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                <title>बांसी का रावजी मोहल्ला : नाममात्र जलापूर्ति से मोहल्लेवासियों में बढ़ा आक्रोश</title>
                                    <description><![CDATA[ऑनलाइन शिकायत दर्ज करवाने के बाद विभागीय अधिकारी मौके पर पहुंचे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/bansi-s-raoji-mohalla--growing-outrage-among-residents-due-to-meager-water-supply/article-154550"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-1111.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। क्षेत्र के बांसी कस्बे स्थित रावजी मोहल्ले में पिछले दो माह से पेयजल संकट गहराने से मोहल्लेवासियों में भारी नाराजगी है। जलदाय विभाग की ओर से पर्याप्त जलापूर्ति नहीं होने के कारण लोगों को भीषण गर्मी में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। समस्या के समाधान नहीं होने पर उपभोक्ताओं ने ऑनलाइन शिकायत दर्ज करवाई, जिसके बाद विभागीय अधिकारी मौके पर पहुंचे।</p>
<p>जानकारी के अनुसार जलदाय विभाग द्वारा बांसी कस्बे के विभिन्न मोहल्लों में घर-घर नल कनेक्शन दिए गए हैं, लेकिन रावजी मोहल्ले में पिछले लंबे समय से नलों में नाममात्र का पानी ही पहुंच रहा है। कई मकानों की दूसरी मंजिल तक पानी नहीं पहुंच पाने से लोगों की परेशानी और बढ़ गई है। ऑनलाइन शिकायत के बाद नैनवां के कनिष्ठ अभियंता विभागीय टीम के साथ मौके पर पहुंचे और जलापूर्ति शुरू करवाई। हालांकि उस समय भी उपभोक्ताओं के नलों में बहुत कम मात्रा में पानी पहुंचता दिखाई दिया। इसके बाद अधिकारियों ने कर्मचारियों को निर्धारित समय से 20 मिनट अतिरिक्त जलापूर्ति करने के निर्देश दिए।</p>
<p>मोहल्लेवासियों हुकमचंद शर्मा, मुकेश कुमार जैन, अंकित जैन, लोकेश शर्मा, सत्यनारायण सोनी, नीरूशंकर शर्मा, सीमा जैन, ममता जैन एवं अवधेश कुमार जैन सहित अन्य लोगों ने बताया कि कई बार विभागीय कर्मचारियों को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन समाधान नहीं हुआ। बिजली कटौती के दौरान मोटर बंद रहने से जलापूर्ति पूरी तरह प्रभावित हो जाती है, जिससे लोगों को निजी नलकूपों से पानी लाने को मजबूर होना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र स्थायी समाधान नहीं किया गया तो वे जलदाय विभाग कार्यालय पहुंचकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। मौके पर पहुंचे अधिकारियों को भी लोगों के आक्रोश का सामना करना पड़ा। बाद में अधिकारियों ने समझाइश कर लोगों को शांत किया।</p>
<p>बांसी के जिस मोहल्ले में जलापूर्ति समस्या है। वह लाइन के टेल क्षेत्र के है। इस समस्या के समाधान के लिए निर्धारित समय से 20 मिनट अधिक समय तक जलापूर्ति करने के लिए कर्मचारी को निर्देशित किया गया है। मोहल्ले में समय से जलापूर्ति हो जाएगी।<br /><strong>- योगिता जांगिड़, जेईएन,जलदाय विभाग, नैनवां </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 14:55:12 +0530</pubDate>
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                <title>अतिक्रमण और अव्यवस्थाओं  का शिकार हो रहा सुकेत बस स्टैंड, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[बैठने और छाया की व्यवस्था नहीं होने से यात्री परेशान।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/suket-bus-stand-plagued-by-encroachments-and-disorganization/article-154338"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(3)40.png" alt=""></a><br /><p>सुकेत। कस्बे का मुख्य बस स्टैंड इन दिनों बदहाली का शिकार बना हुआ है। यहां यात्रियों के लिए न तो पर्याप्त बैठने की व्यवस्था है और न ही गर्मी से बचाव के लिए उचित छाया उपलब्ध है। अतिक्रमण और अव्यवस्थाओं के चलते बस स्टैंड दुर्घटना संभावित क्षेत्र बन गया है, जिससे रोजाना सैकड़ों यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ रही है।</p>
<p>यात्रियों ने बताया कि बस स्टैंड पर केवल कुछ टूटी-फूटी सीमेंट की बेंच ही मौजूद हैं। बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे घंटों धूप में खड़े होकर बसों का इंतजार करने को मजबूर हैं। वहीं बस स्टैंड का टीन शेड भी जर्जर हालत में है। कई जगह से टूटे शेड के नीचे व्यापारियों ने अस्थायी दुकानें लगा रखी हैं, जिससे यात्रियों को धूप में खड़ा रहना पड़ता है। बारिश के दौरान शेड से पानी टपकता है और रात के समय पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था भी नहीं है।</p>
<p><strong>सवारियां सड़क पर ही उतारना-चढ़ाना पड़ रहा</strong><br />यात्री बस स्टैंड परिसर में ठेले और ऑटो खड़े रहने से जगह सिकुड़ गई है। ऐसे में बसों को सड़क पर ही सवारियां चढ़ानी-उतारनी पड़ती हैं, जिससे ज़ाम और दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। पिछले माह एक बुजुर्ग महिला गड्ढे में गिरकर घायल हो गई थी, जबकि आए दिन स्कूली बच्चे भी चोटिल हो रहे हैं।</p>
