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                <title>drinking - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>कापरेन में गहराया पेयजल संकट, तीन दिन से नल सूखे</title>
                                    <description><![CDATA[बस स्टैंड पर लगा वाटर कूलर भी पिछले तीन दिनों से बंद पड़ा होने से यात्री परेशान हो रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/drinking-water-crisis-deepens-in-kapren--taps-run-dry-for-three-days/article-150921"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(4)12.png" alt=""></a><br /><p>कापरेन। नगर पालिका क्षेत्र कापरेन में बढ़ती गर्मी के साथ ही पेयजल संकट गंभीर हो गया है। शहर के कई वार्डों में पिछले तीन दिनों से जलापूर्ति बाधित रहने के कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि नागरिकों को पीने के पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार वार्ड संख्या 24, 15 और 23 स्थित जोसया का खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीन दिनों से नल सूखे पड़े हैं। स्थानीय निवासियों नंदकिशोर खारोल, बबलू सेन, महावीर एवं सुरेश ने बताया कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है। उनका आरोप है कि कभी-कभी एक-दो दिन पानी की आपूर्ति कर फिर मोटर खराब होने का बहाना बनाकर सप्लाई बंद कर दी जाती है।</p>
<p>इधर बस स्टैंड पर नगर पालिका द्वारा लगाया गया वाटर कूलर भी पिछले तीन दिनों से बंद पड़ा है। पानी उपलब्ध नहीं होने से यात्रियों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। स्थानीय निवासी राजाराम गुर्जर ने कहा कि व्यस्त स्थान पर भी मूलभूत सुविधा का अभाव प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि जहां आमजन पानी के लिए परेशान हैं, वहीं जिम्मेदार अधिकारी स्थिति से बेखबर बने हुए हैं। लोगों ने शीघ्र जलापूर्ति व्यवस्था सुधारने की मांग की है।<br /> <br /><strong>यह कहा अधिकारी ने </strong></p>
<p>मोटर खराब होने के कारण सप्लाई व्यवस्था प्रभावित हुई थी, जिसे अब ठीक करवा लिया गया है और पानी की आपूर्ति शुरू कर दी गई है<br /><strong>-खुशबू मीणा, जेईएन, जलदाय विभाग </strong></p>
<p> टंकी में पानी भरवाकर जल्द ही नियमित सप्लाई सुनिश्चित की जाएगी।<br /><strong>- प्रवीण कुमार शर्मा, ईओ, नगर पालिका</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 15:22:31 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का : गंदगी हटा बनाए ‘जल मंदिर’, एडीएम सिटी ने किया वाटर कूलरों का उद्घाटन</title>
                                    <description><![CDATA[भीड़ प्रबंधन के लिए भामाशाह काउंटर को बाहर स्थानांतरित करने के निर्देश दिए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news--filth-cleared-to-create-a--jal-mandir---water-shrine---adm-city-inaugurates-water-coolers/article-149970"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/1200-x-600-px)17.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शिशु एवं मातृ चिकित्सालय जेके लोन अस्पताल में सुविधाओं के विस्तार और नवाचार की दिशा में शुक्रवार को अहम कदम उठाए गए। एडीएम सिटी अनिल कुमार सिंघल ने अस्पताल परिसर में स्थापित किए गए तीन नए वाटर कूलरों का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल की व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के लिए ई-वीसी रूम का प्रस्ताव मांगा और ओपीडी में भीड़ कम करने के लिए भामाशाह काउंटर को बाहर स्थानांतरित करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान एडीएम ने ओपीडी और डिस्चार्ज प्रक्रिया को और सरल बनाने के निर्देश दिए ताकि दूर-दराज से आने वाले मरीजों को कम से कम समय में इलाज मिल सके।</p>
<p><strong>आस्था से स्वच्छता का संदेश</strong><br />अस्पताल अधीक्षक डॉ. निर्मला शर्मा ने बताया कि परिसर के भीतर 80-80 लीटर क्षमता वाले तीन नए वाटर कूलर लगाए गए हैं। अस्पताल प्रशासन ने इसके लिए उन स्थानों को चिन्हित किया जहां पहले गंदगी रहती थी। अधीक्षक ने बताया कि इन जगहों को पूरी तरह साफ करवाकर 'जल मंदिर' के रूप में विकसित किया गया है। यहाँ एक ऊंचे प्लेटफॉर्म पर कांच के भीतर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की गई है, ताकि लोग आस्था के कारण पानी पीने वाले स्थान पर गंदगी न फैलाएं।</p>
<p><strong>भामाशाह काउंटर को बाहर बनवाने का सुझाव</strong><br />एडीएम सिटी अनिल कुमार सिंघल ने एनआईसीयू (NICU) और सीआईसीयू (CICU) के निरीक्षण के बाद ओपीडी में मरीजों की भारी भीड़ को देखा। उन्होंने भीड़ प्रबंधन हेतु सुझाव दिया कि ओपीडी ब्लॉक में दबाव कम करने के लिए भामाशाह काउंटर को बाहर डोम के पास खाली पड़े स्थान पर शिफ्ट किया जाए। इससे छुट्टी (डिस्चार्ज) मिलने वाले मरीजों को बाहर से ही लाभ मिल सकेगा और भीतर भीड़ जमा नहीं होगी।</p>
