<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/government-college/tag-14698" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>government college - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/14698/rss</link>
                <description>government college RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>हाड़ौती के 19 कॉलेजों में 316 शिक्षकों के पद खाली, बारां गवर्नमेंट कॉलेज की अजीब स्थिति, 60% से ज्यादा पद रिक्त </title>
                                    <description><![CDATA[विद्यार्थी बोले-भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा उच्च शिक्षा विभाग ।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/316-teacher-positions-vacant-in-19-colleges-of-hadoti--dire-situation-at-baran-government-college--more-than-60--of-positions-vacant/article-131982"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/111-(20).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती के 19 राजकीय महाविद्यालयों में  300 से ज्यादा शिक्षकों के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। फैकल्टी के अभाव में शिक्षा से गुणवत्ता दूर होती जा रही है। हालात यह हैं, गणित से लेकर संस्कृत तक की कक्षाएं तक नहीं लग रही। नतीजन, विद्यार्थी बिना पढेÞ ही परीक्षा देने को मजबूर हो रहे हैं। जिसका असर गत वर्षों में परीक्षा परिणामों पर देखने को मिल चुका है। उच्च शिक्षा विभाग की लापरवाही के कारण कई विद्यार्थी बैक की मार झेल रहे हैं। इधर, शिक्षाविदें का कहना है कि जब पढ़ाने को शिक्षक ही नहीं होंगे तो विद्यार्थी में विषयों की समझ विकसित होना संभव नहीं हो पाएगा। गणित, राजनेतिक विज्ञान जैसे विषयों की कक्षाएं नहीं लगना चिंता का विषय है। </p>
<p><strong>संभाग में सबसे ज्यादा बूंदी गवर्नमेंट कॉलेज में पद खाली</strong><br />कोटा संभाग में सबसे ज्यादा शिक्षकों के पद राजकीय महाविद्यालय बूंदी में खाली हैं। यहां कुल 107 पद स्वीकृत हैं, जिसमें से मात्र 53 कार्यरत हैं। जबकि, 54 शिक्षकों के पद रिक्त पड़े हैं। जिससे मौजूद शिक्षकों पर वर्कलोड बढ़ रहा है। दो सेशनों के बच्चों को एक साथ बिठाकर पढ़ाने पढ़ता है। नतीजन, यूजीसी की गाइड लाइन के अनुसार, 40 बच्चों पर एक शिक्षक होना संभव नहीं हो पा रहा। शिक्षकों की आवाज क्लास में बैठे आखिरी बच्चों तक नहीं पहुंच पाती। जिससे उन्हें विषय के टॉपिक समझने में परेशानी होती है। </p>
<p><strong>बारां कॉलेज की अजीब स्थिति : 63 में 44 शिक्षक ही नहीं</strong><br />हाड़ौती में उच्च शिक्षा की सबसे ज्यादा स्थिति गवर्नमेंट  बारां कॉलेज की है। यहां शिक्षकों के 63 पद स्वीकृत है, जिसमें से 44 पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। इसके बावजूद उच्च शिक्षा विभाग प्रतिनियुक्ति निरस्त नहीं कर रहा। जबकि, बारां कॉलेज में आर्ट्स, साइंस व वाणिज्य संकाय संचालित हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान समस्याओं का सामना करना पड़ता है। वहीं, हर छह की जगह तीन माह में सेमेस्टर एग्जाम हो रहे हैं। लेकिन, शिक्षकों के अभाव में कोर्स ही पूरा नहीं हो पा रहा। </p>
<p><strong>महत्वपूर्ण विषयों की नहीं लगती कक्षाएं</strong><br />जानकारी के अनुसार, गवर्नमेंट बारां कॉलेज में गणित की शिक्षिका पिछले 2 साल से कोटा गवर्नमेंट साइंस कॉलेज में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं। जबकि, बारां कॉलेज में गणित का एक ही शिक्षक था, जिनके डेपुडेशन पर चले जाने से वह पद भी खाली हो गया। ऐसे में वहां गणित की कक्षाएं तक नहीं लगती। इसी तरह कोटा ग्रामीण के इटावा महाविद्यालय में लंबे वर्षों से 3 शिक्षक राजनेतिक विज्ञान, हिन्दी और संस्कृत के शिक्षक चुरू, मेडता सिटी और बस्सी जयपुर गवर्नमेंट कॉलेजों में सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में यहां इन विषयों की कक्षाएं नहीं लगती। ऐसे में रे-सेंटर के भरोसे रहना पड़ता है। </p>
<p><strong>6 दिन कोटा से इटावा-सांगोद में आती फैकल्टी तो लगती क्लास</strong><br />शिक्षण व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रत्येक जिला मुख्यालय  पर एक रे-सेंटर बनाया गया है। यह सेंटर जिले में मौजूद सभी गवर्नमेंट कॉलेजों में से एक महाविद्यालय को रे-सेंटर बनाया जाता है। जिससे अन्य राजकीय महाविद्यालय जुड़े रहते हैं।   ऐसे में जिन कॉलेजों में सब्जेक्ट टीचर नहीं होता वहां प्राचार्य के आग्रह पर एक माह में 6 दिन के लिए शिक्षक भेजा जाता है। लेकिन, कोटा के ग्रामीण क्षेत्र में स्थित इटावा, सांगोद कॉलेजों में तीन से चार महत्वपूर्ण विषयों की कक्षाएं नहीं लगती। ऐसे में 6-6 दिन के लिए यहां रे-सेंटर से शिक्षक भेजे  जाते हैं। नतीजन, अधिकांश कॉलेजों में शिक्षक नहीं है, ऐसे में रे-सेंटर पर शिक्षक भेजने का भार बढ़ जाता है। जिसकी वजह से संबंधित कॉलेजोें को शिक्षकों के लिए 2 से 3 महीने तक का इंतजार करना पड़ जाता है। </p>
<p><strong>गणित से राजनीतिक विज्ञान तक की कक्षाएं खाली</strong><br />कॉलेज शिक्षा सहायक निदेशक कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, गवर्नमेंट बारां कॉलेज में गणित की शिक्षिका पिछले 2 साल से कोटा गवर्नमेंट साइंस कॉलेज में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं। जबकि, बारां कॉलेज में गणित का एक ही शिक्षक था, जिनके डेपुडेशन पर चले जाने से वह पद भी खाली हो गया। ऐसे में वहां गणित की कक्षाएं तक नहीं लगती। इसी तरह कोटा ग्रामीण के इटावा महाविद्यालय में लंबे वर्षों से 3 शिक्षक राजनेतिक विज्ञान, हिन्दी और संस्कृत के शिक्षक चुरू, मेडता सिटी और बस्सी जयपुर गवर्नमेंट कॉलेजों में सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में यहां इन विषयों की कक्षाएं नहीं लगती। हालांकि, रे-सेंटर से 6 दिन के लिए कोटा से फेकल्टी बुलानी पड़ती है। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं विद्यार्थी</strong><br />कॉलेज में पिछले दो साल से राजनेतिक विज्ञान व हिन्दी की नियमित कक्षाएं नहीं लगी। सेमेस्टर प्रणाली के तहत हर तीन माह में एग्जाम हो रहे हैं। लेकिन, शिक्षकों के अभाव में न तो परीक्षा की तैयारी होती है और न ही सिलेबस समझाया जाता है। मजबूरन, ट्यूशन व वन वीक सीरीज का सहारा लेना पड़ रहा है। <br /><strong>- लोकेश मेहरा, प्रवीण छात्र, इटावा कॉलेज</strong></p>
<p>एडमिशन व एग्जाम फीस देने के बाद भी राजनेतिक विज्ञान जैसे मुख्य विषय पढ़ाने के लिए शिक्षक नहीं मिल रहे। बिना पढेÞ ही परीक्षा देने को मजबूर हो रहे हैं। परीक्षा में नम्बर कम आते हैं। शिक्षा अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा सैकंड सेमेस्टर के एग्जाम में भुगतना पड़ा है।  <br /><strong>- गौरव नायर, अंकित मीणा,  छात्र  सांगोद </strong></p>
<p>गवर्नमेंट आटर्Þ्स कॉलेज कोटा में शिक्षकों के 111 पद स्वीकृत हैं, जिसमें से 45 शिक्षकों के पद खाली चल रहे हैं। जबकि, यह कॉलेज संभाग का सबसे बड़ा महाविद्यालय है। इसके बावजूद विभाग द्वारा शिक्षकों के पदों को नहीं भरा जा रहा। जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। सरकार को जल्द से जल्द रिक्त पद भरकर शिक्षण व्यवस्था में सुधार करना चाहिए।<br /><strong>- रिद्धम शर्मा, छात्र नेता, गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज </strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />आरपीएससी के माध्यम से दिसम्बर में शिक्षक भर्ती परीक्षा है। जिसमें सफल अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के बाद सरकार द्वारा कॉलेजों में ज्वाइनिंग दी जाएगी। जिससे रिक्त पद भर सकेंगे। रही बात, महत्वपूर्ण विषयों की क्लास नहीं लगने की तो जिन महाविद्यालयों में यह समस्या है, वहां के प्राचार्य के आग्रह पर रे-सेंटर से 6-6 दिन के लिए शिक्षण कार्य के लिए शिक्षक लगा दिए जाते हैं।  सरकार की ओर से क्वालिटी एजुकेशन देने के प्रयास लगातार जारी है।<br /><strong>- डॉ. विजय पंचौली, क्षेत्रिय सहायक निदेशक, आयुक्तालय कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/316-teacher-positions-vacant-in-19-colleges-of-hadoti--dire-situation-at-baran-government-college--more-than-60--of-positions-vacant/article-131982</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/316-teacher-positions-vacant-in-19-colleges-of-hadoti--dire-situation-at-baran-government-college--more-than-60--of-positions-vacant/article-131982</guid>
