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                <title>होली पर लगने जा रहा साल का पहला चंद्र ग्रहण : भारत के अलावा इन देशों में दिखेगा असर, पढ़े क्या होता है ग्रहण</title>
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                        <![CDATA[आगामी 3 मार्च को वर्ष का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा, जिसे 'रेड मून' के रूप में देखा जाएगा। उज्जैन की जीवाजी वेधशाला के अनुसार, यह ग्रहण 3 घंटे 28 मिनट तक रहेगा। भारत के पूर्वी हिस्सों में यह दृश्य होगा, हालांकि उज्जैन में सूर्यास्त और चंद्रोदय के समय के कारण इसे स्पष्ट देखना चुनौतीपूर्ण होगा।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/the-first-lunar-eclipse-of-the-year-is-going-to/article-145062"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/chandra-grahan--2026.png" alt=""></a><br /><p>उज्जैन। खगोलीय घटना के तहत 3 मार्च को होने वाला इस वर्ष का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा। उज्जैन स्थित वेधशाला ने इसको लेकर विज्ञाप्ति जारी की है। जिसमें चन्द्र ग्रहण के बारे में जानकारी दी गई है। उज्जैन स्थित शासकीय जीवाजी वेधशाला के अधीक्षक डॉ. राजेंद्र प्रकाश गुप्त ने जारी विज्ञप्ति में बताया कि चंद्र ग्रहण की स्थिति में पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के मध्य सीधी रेखा में आ जाती है। पूर्ण चंद्र ग्रहण की अवस्था में पृथ्वी की छाया से चंद्रमा का पूरा भाग ढक जाता है, जिससे सूर्य का प्रकाश चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाता और पूर्ण ग्रहण दिखाई देता है। इस दौरान चंद्रमा ताम्रवर्ण का प्रतीत होता है, जिसे सामान्यत: रेड मून कहा जाता है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि 3 मार्च पूर्णिमा के दिन पूर्ण चंद्र ग्रहण दोपहर 3 बजकर 19 मिनट 7 सेकंड पर प्रारंभ होगा। ग्रहण का मध्यकाल शाम 5 बजकर 03 मिनट 7 सेकंड पर रहेगा तथा मोक्ष सायंकाल 6 बजकर 47 मिनट 6 सेकंड पर होगा। इस प्रकार ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 28 मिनट रहेगी। ग्रहण का प्रतिशत 155.5 होने के कारण चंद्रमा पूर्ण ग्रहण की स्थिति में रहेगा।</p>
<p>उन्होंने बताया कि यह ग्रहण भारत के पूर्वी भाग, जहां सूर्यास्त शीघ्र होता है, वहां देखा जा सकेगा। इसके अलावा पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर क्षेत्र तथा अमेरिका में भी यह नजर आएगा। डॉ. गुप्त ने बताया कि उज्जैन में ग्रहण के प्रारंभ के समय धूप रहेगी और सूर्यास्त सायं 6 बजकर 31 मिनट पर होगा। सैद्धांतिक रूप से यह ग्रहण भारत में दृश्य रहेगा, लेकिन उज्जैन में सूर्यास्त के समय पूर्व दिशा में पूर्णिमा का चंद्रमा आंशिक ग्रहण लगी हुई स्थिति में उदित होगा। ग्रहण की समाप्ति का समय 6 बजकर 45 मिनट 6 सेकंड बताया गया है।</p>
<p>उन्होंने स्पष्ट किया कि उज्जैन में सूर्यास्त के बाद केवल लगभग 17 मिनट तक ही ग्रहण की स्थिति रहेगी। जब तक चंद्रमा क्षितिज से पर्याप्त ऊपर आकर स्पष्ट रूप से दिखाई देने की स्थिति में पहुंचेगा, तब तक ग्रहण समाप्त हो चुका होगा। इस कारण उज्जैन में इसे नग्न आंखों से देख पाना संभव नहीं होगा। उन्होंने यह भी बताया कि टेलिस्कोप से ग्रहण देखने के लिए चंद्रमा का पर्याप्त ऊंचाई पर आना आवश्यक है, ङ्क्षकतु उसके पहले ही ग्रहण समाप्त हो जाएगा। इसलिए टेलिस्कोप से भी ग्रहण का अवलोकन संभव नहीं हो सकेगा।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Mar 2026 18:00:02 +0530</pubDate>
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                <title>होलिका दहन का सबसे अच्छा मुहूर्त आज रात 9 बजकर 20 मिनट से लेकर रात 10 बजकर 31 मिनट तक </title>
