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                <title>असर खबर का - नहर की सुरक्षा दीवारों की मरम्मत का कार्य शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति द्वारा इस गंभीर लापरवाही के मुद्दे को प्रमुखता से तीन बार प्रकाशित करने के बाद विभाग की नींद टूटी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news--repair-work-begins-on-canal-s-protective-walls/article-148371"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/12200-x-60-px)-(2).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नान्ता क्षेत्र में चम्बल की बायीं मुख्य नहर (छटउ) की टूटी सुरक्षा दीवार, जो पिछले 20 दिनों से राहगीरों के लिए 'मौत का मुहाना' बनी हुई थी, आखिरकार शनिवार से सुधारी जाने लगी है। दैनिक नवज्योति द्वारा इस गंभीर लापरवाही के मुद्दे को प्रमुखता से तीन बार प्रकाशित करने के बाद विभाग की नींद टूटी। शनिवार सुबह मौके पर ग्राउटिंग का काम शुरू होने से अब इस मार्ग से गुजरने वाले हजारों राहगीरों ने राहत की सांस ली है।</p>
<p><strong>सीएड़ी प्रशासन ने सड़क बन्द करवाई</strong><br />सीएड़ी प्रशासन द्वारा सड़क को बँद करवा दिया गया है। नान्ता पुलिया से सगस जी मन्दिर तक का रास्ता पुरी तरह बेरिकेट्स लगाकर बन्द कर दिया है। जिस जगह ज्यादा सड़क नहर की दिवार गिरी है वहां पहले भी दीवार गिर चुकी थी जिसके बाद आरयूआईडीपी द्वारा उपर से ही नयी दीवार बनाने के कारण इस जगह सड़क सकड़ी हो गयी थी ऐसे में अब नीचे से दीवार बनवायी गयी हे जिससे यहां सड़क की चौड़ाई पहले जैसी हो जायेगी।</p>
<p><strong>हजारों भारी वाहनों का मार्ग</strong><br />यह रास्ता नान्ता सुखाड़िया, बुन्दी की और जाने के लिये सीधा और सुगम है। इस बीच यहां का रास्ता लगातार प्रयोग होता रहा, यहां से नगर निगम, क्रेशर के ट्रेक्टर ट्रालियां सहित भारी ट्रेलर तक लगातार गुजरते रहते है। गनीमत रही की कोई बड़ी दुर्घटना नहीं हुयी। राहगीर और स्थानीय लोग प्रशासन की इस अनदेखी यही प्रश्न कर रहे थे कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा था। शनिवार सुबह से शुरू हुए ग्राउटिंग के काम के बाद अब सड़क के इस धंसे हुए हिस्से के धंसने का खतरा कम होगा।</p>
<p><strong>नवज्योति ने उठाई आवाज, तब हरकत में आया तंत्र</strong><br />करीब तीन सप्ताह पहले सोमवार की रात को नहर की दीवार ढह गई थी, जिससे सड़क का हिस्सा पूरी तरह जानलेवा हो गया था। स्थानीय लोगों ने पुलिस और सीएडी अधिकारियों को तुरंत सूचना दी, लेकिन 20 दिनों तक आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला। दैनिक नवज्योति ने नहर की सुरक्षा दीवार देर रात टूटी, उसके बाद 11 मार्च को जिन्दगी की सुरक्षा झाड़ टीन से व तीसरी बार 14 मार्च को यह तो सरासर लापरवाही है शीर्षक से सुरक्षा के मुद्दे को प्रकाशित कर प्रशासन की संवेदनहीनता और झाड़ियों-कांटों के सहारे की जा रही 'अस्थाई सुरक्षा' की पोल खोली। खबर का असर यह हुआ कि विभाग को अंततः काम शुरू करना पड़ा।</p>
<p>दैनिक नवज्योति ने जिस तरह इस मुद्दे को बार-बार उठाया, उसी का परिणाम है कि आज यहाँ काम शुरू हुआ है। वरना अधिकारी तो इसे मिट्टी के कट्टों के और झाड़ के भरोसे ही छोड़ चुके थे। <br /><strong>- नितिन नान्ता, अध्यक्ष ट्रेचिंग ग्राउण्ड़ हटाओं संघर्ष समिति</strong></p>
<p>दीवार नीचे से ही उठाई गई है। काम में समय लगेगा। अभी नहर बंद है जितना हो सकें मरम्मत का काम पूरा किया जाएगा। पहले अन्य विभागों से कहा गया था लेकिन अब काम सीएड़ी ही करवा रहा है।<br /><strong>- अरविंद कुमार, अधिशाषी अभियंता, CAD कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 12:23:27 +0530</pubDate>
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                <title>यह तो सरासर लापरवाही है, 5 दिनों से टूटी पड़ी नहर की दीवार             </title>
                                    <description><![CDATA[प्रशासनिक स्तर की लापरवाही के मुद्दे पर स्थानीय लोगों में चिंता और नाराजगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/this-is-sheer-negligence%E2%80%94the-canal-wall-has-been-broken-for-five-days/article-146497"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(1)17.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । सरकारी तंत्र के हाकमों को आम जनता की जान की कितनी फिक्र होती है, इसका ताजा उदाहरण नान्ता रोड़ पर नहर की टूटी दीवारों को देखने से मिल जायेगा। दरअसल सोमवार रात को चम्बल की बायीं मुख्य नहर की दीवार गिरने से सड़क का रास्ता पुरी तरह जानलेवा हो गया था। मामले में प्रशासनिक तंत्र की गंभीर लापरवाही व संवेदनहीनता सामने आई है। यहां पर आम वाहन चालकों की सुरक्षा के लिये कोई ठोस वयवस्था अभी तक नही की गयी है। घटना की रात ही सूचना मौके से ही पुलिस कन्ट्रोल रूम व स्थानीय थाने व सीएडी प्रशासन को दी गयी थी । देर रात मौके पर हमारे प्रतिनिधी द्वारा एक घंटे रुकने के बाद क्षेत्र के जवानों ने दो अस्थायी बैरिकेट़स लगाये और अगले दिन दीवार के पास सुरक्षित क्षेत्र बनाने का आश्वासन दिया।</p>
