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                <title>holi news - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>ऑर्गेनिक कलर्स से खेलें इको फ्रेंडली होली  </title>
                                    <description><![CDATA[होली के लिए ऑर्गेनिक रंगों को हम घर में ही बना सकते हैं। आइये जानते हैं कौन सा रंग कैसे बनता है?]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/play-eco-friendly-holi-with-organic-colors/article-6315"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/holi6_new.jpg" alt=""></a><br /><p>रसायन युक्त रंगों की बजाय ऑर्गेनिक कलर्स हमारी होली में चार चांद लगा सकते हैं। होली के लिए ऑर्गेनिक रंगों को हम घर में ही बना सकते हैं। आइये जानते हैं कौन सा रंग कैसे बनता है?<br /><br /><span style="color:#ffff00;background-color:#000000;"><strong>पीला रंग</strong></span>: थोड़ी सी हल्दी में बेसन मिलाकर ऑर्गेनिक पीला रंग पाएं। गीला पीला रंग बनाने के लिए पानी में हल्दी को घोल लें और बेधड़क होली खेलें। इसके अलावा आप पीले रंग के फूलों को सुखाकर भी पीला रंग पा सकते हैं। लेकिन एक बात का खास ख्याल रखें कि हल्दी ले रहे हैं तो रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली हल्दी के डिब्बे का इस्तेमाल न करें। इसके लिए नई, पैकेट बंद हल्दी का इस्तेमाल कर सकते हैं।</p>
<p><br /><span style="color:#ff0000;"><strong>सूखा लाल रंग</strong></span>: सूखा लाल गुलाल बाजार से खरीदने की बजाय लाल चंदन का इस्तेमाल करें। अड़हल के फूल सी रंगत भला सिंथेटिक रंगों में कहां मिलती है। अड़हल के फूलों को सुखाकर उसका पाउडर बनाए और देखें कि यह कैसी रंगत देता है। इसमें थोड़ा मैदा मिलाकर इसे ज्यादा भी किया जा सकता है। सूखे के अलावा गीला लाल रंग बनाने के लिए लाल चंदन के पाउडर को थोड़ी देर पानी में उबालने के बाद इस लाल रंग पानी से जमकर होली खेलें। पानी की फुहार से ही वातावरण सुगंधमय तो होगा ही। त्वचा पर कोई दाग धब्बा पड़ने का खतरा भी नहीं होगा। अनार के दानों को पानी में उबालकर भी लाल रंग बनाया जा सकता है। वैसे लाल रंग बेहतर स्वास्थ्य का भी परिचायक होता है यानी आप लाल रंग के जरिये दूसरों तक यह बेहतर स्वास्थ्य का संदेश पहुंचा सकते हैं। खैर! होली के मामले में लाल रंग सबसे चटखदार होता है। इसलिए ऑर्गेनिक होली खेलनी है तो इस रंग को जरूर आजमाएं।</p>
<p><br /><span style="color:#008000;"><strong>हरा रंग</strong> </span>: रंगीली होली में हरा रंग खास महत्व रखता है। वैसे यह रंग पर्यावरण का सूचक भी माना जाता है। आप मेंहदी या हिना पाउडर का इस्तेमाल कर सकते हैं। हिना पाउडर या मेहंदी को मैदे या आटे में मिलाकर होली खेलने के लिए हरा रंग तैयार कर सकते हैं। इसके अलावा पालक, धनिया, पुदीना और अन्य हरी सब्जियों को सुखाएं। इन्हें पीसकर हरा रंग बन जाता है।</p>
<p><br /><span style="color:#800000;"><span style="color:#ff6600;"><strong>मजेंटा</strong></span>:</span> मजेंटा रंग के लिए बीट रूट यानी चुकंदर इसके लिए बेस्ट रहता है। होली के कुछ दिनों पहले ही बीट रूट को सुखा लें। जब यह पूरी तरह सूख जाए तो इसे पीस लें। यह पाउडर की तरह बारीक हो जाएगा जो कि होली को रंगीन बनाने में काम आएगा। अगर हल्का मजेंटा पाना चाहते हैं तो थोड़ी और मेहनत करें यानी प्याज के छिलकों को आधा लीटर पानी में उबाल लें इससे हल्का मजेंटा रंग तैयार हो जाएगा।</p>