                <pubDate>Mon, 10 Nov 2025 16:34:16 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-11/111-%2820%29.png"                         length="360570"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरकारी कॉलेज में नकबजनी करने वाले दो बदमाश गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[मालपुरा गेट थाना पुलिस ने शनिवार को सरकारी कॉलेज में नकबजनी कर सामान चोरी करने वाले दो बदमाशों को गिरफ्तार किया है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/two-miscreants-arrested-in-government-college-arrested/article-121769"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/untitled-design-(9)2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मालपुरा गेट थाना पुलिस ने शनिवार को सरकारी कॉलेज में नकबजनी कर सामान चोरी करने वाले दो बदमाशों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से चोरी की गई पानी की दो मोटर, नल और अन्य सामान बरामद किया है। आरोपित विशाल हिस्ट्रीशीटर है। पुलिस उपायुक्त पूर्व तेजस्वनी गौतम ने बताया कि परिवादी प्रोफेसर अनिल गुप्ता निवासी प्रताप नगर सांगानेर हाल प्राचार्य राजकीय कन्या महाविद्यालय सांगानेर ने रिपोर्ट दी कि 9 जुलाई की रात को कॉलेज परिसर से छात्रा वॉशरूम से स्टील की समस्त टोटियां, 11 जुलाई की शाम को पानी की मोटर चोरी हो गई। </p>
<p>इस रिपोर्ट पर टीम ने घटनास्थल के आस-पास के सीसीटीवी फुटेज खंगालकर आरोपित विशाल श्रीवास्तव निवासी सिन्दोली शाहजहांपुर यूपी हाल मुहाना और आकाश वर्मा निवासी सांगानेर को गिरफ्तार कर लिया। इन दोनों के खिलाफ पहले भी दर्जनों मुकदमे दर्ज हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/two-miscreants-arrested-in-government-college-arrested/article-121769</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/two-miscreants-arrested-in-government-college-arrested/article-121769</guid>
                <pubDate>Sun, 27 Jul 2025 13:30:33 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-07/untitled-design-%289%292.png"                         length="475069"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कॉलेज एडमिशन में लाडलियों को मिला रिजर्वेशन, ग्रामीण क्षेत्रों के कॉलेजों में होगा फायदा</title>
                                    <description><![CDATA[शहर में तीन गर्ल्स कॉलेज हैं लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में कन्या महाविद्यालय नहीं हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/laadlis-get-reservation-in-college-admission/article-116845"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/rtroer52.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। राजकीय महाविद्यालयों में एडमिशन लेने वाली छात्राओं के लिए खुशखबरी है। कॉलेज आयुक्तालय ने सह शिक्षा (कोएड) गवर्नमेंट कॉलेजों में 30 प्रतिशत सीटें बालिकाओें के लिए आरक्षित की है। ताकि, उच्च शिक्षा में छात्राओं की भागीदारी बढ़ सके। यह सुविधा बालिकाओं को इसी सत्र से मिलेगी। हालांकि, तीस प्रतिशत सीटें रिर्जव रखी जाने से छात्रों को सीट मिलने के अवसर कम हो जाएंगे। क्योंकि, बालिकाएं एडमिशन के लिए आवेदन राजकीय कन्या महाविद्यालय के साथ कोएड कॉलेजों में भी करती हैं। ऐसे में गर्ल्स कॉलेज में एडमिशन नहीं होने पर उनका रुख कोएड कॉलेजों में होगा और उनकी परसेंटेज लड़कों के मुकाबले अधिक होती है। ऐसे में नियमित प्रवेश पाने वाले विद्यार्थियों में छात्राओं की संख्या अधिक रह सकती है। </p>
<p><strong>ग्रामीण क्षेत्रों के कॉलेजों में होगा फायदा</strong><br />हाल ही में जारी हुए 12वीं बोर्ड के परिणाम में प्रथम श्रेणी से पास होने वाले विद्यार्थियों में लड़कियों की संख्या अधिक है। ऐसे में कॉलेजों में कटऑफ का लेवल हाई रहने से एडमिशन की मारामारी बनी रहेगी। शहर में तीन गर्ल्स कॉलेज हैं लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में कन्या महाविद्यालय नहीं हैं। ऐसे में राजकीय कोएड कॉलेजों में बालिकाओं के लिए सीट मिलने के अवसर बढ़ जाएंगे।</p>
<p><strong>सरकारी योजनाओं का मिलेगा लाभ</strong><br />कॉलेज शिक्षकों का कहना है, सह शिक्षा वाले सरकारी कॉलेजों में एडमिशन में बालिकाओं के लिए 30 प्रतिशत सीटें रिजर्व करने से उच्च शिक्षा में उनकी संख्या बढ़ेगी। शहर के मुकाबले ग्रामीण क्षेत्रों में गर्ल्स कॉलेज नहीं होने से अभिभावक छात्राओं को रेगुलर एडमिशन नहीं दिलाते। जिसकी वजह से वे सरकारी योजनाओं से वंचित रह जाती हैं। ऐसे में सरकार ने एडमिशन में तीस प्रतिशत सीटें आरक्षित कर देने से अभिभावकों का रुझान बढ़ेगा। बालिकाओं को आसानी से एडमिशन मिलने से उनकी संख्या में इजाफा होने के साथ स्कॉलरशिप सहित अन्य योजनाओं का लाभ मिल सकेगा।  </p>
<p><strong>शहरी कॉलेजों में हाई रहेगा कटऑफ का पारा </strong><br />जिले में राजकीय कन्या महाविद्यालय 6 हैं। इनमें दो इसी वर्ष नए खुले हैं। जिनमें कैथून व सुकेत शामिल हैं। नवीन कन्या महाविद्यालयों में इसी सत्र से एडमिशन दिए जाएंगे। हालांकि, कैथून, सुकेत व रामपुरा कॉलेज के मुकाबले जेडीबी आर्ट्स, साइंस और कॉमर्स गर्ल्स कॉलेज साधन संसाधनों में मजबूत स्थिति में है। ऐसे में छात्राओं इन कॉलेजों में एडमिशन लेने में प्राथमिकता रहेगी  लेकिन कटऑफ अधिक होने के कारण छात्राओं का रुख शहर के कोएड कॉलेजों की ओर बढ़ेगा। जिससे कटऑफ का लेवल अधिक  होने से छात्रों के लिए सीटें मिलना मुश्किल हो जाता है। क्योंकि,गर्ल्स कॉलेज में छात्र आवेदन नहीं कर सकते लेकिन छात्राएं कोएड कॉलेज में एडमिशन के लिए एप्लाई कर सकतीं हैं। ऐसे में छात्राओं के लिए 30 प्रतिशत सीटें आरक्षित होने से छात्रों के अवसर कम हो जाएंगे।  </p>
<p><strong>क्या कहती हैं छात्राएं</strong><br />कॉलेजों में सीटों की संख्या के मुकाबले दोगुने आवेदन आते हैं। परसेंटेज अधिक होने के बावजूद एडमिशन नहीं मिल पाता है। ऐसे में सरकार ने कुल सीटों में से 30 प्रतिशत सीटें छात्राओं के लिए आरक्षित कर देने से एडमिशन की राह आसान कर दी है। <br /><strong>- वैशाली नागर, छात्रा, आकशवाणी </strong></p>
<p>12वीं बोर्ड आर्ट्स में मेरी 85% बनी है। रिजल्ट अच्छा रहने से कटऑफ अधिक रहेगी। ऐसे में हमारे लिए तीस प्रतिशत सीटे आरक्षित रहने से रेगुलर एडमिशन मिलने की संभावना बढ़ गई है। <br /><strong>- प्रियंका गोचर, छात्रा बोरखेड़ा</strong></p>
<p>सरकार ने बालिका शिक्षा बढ़ाने की दिशा में सराहनीय कदम उठाया है। उच्च शिक्षा में छात्राओं को प्रोत्साहित करने के लिए राजकीय महाविद्यालयों (कोएड) में छात्राओं को प्रवेश में 30 प्रतिशत सीटें आरक्षित की गई है। इसका फायदा ग्रामीण अंचल के महाविद्यालयों में नजर आएगा। छात्राओं का रेगुलर एडमिशन होगा तो उन्हें सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल सकेगा।<br /><strong>- प्रो. रोशन भारती, प्रिंसिपल गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/laadlis-get-reservation-in-college-admission/article-116845</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/laadlis-get-reservation-in-college-admission/article-116845</guid>
                <pubDate>Mon, 09 Jun 2025 15:51:09 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-06/rtroer52.png"                         length="593273"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरकारी कॉलेजों में एमए नहीं, यूजी के बाद ही छूट रही बेटियों की पढ़ाई </title>
                                    <description><![CDATA[एमए के लिए 60 से 75 किमी भटकने को मजबूर विद्यार्थी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/no-ma-in-government-diploma--daughter-s-studies-are-being-discontinued-after-ug/article-115849"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtroer58.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित सरकारी कॉलेजों में 7 से 21 साल बाद भी एमए शुरू नहीं हो सका। यूजी के बाद विद्यार्थियों को पीजी करने के लिए 60 से 75 किमी दूर कोटा या झालावाड़ जाना पड़ता है। लेकिन, ग्रामीण परिवेक्ष में लड़कियां इतनी दूरी पर नहीं जा पाती। नतीजन, बीए के बाद उनकी पढ़ाई छूट जाती है। रही बात लड़कों की तो उन्हें शहरी कॉलेजों में सीमित सीटों के कारण पीजी में रेगुलर एडमिशन नहीं मिल पाता। नतीजन, हजारों विद्यार्थी पीजी (एमए) करने से वंचित रह जाते हैं। जबकि, इन महाविद्यालयों में विद्यार्थियों द्वारा एमए शुरू किए जाने की डिमांड कर चुके हैं, इसके बावजूद कॉलेजों में एमए शुरू नहीं हो पा रहा। दरअसल, कोटा ग्रमीण क्षेत्रों के इटावा, कनवास, रामगंजमंडी व सांगोद में राजकीय महाविद्यालय संचालित हुए करीब 7 से 21 साल हो चुके हैं। इसके बावजूद यहां पीजी संकाय शुरू नहीं किए गए। हालांकि, राजकीय महाविद्यालय सांगोद में पिछले सत्र में ही राजनेतिक विज्ञान में एमए शुरू हुई है। लेकिन, 6 अन्य विषयों में पीजी शुरू नहीं हो सकी। </p>
