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                <title>आमजन के लिए खतरा सांड, फिर भी सड़कों पर बसेरा</title>
                                    <description><![CDATA[महानगरों में मवेशी सड़कों पर नजर नहीं आते वैसे ही कोटा में भी व्यवस्था होनी चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/bulls--a-menace-to-the-public--yet-still-roaming-the-streets/article-149266"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/122200-x-60-px)-(1)11.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में जिस तरह से आवारा कुत्ते और बंदर आमजन के लिए खतरा बने हुए हैं। उसी तरह से सड़कों पर घूमते सांड सबसे अधिक खतरनाक हैं। आए दिन राह चलते लोगों पर मवेशियों द्वारा किए गए हमलों में सबसे अधिक सांड ही हैं। इसके बावजूद भी नगर निगम के लिए सांड पकड़ना किसी चुनौती से कम नहीं है। शहर को एक तरफ तो कैटल फ्री बनाने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ सड़कों से मवेशियों का जमघट कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है। कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से बंधा धर्मपुरा में करीब 300 करोड़ रुपए से देव नारायण आवासीय योजना बनाई गई है। जहां पशु पालकों के साथ ही पशुओं को भी शिफ्ट किया गया है। उसके बाद भी शहर से मवेशियों की संख्या कम नहीं हो रही है।</p>
<p><strong>सब्जीमंडी व भीड़भाड़ वाली जगह खतरा अधिक</strong><br />शहर में वैसे तो मवेशी हर जगह सड़कों पर घूमते हुए व समूहों में बैठे हुए देखे जा सकते हैं। सड़कों पर घूमने वाले मवेशियों में भी सांड की संख्या अधिक है। निराश्रित गायों को तो नगर निगम की टीम आसानी से पकड़ भी लेती है। जबकि सांड पकड़ना उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।जबकि शहर में हर जगह सब्जीमंडी हो या भीड़भाड़ वाले स्थान वहां इन सांड से खतरा अधिक हो रहा है। सब्जीमंडी में महिलाएं अधिक होने व उनके हाथ में सब्जी का थैला व अन्य वस्तु होने पर उन्हें खाने के प्रयास में सांड उन पर हमला तक कर रहे हैं। वहीं मुख्य मार्गों पर भी आए दिन सांड द्वारा लोगों को उठाकर फेंकने व उन पर हमला करने की कई घटनाएं हो चुकी हैं। गत दिनों छावनी रामचंद्रपुरा में घर से निकलकर दुकान जा रहे एक बुजुर्ग पर सांड ने दूर से आकर हमला कर दिया था। जिससे उन्हें गम्भीर हालत में निजी अस्पतालमें भर्ती कराना पड़ा था। वहीं इस तरह की घटनाओं में कई लोगों की तो मौत तक हो चुकी है।</p>
<p><strong>घेरा डालकर पकड़ रहे मवेशी</strong><br />नगर निगम की ओर से सड़कों से निराश्रित पशुओं को पकडऩे का ठेका दिया हुआ है। निगम अधिकारियों की मौजूदगी में संवेदक फर्म के कर्मचारियों के माध्यम से मवेशियों को पकडऩे का काम घेरा डालकर किया जा रहा है। वैसे तो अधिकतर समय मवेशियों को रात में पकड़ते हैं। लेकिन गत दिनों दिन के समय सकतपुरा में घेरा डालकर पकडऩे के दौरान कई मवेशी एक सरकारी स्कूल में घुस गए थे। जिससे वहां स्कूल समय में बड़ा हादसा होने से बच गया था।</p>
<p><strong>तीन माह में पकड़े करीब डेढ़ हजार मवेशी</strong><br />नगर निगम से प्राप्त जानकारी के अनुसार निगम टीम ने इस साल के शुरुआती तीन माह में करीब डेढ़ हजार मवेशी सड़कों से पकड़े हैं। उनमें गाय अधिक और सांड बहुत कम हैं।जनवरी में 408, फरवरी में 533 और मार्च में 532 समेत तीन माह में कुल 1473 मवेशी पकड़े गए हैं।</p>
<p><strong>गौशाला में करीब एक तिहाई सांड</strong><br />नगर निगम से प्राप्त जानकारी के अनुसार निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में वर्तमान में करीब 22 सौ मवेशी हैं। इनमें से करीब एक तिहाई 700 सांड हैं। वहीं किशोरपुरा स्थित कायन हाउस में 188 मवेशी हैं।</p>
<p><strong>महानगरों की तरह हो शहर में व्यवस्था</strong><br />लोगों का कहना है कि कोटा में सड़कों पर गाय, सांड, कुत्ते, बंदर व अन्य कई तरह के मवेशी अधिक हो रहे हैं। जबकि महानगरों की तरह कोटा में भी सड़कों पर मवेशी नजर नहीं आने चाहिए।बसंत विहार निवासी शुभम् शर्मा का कहना है कि इस क्षेत्र में सड़कों पर व बाड़ों में पशुओं की संख्या काफी अधिक है। उनके कारण यहां सांड भी आते रहते हैं। जिनसे स्थानीय लोगों को अधिक खतरा बना हुआ है।तलवंडी निवासी योगेश जैन का कहना है कि जिस तरह से महानगरों में मवेशी सड़कों पर नजर नहीं आते। वैसे ही कोटा में भी व्यवस्था होनी चाहिए। गायों को चारा डालने का धर्म करना है तो गौशालाओं में ही गायों को चारा डाला जाना चाहिए। सड़कों पर चारा डालना पूरी तरह से प्रतिबंधित होना चाहिए।</p>
<p><strong>शिकायत पर एम्बूलेंस भेजकर पकड़ते हैं सांड</strong><br />नगर निगम गौशाला समिति के पूर्व अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि शहर में मवेशियों की संख्या काफी अधिक है। उनमें सांड भी काफी है। नगर निगम की ओर से रात के समय घेरा डालकर मवेशी पकड़े जा रहे हैं। सांड पकडऩा मुश्किल है। उनके लिए शिकायत आने पर अलग से एम्बूलेंस भेजकर उसमें पकड़कर लाते हैं। निगम गौशाला में वर्तमान में करीब 700 से अधिक सांड हैं। उसके बाद भी सड़कों से ये कम नहीं हो रहे हैं।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />शहर में सांड अधिक हैं। निराश्रित मवेशियों को पकडऩे का अभियान तो लगातार जारी है। इस महीने करीब 400 से 500 मवेशी पकड़े जा रहे हैं। मवेशियों को घेरा डालकर पकड़ते समय सांड पकडऩा मुश्किल ही नहीं किसी चुनौती से कम नहीं है।उसके बाद भी जान जोखिम में डालकर कर्मचारी सांड पकड़ रहे हैं।<br /><strong>- महावीर सिंह सिसोदिया, प्रभारी, गौशाला नगर निगम</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 15:29:14 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>जनता क्लिनिक का जनता को पता नहीं : नाम नया हालात वही, कोटा के आरोग्य मंदिर बने खाली कुर्सियों के केंद्र</title>
                                    <description><![CDATA[डॉक्टर महीनों से नदारद, दो-तिहाई केंद्रों पर स्टाफ अधूरा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/public-unaware-of--janata-clinics---new-name--same-old-story%E2%80%94kota-s--arogya-mandirs--become-centers-of-empty-chairs/article-146814"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(1)26.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत ह्यशहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिरह्ण के नाम पर चल रहे पूर्व के जनता क्लिनिकों में साफ दिखाई दे रही है। नाम बदलने और बड़े दावों के बावजूद जमीनी स्तर पर हालात बेहद खराब हैं। 20 दिनों तक किए गए भौतिक सत्यापन में सामने आया कि अधिकांश केंद्रों पर डॉक्टर ही नहीं हैं, कई जगह स्टाफ अधूरा है और कुछ केंद्रों पर तो ताले लटके मिले।</p>