<p><strong>ग्रामीणों ने जिला कलक्टर से लगाई गुहार</strong><br />ग्रामीणों ने जिला कलक्टर से बस स्टैंड का निरीक्षण कर यात्रियों के लिए शेड, पेयजल, शौचालय और पर्याप्त बैठने की व्यवस्था कराने की साथ हटाकर परिसर को समतल करने की भी मांग उठाई गई है।</p>
<p>कोटा जाने के लिए कई बार एक घंटे तक बस का इंतजार करना पड़ता है। लेकिन बैठने की व्यवस्था नहीं होने से छोटे बच्चों को गोद में लेकर खड़ा रहना पड़ता है।<br /><strong>- सीमा बाई, नियमित यात्री, सुकेत</strong></p>
<p>बरसात के दिनों में हालात और अधिक खराब हो जाते हैं। बस स्टैंड का रखरखाव नगर पालिका सुकेत के अधीन है। फिलहाल अस्थायी तौर पर चार बेंच लगाई गई हैं, लेकिन यह पर्याप्त नहीं हैं।<br /><strong>- रवि, कॉलेज छात्र, सुकेत </strong></p>
<p>यात्रियों के लिए बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएंगी। यदि किसी ने अतिक्रमण किया है तो उसे हटाया जाएगा। बस स्टैंड पर शौचालय, पेयजल और बैठने की समुचित सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी।<br /><strong>- चारु वर्मा, उपखंड अधिकारी, रामगंजमंडी </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 14:26:25 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का : पेयजल संकट से मिली राहत, पानी की मोटर दुरुस्त की गई</title>
                                    <description><![CDATA[बंद पड़ी मोटर चालू होने से मुक्ति धाम में मिली राहत।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report--relief-from-drinking-water-crisis--water-pump-repaired/article-153794"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(1)58.png" alt=""></a><br /><p>सूमर। भीषण गर्मी के बीच मुक्तिधाम में जल समस्या को लेकर 11 मई 2026 को नवज्योति टीम ने मुद्दा उठाया था। प्रकाशित खबर के बाद ग्राम पंचायत प्रशासक विष्णु नागर के निर्देश पर त्वरित कार्रवाई करते हुए बंद पड़ी मोटर को ठीक करवाकर चालू करवा दिया गया। इससे मुक्ति धाम में जल व्यवस्था पुनः बहाल हो गई है। गौरतलब है कि भीषण गर्मी के दौरान मुक्ति धाम में पीने के पानी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। परिसर में स्थित एक होल में लंबे समय से उसमें लगी मोटर खराब होने के कारण पानी की आपूर्ति प्रभावित थी। खबर प्रकाशित होने के बाद ग्राम पंचायत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मौके पर मरम्मत कार्य करवाया। </p>
<p>मोटर चालू होने के बाद आमजन की समस्या दूर हो गई है, जिससे अंतिम संस्कार में आने वाले लोगों को राहत मिलेगी। वहीं अंतिम संस्कार से जुड़े आवश्यक कार्यों में भी पानी की उपलब्धता बनी रहेगी। ग्रामीणों ने बताया कि पहले लोगों को भीषण गर्मी में पीने के पानी के लिए बाहर से पानी के कैम्पर मंगवाने पड़ते थे, लेकिन अब व्यवस्था सुचारु होने से समस्या दूर हो गई है। ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत की कार्रवाई पर संतोष जताया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 14:23:58 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>दवा से मुश्किल ठंडा पानी, रात होने से पहले पानी स्टाक की फिक्र</title>
                                    <description><![CDATA[रीते कंठ इलाज कराने की मजबूरी, दवा खाने के पानी की जुगत में तीमारदार ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/finding-water%E2%80%94especially-cold-water%E2%80%94is-harder-than-finding-medicine--a-race-to-stock-up-before-nightfall/article-152720"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(1)17.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। संभाग के सबसे बड़े एमबीएस अस्पताल में इन दिनों तीमारदारों को मरीज की देखभाल से ज्यादा चिंता एक बोतल पानी की है। अस्पताल परिसर में पहले जहां हर जगह शीतल जल उपलब्ध हो जाता था वहां पानी के लिये 100 मीटर तक की दूरी तय करनी पड रही है। कहने को परिसर में 28 वाटर कूलर लगे हैं, लेकिन धरातल पर केवल 18 ही जैसे-तैसे चल रहे हैं। बाकी या तो कबाड़ हो चुके हैं या प्रशासन की लापरवाही के कारण तालों में बंद हैं। एक बार जहां से पानी की सुविधा बंद हुई फिर वो चालू की ही नहीं गयी। ऐसे में परिजनों के लिये के लिये बोतलें हाथ में लेकर घुमने की मजबूरी इलाज का हिस्सा बन चुकी है।</p>
<p><strong>बदहाल सिस्टम से परिजनों की परिक्रमा</strong><br />300 फीट लम्बे गलियारों को पार करने के बाद परिसर में लगे वाटर कूलरों से पानी लेने जाने के बाद भी कई बार पानी नहीं मिल पाता। ऐसे में एमबीएस परिसर की ओल्ड़ बिल्डिंग में पीने के पानी के लिये बाहर आने की मजबूरी से परिजनों की लम्बी परेड़ हाे जाती है। कई बार तो परिजन सड़क पार करके भी पानी लेकर जाते है। सबसे बड़े वार्ड मेडिकल के मरीज पानी के लिए ENT वार्ड की गैलरी तक दौड़ रहे हैं। न्यूरोलॉजी विभाग में लगा कूलर का तो कनेक्शन ही काट कर हटा दिया है हांलाकि कूलर बाहर रखा है। बर्न वार्ड के रिनोवेशन के चलते महीनों से पानी की सुविधा पर ताला लगा है।</p>