<p><strong>ई-वीसी रूम की जरूरत पर जोर</strong><br />डिजिटल दौर की आवश्यकताओं को देखते हुए एडीएम ने अस्पताल में ई-वीसी (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग) रूम तैयार करने के लिए प्रस्ताव मांगा है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन ट्रेनिंग, मेडिकल कोर्स और विशेषज्ञों के साथ टेस्ट रिपोर्ट साझा करने के लिए वीसी रूम की बहुत आवश्यकता है। अधीक्षक शर्मा ने बताया कि हमारे 2-3 डॉक्टर लीगल में ही लगे रहते है। वी सी रूम से हमें समय और कार्य प्रबंध्न में लाभ मिलेगा।</p>
<p><strong>नवज्योति ने पहले ही चेताया था</strong><br />अस्पताल परिसरों में गर्मी की शुरूआत के साथ ही मरीजाें और तीमरदारों के लिये पीने के पानी की कमीं को लेकर दैनिक नवज्याति ने ''एमबीएस में 3 प्याऊ फिर से शुरू 8 के लिये इंतजार'' प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी जिसके बाद राजकीय एमबीएस चिकित्सालय परिसर मेंं स्थित जे के लोन शिशु एवं मातृ चिकित्सालय में आज एक साथ 3 वाटर कूलरों को जनता को समर्पित कर दिया गया।<br /> <br />गर्मी को देखते हुये मरीजों की सुविधा के लिये जन सहयोग से ठण्ड़े पानी के लिये 3 जगह व्यवस्था की है। एडीएम साहब ने हमें सुझाव दिये है। इनके बारेे में हम काम करेंगे।<br /><strong>- डॉ. निर्मला शर्मा, अधीक्षक जे के लोन</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 13:02:35 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कस्बे में पेयजल स्रोतों की स्थिति खराब : अव्यवस्थित प्याऊ, जर्जर व गंदे जल स्रोत बने खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[खेळ में काई, गंदा पानी जमा होने व आसपास  जर्जर लोहे के टुकड़े बिखरे होने से मवेशियों की जान  को खतरा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/poor-state-of-drinking-water-sources-in-town--neglected-water-kiosks-and-dilapidated-sources-become-a-hazard/article-148852"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)-(3)5.png" alt=""></a><br /><p>कनवास। कनवास में पेयजल  व्यवस्था की बदहाल स्थिति अब गंभीर खतरे का रूप ले चुकी  है। गंदे पानी और  विद्युत करंट के खतरे से आमजन और मवेशियों की जान जोखिम में बनी हुई है।कस्बे में पेयजल स्रोतों की अनदेखी के चलते हालात चिंताजनक हो गए हैं। मवेशियों और आमजन के लिए बनाए गए जल स्रोत जहां अस्वच्छ हो चुके हैं, वहीं कई स्थानों पर करंट का - खतरा भी बना हुआ है। जानकारी के अनुसार कस्बे में मवेशियों के लिए केवल तीन पानी के खेळ हैं, जबकि पंचायत समिति सदस्य महावीर मेरोठा द्वारा ग्रामीणों और राहगीरों के लिए करीब 6 से 7 ठंडे पानी के प्याऊ स्थापित किए गए थे। लेकिन नियमित देखरेख के अभाव में इनकी स्थिति खराब हो चुकी है।</p>
<p>ग्रामीणों का कहना है कि प्याऊ पर उपलब्ध पानी गंदा और अस्वच्छ है, जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। वहीं कई प्याऊ विद्युत चालित होने के कारण उनमें पहले भी करंट आने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। मवेशियों के लिए बनी पानी की खेळों की स्थिति भी खराब है। वहां गंदा पानी जमा है और आसपास नुकीले व जर्जर लोहे के टुकड़े व पत्थर बिखरे पड़े हैं, जिससे मवेशियों के घायल होने की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों के अनुसार चित्तौड़ा कुंड स्थित खेळ पूरी तरह जर्जर हो चुकी है।</p>
<p><strong>ग्रामीणों ने लगाई प्रशासन से गुहार</strong><br />स्थानीय ग्रामीण घनश्याम कुमावत, राम प्रताप बेरवा और मुकुट मेरोठा ने बताया कि समस्या को लेकर कई बार प्रशासन को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। वहीं कपिल गौतम, बंसीलाल वर्मा, धर्मेंद्र बेरवा और मुकेश मिस्त्री ने बताया कि प्याऊ की नियमित सफाई और विद्युत कनेक्शन की जांच नहीं होने से खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जल स्रोतों की तत्काल सफाई, मरम्मत और सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए तथा विद्युत कनेक्शनों की जांच कर संभावित हादसों को रोका जाए।</p>
<p>मामले की जांच करवाकर सफाई करवा दी जाएगी तथा बिजली कनेक्शन की भी जांच कराई जाएगी। ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना न हो। जल्द ही समस्या का समाधान कर दिया जाएगा।<br /><strong>-कुशलेश्वर सिंह, बीडीओ, सांगोद</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 15:26:15 +0530</pubDate>
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                <title> जनता जल योजना का इंतजार, प्यासे सीमलिया के बाशिंदे </title>