<p><strong>युवक ने कहा अब किसी और को नहीं गिरने दूंगा</strong><br />उस रात हादसे में बाल बाल बचे युवक ने कहा मै यहां चापाई लगा कर बैठूंगा पर किसी को इस नहर मे नही गिरने दूंगा सोमवार की रात जानलेवा हादसे का शिकार होने बचे व्यक्ति ने बताय कि अब जब भी यहा से गुजरता हु तो डर लगता है। मेरी अपील है कि प्रशासन ठीक करवाये या फिर मुझे कहदे मै कम से कम रात के समय तो यहाँ चारपाई लगा कर बैठ ही सकता हूँ। आखिर हमें तो फिक्र करनी ही होगी।</p>
<p><strong>खतरा ज्यों का त्यों</strong><br />तीन दिन बीत जाने के बाद भी दीवार केआसपास स्थायी सुरक्षा उपाय नहीं किए गए। सीएडी अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से मुंह फेरते दिखे। अगले दिन मामले की सूचना एसएचओ कौशल्या गालव को भी दी गई, जिन्होंने सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात कही, लेकिन शुक्रवार रात तक मौके पर सीएडी के जिम्मेदार अधिकारियों ने कोई ठोस कदम उठाया। हालांकि गुरूवार को दिवार के खुले हिस्से पर झाड़ियां जरूर लगा दी ।</p>
<p><strong>बोले थे मिट्टी के कट्टे लगवा रहे</strong><br /> 5 दिन से खुला पड़ा मौत का मुहाना स्थानीय लोगों ने अधिकारियों से संपर्क किया, जिनका कहना था कि जल्दी मिट्टी और कट्टे डालकर व्यवस्था कर दी जाएगी। हालांकि दो दिन गुजर जाने के बाद भी सुरक्षा के पुरे इंतजाम नहीं किया गया। इस प्रशासनिक अनदेखी से स्थानीय लोगों में रोष व्याप्त है। राहगीर और पड़ोसी भी प्रशासन की गंभीर लापरवाही पर ताना मारते हुए गुजरते हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि सरकारी सिस्टम में त्वरित कार्रवाई और जवाबदेही की कमी ने लोगों की सुरक्षा को गंभीर खतरे में डाल दिया है।</p>
<p> गुरुवार को ही हमने कांटे लगवाएं हैं। स्थाई रूप से इंतजाम नहीं कर सकते। लोगों को कोई नुकसान ना हो इसके लिए कार्रवाई करेंगे। अभी वापस से पानी की डिमाण्ड आयी है 3 दिन ओर लगेंगे दीवार नीचें से ही उठेगी अभी नहर बन्द नहीं कर सकते ।<br /><strong>- अरविन्द कुमार अधिशाषी अभियन्ता दायीं मुख्य नहर सीएडी कोटा</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Mar 2026 15:01:57 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>रावी-ब्यास जल ट्रिब्यूनल 5 से राजस्थान दौरे पर : इंदिरा गांधी नहर का करेगा निरीक्षण, केंद्र व राज्य सरकार के प्रतिनिधियों के साथ कानून विशेषज्ञ होंगे शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[रावी-ब्यास जल विवाद पर अहम मोड़—रावी-ब्यास जल ट्रिब्यूनल 5 से 8 मार्च तक राजस्थान दौरे पर रहेगा। न्यायमूर्ति विनीत सरन की अध्यक्षता में टीम बीकानेर से जैसलमेर तक इंदिरा गांधी नहर का निरीक्षण करेगी। 1981 समझौते के तहत 8.6 एमएएफ के बजाय 0.60 एमएएफ कम पानी मिलने का मुद्दा प्रमुख रहेगा। दौरे से राजस्थान अपनी भौगोलिक चुनौतियां मजबूती से रखेगा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/indira-gandhi-will-inspect-the-canal-from-ravi-beas-water-tribunal/article-145216"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/jal-sansadhan-vibhag.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जयपुर। रावी एवं ब्यास जल बंटवारे से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत रावी-ब्यास जल ट्रिब्यूनल 5 से 8 मार्च तक राजस्थान के दौरे पर रहेगा। ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष पूर्व सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश न्यायमूर्ति विनीत सरन के साथ न्यायाधीश सुमन श्याम और न्यायाधीश नवीन राव भी मौजूद रहेंगे। दौरे में केंद्र व राज्य सरकार के प्रतिनिधियों के साथ कानून विशेषज्ञ शामिल होंगे। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के भी कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ट्रिब्यूनल बीकानेर में आरडी 507 से इंदिरा गांधी नहर के निरीक्षण के साथ दौरे की शुरुआत करेगा। 6 मार्च को कोलायत क्षेत्र में फव्वारा पद्धति के कमांड एरिया और 1254 आरडी हेड का निरीक्षण किया जाएगा। 7 मार्च को जैसलमेर के मोहनगढ़ में आरडी 1458 की टेल तक दौरा प्रस्तावित है। टीम तनोट माता मंदिर भी जाएगी। उल्लेखनीय है कि 31 दिसंबर 1981 के समझौते के अनुसार राजस्थान को 8.6 एमएएफ पानी मिलना था, जबकि वर्तमान में करीब 0.60 एमएएफ कम मिल रहा है। इस दौरे से राजस्थान अपनी भौगोलिक परिस्थितियों को प्रभावी ढंग से रख सकेगा।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Mar 2026 10:38:53 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का - नहर में बढ़ाया जलप्रवाह, होने लगी मॉनिटरिंग, टेल क्षेत्र तक पानी पहुंचाने में जुटे अधिकारी</title>
