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                <title>Hospital - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>असर खबर का : नए रंग में नजर आने लगी एमबीएस इमरजेन्सी की ट्रालियां, कांच के कमरे से निकलकर मरीजों की सेवा में पहुंची</title>
                                    <description><![CDATA[नीले रंग की पहचान से खत्म होगी स्ट्रेचर की किल्लत।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report--mbs-emergency-department-s-trolleys-now-visible-in-a-new-color/article-149666"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/1200-x-600-px)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। एमबीएस अस्पताल में इमरजेंसी में आने वाले गंभीर मरीजों को अब स्ट्रेचर के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। अस्पताल प्रशासन ने एक अनूठा प्रयोग करते हुए इमरजेंसी की 18 ट्रॉलियों को विशेष नीले रंग से पुतवा दिया है। प्रशासन ने 8 अन्य नई ट्रॉलियां भी इमरजेंसी विभाग को हैंडओवर कर दी हैं, जिससे अब स्ट्रेचरों की कुल उपलब्धता 26 हो गयी है। साथ ही ट्राली मेन और ईचार्ज काे भी इन्हें संभालने और ऑपरेट करने में लगने वाले समय में भी भारी कमी आयेगी।</p>
<p><strong>पहचान और रिकवरी आसान</strong><br />नीले रंग की वजह से अब ये ट्रॉलियां वार्डों में गुम नहीं होंगी। अस्पताल परिसर में कहीं भी नीला स्ट्रेचर दिखने पर ट्रॉली इंचार्ज उसे तुरंत रिकवर कर इमरजेंसी में ला सकेंगे। प्रबधंधन की और से बताया गया है कि पहले मरीज अपनी सुविधा के लिये ले जाते थे जिन्हे कहीं भी छोड़ देते थे ऐसे में इन्हे ढुढ़ंने मे खासी परेशानी होती थी।</p>
<p><strong>स्थान में बदलाव- बेसमेंट के पास बना नया 'ट्रॉली स्टैंड'</strong><br />अधीक्षक डॉ. धर्मराज मीणा ने बताया कि समस्या के समाधान के लिए अब नई बिल्डिंग के मेन गेट के पास, बेसमेंट पार्किंग के बगल में एक स्थाई ट्रॉली स्टैंड बना दिया गया है। अब सभी ट्रॉलियां एक ही स्थान पर मिलेंगी। जिससें आने वाले मरीजों को अब बाहर से ही इन्हे उपलब्धता हो जायेगी।</p>
<p><strong>खबर का असर</strong><br />दैनिक नवज्योति ने 26 मार्च को 25 ट्रॉलियां कांच के कमरे में शीर्षक से प्रकाशित समाचार में अस्पताल प्रशासन की लापरवाही को उजागर किया गया था कि कैसे एक तरफ मरीज स्ट्रेचर के लिए तड़प रहे हैं और दूसरी तरफ नई ट्रॉलियां तालों में बंद हैं। इस खबर के बाद हरकत में आए अस्पताल प्रशासन ने बुधवार को न केवल ट्रॉलियों को बाहर निकाला, बल्कि उनकी सुचारू उपलब्धता के लिए नई व्यवस्था भी लागू कर दी।</p>
<p>अस्पताल में संसाधनों की कमी नहीं थी, लेकिन उनके मिस-मैनेजमेंट को सुधारने के लिए अब कलर कोडिंग और नया पार्किंग बेसमेंट बनाया गया है ताकि आपातकालीन स्थिति में तुरंत स्ट्रेचर मिल सके। नर्सिंग अधीक्षक की देखरेख में ट्रॉली इंचार्ज इसकी जिम्मेदारी संभालेंगे।<br /><strong>- डाॅ.धर्मराज मीणा, अधीक्षक एमबीएस हॉस्पिटल </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 14:10:22 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का : एमबीएस अस्पताल में सुविधाओं के विकास को लेकर संभागीय आयुक्त ने दिए निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[पुराने भवन के बेसमेंट हॉल में जमा मलबे की सफाई हेतु निरीक्षण दल गठित कर शीघ्र कार्रवाई के निर्देश दिए ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report--divisional-commissioner-issues-directives-regarding-facility-upgrades-at-mbs-hospital/article-147958"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(1)69.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="en" style="font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="en">कोटा । संभागीय आयुक्त अनिल कुमार अग्रवाल ने निर्देश दिए कि एम.बी.एस. चिकित्सालय से संबंधित समस्याओं का समाधान शीघ्र किया जाए ताकि मरीजों को कोई असुविधा ना हो। उन्होंने ये निर्देश उनकी अध्यक्षता में बुधवार को आयोजित बैठक में दिए। बैठक में चिकित्सा सुविधाओं के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।संभागीय आयुक्त ने एम.बी.एस व जे.के. लोन चिकित्सालय परिसर की चार दीवारी के संबंध में स्पष्ट निर्देश दिए कि इस काम के लिए दोनों चिकित्सालय 50-50 प्रतिशत की राशि आगामी तीन कार्य दिवस में सार्वजनिक निर्माण विभाग को हस्तांतरित करना सुनिश्चित करें। एम.बी.एस. चिकित्सालय में करीब 49.95 लाख रुपए लागत से इन्टरनल वायरिंग मरम्मत के निर्देश दिए गए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="en">अनुपयोगी व जर्जर भवनों को गिराएंगे</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="en">एम.बी.एस. चिकित्सालय परिसर स्थित अनुपयोगी, असुरक्षित व जर्जर और नकारा घोषित भवन, राजकीय आवास व लेक्चर थियेटर को गिराए जाने के संबंध में अधिशाषी अभियंता, सा. नि.