                                    <description><![CDATA[आजादी के 80 साल बाद भी गांव में नहीं पहुंचीं बुनियादी सुविधाएं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/waiting-for-the-janta-jal-yojana--thirsty-residents-of-simaliya/article-146223"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)10.png" alt=""></a><br /><p>कनवास। कनवास उपखंड की ग्राम पंचायत बांस्याहेड़ी के सीमलिया गांव के ग्रामीण आजादी के लगभग 80 साल बाद भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। इस बीच कई सरकारें आई और गई। हर चुनाव से पहले जनप्रतिनिधियों ने कई वादे और दावे किए। लेकिन जमीनी स्तर पर आज तक कोई वादा पूरा होता नहीं लग रहा। सरकार विकास और जल जीवन मिशन के तहत हर गांव में साफ पीने का पानी पहुंचाने के दावे करे, लेकिन हकीकत यह है कि आज तक इस गांव के लोग पेयजन की सुविधा से वंचित हैं। गांव में लंबे समय से पीने के पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि सीमलिया गांव अब तक जनता जल योजना से नहीं जुड़ा है। पानी की किल्लत के चलते ग्रामीणों ने एक पुराने कुएं में सामूहिक रूप से अपनी मोटरें डाल रखी हैं और इन्हीं से किसी तरह पीने के पानी की व्यवस्था की जा रही है। इस अस्थायी व्यवस्था को बनाए रखने के लिए ग्रामीणों को महंगी मोटर, पाइप, मिस्त्री की मजदूरी और बिजली बिल जैसे अतिरिक्त खर्च उठाने पड़ रहे हैं।</p>
<p><strong>गर्मी के मौसम में बढ़ जाता है संकट</strong><br />ग्रामीणों ने बताया कि गर्मी का मौसम शुरू होते ही पानी का संकट और गहरा जाता है। सीमित जलस्रोतों के कारण ग्रामीणों को रातभर पानी के लिए जागना पड़ता है। कई बार महिलाएं और बुजुर्ग देर रात तक पानी भरने के लिए कतार में खड़े रहते हैं। इससे गांव में रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है।</p>
<p><strong>जनता जल योजना से जोड़ने की मांग</strong><br />ग्रामवासी मुकेश गुर्जर सहित अन्य ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि सीमलिया को शीघ्र जनता जल योजना से जोड़ा जाए और स्थायी जल व्यवस्था की जाए। ताकि लोगों को पीने के पानी के लिए रातभर परेशान न होना पड़े।</p>
<p>ग्राम पंचायत बांस्याहेड़ी के अंतर्गत आने वाले ग्राम सीमलिया का टेंडर जारी हो चुका है। जल्द ही हर घर नल योजना के तहत कार्य प्रारंभ किया जाएगा।<br /><strong>- राकेश मीणा, कनिष्ठ अभियंता, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Mar 2026 15:16:57 +0530</pubDate>
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                <title>लापरवाही : गहराया पेयजल संकट, घर-घर नल फेल, जल जीवन मिशन योजना का नहीं मिल रहा फायदा</title>
                                    <description><![CDATA[डुंडी ग्राम में नल व्यवस्था को लेकर हो रही है समस्या]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/negligence--drinking-water-crisis-deepens--taps-fail-in-every-home--and-the-jal-jeevan-mission-scheme-is-not-providing-benefits/article-129012"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/copy-of-news-(5)11.png" alt=""></a><br /><p> खानपुर।  खानपुर के पास स्थित ग्राम डुंडी में जल जीवन मिशन योजना के तहत ग्रामवासियों के नल लगवाए गए थे। जिसमें भीमसागर से पानी आता है, लेकिन ग्रामीण वासियों का कहना है कि नल तो आता है लेकिन खातियो के मोहल्ले में पीछे की साइड पर नल में से एक बूंद भी नहीं टपकती है, इसके लिए खातियो के मोहल्ले वालों को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। जल ही जीवन है इसके बिना कुछ नहीं है। व्यक्ति खाना खाकर जिंदा रह सकता है लेकिन पानी के बिना नहीं रह सकता। जल जीवन मिशन योजना के तहत घर-घर नल लगे थे लेकिन उनका ग्रामीण वासियों को अभी कुछ फायदा नहीं हो रहा है। ग्रामीणों ने जेईएन मुस्ताक अली को समस्या से अवगत कराया, उन्होंने समस्या को समझा और तुरंत इस पर एक्शन लेने के लिए कहा क्योंकि नल नहीं आने पर कितनी परेशानी का सामना करना पड़ता है। पानी के लिए खातियों के मोहल्ले वालों को पानी लेने के लिए थाने की टंकी के पास आना पड़ता है और थाने की टंकी से पानी भरते हैं तो वहां से लगभग 2 किलोमीटर दूर पैदल चलकर पानी लाना पड़ता है। ग्रामीणों ने मांग की है कि जल्द से जल्द पानी की समस्या का समाधान किया जाए। </p>
<p>जल जीवन मिशन योजना के तहत नल लगवाए गए थे लेकिन इन नलों में पानी नहीं आ रहा है। <br /><strong>-पवन गौड़, कस्बेवासी </strong></p>
<p>पीने के पानी के लिए दूर दराज से पानी लाना पड़ता है। ग्रामीणो को पानी की समस्या के  समाधान की मांग की है। <br /><strong>-लेखराज मेहता, कस्बेवासी</strong></p>
<p>नलों में पानी नहीं आने से ग्रामीणों को ट्यूबवेल व कुओं का सहारा लेना पड़ रहा है। <br /><strong>-हरिराम मेहता, कस्बेवासी </strong></p>
<p>ग्रामीणों की सुविधा के लिए नल तो लगवा दिए लेकिन पानी नहीं आ रहा है। <br /><strong>-रमेश मेहता, कस्बेवासी</strong></p>
<p>सुबह जल्द उठकर दूर दराज से पानी लाना पड़ता है काफी समस्या आती है। समस्या का समाधान किया जाना चाहिए। <br /><strong>-बिंदराज मेहरा, कस्बेवासी</strong></p>
<p>पानी की समस्या को दिखाकर दो या तीन दिन में समस्या का निवारण कर दिया जाएगा और नल व्यवस्था सुचारू रूप से चालू हो जाएगी।<br /><strong>- सहायक अभियंता मुस्ताक अली, पी एच ई डी खानपुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Oct 2025 16:12:15 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>अनदेखी: सातलखेड़ी में वर्षों से पेयजल टंकी की नहीं हुई सफाई</title>