<p><strong>2 माह से अधिक गुजरा समय</strong><br />विभाग ने 2 माह पूर्व ही इन शहरी आयुष्मान केन्द्रों का संचालन नयी एजेन्सी को दिया है। क्षेत्र से लगातार मिल रही जानकारीयों के सत्यापन के लिये नवज्योति रिपोर्टर टीम ने 24 फरवरी से बड़गांव, सुखाडिया, नान्ता, घोड़ा बस्ती, एक मीनार मस्जिद, गोवर्धनपुरा और बंजारा कॉलोनी समेत कई आरोग्य मंदिरों का दौरा किया। केंद्रों में कहीं भी पूरा स्टाफ ड्यूटी पर मौजूद नहीं मिला। दो केंद्रों पर तो निरीक्षण के दौरान ताले लगें मिलें, जबकि जिन केंद्रों पर ड्यूटी ओपीडी का बोर्ड लगा था वहां भी डॉक्टर नदारद थे। कही पर सात कार्मिकों के नाम की जानकारी तो दी गयी, लेकिन मौके पर उनकी उपस्थिति नहीं मिली, ज्यादातर जगह पर कार्मिक के बारे में कहा गया कि वह अन्य जगह पीएचसी पर गये हुये है। हालांकि नये नियमार्न्तगत शहरी आयुष्मान केन्द्रों के स्टाफ की ड्यूटी का जिम्मा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय का है ।</p>
<p><strong>1.45 रू. प्रति माह के 7 स्टाफ की अनुशंसा</strong><br />सरकारी निदेर्शों के अनुसार प्रत्येक आरोग्य मंदिर के लिये 1.45 रू. मेनपॉवर के दिये जाते है जिससे एक डॉक्टर, दो नर्सिंग स्टाफ, एक फार्मासिस्ट, एक एएनएम, एक सहायक कर्मचारी और एक सफाई कर्मचारी सहित कुल सात कर्मचारियों की व्यवस्था होनी चाहिए। लेकिन नए वित्तीय सत्र के दो महीने गुजर जाने के बाद भी अधिकांश केंद्रों पर चतुर्थ श्रेणी और सहायक कर्मचारी तक नियुक्त नहीं किए गए। परिणामस्वरूप कई जगह गंदगी, बिखरी दवाइयां और अव्यवस्था का आलम देखने को मिला।</p>
<p><strong>महिला स्टाफ की सुरक्षा</strong><br />सबसे खराब स्थिति गोवर्धनपुरा आरोग्य मंदिर में सामने आई। यहां कायर्करत डॉक्टर रूद्रप्रताप छावनी आरोग्य मंदिर पर ड्यूटी कर रहे थे, हांलाकि यहां पर स्टाफ के नाम पर मौजूद एक फार्मासिस्ट ने बताया कि सामुदायिक भवन में चल रहे इस केंद्र पर स्टाफ रुकना नहीं चाहता, क्योंकि अधिकतर कर्मचारी महिलाएं हैं, और सुरक्षा की समस्या बनी रहती है । इसी तरह एक मीनार मस्जिद, छावनी क्षेत्र में शनिवार को दोपहर 2:50 बजे ही केंद्र का ताला लगा मिला। स्थानीय लोगों ने बताया कि यहां डॉक्टर और एजेंसी के बीच विवाद चल रहा है, जिसके कारण डॉक्टर नहीं आते। मरीज अक्सर इलाज की उम्मीद में आते हैं लेकिन बिना चिकित्सक के खाली कुर्सी देखकर वापस लौट जाते हैं।</p>
<p><strong>ओपीडी समय चस्पा कर दिया पर ताले नहीं खुले</strong><br />घोड़ा बस्ती आरोग्य मंदिर में कागजों पर दो टाइम ओपीडी का समय लिखा है, लेकिन वास्तविकता में स्टाफ एक बजे से पहले ही निकल जाता है। मौके पर बिजली विभाग का कर्मचारी भी बिल सम्बन्धी काम से बाहर खड़ा मिला। ओपीड़ी समय के अनुसार हमारी टीम शाम को फिर से यहां पहुंची तो भी यहां मुख्य दरवाजे पर ताला ही लगा मिला।सबसे अजीब स्थिति बंजारा कॉलोनी में सामने आई, जहां आरोग्य मंदिर का कोई बोर्ड तक नहीं लगा है। यह केंद्र स्थानीय पार्षद के घर के भीतर चलाया जा रहा है और यहां पिछले तीन महीनों से डॉक्टर ही नहीं है। स्थानीय पीएचसी शॉपिंग सेंटर के चिकित्सक डॉ. संजय शायर के अनुसार डॉक्टर नहीं होने से मरीजों को काफी परेशानी हो रही है।</p>
<p><strong>आॅनलाईन फोटो में भी आधा ही स्टाफ</strong><br />केंद्रों के संचालन में पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं। कर्मचारियों के अनुसार अटेंडेंस के नाम पर सभी कर्मचारी एक साथ फोटो खींचकर आॅनलाइन अपलोड कर देते हैं, जबकि मौके पर आधे कर्मचारी भी मौजूद नहीं होते। ऐसे में भी विभाग द्वारा इन पर संज्ञान न लेना लापरवाही का सबसे बड़ा उदाहरण है।</p>
<p><strong>जनता तो क्या जनप्रतिनिधियों तक को नहीं पता</strong><br />जनता क्लिनिक के प्रचार प्रसार का हाल यह है कि इनके प्रति किसी भी प्रकार के रूट मेंपिंग तक विभाग के पास मौजूद नहीं है। सम्बन्धित मदर पीएचसी के प्रभारी चिकित्सकों ने तो यहां के रजिस्टरों में विजिट तक दर्ज नहीं हे, यहीं हाल आम नागरिको ने भी बयान किया कि हमें तो अभी तक पता ही नहीं कि हमारे यहां भी कोई क्लिनिक है। जनप्रतिनिधियों को भी इन केंद्रों की स्थिति की जानकारी नहीं है। गोवर्धनपुरा वार्ड-20 की पार्षद इति शर्मा (पूर्व ) ने कहा कि सरकार बनने के बाद इस विषय में उनसे कोई संवाद तक नहीं किया गया, और उन्हें यह तक नहीं पता कि उनके क्षेत्र में जनता क्लिनिक किस जगह और किस स्थिति में चल रहा है।</p>
<p><strong>नोडल अधिकारी ने कहा सभी 40 जगह डॉक्टर</strong><br />उधर विभाग नोड़ल अधिकारी डिप्टी सीएमएचओ घनश्याम मीणा का दावा है कि सभी 40 केंद्रों पर डॉक्टर लगाए जा चुके हैं। उनहोनें कहा कि एजेन्सी की ओर से हमे लेटर में बताया गया कि सभी जगह डॉक्टर लगे हुये है कहीं भी जगह खाली नहीं केवल बाकि दो स्टाफ की लिस्ट अभी नहीं आयी है। लेकिन ग्राउंड रिपोर्ट इस दावे से बिल्कुल उलट तस्वीर दिखाती है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होने के बावजूद अब तक किसी प्रकार की सख्त कार्रवाई नहीं हुई है। सवाल यह है कि जब प्रत्येक केंद्र पर करीब 1.45 लाख रुपए प्रतिमाह स्टाफ पर खर्च किए जा रहे हैं, तो फिर जमीन पर स्टाफ ओर सुविधाएं क्यों नहीं दिखाई दे रही हैं। स्पष्ट है कि सिर्फ नाम बदलकर जनता क्लिनिक को ह्यआरोग्य मंदिरह्ण बना देने से स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार नहीं होगा। जब तक नियमित निरीक्षण, जवाबदेही और सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ये केंद्र आम लोगों के लिए राहत नहीं बल्कि निराशा का कारण बने रहेंगे ।</p>
<p><strong>जमीनी जांच में सामने आए तथ्य</strong><br />- 20 दिन में कई आरोग्य मंदिरों का भौतिक सत्यापन<br />-अधिकांश केंद्रों पर पूरा स्टाफ नहीं मिला<br />-दो केंद्रों पर निरीक्षण के दौरान ताले<br />-कई जगह डॉक्टर महीनों से नदारद<br />-गंदगी और अव्यवस्था, सफाई कर्मचारी तक नहीं<br />-अटेंडेंस के लिए फोटो अपलोड, मौके पर स्टाफ गायब</p>