वि. प्रोजेक्ट खण्ड ने बताया कि एक दो दिवस में कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="en"> </span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="en">ड्रेनेज सिस्टम सुधारें</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="en" style="font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="en">एम.बी.एस. व जे. के. लोन चिकित्सालय परिसर में ड्रेनेज सिस्टम कार्य के संबंध में एम.बी.एस. अधीक्षक को फोलोअप के लिए निर्देशित किया गया। जे. के. लोन व एम.बी.एस. चिकित्सालय परिसर में एस.टी.पी. निर्माण के संबंध में केडीए मुख्य अभियंता ने कार्य शीघ्र प्रारंभ कराने की बात कही।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="en">मां योजना के काउंटर बनाएं</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="en">संभागीय आयुक्त ने एम.बी.एस. चिकित्सालय में पुराने ओ.पी.डी. में कक्षों का रिनोवेशन कर मां योजना काउंटर में परिवर्तित करने, पुराने भवन के भूतल पर स्थित सम्पूर्ण कॉरिडोर में टाइल्स की मरम्मत व पेंटिंग, पुरानी खिडकियों को एल्यूमिनियम की खिड़की में बदलने, विभिन्न वार्ड में टॉयलेटस की मरम्मत, फीमेल सर्जिकल ए, बी, सी व कॉरिडोर की मरम्मत व चिकित्सालय के अन्य कार्य के संबंध में निर्देश दिए। एम.बी.एस. चिकित्सालय के बर्न वार्ड का मरम्मत कार्य सी.एस.आर. फण्ड से करवाने के लिए निर्देशित किया गया। पुराने भवन के बेसमेन्ट में बने हॉल में भरे मलबे की सफाई के लिए निरीक्षण दल गठित कर शीघ्र कार्रवाई के निर्देश दिए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="en"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="en">जेके लोन में मेडिसिन आउटडोर शुरू करें</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="en" style="font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="en">जे.के. लोन न्यू आई.पी.डी. के बाहर खाली पड़े हुए हॉल में तुरन्त प्रभाव से शिशु औषध विभाग का आउटडोर प्रारंभ करने के निर्देश दिए। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे इन सभी कार्यों का निरीक्षण करें। बैठक में जिला कलक्टर पीयूष समारिया, अतिरिक्त संभागीय आयुक्त ममता तिवारी, डॉ. निलेश कुमार जैन, प्रधानाचार्य, डॉ. धर्मराज मीणा, अधीक्षक एमबीएस चिकित्सालय, रविन्द्र माथुर निदेशक अभियांत्रिकी केडीए, अशोक सनाढ्य अधिशाषी अभियन्ता प्रोजेक्ट खण्ड, डॉ विधि शर्मा वित्तीय सलाहकार, चिकित्सा महाविद्यालय, महावीर सांवरिया नर्सिंग अधीक्षक एम.बी.एस. व अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 13:01:42 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>विकलांगता आवेदन पत्रों में फजीर्वाड़ा : मचा हड़कम्प,  सभी ऑफलाईन प्रक्रिया की बंद </title>
                                    <description><![CDATA[कई फार्मो में ''घुटने के नीचे एक पैर कटा'' लिखा असेसमेन्ट बना शक का कारण। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/fraud-uncovered-in-disability-applications--uproar-ensues--all-offline-processing-halted/article-147547"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)57.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जिले में विकलांगता प्रमाण पत्रों को लेकर बड़ा गडबड़ झाला सामने आया है। कोटा एमबीएस में प्राप्त आफलाईन व आनलाईन आवेदनों में गम्भीर प्रकार की गड़बड़ी देखने में आयी है। जहां डॉ. द्वारा जांच पत्र में भरी गयी जानकारी की हूबहू नकल करके अन्य आवेदकों के फार्माे पर लगा कर मिथ्या टिप्पणियां बना दी गयी है। हांलाकि मेडिकल बोर्ड द्वारा समय पर इन गड़बड़ियों को पकड़ लिया गया, जिससे इन आवेदकों के फर्जी विकलांगता प्रमाण पत्र बनने से रह गये । जबकि अस्पताल प्रबंधन द्वारा मामले का परिवाद नयापुरा थाने में भी दिया जा चुका हे।</p>
<p>कोटा के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में विकलांगता प्रमाणपत्र बनवाने के लिये लोग सीधे ही कोटा आते है। ऐसे आवेदनों की संख्या व लोगों को राहत देने के लिये एमबीएस प्रशासन ने अभी भी आॅफलाईन प्रक्रिया जारी की हुई हे। हांलाकि राज्य सरकार ने ऐसे किसी भी आवेदन के लिये वऊकऊ यूनिक डिस एबिलिटि पहचान पत्र पोर्टल पर आवेदन को अनिवार्य रूप से करने का भी निर्देश जारी किया हुआ है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों से आये लोगों द्वारा अभी भी सीधे एमबीएस आने के कारण यहां पर कार्य भार बढ़ता जा रहा है । ऐसे में सीधे कार्यालय में किये गये आवेदनों का जांचने में काफी चूक होने की संभावना रहती है।</p>
<p><strong>घुटने के नीचे एक पैर कटा'' से खुला मामला</strong><br />यहां आये आवेदनों में एक बात सभी में कॉमन थी की सभी आवेदकों के चिकित्सकीय प्रमाणीकरण में घुटने के नीचे एक पैर कटा वाली टिप्पणी लिखी हुयी थी। ऐसे में किसी भी चिकित्सक द्वारा एक जैसी लैखनी व टिप्पणी की गयी थी। जिससे इन आवेदकों के बारें में शक हुआ।विकलांगता के लिये भरे गये पत्र में भी चिकित्सीय टिप्पणी में एक टांग के कटे वाली टिप्पणी से पैनल को सारी कहानी समझ में आ गयी।वहीं दो अन्य मामलों मे प्राप्त आवेदन में भूनेश सुमन वार्ड नं 5 पिपल्दा व मनोहरी बाई ख्यावदा निवासी द्वारा दिये गये प्रपत्र में भी ऐसी ही टिप्पणी की गयी हे।</p>