<p><strong>पहले कहा मेन्टीनेन्स के बाद, अब जरूरत नहीं</strong><br />परिसर में लगे वाटर कूलरों की 19 अप्रेल को खबर प्रकाशित करने के दौरान अस्पताल प्रशासन ने बताया था कि पुराने वाटर कूलरों को मेन्टीनेन्स के लिये हटाया गया है, जिन्हे वापस चालू कर दिया जायेगा। लेकिन भीषण गर्मी 15 दिन गुजर जाने के बाद भी सुविधायें बहाल नहीं हो पायी तब दैनिक नवज्योति ने जन उपयोगीता के मुद्देज पर अस्पताल प्रशासन से पक्ष लिया तब अस्पतान अधीक्षक ने ऐसी जगहों पर दुबारा से प्याऊ शुरू करने की जरूरत नही बताई। पहले दवा काउँटर नं 9, दवा काउन्टर 121 तथा सर्जीकल वार्ड के भीतर लगे प्याऊ बंद कर दिये गये है।</p>
<p><strong>जहां से हटे फिर नहीं लगे,अधीक्षक बोले हमारे पास एक्स्ट्रा</strong><br />लेखा शाखा के बाहर रखा वाटर कूलर कई महीनों से हटाया गया है। न्यू आईपीड़ी व पुराने कॉटेज वार्ड़ की तरफ से आने वाले परिजनाें व लेखा शाखा के कार्मिकों के लिये यही वाटर कूलर ठण्ड़े पानी के लिये काम आता है। अस्पताल सुत्रों ने बताया कि यह कण्ड़म होने के कारण हटा लिया गया है, वही अधीक्षक महोदय के बताये अनुसार अधीक्षक कार्यालय में वाटर कूलर रिजर्व में रखे हुये है।</p>
<p><strong>रखरखाव तो दूर गेट पर ही ताला</strong><br />मेडिकल यूनिट B व C में 2 साल पहले पानी के लिए बाटर कूलर काम कर रहा था पिछले साल से पार्क की तरफ जाने वाला गेट बंद कर दिया गया हांलाकि कूलर आज भी वहीं लगा हुआ है जाे अब कबाड़ में तब्दील होता जा रहा है। </p>
<p><strong>जहां खाना खाने के साथ ठण्ड़े पानी की थी जगह, अब पीक व गंदगी</strong><br />आर्थोपैड़िक वार्ड़ के बाहर परिजनों के खाना खाने के लिये डाईनिंग हालनुमा केम्पस बनाया गया था यहीं पर एक वाटर कूलर भी लगा हुआ है। सीपेज की समस्या के कारण इसे बन्द कर के पुरे केम्पस पर ही ताला लगा दिया। अब यहां लगा कूलर कबाड़ बन गया वहीं गेट के भीतर गंदगी का ढ़ेर जमा हो गया। बची-खुची कसर यहां लोगो ने गुटके की पीक से पुरी कर दी।</p>
<p><strong>मरीज बोले- दवा से मुश्किल ठंडा पानी</strong><br />भैया के एक्सीडेंट के बाद 5 दिन से यहाँ हूँ। रात में अस्पताल में रोशनी कम रहती है, डर लगता है लेकिन पानी के लिए पूरे अस्पताल की परिक्रमा करनी पड़ती है। कोई मिलने वाला आ जाये तो पानी की पुछने में भी सोचना पड़ता है।<br /><strong>- वंदना, तीमारदार</strong></p>
<p>अभी थोडी देर पहले ही 30 रूपये की पानी की बोतल लेकर आयी हूँ यहां वाटर कूलर तो है लेकिन दूसरे वार्ड के भी यही से भरते है कभी भी पानी ठंडा नहीं मिलता। बाहर भी यही हाल है।<br /><strong>-पूजा ,मरीज की पत्नी</strong></p>
<p>जहां आवश्यकता है वहां के वाटर कूलर चालू है। सभी काे बिना जरूरत चालु करने से क्या फायदा। रिजर्व में रखवा रखें है। वाटर टेंक की सफाई करवाई जाती है। डेट भी रहती है।<br /><strong>-डॉ. धर्मराज मीणा, अधीक्षक एमबीएस अस्पताल कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 13:30:20 +0530</pubDate>
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                <title>कापरेन में गहराया पेयजल संकट, तीन दिन से नल सूखे</title>
                                    <description><![CDATA[बस स्टैंड पर लगा वाटर कूलर भी पिछले तीन दिनों से बंद पड़ा होने से यात्री परेशान हो रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/drinking-water-crisis-deepens-in-kapren--taps-run-dry-for-three-days/article-150921"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(4)12.png" alt=""></a><br /><p>कापरेन। नगर पालिका क्षेत्र कापरेन में बढ़ती गर्मी के साथ ही पेयजल संकट गंभीर हो गया है। शहर के कई वार्डों में पिछले तीन दिनों से जलापूर्ति बाधित रहने के कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि नागरिकों को पीने के पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार वार्ड संख्या 24, 15 और 23 स्थित जोसया का खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीन दिनों से नल सूखे पड़े हैं। स्थानीय निवासियों नंदकिशोर खारोल, बबलू सेन, महावीर एवं सुरेश ने बताया कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है। उनका आरोप है कि कभी-कभी एक-दो दिन पानी की आपूर्ति कर फिर मोटर खराब होने का बहाना बनाकर सप्लाई बंद कर दी जाती है।</p>
<p>इधर बस स्टैंड पर नगर पालिका द्वारा लगाया गया वाटर कूलर भी पिछले तीन दिनों से बंद पड़ा है। पानी उपलब्ध नहीं होने से यात्रियों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। स्थानीय निवासी राजाराम गुर्जर ने कहा कि व्यस्त स्थान पर भी मूलभूत सुविधा का अभाव प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि जहां आमजन पानी के लिए परेशान हैं, वहीं जिम्मेदार अधिकारी स्थिति से बेखबर बने हुए हैं। लोगों ने शीघ्र जलापूर्ति व्यवस्था सुधारने की मांग की है।<br /> <br /><strong>यह कहा अधिकारी ने </strong></p>