<p><strong>कोटा या झालावाड़ जाना मजबूरी </strong><br />रामगंजमंडी कॉलेज के छात्रों का कहना है कि वर्ष 1999 में महाविद्यालय खुला था। यहां दो संकाय  कला और वाणिज्य चलता है। दोनों ही यूजी स्तर पर है लेकिन पीजी नहीं खोला गया। इसके लिए विधायक, मंत्री व मुख्यमंत्री के नाम तक ज्ञापन दे चुके। धरना प्रदर्शन भी किए, आयुक्तालय कमीशनर के नाम पत्र भी लिखे लेकिन हर प्रयास विफल हो गए। ऐसे में बीए व बीकॉम करने के लिए विद्यार्थियों को राजगंजमंडी से कोटा 70 किमी तथा झालावाड़ 21 किमी जाने का ही विकल्प बचता है। ऐेसे में बड़ी संख्या में विद्यार्थी पीजी करने से वंचित रह जाते हैं। </p>
<p><strong>1999 के बाद से एमए, एमकॉम नहीं </strong><br />राजकीय महाविद्यालय रामगंजमंडी को शुरू हुए 21 साल बीत चुके हैं। इसके बावजूद यहां आर्ट्स व कॉमर्स में पीजी संकाय शुरू नहीं हो सका। जबकि, महाविद्यालय के छात्रों ने अनगिनत बार आयुक्तालय के नाम ज्ञापन देकर एमए शुरू करवाए जाने की मांग कर चुके हैं। इसके बावजूद 1999 के बाद से अब तक एमए व एमकॉम संचालित नहीं हो सका। जबकि, रामगंजमंडी कॉलेज विधान सभा क्षेत्र में बहुत बड़े एरिया को कवर करता है। छात्रों की अपेक्षा छात्राओं की पढ़ाई छूट जाती है। </p>
<p><strong>बीए के बाद पढ़ाई चौपट</strong><br />कॉलेज शिक्षकों का कहना है, रामगंजमंडी, कनवास, इटावा कॉलेजों में पीजी संकाय नहीं है। जबकि, इन महाविद्यालयों में यूजी में लड़कियों की संख्या अधिक होती है। ऐसे में बीए या बीकॉम करने के बाद लड़कियों का रामगंजमंडी, कनवास, इटावा व सांगोद से कोटा जाना आसान नहीं होता। चूंकि, ग्रामीण परिवेक्ष में अभिभावक भी 60 से 75 किमी दूर कोटा शहर के कॉलेजों में बेटियों को पीजी करने नहीं भेज पाते। नतीजन, यूजी के बाद उनकी पढ़ाई छूट जाती है। यदि, ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी कॉलेजों में ज्योग्राफी, इतिहास, होम साइंस, चित्रकला या उर्दू-संस्कृत में एमए संकाय शुरू किया जाए तो बड़ी संख्या में विद्यार्थी लाभांवित होंगे।</p>
<p><strong>शहरी कॉलेजों में सीट पाने की मारामारी</strong><br />ग्रामीण कॉलेजों में पीजी संकाय नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में विद्यार्थी शहरी कॉलेजों की ओर रुख करते हैं। लेकिन, यहां एमए की सीटें सीमित होने के कारण दाखिले को लेकर मारामारी की स्थिति बनी रहती है। ऐसे में रेगुलर एडमिशन से वंचित छात्रों को स्वयंपाठी विद्यार्थी के रूप में दाखिला लेना पड़ता है। वहीं, कई तो एमए ही नहीं कर पाते। हालात यह है, सबसे ज्यादा विद्यार्थी आर्ट्स के होते हैं और कला में पीजी दो ही कॉलेजों में होती है, जिनमें गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज कोटा और जेडीबी आर्ट्स कॉलेज शामिल हैं। लेकिन गर्ल्स कॉलेज में कुछ विषय वहां नहीं होने से वह भी गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज में आती हैं, ऐसे में लड़कों को सीट पाना और मुश्किल हो जाता है। </p>
<p><strong>90 गांवों को कवर करता कॉलेज</strong><br />महाविद्यालय में एमए शुरू किए जाने की सख्त आवश्यकता है। मंत्री से लेकर लोकसभा अध्यक्ष तक को ज्ञापन दे चुके हैं। आयुक्तालय को कई बार पत्र भेजे हैं। लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। जबकि, कॉलेज में अध्ययनरत विद्यार्थियों में छात्राओं की संख्या अधिक है। जिन्हें मजबूरी में बीए के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ती है। कनवास तहसील में 90 से ज्यादा गांव शामिल हैं। ऐेस में बड़ी संख्या में छात्राएं बीए तक की पढ़ाई तो कर लेती हैं लेकिन एमए की बारी आते ही पढ़ाई छूट जाती है। सरकार को छात्रहित में यहां पीजी संकाय शुरू करना चाहिए।<br /><strong>- अर्जुन खटीक, छात्रनेता राजकीय महाविद्यालय कनवास</strong></p>
<p><strong>क्या कहते हैं प्राचार्य</strong><br />राजकीय कनवास महाविद्यालय वर्ष 2018 में खुला था। तब से लेकर आज तक यहां एमए संकाय खुल नहीं सका। जबकि, इन 7 साल में कई बैच बीए पास आउट हो चुके हैं। एमए के लिए हर दिन डिमांड आती है, जिसे आयुक्तालय को भेज दिया जाता है। क्षेत्र में एमए संकाय खुलने की सख्त आवश्यकता है। पीजी नहीं होने के कारण बीए के बाद लड़कियों  की पढ़ाई छूट जाती है, क्योंकि वह 40 से 45 किमी दूर शहर नहीं जा पाती। हालांकि, हमने राजनेतिक विज्ञान व ज्योग्राफी में पीजी संकाय खोलने को लेकर आयुक्तालय को विद्यार्थियों की डिमांड भेजी है। नए सत्र से पीजी संकाय शुरू होने की उम्मीद है। <br /><strong>- प्रो. जयश्री राठौर, प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय कनवास</strong></p>
<p>हमारे कॉलेज में सत्र 2024-25 में पॉलिटिकल साइंस विषय में एमए शुरू हुआ है। जिसके प्रथम सेमेस्टर का एग्जाम भी हो चुका है। विद्यार्थियों ने अंग्रेजी में भी एमए शुरू किए जाने की मांग की है, उनके ज्ञापन को आयुक्तालय को प्रेषित कर दिया है। छात्रों ने ऊर्जा मंत्री को भी ज्ञापन दिया था। अभी यूजी में ज्योग्राफी, हिन्दी, संस्कृत, ऊर्द, लोकप्रशासन, चित्रकला व होम साइंस विषय संचालित हैं। इनमें से ज्योग्राफी में विद्यार्थियों की संख्या अधिक हैं। यदि, अन्य विषयों में भी एमए शुरू होता है तो ग्रामीण परिवेक्ष के हजारों विद्यार्थी लाभांवित होंगे। <br /><strong>- प्रो.अनिता वर्मा, प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय सांगोद</strong></p>
<p>संबंधित कॉलेजों से विद्यार्थियों की डिमांड आती है तो उसे आयुक्तालय को भेज दी जाती है। इसी के साथ पीजी संकाय खोले जाने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। सरकार हर साल कहीं न कहीं पीजी संकाय खोलती है। <br /><strong>- प्रो. विजय पंचौली, क्षेत्रीय सहायक निदेशक, आयुक्तालय</strong></p>
<p>इटावा क्षेत्र बहुत बड़ा है। यहां वर्ष 2018 में राजकीय महाविद्यालय खुला था, तब से अब तक एमए नहीं खुला। जबकि, सबसे ज्यादा डिमांड भूगोल विषय की है। ऐसे में बीए के बाद विद्यार्थी को एमए के लिए 70 से 80 किमी दूर कोटा शहर जाना पड़ता है। छात्रों से आने वाली डिमांड आयुक्तालय को प्रेषित कर दी जाती है। हाल ही में कॉलेज स्वयं की नई बिल्डिंग में शिफ्ट हुआ है। यहां कक्षा-कक्ष से लेकर फर्नीचर, लाइब्रेरी सहित अन्य सुविधाएं हैं। ऐसे मे उम्मीद है कि नए सत्र से पीजी संकाय की भी सौगात मिल जाए। <br /><strong>- डॉ. रामदेव मीणा, प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय इटावा</strong></p>
<p>रामगंजमंडी कॉलेज को खुले 21 साल हो चुके हैं। यहां यूजी में कला और वाणिज्य संकाय संचालित है। क्षेत्र का सबसे बड़ा कॉलेज होने के नाते यहां पीजी संकाय खोले जाने की सख्त आवश्यकता है। विद्यार्थियों की डिमांड आती है, जिसे आयुक्तालय को भेजते हैं लेकिन अब तक एमए व एमकॉम शुरू नहीं हो सका। वर्तमान में बीए फाइनल में 150 तथा बीकॉम में 100 विद्यार्थी हैं। पीजी नहीं होने से इन्हें कोटा या झालावाड़ जाना पड़ता है। कॉलेज में एमए व एमकॉम खुलना चाहिए। <br /><strong>- डॉ. संजय गुर्जर, प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय रामगंजमंडी </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/no-ma-in-government-diploma--daughter-s-studies-are-being-discontinued-after-ug/article-115849</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/no-ma-in-government-diploma--daughter-s-studies-are-being-discontinued-after-ug/article-115849</guid>
                <pubDate>Fri, 30 May 2025 15:19:59 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-05/rtroer58.png"                         length="650395"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सेमेस्टर बना जी का जंजाल, डबल फीस और परीक्षा बढ़ा रही दर्द </title>
                                    <description><![CDATA[शिक्षक बोले-सालभर परीक्षा फिर एडमिशन में ड्यूटी, कक्षाओं में पढ़ाएं कब?