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                        <![CDATA[होलिका दहन फाल्गुन माह की पूर्णिमा को होता है]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/-best-time-for-holika-dahan-tonight-is-from-9-20-pm-to-10-31-pm--do-holika-dahan-after-worship/article-6284"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/holika-dahan1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। होलिका दहन फाल्गुन माह की पूर्णिमा को होता है,जबकि इसके अगले दिन यानी चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा को रंग वाली होली मनायी जाती है। इस साल रंगवाली होली  18 मार्च 2022 को पड़ रही है। ज्योतिषशास्त्र के मुताबिक होलिका दहन का सबसे अच्छा मुहूर्त 17 मार्च की रात 9 बजकर 20 मिनट से लेकर रात 10 बजकर 31 मिनट तक है।</p>
<p><br />होलिका दहन के अगले दिन रंग वाली होली खेली जाती है, शास्त्रों में कहा गया है कि होलिका दहन पूजा अर्चना करने के बाद ही किया जाना चाहिए। होलिका दहन पूर्णिमा के दिन होता है, लेकिन इसके 8 दिन पहले से ही होलाष्टक लग जाता है और यह होलिका दहन के बाद खत्म होता है। होलाष्टक दरअसल एक किस्म का सूतक होता है, क्योंकि इस दौरान कोई मांगलिक कार्य करना वर्जित होता है। इस दौरान विवाह, मुंडन, सगाई, गृहप्रवेश समेत 16 संस्कार नहीं करने चाहिए। यही नहीं होलाष्टक के समय यज्ञ, हवन आदि भी नहीं करना चाहिए। होलाष्टक के समय में नौकरी परिवर्तन,लंबी यात्रा आदि से भी बचना चाहिए, नया व्यापार भी आरंभ नहीं करना चाहिए।</p>
<p><br />होलाष्टक के दौरान भजन, कीर्तन, पूजा पाठ जैसे कार्य करने चाहिए। होलाष्टक को व्रत, पूजन और हवन की दृष्टि से अच्छा समय माना गया है। इन दिनों दान पुण्य के काम करने चाहिए। ऐसा करने से जीवन के कष्टों से मुक्ति मिलती है। होलाष्टक में स्वच्छता और खान-पान का भी उचित ध्यान रखना चाहिए। इन दिनों में भगवान शिव की उपासना करें। महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें,इससे हर तरह के रोग से मुक्ति मिल जाती है। होलाष्टक के समय श्रीगणेश की वंदना बहुत फलदायी है। हनुमान चालीसा का नियमित पाठ करें। होलाष्टक के दौरान भगवान विष्णु की पूजा करने से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। नवविवाहिताओं को होलाष्टक के दिनों में मायके में रहना चाहिए ।होलाष्टक  फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से लग जाता है और अगले 8 दिनों तक यह रहता है। इस साल यह 10 मार्च से लगा है और 18 मार्च 2022 तक रहेगा।</p>
<p><br />धार्मिक शास्त्रों में होलिका दहन पूजा अर्चना के बाद करने के लिए कहा गया है,क्योंकि माना जाता है कि शुभ मुहूर्त में पूजा पाठ के बाद किये गये होलिका दहन से आपकी तमाम परेशानियों और संकटों का भी दहन हो जाता है। होलिका दहन की पूजा के लिए जिस सामग्री की जरूरत होती है, उसमें एक कटोरी पानी, गाय के गोबर से बने बल्लों की माला, अक्षत, रोली, अगरबत्ती, धूपबत्ती, फूल, हल्दी के कुछ टुकड़े, मूंग की दाल, सूती धागा आदि हैं। इसके अलावा गुलाल पाउडर, एक सूखा नारियल, खेत से लाये गये पक्के हुए गेंहू या दूसरे अनाज की बालें आदि चीजों से होलिका दहन की पूजा होती है।</p>
<p><br />इन तमाम पूजा सामग्रियों को एक बड़ी थाली में रख लें और होलिका स्थल के पास पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह करके बैठ जाएं। जल, चावल, फूल और धातु के सिक्कों का होलिका को संकल्प करें और हाथ में फूल और चावल लेकर गणेश जी का स्मरण करें। इसके बाद भगवान नरसिंह का स्मरण करें और अंत में प्रहलाद का स्मरण करें, उन्हें फूल, रोली और चावल चढ़ाएं। फिर लायी गई समस्त सामग्री को होलिका को अर्पण कर दें। इसके बाद उसके चारों और चक्कर लगाएं तथा कच्चे सूत के धागे से तीन या पांच अथवा सात फेरे बांध दें।</p>]]>
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                                                            <category>जयपुर</category>
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                <pubDate>Thu, 17 Mar 2022 10:21:09 +0530</pubDate>
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