                                    <description><![CDATA[अधिकारियों ने मौके पर जाकर जलप्रवाह की निगरानी शुरू कर दी है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news----water-flow-in-the-canal-has-increased--monitoring-has-begun--and-officials-are-working-to-deliver-water-to-the-tail-end/article-132895"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/11-(700-x-400-px)-(16).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। रबी सीजन की फसलों में सिंचाई के लिए पानी की डिमांड होने लगी है। वहीं गेहंू की बुवाई भी गति पकड़ने लगी है। इस कारण खेतों में नहरी पानी की डिमांड होने लगी है। ऐसे में सीएडी प्रशासन ने कोटा बैराज की दायीं नहर में जलप्रवाह बढ़ा दिया है। इसके अलावा विभागीय अधिकारी टेल क्षेत्र तक पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने में जुट गए हैं, ताकि रबी फसलों विशेषकर सरसों, चने व गेहूं को समय पर सिंचाई की सुविधा मिल सके। पूर्व में दायीं नहर में 2550 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था। मंगलवार को जलप्रवाह की मात्रा बढ़ाकर 4050 क्यूसेक कर दी गई है। अधिकारियों की टीमें माइनरों और वितरिकाओं की लगातार मॉनिटरिंग कर रही हैं, ताकि बीच रास्ते में कहीं भी रिसाव, अवरोध या अघोषित कटान की स्थिति न बने।</p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला</strong><br />नहरों की मरम्मत और साफ-सफाई नहीं होने के सम्बंध में 12 नवंबर को दैनिक नवज्योति में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। इसमें बताया था कि मौसम साफ होने के बाद रबी फसलों की बुवाई का कार्य शुरू हो गया है। दायीं और बायीं नहर से जुड़ी वितरिकाएं कई जगह पर कचरे से अटी पड़ी हैं वही कुछ स्थानों से क्षतिग्रस्त भी हो रही है। पूर्व में इनकी साफ-सफाई और मरम्मत का कार्य किया गया था, लेकिन यह खानापूर्ति तक सीमित होने से टेल क्षेत्र में नहरी पानी पहुंचने में विलम्ब हो सकता है। हर साल जर्जर नहरी तंत्र के कारण टेल क्षेत्र के किसानों को नहरी पानी के लिए लम्बा इंतजार करना पड़ता है। इस साल भी क्षतिग्रस्त वितरिकाओं के कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसके बाद सीएडी अधिकारी के हरकत में आए और टेल क्षेत्र में नहरी पानी में जुट गए।</p>
<p><strong>जिले में गेहूं व सरसों की पैदावार ज्यादा</strong><br />कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार गेहूं की बुवाई के लिए खेतों में नमी होना जरूरी है। वर्तमान में गेहूं की फसल बुवाई हो रही है। इसलिए गेहूं की फसल को निर्धारित मात्रा में पानी देना जरूरी है। राजस्थान में रबी की फसल में सबसे ज्यादा गेहूं और सरसों की पैदावार की जाती है। गेहूं के लगातार बढ़ रहे भावों से अब इसकी खेती मुनाफा किसानों को दे रही है। इसलिए हर साल गेहूं का रकबा बढ़ता जा रहा है। इस कारण अधिकांश किसान गेहूं की बुवाई करना चाहते हैं। इसके अलावा सरसों और चना फसल के प्रति भी किसानों का रूझान बना हुआ है। इन फसलों के लिए पानी की दरकार बनी हुई है। </p>
<p><strong>क्षतिग्रस्त वितरिकाओं की करवाई मरम्मत</strong><br />मौसम खुलने के बाद रबी फसलों में सिंचाई के लिए पानी की मांग तेज हो गई है। इस समय गेहूं की फसल को पानी की ज्यादा जरूरत है। इसके लिए सीएडी विभाग की ओर से दायीं नहर में जलप्रवाह किया जा रहा है। इसके बावजूद टेल क्षेत्र में स्थित कई खेतों में पर्याप्त मात्रा में नहरी पानी नहीं पहुंच पा रहा था। गत दिनों सीएडी के अधिकारियों ने वितरिकाओं में आ रहे अवरोधों को हटा दिया है। वहीं क्षतिग्रस्त हो रही दीवारों की भी मरम्मत करवा दी है।  इसके बाद नहर में जलप्रवाह की मात्रा को बढ़ा दिया है। अब सीएडी के अधिकारियों ने मौके पर जाकर जलप्रवाह की निगरानी शुरू कर दी है। अधिकारियों की टीमें जलप्रवाह में बाधक बन रहे अवरोधों को हटाने में जुट गई है। </p>
<p>गेहूं और चने की फसल को इस समय पानी की सबसे ज्यादा जरूरत रहती है। पिछले सप्ताह पानी धीमा था, अब प्रवाह बढ़ने से फसल बच जाएगी।<br /><strong>- सुनील नागर, किसान</strong></p>
<p>टेल क्षेत्र में अक्सर पानी देरी से पहुंचता है, लेकिन इस बार अधिकारी लगातार नहर पर नजर रख रहे हैं। उम्मीद है कि बी में पानी की कमी नहीं होगी।<br /><strong>- रेखालाल गुर्जर, किसान</strong></p>
<p>रबी सीजन में सिंचाई की मांग बढ़ना स्वाभाविक है। हमने दायीं नहर का डिस्चार्ज बढ़ा दिया है और फील्ड टीम लगातार मॉनिटरिंग कर रही है। <br /><strong>- सागर कुमार, कनिष्ठ अभियंता, सीएडी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Nov 2025 12:48:45 +0530</pubDate>
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                <title>बिना सफाई कैसे पहुंचेगा टेल क्षेत्र तक पानी, हर साल मरम्मत व सफाई के नाम पर खानापूर्ति, दायीं नहर में 1050 क्यूसेक छोड़ा पानी</title>
                                    <description><![CDATA[लाखों रुपए खर्च कर जो पक्का कार्य करवाया गया, वह अभी से उखड़ने लग गया। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/how-will-water-reach-the-tail-end-without-cleaning--every-year--only-a-superficial-repair-and-cleaning-is-done--and-only-1050-cusecs-of-water-is-released-into-the-right-canal/article-132162"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/11120.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मौसम साफ होने के बाद रबी फसलों की बुवाई का कार्य शुरू हो गया है। हाड़ौती के किसान खेती के काम में जुट गए हैं। इसके चलते सीएडी प्रशासन ने मंगलवार को कोटा बैराज की दायीं नहर में जलप्रवाह शुरू कर दिया है। वहीं बायीं नहर में फिलहाल पानी नहीं छोड़ा गया है। दायीं और बायीं नहर से जुड़ी वितरिकाएं कई जगह पर कचरे से अटी पड़ी हैं वही कुछ स्थानों से क्षतिग्रस्त भी हो रही है। पूर्व में इनकी साफ-सफाई और मरम्मत का कार्य किया गया था, लेकिन यह खानापूर्ति तक सीमित होने से टेल क्षेत्र में नहरी पानी पहुंचने में विलम्ब हो सकता है। हर साल जर्जर नहरी तंत्र के कारण टेल क्षेत्र के किसानों को नहरी पानी के लिए लम्बा इंतजार करना पड़ता है। इस साल भी क्षतिग्रस्त वितरिकाओं के कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।</p>