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/semester-has-become-a-problem--double-fees-and-exams-are-increasing-the-pain/article-112754"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtrer-(1)9.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। उच्च शिक्षा में जिस उद्देश्य से राष्टÑीय शिक्षा नीति के तहत सेमेस्टर प्रणाली लागू की गई वो सरकारी मशीनरी की लचरता से जी-का जंजाल बन गई। राजकीय महाविद्यालयों में मानव व भौतिक संसाधनों की आवश्यकता पूरी किए बिना ही सेमेस्टर स्कीम थोप दी गई। जिससे न केवल उच्च शिक्षा बेपटरी हुई बल्कि विद्यार्थी मानसिक व आर्थिक बोझ तले दब गए। उच्च शिक्षा में सेमेस्टर स्कीम लॉन्च हुए दो साल से ज्यादा समय बीत चुका है लेकिन फायदा होने की जगह विद्यार्थियों के परेशानी का सबब बन गया। परीक्षाएं तीन-तीन महीने लेट होने लगी, जिसका असर रिजल्ट में देरी  के रूप में सामने आने लगा। हालात यह हैं, राजसेस व रेगुलर कॉलेजों में छात्रसंख्या  के मुकाबले भौतिक व मानव संसाधनों के अभाव के बीच सेमेस्टर ने उच्च शिक्षा का ढर्रा ही बिगाड़ रख दिया। बीए, बीएससी व बीकॉम में हजारों विद्यार्थी बेक  की मार झेल रहे हैं। तीन साल की ग्रेजुएशन डिग्री चार साल में भी पूरी नहीं हो पा रही। दैनिक नवज्योति ने गत वर्षों से सेमेस्टर स्कीम को अनुभव  कर रहे शिक्षकों व विद्यार्थियों से सुधारात्मक नतीजों पर बात की तो छात्रों का दर्द दिल से जुबां पर आ गया। पेश है रिपोर्ट के खास अंश...</p>
<p><strong>सुझाव : सेमेस्टर पर हो सेमीनार </strong><br />गवर्नमेंट कॉलेज कोटा के निवर्तमान छात्रसंघ अध्यक्ष आशीष मीणा का कहना है, 12वीं कक्षा पार कर प्रथम वर्ष में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थी सेमेस्टर से अनजान होते हैं, सभी नवप्रवेशित विद्यार्थियों को सेमेस्टर प्रणाली क्या है, सिलेबस व पढ़ाई की तैयारी, प्रेक्टिकल तथा मिर्ड टर्म कैसे होंगे, इसकी जानकारी के लिए शुरुआती स्तर पर ही सेमीनार आयोजित कर देनी चाहिए। </p>
<p><strong>कॉलेज स्तर पर हो काउंसलर नियुक्त</strong><br />एनईपी के तहत सेमेस्टर स्कीम के तहत मिर्ड टर्म की तैयारी, प्रेक्टिकल, असाइनमेंट, रिपोर्ट वर्क तैयार करने के तरीके सिखाए जाने तथा क्रेडिट सिस्टम समझाने के लिए कॉलेज स्तर पर काउंसलर्स की नियुक्ति की जानी चाहिए ताकि नवप्रेवेशित विद्यार्थी पहले दिन से ही एग्जाम पैटर्न व प्रक्रिया से रुबरू हो सके।</p>
<p><strong>3 साल की ग्रेजुएशन 4 साल में  </strong><br />राजकीय महाविद्यालयों के छात्रों का कहना है, सरकार कॉलेजों की जमीनी हकीकत से कोसों दूर है, पढ़ाने को शिक्षक नहीं, प्रेक्टिकल के लिए संसाधन नहीं। इसके बावजूद आनन-फानन में सेमेस्टर प्रणाली थोप दी गई। जिसका नकारात्मक प्रभाव कई रूपों में नजर आया। दिसम्बर में होने वाले प्रथम सेमेस्टर के एग्जाम तीन माह देरी से अप्रेल में हो रहे हैं। वहीं, द्वितीय सेमेस्टर जून की जगह अगले वर्ष सितम्बर में हो रही। छात्र प्रकाश कुमार झा, अक्षय मेहता का कहना है, यूजी प्रथम वर्ष के पहले सेमेस्टर का एग्जाम दिसम्बर 2024 में होना था, जो अप्रेल 2025 में हुए। इसी तरह द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षा जून में हो रही। जिसके परिणाम भी देरी से जारी हो रहे। इसकी वजह से 3 साल की ग्रेजुएशन की डिग्री पूरी होने में 4 साल लग रहे। </p>
<p><strong>डबल फीस का बोझ </strong><br />सेमेस्टर स्कीम का सबसे बड़ा नुकसान आर्थिक रूप से  हो रहा है। इस प्रणाली 6-6 माह में साल में दो बार एग्जाम हो रहे हैं, जिसकी फीस दो से ढाई हजार रुपए  के हिसाब से चार से पांच हजार रुपए प्रति स्टूडेंट्स से यूनिवर्सिटी वसूलती है। इसके अलावा बेक आने पर फिर से एग्जाम फीस, रिचेकिंग फीस से भी आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। जबकि, वार्षिक स्कीम में साल में एक बार पेपर और एक बार ही एग्जाम फीस देनी होती थी।  </p>
<p><strong>क्या कहते हैं विद्यार्थी  </strong><br />वर्ष 2023 से सेमेस्टर सिस्टम लागू हुआ लेकिन कॉलेजों में शिक्षकों की कमी पूरी नहीं की गई। कई विषयों की क्लासें नहीं लग पाती। ओल्ड स्कीम में साल में एक बार एग्जाम व एक बार ही एग्जाम फीस तथा समय पर सिलेबस पूरा हो जाता था लेकिन सेमेस्टर सिस्टम में सब दोगुना हो गई। परीक्षाओं के साथ परीणाम में भी अनावश्यक देरी से कॅरियर प्रभावित हो रहा है।<br /><strong>- सलोनी सेन, छात्रा, तृतीय वर्ष गवर्नमेंट कॉलेज</strong></p>
<p>कॉलेजों में मानव व भौतिक संसाधनों की कमी दूर करने के बजाए सेमेस्टर प्रणाली लागू कर देने से उच्च शिक्षा बेपटरी हो गई।  हालांकि क्रेडिट ट्रांसफर और एबीसी आईडी सिस्टम होने से कॉलेज बदलना या ब्रेक लेना आसान हो गया है और मोडूलर परीक्षाएं होने से छात्रों में स्ट्रेस भी कम रहता है। <br /><strong>- चित्रांक्षा कंवर, बीएससी थर्ड सेमेस्टर </strong></p>
<p>जिस उद्देश्य के साथ सेमेस्टर स्कीम लागू की गई, वह संसाधनों की कमी से पूरे नहीं हो पाए। सेमेस्टर एग्जाम तीन-तीन माह देरी से हो रहे। जिनके परिणाम भी देरी से आ रहे। जिसकी वजह से शैक्षणिक सत्र लेट होता है। बाद में यूनिवर्सिटी द्वारा विद्यार्थियों पर परीक्षा का दबाव डाला जाता है। उन्हें परीक्षा की तैयारी करने का समय नहीं दिया जाता। जिससे विद्यार्थी मानसिक तनाव से गुजरते हैं। इसका खामियाजा परीक्षा परिणाम के रूप में भुगतना पड़ता है। सरकार को संसाधनों में सुधार करना चाहिए। <br /><strong>- आशीष मीणा, निवर्तमान छात्रसंघ अध्यक्ष, राजकीय महाविद्यालय कोटा</strong></p>
<p>सिस्टम लागू होने से अभी तक छात्रों को कोई फायदा नहीं हुआ है, बल्कि कई गुना नुकसान हो गया। तीन साल की गे्रजुएशन की डिग्री 4 साल से ज्यादा समय में हो रही है। हर सेमेस्टर एग्जाम फीस जमा करने से आर्थिक भार पड़ रहा है। यूनिवर्सिटी भी विद्यार्थियों  की शिकायतों का समाधान भी समय पर नहीं कर रही। जिससे छात्र परेशान हैं।  <br /><strong>- रिद्धम शर्मा, छात्र नेता,राजकीय कला महाविद्यालय कोटा</strong></p>
<p><strong>एक एग्जाम खत्म तो दूसरे शुरू, टीचर ड्यूटी में तो पढ़ाए कौन</strong><br />सेमेस्टर स्कीम को सैद्धांतिक रूप से लागू किया गया है। मानव संसाधन उपलब्ध कराए बिना इस प्रणाली की सफलता पर संशय है। समेस्टर के तहत कॉलेज में पूरे साल परीक्षा होती है। एक सेमेस्टर की परीक्षा खत्म होती तो दूसरे सेमेस्टर की शुरू हो जाती है। जिसके एग्जाम खत्म हुए उनकी कक्षाएं प्रारंभ हो जाती है। इसी बीच एडमिशन प्रक्रिया भी शुरू हो जाती है। जिनमें शिक्षकों की ड्यूटी लगी  होती है। ऐसे में शिक्षक परीक्षा व एडमिशन भी कराए तो क्लासों में कब पढ़ाएंगे।  <br /><strong>- रघुराज परिहार, प्रदेशाध्यक्ष विवि एवं महाविद्यालय संघ रुक्टा </strong></p>
<p>सेमेस्टर प्रक्रिया से उच्च शिक्षा का व्यवस्थित ढांचा बिगड़ गया। स्टूडेंट्स ही नहीं कई टीचर्स को भी सेमेस्टर स्कीम के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है।  मिड टर्म व प्रेक्टिकल भी देरी से हो रहे हैं। साल में दो बार एग्जाम से चार से पांच हजार रुपए अतिरिक्त  फीस लग रही है। डिग्री करने में तीन की जगह चार साल तक लग रहे हैं।   <br /><strong>- कृतिका गौतम, छात्रा गवर्नमेंट गर्ल्स कॉलेज </strong></p>
<p>नई शिक्षा नीति के तहत सेमेस्टर स्कीम लागू की गई है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों का सर्वार्गिंण विकास करना है। हर 6 माह में परीक्षा होने से कक्षाओं में विद्यार्थियों की उपस्थिति बढ़ती है। जिससे ज्ञान और कौशल का विकास होता है। हालांकि, संसाधनों की कमी के कारण समय पर परीक्षाएं करवाना चूनौतिपूर्ण है। जिसमें सुधार के प्रयास लगातार जारी है। <br /><strong>- प्रो. कैलाश सोडाणी, कुलपति कोटा विवि </strong></p>
<p>जुलाई से शुरू होने वाले नए शिक्षा सत्र 2025-26 में यूजी फाइनल ईयर भी सेमेस्टर प्रणाली के तहत संचालित होगी। इसी के साथ पूरी ग्रेजुएशन नई शिक्षा नीति के तहत सेमेस्टर स्कीम मे हो सकेगी। सेमेस्टर प्रणाली से शिक्षा में गुणवत्ता बढ़ रही है।   <br /><strong>- डॉ. विजय पंचौली, सहायक क्षेत्रीय निदेशक आयुक्तालय कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/semester-has-become-a-problem--double-fees-and-exams-are-increasing-the-pain/article-112754</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/semester-has-become-a-problem--double-fees-and-exams-are-increasing-the-pain/article-112754</guid>
                <pubDate>Fri, 02 May 2025 15:08:17 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-05/rtrer-%281%299.png"                         length="674630"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विद्यार्थियों के सामने परीक्षा से ज्यादा गर्मी बड़ी चुनौती ...   </title>
                                    <description><![CDATA[गर्मी में बेहाल छात्र: बिना पंखों के दे रहे परीक्षा ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/heat-is-a-bigger-challenge-for-students-than-exams/article-111325"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/rtrer-(2)1.png" alt=""></a><br /><p>छीपाबड़ौद। राजस्थान में गर्मी अपने चरम पर है। तापमान लगातार 40 डिग्री सेल्सियस के पार जा चुका है और ऐसे में जब छात्रों के लिए परीक्षा का समय अत्यंत संवेदनशील होता है। ऐसे में पछाड़ स्थित प्रेमसिंह सिंघवी राजकीय महाविद्यालय के छात्र-छात्राएं बेहद अमानवीय परिस्थितियों में परीक्षा देने को मजबूर हैं। इन दिनों कोटा यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित बी ए प्रथम एवं तृतीय सेमेस्टर की परीक्षाएं चल रही हैं। लेकिन परीक्षा कक्षों की बदहाल व्यवस्था ने छात्रों की परेशानियों को कई गुना बढ़ा दिया है। अधिकांश कक्षाओं में पंखे बंद हैं या पूरी तरह खराब हो चुके हैं। ना तो शुद्ध पेयजल की व्यवस्था है और ना ही गर्मी से बचाव का कोई विकल्प। परीक्षा की घड़ी छात्रों के लिए एक मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक परीक्षा बन चुकी है।</p>