<p>मोटर खराब होने के कारण सप्लाई व्यवस्था प्रभावित हुई थी, जिसे अब ठीक करवा लिया गया है और पानी की आपूर्ति शुरू कर दी गई है<br /><strong>-खुशबू मीणा, जेईएन, जलदाय विभाग </strong></p>
<p> टंकी में पानी भरवाकर जल्द ही नियमित सप्लाई सुनिश्चित की जाएगी।<br /><strong>- प्रवीण कुमार शर्मा, ईओ, नगर पालिका</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 15:22:31 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का : गंदगी हटा बनाए ‘जल मंदिर’, एडीएम सिटी ने किया वाटर कूलरों का उद्घाटन</title>
                                    <description><![CDATA[भीड़ प्रबंधन के लिए भामाशाह काउंटर को बाहर स्थानांतरित करने के निर्देश दिए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news--filth-cleared-to-create-a--jal-mandir---water-shrine---adm-city-inaugurates-water-coolers/article-149970"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/1200-x-600-px)17.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शिशु एवं मातृ चिकित्सालय जेके लोन अस्पताल में सुविधाओं के विस्तार और नवाचार की दिशा में शुक्रवार को अहम कदम उठाए गए। एडीएम सिटी अनिल कुमार सिंघल ने अस्पताल परिसर में स्थापित किए गए तीन नए वाटर कूलरों का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल की व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के लिए ई-वीसी रूम का प्रस्ताव मांगा और ओपीडी में भीड़ कम करने के लिए भामाशाह काउंटर को बाहर स्थानांतरित करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान एडीएम ने ओपीडी और डिस्चार्ज प्रक्रिया को और सरल बनाने के निर्देश दिए ताकि दूर-दराज से आने वाले मरीजों को कम से कम समय में इलाज मिल सके।</p>
<p><strong>आस्था से स्वच्छता का संदेश</strong><br />अस्पताल अधीक्षक डॉ. निर्मला शर्मा ने बताया कि परिसर के भीतर 80-80 लीटर क्षमता वाले तीन नए वाटर कूलर लगाए गए हैं। अस्पताल प्रशासन ने इसके लिए उन स्थानों को चिन्हित किया जहां पहले गंदगी रहती थी। अधीक्षक ने बताया कि इन जगहों को पूरी तरह साफ करवाकर 'जल मंदिर' के रूप में विकसित किया गया है। यहाँ एक ऊंचे प्लेटफॉर्म पर कांच के भीतर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की गई है, ताकि लोग आस्था के कारण पानी पीने वाले स्थान पर गंदगी न फैलाएं।</p>
<p><strong>भामाशाह काउंटर को बाहर बनवाने का सुझाव</strong><br />एडीएम सिटी अनिल कुमार सिंघल ने एनआईसीयू (NICU) और सीआईसीयू (CICU) के निरीक्षण के बाद ओपीडी में मरीजों की भारी भीड़ को देखा। उन्होंने भीड़ प्रबंधन हेतु सुझाव दिया कि ओपीडी ब्लॉक में दबाव कम करने के लिए भामाशाह काउंटर को बाहर डोम के पास खाली पड़े स्थान पर शिफ्ट किया जाए। इससे छुट्टी (डिस्चार्ज) मिलने वाले मरीजों को बाहर से ही लाभ मिल सकेगा और भीतर भीड़ जमा नहीं होगी।</p>
<p><strong>ई-वीसी रूम की जरूरत पर जोर</strong><br />डिजिटल दौर की आवश्यकताओं को देखते हुए एडीएम ने अस्पताल में ई-वीसी (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग) रूम तैयार करने के लिए प्रस्ताव मांगा है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन ट्रेनिंग, मेडिकल कोर्स और विशेषज्ञों के साथ टेस्ट रिपोर्ट साझा करने के लिए वीसी रूम की बहुत आवश्यकता है। अधीक्षक शर्मा ने बताया कि हमारे 2-3 डॉक्टर लीगल में ही लगे रहते है। वी सी रूम से हमें समय और कार्य प्रबंध्न में लाभ मिलेगा।</p>
<p><strong>नवज्योति ने पहले ही चेताया था</strong><br />अस्पताल परिसरों में गर्मी की शुरूआत के साथ ही मरीजाें और तीमरदारों के लिये पीने के पानी की कमीं को लेकर दैनिक नवज्याति ने ''एमबीएस में 3 प्याऊ फिर से शुरू 8 के लिये इंतजार'' प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी जिसके बाद राजकीय एमबीएस चिकित्सालय परिसर मेंं स्थित जे के लोन शिशु एवं मातृ चिकित्सालय में आज एक साथ 3 वाटर कूलरों को जनता को समर्पित कर दिया गया।<br /> <br />गर्मी को देखते हुये मरीजों की सुविधा के लिये जन सहयोग से ठण्ड़े पानी के लिये 3 जगह व्यवस्था की है। एडीएम साहब ने हमें सुझाव दिये है। इनके बारेे में हम काम करेंगे।<br /><strong>- डॉ. निर्मला शर्मा, अधीक्षक जे के लोन</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 13:02:35 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कस्बे में पेयजल स्रोतों की स्थिति खराब : अव्यवस्थित प्याऊ, जर्जर व गंदे जल स्रोत बने खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[खेळ में काई, गंदा पानी जमा होने व आसपास  जर्जर लोहे के टुकड़े बिखरे होने से मवेशियों की जान  को खतरा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/poor-state-of-drinking-water-sources-in-town--neglected-water-kiosks-and-dilapidated-sources-become-a-hazard/article-148852"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)-(3)5.png" alt=""></a><br /><p>कनवास। कनवास में पेयजल  व्यवस्था की बदहाल स्थिति अब गंभीर खतरे का रूप ले चुकी  है। गंदे पानी और  विद्युत करंट के खतरे से आमजन और मवेशियों की जान जोखिम में बनी हुई है।