<p><strong>पाटन ब्रांच की जर्जर हो रही स्थिति</strong><br />बायीं नहर से जुड़े केशवरायपाटन के सिंचित क्षेत्र के किसानों को उम्मीद थी कि नहरें पक्की होने के बाद सुविधाएं मिलेगी, लेकिन नहरों की ब्रांचों, वितरिकाओं व माइनरों सही ढंग से नहीं हो पाई है। किसान रोशनलाल और राजेन्द्र का कहना है कि पूर्व में नहरों के सुदृढ़ीकरण के दौरान सीएडी विभाग ने अलग-अलग हिस्सों में काम करवाया गया। संवेदक नहरों के पक्का करने के नाम पर लीपापोती कर चले गए। पाटन ब्रांच में नहरों के नालों के पास कच्ची जगह छोड़ दी गई। इस ब्रांच में अण्दपुरा नाले के पास कच्चा छोड़ दिया, जो कार्य किया वह निर्धारित मापदंड के अनुसार नहीं किया। लाखों रुपए खर्च कर जो पक्का कार्य करवाया गया, वह अभी से उखड़ने लग गया। </p>
<p><strong>खरपतवार रोक सकती है अमृत की राह</strong><br />अब तक टेल क्षेत्र में वितरिकाओं की साफ - सफाई का कार्य अधूरा पड़ा है, जिससे जल प्रवाह शुरू करने के बाद टेल क्षेत्र तक पानी पहुंचना मुश्किल लग रहा है। टेल के रामपुरा, जखाना, मंडित्या, छावनियां, बीचडी, हणुतीया आदि वितरिकाओं की हालत खराब है। सभी खरपतवार से भरी पड़ी है। हालांकि बरसात रुकने के बाद सीएडी विभाग ने समय रहते बूंदी ब्रांच सहित वितरिकाओं में मनरेगा के तहत श्रमिक लगाकर साफ-सफाई और जंगल कटिंग का कार्य शुरू कर दिया है, जिससे लोगों को समय पर टेल में पानी पहुंचने की उम्मीद दिखाई दी है, लेकिन अब मांग बढ़ने की संभावना बनी हुई है। सीएडी विभाग किसानों की मांग पर जल प्रवाह शुरू करता है तो टेल में पानी पहुंचना मुश्किल लग रहा है।</p>
<p><strong>हाड़ौती का नहरी तंत्र</strong><br />- 2.14 लाख हैक्टेयर जमीन सिंचित होती है हाड़ौती की<br />- 2.29 लाख हैक्टेयर जमीन सिंचित होती है मध्यप्रदेश की<br />- 29 हजार हैक्टेयर में लिफ्ट परियोजनाओं से होती है सिंचाई<br />- 6656 क्यूसेक दायीं मुख्य नहर की जल प्रवाह क्षमता<br />- 1500 क्यूसेक बायीं मुख्य नहर की जल प्रवाह क्षमता<br />- 03 लाख कोटा, बूंदी व बारां के किसान लाभान्वित</p>
<p><strong>दायीं नहर में छोड़ा पानी, बायीं में अभी इंतजार</strong><br />रबी सीजन के तहत अब खेतों में गेहूं की बुवाई का कार्य शुरू हो गया है। इस कारण सीएडी प्रशासन ने मंगलवार को दायीं नहर में जलप्रवाह शुरू कर दिया है। अभी नहर में 1050 क्यूसेक पानी की निकासी की जा रही है। अभी मध्यप्रदेश से नहरी पानी की डिमांड नहीं आई है। इसलिए यह पानी हाड़ौती के किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा। मध्यप्रदेश से डिमांड आने के बाद दायीं नहर में जलप्रवाह की मात्रा बढ़ाई जाएगी। वहीं अभी बायीं नहर में जलप्रवाह शुरू नहीं किया गया। इस समय बूंदी जिले में वितरिकाओं की मरम्मत और साफ-सफाई का कार्य चल रहा है। यदि समय रहते कार्य पूरा नहीं हुआ तो टेल क्षेत्र के किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा।</p>
<p>दायीं और बायीं नहर से जुड़ी वितरिकाएं कई जगह पर कचरे से अटी पड़ी हैं वही कुछ स्थानों से क्षतिग्रस्त भी हो रही है। हर साल जर्जर नहरी तंत्र के कारण टेल क्षेत्र के किसानों को नहरी पानी के लिए इंतजार करना पड़ता है। <br /><strong>- जगदीश कुमार, किसान नेता</strong></p>
<p>फिलहाल टेल में पानी की मांग नहीं है। नहर में जल प्रवाह शुरू करने से पूर्व वितरिकाओं और मुख्य केनाल में मनरेगा के श्रमिकों से साफ -सफाई और जंगल कटिंग कार्य करवाया जा रहा है। <br /><strong>- नाथूलाल, सहायक अभियंता, सीएडी </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Nov 2025 14:46:16 +0530</pubDate>
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                <title>सीएडी की नहर में दरारें, ग्रामीणों ने घटिया सामग्री का आरोप लगाया</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रामीणों ने उच्च स्तरीय जांच व दोषी ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/cracks-in-cad-canal--villagers-allege-use-of-substandard-materials/article-131421"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/ews-(8)3.png" alt=""></a><br /><p>नमाना।  नमाना क्षेत्र के सिलोर—कालपुरिया—साकड़दा गांवों से होकर गुजर रही सीएडी बाय-मुख्य नहर के निर्माण कार्य को लेकर किसानों व ग्रामीणों में तीखी नाराजगी है। स्थानीय किसानों शंकर सैन, दशरथ कुशवाह, विष्णु गुर्जर, सुरेन्द्र मेघवाल, आशिष सुमन, विनोद सुमन व फोरू प्रजापत ने आरोप लगाया कि नहर निर्माण में संबंधित ठेकेदारों ने घटिया सामग्री उपयोग की है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले साढ़े एक साल में हुए कार्य के पैनलों में जगह-जगह दरारें आ चुकी हैं। उन्होंने बताया कि पैनलों की ऊपरी सतह हटाकर नीचे से मिट्टी निकालने पर दरारें और अधिक स्पष्ट हो जाती हैं। ग्रामीणों ने उच्च स्तरीय जांच व दोषी ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।</p>