<p><strong>स्थानीय लोग और अभिभावक में रोष, बेपरवाह कॉलेज प्रशासन </strong><br />कॉलेज की हालत देखकर आमजन और अभिभावक भी चिंतित हैं। उन्होंने बताया कि जब सरकारी महाविद्यालय में सुविधाओं की यह स्थिति है, तो छात्रों का भविष्य कैसे उज्जवल होगा? क्षेत्र के नागरिकों ने शिक्षा विभाग से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है।</p>
<p><strong> ये है छात्रों की प्रमुख मांगें</strong><br />  महाविद्यालयों के छात्रों की कई मांगे है। जिनमें सभी कक्षाओं में तत्काल पंखों की मरम्मत या नवीन पंखे लगाए जाएं, परीक्षा के दौरान पेयजल और वेंटीलेशन की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, कॉलेज परिसर में नियमित सफाई और छात्राओं के लिए विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। शिक्षा विभाग द्वारा निरीक्षण कर मूलभूत समस्याओं का स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाए आदि है। </p>
<p><strong>चेताने और ज्ञापन के बाद भी नहीं हुआ समाधान</strong><br />कई बार महाविद्यालय में हो रही समस्याओं को लेकर छात्र नेता और विद्यार्थियों ने कॉलेज प्रशासन को ज्ञापन देकर और अन्य तरीकों से चेताया है लेकिन उसके बावजूद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ। कॉलेज विद्यार्थियों ने बताया कि पूरे साल मूलभूत सुविधाएं नदारद हैं। पानी, शौचालय, सफाई—हर जगह अव्यवस्था का आलम बना हुआ है। जिससे विद्यार्थियों को शिक्षण करने में समस्याओं का सामना करना पड़ता है। विद्याथियों को एक अनुकूल वातावरण नहीं मिल पा रहा है। जिससे वह अपनी पूरी क्षमता के साथ अध्यापन कार्य कर सके। महाविद्यालय की यह स्थिति न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है बल्कि यह भी सवाल खड़ा करती है कि आखिरकार शिक्षा विभाग कब जागेगा?</p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />कॉलेज में सिर्फ परीक्षा की बात नहीं है। पूरे साल मूलभूत सुविधाएं नदारद हैं। पानी, शौचालय, सफाई—हर जगह अव्यवस्था है। यह स्थिति शर्मनाक है और उच्च शिक्षा विभाग को तुरंत संज्ञान लेना चाहिए।<br /><strong>-  पूजा वैष्णव, छात्रा </strong></p>
<p>गर्मी इतनी ज्यादा है कि हमसे बैठा भी नहीं जाता। कई छात्राएं चक्कर खाकर गिर चुकी हैं। बिना पंखों के परीक्षा देना बहुत बड़ी चुनौती है।<br /><strong>- रवीना नागर, परीक्षा देने आई छात्रा </strong></p>
<p>कॉलेज में कई समस्याएं लंबे समय से चल रही हैं। जिन पर कई बार प्रशासन को ज्ञापन दिया जा चुका है। पंखों की मरम्मत की मांग की गई थी, लेकिन आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अब ये परीक्षा के समय छात्रों के स्वास्थ्य पर असर डाल रही है। अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो छात्र संगठन आंदोलन के लिए मजबूर होगा।<br /><strong>- दीपक गुर्जर, अध्यक्ष, कॉलेज छात्र इकाई </strong></p>
<p>कुछ पंखे खराब हो गए हैं। जिसकी जानकारी हमारे पास पहले भी आई थी। मरम्मत के लिए स्थानीय कर्मचारी को सूचना दे दी गई है। बहुत जल्द सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएंगी। <br /><strong>-  अरविन्द प्रताप सिंह, प्राचार्य, प्रेमसिंह सिंघवी महाविद्यालय</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/heat-is-a-bigger-challenge-for-students-than-exams/article-111325</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/heat-is-a-bigger-challenge-for-students-than-exams/article-111325</guid>
                <pubDate>Sat, 19 Apr 2025 14:48:58 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-04/rtrer-%282%291.png"                         length="465887"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>परीक्षा के इंतजार में मार्च आधा बीता, असमंजस में विद्यार्थी</title>
                                    <description><![CDATA[यूनिवर्सिटी हर साल परीक्षाओं का आयोजन करवाने में अनावश्यक देरी कर रही है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/half-of-march-has-passed-in-waiting-for-the-examination--students-are-confused/article-107717"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/257rtrer-(2)36.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा यूनिवर्सिटी द्वारा संबद्ध राजकीय महाविद्यालयों में संचालित प्रथम सेमेस्टर का एग्जाम शेड्यूल अब जारी नहीं किया गया है। जबकि, मार्च माह आधा बीत चुका है। ऐसे में परीक्षा को लेकर विद्यार्थियों में असमंजस बना हुआ है। विद्यार्थियों का तर्क है, परीक्षा में जितनी देरी होगी, उतना ही देरी से परीक्षा परिणाम जारी होंगे। जिसका खामियाजा, यूजी व पीजी फोर्थ सेमेस्टर के विद्यार्थियों को भुगतना पड़ेगा। हालांकि, कोटा विवि ने अपने कैम्पस में संचालित प्रथम व तृतीय सेमेस्टर के एग्जाम शेड्यूल जारी कर दिया है। उनकी परीक्षाएं 19 मार्च से शुरू हो रही है लेकिन हाड़ौती के कॉलेजों में परीक्षाओं का अब तक कोई टाइम टेबल जारी नहीं किया गया है। </p>
<p><strong>परीक्षा में देरी का असर परिणाम पर </strong><br />राजकीय महाविद्यालय कोटा के निवृतमान छात्रसंघ अध्यक्ष आशिष मीणा ने बताया कि यूनिवर्सिटी की लेटलतीफी से  विद्यार्थी परीक्षा को लेकर असमंजस की स्थिति में है। मार्च माह आधा बीत चुका है, इसके बावजूद विवि ने एग्जाम शेड्यूल जारी नहीं किया। उन्होंने कहा कि परीक्षा जितनी देरी से शुरू होगी, उतनी ही देरी परिणाम जारी होने में लगेगा। जिसका खामियाजा बीए, बीएससी व बीकॉम तथा एमए, एमएससी व एमकॉम चतुर्थ सेमेस्टर के विद्यार्थियों को भुगतना पड़ेगा। क्योंकि, यूजी व पीजी के फाइनल ईयर के छात्र अन्य संस्थाओं में एडमिशन लेते हैं, जहां उन्हें ओरिजनल मार्कशीट की आवश्यकता होती है। ऐसे में एग्जाम शेड्यूल जल्द जारी किया जाना चाहिए और पेपर में विद्यार्थियों  को तैयारी के लिए उचित अंतराल भी दिया जाना चाहिए। </p>
<p><strong>अभी तक एग्जाम फॉर्म भरवाए जा रहे</strong><br />छात्रों ने बताया कि इन दिनों महाविद्यालयों में यूनिवर्सिटी द्वारा लेट फीस के साथ प्रथम व तृतीय सेमेस्टर के एग्जाम फॉर्म भरवाए जा रहे हैं। ऐसे में परीक्षाएं मार्च माह के अंतिम सप्ताह तक शुरू होने की संभावना न के बराबर है। हालात यह है, अभी कई सेमेस्टर की मार्कशीट तक कॉलेजों में नहीं आई। यूनिवर्सिटी हर साल परीक्षाओं का आयोजन करवाने में अनावश्यक देरी कर रही है। जिससे लाखों विद्यार्थी प्रभावित हो रहे हैं।</p>
<p><strong>सवा लाख विद्यार्थी देंगे परीक्षा</strong><br />कोटा विवि से संबद्ध राजकीय व निजी महाविद्यालयों के प्रथम व थर्ड सेमेस्टर के करीब सवा लाख विद्यार्थी इस बार परीक्षा में सम्मलित होंगे। ऐसे में परीक्षा आयोजन में अनावश्यक देरी से परिणाम व मार्कशीट समय पर नहीं मिलने की परेशानियों से जूझना पड़ेगा। वर्तमान में राजकीय महाविद्यालय कोटा में प्राइवेट विद्यार्थियों के प्रेक्टिकल चल रहे हैं। लेकिन, नियमित प्रथम व थर्ड सेमेस्टर के छात्रों का लगभग पूरा हो चुका है। ऐसे में विवि को एग्जाम तिथि निर्धारित कर देनी चाहिए। </p>
<p>अभी यूनिवर्सिटी कैम्पस में संचालित प्रथम व तृतीय सेमेस्टर एग्जाम का शेड्यूल जारी किया है। जल्द ही कॉलेजों का भी परीक्षा टाइम टेबल जारी किया जाएगा। <br /><strong>- प्रवीण भार्गव, एग्जाम कंट्रोलर कोटा विवि</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/half-of-march-has-passed-in-waiting-for-the-examination--students-are-confused/article-107717</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/half-of-march-has-passed-in-waiting-for-the-examination--students-are-confused/article-107717</guid>
                <pubDate>Mon, 17 Mar 2025 16:15:09 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-03/257rtrer-%282%2936.png"                         length="546139"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खबर का असर- जंगल से मैदान बना राजकीय महाविद्यालय का स्पोर्ट्स ग्राउंड</title>
                                    <description><![CDATA[राजकीय महाविद्यालय कोटा का खेल मैदान खरपतवार के जंगल से स्पोर्ट्स ग्राउंड में तब्दील हो गया है
