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                <title>this year - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title> मेडिकल कॉलेज में हुआ साल का पहला देहदान</title>
                                    <description><![CDATA[मेडिकल कॉलेज में शनिवार सुबह इस साल का पहला देहदान हुआ। कॉलेज में अब तक कुल 38 देहदान हो चुके हैं । ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-first-body-donation-of-the-year-took-place-in-the-medical-college/article-11315"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/medical-college-dehdaan-kota.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। मेडिकल कॉलेज में शनिवार सुबह इस साल का पहला देहदान हुआ। कॉलेज में अब तक कुल 38 देहदान हो चुके हैं । <br />बल्लभ बाड़ी निवासी दिलीप जैन ने बताया कि उनके 78 वर्षीय पिता राजकुमार जैन काफी समय से बीमार चल रहे थे । 4 दिन पहले उनकी तबीयत अचानक ज्यादा खराब हुई। उन्हें अस्पताल ले जाया गया । उस समय उन्होंने परिजनों से अपनी मौत के बाद देहदान कराने की इच्छा जाहिर की थी। दिलीप जैन ने बताया कि शुक्रवार शाम को उपचार के दौरान उनका निधन हो गया । इसके बाद उन्होंने मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रशासन से संपर्क किया और शनिवार  सुबह उनका देहदान मेडिकल कॉलेज में किया गया इससे पहले उनके पिता की इच्छा अनुसार उनका नेत्रदान भी कराया गया । दिलीप जैन ने बताया कि वह मूल रूप से आसाम के रहने वाले हैं। उनका वहां व्यवसाय था उसके बाद वह रामगंजमंडी आ गए थे। वहां से पिछले कई सालों से कोटा में बल्लभ बाड़ी में रह रहे हैं । उनके बड़े भाई भागचंद जैन भी मंडी में रहते हैं ।<br /><br /> मेडिकल कॉलेज आॅटोनॉमी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रतिमा जायसवाल ने बताया कि राजकुमार जैन के परिजनों ने देहदान की प्रक्रिया को संपन्न कराया है। यह इस साल का पहला देहदान मेडिकल कॉलेज को प्राप्त हुआ है।  इसके साथ ही अब तक मेडिकल कॉलेज में कुल 38 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं । उन्होंने बताया कि कोरोना काल में कमेटी द्वारा शवों को नहीं लिया जा रहा था । इस कारण उस अवधि में देहदान में कमी आई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jun 2022 16:08:42 +0530</pubDate>
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                <title> ऑक्सीजन निर्भरता में चार दशक आगे पहुंचा कोटा</title>
                                    <description><![CDATA[ न्यू मेडिकल कॉलेज के अधीन अस्पतालों में 24 ऑक्सीजन प्लांट लगाएं जाने थे। इसमें से 15 ओवर हैंड हो चुके है। जबकि, 6  प्रक्रियाधीन है। साथ ही 3 नए ऑक्सीजन प्लांट और भी स्थापित किये जाने है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-reached-four-decades-ahead-in-oxygen-dependence/article-6178"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/cylinder.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । कोविड से हर वर्ग प्रभावित हुआ है, लेकिन इससे लाभ हुआ है। इससे सबसे अधिक लाभ चिकित्सा क्षेत्र में हुआ है। इसमें ऑक्सीजन की निर्भरता की स्थिति तो ऐसी है कि कोटा चार दशक आगे पहुंच गया है। न्यू मेडिकल कॉलेज के अधीन अस्पतालों में 24 आॅक्सीजन प्लांट लगाएं जाने थे। इसमें से 15 ओवर हैंड हो चुके है। जबकि, 6 भी प्रक्रियाधीन है। साथ ही 3 नए आॅक्सीजन प्लांट और भी स्थापित किये जाने है। खास बात ये है कि ये प्लांट इसी वर्ष बनकर तैयार हो जाएंगे। इनके बनने से ऑक्सीजन कभी आपूर्ति प्रभावित नही होगी। क्योंकि, इन प्लांटों से 3100 सिलेंडर प्रतिदिन का उत्पादन हो जाएगा। जबकि, यहां के अस्पतालों में प्रतिदिन एक हजार से भी कम सिलेंडर की खपत हो रही है। यानि, कोटा के पांच अस्पताल खपत से चार गुना उत्पादन करना शुरू कर देंगे। ऐसे में चिकित्सा विभाग की चिंता पूरी तरह से खत्म हो जाएगी।<br /><br /><strong>एमबीएस में सर्वाधिक प्लांट</strong><br />न्यू मेडिकल कॉलेज, एमबीएस, जेके लोन, सुपर स्पेशलिटी और रामपुरा सेटेलाइट में कुल 24 प्लांट स्थापित किये जाने है। इनमें सर्वाधिक एमबीएस में 8 स्थापित किये गए है। इसके बाद सुपर स्पेशलिटी में 6, जेके लोन 5,  मेडिकल कॉलेज 4 और रामपुरा सेटेलाइट में एक शामिल है। इनमें अधिकांश अस्पतालों में स्थापित हो चुके है। कुछ में स्थापित होना प्रस्तावित है। यहां भी तेज गति से कार्य संचालित है।<br /><br /><strong>पहली बार लगे आॅक्सीजन प्लांट</strong><br />आॅक्सीजन प्लांट लगाने का काम पिछले साल शुरू किया गया था। इनमें कुछ अस्पतालों में तो पहली बार प्लांट स्थापित किये है। जेके लोन और रामपुरा जिला अस्पताल में आॅक्सीजन प्लांट नही थे, कोविड के उपरांत यहां प्लांट स्थापित कर दिए गए है। ऐसे में ये भी आॅक्सीजन में आत्मनिर्भर हो गए है। इसके साथ ही मेडिकल कॉलेज, सुपर स्पेशिलिटी और एमबीएस में प्लांटों की संख्या चार गुना तक बढ़ा दी गई है। ऐसा पिछले सालों में ही हुआ है। हालांकि, इससे पूर्व कभी आॅक्सीजन की जरूरत नही पड़ी थी। क्योंकि, कोविड में इसकी अधिक उपयोगिता रही थी।<br /><br /><strong>कहां कितने प्लांट</strong><br />कुल 24<br />एमबीएस 8<br />जेकेलोन 5<br />एसएसबी 6<br />मेडिकल कॉलेज 4<br />रामपुरा अस्पताल 1<br /><br /> <strong> इनका कहना है।</strong><br />ये सही है कि चिकित्सा क्षेत्र में बुनियादी सुविधाएं विकसित हुई है। इनमें आॅक्सीजन भी प्रमुख है।<br />- डॉ विजय सरदाना, प्राचार्य, न्यू मेडिकल कॉलेज,</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Mar 2022 14:25:42 +0530</pubDate>
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