कस्बे में पेयजल स्रोतों की अनदेखी के चलते हालात चिंताजनक हो गए हैं। मवेशियों और आमजन के लिए बनाए गए जल स्रोत जहां अस्वच्छ हो चुके हैं, वहीं कई स्थानों पर करंट का - खतरा भी बना हुआ है। जानकारी के अनुसार कस्बे में मवेशियों के लिए केवल तीन पानी के खेळ हैं, जबकि पंचायत समिति सदस्य महावीर मेरोठा द्वारा ग्रामीणों और राहगीरों के लिए करीब 6 से 7 ठंडे पानी के प्याऊ स्थापित किए गए थे। लेकिन नियमित देखरेख के अभाव में इनकी स्थिति खराब हो चुकी है।</p>
<p>ग्रामीणों का कहना है कि प्याऊ पर उपलब्ध पानी गंदा और अस्वच्छ है, जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। वहीं कई प्याऊ विद्युत चालित होने के कारण उनमें पहले भी करंट आने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। मवेशियों के लिए बनी पानी की खेळों की स्थिति भी खराब है। वहां गंदा पानी जमा है और आसपास नुकीले व जर्जर लोहे के टुकड़े व पत्थर बिखरे पड़े हैं, जिससे मवेशियों के घायल होने की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों के अनुसार चित्तौड़ा कुंड स्थित खेळ पूरी तरह जर्जर हो चुकी है।</p>
<p><strong>ग्रामीणों ने लगाई प्रशासन से गुहार</strong><br />स्थानीय ग्रामीण घनश्याम कुमावत, राम प्रताप बेरवा और मुकुट मेरोठा ने बताया कि समस्या को लेकर कई बार प्रशासन को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। वहीं कपिल गौतम, बंसीलाल वर्मा, धर्मेंद्र बेरवा और मुकेश मिस्त्री ने बताया कि प्याऊ की नियमित सफाई और विद्युत कनेक्शन की जांच नहीं होने से खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जल स्रोतों की तत्काल सफाई, मरम्मत और सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए तथा विद्युत कनेक्शनों की जांच कर संभावित हादसों को रोका जाए।</p>
<p>मामले की जांच करवाकर सफाई करवा दी जाएगी तथा बिजली कनेक्शन की भी जांच कराई जाएगी। ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना न हो। जल्द ही समस्या का समाधान कर दिया जाएगा।<br /><strong>-कुशलेश्वर सिंह, बीडीओ, सांगोद</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 15:26:15 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title> जनता जल योजना का इंतजार, प्यासे सीमलिया के बाशिंदे </title>
                                    <description><![CDATA[आजादी के 80 साल बाद भी गांव में नहीं पहुंचीं बुनियादी सुविधाएं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/waiting-for-the-janta-jal-yojana--thirsty-residents-of-simaliya/article-146223"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)10.png" alt=""></a><br /><p>कनवास। कनवास उपखंड की ग्राम पंचायत बांस्याहेड़ी के सीमलिया गांव के ग्रामीण आजादी के लगभग 80 साल बाद भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। इस बीच कई सरकारें आई और गई। हर चुनाव से पहले जनप्रतिनिधियों ने कई वादे और दावे किए। लेकिन जमीनी स्तर पर आज तक कोई वादा पूरा होता नहीं लग रहा। सरकार विकास और जल जीवन मिशन के तहत हर गांव में साफ पीने का पानी पहुंचाने के दावे करे, लेकिन हकीकत यह है कि आज तक इस गांव के लोग पेयजन की सुविधा से वंचित हैं। गांव में लंबे समय से पीने के पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि सीमलिया गांव अब तक जनता जल योजना से नहीं जुड़ा है। पानी की किल्लत के चलते ग्रामीणों ने एक पुराने कुएं में सामूहिक रूप से अपनी मोटरें डाल रखी हैं और इन्हीं से किसी तरह पीने के पानी की व्यवस्था की जा रही है। इस अस्थायी व्यवस्था को बनाए रखने के लिए ग्रामीणों को महंगी मोटर, पाइप, मिस्त्री की मजदूरी और बिजली बिल जैसे अतिरिक्त खर्च उठाने पड़ रहे हैं।</p>
<p><strong>गर्मी के मौसम में बढ़ जाता है संकट</strong><br />ग्रामीणों ने बताया कि गर्मी का मौसम शुरू होते ही पानी का संकट और गहरा जाता है। सीमित जलस्रोतों के कारण ग्रामीणों को रातभर पानी के लिए जागना पड़ता है। कई बार महिलाएं और बुजुर्ग देर रात तक पानी भरने के लिए कतार में खड़े रहते हैं। इससे गांव में रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है।</p>
<p><strong>जनता जल योजना से जोड़ने की मांग</strong><br />ग्रामवासी मुकेश गुर्जर सहित अन्य ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि सीमलिया को शीघ्र जनता जल योजना से जोड़ा जाए और स्थायी जल व्यवस्था की जाए। ताकि लोगों को पीने के पानी के लिए रातभर परेशान न होना पड़े।</p>