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-news---government-college-s-sports-ground-converted-from-jungle-to-field/article-97952"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/5554-(1)8.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। राजकीय महाविद्यालय कोटा का खेल मैदान खरपतवार के जंगल से स्पोर्ट्स ग्राउंड में तब्दील हो गया है। लंबे समय से कॉलेज प्रशासन खेल मैदान को मूल स्वरूप में लाने का प्रयास कर रहा था। करीब डेढ़ से दो माह के अथक प्रयास के बाद खेल मैदान खिलाड़ियों की चहल-पहल से गुलजार हुआ। स्टूडेंट्स यहां सुबह-शाम की पारियों में विभिन्न गेम्स की प्रेक्टिस कर रहे हैं। स्पोर्ट्स ग्राउंड को जंगल से खेल मैदान बनाने में कॉलेज की शैक्षणिक व अशैक्षिण स्टाफ का अथक प्रयास रहा है। प्राचार्य प्रतिमा श्रीवास्तव ने यहां उगी खरपतवारों को हटाने के लिए कैमिकल्स का छिड़काव भी करवाया। जिसका फायदा यह हुआ कि गाजर घास व खरपतवार का उनमूलन व्यवस्थित तरीके से हो गया।  दरअसल, बारिश के बाद से ही कॉलेज का खेल मैदान में बड़ी-बड़ी खरपतवार उग गई थी। वहीं, बरसात का पानी भरा होने के कारण उसका निस्तारण समय पर नहीं हो रहा था। यहां गाजर घास अधिक मात्रा में है। जिसकी वजह से विद्यार्थी खेल नहीं पा रहे थे। बारिश सीजन के दो महीने बाद भी खेल मैदान की सफाई नहीं करवाए जाने पर नवज्योति ने जंगल में तब्दील हुआ खेल मैदान शीर्षक से खबर प्रकाशित कर छात्रहित से जुड़े मुद्दे को पुरजोर उठाया था। जिसके बाद से कॉलेज प्रशासन हरकत में आया और श्रमिक लगवाकर खेल मैदान की सफाई कार्य शुरू करवाया। </p>
<p><strong>ड्रैनेज सिस्टम नहीं होने से हर साल परेशानी</strong><br />विद्यार्थियों का कहना है कि स्पोर्ट्स ग्राउंड काफी बड़ा है। लेकिन, ड्रैनेज सिस्टम नहीं होने से बरसात का पानी तीन से चार माह तक भरा रहता है। जिसकी वजह से खरपतवार व झाड़-झंकाड़ उग जाते हैं और पानी भरा होने से सफाई कार्य भी नहीं हो पाता।  बारिश के पानी की निकासी के लिए कॉलेज प्रशासन को नालियों का निर्माण करवाकर ड्रैनेज सिस्टम बनाना चाहिए। </p>
<p><strong>नवज्योति का जताया आभार</strong><br />राजकीय महाविद्यालय कोटा के निर्वमान छात्रसंघ  अध्यक्ष आशीष मीणा ने छात्रहित से जुड़े मुद्दों को उठाने व स्पोर्ट्स ग्राउंड की दशा सुधरवाने में अग्रणी भूमिका निभाने पर दैनिक नवज्योति का आभार जताया। उन्होंने कहा कि नवज्योति बेबाक और प्रभावशाली तरीके से छात्रहित से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से प्रकाशित कर समाधान में अहम भूमिका निभाता है। छात्र नवनीत गुर्जर, हरिओम, हेमंत कुमार ने कहा कि नवज्योति के सार्थक प्रयासों से स्पोर्ट्स ग्राउंड की दशा सुधर गई है। अब कॉलेज प्रशासन को 15-20 ट्रॉली मिट्टी डलवाकर ग्राउंड का और सुधार करवाना चाहिए।<br /> <br />बारिश के दिनों में परेशानी रहती है। पानी की निकासी नहीं होने से बारिश का पानी कई महीनों तक ग्राउंड में भरा रहता है। जिसकी वजह से मैदान की सफाई समय पर नहीं हो पाती। स्पोर्ट्स ग्राउंड को व्यवस्थित  व मूल स्वरूप में लाने में कॉलेज के शैक्षणिक व अशैक्षणिक स्टाफ का अथक प्रयास रहा है। खरपतवार का उनमूलन के लिए कैमिकलस का छिड़काव भी करवाया। महाविद्यालय प्रशासन स्पोर्ट्स डवलपमेंट के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। <br /><strong>- प्रो. प्रतिमा श्रीवास्तव, प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-news---government-college-s-sports-ground-converted-from-jungle-to-field/article-97952</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-news---government-college-s-sports-ground-converted-from-jungle-to-field/article-97952</guid>
                <pubDate>Wed, 18 Dec 2024 15:52:39 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-12/5554-%281%298.png"                         length="598952"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छह दिन की चांदनी फिर दो महीने अंधेरी रात</title>
                                    <description><![CDATA[हाड़ौती के आठ कॉलेजों में एक दर्जन विषयों की नहीं लगती कक्षाएं। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/six-days-of-moonlight-and-then-two-months-of-darkness/article-96453"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/6-din-ki-chandni-fr-do-mhine-andheri-raat...kota-news-02-12-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती के आठ राजकीय महाविद्यालय शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। सेमेस्टर परीक्षाएं दिसम्बर माह में होनी हैं लेकिन एक दर्जन से अधिक विषयों की कक्षाएं नियमित नहीं लग रही। महत्वपूर्ण विषयों के 60 प्रतिशत से अधिक कोर्स अधूरे हैं, जिनका परीक्षा से पहले पूरे होने की उम्मीद नहीं है। ऐसे में विद्यार्थी रिजल्ट बिगड़ने के डर से तनाव से जूझ रह हैं। दरअसल, इन कॉलेजों में विषय विशेषज्ञ नहीं होने से अंगे्रजी से ज्योग्राफी तक एक दर्जन विषयों की कक्षाएं नहीं लग पाती। ऐसे में यहां 6-6 दिन के लिए कोटा गवर्नमेंट कॉलेज (रे-सेंटर) से फैकल्टी आती है, तब इन विषयों की कक्षाएं लग पाती है लेकिन 6 दिन बाद वापस कक्षाएं अगला राउंड आने तक खाली रहती हैं। </p>
<p><strong>65% से ज्यादा कोर्स अधूरा</strong><br />नाम न छापने की शर्त पर सहायक आचार्य ने बताया कि कोटा जिले के इटावा, सांगोद व रामगंजमंडी में कॉलेज में अंग्रेजी, ज्योग्राफी, भूगोल विषय के शिक्षक नहीं है। जिसकी वजह से कक्षाएं खाली रहती हैं। ऐसे में इन विषयों को पढ़ाने के लिए रे-सेंटर कोटा से वैकल्पिक तौर पर 6 दिन के लिए शिक्षक भेजे जाते हैं। वर्तमान में 30 से 35 प्रतिशत कोर्स ही पूरा हो पाया है और 65% कोर्स अधूरा है। जबकि, अगले महीने दिसम्बर तक सेमेस्टर एग्जाम होने हैं। ऐसे में परीक्षा से पहले कोर्स पूरा होना संभव प्रतित नहीं होता। </p>
<p><strong>क्या है रे-सेंटर</strong><br />आयुक्तालय ने वर्ष 2019 में रिसोर्स असिस्टेंट एंड कॉलेज विद एक्सीलेंस (रे-सेंटर) का गठन किया था। यह सेंटर  प्रदेशभर में जिले वाइज बनाया गया। कोटा में गवर्नमेंट साइंस कॉलेज रे-सेंटर का नोडल प्रभारी है। इस सेंटर से जिले के सभी सरकारी कॉलेज  जुड़े हुए हैं। सेंटर का मुख्य उद्देश्य महाविद्यालयों को साधन-संसाधन उपलब्ध करवाकर सहायता करना है। ऐसे में जहां फैकल्टी की कमी है, वहां रे-सेंटर की मदद से 6-6 दिन शिक्षक भेज शिक्षण कार्य करवाया जाता है। </p>
<p><strong>यहां इन विषयों की नहीं लगती कक्षाएं</strong><br />इटावा में राजनेतिक विज्ञान, हिन्दी, संस्कृत, सांगोद में राजनेतिक विज्ञान,  भूगोल, राजगंजमंडी में इंग्लिश, अटरू में ज्योग्राफी, अंग्रेजी, बारां गवर्नमेंट कॉलेज में इतिहास, केलवाड़ा में इंग्लिश, शाहबाद में अर्थशास्त्र सहित अन्य विषयों के शिक्षक प्रतिनियुक्ति पर अन्य जिलों में चले गए। जिसकी वजह से यहां शिक्षकों के पद खाली होने से कक्षाएं नहीं लग पाती।</p>
<p>जिन महाविद्यालयों में शिक्षकों के पद रिक्त हैं, वहां शैक्षणिक व्यवस्था के लिए  प्रत्येक जिले में रे-सेंटर बनाए हुए हैं। जहां से डिमांड के अनुसार संबंधित कॉलेजों को 6-6 दिन के लिए शिक्षक उपलब्ध करवाते हैं। आरपीएससी के माध्यम से सरकार जल्द ही कॉलेजों में शिक्षक लगाएगी। उच्च शिक्षा के प्रति सरकार गंभीर है। <br /><strong>- डॉ. गीताराम शर्मा, क्षेत्रिय सहायक निदेशक, कॉलेज </strong></p>
<p>6-6 दिन के लिए फैकल्टी मिलना, समस्या का स्थाई समाधान नहीं है। परमानेंट शिक्षक मिलने चाहिए या फिर प्रतिनियुक्ति पर गए शिक्षकों की जगह विद्या संबल पर शिक्षक लगाने का प्रावधान किया जाना चाहिए। फैकल्टी के अभाव में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।<br /><strong>- अनिता वर्मा, प्राचार्य राजकीय सांगोद कॉलेज</strong></p>
<p>यहां शुरू से ही अंगे्रजी के शिक्षक नहीं है। बारां कॉलेज रे-सेंटर नोडल है, जिन्हें पत्र भी लिखे लेकिन वहां भी शिक्षकों की कमी के कारण फैकल्टी नहीं मिल पाती। ऐसे में विद्यार्थियों को सेल्फ स्टडी करनी पड़ती है।  <br /><strong>- बुद्धिप्रकाश मीणा, प्राचार्य राजकीय अटरू कॉलेज</strong></p>
<p>राजकीय महाविद्यालय इटावा में राजनेतिक विज्ञान, हिन्दी, संस्कृत विषय की कक्षाएं नहीं लग पाती। कोटा रे-सेंटर से 6-6 दिन के लिए शिक्षक आते हैं तब ही कक्षाएं लगती हैं। एक साल में 3 बार ही रे सेंटर से फैकल्टी मिल पाती है। ऐसे में इन विषयों की साल में मात्र 20 दिन ही क्लासें लग पाती है। ऐसे में कोर्स पूरा हो ही नहीं पाता। वहीं, बार-बार फैकल्टी न मांगनी पड़े, इसके लिए रे-सेंटर को नियमित शेड्यूल बनाना चाहिए। <br /><strong>- रामदेव मीणा, प्राचार्य राजकीय इटावा कॉलेज</strong></p>
<p>पिछले साल भी राजनेतिक विज्ञान की परीक्षा बिना पढ़े देनी पड़ी थी। यही स्थिति इस बार द्वितीय वर्ष में भी बनी हुई है। 15 से 20 किमी दूर से कॉलेज आते हैं लेकिन यहां पॉलिटीकल साइंस व ज्योग्राफी की कक्षाएं ही नहीं लगती।  दिसम्बर में पेपर होने वाले हैं, परीक्षा की तैयारी कैसे करें।<br /><strong>- हिमांशु नागर द्वितीय वर्ष, सांगोद</strong></p>
<p>कॉलेज में ज्योग्राफी के शिक्षक नहीं होने से क्लासें नहीं लगती। ऐसे में कॉलेज जाने की जगह कोचिंग जाना मजबूरी हो गई। परीक्षा सिर पर है, पेपर पैटर्न क्या रहेगा, यह बताने वाले भी नहीं है। कोर्स पूरा करने के लिए कोचिंग का सहारा लेना पड़ रहा है।<br /><strong>- अंजली रेगर, छात्रा सांगोद </strong></p>
<p>कोटा से 6 दिन के लिए शिक्षक आए तो ज्योग्राफी के प्रेक्टिकल हो सके। सिलेबस पूरा होना तो दूर विद्यार्थियों के लिए परीक्षा में पास होना ही चुनौती बनी हुई है। सरकार को विद्यार्थियों के हित में रिक्त सीटों पर विद्या संबल शिक्षक लगाना चाहिए। <br /><strong>- खुशी मीणा, छात्रा तृतीय वर्ष</strong></p>
