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                <title>डूंगरपुर की दीपिका ने भी अपनाया इस्लाम, बनी नजीरा</title>
                                    <description><![CDATA[डूंगरपुर की रहने वाली दो बच्चों की मां दीपिका ने अपने प्रेमी के साथ कुवैत पहुंचने के बाद इस्लाम धर्म कबूल कर अपना नाम नजीरा रख लिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/dungarpur/dungarpurs-deepika-also-adopted-islam-and-became-an-example/article-54984"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/islam.png" alt=""></a><br /><p>डूंगरपुर। डूंगरपुर की रहने वाली दो बच्चों की मां दीपिका ने अपने प्रेमी के साथ कुवैत पहुंचने के बाद इस्लाम धर्म कबूल कर अपना नाम नजीरा रख लिया है। उसने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर जारी कर इसकी जानकारी देते हुए पति और ससुर पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है।<br />दीपिका पाटीदार 13 जुलाई को लापता हो गई थी। उसी दिन दीपिका ने अपने पति मुकेश पाटीदार को कॉल कर उससे परेशान होकर घर छोड़ने की जानकारी दी थी। <br />सूचना पर मुंबई से डूंगरपुर पहुंचे मुकेश पाटीदार ने 15 जुलाई को चितरी थाने में दीपिका की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई। 13 अगस्त को एक युवक के साथ उसकी फोटो वायरल हो गई। फोटो में बुर्का पहने दीपिका एक युवक के साथ थी। पूछताछ में पता चला कि यह युवक नवानगर, हिम्मतनगर (गुजरात) का रहने वाला इरफान हैदर है। नवानगर जाने पर उसके घर वालों से पता चला कि दीपिका इरफान के साथ कुवैत चली गई है। इस पर पति व परिजन 14 अगस्त को एसपी आॅफिस पहुंचे और दीपिका को गुमराह कर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने का आरोप लगाया था। इस बीच, शनिवार को वायरल हुए वीडियो में दीपिका उर्फ नजीरा ने आरोप लगाया कि ससुर रात को उसके कमरे का दरवाजा खटखटाते और गलत तरीके से छूने की कोशिश करते थे।<br />इस बारे में पति, पिता और परिजनों को कई बार बताया, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>डूंगरपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 20 Aug 2023 10:25:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>पीएफआई की राजनीतिक और नैतिक हार</title>
                                    <description><![CDATA[पीएफआई की फंडिंग भी इस पर प्रतिबंध की एक बड़ी वजह बनी है। ऐसी आशंका है कि अपनी गतिविधियों को चलाने के लिए पीएफआई ने दुबई के एक रेस्टोरेंट के जरिए लाखों रुपए हवाले से भारत में प्राप्त किए और इससे अपनी गतिविधियों को चलाया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/political-and-moral-defeat-of-pfi/article-25448"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/p-62.jpg" alt=""></a><br /><p>पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया आखिर उस परिणिति को पहुंच गया, जहां कयास लगाया जा रहा था। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया यानी पीएफआई अकेले नहीं बल्कि इसके साथी संगठनों कैम्पस फ्रंट ऑफ इंडिया, रिहैब फाउंडेशन ऑफ इंडिया, ऑल इंडिया इमाम काउंसिल, जूनियर फ्रंट, नेशनल कॉन्फण्ड्रेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गेनाइजेशन, नेशनल विमेंस फ्रंट और एम्पावर इंडिया फाउंडेशन पर भी पांच साल का प्रतिबंध लगा दिया गया। सबूतों की लम्बी शृंखला के बाद भारत सरकार ने 28 सितम्बर की अलसुबह राजपत्र में विस्तृत कारण गिनाते हुए यह प्रतिबंध लागू कर दिया। पिछली 22 तारीख से पीएफआई खबरों में था जब देशभर में उसके 100 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। फिर 27 तारीख को भी ऐसा ही अभियान चलाया गया और एक रात के फासले के बाद भारत में पीएफआई के कुल आठ संगठन पांच वर्ष के लिए प्रतिबंधित कर दिए गए।