<p><strong>सभी ने एक ही ई मित्र संचालक का नाम लिया</strong><br />बनवारी सुमन मनोहरी बाई सुमन के पति 4 साल पहले मोटर सायकिल से गिरकर एक्सीडेन्ट हो गया था एक पैर ने काम करना बन्द कर दिया कोटा एमबीएस में आॅपरेशन करवाया था,जिसके बाद पैर पतला पड़ गया। पैर से चलने में लाचार है सरकारी पेंशन मिल जायें तो काम आये इसी लिये हमनें आवेदन किया है। हमने पिपल्दा के ई-मित्र से हमने फार्म भरवाया था। मामले में जानकारी जुटाने के दौरान सभी आवेदक एक ही क्षेत्र के निकले वहीं सभी ने आवेदन प्रक्रिया में ई मित्र संचालक का नाम भी लिया। वही ई मित्र संचालक का कहना है कि मैने किसी का कोई आवेदन नहीं किया।</p>
<p><strong>अब आवेदन केवल आॅनलाईन ही मान्य</strong><br />एम बी एस अस्पताल द्वारा ऐसे मामले सामने आने के बाद हड़कम्प मच गया था। अधीक्षक डॉ धर्मराज मीणा इस संदर्भ में जानकारी देते हुये बताया कि जिसके बाद से ही आॅफलाईन आवेदनों को पूरी तरह बन्द कर दिया गया है। डॉ मीणा ने बताया की हमारी तरफ से उपरोक्त प्रकरण को नयापुरा थाने में भिजवाया गया है ।</p>
<p><strong>चिकित्सकों की डिजिटल मैपिंग</strong><br />अब वऊकऊ की समस्त कार्यप्रणाली आॅनलाइन होगी। अधिकृत चिकित्सकों की प्रोफाइल पोर्टल पर मैप की जा रही है ताकि आंकलन सीधे आॅनलाइन भरा जा सके।सत्यापन प्रक्रिया आॅनलाइन आवेदकों को अस्पताल द्वारा स्वयं कॉल करके बुलाया जाएगा। जांच और आॅनलाइन एंट्री के बाद ही वऊकऊ कार्ड जारी होगा। निश्चित समय सीमा: इस पूरी प्रक्रिया (जांच से कार्ड जारी होने तक) के लिए एक माह की अवधि निर्धारित की गई है।</p>
<p>आम जन की सुविधा के लिये दोनों प्रकार से काम चलाया हुआ था लेकिन गड़बडी मिलने के बाद अब केवल आॅनलाईन ही काम होंगे। हमने पुलिस को भी जानकारी भिजवा दी है।<br /><strong>-डॉ धर्मराज मीणा,  अधीक्षक एमबीएस कोटा</strong></p>
<p>अभी जानकारी में आया हे यदि ऐसा हे तो मामले में जांच की करवायी जायेगी।<br /><strong>- विनोद कुमार,  थानाधिकारी नयापुरा कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 15:41:20 +0530</pubDate>
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                <title>नाइजीरिया में भीषण आतंकवादी हमला: 23 से अधिक लोगों की मौत, अन्य 108 घायल, बचाव और राहत कार्य जारी</title>
                                    <description><![CDATA[नाइजीरिया के बोर्नो में अस्पताल और बाजार के पास हुए संदिग्ध आत्मघाती हमलों में 23 लोगों की मौत हो गई और 108 घायल हुए हैं। पुलिस ने बताया कि विस्फोटकों के जरिए भीड़भाड़ वाले इलाकों को निशाना बनाया गया। घटना के बाद सेना और सुरक्षा बलों ने मोर्चा संभाल लिया है और पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर जांच शुरू कर दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/horrific-terrorist-attack-in-nigeria-more-than-23-people-killed/article-146866"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/barno.png" alt=""></a><br /><p>अबूजा। नाइजीरिया में एक अस्पताल, बाजार और ओवरपास के पास हुए संदिग्ध आतंकवादी हमलों में 20 से अधिक लोग मारे गए और 108 घायल हुए। बोर्नो पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी। </p>
<p>पुलिस ने सोशल मीडिया पर कहा, "प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि ये घटनाएं संदिग्ध आत्मघाती हमलावरों द्वारा अंजाम दी गईं। दुर्भाग्य से, कुल 23 लोगों की जान चली गई, जबकि 108 अन्य लोग अलग-अलग तरह से घायल हो गए।"</p>
<p>बयान में आगे कहा गया है कि घटना के बाद पुलिस सामरिक इकाइयों, सेना और अन्य संयुक्त सुरक्षा बलों को तुरंत प्रभावित क्षेत्रों में तैनात किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 17:55:04 +0530</pubDate>
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                <title>राजकीय जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय में चिकित्सा एवं नर्सिंग स्टाफ की लापरवाही आई सामने, सफाई के नाम पर लीपापोती</title>
                                    <description><![CDATA[राजकीय जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय अजमेर में चिकित्सा एवं नर्सिंग स्टाफ वहां उपचार के लिए आने वाले मरीजों से हर समय घिरे नजर आते हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/negligence-of-medical-and-nursing-staff-in-ajmer-government-jawaharlal/article-144294"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/12200-x-600-px)-(2)17.png" alt=""></a><br /><p>अजमेर। राजकीय जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय अजमेर में चिकित्सा एवं नर्सिंग स्टाफ वहां उपचार के लिए आने वाले मरीजों से हर समय घिरे नजर आते हैं। वही चिकित्सालय में सफाई का ठेका लेने वाली फर्म के कर्मचारी मरीजों की संख्या में इजाफा करने से नहीं चूक रहे इन कर्मचारियों को इस बात की जरा भी भनक नहीं है कि जिस तरीके से वह चिकित्सालय की आपातकालीन इकाई एवं वार्डों की सफाई के नाम पर एक ही पोंछे से लीपापोती करते हैं उससे सफाई तो होती नहीं बल्कि बीमार मरीजों की हालत और खराब तथा उनके साथ आने वाले परिजन एवं अन्य लोगों में भी विभिन्न प्रकार के संक्रमण फैल जाते हैं, जिसका मुख्य कारण है यह सफाई ठेकेदार आपातकालीन इकाई में उपचार के लिए आने वाले घायल मरीजों के शरीर से बह रहे खून एवं उल्टियां तथा अन्य गंदगी को फर्श पर जिस पोंछे से दिखावटी तौर पर साफ करते हैं। </p>