<p><strong>प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का मजबूत होना बेहद जरूरी</strong><br />सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार शहरी क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि इन केंद्रों पर नियमित डॉक्टर और स्टाफ उपलब्ध नहीं होगा तो छोटे-छोटे रोग भी गंभीर बन सकते हैं और मरीजों का बोझ सीधे बड़े अस्पतालों पर बढ़ेगा। इसलिए प्रशासन को इन केंद्रों की नियमित मॉनिटरिंग और जवाबदेही तय करनी चाहिए।</p>
<p><strong>यूँ बोले जिम्मेदार अधिकारी</strong><br />हमने एजेंसी से रिपोर्ट मांगी है। उनके अनुसार सभी 40 केंद्रों पर डॉक्टर लगा दिए गए हैं। इससे ज्यादा जानकारी अभी नहीं दी जा सकती।<br /><strong>- डॉ. घनश्याम मीणा, नोडल अधिकारी, आयुष्मान आरोग्य मंदिर, डिप्टी सीएमएचओ कोटा।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 15:04:05 +0530</pubDate>
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                <title>यह तो सरासर लापरवाही है, 5 दिनों से टूटी पड़ी नहर की दीवार             </title>
                                    <description><![CDATA[प्रशासनिक स्तर की लापरवाही के मुद्दे पर स्थानीय लोगों में चिंता और नाराजगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/this-is-sheer-negligence%E2%80%94the-canal-wall-has-been-broken-for-five-days/article-146497"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(1)17.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । सरकारी तंत्र के हाकमों को आम जनता की जान की कितनी फिक्र होती है, इसका ताजा उदाहरण नान्ता रोड़ पर नहर की टूटी दीवारों को देखने से मिल जायेगा। दरअसल सोमवार रात को चम्बल की बायीं मुख्य नहर की दीवार गिरने से सड़क का रास्ता पुरी तरह जानलेवा हो गया था। मामले में प्रशासनिक तंत्र की गंभीर लापरवाही व संवेदनहीनता सामने आई है। यहां पर आम वाहन चालकों की सुरक्षा के लिये कोई ठोस वयवस्था अभी तक नही की गयी है। घटना की रात ही सूचना मौके से ही पुलिस कन्ट्रोल रूम व स्थानीय थाने व सीएडी प्रशासन को दी गयी थी । देर रात मौके पर हमारे प्रतिनिधी द्वारा एक घंटे रुकने के बाद क्षेत्र के जवानों ने दो अस्थायी बैरिकेट़स लगाये और अगले दिन दीवार के पास सुरक्षित क्षेत्र बनाने का आश्वासन दिया।</p>
<p><strong>युवक ने कहा अब किसी और को नहीं गिरने दूंगा</strong><br />उस रात हादसे में बाल बाल बचे युवक ने कहा मै यहां चापाई लगा कर बैठूंगा पर किसी को इस नहर मे नही गिरने दूंगा सोमवार की रात जानलेवा हादसे का शिकार होने बचे व्यक्ति ने बताय कि अब जब भी यहा से गुजरता हु तो डर लगता है। मेरी अपील है कि प्रशासन ठीक करवाये या फिर मुझे कहदे मै कम से कम रात के समय तो यहाँ चारपाई लगा कर बैठ ही सकता हूँ। आखिर हमें तो फिक्र करनी ही होगी।</p>
<p><strong>खतरा ज्यों का त्यों</strong><br />तीन दिन बीत जाने के बाद भी दीवार केआसपास स्थायी सुरक्षा उपाय नहीं किए गए। सीएडी अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से मुंह फेरते दिखे। अगले दिन मामले की सूचना एसएचओ कौशल्या गालव को भी दी गई, जिन्होंने सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात कही, लेकिन शुक्रवार रात तक मौके पर सीएडी के जिम्मेदार अधिकारियों ने कोई ठोस कदम उठाया। हालांकि गुरूवार को दिवार के खुले हिस्से पर झाड़ियां जरूर लगा दी ।</p>
<p><strong>बोले थे मिट्टी के कट्टे लगवा रहे</strong><br /> 5 दिन से खुला पड़ा मौत का मुहाना स्थानीय लोगों ने अधिकारियों से संपर्क किया, जिनका कहना था कि जल्दी मिट्टी और कट्टे डालकर व्यवस्था कर दी जाएगी। हालांकि दो दिन गुजर जाने के बाद भी सुरक्षा के पुरे इंतजाम नहीं किया गया। इस प्रशासनिक अनदेखी से स्थानीय लोगों में रोष व्याप्त है। राहगीर और पड़ोसी भी प्रशासन की गंभीर लापरवाही पर ताना मारते हुए गुजरते हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि सरकारी सिस्टम में त्वरित कार्रवाई और जवाबदेही की कमी ने लोगों की सुरक्षा को गंभीर खतरे में डाल दिया है।</p>
<p> गुरुवार को ही हमने कांटे लगवाएं हैं। स्थाई रूप से इंतजाम नहीं कर सकते। लोगों को कोई नुकसान ना हो इसके लिए कार्रवाई करेंगे। अभी वापस से पानी की डिमाण्ड आयी है 3 दिन ओर लगेंगे दीवार नीचें से ही उठेगी अभी नहर बन्द नहीं कर सकते ।<br /><strong>- अरविन्द कुमार अधिशाषी अभियन्ता दायीं मुख्य नहर सीएडी कोटा</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Mar 2026 15:01:57 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कागज से धरातल तक आने में ही कई गुना बढ़ रही प्रोजेक्ट कॉस्ट</title>
                                    <description><![CDATA[प्रोजेक्ट की डेड लाइन के कोई मायने ही नहीं, बढ़ता रहता है समय और बजट।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/project-costs-are-multiplying-several-times-over-just-to-get-from-paper-to-reality/article-141859"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/856.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।<strong>  केस एक:</strong> नई धानमंडी स्थित थोक फल सब्जीमंडी को यहां से चंद्रेसल में शिफ्ट करने की योजना तत्कालीन भाजपा सरकार के समय में बनी थी। 23 साल बीतने के बाद भी अभी तक यह योजना प्रक्रियाओं के चलते अधरझूल में ही अटकी है। इससे उस समय इसके लिए तय किए गए बजट में तीन गुना तक बढ़ोतरी हो चुकी है।</p>
<p><strong>केस दो: </strong>कलक्ट्रेट स्थित जिला न्यायालय का भवन समय के साथ छोटा पडने लगा है। इसे स्वास्थ्य भवन के पास सार्वजनिक निर्माण विभाग की जमीन पर तैयार करने के लिए जमीन आवंटित हो गई थी। उस समय इसके लिए करीब 200 करोड़ का बजट तय किया गया था। लेकिन अभी तक प्रक्रियाओं में ही उलझने के कारण न तो जगह तय हो सकी है और न ही इसके बनने की समय सीमा। हालत यह है कि इसका बजट अब 290 करोड़ हो गया है।</p>
<p><strong>केस तीन: </strong>कोटा बैराज समेत तीन बांधों की मरम्मत करवाने की योजना बनी। करीब 10 से 15 साल पहले मरम्मत के लिए करीब 100 करोड़ रुपए का बजट तय किया गया था। वर्तमान में यह बजट दो गुना से भी अधिक 236 करोड़ रुपए हो गया है। लेकिन अभी तक भी मरम्मत के संबंध में कोई ठोस निर्णय या कार्यवाही नहीं हो सकी है।</p>