<p>ग्रामीणों द्वारा लगाया गया घटिया सामग्री का आरोप गलत है; विभाग अपना कार्य निष्ठा से कर रहा है और बरसात के कारण कुछ साधन स्थानों पर नहीं पहुँच पाए थे, किन्तु जो कमी है उसे शीघ्रता से सुधारा जाएगा। सीएडी डायरेक्ट मैनेजर सुब्बा रेड्डी ने भी घटिया सामग्री के आरोप को असत्य बताया और कहा कि पत्थर की डस्ट को एमसेंड बनाकर लगाने का प्रावधान है; जिन पैनलों को क्षति हुई है उन्हें नवंबर में रिपेयर कर दिया जाएगा।<br /><strong>-अरविंद कुमार मीणा, सीएडी अधीक्षण अभियंता।</strong></p>
<p>इनका कहना है सीएडी डायरेक्ट मैनेजर सुब्बा रेड्डी इन्होंने बताया कि घटिया सामग्री का आरोप गलत है, हम अपना कार्य कर रहे हैं, आगे से सुधार कर लिया जाएगा और जो यह पत्थर की डस्ट है, इसको एमसेंड बना कर इसको लगाने का प्रावधान भी है, और जिस जगह के पैनल डैमेज है उनको हम नवंबर के महीने में रिपेयर कर देंगे, आगे से सुधार कर लिया जाएगा।<br /><strong>-सुब्बा रेड्डी, मैनेजर, सीएडी डायरेक्ट।</strong></p>
<p>भाजपा के पूर्व मंडल उपाध्यक्ष धनराज सुमन ने भी कहा कि संबंधित ठेकेदार ने घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया है और मामला गंभीर है।उच्च स्तरीय जांच आवश्यक है।<br /><strong>-धनराज सुमन, पूर्व भाजपा के मंडल उपाध्यक्ष। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Nov 2025 16:47:01 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा उत्तर वार्ड 44 - टूटी सड़कें, जर्जर नहर से परेशान रहवासी, नहर में मगरमच्छ का खतरा </title>
                                    <description><![CDATA[बरसात में पानी का स्तर ऊपर आने से मगरमच्छ गलियों तक पहुंच सकते हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-north-ward-44---residents-troubled-by-broken-roads-and-dilapidated-canal--threat-of-crocodiles-in-the-canal/article-130831"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/_4500-px)-(1)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के नगर निगम कोटा उत्तर क्षेत्र के वार्ड 44 की स्थिति इन दिनों चिंताजनक बनी हुई है। वार्ड के निवासियों का कहना है कि तुल्लापुरा कॉलोनी से गुजरने वाली नहर पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। नहर की दीवारें काफी नीची हैं, जिससे आसपास रहने वाले लोगों के लिए हरदम खतरा बना रहता है। स्थानीय निवासियों ने बताया कि नहर में मगरमच्छ होने की भी पुष्टि हुई है, जिसके कारण बच्चे और बुजुर्ग नहर के किनारे जाने से डरते हैं। बरसात के मौसम में यह खतरा और भी बढ़ जाता है, क्योंकि पानी का स्तर ऊपर आने से मगरमच्छ गलियों तक पहुंच सकते हैं।</p>
<p><strong>स्थानीय निवासी की मांग</strong><br />तुलापुर कॉलोनी की नहर की दीवारों को ऊंचा किया जाए, उसकी नियमित सफाई करवाई जाए, और मगरमच्छ जैसे खतरनाक जीवों को सुरक्षित रूप से पकड़ा जाए। साथ ही रेलवे क्षेत्र में आने वाले इलाकों के विकास के लिए रेलवे विभाग और नगर निगम के बीच समन्वय स्थापित कर ठोस समाधान निकाला जाए। आशा करते हैं कि आने वाले दिनों में निगम प्रशासन वार्ड 44 की इन गंभीर समस्याओं की ओर ध्यान देगा, ताकि लोग सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण में रह सकें।</p>
<p><strong>वार्ड का एरिया</strong><br />न्यू रेल्वे कॉलोनी सरस्वती स्कूल टी.ए.कैम्प, रेल्वे अस्पताल, रेल्वे वर्कशॉप ग्राउण्ड, तुलापुरा का क्षेत्र शामिल है।</p>
<p>इस नहर की मरम्मत की मांग कई बार की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। जर्जर दीवारें किसी भी समय हादसे को जन्म दे सकती हैं। नहर के किनारे सुरक्षा रेलिंग भी नहीं हैं और जगह-जगह कचरा जमा है, जिससे दुर्गंध फैल रही है। इसी के साथ वार्ड में आवारा कुत्तों का आतंक भी लोगों की नींद उड़ा रहा है। आए दिन बच्चों और बुजुर्गों पर कुत्तों के हमले की घटनाएं सामने आ रही हैं। कई बार निगम प्रशासन को शिकायतें दी गईं, लेकिन कुत्तों को पकड़ने की कार्रवाई सिर्फ नाममात्र की होती है।<br /><strong>- सागर राजावत, वार्डवासी</strong></p>
<p>दूसरी बड़ी समस्या वार्ड में रेलवे क्षेत्र से जुड़ी है। वार्ड का एक बड़ा हिस्सा रेलवे के अधीन आने के कारण यहां पर नगर निगम द्वारा कई विकास कार्य नहीं हो पाते। बुनियादी सुविधाओं की कमी वार्डवासियों को लगातार परेशान कर रही है। पार्षद के अनुसार, रेलवे की जमीन पर किसी भी प्रकार का स्थायी कार्य करने की अनुमति नहीं मिलती, जिसके चलते नागरिकों की समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा।<br /><strong>- अब्दुल अजीज, वार्डवासी</strong></p>
<p>जब नवज्योति टीम ने वार्ड की समस्याओं के संदर्भ में वार्ड पार्षद नीरज कुमार मीणा से संपर्क करने का प्रयास किया, तो कई बार फोन करने के बावजूद उनका कोई जवाब नहीं आया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Oct 2025 14:56:53 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - नहर कट बंद, किसानों को मिली राहत</title>
                                    <description><![CDATA[नवज्योति ने इस समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किया था।  