<p>इस पोंछा को वह बाहर बरामदे में भी फिर देते हैं और उसके बाद आपातकालीन इकाई के वार्ड में भी वही पोंछा फर्श पर चला दिया जाता है जिससे विभिन्न प्रकार की बीमारियों का संक्रमण फर्श पर जा चिपकता है। नतीजतन मरीज के साथ आने वाले उनके परिजन चिकित्सालय स्टाफ आदि भी संक्रमणों के शिकार हो जाते हैं इसके अलावा उनके जूते चप्पलों में लगकर जाने वाली यह संक्रमित गंदगी उनके घरों एवं संस्थानों में भी पहुंच जाती है जिसकी वजह से वहां भी संक्रमण फैलने के हालात बन जाते हैं यही हाल चिकित्सालय के बाकी वार्डों और गैलरियों तथा कार्यालयों का भी है। इस संबंध में चिकित्सालय अधीक्षक डॉक्टर खरे ने बताया कि इस तरह की सफाई की गड़बड़ी की शिकायत है मिलने पर ठेका फॉर्म को लिखित में नोटिस दिए गए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Feb 2026 18:18:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>30 साल पुरानी एक मात्र मशीन पर धुलाई का जिम्मा, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[एमबीएस अस्पताल प्रशासन की  लापरवाही से लॉन्ड्री मशीन हुई नाकारा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/a-single-30-year-old-machine-is-responsible-for-laundry/article-143783"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/12200-x-600-px)-(2)9.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। लाखों की मशीनरी भी प्रशासनिक लापरवाही के चलते किस तरह कण्डम हो जाती है इसकी बानगी कोटा के एमबीएस अस्पताल के लॉन्ड्री सेक्शन में देखने को मिली । बेपरवाही का आलम यह है कि अस्पताल में मरीजों की चादरें, कंबल और अन्य कपड़ों की धुलाई अभी भी लगभग 25 वर्ष पुरानी मशीनों से की जा रही है, जिससे काम की रफ्तार और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो रही हैं। अस्पताल से आए दिन दाग लगे चद्दरों की शिकायतें भी कितनी  बार परिजनों द्वारा सामने आती रहती है । लॉन्ड्री सेक्शन के प्रभारी ने बताया कि यहां पर सोमवार और गुरुवार को ही कपड़े लिए और दिए जाते हैं, क्योंकि पुरानी मशीनें होने के कारण लगातार धुलाई का काम चल रहा है। इसी वजह से पूरे सप्ताह में नियमित और समय पर कपड़ों की आपूर्ति करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।</p>
<p><strong>मात्र 70 हजार की दरकार</strong><br />जानकारी के अनुसार वर्ष 2020 में अस्पताल प्रशासन को एक आधुनिक कपड़ा धुलाई मशीन स्थापित की गई थी, जिसे एक आॅयल कम्पनी के सहयोग से उपलब्ध कराया गया था। यह मशीन अत्याधुनिक तकनीक से लैस थी । पारम्परिक ब्लीच,सोडा व सर्फ के प्रयोग से कपडो व त्वचा को भी परेशानी होती है जबकि नई मशीन व उन्नत कैमिकल से अधिक मात्रा में साफ-सफाई सुनिश्चित करने में सक्षम थी । यहां काम करने वाले लोगों ने बताया कि इसको देखने के लिए इंजीनियर भी आए थे जिन्होने 70 हजार खर्चा  बताया था । कार्मिकों ने बताया कि नई लगाई गई मशीन को पहले तो करीब दो सालों तक चालू ही नहीं किया गया। 2022-23 में मशीन को चालू किया गया तब काम में थोड़ा आराम और सुधार आया था लेकिन पिछले करीब 14 माह से भी अधिक का समय गुजर गया लेकिन मशीन चालू नहीं हो पायी है।</p>
<p><strong>बेड़शीट सहित ओटी ड्रेस की धुलाई</strong><br />परिसर में स्थापित इस धुलाई केन्द्र पर रोजाना करीब 600 बेडशीट के अलावा आई ओटी, जनरल व न्यूरो आॅपरेशन थियेटर के भी कपडे़ आते है। यहां पर पुराने समय की धुलाई करने वाली दो मशीनें है इनमें से एक तो पूरी तरह गल चुकी है जबकि दूसरी को  किसी तरह जुगाड़ करके चलाया जा रहा है जो भी बंद हो जाए अस्पताल में भारी परेशानी पैदा हो सकती है।</p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />मशीन की कम्पनी का पता कराया है, मशीन की मरम्मत के लिए आवश्यक पत्रावलियां तैयार की जा चुकी है, विशेषज्ञों के अनुसार करीब 70-80 हजार का खर्च आने का एस्टीमेट है। इसको चालू करवाया जाएगा।<br /><strong>- डॉ. कर्नेश गोयल, उपाधीक्षक एमबीएस असपताल </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Feb 2026 14:46:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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                <title>बदहाली की मार, बिना भवन-संसाधन एक (कंपाउंडर) के भरोसे पशु चिकित्सालय </title>