<p>ग्राम पंचायत बांस्याहेड़ी के अंतर्गत आने वाले ग्राम सीमलिया का टेंडर जारी हो चुका है। जल्द ही हर घर नल योजना के तहत कार्य प्रारंभ किया जाएगा।<br /><strong>- राकेश मीणा, कनिष्ठ अभियंता, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Mar 2026 15:16:57 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>लापरवाही : गहराया पेयजल संकट, घर-घर नल फेल, जल जीवन मिशन योजना का नहीं मिल रहा फायदा</title>
                                    <description><![CDATA[डुंडी ग्राम में नल व्यवस्था को लेकर हो रही है समस्या]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/negligence--drinking-water-crisis-deepens--taps-fail-in-every-home--and-the-jal-jeevan-mission-scheme-is-not-providing-benefits/article-129012"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/copy-of-news-(5)11.png" alt=""></a><br /><p> खानपुर।  खानपुर के पास स्थित ग्राम डुंडी में जल जीवन मिशन योजना के तहत ग्रामवासियों के नल लगवाए गए थे। जिसमें भीमसागर से पानी आता है, लेकिन ग्रामीण वासियों का कहना है कि नल तो आता है लेकिन खातियो के मोहल्ले में पीछे की साइड पर नल में से एक बूंद भी नहीं टपकती है, इसके लिए खातियो के मोहल्ले वालों को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। जल ही जीवन है इसके बिना कुछ नहीं है। व्यक्ति खाना खाकर जिंदा रह सकता है लेकिन पानी के बिना नहीं रह सकता। जल जीवन मिशन योजना के तहत घर-घर नल लगे थे लेकिन उनका ग्रामीण वासियों को अभी कुछ फायदा नहीं हो रहा है। ग्रामीणों ने जेईएन मुस्ताक अली को समस्या से अवगत कराया, उन्होंने समस्या को समझा और तुरंत इस पर एक्शन लेने के लिए कहा क्योंकि नल नहीं आने पर कितनी परेशानी का सामना करना पड़ता है। पानी के लिए खातियों के मोहल्ले वालों को पानी लेने के लिए थाने की टंकी के पास आना पड़ता है और थाने की टंकी से पानी भरते हैं तो वहां से लगभग 2 किलोमीटर दूर पैदल चलकर पानी लाना पड़ता है। ग्रामीणों ने मांग की है कि जल्द से जल्द पानी की समस्या का समाधान किया जाए। </p>
<p>जल जीवन मिशन योजना के तहत नल लगवाए गए थे लेकिन इन नलों में पानी नहीं आ रहा है। <br /><strong>-पवन गौड़, कस्बेवासी </strong></p>
<p>पीने के पानी के लिए दूर दराज से पानी लाना पड़ता है। ग्रामीणो को पानी की समस्या के  समाधान की मांग की है। <br /><strong>-लेखराज मेहता, कस्बेवासी</strong></p>
<p>नलों में पानी नहीं आने से ग्रामीणों को ट्यूबवेल व कुओं का सहारा लेना पड़ रहा है। <br /><strong>-हरिराम मेहता, कस्बेवासी </strong></p>
<p>ग्रामीणों की सुविधा के लिए नल तो लगवा दिए लेकिन पानी नहीं आ रहा है। <br /><strong>-रमेश मेहता, कस्बेवासी</strong></p>
<p>सुबह जल्द उठकर दूर दराज से पानी लाना पड़ता है काफी समस्या आती है। समस्या का समाधान किया जाना चाहिए। <br /><strong>-बिंदराज मेहरा, कस्बेवासी</strong></p>
<p>पानी की समस्या को दिखाकर दो या तीन दिन में समस्या का निवारण कर दिया जाएगा और नल व्यवस्था सुचारू रूप से चालू हो जाएगी।<br /><strong>- सहायक अभियंता मुस्ताक अली, पी एच ई डी खानपुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Oct 2025 16:12:15 +0530</pubDate>
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                <title>अनदेखी: सातलखेड़ी में वर्षों से पेयजल टंकी की नहीं हुई सफाई</title>
                                    <description><![CDATA[टंकी के आसपास भी फैली हुई है गंदगी, देखरेख नहीं होने से परिसर में उगे झाड़-झंखाड़]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/neglect--drinking-water-tank-has-not-been-cleaned-for-years-in-satalkhedi/article-120044"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/882roer-(5)1.png" alt=""></a><br /><p>सातलखेड़ी। सातलखेड़ी में घर-घर पेयजल सप्लाई करने के लिए बनी पानी की टंकी की हालत काफी खराब है। इसके आसपास गंदगी के ढेर जमा हैं। जानकारी के अनुसार खान और गांव के बीच बनी इस टंकी पर किसी का ध्यान नहीं होने से दिनों-दिन इसकी हालत बिगड़ती जा रही है। कस्बे में इस पानी की टंकी को बने हुए करीब 25 से 30 साल हो गए हैं। देखरेख के अभाव में अब यह जर्जर होने लगी है। इस टंकी से पाइप लाइन के जरिए सातलखेड़ी के घरों में कनेक्शन दिए गए हैं। लेकिन इस टंकी के आसपास गंदगी का अंबार लगा हुआ है। इस टंकी के माध्यम से नई बस्ती, यादव मोहल्ला, वार्ड नम्बर 21, वार्ड नम्बर 10 व गांव सातलखेड़ी के आधे से ज्यादा घरों में जल वितरण किया जाता है। लेकिन इसकी व्यवस्थाओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। </p>
<p><strong>नहीं होती नियमित सफाई:</strong> एक ओर जहां पानी की टंकी दुर्दशा का शिकार हो रही है, वहीं दूसरी ओर साफ-सफाई नहीं होने से कई बार दूषित पेयजल होने की आशंका बनी रहती है। जिससे पेट संबंधी रोगों के साथ डायरिया जैसी जानलेवा बीमारी फैल सकती है। </p>