<p>ग्रामीण इलाकों के कॉलेजों में शिक्षकों की कमी लंबे समय से चली आ रही है। आयुक्तालय की लापरवाही का खामियाजा पिछले साल बीए के परिणाम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को भुगतना पड़ा। कई विद्यार्थियों के सप्लीमेंट्री आई तो कुछ फेल हो गए। <br /><strong>- आशीष गोचर, अध्यक्ष, ग्रामीण छात्र संगठन सांगोद</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/six-days-of-moonlight-and-then-two-months-of-darkness/article-96453</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/six-days-of-moonlight-and-then-two-months-of-darkness/article-96453</guid>
                <pubDate>Mon, 02 Dec 2024 16:00:15 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-12/6-din-ki-chandni-fr-do-mhine-andheri-raat...kota-news-02-12-2024.jpg"                         length="565519"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरकारी कॉलेज की छात्राओं को मिलेगी स्टार्टअप और इनक्यूबेशन की जानकारी</title>
                                    <description><![CDATA[एपीजे अब्दुल कलाम गवर्नमेंट गर्ल्स कॉलेज, गंगापोल और राजस्थान विश्वविद्यालय के उद्यमिता करियर हब (ईसीएच) इनक्यूबेशन सेंटर जयपुर के बीच शनिवार को एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/government-college-students-will-get-information-about-startup-and-incubation/article-95722"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/6630400-sizee-(2)16.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। एपीजे अब्दुल कलाम गवर्नमेंट गर्ल्स कॉलेज, गंगापोल और राजस्थान विश्वविद्यालय के उद्यमिता करियर हब (ईसीएच) इनक्यूबेशन सेंटर जयपुर के बीच शनिवार को एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इसके माध्यम से एपीजे अब्दुल कलाम गवर्नमेंट गर्ल्स कॉलेज की छात्राएं और फैकल्टी राजस्थान विश्वविद्यालय के छात्रों और फैकल्टी के समान सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगी। अब कॉलेज की छात्राएं और शिक्षक ईसीएच इनक्यूबेशन सेंटर में उपलब्ध सुविधाओं का उपयोग कर सकते हैं और अपने स्टार्टअप के लिए इनक्यूबेट के रूप में नामांकन कर सकते हैं।</p>
<p>यह समझौता छात्राओं के बीच उद्यमिता के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे छात्राओं को उद्यमिता, स्टार्टअप और नवाचार के क्षेत्र में नई संभावनाओं को तलाशने का अवसर मिलेगा। इस एमओयू पर हस्ताक्षर प्रो. सुमिता कच्छवाहा, समन्वयक, ईसीएच इनक्यूबेशन सेंटर, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर और प्रो. हेमंत पारीक, प्राचार्य, एपीजे अब्दुल कलाम गवर्नमेंट गर्ल्स कॉलेज, गंगापोल, जयपुर द्वारा किए गए। इस अवसर पर महाराजा कॉलेज, जयपुर के प्राचार्य प्रो. जी. पी. सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहे। यह समझौता एपीजे अब्दुल कलाम गवर्नमेंट गर्ल्स कॉलेज की छात्राओं के लिए नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में एक नए युग की शुरूआत करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/government-college-students-will-get-information-about-startup-and-incubation/article-95722</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/government-college-students-will-get-information-about-startup-and-incubation/article-95722</guid>
                <pubDate>Sun, 24 Nov 2024 11:25:53 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-11/6630400-sizee-%282%2916.png"                         length="459494"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जमीन पर उच्च शिक्षा : कॉलेजों में फर्श पर चल रही कक्षाएं</title>
                                    <description><![CDATA[कहीं दरी पट्टी पर तो कहीं जमीन पर चल रही कक्षाएं । ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/higher-education-on-the-ground--classes-are-being-conducted-on-the-floor-in-colleges/article-93026"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/630400-size-(7)7.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती के नवीन राजकीय महाविद्यालयों में उच्च शिक्षा का स्तर जमीन पर पहुंच गया। सरकारी मशीनरी की लचरता व लापरवाही से 372 विद्यार्थी जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। कॉलेजों में विद्यार्थियों के बैठने के लिए टेबल कुर्सियां नहीं हैं। कहीं, दरी पट्टियों पर बिठाकर पढ़ाया जा रहा तो कहीं जमीन पर बिछाने के लिए दरी पट्टी तक नहीं है। ऐसी अव्यवस्थाओं के बीच  छात्र-छात्राओं को कई तरह की परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। दरअसल, मुख्यमंत्री बजट घोषणा में सत्र 2024-25 में कोटा, बूंदी झालावाड़ में चार नए राजकीय कला महाविद्यालय खोले हैं। जिनमें करीब 447 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। जिन्हें बिठाने के लिए कॉलेज प्रशासन के पास टेबल कुर्सियां तक नहीं हैं। उन्हें कक्षाओं में जमीन पर बिठाया जाता है। </p>
<p><strong>जमीन पर बैठने को मजबूर 372 विद्यार्थी </strong><br />कोटा के चेचट, बूंदी के लाखेरी तथा झालावाड़ के डग राजकीय कला महाविद्यालय को मिलाकर कुल 372 विद्यार्थियों ने सत्र 2024-25 में बीए प्रथम वर्ष में एडमिशन लिए हैं। जिन्हें कक्षाओं में जमीन पर बिठाकर पढ़ाया जा रहा है। जबकि, कॉलेजों में टेबल-कुर्सियों की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी आयुक्तालय द्वारा संबंधित नोडल महाविद्यालय को दी गई है। इसके बावजूद इन तीन कॉलेजों के नोडल प्राचार्यों ने अपने अधीन नवीन महाविद्यालयों के लिए टेबल-कुर्सियां खरीदने में कोई रुची नहीं दिखाई। विद्यार्थी जमीन पर बैठने में असहज महसूस कर रहे हैं लेकिन उनकी मजबूरी  समझने वाला कोई नहीं। </p>
<p><strong>लाखेरी महाविद्यालय में बिछाने को दरी पट्टियां तक नहीं</strong><br />बूंदी जिले के राजकीय महाविद्यालय लाखेरी की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। यहां फर्नीचर तो दूर स्टूडेंट्स के बैठने के लिए दरी पट्टियां तक नहीं है। 132 छात्र-छात्राओं को जमीन पर बैठना पड़ता है। कई बार छात्राओं को लेने अभिभावक आते हैं तो बच्चों को जमीन पर बैठा देख नाराजगी जताते हैं। न तो आयुक्तालय ने फर्नीचर खरीद के लिए बजट दिया और न ही नोडल महाविद्यालय बूंदी ने विकास समिति फंड से फर्नीचर खरीदे। </p>
<p><strong>सर्दियों में गलेंगे फर्श, कैसे चलेंगी क्लासें</strong><br />सरकार नए कॉलेज खोल वाहवाही लूट रही है लेकिन संसाधन नहीं दे रही। कोई सामुदायिक अस्पताल के खस्ताहाल भवन में तो स्कूलों की पुरानी बिल्डिंगों में चल रहे हैं। अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से सर्दियां प्रारंभ हो जाएंगी। सर्दी से फर्श गलेंगे तो छात्र-छात्राएं जमीन पर कैसे बैठ पाएंगे। ऐसे में कक्षाएं प्रभावित होंगी, नियमित कक्षाएं नहीं लगने से कोर्स पूरा नहीं हो पाएगा, जिसका असर परीक्षा परिणामों में नजर आएगा। </p>
<p><strong>स्कूलों से मांग रहे दरी पट्टियां </strong><br />डग महाविद्यालय में फर्नीचर तो दूर बिछाने के लिए दरी पट्टियां तक नहीं हैं। कॉलेज भी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में चल रहा है। ऐसे में कॉलेज प्रशासन को विद्यार्थियों को बिठाने के लिए स्कूल से दरी पट्टियां मांगनी पड़ रही है। नोडल प्राचार्य ओम प्रकाश के अनुसार, फर्नीचर खरीद के लिए आयुक्तालय से बजट नहीं मिला है। ऐसे में फर्श या दरी पट्टियों का इंतजाम करना पड़ रहा है।</p>
<p>कॉलेज में अभी टेबल-कुर्सियों की खरीद में वक्त लगेग। क्योंकि, इसके लिए बजट की उपलब्धता व टेंडर प्रक्रिया से गुजरना होगा। अभी तो नल-बिजली की व्यवस्था कर रहे हैं। जिसकी संबंधित विभागोें में फाइल लगा रखी है। फिलहाल दरी पट्टियों पर ही बिठाकर बच्चों को पढ़ा रहे हैं।<br /><strong>- डॉ. पवन शर्मा, नोडल प्रभारी, राजकीय महाविद्यालय, चेचट </strong></p>
<p>कॉलेज में फर्नीचर व्यवस्था के लिए कई बार नोडल राजकीय महाविद्यालय बूंदी को लिख चुके हैं। लेकिन,  बजट नहीं आने की बात कही जाती है। आयुक्तालय ने 34 कोएड तथा 27 गर्ल्स कॉलेज को फर्नीचर खरीद के लिए बजट मुहैया करवाया है लेकिन सूची में लाखेरी महाविद्यालय का नाम नहीं है। बच्चों को जमीन पर बिठाकर ही कक्षाएं लगा रहे हैं। <br /><strong>- डॉ. दिनेश कुमार शुक्ल, नोडल प्रभारी राजकीय महाविद्यालय, लाखेरी </strong></p>
<p>राजकीय महाविद्यालय डग चौमेहला कॉलेज के अधीन है और यहां रेगुलर फैकल्टी के रूप में मैं अकेला हूं। इसलिए सभी आॅफिशियल काम मुझे ही करना है। 5 अक्टूबर तक तो विद्या संबल शिक्षकों के आवेदन निकाले हैं। क्योंकि, इससे पहले तक चौमेहला कॉलेज में सेमेस्टर परीक्षाएं सम्पन्न करवा रहे थे। टेबल कुर्सियां नहीं है। आयुक्तालय से 10 लाख का बजट मांगा है, जिसके प्रस्ताव भेज चुके हैं। सोमवार से कक्षाएं शुरू होंगी। विद्या संबल फैकल्टी भी आ चुकी है। अब दरी पट्टियों की व्यवस्था कर रहे हैं। <br /><strong>- ओम प्रकाश, नोडल प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय डग</strong></p>
<p>सभी नोडल कॉलेजों के प्राचार्यो को अपने स्तर पर उनके अधीन नवीन महाविद्यालयों के लिए फर्नीचर की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, लाखेरी कॉलेज में बिना दरी पट्टियों के जमीन पर विद्यार्थियों को बिठाए जाने की जानकारी नहीं है। मामले की जानकारी लेकर उचित व्यवस्था करवाएंगे। <br /><strong>- प्रो. गीताराम शर्मा, क्षेत्रिय सहायक निदेशक कॉलेज आयुक्तालय कोटा</strong></p>