<p><br /><strong><span style="color:#993366;">जामुनी</span></strong> : जामुनी रंग पाने के लिए काले अंगूरों को या जामुन को उबाला जा सकता है। ध्यान रखें कि पानी ठंडा हो जाने के बाद ही रंगीन पानी का इस्तेमाल करें। कुल मिलाकर कहने की बात यह है कि इन रंगों को घर पर बनाकर आप बेहद खूबसूरत अंदाज में रंग रंगीली होली खेल सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक आॅर्गेनिक रंगों का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Mar 2022 15:16:42 +0530</pubDate>
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                <title>होली-धुलंडी पर एसएमएस सहित अन्य अस्पतालों में रहेंगे विशेष इंतजाम</title>
                                    <description><![CDATA[स्किन समस्या हो तो डॉक्टर से मिलें]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/special-arrangements-will-be-made-in-other-hospitals-including-sms-on-holi-dhulandi--additional-arrangements-for-drinking-water/article-6293"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/holi-1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। होली और धुलंडी पर शहर के सवाई मानसिंह अस्पताल में इलाज की विशेष व्यवस्था की गई है। अधीक्षक डॉ. विनय मल्होत्रा के अनुसार होली के हुड़दंग में घायल होकर अस्पताल पहुंचने वालों के लिए ट्रोमा सेंटर में न्यूरो सर्जन, आॅर्थोपेडिशियन, जनरल सर्जन, एनेस्थिसिया विभाग के चिकित्सकों की अतिरिक्त व्यवस्थाएं की है। इमरजेंसी में भी नेत्र रोग विशेषज्ञ, चर्म रोग विशेषज्ञ सहित अन्य चिकित्सकों की भी अतिरिक्त व्यवस्थाएं रहेंगी। आपातकालीन ईकाई और इंडोर में पर्याप्त संख्या में नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ की ड्यूटी लगाई है। जयपुरिया, कांवटिया, बनीपार्क एवं सेठी कॉलोनी स्थित सरकारी अस्पतालों में भी आपातकालीन सुविधा के लिए अतिरिक्त चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ  की व्यवस्था भी की है। <br /><br /><strong>पेयजल के भी अतिरिक्त इंतजाम</strong><br />जलदाय विभाग ने धुलंडी पर शहर में पेयजल सप्लाई की अतिरिक्त व्यवस्था की है। बीसलपुर बांध से धुलंडी के दिन पांच करोड़ लीटर पानी अतिरिक्त सप्लाई होगी। अतिरिक्त मुख्य अभियंता मनीष बेनीवाल ने बताया कि अधिकारी-कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं कि वे फील्ड में मुस्तैद रहे। अधीक्षण अभियंता अजय सिंह राठौड़ ने बताया कि शहर में दोपहर 12.30 से शाम 4 बजे के बीच एक घंटा अलग अलग एरिया में पानी की अतिरिक्त सप्लाई होगी। <br /><br /><strong>स्किन समस्या हो तो डॉक्टर से मिलें</strong><br />होली पर कैमिकलयुक्त रंग परेशानी बन जाते हैं। खासतौर पर उन लोगों के लिए जिन्हें किसी तरह की एलर्जी है। ऐसे में जरूरी है कि त्योहार पर हम रंग गुलाल लगाएं तो सही लेकिन एहतियात भी बरतें। स्किन से जुड़ी समस्या हो तो तुरंत चिकित्सक को दिखाएं। सीनियर डर्मेटॉलोजिस्ट डॉ. अतुल जैन का कहना है कि होली खेलने से पहले मॉश्चराइजर/नारियल तेल और सनस्क्रीम लगानी चाहिए। सनग्लासेज का इस्तेमाल करे। मणिपाल हॉस्पिटल के कंसलटेंट प्लास्टिक और कॉस्मेटिक सर्जरी डॉ. त्रिवेणी ढ़ाका ने बताया कि होली पर अस्थमा व एलर्जी से पीड़ित मरीज हर्बल और नेचुरल कलर का इस्तेमाल करें। श्वसन रोग विभाग डॉ. नलिन जोशी ने बताया कि होली में केमिकल युक्त रंगों के कारण अस्थमा व एलर्जी के मरीजों को विशेष सावधानियां बरतनी चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Mar 2022 11:59:23 +0530</pubDate>