                                    <description><![CDATA[टंकी के आसपास भी फैली हुई है गंदगी, देखरेख नहीं होने से परिसर में उगे झाड़-झंखाड़]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/neglect--drinking-water-tank-has-not-been-cleaned-for-years-in-satalkhedi/article-120044"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/882roer-(5)1.png" alt=""></a><br /><p>सातलखेड़ी। सातलखेड़ी में घर-घर पेयजल सप्लाई करने के लिए बनी पानी की टंकी की हालत काफी खराब है। इसके आसपास गंदगी के ढेर जमा हैं। जानकारी के अनुसार खान और गांव के बीच बनी इस टंकी पर किसी का ध्यान नहीं होने से दिनों-दिन इसकी हालत बिगड़ती जा रही है। कस्बे में इस पानी की टंकी को बने हुए करीब 25 से 30 साल हो गए हैं। देखरेख के अभाव में अब यह जर्जर होने लगी है। इस टंकी से पाइप लाइन के जरिए सातलखेड़ी के घरों में कनेक्शन दिए गए हैं। लेकिन इस टंकी के आसपास गंदगी का अंबार लगा हुआ है। इस टंकी के माध्यम से नई बस्ती, यादव मोहल्ला, वार्ड नम्बर 21, वार्ड नम्बर 10 व गांव सातलखेड़ी के आधे से ज्यादा घरों में जल वितरण किया जाता है। लेकिन इसकी व्यवस्थाओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। </p>
<p><strong>नहीं होती नियमित सफाई:</strong> एक ओर जहां पानी की टंकी दुर्दशा का शिकार हो रही है, वहीं दूसरी ओर साफ-सफाई नहीं होने से कई बार दूषित पेयजल होने की आशंका बनी रहती है। जिससे पेट संबंधी रोगों के साथ डायरिया जैसी जानलेवा बीमारी फैल सकती है। </p>
<p><strong>टंकी के आसपास जमा हो रही है गंदगी </strong><br />कस्बे में टंकी का निर्माण तो कर दिया गया है। लेकिन देखरेख के अभाव में टंकी के आसपास काफी गंदगी व झाड़-झंकाड़ का ढेर लगा हुआ है। इस टंी से प्रतिदिन जल सप्लाई की जाती है। जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर खराब असर पड़ने की आशंका बनी रहती है। वहीं गंदगी के कारण बारिश का पानी भी वहीं जमा हो रहा है। जिससे वायरल सहित अन्य मौसमी बीमारियां फैलन की आशंका भी बनी हुई है।  साथ ही टंकी से निकलने वाला पानी भी परिसर में ही जमा हो रहा है। जिससे आसपास कीचड़ फैला हुआ है। साथ ही टंकियों के आसपास घास भी हो रही है। पंचायत द्वारा नगर में स्वच्छता अभियान चलाया जाता है। लेकिन रोजाना की व्यवस्थाओं पर ध्यान नहीं दिया जाता। </p>
<p>समय-समय पर पानी की टंकी की सफाई करवाई जानी चाहिए। क्योंकि अधिकतर बीमारियों का कारण दूषित पानी पीना है। साथ ही परिसर में हो रही गंदगी को भी साफ करवाया जाना चाहिए। <br /><strong>-अजय वर्मा, उपभोक्ता, सातलखेड़ी</strong></p>
<p>सातलखेड़ी खान व गांव सातलखेड़ी के बीच में जो पानी की टंकी है, उसकी जल्द ही सफाई करवाई जाएगी। साथ ही परिसर में जो गंदगी हो रही है उसे भी साफ करवाया जाएगा। <br /><strong>-बच्चू सिंह मीणा, एईएन, जलदाय विभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Jul 2025 15:34:30 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>छबड़ा के खेल मैदान में जन सुविधाओं का अभाव, बड़ी संख्या में घूमने आते हैं महिला-पुरूष</title>
                                    <description><![CDATA[पालिका प्रशासन की उदासीनता से पीने के पानी तक की नहीं है व्यवस्था]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/lack-of-public-facilities-in-chhabra-s-playground/article-116247"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/rtroer-(1)8.png" alt=""></a><br /><p>छबड़ा। छबड़ा कस्बे के एक मात्र सीनियर हायर सैकंडरी के खेल मैदान पर पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं होने एवं चारों ओर गन्दगी का आलम पसरा रहने से रोजाना मोर्निग एवं ईवनिंग वाक पर आने वालों, अपनी खेल प्रतिभा को निखारने आने वाले खिलाड़ियों, पुलिस सेना भर्ती की तेयारियों करने वाले छात्रों तथा छुट्टियों का आनन्द उठाने के लिये आ रहे छोटे बच्चों के साथ ही ग्रामीण क्षेत्र से आकर तपती दोपहर में यहां थोड़ी देर सुस्ताने वाले ग्रामीणों को पीने के पानी की समस्या से जूझना पड़ता है। आश्चर्य तो इस बात का हे की लगभग 25 वर्षो पूर्व बने इस खेल मैदान पर जन सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिये न तो नगर पालिका ने ध्यान दिया न किसी भी दल के जनप्रतिनिधियों ने। भाजपा के वरिष्ठ नेता संजय नामदेव ने लोगों की इस पीड़ा का समाधान करने का बीड़ा उठाते हुए क्षेत्रीय विधायक एवं पालिका प्रसासन को पत्र लिखकर खेल में दान पर शीघ्र टुयुबवेल एवं वाटर कूलर लगाने तथा लोगों के स्वास्थ्य के तहत खेल मैदान की सफाई कराने की मांग की हे  ताकी लोगों को राहत मिल सके।</p>
<p><strong>बड़ी संख्या में घूमने आते हैं महिला-पुरूष</strong><br />कस्बे के चारों ओर ईंट भट्ठे संचालित होने के चलते सुबह शाम खेल मैदान पर सेकंडों महिला पुरुष एवं युवक युवतियां यहां स्वास्थ्य की दृष्टी से घूमने आते हैं। भले ही सर्दी में पानी की कमी महसूस न हो लेकिन गर्मी में घूमने व्यायाम करने के दोरान प्यास सताने लगती है। जिससे बड़ी संख्या में लोग जल्दी ही लोट जाते हे तथा बहुत से लोग पानी की बोतल साथ लाते हैं।</p>
<p><strong>खिलाड़ी प्रतिदिन करते हैं अभ्यास</strong><br />विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले खिलाड़ी तो रोजाना यहां अभियान करते ही हे साथ ही प्रतिदिन खिलाड़ी विशेष तोर से क्रिकेट के शोकीन भी यहां आते हें लेकिन पानी की कमी से इन्हें भी जूझना पड़ता है।</p>