<p>यह तो कुछ उदाहरण हैं । ऐसी छोटी बड़ी कई योजनाएं हैं जिनकी बजट तक में घोषणा हो जाती है। बजट दो से दस गुना तक बढ़ जाता है लेकिन योजना धरातल पर नहीं आ पाती। दूसरी तरह चीन जैसे देश में ऐसे प्रोजेक्ट ना केवल समय पर तैयार हो जाते हैं अपितु डेढ लाइन से छह माह पूर्व तैयार कर लिया जाता है। ऐसा छोटी मोटी योजनाओं में ही नहीं अपितु बुलेट ट्रेन चलाने जैसी योजनाओं में देखा जा चुका है।चीन को दुनिया में तेजी से और समय से पहले प्रोजेक्ट पूरे करने के लिए जाना जाता है।</p>
<p><strong>यह कर दिखाया चीन ने </strong><br />- हुओशेनशान अस्पताल (वुहान) कोरोना महामारी के दौरान 1000 बेड का अस्पताल तय समय से 10 दिन पहले तैयार कर दिया।<br />- बीजिंग-शंघाई हाई-स्पीड रेल लाइन। 1318 किमी निर्धारित समय से पहले पूरा। यह दुनिया की सबसे व्यस्त हाई-स्पीड रेल लाइनों में से एक।<br />-बीजिंग डाक्सिंग इंटरनेशनल एयरपोर्ट दुनिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में शामिल, पूरी तरह हाई-टेक और आॅटोमेटेड सिस्टम के बावजूद 2019 में तय समय से पहले उद्घाटन।<br />- थ्री गॉर्जेस डैम चीन की ऊर्जा जरूरतों की रीढ़ दुनिया का सबसे बड़ा जलविद्युत बांध। कई यूनिट पहले ही चालू कर दी गईं।</p>
<p><strong>मिनी सचिवालय की भी यही हालत</strong><br />संभागीय मुख्यालय होने के बावजूद भी अभी तक कोटा में मिनी सचिवालय नहीं है। कोटा में मिनी सचिवालय बनाने का प्रोजेक्ट कांग्रेस सरकार के समय में बना। योजना धरातल पर उतरती उससे पहले ही सरकार बदल गई। प्रोजेक्ट अब एक कदम भी आगे नहीं बढ़ रहा है ।</p>
<p><strong>कंवेंशन सेंटर का तो प्रोजेक्ट ही निरस्त</strong><br />कोटा के दशहरा मैदान स्थित फेज दो में दिल्ली के भारत मंडपम् के तर्ज पर कंवेंशन सेंटर बनाने की योजना थी। पहले इस पर करीब 400 करोड़ रुपए खर्च होने थे। बाद में दूसरी बार योजना बदली और बजट आधा कर 200 करोड़ रुपए कर दिया गया। समय इतना अधिक लगा कि योजना को मूर्त रूप लेने की जगह आखिरकार निरस्त ही करना पड़ा।</p>
<p><strong>स्मार्ट सिटी के भी कई प्रोजेक्ट हुए निरस्त</strong><br />इतना ही नहीं तत्कालीन भाजपा सरकार के समय में कोटा में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत बस स्टॉप समेत अन्य कार्य करवाने की योजनाएं बनी। उन पर काम भी हुआ लेकिन सरकार बदलने के बाद आधी से अधिक योजनाएं निरस्त करनी पड़ी और कई में बजट बढ़ गया। ऐसे कई योजनाएं हैं जो धरातल पर आने से पहले ही न तो समय पर पूरी हो पा रही हैं और उनका बजट भी कई गुना अधिक बढ़ रहा है। जिससे आमजन को उनका लाभ तक नहीं मिल पा रहा।</p>
<p><strong>समय पर हो योजनाएं पूरी, जनता पर नहीं पड़े भार</strong><br />तलवंडी निवासी महेश शर्मा का कहना है कि सरकार द्वारा कई बार लोगों की डिमांड पर घोषणा तो कर दी जाती है। उसके बाद योजना भी बन जाती है। लेकिन उन योजनाओं को लागू व विभिन्न स्तरों पर स्वीकृतियों में ही इतना अधिक समय लग जाता है कि उस योजना का बजट कई गुना बढ़ जाता है। जिसका आर्थिक भार जनता पर ही पड़ता है। महावीर नगर निवासी नितिन नामा का कहना है कि योजनाएं आमजन के लिए लाभकारी और कम बजट की होनी चाहिए। साथ ही उन्हें समय पर पूरा किया जाए। जबकि विदेशों में तरक्की करने का कारण ही यह है कि वहां कम बजट में और समय पर योजनाएं पूरी होती है। जिससे जनता को उनका लाभ मिल पाता है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />योजनाएं सरकार के स्तर पर बनती है। उनकी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद निविदा जारी की जाती है। निविदा व टेंडर जारी होने के बाद उसमें जितना भी समय लगता है उसके बाद बजट बढ़े या कम हो उसके लिए संवेदक फर्म ही जिम्मेदार रहती है। योजनाओं की स्वीकृति में समय लगना सरकार के स्तर पर ही रहता है। एक बार योजना बनने के बाद उसमें बदलाव होने पर ही बजट बढ़ता है।<br /><strong>- सुनील गर्ग, अध्यक्ष, पीडब्यूडी कांंट्रेक्टर एसोसिएशन</strong></p>
<p>जब तक निविदा जारी नहीं होती तब तक वह योजना धरातल पर नहीं आती। निविदा जारी होने व कायार्देश जारी होने के बाद स्वीकृतियों में समय लगने से यदि बजट बढ़ता है तो उसका जनता पर भार नहीं पड़ता है। कई योजनाएं तो निविदा जारी होने से पहले ही बदलती रहती हैं। उस बारे में सरकार के स्तर पर ही कुछ कहा जा सकता है।<br /><strong>- ए.क्यू कुरैशी, एक्सईएन, नगर निगम कोटा</strong></p>
<p> सरकार व प्रशासन की मंशा तो रहती है कि जो भी प्रोजेक्ट बनाए जाएं समय पर पूरा किया जाए। लेकिन कई बार जमीन आवंटन, बजट आवंटन, अन्य प्रक्रियाओं को पूरा करने में सरकार के स्तर पर ही समय अधिक लग जाता है। जिससे कई बार कुछ प्रोजेक्ट में देरी हो सकती है। लेकिन हर प्रोजेक्ट बनते समय ही उसकी समय सीमा तय करने से उसकी लागत भी सीमित रहती है और जिस उद्देश्य से प्रोजेक्ट बनाया गया है उसका लाभ भी लोगों को मिल पाता है। विदेशों में ऐसा हो रहा है तो यहां भी उससे सीख लेते हुए कार्य किए जाने चाहिए।<br /><strong>- कृष्णा शुक्ला, अतिरिक्त जिला कलक्टर, प्रशासन</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Feb 2026 11:42:46 +0530</pubDate>
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                <title>ये हटा रहे, वो लगा रहे, शहर को बदरंग करने वालों पर नहीं हो रही सख्ती</title>
                                    <description><![CDATA[एक बार लगने के बाद उन्हें काफी समय तक हटाया भी नहीं जाता । ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/they-are-removing-them--others-are-putting-them-up-again--no-strict-action-is-being-taken-against-those-who-are-defacing-the-city/article-139655"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(3)18.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। एक तरफ तो शहर को पर्यटन नगरी के रूप में विकसित किया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ शहर को बदरंग करने वालों के खिलाफ सख्ती नहीं की जा रही है। जिससे नगर निगम द्वारा बार-बार हटाने के बाद भी संस्थाओं द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर अवैध रूप से पोस्टर व बैनर लगाए जा रहे हैं।शहर में किसी भी सार्वजनिक स्थान चाहे वह फ्लाई ओवर हो या अंडरपास। बुर्ज की दीवार हो या निजी व सरकारी भवन की दीवार।शौचालय या अन्य किसी भी स्थान पर चाहे डिवाइडर पर लगे बिजली के खम्बे ही क्यों न हो वहां बिना अनुमति के किसी भी तरह की प्रचार सामग्री लगाना अवैध है। ऐसा करने वालों के खिलाफ सम्पति विरूपण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाती है।</p>