<p><strong>क्या कहते हैं विद्यार्थी</strong><br />कस्बे में कॉलेज खुला तो बहुत खुशी हुई थी। क्योंकि, घर से मुख्यालय की दूरी करीब 70 किमी है। ऐसे में  यहां एडमिशन लिया लेकिन पहले दिन कक्षा में गए तो वहां टेबल-कुर्सियां नहीं थी, विद्यार्थी जमीन पर बैठे हुए थे। बिछाने के लिए दरी पट्टियां तक नहीं थी। ऐसे में जमीन पर बैठना असहज लगा। कम से कम सरकार को बैठने की व्यवस्था तो करनी चाहिए। <br /><strong>- जोगेंद्र कुमार, छात्र राजकीय महाविद्यालय, लाखेरी </strong></p>
<p>अभी तक कॉलेज में कक्षाएं तक नहीं लगी है। लेकिन, यहां टेबल कुर्सियां नहीं है। कॉलेज स्तर के विद्यार्थियों को प्राथमिक विद्यालय के बच्चों की तरह जमीन पर ही बिठाया जाएगा। सरकार को जब संसाधन मुहैया नहीं करवाने थे तो कॉलेज भी नहीं खोलने चाहिए थे।<br /><strong>- सीमा कराड़िया (परिवर्तित नाम) छात्रा, राजकीय महाविद्यालय, डग </strong></p>
<p>टेबल-कुर्सियां तो छोड़िए कॉलेज में बिजली तक नहीं है। कक्षाओं में अंधेरा रहता है। पीने के पानी की व्यवस्था तक नहीं है। दरी पट्टियां बिछाकर ही क्लासों में बिठाया  जाता है। कॉलेज की बहुत बूरी स्थिति है। अव्यवस्थाओं के कारण कई विद्यार्थियों ने तो कॉलेज आना ही छोड़ दिया। पहले 70 से 80 छात्र-छात्राएं नियमित आते थे लेकिन अब यह संख्या घटकर 40 से 50 रह गई। जबकि, यहां 153 विद्यार्थियों का नामांकन है। <br /><strong>- हेमंत नागर (परिवर्तित नाम) छात्र प्रथम वर्ष, राजकीय महाविद्यालय, चेचट </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/higher-education-on-the-ground--classes-are-being-conducted-on-the-floor-in-colleges/article-93026</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/higher-education-on-the-ground--classes-are-being-conducted-on-the-floor-in-colleges/article-93026</guid>
                <pubDate>Mon, 14 Oct 2024 16:34:06 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-10/630400-size-%287%297.png"                         length="360496"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>धर्मशाला व स्कूलों में चल रहे कोटा संभाग के 8 कॉलेज</title>
                                    <description><![CDATA[अस्थाई जर्जर भवनों में संचालित हो रहे सरकारी महाविद्यालय । 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/8-colleges-of-kota-division-are-running-in-dharamshala-and-schools/article-90665"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/630400-size-(9).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती के सरकारी महाविद्यालय धर्मशाला व स्कूलों में चल रहे हैं। जहां कॉलेज संचालित करने से पहले स्कूल की छुट्टी होने का इंतजार करना पड़ता है। वहीं, खतस्ताहाल अस्थाई भवनों में सुविधाएं तो न के बराबर हैं लेकिन हादसों का खतरा भरपूर है। हालात यह हैं, संभाग के 8 सरकारी कॉलेज उधार के भवनों में संचालित हो रहे हैं। कई महाविद्यालय 3 तो कोई 5 कमरों में चल रहा है। जहां बारिश में टपकती छतें व दीवारों से उठती सीलन की बदबू और बिजली के तारों से हादसे का खतरा बना रहता है। जबकि, अधिकतर कॉलेजों में विद्यार्थियों की संख्या 600 से ज्यादा है। ऐसे में विद्यार्थियों के बैठने तक की जगह नहीं मिलती। इन्हें आज तक खुद का भवन नसीब नहीं हुआ। इधर, बारां जिले में 4 भवनों में 8 कॉलेज चल रहे हैं।  </p>
<p><strong>सुबह की पारी में स्कूल, शाम को कॉलेज</strong><br />बूंदी जिले के तालेड़ा कस्बे में गत वर्ष राजकीय कला महाविद्यालय खुला था, जो वर्तमान में महात्मा गांधी सी.सै. गर्ल्स स्कूल में चल रहा है। सुबह की पारी में स्कूल चलता है, जिसकी छुट्टी होने के बाद दोपहर 1 से शाम 6 बजे तक कॉलेज शुरू होता है। स्कूल से उधार मिले 3 से 4 कमरों में कक्षाएं संचालित करनी पड़ती है। कॉलेज शुरू करने के लिए शिक्षकों को स्कूल की छुट्टी का इंतजार करना पड़ता है। </p>
<p><strong>कम समय, कैसे कराएं एक्टिवीटी</strong><br />राजकीय कला महाविद्यालय तालेड़ा के प्राचार्य बीके  शर्मा कहते हैं, कॉलेज संचालित करने के लिए लिमिटेड समय मिलता है, ऐसे में स्पोर्ट्स व कल्चर एक्टिीवीटी नहीं करवा पाते। सिर्फ पढ़ाई पर ही फोकस रखते हैं।  वर्तमान में कॉलेज में 300 से ज्यादा विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। हालांकि अकतासा में कॉलेज की नई बिल्डिंग बन रही है।</p>
<p><strong>7 साल से धर्मशाला में चल रहा कॉलेज</strong><br />राजकीय इटावा महाविद्यालय की स्थापना वर्ष 2018 में हुई थी, तब से यह करीब 51 साल पुरानी त्यागी धर्मशाला में चल रहा है। भवन जितना पुराना है, उतना ही जर्जर अवस्था में है। बरसात में कक्षा-कक्षों में पानी टपकता है। छतों का पलास्टर जगह-जगह उखड़ा है। हालांकि, 6 करोड़ की लागत से महाविद्यालय का नया भवन का निर्माण लगभग पूरा हो गया है। दीपावली के बाद शिफ्ट होने की उम्मीद है। </p>
<p><strong>एक प्रिंसिपल चला रहे 3 कॉलेज</strong><br />बारां जिले के राजकीय कला महाविद्यालय छबड़ा के  प्राचार्य अरविंद प्रताप वर्तमान में तीन कॉलेजों का संचालन कर रहे हैं। उनके जिम्मे बयॉज अटरू, गर्ल्स अटरू और राजकीय प्रेम सिंह सिंघवी कॉलेज हैं। इसी तरह अटरू राजकीय महाविद्यालय के प्राचार्य बुद्धिप्रकाश मीणा खुद के कॉलेज के अलावा राजकीय कला कन्या महाविद्यालय अटरू का भी संचालन कर रहे हैं।  </p>
<p><strong>पेड़ के नीचे लगती क्लासें</strong><br />प्राचार्य रामदेव मीणा ने बताया कि इटावा कॉलेज में वर्तमान में 800 से 900 के बीच विद्यार्थी अध्यनरत हैं, जबकि, धर्मशाला में 5 कमरे मिले हैं, जिनमें से एक प्राचार्य आॅफिस है। ऐसे में 4 कमरों में ही कॉलेज चलाना पड़ रहा है। विद्यार्थियों को बिठाने की जगह नहीं होने से बीए की दो कक्षाएं टीन शेड व पेड़ के नीचे लगानी पड़ती है।  वहीं, कॉलेज में 7 विषय स्वीकृत हैं, जिसमें से अंग्रेजी, संस्कृत, हिन्दी और राजनेतिक विज्ञान के शिक्षक नहीं हैं।  </p>
<p><strong>यह कॉलेज भी स्कूल-पंचायत भवनों में संचालित</strong><br />गवर्नमेंट कॉलेज बारां के सहायक आचार्य राजेंद्र मीणा ने बताया कि जिले में राजकीय कला गर्ल्स महाविद्यालय शाहबाद कॉलेज कस्बे के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय मुंडियर में संचालित हो रहा है। यह स्कूल खस्ताहाल है। यहां 130 विद्यार्थियों का नामांकन है। इसी तरह राजकीय महाविद्यालय नाहरगढ़ वर्ष 2022-23 से पुलिस थाने के पीछे पंचायत समिति के भवन में चल रहा है। वहीं, सीसवाली कॉलेज राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, केलवाड़ा गर्ल्स कॉलेज पिछले साल से ही सीताबाड़ी स्थित सरकारी स्कूल के पुराने भवन में चल रहा है। यहां 300 छात्राओं का नामांकन है। इधर, आयुक्तालय से मिली जानकारी के अनुसार, झालावाड़ के असनावर व खानपुर राजकीय महाविद्यालय भी स्कूलों के पुराने भवनों में संचालित हो रहे हैं। </p>
<p><strong>4 भवनों में 8 कॉलेज</strong> <br />बारां जिले में एक बिल्डिंग में दो-दो कॉलेज संचालित हो रहे हैं। इनमें राजकीय महाविद्यालय छबड़ा की बिल्डिंग में गवर्नमेंट आर्ट्स गर्ल्स कॉलेज, राजकीय अटरू महाविद्यालय में कन्या कला अटरू, गवर्नमेंट केलवाड़ा कॉलेज में शाहबाद कृषि महाविद्यालय तथा  राजकीय महाविद्यालय बारां में गवर्नमेंट एग्रीकल्चर कॉलेज बारां संचालित हो रहा है। इन कॉलेजों में कक्षा कक्ष सीमित हैं और विद्यार्थियों की संख्या कई गुना अधिक है। कॉलेज प्राचार्यों को संचालन संबंधित कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं विद्यार्थी</strong><br />कॉलेज में न तो पढ़ाने के लिए शिक्षक हैं और न ही बैठने के लिए जगह। कॉलेज जाने में समय की बर्बादी होती है। ऐसे में घर पर ही सेल्फ स्टडीज करनी पड़ती है। मिड टर्म के दौरान सभी विद्यार्थी एक साथ आ गए तो बैठने की जगह तक नहीं मिली।  <br /><strong>- दीपेंद्र कुमार, छात्र द्वितीय वर्ष, राजकीय इटावा महाविद्यालय</strong></p>
<p>पढ़ने से पहले स्कूल की छुट्टी होने का इंतजार करना पड़ता है। संभाग का यह एकमात्र कॉलेज है जो दोपहर को संचालित होता है। यहां दो तीन कमरें हैं। बैठने के लिए जगह तक नहीं है। जबकि, 300 से ज्यादा विद्यार्थियों का नामांकन है। कॉलेज शुरू होने से पहले स्कूल की छुट्टी होने का इंतजार करना पड़ता है। <br /><strong>- तेजाराम नाथावत, छात्र, राजकीय महाविद्यालय तालेड़ा</strong></p>
<p>जो कॉलेज वर्तमान में अस्थाई भवन में चल रहे हैं, उनके नए भवन का निर्माण कार्य लगभग पूरे हो चुके हैं, जो जल्द ही अपने नए भवन में शिफ्ट हो जाएंगे।  सरकार इसके प्रति गंभीर है, प्रति सप्ताह निर्माणाधीन  भवनों की प्रगति की रिपोर्ट भेजने के लिए प्राचार्यों को पाबंद किया है। वहीं, इस वर्ष संभाग में जो नए कॉलेज  खुले हैं, उनमें दो महाविद्यालयों को भूमि आवंटित हो चुकी है और दो की आवंटन प्रक्रिया अंतिम चरण में है। <br /><strong>- डॉ. गीताराम शर्मा, क्षेत्रिय निदेशक, कॉलेज आयुक्तालय कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/8-colleges-of-kota-division-are-running-in-dharamshala-and-schools/article-90665</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/8-colleges-of-kota-division-are-running-in-dharamshala-and-schools/article-90665</guid>
                <pubDate>Mon, 16 Sep 2024 16:24:47 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-09/630400-size-%289%29.png"                         length="675502"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        