                                    <description><![CDATA[जीर्णशीर्ण भवन में चल रहा चिकित्स्थासालय,मवेशियों के उपचार हेतु पशुपालक परेशान ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/the-scourge-of-disrepair--without-a-building-or-resources--the-veterinary-hospital-is-dependent-on-a-single-compounder/article-143155"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/kkkkkkota.jpg" alt=""></a><br /><p>देईखेड़ा। क्षेत्र के देईखेड़ा कस्बे में स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय बदहाली का दंश झेल रहा है। स्थापना के डेढ़ दशक बाद भी अस्पताल को न स्थायी भवन मिल पाया है और न ही पर्याप्त स्टाफ व संसाधन उपलब्ध हो सके हैं। वर्तमान में पूरा चिकित्सालय केवल एक पशुधन निरीक्षक (कंपाउंडर) के भरोसे संचालित हो रहा है। अस्पताल अस्थायी रूप से जीर्णशीर्ण भवन में चल रहा है, जबकि इससे क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांवों के पशुपालक जुड़े हुए हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार नए भवन निर्माण के लिए कम से कम 100़100 फीट भूमि का पट्टा जारी होना आवश्यक है, लेकिन स्थानीय पंचायत प्रशासन द्वारा पट्टा जारी करने में टालमटोल की जा रही है। इसके चलते अस्पताल पूर्व में मर्ज किए जा चुके राजकीय प्राथमिक विद्यालय के भवन में संचालित करना पड़ रहा है।</p>
<p>देईखेड़ा पशु चिकित्सालय में एक पशु चिकित्सक, एक पशुधन निरीक्षक (कंपाउंडर) तथा एक पशु परिचर (चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी) के पद स्वीकृत हैं, किंतु वर्तमान में केवल एक पशुधन निरीक्षक के भरोसे व्यवस्थाएं चल रही हैं। स्थानीय पशुपालकों का कहना है कि स्थायी भवन, उपकरण और पशु चिकित्सक के अभाव में मवेशियों के उपचार में परेशानी आ रही है। गंभीर बीमार पशुओं को सर्जरी अथवा विशेष उपचार के लिए दूरस्थ केंद्रों तक ले जाना पड़ता है। ग्रामीणों ने पंचायत प्रशासन और पशुपालन विभाग से शीघ्र भूमि आवंटन व रिक्त पदों पर नियुक्ति की मांग की है।</p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों के साथ बीमार मवेशियों का हर सम्भव उपचार किया जा रहा है। भूमि आवंटन के लिये पंचायत को लिखा जा चुका है। पंचायत ने भवन के स्थानांतरित करने के लिये मौखिक बोला गया है। समस्त स्थिति से उच्चाधिकारियों को अवगत करवा दिया है। <br /><strong>-ओमप्रकाश नागर,  पशुधन निरीक्षक, देईखेड़ा। </strong></p>
<p>पशु चिकित्सालय के लिए भूमि आवंटन के लिए प्रस्ताव ले रखे है। जल्द ही भूमि चिहिन्त कर आवंटन किया जाएगा। <br /><strong>- राहुल पारीक, ग्राम विकास अधिकारी, देईखेड़ा। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Feb 2026 15:00:37 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>ईसाटोरी गांव आज भी पक्की सड़क से वंचित, इस रास्ते से जुड़े  हैं दर्जनों गांव </title>
                                    <description><![CDATA[ग्रामीणों ने दी चुनाव बहिष्कार की चेतावनी, गांव में नहीं पहुंच रही एम्बुलेंस।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/isatori-village-still-lacks-a-paved-road--dozens-of-villages-are-connected-by-this-route/article-141449"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/85641.png" alt=""></a><br /><p>समरानियां। ग्राम पंचायत हाटरी के अंतर्गत आने वाले ग्राम ईसाटोरी सड़क बनी है और न ही ऐसा कोई वैकल्पिक मार्ग है, जिससे बरसात के समस्या से आक्रोशित मौसम में बीमार लोगों को अस्पताल तक सुरक्षित पहुंचाया जा सके। इस ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि इस बार भी समाधान नहीं हुआ तो वे आगामी चुनाव का बहिष्कार करेंगे। ग्रामीणों ने बताया कि हर साल चुनाव के समय नेता गांव में आते हैं, बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही सब वादे हवा हो जाते हैं और गांव की हालत जस की तस बनी रहती है। ग्रामीणों ने बताया कि ईसाटोरी गांव से होकर दर्जनों  गांवों का आवागमन होता है। यह रास्ता रोजमर्रा की जरूरतों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन सड़क खराब होने से लोगों का समय भी अधिक लगता है और दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है।</p>
<p><strong>बारिश में हालात बद से बदतर</strong><br />बरसात के मौसम में स्थिति और ज्यादा गंभीर हो जाती है। यदि किसी व्यक्ति की तबीयत खराब हो जाए तो एम्बुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती। मजबूरी में ग्रामीणों को मरीजों को मध्यप्रदेश के अस्पतालों में ले जाना पड़ता है। ग्राम पंचायत ने गांव के अंदर तक सीसी रोड नहीं बनवाई है। कच्चे रास्तों पर कीचड़ भर जाने से बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।</p>
<p><strong>हर चुनाव में वादे, लेकिन जमीन पर काम शून्य</strong><br />ग्रामीणों का कहना है कि हर चुनाव से पहले जनप्रतिनिधि गांव में पहुंचते हैं और सड़क निर्माण के बड़े-बड़े वादे करते लेकिन चुनाव समाप्त होते ही कोई सुध लेने नहीं आता। वर्षों से ग्रामीण कच्चे, कीचड़ भरे रास्तों पर चलने को मजबूर हैं ।</p>
<p><strong>ग्रामीणों की मांग: जल्द मिले स्थायी समाधान</strong><br />ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि फॉरेस्ट विभाग से समन्वय कर जल्द एनओसी दिलवाई जाए और सड़क निर्माण कार्य तुरंत शुरू किया जाए। उनका कहना है कि सड़क केवल सुविधा नहीं बल्कि जीवन और मृत्यु का सवाल बन चुकी है।</p>
<p>इस रास्ते से दर्जनों गांव जुड़े हुए हैं और रोजाना लोग इसी मार्ग से आवागमन करते हैं, लेकिन सड़क न होने के कारण समय भी ज्यादा लगता है और परेशानी भी होती है।<br /><strong>-सुनील शिवहरे, ग्रामीण</strong></p>