<p>शहर का कोई इलाका या सार्वजनिक स्थान ऐसा नहीं है जहां निजी संस्थाओं, होटल, कोचिंग, डॉक्टर व व्यवसायिक प्रतिष्ठान संचालक ने विज्ञापन के पोस्टर व बैनर नहीं लगा रखे हों। जन्म दिन की बधाई से लेकर रक्तदान शिविरों तक के विज्ञापन अवैध रूप से लग रहे हैं। एक बार लगने के बाद उन्हें काफी समय तक हटाया भी नहीं जा रहा। संबंधित विभागों के अधिकारी भी देखकर अनजान बने हुए हैं। हालांकि नगर निगम की ओर से टीमें लगाकर लगातार अवैध रूप से चस्पा विज्ञापनों को हटाया जा रहा है। पहले यह कार्रवाई निगम के राजस्व अनुभाग के माध्यम से करवाई जा रही थी। जबकि वर्तमान में जन स्वास्थ्य अनुभाग के माध्यम से पोस्टर, बैनर व फ्लेक्स को हटाया जा रहा है। हालत यह है कि एक तरफ नगर निगम की टीमें पोस्टर, बैनर व फ्लेक्स हटाकर आती है। वहीं दूसरी तरफ संस्थाएं फिर से उसी जगह पर दोबारा से विज्ञापन चस्पा कर रही है। हालांकि कई संस्थाएं तो बार-बार ऐसा कर रही है और कई जगह पर हर बार नई संस्था का विज्ञापन नजर आ रहा है।</p>
<p><strong>हर जगह लगे हैं विज्ञापन</strong><br />वर्तमान में एरोड्राम अंडरपास हो या छावनी फ्लाई ओवर। गुमानपुरा फ्लाई ओवर हो या दादाबाड़ी फ्लाई ओवर। यहां तक कि पुराने शहर में बुर्ज की दीवारों पर और डिवाइडरों के बीच बिजली के खम्बों पर अभी भी बड़ी संख्या में ऐसे पोस्टर, फ्लेक्स व बैनर लगे हुए हैं। जिन पर नगर निगम की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।</p>
<p><strong>बिना सख्ती मेनपावर का दुरुपयोग</strong><br />जानकारों का कहना है कि नगर निगम द्वारा एक या दो बार विज्ञापन हटाना तो किसी हद तक सही है। लेकिन बार-बार विज्ञापन लगाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं करना और फिद्दर से उन्हें अपने स्तर पर ही हटाना मेन पावर का दुरूपयोग है। तलवंडी निवासी अनिल जैन का कहना है कि जब तक नगर निगम की ओर से सम्पति विरूपण अधिनियम के तहत सख्ती नहीं की जाएगी। भारी जुमार्ना या मुकदमा दर्ज नहीं कराया जाएगा तब तक किसी पर कोई असर नहीं हो रहा।</p>
<p>महावीर नगर निवासी कैलाश शर्मा का कहना है कि निजी संस्थाएं विज्ञापन एजेंसी या फर्म के माध्यम से अपना प्रचार कर रही है। एजेंसी मनमर्जी की जगह पर विज्ञापन चस्पा कर कमाई कर रही है। ऐसे में दोनों का काम हो रहा है। जबकि नुकसान नगर निगम को और शहर गंदा होने से छवि शहर की खराब हो रही है। जबकि ऐसा करने वालों के खिलाफ केवल कहने से नहीं सख्ती करने से ही असर होगा।</p>
<p><strong>नोटिस देने की तैयारी</strong><br />नगर निगम की स्वास्थ्य अधिकारी रिचा गौतम ने बताया कि निगम आयुक्त के आदेश से जन स्वास्थ्य अनुभाग की टीमें अवैध पोस्टर, बैनर व फ्लेक्स हटा रही है। साथ ही जो बार-बार लगा रहा है उनकी सूची तैयार कर राजस्व अनुभाग को दी जा रही है। राजस्व अनुभाग व आयुक्त के आदेश पर बार-बार विज्ञापन लगाने वालों के खिलाफ नोटिस जारी करने व जुमार्ना समेत सख्त कार्रवाई करने की तैयारी की जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 15 Jan 2026 16:36:30 +0530</pubDate>
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                <title>पंचायत मुख्यालय पर शोपीस बने जनसुविधाघर</title>
                                    <description><![CDATA[पानी की सुविधा नहीं होने से  नियमित सफाई नहीं हो रही]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/public-toilets-at-panchayat-headquarters-become-showpieces/article-137179"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px-(5)7.png" alt=""></a><br /><p>दबलाना। क्षेत्र के धाबाइयों का नया गांव पंचायत मुख्यालय स्थित अटल सेवा केंद्र में स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण योजना के तहत निर्मित जन सुविधा घर पंचायत की अनदेखी के चलते बदहाली का शिकार हो गए हैं। सुविधाओं के अभाव और जमा गंदगी के कारण ये जनसुविधाघर उपयोग में नहीं आ पा रहे हैं और महज शोपीस बनकर रह गए हैं।बाथरूम के ऊपर पानी की टंकी का अभाव है, वहीं टंकी से आने वाला पाइप क्षतिग्रस्त है और नल भी गायब है। पानी की सुविधा नहीं होने से महिलाओं एवं पुरुषों के लिए बने सुविधाघरों में नियमित सफाई नहीं हो पा रही है। जमा गंदगी और दुर्गंध के कारण ग्राम सभा जैसे बड़े आयोजनों के दौरान पंचायत मुख्यालय आने वाले ग्रामीणों को शौच के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। पंचायत परिसर में लगी बोरिंग की मोटर लंबे समय से खराब पड़ी है। बरसात के बाद क्यारियां तो बनाई गईं, लेकिन मोटर खराब होने से अब तक पौधारोपण नहीं हो सका। दीवारों की कालिमा और गंदगी स्वच्छ भारत मिशन की जमीनी हकीकत बयां कर रही है।</p>
<p><br />ग्राम विकास अधिकारी परमेश्वर प्रजापत ने बताया कि बोरिंग की मोटर शीघ्र ठीक करवाई जाएगी तथा टूटी टंकी के स्थान पर नई टंकी रखवाई जाएगी।<br /><strong>-परमेश्वर प्रजापत,ग्राम विकास अधिकारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Dec 2025 15:20:19 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कोटा उत्तर वार्ड 1 - बदहाल सड़कें, खाली प्लाटों में भरा बरसाती पानी, अंधेरे में डूबा इलाका, जनता परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[स्थानीय निवासियों के बार-बार शिकायत करने के बावजूद उनकी सुनवाई नहीं हो रही।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-north-ward-1---bad-roads--rainwater-filled-in-empty-plots--area-immersed-in-darkness--public-troubled/article-125424"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/1ne1ws-(2)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा शहर का उत्तर क्षेत्र स्थित वार्ड नंबर 1 समस्यों का अंबार है। वार्डवासी रोजमर्रा की बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कॉलोनियों की गलियों से लेकर मुख्य सड़कों तक गंदगी, अंधेरा और टूटी सड़कें लोगों की परेशानियों को बढ़ा रही हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद उनकी सुनवाई नहीं हो रही है।</p>
<p><strong>सड़कों पर अंधेरा, हादसों का डर</strong><br />वार्ड का बड़ा हिस्सा शहर के मुख्य हाईवे से जुड़ा हुआ है। यहां से हर समय भारी वाहन, बसें और छोटे वाहन गुजरते रहते हैं। लेकिन अफसोस की बात है कि कई हिस्सों में सड़क किनारे लगी रोड लाइटें लंबे समय से बंद पड़ी हैं। अंधेरे में राहगीरों और वाहन चालकों के सामने हादसों का खतरा हर समय बना रहता है। कई बार कुत्तों के पीछे दौड़ने से लोग घायल भी हो चुके हैं।</p>