<p><strong>टंकी के आसपास जमा हो रही है गंदगी </strong><br />कस्बे में टंकी का निर्माण तो कर दिया गया है। लेकिन देखरेख के अभाव में टंकी के आसपास काफी गंदगी व झाड़-झंकाड़ का ढेर लगा हुआ है। इस टंी से प्रतिदिन जल सप्लाई की जाती है। जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर खराब असर पड़ने की आशंका बनी रहती है। वहीं गंदगी के कारण बारिश का पानी भी वहीं जमा हो रहा है। जिससे वायरल सहित अन्य मौसमी बीमारियां फैलन की आशंका भी बनी हुई है।  साथ ही टंकी से निकलने वाला पानी भी परिसर में ही जमा हो रहा है। जिससे आसपास कीचड़ फैला हुआ है। साथ ही टंकियों के आसपास घास भी हो रही है। पंचायत द्वारा नगर में स्वच्छता अभियान चलाया जाता है। लेकिन रोजाना की व्यवस्थाओं पर ध्यान नहीं दिया जाता। </p>
<p>समय-समय पर पानी की टंकी की सफाई करवाई जानी चाहिए। क्योंकि अधिकतर बीमारियों का कारण दूषित पानी पीना है। साथ ही परिसर में हो रही गंदगी को भी साफ करवाया जाना चाहिए। <br /><strong>-अजय वर्मा, उपभोक्ता, सातलखेड़ी</strong></p>
<p>सातलखेड़ी खान व गांव सातलखेड़ी के बीच में जो पानी की टंकी है, उसकी जल्द ही सफाई करवाई जाएगी। साथ ही परिसर में जो गंदगी हो रही है उसे भी साफ करवाया जाएगा। <br /><strong>-बच्चू सिंह मीणा, एईएन, जलदाय विभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Jul 2025 15:34:30 +0530</pubDate>
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                <title>छबड़ा के खेल मैदान में जन सुविधाओं का अभाव, बड़ी संख्या में घूमने आते हैं महिला-पुरूष</title>
                                    <description><![CDATA[पालिका प्रशासन की उदासीनता से पीने के पानी तक की नहीं है व्यवस्था]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/lack-of-public-facilities-in-chhabra-s-playground/article-116247"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/rtroer-(1)8.png" alt=""></a><br /><p>छबड़ा। छबड़ा कस्बे के एक मात्र सीनियर हायर सैकंडरी के खेल मैदान पर पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं होने एवं चारों ओर गन्दगी का आलम पसरा रहने से रोजाना मोर्निग एवं ईवनिंग वाक पर आने वालों, अपनी खेल प्रतिभा को निखारने आने वाले खिलाड़ियों, पुलिस सेना भर्ती की तेयारियों करने वाले छात्रों तथा छुट्टियों का आनन्द उठाने के लिये आ रहे छोटे बच्चों के साथ ही ग्रामीण क्षेत्र से आकर तपती दोपहर में यहां थोड़ी देर सुस्ताने वाले ग्रामीणों को पीने के पानी की समस्या से जूझना पड़ता है। आश्चर्य तो इस बात का हे की लगभग 25 वर्षो पूर्व बने इस खेल मैदान पर जन सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिये न तो नगर पालिका ने ध्यान दिया न किसी भी दल के जनप्रतिनिधियों ने। भाजपा के वरिष्ठ नेता संजय नामदेव ने लोगों की इस पीड़ा का समाधान करने का बीड़ा उठाते हुए क्षेत्रीय विधायक एवं पालिका प्रसासन को पत्र लिखकर खेल में दान पर शीघ्र टुयुबवेल एवं वाटर कूलर लगाने तथा लोगों के स्वास्थ्य के तहत खेल मैदान की सफाई कराने की मांग की हे  ताकी लोगों को राहत मिल सके।</p>
<p><strong>बड़ी संख्या में घूमने आते हैं महिला-पुरूष</strong><br />कस्बे के चारों ओर ईंट भट्ठे संचालित होने के चलते सुबह शाम खेल मैदान पर सेकंडों महिला पुरुष एवं युवक युवतियां यहां स्वास्थ्य की दृष्टी से घूमने आते हैं। भले ही सर्दी में पानी की कमी महसूस न हो लेकिन गर्मी में घूमने व्यायाम करने के दोरान प्यास सताने लगती है। जिससे बड़ी संख्या में लोग जल्दी ही लोट जाते हे तथा बहुत से लोग पानी की बोतल साथ लाते हैं।</p>
<p><strong>खिलाड़ी प्रतिदिन करते हैं अभ्यास</strong><br />विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले खिलाड़ी तो रोजाना यहां अभियान करते ही हे साथ ही प्रतिदिन खिलाड़ी विशेष तोर से क्रिकेट के शोकीन भी यहां आते हें लेकिन पानी की कमी से इन्हें भी जूझना पड़ता है।</p>
<p><strong>सेना एवं पुलिस भर्ती की तैयारी के लिए बहाते हैं पसीना:</strong> यहां रोजाना पुलिस एवं सेना भर्ती के साथ शारिरिक क्षमता वाली अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तेयारी करने वाले छात्र छात्राएं रोजाना यहां आकर दोड एवं व्यायाम के साथ पसीना बहाते हैं तथा नोकरी पाने की लालसा मे अपनी क्षमता से सभी अधिक परिश्रृम करते हैं।</p>
<p><strong>छोटे-छोटे बच्चे भी आते हैं छुट्टियों का आनन्द उठाने </strong><br />स्कूल में पढ़ने जाने वाले बच्चों का गर्मी की छुट्टियां मोज मस्ती करने का सबसे उत्तम समय होता हे तथा वह घर से क्रिकेट का सामान लाकर क्रिकेट खेलने का आनन्द उठाते हैं। लेकिन इस दौरान लगने वाली प्यास आनंद में खलल डाल देती है।</p>
<p><strong>गंदगी का अंबार होने से होती है परेशानी</strong><br />खेल में दान पर लम्बे समय तक सफाई न होने से यहां गन्दगी का आलम पसरा रहता हे जिससे उठती बदबू दोड भाग कर स्वास्थ्य सुधारने आये लोगों के स्वास्थ्य पर उल्टा प्रभाव डालती है।</p>