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                <title>प्रथम पूज्य के मंदिरों में हुआ फागोत्सव: मोतीडूंगरी गणेश मंदिर सहित अन्य मंदिरों में भी हुए आयोजन</title>
                                    <description><![CDATA[भगवान ने जयपुरी साफा और अंगरखा धारण किया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/fagotsav-took-place-in-the-temples-of-the-first-worshiped--events-were-held-in-other-temples-including-motidungri-ganesh-temple/article-6291"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/ganesh_new.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। शहर के सभी मंदिरों में बुधवार को सतरंगी गुलाल और पुष्पों भक्तों ने जमकर होली खेली। मोती डूंगरी गणेश मंदिर में महंत कैलाश शर्मा के सानिध्य में शाम पांच बजे फागोत्सव संध्या की शुरुआत हुई। महंत ने बताया कि गुलाल और गुलाल गोटों से भक्तों ने होली खेली। भगवान ने जयपुरी साफा और अंगरखा धारण किया। शाम को सोहन लाल के सानिध्य में ढप, चंग कार्यक्रम हुआ। नहर के गणेशजी मंदिर में भगवान की नयनाभिराम फागुणियां झांकी सजाकर दोपहर 1 से रात्रि 11 बजे तक मंदिर महंत पं.जय शर्मा के सानिध्य में हुए ढप चंग पिचकारी विभिन्न प्रकार की गुलाल से फागुणियां झांकी सजाई गई। पद्मश्री गुलाबो सपेरा पार्टी ने भजनों पर नृत्य किया।  </p>
<p><br />चांदपोल बाजार स्थित ठिकाना मंदिर रामचन्द्रजी में महंत राधेश्याम तिवाड़ी के सानिध्य में ठाकुरजी ने सखी रूप धारण कर सीताजी की सखियों को रिझाया। अनेक फाग के पदों का गायन हुआ और फूल, गुलालों से होली खेली गई। भगवान का मनमोहक शृंगार आकर्षण का केन्द्र रहा।  </p>
<p><br />चांदपोल स्थित परकोटे वाले गणेश मंदिर में फागोत्सव पर युवाचार्य पं.अमित शर्मा महंत परिवार के सानिध्य में भगवान की विशेष पूजा अर्चना कर फाल्गुनी पोशाक धारण कर सतरंगी गुलाल और पुष्पों से शृंगार किया। महिला मंडल ने एक ही गणवेश में फागोत्सव में भाग लिया, फूलों की होली खेली और एक-दूसरे को गुलाल लगाई। फाल्गुनी भजनों का रस कलाकार बरसाते रहे। भगवान का पंचामृत अभिषेक कर फूल बंगला झांकी सजाई। भजन गायकों ने गणेश वंदना के साथ भजन सुनाए। श्रद्धालुओं ने पुष्प और इत्र वर्षा, गुलाल गोटे के साथ भगवान के साथ होली खेली। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Mar 2022 11:45:16 +0530</pubDate>
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                <title>गोविंद देव जी मंदिर में पुष्प फ़ाग</title>
                                    <description><![CDATA[आराध्य देव गोविंद देवजी मंदिर में छाया रंगों के पर्व होली का उल्लास  भक्तों के सिर चढ़कर बोला। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/flowers-at-govind-dev-ji-temple/article-6269"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/ho.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। आराध्य देव गोविंद देवजी मंदिर में छाया रंगों के पर्व होली का उल्लास  भक्तों के सिर चढ़कर बोला। मंदिर का चप्पा-चप्पा होली के उत्साह और उमंग से सराबोर नजर आया। सत्संग भवन में आयोजित पुष्प फाग हो या मंदिर के गर्भगृह में सजी रचना झांकी। हर ओर श्रद्धालु होली के रंग में रंगे नजर आए।</p>
<p> </p>