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/effect-of-news---canal-cut-closed--farmers-got-relief/article-126200"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/untitled-design-(15)1.png" alt=""></a><br /><p>नमाना रोड। काफी दिनों से टूटी पड़ी नहर की दीवार को आखिरकार विभाग ने दुरुस्त कर किसानों को राहत दी। नहर में कट लगने से सैकड़ों बीघा धान की फसल खराब होने की आशंका बनी हुई थी। दैनिक नवज्योति ने इस समस्या को प्रमुखता से उठाते हुए 5 सितंबर के अंक में समाचार प्रकाशित किया था। खबर का असर हुआ और सीएडी विभाग ने त्वरित संज्ञान लेते हुए कोटा से पोकलैंड मशीन मंगवाई। रविवार को मौके पर पहुंची मशीन से झाड़ियां व बबूल डालकर कट को बड़ी मशक्कत से बंद किया गया। इससे किसानों की चिंताएं कम हुईं।</p>
<p><strong>किसानों ने जताया आभार</strong><br />मुख्य नहर दीवार के कट बंद होने पर क्षेत्र के किसान हेमंत मीणा, हरिराम मेघवाल, मुकेश मीणा आदि ने दैनिक नवज्योति द्वारा समस्या उठाने के लिए धन्यवाद व्यक्त किया है। </p>
<p><strong>अधिकारियों ने कही यह बात</strong><br />शिकायत मिलते ही कोटा से पोकलैंड मशीन मंगवाकर दीवार के कट को बंद किया गया। साथ ही तालेड़ा-बूंदी उपखंड की नहरों को नियंत्रित कर चलाया जा रहा है ताकि आबादी क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति न बने।<br /><strong>- अरविंद मीणा, अधिशासी अभियंता, सीएडी विभाग बूंदी।  </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Sep 2025 16:25:30 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - पंचायत समिति के अधिकारी ने टीम के साथ लिया नहर का जायजा</title>
                                    <description><![CDATA[गड्ढों में पानी कम भरा होने से इस समय डेम से पानी के साथ आई मछलियां की मौत होने लगी थी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/effect-of-the-news---panchayat-samiti-officer-inspected-the-canal-with-the-team/article-105713"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer-(2)64.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। क्षेत्र के दुगारी में आबादी से होकर गुजर रही केनाल नंबर एक में हो रहे गड्ढे व आवागमन में क्षतिग्रस्त सड़क की सुध लेने नैनवां पंचायत समिति के जिम्मेदार अधिकारी टीम के साथ बुधवार को पहुंचे है। मौके पर ग्रामीणों की समस्या का जायजा लेकर जल्द समस्या का समाधान का दिलवाने का आश्वासन दिया गया है। अब जाकर दुगारीवासियों को राहत मिलेगी। इस संबंध में दैनिक नवज्योति ने 26 फरवरी के अंक में केनाल में मछलियों के मरने से फैल रही बदबू... इस शीर्षक द्वारा प्रमुखता से खबर प्रकाशित करके जनता की समस्या को उजागर किया गया था। तब जाकर अधिकारी मौके पर पहुंचकर हालातों से रुबरु हुए है। जानकारी के अनुसार दुगारी कस्बे में कनकसागर डैम से सिंचाई के पानी के साथ निकल रही केनाल नंबर एक जगह-जगह से क्षतिग्रस्त होकर गहरे गड्ढे होने से आवागमन के पास सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो गई थी। गड्ढों में पानी कम भरा होने से इस समय डेम से पानी के साथ आई मछलियां की मौत होने लगी थी।  इन गड्ढों में मृत मछलियों से उठती दुर्गंध की समस्या हो रही थी। नवज्योति की खबर के बाद  बुधवार को नैनवां पंचायत समिति विकास अधिकारी नरेंद्र सिंह झाला सहित ग्राम विकास अधिकारी बाबूलाल कारपेंटर मौके पर पहुंचे। जहां पर ग्रामीणों ने गांव की समस्या से मौके पर ले जाकर अवगत करवाया। जिसे अधिकारी ने गंभीरता से लेते हुए जगह-जगह केनाल के गड्ढों में मृत मछलियों को हटाने को लेकर संबंधित विभागीय अधिकारी को लिखित पत्र देकर आमजनों की समस्या को अवगत करवाकर हटवाने के लिए लिखा गया है। आबादी में जहां-जहां क्षतिग्रस्त सड़कों में गहरे गड्ढे के रूके पानी की बदबू को दूर करने व आवागमन की समस्या को दूर करने को लेकर जल्द गड्ढों में झीकरा डालकर आवागमन की समस्या को दूर करने व लंबे समय से भरे गड्ढे के पानी से उठ रही दुर्गंध से राहत दिलाई जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Feb 2025 16:03:31 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का- मूण्डली माइनर में पहुंचा नहरी पानी, किसानों को अब मिली राहत </title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति की शुक्रवार को प्रकाशित समाचार के लिए सराहना भी की है, जो समय रहते उनकी समस्या का जल्द निराकरण हुआ है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/impact-of-the-news---canal-water-reached-mundli-minor--farmers-now-got-relief/article-105133"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer89.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। क्षेत्र में गोठड़ा केनाल की टेल क्षेत्र की मूण्डली माइनर में नहरी पानी टेल तक नहीं पहुंच रहा था। जिस पर क्षेत्रीय किसानों की समस्या को दैनिक नवज्योति ने गंभीरता से लेते हुए। किसानों की इस समस्या को दैनिक नवज्योति ने 21 फरवरी के अंक में टेल क्षेत्र में नहीं पहुंच रहा नहरी पानी... इस शीर्षक द्वारा प्रमुखता से खबर प्रकाशित किया था। इस समस्या को जलदाय विभाग के अधिकारियों ने सुध ली। जिस पर शुक्रवार को माइनर के टेल क्षेत्र में पानी पहुंचा तो क्षेत्रीय किसानों ने रबी फसलों की पिलाई करना शुरू कर दिया गया है। जिससे किसानों की राहत की सांस ली। जानकारी के अनुसार इस समय क्षेत्र में गोठड़ा बांध से मुख्य मूण्डली माइनर में नहरी पानी का प्रवाह हो रहा है। अब क्षेत्रीय किसान अपनी फसलों में नहरी पानी पहुंचाने में जूट गए है।</p>