<p>बरसात के दिनों में यदि कोई बीमार हो जाए, तो गांव से अस्पताल ले जाना बेहद मुश्किल हो जाता है। मजबूरी में कई बार लोगों को इलाज के लिए मध्यप्रदेश की ओर जाना पड़ता है।<br /><strong>- करण सहरिया, ग्रामीण</strong></p>
<p>ग्राम पंचायत द्वारा गांव के अंदर तक सीसी रोड तक नहीं बनवाई गई है, जिससे आमजन को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।<br /><strong>- मुरारी प्रजापति, ग्रामीण</strong></p>
<p>सहरिया बस्ती के रोड का कार्य जल्द ही शुरू किया जाएगा।<br /><strong>- सियाराम, वीडीओ</strong></p>
<p>सड़क निर्माण की स्वीकृति जारी हो चुकी है, लेकिन फॉरेस्ट विभाग की एनओसी अभी तक नहीं मिलने के कारण कार्य शुरू नहीं किया जा सका है।<br /><strong>-बसंत गुप्ता, एएक्सईएन, पीडब्ल्यूडी</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 31 Jan 2026 17:02:08 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एमआरआई करवाना जंग जीतने जैसा, मरीज हो रहे परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[एमबीएस , जेके लोन और रामपुरा जैसे बड़े सरकारी अस्पतालों में भी एमआरआई सुविधा नहीं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/getting-an-mri-at-kota-medical-college-hospital-is-like-winning-a-battle/article-140714"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/ेलल्े्.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। संभाग के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मरीजों को एमआरआई जांच के लिए एक से 2 महीने तक का लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। स्थिति तब और बदतर हो जाती है, जब मरीजों को शहर के प्रमुख एमबीएस अस्पताल से करीब 10 किलोमीटर का सफर तय कर मेडिकल कॉलेज पहुंचना पड़ता है, लेकिन वहां भी तारीख एक महीने बाद की मिल रही है। शहर के सरकारी स्वास्थ्य क्षेत्र में केवल एक एमआरआई मशीन मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ही उपलब्ध है, जबकि एमबीएस अस्पताल में यह सुविधा ही नहीं है। नतीजतन, मरीजों को निजी डायग्नोस्टिक केंद्रों पर 2000 से 4,000 रुपये खर्च कर एमआरआई करवानी पड़ रही है। ग्रामीण और गरीब तबके के मरीजों की इस पीड़ा को सुनने वाला कोई नहीं है।</p>
<p><strong>हाड़ौतीभर से आते मरीज, हो रहे परेशान</strong><br />मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एमआरआई मशीन की कमी और लंबी प्रतीक्षा सूची ने मरीजों को निजी केंद्रों की ओर धकेल दिया है। लंबी प्रतीक्षा और और अत्यधिक भीड़ के चलते मरीजो को मजबूरन निजी केंद्रो की ओर रुख करना पड़ रहा है, जहां 4 से 5 हजार की चपत लग रही है।</p>
<p><strong>प्रतिदिन 90 से ज्यादा होती है एमआरआई</strong><br />मेडिकल कॉलेज अस्पताल से बाली जानकारी के अनुसार यहां प्रतिदिन 90 से ज्यादा मरी जांच की जाती है गत वर्ष 23 हजार 62 एमआरआई जांचे की गई है। हाडोतीभर से यहां बड़ी संख्या में मरीज आते हैं। निजी केन्द्रों पर महंगे दमों पर यह जांच होने से मरीजों का अत्यधिक भार मेडिकल कॉलेज अस्पताल पर पड़ता है। ऐसे में यहां एमआरआई करवाना चुनौती बना हुआ है।</p>
<p><strong>एक ही मशीन पर सारा भार</strong><br />सरकारी क्षेत्र में एमआरआई की नए अस्पताल में ही मशीन है। यहां कोटा संभागभर से मरीज इलाज के लिए पहुंचते है। सरकार की ओर से नि:शुल्क जांच की सुविधा देने की घोषणा के साथ ही मरीजों की संख्या भी बढ़ गई है। इससे एक ही मशीन पर सारा भार आ गया है।</p>
<p><strong>मरीज को झेलनी पड़ रही दोहरी मार</strong><br />मेडिकल कॉलेज अस्पताल में केवल एक एमआरआई मशीन होने के कारण मरीजों को समय पर जांच नहीं हो पा रही। इधर एमबीएस अस्पताल, जो कोटा का प्रमुख सरकारी अस्पताल होने के बावजूद एमआरआई मशीन की अनुपस्थिति मरीजों के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है। इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को शहर में आने-जाने और निजी केंद्रों पर खर्च करने की दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।<br /><strong>- एड. बीटा स्वामी</strong></p>
<p><strong>लंबी प्रतीक्षा और सीमित सुविधाए बनी चुनौती</strong><br />ग्रामीण व आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीज इस स्थिति से सबसे अधिक प्रभावित हैं। कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल शहर में ही है, लेकिन लंबी प्रतीक्षा और सीमित सुविधायें मरीजों के लिए चुनौती बन गई है। स्थानीय निवासियों और सामाजिक कार्यकतार्ओं ने सरकार से मांग की है कि एमबीएस अस्पताल में एमआरआई मशीन स्थापित की जाए ।<br /><strong>- कुशाल सेन, समाजसेवी</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक ही एमआरआई मशीन है, जो काफी पुरानी है। ऐसे में उच्च गुणवत्तायुक्त मशीन स्थापित होनी चाहिए। हालांकि इसके लिए प्रपोजल दिया हुआ है। अस्पताल में मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा देने के लगातार प्रयास किया जा रहे हैं।<br /><strong>- डॉ. आशुतोष शर्मा, अधीक्षक मेडिकल कॉलेज अस्पताल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 24 Jan 2026 17:22:15 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मोखापाड़ा पशु चिकित्सालय: सोनोग्राफी मशीन पर जमी धूल, काफी समय से खराब होने से नहीं हो रहा उपयोग </title>
