। जनवरी का महीना पूरी दुनिया में नए साल के लिए एक उम्मीद ले कर आता है, लेकिन कश्मीरी पंडितों के लिए यह महीना दु:ख, दर्द और निराशा से भरा है। 19 जनवरी प्रतीक बन चुका है उस त्रासदी का, जो कश्मीर में 1990 में घटित हुई। जिहादी इस्लामिक ताकतों ने कश्मीरी पंड़ितों पर ऐसा कहर ढाया कि उनके लिए सिर्फ तीन ही विकल्प थे- या तो धर्म बदलो, मरो या पलायन करो। आतंकवादियों ने सैकड़ों अल्पसंख्यक कश्मीरी पंड़ितों को मौत के घाट उतार दिया था। कई महिलाओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म कर उनकी हत्या कर दी गई। उन दिनों कितने ही लोगों की आए दिन अपहरण कर मार-पीट की जाती थी। पंड़ितों के घरों पर पत्थरबाजी, मंदिरों पर हमले लगातार हो रहे थे। घाटी में उस समय कश्मीरी पंड़ितों की मदद के लिए कोई नहीं था, ना तो पुलिस, ना प्रशासन, ना कोई नेता और ना ही कोई मानवाधिकार के लोग। उस समय हालात इतने खराब थे कि अस्पतालों में भी हिन्दू समुदाय के लोगों के साथ भेदभाव हो रहा था। सड़कों पर चलना तक मुश्किल हो गया था। कश्मीरी पंड़ितों के साथ सड़क से लेकर स्कूल-कॉलेज, दफ्तरों में प्रताड़ना हो रही थी- मानसिक, शारीरिक और सांस्कृतिक। 19 जनवरी, 1990 की रात को अगर उस समय के नवनियुक्त राज्यपाल जगमोहन ने घाटी में सेना नहीं बुलाई होती, तो कश्मीरी पंड़ितों का कत्लेआम व महिलाओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म किस सीमा तक होता, इसकी कल्पना नहीं की जा सकती।<br />-<strong> ललित गर्ग</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong><br /><br /><br />साम्प्रदायिक समस्या एवं स्वार्थ की देश तोड़क राजनीति का हल तो तभी प्राप्त हो सकेगा जब इस बात को सारे देश के मस्तिष्क में बहुत गहराई से बैठा दिया जाए कि भारतवर्ष की अपनी सांस्कृतिक विशिष्टता है और उसको आत्मसात करने में ही सबका हित है। हिन्दू और मुसलमान दोनों को ही जब इस देश में रहना है तो दोनों को ही अपनी-अपनी मानसिकता बदलनी होगी। इसीलिये मोहन भागवत ने कश्मीरी पंडितों के दर्द को साझा करते हुए कहा, मुझे लगता है कि वह दिन बहुत करीब है जब कश्मीरी पंडित अपने घरों में वापस आएंगे और मैं चाहता हूं  कि वह दिन जल्दी आए। संघ प्रमुख ने कहा कि फिल्म ने 1990 के समय में घाटी से कश्मीरी पंडितों और उनके पलायन की तस्वीर सामने रख दी है। भागवत ने यह भी कहा कि कश्मीरी पंडितों को अपने वतन लौटने का संकल्प लेना चाहिए, ताकि स्थिति जल्दी बदल सके। गविविधता में एकताग गहम सब एक हैंग, के लिए लम्बा समय और जीवन खपा देने वालोें की कुर्बानी को हम भूल रहे हैं। जबकि इस प्रकार की संस्कृति तो नित्य योगदान मांगती है। ये पौधे तो नित्य पानी मांगते हैं। जनता राजनीतिज्ञों से ईमानदारी की अपेक्षा रखती है। वह उन पर जाति सम्प्रदाय का लेबल देखना नहीं चाहती। समझ में नहीं आता सत्ता मोह और धर्मान्धता व्यक्ति को इतना संकीर्ण, अनुदार और बहुरूपिया क्यों बना देती है?<br />कश्मीरी पंडितों के दर्द को देखना जितना दयनीय है, उतना ही ल’जाजनक भी है। अब कश्मीरी हिंदुओं के दर्द को समझने के साथ ऐसा वातावरण बनाने में सहयोग देना चाहिए कि उनकी घाटी में वापसी हो सके, तब या तो सस्ती राजनीति की जा रही है या फिर परस्पर दोषारोपण किया जा रहा है, अब तोड़ने नहीं जोड़ने की बात हो। कोई इस फिल्म की विषयवस्तु से सहमत हो या न हो, लेकिन इस सच से मुंह नहीं मोड़ सकता कि कश्मीरी हिंदुओं पर भीषण अत्याचार हुए। यह समझा जाना चाहिए कि लाखों कश्मीरी हिंदुओं का घाटी से पलायन एक ऐसी त्रसदी है, जिसे भूला नहीं जा सकता। वास्तव में आवश्यक केवल यह नहीं कि कश्मीरी हिंदुओं का दमन करने वालों की पहचान तय कर उन्हें दंडित करने के लिए कोई जांच आयोग बनें, बल्कि यह भी है कि उनकी घर वापसी के लिए ठोस प्रयास किए जाए। ये प्रयास तभी सफल होंगे, जब उन्हें सभी का सहयोग मिलेगा।<br /><br /><br /><br /><strong>प्रसंगवशट</strong><br />वर्ष 1989 के अन्तिम चरण से लेकर 1990 के आरम्भिक दिनों तक जेकेएलएफ  एवं अन्य इस्लामी उपद्रवियों द्वारा निशाना बनाए जाने की शुरुआत के तुरन्त बाद हुए हिंदू विरोधी नरसंहारों और हमलों की श्रृंखला को संदर्भित करती है, जिसमे अंतत: कश्मीरी हिंदू घाटी छोड़कर भागने को मजबूर हुए थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/opinion/-return-of-hindus-to-kashmir-became-a-national-issue-mohan-bhagwat/article-7752</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/opinion/-return-of-hindus-to-kashmir-became-a-national-issue-mohan-bhagwat/article-7752</guid>
                <pubDate>Mon, 11 Apr 2022 15:38:53 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-04/rss.jpg"                         length="32089"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चरमपंथ के कारण कश्मीरी पंडित हुए विस्थापित : भागवत </title>