<p>माइनर में पहले रात्रिकाल में ऊपर के किसान नहरी पानी लेना बंद कर देते थे, जो रात के समय माइनर में पानी आना शुरू हो जाता था। सुबह फिर ऊपरी किसान पानी लेने के कारण दिन के समय नहरी पानी कम हो जाता था। जिससे क्षेत्र में जरुरतमंद किसानों को पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा था। नहरी पानी पर निर्भर क्षेत्रीय किसानों का कहना था कि टेल क्षेत्र में नहरी पानी पहुंचने से राहत मिलने लगी है। उन्होंने दैनिक नवज्योति की शुक्रवार को प्रकाशित समाचार के लिए सराहना भी की है, जो समय रहते उनकी समस्या का जल्द निराकरण हुआ है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Feb 2025 15:31:31 +0530</pubDate>
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                <title>हर साल 70 से 80 लोगों की जान ले रही नहरें</title>
                                    <description><![CDATA[नहर  की चार दीवारी इतनी छोटी है वहां से कोई भी आसानी से नहर में उतर व कूद सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/canals-are-killing-70-to-80-people-every-year/article-100951"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/257rtrer-(1)20.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। <strong>केस- 1</strong> बोरखेड़ा थाना क्षेत्र में दो दिन पहले  छोटी नहर में एक युवक डूब गया था। सूचना पर नगर निगम के गोताखोरों की टीम ने मौके पर पहुंचकर उसे बाहर निकाला लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। </p>
<p><strong>केस- 2</strong> नांता थाना क्षेत्र में एकदिन पहले एक व्यक्ति के बांयी मुख्य नहर में डूबने की सूचना मिली थी।  सूचना  पर निगम के गोताखोरों की टीम मौकेपर पहुंची। काफी तलाश के बाद दो कि.मी. दूर युवक का शव मिला।</p>
<p><strong>केस- 3 </strong>नांता थाना क्षेत्र में ही रविवार को दो मजदूरों के नहर में डूबने की सूचना मिली थी। जिसमें एक युवक हाथ धोते समय नहर में गिर गया था। जिसे बचाने उतरा दूसरा युवक भी डूब गया। </p>
<p><strong>केस- 4 </strong>कुन्हाड़ी थाना क्षेत्र में एक दिन पहले बांयी मुख्य नहर में कूदे युवक का शव सोमवार को मिला।   जिसे निगम के गोताखोरों ने एक दिन पहले रात तक तलाश किया था। </p>
<p> ये तो उदाहरण मात्र हैं उस भयावह स्थिति को बताने के लिए जो नए साल के शुरुआती 12 दिन में ही हुई है। शहर के बीच से निकल रही नहर में डूबने व कूदकर खुदकुशी करने के मामले लगातार बढ़ते जा रहे है। नगर निगम से प्राप्त जानकारी के अनुसार  हर साल ऐसे करीब 70 से 80 मामले होते है। जिनमें लोगों के डूबने या कूदने पर उन्हें निकाला जाता  है।  डूबने वालों में से अधिकतर के शव ही निकलते है। जबकि समय रहते सूचना मिलने पर या मौके पर मौजूद लोगों द्वारा तुरंत कूदकर बचाने पर ही गिनती के लोगों को जीवित बाहर निकाला जाता  है।  शहर में नए साल के शुरुआत में ही बोरखेड़ा, कुन्हाड़ी, नांता समेत अन्य थाना क्षेत्रों में नहर में लोगों के डूबने की घटनाएÞं हो चुकी है। उसके बाद भी संबंधित विभाग,प्रशासन व पुलिस विभाग  की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही।</p>
<p><strong>आए दिन हो रही घटनाएं</strong><br />शहर के बीच से दांयी व बांयी मुख्य नहर निकल रही है। नांता, कुन्हाड़ी, बरखेड़ा, गुमानपुरा समेत कई थाना क्षेत्रों से निकल रही इस नहर की चार दीवारी जगह-जगह से टूटी हुई है। जहां से आए दिन लोगों के नहर  में गिरने या कूदने की घटनाएं  हो रही है। साथ ही जहां चार दीवारी सही भी है तो वहां उसकी ऊंचाई इतनी कम है कि आसानी से  लोग नहर में उतर रहे है। नहर में ढलान होने व पानी का बहाव अधिक होने पर तैरना जानने वाले तक डूब रहे है। गुमानपुरा सिंधी कॉलोनी में पहले नहर की दीवार काफी छोटी थी।  जिसे ऊंचा तो कर दिया लेकिन वह कई जगह से टूटी हुई है। जिससे वहां से किसी के भीनहर में गिरने की घटना हो सकती है। बोरखेड़ा माइनर कई जगह से टूटी हुई है। वहीं अधिकतर जगह पर नहर की चार दीवारी इतनी छोटी है वहां से कोई भी आसानी से नहर में उतर व कूद सकता है। </p>
<p><strong>हर साल 70 से 80 घटनाएं</strong><br />नगर निगम के गोताखोर विष्णु शृंगी ने बताया कि शहर के बीचसे निकल रही नहर व चम्बल नदी में डूबने व खुदकुशी करने की हर साल 70 से 80 घटनाएं होती है। जिनमें से अधिकतर के तो शव ही निकालते है। इस साल की शुरुआत में ही 12 दिन में  4 से 5 घटनाएं हो चुकी है। हालांकि कई लापरवाही से तो कई जान बूझकर जान गवां रहे है। श्रृंगी ने बताया कि  प्रशासन  को चाहिए नहरों की चार दीवारी को इतना ऊंचा तो बनाया जाए जिससे कोईउसमें कूद नहीं सके। साथ ही जहां टूटफूट हो रही है। वहां उन्हें समय पर मरम्मत करवाईजाए। जिससे किसी के गिरने की कोई घटना नहीं हो। पुलिस को चाहिए कि वह भी सख्ती करे। बड़ी घटना होने पर कुछ दिन तो सख्ती होती है उसके बाद फिर पुराने ढर्रे पर लौट आते है। किसी के डूबने पर उस परिवार की मनोदशा का अंदाजा लगाया जा सकता है। वहीं भरी सर्दी में नहर के ठंडे पानी में रहकर डूबने वालों को तलाश करना काफी कठिन काम है लेकिन निगम के गोताखोर हो या एसडीआरएफ के जवान वे अपने काम को बखूबी कर रहेहै। </p>