<p><strong>वार्ड का क्षेत्र</strong><br />वार्ड नंबर 1 में समस्त बड़गांव, गिरधरपुरा, गौरधनपुरा व देव नगर ग्राम,  शम्भूपुरा ग्राम, माहेश्वरी रिसोर्ट, सेन्ट जोन्स स्कूल एवं ज्ञान सरोवर कॉलोनी का क्षेत्र शामिल है। यह इलाका तेजी से विकसित हो रहा है, लेकिन सुविधाओं का हाल बदतर बना हुआ है।</p>
<p><strong>वार्ड में नहीं आती कचरा गाड़ी, गंदगी का अंबार</strong><br />सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चरमराई हुई है। कॉलोनियों में गंदगी बनी रहती हैं। कहीं नालियां खुली पड़ी हैं तो कहीं ढकी हुई नालियां गंदगी से जाम हैं। परिणामस्वरूप नालियों से बदबू आती है और गंदा पानी गलियों में बहता है। बच्चों और बुजुर्गों को इसमें से गुजरना पड़ता है, जिससे बीमारियां फैलने का खतरा और बढ़ जाता है।</p>
<p><strong>नहीं मिला जवाब</strong><br />जब वार्ड पार्षद रवि मीणा से नवज्योति की टीम ने इन समस्याओं पर बात करने की कोशिश की तो उन्होंने फोन काट दिया। इसके बाद भी कई बार संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला।</p>
<p><strong>खाली प्लाट बने मच्छरों का अड्डा</strong><br />वार्ड की कॉलोनियों में कई खाली प्लॉट हैं, जिनमें बरसात का पानी भरकर हफ्तों तक जमा रहता है। इससे मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है और डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा मंडराता है। लोगों का कहना है कि जल निकासी की कोई उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण हर साल मानसून में हालात बिगड़ जाते हैं।<br /><strong>- रचना, वार्डवासी</strong></p>
<p><strong>सामुदायिक भवन का अभाव</strong><br />वार्ड में न तो कोई पार्क है और न ही सामुदायिक भवन। बच्चों को खेलकूद के लिए दूसरे इलाकों का रुख करना पड़ता है। बुजुर्गों को टहलने के लिए सुरक्षित स्थान नहीं मिलता। वहीं सामाजिक और धार्मिक आयोजनों के लिए भी लोगों को मजबूरी में होटल या किराए के हॉल पर निर्भर रहना पड़ता है।<br /><strong>- सुनिता, वार्डवासी</strong></p>
<p><strong>समस्याएं जस की तस</strong><br />पार्षद उनकी कॉलोनियों में आते ही नहीं। उनकी समस्याओं की सुनवाई तक नहीं होती। कई बार शिकायत करने के बावजूद न तो सफाई सुधरी और न ही रोड लाइटें ठीक हुईं। लोगों का कहना है कि कॉलोनी में खाली पड़े प्लाटो में बारिश के पानी की निकासी का कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया है।<br /><strong>-छोटूलाल, वार्डवासी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Sep 2025 15:57:13 +0530</pubDate>
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                <title>पोस्टर फ्लेक्स लगाकर शहर को किया बदरंग</title>
                                    <description><![CDATA[सार्वजनिक स्थानों पर विज्ञापन पोस्टर व बैनर फ्लेक्स लगा रहे है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-city-has-been-discoloured-by-putting-up-posters-and-flexes/article-110862"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/257rtrer-(1)48.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । स्मार्ट सिटी की दौड़ में शामिल और पर्यटन नगरी के रूप में विकसित हो रहे कोटा शहर को सुंदर बनाने पर जहां करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे है। वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग शहर की सुंदरता को बदरंग कर रहे है। ऐसा करने वालों पर कार्रवाई नहीं होने से उनके हौंसले बुलंद हो रहे है।  केन्द्र सरकार के स्मार्ट सिटी मिशन के तहत कोटा शहर में विकास व सौन्दर्यीकरण पर हजारों करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। जिससे शहर सुंदर दिखने के साथ ही पर्यटन नगरी के रूप में विकसित किया जा रहा है। शहर में पुराने चौराहों को नया रूप दिया गया। अंडरपास व फ्लाई ओवर बनाए गए। शहर को हैरीटेज लुक देने के लिए एक रूपता के साथ विकास कराया गया है। लेकिन शहर में कुछ लोग ऐसे हैं जो सार्वजनिक स्थानों पर विज्ञापन पोस्टर व बैनर फ्लेक्स लगा रहे है।  </p>
<p><strong>जारी कर रहे हैें नोटिस  </strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण के राजस्व अधिकारी का कहना है कि निगम की ओर से समय-समय पर सम्पति विरूपण अधिनियम के तहत नोटिस जारी करने व जुर्माना तक की कार्रवाई की गई है। गत दिनों तो कुछ लोगों के खिलाफ दादाबाड़ी थाने में मुकदमा भी दर्ज कराया था और अदालत में चालान भी पेश किया गया था। उसके बाद भी  जो लोग नहीं मान रहे हैं उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p><strong>सख्ती हो तो पड़े फर्क</strong><br />लोगों का कहना है कि नगर निगम व प्रशासन द्वारा गलत काम करने वालों पर सख्ती नहीं करने से ही उनके हौंसले बुलंद हो रहे है। यदि कुछ लोगों पर सख्ती की जाए तो अन्य लोगों पर उसका असर पड़ेगा। बसंत विहार निवासी अरविंद विजय का कहना है कि प्रशासन द्वारा सख्ती नहीं करने से गलत काम करने वालों के हौंसले बुलंद हो रहे है। एक यदि गलत कर रहा है तो उसे देखकर अन्य लोग भी वेसा ही करने लगते है। जिसका नतीजा है कि निर्धारित स्घानों के अलावा सार्वजनिक स्थानों पर बधाई के विज्ञापन लगाकर शहर को बदरंग किया जा रहा है।  मोखापाड़ा  निवासी कुलदीप नायक का कहना है कि जब तक प्रशासन सख्त रवैया नहीं अपनाएगा तब तक गलत काम करने वालों  पर असर नहीं होगा। नगर निगम को ऐसे लोगों पर कार्रवाई करनी चाहिए। </p>
<p><strong>विज्ञापनों के लिए स्थान निर्धारित</strong><br />शहर में विज्ञापनों के लिए नगर निगम  व संबंधित एजेंसियों द्वारा स्थान निर्धारित किए हुए हैं। उन स्थानों पर यूनिपोल व अन्य माध्यमों  से प्रचार प्रसार के लिए उन्हें निजी फर्मो को ठेके पर दिया गया है। जहां विज्ञापन लगाने पर उसका निर्धारित शुल्क लगता है। ऐसे में अधिकतर लोग उस शुल्क से बचने के लिए सार्वजनिक स्थानों पर बिना किसी शुल्क के विज्ञापन तो चस्पा कर ही रहे हैं। साथ ही शहर को भी बदरंग कर रहे हैं। </p>
<p><strong>सम्पति विरूपण में कार्रवाई का प्रावधान</strong><br />शहर की सुंदरता को ग्रहण लगाने व बदरंग करने वालों के खिलाफ नगर निगम द्वारा कार्रवाई की जाती है। सम्पति विरूपण अधिनियम के तहत  नगर निगम को कार्रवाई का प्रावधान दिया गया है। जिसमें जुर्माना व मुकदमा दर्ज करवाने और नोटिस जारी करने तक का प्रावधान है। हालत यह है कि नगर निगम कोटा दक्षिण द्वारा कुछ समय पहले शहर को बदरंग करने वालों पर कार्रवाई की थी। लेकिन उसके बाद कार्रवाई नहीं होने से फिर से पुराने हालात बन गए हैं। </p>