<br /><br />पीएफआई पर गंभीर आरोप हैं। पीएफआई पर आरोप हैं कि दुर्दान्त आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट को जिन भारतीय नौजवानों ने ज्वाइन किया था उसमें कुछ पीएफआई से जुड़े थे। साल 2010 में पेपर में आपत्तिजनक सवाल पूछने के आरोप में एक कॉलेज प्रोफेसर के हाथ काटने का आरोप भी पॉपुलर फ्रंट पर है। तमिलनाडु में 2019 में वी. रामलिंगम और 2016 में शशि कुमार, केरल में नवम्बर 2021 में संजीत, 2021 में नन्दू, 2018 में अभिमन्यु, 2017 में बिबिन, कर्नाटक में 2017 में शरत, 2016 में आर. रुद्रेश, प्रवीण पुजारी और 2022 में प्रवीण नेत्तारू की हत्या में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के कार्यकर्ताओं का हाथ बताया जा रहा है। <br /><br />पीएफआई की फंडिंग भी इस पर प्रतिबंध की एक बड़ी वजह बनी है। ऐसी आशंका है कि अपनी गतिविधियों को चलाने के लिए पीएफआई ने दुबई के एक रेस्टोरेंट के जरिए लाखों रुपए हवाले से भारत में प्राप्त किए और इससे अपनी गतिविधियों को चलाया। गृह मंत्रालय का आरोप है कि इन पैसों को वैध दिखाने के लिए कई चैनल से घुमाया गया ताकि चंदे को सफेद दिखाया जा सकें।<br />पीएफआई अपनी विचारधारा से वहाबी संगठन है। पूरी दुनिया जिसे इस्लामी आतंकवाद पुकारती है दरअसल, वह वहाबी आतंकवाद है। यह नाम इस विचारधारा के संस्थापक इब्न अब्दुल वहाब के नाम पर रखी गई है। इस्लाम की कट्टर तफसीर हत्या को प्रमुख सजा के तौर पर स्थापित करने, महिलाओं, बच्चों के अधिकार निषेध और मनोरंजन की व्याख्या में अतिरंजना इस विचारधारा के प्रमुख हथियार हैं। इस्लामी स्टेट, अल कायदा, तालिबान, अल नुसरा, बोको हराम, हिज्बुल मुजाहिदीन या जैश-ए-मुहम्मद, हर संगठन की मूल विचारधारा वहाबी है। किसी संगठन को एक लक्ष्य के साथ स्थापित किया जा सकता है, लेकिन किसी को मानव बम के तौर पर मरने के लिए तैयार करने के लिए एक दुर्दान्त विचारधारा की जरूरत पड़ती है। पीएफआई ने भी उसी विचारधारा को एक मारक हथियार के तौर पर चुना। <br /><br />पॉपुलर फ्रंट पर सबसे पहले प्रतिबंध की मांग 2016 में दिल्ली की एक छोटी सी मस्जिद के इमाम मौलाना अशफाक हुसैन कादरी ने तत्कालीन गृह मंत्री राजनाथ सिंह से की थी। पीएफआई को जब आम लोग और मीडिया जानते भी नहीं थे तब एक इमाम की इस मांग के कारणों की गहराई में जाना चाहिए। अशफाक हुसैन कादरी ने आशंका जताई थी कि यह संगठन मारक है। युवाओं में वहाबी विचारधारा के पोषण के साथ कट्टरता और अलगाव की स्थिति पैदा कर रहा है। यह भारत संघ और भारत के संविधान के विरुद्ध है। ऐसे ही विचार बाद में मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया यानी एमएसओ के चैयरमेन शुजाअत अली कादरी ने व्यक्त किए। हाल के घटनाक्रम के बाद राजस्थान के संगठन तहरीक उलामा-ए-हिन्द के प्रवक्ता ने कहा कि पीएफआई पर आजीवन प्रतिबंध लगना चाहिए। अजमेर दरगाह के गद्दीनशीन ने इन प्रतिबंधों का स्वागत किया। इन सभी लोगों में समानता यह है कि यह सभी सूफी इस्लामी व्याख्या में विश्वास करते हैं। यह अन्तर उन सभी हितधारकों को समझना चाहिए, जो भारत में इस्लाम की विचारधारा और मुसलमान समाज की आंतरिक बनावट को समझना चाहते हैं।<br /> <br />सुन्नी वर्ग में आज भी भारत में बहुमत सूफी वर्ग का है। यह किसी न किसी सिलसिले से जुड़े हुए लोग हैं, जो तरीकत में विश्वास करते हैं। यह तरीकत उन सूफी बुजुर्गों के रूहानी प्रयोग हैं जो ख़ुदा की याद, जिक्र मजबूरों की सेवा, गरीबों की मदद, बीमारों की दवा और टूटे दिलों के लिए दुआ का नाम है। आश्चर्य की बात है कि ऐसी किसी तरीकत में वहाबी विचार विश्वास नहीं करती, मगर इसे मानने वाले भारत के राजनीतिक प्रतिनिधित्व तक में अपनी जगह बनाए बैठे हैं।<br /><br />भारत में सूफीवाद के सबसे बड़े प्रयोग हुए हैं। यहां वहाबियत का पौधा वैसे भी फल नहीं दे सकता, लेकिन पीएफआई इस कोशिश में लगी रही कि वह एक दिन सामाजिक बंटवारा कर पाएगी। यहीं उसकी राजनीतिक और नैतिक हार हो जाती है।<br /><br />-डॉ. अखलाक अहमद उस्मानी<br />(ये लेखक के अपने विचार हैं)</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Oct 2022 12:16:31 +0530</pubDate>