<p><strong>दो साल पहले होली पर हुआ हादसा तो बढ़ी थी सख्ती</strong><br /> शहर में वैसे तो नहर में डूबने की घटनाएं आए दिन हो रही है। कभी एक तो कभी दो लोग या तो हादसों के कारण नहर में डूब रहे हैं या फिर कई लोग जान बूझकर नहर में कूदकर आत्म हत्याएं कर रहे हैं। दो साल पहले कुन्हाड़ी थाना क्षेत्र में धुलंडी के दिन एक साथ नहर में तीन से चार जनों के डूबने की घटना हुई थी। उस घटना के बाद जिला कलक्टर व एसपी ने सख्ती की थी। जिसके बाद नहर पर पुलिस का पहरा लगा दिया था। साथ ही लोगों के नहर पर नहाने पर भी पाबंदी लगा दी थी। इतना ही नहीं नहर पर नहाने वालों को पुलिस ने पकड़ा भी था। जिसका असर पिछले साल धुलंडी पर भी देखा गया था। लेकिन कुछ दिन की सख्ती के बाद फिर से मामला पुराने ढर्रे पर लौट आया। <br /><strong>- शैलेन्द्र तापड़िया निवासी  बजरंग नगर </strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />शहर के बीच विभिन्न क्षेत्रों से निकल रही नहर की चार दीवारी में टूट फूटकी समय-समय पर मरम्मत करवाईजाती है। पूर्व में कई जगह पर चार दीवारी को ऊंचा भी कराया गयाहै। फिर भी जहां अभी भी चार दीवारी छोटी है  या टूटी हुई है  बजट उपलब्ध होते ही उन्हें भी सही करवा दिया जाएगा। <strong>- लखनलाल, अधिशाषी अभियंता, सिचाई विभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Jan 2025 16:00:41 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>नहर कचरे और घास से अटी पड़ी, टेल तक कैसे पहुंचेगा पानी?</title>
                                    <description><![CDATA[एक वर्ष होने पर भी पुलिया पर रैम्प नहीं बनाया 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/the-canal-is-filled-with-garbage-and-grass--how-will-water-reach-the-tail/article-94893"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/6630400-sizee-(2)11.png" alt=""></a><br /><p>नमाना रोड। बाईं मुख्य नहर के हरीपुरा नंदपुरा डिस्ट्रीब्यूटर की सफाई के अभाव में कचरे का ढेर लगा हुआ है। नहर भी जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो रही है।  एक दो दिन बाद में नहर में जल प्रवाह शुरू होने वाला है और अभी तक नहर की पर्याप्त सफाई नहीं हुई है। ऐसे में टेल तक पानी पहुंचना संभव नहीं है। ग्रामीणों का आरोप है कि नरेगा के तहत नहर की सफाई के नाम पर औपचारिकता की गई और जेसीबी से सफाई की जा रही हैं। उससे सफाई के नाम पर खानापूर्ति हो रहीं हैं। अगर सफाई नहीं हुईं तो नहर ओवरफ्लो होने से खेतों में पानी भरने की आशंका बनीं हुई हैं जिससे किसानों को गेहूं की फसलों में नुकसान उठाना पड़ेगा और टेल क्षेत्र में समय पर पानी नहीं पहुंच पाएगा। किसानों को खेतों को रेलने में वैसे ही देरी हो रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि पक्की नहर के निर्माण में घटिया निर्माण जा रहा हैं। काली बजरी काम में ले रहे हैं जिसमें बजरी से ज्यादा मिट्टी हैं। ठेकेदार और सीएडी प्रशासन की मिलीभगत से घटिया सामग्री लगाई जा रहीं हैं। सरकार के बड़े बड़े वादे होते हैं। किसानों को फायदा पहुंचाने के लिए पक्की नहर का निर्माण किया जा रहा हैं। टेल क्षेत्र पर समय पर पानी पहुंच सके और पानी व्यर्थ न बहे लेकिन ठेकेदार निर्माण कार्य में खानापूर्ति कर देते हैं जिसकी वजह से निर्माण ज्यादा दिन नहीं चल पायेगा हैं और पूर्व में किया गया कार्य भी घटिया निर्माण के कारण उखड़ रहा हैं। नई पुलिया पर आवागमन सुचारू नहीं होने से क्षतिग्रस्त पुलिया से निकल रहे हैं। जिस पर कभी बड़ा हादसा होने की आशंका बनीं रहतीं हैं। एक वर्ष पूर्व में पुलिया निर्माण किया गया था लेकिन अभी तक पुलिया पर रैम्प नहीं बनाया गया हैं जिससे हर रोज 50 से ज्यादा किसानों को आवाजाही में दिक्कत हो रही है। </p>
<p><strong>नहरों की नहीं हो रही सफाई, टेल तक पानी पहुंचना होगा मुश्किल</strong><br />किसान दीनदयाल मीणा नंदपुरा ने बताया हैं कि जिम्मेदार व्यक्ति ध्यान नहीं दे रहा हैं और समय पर सफाई नहीं होने से हमारे टेल क्षेत्र पर पानी नहीं पहुंच पाता हैं जिससे हमें डीजल इंजन से पानी पिलाना पड़ता हैं।</p>
<p><strong>नहर निर्माण में घटिया सामग्री उपयोग का आरोप</strong><br /><strong>किसान ओम प्रकाश मीणा हरिपुरा </strong>ने बताया कि पक्की नहर का निर्माण किया लेकिन पुलिया पर एक साल होने पर रैम्प नहीं बनाया है। पुलिया टूटी हुई। इस वजह से ट्रैक्टर निकालने पर डर बना रहता हैं।</p>
<p><strong>भाजपा किसान मोर्चा मण्डल अध्यक्ष बलराम यादव</strong> ने बताया कि औंकारपुरा  पक्की नहर के निर्माण पर पक्के धोरों का निर्माण करना था लेकिन नाली रखकर खानापूर्ति कर रखीं हैं। बारिश में पुलिया तोड़कर बारिश का पानी ड्रेन में निकाला था जिसका निर्माण भी घटिया किया गया हैं।</p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />ठेकेदार से बात करके निर्माण कार्य सुधार करवाएंगे। नहर की  सफाई जल्द करवाई जाएगी। <br /><strong>- मनीष कुमार, एईएन सीएडी विभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 Nov 2024 16:18:03 +0530</pubDate>
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