                                    <description><![CDATA[कश्मीरी पंडितों के नए साल यानी नवरेह के मौके पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने कश्मीरी हिंदुओं को संबोधित किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/pandits-displaced-due-to-extremism--says-bhagwat/article-7294"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/rss-chief-mohan-bhagwat--copy.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कश्मीरी पंडितों के नए साल यानी नवरेह के मौके पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने कश्मीरी हिंदुओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि चरमपंथ के कारण आप लोगों को कश्मीर से विस्थापित होना पड़ा, लेकिन अब आप हिंदू और भारतभक्त के रूप में वापस जाएंगे। भागवत ने कहा कि फिल्म ‘कश्मीर फाइल्स’ कश्मीरी पंडितों की कहानी को बयां कर रही है।</p>
<p>कुछ लोग इसके पक्ष में हैं तो कुछ इसके खिलाफ हैं। फिल्म ने कश्मीरी पंडितों की भयानक त्रासदी की एक दुर्भाग्यपूर्ण वास्तविकता को दिखाया है, जिसने हम सभी को झकझोर दिया है। कश्मीरी पंडित पिछले 3-4 दशकों से अपने ही देश में अपने घर से विस्थापित होने का खामियाजा भुगत रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले मैंने कहा था कि कश्मीरी पंडितों के मुद्दे को जन जागरूकता और कला जैसे माध्यम से हल किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/pandits-displaced-due-to-extremism--says-bhagwat/article-7294</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/pandits-displaced-due-to-extremism--says-bhagwat/article-7294</guid>
                <pubDate>Mon, 04 Apr 2022 11:03:53 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-04/rss-chief-mohan-bhagwat--copy.jpg"                         length="98093"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ट्विटर ने मोहन भागवत के अकाउंट को किया बहाल</title>
                                    <description><![CDATA[ट्विटर ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के अकाउंट से ब्लू टिक हटा दिया। इसके अलावा आरएसएस के सुरेश सोनी, अरुण कुमार, सुरेश जोशी और कृष्ण कुमार के ट्विटर अकाउंट्स से भी ब्लू टिक को हटा दिया था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%9F%E0%A4%B0-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%B9%E0%A4%A8-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B5%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%85%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%89%E0%A4%82%E0%A4%9F-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B2/article-607"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-06/4654654654651.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। ट्विटर ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के अकाउंट से ब्लू टिक हटा दिया। इसके अलावा आरएसएस के सुरेश सोनी, अरुण कुमार, सुरेश जोशी और कृष्ण कुमार के ट्विटर अकाउंट्स से भी ब्लू टिक को हटा दिया था।</p>
<p>ट्विटर ने कुछ समय के बाद भागवत के अकाउंट को बहाल कर दिया। अधिकारियों ने कहा कि ब्लू टिक हटने के बाद ट्विटर से संपर्क किया गया। इसके बाद अकाउंट को बहाल कर दिया गया। <br />  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%9F%E0%A4%B0-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%B9%E0%A4%A8-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B5%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%85%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%89%E0%A4%82%E0%A4%9F-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B2/article-607</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%9F%E0%A4%B0-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%B9%E0%A4%A8-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B5%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%85%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%89%E0%A4%82%E0%A4%9F-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B2/article-607</guid>
                <pubDate>Sat, 05 Jun 2021 17:44:37 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2021-06/4654654654651.jpg"                         length="137110"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        