<p><strong>सेना एवं पुलिस भर्ती की तैयारी के लिए बहाते हैं पसीना:</strong> यहां रोजाना पुलिस एवं सेना भर्ती के साथ शारिरिक क्षमता वाली अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तेयारी करने वाले छात्र छात्राएं रोजाना यहां आकर दोड एवं व्यायाम के साथ पसीना बहाते हैं तथा नोकरी पाने की लालसा मे अपनी क्षमता से सभी अधिक परिश्रृम करते हैं।</p>
<p><strong>छोटे-छोटे बच्चे भी आते हैं छुट्टियों का आनन्द उठाने </strong><br />स्कूल में पढ़ने जाने वाले बच्चों का गर्मी की छुट्टियां मोज मस्ती करने का सबसे उत्तम समय होता हे तथा वह घर से क्रिकेट का सामान लाकर क्रिकेट खेलने का आनन्द उठाते हैं। लेकिन इस दौरान लगने वाली प्यास आनंद में खलल डाल देती है।</p>
<p><strong>गंदगी का अंबार होने से होती है परेशानी</strong><br />खेल में दान पर लम्बे समय तक सफाई न होने से यहां गन्दगी का आलम पसरा रहता हे जिससे उठती बदबू दोड भाग कर स्वास्थ्य सुधारने आये लोगों के स्वास्थ्य पर उल्टा प्रभाव डालती है।</p>
<p>हैंडपम्प लगाने का कार्य जलदाय विभाग द्वारा किया जा रहा है तथा जहां तक मेरी जानकारी में आया है, विधायक ने जलदाय विभाग को यहां शीघ्र हैंडपंप लगाने के निर्देश दिए हैं।<br /><strong>-यादवेन्द्र यादव, तहसीलदार एवं ईओ, नगर पालिका, छबड़ा </strong></p>
<p>खेल मैदान पर पानी की किसी रे तरह की कोई सुविधा नहीं है। मैंने विधायक सिंघवी को एवं पालिका प्रसासक को पत्र लिखकर यहां टुयुबवेल खुदवाने एवं वाटर कूलर लगवाने की मांग की है। ताकि लोगों को राहत मिल सके। <br /><strong>-संजय नामदेव, वरिष्ठ भाजपा नेता</strong></p>
<p>मैं साथियों सहित रोजाना सुबह शाम घूमने जाता हूं। लेकिन खेल मैदान पर पानी की कोई व्यवस्था नहीं है तथा सफाई नहीं होने से गन्दगी भी पसरी रहती है।<br /><strong>-सीपी गेरा, पूर्व भाजपा नगर अध्यक्ष</strong><br /> <br />खेल मैदान पर प्रतिदिन सैंकडों महिला पुरुष घूमने आते हैं। लेकिन पानी की समस्या के चलते सभी परेशान होते हैं। जबकि यहां डाक्टर, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारी भी आते हैं।<br /><strong>-प्रवीण जैन, रिटायर्ड कर्मचारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Jun 2025 15:53:31 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बदलाव की आस में थम गया वक्त : आज भी मूलभूत सुविधा पानी के लिए तरस रही पीथपुर ग्राम पंचायत, हर चेहरे पर एक ही सवाल कब मिलेगा पानी, </title>
                                    <description><![CDATA[ गांव की हालत इतनी बदतर है कि यहां की महिलाएं आज भी मीलों पैदल चलकर, सिर पर मटके उठाए कुएं से पानी लाने को मजबूर हैं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/time-stopped-in-the-hope-of-change--pots-on-heads/article-114654"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtrer-(8)5.png" alt=""></a><br /><p>छीपाबड़ौद। एक ओर सरकार हर घर नल से जल का दावा कर रही है। वहीं छीपाबड़ौद तहसील की पीथपुर ग्राम पंचायत आज भी मूलभूत सुविधा पानी के लिए तरस रही है। गांव की हालत इतनी बदतर है कि यहां की महिलाएं आज भी मीलों पैदल चलकर, सिर पर मटके उठाए कुएं से पानी लाने को मजबूर हैं। ये मटके केवल पानी नहीं, बल्कि वर्षों से झेली जा रही उपेक्षा और पीड़ा का भार ढो रहे हैं। पूरे पंचायत क्षेत्र में न तो एक भी हैडपंप है, न ही जल संग्रहण टंकी। गर्मी के मौसम में जब कुएं भी सूखने लगते हैं, तब हालात और भी भयावह हो जाते हैं। महिलाएं सूरज चढ़ने से पहले ही निकल पड़ती हैं ताकि दिन के लिए थोड़ा बहुत पानी मिल सके। बच्चों की प्यास, बुजुर्गों की बेबसी और महिलाओं की थकान इस गांव की रोजमर्रा की कहानी बन गई है। धूप में तपती धरती, सर पर पानी के मटके उठाए महिलाएं, और हर चेहरे पर एक ही सवाल कब मिलेगा पानी। </p>
<p><strong>अब तो उम्मीद करना भी छोड़ दिया </strong><br />गांववासियों ने बताया कि वे कई बार पंचायत और अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं। लेकिन अभी तक सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं। ग्रामीण महिला कमला बाई ने कहा कि हमने तो अब उम्मीद करना भी छोड़ दिया है, बस जी रहे हैं जैसे तैसे। </p>
<p><strong>सरकार और प्रशासन से गुहार</strong><br />अब गांववाले एक बार फिर उम्मीद लगाए बैठे हैं कि शायद उनकी इस आवाज को कोई सुने, और जल जैसी बुनियादी जरूरत के लिए कोई स्थायी समाधान निकले। </p>
<p>हम रोज दो किलोमीटर दूर कुएं से पानी लाने जाते हैं। कभी-कभी तो दो-तीन चक्कर लगाने पड़ते हैं, तब जाकर घर का काम चलता है। शरीर थक जाता है, लेकिन कोई उपाय नहीं है। कई बार हाथ-पैर छिल जाते हैं, पर कोई देखने वाला नहीं। अब तो पानी के लिए जीना भी बोझ लगने लगा है। <br /><strong>-रामप्यारी, ग्रामीण महिला</strong></p>
<p>हमने पंचायत में कई बार आवेदन दिए। अधिकारियों से गुहार लगाई। लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ। गांव में न हैंडपंप है, और न ही कोई टंकी। बरसों से हालात ऐसे ही हैं। गर्मियों में तो हालात और बिगड़ जाते हैं। अब हमें समझ नहीं आता कि कहां जाएं, किससे उम्मीद करें।       <br /><strong> -घासीलाल, ग्रामीण</strong></p>