                                    <description><![CDATA[पशु चिकित्सालय में रोज 80 से 100 तक पशु उपचार के लिए लाए जाते हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mokhapaada-veterinary-hospital--sonography-machine-covered-in-dust--unused-for-a-long-time-due-to-being-out-of-order/article-138233"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px-(1)7.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के मोखापाड़ा स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय में सोनोग्राफी मशीन काफी समय से बंद पड़ी हुई है। आधुनिक जांच सुविधा के अभाव में चिकित्सकों को बीमार पशुओं का उपचार केवल लक्षणों और अनुभव के आधार पर करना पड़ रहा है। इससे न सिर्फ उपचार की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, बल्कि कई जटिल मामलों में पशुओं की जान पर भी जोखिम बढ़ गया है। पशु चिकित्सालय में रोजाना 80 से 100 तक पशु उपचार के लिए लाए जाते हैं। इनमें बड़ी संख्या दुधारू गाय-भैंसों, गर्भवती पशुओं और प्रजनन संबंधी समस्याओं वाले मामलों की होती है। सोनोग्राफी मशीन के जरिए गर्भ की स्थिति, भ्रूण का विकास, आंतरिक सूजन, ट्यूमर, चोट या संक्रमण की सटीक जानकारी मिलती है। सोनोग्राफी मशीन बंद होने से गर्भ जांच पूरी तरह प्रभावित हो गई है।</p>
<p><strong>निजी जांच केंद्रों का ही सहारा</strong><br />सरकारी अस्पताल में सोनोग्राफी सुविधा नहीं मिलने से पशुपालकों को निजी क्लीनिकों और जांच केंद्रों की ओर रुख करना पड़ रहा है। निजी स्तर पर सोनोग्राफी कराने पर 800 से 1500 रुपऐ तक खर्च आ रहा है, जो छोटे और मध्यम पशुपालकों के लिए बड़ी रकम है। कई पशुपालक आर्थिक तंगी के कारण जांच नहीं करा पा रहे हैं, जिससे बीमारी समय पर पकड़ में नहीं आ रही। चिकित्सकों के अनुसार सोनोग्राफी के बिना कई बार बीमारी की सही वजह स्पष्ट नहीं हो पाती। इससे इलाज ट्रायल-बेस पर करना पड़ता है, दवाइयों की अवधि बढ़ जाती है और पशु के स्वस्थ होने में अधिक समय लगता है। दुधारू पशुओं के मामलों में दूध उत्पादन घटने से पशुपालकों को सीधा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>नई मशीन की मांग, लेकिन अब तक इंतजार</strong><br />पशु चिकित्सालय प्रशासन की ओर से कई माह पहले ही नई सोनोग्राफी मशीन की मांग उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है। बजट और प्रक्रिया का हवाला देते हुए मामला लंबित बताया जा रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि आधुनिक मशीन मिलने से न सिर्फ जांच सटीक होगी, बल्कि रेफर के मामलों में भी कमी आएगी। स्थानीय पशुपालकों ने विभाग से मांग की है कि मोखापाड़ा पशु चिकित्सालय में जल्द से जल्द नई सोनोग्राफी मशीन उपलब्ध कराई जाए। ताकि क्षेत्र के हजारों पशुपालकों को राहत मिल सके और पशुओं का समय पर, सटीक और प्रभावी उपचार सुनिश्चित हो सके।</p>
<p>सरकारी अस्पताल में सोनोग्राफी सुविधा नहीं होने से हमें निजी जगह जांच करानी पड़ती है। खर्च ज्यादा आता है, ऊपर से समय भी बर्बाद होता है। गरीब पशुपालकों के लिए यह बड़ी समस्या है।<br /><strong>-रामलाल, पशुपालक</strong></p>
<p>पशु चिकित्सालय में सोनोग्राफी मशीन खराब पड़ी हुई है। नई मशीन के लिए डिमांड भेज रखी है। नई मशीन मिलने के बाद उपचार की गुणवत्ता काफी बेहतर हो सकेगी।<br /><strong>-डॉ. भंवर सिंह, उपनिदेशक, राजकीय पशु चिकित्सालय</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 03 Jan 2026 15:21:43 +0530</pubDate>
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                <title>दुर्गंध के बीच कैसे करें उपचार, डॉक्टर खुद होने लगे बीमार, बदबू के कारण सांस लेना  हो रहा  मुश्किल </title>
                                    <description><![CDATA[राजकीय पशु चिकित्सालय से नहीं उठ रहे मृत मवेशी  चिकित्सालय सटाफ व पशुपालक हो रहे परेशान।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/how-to-provide-treatment-amidst-the-stench--doctors-themselves-are-falling-ill--breathing-is-becoming-difficult-due-to-the-foul-smell/article-137177"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px45.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के मोखापाड़ा स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय में बीते कई दिनों से मृत मवेशियों को नहीं उठाए जाने से हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। अस्पताल परिसर में पड़े मृत पशुओं से उठ रही दुर्गंध के कारण न सिर्फ उपचार कार्य प्रभावित हो रहा है, बल्कि चिकित्सक, स्टाफ और पशुपालकों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में पशुपालक अपने बीमार मवेशियों को इलाज के लिए लेकर पहुंचते हैं, लेकिन परिसर में फैली बदबू के चलते वहां रुकना तक मुश्किल हो गया है। दुर्गंध के कारण कई पशु चिकित्सकों और कर्मचारियों की तबीयत बिगड़ चुकी है। इसके बावजूद मृत मवेशियों के निस्तारण को लेकर जिम्मेदार विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।</p>