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                <title>यूएई में मंदिर पर मुस्लिम कट्टरपंथी नाराज</title>
                                    <description><![CDATA[मंदिर को दो चरणों में खोला जाएगा। पहले चरण में जनता के लिए सिर्फ पूजा स्थल खोलेंगे। मंदिर समिति के सदस्य अशोक कुमार डब्ल्यू ओधरानी ने कहा कि दूसरा चरण 14 जनवरी से शुरू होगा, मकर संक्रांति के दिन, जब ज्ञान कक्ष और सामुदायिक सेंटर को खोला जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/muslim-fundamentalists-angry-over-temple-in-uae/article-18529"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/v-1.jpg" alt=""></a><br /><p>दुबई। संयुक्त अरब अमीरात के दुबई शहर में बन रहे भव्य हिंदू मंदिर पर सोशल मीडिया में महाभारत शुरू हो गई है। दुबई के इस आलीशान मंदिर में 16 देवी-देवताओं की मूर्तियों को रखा जाएगा। इस मंदिर का 4 अक्टूबर को शानदार तरीके से अनावरण किया जाएगा। मुस्लिम देश यूएई में हिंदू मंदिर बनने की खबर सोशल मीडिया में आने के बाद घमासान मच गया है और कट्टरपंथी इसका जमकर विरोध कर रहे हैं। वहीं हिंदू समुदाय के लोग यूएई के इस कदम की तारीफ कर रहे हैं। खलीज टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक दशहरा के दिन 5 अक्टूबर को इस मंदिर को दुनिया के लिए खोल दिया जाएगा। सिंधु गुरु दरबार मंदिर के एक ट्रस्टी राजू श्राफ ने इसकी पुष्टि की है। इस मंदिर को दुबई के जेबेल अली इलाके में बनाया जा रहा है। इसी इलाके में एक सिख गुरुद्वारा और कई चर्च भी मौजूद हैं। इस मंदिर के अनावरण के दौरान यूएई सरकार के अधिकारी और विशिष्ट अतिथि मौजूद रहेंगे। इस मंदिर में शादी, हवन और अन्य निजी कार्यक्रम आयोजित किए जा सकेंगे।<br />यह मंदिर काफी बड़ा है और एक बार में 1000 से लेकर 1200 भक्त मंदिर में पूजा कर सकेंगे। इस मंदिर की तस्वीरों को ट्विटर पर यूएई के रहने वाले हसन सजवानी ने शेयर की हैं। <br /><br /><strong>भारत में मस्जिद नष्ट कर रहे हैं</strong><br />तस्वीरों के सामने आने के बाद जहां हिंदू इसकी जमकर तारीफ कर रहे हैं, वहीं कट्टरपंथी भड़के हुए हैं। फैसल खान ने लिखा कि बीजेपी के अतिवादी हिंदू भारत में मस्जिद को नष्ट कर रहे हैं और यूएई के लोग देश में हिंदूओं के लिए मंदिर बना रहे हो। आपके राजा को कितने पैसे की जरूरत है। बिजनस हित इसके पीछे है। कई और लोगों ने मुस्लिम देश यूएई में हिंदू मंदिर बनाने का विरोध किया है। वहीं एक बहुत बड़ी तादाद ऐसे लोगों की है जिन्होंने यूएई के कदम की जमकर तारीफ की है। यूएई के रहने वाले हसन सजवानी के ट्वीट को अब तक 5 हजार से ज्यादा बार रीट्वीट किया जा चुका है और करीब 28 हजार लोगों ने लाइक किया है। इस ट्वीट पर कॉमेंट करने वाले आफताब ने लिखा, अविश्वसनीय लेकिन वास्तविकता। यूएई लोगों के दिलों को जीतने के मामले में उभरता हुआ सितारा है।<br /><br /><strong>दो चरण में खुलेगा मंदिर</strong><br />मंदिर को दो चरणों में खोला जाएगा। पहले चरण में जनता के लिए सिर्फ पूजा स्थल खोलेंगे। मंदिर समिति के सदस्य अशोक कुमार डब्ल्यू ओधरानी ने कहा कि दूसरा चरण 14 जनवरी से शुरू होगा, मकर संक्रांति के दिन, जब ज्ञान कक्ष और सामुदायिक सेंटर को खोला जाएगा। इसके अलावा मंदिर में आने वाले श्रद्धालु शादी समारोह, हवन और निजी कार्यक्रम भी आयोजित कर सकते हैं। ओधरानी ने कहा कि मंदिर में 1000 से 1200 श्रद्धालुओं की क्षमता है लेकिन हिंदू त्योहारों के दौरान इनकी संख्या बहुत अधिक होने की संभावना है।