<p>पेयजल समस्या हमारे गांव की गंभीर समस्या है। हम इसे लेकर कई बार संबंधित विभागों को अवगत करा चुके हैं। पर इस ओर सरकार ने आजतक ध्यान नहीं दिया है। हम खुद चाहते हैं कि गांव की महिलाएं और बच्चे इस संकट से बाहर आएं। मैं प्रशासन से निवेदन करता हूं कि प्राथमिकता के आधार पर पीथपुर की पेयजल योजना को पूर्ण कराया जाए। <br /><strong>-कौशल किशोर, सरपंच, पीथपुर ग्राम पंचायत</strong></p>
<p>इस समस्या पर ध्यान दिया जाएगा। गांव में निरीक्षण कर सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।<br /><strong>-रवि गुप्ता, सहायक अभियंता, जलदाय विभाग, छीपाबड़ौद</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 May 2025 18:11:35 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का - गर्मी में अब प्यासे कंठों की बुझने लगी प्यास </title>
                                    <description><![CDATA[थोक फलसब्जी मंडी परिसर में वाटर कूलर खराब होने के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-impact-of-the-news---thirst-of-thirsty-throats-is-now-being-quenched-in-the-summer/article-112087"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/rtrer-(3)12.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । भीषण गर्मी के दौर में शहर की सबसे बड़ी थोक फलसब्जी मंडी में प्यासे भटक रहे ग्राहकों, मजूदरों व सब्जी विक्रेताओं को अब राहत मिल गई। मंडी प्रशासन ने यहां खराब पड़े तीन वाटर कूलरों को चालू करवा दिया है। वहीं चार प्याऊ भी शुरू कर दी गई। इसके अलावा ठेलों के माध्यम से भी मंडी परिसर में शीतल जल पिलाया जाने लगा है। इन दिनों भीषण गर्मी का दौर चल रहा है। इसके बाद भी मंडी परिसर में पीने के पानी की समुचित व्यवस्था नहीं थी। इससे मंडी में आने वाले किसान, मजदूर, ग्राहक और व्यापारी ठंडे पानी के लिए तरस रहे थे। अब पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था होने से सभी को काफी राहत मिली है।</p>
<p><strong>मंडी परिसर में घूमकर पिला रहे पानी</strong><br />थोक फलसब्जी मंडी परिसर में वाटर कूलर खराब होने के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। चार वाटर कूलर भी शोपीस बने हुए थे और प्याऊ का संचालन भी बंद था। अब मंडी प्रशासन ने चार में से तीन वाटर कूलरों को ठीक करवा दिया है। वहीं चौथे कूलर को भी ठीक करवाया जा रहा है। इसके अलावा परिसर में अलग-अलग स्थानों पर बनी हुई पक्की प्याऊ को भी शुरू कर दिया है। मंडी प्रशासन द्वारा तीन ठेलों द्वारा भी परिसर में घूमकर ग्राहकों और सब्जी विक्रेताओं को पानी पिलाने का कार्य भी शुरू कर दिया है। इसके लिए अलग से बर्फ का इंतजाम किया गया है, ताकि लोगों को शीतल जल उपलब्ध हो सके।  </p>
<p><strong>नवज्योति ने उठाई परेशानी तो हरकत में आया मंडी प्रशासन</strong><br />भीषण गर्मी के दौर में भी थोक फल मंडी परिसर में पेयजल की व्यवस्था नहीं होने के सम्बंध में 19 अप्रैल को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था। इसमें बताया था कि मंडी परिसर में किसान, व्यापारी व मजदूर ठंडे पानी के लिए तरस रहे हैं। मंडी में चार वाटर कूलर लगे हुए हैं। काफी समय से इनकी मरम्मत नहीं हो पाई है। इस कारण इनका उपयोग नहीं हो पा रहा है। ऐसे में गर्मी के मौसम में लोगों का हलक तर नहीं हो पा रहा है। मंडी प्रतिदिन काफी संख्या में किसान व व्यापारी दूर दराज क्षेत्रों से आते है। वाटर कूलर खराब होने से उन्हें ठंडा पानी नहीं मिल पा रहा है। </p>
<p>गर्मी के मौसम में मंडी परिसर में पेयजल की उचित व्यवस्था नहीं होने से परेशानी हो रही थी। अब मंडी प्रशासन ने खराब वाटर कूलरों को ठीक करवा कर चालू करवा दिया है। इससे अब राहत मिली है।<br /><strong>- भीमाराम डांगी, श्रमिक</strong></p>
<p>मंडी में दोपहर तक कारोबार चलता है। इसके बावजूद पानी की व्यवस्था नहीं थी। बाहर से पानी लाना पड़ता था। अब सुबह से ठेले पर चलती फिरती प्याऊ चालू हो गई है। जिससे ठंडे पानी के लिए अब भटकना नहीं पड़ता है।<br /><strong>- नितेष सैनी, सब्जी विक्रेता</strong></p>
<p>मंडी परिसर में खराब पड़े वाटर कूलरों को ठीक करवा दिया है और चार प्याऊ भी संचालित कर दी है। इसके अलावा ठेलों में पानी के मटके रखकर परिसर में घुमाया जा रहा है ताकि किसी को पानी की दिक्कत नहीं आए। <br /><strong>- विश्वजीत सिंह, सचिव, थोक फलसब्जी मंडी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 26 Apr 2025 15:33:28 +0530</pubDate>
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                <title>सहरिया बस्ती में 10 दिनों से जल संकट</title>