<p>पंडित मालीराम शास्त्री ने राधा-कृष्ण की लीला से जुड़े पदों का गायन कर वृंदावन का सा माहौल बना दिया। वहीं शेखावाटी के आधा दर्जन कलाकारों ने ढप और चंग की थाप पर ऐसी धमाल गाई कि उपस्थित श्रद्धालु अपने स्थान से खड़े होकर नाचने लगे। युवतियों और बच्चियों ने कृष्ण, राधा और गोपी के स्वरूप बनकर स्थापित कलाकारों की तरह नृत्य की मनोरम प्रस्तुतियां देकर सभी का दिल जीत लिया। मधुर भजनों की स्वर लहरियां बिखेरी। राधा-कृष्ण और गोपी के स्वरुपों ने भजन के भावों के अनुरूप नृत्य किया। राधा-कृष्ण के होली खेलने के भजनों पर टोकरी भर भर कर पुष्प वर्षा की गई। युवतियों और बच्चियों का श्रृंगार, केश विन्यास और कायिक, वाचिक, आंगिक अभिनय किसी दक्ष कलाकारों से भी कहीं ज्यादा प्रभावी रहा। अंतिम प्रस्तुतियां धमाल के नाम पर रही। राधा और कृष्ण के स्वरूपों ने ढप पर खड़े होकर नृत्य किया तो उपस्थित श्रद्धालु खड़े होकर मनोरम दृश्य को निहारने लगे।</p>
<p> </p>
<p>मंदिर महंत अंजन कुमार गोस्वामी और प्रबंधक मानस गोस्वामी ने अतिथियों का दुपट्टा पहनाकर स्वागत किया। बुधवार को होली पद भजनामृत वर्षा अनुष्ठान में दोहपर एक से अपराह्न साढ़े चार बजे तक कोलकाता के पं. मालीराम शर्मा भजनों की प्रस्तुतियां हुई|</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Mar 2022 16:18:07 +0530</pubDate>
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                <title>होली खेलूंगी श्याम संग, गोविंद माखण्यिो राधाजी ने रिझावणियो...</title>
                                    <description><![CDATA[गोविंददेवजी मंदिर के बाहर होलिका दहन रात्रि 9:05 बजे भद्रा पुच्छ में होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/i-will-play-holi-with-shyam--govind-makhanyo--radhaji-has-suggested----half-a-dozen-artists-of-shekhawati-rocked-the-beats-of-dhup-and-chang/article-6239"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/holo2.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। आराध्यदेव गोविंददेवजी मंदिर में पुष्प फाग का जोरदार रंग चढ़ रहा है। पिछले दो साल से कोविड के कारण श्रद्धालु इस रंग में रंगने से वंचित रहे, लेकिन अब रंगों का पर्व होली का उल्लास मंगलवार को भक्तों के दिलों दिमाग में छा गया है। मंदिर परिसर के सत्संग भवन में मंगलवार को पुष्प फाग हो या मंदिर के गर्भगृह में सजी रचना झांकी। हर तरफ श्रद्धालु होली की मस्ती व उल्लास में डूबे नजर आए।</p>
<p><br />कोलकाता से आए बाल व्यास श्रीकांत शर्मा ने लगातार दूसरे दिन राधा-कृष्ण की लीला से जुड़े पदों का गायन कर वृंदावन का सा माहौल बना दिया। उन्होंने तेरी बंसी पर जाऊ बलिहार रसिया, होली खेलूंगी श्याम संग आज, गोविंद माखण्यिो राधाजी ने रिझावणियो... जैसे मधुर भजन सुननाए। शेखावाटी के आधा दर्जन कलाकारों ने ढप और चंग की थाप पर ऐसी धमाल गाई कि श्रद्धालु खड़े होकर नृत्य करने लगे। युवतियों और बच्चियों ने कृष्ण-राधा और गोपियों के स्वरूप बनकर मनोरम प्रस्तुतियां दी। होली पद भजनामृत वर्षा अनुष्ठान में बुधवार दोपहर एक से शाम को चार बजे तक कोलकाता के पं. मालीराम शर्मा भजनों की प्रस्तुतियां देंगे।</p>
<p><br /><strong>भद्रा पुच्छ में होगा होलिका दहन</strong><br /> आर्ष दिग्दर्शक संस्था की ओर से गोविंददेवजी मंदिर के बाहर होलिका दहन रात्रि 9:05 बजे भद्रा पुच्छ में होगा। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए होली में लकड़ियों के बजाय गौकाष्ठ का उपयोग किया जाएगा। होलिका दहन से पूर्व ढप और चंग पर धमाल होगी। विभिन्न मंदिरों के संत-महंतों के सान्निध्य में प्रहलाद का पूजन होगा और फिर होलिका दहन होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Mar 2022 13:22:21 +0530</pubDate>
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