<p>हैंडपम्प लगाने का कार्य जलदाय विभाग द्वारा किया जा रहा है तथा जहां तक मेरी जानकारी में आया है, विधायक ने जलदाय विभाग को यहां शीघ्र हैंडपंप लगाने के निर्देश दिए हैं।<br /><strong>-यादवेन्द्र यादव, तहसीलदार एवं ईओ, नगर पालिका, छबड़ा </strong></p>
<p>खेल मैदान पर पानी की किसी रे तरह की कोई सुविधा नहीं है। मैंने विधायक सिंघवी को एवं पालिका प्रसासक को पत्र लिखकर यहां टुयुबवेल खुदवाने एवं वाटर कूलर लगवाने की मांग की है। ताकि लोगों को राहत मिल सके। <br /><strong>-संजय नामदेव, वरिष्ठ भाजपा नेता</strong></p>
<p>मैं साथियों सहित रोजाना सुबह शाम घूमने जाता हूं। लेकिन खेल मैदान पर पानी की कोई व्यवस्था नहीं है तथा सफाई नहीं होने से गन्दगी भी पसरी रहती है।<br /><strong>-सीपी गेरा, पूर्व भाजपा नगर अध्यक्ष</strong><br /> <br />खेल मैदान पर प्रतिदिन सैंकडों महिला पुरुष घूमने आते हैं। लेकिन पानी की समस्या के चलते सभी परेशान होते हैं। जबकि यहां डाक्टर, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारी भी आते हैं।<br /><strong>-प्रवीण जैन, रिटायर्ड कर्मचारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Jun 2025 15:53:31 +0530</pubDate>
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                <title>बदलाव की आस में थम गया वक्त : आज भी मूलभूत सुविधा पानी के लिए तरस रही पीथपुर ग्राम पंचायत, हर चेहरे पर एक ही सवाल कब मिलेगा पानी, </title>
                                    <description><![CDATA[ गांव की हालत इतनी बदतर है कि यहां की महिलाएं आज भी मीलों पैदल चलकर, सिर पर मटके उठाए कुएं से पानी लाने को मजबूर हैं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/time-stopped-in-the-hope-of-change--pots-on-heads/article-114654"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtrer-(8)5.png" alt=""></a><br /><p>छीपाबड़ौद। एक ओर सरकार हर घर नल से जल का दावा कर रही है। वहीं छीपाबड़ौद तहसील की पीथपुर ग्राम पंचायत आज भी मूलभूत सुविधा पानी के लिए तरस रही है। गांव की हालत इतनी बदतर है कि यहां की महिलाएं आज भी मीलों पैदल चलकर, सिर पर मटके उठाए कुएं से पानी लाने को मजबूर हैं। ये मटके केवल पानी नहीं, बल्कि वर्षों से झेली जा रही उपेक्षा और पीड़ा का भार ढो रहे हैं। पूरे पंचायत क्षेत्र में न तो एक भी हैडपंप है, न ही जल संग्रहण टंकी। गर्मी के मौसम में जब कुएं भी सूखने लगते हैं, तब हालात और भी भयावह हो जाते हैं। महिलाएं सूरज चढ़ने से पहले ही निकल पड़ती हैं ताकि दिन के लिए थोड़ा बहुत पानी मिल सके। बच्चों की प्यास, बुजुर्गों की बेबसी और महिलाओं की थकान इस गांव की रोजमर्रा की कहानी बन गई है। धूप में तपती धरती, सर पर पानी के मटके उठाए महिलाएं, और हर चेहरे पर एक ही सवाल कब मिलेगा पानी। </p>
<p><strong>अब तो उम्मीद करना भी छोड़ दिया </strong><br />गांववासियों ने बताया कि वे कई बार पंचायत और अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं। लेकिन अभी तक सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं। ग्रामीण महिला कमला बाई ने कहा कि हमने तो अब उम्मीद करना भी छोड़ दिया है, बस जी रहे हैं जैसे तैसे। </p>
<p><strong>सरकार और प्रशासन से गुहार</strong><br />अब गांववाले एक बार फिर उम्मीद लगाए बैठे हैं कि शायद उनकी इस आवाज को कोई सुने, और जल जैसी बुनियादी जरूरत के लिए कोई स्थायी समाधान निकले। </p>
<p>हम रोज दो किलोमीटर दूर कुएं से पानी लाने जाते हैं। कभी-कभी तो दो-तीन चक्कर लगाने पड़ते हैं, तब जाकर घर का काम चलता है। शरीर थक जाता है, लेकिन कोई उपाय नहीं है। कई बार हाथ-पैर छिल जाते हैं, पर कोई देखने वाला नहीं। अब तो पानी के लिए जीना भी बोझ लगने लगा है। <br /><strong>-रामप्यारी, ग्रामीण महिला</strong></p>
<p>हमने पंचायत में कई बार आवेदन दिए। अधिकारियों से गुहार लगाई। लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ। गांव में न हैंडपंप है, और न ही कोई टंकी। बरसों से हालात ऐसे ही हैं। गर्मियों में तो हालात और बिगड़ जाते हैं। अब हमें समझ नहीं आता कि कहां जाएं, किससे उम्मीद करें।       <br /><strong> -घासीलाल, ग्रामीण</strong></p>
<p>पेयजल समस्या हमारे गांव की गंभीर समस्या है। हम इसे लेकर कई बार संबंधित विभागों को अवगत करा चुके हैं। पर इस ओर सरकार ने आजतक ध्यान नहीं दिया है। हम खुद चाहते हैं कि गांव की महिलाएं और बच्चे इस संकट से बाहर आएं। मैं प्रशासन से निवेदन करता हूं कि प्राथमिकता के आधार पर पीथपुर की पेयजल योजना को पूर्ण कराया जाए। <br /><strong>-कौशल किशोर, सरपंच, पीथपुर ग्राम पंचायत</strong></p>
<p>इस समस्या पर ध्यान दिया जाएगा। गांव में निरीक्षण कर सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।<br /><strong>-रवि गुप्ता, सहायक अभियंता, जलदाय विभाग, छीपाबड़ौद</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 May 2025 18:11:35 +0530</pubDate>
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