<br /><br /><strong>मनाएं जाएंगे दिवाली-नवरात्र जैसे त्योहार</strong><br />कोविड-19 के बीच मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, मंदिर के अधिकारियों ने एक क्यूआर-कोड आधारित स्लॉट बुकिंग सिस्टम बनाया है। श्रॉफ ने बताया कि हिन्दूटेम्पलदूबईडॉटकॉम से क्यूआर कोड प्राप्त कर सकते हैं। मंदिर सुबह 6 से रात 9 बजे तक खुला रहेगा। उन्होंने कहा कि लोग अपने दिए गए स्लॉट पर मंदिर आ सकते हैं। यह कोविड-19 को फैलने से रोकने के लिए हमारे तैयारी प्रोटोकॉल का हिस्सा है। खुलने के बाद मंदिर में दिवाली और नवरात्रि जैसे त्योहार बड़े पैमाने पर आयोजित किए जाएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Aug 2022 12:03:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>ऐतिहासिक फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[हिजाब न तो इस्लाम धर्म का अनिवार्य अंग है और न ही इसके न पहनने से किसी प्रकार के धार्मिक अधिकार का हनन होता है: HC]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/sectarian--historic-verdict--karnataka-high-court--while-dismissing-five-petitions-seeking-permission-to-wear-the-hijab-in-the-classroom--has-ruled-that-the-hijab-is-neither-a-mandatory-part-of-islam-nor-does-its-non-wearing-violate-any-religious-right/article-6303"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/hijab.jpg" alt=""></a><br /><p>कर्नाटक हाई कोर्ट ने कक्षा में हिजाब पहनने की अनुमति देने की अपील करने वाली पांच याचिकाओं को खारिज करते हुए फैसला दिया है कि हिजाब न तो इस्लाम धर्म का अनिवार्य अंग है और न ही इसके न पहनने से किसी प्रकार के धार्मिक अधिकार का हनन होता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि हिजाब न पहनने से निजता व शिक्षा के मूल अधिकार का हनन नहीं होता है। तीन न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि स्कूल वर्दी का नियम एक उचित पाबंदी है और संवैधानिक रूप से मान्य है। वर्दी के मामले में छात्राओं की आपत्ति उचित नहीं है। वास्तव में यह ऐसा रूढिवादीता फैसला है, जिसका मुस्लिम समाज के प्रगतिशील तबके को स्वागत करना चाहिए। यह एक ऐसा फैसला भी है, जिसके बाद हिजाब विवाद यहीं समाप्त हो जाना चाहिए, लेकिन लगता है ऐसा नहीं होगा क्योंकि याचिका दायर करने वाली छात्राओं के वकील ने कहा है कि मामले को सुप्रीम कोर्ट लेकर जाएंगे। दरअसल, कर्नाटक स्थित उड्डी के दो सरकारी प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेजों की कुछ छात्राओं ने कॉलेज प्रबंधन द्वारा कक्षाओं में हिजाब पहनने पर रोक लगाने के खिलाफ अदालत में याचिका दायर की थी। इससे पहले फरवरी के मध्य में हिजाब विवाद को लेकर कर्नाटक में फिर पूरे देश में विवाद खड़ा हो गया। जब इस मामले का विरोध हुआ तो कुछ छात्र भगवा शॉल डालकर प्रदर्शन करने लगे। इस दौरान पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनावों में भी इस मुद्दे को लेकर राजनीति गर्म रही। तब इस विवाद के मूल में राजनीतिक निहितार्थ की बात कही गई। इसे लेकर मामले की सुनवाई कर रही पीठ ने भी कहा कि अकादमिक सत्र के बीच में अचानक यह मुद्दा क्यों उठा? लगता है कि इसके पीछे किसी का हाथ है। निस्संदेह, अशांति पैदा करने व सद्भाव को प्रभावित करने के लिए ऐसा किया गया। इस विवाद को लेकर आंदोलन में जगह-जगह पथराव, तोड़फोड़ की घटनाएं शुरू हो गईं। स्कूल-कॉलेज बंद तक करने की नौबत आ गई। धार्मिक स्वतंत्रता व निजता के अधिकार को लेकर बहस शुरू हो गई। लेकिन अंतत: अदालत ने इस सबसे इनकार कर दिया। लेकिन हिजाब की रस्म को जिस तरह मजहबी-चोला पहनाकर इस्लाम के मुल्ला व फतवा जारी करने वालों ने मुस्लिम महिलाओं के साथ न्याय नहीं किया। जबकि आज महिलाओं को सशक्त बनाने की जरूरत है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Mar 2022 13:03:58 +0530</pubDate>
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