<p><strong>यहां चस्पा हैं फ्लेक्स</strong><br />शहर में कोई भी सार्वजनिक स्थान ऐसा नहीं है जिसे विज्ञापनों से बंदरंग नहीं किया गया हो। छावनी फ्लाई ओवर की ऊपरी दीवार से लेकर पिलर तक, गुमानपुरा इंदिरा गांधी चौराहे से लेकर वल्लभ नगर तक के फ्लाई ओवर के पिलरों को विज्ञापन फ्लेक्स से अटा रखा है। दादाबाड़ी केशवपुरा फ्लाई ओवर हो या बोरखेड़ा फ्लाई ओवर सभी के पिलरों पर इतने अधिक विज्ञापन फ्लेक्स लगाए हुए हैं। जिन्हें देखकर ऐसा लग रहा है जैसे ये विज्ञापनों के लिए ही बनाए गए हैं। इसके अलावा सूरजपोल दरवाजे के पास, फोर्टवाल, किशोर सागर तालाब की पाल समेत शहर के अंदरूनी इलाकों में दीवारों पर विज्ञापनों के बैनर व फलेक्स लगाए हुए हैं। किसी पर जन्म दिन की बधाई के तो किसी पर रक्तदान शिविरों की जानकारी दी गई है। किसी पर निजी स्कूल का तो किसी पर डॉक्टरों के परामर्श संबंधी विज्ञापन लगे हुए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Apr 2025 15:15:36 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का - रास्ते पर डाला बिल्डिंग मटेरियल हटाया, रास्ता हो गया था अवरुद्ध </title>
                                    <description><![CDATA[वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/-impact-of-the-news---building-material-dumped-on-the-road-removed/article-107535"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/257rtrer-(1)52.png" alt=""></a><br /><p>सांंवतगढ़। सांवतगढ़ मुख्यालय के निमोद रोड पर पड़ा हुआ बिल्डिंग मटेरियल हटा लिया गया है। मंगलवार को आम रास्ते पर बिल्डिंग मेटेरियल डालने से रास्ता अवरुद्ध हो गया था जिससे वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा था। नवज्योति ने संबंधित अधिकारियों को अवगत करवाकर 12 मार्च के अंक में समाचार को प्रमुखता से प्रकाशित किया। इसके बाद बिल्डिंग मटेरियल को रोड के एक साइड लगवा दिया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Mar 2025 15:00:16 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>शहर की सुंदरता पर काला दाग, गेंट्री बोर्ड से लेकर सार्वजनिक स्थानों पर चस्पा हो रहे हैं पोस्टर</title>
                                    <description><![CDATA[स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए केन्द्रीय टीम भी कोटा आने वाली है। ऐसे में टीम को भी जब शहर बदरंग नजर आएगा तो कोटा की रैकिंग में सुधार होने के स्थान पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/black-stain-on-the-beauty-of-the-city/article-105749"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer-(3)48.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । शहर को एक तरफ तो पर्यटन नगरी के रूप में विकसित करने के लिए स्वच्छ व सुंदर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ विज्ञापनों के माध्यम से गेंट्री बोर्ड व सार्वजनिक स्थानों को बदरंग किया जा रहा है। जिससे बाहर से आने वालों पर शहर की छवि धूमिल हो रही  है। शहर को बदरंग करने वालों पर सख्ती नहीं होने का असर है कि वर्तमान में शहर का कोना-कोना बदरंग हो रहा है।  स्मार्ट सिटी के तहत शहर का विकास व सौन्दर्यीकरण किया गया। करोड़ों की लागत से यहां विकास कार्य करवाए गए। वहीं अब शहर को पर्यटन नगरी के रूप में विकसित कर विदेशी पर्यटकों को यहां आकर्षित करने का दावा तो किया जा रहा है। लेकिन बाहर से आने वालों पर शहर की छवि अच्छी बनने की जगह बदसूरती की बन रही है।  हालत यह है कि बाहर से आने वालों को शहर में दिशा बताने वाले दिशा सूचक व संकेतक(गेंट्री बोर्ड) पर बड़े-बड़े विज्ञापन फ्लेक्स लगाए हुए  है। जिससे दिशा सूचक बोर्ड पर दिशा बताना तो दूर दिशा भटकाने का काम कर रहे है। जबकि बड़े-बड़े शहरों में कहीं भी ऐसा देखने को नहीं मिलता।  शहर के सभी प्रमुख मार्गों व प्रवेश मार्गों पर केडीए के गेंट्री बोर्ड लगे हुए हैं। जिन पर शहर  के रास्तों व इलाकों की जानकारी संकेतक व दिशा सूचकों के माध्यम से दे तो रखी है लेकिन वह नजर नहीं आ रही है। उस पर विञ्जापन चस्पा कर छिपा दिया गया है। ऐसा किसी एक दो जगह नहीं पूरे शहर में हो रहा है। सीएडी चौराहा हो या दादाबाड़े से केशवपुरा रोड। डीसीएम रोड हो या बारां रोड। जवाहर नगर का क्षेत्र हो या तलवंडी का हर जगह पर यही स्थिति है। सभी जगह पर राजनीतिक दलों के नेताओं व कार्यकर्ताओं के जन्म दिन व पदाधिकारी बनाए जाने पर बधाई संदेश के विज्ञापन फ्लेक्स लगे हुए हैं। </p>
<p><strong>निगम ने कुछ दिन की सख्ती कर की इतिश्री</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण द्वारा सार्वजनिक स्थानों को बदरंग करने वालों के खिलाफ कुछ दिन तक कार्रवाई की। नोटिस व जुर्माने के अलावा कुछ लोगों के खिलाफ दादाबाड़ी थाने में मुकदमा भी दर्ज कराया था। लेकिन उसके बाद उन्होंने भी कोई कार्रवाई नहीं की। वाहीं कोटा उत्तर में इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की गई। </p>
<p><strong>फ्लाई ओवर व फोर्ट वाल तक बदरंग</strong><br />इधर शहर में अधिकतर सार्वजनिक स्थानों को भी विज्ञापनों से बदरंग किया हुआ है। नियमानुसार किसी भी सार्वजनिक स्थान पर  बिना अनुमति के विज्ञापन सामग्री नहीं लगाई जा सकती। लेकिन हालत यह है कि अधिकारियों की अनदेखी और विज्ञापन दाताओं व एजेंसियों को बुलंद हौंसले सार्वजनिक स्थानों के बदरंग के रूप में नजर आ रहे है। यहां तक कि फ्लाई ओवर व फोर्ट वाल तक को नहीं बक् शा गया।  सूरजपोल दरवाजे के पास हो या कैथीनीपोल में, लाड़पुरा दरवाजे के पास हो पाटनपोल में सभी जगह पर फोर्ट वाल तक पर विज्ञापन लगाए हुए हैं। इसी तरह से शहर में करोड़ों रुपए खर्च कर बनाए गए फ्लाई ओवर की दीवारों तक पर विज्ञापन लगाए हुए हैं। फिर चाहे व छावनी फ्लाई ओवर हो या गुमानपुरा का। दादाबाड़ी का फ्लाई ओवर हो या झालावाड़ रोड का। बारां रोड का हो या रंगपुर रोड का। इनकी दीवार और पिलर तक को विज्ञापनों से इतना अधिक बदरंग किया हुआ है जिससे लगता है मानो ये विज्ञापन के लिए ही अधिकृत किए हुए हैं।  वहीं स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए केन्द्रीय टीम भी कोटा आने वाली है। ऐसे में टीम को भी जब शहर बदरंग नजर आएगा तो कोटा की रैकिंग में सुधार होने के स्थान पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। </p>