<p><strong>कई चिकित्सकों की बिगड़ी तबीयत</strong><br />अस्पताल में कार्यरत पशु चिकित्सकों और कर्मचारियों ने बताया कि लगातार दुर्गंध के संपर्क में रहने से उन्हें सिरदर्द, उल्टी, चक्कर, सांस लेने में तकलीफ और आंखों में जलन जैसी समस्याएं हो रही हैं। कुछ चिकित्सकों को तो इलाज के बाद खुद चिकित्सकीय परामर्श लेना पड़ा है। एक चिकित्सक ने बताया कि मृत मवेशियों से निकलने वाली दुर्गंध में अमोनिया और सड़ांध की गैसें होती हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक हैं। लगातार ऐसे माहौल में काम करने से हमारी तबीयत बिगड़ रही है, फिर भी मजबूरी में हमें पशुओं का इलाज करना पड़ रहा है। एक अन्य चिकित्सक ने कहा कि यह सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो संक्रमण फैलने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।</p>
<p><strong>पशु उपचार कार्य भी प्रभावित</strong><br />पशु चिकित्सकों का कहना है कि दुर्गंध और अस्वच्छ वातावरण में पशुओं का इलाज करना बेहद कठिन हो गया है। संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ गया है, जिससे अन्य बीमार पशुओं की सेहत पर भी असर पड़ सकता है। दुर्गंध और असहज वातावरण के चलते कई बार पशुओं का उपचार जल्दी-जल्दी निपटाना पड़ रहा है या फिर पशुपालकों को इंतजार करने को कहा जा रहा है। इससे गंभीर रूप से बीमार पशुओं के इलाज में देरी हो रही है। चिकित्सकों का कहना है कि इस तरह की स्थिति में गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित उपचार संभव नहीं हो पा रहा है। बदबू के कारण सांस लेना तक मुश्किल हो रहा है।</p>
<p><strong>अब संक्रमण का खतरा बढ़ा</strong><br />पशु चिकित्सकों का कहना है कि मृत पशुओं के लंबे समय तक पड़े रहने से बैक्टीरिया और कीटाणुओं के पनपने का खतरा बढ़ जाता है। इससे न सिर्फ अस्पताल परिसर अस्वच्छ हो रहा है, बल्कि अन्य बीमार पशुओं में संक्रमण फैलने की आशंका भी बनी हुई है। दुर्गंध के कारण मक्खियों और अन्य कीटों की संख्या भी बढ़ गई है, जो बीमारियों को और फैलाने का कारण बन सकती हैं। चिकित्सकों का कहना है कि दुर्गंध इतनी तीव्र है कि उपचार कक्षों में लंबे समय तक रुकना मुश्किल हो गया है, जिससे नियमित जांच, इंजेक्शन, ड्रेसिंग और आॅपरेशन जैसी प्रक्रियाएं प्रभावित हो रही हैं।</p>
<p>-हमारे पशु बीमार हैं, उन्हें आराम और साफ माहौल चाहिए, लेकिन यहां बदबू के कारण पशु भी बेचैन हो जाते हैं। प्रशासन को यहां की समस्या का जल्द से जल्द समाधान करना चाहिए।<br /><strong>- रमेश गुर्जर, पशुपालक</strong></p>
<p>-राजकीय पशु चिकित्सालय में मृत मवेशियों को कई दिनों से नहीं उठाए जाने के कारण फैली दुर्गंध अब गंभीर स्वास्थ्य समस्या का रूप ले चुकी है। बदबू के चलते पशुओं की उपचार व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है। कई पशु चिकित्सकर्मियों की तबीयत तक बिगड़ चुकी है।<br /><strong>- डॉ. भंवर सिंह, वरिष्ठ पशु चिकित्सक</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Dec 2025 16:30:54 +0530</pubDate>
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                <title>पुरानी रंजिश के चलते युवक पर फायरिंग , बाल-बाल बचा </title>
                                    <description><![CDATA[युवक का अस्पताल में  उपचार चल रहा है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/firing-on-a-young-man-due-to-an-old-rivalry--narrowly-escapes/article-135467"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/2222.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । नयापुरा थाना क्षेत्र में पुरानी रंजिश के चलते युवक पर कुछ बदमाशों ने फायरिंग कर दी। गनीमत रही कि युवक बाल-बाल बच गया। गोली युवक के पेट को चीरती हुई निकल गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने युवक को तुरंत एमबीएस अस्पताल में भर्ती कराया है जहां उसका उपचार चल रहा है। पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की तलाश में जुट गई है। <br /> <br />पुलिस इंस्पेक्टर विनोद कुमार ने बताया कि लाडपुरा वाल्मीकि बस्ती प्रताप चौक में रहने वाला रोहित मंगलवार देर रात  बाइक से अपने छोटे भाई के साथ घर लौट रहा था। तभी आकाशवाणी के पास पीछे कार में सवार होकर आए बदमाशों ने कट मार कर उसे रोक लिया और उस पर दो-तीन फायर किए गोली उसके पेट को चीरती निकल गई। रोहित घायल  हो गया। इसके बाद बदमाश फरार हो गए। रोहित और सीताराम भूरिया के बीच पैसों के लेन देन को लेकर पुरानी रंजिश चल रही है। इनके बीच पूर्व में भी कहासुनी हो गई थी। उन्होंने बताया कि मामले में रोहित के बयान के आधार पर मुकदमा दर्ज किया है और आरोपियों को तलाश किया जा रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Dec 2025 14:21:27 +0530</pubDate>
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