                                    <description><![CDATA[पानी को लेकर बस्ती में तनाव का माहौल बनता जा रहा है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/water-crisis-in-sahariya-colony-since-10-days/article-110553"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/257rtrer-(2)33.png" alt=""></a><br /><p>राजपुर। क्षेत्र की राजपुर ग्राम पंचायत स्थित सहरिया बस्ती के लोग बीते 10 दिनों से गंभीर जल संकट का सामना कर रहे हैं। इस बस्ती का एकमात्र सहारा सरकारी ट्यूबवेल पिछले 10 दिनों से खराब पड़ा है। जिससे बस्तीवासियों को पीने तक के पानी के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। अरविंद, नारायण लाल सहरिया,  काशीलाल गणेशलाल सहरिया, जानकीलाल, लखन सहरिया, राजेंद्र सहरिया,सहित अन्य स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार जिम्मेदारों को इस समस्या की जानकारी दी लेकिन अब तक न तो कोई मिस्त्री आया और न ही ट्यूबवेल की मरम्मत के लिए कोई प्रयास किया गया। गर्मी के इस भीषण मौसम में जहां पारा तेजी से चढ़ रहा है, वहीं लोगों को अपनी बुनियादी जरूरत पानी के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों से पानी लाना पड़ रहा है। बस्ती के वासियों ने बताया कि बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। कई लोग रोजाना एक किलोमीटर दूर से पानी लाकर पीने, नहाने और खाना बनाने की जरूरतें पूरी कर रहे हैं। स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि पानी को लेकर बस्ती में तनाव का माहौल बनता जा रहा है।</p>
<p><strong>पंचायत की उदासीनता बनी परेशानी की वजह</strong><br />ग्राम पंचायत और संबंधित अधिकारियों को बार-बार सूचना देने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। न तो ट्यूबवेल की मरम्मत हुई और न ही वैकल्पिक जलापूर्ति की कोई व्यवस्था की गई है।</p>
<p><strong>ग्रामीणों ने की मांग</strong><br />बस्तीवासियों ने जिला प्रशासन और जलदाय विभाग से जल्द से जल्द इस मुद्दे पर संज्ञान लेकर ट्यूबवेल की मरम्मत कराने और जब तक मरम्मत नहीं होती, तब तक टैंकर से जल आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है। यदि जल्द ही इस ओर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। ऐसे में स्थानीय ग्राम पंचायत प्रशासन की लापरवाही ग्रामीणों की नाराजगी का कारण बन सकती है।</p>
<p><strong>जल्द करें समाधान</strong><br />बस्तीवासियों को पीने तक के पानी के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। जल्दी ही समस्या का समाधान करवाया जाए।<br /><strong>- मुन्ना सहरिया, बस्तीवासी। </strong></p>
<p>समस्या को लेकर कई बार जिम्मेदारों को अवगत करा चुके है लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है। <br /><strong>-रवि सहरिया, ग्रामीण। </strong></p>
<p><strong>पर्याप्त मात्रा में नहीं है पानी</strong><br />गर्मी में दूर-दराज के क्षेत्रों से पानी लाना पड़ रहा है। जिसमें अधिक समय पानी लाने में निकल जाता है और पानी भी पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल रहा है। <br /><strong>- बसंती बाई सहरिया, अनारी सहरिया, बस्तीवासी।     </strong></p>
<p><strong>जल्द करवाएंगे समाधान</strong><br />सहरिया बस्ती में पानी की समस्या की जानकारी मिली है। शाहाबाद विकास अधिकारी को अवगत करा दिया है। इस मामले को लेकर जल्दी समाधान करवाएंगे।<br /><strong>- जबर सिंह, एडीएम, शाहाबाद।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 12 Apr 2025 15:41:31 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कीचड़-कचरे और झाड़ियों से अटी ‘जीवन दायिनी’, नदियां पूरी तरह से हो सकती है गंदे नाले में तब्दील </title>
                                    <description><![CDATA[कभी छीपाबड़ौद की शान मानी जाने वाली नदियां आज अपनी दुर्दशा पर आंसू बहाने को मजबूर है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/jeevan-daayini--is-filled-with-mud--garbage-and-bushes/article-108055"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/news-(1)29.png" alt=""></a><br /><p>छीपाबड़ौद। कभी छीपाबड़ौद की शान मानी जाने वाली नदियां आज अपनी दुर्दशा पर आंसू बहाने को मजबूर है। जिन जलधाराओं ने कभी पूरे क्षेत्र को तृप्त किया, खेतों को सिंचाई दी और हरियाली का आधार बनीं, वे अब गंदगी और कूड़े के ढेर में तब्दील हो रही हैं। स्थिति इतनी भयावह हो गई है कि इन नदियों का पानी पीना तो दूर, इनके किनारे खड़ा होना भी मुश्किल हो गया है।</p>
<p><strong> पर्यावरण और स्वास्थ्य पर मंडराता खतरा</strong><br />गंदगी और कूड़े-कचरे की वजह से मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है। जिससे मलेरिया, डेंगू और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा बना हुआ है। बारिश के दिनों में स्थिति और विकट हो जाती है, जब गंदा पानी आसपास के इलाकों में फैलने लगता है। यह समस्या न केवल इंसानों के लिए बल्कि पशुओं और पक्षियों के लिए भी जानलेवा साबित हो रही है।</p>
<p><strong>नदियां पूरी तरह से हो सकती है गंदे नाले में तब्दील</strong><br />अगर अब भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो आने वाले कुछ वर्षों में छीपाबड़ौद की ये नदियां पूरी तरह से गंदे नाले में बदल जाएगी। सवाल यह है कि क्या हम अपनी इस अमूल्य धरोहर को बचाने के लिए आगे आएंगे, या इसे यूं ही नष्ट होने देंगे?</p>