<p><strong>सख्ती से ही लगेगी रोक</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण के उप महापौर व सफाई समिति के अध्यक्ष पवन मीणा का कहना है कि शहर के विकास व सौन्दर्यीकरण पर करोडों रुपए खर्च किए गए हैं। जिसे शहर सुंदर दिखे लेकिन कुछ लोगों के कारण शहर बदरंग हो रहा है। आजकर बधाई देने का ऐसा रोग लगा है कि जहां जगह मिले वहां फ्लेक्स लगाए जा रहे हैं। जबकि विज्ञापन के लिए नगर निगम द्वारा बोर्ड व स्थान चिन्हित किए हुए हैं। उन्हीं स्थानों पर अनुमति लेकर विज्ञापन लगाए जा सकते है। सार्वजनिक स्थानों पर विज्ञापन लगाने वालों के खिलाफ नगर निगम सम्पति विरूपण अधिनियम के तहत कार्रवाई कर सकता है। निगम व केडीए के सख्ती से ही इन पर रोक लगाई जा सकती है। </p>
<p><strong>लगातार कार्रवाईकी जा रही</strong><br />इधर नगर निगम कोटा दक्षिण के राजस्व अनुभाग के अधिकारियों का कहना है कि शहर को बदरंग  करने वालों के खिलाफ पूर्व  में भी कई बार सम्पति विरुपण अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई। नोटिस दिए गए और जुर्माना तक किया गया।  इस तरह की कार्रवाई समय-समय पर की जाती है। उसके बाद भी कुछ लोग नहीं मानते। उनके खिलाफ फिर से कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p> हमने पहले भी कार्रवाई की थी। अब फिर से अभियान चला कर कार्रवाई करेंगे। <br /><strong>- राजीव अग्रवाल महापौर दक्षिण </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Feb 2025 16:37:38 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - जागा पालिका प्रशासन: सड़क का निर्माण कार्य प्रारंभ किया</title>
                                    <description><![CDATA[खबर का असर देखने को मिला की नगर पालिका द्वारा उक्त सीसी सड़क का मलबा हटाकर निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/effect-of-the-news---nagar-palika-woke-up--started-the-construction-work-of-the-road/article-102259"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/78-(6)4.png" alt=""></a><br /><p>इन्द्रगढ़। इन्द्रगढ़ नगर पालिका द्वारा गलीयों में सीसी सड़क निर्माण के लिए सड़कों को खोदकर छोड़ने के मामले में दैनिक नवज्योति में 18 जनवरी रविवार के अंक में विकास के नाम पर उधेडी सड़कें, 8 दिन से पड़ा है मलबा... शीर्षक से खबर प्रकाशित हुई थी जिसमें पालिका द्वारा खोदी गई। सड़क से मोहल्ले वासियों को हो रही समस्याओं को प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया गया था। समाचार प्रकाशित होने के बाद नगर पालिका ने खोदी गई सड़कों की सुध ली तथा न केवल गलियों में खोदी गई। सडक का मलबा उठाया बल्कि सड़क का निर्माण कार्य भी प्रारंभ कर दिया। इस दौरान पालिका प्रशासन व संवेदक द्वारा मोहल्लेवासियों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए तुरंत प्रभाव से खोदी गई सड़क का मलबा उठाया तथा शुक्रवार से सड़क का निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया। जानकारी के अनुसार इन्द्रगढ के वार्ड नं. 12 में पालिका द्वारा सीसी रोड निर्माण के लिए पूर्व में बनी सडक को खोद दिया गया था तथा सड़क का मलबा वही पर छोड दिया गया था। सड़क की खुदाई किए हुए लगभग आठ दिन हो चुके थे। इस दौरान पालिका प्रशासन व संवेदक द्वारा सड़क का मलबा भी नही उठाया गया था। मोहल्लेवासियों की भारी परेशानी को देखते हुए दैनिक नवज्योति संवाददाता द्वारा इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित करवाया था। खबर का असर देखने को मिला की नगर पालिका द्वारा उक्त सीसी सड़क का मलबा हटाकर निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया है।</p>
<p><strong>पाठकों ने कहा थैंक यू नवज्योति </strong><br />नवज्योति अखबार द्वारा जनता से जुडी इस समस्या को प्रमुखता से उठाने के लिए मोहल्लेवासी श्रीानाथ शर्मा, अंकिश तिवारी, महावीर सैनी, राकेश शास्त्री, सत्यप्रकाश पोटरव संतोष शर्मा सहित कई नगरवासियों ने नवज्योति को धन्यवाद दिया है। कहा है कि नवज्योति अखबार सदैव जनता से जुडी समस्याओं को प्रमुखता से उठाता रहा है। आगे भी नवज्योति जनता के दुख दर्द की आवाज को अपने अंक में प्रमुखता से स्थान देकर समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।   </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Jan 2025 13:29:58 +0530</pubDate>
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                <title>हमारी सरकार में शुरू स्वास्थ्य प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने से जनता को मिलेगी सहूलियत: गहलोत</title>
                                    <description><![CDATA[गहलोत ने कहा है कि हमारी सरकार के दौरान राजस्थान को स्वास्थ्य सुविधाओं में मॉडल स्टेट बनाने का काम प्राथमिकता पर रहा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/gehlot-the-public-will-get-convenience-by-taking-forward-the/article-84193"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/ashok-gehlot.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उनकी सरकार के समय शुरू हुए स्वास्थ्य प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने के लिए भजनलाल सरकार से अपील की है।</p>
<p>गहलोत ने कहा है कि हमारी सरकार के दौरान राजस्थान को स्वास्थ्य सुविधाओं में मॉडल स्टेट बनाने का काम प्राथमिकता पर रहा। जयपुर के शास्त्री नगर स्थित आरयूएचएस कॉलेज ऑफ डेंटल साइंस का मैंने दौरा किया तो इसकी स्थिति काफी चिंताजनक लगी। इसकी स्थिति को सुधारने के लिए हमने बजट में इस डेंटल कॉलेज के लिए विशेष फंड की घोषणा की। इस घोषणा पर डॉक्टर्स की सलाह के मुताबिक संसाधन डेंटल कॉलेज को दिए गए और अब इसका एक नया स्वरूप जनता के लिए समर्पित किए जाने के लिए तैयार है। मुझे जानकारी मिली है कि डेंटल कॉलेज के इस नए रूप को देखकर वहां के स्टूडेंट्स, फैकल्टी मेंबर्स, डॉक्टर्स एवं पूरे स्टाफ में भी खुशी का माहौल है। मैं आशा करता हूं कि हमारी सरकार के दौरान शुरू किए गए स्वास्थ्य विभाग के प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाया जाएगा और जनता के लिए इससे अधिक से अधिक सहूलियत मिलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jul 2024 18:51:21 +0530</pubDate>
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