<p><strong>समस्या का निकाले स्थायी समाधान</strong><br />अब समय आ गया है कि प्रशासन और जनता मिलकर इस समस्या का स्थायी समाधान निकालें। कुछ आवश्यक कदम जो तुरंत उठाए जाने चाहिए। कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। नदी में कूड़ा डालने वालों पर सख्त जुर्माना लगाया जाए।  नगर प्रशासन द्वारा नियमित सफाई अभियान चलाया जाए।आमजन में जागरूकता पैदा की जाए। लोगों को समझाया जाए कि नदियां हमारी धरोहर हैं और इन्हें बचाना हमारी जिम्मेदारी है।  कूड़ा कचरे का निस्तारण कराया जाए। नदी के पास कूड़ा फैंकने के बजाय उचित स्थानों पर कूड़ेदान लगाए जाएं।</p>
<p><strong>कौन जिम्मेदार? प्रशासन या जनता!</strong><br />स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस बदहाली के लिए सिर्फ आम लोग ही नहीं, बल्कि प्रशासन और पंचायत भी बराबर के दोषी हैं। सफाई कर्मचारियों द्वारा कस्बे का कचरा इन नदियों में फैंक दिया जाता है। घरों और दुकानों से निकलने वाला कूड़ा-कचरा भी सीधे जलधाराओं में बहा दिया जाता है। कई बार इस मुद्दे को अधिकारियों तक पहुंचाने की कोशिश की गई, लेकिन हर बार आश्वासनों के सिवा कुछ हाथ नहीं आया।</p>
<p>नदियों का पानी पीना तो दूर अब इनके किनारे खड़ा रहना भी मुश्किल हो रहा है। फैैल रही गंदगी की दुर्गंध से वातावरण दूषित हो रहा है। <br /><strong>- कन्हैयालाल, कस्बेवासी। </strong></p>
<p>कई बार इस समस्या को अधिकारियों तक पहुंचाने की कोशिश की गई, लेकिन हर बार आश्वासनों के अलावा कुछ हाथ नहीं लगा। <br /><strong>- ओमप्रकाश, कस्बेवासी। </strong></p>
<p>स्वच्छता को लेकर सरकार और प्रशासन पूरी तरह से प्रयासरत हैं, लेकिन आमजन की भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कचरा इधर-उधर नहीं फै कें और अपने आसपास की सफाई बनाए रखें। यदि किसी भी ग्राम पंचायत द्वारा कचरा नदियों या अन्य जल स्रोतों में फेंका जा रहा है, तो यह गंभीर विषय है। हम इस ओर कड़ी निगरानी रखेंगे और आवश्यक कार्रवाई करते हुए संबंधित पंचायतों को पाबंद करेंगे ताकि स्वच्छता अभियान को पूरी प्रभावशीलता के साथ लागू किया जा सके। <br /><strong>- सूर्यप्रकाश जारवल, विकास अधिकारी, पंचायत समिति छीपाबड़ौद। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Mar 2025 15:16:04 +0530</pubDate>
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                <title>पानी को तरस रहे लावारिस बेजुबान </title>
                                    <description><![CDATA[ पिछले कुछ दिनों से गर्मी लगातार बढ़ती जा रही है। तेज गर्मी में जहां आमजन परेशान है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/unclaimed-animals-are-yearning-for-water/article-79532"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/pani-ko-taras-rahe-lavarish-bejuban...bundi-news-2705.2024.jpg" alt=""></a><br /><p>अरनेठा। कस्बे में पिछले कुछ दिनों से चल रही भीषण गर्मी में लावारिस गोवंश और मवेशियों के लिए पेयजल की समस्या खड़ी हो गई है। ग्रामीणों ने जिम्मेदारों से उचित व्यवस्था की मांग की है। ग्रामीणों ने बताया कस्बे में आवारा गोवंश की संख्या अधिक हैं । पिछले कुछ दिनों से गर्मी लगातार बढ़ती जा रही है। तेज गर्मी में जहां आमजन परेशान है। वही लावारिस गोवंश के लिए पीने के लिए पानी का ठीक प्रकार से व्यवस्था नहीं होने से पेयजल को लेकर इधर-उधर भटक रहे हैं। ऐसे में कस्बे के मुख्य मुख्य स्थानों पर पानी की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। ताकि गोवंश को पेयजल की समस्या ना हो उधर इसी प्रकार कस्बे के युवा शिव सुमन, राकेश गुर्जर, ओमाशंकर सैनी, जगदीश सुमन, पिंटू सैनी आदि ने भी कस्बे में आवारा गोवंश हेतु पेयजल व्यवस्था की मांग की हैं । </p>
<p> लावारिस गोवंश की कस्बे में संख्या अधिक हैं। पिछले कुछ दिनों से भीषण गर्मी पड़ रही हैं । आवारा गोवंश के लिए पेयजल के लिए कस्बे में पर्याप्त मात्रा में व्यवस्था नहीं हैं। ऐसे में सभी आवारा गोवंश के लिए कस्बे के मुख्य मुख्य स्थानों पर पेयजल की व्यवस्था होनी चाहिए ताकि आवारा गोवंश इधर उधर कस्बे के गली मोहल्लों में नही भटके। <br /><strong> - नरेंद्र गौतम, ग्रामीण अरनेठा</strong></p>
<p>गर्मी लगातार बढ़ रही हैं। मूलभूत  समस्याएं भी चल रही हैं पिछले कुछ दिनों से बढ़ती गर्मी के कारण आवारा गोवंश की पेयजल  समस्या खड़ी हो गई हैं। जिम्मेदारों से आग्रह हैं जानवर बेजुबान हैं। ये अपनी समस्या बता नहीं सकते। हम सबको मिलकर इनके लिए पेयजल की उचित व्यवस्था करनी चाहिए।<br /> <strong>- बजरंग लाल, ग्रामीण अरनेठा  </strong></p>
<p>आवारा गोवंश के पेयजल व्यवस्था को लेकर प्रयास शुरू कर दिया हैं। विद्यालय सर्किल के पास पहले से ही पेयजल व्यवस्था हैं। गणेश पूरा बस्ती रोड़ पर व्यवस्था के लिए ठेकेदार को बोल दिया हैं। सोमवार को मैं खुद में गांव में  भ्रमण कर अन्य जगह भी उचित व्यवस्था का प्रयास करेंगे।<br /><strong>  - बजरंगलाल मेघवाल, सरपंच अरनेठा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 May 2024 15:24:38 +0530</pubDate>
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